Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
06-09-2018, 02:13 PM,
#21
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--21
गतांक से आगे ...........
मैं: ओह ! मजा आ गया, क्या स्वादिष्त खाना था।
नवरीत: अभी तो इतनी सारी पूरियों बची हुई हैं और एक कौर तोड़कर मेरे मुंह में दे दिया।
फिर तो कभी सोनल, कभी तान्या और कभी नवरीत अपने हाथों से मुझे खिलाती गई। मेरा पेट फठने को हो गया था, पर वो इतने प्यार से खिला रही थी तो मैं मना भी कैसे करता। मैंने भी उनको खिलाना शुरू कर दिया ताकि सारा मेरे को ही ना खाना पड़े।
खाना खत्म होते होते मेरा पेट एकदम फटने को हो गया था।
मैं: यार, इतना खिला दिया, लगता ह ैअब तो कई दिनों तक भूख ही नहीं लगेगी।
सोनल: तो किसने कहा था, इतना खाने को, खाना रीत का था तो क्या हुआ, पेट तो तुम्हारा ही था ना।
और वो तीनों खिलखिलाकर हंसने लगी। अब मुझसे बैठा भी नहीं जा रहा था। मैं उठा और बाहर वॉशबेसिन पर हाथ धोकर आकर बेड पर लेट गया।
सोनल (मेरे पास आकर अपनी कमर पर हाथ रखकर खड़ी होते हुए): अब क्या इधर ही डेरा जमाने का इरादा है।
मैंने सोनल की तरफ देखा, वो खड़ी खड़ी मुस्करा रही थी। नवरीत बर्तन लेकर नीचे चली गई।
सोनल मेरे पास बेड पर बैठ गई। तान्या भी उसके पास आकर बैठ गई।
तभी मेरे मोबाइल की मैसेज टोन बजी। मैंने जेब में से मोबाइल निकाल कर मैसेज देखा। अपूर्वा का था, वो अपने मौसी के वहां से वापिस आ गई थी। यही लिखा था।
मैंने भी उसे मैसेज कर दिया, वेलकम बैक! क्ल टाइम पे ऑफिस आ जाना।
मैं (उठते हुए): ओके, अब मैं चलता हूं।
और उठ गया। सोनल भी मेरे साथ नीचे आ गई। तान्या वहीं पर रह गई। हम बाहर गली में आ गये। नवरीत वहीं पर खड़ी हुई किसी लेिंडज से बातें कर रही थी।
मैंने उसे खाने के लिए थैंक्स कहा, और बायें कहकर बाइक उठाकर चल दिया। पेट इतना ज्यादा भर गया था कि सांस लेने में भी प्रॉब्लम हो रही थी। रस्ते में मैंने हाजमोला ली और मुंह में रख ली। घर पहुंचकर मैं सीधा आकर बेड पर लुढ़क गया। थोडी देर ऐसे ही पेरशान होकर करवटे बदलता रहा, फिर पता नहीं कब नींद आ गई और मैं सपनों की दुनिया में गुम हो गया।

टिक टिक टिक टिक, ट्रिगगगगगगगगगगगगगगगगगगग
प्लेटिनम रिकॉर्ड शहर टेक वन..........................
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शहर में हूं मैं तेरे, आके मुझे मिल तो ले,
देना ना तू कुछ मगर, आके मेरा दिल तो तू ले ले जाना,

‘उं हूं, ये फोन भी ना, चैन से सोने भी नहीं देता।’
मोबाइल की रिंग सुनकर मेरी आंख खुली तो होठों से पहले शब्द यही निकले। इतनी अच्छी नींद आई हुई थी।
मैंने मोबाइल उठाकर देखा, सोनल की कॉल थी। मैंने कॉल रिसीव की।
मैं: उंहहहहहहहहहहहहह, क्या हुआ।
सोनल: तुम सो रहे हो! हे राम! ये लड़का भी ना कितना सोता है। चलो जल्दी से उठ जाओ, हमें वापिस लेके नहीं जाना क्या? जल्दी आ जाओ, मैं वेट कर रही हूं।
मैं: ओके, आ रहा हूं।
मैं उठा और नींद खोलने के लिए ठंडे पानी से मुंह धोया। मैंने टाइम देखा तो साढे ग्यारह हो रहे थे।
मैंने नीचे आकर बाईक स्टार्ट की और पांच मिनट में ही डेस्टिनेशन पर पहुंच गया। वहां जाकर मैंने सोनल को कॉल की। कॉल करते ही सोनल ने पूछा: क्या हुआ, अभी तक आए नहीं क्या।
मैं: अरे यार, मैं तो कब से नीचे खड़ा हूं, आप आओ तब ना।
सोनल: ओके अभी आ रही हूं और फोन काट दिया।
थोड़ी देर में नवरीत और सोनल बाहर आई। दोनों बहुत ही थकी हुई लग रही थी।
सोनल (मेरे पास आकर): यार, आज तो नाच नाच के हालत खराब हो गई। इस रीत की बच्ची ने ना, आराम भी नहीं करने दिया।
नवरीत: अच्छा जी, खुद तो बार बार मेरा हाथ पकड़ पकड़ कर डांस के लिए मैदान के कूद जाती थी, और मुझे दोष दे रही हो।
मैं: हाय री किस्मत! दो दो अप्सराओं नाच रही थी और मैं सो रहा था।
मेरी बात सुनकर सोनल हंसने लगी और नवरीत का चेहरा शरम से लाल हो गया (वैसे लाल तो पहले ही हो रखा था नाच नाच के) और उसने अपनी आंखें नीचे झुका ली और फिर वापिस से मेरी तरफ देखने लगी।
उसकी इस अदा ने तो मेरे जान ही निकाल ली। उसने इस अदा के साथ पलकें झुका कर उठाई की मैं तो बुरी तरह घायल हो गया।
सोनल मेरे पीछे बैठ गई।
मैं: तान्या नहीं आ रही।
सोनल: वो तो गई, उसने अपने पापा को बुला लिया था।
सोनल के बैठने के बाद मैंने बाइक स्टार्ट कर दी। बाइक स्टार्ट होते ही नवरीत हमारे पास आई और बाइक पर बैठी सोनल के गले लग गई। जब वो सोनल से गले लग रही थी तो उसकी कमर साइड से मुझे टच हो रही थी, बहुत ही सेंसेशनल टच था उसका।
फिर वो मेरे पास आई और मेरी तरफ हाथ बढ़ा दिया।
मैं: ये गलत बात है जी, एक को तो इतनी प्यारी झप्पी और हमें सिर्फ हाथ।
मेरी बात सुनकर सोनल ने मेरी कमर में एक मुक्का जमा दिया।
नवरीत: ओके जी, आप भी क्या याद रखोगे (और मेरे पास आकर मेरे गले लग गई)।
मुझसे गले लगते हुए उसने मर्यादा का काफी धयान रखा था। उसने अपना एक हाथ मेरे गले में डाला दिया और अपना चेहरा मेरे चेहरे पर रगड़ते हुए गले लग गई। पर हमारे बदन के बीच में काफी गेप था।
जब उसके गाल मेरे गालों से टच हुए तो मैं तो बस पागल ही हो गया। क्या मुलायम गाल थे एकदम सॉफ्रट-सॉफ्रट। मेरा पप्पू तो जींस में ही धमा-चौकड़ी मचाने लगा।
वो मुझसे अलग हुई।
सोनल: ओके जी, अब चलो, अब तो झप्पी भी मिल गई।
मैंने बाइक में गियर डाला और नवरीत को बाय कहते हुए निकल लिया।
सोनल ने अपने हाथ मेरे पेट पर कस दिये और मेरी पीठ से चिपक गई। उसके बूब्स मेरी कमर में दबकर पिचक गये। उसने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया और मेरे कानों पर धीमी धीमी फूंक मारने लगी। थोड़ी ही देर में हम घर पहुंच गये।
सोनल: तैयार रहना, रात को आउंगी, मम्मी के सोते ही।
मैं: यार आज बहुत थक गया हूं, आज रहने दो।
सोनल: अच्छा, बताना मुझे किस चीज से थक गये हो, पूरे दिन तो सोते रहे हो।
मैं: अच्छा बाबा! आ जाना, ऐसा चबाउंगा कि दस दिन तक नाम भी नहीं लोगी मेरे कमरे में आने का।
सोनल: हां - हां, देखती हूं, कौन किसको चबायेगा।
और सोनल अंदर चली गई। मैं भी उपर आ गया। नींद का असर अभी भी था तो सोचा कि नहा लिया जाए और मैं नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया। नहाकर मैं टॉवेल लपेटकर बाहर आ गया और छत पर टहलने लगा।

‘क्या बात है, आज इतनी रात को कैसे नंगे होकर छत पर घूम रहे हो’,
मैं आवाज की तरफ पलटा, पूनम अपनी छत पर खड़ी थी।
मैं: बस वो अभी नहाया था, तो इसलिए सोचा थोड़ा टहल लेता हूं, आज दिन में ज्यादा सो लिया तो नींद भी नहीं आ रही।
मैं: आपके मामा जी कैसे हैं अब?
पूनम: सही हैं, क्यों पूछ रहे हो।
मैं: सोनल ने बताया था कि उनका एक्सीडेंट हो गया था।
पूनम: अरे, वो मामी भी ना, वैसे ही घबरा जाती हैं, बस कुछ खरोंच ही आई थी, और फोन करके कह दिया कि एक्सीडेंट हो गया। पीकर चला रहे थे, एक खड़ी हुई कार में ठोक दी।
मैं: चलो, बढ़िया है, खड़ी कार में ही ठोकी।
मैं: मेरा तो फिर भी कारण है, दिन में सो लिया था, आपकी कैसे रातों की नींद उड़ी हुई है।
पूनम: अभी अभी आई हूं, फ्रेड के यहां गई हुई थी, तो सोचा थोड़ी देर छत पर टहल लेती हूं।
मैं: क्यों तुम्हारें फ्रेंड के यहां भी कोई फंक्शन था क्या?
पूनम: नहीं तो, और किसके फ्रेंड के वहां फंक्शन था।
मैं: सोनल जी के, अभी अभी लेके आया हूं, ‘फंक्शन में से’।
मैंने आखिरी शब्दों को कुछ ज्यादा जोर देकर कहा, जिससे पूनम हंसने लगी।
पूनम: तो आज तो सोनल नहीं आती होगी रात, को पार्टी में थी तो थक गई होगी।
मैं: वो क्यों आयेगी रात को।
पूनम: ज्यादा बनो मत, मुझे सब पता है। पूरी रात मजे करते हो उसके साथ, कभी हमारी तरफ भी देख लिया करो।
मैं: ऐसा है क्या! मेरे अच्छे भाग, जो आपने हमें इस लायक समझा।
पूनम: तो आज मैं आ जाती हूं, सोनल तो आयेगी नहीं।
मेरे मन में तो खुशी के मारे लड्उू फूट रहे थे। मैंने थोड़ी देर सोचा कि सोनल भी आयेगी, और इसके साथ देख लिया तो कहीं नाराज ना हो जाये। फिर सोचा, वो भी देखी जायेगी, हाथ आई चिड़िया को क्यूं जाने दूं। ऐसे मौके कभी कभी ही आते हैं।
मैं: मेरी बड़ी खुशकिस्मती होगी, जो आपका सानिधय प्राप्त होगा। मैं तो धन्य हो जाउंगा।
पूनम: ज्यादा मस्का लगाने की जरूरत नहीं है।

पूनम: मैं तो उस दिन आपका नाश्ता बनाया था, उसकी दिन से मौके की तलाश में हूं, पर मेरी फूटी किस्मत कोई मौका मिला ही नहीं, पर आज मैं ये मौका नहीं छोड़ूंगी। ठीक है, मैं घरवालों के सोने के बाद आउंगी, दरवाजा खुला ही रखना।
मैं: ओके जी, मैं इंतजार करूंगा, पर कहीं ऐसा ना हो कि इंतजार में ही पूरी रात गुजारनी पड़ जाए।
पूनम (इतराते हुए): अब क्या कह सकते हैं, जिसकी जैसी किस्मत होगी, वैसे ही रात गुजरेगी।
मैं: अच्छा जी, अभी तो बड़ी उछल रही थी।
पूनम: अरे, मैं तो मजाक कर रही हूं।
उसकी ये बात सुनते ही मेरे चेहरे पर उदासी छा गई।
पूनम: क्यों, चेहरा क्यों उतर गया। ------------------------ ओह माय गोड! अरे मैं वो वाला मजाक नहीं कर रही, मैं रात को आउंगी, मजाक तो मैं वो किस्मत वाली बात कह रही थी।
उसकी बात सुनकर मेरे चेहरे पर फिर से चमक आ गई।
ओके, मैं चलती हूं, देखती हूं, घरवाले कब तक सोते हैं, फिर आउंगी (और कहते हुए नीचे चली गई)।
मैं आकर बेड पर लेट गया। अब मैं बस यही दुआ कर रहा था कि सोनल पहले ना आ जाये, नहीं तो सारा काम खराब हो जायेगा।
और आखिरकार रायता फिर ही गया। आधे घण्टे बाद दरवाजा खुला और सोनल चुपके से अंदर आ गई। मैंने उसे देखकर स्माइल पास की तो वो भी मुस्करा दी।
ओह तेरे की, मैं मोबाइल तो उधर ही छोड़ आई - सोनल ने अपने माथे पर हाथ मारते हुए कहा।
मैं: तो क्या हुआ, अब कौनसा तेरे को किसी को फोन करना है।
सोनल: अब रात में किसी का फोन आया तो मम्मी उठ जायेगी, और मैं वहां नहीं मिलूंगी तो, मेरी तो बैण्ड बज जायेगी, अभी लेकर आती हूं।
और सोनल वापिस नीचे चली गई। थोड़ी देर बाद फिर से दरवाजा खुला तो दरवाजे पर देखकर मेरा मुंह खुला का खुला रह गया। दरवाजे पर पूनम खड़ी थी। उसने नाइटी पहनी हुई थी जो बहुत ही ज्यादा पतली थी जिससे उसकी ब्रा और पैंटी साफ साफ चमक रही थी, उसने काली ब्रा और पैंटी पहन रखी थी। नाइटी उसके जांघों तक ही थी जिससे उसके मांसल जांघें और चिकने पैर कहर ढा रहे थे। उसके बूब्स एकदम सेब के आकार के पूरी तरह तने हुए थे। उसके निप्पल ब्रा में से झांक रहे थे। एकदम सपाट पेट थोडी सी भी चर्बी नहीं और एक दम चिकनी मांसल जांघे। मैं तो बस उसे देखता ही रह गया। मेरी नजर उसकी जवानी का रसपान करने में लगी हुई थी।
क्रमशः.....................
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06-09-2018, 02:13 PM,
#22
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--22
गतांक से आगे ...........
होठों से भी पीओगे या बस नजरों से ही पीने का इरादा है, पूनम मुस्कराती हुई मेरे पास आकर बेड पर बैठ गई।
मैंने अपने हाथ सीधे उसकी जांघों पर टिका दिये। पूनम में मुंह से हलकी आह निकल गई। मैं भी बेड पर बैठ गया और उसके पीछे की साइड से अपनी ठोडी उसके कंधे पर रख दी और अपने हाथ उसके पेट पर कस दिए। पूनम की सांसे एकदम तेज तेज चलने लगी और उसका पेट फडकने लगा। मैं अपने गालों को उसके गालों से रगड़ने लगा। वो कुछ शरमा रही थी। मैंने उसके पेट को सहलाना शुरू कर दिया और उसके गालों पर धीमी धीमी फूंक मारने लगा। ये फूंक मारने वाला आइडिया सोनल से आया, जब वो रात को लौटते वक्त मेरे कानों पर फूंक मार रही थी तो बहुत ही मजा आ रहा था।
पूनम की आंखें बंद होने लगी। उसने अपने हाथ मेरे हाथों पर रख दिए और मेरे हाथों को पकड़ लिया। मैंने कुछ देर अपने हाथों को ऐसे ही रखा और फिर से उसके पेट को सहलाना शुरू कर दिया। उसके पेट को सहलाते हुए ही मैंने उसके गालों पर अपनी जीभ फिरानी शुरू कर दी।
तभी दरवाजा खुला और सोनल अंदर।
पूनम को अंदर देखकर सोनल का मुंह खुला का खुला रह गया और वो मुझे घूरकर देखने लगी। सोनल के अंदर आते ही पूनम एकदम से खड़ी हो गई और कभी सोनल की तरफ तो कभी मेरी तरफ देखने लगी।
सोनल मेरी तरफ आंखें तरेरते हुए अंदर आ गई और दरवाजा बंद करके कुंडी लगा दी। सोनल के हाथ में एक कटोरी थी। मैंने उसकी तरफ आंखों से इशारा करके पूछा की ये क्या है।
सोनल (थोड़ा गुस्से में): तेल लाई थी गर्म करके, सोच रही थी थोड़ी मालिश करवा लूंगी, थकान उतर जायेगी। पर यहां तो और ही किसी की मालिश चल रही है।
सोनल की बात सुनकर पूनम ने अपनी नजरे नीची कर ली।
सोनल (बेड पर बैठते हुए, पूनम की तरफ देखते हुए): मेरी जान, मैं तुम्हें कोई खा नहीं जाउंगी, इतना घबरा क्यों रही हो।
पूनम ने सोनल की तरफ देखा, सोनल मुस्करा रही थी। सोनल की बात सुनकर पूनम के जी में जी आया।
पूनम: मुझे पता नहीं था कि आप आयेंगी, नहीं तो-----। ओके मैं चलती हूं, आप मालिश करवाओ।
और पूनम दरवाजे की तरफ चलने लगी।
सोनल ने जल्दी से आगे होकर उसका हाथ पकड़ लिया और खींचकर बेड पर बैठा दिया।
सोनल: अच्छा, बड़ी आई जाने वाली। चुपचाप बैठ जा यहां पर।
बेड पर बैठकर पूनम सोनल की तरफ सवालिया नजरों से देखने लगी।
सोनल: ऐसे क्या देख रही है, आज इसका कचूमर निकालेंगी दोनों मिलकर, बड़ा आया मुझे चबाने वाला। अब देखती हूं, कौन किसको चबायेगा।
सोनल की बात सुनकर मैं मुस्कराने लगा।
सोनल: हां, मुस्करा ले, मुस्करा ले। आज पता चलेगा तुझे। कल तो मैंने कुछ नहीं किया, नहीं तो कल ही पता चल जाता।
मैं: तो मना किसने किया था, अंदर डालने से पहले ही खल्लास होकर साइड में पसर गई। बेचारी तान्या ने ही मैदान संभाला।
तान्या का नाम सुनते ही पूनम ने हमारी तरफ आश्चर्य से देखा।
सोनल: अरे यार वो कल तान्या भी थी हमारे साथ।
पूनम: तो यहां पर पूरी मस्ती चलती है रात को। और कौन कौन आ चुकी है।
सोनल: अरे वो तो कल तान्या इधर ही रूक गई थी, इसलिए वो भी शामिल हो गई, नहीं तो हम दोनों ही होते हैं।
मैंने पूनम की कमर में अपना हाथ डाला और उसे पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया।
सोनल: हां, नया माल मिल गया, अब मेरी तरफ क्यों देखोगे।
मैंने अपना दूसरा हाथ सोनल की कमर में डाला और उसे भी अपनी तरफ खींचकर अपने जिस्म से चिपका लिया। मेरी इस हरकत से सोनल थोड़ा शरमा गई।
सोनल (मेरे कंधे पर मुक्का मारते हुए): छोड़ो बेशर्म कहीं के।
मैं: अरे कुछ करोगी, तभी तो छूटेगा। ऐसे क्या बिना हाथ लगाये ही छूट जायेगा।
मेरी बात सुनकर पूनम का चेहरा लाल हो गया और सोनल ने मेरी कमर में एक जोरदार मुक्का जमा दिया।
मैंने सोनल का हाथ पकड़ा और उसे बेड पर पटक दिया और उसकी जांघों पर बैठ गया। सोनल ने मेरी कमर में अपना हाथ डाला और एक झटके में मेरा तौलिया खोल दिया। तौलिया निकलकर सोनल की जांघों पर गिर गया और मेरा लिंग उछलकर बाहर आ गया।
मुझे लग रहा था कि जबसे मैंने सोनल के साथ सैक्स शुरू किया है तब से लेकर अब तक लिंग के साइज में काफी अंतर आ गया है। अब वह पहले से ज्यादा मोटा और शायद कुछ लम्बा भी हो गया है। मैंने कभी नापा तो नहीं, इसलिए साइज को पता नहीं, पर काफी लंबा और बड़ा है।
मेरा तौलिया खुलते ही पूनम की आंखें मेरे लिंग पर जम गई। मैंने अपने हाथ सोनल के उभारों पर रख दिये और उन्हें मसलने लगा। जब सोनल ने पूनम को ऐसे मेरे लिंग को घूरते देखा तो उसका हाथ पकउ़कर मेरे लिंग पर रख दिया। उसके हाथ का स्पर्श होते ही मेरे लिंग ने एक झटका खाया और मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ गया।
पूनम कुछ देर हाथ को वैसे ही रखे रही, फिर उसने मेरे लिंग को अपनी मुठ्ठी में भर लिया। कोमल कोमल हाथों में जाकर मेरा लिंग फूला नहीं समा रहा था। पूनम थोड़ा एडजस्ट हुई और बेड पर उपर पैर करके अच्छी तरह से हमारे पास होके आलथी-पालथी मारकर बैठ गई। उसने फिर से मेरे लिंग को अपनी मुठ्ठी में भर लिया और उसकी खाल को पिछे करने लगी। जिससे चमकता हुआ गुलाबी सुपाड़ा बाहर निकल आया।
मेरे हाथ सोनल के उभारों को मसलने में बिजी थे। सोनल ने मेरे एक हाथ को पकड़ा और मेरी एक उंगली अपने मुंह में ले ली और चूसने लगी। उसके गरम मुंह में उंगली डालने में भी बहुत मजा आ रहा था, ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरे लिंग को ही चूस रही थी। हमारी जांघों के बीच पड़ा तौलिया शायद पूनम को कुछ परेशान कर रहा था, उसने तौलियों को पकड़कर खींचकर बाहर निकालने की कोशिश की। पर वो मेरे नीचे दबा था। मैंने पूनम की तरफ देखा और थोड़ा सा उपर उठ गया। पूनम ने खींचकर तौलिया को एक तरफ रख दिया।
पूनम ने सोनल की तरफ देखा, वो तो आंखें बंद किए मजे से मेरी उंगली को लिंग सोचकर चूस रही थी। पूनम के होंठों पर मुस्कान तैर गई और उसने थोड़ा आगे होकर मेरे लिंग को फिर से पकड़ लिया और उसके सुपाड़े पर उंगली फिराने लगी। मजे के मारे मेरी आंखें भी बंद होने लगी। पूनम के हाथों का कमाल की मेरे सुपाड़ों पर प्रिकम की बूंदू चमकने लगी। पूनम ने उसे अपनी उंगली पर लगाया और मेरे पूरे लिंग पर मसल दिया। बहुत ही मजा आ रहा था। पूनम बहुत ही प्यार से मेरे लिंग को छेड़ रही थी। ऐसा लग रहा था कि मैं हवा में उड़ रहा हूं।
मैंने सोनल के निप्पल को अपनी दो उंगलियों के बीच भरा और जोर से भींच दिया। सोनल के मुंह से कराह और आनंद की मिली जुली सिसकारी निकली और उसने मेरी उंगली को और कसके चूसना शुरू कर दिया।

मैंने अपना हाथ सोनल के उभार पर से हटाया और पूनम के उभार पर रख दिया और हल्के हल्के उसे सहलाने लगा। पूनम के मुंह से एक सिसकारी निकली। सोनल ने अपनी आंखें खोलकर मेरे हाथ को देखा कि कहां गया और पूनम के उभारों पर पहुंचा देखकर वापिस अपनी आंखें बंद कर ली। मैं पूनम के उभारों को बारी बारी हलके हलके सहलाने लगा। मेरी इस हरकत से सोनल के शरीर में रह रहकर तरंगे सी उठ रही थी और उसकी मेरे लिंग पर पकउ़ बढ़ती जा रही थी। अब वो मेरे लिंग पर अपने हाथ को आगे पिछे चला रही थी।
मैंने पूनम की नाइटी को पकड़ा और उपर उठाने लगा, पर वो पूनम के नीचे दबी हुई थी। पूनम थोड़ी सी उपर को हुई और मैंने नाइटी को उसकी कमर तक खींच लिया। वो वापिस बैठ गई। मैंने धीरे धीरे करके एक हाथ से ही उसकी नाइटी को उसके शरीर से अलग कर दिया और बेड पर एक साइड में रख दी। फिर मैं अपना हाथ पिछे की तरफ ले गया और उसकी ब्रा के हुक खोलने की कोशिश करने लगा। पर एक हाथ से खुल नहीं पा रहे थे। मुझे परेशान होते देखकर पूनम ने अपने हाथ पिछे किए और हुक खोल दिया और वापिस से मेरे लिंग पर अपने हाथ की पकड़ बना ली। अब उसने अपना एक हाथ मेरी कमर पर कुल्हों के पास रख दिया था और धीरे धीरे सहलाने लगी थी। मुझे तो इतना मजा आ रहा था कि मुझे लग रहा था कि मैं अब गया। मैंने पूनम की ब्रा को उसके शरीर से अलग कर दिया। अब वो बस एक पैंटी में बैठी थी।
मैंने वापिस अपना हाथ उसके उभारों पर टिका दिया और उसके निप्पल को चुभलाने लगा। वो मजे के मारे सिसकारियों निकाल रही थी और बड़बड़ा रही थी, आहहहहहह बहुत मजा आ रहा है। मजे के मारे उसने उसकी आंखें बंद हो चुकी थी।
मैंने अपना हाथ उसके सिर के पिछे किया और उसको अपनी तरफ खींच लिया। शायद वो समझ गई थी कि मैं क्या कर रहा हूं, इसलिए वो अपने घुटनों के बल खड़ी हो गई। उसकी आंखें बंद ही थी। मैंने उसके चेहरे को निहारा, बहुत ही प्यारी लग रही थी, वासना के कारण उसका चेहरा एकदम गुलाबी हो गया था। मैं कुछ देर तक उसके चेहरे में ही खो गया। जब मैंने कोई हरकत नहीं की तो पूनम ने अपनी आंखें खोली और मेरी तरफ देखा। मुझे इस तरह खुदकर को देखता पाकर उसने शरम से अपना चेहरा एक तरफ घुमा लिया। मैंने उसकी ठोडी को पकड़कर उसके चेहरे को घुमाया और धीरे धीरे अपने चेहरे को उसके चेहरे के पास ले जाने लगा। उसने हया से अपनी आंखें बंद कर ली। मैंने अपने होंठ उसके नाक की चोंच पर रख दिये। मेरे होंठ लगते ही वो सिहर गई। उसने अपने हाथ मेरे कंधों पर रख दिये। मैंने अपने होठों को उसके गालों पर फिराया, बहुत ही मजेदार अनुभव था, ऐसा लग रहा था कि मैं अपने होठों से मक्खन को छू रहा हूं। मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और उसके गालों को चाटने लगा। उसके हाथ मेरे बालों में हरकत करने लगे। फिर मैंने उसके रस भरे फडकते होंठों पर अपनी जीभ फिराई। मजे के मारे उसके होंठ थोड़े से खुल गये।
मैंने उसके उपर वाले होंठ को अपने होंठों में पकड़ लिया और चूसने लगा। हमारे होंठ मिलते ही वो बुरी तरह से मेरे नीचले होंठ को चूसने लगी। मैंने अपनी आंखें बंद कर ली और उसके होंठों से निकलते रस का पान करने लगा। उसके हाथ मेरे सिर में फिर रहे थे। वो बार बार मेरे सिर को अपने चेहरे पर दबा रही थी। मैंने थोड़ी सी आंखें खोलकर सोनल की तरफ देखा, वो मेरी उंगली को अपने होठों पर फिरा रही थी और हमारी तरफ देखकर मुस्करा रही थी। मैं वापिस पूनम के लबों का रसपान करने में मशगूल हो गया। पूनम किस करने में पूरा साथ दे रही थी। ऐसा लग रहा था कि वो किस करने में माहिर है। सच बताउं तो मुझे अबसे पहले किस करने में इतना मजा नहीं आया था। मैं उसके होठों को चूसे ही जा रहा था और वो मेरे होंठों को। मेरे लिंग को खाली देखकर सोनल ने उसे अपने हाथों में दबोच लिया और उससे खेलने लगी।
सोनल एक हाथ से अपने उभारों के साथ खेल रही थी और दूसरे हाथ से मेरे लिंग के साथ खेलते हुए हमें मजे लेकर देख रही थी।
मैंने अपना एक हाथ सोनल के उभार पर रख दिया और मसलने लगा और दूसरा हाथ पूनम के सिर पर था ही। सोनल जोर जोर से मेरे लिंग को सहलाने लगी। मुझे लग रहा था कि मैं बस निकलने वाला हूं। मुझे इतना ज्यादा मजा आ रहा था कि मैं अभी झडना नहीं चाहता था, मैंने सोनल के हाथ को पकड़ लिया और वैसे ही रहने दिया। सोनल ने मेरी तरफ देखा। पर मैं तो पूनम के लबों का रस चूसने में मशगुल था। कुछ देर बाद मैंने अपना हाथ पूनम के उभारों पर रख दिया और उन्हें मसलने लगा। जैसे ही मेरा हाथ उसके उभारों पर पड़ा वो और भी ज्यादा वाइल्ड तरीके से मेरे होठों को चूसने लगी। मैंने उसके होठों पर अपने दांत गड़ा दिये और हलके हलके दांतों के बीच रगड़ने लगा। पूनम ने मेरी कमर में एक मुक्का जमा दिया। मैंने अपने दांत हटा लिये, परन्तु जैसे ही मैंने अपने दांत हटाये पूनम ने मेरे होठों पे अपने दांत गड़ा दिये और जोर से काटने लगी। मैंने उसकी चूची को हाथ में भर बुरी तरह भींच दिया। वो दर्द और वासना से सीत्कार उठी और मेरे लबों को छोड़ दिया। हमारी सांसे उखड़ी हुई थी। हम गहरी सांसे लेने लगी। मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा, उसके होठों पे थोड़ा सा खून लगा हुआ था।
सोनल ने मौके का फायदा उठाया और पूनम का हाथ पकड़कर उसे बेड पर गिरा दिया और मुझे अपने उपर खींच लिया। और मेरे होठों को अपने होठों में कैद कर लिया। पूनम के काटने की वजह से मेरे होंठों में दर्द हो रहा था। पर सोनल के रसीले होंठों के रस के लालच ने दर्द को भुला दिया। मैं अब सोनल के नीचे वाले होंठ को चूसने लगा और और सोनल मेरे उपर वाले होंठ को। वो अपनी आंखें खोल कर मुझे देख रही थी। उसके हाथ मेरी कमर में घुम रहे थे। अचानक मुझे अपनी कमर में तीन हाथ महसूस हुये। मैंने पूनम की तरफ देखा। वो हमारे साइड में लेटकर अपने एक हाथ से मेरी कमर सहला रही थी। मैं वापिस सोनल के होठों को रस पीने लग गया। पूनम ने मेरी कमर सहलाते हुए अपना हाथ मेरे कुल्हों पर ले गई और मेरे कुल्हों को सहलाने लगी। अचानक वो उठी और मेरे उपर आकर लेट गई।

बेचारी सोनल तो दोनों के नीचे दब गई। पर उसने मेरे होठों को नहीं छोड़ा। पूनम की गीली पैंटी मुझे अपने कुल्हों पर महसूस हो रही थी। पूनम ने अपने हाथ नीचे की तरफ किये और अपनी पैंटी को अपने कुल्हों से खींचकर निकाल दिया। अब उसकी पैंटी उसकी जांघों में अटकी हुई थी। उसके बूब्स मेरी कमर में रगड़ खा रहे थे। वो धीरे धीरे हिलने लगी और अपनी जांघों को मेरे कुल्हों पर ओर अपने बूब्स को मेरी कमर पर रगड़ने लगी। उसकी योनि से निकलता गर्म पानी मेरे कुल्हों पर गिर कर भिगो रहा था। वो वासना में बहुत ही ज्यादा डूब गई थी। उसने अपने गाल भी मेरी कमर पर रगड़ने शुरू कर दिये। पूनम ने अपने हाथ मेरी कमर में से लेते हुए हमारे बीच में ले आई और सोनल की चूचियों को सहलाने लगी। जब उसके हाथ सोनल की चूचियों पर पड़े तो सोनल के शरीर ने एक झटका खाया। और शायद उसकी पैंटी और ज्यादा गीली हो गई थी। सोनल से हम दोनों का वजन सहन नहीं हो पा रहा था, वो मेरे कंधों पर हाथ रखकर मुझे उठाने की कोशिश करने लगी। मैंने अपना एक हाथ पिछे ले जाकर पूनम की कमर में डाल दिया और दूसरी तरफ पलट गया। अब पूनम मेरे नीचे बेड पर और मैं उसके उपर पीठ के बल लेटा हुआ था। सोनल करवट लेकर मेरी तरफ लेट गई। पूनम ने मेरे पेट पर अपने हाथ कस दिये और मेरे नीचे से निकलते हुए मुझे दोनों के बीच में लेटा दिया। उसने मुझे इस तरह से पलटा था कि मेरा मुंह अब पूनम की तरफ था।
पूनम ने अपना एक हाथ मेरी कमर में डाला और मुझे अपनी तरफ खींचकर मुझसे चिपक गई। मेरा लिंग सीधा उसकी योनि पर जाकर टकराया और हम दोनों के मुंह से आह निकल गई। उसके उभार मेरी छाती में दब गये। उसके कड़े निप्पल मुझे चुभ रहे थे। मैंने उसके होठों पर एक पप्पी दी और पलटी मारकर उसके उपर आ गया। अब पूनम मेरे नीचे थी और मैं उसके उपर। मैंने सोनल की तरफ देखा वो मुस्कराते हुए हमारी ही तरफ देख रही थी।
पूनम नीचे से अपने कुल्हे उठाकर मेरे लिंग पर अपनी योनि को रगड़ने लगी। मैं हाथ को हमारी जांघों के बीच ले गया और अपना लिंग उसकी योनि की फांकों के बीच में सैट कर दिया। मेरा लिंग उसकी योनि की फांको को खोलकर पूरी तरह उसकी योनि के उपर सेट हो गया और मेरा सुपाड़ा उसके क्लिट को रगडने लगा। पूनम मस्ती में सिसकारी भरने लगी। अब मैं भी धीरे धीरे अपने लिंग को उसकी योनि पर रगड़ रहा था। मेरा सुपाडा उसकी क्लिट को बुरी तरह मसल रहा था, जिससे उसकी योनि ने पानी बहाना शुरू कर दिया। पूनम के हाथ मेरे कुल्हों पर थे और नीचे की तरफ दबा रहे थे। मेरे होंठ उसके होठों का रस पी रहे थे। वो तेजी से अपने कुल्हे उठाकर मेरे लिंग पर अपनी योनि रगड़ने लगी। अचनाक उसके कुल्हें हवा में उठे और उपर से उसने मेरे कुल्हों पर अपने हाथों का दबाव बढ़ा दिया। उसका शरीर अकड गया था और उसने मेरे होठों पर अपने दांत गड़ा दिये, उसकी योनि से पानी का सैलाब बह निकला। थोड़ी देर में वो निढाल होकर बेड पर गिर गई। और जोर जोर से सांसे लेने लगी। मेरे होंठों से खून निकल आया था। पूनम आंखें बंद करके शांत होकर लेटी थी।
क्रमशः.....................
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06-09-2018, 02:14 PM,
#23
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--23
गतांक से आगे ...........
सोनल ने मेरी कमर पर अपने हाथ रख दिये और सहलाने लगी।
मैं पूनम के उपर से उठने लगा तो पूनम ने मेरी कमर में अपने हाथ कस दिये और मुझे अपनी बाहों में भींच लिया और मेरे गालों को चूमने लगी। वो इतनी जल्दी फिर से तैयार हो गई थी और नीचे से अपने कुल्हें उठाकर मेरे लिंग को अपनी योनि पर रगड़ने लगी थी। मैंने भी अपने कमर को हिलाना शुरू कर दिया और उसकी योनि को कुचलने लगा। पूनम के पैर मेरी कमर के चारों तरफ लिपट गये थे। मैंने हाथ नीचे करके अपने लिंग को उसके योनि द्वार पर सैट किया और हल्का हल्का दबाव बढ़ाने लगा। पूनम ने नीचे से एक तेज धक्का मारा और मेरा सुपाड़ा उसकी योनि में जाकर फंस गया। पूनम के मुंह से चीख निकल गई। उसकी योनि ने मेरे सुपाड़े को अपनी दीवारों में भींच लिया था। ऐसा लग रहा था कि उसकी योनि मेरे लिंग को अंदर की तरफ खींच रही है। मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रखे और लिंग को थाड़ा सा पीछे करके एक जोर का झटका मारा। पूनम का शरीर अकड़ गया और मेरा लिंग दो इंच उसकी योनि में घुस गया। पूनम की आंखों से आंसू बहने लगे और उसके हाथ और पैर मेरी कमर पर बुरी तरह से कस गये। उसके नाखून मेरी कमर में गड़ गये थे, जिससे मुझे भी दर्द हो रहा था। मैंने फिर से अपने लिंग को थोड़ा सा पीछे खींचा और एक जोरदार धक्का मारा, मेरा लिंग उसकी झिल्ली को फाड़ता हुआ आधे से ज्यादा पूनम की योनि में समा गया। उसने मेरे कंधे पर अपने दांत गड़ा दिये और मेरी कमर में अपने नाखुन। उसकी आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे। मैं थोड़ी देर ऐसे ही रहा और उसके बालों को सहलाता रहा। उसके उभार मेरी छाती के नीचे दबे हुए थे। सोनल ने उसके गालों पर अपने होंठ रख दिये और चूसने लगी। जब पूनम कुछ नोर्मल हुई तो मैंने अंदर रखे रखे ही मैंने अपने लिंग का दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया। फिर मैंने अपने लिंग को थोड़ा सा बाहर निकाला और आराम से आराम से थोड़ा सा अंदर करने लगा। मैंने पांच छः बार ऐसे ही किया। फिर मैंने लिंग को सुपाड़े तक बाहर निकाला और जैसे ही मैंने धक्का मारा, पूनम ने नीचे से अपने कुल्हें उठाकर एक तेज धक्का मारा और मेरा लिंग उसकी पूरी योनि को चीरता हुआ उसके गर्भाश्य से जाकर टकरा गया। पूनम के मुंह से दर्द व मस्ती भरी आह निकली और उसके दांत फिर से मेरे कंधो पर गड़ गये। मुझे दर्द तो बहुत हो रहा था, पर शायद जो दर्द उसे हो रहा था उसके सामने कम ही था। पूनम कुछ देर ऐसे ही लेटी रही और फिर धीरे धीरे नीचे से अपने कुल्हों को हिलाने लगी। इशारा पाकर मैंने अपने लिंग को बाहर निकाला और एक जोर का धक्का मारा। मेरा पूरा लिंग उसकी योनि में समा गया और उसके गर्भ द्वार को खोलने की कोशिश करने लगा। पूनम मस्ती भरी सिसकारियां निकालने लगी थी। अब उसका दर्द खत्म हो गया था और वो मेरे धक्कों के साथ अपने कुल्हें उठाकर धक्के लगा रही थी।

उसकी योनि इतनी टाइट थी कि मेरे लिंग को बुरी तरह जकड़ रखा था। मैं उसकी योनि के इस मुलायम और मस्त घर्षण को सहन नहीं कर पाया और मेरे लिंग ने उसके अंदर अपना रस निकालना शुरू कर दिया। मेरी गर्म गर्म रस की पिचकारी सीधे उसके गर्भ द्वार पर जाकर टकरा रही थी। मेरे गर्म वीर्य की बौछार होते ही उसका शरीर फिर से अकड़ गया और उसने चिल्लाते हुए योनि रस बहाना शुरू कर दिया। उसके कुल्हे हवा में उठ गये और उसके हाथों ने मेरे कुल्हों को नीचे की तरफ दबा लिया। मेरा पूरा लिंग उसकी योनि में समाया हुआ अपने रस की बौछार कर रहा था और साथ में उसकी योनि अपना पानी बहा रही थी। उसकी योनि कभी मेरे लिंग पर सिकुडती और कभी ढीली हो जाती, मानों मेरे लिंग में से एक-एक बूंद निचोड रही हो। उसकी योनि की इस हरकत ने मेरे लिंग को मैदान नहीं छोड़ने दिया और मेरा लिंग तुरंत ही फिर से तैयार हो गया। मैंने फिर से धक्के लगाने शुरू कर दिये। हमारे रस के कारण पच-पच की आवाजें आ रही थीं। उसकी सिकुडती और खुलती योनि के कारण मेरे लिंग पर बहुत ज्यादा घर्षण हो रहा था, जिससे बहुत ही मजा आ रहा था। थोउ़ी ही देर में उसने भी नीचे से अपने कुल्हों को उछालना शुरू कर दिया और जोर जोर से सिसकारियां निकालने लगी।
आहहहहहह ओर जोर ससससससससससससे बहुत मजा आ रहा हहहहहहहहहहहै, अगर पहले पता होततततततततततता किक इततततनाााा ममममजजजजजजजजा आययययययययेगगगगगा तततततततो नननननननाश्श्श्श्श्श्श्श्श्ता बबबबबबबबनननननननााययययययययययययया थ्थ्थ्थ्थ्थ्थ्थ्था उसससससससी दिन चुददददददददददददददववववववववववा लललललेतती, ओहहहहहहहहह माइइइइइइइइइ गोडडडडडडडड औररररररररररर जोरररररर से
वो अपने कुल्हों को पूरी तेजी के साथ उपर की तरफ उछाल रही थी। जैसे मैं अपने लिंग को बाहर की तरफ खिंचता वो नीचे से अपने कुल्हों को उछाल देती और मेरे धक्के के साथ ही उसके कुल्हे वापिस बेड पर पहुंच जाते, और मेरा लिंग सीधे उसके गर्भाश्य से जाकर टकरा जाता।
ओहहहहहहहहह मैं गइइइइइइइइइइइइइई और उसके हाथ मेरी कमर पर इतनी बुरी तरह कस गये कि मुझे सांस लेने में भी प्रॉब्लम होने लगी। उसकी चूचियां मेरे सीने में दबकर बुरी तरह से पिचक गई थी।
उसकी योनि ने तीसरी बार पानी बहाना शुरू कर दिया। उसके गर्म पानी को महसूस करके मैंने भी तेज धक्के लगाने शुरू कर दिये और मेरे लिंग ने भी उसकी योनि में रस की बौछार कर दी। मेरे रस की बौछार होते ही उसने मुझे और कस के भींच लिया, ऐसा लग रहा था कि मुझे ऐसे भींच कर ही मार देगी। थोड़ी देर में उसकी पकड़ कमजोर होेन लगी और वो हांफने लगी। मैं भी उसके उपर लेटे लेटे हांफ रहा था। थोड़ी देर में मेरा लिंग छोटा होकर उसकी योनि से निकल आया और हमारा मिक्स जूस बाहर निकलकर चददर को भिगोने लगा।
मैं बहुत ज्यादा थक गया था इसलिए हिलने का भी मन नहीं कर रहा था। मैं ऐसे ही अपनी आंखें बंद करके उसके उपर लेटा रहा। वो भी अपनी आंखें बंद करके अपनी सांसों को नॉर्मल करने की चेष्टा कर रही थी। उसके हाथ अभी भी मेरी कमर में ही थे, जिनसे वो हलके हलके मेरी कमर को सहला रही थी। ऐसे ही लेटे लेटे पता नहीं कब नींद आ गई।
मुझे मेरे कुल्हों पर हरकत महसूस हुई तो मेरी नींद खुली। मैं आंखें बंद किए किए ही समझने की कोशिश करने लगा कि पूनम के हाथ हैं या सोनल के। पर पूनम के हाथ तो मेरी कमर में थे। मैंने अपनी आंखें खोली और पूनम के चेहरे की तरफ देखा। बहुत ही प्यारा लग रहा था। वो चैन की नींद सो रही थी। उसके चेहरे पर अलग ही चमक और शांति झलक रही थी। सोते हुए भी उसके हाथ मेरी कमर पर ही कसे हुए थे, जैसे उसे डर हो कि मैं कहीं भाग ना जाउं।
फिर मैंने सोनल की तरफ देखा। वो पूरी नंगी हो चुकी थी। उसके शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था। मुझे उठा हुआ देखकर वो मुस्कराई।
सोनल: खुद खुद मजे करके सो गये, मैं यहां पर तड़प रही हूं। अपनी उंगली से ही शांत होने की कोशिश की पर और ज्यादा आग लग गई।
मैंने अपनी आंखों के इशारे से पूनम के हाथों की तरफ इशारा किया। सोनल समझ गई और हलके से पूनम के हाथ मेरी कमर में से हटाकर आराम से बेड पर रख दिये।
मैं पूनम के उपर से उठा। उसकी योनि के उपर हमारा मिक्स रस जम सा गया था। मेरे लिंग पर भी सफेद सफेद पपड़ी सी जम गई थी।
मैं उठकर बाथरूम में गया और शॉवर ऑन करके नहाने लगा। सोनल भी मेरे पिछे पिछे बाथरूम में आ गई और बेल की तरह मुझसे लिपट गई।
सोनल मेरे पीछे आकर मुझसे लिपट गई और अपना एक हाथ मेरे पेट पर रख कर सहलाने लगी और दूसरे हाथ में मेरे लिंग को पकड़ लिया और मसलने लगी। उसकी नंगी चूचियां मेरी कमर में चुभ रही थी। उसके होंठ मेरी गर्दन और कंधों पर किस कर रहे थे। मैंने अपने हाथ पीछे करके उसके कुल्हों को पकड लिया और मसलने लगा। उसके मुंह से आहें निकलने लगी।
शॉवर का ठंडा पानी हमारे गर्म शरीर पर गिरकर आग में घी का काम कर रहा था। मैं बुरी तरह से उसके कुल्हों को मसलने लगा। उसने भी मेरे लिंग को कसकर पकड़ लिया और स्पीड से अपना हाथ चलाने लगी। मैंने अपनी गर्दन को पिछे की तरफ घुमाया और उसके होठों पर अपने होंठ रख दिये। मेरे होंठ मिलते ही सोनल उन पर टूट पड़ी और चूसने व काटने लगी। पहले से ही तान्या ने मेरे होठों को काट रखा था इसलिए मुझे दर्द होने लगा। मैंने अपने होंठ उससे अलग किए।
मैं: प्लीज! दांत मत लगाओ, बहुत दर्द हो रहा है।
मेरी बात सुनते ही सोनल ने मेरे होठों पर अपनी उंगली फिराई और फिर से अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिये और बहुत ही आराम से अपने होंठों के बीच में लेकर चूसने लगी। उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी। मैंने उसकी जीभ को चूसना शुरू कर दिया।
मैं घूम कर सीधा हो गया। मेरे सीधे होने से मेरा लिंग उसकी योनि पर जाकर सैट हो गया। मैंने अपने हाथों में उसके कुल्हों को पकड़ा और उसको थोडा सा उपर उठाकर वापिस नीचे कर दिया। मेरा लिंग सीधा उसकी योनि में घुस गया। उसके मुंह से आह निकली और वो अपने कुल्हों को आगे पिछे करके मुझे चोदने लगी। मैं भी अपने हाथों से उसके कुल्हों को दबाकर उसकी मदद कर रहा था। मैंने निप्पल पर अपने होंठ टिकाये और चुभलाने लगा और उसके उभारों पर अपनी जीभ फिराने लगी।
सोनल अपने कुल्हों को जोर जोर से आगे पिछे करने लगी, और उसका शरीर अकड़ने लगा। उसके मुंह से लगातार सिसकारियां निकल रही थी।
आहहहहहहहहहहहहहहहह पूराा अंदर डाल दो, क्या कर रहे हो,,,,, और जोर जोर से अपने कुल्हों को हिलाने लगी। मेरा लिंग पूरा उसके अंदर जाकर वापिस आ रहा था।
ओहहहहहहहहहहहहहहहहह आहहहहहहहहहहहहहहहहहसीदइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइ समीरररररररररररर प्लीजजजजजजजजजजजज आहहहहहहहहहहहहहहहहह ओहहहहहहहहहह मैं गईइइइइइइइइइइइइइइइइइइइ
और उसका शरीर अकड़ कर मेरे साथ चिपक गया, उसकी योनि ने अपना पानी बहाना शुरू कर दिया। उसका गर्म गर्म लावा मुझे अपने लिंग पर महसूस हो रहा था। उसके गर्म लावा को महसूस करके मेरे लिंग ने उसकी योनि के अंदर ही झटके लेने शुरू कर दिये।
झडने के बाद सोनल निढाल होकर मेरी बाहों में झुल सी गई। और अपने हाथ मेरी कमर में कसकर लपेट दिये। उसने अपना चेहरा मेरी छाती में रख दिया और गहरी सांसे लेने लगी। मैंने शॉवर को बंद किया और उसे अपनी गोद में उठाकर बाथरूम से बाहर आ गया।
मैंने एक हाथ से बेड पर तौलिया बिछाया और सोनल को उसके उपर लेटा दिया। सोनल ने आंखे खोलकर प्यार से मेरी तरफ देखा और फिर अपनी आंखें बंद कर ली। सोनल का गोरा बदन पानी में भिगा हुआ कयामत ढा रहा था। मैंने खुद को पौंछा और बेड पर चढकर सोनल के उपर लेट गया। उसके गीले बदन का स्पर्श मेरे शरीर में सिहरन पैदा कर रहा था। मैं बैठ गया और अपने हाथ उसकी टांगो के पिछे ले गया और उसकी टांगों को उठाकर अपने कंधों पर रख दिया।
मेरा लिंग उसके गुदा द्वार पर जाकर टकराया जिससे सोनल के मुंह से जोर की सिसकारी निकली। मैं वैसे ही बैठा हुआ अपने लिंग को आगे पिछे करने लगा। मेरा लिंग उसके गुदा द्वार पर टक्कर मार रहा था।
सोनल के मुंह से मादक सिसकारियां निकल रही थी। उसने अपने हाथ अपने उभारों पर रखे और उन्हें बुरी तरह मसलने लगी। मैंने अपने लिंग को उसके गुदा द्वार पर रखकर थोडा सा अंदर की तरफ धक्का मारा। सोनल सिहर गई और मेरा लिंग उसके द्वार पर दबाव डालने लगा।
मैं उठा और बाथरूम में जाकर अपने पूरे लिंग पर तेल लगाकर थोडा सा तेल अपने हाथ में लेकर वापिस आ गया। सोनल मुझे देख रही थी और अपनी आंखों से ना का इशारा कर रही थी।
मैंने बेड पर आकर सोनल को उलटा होने को कहा, वो मना करने लगी। मैंने अपने तेल वाला हाथ सीधा उसके कुल्हों की दरार में ले गया और उसके पीछे वाले छेद पर तेल मसल दिया। सोनल कसमसा उठी। उसके शरीर में आनंद की लहरें उठने लगी। अच्छी तरह से तेल मसलने के बाद मैंने उसकी कमर को पकड़ा और उसके पेट कर बल लेटा दिया।
सोनल धीमी धीमी आवाज में कह रही थी ‘प्लीज पिछे नहीं, बहुत दर्द होगा’। पर मैंने उसकी बातों पर धयान नहीं दिया और अपना लिंग उसके कुल्हों और जांघों के बीच में सैट करके उसके उपर लेट गया। मेरा लिंग उसके छेद पर दस्तक दे रहा था। मैंने अपने कुल्हों को थोड़ा सा उपर उठाया और उसके छेद पर हल्का सा दबाव डाला। सोनल ने तकिया उठाकर अपने मुंह के नीचे रख लिया और बेड की चद्दर को जोरों से अपनी मुठठी में भींच लिया। मैं उसके छेद पर अपना लिंग रगड़ने लगा। उसकी सिसकारियां तकियें में घुट रही थी। मैं उसी तरह अपने लिंग को उसके छेद पर रगड़ता रहा। तभी अचानक सोनल ने अपने कुल्हों को उपर उठा दिया और दबाव के कारण मेरा सुपाडा उसके छेद में घुस गया। पर अगले ही पल सोनल को अपनी गलती का अहसास हो गया। दर्द के मारे उसका शरीर अकड़ गया और उसने चददर को और भी जोर से कस के पकड़ लिया।

मैंने अपने लिंग पर थोडा थोड़ा जोर देना शुरू कर दिया। सोनल ने अपने कुल्हों को वापिस नीचे कर लिया जिससे मेरा सुपाड़ा उसके गुदा द्वार से बाहर आ गया। सोनल ने सीधा होने की कोशिश की, पर मैंने उसको कसकर पकड़ लिया और उलटा ही लेटाये रखा और फिर से अपना लिंग उसके द्वार पर सैट किया और एक हल्का धक्का मारा, जिससे मेरा सुपाड़ा फिर से उसके छेद में घुस गया। सोनल ने अपना मुंह तकिये में दबा लिया और अपने दोनों हाथों से तकिये को दोनों साइड से पकड़ लिया। मैंने थोड़ा सा पिछे होके एक जोर का धक्का मारा और मेरा आधा से ज्यादा लिंग उसकी गुदा में समा गया। सोनल के मुंह से जोर की चीख निकली जो तकिये में घुट गई। मैं कुछ देर ऐसे ही रहा। जब सोनल को थोडा आराम पहुंचा तो मैंने अपने लिंग को फिर से थोडा सा बाहर खींचा और एक और जोर का धक्का मारा। मेरा पूरा लिंग उसके अंदर समा गया और मैं उसके उपर लेट गया। उसके कुल्हें एक दम गदेदार थे। मेरे लेटने से वो पिचक गये। सोनल ने तकिये को इतना कसके पकड़ा हुआ था कि उसके नाखून तकिये में घुस गये थे और तकिया फट गया था। मैं कुछ देर ऐसे ही उसके उपर लेटा रहा। थोड़ी देर में तकिये पर से सोनल की पकड़ कुछ कम हो गई और वो गहरी सांसे लेने लगी। मैंने अपने कुल्हों को उठाकर लिंग को थोडा सा बाहर निकाला और फिर आराम से अंदर डाल दिया। सोनल के मुंह से फिर से दर्द भरी सिसकारी निकली। मैं धीरे धीरे हल्के हल्के धक्के लगाने लगा। अब सोनल को मजा आने लगा था वो अपने कुल्हों को उछाल कर लिंग को अंदर लेने की कोशिश करने लगी।
उसे मजा लेते देख मैंने भी अपने धक्कों की स्पीड बढा दी और तेज तेज धक्के मारने लगा। मेरा लिंग बुरी तरह से जकड़ा हुआ था उसकी गांड द्वारा। बहुत ही टाइट अंदर जा रहा था। मैं इतना ज्यादा घर्षण सहन नहीं कर सका और जल्दी ही उसकी गांड में अपना सारा रस निकाल दिया। मेरा रस अपनी गांड में महसूस करते ही सोनल का शरीर भी अकड़ गया और उसकी योनि ने भी पानी बहाना शुरू कर दिया। मेरे साथ ही उसका शरीर भी अकड़ गया और जल्दी ही हम शांत हो गये और गहरी सांसे लेने लगे। मेरे लिंग छोटा होकर बाहर निकल गया। मैं अभी भी उसके उपर लेटा हुआ था और सांसों को नॉर्मल करने की कोशिश कर रहा था।
सोनल थोडा कसमसाई तो मैं उसके उपर से उतरकर साइड में लेट गया। सोनल ने मेरी तरफ करवट ली और मेरी छाती में मुक्के मारने लगी।
सोनल: तुम बहुत जालिम हो, मेरे दर्द की थोड़ी सी भी परवाह नहीं की।
मैं: अरे मेरी जान! दर्द में ही तो असली मजा है, क्यों है ना।
सोनल शरमा गई और अपना चेहरा मेरी छाती में छुपा लिया। मैं उसके बालों में हाथ फिराने लगा और ऐसे ही कब हमें नींद आ गई पता ही चला।

टननननननननननननननननननननननननननननननननननननननननननननननननननननननननननननन
‘उं हूं’ मैं उंघते हुए उठा और अलार्म की तरफ हाथ बढ़ाया, पर मेरा हाथ लगकर अलार्म नीचे गिर गया।
मैं आंखों को मसलते हुए उठने लगा तो मेरे उपर पड़े हाथों की वजह से उठ नहीं पाया। अलार्म की आवाज सुनकर पूनम की आंख खुल गई।
मैंने आंखें खोलते हुए चारों तरफ का जायजा लिया। सोनल मुझसे आगे से चिपक कर सो रही थी और पिछे से पूनम मुझसे चिपकी हुई थी। पूनम का एक हाथ मेरे पेट पर था। उसका हाथ इस प्रकार रखा हुआ था कि उसकी कोहनी तो मेरे पेट पर थी और उसके हाथ का पंजा मेरी छाती पर था। उसके हाथ के ठीक नीचे सोनल का हाथ मेरे लिंग को छूता हुआ रखा हुआ था। दोनों का एक एक पैर मेरी जांघों पर था। पूनम का सिर मेरे हाथ पर कंघे के पास था और सोनल ने मेरे दूसरे हाथ को तकिया बना रखा था।
सोनल (नींद में बड़बड़ाते हुए): हूंहहहहहहूं, इस अलार्म को बंद करो ना जानूं।
पूनम ने अपने गाल मेरी छाती पर रख दिये और मेरे पेट को अपने हाथों से सहलाने लगी।
जब अलार्म बंद नहीं हुआ तो सोनल ने धीरे से आंख खोली।
सोनल: उंहहहहहहहहहहहहहहह, क्या टाइम हो गया।
मैं: पांच गये स्वीटू।
मेरी बात सुनते ही दोनों हसीनाओं एकदम उठकर बैड पर खड़ी हो गई।
क्रमशः.....................
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06-09-2018, 02:14 PM,
#24
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--24
गतांक से आगे ...........
पूनम: मर गई आज तो, मम्मी उठ गई होंगी, और सबसे पहले मुझे ही उठाने आती हैं, और मैं रूम में मिलूंगी नहीं, तो आज तो मेरी बैंड बज जायेगी।
मैं: कुछ नहीं होगा, कह देना उपर टहलने चली गई थी।
दोनों ने जल्दी जल्दी अपने कपड़े पहने और बाहर की तरफ भाग ली।

सोनल ने जैसे ही बेड से नीचे पैर रखा वो लड़खड़ा कर वापिस बेड पर बैठ गई।
आहहहहहहहह------------ कमीने,,,,, क्या हालत कर दी, चला भी नहीं जा रहा। सोनल की आंखों में आंसू आ गये थे।
सोनल की दर्द भरी आह सुनकर पूनम ने पीछे मुड़कर देखा और उसकी आंखों में आंसू देखकर वापिस हमारे पास आई।
मैं उठ कर बैठ गया और सोनल के गालों को सहलाने लगा।
मैं: ओह बेबी, बस कुछ देर होगा, फिर ठीक हो जायेगा। तुम आराम आराम से नीचे जाओ, ताकि आंटी को शक ना हो, मैं जाकर पेन किलर लेकर आता हूं।
मैंने अपने कपड़े पहने और मैंने सहारा देकर सोनल को उठाया।
तान्या ने आंखों के इशारे से मुझसे पूछा कि क्या हुआ, तो मैंने बात में बताने के लिए कहा।
दूसरी साइड से पूनम ने सोनल को पकड़ लिया और हम बाहर आ गये।
हर रोज की तरह आज भी छतों पर कोई नहीं था, गली में इक्के-दुक्के अंकल आंटी पार्क में टहलने के लिए जा रहे थे। हमने थोडी देर सोनल को छूत पर घुमाया, जब वो चलने में थोडी आसानी महसूस करने लगी तो मैंने उसके नीचे जाने के लिए कहा। पर जैसे ही वो सीढ़ियों में उतरने के लिए पैर नीचे किया, उसके शरीर में दर्द की लहर उठी और वो वहीं पर बैठने लगी। मैंने उसे पकड़ा और गोद में उठाकर वापिस बेड पर लाकर लेटा दिया।
मैं अभी आया, कहकर मैं बाहर निकल गया, और जल्दी से जाकर पेन किलर लेकर आया। आंटी शायद अभी नहीं उठी थी।
उपर आकर मैंने सोनल को पैन किलर दी। पूनम वहां पर नहीं थी।
पेन किलर देकर मैंने सोनल को आराम करने को कहा, और खुद बाहर आकर आंटी पर नजर रखने लगा, कि जैसे ही आंटी जागेगी, सोनल को बाहर बुला लूंगा, ताकि आंटी को लगे कि सोनल जल्दी उठकर छत पर टहलने चली गई होगी।
थोडी देर में पूनम भी छत पर आ गई और मुझे छत पर खड़ा देखकर मेरे पास आ गई।
पूनम: क्या हुआ, वो चल क्यों नहीं पा रही है?
मैं (हंसकर उसकी आंखों में देखा): क्यों तुम्हें दर्द नहीं हो रहा?
पूनम: हो तो रहा है, पर इतना ज्यादा तो नहीं हो रहा, बस थेाडा थोडा हो रहा है। और मेरा तो पहली बार था, पर वो तो हर रोज करती है तुम्हारे साथ, फिर भी।
मैं मुस्कराया और उसकी तरफ आंख मारकर बोला।
मैं: आज उसका पिछे का उदघाटन हुआ है?
मेरी बात सुनकर पूनम के चेहरे पर मुस्कान तैर गई और उसने चारों तरफ देखा और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये और एक जोरदार किस करके, बायें बोलते हुए वापिस अपनी छत पर चली गई।
नीचे से दरवाजा खुलने की आवाज आई, मतलब आंटी उठ गई थी। मैं अंदर गया और एक चेयर बाहर लाकर रख दी और फिर सोनल को सहारा देकर बाहर ले आया और चेयर पर बैठा दिया।
सोनल चेयर पर बैठ गई। पूनम की आवाज सुनकर उसने पिछे देखा।
पूनम (हंसते हुए): आज तो पूरे मजे ले लिए जानी ने।
सोनल: हंस ले, हंस ले, तेरा नम्बर आयेगा तब देखूंगी हंसती है या रोती है।
पूनम: मैं उलटे-सीधे काम नहीं करती, बस मतलब की चीजों से मतलब रखती हूं।
सोनल: हां, देखती जा, सब पता चल जायेगा।
तभी नीचे से आंटी की आवाज आई, सोनल बेटा।
सोनल उठकर मुंडेर के पास गई।
सोनल: मम्मी मैं, उपर हूं।
आंटी: बेटा, मैं पार्क में जा रही हूं, थोड़ा धयान रखना।
सोनल (मुस्कराते हुए): ठीक है मम्मी, आप जाओ, मैं देख लूंगी।
आंटी पार्क के लिए निकल गई।
सोनल वापिस मुडी और मेरे गले में अपनी बांहें डाल दी।

सोनल: अब मुझे गोद में उठाओं और अंदर ले चलो।
जो हुकुम मेरे आका कहकर मैंने सोनल को गोद में उठाया और अंदर ले आया, और बेड पर लेटा दिया। पूनम नीचे चली गई थी।
मैं भी बेड पर बैठ गया और सोनल की तरफ देखकर मुस्कराने लगा।
सोनल ने मेरे कंधे पर एक मुक्का मारा।
सोनल: हंस क्या रहे हो, कभी तुम्हारे पिछे डालूंगी डिल्डो, तब पता चलेगा।
मैं: अच्छा तो तुम्हारे पास डिल्डो भी है।
सोनल: ओर नहीं तो क्या आपके ही लंड है।
मैं: कहां से लाई?
सोनल: दीदी लेकर आई थी, जब इंडिया आई थी।
मैं: ओह, तो ये बात है, हसीनाओं को डिल्डो का चस्का लगा हुआ है, अरे यार डिल्डो को ही यूज करोगी तो हमारे लंड तो बेचारी ऐसे ही सूख जायेंगे।
सोनल: तो सूखने दो, जिनको हमारी थोड़ी सी भी परवाह नहीं, उनकी यही सजा है, चलने लायक भी नहीं छोड़ा।
मैंने सोनल के माथे पर किस की और किचन में आ गया, चाय बनाने के लिए।
चाय बनाकर मैंने दो कप में डाली और एक सोनल को दी और एक खुद पीने लगा। पेन किलर ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था, उसका दर्द कम हो रहा था।

चाय पीकर सोनल नीचे चली गई। 6 बज गये थे तो मैं ऑफिस के लिए तैयारी करने लगा। मैं नाश्ता तैयार करके नहाकर तैयार हो गया। जब तक मैंने नाश्ता किया तो साढ़े आठ बज चुके थे।
मैं मुंडरे के पास आकर खड़ा हो गया। मैंने देखा कि सोनल तैयार होकर स्कूटी पर कहीं जा रही है, शायद कॉलेज के लिए निकली होगी।
मैं भी नीचे आया और बाईक स्टार्ट करने लगा। पर बाईक नहीं हुई। मैंने तीन-चार कोशिश की पर नहीं स्टार्ट हुई। फिर मैंने तेल चैक किया तो टंकी तो खाली थी।
ओह शिट यार, ये भी अभी खत्म होना था। मैंने बाइक को वहीं खड़ा किया और बस पकड़ने के लिए निकल पड़ा।
सत्कार पर आकर मैं सिटी बस का वेट करने लगा, करीब दस मिनट बाद बस आई। मैं बस में चढ़ गया। सुबह का टाइम था तो बस में बहुत ही ज्यादा भीड़ थी। मैं भी घुसते घुसते बीच में जाकर खड़ा हो गया।
मेरे आगे एक लड़की खड़ी थी, बस में भीड़ बहुत ज्यादा था इसलिए मेरे और उसके बीच में बिल्कुल गैप नहीं था, मैं बिल्कुल उससे सटकर खड़ा था। उस लड़की ने पजामी (वो टाइट वाली नहीं, ढीली वाली, जो कुल्हों पर तो एकदम टाइम होती है और पूरी शेप दिखाती है पर कुल्हों से नीचे ढीली होती है) और कुर्ती पहन रखी थी। मेरा लिंग उसके कुल्हों की दरार के बीच में सैट हो गया था। उसकी शरीर की गर्मी पाकर मेरे लिंग ने अंगडाई लेनी शुरू कर दी। मैं परेशान हो गया। क्योंकि हम बिल्कुल सटकर खड़े थे और मेरे पप्पू के खड़े हो जाने पर उसे पता चलना ही था। पर अब हो भी क्या सकता था। मैंने अपना हाथ नीचे लेजाकर अपने लिंग को एडजस्ट करने की कोशिश की पर इतनी भीड़ में कहां, और उपर से इस बात की भी डर की कहीं मेरा हाथ उसके कुल्हों से टच न हो जाये।
मेरे हाथ लगाने से पप्पू और भी ज्यादा हुडदंग मचाने लगा और एकदम तन गया। अब मेरा लिंग बिल्कुल उसके कुल्हों के बीच में सैट हो गया।
तभी बस के ब्रेक लगे और वो लड़की थोउ़ी आगे होकर फिर से पिछे को आई तो मेरा लिंग उसके कुल्हों के बीच में जाकर सैट हो गया। शायद उसे महसूस हो गया था।
उसने मेरी तरफ घूर कर देखा। मैंने उसकी तरफ देखा, बहुत ही खूबसूरत आंखे थी। चेहरे पर तो उसने कपड़ा बांधा हुआ था, केवल आंखें ही देख पाया।
मैं: सॉरी, बहुत ज्यादा भीड़ है, माफ कीजियेगा।
वो लड़की मुस्कराई और ‘इट्स ओके’ कहा।
मैं थोड़ा सा पिछे हो गया, पर पिछे वाले ने थोड़ा सा मुझे आगे की तरफ धक्का दे दिया और मेरा लिंग फिर से उसके कुल्हों के बीच में जाकर सैट हो गया।
तभी मुझे महसूस हुआ कि वो लड़की अपने कुल्हों को मेरे लिंग पर रगड़ रही है। मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा, पर कुछ एक्सप्रेशन तो जब दिखें ना तब चेहरा दिखे।
मैं आराम से खड़ा हो गया, और अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया। मुझे उसके कुल्हें साफ महसूस हो रहे थे। उसकी पजामी का कपड़ा काफी पतला था।
मैंने भी उसके कुल्हों पर अपना लिंग रगड़ना शुरू कर दिया। अब मैं उसके कुल्हों पर हल्के हल्के धक्के लगा रहा था। वो भी पूरा साथ दे रही थी और बार बार अपने कुल्हों को आगे करके फिर से पिछे ला रही थी। मैं पहली बार सिटी बस में सफर कर रहा था तो मुझे इन सबका कोई एक्सपीरियंस नहीं था। इतना मजा आ रहा था कि मेरे मन में हर रोज ही बस से आने जाने का ख्याल आने लगा।
तभी बस ने ब्रेक लगाये और ओ-टी-सी- पर बस में से काफी सवारी उतर गई। हमारे सामने वाली सीट पर जो आंटी बैठी थी वो भी उतर गई, पर वो लड़की बैठी नहीं और वैसे ही खड़ी रही। उस खाली सीट पर एक दूसरी लड़की बैठ गई। जितनी सवारी उतरी थी उससे आधी बस में और चढ गई। अब बस में ज्यादा भीड तो नहीं थी, पर फिर भी चिपक कर खड़ा होने पर कोई कुछ कह नहीं सकता था, इतनी भीड़ तो थी ही।
उसके ना बैठने से मैं समझ गया कि ये पूरे मजे ले रही है और जैसे ही बस चली मैंने अपने हाथ नीचे लेजाकर उसके कुल्हों को मसलना शुरू कर दिया। मैंने अपनी ठोडी उसके कंधे पर रख दी।
मैं: मुझे तो पता नहीं था कि बस में इतने मजे आते हैं, नहीं तो डेली बस से ही सफर करता।
उसने मेरी तरफ चेहरा करने की कोशिश की तो मेरे होंठ कपडे के उपर से उसके गालों से टकरा गये। उसने अपने चेहरे को वैसे ही रखा और अपने कुल्हों को मेरे लिंग पर रगड़ने लगी। हमारे सामने जो लड़की बैठी थी वो हमें घूर घूर कर देख रही थी, उसने भी अपने चेहरे पर कपड़ा बांधा हुआ था (जिसने भी ये चेहरे पर कपड़ा बांधने का चलन चलाया, उसपर बहुत गुस्सा आता है)। मैंने उस लड़की को आंख मार दी। उसने मेरी तरफ आंखें निकाली और फिर दूसरी तरफ देखने लगी। मैं अपना एक हाथ आगे की तरफ ले गया और उसकी जांघों को भिंचने लगा। वो अपने गालों को मेरे हाेंठों पर रगड़ने लगी। तभी कंडेक्टर ने बापू नगर की आवाज लगाई और मैं उस लड़की को बायें बोलकर नीचे उतर आया। मेरी हैरानी का ठिकाना न रहा जब मैंने देखा कि वो भी मेरे पीछे पीछे नीचे उतर गई। मैंने उसकी तरफ देखा, वो मुझे ही घूर घूर कर देख रही थी और मुझे ऐसा लग रहा था कि वो मुस्करा रही थी।
मैं मुडकर चलने लगा तो उसने मुझे पिछे से आवाज लगाई, ‘समीर’।
मैं अपना नाम सुनकर चौंक गया और उसकी तरफ देखा। इसको मेरा नाम कैसे पता चला।
वो मेरे पास आई, और मेरी तरफ अपना हाथ बढ़ा दिया और हाय कहा।
मैंने उससे हाय कहा।
मैं: सॉरी, पर आपको मेरा नाम कैसे पता चला।
लड़की: तुमने मुझे पहचाना नहीं?
मैं: अब मुंह पर तो ऐसे कपड़ा बांध रखा है जैसे पता नहीं कहां मुंह काला करवाकर आई हो और कपड़ा बांधकर छिपाने की कोशिश कर ही हो, तो पहचानूंगा कैसे।
वो मेरी बात सुनकर थोडा सा नाराज हो गई और उसने कपड़ा खोल दिया।
उसे देखकर मेरा मुंह खुला का खुला रह गया।

तुम, तभी तो मैं सोचूं कि ये लड़की इतनी बेशर्म कैसे है, जो किसी अनजान के साथ ऐसे मजे ले रही है, मैंने उसे देखते हुए कहा।
वो खड़ी खड़ी मुस्करा रही थी।
मैं: तुम्हारे पास तो स्कूटी पर, फिर बस में।
निशा: वो मम्मी को कहीं जाना था तो, इसलिए स्कूटी नहीं लाई।
मैं: इधर क्या काम है?
निशा (मुस्कराते हुए): कुछ भी नहीं, मैं तो कॉलेज जा रही थी, आप उतरे तो सोचा आपको थोडा सरप्राइज दे दूं।
तभी दूसरी बस आ गई। निशा ने मेरे गालों पर एक पप्पी दी और बायें कहते हुए बस में बैठ गई।
मैं बॉस के घर पर आकर ऑफिस में आ गया।
मैं अभी ऑफिस में घुस ही रहा था कि अपूर्वा अंदर आती हुई दिखाई दी। मैं बाहर ही खड़ा हो गया। अपूर्वा ने अपनी स्कूटी खड़ी की और इधर-उधर नजर दौडाई और ऑफिस की तरफ चल दी।
मैं: हाय! आज तो लगता है किसी की जान ही लेकर रहोगी।
अपूर्वा: क्यों, ऐसे क्यों कह रहे हो?
मैं: बस, तुम लग ही इतनी ब्यूटीफुल रही हो कि किसी को तो हर्ट अटैक आयेगा ही आज।
अपूर्वा ने सफेद चुडीदार सलवार और हल्के गुलाबी रंग की कुर्ती पहनी हुई थी। कुर्ती उसकी जांघों से थोड़ी सी नीचे तक थी और उसकी जांघों से चिपकी हुई थी और उसकी मांसल जांघें की शेप उजागर हो रही थी।
हाय, अपूर्वा ने अपना हाथ मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा।
क्रमशः.....................
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Reply
06-09-2018, 02:14 PM,
#25
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--25
गतांक से आगे ...........
मैंने भी उसे हाय कहा और उसका हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया। वो सीधी मेरे सीधे से आकर चिपक गई। मैंने अपने हाथ उसकी कमर में डाले और उसको अपने शरीर के साथ चिपका लिया। अपूर्वा ने एक आह ली और अपने हाथ मेरी कमर में कस दिये और अपना चेहरा मेरे कंधे पर रख दिया।
अपूर्वा बार बार अपने हाथों को थोडा सा कस रही थी। उसकी गोलाइयां मेरे छाती में दब गई थी। तभी मुझे पहले कमरे का दरवाजा खुलने की आवाज आई तो हम अलग हो गये।
मैं: और कैसा रहा तुम्हारा टूर।
अपूर्वा: अच्छा था, बहुत मजा आया, मेरे मामा की लड़कियां भी आई हुई थी और बुआ के बच्चे भी आये हुए थे, काफी दिनों बाद सभी से मिली थी, बहुत ही अच्छा लगा। आप बताओ, आपके दिन कैसे बीतें, अकेले बोर हो गये होंगे ऑफिस में।
मैं: और क्या, यहां पर अकेला बैठा बैठा बोर होता रहा, और क्या करता? अब तुम तो मजे ले रही थी अपनी मौसी के घर पर।
गुड मॉर्निंग, बॉस ने हमारी तरफ आते हुए कहा।
गुड मॉर्निंग बॉस, हम दोनों ने एक साथ कहा।
हम अंदर ऑफिस में आ गये और अपने सिस्टम ऑन कर दिये। अपूर्वा अपनी चेयर पर बैठ गई।
बॉस: समीर वो तुम मैडम के साथ चले जाओ, उनकी सिस्टर आई हुई है, कल हम यहां पर थे नहीं तो वो अभी होटल में रूकी है। इधर जयपुर में पहली बार ही आई है, मैडम के मामा की बेटी है। तो तुम मैडम के साथ जाकर उन्हें ले आओ। मुझे अभी बैंक जाना है। गाड़ी ले जाना।
मैं: ठीक है बॉस।
बॉस: मैं अभी निकल रहा हूं, मैडम तैयार हो रही है, तुम चले जाना।
बॉस (अपूर्वा की तरफ घूमते हुए): और तुम्हारा वो काम पूरा हो गया अपूर्वा या बचा है?
अपूर्वा: बॉस अभी तो काफी बचा है, वो अगले दिन ही तो मैं चली गई थी, पर आप टेंशन मत लो, जल्दी ही पूरा हो जायेगा।
बॉस: गुड! दो चार दिन में ऑफिस भी खुल जायेगा, फिर उधर ही शिफ्रट हो जायेंगे।
और बॉस बाहर चले गये। मेरा सिस्टम चालू हो गया था, काम शुरू करने का तो कोई फायदा था नहीं, इसलिए मैंने फेसबुक खोल ली और न्यूजफीड देखने लग गया।
20-25 मिनट में मैडम आई, उन्होंने साड़ी पहनी हुई थी जिसमें वो बहुत ही हॉट लग रही थी। ब्लाउज पिछे से बस थोड़ा सा था, जिससे उनकी लगभग पूरी कमर नंगी ही थी। आगे से उनकी क्लीवेज काफी दिख रही थी। और पेट पर हल्का सा पारदर्शी कपडा। कुल मिलाकर एकदम पटाका लग रही थी।
मैंने मैम को गुड मॉर्निंग कहा, अपूर्वा ने हमारी तरफ देखा और उसने भी मैम को गुड मॉर्निंग कहा।
मैम: गुड मॉर्निंग, समीर चलो, वो होटल तक चलना है एक बार।
मैं: जी मैम।
और मैं चेयर से उठ गया। मैम ने गाड़ी की चाबी मुझे दी और हम बाहर आ गये। मैं गाड़ी निकालने गैराज में आ गया और मैम बाहर गेट पर जाकर खड़ी हो गई। मैंने गाड़ी बाहर निकाली और मैम आगे की सीट पर बैठ गई। होटल जयपुर से बाहर 20 किलोमीटर के आस पास दूर था। थोड़ी ही देर में हम हाइवे 8 पर पहुंच गये। हाइवे पर आते ही मैम थोड़ा सा मेरी तरफ सरक गई और अपना हाथ सीधा मेरी जांघ पर रख दिया। मैंने मैम की तरफ देखा वो सीधे देख रही थी। मैंने वापिस सामने देखने लगा। मैम का हाथ लगते ही मेरा लिंग एकदम तन कर फुफकारने लगा। मैम ने अपना हाथ धीरे धीरे मेरी जांघों पर फिराना शुरू कर दिया। वो बहुत ही हल्के हल्के मेरी जांधाों को सहला रही थी। मैंने अपना एक हाथ उनके हाथ पर रख दिया और उनकी तरफ देखने लगा। मैम ने मेरी तरफ देखा और मुझे अपनी तरफ देखता पाकर मुस्करा दी और आंखों से सामने देखने का इशारा किया। मैं भी मुस्करा दिया और सामने देखने लगा। मैंने गाड़ी की स्पीड थोड़ी कम कर ली। होटल अब 5 मिनट की दूरी पर ही थी, पूरे रस्ते मैडम ऐसे ही मेरी जांघों पर अपना हाथ फिराती रही और कभी मेरे लिंग को अपनी मुठ्ठी में भरकर दबा देती।
मैम ने पर्स से अपना सैल निकाला और फोन मिलाया, घंटी गई, मैम ने स्पीकर ओन करके फोन डेस्कबोर्ड पर रख दिया। पांच-छः घंटी जाने के बाद दूसरी तरफ से फोन उठाया और एक प्यारी सी, स्वीट सी हैल्लो की आवाज कानों में घुल गई।
मैम: हैल्लो! हां कोमल, मैं बस पहुंचने वाली हूं, तुम तैयार हो ना।
कोमल: क्या, आप आ रही हो, अरे मेरी मां, मैं तो सोच रही थी कि आप शाम को आओगी, तो मैं तो आ गई जयपुर घूमने, यहां से जयपुर घुमाने के लिए टूर जा रहा था तो मैं भी आ गई।
मैम: ओह हो, तू भी ना किम्मी, अब मैं यहां तेरे इंतजार में बैठी रहूंगी।
कोमल: तो क्या हुआ दी, होटल में रोज-रोज थोड़े ही ठहरने को मिलता है, अच्छा सुनो अब आप आ गई हो तो मैं थोड़ी देर में यहां से निकलती हूं, तब तक आप मेरे रूम में वेट कर लेना।
मैम: हां, तेरे रूम में वेट कर लेना, जैसे मेरे को चाबी देकर गई है।
कोमल: तो काउन्टर पे ही तो है चाबी, वहीं से ले लेना।
मैम: हां, मैं जाकर चाबी मांगूगी और वो चुपचाप जी मैम जी मैम करके चाबी दे देंगे, आई बड़ी काउंटर की बच्ची। तू जल्दी आ जा, तब तक मैं दूसरा रूम लेती हूं।
कोमल: ओके मैं आधे-एक घंटे में निकल लूंगी यहां, से अब आप रूम ले ही रहीं हैं तो फिर कुछ देर तो रूकना ही चाहिए ना उसमें। मैं जल्दी आ जाउंगी तो ऐसे ही पैसे खराब जायेंगे।
मैम: ठीक है, पर तू ज्यादा देर मत करियो।
कोमल: ओके दी, (और उसने फोन काट दिया)।
मैम (मेरी तरफ देखते हुए): मेरे मामा की लड़की है, बहुत शैतान है, इलाहाबाद से है। अभी ग्रेजुएशन पूरी की है।
मैं: मतलब आपसे काफी छोटी है।
मैम: मुझसे तो पंद्रह साल छोटी है, अभी 19 की ही हुई है।
मैं: तो इसका मतलब आप अभी 34 की हुई हैं। पर बॉस तो चालीस से उपर के हैं।
मैम: हां वो तो 43 के हो जायेंगे इस साल। 9 साल बड़े हैं मुझसे। वो टाइम ही ऐसा था कि ये सब नहीं देखा जाता था शादी करते वक्त। और फिर यें तो सैटल थे, अच्छा कमाते थे तो पिताली ने शादी कर दी।
हम होटल पहुंच गये। मैम ने एक रूम बुक करवाया और हम रूम में आ गये। दरवाजे से अंदर होते ही मैम ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अंदर खींच लिया और मेरे बावलों की तरह मेरे गालों को चूमने लगी।
मैंने उन्हें खुद से दूर किया।
मैं: मैम! ये आप क्या कर ही हैं।
मैम ने फिर से मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरे बालों में हाथ फेरते हुए मेरे होंठों को चूसने लगी। मैं उन्हें तड़पाने के लिए उन्हें खुद से दूर हटाने की झूठी-मूठी कोशिश कर रहा था। मैम ने मेरे हाथों को पकड़ा और अपने कुल्हों पर सैट कर दिया और फिर से मेरे होंठों को चूसने लगी। मैम मुझे खींचते हुए बेड की तरफ ले जाने लगी। मैंने चलते चलते दरवाजे को हाथ मारा, पर वो पूरा बंद नहीं हुआ, हल्का सा खुला रह गया।
मैम मेरे होंठों को चूसते हुए मुझे बेड तक ले गई और मुझे धक्का देकर बेड पर गिरा दिया। वो खड़ी खडी मुझे खा जाने वाली नजरों से देख रही थी। मेरा पप्पू तो पहले ही मैदान में आ चुका था और अपीन जंजीरे खुलने की बाट जोह रहा था।
मैम ने अपना पल्लू नीचे गिरा दिया और पिछे हाथ करके अपने ब्लाउज का हुक खोलकर निकाल दिया। अब वो केवल ब्रा में खड़ी थी। मैम ने ब्लाउज को एक तरफ फेंक दिया। पुशअप ब्रा में कैद मैम के उभार कहर ढा रहे थे। मैं घूरकर मैम के उभारों को देख रहा था। मैम नीचे झुकी और मेरी बेल्ट को खोल दिया और जींस का हुक खोलकर घुटनों तक सरका दी। मेरा लिंग झटका खाकर बाहर आ गया और मैम को सलामी देने लगा।
मैम एकटक मेरे लिंग को देखती रही।
हाय,,,, कितना सोहना लंड है तेरा, और ये कहते हुए मैम ने अपने होंठों को मेरे लिंग के सुपाड़े पर टिका दिया। उन्होंने अपनी जीभ निकाली और मेरे लिंग से निकली प्रिकम की बूंदों को चाट गई। मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। मैं आराम से बेड पर लेटा था। फिर मैम ने अपनी ब्रा भी उतार दी और उनकी चूचियां झूलने लगी। उनकी तेज सांसों के साथ उनकी चूचियां भी उपर नीचे हो रही थी। शायद वासना के कारण उनकी चूचियां तन कर कड़ी हो गई थी, वो थोडी सी भी नहीं लटकी हुई थी।
फिर मैम ने मेरी शर्ट के बटन खोल दिये और साइड में गिरा दी। मैम मेरे उपर लेट गई और मेरे गालों और होंठों को चूमने लगी। मेरा लिंग उनके पेट पर हरकत कर रहा था, उनके उभार मेरी छाती पर दब गये थे, बिल्कुल नरम, परन्तु तने हुए। मैंने अपना हाथ उनकी कमर पर रख दिया और सहलाने लगा।
हाय, आज तो बस तू मुझे जन्नत की सैर करा दे, बहुत दिनों से तेरे ही सपने देख रही थी मैं, मैम ने मेरे गालों पर अपने दांत गड़ाते हुए कहा।
मैंने अपने हाथ साड़ी के अंदर डाल कर उसके कुल्हों को मसलने लगा। मैम मेरे होंठों को काटने लगी और अपनी चूचियों को मेरी छाती पर रगड़ने लगी। मैम अपना एक हाथ नीचे ले गई और हमारे बीच में डालकर मेरा लिंग पकड़ लिया।
क्या शानदार लंड है तेरा, और ये कहते हुए वो नीचे को सरक गई और मेरा पूरा लिंग एकदम से अपने मुंह में भर लिया। मेरा लिंग उनके गले में जाकर अटक गया। फिर मैम ने मेरे लिंग को बाहर निकाला और फिर से पूरा मुंह में गटक लिया। लिंग जैसे ही अंदर जाता मैम की जीभ उसके चारों तरफ घूमने लगती। वो इतने अच्छे तरीके से चूस रही थी और कुछ उनके मुंह की गर्मी, मुझे लग रहा था कि आज तो मैं दो मिनट भी मैदान में नहीं टिक पाउंगा।
फिर उन्होंने मेरे लिंग को पूरा मुंह के अंदर लिया और अंदर ही रखे हुए जीभ फिराने लगी। मैं तो मजे से पागल ही हुआ जा रहा था। मुझे खुद पर कंट्रोल करना बहुत ही मुश्किल हो गया था। मेरी कमर बार बार हवा में उठ रही थी और मेरे मुंह से आहह ओहहह की आवाजें निकल रही थी।
और फिर जिसका मुझे डर था वहीं हुआ, मैंने अपना रस मैम के मुंह में उडेलना शुरू कर दिया। जैसे ही मैम ने मेरे रस की बौछार अपने मुंह में महसूस की उन्होंने अपने होंठों को और भी जोर से मेरे लिंग पर कस दिया और सारा रस पीने लगी। आठ-दस पिचकारियां छोड़ने के बाद मैं शांत हो गया और बेड पर कमर रखकर तेज तेज सांसे लेने लगा। आज तक मुझे इतना मजा नहीं आया था जितना आज मैम ने मेरे लिंग को चूस कर दिया था। मेरा लिंग छोटा होना शुरू हो गया। पर मैम ने उसे मुंह से नहीं निकाला और चूसती रही, और इसका परिणाम यह हुआ कि मेरा लिंग फिर से अंगडाई लेने लगा। मेरे लिंग को फिर से मैदान में आते देखकर मैम की आंखों में चमक आ गई। वो खड़ी हुई और अपनी साड़ी उतार कर एक साइड में रख दी।
मैं देखकर हैरान रह गया कि उन्होंने नीचे पेटीकोट नहीं पहना हुआ था, बस पेंटी ही थी। उनका पेट एकदम सपाट था और जांघें भरी हुई थी। उन्होंने फिर अपनी पेंटी में अपने अंगूठे फसाये और उसे निकाल दिया। उनकी योनि उनकी जाघों के बीच में छुपी हुई थी। फिर मैम ने मेरी जींस को भी खींचकर निकाल दिया और मेरे उपर लेट गई। उन्होंने अपनी योनि को मेरे लिंग पर सैट किया और एक ही झटके में पूरे लिंग को गलप कर गई। मुझे लगा कि मेरा लिंग बाहर ही रह गया है तो मैंने अपना हाथ नीचे करके अपने लिंग केा सैट करने की कोशिश की। पर मेरा लिंग तो पहले से ही उनकी योनि के अंदर था।

मैं हैरान रह गया, मुझे लग ही नहीं रहा था कि मेरा लिंग किसी योनि में है। मैंने सवालियां नजरों से मैम की तरफ देखा, पर उनकी आंखें बंद थी और वो हलके हलके धक्के लगा रही थी। अचानक ही उनके धक्के बढ़ गये और उनका शरीर अकड़ने लगा। उन्होंने मेरे मुंह को अपने उभारों पर दबा दिया और तेज तेज धक्के मारने लगी। मुझे कुछ भी मजा नहीं आ रहा था। मैम के मुंह से लम्बी लम्बी सिसकारियां निकलने लगी और मुझे लगा कि कुछ चीज मेरे लिंग को जकड़ रही है। मैम के धक्के अब ज्यादा ही तेज हो गये थे और उन्होंने चार पांच और तेज धक्के मारे और मुझे मेरे लिंग पर गर्म गर्म पानी महसूस हुआ और उनकी योनि ने मेरे लिंग को बुरी तरह से जकड़ लिया। वो कभी मेरे लिंग को जकड़ लेती और कभी छोड़ देती। कुछ मैम का गर्म पानी और कुछ उनकी योनि की इस तरह की जकड़न के साथ तेज धक्के, मैं भी दूसरी बार झड गया और अपने पानी से मैम की योनि भर दी।
मैं मेरे उपर लेटकर तेज तेज सांसे लेने लगी और मेरे बालों को सहलाने लगी। वो मेरे चेहरे को चूम रही थी, चाट रही थी। उनकी योनि अभी भी मेरे लिंग को कभी जकड़ रही थी और कभी छोड़ रही थी। उनकी योनि की ये छोउ़ पकड़ मेरे लिंग को ढीला नहीं पड़ने दे रही थी। मैंने उन्हें पकड़ा और बेड पर पलट दिया और उनके उपर आ गया। मैम अपनी आंखें बंद करके शांत होकर लेट गई। मैंने नीचे होकर उनकी योनि को देखा, वो एकदम से फैली हुई थी, ऐसा लग रहा था कि कोई गुफा है। मैंने मैम की तरफ देखा, मेरे चेहरे पर सवाल देखकर मैम मुस्कराई।
मैम: तुम्हारे सर बिस्तर में ज्यादा देर टिकते नहीं हैं, कभी कभी तो दो तीन धक्कों में ही झड जाते हैं और एक बार झडने के बाद उनका फिर खड़ा ही नहीं होता, तो मैं प्यासी ही रह जाती हूं, इसलिए फिर मैं डिल्डो से काम चलाती हूं, और डिल्डो बहुत मोटा है तो इस कारण मेरी चूत इतनी चौड़ी हो गई है। अब तो हर रोज डिल्डो मेरी चूत की प्यार बुझाता है तो इसलिए ये हमेशा ऐसे ही खुली रहती है।
इतना कहकर मैम ने मेरा हाथ पकड़कर अपने उपर खींच लिया और मुझे अपनी बाहों में कस लिया।
पर आज तेरे साथ मैं जल्दी ही झड गई, सच में तेरे साथ बहुत मजा आया, और मैम ने नीचे हाथ करके मेरे लिंग को फिर से अपनी योनि पर सैट कर दिया। मेरा लिंग सिकुडा हुआ था तो मैम अपनी योनि को मेरे लिंग पर रगड़ने लगी और उनकी योनि की गर्मी से वो जल्दी ही फिर से तन कर खड़ा हो गया। चूंकि मैडम ने लिंग को अपनी योनि पर सैट कर रखा था, इसलिए जैसे जैसे मेरा लिंग खड़ा होता गया, वैसे वैसे ही उनकी योनि में घुसता गया और पूरा तन कर उनकी योनि में गर्भ पर ठोकरे मारने लगा। मुझे बस मेरा लिंग अंदर उनके गर्भ से टकराता हुआ ही महसूस हो रहा था, बाकी लग नहीं रहा था कि मेरा लिंग किसी योनि में घुसा हुआ है। मैंने अपने लिंग को बाहर खींचा और एक जोर का धक्का मारा, मैम के मुंह से आह निकल गई और वो अपने कुल्हों को नीचे से उछालने लगी। मैंने आठ दस धक्के लगाये पर कोई मजा ही नहीं आ रहा था। मैंने अपना लिंग बाहर निकाल लिया और मैम के पैरों को उठाकर अपने कंधों पर रख लिया और अपने लिंग को उनके पिछे के छेद पर सैट कर दिया। मेरे लिंग को पिछे के छेद पर लगते ही मैम सिहर गई और अपने पैर मेरी कमर में डाल कर कसकर जकड़ लिये। मैंने थोड़ा सा धक्का लगाया तो मेरा लिंग का सुपाड़ा उनके छेद में घुस गया। मैम थोड़ा सा कसमसाई और फिर अपने कुल्हों को नीचे की तरफ धक्का दे दिया। मेरा पूरा लिंग उनके अंदर घुस गया। उनकी पिछे का छेद कुछ टाइट था तो अब मुझे भी मजा आ रहा था और मैंने तेज तेज धक्के लगाने शुरू कर दिये। मैम बार बार अपनी गांड को सिकोड रही थी जिससे मुझसे सहन नहीं हुआ और थोड़ी देर में ही मैं फिर से झड गया, मेरा वीर्य अपने अंदर महसूस करते ही मैम का शरीर भी अकड़ गया और उनकी योनि ने भी पानी निकालना शुरू कर दिया। मैं उनके उपर लेट गया और अपना चेहरा उनकी चूचियों पर रख दिया।
हम ऐसे ही लेटे रहे। मुझे हलकी हलकी नींद आने लगी थी कि तभी मैम का मोबाइल बजने लगा।
मैम ने देखा, कोमल का फोन था। मैम ने फोन रिसीव किया, कोमल वापिस आ चुकी थी, उसने अपना रूम नंबर बताया और हम फ्रेश होकर अपने कपड़े पहनकर कोमल के रूम की तरफ चल दिये।
क्रमशः.....................
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06-09-2018, 02:15 PM,
#26
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--26
गतांक से आगे ...........
हम कोमल के रूम पर पहुंचे, दरवाजा हलका खुला हुआ था। मैम ने दरवाजा खोला और अंदर आ गई। अंदर बेड पर एक बला की खुबसूरत, बड़ी बड़ी आंखें जिनमें चंचलता साफ झलक रही थी, गोल गोरे गोरे गाल, गुलाबी होंठ और चेहरे की शोभा बढ़ाता सीधा नाक। दरवाजा खुलते ही उसने दरवाजे की तरफ देखा और मैम को देखते ही वो बेड से उठी और भागकर दीदी दीदी करते हुए मैम के गले जा लगी।
वो जैसे ही बेड पर से उठी, ओढी हुई चददर एक तरफ लुढक गई और उसका गदराया जोबर कपड़ों में से झलकने लगा। उसने लहंगा और कुर्ती पहनी हुई थी, लहंगा घुटनों से थोड़ा उपर तक था। टाइट कुर्ती में से उसके उभार चमक रहे थे। शायद उसने ब्रा नहीं पहनी थी, या पहनी भी हो, उसके निप्पल कुर्ती में से झांक रहे थे, मधयम आकार के उसके उभार, जिन्हें देखकर लगता नहीं था कि अभी ये जवानी के असली सुख का आनंद ले चुकी होगी, एकदम सपाट पेट, जल्दी में उठने के कारण कुर्ती थोड़ी उपर हो गई थी और उसके सपाट पेट पर गहरी लम्बी नाभि। थोड़ा और नीचे आने पर उसके योनि पर कसा उसका लहंगा, और योनि से नीचे आकर खुला हुआ, घुटनों से उपर थोड़ी सी गदराई सातलों की झलक दिखाई दे रही थी। एकदम संगमरमरी, केले के तने जैसी मांसल और चिकनी जांघे।
मैं मैम के पिछे ही थोड़ा सा साइड में खड़ा था। उसने अपनी बांहें मैम की कमर में कस दी और जब गले लगी तो पिछे मुझसे उसकी नजरे मिलीं। उसने एक पल के लिए मुझे देखा और फिर अपनी नजरें झुका ली।
जिस अदा से उसने नजरें झुकाई मैं तो बस घायल ही हो गया।
उसने फिर से अपनी पलकें उठाकर मुझे देखा और वापिस अपनी पलकें झुका ली।
मैम: किम्मी, अब गले ही लगे रहेगी क्या, चल हट, और तैयार हो जा, चलते हैं।
वो मेरी तरफ घूरते हुए मैम से अलग हो गई और आंखों के इशारे से मैम से मेरे बारे में पूछने लगी।
मैम: ये, ये समीर है, कम्पनी में काम करता है, तुम्हारे जीजा जी को किसी काम से जाना था तो, मैं साथ ले आई।
कोमल ने नाक-भौंक सिकोड़ते हुए मेरी तरफ देखा और जैसे मुझे चिढ़ा रही हो, छोटा दिखा रही हो, अदा के साथ मुड़कर वापिस बेड की तरफ चल दी। उसकी इन अदाओं से मेरे चेहरे पर शैतानी मुस्कान तैर गई।
पिछे से उसके छोटे छोटे कुल्हों पर कसा लहंगा उसके एक एक कटाव को उजागर कर रहा था। एकदम गोल और कसे हुए नितम्ब, साइज में न ज्यादा बड़े और न ज्यादा छोटे।
मेरा पप्पू तो भगवान से दुवाएं मांगने लगा कि शायद इसके साथ बात बन जाये।
वो बेड के पास गई और अपना पहले से पैक किया हुआ बेग उठाया और खड़ी हो गई।
कोमल: ओके, चलो चलते हैं, सबकुछ पैक है।
मैं बाहर आ गया और पिछे पिछे मैम और कोमल भी बाहर आ गई। मैंने पिछे मुड कर कोमल की तरफ देखा तो उसने अपनी नाक उपर को चढा ली और चेहरे को एक झटका सा दिया।
बड़ी नखरैल है, जल्दी हाथ नहीं आयेगी, थोड़ी मेहनत लगेगी इसपे, मैंने मन ही मन सोचा।
मैं धीरे धीरे चलते हुए उनके पिछे हो गया और पिछे पिछे चलने लगा।
कोमल की कातिल मस्त चाल, पैरों के साथ रिद्म मिलाकर मटकते कुल्हे, ऐसा लग रहा था कि निमंत्रण दे रहो हों कि आओ और हमें मसल डालो।
काउंटर पर आकर मैम और उसने चैक आउट किया और हम बाहर आ गये। हमारे बाहर आने से पहले ही गाड़ी गेट के सामने पहुंच चुकी थी। मैं बहुत इम्प्रैस हुआ उनकी पार्किंग सर्विस से। गाड़ी पर कपड़ा लगाया गया था और गाड़ी एकदम चमक रही थी।
मैंने गाड़ी की चाबी ली और ड्राइवर सीट पर आकर बैठ गया। मैम और कोमल पिछे बैठ गई। मैंने गाड़ी स्टार्ट की और घर की तरफ चल पड़ा। आते समय शहर में ट्रेफिक कुछ ज्यादा ही हो गया था इसलिए वापिस आने में 40 मिनट से ज्यादा लग गये। हम 2 बजे वापिस घर पहुंचे। बॉस बैंक से वापिस आ चुके थे।
अंदर आने पर मैम और कोमल गाड़ी में से उतर गये और मैंने गाड़ी वापिस गैराज में खड़ी कर दी। कोमल और मैम अंदर चली गई थी, मैं ऑफिस में आ गया।
अपूर्वा: इतना टाइम कैसे लग गया?
मैं: अरे वो लाटसाहबनी जयपुर दर्शन पे गई हुई थी।
अपूर्वा: क्या, उसे पता नहीं था कि आज लेने आयेंगे।
मैं: अब मुझे क्या पता यार, और है भी बड़ी नखरैल सी, मुझे देखकर नाक-भौंह सिकोड़ रही थी।
अपूर्वा मुस्कराने लगी।
थोड़ी देर में काम वाली चाय लेकर आ गई। उसे देखते ही मुझे शनिवार वाली बात याद आ गई। वो मेरी तरफ देखकर मुस्करा रही थी।
उसने हम दोनों को चाय दी और चली गई।
अपूर्वा: मैम नहीं आई आज चाय लेकर!
मैंने मन ही मन सोचा, अब क्यों आयेगी, साली की गरज निकल गई, अब तो कामवाली के हाथ से ही चाय पिनी पडेगी।
जाते वक्त कामवाली अपने कुल्हें मटकाती हुई मुझे मुड मुड कर देख रही थी जब तक वो बाहर नहीं निकल गई।
मैंने अपनी चेयर को अपूर्वा के पास कर लिया और हम चाय पीने लगे।
अपूर्वा लगातार मुझे घूरे जा रही थी।
ऐसे क्यों घूर रही हो, मैंने उससे पूछा।
क्यों, आपको कोई प्रॉब्लम है, मेरी मर्जी मैं जिसे चाहे घूरू, आंखें नचाते हुए अपूर्वा ने उतर दिया।
मैं चुप हो गया और चाय पीने लगा।
अचानक अपूर्वा बोली, शाम को मूवी देखने चले।
मैं उसके चेहरे की तरफ देखने लगा।
अपूर्वा: ऐसे क्या देख रहे हो, मूवी के लिए ही तो पूछा है, कोई परपोज थोडे ही किया है।
मैं मुस्करा दिया और कहा, ‘क्या पता अभी मूवी के लिए परपोज किया है, और मूवी देखने के बाद फिर शादी के लिए परपोज कर दो।’

जी नहीं, शादी के लिए अभी परपोज नहीं करूंगी।
मैं उसे छेड़ते हुए कहा, ‘इसका मतलब परपोज तो करोगी, पर बाद में’।
अपूर्वा का चेहरा शर्म से लाल हो गया और उसने अपनी पलकें झुका ली।
अच्छा कौन-सी देखोगी, मैंने कहा।
कौन-कौन सी लगी हुई हैं, अपूर्वा ने फिर से आंखें नचाते हुए कहा।
ये लो, कल्लो बात, ये भी नहीं पता कौन-कौन सी लगी हुई हैं, और मूवी देखने चले हैं, मैंने उसे छेड़ते हुए कहा।
तो क्या हुआ, जो भी बढ़िया सी लगी होगी, वो देख लेंगे, वो वैसे ही मचलते हुए बोली।
मैं: रास्कल----
और मेरी बात पूरी होने से पहले ही वो बोल पड़ी, नहीं वो फ्रेंडशिप वाली है ना जो इस शुक्रवार को लगी थी, वो देखते हैं, अच्छी मूवी बता रहे हैं, मेरी फ्रेंड देख के आई थी।
अच्छा, वो मुझसे फ्रेंडशिप करोगे, मैंने चटकारा लेते हुए कहा। वो तो बेकार सी मूवी है, मेरा फ्रेंड भी देखके आया था, मैंने उसे छेड़ते हुए कहा।
चलो फिर रास्कल ही देख आते हैं, वो तो बढिया ही होगी, उसने कहा।
वैसे ये मूवी देखने का भूत कहां से चढ़ गया तुम्हारे उपर, मैंने फिर से चटकारा लेते हुए कहा।
कहीं से नहीं, रहने दो, मुझे नहीं देखनी मूवी-वूवी, अपूर्वा ने नाराज होते हुए कहा और मुंह फेरकर काम करने लग गई।
ओह,,, बाबू तो नाराज हो गई, मैंने उसकी ठोड़ी को पकड़कर उसके चेहरे को अपनी तरफ करते हुए कहा।
उसने मेरा हाथ झटक दिया और मेरे से दूसरी तरफ मुंह कर लिया।
चलो ठीक है, शाम को रास्कल देखने चलते हैं, और चेयर पर से उठकर उसके चेहरे को अपनी तरफ किया।
परन्तु उसके चेहरे की तरफ देखते ही मुझे खुद पर बहुत ही गुस्सा आया, उसकी आंखों में आंसू छलक आये थे।
क्या हुआ, तुम रो क्यों रही हों, मैंने उसके आंसू पौंछते हुए कहा।
कुछ नहीं, उसने अपना एक हाथ मेरे हाथ के उपर रख दिया और दूसरे गाल पर आये आंसूओं को पौंछने लगी।
नहीं बताओं, क्या हुआ यार, मुझे टेंशन हो गई है मुझे इतनी और तुम कह रही हो कुछ नहीं।
मेरी बात सुनते ही अपूर्वा ने मुझे बाहों में भर लिया और जोर से भींच लिया। वो चेयर पर ही बैठी थी जबकि मैं खडा था तो बस हमारे गाल ही एक दूसरे से मिले हुए थे।
थोड़ी देर वो ऐसे ही मुझे हग किये रही, फिर मैंने उसे पिछे हटाना चाहा, पर वो उं हूं करके वैसे ही मुझसे चिपकी रही।
थोड़ी देर बाद उसने मुझे छोड़ा और नीचे देखने लगी।
चलो, अब बताओ क्या हुआ, तुम रो क्यों रही थी, मैंने उसके गालों को सहलाते हुए कहा।
‘आई-----’ उसके होंठ खुले, पर इतना कहने पर ही उसका गला रूंध गया और आगे के शब्द निकले ही नहीं और उसकी आंखों से फिर से आंसू बहने लगे।
मैं परेशान हो गया, पता नहीं क्या हुआ, जो ये रोये जा रही है।
अपूर्वा, मुझे बताओ ना क्या हुआ, ऐसे क्यों रो रही हो।
उसने अपने आंसू साफ किये और बोली, ‘वो सुबह मम्मी ने डांट दिया था, इसलिए, बस और कोई बात नहीं है।’
मैंने चेन की सांस ली, पागल, मम्मी तो डांटती ही रहती है, इसमें रोने की क्या बात है, मैंने उसके गालों पर बचे आंसूं को पोंछते हुए कहा।
उसने बस अपनी गर्दन हिलाकर हूं कहा और अपनी लम्बी लम्बी उंगलियां की-बोर्ड पर टिका दी।
मैंने उसके सिर पर हाथ रखा और हलके से मसल दिया, और ‘पागल, मम्मी के डांटने पर भी कोई रोता है’ कहते हुए अपनी चेयर पर आ गया।
उसने अपने बाल ठीक किये और फिर से काम में लग गई। मैंने छः बजे वाले शो के दो टिकट आइनोक्स, क्रिस्टल पाम के बुक करवा लिये और प्रिंट करके अपने पर्स में रख लिए।
कुछ देर बाद बॉस आ गये और हमसे दो चार बातें करके वहीं तीसरे सिस्टम पर बैठ गये और ऑन करके कुछ प्रोजेक्ट देखने लग गये।
साढ़े चार बजे मैम चाय लेकर आई, और तीनों को दे दी, उनके पिछे पिछे कोमल आ रही थी, उसके हाथ में नमकीन वाली ट्रे थी।
साइड से टेबल सेन्टर में रखके मैम ने नमकीन उसपर रख दी और एक चेयर पर बैठ गई। कोमल मैम की चेयर के साथ पिछे से हाथ रखके खड़ी हो गई। सभी ने चाय पी और थोड़ी थोड़ी नमकीन ली।
कोमल कभी मुझे घूर रही थी तो कभी अपूर्वा की तरफ देख रही थी।
चाय पीने के बाद मैम कप और ट्रे लेकर चली गई। मैं कुछ देर में आती हूं, कहकर कोमल वहीं रूक गई।
वो चेयर को अपूर्वा की चेयर के पास करके उसके पास जाकर बैठ गई। कोमल ने अपूर्वा की तरफ हाथ बढ़ाया और अपना परिचय भी दिया। अपूर्वा ने भी उससे हाथ मिलाया और अपना परिचय दिया।
फिर तो उनके बीच फुसफुस शुरू हो गई, मुझे बस फुसफुस ही सुनाई पड़ रही थी, वो क्या बातें कर रही हैं, कुछ नहीं सुन रहा था।
पांच बजे मैंने अपना सिस्टम ऑफ किया और बॉस से जाने की अनुमति मांगी।
मेरी आवाज सुनकर अपूर्वा ने टाइम देखा और उसने भी अपना सिस्टम ऑफ कर दिया। और खड़ी हो गई। कोमल भी खड़ी हो गई। हम बाहर आ गये। कोमल अंदर मैम के पास चली गई और मैं और अपूर्वा बाहर आंगन में गेट के पास आ गये।
तुम्हारी बाईक कहां है, अपूर्वा ने पूछा।
आज नहीं लाया, उसका पैट्रोल खत्म हो गया था, मैंने जवाब दिया।
क्या, इतना बुरा टाइम आ गया, कि पैट्रोल के भी पैसे नहीं है, अपूर्वा ने छेड़ते हुए कहा।

ओए, वो तो मैं डलवाना भूल गया, नहीं तो पैसों की कमी नहीं है मेरे पास, बात करती है, मैंने भी उसको उसी के लहजे में जवाब दिया।
चाबी, कहते हुए मैंने उसकी तरफ हाथ बढ़ा दिया।
उसने अपने पर्स में से चाबी निकाली और मुझे देते हुए कहा, ‘रोज-रोज की आदत पड़ गई लगता है, फ्री में गाड़ी चलाने की’।
अब हम तो ऐसे ही हैं, पानी नहीं मिले तो कोक पीकर काम चला लेते हैं, मैंने कहा।
अपूर्वा हंसने लगी।
कोमल दरवाजे में खड़ी खड़ी हमें ही घूर रही थी। मैंने स्कूटी को स्टार्ट किया और अपूर्वा पिछे बैठ गई।
हम बाहर सड़क पर आ गये और मैंने स्कूटी को दूसरी साइड में घुमा दिया।
उधर किधर जा रहे हो, रस्ता भूल गये क्या, अपूर्वा में मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।
आज मन कर रहा है कि जयपुर का एक चक्कर लगा लेता हूं, मेरा कौन सा पैट्रोल जलेगा, मैंने उसे छेड़ते हुए कहा।
ये इसको संभालों, कहीं गिर गई तो फिर से रोना शुरू कर दोगी, मैंने फिर से उसे छेड़ते हुए कहा।
उसने टिकट ली और देखकर मेरी कमर में एक घूसा जमा दिया।
‘हाउ स्वीट, मुझे पहले क्यों नही बताया’ कहते हुए उसने मुझे पिछे से बाहों में भर लिया और उसके उभार मेरी कमर में दब गये।
मैंने जानबूझ कर ‘आउच’ की आवाज निकाली।
क्या हुआ, अपूर्वा ने हैरान होते हुए पूछा।
‘वो चुभ रहे हैं, कमर में’, मैंने पिछे इशारा करते हुए कहा। मैं बैक मिरर से उसे देख रहा था।
मेरी बात सुनकर उसका चेहरा लाल हो गया और थोड़ा पिछे होकर बैठ गई।
पर मैं कहा उसको पिछे होकर बैठने देने वाला था, मैंने स्कूटी में रेस दी और फिर एकदम से ब्रेक लगा दिये। उसके उभार वापिस मेरी कमर में दब गये और अबकी बार उसके मुंह से ‘आहह’ निकली।
क्या हुआ, चोट तो नहीं लगी, मैंने कहा।
बदमाश, कहते हुए उसने मेरे कंधे पर मुक्का मारा और अपना चेहरा मेरे कंधे से सटाकर पीछे पर टिका दिया और हाथों से मेरे पेट को कस लिया।
अभी शो में टाइम था तो मैं स्कूटी को धीरे धीरे चलाने लगा। उसकी गर्म गर्म सांस मुझे मेरे कंधे के पास महसूस हो रही थी।
आधे घंटे में हम बाईस गोदाम पहुंच गये, पर देखा तो सर्किल पर सीधे जाने का रास्ता बंद कर रखा था तो हम पिछे से घूमकर मॉल में आ गये। स्कूटी को पार्क करके हम मॉल में अंदर आ गये। अभी मूवी स्टार्ट होेने में 20 मिनट थे। मैंने प्रिंट आउट देकर टिकट ली और हम अंदर आ गये। अपूर्वा ने मेरे एक हाथ को पकड़ रखा था और अपना सिर मेरे कंधे पर रखा हुआ था।
हमारा रिस्ता फ्रेंडशिप से आगे बढ़ चुका था, पर अभी इसका पता हम दोनों (खासकर मुझे) नहीं लगा था।
चैंकिंग वगैरह क्लियर करके हमने खाने के लिए पॉपकॉर्नर लिये। तभी पिछला शो खत्म हो गया और थोड़ी देर में ही एंट्री शुरू हो गई। हम थोड़ी देर बाहर ही रूके रहे, क्योंकि भीड़ बहुत ज्यादा थी और मैं नहीं चाहता था कि भीड़ में कोई अपूर्वा से छेड़छाड़ करे। सबके बाद में हम अंदर आ गये और पिछे की सीट जो मैंने बुक की थी, पर जाकर बैठ गये। हॉल लगभग फुल था। शो स्टार्ट हो गया। पूरी मूवी के दौरान मेरा हाथ अपूर्वा के हाथ में रहा जो उसकी जांघों पर रखा था। इंटरवल में अपूर्वा ने कोक और समोसे के लिए ऑर्डर कर दिया था।
मूवी ठीक ठाक थी, पर अपूर्वा के साथ देखने में और ज्यादा मजा आया था। मूवी के बीच में कई बार अपूर्वा का फोन बजा पर उसने साइलेंस पर कर दिया।
हम बाहर आ गये, 9 बजने वाले थे। अपूर्वा ने मुझे घर छोड़ा और फिर अपने घर के लिए निकल गई।
मैं उपर आ गया, सोनल छत पर ही खड़ी थी और उसके साथ पूनम भी खड़ी थी।
तुम्हारी तो मौज है जी, रात को 9 बजे लड़कियां घर छोउ़कर जाती हैं, सोनल ने मुस्कराते हुए कहा।
और क्या, दो दो तो घर पे हैं, और एक ये बाहर, और क्या पता एक ही है या और भी हैं, पूनम ने उसका साथ देते हुए कहा।
मैंने उनकी बातों पर ज्यादा धयान नहीं दिया और रूम खोलकर अंदर आ गया। सोनल और पूनम बाहर ही खड़ी-खड़ी बतियां रही थी।
कुछ खाने को मिलेगा क्या, मैंने अंदर से ही सोनल को आवाज लगाई।
अच्छा जी, उस स्कूटी वाली ने नहीं खिलाया-पिलाया क्या, ऐसे ही रात के 9 बजे तक परेशान करती रही, सोनल की आवाज आई।
और वो दोनों अंदर आ गई।
क्रमशः.....................
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Reply
06-09-2018, 02:15 PM,
#27
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--27
गतांक से आगे ...........
अगर कुछ हो तो बताओ, नहीं तो फिर ढाबे पे खा आता हूं, मैंने अपने कपड़े उतारते हुए कहा।
हम किस मर्ज की दवा हैं, अभी बना देती हूं, पूनम ने चहकते हुए कहा।
मैंने रसोई में चैक किया, सब्जी रखी हुई थी।
ठीक है, पर जल्दी से बनाना, भूख लगी हुई है।
वो दोनों रसोई में घुस गई और मैं कपड़े चेंज करके दूध लेने के लिए चल दिया।
जब तक मैं वापिस आया उन दोनों ने खाना बना दिया था और बाहर छत पर टहल रही थी। मैं ये देखकर हैरान हुआ कि उनके साथ छत पर आंटी भी थी क्योंकि पिछले दो तीन दिन से आंटी घुटनों में दर्द की शिकायत कर रही थी।
हाय आंटी, मैंने उनको देखते ही कहा।
हाय बेटा, कैसे हो? आंटी ने पूछा।
‘बस आपकी मेहरबानी है’, मैंने सोनल की तरफ देखते हुए कहा।
सोनल मेरी बात का मतलब समझ गई और मुझे आंखें दिखाने लगी। शायद पूनम भी समझ गई थी, इसीलिए वो मंद मंद मुस्करा रही थी।
आंटी आपके घुटनों का दर्द सही हो गया, मैंने आंटी से मुखातिब होते हुए कहा।
कहा बेटा, उपर तो आ गई, अब लग रहा है, नीचे तो तुम्हें सहारा देकर उतारना पड़ेगा, बहुत दर्द हो रहा है, आंटी ने अपने घुटनों को मसलते हुए थोड़ा दर्द से कराहते हुए कहा।
दोस्तो आंटी कोई सैक्सी लेडिज नहीं है, वो तो एक 40-45 साल की औरत है, मोटी-मोटी चूचियां जो कि हमेशा ब्लाउज में से बाहर निकलने की कोशिश में रहती हैं, कमर (सॉरी कमरा ही कहना पड़ेगा) बहुत ही मोटी और पेट तो आप ये ही कह सकते हो पृथ्वी गोल है। कद भी 5 फुट से कुछ कम ही होगा, मेरे कंघों से भी नीचे आती हैं, परन्तु यारों क्या बताउं, चेहरा इतना खूबसूरत है कि अगर वो अपना वेट कम कर ले तो शायद सोनल उसके सामने पानी भरे। चेहरे पर बिल्कुल भी चर्बी नहीं है और मोटी मोटी हिरणी जैसी आंखें, एकदम सफेद आंखों के बीच में काली पुतली, लम्बा-लम्बा चेहरा, और सीधा नाक, शायद रसीले होंठ (अब कुछ अंकल ने छोड़ा होगा तो), चेहरे पर झुर्रियों का कोई भी नामों निशान नहीं, कुल मिलाकर ये कह सकते हैं कि अगर कोई उनको कोई केवल गर्दन से उपर देखें तो दिल दे बैठें। आंटी हमेशा साड़ी ही पहनती हैं, जिससे उनकी गोल पृथ्वी और कमर रूमी कमरा और साथ ही हमेशा ब्लाउज से बाहर निकलने को बेताब चूचियों बूढ़ों पर कयामत ढाती रहती होंगी।
मैं दूध अंदर रखकर आ बाहर आ गया।
आंटी: बेटा, अब नीचे छोड़ आ मुझे सहारा देकर।
मैं (आंटी की तरफ बढ़ते हुए): ओके, चलो आंटी।
मैंने आंटी की एक बांह पकड़ी और दूसरा हाथ उनकी गर्दन पर से दूसरी साइड में उनके कंधे पर रख दिया और उनको चेयर पर से उठाकर सीढ़ियों को तरफ चल दिया।
सोनल पहले ही सीढ़ियों में पहुंच गई और आंटी का एक हाथ पकड़कर अपने कंधे पर रख लिया।
जैसे ही आंटी एक सीढ़ी उतरी उनका बैलेंस बिगड़ा और उनका सारा बोझ सोनल के उपर, मैंने जल्दी से एक हाथ से सोनल को पकड़ा नहीं तो शायद वो तो लुढ़कती हुई नीचे वाली सीढ़ी पर ही रूकती।
मैं: आंटी ऐसे तो शायद प्रॉब्लम हो जायेगी, आप ऐसा करो मेरी पीठ पर बैठो, और मैं आंटी के आगे वाली सीढ़ी पर आकर खड़ा हो गया।
आंटी मेरी पीठ पर बैठ गई, काफी भारी थी, मैं संभलते हुए उतरने लगा और अपने एक हाथ से सोनल को पकड़ लिया जो अब मेरे से एक सीढ़ी आगे चल रही थी। आंटी में काफी वजन था इसलिए मैं बहुत ही धीरे धीरे नीचे उतर रहा था। बढ़ी मुश्किल से नीचे तक पहुंचा।
नीचे आकर मैंने आंटी को उतारा और राहत की सांस ली।
आंटी: काफी मजबूत जिस्म है बेटा, इतनी भारी आंटी को पीठ पर बैठाकर नीचे उतारना कोई बच्चों का खेल नहीं है।
मैं सिर्फ मुस्करा दिया और आंटी को अंदर लाकर उनके बेडरूम में बेड पर बैठा दिया। आंटी बैठकर अपनी साड़ी को घुटनों से उपर उठाकर अपने घुटनों को सहलाने लगी।
बेटा सोनल, वो रसोई में मालिश वाला तेल रखा है, उसको थोड़ा सा गर्म करके ला दे, आंटी ने सोनल की तरफ देखते हुए कहा।
सोनल बाहर निकलकर रसोई में चली गई और मैं आंटी के पास बेड पर बैठ गया।
ये दर्द तो मुझे किसी काम की नहीं छोड़ेगा, अभी से पहले जकड़ लिया, आंटी ने बड़बड़ाते हुए कहा।
कल किसी अच्छे डॉक्टर के पास चलेंगे, आजकल तो हर चीज का इलाज है आंटी, टेंशन मत लो, मैंने उनके घुटने को सहलाते हुए कहा।
‘ये लो मम्मी, थोड़ा ज्यादा गर्म हो गया, ठंडा करके लगाना’, एक कटोरी में गर्म तेल लेकर आते हुए सोनल ने कहा, और कटोरी को बेड पर रखकर मेरी तरफ आंखों से आने का इशारा करके बाहर निकल गई।
‘अच्छा आंटी जी, थोउ़ा ठंडा करके लगाना तेल’, मैंने उठते हुए कहा।
बेटा अब तुम आ ही गये हो तो, लगा दो, मेरा तो ये पेट परेशान करता है झुकने में, आंटी ने बेड पर लेटते हुए कहा।
ओके, मैंने कहा और तेल की कटोरी में उंगली डालकर तेल की गर्माहट चैक की और फिर थोड़ा सा उंगली पर लगाकर आंटी के घुटनों पर लगा दिया। तेल ज्यादा गर्म नहीं था तो मैंने कटोरी में से सीधा थोड़ा सा तेल आंटी के घुटनों पर डाला और मालिश करने लगा। मेरा हाथ बार बार आंटी की साड़ी से टकरा रहा था तो आंटी ने साड़ी को उपर कर लिया, परन्तु साड़ी कुछ ज्यादा ही उपर हो गई और उनकी गोरी मोटी मोटी जांघें मेरी आंखों के सामने नंगी चमकने लगी। मैंने जैसे ही उनकी जांघों की तरफ देखा तो मैं हैरान रह गया, आंटी ने अपनी साड़ी को और भी उपर कर लिया था, जिससे अब उनकी जांघें और साफ में पेंटी भी साफ झलक रही थी। जब मेरी नजर उनकी पेंटी पर गई तो मुझे एक 440 वोल्ट का झटका लगा, आंटी की पेंटी योनि के पास से गीली थी। मैंने आंटी के चेहरे की तरफ देखा, उनकी आंखें बंद थी।
जब मैं कुछ देर तक उपर नहीं पहुंचा तो सोनल वापिस नीचे आ गई, और मुझे आंटी की मालिश करते देखकर वहीं बैठ गई और दूसरे घुटने की मालिश करने लगी। आंटी को शायद सोनल के आने का पता नहीं चला था, इसलिए उन्होंने अभी भी अपनी साड़ी को वैसे ही जांघों तक सरका के अपने हाथों से पकड़ा हुआ था।
मैंने सोनल की तरफ देखा और फिर आंटी की गीली पेंटी की तरफ इशारा करते हुए कहा सोनल के कान में हलके से कहा, ‘एकदम गीली हो चुकी है’।
सोनल ने मेरी तरफ घूरकर देखा और मेरी कमर में जोर का घुसा मार दिया। घुस्से की आवाज सुनकर आंटी ने अपनी आंखें खोली और सोनल को देखकर उनका चेहरा सफेद हो गया।
पर फिर उन्होंने संभलते हुए कहा, ‘पहले तो भाग गई, अब क्यों आई हैं’?
उनकी आवाज में थोड़ी हड़बड़ाहट और झुंझलापन था। आंटी ने अपने हाथों से साड़ी को छोड़ दिया जिससे साड़ी थोउ़ी नीचे हो गई और उनकी पेंटी छुप गई।
मैं और सोनल आंटी की मालिश करते रहे। मेरी बार बार हंसी छूट रही थी, तो सोनल ने मुझको आंखों से डराकर चुप होने को कहा। पर थोड़ी देर बाद मेरी फिर से हंसी छूट जाती।
आंटी की मालिश करने के बाद बाहर आ गये।
मैं (बाहर आकर सोनल को छेड़ते हुए): तू आंटी को थोड़ा ख्याल रखा कर, महीने में एक दो उनका पानी निकाल दिया कर, तू अपनी मम्मी के लिए इतना भी नहीं कर सकती, कैसे बेचारी आंटी की पेंटी गीली हो रखी थी।
सोनल ने एक तेज मुक्का मेरी कमर में जमा दिया, मुक्का काफी जानदार था, और उपर से उसकी अंगूठी मेरी कमर में चुभ गई, इसलिए मुझे तेज कमर में दर्द हुआ।
मैंने रोनी सुरत बनाते हुए सोनल की तरफ देखा और अपना हाथ पिछे ले जाकर कमर को सहलाने लगा।
मुझे काफी दर्द हुआ है, इस बात का अंदाज सोनल को भी हो गया था, इसलिए उसने भी अपना हाथ मेरी कमर में रख दिया और सहलाने लगी।
सॉरी, ज्यादा जोर से लग गया, मैं तो आराम से मारना चाहती थी, सोनल ने मेरी कमर सहलाते हुए कहा।
जोर की बच्ची, तेरे मुक्कों से मुझे कुछ नहीं होने वाला, पर तेरी इस अंगूठी ने ऐसी चोट मारी है, बहुत दर्द हो रहा है।
क्या, ओह माई गोड, आई एम सॉरी, प्लीज, आई एम रियली सॉरी, प्लीज, प्लीज, प्लीज, सोनल मेरी तरफ मरा सा मुंह बनाते हुए कहने लगी।
सॉरी से दर्द थोड़े ही कम हो जायेगा, मैंने वैसे ही दर्द भरा चेहरा बनाये हुए उसकी तरफ देखते हुए कहा।
मुझे सच में बहुत दर्द हो रहा था, और दर्द से मेरा गला रूंध गया था, जिससे बोलने में दिक्कत हुई थी।
सोनल मेरी टी-शर्ट को उपर करके जहां उसने मुक्का मारा था वहां देखने लगी और फिर अचानक ही वो वहां पर बेतहाशा चूमने लगी। वो कभी अपने मुलायम नरम होंठ चोट वाली जगह पे फिराती तो कभी अपनी जीभ से सहलाने लगती।
कमाल ही हुआ ना, उसके इस तरह चूमने से मेरा दर्द कम होने लगा और मुझे मजा आने लगा।
थोड़ी ही देर में मेरा दर्द गायब हो गया, पर मैं ऐसे ही दर्द की एक्टिंग करता रहा और वो मुझे कमर में चूमती रही। उसकी हाथ भी उपर की तरफ मेरी कमर को सहला रहे थे। अचानक मुझे अपनी कमर में कुछ चुभता हुआ सा महसूस हुआ, मैं तुरंत समझ गया कि वो अपनी चूचियों को मेरी कमर में रगड़ रही है, पर मुझे कोई भी कपड़ा महसूस नहीं हो रहा था, सीधे जिस्म से जिस्म का स्पर्श महसूस हो रहा था।
हम उनके घर के हॉल में थे और आंटी के बेडरूम में से वहां दिखाई नहंी देता था और बाहर से तो कुछ दिखाई ही नहीं दे सकता था।
मैं समझ गया कि उसने अपने बूब्स बाहर निकाल लिये हैं और मेरी कमर में चोट वाली जगह पर सहला रही है। अब तो मैं और भी ज्यादा दर्द की एक्टिंग करने लगा ताकि वो इसी तरह सहलाती रहे, पर कहते हैं ना कि ज्यादा एक्टिंग नुकसान दायक ही होती है, और वही मेरे साथ भी हुआ। मेरे इस तरह ज्यादा कराहने से वो समझ गई कि अब मुझे दर्द नहीं हो रहा और मैं मजे लेने के लिए दर्द होने की एक्टिंग कर रहा हूं। उसने अपने उभार मेरी छाती में से हटा लिए।
मैंने सोचा शायद अब कुछ और मजेदार होने वाला है, पर जब कुछ देर तक उसके शरीर का कोई हिस्सा मेरे शरीर से टच नहीं हुआ तो मैंने पिछे मुड़कर देखा तो वो अपनी कमर में हाथ रखे खड़ी थी और मुस्करा रही थी। मैंने उसकी तरफ देखते ही फिर से आहहहह, आहहह बहुत दर्द हो रहा है, एक्टिंग करनी शुरू कर दी।
उसने मेरी बाजू पर एक घुस्सा जमा दिया, पर अबकी बार उसने अंगूठी को निकाल लिया था। मैं हंसने लगा और वो भी हंसने लगी। वो अंगूठी को अंदर रख आई और हम उपर आ गये। पूनम छत पर ही बैठी थी।
खाना ठंडा हो जायेगा, खा लो, पूनम ने कुर्सी पर से खड़े होते हुए कहा।
वो तो मैं तुरंत ही गर्म कर दूंगा, ठंडा होने की टेंशन मत लो, मैंने उसकी तरफ आंख मारते हुए कहा।
मेरी बात का मतलब समझते ही वो शरमा गई और अपनी नजरें नीचे झुका ली।

हम अंदर आ गये और पूनम ने तीन थालियों में खाना लगा दिया। बेड पर बैठकर हम खाना खाने लगे। मैंने रोटी का कौर तोड़कर सब्जी लगाई तो मेरी उंगली सब्जी में चली गई, सब्जी काफी गर्म थी, जिससे उंगली जल गई, पर मैंने किसी को आभास नहीं होने दिया और फुंक मार मारकर खाने लगा। जैसे ही सोनल ने सब्जी लगाने के लिए रोटी का कौर कटोरी में डाला, तो अब उंगली तो सब्जी में जानी ही थी, वो जोर से चिल्लाई, आहहहहहहहहहहहहह!
उसकी आहहहहहहहहह सुनकर मेरी हंसी छूट गई। उसके हाथ से रोटी का कौर सब्जी में ही गिर गया था, और वो अपनी उंगली को मुंह में लिए चूस रही थी। मैंने उसका हाथ पकड़ा और देखा तो उसकी उगंली पर फफोला हो गया था, जलने से। मैं उठा और फर्स्ट ऐड बॉक्स ले आया और उसकी उंगली पर दवाई लगा दी और फिर से खाना खाने बैठ गया। सोनल ने अपनी थाली मेरी तरफ सरका दी। मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने मुंह बनाते हुए कहा।
सोनल: आप खिलाओं ना, मेरा हाथ जल रहा है।
मैं: तो मेरे हाथ क्या लोहे के हैं, जो जलेंगे नहीं।
मेरी बात सुनकर सोनल ने मुंह फुला लिया और एक तरफ होकर बैठ गई। मैंने पूनम की तरफ देखा वो मुस्करा रही थी। फिर मैंने एक कौर लेकर सब्जी लगाई और सोनल के मुंह के सामने कर दिया। सोनल खुश हो गई और खाने के लिए मुंह खोलकर आगे बढ़ा दिया, पर उसके मुंह में जाने से पहले ही मैंने वो कौर खुद ही खा लिया। पूनम की हंसी छूट गई और सोनल फिर से मुंह फुलाकर बैठ गई।
मैंने फिर से एक कौर तोड़ा और उसके मुंह के सामने कर दिया, उसने मेरी तरफ देखा, पर ऐसे ही मुंह फुलाए बैठी रही।
मैं: अच्छा तो चल, अबकी बार नहीं करूंगा, चल खा ले, पक्का नहीं करूंगा अब।
और सोनल ने मुंह खोलकर आगे बढ़ाया तो मैंने फिर से वैसे ही किया और खुद ही खा गया। अबकी बार तो सोनल गुस्सा हो गई और बेड पर से उठकर जाने लगी।
मैंने उसे पकड़ कर बैठाया और माफी मांगते हुए कहा कि अब बिल्कुल नहीं, चलो अब खा लो और एक कौर को सब्जी लगाकर उसके मुंह के सामने कर दिया। जैसे ही उसने मुंह खोला तो मैंने अबकी बार भी खुद ही खा लिया। सोनल ने मेरे कंधे पर एक मुक्का मारा और एक साइड में होकर बैठ गई और रोने की एक्टिंग करने लगी।
मैं: लो यार, मुक्का तो मुझे लगा है, और रो तुम रही हो, ये क्या बात हुई?
मुझसे बात मत करो, सोनल ने झल्लाते हुए कहा।
मैंने एक कौर पर सब्जी लगाई और अपनी जगह से उठकर सोनल के पास आया और उसके मुंह के सामने कौर कर दिया। सोनल ने एकबार मेरी तरफ देखा और फिर अपना मुंह खोला, पर आगे बढ़ाने से पहले अपने हाथ से मेरे हाथ को पकड़ा और फिर अपना मुंह आगे बढ़ाकर कौर सीधा मुंह में। मेरी उंगली भी थोड़ी सी उसके मुंह में चली गई और उसने उंगली को हलका सा काट लिया।
मैं नहीं खिलाता तुझे, एक तो खाना खिलाओ, और उपर से उंगली भी काटवाओ, मैंने कहा।
ओके, ओके, अब नहीं काटूंगी, प्लीज खिलाओ न, बहुत स्वादिष्ट लग रहा है तुम्हारे हाथों से, सोनल ने चहकते हुए कहा।
फिर मैंने एक कौर तोड़कर उसको खिलाया और फिर एक खुद खा लिया, इस तरह से हमने खाना शुरू किया। पूनम ने भी खाना शुरू कर दिया। खाने के आखिर में एक रोटी मैंने पूनम को भी खिलाई और सोनल ने मुझे और पूनम को व पूनम ने मुझे व सोनल को खिलाई। दोनों के हाथ से खाना खाकर बहुत ही मजा आया।
क्रमशः.....................
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06-09-2018, 02:15 PM,
#28
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--28
गतांक से आगे ...........
खाना खाने के बाद मैंने बर्तनों को उठाकर रसोई में रख दिया। तभी पूनम का सैल बजने लगा।
मर गई, मम्मी का फोन है, मैं अभी आई, पूनम ने उठते हुए कहा और कॉल पिक करके बाहर चली गई।
पूनम के जाते ही सोनल ने मुझे बेड पर धक्का दिया और मेरे उपर लेट कर मेरी आंखों में आंखें उालकर प्यार से देखने लगी। उसके उभार मेरी छाती में पिचक गये थे। वो लेटे हुए अपने पैरों को मेरे पैरों पे रगड़ रही थी और अपने हाथों से मेरे गालों को सहला रही थी। मैंने अपने हाथ उसकी कमर में लपेट दिए और सहलाने लगा। धीरे धीरे मैं उसके कुल्हों की तरफ बढ़ गया और उसके कुल्हों को पकड़कर भींच दिया। सोनल के मुंह से एक आह निकली और वो पागलों की तरह कभी मेरे होठों को तो कभी मेरे गालों को चूमने लगी।

मैंने भी उसके कुल्हों को जोर जोर से मसलना शुरू कर दिया। मैनें उसकी कुर्ती को उपर सरका दिया और सलवार के उपर से उसके कुल्हों को मसलने लगा। सलवार कुछ ऐसी थी कि ऐसा लग रहा था कि मैंरे हाथ उसके नंगे कुल्हों पर हैं।
सोनल जोर जोर से मेरे होंठों को चूसने लगी जैसे कि आज इनका सारा रस निचोड के ही रहेगी। मैंने उसके सलवार के नाड़े के हाथ हाथ रखे और सीधे सलवार के अंदर घुसा दिये, उसके ठंडे ठंडे कुल्हों का स्पर्श बहुत ही आनंदकारी था, मैं उसके कुल्हों को मसलने लगा और अपनी उंगली से उसकी खाई को सहलाने लगा। मैंने अपनी एक उंगली उसके पिछे के छेद पर टिका दी और सहलाने लगा। सोनल का शरीर में एक आनंद की लहर दौड़ गई और उसका शरीर ऐंठने लगा। वो मेरे होंठों को चूसते हुए अपने उभारों को मेरी छाती पर रगड़ने लगी। मेरे गालों को उसने अपनी हथेलियों में पकडा हुआ था और सहला रही थी। धीरे धीरे उसकी जांघें मेरी जांघों पर मचलने लगी और वो मेरे उपर लेटी हुई सिसकारियां लेने लगी। उसने अपने चेहरे को उपर उठाया और मेरी आंखों में देखा और फिर से चेहरे को नीचे किया और मेरी कानों के नीचे वाले हिस्से को अपने होंठों में भर लिया और चूसने लगी। मुझे एकदम करंट सा लगा और मेरे हाथों की हरकत उसके कुल्हों पर बढ़ गई। उसके हाथ मेरे बालों से खेल रहे थे। शॉर्ट के अंदर मेरा लिंग तनकर उसकी योनि के दरवाजे पर दस्तक दे रहा था। अचानक वो उठी और मेरी शॉर्ट को नीचे सरका दिया और फिर अपनी सलवार का नाड़ा खोलकर उसे भी पेंटी के साथ घुटनों से नीचे सरका दिया और अपनी कुर्ती को भी निकाल दिया। कुर्ती के निकालते हुए उसके दूधियां उभार मेरे सामने प्रकट हो गये, उसने ब्रा नहीं पहनी थी, एकदम तने हुए निप्पल और धीरे धीरे फड़कती हुई चूचियां, बहुत ही दिलकश लग रही थी। मैंने तुरंत अपने हाथों को हरकत दी और उसके जोबन का मर्दन करने लगा। सोनल ने मेरे हाथ एक तरफ झटक दिए और मेरी टी-शर्ट को उतारने लगी। मैंने अपनी कमर को उपर उठा दिया और फिर सिर को उपर उठाकर टी-शर्ट को निकालने में मदद की।
टी-शर्ट उतारते ही सोनल वापिस मेरे उपर लेट गई। मेरे लिंग उसके पेट में धंस गया। उसने अपने हाथ को नीचे लेजाकर मेरे लिंग को अपनी योनि की फांकों के बीच में इस तरह सैट किया कि मेरे लिंग का सुपाड़ा उसकी योनि के दाने को रगड़ने लगा और मेरी लिंग की जड़ में उसकी योनि का नीचे वाला भाग टच हो रहा था।
उसने अपने हाथ मेरे बालों को सहलाने में व्यस्त कर दिये और अपने होठों को मेरे होठों का रसपान करने में, और अपनी योनि को मेरे लिंग पर रगड़ने लगी। इस तरह रगड़ने से मुझे भी काफी मजा आ रहा था और मैंने भी नीचे से अपने कुल्हों को हरकत देनी शुरू कर दी। सोनल की योनि से निकलता रस मेरे लिंग पर गिरकर उसे भिगो रहा था। सोनल अपनी योनि को मेरे लिंग पर रगड़ रही थी और अपनी चूचियों को मेरी छाती पर। उसके कडे निप्पल मेरी छाती में चुभ रहे थे और गुदगुदी कर रहे थे।
मेरे हाथ सोनल की कमर और कुल्हों का मर्दन कर रहे थे। सोनल ने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल और मेरी जीभ पे फिराने लगी। मैंने भी अपनी जीभ को बाहर की तरफ धकेल दिया, सोनल तो जैसे यही चाहती हो, उसने अपने होंठ खोले और मेरी जीभ को दबोच लिया और चूसने लगी। जब वो चूसती तो मेरा रस उसके मुंह में चला जाता और जब वो चूसना बंद करती तो उसका और मेरा मिला जुला रस वापिस मेरे मुंह में आ जाता।
जीभ को मुंह से बाहर निकले निकले काफी देर हो गई थी, जिससे मेरी जीभ की जड़ में दर्द होने लगा था, इसलिए मैंने अपनी जीभ को वापिस अंदर कर दिया। सोनल ने मेरी तरफ खा जाने वाली नजरों से देखा और फिर मेरे होंठों को चूसने लगी।
अचानक मैंने अपने कुल्हों को कुछ ज्यादा उपर उठा दिया जिससे सोनल के कुल्हें भी उपर उठ गई और मेरा लिंग उसकी योनि की फांकों और फैलाता हुआ दब गया। फिर मैं एकदम से नीचे हो गया जिससे एक पल के लिए मेरा लिंग उसकी योनि से दूर हो गया और जैसे ही वो नीचे को आई तो मेरा लिंग सीधा उसकी योनि के द्वार पर टकराया और उसकी योनि द्वार को खोलता हुआ अंदर घुस गया। सोनल और मेरे मुंह से एक मादक आह निकली और मैंने अपने कुल्हों को थोड़ा सा उपर उठाकर अपने लिंग को पूरा उसकी योनि में घुसा दिया। सोनल अपने कुल्हों को उठाकर मेरे लिंग का मर्दन करने लगी।
अब उसके होंठ मेरे होंठों पर तो थे पर वो उन्हें चूस नहीं रही थी, उसका सारा धयान मेरे लिंग को ज्यादा से ज्यादा मर्दन करने पर था। उसके हाथ मेरे बालों में रूके हुए थे। मैंने भी नीचे से कुल्हें उठाकर उसका साथ देना शुरू कर दिया। नीचे से मेरे धक्कों के कारण लिंग उसकी योनि के आखिरी छोर तक जाकर उसके गर्भाश्य से टकरा रहा था। हरेक टक्कर में सोनल का शरीर ऐंठ जाता और उसके मुंह से मादक सिसकारी निकलकर मेरे होंठें के बीच गुम हो जाती।
अचानक सोनल ने जोर जोर से अपनी जांघों को उछालना शुरू कर दिया और उसका शरीर अकड़ गया। उसके होंठ मेरे होंठों पर भींच गये और उसके हाथ मेरे सिर पर खिंच गये। उसकी योनि ने मेरे लिंग को भिंच लिया जैसे उसका रस निचोउ़ने की कोशिश कर रही हो, सोनल का गर्म गर्म रस मेरे लिंग को भिगोता हुआ मेरी जांघों पर गिरने लगा। सोनल का शरीर कुछ ढीला होता जा रहा था, पर उसकी योनि उसी तरह से मेरे लिंग को कसे हुए थी। मेरा लिंग उस कसाव को सहन नहीं कर पाया और सोनल की योनि में अपने रस की पिचकारियां छोड़नी शुरू कर दी। मेरे रस को महसूस करते ही सोनल का शरीर फिर से अकड़ गया और उसकी योनि का कसाव बढ़ गया। मुझे लगा कि जैसे मेरा लिंग बहुत ही टाइट योनि के अंदर फंसा हुआ है। मेरे लिंग ने कुछ ज्यादा ही रस उगल दिया था।
धीरे धीरे सोनल शांत होती हुई मेरे उपर लेट गई और मैं भी झडने के बाद अपनी आंखें बंद करके लेट गया। आज मैंने कोई मेहनत नहीं की थी, परन्तु फिर भी ऐसा लग रहा था कि मैं बहुत जयादा थक गया हूं।
हमारे पैरों की लड़ाई में सलवार और शॉर्ट कब पैरों से अलग हुई पता ही नहीं चला। सोनल वैसे ही मेरे उपर लेटे हुए मेरे बालों को सहलाती रही और इसी तरह लेटे हुए हम नींद के आगोश में समा गए।

ठनननननन ठनननन टनननन टिनननननन टूननननननन ठननननन टननटनन टननठनननठननन की आवाज सुनकर मेरी आंख खुली, सोनल बेड पर नहीं थी।
मैं (लेटे लेटे ही आंख मलते हुए): क्या हुआ, ये क्या गिरा दिया।
सोनल (रसोई में से): उंहहह, गिलास गिर गया।
मैं: उंहहहूहहूहहहहहहहह, एक गिलास पानी मुझे भी देना।
फिर फ्रिज खुलने की आवाज आई और गिलास में पानी डलने की ओर फिर वापिस से फ्रिज बंद होने की।
लीजिए जी, सोनल ने पानी का गिलास मेरी तरफ बढ़ा दिया।
मेरी नजरें उसके नंगे योवन पर ही गढ़ी हुई थी, मैंने गिलास लिया और पानी पीते हुए उसके पहले से मोटे नजर आ रहे उभारों को देखने लगा। सोनल ने एक अंगड़ाई ली और उसके हाथों के साथ साथ उसके उभार भी उपर की तरफ चल दिये।
इतना सैक्सी सीन देखकर मेरे लिंग ने अंगड़ाई ली और उछल कर मेरे पेट से जा टकराया। सोनल ने जैसे ही अंगड़ाई लेकर नीचे को हाथ लाई, तो उसका चेहरा भी नीचे हुआ और उसकी नजर मेरे लिंग पर पड़ी।
वो बेड पर बैठ गई और लिंग को हाथ में पकड़ लिया।
सोनल: इस बदमाश को अब भी चैन नहीं है, कैसे घूर-घूर कर देख रहा है मुझे।
सोनल का ठंडा हाथ मेरे लिंग पर पड़ते ही मेरे शरीर में झुरझरी दौड़ गई और मेरा लिंग और भी ज्यादा अकड़ गया। सोनल ने सुपाड़े पर से चमड़ी को हटाना चाहा, परन्तु हमारे रस से वो चिपक सी गई थी, जिससे मुझे थोड़ा सा दर्द हुआ और मेरे मुंह से आह निकल गई। मैंने पानी पीकर गिलास साइड में रख दिया।
जैसे ही मैंने गिलास को रखा सोनल ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे उठाने लगी। मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा तो उसने मुझे आंखों से उठने का ऑर्डर थमा दिया।
जैसे ही मैंने उठने के लिए नीचे की तरफ अपना कदम बढ़ाया, मेरी जांघों पर जमी पपड़ी के कारण खाल में खिंचाव हुआ और दर्द का आभास हुआ।
मैंने मुंह से एक आहह निकाली और वैसे ही रूक गया। सोनल ने मेरा हाथ छोउ़ा और बेड पर झुककर मेरे पिछे वाले छेद में उंगली डालने लगी। मैं तुरत उठकर खड़ा हो गया।
सोनल: शाबाश, पहले उठ जाते तो, मेरे को परेशान तो नहीं होना पड़ता।
मैं मुस्करा दिया और सोनल मुझे खींचते हुए बाथरूम में ले गई। बाथरूम में जाते ही उसने शॉवर ऑन कर दिया और हम शॉवर के नीचे खडे होकर नहाने लगे। सोनल ने रगउ़ रगड़ कर मेरी जांघों और लिंग को साफ किया और फिर मेरे पूरे शरीर पर मल मल कर साबुन लगाने लगी। साबुन लगाकर उसने मुझे वापिस शॉवर के नीचे खड़ा कर दिया और शरीर पर से साबुन साफ करने लगी। मुझे नहलाने के बाद उसने मेरी तरफ साबुन कर दिया। मैंने साबुन लिया और उसके बूब्स पर मलने लगा। उसके बूब्स पर साबुन मलने में बहुत ही मजा आ रहा था, इसलिए मैं लगातार उसके बूब्स पर ही साबुन लगाये जा रहा था।
और भी जगह हैं मेरे बदन में साबुन लगाने के लिए, सोनल ने मेरे हाथ को नीचे धकाते हुए कहा।
मेरा हाथ फिसल कर उसके मुलायम पेट पर आ गया, मैं उसके पेट पर साबुन लगाने लगा। और धीरे धीरे उसकी योनि तक आ गया। मैंने उसकी योनि पर साबुन लगाया और फिर साबुन को दूसरे हाथ में पकड़ा और उसकी योनि को मसलने लगा। सोनल ने मेरे कंधे पर अपने हाथ रख दिये और मुझे नीचे दबाने लगी। मैं नीचे बैठ गया और सोनल को शॉवर के नीचे कर दिया। शॉवर के नीचे आने से उसकी योनि पर लगा साबुन साफ हो गया और मेरा हाथ वहां पर घर्षण के साथ फिरने लगा। सोनल की योनि ने पानी निकालना शुरू कर दिया था। सोनल मेरे सिर पर पिछे से दबाव बना रही थी, ताकि मैं अपना मुंह उसकी योनि पर लगा दूं, मैंने भी उसको निराश नहीं किया और उसकी नाभि पर अपने होंठ टिका दिये।
मेरे होंठ लगते ही उसके शरीर में तरंग सी उठी और उसके मुंह के द्वारा आहहहहहह की आवाज के रूप में बाहर निकली। मैं उसकी नाभि में जीभ फिराने लगा, सोनल का पेट फुदकने लगा। मैंने अपने होंठ उसके नाभि के चारों तरफ टिका दिये और अपनी जीभ उसकी नाभि में डालकर अंदर की तरफ हवा खींचने लगा, सोनल पागल हो गई और मेरे सिर को नीचे दबाने लगी। उसके दबाने के कारण मैं धीरे धीरे नीचे आता गया और अपने होंठ सोनल की योनि से टपकते रस के द्वार पर टिका दिया और एक जोर की सुकिंग की। मेरी सुकिंग के साथ ही सोनल का रस और जोर से बहने लगा और वो मेरे सिर को अपनी योनि पर दबाने लगी। मैंने अपनी जीभ निकाली और उसकी योनि में घुसा दी। सोनल तो एकदम से पागल हो गई और उसके हाथों का दबाव मेरे सिर पर बढ़ गया, उसका शरीर अकड़ गया और पैर कांपने लगे। वो इतना मजा बर्दाश्त न कर सकी और अपने पेट को मेरे सिर पर रखते हुए नीचे को झुक गई और जोर जोर की सांसे लेने लगी। उसके लब मेरी पीठ से जुड़ गये और वो बुरी तरह से अपने लबों को मेरी पीठ पर रगड़ने लगी।
उसने मेरी कमर को अपने हाथों से कस के पकड़ा हुआ था। उसकी योनि से निकलता रस सीधा मेरे मुंह में पहुंच रहा था। बहुत ही जायकेदार स्वाद था। मैं उसकी योनि से रस खींचता रहा और वो अपना रस बहाती रही। मेरे द्वारा खींचे जाने से बहुत सारा रस निकल रहा था, और जब सोनल की बर्दाश्त के बाहर हो गया तो वो उठी और मेरे सिर को पिछे धकेल कर खुद भी पिछे हो गई।
उसकी टांगे कांप रही थी, उसने नल को पकड़ लिया और दीवार के सहारे खडे होकर हांफने लगी। कुछ देर बाद उसकी सांसे नोर्मल हुई तो उसने अपनी आंखें खोली और मेरी तरफ देखा। मैं शॉवर के नीचे फर्श आराम से बैठा हुआ था और उसे ही देख रहा था।
सोनल ने मेरी तरफ बहुत ही प्यार से देखा, उसकी आंखे आंधी खुली थी और आधी बंद। उसका पेट अभी भी उछल रहा था और उसकी टांगे कांप रही थी। उसने अपने कांपते होंठों को जैसे ही खोला तो वो लरजकर वापिस बंद हो गए।
उसकी ऐसी हालत देखकर मैं खड़ा हुआ और उसके अपनी बाहों में भर लिया। सोनल तुरंत ही किसी बेल की तरफ मुझसे लिपट गई और मेरे गले और गालों को बेहताशा चूमने लगी।
मेरे हाथ उसकी पीठ को सहला रहे थे और सोनल के हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे और वो कभी मेरे गालों किस करती, चाटती और कभी मेरे गले को। और बीच बीच में बड़बड़ाती जा रही थी।

मुझे तो लगा, मेरी जान ही निकल जायेगी, ओहहहह आहहह इतना मजा, मैं ब्यान नहीं कर सकती, पुच पुच,,, लव यू,,,,, आहहहह,, ओहहहह, आई लव यू,, आहहहहहह, लव यू,,,,,,
वो थोड़ा पिछे हटी और मेरे एक पल के लिए मेरे लबों पर अपने लब रखे और उन्हें चूसा ओर फिर नीचे होते हुए मेरी चिन को चूमने लगी, फिर वो नीचे हुई और मेरे निप्पल पर अपनी जीभ फिराने लगी, पैर कांपने की बारी अब मेरी थी, मेरे शरीर में आनंद की तरंगे उठने लगी, अचानक सोनल ने मेरे निप्पल को दांतों के बीच दबा के हलके से चुभला दिया। मेरा तो निकलने को ही हो गया। उसके हाथ मेरे कंधों पर टिके थे। फिर वो नीचे हुई और मेरे पेट को चाटने और चूमने लगी। उसके हाथ मेरी छाती पर मेरे निप्पल्स को छेड़ रहे थे।
फिर वो नीचे घुटने टेक कर बैठ गई और मेरी तरफ देखा, मैंने उसकी तरफ देखा और अपनी आंखें बंद कर ली।
सोनल ने मेरे पेट के नीचे वाले भाग पर अपने होंठ रखे और गोल गोल घुमाते हुए चूमने लगी और साथ साथ अपनी जीभ फिराने लगी। मैं तो बस हवा में उड़ रहा हूं, ऐसा लग रहा था। मेरा लिंग उसके गालों और ठोडी पर रगड़ रहा था। अचानक उसने अपना चेहरा मेरी जांघों में घुसा दिया और अपनी जीभ से मेरी गोलियों के नीचे के हिस्से पर फिराने लगी। अब मेरी टांगे जवाब दे गई थी, इतनी सेंसेशन मैंने अब तक महसूस नहीं की थी। वो मेरी गोलियों पर अपनी जीभ फिरा रही थी और कभी अपने होंठ लगाकर उन्हें अन्दर की तरफ खींचने की कोशिश कर रही थी।
अचानक उसने अपने होंठ खोले और मेरी दोनों गोलियों को मुंह में भर लिया और उन पर जीभ फिराने लगी। मेरा लिंग उसकी आंखों पर टकरा रहा था। वो मेरी गोलियों को जोर जोर से चूसने लगी। मुझे हल्का हल्का दर्द भी हो रहा था और मजे की तो बस पूछो मत, इतना ज्यादा मजा आ रहा था, कि मुझे लग रहा था कि मैं अब निकला कि तब निकला। मेरी आंखें जोरों से बंद थी और मुंह से मजे की सिसकारियां निकल रही थी।
पर मेरे निकलने से पहले ही सोनल ने गोलियों को बाहर निकाल दिया और मेरी जांघों को अपने हाथों से सहलाने लगी।
क्रमशः.....................
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06-09-2018, 02:15 PM,
#29
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--29
गतांक से आगे ...........
अचानक उसने एकदम से मेरे पूरे लिंग को मुंह में ले लिया और अपनी जीभ को उस पर लपेट दिया। मैं उसके मुंह की गर्मी को बर्दाश्त न कर सका और मेरे लिंग ने पिचकारियां मारनी शुरू कर दी। मेरा लिंग उसके गले में अटका हुआ था, मेरे हाथ उसके सिर पर कस गये थे और लिंग को ओर अंदर घुसाने की कोशिश में उसके सिर को जांघों की तरफ दबा रहे थे। सोनल अपने सिर को पिछे हटाने के लिए जोर लगा रही थी, पर मैं तो ओर ही दुनिया में पहुंचा हुआ था, मेरी जांघें आगे की ओर जोर लगाकर लिंग को ओर ज्यादा उसके मुंह में धकेलने की कोशिश कर रही थी। मेरा रस सीधा उसके गले में गिर रहा था। मजे के मारे मेरी आंखें बंद थी।
सोनल ने अपने हाथों को मेरे पेट पर रखा और मुझे पिछे धक्का देने लगी। मेरा रस भी निकल गया था जिस कारण मेरे हाथों की पकड़ ढीली हो गई थी। सोनल ने मेरे लिंग को मुंह से निकाला और खांसने लगी। मेरा रस उसके मुंह से निकल कर बह रहा था और वो अपने गले पर हाथ रखकर खांसे जा रही थी।
उसकी ऐसी हालत देखकर मैं उसके गले को सहलाने लगा। थोड़ी देर में उसकी सांसे नोर्मल हुई तो उसने मेरी छाती में दनादन घुस्से मारने शुरू कर दिए और रोने लगी।
मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया और उसके गालों को सहलाने लगी। उसके गालों पर से लुढ़कते आसुंओं को मैंने अपने लबों से चूसना शुरू कर दिया। सोनल ने अपना चेहरा मेरी छाती से चिपका दिया और एक हाथ मेरी कमर में डाल दिया और दूसरे हाथ से अभी भी मेरी छाती में मुक्के मारे जा रही थी।

मुझे अब आपसे कभी बात नहीं करनी, उसने रोते रोते कहा।
मैं उसकी हालत को समझ सकता था, इसलिए मैंने उसे कुछ कहा नहीं, बस कभी उसके गालों को तो कभी गले को, कभी कमर को सहलाता रहा।
जब वो थोड़ा नोर्मल हुई तो मैंने उसे शॉवर के नीचे ले आया और उसके छाती और ठोडी पर गिरा अपना रस साफ करने लगा।
सॉरी, मुझे माफ कर देना, प्लीज, मेरा खुद पर कंट्रोल नहीं रहा, प्लीज, मैंने उसके कान के पास अपने होंठ करके कहा।
तुम्हें तो मजा आ रहा था, पर मेरी तो जान निकलने वाली थी, ऐसा लग रहा था कि आज मैं नहीं बचूंगी, सोनल ने कहते हुए फिर मेरी छाती में एक मुक्का मार दिया।
नहाने के बाद मैंने शॉवर बंद किया और खुद को टॉवल से साफ किया और उसके शरीर पर टॉवल लपेट कर अपनी बांहों में उठा लिया और कमरे में आकर बेड पर लेटा दिया।
बेड पर लेटते ही सोनल ने अपना चेहरा दूसरी तरफ कर दिया।
क्या हुआ बेबी, नाराज हो, प्लीज आज के बाद कभी नहीं होगा, अब तो मान जाओ, मैं कान पकउ़ता हूं, मैंने उसके यों मुंह फेरने पर सॉरी बोलते हुए कहा।
मेरी बात सुनकर सोनल मेरी तरफ पलटी, ‘पहले उठक बैठक लगाओ,।
मैंने छोटी छोटी दो तीन उठक बैठक लगा दी।
ऐसे नहीं, पूरी उठक बैठक लगाओ, और जब तक मैं ना कहूं, लगाते रहो, उसके चेहरे पर मुस्कान तैर रही थी।
मैंने फिर से सही तरह से उठक बैठक लगानी शुरू कर दी। दस-बारह उठक बैठक के बाद ही मेरे पैर कांपने लगे। मैंने याचक की तरह उसकी तरफ देखा तो, उसे भी दया आ गई और वो उठी और मुझे बाहों में भर लिया।
वो बेड पर थी और मैं बेड के किनारे खड़ा था। जब वो उठी तो टॉवल नीचे गिर गया था, जिस कारण उसके नंगे उभार मेरी नंगी छाती में दब गये थे। मुझे बांहों में भरे हुए ही वो बेड पर लुढक गई, और मैं उसके पर लुढक गया।
उसने मेरे लबों को अपने लबों से दबोच लिया और प्यारी प्यारी किस्स्सी करने लगी।
टनननननन टननन, तभी पांच बजे का अलार्म बजना शुरू हो गया। मैंने हाथ मारकर अलार्म बंद किया और वापिस सोनल को किस करने लगा। थोड़ी देर किस करने के बाद सोनल ने धक्का देकर मुझे साइड में लुढ़का दिया और खुद उठ गई।
मम्मी उठने वाली होगी, अब मैं चलती हूं, बेड पर से उतरते हुए सोनल ने कहा।
मैंने उसका हाथ पकड़ लिया, प्लीज एक बार और करते हैं ना, मैंने कहा।
नहीं, अब बिल्कुल भी नहीं, मम्मी उठ गई तो प्रॉब्लम हो जायेगी, सोनल ने अपना हाथ छुड़ाते हुए कहा।
और अपना हाथ छुड़ाकर कपड़े पहनने लगी। मैंने भी ज्यादा नहीं कहा।
सोनल कपड़े पहनकर बेड पर झुकी और पहले मेरे होंठों पर एक किस की और जैसे ही उठने लगी तो उसकी नजर मेरे झटके खाते हुए लिंग पर पड़ी तो उसने मुस्करा कर एक किस मेरे लिंग पर दी और बायें कहते हुए चली गई। मैं थोड़ी देर और लेटा रहा और फिर उठकर कपड़े पहने और बाहर छत पर आकर टहलने लगा।
मैंने नीचे गली में देखा, पड़ोस वाले अंकल आंटी घूमने के लिए पार्क में जा रहे थे, तो मैं भी पार्क में घूमने के लिए चल पड़ा।

हाय! काफी दिनों बाद दिखाई दिये, पार्क में घुसते ही स्वीट सी आवाज मेरे कानों में घुल गई।
मैंने आवाज की दिशा में देखा, मोनी थी, परन्तु आज उसका डॉगी उसके साथ नहीं था।
हाय, बस कुछ बिजी था तो आने का टाइम नहीं मिला, मैंने उसके सवाल का जवाब देते हुए कहा।
मोनी घास पर टहल रही थी। मैं जाकर उससे थोड़ी दूरी पर घास पर बैठ गया, कुछ देर टहलने के बाद मोनी भी मेरे पास आकर बैठ गई।
उसके बदन से उठती खूशबू मेरी नाथूनों में भर गई और मैं मदहोश हो गया।
वॉव, यार आज तक ये समझ में नहीं आया कि ये लड़कियां ऐसा क्या लगाती हैं, कि इतना बदन हमेशा ही महकता रहता है, मैंने मोनी की तरफ देखते हुए कहा।
मेरी बात सुनकर मोनी मुस्करा दी।
कुछ नहीं, आज तो मैंने बस हलकी सी क्रीम ही लगाई थी, परफयूम भी नहीं लगाया, मोनी ने मुस्कराते हुए कहा।
तुम्हें मुझसे से कोई खूशबू आ रही है, मैंने मोनी की तरफ सरकते हुए कहा।
मोनी ने मेरे पास अपना चेहरा किया और सूंघ कर कहा, नहीं।
मैंने सुबह क्रीम, डियो, दोनों चीज लगाई थी, फिर भी महक नहीं आ रही और तुमने सिर्फ क्रीम ही लगाई थी, फिर भी ऐसे महक रही हो।
ये तो हमारे बदन की नेचुरल महक है, इसी से तो लड़के पागल हो जाते हैं लड़कियों के पिछे, मोनी ने मेरी तरफ आंख मारते हुए कहा।
शायद मुझे अपने मम्मी पापा के साथ देखकर वो मुझसे कुछ ज्यादा ही खुल गई थी, इसलिए इतनी खुलकर बात कर रही थी।
हूं, पर ------,,, फिर मैं कुछ सोचकर चुप हो गया।
क्या, पर----, मोनी ने पूछा।
कुछ नहीं, बस वैसे ही, मैंने बात टालते हुए कहा।
सोनी जी के कैसे हाल-चाल हैं, मैंने कहा।
तुम्हें सोनी के बारे में कैसे पता, मोनी ने थोड़े आश्चर्य से कहा।
यहीच, यहीच तो प्रॉब्लम है तुम लड़कियों की, कि तुम्हारा दिमाग घुटनों में होता है, मैंने चुटकी लेते हुए कहा।
ऐसा कुछ नहीं है, और आप है ना, ऐसे बेइज्जती ना करो लड़कियों की, आजकल लड़कियां लड़कों से आगे हैं।
वो तो होंगी ही, लड़कों को पिछे ज्यादा मजा जो आता है, इसलिए वो आगे जाने देते हैं, मैंने कहते हुए उसकी तरफ आंख मार दी।
मतलब क्या है आपका, आप है ना मुझसे ज्यादा दो-अर्थी बात मत करो, मैं सब समझती हूं आपकी बात का मतलब, सोनी ने मुंह बनाते हुए कहा।
अब समझाने के लिए ही तो मैंने बात कही है, अच्छा हुआ आप समझ गई नहीं तो मुझे समझाना पड़ता तो मुश्किल होती, मैंने हंसते हुए कहा।
देखो, मैं ऐसी वैसी लड़की नहीं हूं, आप है ना तमीज से बात करो, मोनी ने फिरसे मुंह बनाकर कहा।
लो जी, हर बार तो आपको आप कहकर ही बोला हूं, और कुछ गलत भी नहीं कहा है, फिर भी आप खामखां नाराज हो रही हैं, मैंने हंसते हुए कहा।
छोड़ो, आप ये बताओ की सोनी को कैसे जानते हो, मोनी ने बात बदलते हुए कहा।
लो भूल गई, आपने ही तो बताया था कि आप दो बहनें हो, सोनी और मोनी, मैंने अपने पैरों को सीधे करते हुए कहा।
और मैं अपने पैरों को सीधा करके हाथ पिछे टिका कर बैठ गया। हाथ पिछे करते वक्त मेरे हाथ मोनी के कुल्हों से टकरा गये और मैंने उसके कुल्हों से सटाकर ही अपना हाथ रख दिया। मेरी उंगलियां थोड़ी सी उसके कुल्हों के नीचे घुस गई थी।
मैंने मोनी की तरफ देखा, उसका चेहरा थोड़ा सा लाल हो गया था, पर उसने खुद को हटाया नहीं।
आपके घर में कौन कौन है, मोनी ने शरमाते हुए पूछा। (शरमा वो मेरे हाथ के कारण रही थी)।
जी हम तो अकेले ही रहते हैं, अब कोई है नहीं आप जैसा साथ रहने के लिए, मैंने मुस्कराते हुए कहा।
क्यों, मम्मी-पापा नहीं रहते साथ में, मोनी ने कहा।
मम्मी-पापा गांव में रहते हैं, यहां पर मैं अकेला ही रहता हूं, मैंने कहा।
मोनी मेरी बात सुनकर मुस्कराने लगी, आप कहा रहते हैं, मोनी ने कहा।
यही पास में, वो गली में मुडकर जो कोने वाला मकान है, उसी में सबसे उपर वाली मंजिल पर रहता हूं, कभी आइयेगा, मैंने कहा।
जरूर, आप बुलायेगें तो जरूर आउंगी, मोनी ने कहा।
अचानक मेरे हाथ पर शायद चींटी ने काटा होगा, जिससे मैंने हाथ को एकदम से उठाकर सामने लाया। झटके से उठाने के कारण मेरा हाथ मोनी के कुल्हों से घर्षण करता हुआ उपर को हुआ तो उसके बूब्स से साइड से छू गया। मैं हाथ को देखने लगा।
क्या हुआ, मोनी ने पूछा।
सॉरी, शायद चींटी ने काट लिया, मैंने उसे सॉरी बोलते हुए कहा।
सॉरी क्यों, मोनी ने कहा।
मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा, वो ऐसे बिहेव कर रही थी कि जैसे मेरा हाथ उसके शरीर से टच हुआ ही ना हो।
बस ऐसे ही, मैंने बात टालते हुए कहा और फिर से अपना हाथ उसके शरीर से रगड़ते हुए पिछे ले जाकर गया और अपनी कोहनी को घास पर टिका दिया और अपना हाथ उसके दूसरी तरफ लेजाकर उसके कुल्हे पर सैट कर दिया। इस तरह से मेरी दो उंगलियां तो उसके कुल्हों के नीचे थी और बाकी की दो उसके कुल्हें पर साइड से रखी हुई थी, जैसे तरबूज को एक हाथ से पकड़ते हैं उस प्रकार। और मेरा अंगूठा उसके पिछे की तरफ उसके कुल्हों के बीच की गहराई में टच हो रहा था।

मैंने अपना हाथ इस तरह से रख तो लिया था, पर मेरे दिल की धड़कन एकदम बढ़ गई थी और मुझे उम्मीद भी थी कि मेरे गालों पर एक चांटा आने वाला है, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ।
इसके उलटे मोनी ने भी अपने पैरों को आगे की तरफ इस फैला दिया, उसका एक पैर मेरे पैर पर आकर टिक गया, जिसे मेरी जांघें साइड से उसकी जांघों से सट गई। उसने अपने हाथ भी पिछे घास पर टिका दिये और बैठ गई।
उसके इस तरह बैठने से एक फायदा ये हुआ कि अब वो मेरे से बिल्कुल सटकर बैठी थी, परन्तु इससे ज्यादा नुकसान ही हुआ, क्योंकि मेरा हाथ उसके कुल्हों के नीचे दब गया था और नीचे की जमीन में पड़ी छोटी छोटी कंकर उंगलियों में चुभ रही थी।
मोनी का चेहरा लाल हो गया था और वो सामने की तरफ देख रही थी। मेरे चेहरे पर दर्द की शिकन साफ महसूस की जा सकती थी, पर वो तो तब उसे पता चलता जब वो मेरी तरफ देखती, वो तो बस सामने ही देखे जा रही थी और मंद मंद मुस्करा रही थी।
आप क्या करते हैं, मेरा मतलब किस चीज की तैयारी कर रहे हैं, उसने सामने देखते हुए ही कहा।
अब तक तो आपको समझ जाना चाहिए था कि मैं किस चीज की तैयारी कर रहा हूं, मैंने कहते हुए अपनी उंगलियों को थोड़ा सा उसके कुल्हों पर दबा दिया।
मेरी द्वारा कुल्हों को दबाये जाने पर वो समझ शायद वो समझ गई कि मैं क्या कहना चाहता हूं, और उसके गाल धीरे धीरे फड़कने लगे और साथ ही उसकी एक आंख भी।
मेरा मतलब वो नहीं था, उसने कहते हुए अपना पैर उठाकर मेरे पैर पर अपनी ऐडी से वार किया।
आउच, तो क्या था, अब मुझे क्या पता क्या मतलब था आपका, जो मेरी समझ में आया मैंने बता दिया, मैंने अपना दूसरा पैर उसके पैर के उपर जो कि मेरे पैर पर रखा हुआ था, रखते हुए कहा।
मेरी उंगलियों में अब ज्यादा दर्द होने लगा था तो मैंने उसके कुल्हें को मुट्ठी में भर लिया, सोनी के मुंह से हल्की सी सिसकारी निकली, जिसे वो दबा गई।
मेरे पैर को उसके पैर के उपर रखने से उसकी पैर घुटनों से थोड़े से उपर तक मेरे पैर के उपर था। उसके कुल्हों को मुट्ठी में भरने से उसका उस पैर का दबाव मेरे नीचे वाले पैर पर बढ़ गया।
बताओ ना क्या करते हो, मोनी ने हकलाते हुए सा कहा।
अब पहले मतलब समझा दो कि किस के बारे में पूछ रही हो, नहीं तो फिर कहोगी कि मेरा ये मतलब नहीं था, मैंने अपने पैर को उसके पैर पर थोड़ा सा दबाते हुए कहा।
मेरा मतलब है कि आप काम क्या करते हो, किसी चीज की कोचिंग कर रहे हो या, फिर अभी पढ़ रहे हो, या जॉब करते हो, अब की बार उसने अच्छी तरह से समझाते हुए कहा।
ओह तो आप ये पूछना चाहती थी, पहले ही ऐसे कहना चाहिए था ना, मैंने कहा।
तो अब बता दो, अब तो समझा दिया कि क्या पूछना चाहती हूं, मोनी ने कहा।
मैं जॉब करता हूं, आई-टी- फील्ड मैं, तुम क्या कर रही हो, मैंने कहा।
आई-टी- फील्ड में, सॉफ्रटवेयर इंजीनियर हो, मोनी ने अबकी बार मेरी तरफ देखते हुए कहा।
मैंने उसकी तरफ आंख मारी, नहीं, वेब डेवलपर हूं।
वॉव, वेब डेवलपर, फिर तो एक मेरी भी वेबसाइड बनाना, बढ़िया सी, मोनी ने चहकते हुए कहा।
आप क्या करती हो, मैंने पूछा।
मैं तो एम-टेक कर रही हूं, इलेक्ट्रोनिक्स से, जेएनयू से, उसने कहा।
वाह, बहुत खूब, इलेक्ट्रोनिक्स से, मैंने कहा।
आप मेरी वेबसाइड बनाओगे ना, प्लीज, मोनी ने कहा।
किस चीज की वेबसाइट बनवानी है तुम्हें, मैंने कहा।
हम्मममम--- अभी सोचा नहीं है, पर आप तो बना देना बस, मैं सोचकर बता दूंगी, उसने अपने होंठों पर उंगली रखते हुए कहा।
ठीक है जी, आप बता देना, मैंने अपना घर तो आपको बता ही दिया है, आ जाना कभी भी, जब आप सोच लो कि किस चीज की बनवानी है।
तभी उसका मोबाइल बजने लगा।
ओ-के, अब मैं चलती हूं, नहीं तो कॉलेज के लिए लेट हो जाउंगी, कहकर वो अपने कुल्हों को मेरे हाथ पर मसलते हुए उठ गई।
क्रमशः.....................
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06-09-2018, 02:15 PM,
#30
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--30
गतांक से आगे ...........
उठते हुए उसने अपना एक हाथ मेरी जांघों पर रख दिया और दूसरा हाथ मेरे कंधे पर रखकर सहारा लेकर उठी तो उसके बूब्स मेरे कंधे पर दब गये, एकदम नर्म नर्म बूब्स थे।
उसके खड़े होने के बाद मैं भी उठ गया, वो वायें कहते हुए चली गई। उसके जाने के बाद मैं कुछ देर पार्क में टहला और फिर वापिस रूम पर आ गया।
मैंने नाश्ता बनाया और ऑफिस के लिए तैयार हो गया, अभी आठ ही बजे थे तो मैंने सोचा चलो कुछ देर आंटी के पास चलते हैं। ये सोचकर मैं नीचे आ गया।

दरवाजा खुला था, मैं अंदर आ गया, आंटी किचन में थी,
गुड मॉर्निंग आंटी, मैंने आंटी से कहा।
गुड मॉर्निंग बेटा, आंटी ने कहा।
अब दर्द कैसा है, मैं दोपहर को आ जाउंगा, फिर डॉक्टर के पास चलेंगे, मैंने कहा।
अभी तो आराम है बेटा, पर डॉक्टर को तो दिखाना ही पडेगा, आंटी ने रोटी सेकते हुए कहा।
गुड मॉर्निंग, मेरे पिछे से आवाज आई। मैंने पिछे पलटकर देखा तो मैं देखता ही रह गया।
कितनी ही बार मैं इसे पूरी तरह नंगी देख चुका था, और भोग चुका था, पर आज जब वो नहाकर बाथरूम से बाहर आई तो उसने शरीर पर बस एक तौलिया लपेटा हुआ था, जो उपर से उसके आधे उभारों के दर्शन करा रहा था और नीचे से बस उसकी योनि को ही ढांप रहा था, बाकि उससे नीचे उसकी मांसल जांघें जिनपर पानी की हल्की हल्की बूंदे चमक रही थी, साफ दिखाई दे रही थी। मेरी नजर तो बस हटने का नाम ही नहीं ले रही थी।
गुड मॉर्निंग, मैंने उसे हाथ से ओ बनाते हुए मस्त लगने का इशारा किया और उसके गुड मॉर्निंग का जवाब दे दिया।
सोनल अपने रूम में चली गई और मैं आंटी से बातें करने लगा। कुछ देर बाद सोनल कपड़े पहनकर बाहर आई।
उसने व्हाइट कलर की स्लीवलैस कुर्ती पहनी हुई थी जो थोड़ी थोड़ी चमक भी रही थी, कुर्ती उसके उभारों पर इस तरह से थी जैसे दो कपड़ों को तिरछे करके एक दूसरे के उपर रख दिया जाता है, और उनके बीच में जो गेप बन जाता है, उसमें से उसकी कातिल क्लीवेज दिखाई दे रही थी। नीचे कुर्ती उसके कुल्हों से बस थोड़ी सी नीचे थी, जो कि उसके कुल्हों पर कसी हुई थी और शेप को उजागर कर रही थी। कुर्ती पर बूब्स के पास तिरछी किनारों पर ब्लैक कलर की डिजाइन और सेम वही डिजाइन नीचे की किनारियों पर भी था। नीचे उसने ब्लैक कलर की सलवार पहनी हुई थी।
मेरा तो लिंग एकदम उछाल मारकर जींस को फाड़ने को हो गया, बहुत ही होट लग रही थी, पता नहीं कॉलेज के लड़कों का क्या हाल होगा आज तो, मैंने मन ही मन सोचा।
मेरी नजर उसपर से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी, सोनल चलते हुए मेरे पास आई और मेरे गालों पर उंगली फिराती हुई रसोई में चली गई।
उसकी इस कातिल अदा ने तो मेरा कल्त ही कर दिया बस। और वोही बात जो सभी लड़कियों में पाई जाती है, जैसे ही वो मेरे पास से गुजरी उसके बदन से उठती महक मेरी नथूनों में भर गई।
जैसे ही वो अंदर जाने लगी मैंने उसके कुल्हों पर एक थप्पड मार दिया। उसने कातिल अदा से पिछे चेहरा घुमाकर मेरी तरफ घूरते हुए देखा और फिर सीधे किचन में घुस गई।
ओ-के आंटी अब मैं चलता हूं, कहकर मैं बाहर की तरफ आने लगा।
तभी मुझे धयान आया की बाइक में पटरोल तो है ही नहीं।
सोनल स्कूटी की चाबी देना, बाइक में तेल ही नहीं है, मैंने वापिस मुड़ते हुए कहा।
मैं रसोई के दरवाजे तक पहुंच गया था, तब सोनल रसोई से बाहर आ रही थी, जैसे ही वो बाहर निकली मैंने उसके कुल्हों पर चुटकी काट ली।
आह----- सोनल के मुंह से निकला।
क्या हुआ बेटी, अंदर से आंटी की आवाज आई।
कुछ नहीं मम्मी, कहते हुए सोनल ने मुझे एक मुक्का मारा और अपने रूम की तरफ चल दी। उसने चाबी लाकर मुझे दी और मेरे कान में कहा, दो मिनट रूकना, मैं भी आ रही हूं।
चाबी लेकर मैं नीचे आ गया और एक प्लास्टिक वाली दो लीटर की बोतल लेकर पैटरोल लेने के लिए चल पड़ा। पम्प पर कुछ भीड़ थी, इसलिए बीस मिनट लग गए वापिस आने में। जब मैंने स्कूटी अंदर खडी की तो सोनल नीचे ही आ रही थी।
कहां गये थे, सोनल ने नीचे आते ही मुझसे पूछा।
मैंने पैटरोल की बोतल उसके चेहरे के सामने कर दी। सोनल थोड़ी सी पिछे हो गई।
आज मेरे साथ चलो ना, अब कहा पैटरोल के हाथ करोगे, इसको रख दो, शाम को आकर डाल लेना।
अच्छा, अभी तो तुम्हारे साथ चल पडूंगा, पर शाम को फिर बस से आना पडेगा। फिर मैंने कुछ सोचा।
चलो ठीक है, मैंने सोचते हुए कहा।
मेरी हां सुनकर सोनल ने मेरे गले में बाहें डाली और मेरे होंठों पर एक किस्सससी ले ली।
ठीक है, ठीक है, अब इतना प्यार दिखाने की जरूरत नहीं है, चलो अब। मैंने पैटरोल की बोतल को वहीं पर रखा और पिछे वाली सीट पर बैठ गया।
आप चलाओ ना, सोनल ने मुंह बनाते हुए कहा।
नहीं, तुम चलाओ, मैं पिछे बैठकर मजा लूंगा।
सोनल अनमने मन से आगे बैठ गई और स्कूटी स्टार्ट की और बाहर आ गये। मेरे नजर सामने वाले मकान पर पड़ी तो वहां पर टू-लेट का बोर्ड लगा हुआ था, शायद अभी अभी लगाया था।
मैंने सोनल से पूछा, ये सामने वाले घर में टू-लेट लगा है। पहले इन्होंने किराये पर दे रखा था क्या।
सोनल: नहीं, पहले ये खुद ही इस्तेमाल करते थे, उपर वाले पोर्शन के लिए टू-लेट लगाया है।
वो मकान हमारे मकान के सामने था, बीच में गली थी। उसमें एक अंकल-आंटी रहते हैं, बाकी बच्चों को तो मैंने एक दो बार ही देखा है उस घर में। शायद दो लड़कियां हैं उनकी और दो लड़के। चारों बाहर ही रहते हैं। कभी कभार ही आते होंगे।
सोनल ने स्कूटी को मंजिल की तरफ बढ़ा दिया। मैं आराम से पिछे बैठा था। सोनल बार बार पिछे की तरफ होकर मेरी छाती में अपनी कमर मार रही थी।
क्या है, आराम से नहीं बैठ सकती, मैंने सोनल से कहा।
पर वो कहां मानने वाली थी, बार बार वैसे ही मेरी छाती में कमर से वार करती रही।
हम मेन रोड पर आ गये थे। अब कोई टेंशन नहीं थी। मैंने अपने हाथ उसके पेट पर कस दिये और आगे होकर उसकी कमर से अपनी छाती चिपका दी और उसके कंधे पर ठोडी रखकर आराम से बैठ गया। फिर मैंने अपने गाल को उसके कंधे पर रख दिया और उसकी गर्दन पर अपने होंठ फिराने लगा। उसे गुदगुदी हो रही थी शायद, वो बार बार अपनी गर्दन को हटाने की कोशिश कर रही थी।
मैंने अपने हाथ की उंगलियों को थोड़ा सा उपर की तरफ किया जो सीधी उसके उभारों से जा टकराई। उसकी उस कुर्ती में ऐसा लग रहा था कि मैं सीधे उसके नंगे उभार से हाथ टच कर रहा हूं। मैंने अपने हाथों से थोड़ा सा टटोला तो मुझे लगा कि उसने नीचे ब्रा वगैरह कुछ नहीं पहनी है। मैंने ब्रा की स्टरेप को ढूंढने की कोशिश की पर नहीं मिली, फिर मैंने हाथों को नीचे किया और उसकी कुर्ती को उपर उठाकर देखा तो समीज भी नहीं था।
पर मुझे यकीन नहीं हो रहा था। मैं उसके कान में फुसफुसाया, तुमने ब्रा नहीं पहनी। उसने शर्माते हुए नहीं में गर्दन हिला दी।
समीज भी नहीं पहना, मैंने फिर से उसके कान में कहा।
नहीं, उसने थोड़ा सा शर्माते हुए कहा।
मैंने अपने हाथ सीधे उसके उभारों पर रख कर दबा दिये, उसके मुंह से हलकी सिसकारी निकली, और साथ ही निकला, हटाओ कोई देख लेगा।
मैंने थोड़ा सा उसके उभारों को दबाकर वापिस अपने हाथ उसके पेट पर रख दिये। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि उसने ब्रा नहीं पहनी है, क्योंकि उसके उभार एकदम शेप में थे।
हम्मम,, लगता है हमेशा ही गीली रहती है तो तुम जो बगैर ब्रा के भी तुम्हारी चूचियां सीधी तनी हुई हैं।
ऐसी ही हैं मेरी चूचियां, औरों की तरह नहीं हैं लटकी हुई, मैं गरम नहीं होती तब भी ये नहीं लटकती। हमेशा तनी हुई रहती हैं।
मैंने उसे जोर से बाहों में भीच लिया।
ओह शिटटटटअअअअअअअअ मर गये, सोनल ने ब्रेक लगाते हुए कहा।
क्या हुआ, मैंने पूछा।
सामने देखों, मामू खडे हैं, उसने कहा। तब तक एक पुलिस वाला हमारी तरफ ही भागता हुआ, सीटी बजाता हुआ आ रहा था।
दरअसल वो मोड मुड़ते ही थोडी सी दूरी पर खड़े थे, जिससे दूर से दिखे नहीं, पर अब कुछ नहीं हो सकता था। दोनों में से किसी ने भी हेलमेट नहीं पहना था।
चलो साइड में लगाओ, पुलिस वाले ने आते ही चाबी निकाल ली और साइड में इशारा करते हुए कहा।
मैं नीचे उतर गया और सोनल ने स्कूटी साइड में खडी कर दी।
हेलमेट क्यों नहीं है, चलो लाइसेंस दिखाओ, पुलिस वाले ने कहा।
सोनल का चेहरा तो एकदम देखने लायक हो गया था। घबराओ मत, मैंने सोनल से कहा।
मैंने अपना लाइसेंस निकाल के दिखाया, पुलिस वो का धयान पूरी तरह से हमारी तरफ नहीं था। वो बार बार इधर उधर देख रहा था।
कागज दिखाओ, लाइसेंस देखते हुए पुलिस वाले ने कहा।
जी वो चाबी, वो कागज लॉक में रखे हैं, सोनल ने पुलिस वाले से कहा।
हेलमेट क्यों नहीं लगाया, चालान कटेगा, पुलिस वाले ने कहा।
तो सर मना कौन कर रहा है, काट दो, मैंने बीच में ही कहा।
पुलिस वाला मुझे घूरकर देखने लगा। स्कूटी ये चला रही थी, ना तुम अपना लाइसेंस दिखाओ।
सोनल ने स्कूटी पर से अपना बैग उठाया और चैन खोलकर लाइसेंस ढूंढने लगी।
जी ये लीजिए, लाइसेंस निकाल कर सोनल ने पुलिस वाले से कहा।
हम्मममम----- चलो ठीक है, आगे से हेलमेल पहनकर चलना, चलो अब 50 रूपये निकालो और चलते बनो।
उसने सोनल का लाइसेंस वापिस कर दिया।
आप चालान काटिये, मैंने उससे कहा।
चालान पांच सौ का कटेगा, 50 में काम चल रहा है, चलो जल्दी दो।
सोनल बैग में से पर्स निकाला, और पैसे निकालने लगी।
क्या कर रही हो, पागल हो क्या, सोनल से कहा।
आप चालान काटिए कोई दिक्कत नहीं, आप पांच सौ क्या, हजार का काटिए, मैंने पुलिस वाले से कहा।

दे दो ना पैसे, अब कहां चालान भरते फिरेंगे, सोनल ने मुझसे कहा।
आप चालान काटिए, मैंने फिर से कहा।
वो मुझे घूरते हुए देखने लगा और फिर अपने दूसरे साथी को आवाज लगाकर हमारी तरफ इशारा किया।
जाओ, उधर जाकर कटवाओ, उसने नाराज होते हुए कहा।
मैंने आगे खडी पुलिस की गाड़ी के पास जाकर चालान कटवाया। अपना लाइसेंस लिया और चल पडे।
सोनल थोड़ी नाराज सी लग रही थी। उसने पूरे रास्ते बात नहीं की। ऑफिस पहुंचकर उसने मुझे उतारा और बगैर कुछ बोले ही चली गई। मैं अंदर आ गया, अपूर्वा की स्कूटी खडी थी, मैंने टाइम देखा तो मैं पंद्रह मिनट लेट हो गया था। जैसे ही मैं अंदर घुसा सामने से बोस बाहर आये।
गुड मॉर्निग सर, मैंने सर को कहा।
गुड मॉनिंग, लेट कैसे हो गये, सर ने कहा।
सर वो बाइक में पेैटरोल खत्म हो गया था, तो उस चक्कर में लेट हो गया।
आज हम बाहर जा रहे हैं, घूमने फिरने, तो तुम चाहो तो छुट्टी कर लो, बॉस ने कहा।
ठीक है सर, एक काम भी है, तो मैं बारह बजे निकल जाउंगा, मैंने कहा।
मैं ऑफिस में आ गया।
वॉव, लगता है आज तो किसी का कत्ल करने का इरादा है, मैंने ऑफिस में घुसते ही कहा।
गुलाबी तंग कुर्ती, बहुत ही महीन सी थी, ब्रा की स्ट्रैप साफ झलक रही थी, नीचे महीन व्हाइट पजामी, जिसमें से पेंटी लाइन साफ दिखाई दे रही थी, कुल्हों की शेप को इस तरह उजागर कर रही थी, मानों कुछ पहना ही ना हो, कुर्ती कुछ उपर उठ गई थी, जिस वजह से पजामी के थोड़ी उपर तक कमर दिख रही थी।
क्रमशः.....................
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