मेरी मौसी और उसकी बेटी सिमरन
01-17-2019, 02:31 AM,
#11
RE: मेरी मौसी और उसकी बेटी सिमरन
कुछ देर लेटा रहा फिर धीरे धीरे उसकी स्कर्ट को ऊपर खिसकाने लगा. वह चुप रही और थोड़ी ही देर मे उसका स्कर्ट ऊपर कर दिया और उसकी पैंटी दिखने लगी. कुछ देर बाद जब उसकी पैंटी को खिसकाना चाहा तो उसने मेरे हाथो को पकड़ लिया और टीवी देखती रही. मैं समझ गया कि वह शरमा रही है. मैंने सोचा ठीक है रात मे देखूँगा नीचे वाली, अभी मम्मों का ही मज़ा लिया जाए. 
फिर हाथ को उसकी टी-शर्ट के पास लाया और आगे कर उसके एक मम्मे को पकड़ा. वह चुप रही तो फिर मैं धीरे धीरे दबाने लगा. दोनो मम्मों को 4-5 मिनट तक दबाया फिर उसकी टी-शर्ट को ऊपर करने लगा तो उसने मेरी हेल्प की. दोनो मम्मों को टी-शर्ट से बाहर कर दिया था. वह ब्रा पहले ही उतार चुकी थी. मम्मों को नंगा करने के बाद उसका कंधा पकड़ अपनी तरफ किया तो वह चुप चाप सीधी होकर लेट गयी. उसकी आँखें बंद थी और मैं उसकी ताने हुए मम्मों को देखता ना रह सका और झुककर एक को मुँह मे ले लिया. अब मैं दोनो मम्मों पर जीभ चला चला चाट रहा था. मैं अपनी बहन के दोनो मम्मों को चूस नही रहा था बल्कि चाट रहा था. जब 6-7 मिनट तक चाट्ता रहा तब वह भी मस्ती से भर गयी और अपने एक मम्मे को अपने हाथ से पकड़ मेरे मुँह मे घुसेड़ती फुसफुसाकर बोली, “भैया.” 
“क्या है सिमरन?” 
“ववव आह इनको….” 
“क्या बताओ ना तुम तो बहुत शरमाती हो.” 
“भैया इनको मुँह से चूस कर पियो जैसे खाने से पहले कर रहे थे.” वह शरमाते हुए बोली. 
“तुमको अच्छा लगा था अपने मम्मों को अपने भाई को चूसाने मे?” 
“हां भैया बहुत मज़ा आया था, और पियो इनको.” 
“पगली, शरमाया मत कर. अगर तुझे अपनी इस मस्त जवानी का मज़ा लेना हो तो शरमाना नही. चलो खुलकर इनका नाम लेका कहो जो कहना है.” 
“भैया हाये पियो हाये पियो अपनी बहन के मम्मों को.” और शरमाते हुए बोली, “ठीक है ना भैया?” 
“बहुत अच्छे चलो एक काम करो यह सब कपड़े अलग करो अड़चन होती है.” 
“नही भैया पूरी नंगी नही.” 
“अरे देख तेरी मस्त मम्मे मेरे सामने है ही फिर क्या?” 
“नही भाई नीचे नही उतारूंगी.” 
“अच्छा चलो पैंटी पहने रहो और सब उतार दो.” 
“मम्मी ना आ जाएँ दरवाज़ा बंद कर लो.” 
“अरे अगर दरवाज़ा बंद कर लिया तो मौसी कुछ ग़लत समझेंगी. डरो नही मौसी कम से कम 2 घंटे बाद ही उठेंगी.” 
तब उसने अपनी टी-शर्ट और स्कर्ट अलग कर दिया और केवल पैंटी मे ही लेट गयी. फिर मैं उसका एक चुची मसलते हुए दूसरे को चूसने लगा. 20-25 मिनट मे ही वह एकदम मस्त हो चुकी थी तब मैंने कुछ आगे ट्राइ करने की सोचा. 
“सिमरन.” 
“जी भैया.” 
“मज़ा आया ना.” 
“जी बहुत आहह, आप कितने अच्छे हैं.” 
“और चूसू कि बस?” 
“अब बस भैया अब कल फिर.” 
“क्यों रात मे नही पिलाओगी अपने मम्मों को?” 
“रात मे कैसे?” 
“मे चुपके से तुम्हारे रूम मे आ जाउन्गा.” 
“ओह्ह भैया फिर तो मज़ा आ जाएगा, हाये मे तो रात भर आपको पिलाऊँगी.” 
“पर मेरा भी तो एक काम करो.” 
“क्या भैया?” 
“देखो मैंने तुमको इतना मज़ा दिया है ना इससे मेरा यह बहुत परेशान हो गया है. तुम अपने हाथ से इसे थोड़ा प्यार करो तो इसे भी क़रार आ जाए.” और अपने लंड पर हाथ लगाया. 
वह यह देख शरमाने लगी तो मैंने उसके हाथ को पकड़ अपने लंड पर रखते कहा, “अरे यार तू शरमाती क्यों है.” 
“नही भैया नही मैं इसे नही पकडूँगी.” और उसने अपना हाथ हटा लिया. 
“क्या हुआ जान?” 
“भैया आपको जो करना हो कर लो मैं इसे नही पाकडूँगी मुझे डर लगता है.” 
“अच्छ ठीक है चल तू ज़रा अपने मम्मों को मेरे मुँह मे दे.” 
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01-17-2019, 02:31 AM,
#12
RE: मेरी मौसी और उसकी बेटी सिमरन
फिर मैं सीधा लेट गया और वह मेरे पास आ अपने मम्मों को पकड़ मेरे मुँह मे देने लगी. मैंने उसके मम्मों को चूस्ते हुए अपनी पॅंट को अलग किया फिर अंडरवियर को खिसका लंड बाहर किया. लंड बाहर कर अपने हाथ से लंड सहलाने लगा. मैंने देखा कि सिमरन की आँखें मेरे लंड पर थी. 2-3 मिनट बाद सिमरन से कहा, “सिमरन मेरी बहन हाये मेरा लंड सूखा है ठीक से हो नही रहा प्लीज़ इस पर अपना थूक लगा दो तो यह चिकना हो जाएगा और आराम से कर लूँगा.” 
वह कुछ देर सोचती रही फिर धीरे से मेरे पैरों के पास गयी और झुककर मेरे लंड पर खूब सा थूक उंड़ेल दिया. थूक लगा वह फिर मेरे पास आई तो मैं लंड सहलाते बोला, “हां सिमरन अब सही है तुम्हारा थूक बहुत चिकना है. आहह चुसाओ अपनी हाये तुम्हारे मम्मों को पीकर मूठ मारने का मज़ा ही कुछ और है.” 
मे उसके मम्मों को चूस अपनी मूठ मारता रहा फिर थोड़ी देर बाद बोला, “सिमरन हाये ऐसे नही निकलेगा प्लीज़ एक काम करो” 
“जी बताएँ भैया.” 
“यार अपने हाथ से नही होता और तू करेगी नही, तुम प्लीज़ अपनी पैंटी उतारकर मुझे दे दो ना.” 
“नही नही हाये नही भैया.” 
“पगली मैं तुमको देखूँगा नही बस अपनी पैंटी दे दो. क्या मेरे लिए इतना भी नही करोगी.” 
तब उसने कुछ सोचते हुए अपने स्कर्ट के अंदर हाथ डाला और फिर पैंटी उतारी और मेरी ओर कर दी. मैंने पैंटी पकड़ी और उसे सूंघते हुए उसे मस्त करने के लिए कहा, “हाये सिमरन मेरी बहन कितनी मस्त और नशीली खुश्बू आ रही है तुम्हारी पैंटी से हह आह अब तुम्हारी पैंटी को प्यार करूँगा तो मेरा निकलेगा. 
फिर उसकी पैंटी को दो-चार बार नाक पर लगा सूँघा और फिर उसे दिखाते हुए उस जगह को खोला जहाँ पर उसकी चूत होती है. उस जगह को देखा तो वह कुछ पीली सी थी. मैंने उस पीली जगह को उसे दिखाते कहा, "सिमरन देखो तुम्हारी पैंटी यहाँ पीली है, शायद यहाँ पर तुम्हारा पेशाब लग जाता होगा.” 
वह शर्मकार नीचे देखने लगी तो मैंने आगे कहा, “सच सिमरन तुम्हारी चूत की खुश्बू इस पैंटी से कितनी प्यारी आ रही है. हाये इसे चाटने मे बहुत मज़ा आएगा.” 
फिर मैं उसकी पैंटी को मुँह मे ले चूसने और चाटने लगा तो वह हैरानी से मुझे देखने लगी. कुछ देर चाट कर बोला, “सिमरन लग रहा है जैसे सच मे तुम्हारी चूत चाट रहा हूँ.” 
वह और ज़्यादा शरमा गयी तब मैंने दो टीन बार और पैंटी को चाटा फिर उसकी पैंटी से अपने लंड को रगड़ते हुए कहने लगा, “ले हाये ले सिमरन की पैंटी पर ही निकल जा हाये यह तो मेरी छोटी बहन है यह तुमको अपनी चूत नही देगी. हाये जब यह मेरा पकड़ नही रही है और मुझे अपनी चटा नही रही है तो तुझे कैसे देगी.” 
और फिर मैं तेज़ी से झड़ने लगा. खूब पानी निकला था जिसे वह देख भी रही थी और शरमा भी रही थी. जब मैं झड़ गया तो उसे पकड़ उसके होंठ चूमकर बोला, “थॅंक यू सिमरन अगर तुम अपनी पैंटी ना देती तो मेरा निकलता नही और मुझे मज़ा नही आता. प्लीज़ अब तुम अपनी सभी गंदी पैंटी मुझे दे दिया करना.” 
वह कुछ बोल्ड हो बोली, “भैया गंदी क्यों?” 
“अरे जो पहनी हुई होगी उसी मे तो तुम्हारी चूत की मस्त खुश्बू होगी ना.” 
वह फिर शरमा गयी और धीरे से बोली, “हाय चलिए, भैया थोड़ा सा और चूस दीजिए ना.” 
तब मैंने फिर उसके मम्मों को 10 मिनट तक और चूसा फिर उससे बोला, “जा देखकर आ मौसी सो रही हैं ना.” 
वह गयी और थोड़ी देर बाद आ बोली, “हां भैया सो रही हैं मम्मी.” 
“सिमरन मेरी जान तुम्हारी मम्मे बहुत अच्छे हैं, इनको चूस कर मज़ा आ गया यार ज़रा सा अपनी नीचे वाली भी चटा दो ना.” 
“हाये भैया नही नही यह ठीक नही है.” 
“अरे यार तुम डरो नही बस केवल देखूँगा और एक बार चाटूँगा फिर कुछ नही करूँगा. प्लीज़ सिमरन.” 
“भैया आप नही मानते तो मैं आपको केवल दिखा सकती हूँ लेकिन छूने नही दूँगी, बोलिए?” 
“ओके, ठीक है, दिखाओ हाये देखें तो मेरी बहन की चूत कैसी है हाये जिस चूत की खुश्बू इतनी प्यारी है वह देखने मे कितनी खूबसूरत होगी?” 
वह मेरी बात सुन शरमा गयी और फिर धीरे से अपने स्कर्ट को पकड़ा और मेरे सामने खड़ी हो स्कर्ट ऊपर उठाने लगी. मैं उसकी चूत देख मस्त हो गया और लंड तेज़ी से झटके लेने लगा. मैं उसकी खूबसूरत चूत देख अपने होंठो पर जीभ फेरता बोला, “आह सिमरन मेरी जान मेरी प्यारी बहन तुम्हारी चूत बहुत खूबसूरत है, हाये कितनी प्यारी सी छोटी छोटी फाँक और कितनी गुलाबी सी एकदम गुलाब की कली सी चूत है. हाये सिमरन वह कितना खुशनसीब होगा जो इस कली को फूल बनाएगा. आअह उसे कितना मज़ा आएगा जब वह मेरी बहन की प्यारी सी चूत पर अपनी जीभ लगा चाटेगा.” 
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01-17-2019, 02:32 AM,
#13
RE: मेरी मौसी और उसकी बेटी सिमरन
वह मेरी इस तरह की बात सुन मस्त हो और कुछ शरमाते हुए बोली, “ओह्ह भैया आप कैसी बातें कर रहे हैं? अब देख लिया अब बस अब चलिए आराम से टीवी देखते हैं.” 
फिर वह स्कर्ट नीचे कर सामने बेड पर करवट के बल लेट गयी तो मैं भी उसके पिछे लेट उसकी गाँड पर लंड सटा उसे अपनी बाँहो मे दबोच लिया. वह कसमसाई तो मैंने उसके मम्मों को पकड़ लिया और दबाते हुए उसे मस्त करने के लिए उसके कान मे फुसफुसाने लगा. 
“सिमरन मेरी बहन तुम बहुत खूबसूरत हो, तुम्हारी मम्मे बहुत कड़क है और तुम्हारी चूत का तो जवाब ही नही.” 
वह शरमाती सी बोली, “भैया टीवी देखिए ना?” 
“ओह्ह देख तो रहा हूँ, हाये सिमरन अगर तुम इज़ाज़त दो तो तुम्हारी चूत को हाथ से छू कर देख लूँ.” 
“ओह्ह भैया आप भी.” 
“प्लीज़ सिमरन.” 
“भैया देखिए आप ……ओके भैया लेकिन भैया अभी नही प्लीज़ अभी टीवी देखिए रात को जब मम्मी सो जाए तब आप आ जाइएएगा मेरे रूम मे तब आप देखिएगा भी और छू भी लीजिएगा.” 
“हाये ठीक है सिमरन, ऊहह हाये रात तक इंतेज़ार करना होगा इस प्यारी चूत के लिए.” 
फिर मैंने उसके मम्मों को पकड़ लिया और उसको मसलता रहा और टीवी देखता रहा. 15-20 मिनट बाद वह अलग होते बोली, “भैया अब हटिए मम्मी उठने वाली होंगी.” 
फिर वह उठकर टॉइलेट गयी और वापस आ ठीक से बैठ गयी. फिर मैंने भी अपने कपड़े सही किए और थोड़ी देर बाद मौसी आ गयी. 
मौसी भी हमारे साथ टीवी देखने लगी. 10 मिनट बाद मौसी बोली, “सिमरन बेटी जा चाय बना ला.” 
वह गयी तो मौसी ने मुझसे कहा, “राज बेटे कुछ काम बना तुम्हारा?” 
“मौसी बहुत काम बन गया.” 
“अच्छा क्या क्या हुआ?” 
“मौसी आज तो सिमरन की दोनो मम्मों को चूस चूस कर खूब मज़ा लेकर झाड़ा और उसकी चूत को भी देखा लेकिन उसने छूने नही दिया.” 
“अरे तो केवल मम्मों का ही मज़ा लिया अपनी बहन की.” 
“हां मौसी वैसे उसने कहा है कि रात को अपने रूम मे बुलाएगी.” 
“अच्छा ठीक है बेटा तुम उसके कमरे मे जाकर ही मज़ा देना. कोशिश करना कि तुम उसे आज ही चोद लो, और अगर ना चोद पाओ तो एक काम ज़रूर करना.” 
“क्या मौसी?” 
“तुम अपनी अंडरवियर उसके रूम मे ही छोड़ देना और अपनी कोई और आइटम भी वही छोड़ देना बाकी मैं देख लूँगी.” 
“ठीक है मौसी.” 
फिर सिमरन चाय लेकर आ गयी. हम सब चाय पीने लगे. फिर सब कुछ नॉर्मल हो गया. मैं बाहर चला गया. रात को वापस आया फिर सबलोगो ने खाना खाया और फिर सिमरन बर्तन धोने लगी तो मौसी ने मुझसे कहा, “बेटा आज तू अपनी बहन की लेगा, तुझे उसके सामने अपनी मौसी तो अच्छी नही लगेगी.” 
“ओह्ह मौसी आप कैसी बात करती हो, आप तो पहले हैं और सिमरन बाद मे. आज आप अकेले सो जाओ आज सिमरन को कोशिश करके चोद लूँ तो फिर कल आपको.” 
“ठीक है बेटा अगर वह ना माने तो ज़बरदस्ती मत करना, अगर वह डर गयी तो तुम्हारा काम बिगड़ जाएगा, जितना करवाए उतना करना बाकी मैं कल तुम्हारा पूरा काम बनवा दूँगी.” 
फिर मौसी सिमरन से बोली, “बेटी मैं सोने जा रही हूँ, तुम बर्तन धोकर सोना, राज बेटा जाओ तुम भी सोओ जाकर.” 
“आप चलिए मम्मी मैं ज़रा टीवी देखूँगा.” 
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01-17-2019, 02:32 AM,
#14
RE: मेरी मौसी और उसकी बेटी सिमरन
फिर मौसी चली गयी तो मैं किचन मे घुस गया और सिमरन के पिछे खड़ा हो उसकी गाँड मे लंड लगाया. वह अपनी गाँड को मेरे लंड पर दबाती मुझे देख मुस्करती बोली, “ओह्ह भैया क्या है, जाइए आप टीवी देखिए मैं काम कर रही हूँ.” 
“तुमको रोका किसने है हाये आज तो मेरी ज़िंदगी का सबसे अच्छा दिन था और अब रात भी सबसे हसीन होगी.” 
“क्यों भैया?” 
“हा आहह आज रात मेरी खूबसूरत जवान बहन मेरे साथ बिस्तर पर होगी ना इसलिए.” और उसके मम्मों को पकड़ा. 
“ओह्ह भैया चलिए हटिए, आप चलिए मैं आती हूँ.” 
“मेरे साथ ही चलना हाये यार जल्दी धो बर्तन और चलो देख ना यह कितना तड़प रहा है.” और अपने लंड पर हाथ लगाया. 
वा मेरी पॅंट को देखते बोली, “ओह्ह भैया आप चलिए फिर मेरी चूस कर इसे सही कर लीजिएगा.” 
“तुम तो बस अपने मम्मों को ही चुस्वाति हो सिमरन यार अब बहुत चूसी है तुम्हारी मम्मे अब अपनी चूत चटवाना.” और उसकी चूत छूने की कोशिश की तो वह मेरा हाथ हटाने लगी. 
“भैया मुझे अपनी चुसवाने मे बहुत मज़ा आया था.” वह मेरा हाथ अपने मम्मों पर रखती बोली. 
“अरे यार तुम एक बार अपनी चूत को अपने भाई से चटवाकर तो देखो मम्मों से ज़्यादा मज़ा चूत मे होता है.” मैंने कसकर मम्मों को मसला. 
“भैया आप कहते है तो सच होगा लेकिन मुझे बहुत डर लगता है.” वह अपने मम्मों को देखते बोली. 
“अच्छा तू एक बात बता, तुझे अपनी चूत चट्वाने मे क्या डर लगता है?” 
“व्व वह वो भैया….” 
“हां हां बताओ ना.” 
“ज्ज्ज्जई भैया वा मुझे मेरा मतलब है मुझे शरम आती है.” उसने सर झुकाया. 
“पगली शरम क्यों लगती है?” मैंने उसके चेहरे को हाथो से पकड़ अपनी ओर किया. 
“आप मेरे भाई है ना.” उसने यह कहते हुए मुझे देखा और सर फिर झुका लिया. 
मे उसके गालो को पकड़ उसके होंठो को चूम बोला, “अरे यार शरमाने की क्या बात जब मम्मों को चुस्वा चुकी हो और चूत दिखा चुकी हो तो क्या शरम. चल पगली अब मुझसे शरमाने की कोई ज़रूरत नही. चलो अब चलते है.” 
फिर मैने उसे गोद मे उठाया तो वह मेरी गोद से उतरते हुए बोली, “ओके भैया ठीक है आप जैसे चाहे वैसे मज़ा लीजिएगा अपनी प्यारी छोटी बहन का पर आप छोड़िए तो.” 
“अब क्या है?” 
“आप अपने रूम मे चलिए मैं वही आती हूँ.” 
“सिमरन तुम्हारे रूम मे चलते हैं ना?” 
“भैया मेरे रूम मे टॉइलेट नही है, आपके रूम मे टॉइलेट है ना, वरना टॉइलेट के लिए बाहर आना पड़ेगा.” 
“अच्छा ठीक है जल्दी आना.” 
फिर मैं अपने रूम मे आया और बेड पर लेट गया और अपनी बहन के आने का इंतेज़ार करने लगा. मैं लेटा हुआ अपनी मौसी के बारे मे सोच रहा था कि बेचारी मौसी आज अकेले तड़प रही होगी. तभी दरवाज़े पर आहट हुई तो मैंने देखा और देखता ही रह गया. 
दरवाज़े पर सिमरन खड़ी थी. उफ्फ कितनी हसीन लग रही थी वह. उसके बदन पर एक सफेद झीना सा छोटा कुर्ता था जो उसकी कमर तक ही था और अंदर काली ब्रा पहने थी. नीचे भी वह केवल काली पैंटी पहने थी और कुछ नही. उसने मेक-अप भी किया था. होंठो पर लाल लिपस्टिक थी और आँखों मे काजल और पर्फ्यूम भी लगी थी. मैं उसे पागलों की तरह देखता रहा. अपनी छोटी बहन को तीन सेक्सी कपड़ो मे देख सबकुछ भूल गया. 
जब मैं उसे देखता रहा तो वह मुस्काराकार बोली, “भैया अब देखते ही रहिएगा या अंदर आने को भी कहिएगा.” 
मे उसकी बात सुन बेड से उतर उसके पास गया और दरवाज़ा बंद कर उसे गोद मे उठाया और फिर बेड पर लिटाया और उसके पास बैठ उसे देखने लगा. वह इस तरह अपने आपको देखता पा मुस्कराती हुई बोली, “क्या बात है भैया अब देख भी चुको.” 
“सिमरन मेरी जान क्या बात है यार इस वक़्त तू बहुत प्यारी लग रही है मन कर रहा है कि देखता ही रहूं.” 
“भैया अब देखना बंद करिए, कल पूरा दिन देख लीजिएगा, अब जो करना हो करिए मुझे सोना है और सुबह कॉलेज जाना है.” 
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01-17-2019, 02:32 AM,
#15
RE: मेरी मौसी और उसकी बेटी सिमरन
तब मैंने उसके होंठो को कुछ देर तक चूसा. वह भी मेरे होंठो को चूसती रही फिर मैंने उसके कुर्ते को उतारा और ब्रा को अलग किया तो दिन मे जी भरकर चूसे गए दोनो मम्मे ऊपर को तने तने मुझे ललचाने लगे. मैंने दोनो हाथो से सिमरन के दोनो मम्मों को पकड़ा फिर धीरे धीरे सहलाने लगा. मैं मम्मों को सहलाते हुए सिमरन को देख रहा था. वह भी मुझे ही देख रही थी और मुस्करा भी रही थी. 
मैंने उसके मम्मों को धीरे धीरे सहलाते हुए उसके होंठो को चूमा बोला, “सिमरन तुम्हारी मम्मे बहुत प्यारे है.” 
वह मुस्काराई और मेरे हाथो पर अपना हाथ रख दबाव ज़्यादा करते हुए बोली, “भैया मेरे मम्मे आपके लिए है. लीजिए मज़ा अपनी बहन के मम्मों का, दबा दबाकर भैया.” 
मैंने उसके मम्मों को 6-7 मिनट तक दबाया और वह बराबर मुझे देखती रही. फिर वह मेरा हाथ पकड़ बोली, “भैया अब बस भी करिए.” 
“हाये बहुत अच्छा लग रहा है.” 
“अब फिर दबा लीजिएगा, अब ज़रा इनको मुँह मे लेकर चूसिए ना.” 
“तुमको चुसवाना अच्छा लगता है?” 
“हां भैया बहुत मज़ा आया था दिन मे.” 
“ठीक है जब मन हो तब चुस्वा लिया करना.” 
फिर झुककर उसका एक चुची को जीभ से चाटने लगा. कुछ देर बाद दूसरी को भी चाटा और फिर एक को मुँह मे लेकर चूसने लगा. 4-5 मिनट बाद दूसरी को भी खूब चूसा. वह अब आँखें बंद कर सिसकते हुए मेरा सर अपने मम्मों पर दबा रही थी. कुछ देर बाद उसके निपल को मुँह मे लेकर जब पीना शुरू किया तो वह एकदम मस्त हो हाये हाये करने लगी. अब वह अपने मम्मों को अपने हाथ से दबा दबा मुझे पिला रही थी. 
“हाये भैया हाये मेरे प्यारे भैया और और हाये बहुत मज़ा है पिलाने मे, पियो सारा रस पी जाओ.” 
10 मिनट तक दोनो निपल चूसे फिर मुँह अलग कर उसकी बगल मे लेट गया. थोड़ी देर मस्ती की लौ मे रहने के बाद उसने आँखे खोल मुझे देखा और मुस्कराते हुए बोली, “शुक्रिया भैया.” 
“मज़ा आया ना?” 
“बहुत हाये आपको मज़ा आया मेरे मम्मों का रस पीने मे?” 
“अरे यार तुझे मालूम नही कि जब बच्चा होता है तभी इनमे रस होता है.” 
“ओह्ह भैया मुझे नही पता था. तो क्या आपको मज़ा नही आया?” 
“अरे यार मुझे तो बहुत मज़ा आया, मैं तो रस के बारे मे बता रहा था, हां अभी तुम्हारी चूत मे रस ज़रूर होता है, अगर तुम मुझे अपनी चूत का रस पिला दो तो मुझे मज़ा आ जाए.” 
वह मुझे देखने लगी फिर चुप हो गयी और कुछ सोचने लगी. कुछ देर बाद उसने मुझे देखा और मुस्काराकार बोली, “ठीक है भैया आप आज अपनी बहन की चूत चाट कर दिखाइए उसमे कितना मज़ा है.” 
मैं खुश हो गया और उसे चूम नीचे उसकी कमर के पास गया. फिर धीरे धीरे उसकी पैंटी को उतारने लगा. उसने चूतड़ उठा पैंटी अलग करवाई तो उसकी चूत देख मस्त हो गया. एकदम चिकनी लग रही थी. शायद अभी क्रीम से थोड़े बहुत रोएँ भी साफ कर आई थी. मैंने उसे बेड पर टेक लगा बिठाया और उसकी गाँड के नीचे तकिया रख दिया जिससे उसकी चूत उभर आई. फिर उसकी टाँगो के बीच लेटा और उसकी चूत के दोनो फाँक उंगली से खोल देख कर मुस्काराया तो वह भी मुस्करा दी. 
“भैया क्या देख रहे हो?” 
“देख रहा हूँ कितनी प्यारी है हाये इसको तो बस चाटने का मन कर रहा है.” “तो चाटिये ना भैया अब किस बात की देर है? लो चाटो.” 
उसने अपनी कमर उचकाई तो मैंने उसकी चूत पर हाथ फिराया. चूत पर हाथ रखते ही मेरे बदन मे सनसनी दौड़ गयी. वह भी मचल सी गयी. उसके मुँह से एक आह निकल गयी. मैं उसकी चूत को हाथ लगा मस्त हो गया. मौसी की चूत से कहीं ज़्यादा खूबसूरत चूत थी सिमरन की. मन तो कर रहा था कि हाथ रखे चूत को देखता रहूं. 
सिमरन की चूत को 4-5 बार सहलाया तो वह बोली, “भैया अच्छा लग रहा है.” 
“हाये बहुत प्यारी चूत है, हाये छोटी सी फाँक वाली गुलाबी गुलाबी.” और फिर उंगली से दोनो फाँक खोलकर देखा तो छेद देख बोला, “और दोनो फाँक कितने मस्त है और हाये कितना प्यारा छेद है, हाये सिमरन मेरी जान ऐसी चूत तो बस रात भर चाटने के लिए होती है.” 
“भैया हाये आपकी बहन आपके सामने ऐसे ही चूत खोले लेटी है और आप चाट क्यों नही रहे?” 
“चाटूंगा चाटूंगा यार हाये देखने से ही इतना मज़ा आ रहा है.” 
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01-17-2019, 02:32 AM,
#16
RE: मेरी मौसी और उसकी बेटी सिमरन
फिर चेहरे को उसकी चूत पर झुकाया और नाक को उसकी चूत पर सूँघता हुआ बोला, “हाये आहह कितनी प्यारी, नशीली खुश्बू आ रही है तेरी चूत से, आहह हाये तुम्हारी पैंटी की खुश्बू से ज़्यादा मस्त खुश्बू चूत मे है.” 
वह मुझे अपनी चूत की खुश्बू सूंघते देख खुश हो गयी और मेरे सर पर हाथ लगा धीरे से बोली, “ओह भैया हाये आप कितने अच्छे हैं, आप अपनी बहन को कितना प्यार करते हैं हाये और प्यार करिए अपनी बहन को आपकी बहन अब आपकी दीवानी हो गयी है.” 
कुछ देर तक चूत की खुश्बू लेने के बाद उसकी चूत को चूमा तो वह एकदम से फडक गयी और उसकी गाँड तकिये से उछल गयी और वह मेरा सर अपनी चूत पर दबाते हाये हाये करती बोली, “ओह्ह हाये आहह ब्ब्भ्ह्ह्हाऐज्जाआन उुउऊहह भैया हां हां और और ऐसे ही करिए हाये बहुत अच्छा.” फिर दो तीन बार चूमने के बाद जीभ निकाली और उसकी रानो को चाटा फिर जीभ को उसके दोनो फांको पर ऊपर नीचे तक चला चला 4-5 मिनट चाटा. वह इतने मे ही एकदम पागल सी हो गयी थी. दोनो फांकों को चाट चाट्कर थूक से भिगोने के बाद उसको देखने लगा. चूत से ज़ुबान हटी तो उसने आँखे खोल मुझे देखा फिर मुस्कराती बोली, “भैया बहुत अच्छा लगा.” 
“अभी चाटूँगा तो और अच्छा लगेगा.” 
“हाये भैया अभी चाटा नही क्या?” 
“कहाँ मेरी जान अभी तो ऊपर से मज़ा लिया है.” और चूत की फाँक मे उंगली चलाई. 
वह अपने पैर कसकर फैलाती बोली, “हाये आह आज तो मज़े से पागल हो जाऊँगी, भैया इसमे तो मम्मे चुसवाने से ज़्यादा मज़ा है.” 
फिर मैंने उसकी फांको मे अपनी ज़ुबान ऊपर से नीचे चलाई और उसके क्लिट को ज़ुबान से चाटा. क्लिट को ज़बान लगते ही वह एकदम बेहोश सी हो गयी थी. क्लिट को चाटने के साथ ही उसके छेद मे ज़ुबान डाल डाल पूरी चूत को चूस कर चाटने लगा. अब वह मज़े से भारी चुतड़ को ऊपर की ओर उछाल सिसकती हुई हाये हाये कर रही थी. 
फिर हाथ ऊपर कर उसकी दोनो मम्मों को पकड़ दबा दबा चाटने लगा. 8-10 मिनट इसी तरह चाटा कि वह एक तेज़ सिसकारी ले हाये भैया बोलती झडने लगी. मुँह पर उसकी चूत का नमकीन पानी लगा तो मुँह चूत से हटा उसकी चूत को देखने लगा. चूत से धीरे धीरे नमकीन पानी रिस रहा था. झड़ती चूत बहुत प्यारी लग रही थी. मैं अभी भी उसके मम्मों को पकड़े था और उसकी चूत को भी होंठो से कभी कभी मसल देता था. 
कुछ देर बाद वह जब नॉर्मल हुई तो मुझे देख मुस्काराई और मेरे चेहरे को पकड़ ऊपर की ओर किया. मैं उसके पास गया तो वह मेरे होंठो को चूम कर बोली, “भैया यह कैसा मज़ा दिया आपने, मैं तो आसमान पर उड़ रही हूँ.” 
“मज़ा आया ना चट्वाने मे?” 
“हां भैया यह तो सबसे हसीन मज़ा था. मम्मों से ज़्यादा मज़ा चूत मे है.” 
“हां सिमरन इसीलिए तो कह रहा था, मुझे भी बहुत मज़ा आया, देखो मेरा लंड कैसा कड़क हो रहा है, हाये अब इसका पानी भी निकालना पड़ेगा वरना यह मुझे सारी रात सोने नही देगा.” 
वह यह सुन मुझे देखने लगी. फिर धीरे से मुस्कराई और बोली, “भैया जैसे दिन मे आपका पानी निकला था वैसे ही मेरा भी पानी निकला था अभी.” 
“हां जब मज़ा आता है तो पानी निकलता है और यही पानी निकलने पर ही असली मज़ा आता है, मैंने तुम्हारा पानी चाट कर निकाला है अब अपना पानी निकालूँगा तो मुझे भी मज़ा आएगा.” 
“आप अपना पानी कैसे निकलेंगे?” 
“कई तरीके होते है. जैसे मैं अपने हाथ से अपना पानी निकालु या तुम अपने हाथ से निकाल दो या तुम अपने मुँह मे लेकर चाटकर भी निकाल सकती हो और सबसे प्यारा तरीका है कि तुम्हारी चूत मे इसे डालकर निकालु. सबसे ज़्यादा मज़ा इसी मे आता है.” 
“हाये भैया कैसे?” 
“इसमे तुम्हारा पानी भी निकल जाएगा और मेरा पानी तुम्हारी चूत मे निकलेगा तो तुमको बहुत मज़ा आएगा. बोलो निकालें इस तरह से?” 
“हाये नही भैया मुझे डर लगता है.” 
“ओह्ह तो कोई बात नही मैं अपना पानी खुद निकालूँगा.” 
फिर अपना अंडरवियर उतार उसकी बगल मे लेटा और उसे देखते हुए मूठ मारने लगा. वह कुछ देर बाद बोली, “भैया मैं कर दूं?” 
“हाये करो ना बहुत मज़ा आएगा तुम्हारे हाथ से.” 
तब वह उठी और मेरे लंड को पकड़ लिया फिर धीरे धीरे हाथ ऊपर नीचे करने लगी. उसके हाथ मे लंड जाते ही मज़ा बढ़ा. 5-6 बार सहलाया तो मैं बोला, “हाये सिमरन अगर तुम इसे अपने मुँह मे लेकर देखो तो मज़ा आ जाएगा तुमको. लंड चाटने मे लड़कियों को बहुत मज़ा आता है.” 
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01-17-2019, 02:32 AM,
#17
RE: मेरी मौसी और उसकी बेटी सिमरन
मेरी बात सुन उसने मुझे देखा. वह हिचकिचा रही थी. फिर उसने मुस्काराकार अपने चेहरे को मेरे लंड पर झुकाया और होंठो को सुपाड़े के पास लाई. कुछ देर तक रुकी फिर अपनी गरम ज़बान निकाल सुपाड़े पर लगाया और फिर मुझे देखा. वह कुछ शरमाने सी लगी तो मैं उसकी हिम्मत बढ़ाता बोला, “क्या हुआ सिमरन लो ना मुँह मे. लो बहुत मज़ा आता है चाटने मे. अगर अच्छा ना लगे तो मत चाटना. अरे कोई ज़बरदस्ती नही है मैं तो तुम्हारा भाई ही हूँ कोई बाहर वाला या तुम्हारा पति नही जो बुरा मानूं.” 
तब उसने मुँह खोला और सुपाडे को अंदर लिया. फिर उसने केवल सुपाडे को तीन चार बाद अंदर बाहर किया और शायद उसे अच्छा लगा था क्योंकि उसके बाद उसने अपनी ज़बान बाहर निकाली और पुर लंड को चारो ओर से ज़बान लगा लगा चाटने लगी.मे मस्त हो गया और आहह हाये करने लगा. कुछ देर तक उसने लंड को ज़बान से ही चाटा. 
फिर उसने लंड को अपने मुँह मे लिया और कसकर चूसने लगी. अब तो मैं समझ गया कि अब घर मे जन्नत हो गयी है. वह अपना मुँह तेज़ी से लंड पर ऊपर नीचे चलाती चाट रही थी. मैंने उसके सर को पकड़ा और अपनी गाँड उछाल उछाल उसके मुँह को ही चोद्ने लगा. वह भी तेज़ी से चाट रही थी. 
10 मिनट बाद मे हांफता सा बोला, “हाहह बस… बस कर सिमरन अब निकाल दे अपने मुँह से बाहर अब झडने वाला है. आहह हाये मैं गया.” 
फिर उसने लंड को मुँह से बाहर किया और देखने लगी. मेरे लंड ने दो चार झटके लिए और फ़च से झड़ने लगा. वह बहुत गौर से देख रही थी. मैं लेटा था इसलिए सारा पानी मेरे ऊपर ही गिर गया. दो मिनट बाद लंड एकदम लूज हो गया और वह भी नॉर्मल हुई. तब मैंने उसकी पैंटी से अपना लंड और पानी को पोंछा और पैंटी को अपने बेड के नीचे डाल दिया. मैं मौसी की बात सोच रहा था कि सिमरन का कोई कपड़ा अपने रूम मे मौसी को मिले तो वह उसे फँसाए. 
फिर सिमरन को अपनी बाँहों मे भर लिया और अपने ऊपर लिटा लिया. वह मेरे ऊपर थी और उसके मम्मे मेरे सीने से दब रही थी और चूत लंड के ज़रा ऊपर पेट पर थी. मैं उसके दोनो गुदाज़ चूतड़ पर हाथ लगा सहलाता हुआ उससे बातें कर रहा था. 
“सिमरन मेरी बहन कैसा लगा लंड चाटने?” 
“भैया….” 
“आए शरमा मत बता ना अपने भैया का लंड कैसा लगा? अगर अच्छा नही लगा तो फिर नही कहूँगा चाटने को.” 
“नही नही भैया.” 
“क्या नही नही?” 
“व्व वो मेरा मतलब है भैया बहुत अच्छा लगा चाटने मे. भैया प्लीज़ अब मैं रोज़ रात को आपके साथ ही लेटुंगी. आप प्लीज़ रोज़ मेरी चूत को चाटियेगा और मैं आपका लंड.” 
“ठीक है जान तुम्हारा हर तरह से मैं ख्याल रखूँगा. अब बताओ क्या इरादा है?” 
“भैया जो आप चाहें.” 
“मैं तो तुमको अभी खूब मज़ा देना चाहता हूँ. बोलो लोगी मज़ा?” 
“जी भैया बिल्कुल बोलिए क्या करेंगे?” 
“अब तुम्हारी चूत को अपनी उंगली से चोद्कर तुमको मज़ा दूँगा.” 
“हाये भैया उंगली से कैसा लगता है?” 
“उंगली से भी मज़ा आता है. तुमको लगेगा कि कोई तुम्हारी चूत को चोद रहा है.” 
“हाये भैया कोई कौन, मेरे भैया क्यों नही?” 
“हाये तुम मेरा लंड अपने अंदर लो तो ऐसा ही कहता.” 
“मुझे डर लगता है भैया प्लीज़ आप उंगली से करिए.” 
तब उसे एक कुर्सी पर बिठाया और उसके सामने बैठ उसकी चूत को खोल ज़ुबान लगा चाटने लगा. वह अपने पैरों को मेरे कंधों पर रखे थी. मैंने कुछ देर तक चूत को चाटा फिर एक उंगली को उसकी चूत मे कच से पेल दिया. उसके मुँह से हाये निकला. फिर उंगली को अंदर बाहर कर सिमरन की चूत को फिंगर फक करने लगा. उसे मज़ा मिला और वह चूत को उचका उंगली से चुद्वाती रही. मैं एक हाथ से उसके मम्मों को दबा दबा उसे फिंगर फक कर रहा था. 
इस बार वह पहले से भी ज़्यादा झड़ी. जब वह झड़ रही थी तो उसने मेरी उंगली को अपनी चूत मे ही दबा लिया और होंठो को कसे झड़ती रही. उसने टाँगो को मेरी गर्देन पर कस रखा था और मैं उसकी रानो को चाट रहा था. उसकी गाँड बहुत तेज़ी से झटके ले रही थी. 
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01-17-2019, 02:32 AM,
#18
RE: मेरी मौसी और उसकी बेटी सिमरन
जब वह झड़ कर नॉर्मल हुई तो उसने आँखे खोल मुझे देखा. मैं भी उसे ही देख रहा था. उसने मुस्कराते हुए अपने पैर मेरे कंधे से हटाए और रानो को चौड़ा किया तो मैंने अपनी उंगली उसकी चूत से बाहर निकाली. वह उसकी चूत के रस से सराबोर थी. मैंने उंगली उसे दिखाई फिर अपने मुँह मे ले अपनी उंगली चाट ली और बोला, “हम्म क्या मज़ेदार रस है मेरी बहन का.” 
वह यह देख मुस्काराई और बोली, “भैया मुझे भी चटाओ रस.” 
तब मैंने उसकी चूत मे उंगली डाल घुमाया और फिर उंगली निकाल उसके मुँह के पास कि तो उसने मेरी उंगली मुँह मे ले चूसी और बोली, “हां भैया बहुत प्यारा टेस्ट है.” 
फिर मैंने उसे गोद मे उठाया और बाथरूम मे गया. फिर उसकी चूत और अपना लंड धोकर साफ किया और वापस आया. मैं बेड पर लेटा तो वह मेरी बगल मे लेट मुझसे चिपकती मेरे होंठो को चूम बोली, “भैया आप बहुत अच्छे हैं.” 
“तू भी बहुत अच्छी है मेरी जान.” 
“भैया अब मैं अपने रूम मे जाती हूँ.” 
“हाये अभी तो 2 बजे है अभी और रूको ना.” 
“भैया आज नही. कल फिर आऊँगी.” 
“कल दिन मे तो तुम कॉलेज जाओगी ना?” 
“जी तभी तो अभी जा रही हूँ. भैया कल पूरी रात अपने भैया के पास रहूंगी.” 
“सच?” 
“और क्या मैं अपने भैया से झूठ बोलूँगी? भैया कल आपकी बहन रात भर आपके बेड पर आपकी बाँहों मे रहेगी.” 
“रात भर बिना कड़ों के पूरी नंगी अपने नंगे भैया की बाँहों मे रहना होगा और लंड को चाट कर चूत चटवानी होगी?” 
“जी भैया जो जी मे आए करिएगा पर अब आज नही, कल.” 
“ओके.” 
फिर उसे अपने से अलग किया तो उसने अपना कुर्ता पहना और ब्रा लेकर पैंटी उठाने लगी तो मैं बोला, “इसे छोड़ दो यही हाये रात भर यह तुम्हारी याद दिलाएगी.” 
वह मुस्काराई फिर बिना पैंटी पहने नीचे से नंगी अपनी गाँड मुझे दिखाती दरवाज़े तक गयी और पलट कर मुझे देखा और मुस्काराकार मुझे देखा और दरवाज़ा खोला और फिर बाहर देखा फिर चुपके से निकल गयी. 
अगले दिन सुबह मैं देर से उठा. सिमरन कॉलेज जा चुकी थी. मैंने फ्रेश होकर नाश्ता किया. कुछ देर बाद मौसी आई और मुस्कराकर बोली, “क्यों बेटा खूब मज़ा लिया रात भर नये माल का?” 
“मौसी आप भी.” 
“मैंने उसे तुम्हारे रूम मे जाते और वापस आते देखा था.” 
“जी मौसी पर चोदा नही है.” 
“क्या क्या किया?” 
“अभी मम्मों को चूस कर चूत को चाटा और उंगली से चोदा है.” 
“अपना माल दिखाया या नही?” 
“दिखाया अरे मौसी अपना उसके मुँह मे दे दिया है.” 
“अरे तुम दोनो तो एक दिन मे ही बहुत आगे तक जा चुके हो.” 
“हां मौसी अब आप उसे चुद्वा दीजिए. वह चुद जाएगी, कह रही थी कि उसे शरम आती है. ओह्ह मौसी उसकी चूत इतनी प्यारी है कि क्या बताऊ.” 
“अरे बेटा 15 साल का कसा माल है, अनछुआ भी है. मज़ा तो आएगा ही. आज ही कोशिश करूँगी तेरा काम बनाने की.” 
“मौसी उसकी पैंटी मेरे रूम मे है.” 
“बस बन गया काम, तू पैंटी मेरे रूम मे रख दे.” 
मैंने पैंटी मौसी के रूम मे रख दी और यूनिवर्सिटी चला गया. 
दिन मे जब सिमरन वापस आई तो मौसी ने उसे बुलाया और उसे घूरने लगी. वह डर गयी और चुप रही. मौसी ने उसे घूरने के बाद कहा, “सिमरन.” 
“ज्जजई मम्मी.” 
“यह तुम्हारी है ना?” मम्मी ने उसकी काली पैंटी उसे दिखाते कहा. 
वह पैंटी देख घबरा गयी और हकलाने लगी. तब मौसी ने उसका हाथ पकड़ा और अपने रूम मे ला उसे बैठा खुद उसके पास बैठती बोली, “बेटी यह तेरे भाई के रूम से मिली है.” 
“मम्मी मुझे नही पता वहाँ कैसे गयी.” 
“ऐसा तो नही तुम गयी हो भाई के रूम मे?” 
“न्न्न नही मम्मी.” 
“ओह्ह मुझे लगता है तुम्हारा भाई ही इसे ले गया होगा अपने रूम मे. मुझे लगता है वह छुप छुप कर तुमको देखता भी है.” 
“ज्ज्ज मम्मी.” 
“बेचारा वह भी क्या करे तू है ही इतनी खूबसूरत की कोई भी लड़का तुमको देखना चाहेगा.” 
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01-17-2019, 02:32 AM,
#19
RE: मेरी मौसी और उसकी बेटी सिमरन
वह शरमाई तो मम्मी ने आगे कहा, “क्यों बेटी कॉलेज मे लड़के तुमको देखते होंगे.” वह फिर शरमाई तो मौसी ने उसका चेहरा पकड़ कहा, “अरे बेटी शरमा नही, मैं तुम्हारी सहेली भी हूँ, मैं ही तुमको सब कुछ समझाउंगी बताओ?” 
“ज्जई मम्मी लड़के देखते तो है.” 
“कुछ कहते या करते तो नही?” 
“नही मम्मी मैं किसी से बात नही करती और ना ही देखती हूँ पर..” 
“पर क्या?” 
“वह लड़के उल्टा सीधा बोलते रहते हैं.” 
“क्या कहते हैं?” 
“जी यही कि कितनी खोबसूरत है और इसका माल कितना कसा है.” 
“बहुत बुरे होते हैं वह लड़के, बेटी तुम कभी उनके चक्कर मे मत आना, जानती हो ऐसे लड़के लड़कियों को अपने जाल मे फँसाकर उनकी इज़्ज़त से खेलते हैं.” 
“जी मम्मी.” 
“बेटी तुम जवान हो और जवानी मे हर लड़की चाहती है कि कोई उसे खूब प्यार करे. अगर तुम्हारा मन करे तो तुम मुझे बताना.” 
“ज्जजई.” 
“हां बेटी, इस उमर मे ऐसा होता है यह कोई ग़लत बात नही. लेकिन बाहर के लड़के लड़कियों को बर्बाद कर देते है. बेटा तुम्हारा भाई तुमको बहुत प्यार करता है. वह तुमको छुप कर देखता भी है. तुम उसे ही दिखाओ ना अपना कसा माल.” 
“मम्मी.” 
“हां बेटी मैं सही कह रही हूँ, इस उमर मे अगर कोई लड़का लड़की को प्यार करता है तो उसे बहुत मज़ा आता है. अगर इस वक़्त कोई लड़का तुमको प्यार करे तो तुमको लगेगा कि तुम जन्नत मे हो. तुम रात मे अकेले सोती हो अगर कोई लड़का तुम्हारे साथ सोए तो तुम बहुत खुश होगी. इसीलिए कह रही हूँ कि बाहर के लड़को के साथ कभी मत मिलना जुलना.” 
“जी मम्मी नही मिलूंगी.” 
“तुम्हारा मन करता हो कि कोई लड़का तुम्हारे साथ सोए तो तुम अपने भाई को अपना कसा माल दिखाओ और अगर वह तुमको प्यार करेगा तो कोई डर नही होगा. इसमे बदनामी भी नही होती और कोई जान भी नही पाता.” 
सिमरन मन मे बहुत खुश थी. मौसी तो उसके मन की बात कर रही थी. वह शरमाने की एक्टिंग करती बोली, 
“मम्मी हाये नही.” 
“जा अपनी कोई पुरानी छोटी कुरती पहन आ जिससे तुम्हारे ये दोनो कम से कम आधे बाहर निकल आए और अंदर ब्रा नही पहनना और नीचे मियानी फटी रखना जिससे तुम्हारे भाई को सब कुछ दिखे.” 
“मम्मी! हाये नही भाई क्या सोचेगा?” 
“पगली देख तू अगर घर से बाहर किसी के चक्कर मे पड़ी तो तेरे भाई की कितनी बदनामी होगी, इसीलिए कह रही हूँ. कोई बात नही देखो बेटी मुझसे मत शरमाओ. अगर तुम्हारा मन करता है कि कोई लड़का तुमको प्यार करे तुमको चाहे तो मुझे बताओ मैं घर पर ही तुम्हारे लिए लड़के का इंतज़ाम कर दूँगी. बोलो?” 
“ज्जज्ज मम्मी ववव वह मन…” 
“हां हां बोलो बेटी शरमाओ मत.” 
“जी मम्मी मन तो करता है…” 
“क्या मन करता है खुलकर पूरी बात बताओ.” 
“जी मम्मी मन करता है कोई लड़का मुझे पकड़कर खूब चूमे और इनको..” 
“हां बेटी बोलो.” मौसी ने हौसला दिया. 
“मम्म मन करता है कोई इनको पकड़ कर दबाए और चूसे.” सिमरन ने अपने मम्मों को पकड़ कर शरमाते हुए कहा.
“पगली तो इसमे इतना शरमाने की क्या बात है. इस उमर मे तो यह मन करता ही है. तुम्हारे भले के लिए कह रही हूँ. तुम अपने भाई को अपने खूबसूरत बदन को दिखाओ तो अगर वह फँस गया तो तुमको कहीं बाहर जाने की ज़रूरत नही होगी.” 
“जी मम्मी क्या करना होगा?” 
“पहले तो तुम जाओ और कोई छोटे कपड़े पहनो जिसमे कुछ दिखे.” 
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01-17-2019, 02:32 AM,
#20
RE: मेरी मौसी और उसकी बेटी सिमरन
फिर वह अपने रूम मे जा पुराने कपड़े पहन आई. सफेद शलवार जंपर था. शलवार कसी थी और जंपर भी कसी थी और दोनो मम्मे कसकर बाहर को आ रहे थे और ऊपर से दिख रहे थे. वह पास गयी तो मौसी ने उसे पकड़ कहा, “हां अब ठीक है, जब भाई आए तो उसके सामने ही बैठना और पैरों को फैलाना जिससे उसे तुम्हारी चूत की झलक दिखे और मम्मों को ज़रा और बाहर निकाल लेना जा.” 
फिर जब शाम को मैं पहुँचा तो सिमरन ने मुझे देखा और पास आई तो मैंने उसके मम्मों को पकड़ कहा, “हाये सिमरन कितनी प्यारी लग रही हो इन कपड़ों में हाये सब दिख रहा है.” 
“भैया मम्मी ने पहनाए है ये कपड़े, कहा है अपने भाई को दिखाओ अपना माल.” 
“हाये तेरा माल तो देख भी चुका हूँ और चख भी चुका हूँ, रानी आज तो तुम्हारा पूरा मज़ा लूँगा, आज अपनी बहन की जवानी को खुलकर चोदूँगा.” 
“भैया हटो भी आप तो मुझे चोदे बिना नही मनोगे?” 
“अरे यार मौसी भी चाहती है कि तुम अपनी चुदवाओ मुझसे तो क्यों शरमाती है?” 
“जी नही भैया मम्मी तो बस इतना चाहती हैं कि मैं आपको दिखाऊ और थोड़ा बहुत दबवाकर मज़ा लूँ. आई बात समझ मे अब जाइए और रात को मेरे रूम मे आना हो तो मुझे इनकार नही.” 
फिर वह इठलाती हुई चली गयी. मैं मौसी के पास गया और पूछा तो मौसी बोली, “काम बन रहा है, जल्दी मत करो आज रात चोद लेना अपनी बहन को.” 
फिर सब नॉर्मल होने लगा. वह मुझे देख देख इठला रही थी. खैर रात के 11 बजे मे उसके रूम मे गया तो वा बेड पर लेटी कोई बुक देख रही थी. मैं उसके पास गया तो वह बुक रख मुझे देखने लगी. मैं पास गया और उसको पकड़ कहा, “आज क्या करवाएगी?” 
फिर जब मैं उसके पास गया तो वह मुझे देख मुस्कराने लगी. मैंने उससे कहा, “सिमरन बोल क्या करवाएगी?” 
“भैया जो चाहो करो, अब तो मैं आपकी हूँ.” 
“तुम झूठ बोलती हो.” 
“नही भैया सच कह रही हूँ, मैं अब सिर्फ़ आपकी हूँ.” 
“तो ठीक है पहले तो मैं तुम्हारी चूत को चाट कर मज़ा लूँगा फिर आज तुमको चोदूँगा भी.” 
“नही भैया प्लीज़ चाट लो पर चोद्ना नही.” 
“क्यों? तुम तो कहती हो कि तुम सिर्फ़ मेरी हो तो क्या बात है?” 
“मुझे डर लगता है.” 
मे अभी कुछ कहने ही वाला था कि बाहर से आहट की आवाज़ आई और फिर मौसी की आवाज़ आई, “राज बेटा तुम कहाँ हो?” 
“मौसी मैं यहा हूँ सिमरन के पास.” 
मौसी अंदर आई. हम दोनो ठीक से बैठे थे. मौसी पास आ सिमरन के पास बैठी और बोली, “राज बेटा तुम इतनी रात को यहाँ क्या कर रहे हो?” 
सिमरन कुछ घबरा रही थी. मैं सिमरन को देखते बोला, “मौसी नींद नही आ रही थी सोचा सिमरन से बातें ही करूँ कुछ देर.” 
“हां हां बेटा ठीक है, तुम दोनो लोग बातें करलो मैं तो सोने जा रही हूँ. वैसे तुमलोग भी जल्दी सो जाना बाते करने के बाद.” 
“पर मौसी यह मुझसे बात नही कर रही.” 
“अरे क्यों?” 
“जो मैं इससे कह रहा हूँ वह नही मान रही.” 
“अरे सिमरन बेटी क्या बात है. अपने बड़े भाई की बात मानलो, जो कह रहा वह करो. बेटा मानेगी तुम्हारी बात.” 
सिमरन सब सुन घबरा सी रही थी. तभी मौसी ने उसके गालों को पकड़ कहा, “बेटी क्या कह रहा था यह?” 
“ज्ज्ज…” 
“क्यों तुम क्या कह रहे थे इससे?” 
“मौसी मैं कह रहा था कि तुम मेरी छोटी और प्यारी बहन हो और मैं तुमको बहुत प्यार करता हूँ और मैं इस वक़्त इससे कुछ प्यारी बातें करने आया हूँ.” 
“अरे बेटी तुम अपने भाई को बहुत परेशान करती हो. तुमको समझाइया था दिन मे. चलो अपने भाई को अपना माल दिखाओ.” 
वह मौसी की खुली खुली बात सुन शरमा गयी. मैं खुश था. तभी मौसी मुझसे बोली, “बेटा तुम अपनी बहन का माल देख लो और इसे थोड़ा प्यार भी करना, बेचारी को किसी के प्यार की बहुत ज़रूरत है.” 
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