Adult Kahani कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास
08-21-2019, 08:09 PM,
RE: Adult Kahani कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास
राम्या का दिल बोटिंग के लिए करने लगा तो दोनो ने एक बोट किराए पे ले ली एक घंटे के लिए.
बोट में राम्या, कामया के साथ ही बैठी, ताकि वो आराम से बातें कर सके.

राम्या : कैसा लगा भाई के साथ मोम.

कामया : क्या मतलब?

राम्या : मतलब आप अच्छी तरहा जानती हो, बताओ ना कैसा लगा भाई के साथ.

कामया : तू कहना क्या चाहती है, मेरा बेटा है, बस थोड़ी देर उसके पैर की मालिश करी फिर हम दोनो सो गये .

राम्या : अच्छा जी , तो फिर आपके सोने के बाद कमरे में कोई और आ गई होगी. जिसकी सिसकियाँ कमरे के बाहर तक सुनाई दे रही थी.

कामया का चेहरा लाल पड़ जाता है, वो राम्या को ये बात पता नही चलने देना चाहती थी, कि वो भी विमल से चुदवा चुकी है.

राम्या : ह्म्म ये चेहरे की लाली सब कुछ ब्यान कर रही है.

कामया : ( झल्लाते हुए ) राम्या ! ये क्या बेहूदा मज़ाक है.

राम्या : लो कर लो बात, इन्हें ये मज़ाक लग रहा है. ना बताओ – भाई से ही पूछ लूँगी.

कामया : उफफफफफफ्फ़ ये लड़की भी

राम्या : हां ये लड़की जो आपकी बेटी है वो सब जानती है – कल रात क्या हुआ था – अब आप एक दोस्त होते हुए भी छुपाओगी तो मुझ से भी उम्मीद मत रखना कि आपको सब कुछ बताऊ.

कामया : तू मानेगी नही ?

राम्या : ना बिकुल नही बताओ ना कैसा लगा

कामया नज़रें नीचे झुका लेती है.

राम्या : अरे आप तो ऐसे शरमा रही हो जैसे कल सुहागरात मनाई हो

कामया : हां वो सुहागरात से कम नही थी – इतना मज़ा तो मुझे तेरे पापा के साथ सुहागरात में भी नही आया था.

राम्या : ओह हो तो भाई ने सिक्का जमा ही लिया. अब पापा बेचारे का क्या होगा?

कामया : क्यूँ तेरे पापा को अपनी खुराक पूरी मिलती रहेगी.

राम्या : हां वो तो है – फिर आपको मोका कहाँ मिलेगा भाई के साथ – पापा तो आपको छोड़ेंगे ही नही.

कामया सोच में पड़ गई.

कामया : सारा दिन थोड़े ही चिपके रहेंगे.

राम्या : तो भाई कौन सा सारा दिन घर रहेगा – चिपका चिपकी तो रात को ही होगी – अब दोनो के साथ – एक ही बार चिपकने का इरादा है क्या?

कामया : चल हट ऐसा नही हो सकता.

राम्या : हो तो सकता है – आप को भी तो दो एक साथ लेने का शोक है – तो बाप बेटे- दोनो का ले लेना

कामया : नही नही ऐसा नही हो सकता, और तुझे किसने कहा- मैं दो एक साथ लेती हूँ.

राम्या : पता है बस – ये राज तो आप ही खोलोगि – जब दिल करे तब बता देना.

कामया : तू अब बहुत ज़्यादा बोलने लगी है – ऐसा कभी नही हो सकता – ना मैने ऐसा कभी किया है.

राम्या : किया तो है – खैर अभी छोड़ो इस बात को – ये बताओ – अब भाई को आपका टेस्ट मिल चुका है – वो तो आपके पीछे पड़ जाएगा – तब क्या करोगी –

कामया : उसके लिए तू है ना

राम्या : अच्छा जी आप दो से मज़े लो और मैं सिर्फ़ एक से

कामया चोंक कर राम्या की तरफ देखने लगी.
राम्या के चेहरे पे रहस्यमई मुस्कुराहट थी.

राम्या : अरे मोम डार्लिंग, ऐसे क्यो देख रही हो – चलो मैं एक से ही सब्र कर लूँगी

राम्या के मन में क्या था – ये तो वही जानती थी – काश कल रमेश को फोन ना आया होता – तो उसे भी घर का दूसरा लंड मिल चुका होता.बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी – जो कल नही हुआ – वो बाद में हो जाएगा.

राम्या : मोम आज रात मेरे साथ रुक जाओ ना, बहुत दिन हो गये हैं आपके साथ रात बिताए हुए.
कामया : आज नही कल
राम्या : हां अब भाई का मोटा लंबा जो मिल रहा है, मेरे साथ मज़ा थोड़े ही आएगा.
कामया : प्लीज़ यार समझा कर

राम्या : क्या कहा – यार – अब मुकरना मत – यार से सब कुछ शेअर किया जाता है.
कामया : तुउुउउ …….

राम्या : अच्छा यार – तुम भी क्या याद रखोगी – किस दिलवली से पाला पड़ा है – मैं मासी से काम चला लूँगी.

कामया : कयययययाआआआ

राम्या : और नही तो – अब तो मासी और मेरा भी आँकड़ा फिट हो चुका है. सही में यार क्या मस्त जिस्म है मासी का – भाई की तो ऐश हो गई – तीन –तीन मिल गई हैं उसे – अपनी देनेवाली
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08-21-2019, 08:09 PM,
RE: Adult Kahani कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास
कामया : चल बोट भी किनारे पहुँचनेवाली है. शाम भी हो चुकी है सीधा होटेल चलते हैं.

राम्या : क्यूँ सब्र नही हो रहा क्या? थोड़ा तो इधर उधर घूमते हैं

कामया : नही नही बस अकेले शाम को ज़्यादा बाहर नही घूम सकते.

राम्या : ओके तो फिर होटेल में बियर पार्टी करेंगे.

कामया : चल ठीक है पर ज़्यादा नही

राम्या : मुझे अपनी लिमिट मालूम है

बोट किनारे पे लग जाती है और दोनो होटेल की तरफ चल पड़ती हैं.
राम्या नीचे रिसेप्षन पे ही 10 बियर की बॉटल और नोन-वेग स्नॅक्स का ऑर्डर दे देती है.

दोनो जब रूम में पहुँचती हैं तो विमल और सुनीता दोनो तयार बैठे टीवी देख रहे थे, और कमरा भी सॉफ था. सुनीता का चेहरा बता रहा था कि जम के चुदि है वो.

उसके चेहरे पे छाई रोनक सब कुछ बयान कर रही थी. उसे देख कामया और राम्या मुस्कुरा देती हैं और सुनीता का चेहरा शर्म से लाल पड़ जाता है.

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उधर रमेश बाहर लॉन में बैठा कॉफी की चुस्कियाँ ले रहा था, बार बार उसकी आँखों के सामने रिया के बूब्स आ रहे थे और उसके लंड ने तूफान मचाना शुरू कर दिया था.

पहले ही राम्या के साथ वो काफ़ी गरम हो चुका था, इस वक़्त उसे समझ नही आ रहा था वो क्या करे, अचानक उसका ध्यान रानी की तरफ जाता है. उसने आज तक रानी को नही छुआ था. वो कमरे में चला जाता है, रानी कुर्सी पे बैठी हुई थी. रिया अभी भी गहरी नींद में थी.

रमेश रानी को पीछे आने का इशारा करता है और उसी कमरे में बने दरवाजे से दूसरे कमरे में चला जाता है.
पता नही क्या काम है, ये सोच कर रानी उसके पीछे चल देती है, जैसे ही रानी कमरे में घुसती है, रमेश दरवाजा बंद कर देता है और रानी को खींच कर उसके होंठों पे अपने होंठ रख देता है.

रानी उसकी पकड़ में छटपटाने लगती है. उसे ये बिल्कुल भी उम्मीद नही थी कि रमेश कभी उसके साथ ऐसा करेगा.
रानी उसके शिकंजे से छूटने की पूरी कोशिश करती है, पर कामयाब नही हो पाती.
रमेश उसके होंठों को चुस्ते हुए उसके उरोज़ को मसल्ने लगता है.

धीरे धीरे रानी का छटपटाना बंद हो जाता है और वो अपने मालिक के हाथों में अपना जिस्म ढीला छोड़ देती है. रानी का रंग ज़रूर सांवला था पर उसमे ग़ज़ब की सेक्स अपील थी.

रमेश उसके होंठों को चूस्ते हुए उसके कपड़े उतारने लगता है और रानी भी कोई विरोध नही करती.
रमेश रानी से अलग होता है और अपने सारे कपड़े उतार कर रानी के भी बचे कपड़े उतार कर उसे बिस्तर पे लिटा कर उसके उपर छा कर उसके निपल को चूसने लगता है. रानी के हाथ अपने आप रमेश के सर पे चले जाते हैं और उसके मुँह से सिसकियाँ निकलने लगती हैं. वो भी काफ़ी गरम हो चुकी थी और उसकी चूत भी कुलबलाने लगी थी.

उसके निपल अच्छी तरहा चूसने के बाद रमेश उसकी बगल में आ कर अपने लंड उसके मुँह के सामने कर देता है. रमेश का मोटा लंबा लंड देख एक बार तो रानी घबरा जाती है फिर रमेश की आँखों में देखते हुए उसके लंड को चाटने लगी . रमेश ने उसके चेहरे को हाथों में थाम लिया और अपने लंड का दबाव उसके मुँह पे करने लगा, रानी ने अपना मुँह खोल दिया और जितना ले सकती थी उसके लंड को अपने मुँह में ले कर चूसने लगी.

थोड़ी देर अपना लंड उसे चूसने के बाद रमेश ने अपना लंड उसके मुँह से निकाल लिया. रानी समझ गई कि आगे क्या होगा और उसने अपनी जांघे पूरी फैला दी और रमेश की आँखों के सामने उसकी चूत आ गई जो रस टपका रही थी. रमेश उसकी चूत पे अपना लंड घिसने लगा और अपने सुपाडे को उसकी चूत में फसा कर एक तेज झटका मार दिया.

रानी की चूत बहुत टाइट थी, जैसे ही रमेश का लंड थोड़ा अंदर घुसा वो बहुत ज़ोर से चीख पड़ी

आआआआऐययईईईईईईईईईईईईईईईईई म्म्म्मतममममममाआआआआररर्र्र्र्ररर गगग्गगाआआऐययईईईईईईईईईई

रमेश उसके उपर झुक गया और उसके होंठों को चूसने लगा.

लेकिन जो गड़बड़ होनी थी वो हो गई. रानी की चीख इतनी तेज थी कि दूसरे कमरे में सोई रिया की आँखें खुल गई.

किसी तरहा से रिया अपने बिस्तर से उठी और कमरे से बाहर निकल ये पहचानने की कोशिश करने लगी कि वो कहाँ है, बाहर का नज़ारा देख उसे समझ में आ गया कि वो अपने ही फार्म हाउस में है.

पर वो यहाँ तक कैसे पहुँची और ये चीख किसकी थी ? इन सवालों में खोई वो दूसरे कमरे की तरफ बढ़ी, दरवाजा बंद था पर खिड़की का परदा हटा हुआ था. उसने खिड़की से झाँक कर देखा तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गई, अंदर उसका बाप, वहाँ की नौकरानी के उपर चढ़ा हुआ था.


रिया का गुस्से के मारे बुरा हाल हो गया.
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08-21-2019, 08:09 PM,
RE: Adult Kahani कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास
दोस्तो ये कहानी इस वक़्त 3 जगह चल रही है

रमण रवि और ऋतु दुबई में जो बस कुछ दिनो में इंडिया आनेवाले हैं.

राम्या, कामया, सुनीता और विमल जो इस वक़्त नानिताल में छुट्टी मना रहे हैं

रमेश और रिया जो इस वक्त फार्म हाउस पे हैं जहाँ रिया रमेश को अपनी नौकरानी रानी को चोदते हुए देख लेती है.

पहले हमने पढ़ा था कि रवि और ऋतु रेगिस्तान में मस्ती मार रहे थे जब अचानक तूफान आ गया चलिए देखते हैं वहाँ क्या हुआ फिर बाकी लोगो के पास आएँगे.

रवि ऋतु को अपनी आँखें अच्छी तरहा बंद करने के लिए कह कर उसे सहारा देते हुए कॅंप की तरफ बढ़ता है, अधखुली आँखों से वो रास्ता देख रहा था और रेत के कण उसकी आँखों में भरते जा रहे थे. उसकी आँखें जल रही थी, पर वो ऋतु को एक क्षण के लिए भी अपनी आँख खोल कर देखने के लिए नही कहता. वो खुद सारी तकलीफें बर्दाश्त कर सकता था, पर ऋतु को ज़रा सी भी आँच आए वो उसकी बर्दाश्त के बाहर था.

रेतीले तूफान की थपेड़े खाते हुए दोनो किसी तरहा कॅंप के अंदर पहुँचते हैं, तब जा कर ऋतु अपनी आँखें खोलती है और रवि की हालत देख उसे रोना आ जाता है, फटफट वहाँ से पानी ले कर वो पहले रवि की आँखें धोती है ताकि रेत के कण उसकी आँख से निकल जाए और उसे कुछ चैन मिले फिर वो अपना चेहरा धो कर रेत हटाती है. दोनो बुरी तरहा रेत से नहाए हुए थे.

हालाँकि ऋतु ने रवि की आँखें धो दी थी, पर फिर भी रवि को चैन नही मिल रहा था, उसकी आँखों में तेज दर्द हो रहा था और आँखों से लगातार पानी बह रहा था.

ऋतु रवि को अपने कॅबिन में ले जाती है और अंदर बने बाथरूम में घुस, अपने और उसके सारे कपड़े उतार कर अच्छी तरहा खुद नहाती है और रवि के भी बढ़न से सारी रेत सॉफ कर देती है.

नहाने के बाद दोनो वो कपड़े पहन लेते हैं जो उन्होने अगले दिन सुबह पहनने थे. इतने में कॅंप का मॅनेजर आ कर एक दवाई देता है आँखों में डालने के लिए जो सिर्फ़ इस बात के लिए वहाँ रखी गई थी कि रेत के तुफ्फान में फसने वालों को राहत दिला सकें.

ऋतु रवि की आँखों में वो दवाई डाल कर उसके पास ही बैठ जाती है और प्यार से उसके सर को सहलाने लगती है.

करीब आधे घंटे बाद फिर एक बार रवि की आँखों में दवाई डालती है और उसके थोड़ी देर बाद रवि को चैन मिल जाता है और वो अपनी आँखें अच्छी तरहा खोल पाता है.

आँखों से दर्द गायब होने के बाद रवि को फिर मस्ती चढ़ने लगती है और वो ऋतु को अपनी गोद में खींच कर उसके होंठ पे अपने होंठ रख देता है.

ऋतु की फॅंटेसी थी, खुले आसमान के नीचे चुदने की, वो आज धरी की धरी रह गई. आज नही तो फिर कभी सोच कर वो रवि का साथ देने लगती है.

दोनो एक दूसरे के होंठ चूसने में खो जाते हैं और ज़ुबाने आपस में पैंच लड़ाने लगती है.

दोनो की उत्तेजना बहुत बढ़ जाती है, एक दूसरे से अलग हो कर अपने कपड़े उतार फेंकते हैं और दोनो एक चुंबक की तरहा एक दूसरे सी चिपक जाते हैं. ऋतु की चूत में हज़ारों चीटियाँ रेंग रही थी, उससे सहा नही जा रहा था और वो रवि को ले कर बिस्तर पे लूड़क जाती है.

दोनो के होंठ ऐसे चिपके हुए थे जैसे कभी अलग थे ही नही और रवि का लंड उसकी चूत को चूम रहा था.

ऋतु के होंठो को चूस्ते हुए रवि उसके उरोज़ मसल्ने लगा. ऋतु ने अपनी पैरों की कैंची बना कर रवि को अपनी तरफ खींचा ताकि उसका लंड चूत में घुस जाए.

रवि उसका इशारा समझ गया और उसने भी अपनी कमर को नीचे की तरफ दबा कर अपने लंड को उसकी चूत में उत्तार दिया.

ऋतु की सिसकियाँ रवि के मुँह में ही घुल रही थी और ऋतु ने अपनी कमर उछालनी शुरू कर दी और रवि ने धक्के लगाने .

कमरे में एक तुफ्फान आ गया था, दो जिस्म एक दूसरे से बिजली की गति से टकरा रहे थे. कमरे में थप थप की आवाज़ें होने लगी आर ऋतु की गीली चूत से फॅक फॅक का संगीत निकल ने लगा. रवि ने अपनी गति बढ़ाने के लिए ऋतु के होंठ छोड़ दिए और अपना वजन अपनी कोहनियों पे ले लिया.

ऋतु का मुँह जैसे ही आज़ाद हुआ उसकी सिसकारियाँ भी गूंजने लगी.

चोद रवि चोद और ज़ोर से चोद. चोद अपनी रंडी ऋतु को.

अहह उफफफफफफफ्फ़ हमम्म्ममम हाँ और ज़ोर से और तेज और तेज

फाड़ दे मेरी चूत
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08-21-2019, 08:09 PM,
RE: Adult Kahani कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास
ऋतु मस्ती में जो मुँह में आ रहा था बोल रही थी. रवि का लंड पिस्टन की तरहा उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था. ऋतु दो बार झाड़ चुकी थी और रवि का बराबर साथ दे रही थी.

रवि अपना पूरा लंड बाहर निकालता और ज़ोर से अंदर घुसा देता, हर चोट के साथ ऋतु का मज़ा बढ़ रहा था. दोनो की साँसे ढोक्नी की तरहा चल रही थी, पर जिस्म टकराने से बाज नही आ रहे थे.

चोद भाई चोद और ज़ोर से चोद………अहह मैं गाआऐययईईईईईईईईई

ऋतु का जिस्म अकड़ गया और उसका लावा रवि के लंड को भिगोने लगा, धीरे धीरे वो शांत पड़ने लगी पर रवि फिर भी लगा हुआ था और 10-12 धक्के और मारने के बाद वो ऋतु के उपर गिर पड़ा और उसका लंड ऋतु की चूत में अपनी बोछार छोड़ने लगा.

ऋतु की चूत ने उसके लंड को जाकड़ लिया और एक एक बूँद निचोड़ने लगी.

रवि की आखरी बूँद तक निचोड़ने के बाद ऋतु की चूत को तस्सली हुई और वो शांत हो गई.

रवि ने अपने ढीले होते हुए लंड को बाहर निकाला और पक की आवाज़ हुई जैसे बॉटल से कॉर्क का ढक्कन खोल दिया गया हो. रवि उसकी बगल में गिर कर अपनी साँसे संभालने लगा और ऋतु की आँखें बंद होती चली गई.
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08-21-2019, 08:10 PM,
RE: Adult Kahani कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास
उधर रिया ने एक गमला उठा कर शीशे पे दे मारा. ढाढ़ की आवाज़ से शीशा चकना चूर हो गया और एक भूचाल आ गया , रिया की आँखें गुस्से से लाल सुर्ख थी.

जैसे ही रमेश की नज़र उसपे पड़ी उसके जिस्म का खून सूखने लगा, उसका लंड एक दम ढीला पड़ गया और रानी उसकी हालत तो और भी खराब हो गई.

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कामया और राम्या वहीं सोफे पे बैठ जाते हैं और थोड़ी देर में बियर की बोतलें आ जाती हैं, साथ में काफ़ी नोन वेज स्नॅक्स भी था.
सुनीता हैरानी से कामया को देखती है.

‘अरे यार हैरान क्यूँ हो रही है, आज बियर पार्टी मनाएँगे’

विमल कुछ बोलता हुआ रुक जाता है.

‘इस पार्टी की साकी मैं बनूँगी’ कह कर राम्या चार बियर की बोटले खोलती है और ग्लास में डाल कर सब को सर्व करती है.

सभी चियर्स करते हैं और बियर के सीप लेने लगते हैं. राम्या सॉफ्ट म्यूज़िक लगा देती है, संगीत की मीठी धुन मस्ती के आलम को और बढ़ा देती है.

‘अरे मेरे कन्हिया – गोपियाँ क्या यूँ ही बैठे रहेंगी – चल डॅन्स करते हैं’ कहती हुई राम्या विमल को खींच कर खड़ा करती है और उसके साथ चिपक कर डॅन्स करने लगती है.

दोनो के जिस्म गरम होने लगते हैं और राम्या किसी की परवाह ना कर अपने होंठ विमल के होंठों से सटा देती है. विमल अलग होने की कोशिश करता है पर राम्या चिपकती ही चली जाती है.

मन में सोच कर जो होगा देखा जाएगा, वो राम्या के होंठ चूसने लगता है. जिस्म थिरक रहे थे और होंठ एक दूसरे को अपना जाम पिला रहे थे.

थोड़ी देर बाद राम्या अलग होती है आर दोनो बैठ कर फिर बियर पीने लगते हैं. इन दोनो को नाचता देख सुनीता और कामया भी अंदर ही अंदर मचल उठती हैं, कब उनकी बारी आएगी.

राम्या ने सबके सामने किस कर, महॉल को और भी खोल दिया था. विमल फटाफट अपनी बियर गटकता है और सुनीता के पास जा कर उसका हाथ थाम लेता है.
सुनीता अपनी नशीली आँखों से उसे देखती है और उठ कर उसकी बाँहों में समा जाती है.

सुनीता के जिस्म से उठती हुई मदहोश करने वाली सुगंध विमल को मदहोश करने लगती है और वो सुनीता को अपने जिस्म से चिपका लेता है.

दोनो की आँखें जब एक दूसरे से टकराती हैं तो दोनो वहीं जाम हो जाते हैं. उनके थिरकते हुए पैर रुक जाते हैं. आँखें एक दूसरे से बात करना शुरू कर देती हैं. विमल को चुदाई का जो आनंद सुनीता के साथ मिला था वो किसी और के साथ नही. ना जाने क्या बात थी सुनीता में कि वो खोता ही जा रहा था, और उस पल से घृणा कर रहा था जब सुनीता वापस अपने परिवार में चली जाएगी. वो हर उस पल को अपने अंदर समेट लेना चाहता था जितना भी उसे सुनीता के साथ मिल रहा था.

कुछ ऐसा ही हाल सुनीता का भी था. दोनो को पता ही चलता कब दोनो के होंठ आपस में मिल गये और एक ऐसे चुंबन की शुरुआत हो गई जो दोनो के जिस्म को आनंद की उन गहराईयो तक ले जा रहा था जिसकी हर इंसान तमन्ना करता है.

दोनो के ऐसे एक दूसरे में खोए हुए देख कामया के कलेजे पे साँप लोट जाते हैं, फिर एक जलन की भावना उसके अंदर आ जाती है.
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08-21-2019, 08:10 PM,
RE: Adult Kahani कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास
राम्या कामया की आँखों में उतरती हुई जलन को समझ जाती है और उसका ध्यान बाँटने के लिए उसे अपनी तरफ खींचती है और उसे अपने साथ डॅन्स के लिए मजबूर कर, उसके साथ चिपक जाती है और कामया के होंठों पे अपने होंठों का कब्जा बना लेती है.


विमल और सुनीता बस एक दूसरे में खो जाते हैं. दोनो को कोई होश नही रहता कि पास में दो लोग और हैं. कामया का जलन के मारे बुरा हाल हो जाता है. उसकी आँखों में एक दर्द समा जाता है. उसके होंठ चूस्ते हुए राम्या उसकी आँखों में ही देख रही थी. राम्या उसके होंठ छोड़ देती है और उसके कान पे अपना मुँह ले जा कर फुसफुसती है – ‘ प्यार बाँटने से कम नही होता – रात को तो भाई आपके पास ही होगा – जी भर के प्यार कर लेना’

कामया की नज़रें जो सुनीता और विमल पे ही टिकी हुई थी वो वापस राम्या के उपर आ जाती हैं और उसके होंठों पे एक फीकी मुस्कान आ जाती है.

राम्या उस से अलग होती है और खाली ग्लास में बियर डालती है.

‘अरे ओ लैला मजनू बस ब्रेक टाइम, बियर गरम हो रही है’

राम्या की बात से दोनो को झटका लगता है और वो अलग हो जाते हैं. सुनीता का चेहरा शर्म से ऐसा लाल पड़ता है जैसे सुहागरात मनाते हुए किसी ने उसे देख लिया हो और वो सर झुकाए बैठ जाती है.

राम्या चारों को बियर के ग्लास पकड़ाती है और विमल को इशारे से कामया के पास बैठने को बोलती है, विमल अपना ग्लास ले कर कामया के साथ चिपक के बैठ जाता है.
कामया का चेहरा खिलखिला उठता है.

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उधर रिया जब गमला उठा के शीसा तोड़ती है तो रानी और रमेश तो की जान सुख जाती है. रानी तो किसी तरहा अपने कपड़े उठा कर वहाँ से भागती है पर रमेश तो जैसे अधमरा हो गया था, उसे ये भी ध्यान नही रहता कि वो रिया के सामने नंगा है और से खुद को ढक लेना चाहिए.

रिया उसी दरवाजे से अंदर आती है जिसे खोल के रानी भागी थी. उसकी आँखें रमेश के चौड़े, सख़्त जिस्म का जैसे मुआईना कर रही थी.
वो रमेश को ज़ोर का चाँटा मारती है और उसके सीने पे मुक्कों की बरसात शुरू कर देती है.
रमेश चुप चाप मार ख़ाता चला जाता है

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सुनीता अपना चेहरा शर्म के मारे झुका लेती है, उसके दिल में कसक सी रह जाती है, विमल से अलग होना उसे अच्छा नही लग रहा था, पर वो जानती थी, कि सुबह कामया ने उसे मोका दे दिया है और रात तो कामया की ही होगी.

विमल का हाल भी कुछ ऐसा ही था, ना जाने क्यूँ उसे सुनीता का साथ ज़्यादा अच्छा लगता था, वो हर दम सुनीता के करीब रहना चाहता था, उसे भी मालूम था कि रात को कामया ही उसके पास रहेगी. ऐसा नही था कि कामया उसे पसंद नही थी या फिर वो कामया के जिस्म का भी दीवाना नही था, पर कुछ था जो उसे बार बार सुनीता की तरफ खींच रहा था.

जो खेल राम्या ने सिर्फ़ जिस्म की प्यास भुजाने के लिए शुरू किया था वो दूसरा ही रूप इकतियार करने लगा था. कामया के अंदर विमल वो जगह ले चुका था जो रमेश कभी नही ले पाया. जो आनंद , जो सुख उसे विमल के साथ मिला था, ऐसा आनंद उसे रमेश ने कभी नही दिया था. उसके दिल में हज़ारों सवाल थे आगे क्या होगा? कैसे होगा? कैसे वो विमल को सिर्फ़ अपना बना के रख पाएगी

और बियर के घूँट भारती हुई राम्या कुछ और सोच रही थी. विमल को तो तीन चूत मिल गई अपने लंड की प्यास भुजाने के लिए, अब विमल सिर्फ़ उसका नही रह गया था, अगर विमल घर की सब औरतों को चोद सकता है तो वो क्यूँ ना रमेश से चुदवाये – यही तो वो चाहती थी- एक और लंड का मज़ा लेना.

सुनीता तो कल अपने घर चली जाएगी फिर कामया को विमल के लिए अगर मुक्त छोड़ना है तो रमेश को बिज़ी रखना पड़ेगा यही वो अंदर ही अंदर चाहती थी , वो विमल से बहुत प्यार भी करती थी लेकिन वो बँध के नही रहना चाहती थी, अगर उस दिन रात को वो फोन नही आता तो रमेश से चुद जाती, खैर ये सब तो बाद में भी हो जाएगा अभी तो छुट्टी का मज़ा लो सोच कर उसके चेहरे पे मुस्कान आ जाती है और गतगत अपना बियर का ग्लास ख़तम कर लेती है.

कामया : कल सुबह जल्दी निकलना है घूमने के लिए, आखरी दिन है हमारा नैनीताल में तो चलो सोते हैं, वैसे भी बहुत देर हो चुकी है.

विमल : हां में भी अपने कमरे में चलता हूँ ( और उठते वक़्त 2 बियर की बोतले उठा लेता है)

कामया ने ये तो सोचा ही नही था कि विमल ही उठके निकल लेगा.
विमल के निकलते ही राम्या खिलखिला के हँस पड़ती है.

राम्या : मोम डार्लिंग तुम्ही जा के भाई को सुला दो, वरना पता नही कितनी देर पीता रहेगा.
सुनीता भी मज़े लेने से पीछे नही हटती

सुनीता : दी तुम कहो में जा के उसे सुला दूं.

कामया : आई है बढ़ी उसे सुलाने वाली, ये मेरा काम है, मैं जाती हूँ.

सुनीता आंड राम्या दोनो ही हँस पड़ती हैं.

राम्या : हां मोम बेचारा खड़ा खड़ा थक गया होगा, अब जा के सुला ही दो उसे.
कामया एक चपत मारती है राम्या के सर पे और कमरे से बाहर निकल जाती है विमल के पास जाने के लिए.

कामया के जाते ही, राम्या सुनीता को दबोच लेती है,

राम्या : मासी, वो दोनो अपना खेल खेलेंगे, हम अपना खेलते हैं.
और दोनो के होंठ जुड़ जाते हैं और एक दूसरे के होंठ चूसने लगती हैं.

उधर कामया जैसे ही विमल के कमरे में घुसती है तो देखती है विमल बाल्कनी में खड़ा बियर पी रहा था, कामया दरवाजा अंदर से बंद कर लेती है, अपनी सारी उतार कर ब्लाउस और पेटिकोट में जा कर विमल के साथ पीछे से सट जाती है.

कामया : क्यूँ रे बहुत चिपक रहा था मासी के साथ, वो भी मेरे सामने.

विमल बियर की बॉटल साइड में रख, कामया को अपने सामने कर लेता है.

विमल : क्यूँ जलन होने लगी है क्या मोम डार्लिंग? ( और कामया के चेहरे को अपने हाथों में थाम कर उसकी आँखों में झाँकने लगता है)

कामया के होंठ थरथराने लगते हैं, जैसे कह रहे हों, आओ चूम लो, चूस लो, सारा रस निचोड़ कर पी लो.
कामया कोई जवाब नही देती और अपनी नज़रें झुका लेती है.
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08-21-2019, 08:10 PM,
RE: Adult Kahani कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास
विमल धीरे धीरे झुकता है और अपने होंठ बिल्कुल कामया के होंठों के पास ले आता है. दोनो की गरम साँसे एक दूसरे में घुलने लगती हैं और कामया अपनी आँखें बंद कर लेती है. विमल के होंठों की तपिश अपने होंठों के करीब पा कर कामया की साँसे तेज होने लगी और वो अपनी बाहों का हार विमल के गले में डाल कर उसे अपनी ओर खींचने लगी.

विमल ने भी ज़्यादा देर नही करी और कामया के होंठों से अपने होंठ सटा दिए.

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उधर रिया रमेश की छाती पे मुक्के बरसाती बरसाती रो पड़ती है और रमेश की छाती को चूमने लग जाती है.

हिचकति हुई आवाज़ में बोल पड़ती है

‘ क्यूँ करते हो ऐसा? क्यूँ दूसरी औरतों के पीछे भागते हो? मैं नही दिखाई देती क्या’

रमेश के कानो में बम सा फुट जाता है, उसने कभी सपने में नही सोचा था कि रिया के दिल में ये सब है. उसे जैसे होश आता है, खुद को रिया से छुड़ाता है और अपने कपड़े उठा कर बाथरूम में घुस जाता है.

रिया बस उसे देखती रह जाती है और उसकी रुलाई और तेज हो जाती है.
रमेश बाथरूम से बाहर आता है और कमरे से बाहर निकलने लगता है.
रिया लपक के उसके सामने आ आती है और उसके सीने से चिपक जाती है.

रमेश : रिया बेटा, खुद को सम्भालो.

रिया चोंक कर उसकी तरफ देखती है.

रमेश : हां बेटा मुझ से बहुत बड़ी ग़लती हो गई थी, अंधविश्वास में पड़के तुम्हारा और राम्या का नाम बदल दिया था. अब और नही. तुम रिया थी और रिया ही रहोगी.

रिया ज़ोर से रमेश के साथ चिपक जाती है.

रमेश उससे छूटने की कोशिश करता है पर रिया जोंक की तरहा उसके साथ चिपकती है जा रही थी. ना चाहते हुए भी रमेश की बाँहें उसके नितंबों पे चली जाती हैं और उसे अपने साथ कस के चिपका लेती हैं.

रिया अपनी आँखें बंद कर अपना चेहरा उपर उठाती है, उसके अधखुले होंठ रमेश को दावत दे रहे थे. रमेश उसकी आँखों से बहते हुए आँसू चाटने लगता है और रिया रमेश की पीठ पे बाँहों के घेरा डाल कर अपने उरोज उसकी छाती में गढ़ा देती है.

रिया की मदहोश जवानी रमेश को बहकाने लगती है और उसके आँसुओं को चाट ते चाट ते उसके होंठ रिया के होंठों की दावत को कबूल कर लेते हैं, और बाप बेटी एक गहरे चुंबन में खो जाते हैं.
...............................................................................................


रात भर रवि से 2 बार चुदवाने के बाद भी ऋतु की प्यास भुजी नही थी.
रवि के साथ जब वो घर के लिए वापस आ रही थी, तो सारे रास्ते रमण के बारे में सोच रही थी. किस तरहा उसने रमण की मर्दानगी को चेलेंज कर उसकी बेइज़्ज़ती करी थी.

माना उस दिन रमण का हाथ सुनीता पे उठ गया था, ये पति पत्नी के बीच की बात थी, ऋतु को क्या हक़ बनता था कि रमण को यूँ प्रताड़ित करे. उसने सोच लिया था कि वो रमण की मनोस्तिति वही रहने देगी, पर उसे चूत से दूर नही रखे गी उसे अभी रवि को भी तयार करना था अपना मक़सद पूरा करने के लिए.

वो घर की रंडी बनना चाहती थी, एक साथ दोनो के लंड लेने चाहती थी, एक चूत में और एक गान्ड में.

घर की रंडी – ये सोचते ही ऋतु के चेहरे पे एक मुस्कान दौड़ गई.

जब दोनो घर पहुँचे तो रवि बाहर से ही उसे ड्रॉप कर के अपने कॉलेज चला गया. आज उसे बहुत काम थे कॉलेज में.

ऋतु घर में घुसी तो रमण बैठक में बैठा टीवी देख रहा था, उसके चेहरे पे एक उदासी छाई हुई थी.

ऋतु अपना मन बना के आई थी कि वो रमण को आज पूरा मज़ा देगी और उसे इस बात के लिए तयार कर देगी कि वो रवि के साथ मिलकर उसे चोदे.

एक बार रमण तयार हो गया तो रवि को अपनी कसम दे कर तयार कर लेगी और फिर उसका सपना पूरा हो जाएगा – घर की रंडी बनने का.

रमण को विश कर के ऋतु बाथरूम में घुस गई और नहा कर उसने खुद को सजना शुरू कर दिया, थोड़ी ही देर में वो एक अप्सरा के रूप में आ गई थी, अपने बदन पे उसने सिर्फ़ एक छोटी नाइटी ही डाली थी, ब्रा और पैंटी तो पहनी ही नही.

अपने आप को शीशे में अच्छी तरहा निहार ने के बाद वो रमण के रूम में घुसी और उसकी अलमारी से एक वोडका की बॉटल निकाल ली फिर फ्रिड्ज में से ऑरेंज जूस निकाल कर उसने दो तगड़े पटियाला पेग तयार किए – स्क्रू ड्राइवर के ( कॉकटेल ऑफ वोड्का & ऑरेंज जूस)

इठलाती हुई वो रमण के पास जा कर उसके साथ चिपक के बैठ गई.

रमण फिर से जलील नही होना चाहता था, ऋतु के शब्द बार बार पिघले लोहे की तरहा उसके कानो में गूँज रहे थे, जैसे ही ऋतु उसके साथ बैठी, वो उठ के खड़ा हो गया.

ऋतु के चेहरे पे कटीली मुस्कान फैल गई और उसने रमण का हाथ पकड़ उसे अपने उपर खींच लिया

ऋतु : क्या हुआ रमण डार्लिंग, अपनी रंडी ऋतु से नाराज़ हो
कह कर ऋतु ने अपने होंठ रमण के होंठ से सटा दिए और अपनी ज़ुबान उसके होंठों पे फेरने लगी.

रमण के चेहरे पे घबराहट फैल गई और उसने खुद को छुड़ाने की कोशिश करी.

रमण का ये बर्ताव देख ऋतु मुस्कुराने लगी और उसकी आँखों में आँखें डाल कर बिल्कुल एक रंडी की तरहा बोल पड़ी.

ऋतु : क्या हुआ मेरी जान आज लंड खड़ा नही हो रहा क्या? चलो मूड अच्छा करो, इस तरहा तो बच्चे नाराज़ होते हैं.


और कॉकटेल के ग्लास को उठा कर एक सीप लेती है और उसे रमण के होंठों से लगा देती है. रमण बस उसे देखता हुआ कॉकटेल पीने लगता है
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08-21-2019, 08:10 PM,
RE: Adult Kahani कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास
अफ क्या तेज कॉकटेल बनाई थी ऋतु ने, रमण का सीना जलने लगता है जैसे जैसे कॉकटेल उसके हल्क से नीचे उतरती है और उसके जिस्म में गर्मी चढ़ने लगती है.
रमण को पूरा ग्लास पिला कर ऋतु उसके होंठ चाटने लगी.

‘कमोन किस युवर रंडी’

रमण को गर्मी तो चढ़ चुकी थी वो ऋतु को कस के दबोच लेता है और पागलों की तरहा उसके होंठ चूसने, चाटने और काटने लगता है.

ऋतु भी उसका साथ देती है और दोनो की ज़ुबाने एक दूसरे से पेच लड़ाने लगी.
ऋतु रमण का हाथ पकड़ के अपने उरोज़ पे रख देती है और रमण उसके उरोज़ को मसल्ते हुए उसके होंठों का रस पीने लगा.
जब दोनो की साँसे टूटने लगी तो दोनो अलग हुए और अपनी साँसे संभालने लगे. ऋतु की आँखों में गुलाबी नशीले डोरे तैरने लगे थे और रमण की आँखों में वासना का नशा भर चुका था.

अपनी साँस ठीक कर के ऋतु कॉकटेल का दूसरा ग्लास उठा कर एक सीप पीती है और फिर अपने मुँहे में भर कर रमण के होंठों पे होंठ रगड़ते हुए उसके मुँह में डाल देती है. इस तरहा आधे घंटे में जा कर वो ग्लास खाली होता है.

रमण को समझ नही आ रहा था उस दिन तो ऋतु ने इतनी बेइज़्ज़ती करी आज ये रंडीपना इतने प्यार से क्यूँ दिखा रही है.

ऋतु रमण का हाथ पकड़ उसे बेडरूम में ले गई और उसकी पॅंट की ज़िप खोल कर उसके लंड को बाहर निकाल कर सहलाने लगी.

रमण ने उसे फिर लपेल लिया और उसके होंठ चूसने लगा. थोड़ी देर अपने होंठ चुसवाने के बाद ऋतु नीचे बैठ कर रमण का लंड चूसने लगी, मस्ती के आलम में

रमण की सिसकियाँ निकलने लगी और उसने ऋतु के सर को अपने लंड पे दबा कर अपना लंड उसके हलक तक डाल कर उसका मुँह चोदने लगा.

ऋतु को साँस लेने में तकलीफ़ होने लगी, पर वो रमण का साथ देती रही बिल्कुल एक रंडी की तरहा और ज़ोर ज़ोर से उसका लंड चूसने लगी.

रमण ज़्यादा देर तक टिक नही पाया और जल्दी ही ऋतु के मुँह में झड़ने लगा. ऋतु ने एक बूँद भी जाया नही होने दी और उसका सारा रस पी कर उसके लंड को चाट ते हुए अपने मुँह से बाहर निकाल दिया और हाँफने लगी.

रमण ने उसे बिस्तर पे लिटा दिया और अपने कपड़े उतार कर उसकी चूत पे टूट पड़ा.

उफफफफफफफ्फ़ हमम्म्ममममम चूसो अपनी रंडी की चूत अहह और ज़ोर से चूसे. ऋतु आ ज से इस घर की रंडी है ------- आह आह उम उम ओह म्म्म्मा आआआआ

रमण ने उसकी चूत में अपनी ज़ुबान डाल दी और अपनी जीब से उसे चोदने लगा साथ ही साथ अपनी एक उंगली ऋतु की गान्ड में भी घुसा डाली.

जैसे ही ऋतु की गान्ड में उसकी उंगली घुसी ऋतु दर्द के मारे चिल्ला पड़ी
आाऐययईईईईई मदर्चोद गान्ड के पीछे क्यूँ पड़ गया, बाहर निकाल नही तो लंड काट दूँगी तेरा, रंडी की मर्ज़ी के बिना गान्ड को हाथ मत लगाना.

रमण वाकई में डर गया और फट से अपनी उंगली उसकी गान्ड से बाहर निकाल कर ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत को चूसने लग गया. कभी ज़ुबान से चाट ता, कभी पूरी चूत मुँह में भर के ज़ोर से चूस्ता तो कभी अपनी उंगलियों से उसकी चूत में घुसा कर पेलने लगता.

आह आह चूसो मेरी चूत, हाई चूसो इस रंडी की चूत, आह मज़ा आ रहा है

ऋतु ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ ले रही थी, अब तक रमण का लंड फिर खड़ा हो चुका था, और उसने देर ना करते हुए ऋतु की टाँगों को अपने कंधों पे रखा और एक ही झटके में ऋतु की चूत में अपना लंड घुसा दिया.

दर्द के मारे ऋतु बिलबिला उठी, हहाआआआआऐययईईईईईईई माआआआररर्र्र्ररर द्द्ददडाअल्ल्लाआाअ कककककुउुुउउत्त्तट्टीईई आराम से नहियीईईईई डाल सकता था.

रमण ऋतु की चीखों की परवाह नही करता और बिल्कुल उसे रंडी समझ के ज़ोर दार चुदाई शुरू कर देता है.

ऋतु भी अपनी चूत का रस छोड़ कर उसके लंड को गीला कर देती है और कमरे में फॅक फॅक फॅक की आवाज़ें गूंजने लगती है.

आधे घंटे तक रमण ऋतु की ताबडतोड़ चुदाई करता है और फिर झड कर उसके बगल में गिर पड़ता है. दोनो के जिस्म पसीने से लथपथ हो चुके थे और दोनो ही अपनी साँसे संभालने लगे इस दौरान ऋतु 4 बार झाड़ चुकी थी और चुदाई के मज़े को अपने अंदर समेट रही थी.अफ क्या तेज कॉकटेल बनाई थी ऋतु ने, रमण का सीना जलने लगता है जैसे जैसे कॉकटेल उसके हल्क से नीचे उतरती है और उसके जिस्म में गर्मी चढ़ने लगती है.
रमण को पूरा ग्लास पिला कर ऋतु उसके होंठ चाटने लगी.

‘कमोन किस युवर रंडी’

रमण को गर्मी तो चढ़ चुकी थी वो ऋतु को कस के दबोच लेता है और पागलों की तरहा उसके होंठ चूसने, चाटने और काटने लगता है.

ऋतु भी उसका साथ देती है और दोनो की ज़ुबाने एक दूसरे से पेच लड़ाने लगी.
ऋतु रमण का हाथ पकड़ के अपने उरोज़ पे रख देती है और रमण उसके उरोज़ को मसल्ते हुए उसके होंठों का रस पीने लगा.
जब दोनो की साँसे टूटने लगी तो दोनो अलग हुए और अपनी साँसे संभालने लगे. ऋतु की आँखों में गुलाबी नशीले डोरे तैरने लगे थे और रमण की आँखों में वासना का नशा भर चुका था.

अपनी साँस ठीक कर के ऋतु कॉकटेल का दूसरा ग्लास उठा कर एक सीप पीती है और फिर अपने मुँहे में भर कर रमण के होंठों पे होंठ रगड़ते हुए उसके मुँह में डाल देती है. इस तरहा आधे घंटे में जा कर वो ग्लास खाली होता है.

रमण को समझ नही आ रहा था उस दिन तो ऋतु ने इतनी बेइज़्ज़ती करी आज ये रंडीपना इतने प्यार से क्यूँ दिखा रही है.

ऋतु रमण का हाथ पकड़ उसे बेडरूम में ले गई और उसकी पॅंट की ज़िप खोल कर उसके लंड को बाहर निकाल कर सहलाने लगी.

रमण ने उसे फिर लपेल लिया और उसके होंठ चूसने लगा. थोड़ी देर अपने होंठ चुसवाने के बाद ऋतु नीचे बैठ कर रमण का लंड चूसने लगी, मस्ती के आलम में

रमण की सिसकियाँ निकलने लगी और उसने ऋतु के सर को अपने लंड पे दबा कर अपना लंड उसके हलक तक डाल कर उसका मुँह चोदने लगा.

ऋतु को साँस लेने में तकलीफ़ होने लगी, पर वो रमण का साथ देती रही बिल्कुल एक रंडी की तरहा और ज़ोर ज़ोर से उसका लंड चूसने लगी.

रमण ज़्यादा देर तक टिक नही पाया और जल्दी ही ऋतु के मुँह में झड़ने लगा. ऋतु ने एक बूँद भी जाया नही होने दी और उसका सारा रस पी कर उसके लंड को चाट ते हुए अपने मुँह से बाहर निकाल दिया और हाँफने लगी.

रमण ने उसे बिस्तर पे लिटा दिया और अपने कपड़े उतार कर उसकी चूत पे टूट पड़ा.

उफफफफफफफ्फ़ हमम्म्ममममम चूसो अपनी रंडी की चूत अहह और ज़ोर से चूसे. ऋतु आ ज से इस घर की रंडी है ------- आह आह उम उम ओह म्म्म्मा आआआआ

रमण ने उसकी चूत में अपनी ज़ुबान डाल दी और अपनी जीब से उसे चोदने लगा साथ ही साथ अपनी एक उंगली ऋतु की गान्ड में भी घुसा डाली.

जैसे ही ऋतु की गान्ड में उसकी उंगली घुसी ऋतु दर्द के मारे चिल्ला पड़ी
आाऐययईईईईई मदर्चोद गान्ड के पीछे क्यूँ पड़ गया, बाहर निकाल नही तो लंड काट दूँगी तेरा, रंडी की मर्ज़ी के बिना गान्ड को हाथ मत लगाना.

रमण वाकई में डर गया और फट से अपनी उंगली उसकी गान्ड से बाहर निकाल कर ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत को चूसने लग गया. कभी ज़ुबान से चाट ता, कभी पूरी चूत मुँह में भर के ज़ोर से चूस्ता तो कभी अपनी उंगलियों से उसकी चूत में घुसा कर पेलने लगता.

आह आह चूसो मेरी चूत, हाई चूसो इस रंडी की चूत, आह मज़ा आ रहा है

ऋतु ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ ले रही थी, अब तक रमण का लंड फिर खड़ा हो चुका था, और उसने देर ना करते हुए ऋतु की टाँगों को अपने कंधों पे रखा और एक ही झटके में ऋतु की चूत में अपना लंड घुसा दिया.

दर्द के मारे ऋतु बिलबिला उठी, हहाआआआआऐययईईईईईईई माआआआररर्र्र्ररर द्द्ददडाअल्ल्लाआाअ कककककुउुुउउत्त्तट्टीईई आराम से नहियीईईईई डाल सकता था.

रमण ऋतु की चीखों की परवाह नही करता और बिल्कुल उसे रंडी समझ के ज़ोर दार चुदाई शुरू कर देता है.

ऋतु भी अपनी चूत का रस छोड़ कर उसके लंड को गीला कर देती है और कमरे में फॅक फॅक फॅक की आवाज़ें गूंजने लगती है.

आधे घंटे तक रमण ऋतु की ताबडतोड़ चुदाई करता है और फिर झड कर उसके बगल में गिर पड़ता है. दोनो के जिस्म पसीने से लथपथ हो चुके थे और दोनो ही अपनी साँसे संभालने लगे इस दौरान ऋतु 4 बार झाड़ चुकी थी और चुदाई के मज़े को अपने अंदर समेट रही थी.
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08-21-2019, 08:11 PM,
RE: Adult Kahani कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास
उधर विमल ने कामया के होंठों को चूसना शुरू कर दिया और कामया पिघलती हुई उसके साथ बेल की तरहा लिपट गई.
विमल और कामया की साँस जब उखाड़ने लगी तो दोनो अलग हो गये. और कामया अपनी साँस संभालते ही बाल्कनी में जा कर खड़ी हो गई.

विमल पीछे से आ कर उसके साथ चिपक गया.

‘क्या हुआ मोम डार्लिंग, नाराज़ हो क्या मुझ से?’

कामया कुछ नही बोलती बस सामने फैली हुई नैनी झील को देखती रही जिस पे चाँद की किरने अपनी अठखेलियाँ कर रही रही थी.

विमल उसके कान की लो चूसने लगा और फिर पूछ बैठा.

‘बताओ ना डार्लिंग क्यूँ नाराज़ हो?’

आख़िर कामया अपने मन की बात बोल ही पड़ी.

‘मैं नही चाहती कि सिवाए मेरे और राम्या के तू किसी और के पास जाए’

‘ओह तो मासी से जल रही हो. आइ लव यू मोम, पर पता नही क्यूँ मेरा दिल मुझे बार बार मासी के पास खींचता है- ऐसे नाराज़ मत हो मुझ से मैं तो सारी जिंदगी बस तुम तीनो के अंदर ही खोया रहना चाहता हूँ. तुम तो मेरी देवी हो जिसकी मैं पूजा करता हूँ- मासी को प्रसाद के रूप में मुझे दे दो – मेरी ये छोटी इच्छा पूरी कर दो मोम डार्लिंग – फिर कभी कुछ नही माँगूंगा’
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08-21-2019, 08:11 PM,
RE: Adult Kahani कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास
कामया का दिल अंदर ही अंदर रो पड़ता है- सुनीता का जादू विमल पे चढ़ चुका था – अब वो कुछ भी कर ले ये जादू नही उतरने वाला था. आख़िर खून खून के पास खींच रहा था, और फिर जब रमण और उसके बच्चे आ जाएँगे – तब सुनीता उन में बिज़ी हो जाएगी – कुछ दिन की ही तो बात है – दिल को यही समझा कर कामया अपनी स्वीकृति दे देती है.

‘ठीक है विमू जो तू चाहता है वो कर- पर मुझे भूल तो नही जाएगा?’

‘अपनी देवी को कोई भूल सकता है क्या’ कह कर विमल कामया को अपने तरफ घूमता है और उसके होंठों पे छोटे छोटे चुंबन जड़ने लगता है.

कामया पिघलने लगी उसकी चूत में तेज खुजली शुरू हो गई और वो विमल से चिपक गई, अब दोनो एक दूसरे के होंठ चूसने लगे और कामया का हाथ नीचे चला गया, विमल की पॅंट की ज़िप खोल कर उसके लंड को पकड़ के सहलाने लगी.

कामया को चूमते हुए विमल उसकी सारी उतारने लग और कुछ ही पलों में कामया पेटिकोट और ब्लाउस में आ गई.

दोनो का चुंबन अभी जारी था और कामया का पेटिकोट भी जिस्म का साथ छोड़ दिया.
फिर विमल ने कामया के ब्लाउस के बटन खोलने शुरू कर दिए और कामया ने चुंबन तोड़ कर विमल के कपड़े उतारने शुरू कर दिए.

विमल सिर्फ़ अंडरवेर में रह गया और कामया सिर्फ़ पैंटी में. विमल ने वहीं एक कुर्सी पे बैठ कर कामया को अपनी गोद में बिठा लिया और उसके उरोज़ को चूसने और मसल्ने लगा.

दूसरे कमरे में राम्या, सुनीता के साथ चिपक जाती है और उसके होंठ चूसने लगती है. सुनीता भी उसका साथ देने लगी, अब से भी इस खेल में मज़ा आने लगा था.

दोनो के कपड़े जिस्म का साथ छोड़ देते हैं और दोनो ही एक दूसरे के उरोज़ मसल्ने लगती हैं.

दोनो को पता ही नही चलता कब दोनो बिस्तर पे पहुँच कर 69 में आ गई और ज़ोर ज़ोर से एक दूसरे की चूत को चूसने लगी.
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रमेश को एक झटका लगता है, शायद उसका दिमाग़ जाग जाता है- हथौड़े बज रहे थे दिमाग़ में, पहले राम्या और अब रिया – ये हो क्या रहा है. कैसे वो अपनी ही बेटियों को भोगने के लिए तयार होगया. उफ़फ्फ़ लानत है.
वो झटके से रिया से अलग होता है.

‘नही ये ग़लत है. रिया बेटी ये ग़लत है’

रिया को रमेश पे गुस्सा चढ़ जाता है और लगभग धक्के देते हुए उसे अंदर बिस्तर पे गिरा देती है और उसकी छाती पे चढ़ जाती है.

रिया की आँखों में इस वक़्त नशीले डोरे तैर रहे थे.

‘क्या ग़लत है? नौकरानी को चोदना सही है? अपनी साली पे झपटना सही है? और जो तुम्हें प्यार करता हो उसे तुम ठुकराते हो – ये सही है? – क्या चाहते हो? अपनी चूत के दरवाजे दूसरों के लिए खोल दूं? चुद जाउ दूसरों से? – बोलो – क्या चाहते हो?’

रिया इस भाषा में बात करेगी और ऐसे सवाल खड़े कर देगी ये तो उसने ख्वाब में भी नही सोचा था. फिर उसे डॉक्टर की बात याद आती है – रिया को इस वक़्त प्यार की ज़रूरत थी – उसके कॉन्फिडेन्स को वापस लाना था और उसके लिए अगर…….आगे रमेश नही सोच पाता और रिया को खुद पे खींच कर उसके होंठों के अपने कब्ज़े में ले कर ज़ोर ज़ोर से चूसने लग गया.
................................................
वहाँ विमल बाल्कनी में कामया को अपनी गोद में बिठा कर उसके मम्मे चूस रहा था और मसल रहा था.

हां विमू हां, चूस और चूस पी जा मेरा सारा दूध – उफफफफफफफ्फ़

‘ओह मोम, तुम्हारे दूध कितने अच्छे हैं- दिल करता है बस इन्हें चूस्ता ही रहूं’

‘तो चूस ना मेरे लाल, कब तुझे रोका है जी भर के चूस, जब तेरा दिल करे तब चूस--------आाआऐययईईईईईईईईईईईई आराम से ‘

विमल ज़ोर ज़ोर से कामया के उरोज़ चूसने लग गया, और कामया की सिसकियाँ हवाओं में फैलने लगी.

अहह उूुुउउम्म्म्ममममममम हाआंणन्न् ऐसे ही उफफफफफफफ्फ़

काफ़ी देर तक विमल कामया के उरोज़ चूस्ता है फिर उसे थाम कर अंदर कमरे में ले जाता है और बिस्तर पे लिटा देता है.

विमल झुक कर आज कामया के पैरों की उंगलियों को चूसने लगा और जो लज़्जत और जो मज़ा कामया को मिलने लगा वो बयान के बाहर है. रमेश ने कभी इस तरहा उसे प्यार नही किया था.

विमल धीरे धीरे कामया की जांघों पे आ जाता है और अपनी ज़ुबान फेरने लगता है.

कामया की सिसकियाँ बदस्तूर कमरे में गूँज रही थी. और विमल के होंठ उसकी जांघों से तरंगों को जागृत कर उसकी चूत और उसके उरोज़ को झंझणा रहा थे.

कामया जल बिन मछली की तरहा बिस्तर पे तड़पने लगी, विमल को उसे ज़ोर से पकड़ना पड़ा फिर भी कामया के जिस्म में जो थिरकन उठ चुकी थी वो थमने का नाम नही ले रही थी.

‘अहह ववववववववववीीईईईईईईईईईईईईईईईइइम्म्म्ममममम्मूऊऊुुुउउ’

विमल उसकी जांघों को चूमते चूस्ते और काटते हुए उसकी नाभि तक आ जाता है और अपनी ज़ुबान से नाभि को छेड़ने लगता है.
कामया की उत्तेजना चर्म तक पहुँच चुकी थी, नाभि से उठती हुई लहरों को वो बर्दास्त ना कर सकी जो सीधा उसकी चूत तक जा रही थी.
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