antervasna फैमिली में मोहब्बत और सेक्स
12-01-2018, 01:07 AM,
#21
RE: antervasna फैमिली में मोहब्बत और सेक्स
स्मृति - हे... क्यू बच्चू मज़ा आया. बड़े आए बूब्स दबाने वाले.

स्मृति भी थोड़ा ओपन हो रही थी उसके साथ.

लाइयन - थप्पड़ मारते ही वो स्लो मोशन मे आगे की ओर चल दी और किचन के गेट पर पहुँच कर फिर से एक बार मूडी और मुझे फिर से एक स्माइल दी. थप्पड़ खाने के बावजूद मे उसके बदन का भूखा था.

लाइयन - कैसी लगी मेरी चेस्ट???

स्मृति - मुझसे क्यू पुच्छ रहे हो?

लाइयन - नही मेने लिप्स को अलग करते हुए उससे पुछा कि कैसी लगी मेरी चेस्ट और वो कुच्छ नही बोली. मे समझ गया कि उसे पसंद आई. मेने अपने आपको झुकाया और अपने लिप्स को स्मृति के बूब्स पे रख दिया, मेरा स्टाइल थोड़ा अलग है तो मे उन्हे दबा भी रहा था और चूस भी रहा था. स्मृति आअहह करे जा रही थी.

स्मृति - क्या आराम से पेश नही आ सकते थे.

लाइयन - लेकिन स्मृति जी वो बोले तो सही. वो तो ऐसे पेश आ रही थी जैसे कब से अपनी चुचियाँ मुझसे ही दब्वाने को बचा कर रखी हो. ये काफ़ी देर चला फिर मेने अपने हाथ स्मृति की पैंटी की तरफ बढ़ाए. पैंटी जैसे ही थोड़ी नीचे हुई मुझे समझ आ गया कि जितनी खूबसूरत स्मृति है उतनी ही खूबसूरत उसकी चूत है. उसकी चूत पे घने बाल थे.

स्मृति - छ्ह्हि, गंदी कहीं की.

लाइयन - क्यू तुम्हे घने बाल अच्छे नही लगते.

स्मृति - वैसे मे तुम्हे क्यू बताऊ? लकिन फिर भी हिंट दे देती हू कि मुझे क्लीन रहना पसंद है.

लाइयन - बिल्कुल क्लीन?

स्मृति - यस. और अब ज़्यादा मत पुछो. बताओ क्या हुआ.

लाइयन - उसकी पैंटी नीचे होते ही मेने उसे लेटने का इशारा किया स्मृति के लेट ते ही मेने अपना मूँह उसकी चूत पे लगा दिया.

स्मृति को ऐसा लगा जैसे वो मर ही जाएगी. 3 बच्चो की मा होने के बावजूद आज वो एक कमसिन लड़की की तरह फील कर रही थी. उसको फील होने लगा था कि बॉडी मे फीलिंग आ चुकी है.

स्मृति - फिर?

लाइयन - मे स्मृति की चूत को पागलो की तरह चाट रहा था. वो बड़बदाए जा रही थी कि क़िस्स्सस्स मी....... कभी का ही अपने लिप्स वहाँ से हटा कर अपनी 2 फिंगर उसकी चूत मे घुसा देता था. कितना पानी था पता नही उसकी चूत मे. गर्दन इधर उधर पटक रही थी. मे समझ गया था कि इसको प्यार की ज़रूरत है लेकिन बदनामी से डरती है. उसकी चूत को करीब 10 मिनिट तक मे ऐसे ही चूस्ता रहा.
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12-01-2018, 01:08 AM,
#22
RE: antervasna फैमिली में मोहब्बत और सेक्स
स्मृति मन ही मन सोच रही थी कि झूठा कहीं का. 10 मिनिट मे तो कितनी बार उसका रस निकल जाता.

लाइयन – वो मेरे बाल खींचने लगी थी, मे समझ गया था कि आग अब बहुत बढ़ गयी है और ज़्यादा करने से लॉस हो सकता है. मेने अपने होंठ हटाना ही सही समझा, थोड़ी देर बाद वो उठ कर बैठ गयी जब तक मे अपनी जीन्स खोल चुका था. वो आगे बढ़ी और और मेरी फ्रेंची के उपर से ही उसने मेरा लंड पकड़ लिया. उसकी आँखे ही बता रही थी कि उसे कितना सुकून मिला मेरे लंड का अहसास मिलने से.

स्मृति की हालत अब फाइनल स्टेज पर पहुँच गयी थी. एक जगह बीत कर उसका हाथ उपर से ही अपनी चूत पे पहुँच गया था. एग्ज़ाइट्मेंट के सागर मे वो डूबती जा रही थी. लाइयन उस पर अपना पूरा जादू चलाने मे कोई कमी नही छोड़ रहा था.

लाइयन – स्मृति जी यू देअर्?

स्मृति – यू कॅरी ऑन प्लीज़….

लाइयन – वैसे आप क्या कर रही है?

स्मृति – डॉन’ट आस्क, प्लीज़ बताओ फिर क्या हुआ.

लाइयन – प्लीज़ माइंड कीजिए अगर मे लंड चूत जैसे गंदे शब्द यूज़ कर रहा हू.

स्मृति – अब तो तुमने आदत ही डाल दी है. प्लीज़ बताओ मुझे कि फिर क्या हुआ.

लाइयन – स्मृति नीचे बैठी, मेरी फ्रेंची नीचे करी और मेरा लंड बाहर निकाल लिया. मेरे लंड को देख कर उसके फेस पे एक मुस्कुराहट थी. उसने टाइम वेस्ट नही किया और अपनी गुलाबी लिप्स को खोल कर मेरा लंड अपने मूँह मे ले लिया

स्मृति – एक बात बोलू ?

लाइयन – बोलो जी

स्मृति – यू आर सो रोमॅंटिक…..

स्मृति ने ये बात टाइप करके भेजी ही थी कि ट्रिपल ऐक्स_लाइयन ऑफलाइन हो गया. स्मृति की ऐसी हालत हो गयी जैसे उसे कोई सेक्स के दौरान छोड़ कर चला गया हो.

दर असल, स्मृति अपने उपर से अपना कंट्रोल खोती जा रही थी. उसकी चूत को लाइयन बुरी तरीके से गीला कर चुका था. स्मृति की ऐसी हालत सेक्स के दौरान भी नही होती थी. वो एक शरीफ लेडी थी लेकिन उसके अंदर छुपि हुई भावनाओ को लाइयन जगा चुका था. जिसका अहसास स्मृति को नही हो पाया था. वो काफ़ी टाइम तक उसका वेट करती रही लेकिन वो ऑनलाइन नही आया. उसका मन अब सफाई मे नही लग रहा था, वो उठ कर अपने रूम की ओर चल देती है.

दूसरी तरफ आराधना उठ चुकी है. नॉर्मली सनडे को सभी बच्चे देर तक सोते है लेकिन आज एक नयी मॉर्निंग थी आराधना की लाइफ मे और इस एग्ज़ाइट्मेंट मे वो जल्दी उठ गयी थी. वो नहा कर बाथरूम से बाहर आती है. वॉर्डरोब से एक टी-शर्ट निकालती है और उसे देख कर वो वापिस रखने लगती है क्यूंकी उसे याद आ जाता है कि ये वो ही टी-शर्ट है जो उसे बूब्स पे से बेहद टाइट है जबकि वो लूस क्लोदिंग ही प्रिफर करती थी. ये इन्सिडेंट उस दिन का है जब प्रीति उसके रूम मे आई थी. फिर एक मुस्कुराहट के साथ पता नही क्यू वो ये फ़ैसला करती है आज उसी टीशर्ट को पहनेगी वो. उसके फेस पर एक मुस्कान थी जिसमे वो और भी खूबसूरत लग रही थी. बाथरूम के अंदर जाकर वो ब्रा पहनती है और पैंटी भी. पैंटी पहन ने से पहले एक बार फिर से अपनी छोटी सी पुस्सी पे हाथ लगाती और खुद ही चिहुनक जाती है. ब्रा पहन ने के बाद वो टीशर्ट पहनती है लेकिन टीशर्ट पहनते ही उसे अहसास हो जाता है कि ब्रा को उतारना पड़ेगा नही तो टी-शर्ट नही आएगी. वो बिना ब्रा के ही टी-शर्ट पहन लेती है और उसके नीचे एक बर्म्यूडा. जो कि उसके नीस तक था. नॉर्मली वो ऐसे कपड़े अवाय्ड ही करती थी.

अब वो बिना ब्रा के टी–शर्ट पहन कर नीचे आने लगती है आज मोम को सर्प्राइज़ दूँगी जल्दी उठ कर. सीढ़ियों से उतरते टाइम उसके बूब्स ऐसे हिल रहे थे मानो उनके किसी कपड़े मे समेट कर रखना पासिबल ना हो उन बूब्स को. वो नीचे आने पे देखती है कि सफाई तो की गयी है लेकिन मोम दिखाई नही दे रही है. वो किचन मे जाती है लेकिन वहाँ पर भी कोई नही था. वो मोम डॅड के बेड रूम की तरफ बढ़ती है, बेड रूम मे वो घुसने ही वाली थी एक सीन उसके कदम रोक देता है.
उसके चेहरे मे जैसे बॉडी का सारा लाल रंग उतर आया हो. ऐसा क्या देख लिया उसने? नज़ारा की कुच्छ ऐसा था, जिस टाइम वो बेडरूम मे घुसने वाली थी उस टाइम उसने देखा कि बेड पे पंकज बैठा है और उसका विशाल लंड उसकी मा स्मृति के मूँह मे था. पंकज ने सिर्फ़ टी-शर्ट पहनी हुई थी और स्मृति ने ब्रा और पैंटी. दोनो के बाकी कपड़े बेड से नीचे पड़े हुए थे. स्मृति पंकज के लंड पर झुकी हुई थी जबकि पंकज की आँखे सॅटिस्फॅक्षन से बंद थी. शायद ये पहला मौका था जब स्मृति ने उसके लंड को अपने मूँह मे लिया था. दोनो को आराधना ने क्लियर देखा लेकिन उन दोनो मे से किसी की नज़र आराधना पे नही पड़ी और उन्हे आइडिया भी नही था कि सनडे के दिन बच्चे इतनी जल्दी उठ सकते है.

ये पहला ऐसा सीन था जब आराधना ने किसी कपल को ऐसी हालत मे देखा हो वो भी तब जब वो अपनी जवानी की चरम सीमा पे थी. वो चीज़ जिसने उसको अंदर तक हिला दिया था – वो था पंकज का लंड. “क्या लंड ऐसे होते है” आराधना के मन मे शायद यही ख्याल आ रहा था. जिस तरीके से स्मृति का मूँह खुला हुआ था तो क्लियर पता चल रहा था कि उसे अपने मूँह को खोलने बहुत मेहनत करनी पड़ रही है और पंकज के लंड को मूँह मे लेने मे. आराधना साइड मे खड़े होकर तेज तेज साँसे लेने लगती है, उसको ऐसा फील हो रहा था जैसे फीवर हो गया हो. वो रह रह कर यही सोच रही थी कि कहाँ मास्टरबेशन मे दो फिंगर यूज़ नही कर पाई तो स्मृति इसे कैसे अड्जस्ट करती होगी.
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12-01-2018, 01:08 AM,
#23
RE: antervasna फैमिली में मोहब्बत और सेक्स
दरअसल इस सीन से पहले जब स्मृति अपने पति के रूम में गई थी तो तब तक उसकी हालत लॉयन खराब कर चुका था, सेक्स किए हुए उसे भी बहुत दिन हो चुके थे और लॉयन जैसे किसी अनजान ने उसके जज्बातों को भड़का दिया था,

स्मृति जब अपने रूम में पहुंची थी तो उसने पंकज को जगा हुआ पाया, तभी उसने डिसाइड कर लिया कि आज वह पंकज के साथ सेक्स करके ही रहेगी नहीं तो बहुत मुश्किल हो जाएगी, पंकज की हालत सिमरन पहले ही खराब कर चुकी थी और तभी से उसे भी कुछ नसीब नहीं हुआ था, इधर स्मृति कमरे में पहुंचकर बेड़ पर जा चढ़ी और पंकज के ठीक सामने आकर खड़ी हो गई, पंकज की दोनों सीधी टांगे स्मृति के टांगों के बीच में थी और फिर उसे स्मृति ने एक स्माइल दी जिसने पंकज को समझा दिया की स्मृति को आज प्यार की जरूरत है ,पंकज स्मृति का हाथ पकड़ कर खींचता है और अपने सीने से लगा लेता है ,आज स्मृति पंकज कि वह ख्वाहिश भी पूरी कर देना चाहती थी जो उसने कभी नहीं की थी यानि उसके लंड को चूसने की इच्छा ,थोड़ी देर के लिए उनके हाथों का मंथन चला और उसके ठीक बाद स्मृति ने पंकज का लंड निकाला और उसे अपने मुंह में ले लिया ,पंकज को ऐसे लगा जैसे ऊपर वाले ने उसकी कैसे सुन ली ,

इसी दौरान आराधना तैयार होकर नीचे आ गई और उसने पंकज और स्मृति को इस हालत में देख लिया था ,आराधना उन दोनों के बेडरूम के गेट पर साइड में खड़ी थी ,उसने अपनी पीठ दीवार से लगा दी थी और आंखें बंद थी ,उसको जैसे पंकज का लंड देखकर चक्कर सा आ गया हो , जिसे स्मृति खूब मन से चूस रही थी, आराधना की यह अवधारणा बन चुकी थी कि शायद मम्मी इसे रोज ऐसे ही चुस्ती होगी, लेकिन उसे भी पता नहीं था कि आज स्मृति भी किस आग से गुजर रही है जो लॉयन भड़का चुका था, बड़ी हिम्मत करके आराधना ने फिर से अंदर झांकने की कोशिश की ,अंदर का नजारा और भी हॉट था, पंकज अपनी टी-शर्ट उतार रहा था और उसका आधा लंड अभी भी स्मृति के मुंह में था ,आधा लंड मुह में होने के बावजूद भी काफी लंड बाहर ही था ,पंकज ने जैसे ही अपनी टी शर्ट उतारी उसकी बालों से भरी मजबूत छाती नंगी हो गई, एकदम माचो मैन लग रहा था, 

स्मृति अपना मुंह ऊपर नीचे करके उसके लंड को पूरा अंदर लेने की कोशिश कर रही थी ,लेकिन वह जा नहीं रहा था ,उसके लंड की नसों को देखकर आराधना को ऐसा लग रहा था जैसे वह अभी फटने वाला है, लेकिन उसे नहीं पता था कि लंड की यह खासियत होती है

आराधना फिर से अपने आप को पीछे कर लेती है ,उसके पांव कांप रहे थे, दिल की धड़कन बहुत बढ़ गई थी, सर चकरा रहा था ,कल रात ही उसने पहली बार हस्तमैथुन किया और आज सुबह ही उसे एक मजबूत लंड दिखाई दे गया ,उसे भी समझ नहीं आ रहा था कि आखिर उसकी जिंदगी में किस्मत ये कैसा खेल रहे खेल खेल रही है,

तभी उसे अंदर से पंकज की आवाज सुनाई देती है वह कान लगाकर गौर से सुनने की कोशिश करती

पंकज - “पूरा अंदर लेना डार्लिंग” पंकज स्मृति से कह रहा था
स्मृति - “यह कोई बच्चों का लोलीपोप नहीं है ,मुझे ही पता है कि मैं इसे कैसे अंदर ले रही हूं, इससे ज्यादा मुझसे नहीं होगा “स्मृति ने अपने मुंह से पंकज के लंड को हटाकर यह बात कही
पंकज - “ मेरी जान मर्दों के लंड तो ऐसे ही होते हैं, कहो तो बाहर से कोई छोटा खिलौना ले कर आता हूं” पंकज स्मृति को चिढ़ाते हुए कहते हैं
स्मृति - “मुझसे यह गंदी लैंग्वेज में बात मत किया करो” और फिर से स्मृति ने अपना मुंह उसके लंड पर दोबारा लगा दिया

बाहर खड़ी आराधना ने जब अपने पिता के मुह से लंड शब्द को सुना तो वह भी शॉक रह गई, और वह रोमांचित भी थी, शायद उसे यह सब अच्छा भी लगा और शायद उसने यह भी सोचा होगा कि पति पत्नी कितने पर्सनल होते हैं ,बाहर तो किसी के रूप का कोई पता नहीं चलता और असलियत में वह कैसी भाषा में बात करते हैं, पता नहीं आज वहां खड़ा रहना आराधना के लिए बहुत मुश्किल हो रहा था, उसके बर्दाश्त से सब चीजें बाहर होते जा रहे थे, उसका कुंवारा और जवान मन पागल होता जा रहा था, उसके चेहरे पर कुछ गंभीर भाव भी थे ,लेकिन यह क्यों थे पता नहीं ,उसे अब रुकना बेहद मुश्किल सा हो रहा था, लेकिन वह अपने कदम भी नहीं हिला पा रही थी ,बड़ी हिम्मत करके वह थोड़ा आगे को बढ़ी , वह दबे पांव निकलने की सोच रही थी कि तभी उसके पांव उसे धोखा दे गए और एक मामूली सी आवाज ने पंकज का चेहरे को बाहर की तरफ घुमा दिया ,जब नियति कोई चीज होती है तो उसे कोई भी नहीं टाल सकता ,जैसे ही थोड़ी आवाज हुई आराधना ने अपने कदम रोक लिए

और रूम की तरफ देखा और उनकी तरफ देखते ही पंकज और आराधना की नजर मिल गई, आराधना इस टाइम साइड पोज़ में पंकज के सामने थी जिससे उसके बूब्स की शेप पंकज को क्लियर दिखाई दे रही थी, आराधना को Idea था कि अब शायद वो घबरा जाएंगे और मां को वहां से हटाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ ,पंकज की तरफ से कोई रिएक्शन नहीं था ,उसने अभी दोनों हाथों से स्मृति के चेहरा पकड़ा हुआ था जो उसके लंड को चूसने में मस्त थी ,करीबन 10 सेकंड तक दोनों की नजरें मिली रही और पता नहीं कितने टाइम में दोनों की नज़रों ने एक दूसरे से क्या कहा ,आराधना की सांसे ऐसी ऊपर नीचे हो रही थी कि मानो पता नहीं क्या हो गया हो, कुंवारी लड़की का लंड देखना ठीक ऐसा ही जैसे किसी ने अपने बेडरुम में कोई सांप या बिच्छू देख लिया हो ,आराधना और पंकज की नजरें अभी भी मिली हुई थी, कमाल की बात यह थी कि कोई सिचुएशनल ड्रामा नहीं हो रहा था, जैसे कोई शर्मा कर नजरे चुराई या फिर पंकज उठकर गेट बंद करें,


आराधना फाइनली अपनी नजर निचे करती है और ऊपर की ओर जाने लगती है, उसके चेहरे पर ना जाने क्यों गुस्से के भाव थे, वह धीरे धीरे ऊपर आ जाती है और डायरेक्ट बाथरुम में घुस जाती है, बाथरूम में जाते ही वह अपनी टी-शर्ट उतार कर फेंक देती है और बाथ टब के कोर्नर में बैठ जाती है, उसने अब ऊपर कुछ नहीं पहना हुआ था ,रह रह कर उसको वह सब याद आ रहा था जो उसने नीचे देखा था, बोटम में वह कंफर्टेबल फील नहीं कर रही थी तो उसे भी उतारने का फैसला किया उसने, 

उसको ऐसा फील हो रहा था जैसे सिर दर्द हो रहा हो, बॉडी में मीठा मीठा दर्द हो रहा था ,वह ख्यालों में खोई हुई थी, उसको अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि उसने मॉम डैड को ऐसे ओपन में यह सब करते हुए देख लिया था ,जबकि तीन जवान बच्चे घर में ही है, और क्या वह यह सब रात से ही कर रहे हैं, क्या सेक्स ऐसी चीज है कि रात में भी पेट नहीं भरता उनका ,यह सब सवाल उसके दिमाग में घूम रहे थे,

जरुर ज्यादा आग मां को ही लगी हुई है ,तभी तो कितने प्यार से हो पापा का लंड ........वह सोचते हुए रुक जाती है, 
“हां शायद मैं सही हूं डेड तो नॉर्मल थे लेकिन माँ ज्यादा उतावली हो रही थी, रात में उनका पेट नहीं भरा इतने बड़े साइज को भी वह बार-बार लेने की हिम्मत रखती है “ स्मृति की एक इमेज उसके मन में बनती जा रही थी पता नहीं क्या सोचते सोचते उसका एक हाथ अपने पहुंच गया और जैसे ही उसी को टच किया उसे समझ आ गया कि उसका बेहद ज्यादा असर हुआ है 

“क्या मेरी उम्र सही है यह सब सोचने की” आराधना के दिमाग में यह सवाल आ रहे थे, कहीं इससे मेरे फ्यूचर पर तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा ,पता नहीं वह क्या क्या सोचने में बिजी थी 

सोचते सोचते फिर से उसकी एक उंगली अंदर जा चुकी थी ,वह ऊँगली को अंदर से और अंदर तक पहुंचाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसके दिमाग में बस वही सीन घूम रहा था जो वह नीचे देख कर आई थी, जो उसे और ज्यादा एक्साइट कर रहा था, बाथ टब पर बैठना से उसे कम्फ़र्टेबल नहीं लग रहा था तो बाथरूम के फ्लोर पर ही बैठ गई, उंगली अंदर और बाहर हो रही थी लेकिन उसे थोड़ा और आरामदायक करने के लिए उसने अपनी टांगे और ज्यादा फैला दी जिससे उसके उंगली और भी स्मूथ होकर अंदर जाने लगी थी ,वह बिना ब्रा और पैंटी की थी यानि बिल्कुल नंगी, ये आराधना स्टाइल नहीं था लेकिन नीचे के सीन ने उसकी आग को और बढ़ा दिया था 

दूसरी तरफ स्मृति पंकज का लंड चूसने में लगी हुई थी ,लेकिन पंकज का ध्यान कहीं और ही था, वैसे भी पति को पत्नी का क्रेज एक लिमिटेड टाइम तक ही रहता है, स्मृति को ये आशा थी कि आज वह पंकज के लंड को चुसेगी तो पंकज भी उसे ओरल सेक्स का सुख देगा ,लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ, स्मृति जैसे ही उसके लंड से हटी पंकज बोला कि डार्लिंग अब नहीं रात को प्लान बनाएंगे

स्मृति को तो जैसे सारे अरमान मर गए, उसे लगा कि दुनिया के सारे गम उसी पर टूट पड़े हो, एक झटके में वो बेड से उतरी और कपड़े उठाकर बाथरुम में घुस गयी ,कहा जाता है कि आग और औरत की आग को बुझाया न जाए तो पूरा घर हिला देती है 


आराधना धीरे धीरे अपनी स्पीड बढ़ा चुकी थी ,उसका एक हाथ चुत पर था तो दूसरा अपने बूब्स पर पहुंच गया था ,वह बहुत ज्यादा एक्साइटेड हो गई थी और यही था जो वह कर सकती थी
आह्ह्ह ओह्ह्ह्हह के बेहद गर्म साउंड उसके गुलाबी होठों से बाहर आ रहे थे, और कुछ ही मिनटों में वो ठंडी पड़ गई, उसे अब की बार कुछ ज्यादा ही मजा आया ,उसके दिमाग में फिर से बहुत सारे सवाल आ रहे थे कि हर बार उसका मज़ा बढ़ रहा है लेकिन कहीं तो इसका एंड होगा आखिर यह कैसी प्यास है जो जितना बड़ा उतना ही बढ़ती है 

कल रात से वह दो बार हस्तमैथुन कर चुकी थी और अब आराम करना चाहती थी इसलिए बेड पर आ कर लेट गई

संडे शाम को पूरी फैमिली शॉपिंग जाने के लिए रेडी थी ,लेकिन सबके माइंडसेट कहीं ना कहीं डाइवर्ट है, खैर नॉर्मल तो सभी देख रहे थे ,पंकज ने अपनी गाड़ी घर के गेट पर लगा दी ,स्मृति सबसे आगे पंकज के साथ बैठ गई ,और पीछे वाली 3 सीटों पर आराधना उसके बाद कुशल और सबसे अंत में प्रीति बैठी हुई थी, आराधना और स्मृति ने सूट पहना हुआ था जबकि प्रीति ने जींस और टी-शर्ट 

गाड़ी घर से बाहर निकल गई, सब शांत हैं पंकज नॉर्मल म्यूजिक ऑन कर देता है ,पंकज अपने ड्राइविंग मिरर में पीछे देखता है और उसे आराधना के नेचुरल गुलाबी होंठ दिखाई दे जाते हैं, वह अपनी गर्दन को थोड़ा सा और नीचे करता है तो मिरर में ही उसकी नजरें आराधना से मिल जाती हैं, पंकज उसे एक नॉर्मल सी स्माइल देता है लेकिन वो ऐसे मुंह फेर लेती है जैसे उससे गुस्सा है ,पंकज को यह बड़ा अजीब लगा,



स्मृति पता नहीं किसके ख्यालों में गुम है और कुछ नहीं बोल रही है, कुशल का असली गुस्सा प्रीति पर था जो कि उसे कल से ही आ रहा था लेकिन वह कुछ बोल नहीं रहा था ,पूरी गाड़ी में एक सन्नाटा जिसे प्रीति तोड़ती है

प्रीति –“क्या भाई बड़ा अपसेट सा लग रहा है सब ठीक तो है ना , तू तो तो शॉपिंग के लिए बड़ा एक्साइटेड था” प्रीति ने कुशल को चिढ़ाते हुए कहा 
कुशल - " नहीं यार बस ऐसे ही सोच रहा हू की आज क्या क्या ख़रीदूँ"। कुशल ने बात को टालते हुए कहा

प्रीति -" ठण्डा पानि, हे हे हे हे"। प्रीती ने कुशल के कान के क़रीब आकर स्लो वौइस् में कहा

कुशाल -" तेरी चूत में डालने के लिए?" कुशल ने भी उसी स्टाइल में आराम से प्रीति के कानो में कह दिया जिसे और आस पास वाले नहीं सुन सकते थे क्यूंकि म्यूजिक चल रहा था। प्रीती इस बात को सुनकर समझ सकती थी की कुशल में कितना गुस्सा है अभी भी।

" पापा आज गर्मी भी बहुत है प्लीज आइस क्रीम पार्लर पे तो जरूर लेकर चलना"। कुशल में पंकज से कहा 


" हाँ हाँ क्यूँ नहीं, क्यूँ आराधना तुम्हारा क्या सोचना है" पंकज ने मिरर में देखते हुए ही आराधना से पुछा,आराधना ने भी जवाब दिया कि क्यों नही

पंकज - " क्यों स्मृति, तुम्हारा क्या ख्याल है आइस क्रीम के बारे में?" पंकज स्मृति से पूछ्ता है।

स्मृति - "मेरा मूड नहीं है", स्मृति ने जवाब दिया


" हाँ तेरा क्यों मूड होग, जब घर बेठे बेठे ही vip आइस क्रीम चूसने को मिल रही है", आराधना अपने मन में ही सोचती है, पता नहीं क्यूँ वो स्मृति के बारे में ऐसा सोच रही थी


खैर थोड़ी देर की ड्राइव के बाद वो मॉल पहुँच जाते है, सबसे आगे स्मृति और पंकज है, उनके पीछे आराधना और सबसे पीछे प्रीती और कुशल,
पंकज स्मृति का हाथ पकड़ लेता है और ये सब आराधना देख रही थी, उसके चेहरे पे स्माइल जरा भी नहीं थी

पीछे कुशल और प्रीती दोनों शांत थे, लकिन प्रीती उस चुप्पी को तोड़ती है -

प्रीति - " ओए होए कुशल आज तो हीरो बन जाएग, नए कपडे लेकर। " 

कुशल -" मुझे हीरो बनने के लिए नए कपड़ो की जरुरत नहीं है" कुशल ने ऐटिटूड में आकर कहा

प्रीति - " कितनी ग़लतफ़हमी है तुझे, हा हा हा हा ह, आइना देखा कर डैली"

ये बात बोल कर प्रीती तेज तेज आगे आराधना के पास जाने लगती है, कुशल की निगाहें बस उसके मटकते हिप्स पर थी, जीन्स बेहद लो वेस्ट और टाइट थी और उसने एक शार्ट टीशर्ट पहनी हुई थी जिससे उसकी जीन्स और टीशर्ट के बीच में खाली स्पेस था, कुशल ने गौर से देखा तो खाली स्पेस में उसकी रेड पैंटी दिखाई दे रही थी जिसकी एक मामूली सी स्ट्राइप स्टाइल में जीन्स से बहार थी।


" लड़की को इतना सेक्सी भी नहीं होना चहिये" कुशल अपने मन में सोच रहा था, प्रीती की गाँड की तरफ देखते हुए, तभी प्रीती ने पीछे मुड कर देखा और कुशल को अपने हिप्स को घुरता पाया

" तेरे नसीब में नहीं है"। प्रीती ने पीछे मुड कर कुशल से कहा और है आराधना दीदी के पास भाग कर पहुँच गयी

अब कुशल पीछे अकेला रह गया था, उसकी निगाहें बस प्रीती के हिप्स पर ही जमी हुई थी और जमे भी क्यों न, जो स्लोप उसकी कमर में कुशल देख रहा था ऐसा स्लोप तो आज कल कम ही देखने को मिलता है

प्रीति को भी पूरा अहसास था कि कुशल की निगाहें कहाँ है तो वो और भी मटक मटक के चल रही थी

आगे प्रीती और आराधना चलते चलते बाते करते है -

प्रीति -" दीदी क्या बात है, कहाँ खोयी रहती हो आज कल, कोई इश्क विश्क का तो चक्कर नहीं है"प्रीती ने मजाकिया अंदाज़ में आराधना से कहा

आराधना -" मैं ऐसे चक्करो में नहीं पडती" आराधना ने रिप्लाई किया

प्रीति -" हाँ में तो भूल गयी थी कि हमारी दीदी हिटलर है, हे हे हे हे"


आराधना -" अगर मुझे ये चक्कर अच्छे नहीं लगते तो मैं हिटलर हो गयी?"

प्रीति -" दीदी अगर आप जैसी ही थिंकिंग सभी लड़कियों की हो गयी तो इन सब लड़को का क्या होगा, इनका तो जीवन ही बेकार हो जाएगा, लेकिन चलो छोडो, ये बताओ की आज क्या खरीद रही हो? आज तो कुछ ऐसा ले लो जिससे बिजली गिर जाए चारो तरफ"। प्रीती ने फिर शरारती अन्दाज़ में कहा

आराधना - " मुझे ऐसे कपडे पसन्द नहीं है जिनसे बिजलियाँ गिरे और मुझे हमेशा पुरे कपडे पहनने ही पसंद है, तेरी तरह नहीं जो है पैंटी दीखाती घूम रही है",आराधना ने प्रीती की पैंटी की विज़िबल स्ट्राइप की तरफ इशारा करते हुए कहा

प्रीति - " ओह्ह हो, कहीं ऐसा तो नहीं है की आप जेलस फील कर रहीं है, और वैसे भी दीदी क्या करु , कैसे छुपाऊँ इस बॉडी को, ये साली छिपति ही नही" प्रीती ने बड़े ही रोमांटिक अंदाज़ में कहा और फिर वो हंसने लगी



*****

आराधना - " जेलस? मैं क्यों जेलस होने लगी तेरे से, सेक्सी अगर चाहूं तो मैं भी दीख सकती हू लेकिन मैं ऐसा चाहती नहीं, "

प्रीति - " वो तो ठीक है लेकिन दीदी आज कल ब्रांड्स पुरे कपडे बनाने में भी डरते है, बिकते ही नहीं, जो बिज़नेस टिका हुआ है वो आप जैसी क्लास कस्टमर्स के दम पर ही टीका हुआ है,", प्रीती ने फिर से एक तीर छोड़ दिया,

इतने मैं आगे जाकर पंकज और स्मृति रूक गए और बच्चो का इंतज़ार करने लगे, धीरे धीरे आराधना, प्रीती और कुशल तीनो वहां पहुँच गए, 

" आज हम बाते बनाने नहीं शॉपिंग करने आये है" पंकज ने मजाक में सब बच्चो से कहा, और फिर तीनो एक बहुत बड़े ब्रांडेड शो रूम में घुस जाते है, पंकज और स्मृति अभी भी साथ साथ थे और आराधना उनके पीछे चल रही थी,

प्रीति लेडीज वेस्टर्न डिपार्टमैंट में घुस गयी थी क्यूंकि वो वेस्टर्न क्लोथ्स की शौकीन थी, कुशल भी प्रीती के पीछे चलने लगता है,

प्रीति -" तू कहाँ मेरे पीछे पीछे आ रहा है?",

कुशाल -" सोचा तेरी हेल्प कर दूँ शॉपिंग मे",

प्रीति - " मैं कोई दूध पीती बच्ची नहीं हू और न ही पहली बार शॉपिंग कर रही हूँ, तू जा अपने डिपार्टमैंट में", और प्रीती कुशल के चेस्ट पर हाथ लगा कर पीछे धक्का देने लगती है,

कशाल -" मेरा डिपार्टमैंट? क्या तू नहीं है मेरा डिपार्टमैंट", ये बात सुनकर प्रीती शर्मा जाती है,

प्रीति -" कुशल हर टाइम मज़ाक़ नहीं, प्लीज तू जा अपने कपडे ख़रीद, नहीं तो अगर मदद करनी ही है तो जा आराधना दीदी की कर दे"

कशाल -" आराधना दीदी को एक बुरका गिफ्ट कर देता हूँ, उनकी शॉपिंग खत्म हो जाएगी, हा हा हा हा", और कुशल मेन डिपार्टमैंट की तरफ जाने लगता है, 

****

आराधना अभी भी पंकज और स्मृति के पीछे थी, लेकिन पंकज और स्मृति को अब अहसास नहीं था और वो इस ख्याल में थे कि तीनो बच्चे जा चुके है, चलते चलते पंकज अपना एक हाथ स्मृति की कमर पे रख देता है लकिन स्मृति एक झटके में हटा देती है, आराधना ये सब देख रही थी, फिर पंकज और स्मृति दबी आवाज में बात करने लगते है, लेकिन आराधना के कान वहीपर थे -

पंकज -" क्या बात है ,मेरी जान क्यों गुस्सा है?", पंकज ने चलते चलते कहा

स्मृति - " मैं क्यों होने लगी गुस्सा",

" नख़रे तो देख, पूरी रात ऐसी तैसी करने के बाद भी नखरो की कमी नहीं है", आराधना अपने मन में ही बड़बड़ा रही थी,

पंकज - " डार्लिंग, क्या अभी तक मॉर्निंग वाली बात पे गुस्सा हो? चलो आज रात फिर मूड बना लेंगे, टेंशन क्यों लेती हो", पंकज ने स्मृति को रिलैक्स करते हुए कहा

स्मृति - " पता नहीं क्यों मेरे लाइफ में प्यार की कमी है", स्मृति ने सीरियस होते हुए कहा

आराधना का मुँह खुला का खुला रह गया ये बात सुनकर, " इतना बड़ा डण्डा लेने के बाद भी प्यार की कमी है लाइफ में, हे भगवान आखिर मेरी माँ की डिमांड क्या है, पता नहीं डैडी इतने नखरे क्यों झेल रहे है", आराधना अपने मन में सोचती है,

थोड़ा सा आगे चलने के बाद एक मॉडल गर्ल स्टेचू आती है जिसपे एक नाईट गाउन लगा हुआ था जो बेहद सेक्सी था, पिंक कलर में शिफॉन मटेरियल और वो भी बिलकुल ट्रांसपरेंट, नाईट गाउन का टॉप पोरशन ब्रा स्टाइल में ही था और नीचे एक एडिशनल पैंटी दी हुई थी, नाईट गाउन की जो लेंथ थी वो सिर्फ पैंटी तक ही थी, उस नाईट गाउन को देख कर पंकज रूक जाता है

पंकज -" स्मृति क्यों न आज तुम इसे लो" पंकज स्मृति को वो नाईट गाउन दीखाता है,

स्मृति - " अगर आपको पहनना है तो ले लो", स्मृति ने ऐटिटूड दिखते हुए कहा

पंकज - " डार्लिंग, मेरा दिल है कि मैं तुम्हे इस ड्रेस में देखु तो बुराई क्या है",

समृति - " क्या मेरे दिल की सारी बाते सुनी जाती है जो मैं सुनु",

पंकज -" गुस्सा क्यों होती हो, जो लेना है ले लो", आराधना ये सब बाते सुन रही थी,

इस तरफ प्रीति, एक बेहद सेक्सी और शार्ट ड्रेस को देख रही थी, ड्रेस का कलर रेड था, ड्रेस की लेंथ प्रीती की जांघ तक होगी, वो उस ड्रेस को लेकर एक सेल्स गर्ल के पास जाती है, 

********

प्रीती -" एक्सक्यूस मी, क्या आप मुझे बता सकती है कि इस ड्रेस के साथ बॉटम कौन सा चलेगा", प्रीती ने सेल्स गर्ल से पुछा

सेल्स गर्ल - " नहीं इस ड्रेस के लिए आपको किसी बॉटम की जरुरत नहीं है, ये ड्रेस आपकी थाइज तक रहेगा,"

प्रीति -" कहीं ये ज्यादा छोटी तो नहीं है?"

सेल्स गर्ल -" आपके जैसी सेक्सी गर्ल के लिए ही तो ये बनी है, एक बार ट्राय तो करिये और अपने बॉय फ्रेंड को दिखाइये, कसम से कहती हूँ इलेक्ट्रिक शॉक लग जाएगा", सेल्स गर्ल ने एक आँख दबाते हुए कहा

प्रीति - " बॉय फ्रेंड? कौन बॉय फ्रेंड?",

सेल्स गर्ल -" वो ही जिसे आप इतने प्यार से इस डिपार्टमेंट से बाहर भेज रहीं थी, वाकई में शायद दीवाना है आपका", प्रीती समझ गयी थी कि वो कुशल की बात कर रही है और उसकी आँखे एक आईडिया के साथ चमक जाती है,

प्रीति -" क्या मैं एक बार ट्राय करके ये ड्रेस अपने बॉय फ्रेंड को दिखा सकती हूं?" प्रीती ने बहुत ही भोला बनते हुए कहा

सेल्स गर्ल-" ये भी कोई कहने की बात है, कहो तो आपके केबिन में ही भेज दूँ, वैसे भी अभी क्राउड इतना नहीं है?" सेल्स गर्ल में फिर से नॉटी स्टाइल में बोली

प्रीति - " प्लीज आप मेरा ये काम कर दीजिये, में ट्राइ कर रही हू और आप उसे अंदर मेरे केबिन में भेज दीजियेगा",

सेल्स गर्ल -" ऑफ कोर्स ,नो इस्सु, हमेशा लवर्स की हेल्प करती हू मैं, आप जाइये और ट्राय करिए",

प्रीति तुरंत उस ड्रेस को लेकर ट्रायल रूम में जाती है, एक झटके में टी-शर्ट उतार देती है, ट्रायल रूम मिर्रर्स में अपने बम टाइप बूब्स को ब्रा में देखति है, उसे खुद भी समझ आा रहा था कि वो कितनी सेक्सी है, दोनों हाथ पीछे ले जाकर ब्रा भी उतार देती है और दोनों बूब्स आाजद, उसके बाद वो है जीन्स को उतारती है, जीन्स उतरने में ही उसकी क्या किसी भी सेक्सी लड़की की सबसे ज्यादा मेहनत लगती है, जैसे तैसे वो भी उतर गयी और उसके बाद पैंटी भी, उसने बिना टाइम वेस्ट किये उस ड्रेस को अपने ऊपर ड़ाला और पीछे से ज़िप बंद करनी चाहि लेकिन फिर पता नहीं क्या सोच कर छोड़ दीं, अपने बाल उसने खोल लिए और फ्रंट से ड्रेस का व्यू थोड़ा सा खोल दिया जिससे बूब्स और थोड़े विज़िबल हो जाए, अभी वो और सेटिंग कर ही रही थी कि तभी ट्रायल रूम का गेट नॉक हुआ,

प्रीति -" हु इस दिस?" 
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12-01-2018, 01:08 AM,
#24
RE: antervasna फैमिली में मोहब्बत और सेक्स
दूसरी साइड से आवाज आई कि योर बॉय फ्रेंड्, प्रीती समझ गयी कि उस लड़की ने अपना काम कर दिया है, प्रीती गेट के पीछे अपने आप को छुपा कर गेट खोलती है और सामने कुशल खड़ा होता है, और कुशल के पीछे वो सेल्स गर्ल, प्रीती उससे इशारे में पूछती है कि कोई प्रॉब्लम तो नहीं है न और वो इशारे में ही बात देती है कि नो इस्यू

अब कुशल प्रीती के ट्रायल रूम में अंदर चला जाता है, और जाते ही गेट बंद कर लेता है,

कुशल -" मुझे यहाँ बुलाने का मतलब", वो प्रीती के सेक्सी स्टाइल को उस रेड हॉट ड्रेस में देखकर सदमें में आ गया था, उसकी बात सुनकर प्रीती घूम जाती है और पीठ उसके सामने कर देती है, "जीप बंद नहीं हो रही प्लीज हेल्प कर दे", प्रीती ने उसे नंगी पीठ दीखते हुए कहा, ये बात सुनकर जैसे कुशल पागल हो गया,

उसने आगे बढ़कर प्रीती को मजबूत बांहो में पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया, प्रीती की पीठ धम्म से आकर कुशल के सीने में लग जाती है, कुशल का हाथ नीचे की ओर बढ़ने लगता है,

" तेरी ज़िप बंद नहीं, आज तेरी चूत खोलूँगा अपने मुसल जैसे लुंड से", कुशल बोलता है और उसके बाल खिंच कर अपने दूसरे हाथ को उसके हिप्स की ओर ले जाता है,

" समझदारी से काम ले, ये कोई तेरा घर नहीं है, और वैसे भी में वर्जिन हूँ, और मेरे साथ सेक्स यहाँ करेगा तो ब्लड कहाँ छुपायेगा, माँ और डैड भी यहीं पर है", प्रीती ने उसे समझते हुए कहा

" तो मुझे यहाँ बुलाने का क्या मतलब है?", कुशल ने थोड़ा सा ढीला होते हुए कहा,

" मुझे लगा कि तेरी हेल्प अपने बूब्स दिखा के कर दु", प्रीती ने अपने ड्रेस को सामने से थोड़ा सा खोलते हुए कहा

प्रीति के बूब्स की झलक पाते ही कुशल पागल होकर उन पर अपना मुँह लगा देता है, " ओह्ह्ह्हह्ह्ह्,,,,,, आराम से ब्रो,,,,,,,,, प्रीती उसे समझाती है, अब कुशल का एक हाथ से उसका बूब्स प्रेस कर रहा था तो दूसरे बूब्स को अपने मुँह में भर रखा था,

" येस्सलससससस,,,,,,,,,, यु आर अमेज़िंग,,,,,,,,,, यु र अ रियल मैन,,,," प्रीती स्लो वौइस् में बड़बड़ाये जा रही थी उसकी आँखे बंद हो चुकी थी, कुशल ने अपना दूसरा हाथ उसकी चूत पर पहुँचा दिया और एक फिंगर सीधा अंदर घुसा दिया, " आआह्ह्ह्हह्हह्ह्,,,,,,, " प्रीती की ये सेक्सी सिसकारियां कुशल को और पागल कर रही थी, वो अब बूब्स को चुस रहा था है एक फिंगर को अंदर बहार किये जा रहा था,

" यू आर वेरी स्वीट एंड नॉटी ,,,,, लव मि ,,,,,, याआ,,,,,,,,, फास्टर प्लीज़,,,,,,,,,", प्रीती चरम सीमा पे थी, " लव यू,,,,,,,, माय डार्लिंग,,,,, वो पागलो की तरह अपने बूब्स कुशल के साथ रगडे जा रही थी, कुशल भी एक बार फिर से कुँवारा और जवान जिस्म अपने हाथ में आा जाने के बद बेक़ाबू हुआ जा रहा था,

" आआआह्ह्ह्ह,,,,,, आआआह्ह्ह्हह्ह्,,,,,, आह्ह्ह्हह्ह्ह्,", कुशल की फिंगर प्रीती की चूत में और तेजी से चल रही थी, वो उसके बूब्स को और सख्ती के साथ चूसे जा रहा था, 
“ओह्ह्ह्ह अम्म्मम्म्म्मम्म्म्म कम्मिंग आअह्ह्ह्ह माय लव लाइक देट आह आह्ह आह आह आअह्ह्ह्ह” और प्रीती अपना पानी छोड़ देती है, अभी कुशल कुछ कहने ही वाला था की गेट कोई बहार से नोक करता है, कुशल की तो जैसे साँसे ही रुक जाती है 

प्रीती हिम्मत से काम लेती है और पूछती है

प्रीती – “कौन है “
दूसरी तरफ से सेल्स गर्ल की आवाज़ आती है की प्लीज़ दरवाज़ा खोलो, प्रीती थोडा सा गेट खोलती है और कुशल उसके पीछे छुपके खड़ा हुआ था 

प्रीती – हां बोलो 

सेल्स गर्ल – आपकी आवाजे बाहर तक आ रही है ,मुझे लगा की आप लोग बस किस ....... प्लीज़ अगर किसी ने कुछ देख लिया तो मेरी जॉब खतरे में पड जाएगी , प्लीज़ आप अपने बॉय फ्रेंड को बाहर भेज दीजिये , सेल्स गर्ल ने रिक्वेस्ट करते हुए कहा 

प्रीती कुशल की ओर इशारा करती है बाहर निकलने के लिए ,कुशल की आँखे ऐसी हो चुकी थी जैसे पता नहीं किस्मत उसे कस कस के थप्पड़ क्यों मार रही है,लेकिन मरता क्या न करता , प्रीती को देखते देखते बहार आ जाता है 

पंकज और स्मृति सभी चीजों को देखने में ही बिजी थे, लेकिन आराधना उनके पीछे नहीं थी, शायद वह कहीं कुछ और ही खरीद रही थी, चलते चलते स्मृति को एक ड्रेस दिखाई देती है लॉन्ग ब्लैक ड्रेस एंड बेक लेस, यह एक स्टेचू पर लगी हुई थी ,जैसे उस ड्रेस पर स्मृति का दिल आ गया 
“मुझे यह चाहिए” उसने पंकज से कहा, पंकज भला उसे कैसे मना कर सकता था, दरअसल यह ड्रेस उस ड्रेस से मिलती थी जिसका जिक्र लॉयन ने किया था, इस ड्रेस के अलावा स्मृति ने कुछ और भी कपडे लिए 
, इधर कुशल का मन शॉपिंग में तो नहीं था लेकिन वह फिर भी इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहता था इसलिए उसने भी कुछ टीशर्ट जींस और कुछ शॉर्ट्स सेलेक्ट कर लिए थे,

सभी लोग अपनी फाइनल शॉपिंग के साथ रेडी थे, लेकिन आराधना का कुछ नहीं पता था, इतने बड़े शोरूम में देखना भी पॉसिबल नहीं था, तभी थोड़ी देर बाद वह भी आती हुई दिखाई देती है और उसके हाथ में भी एक शॉपिंग बास्केट था

स्मृति –“तू कहां गई थी, क्या हो गई शॉपिंग”

आराधना-“ हां मेरी शॉपिंग कंप्लीट हो गई है”

कुशल-“ तो चलो पापा पे करो और फिर कुछ खाने चलते हैं”

और वो सब बाहर आ गये, सभी साथ चल रहे थे तो तभी वहां एक बोर्ड लगा दिखाई दिया “स्केरी हाउस” और कुशल चिल्लाता हुआ बोलता है कि मॉम चलो ना यहां चलते हैं

स्मृति –“इसमें क्या होता है”

कुशल-“इसमें अंदर घना अंधेरा होता है, सभी को एक डोर से घुसकर दूसरे से निकलना होता है, अंदर हम कुछ नहीं देख सकते हैं, और हमे ही रास्ता भी खोजना होता है और अंदर भूतिया टाइप कैरेक्टर भी होते हैं ,बड़ा मजा आएगा, चलों ना मा” कुशल रिक्वेस्ट करता है

स्मृति पंकज की तरफ देखती है और पंकज कहता है कि भाई हमें तो भूख लगी है और अगर तुम जाना चाहते हो तो चले जाओ
फिर स्मृति आराधना से पूछती है लेकिन आराधना का तो एटीट्यूड बदल चुका था इसलिए उसने साफ मना कर दिया
“ तो ठीक है हम दोनों ही घूम कर आते हैं” स्मृति कुशल के साथ जाते हुए कहती है
“ ओके हम फ़ूड कोर्ट में तुम्हारा वेट करेंगे” पंकज बोलता है 

और कुशल अपनी मां का हाथ पकड़कर स्केरी हाउस की तरफ चल देता है, आराधना, पंकज और प्रीती टेबल पर जाकर बैठ जाते हैं, 

पंकज – “तो बेटा तुमने क्या लिया” पंकज आराधना का बैग हाथ में लेते हुए बोलता है , तभी वो बैग आराधना उसके हाथ से छीन लेती है 
आराधना – “आपके देखने की चीज़ नही है “
पंकज –“सॉरी बेटा “

आराधना –“ थट्स ओके डैड,नो नीड टू से सॉरी “

और फिर तीनो नॉर्मल बातों में लग जाते हैं,

दूसरी तरफ कुशल स्केरी हाउस की टिकट ले चुका था और वह दोनों अंदर जाने की तैयारी कर रहे थे,

कुशल –“ माँ, अंदर लोग चिल्लाएंगे, शोर मचाएंगे लेकिन आप घबराना मत और मैं भी आपका साथ नहीं दे पाऊंगा क्योंकि मैं इस थ्रील्लिंग एडवेंचर को अकेले देखना चाहता हूं “

स्मृति –“ओके, आगे जो भी होगा देखा जायेगा ,देखते हैं अंदर का माहौल क्या है”

और दोनों अंदर चले जाते हैं, एक बार तो स्मृति सकते में आ जाती है, बिल्कुल अंधेरा और लाइट का कोई नामोनिशान नहीं, अंदर घुसते ही स्मृति अपने बाएं तरफ चलने लगती है, बेहद डरावनी आवाज आ रही थी उस स्केरी हाउस में, स्मृति का तो गला सूख चुका था 

उसने पीछे मुड़कर देखा तो कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था, उसने धीरे से आवाज़ लगाई कुशल कुशल लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिल रहा था, वह धीरे से थोड़ा और आगे चली लेकिन तभी साइड से एक डरावना चेहरा उसके सामने आ गया और वह चिल्ला कर राइट साइड में हो गई 

वहां पर और भी चिल्लाने की आवाजे आ रही थी, वह समझ गई कि यहां एक आर्टिफिशियल डरावना माहोल बनाया हुआ है, वो थोड़ा सा और आगे बढ़ी , तभी उसने देखा कि एक परछाई उसके करीब आ रही है, वो राइट में होने ही वाली थी कि अचानक उस परछाई ने उसका हाथ पकड़ लिया और एक झटके में अपनी तरफ खींच लिया 

स्मृति बहुत तेज़ चिल्लाई लेकिन उस स्केरी हाउस में सबके चिल्लाने की आवाज़ में उसकी आवाज़ दब गयी ,जिस सख्श ने स्मृति को पकड़ा हुआ था उसने उसे घुमाकर पकडकर अपनी ओर खिंच लिया और अपने सीने से लगा लिया,स्मृति ने फिर चिल्लाना चाहा तो उस सख्श ने मजबूती से उसके मुंह को बंद कर दिया और उसे एक साइड में ले आया ,

वो चिल्लाने की पूरी कोशिश कर रही थी, पर इससे पहले की उसका दिमाग कुछ कम कर पाता , उस इंसान के हाथ आगे बढ़ कर स्मृति के बूब्स पर पहुँच चुके थे और उसने अपने होठों को स्मृति की गर्दन पर रख दिया था ,

स्मृति को तो ये आईडिया भी नहीं था कि ऐसा कुछ भी हो सकता है, स्मृति को लगा कि ऐसे बदतमीजी यहां का कोई स्टाफ कर देता हो और उसे पूरा Idea था कि वह जल्दी उसे छोड़ देगा, लेकिन वह इंसान नहीं रुका और उसने अपना हाथ उसके बूब्स से हटाकर उस के सूट के अंदर ले जाकर उसकी पैंटी तक पहुंचा दिया 

स्मृति एक मजबूत कद-काठी वाली लेडी थी लेकिन वह इस अचानक हुई परिस्थिति के लिए तैयार नहीं थी, उसका दिमाग पता नहीं कहां से कहां पहुंच रहा था कि क्या यह नॉर्मल इंसिडेंट है जो इस स्केरी हाउस में होता रहता है या उसका रेप प्लान है, वह कुछ समझ नहीं पा रही थी 

वह अभी अपने आप को छुड़ाने की पूरी कोशिश कर रही थी, लेकिन पीछे वाला भी कम मजबूत नहीं था, बिना टाइम वेस्ट करें अब उस इंसान ने अपने एक हाथ को स्मृति की पैंटी के अंदर मेन आइटम तक पहुंचा दिया यानी उसकी चुत तक,

ना कुछ दिखाई दे रहा था और बस शोर ही शोर ,इस शोर में स्मृति की आवाज को कोई सुन पा रहा था, ऐसे में स्मृति के माइंड ने भी काम करना बंद कर दिया था, उसको पता था कि डरने से काम नहीं चलेगा, यह जो भी इंसान है जिसने उसे पकड़ा हुआ है वह कोई खूनी नहीं बल्कि इसे शरीर की भूख है , लेकिन अगर वो कुछ करना भी चाहता है तो यहां कैसे कर लेगा,

इस वक्त स्मृति के दिलों दिमाग में बस यही बात घूम रही थी, वह इंसान अभी भी पागलों की तरह स्मृति की गर्दन पर किस किया जा रहा था, दूसरी तरफ उसका हाथ उसकी चुत पर पहुंच चुका था और उसने अपनी दो फिंगर्स को उसकी चुत के अंदर डालना चाहा ,पर ऐसी सिचुएशन में दो फिंगर्स भी ज्यादा थी क्योंकि न ही तो स्मृति एक्साइटेड थी और ना ही उसकी चुत में गीलापन था 

इस वजह से उसे ऐसा दर्द हुआ जैसे किसी लड़की को फर्स्ट टाइम सेक्स में होता है जब उस लड़के ने अपने दो फिंगर्स उसकी चुत में जबरदस्ती घुसा दी 

“ऊऊन्ह्ह............” वो बंद मुंह से ही खूब चिल्लाने की कोशिश कर रही थी और अपने दर्द को दिखाने की कोशिश कर रही थी लेकिन कोई फायदा नहीं होने वाला था 

स्मृति पूरी ताकत लगाकर चिल्लाने की कोशिश कर रही थी और अपनी सांसो की ताकत से उसके हाथों को छुड़ाना चाह रही थी 
उस इंसान ने तेजी से दो उंगलियां अंदर बाहर करना शुरु कर दिया

स्मृति को कुछ भी हिंट नहीं मिल रहा था कि आखिर यह क्या सीन चल रहा है, अगर वह मेरे साथ सेक्स करना चाहता है तो ये ड्रामा क्यों कर रहा है ,यह मेरी चुत की हालत खराब क्यों कर रहा है अपनी मोटी मोटी उंगलियों से 

स्मृति के मंद में एक ट्रिक आई , उसने अपनी बॉडी को बिल्कुल हल्का छोड़ दिया ,ऐसे की जैसे वह बेहोश हो गई हो और छूटने की कोशिश बंद कर दी, उसका रिएक्शन थोड़ा पॉजिटिव हुआ क्यूंकि जिस इंसान ने उसे पकड़ा हुआ था उसे ऐसा लगा जैसे की स्मृति बेहोश हो गयी और उस इंसान ने अपना हाथ उसके मुंह से धीरे-धीरे हटा लिया,

लेकिन उंगलिया अभी भी उसकी चुत में ही थी, “आआआअह्हह्हह्ह .......” स्मृति ऐसे चुल्ली मानो भूकंप आ गया हो ,स्केरी हाउस के भूत भी डर गये होंगे शायद ,पर उस इन्सान ने टाइम न वेस्ट करते हुए फिर से उसको मुंह को कस के पकड़ लिया, उसको समझ आ गया की स्मृति चालाकी दिखा रही है ,स्मृति को भी एक झटके में समझ आ गया चिल्लाने से अब कोई फायदा नहीं होने वाला 

उस इंसान ने अपनी उंगलियों की रफ़्तार और तेज़ कर दी, स्मृति की तो जैसे जान निकले जा रही थी , उसने एक नयी ट्रिक अपनाई, दो तिन बार स्मृति ने अपने कंधो से बेक साइड में खड़े इंसान की चेस्ट में ऐसे पुश किया जैसे वो कुछ कहना चाहती हो शुरू में तो उस इंसान ने कोई रेस्पोंस नही दिया लेकिन फिर जब ज्यादा शोर हो रहा था तो उसने एक चांस दिया स्मृति को बोलने का 

“तुम पागल कुत्ते हो, तुम्हें क्या चाहिए, मेरे पति बाहर ही है, आज तेरा खून होकर रहेगा” स्मृति बहुत ही हल्की आवाज में थोड़ा सा पीछे होकर बोली, लेकिन पीछे से कोई रिस्पांस नहीं मिला और वह इंसान चुप खड़ा रहा और अपनी स्पीड को ऐसे ही जरी रखा ,स्मृति भी अब चिल्ला कर फिर से बोलने का ऑप्शन नहीं खोना चाहती थी

“ मुझे तुम बताओ तुम्हें क्या चाहिए,सेक्स” स्मृति ने प्यार से काम लेना चाहा लेकिन फिर भी उस इंसान ने कोई रेस्पोंस नही दिया 

“कुत्ते भोंक न “ स्मृति का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा था, स्मृति ने इतना ही बोला होगा की उस इंसान ने स्मृति का गत पकड़ा और सीधा पीछे ले जाकर अपने खड़े लंड पर रख दिया, स्मृति की साँसे तो ऊपर की ऊपर और निचे की निचे रह गयी , पहले २ सेकंड तो उसे समझ ही नही आया की ये चीज़ क्या है पर अगले ही पल उसे सब समझ आ गया 


“ये सेक्स के लिए सही जगह नही है “स्मृति ने प्यार से उसे समझाते हुए कहा, उस इंसान ने अपने हाथ उसकी चुत से हटाया और अपने लंड पर ले जाकर रख दिया और बिना कुछ बोले ही उसके हाथ को पकड़ कर दो बार आगे पीछे करके दिखा दिया 

“ओह्ह्ह यू बास्टर्ड !!!!! इस स्केरी हाउस में तूने मुझे अपने मसटर्रबेसन के लिए पकड़ के रखा है “ स्मृति ने फिर एक बार स्लो वौइस् में कहा 

इतना सुनते ही उस इंसान ने फिर से अपना हाथ उसकी सलवार के अंदर घुसा दिया और उसकी चुत में अबकी बार तिन उन्गलीयाँ गुसने की कोशिश करने लगा

“आईई ......”स्मृति को फिर से पैन हुआ लेकिन इस बार उसकी चुत थोडा गीलापन था तो उतनी परेशानी नहीं हुई जितनी की पहले हुई थी 

स्मृति ने भी अब टाइम ना वेस्ट करते हुए सीधा हाथ उसके लंड पर ले गई और उसे चलाना शुरु कर दिया, स्मृति के टच से ही वह इंसान पागल सा हो गया और स्मृति को चूमने लगा, स्मृति को समझ आ रहा था कि यह कोई भूखा है, अब स्मृति ने अपने हाथ को और तेज चलाना शुरु कर दिया क्योंकि वह खुद भी चाहती थी कि जल्दी से इस मुसीबत से छुटकारा मिले

जैसे जैसे स्मृति अपने कोमल हाथ उसके लंड पर फिरा रही थी वैसे वैसे उसका लंड और भी विकराल होता जा रहा था और स्मृति भी अब इस परिस्थिति से गुजर रही थी क्योंकि वह रिलेक्स थी कि यह सिर्फ सेक्सुअल फ्रस्टेसन का मारा है ,वह अपने औरत होने का पूरा फायदा उठाने की कोशिश कर रही थी ताकि जल्दी से जल्दी उस इंसान का पानी निकलवा सके 

उसको टेंशन भी हो रही थी लेकिन कहीं ना कहीं उसका माइंड भी काम कर रहा था कि टेंशन में जितना ज्यादा टाइम लगेगा उतनी ही मुश्किल होगी, 

“क्या मैं इसे ओरल सेक्स से संतुस्ट कर दूँ,शायद यह जल्दी डिस्चार्ज हो जाएगा” स्मृति के माइंड में यही बाते आ रही थी और उसने अपना मुंग उसकी तरफ करना चाह लेकिन उसने अपनी ताकत का यूज़ करते स्मृति को घूमने नहीं दिया, वह इंसान अभी भी अपने तीन उंगलियां स्मृति की चुत में अंदर बाहर कर रहा था 


“यू लोफर , गंवार ,कभी किसी के साथ कुछ किया भी है या नहीं, क्या पूरा हाथ घुसा दिया है मेरे यहां, अपनी एक या दो फिंगर यूज़ कर “ स्मृति ने फिर से एक बार हल्की आवाज़ में उसे धमकाया ,उस इंसान ने इस बार स्मृति की बात को इज्जत दी और अपनी एक फिंगर बहार निकल ली और अब वो बस अपनी दो फिंगर ही यूज़ कर रहा था, स्मृति आज अपने औरत होने का फुल यूज़ कर रही थी , और यही एक तरीका था जिससे वो जल्द से जल्द उस इंसान की कैद से छुट सकती थी 

स्मृति बहुत तेज़ तेज़ हाथ चला रही थी पर स्मृति का माइंड कह रहा था की ये है तो कोई अनाडी पर लंड कमाल का है इसका “ मुट्ठी में भरने के बाद भी करीब पाच से छ इंच बहार होगा 

अब स्मृति ने अपना ब्रम्हास्त्र फेंकना शुरू कर दिया, और अपनी गांड को उसकी बॉडी से मसलना शुरू कर दिया ,

पूरा संसार जानता है कि लडकी के पास दो ही अनबिटेबल हथियार जय जिनसे वो कुछ भी कर सकती है – बूब्स और गांड , खास कर वो भी पूरी तरीके से भरी हुई स्मृति जैसी औरत हो अगर 
वो कुछ बोल नही रहा था लेकिन स्मृति ये फील कर रही थी वो उतेजित होता जा रहा है, उसके साँस लेने की स्पीड बढ़ रही थी और उसका लंड भी और पे और विकराल होता जा रहा था, 


स्मृति फील नही करना चाहती थी लेकिन असल में वो भी बहुत उत्तेजित होती जा रही थी, उसकी चुत का पानी अब और तेज़ी के साथ आने लगा था, स्मृति अपनी गांड को और तेज़ी से हिलाने लगी थी, 
“काम तो तूने ऐसा किया है की तुझे मौत मिलनी चाहिए लेकिन एक बात है दम है तुझमे “ स्मृति ने लो वौइस् में उसको और उत्तेजित करते हुए खा , उसकी साँसे तेज़ होती जा रही थी ,उसकी धडकनों को स्मृति की पीठ फील कर रही थी, स्मृति की चुत में उसकी उँगलियाँ तेज़ी से भाग रही थी और वहीँ पे स्मृति के हाथ में उसका विशाल लंड भी था तो नेचुरल था की कोई भी लेडी उतेजित हो जाती और वी ही स्मृति के साथ हो रहा था लेकिन वो परिस्तिथि के साथ एडजस्ट नही हो पा रही थी 

धीरे धीरे उसका हाथ स्मृति की चुत पे टाईट होता जा रहा था, लें वो अब ही कुछ नही बोल रहा था,स्मृति समझ गयी कि वो अब डिस्चार्ज होने के करीब ही है . स्मृति ने अपना हाथ और तेज़ी से आगे पीछे करना शुरू कर दिया और तभी –“पिछ्ह्ह्ह........”स्मृति ये देखना चाहती थी की आखिर ये कैसा है और वो अपना हाथ लंड के सामने ले जाती है, कई झटको के साथ उसका सारा वीर्य स्मृति की मुट्ठी में भर जाता है 

“ओह माय गोड ......क्या सारा गुस्सा मेरे लिए ही बचा के रखा था” स्मृति लो वौइस् में उसके वीर्य के गढ़ेपन और मात्र को देखते हुए बोली, वो समझ गयी थी की ये जो भी है , सेक्स के लिए पागल है या इसके पास कोई पार्टनर नही है 







उसकी पकड़ स्मृति पे ढीली पड़ती जा रही थी , और तभी स्मृति को लगा कि वो आजाद है , वो तुरंत पीछे मुड़ी पर उसे वहां कोई नही दिखाई दिया, ये अजीब सा इंसिडेंट था उसकी लाइफ में , वो यही सोच रही थी पर फिर उसने सब भूल कर बाहर जाना उचित समझा , वो जैसे तैसे बाहर निकली और सीढ़ी लेडीज वाशरूम में घुस गयी
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12-01-2018, 01:09 AM,
#25
RE: antervasna फैमिली में मोहब्बत और सेक्स
उसके हाथ में अभी भी उस इंसान का वीर्य भरा हुआ था ,वह अपना हाथ छुपाकर वॉशरूम में आ गई और वॉश बेसिन में जाकर धोने लगी ,जैसे जैसे वह वीर्य उसके हाथ से हट रहा था ,स्मृति को भी टेंशन से आजादी मिल रही थी, स्मृति अपने हाथ को धोकर जैसे ही नैपकिन लेने के लिए पलटी उसकी नजरें आराधना से मिल गई जोकि उसी वॉशरूम में आई हुई थी 

स्मृति – “अरे आराधना तुम यहां “
आराधना – “मैं यहां नहीं तो क्या जेंट्स वॉशरूम में जाऊं क्या “
स्मृति– “ अरे मेरा मतलब था कि बाकी सब कहां है” स्मृति ने नॉर्मल होते हुए कहा 
आराधना – “फ़ूड कोर्ट में सब तुम दोनों का वेट कर रहे हैं, मुझे लगा कि तुमने ज्यादा टाइम लगा देना है इसलिए मैं यहां आ गई”
स्मृति – “ठीक है तो तू चल मैं बस हाथ धोकर आती हूं “
आराधना – “पर आपने यह हाथ पर क्या लगा लिया था” आराधना ने उसे हाथ धोते हुए देखे लिया था 

स्मृति – “वह ...वह... कुशल ने कोई गम चिपका दी थी” स्मृति में घबराहट में और कोई बात नहीं निकली 
आराधना – “चलिए तो साथ ही चलते हैं ,आप हाथ पोंछ ले मैं बाहर इंतजार करती हूं “

स्मृति ने अपना फेस वाश किया और आराधना के साथ वॉश रुम से बाहर आ गई, वो अभी वाशरूम से थोड़ी ही दूर चले थे कि दूर से कुशल आता हुआ दिखाई दिया 
कुशल – “अरे मा आप कहां रह गई थी” यह कहकर कुशल अपनी मॉम से जा लिपटा

स्मृति – “ बेटे मैं तो तुझे ढूंढ रही थी लेकिन तू कहीं दिखाई ही नहीं दिया” स्मृति ने नॉर्मल सा जवाब दिया 

“और तु मोम को परेशान क्यों करता है गम वगरह लगा कर” आराधना कुशल को डांटते हुए बोली 
“अब छोड़ भी पहले खाना खा लेते हैं फिर बात करना” इससे पहले कि कुशल कुछ समझ पाता स्मृति ने बात को डालते हुए उसे जवाब दे दिया 
आराधना भी कोई बच्ची नहीं थी ,वो समझ गई की दाल में जरुर कुछ काला है, 
“ कहीं मोम किसी और के साथ तो ......”आराधना के दिल में ख्याल आ रहे थे ,खैर वो फ़ूड कोर्ट पहुंचे और खाना खाया

सभी लोग थक चुके थे तो घर के लिए रवाना हुए, थोड़ी देर में वो सभी घर पहुंच गए ,सब थक चुके थे, वो सभी अपने अपने रुम में चले गए ,आराधना को जैसे सर दर्द हो रहा था क्योंकि उसे तो यही लगने लगा था कि मोम कुछ गलत कर के आ रही है, 

आराधना अपने रूम में पहुंची और गेट को लॉक किया, सारा सामान बेड पर फेंक कर आराधना वॉशरूम में घुस गई क्योंकि उसका शावर लेने का दिल था ,वो शुरू में घुसने के बाद उसने अपना फेस वाश किया और तोलिया लेने के लिए बाहर जाने लगी कि तभी उसकी नजरें बाथरूम के कोने में रखें डस्टबिन पर पड़ी,उसमें कुछ बैलून टाइप चीजें पड़ी हुई थी ,

आराधना देखते ही समझ गई कि वो कंडोम है, आराधना ने करीब जाकर देखा तो वो तीन थे जिनमें वीर्य भी भरा हुआ था

आराधना का तो जैसे खून खौल उठा, वो वाश रूम के बाहर आई तो देखा कि बेड शीट भी अस्त व्यस्त थी ,उसका चेहरा गुस्से में इतना लाल हो चुका था जैसे उसमें खून उतर आया हो, वो एक ही झटके में समझ गई कि जरूर सिमरन ने कुछ गलत किया है क्योंकि वही अपने बॉयफ्रेंड के साथ यहां आने का प्लान बना रही थी

उसने एक झटके में फोन उठाया और तुरंत सिमरन को मिला दिया 

सिमरन –“ हाय जान”
आराधना –“ तू घर आई थी”
सिमरन –“हां स्वीटी आई थी ,अभी थोड़ी देर पहले ही हम निकले हैं वहां से”
आराधना –“मेरे बेडरुम में भी आई थी?”
सिमरन –“तेरे ही बेडरूम में थी मैं ,क्यों क्या हुआ?”
आराधना –“यू बिच, तेरी हिम्मत कैसे हुई हमारे घर में ये सब करने की”
सिमरन –“कंट्रोल योर टंग आराधना ,मैं हमेशा हलके में लेती हूं लेकिन आज तो तू कुछ ज्यादा ही बोल रही है”
आराधना –“लेकिन तुझे मेरा ही घर मिला था अपना मुंह काला करने को और ये अपनी गंदगी तुम मेरे बाथरुम में फेंक कर चली गई, किसने दिया तुम्हें ये अधिकार?”

सिमरन – “आरू मेरी दोस्त सुन, मैंने कोई मुंह काला नहीं किया है, मैंने बस वही किया है जो जवानी में करना चाहिए, सभी लड़कियां करती हैं तो मैंने भी किया तो इसमें इतना ओवर रिएक्ट करने वाली कौन सी बात है, यह मेरी जिंदगी है और मेरा जो दिल आएगा मैं वही करूंगी, हाँ तेरे घर पर जो कुछ कंडोम रह गई वह मेरी गलती है और वह मैं मानती हूं ,अगर तू कहेगी तो मैं खुद आकर उन्हें फेंक दूंगी”

आराधना – “अगर तुझे इतनी ही आग लगी है तो अपने घर वालों से बोलती क्यों नहीं कि तेरी शादी कर दे”

सिमरन – “लिसन डियर, मैं फिजिकल रिलेशन के लिए तैयार हूं ना की शादी के लिए, शादी एक फाइनल स्टेप है और सेक्स के लिए मैं शादी तक का इंतजार नहीं कर सकती तो इसमें गलत क्या है और मैं तुझ से पूछती हूं कि आज कोई तेरे शरीर को आकर प्यार करे तो क्या तेरी चुत ये बोलेगी कि नहीं तू तो शादीशुदा है ही नहीं, फिजिकल नीड और मोरल इन्वायरमेंट में फर्क होता है, तू इतना फ्रस्टेट क्यों रहती है क्योंकि यू आल्सो नीड सेक्स ,लेकिन यह एसी अनजान सिचुएशन है जिसे तू कभी नहीं समझ सकती”

आराधना – “ चल मान भी लिया कि मेरा दिल करता है लेकिन मैं फिर भी शादी तक इंतजार कर सकती हूं, तेरी तरह नहीं की अभी अपनी इज्जत लुटाती फिरु और सेकंड हैंड बनकर हस्बैंड के पास जाऊं”

सिमरन – “तू कर ले इंतजार और जीतले नोबेल प्राइज, मुझे तो अपनी ऐसी ही जिंदगी पसंद है, आज ही सेक्स की फुल डोज दी है मेरे बॉयफ्रेंड ने मुझे, सो प्लीज़ मूड ऑफ मत कर, सच बोल रही हूं कि तेरा पति भी तेरी लेते हुए डरेगा, तू मदर टेरेसा टाइप है लेकिन पतियों को कुछ और ही स्टाइल की वाइफ पसंद होती है”

आराधना – “तू कोई मेरी गॉड फादर नहीं है जो मेरा टाइप बताइगी “

सिमरन – “मुझे भी कोई शौक नहीं है लेकिन तू मेरी फ्रेंड है तो तुझे सलाह दे रही हूं ,तुझे लगता है कि सब बुरे हैं और तू अच्छी है ,यार मेरी बात मान लड़की है तो लड़की की तरह रह ,नहीं तो लोग तेरी पहचान भूल जाएंगे, मैं तुझे याद कराना नहीं चाहती लेकिन तेरे डैडी को भी यह एहसास मैंने ही दिलाया कि तू एक लड़की है नहीं तो उन्हें भी यह एहसास नहीं था” सिमरन थोड़ा सा उत्तेजित होकर एक साँस में सब बोल जाती है 

आराधना – “क्या कहा तूने डैडी के बारे में?”

सिमरन –“मैंने वही कहा जो तूने सुना, मैं तेरे घर आई और तेरे घर को गंदा किया इसके लिए मुझे माफ कर दे लेकिन आज जो मैंने तेरे से बोला है उन सब बातों पर ध्यान दें “और यह बात बोलते ही वो फोन कट कर देती है
आराधना हेलो हेलो करती रह जाती है लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता ,सिमरन की इस 5 मिनट की टॉक ने आज आराधना को एक आइना दिखा दिया था और आराधना सोचने पर मजबूर हो गई थी

बार-बार वो उन कंडोम को देख रही थी ,वो भी एक लड़की थी तो कल्पना करना शुरु कर दिया था कि कैसे उसके बॉयफ्रेंड ने उसे प्यार किया होगा ,उसे गुस्सा भी आ रहा था कि उसने ऐसी बात क्यों बोली कि मेरे डैडी को भी मेरे लड़की होने पर शक है, 

“लगता है अब दिखाना ही पड़ेगा कि मैं भी एक लड़की ही हूं “आराधना ने अपने आप से फैसला किया, वो तैयार थी कुछ भी करने के लिए

शॉपिंग से आने के बाद आराधना थक चुकी थी लेकिन उसने सिमरन को फोन करने के बाद जो अपने दिमाग के तारों को छोड़ दिया उससे वो बेचैन हो गई, उसको समझ नहीं आ रहा था कि आखिर क्या हो रहा है, उसको यह लगने लगा था कि कहीं उसकी लाइफ स्टाइल गलत तो नहीं ,कही सिमरन जैसी ही लड़कियां सही तो नही जो सेक्स करती करती हैं

वो अपने आप से बात कर रही थी, 

“उसने डैडी के बारे में ऐसी बात क्यों कही ,डैडी ने मुझे वो साड़ी और ब्लाउज क्यों गिफ्ट किया ?, कहीं ऐसा तो नहीं कि खुद मेरे डैडी ही मुझे नहीं सिमरन को पसंद करते हैं ,कहीं वाकई में मेरा एटीट्यूड गलत तो नहीं ,कहीं मेरा टाइप वाकई में मदर टेरेसा तो नहीं “ यह वो सारे सवाल थे जो उसके दिमाग में घूम रहे थे, उसका सिर दर्द बढ़ता ही जा रहा था ,वो उठी और पानी की बोतल उठा कर पानी पीने लगी 

इतने में उसने देखा कि सामने से प्रीती जा रही थी, शायद वो वॉशरूम जा रही थी ,आराधना ने फैसला किया कि क्यों ना थोड़ी देर प्रीति से ही बात कर ली जाए शायद उसका सर दर्द थोड़ा कम हो

आराधना –“ प्रीति ?” आराधना प्रीति को आवाज देती है 

प्रीति –“हां दीदी “ प्रीति ने बाहर खड़े रहकर ही पूछ लिया 

आराधना –“कहां जा रही है, आ थोड़ी देर बैठते हैं “ 

प्रीति ने आराधना को एक कार्नर फिंगर दिखाते हुए इशारा किया की सूसू लगी है

प्रीति -“ बस दीदी 1 मिनट में आती हूं, मैं नहीं चाहती कि आपका रूम गंदा कर दूँ” प्रीति ने तेज तेज वॉशरूम की तरफ चलते हुए कहा 
थोड़ी देर बाद प्रीति अपनी दीदी के रूम में आ जाती है 

प्रीति -“ दीदी अब बताओ क्या बात है”
आराधना -“ कुछ नहीं ऐसे ही सोचा कि अपनी बहन से थोड़ी देर बात कर लूँ , आज थोड़ा अच्छा फील नहीं हो रहा “
प्रीति -“ क्या बात है भाई, आज रात में सूरज कहां से निकल रहा है” प्रीति ने थोड़ा मजाकिया अंदाज में कहा 
आराधना -“ क्या यार तुम सब लोग मुझे हिटलर क्यों समझते हो, मेरे दिल में भी तुम सबके लिए प्यार है, लेकिन पता नहीं तुम सब क्यों नहीं समझते” आराधना ने थोड़ा सीरियस होते हुए कहा

प्रीति -“ दीदी ये टाइम हमें प्यार करने का नहीं बल्कि अपना प्यार ढूंढने का है” प्रीति ने एक आंख मारते हुए उसे कहा

आराधना -“ तू बहुत बड़ी हो गई है कहीं ऐसा तो नहीं है कि तूने ही अपना प्यार ढूंढ लिया हो”

प्रीति -“ हाय मेरी ऐसी किस्मत कहां, काश ऐसा हो गया होता “ प्रीति ने मजाक में अपना सर पर हाथ मारते हुए कहा 

आराधना -“ हा हा हा फनी गर्ल है तू काफी, अच्छा सीरियस होकर बता कि मेरे अंदर क्या-क्या कमियां हैं” आराधना ने सीरियस होते हुए कहा 

प्रीति -“ अंदर? कमियां? मुझे तो सब फिट हिट दिखाई देता है” प्रीति ने फिर से मजाक में आराधना के बूब्स की तरफ देखते हुए कहा 

आराधना -“ मारूंगी एक, सीरियस होकर बता, क्योंकि आज मेरा दिल दुखी है ,तू ही तो है जो मेरे करीब है, सो प्लीज मेरी हेल्प कर “

प्रीति -“ क्या दीदी आज तो शॉपिंग करके आई हो मस्त वाली, इतनी सीरियस क्यों हो रही हो, सब ठीक तो है ना”

आराधना -“ सब ठीक है, बस ऐसे ही आज मुझे किसी ने एहसास दिलाया कि शायद मैं एक अच्छी पत्नी ना बन पाउं और यहां तक बोला कि मेरा टाइप मदर टेरेसा टाइप है और शायद यही कारण है कि मैं एक अच्छी पत्नी का किरदार निभा सकती “ आराधना ने फिर से सीरियस होते हुए कहा 

प्रीति -“ दीदी अब मैं क्या बोलूं, आपसे छोटी हूं लेकिन......”

आराधना -“ लेकिन... क्या ......बोलना “

प्रीती -“ दीदी हां बात सच है कि आपका टाइप आजकल की लड़कियों से मैच नहीं करता और आजकल के लड़के भी बहुत एडवांस हैं ,उन्हें ऐसी ही वाइफ पसंद आती है जैसी कि आप हो लेकिन सिर्फ बाहर की दुनिया को दिखाने के लिए, लेकिन दीदी आजकल के लड़कों को ऐसी पत्नी भी चाहिए जो बेड में शर्माए ना, माइंड मत करना लेकिन शायद आपका स्टाइल एक मॉडर्न वाइफ वाला नहीं है और शायद लड़के तुम्हें एक गर्ल फ्रेंड के तौर पर भी एक्सेप्ट ना करें”

आराधना -“ तो क्या मैं अपने आप को सिर्फ इसीलिए बदल दूं कि कोई मेरा बॉयफ्रेंड बने, तुझे भी पता है कि ये सब मुझे पसंद नहीं ,हां लेकिन पति को खुश रखना हर पत्नी का फर्ज़ है ,वैसे तेरी नॉलेज कमाल की है, कहीं तेरा ही तो कोई बॉय फ्रेंड नहीं बन गया “

प्रीति -“ दीदी अभी तो मैं बस 19 साल की हूं, अभी तो मेरी चीजों में आकार लेना शुरु किया है” प्रीति का इशारा अपने बूब्स की तरफ था 

आराधना -“ हा हा हा हा वाकई में बहुत फनी है तू, लेकिन और कितना आकार बदलेगी तेरी चीजें, वैसे ही इतना.........”

प्रीति –“ दीदी आपको पता है, आप हमें हिचकिचाहट बहुत ज्यादा है, आप बिल्कुल मस्त रहा करो, एक बिंदास लड़की बनो, बॉयफ्रेंड और पति ही सब कुछ नहीं है, ये तुम्हारी लाइफ है इसे जीना सीखो, वैसे इतना क्या .........आप बीच में क्यों रुक गई”

आराधना –“ अरे नहीं, वो तू कह रही है ना कि अभी तो तेरी चीजों ने आकार लेना शुरु किया है, मुझे लगता है कि आकार काफी सही हो गया है तेरा 19 साल की उम्र में ही” आराधना का इशारा प्रीति के बूब्स की तरफ था

प्रीति –“ हाय मैं मर जावा, आज मेरी दीदी मेरे बूब्स की तारीफ कर रही है “ प्रीति ने खिलखिलाते हुए कहा 

आराधना –“ छी ,फिर से ऐसी बातें शुरु कर दी तूने” 

प्रीति –“ आपके चेहरे का रंग बता रहा है कि ऐसी बातें तो आपको भी अच्छी लगती हैं, लेकिन आप शर्माती बहुत हैं, खैर ये मेरा फर्ज नहीं है कि मैं आपकी बॉडी को देखूं या तारीफ करूं, ये तो आपके बॉयफ्रेंड या आपके पति का ही हक़ होगा “

आराधना –“ चुप कर पागल कहीं की, मुझे तो लगता है कि तेरा ही कोई बॉयफ्रेंड बन गया है, कहीं ऐसा तो नहीं है कि तू कुछ कर भी चुकी है, क्योंकि तेरी बॉडी भी ठीक सिमरन जैसी है” आराधना ने थोड़ा मजाकिया अंदाज ने कहा 

प्रीति –“ हाय दीदी अगर बॉडी से ही पता चलता तो सबसे बड़ी हिट तो आप हैं, कहां सिमरन ओर कहां मैं, कहीं ऐसा तो नहीं कि आप ही कुछ कर चुकी हैं” प्रीति ने भी मजाक में तीर छोड़ दिया 

आराधना –“ चुप कर ऐसा क्या है मेरी बॉडी में?”

प्रीति –“ अरे दीदी अच्छे अच्छे जवानों के छक्के छुड़ाने की हिम्मत रखती हैं, आप बस ड्रेसिंग सेंस बदलिए, मधुबाला से मल्लिका शेरावत पर आइए और फिर देखिए”

आराधना –“ कोशिश करुंगी अगर तू कहती है तो”

प्रीति –“ ओए मेरी ग्रेट दीदी” प्रीति भास्कर आराधना से लिपट जाती है, वो आज बहुत खुश थी क्योंकि आराधना ने पहली बार उसे इतना स्पेस दिया था बात करने का 

“अच्छा दीदी अब रात काफी हो चुकी है मैं चलती हूं” प्रीति ने आराधना से कहा 

“ओके चल प्रीति अब तू सो जा” प्रीति अपने रूम में चली जाती है, आराधना उन सारे कपड़ों को बाहर निकलती है जिन्हें वो लेकर आई थी

सबसे पहले वो अपने हाथ में उस आइटम को लेती है जो पंकज ने स्मृति को ऑफर किया था ब्लैक नाइटी, ये नाइटी आराधना ने मार्केट से सबकी नजरें बचाकर ले ली थी, वैसे तो आराधना ने किसी को पता ही नहीं चलने दिया था कि उसने क्या क्या लिया है, आराधना उस ब्लैक नाइटी को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर देखती है, इतनी छोटी सेक्सी और पारदर्शी नाइटी को देखकर आराधना शर्म से लाल हो जाती है, 

स्मृति आज थक गई थी तो जल्दी सो गई, पंकज बाहर हॉल में टहल रहा था, रात काफी हो चुकी थी लेकिन उसके चेहरे पर नींद के नामो निशान नहीं थे, वो तो स्मोकिंग करता हुआ हॉल में इधर से उधर घूम रहा था, थोड़ी देर पहले ही वो किचन में जाता है और शायद इस उम्मीद में कि उसे नींद आ जाएगी वो एक बीयर निकालता है और फिर से हॉल में आकर बैठ जाता है 

टेबल पर रखी मेग्जीन को उठाकर पड़ने लगता है, लेकिन उसका दिमाग कहीं और ही था, उसकी बॉडी लैंग्वेज से ही पता चल रहा था कि उसका मन नहीं लग रहा है, 

उसने फैसला किया कि “चलो क्यों ना ऊपर घूम कर आया था, लेकिन 12 से ज्यादा बज गए हैं और बच्चे सो गए होंगे “उसके दिमाग में ख्याल आता है 
“लेकिन ऊपर जाने में क्या परेशानी है घूमने आऊंगा और एक्सरसाइज भी हो जाएगी “वो फिर से ये सोचकर ऊपर की ओर चल देता है 

हाथ में बियर को लिए हुए धीरे-धीरे हो ऊपर की तरफ बढ़ने लगता है ,उसको यही Idea था कि सभी सो चुके हैं लेकिन फिर भी वो उपर जा रहा था, जैसे जैसे सीढियों से ऊपर आता है तो देखता है कि कुशल और प्रीति के रूम और लाइट दोनों बंद हैं लेकिन आराधना का गेट अभी भी खुला हुआ है और लाइट भी जली हुई है

वो धीरे-धीरे आगे बढ़ता है, गेट के करीब पहुंचने वाला ही होता कि वो बोलना शुरू कर देता है “आराधना बेटा.... आराधना बेटा.....” ये बोलते बोलते वो गेट के बिल्कुल करीब पहुंच गया और तीसरी बार बोलने ही वाला था “आराधना बे........” और उसकी सांसें वही की वही रुक जाती है 

पता नहीं क्यों उसके हाथ से बीयर की बोतल छूट जाती हैं और नीचे गिर कर टूट जाती है, अंदर का नजारा ही कुछ ऐसा था 

दरअसल आराधना को भी आईडिया नहीं था कि कोई आ सकता है और वो अपनी नाइटी को टाई करने के लिए पहन चुकी थी, आराधना का गोरा सुडोल और मांसल बदन अभी उस सेक्सी नाइटी में पूरा विजिबल था, नाइटी की लंबाई बस आराधना की चुत से थोड़ा सा ही नीचे तक थी, नीचे उसकी गोरी गोरी चिकनी टांगे बिल्कुल विजिबल थी, नाइटी का साइज थोड़ा फिट था इसलिए बूब्स की जगह तो ऐसे लग रहा था जैसे जबरदस्ती बंद किया गया हो उन्हें, नाइटी में ब्रा ऑलरेडी थी और पेंटी एडिशनल थी जो की आराधना ने पहनी हुई थी,

ब्रा के ऊपर से आराधना के बूब्स का ऐसा क्लीवेज दिख रहा था कि बस पूछो ही मत, ब्रा के एरिया से नीचे नाइटी ट्रांसपेरेंट थी तो आराधना का पेट साफ साफ नजर आ रहा था और साथ में उसकी नाभि भी, आराधना के बाल खुले हुए थे और फेश वॉश था, वो सुंदर और सेक्सी दोनों का ही परफेक्ट मिक्सचर लग रही थी 


दोनों की नजरें मिलती हैं, आराधना साइड पोज में खड़ी थी मिरर के सामने, जैसे ही उसे अपने डैडी की आवाज आती है तो वो अपना चेहरा डोर की तरफ कर देती है और डैडी को देखती है 
पंकज उसे देखकर घबरा जाता है, उसे समझ नहीं आता कि क्या करें, लेकिन नजरें नहीं हटा पाता और आराधना भी अपनी जगह से नहीं हिल रही थी 
खैर इस चुप्पी को पंकज तोड़ता है और कहता है “सो..... सॉरी ....बेटा, मैं बाद में आता हूं”

पर आराधना आज पता नहीं किस मुड में थी, आराधना आगे गेट की ओर चलती है और डोर पर जाकर खड़ी हो जाती है 

पंकज न चाहते हुए भी उस सेक्सी ब्यूटी को देखे बिना नहीं रह पाता

आराधना –“ क्यों कहां जा रहे हैं?” आराधना ने थोड़े एटीट्यूड में कहा 
पंकज –“ नहीं... वो ...वो....... शायद तुम सोने की तैयारी कर रही थी, तो सो जाओ “ पंकज बात टालने की कोशिश करता है

आराधना –“ नहीं मुझे नींद नहीं आ रही, और साफ साफ बोलिए ना कि आप मुझे इन कपड़ो में देख कर डर गए है”

पंकज –“ नहीं वो बेटा ऐसी बात नहीं है, ये तो शायद वही नाइटी है जो मैंतुम्हारी मां को दिलवा रहा था” पंकज ने नाइटी की तरफ देखते हुए कहा 

आराधना –“कपड़े पहनने के लिए होते हैं ,यह लड़कियों के कपड़े हैं ,सो मैंने पहने, क्यों बुरा किया मैंने?”

पंकज –“ नहीं बेटा.... आप तो बहुत सुंदर लग रही हो”

आराधना –“थैंक्यू डैड, अंदर आइए ना” आराधना गेट पर खड़े रहते हुए अंदर जाने का रास्ता छोड़ती है 
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Reply
12-01-2018, 01:13 AM,
#26
RE: antervasna फैमिली में मोहब्बत और सेक्स
आराधना के पास से गुज़रता हुआ पंकज सीधा रूम मे जाता है. आराधना गेट पे ही खड़ी ही थी, उसके नेचर मे सिमरन और प्रीति ने एक आग डाल दी थी तभी तो उसमे इतनी हिम्मत आ चुकी थी कि आज वो अपने डॅडी के सामने मिडनाइट मे सेक्सी, ट्रॅन्स्परेंट, और सेमी न्यूड नाइट सूट मे थी. 

पंकज बिना आराधना की ओर देखते हुए अंदर जाने लगता है. आराधना की निगाहे सिर्फ़ पंकज पे ही टिकी हुई थी, दूसरी तरफ आराधना की बॉडी से भीनी भीनी खुसबु भी पंकज को अच्छी तरीके से पागल कर रही थी.

अब पंकज रूम मे आ चुका है. पता नही क्यू वो आराधना से नज़रे नही मिला पा रहा था और रूम मे चारो तरफ देख रहा था. दोनो चुप थे और रूम मे सन्नाटा था. धीरे धीरे चल कर आराधना भी रूम मे अंदर आ जाती है.

" आज बताती हू कि लड़की क्या चीज़ होती है". आराधना ने सिमरन की बात को याद करते हुए मन मे सोचा. पंकज बेड पे बैठ जाता है और अपनी बियर की एक सिप लेता है, उसकी निगाहे बस आराधना पे है अब. आराधना वॉर्डरोब से एक नेल पैंट की शीशी निकालती है, एक चेअर् लेकर पंकज से बस 2 हाथ की दूरी पर बैठ जाती है. पंकज के हाथो मे जैसे कंपन हो रही थी लेकिन वो कुच्छ बोल नही रहा था. कुर्सी पे बैठते ही आराधना वो करती है जिसका आइडिया पंकज को भी नही था, कुर्सी पे बैठते ही आराधना नेल पैंट अपने पाँव की फिंगर्स पे लगाने के लिए झुक जाती है. ओह माइ गॉड..... खुद आराधना भी नही जानती थी कि ये सीन किसी भी इंसान की भावनाओ को किस हद तक भड़का सकता है. उसके सेक्सी बूब्स नाइट सूट से ऐसे बाहर आ जाने तैयार हो गये थे, वैसे भी नाइटी उसने खुद ही उसने बेहद टाइट ली थी. वो इस तरीके से झुकी तो पंकज क्या किसी भी इंसान का ध्यान पहले बॉडी और बाद मे रिश्तो पे जाएगा. पंकज खो चुका था.

आराधना -" मोम सो गयी क्या"? आराधना ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा लेकिन पंकज का माइंड वहाँ नही कहीं और ही घूम रहा था. दूसरी तरफ से रिप्लाइ ना मिलने पे आराधना ने नज़रे उठा कर देखा तो पंकज एक टक उसके बूब्स को ही देखे जा रहा था. ये देख कर आराधना की थोड़ी सी हँसी छूट गयी और वो सीधा होते हुए पंकज की आँखो के सामने चुटकी बजाती है और दोबारा पूछती है

" मोम सो गयी क्या?" आराधना ने दोबारा पुछा

पंकज -" क्या..... क... ओह्ह्ह्ह मोम..... वो तो सो गयी" पंकज हड़बड़ा गया था

आराधना -" तो आपको नींद नही आ रही क्या". आराधना दोबारा उसी सिचुयेशन मे आ जाती है जिसमे पहले थी और दोबारा नेल पैंट लगाना शुरू कर देती है.

पंकज -" नही वो बेटी नींद नही आ रही थी तो सोचा कि उपर घूम आउ?"

आराधना -" आपने अच्छा किया, वैसे मे भी बोर हो रही थी". आराधना ने फिर ने थोड़ी सी नज़रे उपर करी तो देखा कि पंकज की निगाहे अभी भी उसके बूब्स पे ही थी

पंकज -" कभी तुम भी नीचे घूमने आ जाया करो. क्या हमेशा उपर रहती हो या घर से बाहर कॉलेज चली जाती हो". पंकज ने शिकायत करते हुए कहा

आराधना -" रहने दो डॅड, मैं आपकी पर्सनल लाइफ मे प्राब्लम नही देना चाहती. क्या पता आप हसबैंड वाइफ......"

पंकज -" ओह्ह कम ऑन आराधना. अब तुम एक अडल्ट हो, उस दिन का अहसास मुझे भी है लेकिन मे आशा करता हू कि तुम समझ सकती हो."

आराधना -" किस दिन की बाते कर रहे है है आप?" आराधना ने अंजान बनते हुए कहा

पंकज -" तुम्हे सब पता है कि मैं किस दिन की बात कर रहा हू".

आराधना -" नही डॅडी मुझे नही पता".

पंकज -" वो ही दिन जब तुम्हारी मोम और मैं..... तुम्हे अब पता तो है". पंकज बीच मे ही बात को छोड़ते हुए बोला.

आराधना -" ओह्ह वो दिन....... सब सही है डॅडी लेकिन एक बात बोलू?"

पंकज -" हाँ बेटे बोलो ना. वैसे तुम एक समझदार और बड़ी लड़की हो, जो भी कहोगी सही ही कहोगी".

आराधना -" डॅड, क्या आप लोग गेट बंद नही कर सकते थे. अगर थोड़ा बहुत होता तो चलता लेकिन आप लोग तो....." आराधना ने बीच मे ही बात छोड़ते हुए कहा

पंकज -" थोड़ा बहुत से क्या मतलब है तुम्हारा?"

आराधना -" डॅडी अब कैसे बताऊ. आप समझदार है"

पंकज -" नही मुझे बताओ ना. हो सकता है कि तुम कुच्छ ही चीज़ सिखा दो".

आराधना -" तो मैं आपकी बताती हू डॅडी. अगर आप लोग किस कर रहे होते तो बात भी थी कि गेट खुला रह गया लेकिन मोम तो आपके वहाँ........" आराधना बीच मे चुप हो गयी

पंकज -" वहाँ क्या". पंकज ने स्लो वाय्स मे कहा

आराधना -" आपको पता है कि मैं क्या कहना चाहती हू". आराधना की आवाज़ मे कंपन्न थी

पंकज -" मुझे नही पता कि तुमने क्या देखा. मेरा ध्यान तो कहीं और था. तो मुझे बताओ ना कि क्या हो गया था" पंकज ने अंजान बनते हुए कहा

आराधना -" गेट खोल कर आपको मोम को अलाव नही करना चाहिए था कि वो वहाँ किस करे.". आराधना की हालत बेहद खराब होती जा रही थी, आवाज़ काँपने लगी थी, टिट्स खड़े होने लगे थे आख़िर उसने ऐसी बाते कभी किसी से नही की थी.

पंकज -" बेटा सब अचानक हो गया. नही तो गेट तो डेली बंद रहता है".

आराधना -" तो डेली मोम से मेहनत कराते हो." आराधना ने थोड़ा हंसते हुए कहा

पंकज -" वो... नही. गेट डेली बंद होता है लेकिन हम डेली ऐसा नही करते." आराधना के उस एरॉटिक रूप और बियर का नशा धीरे धीरे पंकज पे चढ़ने लगा था और उसका लंड आकार लेने लगा था.

आराधना -" क्यूँ डेली मोम सुंदर नही लगती क्या आपको?". आराधना ने बहुत नशीले अंदाज मे पंकज की तरफ देखते हुए कहा

पंकज -" तुम्हारी मोम बिल्कुल ऐसी थी जैसी तुम आज हो अपनी जवानी मे". ये बात बोलते हुए पंकज की निगाहे बस आराधना के गोरे गोरे बूब्स पे हो थी

आराधना -" हप!! यू आर सो नॉटी.". आराधना ने भी शरमाते हुए कहा
पंकज को भी समझ नही आ रहा था कि ऐसा क्यूँ हो रहा है लेकिन उसका लंड अब बुरी तरीके से अकड़ चुका था. उसकी पॅंट मे तंबू बन चुका था लेकिन अभी तक आराधना की निगाहे वहाँ नही पड़ी थी क्यूंकी वो नीचे झुक कर नेल पैंट लगाने मे लगी हुई थी. पंकज को समझ नही आ रहा था कि वो क्या करे और वो बड़ी ही अनकंफर्टबल सिचुयेशन मे था लेकिन ज़्यादा हिल भी नही सकता था नही तो आराधना को शक होने का चान्स था.

आराधना आज सारे गजब ढाने मे लगी हुई थी. नेल पैंट लगाने के बाद वो चेर से खड़ी होती है और वॉर्डरोब की तरफ जाती है नेल पैंट को रखने के लिए. पहले आराधना ने आइ लेवेल से उठाया था नेल पैंट को लेकिन इस बार उसने फ़ैसला किया कि वॉर्डरोब मे नीचे रखेगी. इसके लिए वो नीचे झुकती है. उफफफ्फ़...., और कितना ज़ुल्म होना था पंकज पे. अब उसकी छोटी सी पैंटी मे गान्ड विज़िबल थी पंकज की तरफ, वो एक टक देखा ही जा रहा था और करता भी ऐसी सिचुयेशन मे. पैंटी भी ज़्यादा हार्ड मेटीरियल की नही थी तो अंदर का हिस्सा भी थोड़ा थोड़ा विज़िबल हो रहा था. पंकज अपने जज़्बातो को कंट्रोल मे किए हुए था लेकिन अब उसका लंड ऐसी हालत मे आ चुका था जहाँ उसका पानी बिना कुच्छ किए निकल सकता था. लेकिन पंकज को अपनी इज़्ज़त प्यारी थी, जैसे आराधना का चेहरा दूसरी तरफ था पंकज ने अपने लंड को अड्जस्ट करने का फ़ैसला किया जिससे कि अगर वो रूम से बाहर जाए तो कुच्छ भी आराधना को दिखाई ना दे. लेकिन जैसे ही उसने अपनी पॅंट के उपर से अपने लंड पे हाथ लगाया उसके मूँह से एक आआहह निकल गयी.

आराधना -" डॅडी क्या हुआ?". आराधना सीधा खड़े होते हुए अपने डॅड से बोलती है. पंकज अपना हाथ एक झटके मे हटा लेता है. लेकिन अब आराधना की निगाहे सीधी उसके लंड पे जाती है. वो ऐसे खड़ा हुआ था कि अंदर कुच्छ छुपा रखा हो, बेहद सख़्त और बेहद ही स्ट्रॉंग. आराधना तो क्या कोई बच्चा भी देख कर आइडिया लगा लेता कि पंकज की क्या हालत है. आराधना एक जवान लड़की थी, मिड नाइट मे उसके कमरे मे एक मर्द और उसका लंड अगर इस सिचुयेशन मे होगा तो कोई भी जवान लड़की पागल हो सकती है. जैसे ही आराधना की निगाहे उस लंड की उठी हुई जगह पर पड़ी उसकी तो जैसे साँसे ही रुक गयी. उसका सीना उपर नीचे होने लगा, पाँव जैसे काँपने लगे. दोनो मे से किसी को कुच्छ समझ नही आ रहा था कि क्या बोले - आराधना की निगाहे उसके लंड वाली जगह पर और पंकज की निगाहे आराधना के चेहरे पर टिकी हुई थी.

इस चुप्पी तो को पंकज तोड़ता है.

" वो अरू, तुम्हारा वॉशरूम यूज़ करना है. ज़रा हाथ गंदे है वो धो लेता हू" पंकज ने आराधना से कहा

ऑफ... कॉर्स डॅड" आराधना उसे बाथरूम डोर की तरफ इशारा करते हुए कहती है. अब पंकज खड़ा होता है तो सारी पोल खुल जाती है. पता नही कैसे अभी तक ज़िप बंद थी लेकिन करीबन 6 इंच बाहर निकला हुआ था पॅंट का हिस्सा बाहर की तरफ. इस बार आराधना के हाथ अपनी मूँह पे पहुँच जाते है आश्चर्य मे.

पंकज -" क्या हुआ अरू?". पंकज आराधना से पुछ्ता है

आराधना अपना मूँह दूसरी तरफ फिरा लेती है और कहती है -

आराधना -" वो.... डॅडी..... डॅडी... वो... वो...."

पंकज -" बोलो ना बेटा क्या बात है"

आराधना -" वो... डॅडी आपके इसको..... क्या.... क्या हुआ है......".

पंकज-" अरू मजबूर हू, मर्द हू ना. आशा करूँगा कि तुम माइंड नही करोगी". पंकज जैसे थोड़ा शर्मिंदा हो रहा था

आराधना -" इट ईज़ ओके डॅड. मे कोई ईडियट नही हू और समझ सकती हू. लेकिन ये ... ये ...."

पंकज -" बोल ना अरू"

आराधना -" वो वो डॅड... ये तो कुच्छ ज़्यादा ही बड़ा है...... नही?" आराधना एक झटके मे बोल गयी.

पंकज -"शादी के बाद तुम्हारी मोम बहुत परेशान रही लेकिन धीरे धीरे उसके सारे रास्तों को मेने इस ट्रक की आदत डाल दी".

आराधना की हँसी छूट गयी ये बात सुनकर. " आप को बियर चढ़ गयी है, आप प्लीज़ बाथरूम मे जाइए". आराधना पंकज को धक्का देते हुए बाथरूम मे भेजती है लेकिन पंकज एक झटके से छूट जाता है और आराधना के दोनो बूब्स पंकज की पीठ से टकरा जाते है और फिर से एक चुप्पी छा जाती है.

पंकज बिना कुच्छ बोले बाथरूम मे चला जाता है. बाथरूम मे घुसते ही वो अपनी पॅंट खोलता है और अपने लंड को बाहर निकालता है. "ओह". पंकज को जैसे अब आराम मिला है काफ़ी देर के बाद. पंकज पेशाब करने लगता है. इधर आराधना को अपना लीप ग्लॉस लगाना था जो वो शॉपिंग करके लाई थी लेकिन वो भी बाथरूम मे ही था.

लेकिन पंकज तो जैसे बाथरूम से निकलने का नाम ही नही ले रहा था. पेशाब करने के बाद वो अपने हाथो को भी धोने लगा.

" डॅडी क्या टाइम लगेगा" आराधना बहुत ही स्लो वाय्स मे बाथरूम के बाहर से पूछती है

पंकज -" हाँ थोड़ा और लगेगा, क्यू?"

आराधना -" मेने एक लिप ग्लॉस खरीदा था वो अंदर ही रख दिया है मेने"

पंकज -" तो बाथरूम का डोर खुला है, तुम आ सकती हो"

आराधना -" शुवर?? आप क्या कर रहे है?"

पंकज -" जो तुम सोच रही हो वो मे कर चुका हू, तुम अंदर आ जाओ".

आराधना गेट खोल कर बाथरूम के अंदर चली जाती है. बाथरूम मे लो लाइट थी लेकिन आराधना का गोरा बदन सॉफ चमक रहा था. पंकज बाथ टब पे बैठ कर अपने हाथ पावं धो रहा था.
आराधना बहुत स्लो स्पीड मे अपना लिप ग्लॉस उठाती है और मिरर मे देख कर उसे लगाने लगती है. पंकज उसे मिरर मे देख रहा था.

पंकज -" ऐसा क्या खास है इस लिप ग्लॉस मे?"

आराधना -" ये फ्लवॉरड है - स्ट्रॉबेरी". आराधना ने लो वाय्स मे फिर से कहा

पंकज - " ऐसे भी लिप ग्लॉस आते है क्या. मे नही मानता?". पंकज ऐसे ही मज़े ले रहा था लेकिन उसके लंड ने फिर से हलचल शुरू कर दी थी क्यूंकी लो लाइट मे आराधना का दूधिया बदन सॉफ चमक रहा था

आराधना -" नही डॅड , सच मे. ये स्ट्रॉबेरी फ्लेवर है और एक्सपेन्सिव भी है". आराधना उसे अपने लिप्स पे लगाने मे लगी हुई थी

पंकज -" तुम्हारी तो हर चीज़ ही एक्सपेन्सिव है. फ्लवॉरड लिप ग्लॉस? चलो आज ये भी सुन लिया"

आराधना -" आप तो यकीन नही करोगे". आराधना अब लिप ग्लॉस लगा कर घूम चुकी थी. उसके होंठो मे एक अलग शाइनिंग थी. खुले बाल, चमकता बदन और उसके बाद उसने लिप्स भी और जुवैसी कर लिए.

पंकज -" नही मुझे तो यकीन नही है".

आराधना -" तो यहाँ मेरे पास आइए". बहुत ही सेक्सी वाय्स मे आराधना ने पंकज से कहा. पंकज अपनी जगह से खड़ा हुआ और आराधना की तरफ चल दिया. उसका लंड अभी भी तंबू बने ही खड़ा हुआ था और आराधना सॉफ देख रही थी. वो आराधना के बहुत करीब जाकर खड़ा हो जाता है.

पंकज -" यस" पंकज आराधना जी आँखो मे झाँकते हुए बोलता है. वो आराधना के इतने करीब था कि उसका खड़ा लंड आराधना की थाइस को टच करने लगा था.

आराधना पंकज के एक हाथ हो पकड़ कर अपने लिप्स तक लाती है और उसकी एक उंगली पकड़ कर अपने लिप्स लगाती है. दोनो की आँखे एक दूसरे को ही देख रही है. पंकज अपनी एक फिंगर को अच्छी तरीके से आराधना के लिप्स पे घुमाता है. आराधना की आँखे बंद हो गयी थी इस मर्दाने टच से.

पंकज अब उंगली को हटा कर अपने मूँह मे ले जाता है. और ऐसे रिक्ट करता है जैसे कुच्छ सोच रहा है फिर आराधना से बोलता है

पंकज -" स्ट्रॉबेरी जैसा तो कुच्छ लगा नही".

आराधना अपना चेहरा पंकज के बहुत करीब ले जाती है. दोनो के लिप्स के बीच की दूरी बस अब सेनटी मीटर्स मे रह गयी थी.

" आप खुद ही चेक कर लीजिए कि स्ट्रॉबेरी है या नही" बहुत ही सॉफ्ट वाय्स मे आराधना पंकज से बोलती है. ये बोलते बोलते आराधना ने अपनी आँखे बंद कर ली थी,

पंकज ने अपने लिप्स अब आराधना के लिप्स पर रख दिए. उफफफफफफ्फ़.......

अर्र्र्रररीईईईईई ये क्या कर दिया भाई मुझे तो लगता है मामला कुछ और जाने वाला है दोस्तो आपको नही लगता क्या...........
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Reply
12-01-2018, 01:13 AM,
#27
RE: antervasna फैमिली में मोहब्बत और सेक्स
ये एक ऐसी सिचुयेशन थी जिसको शब्दो मे तो बयान किया ही नही जा सकता. पंकज ने अपने दोनो लिप्स आराधना के लिप्स पर टिकाए और जैसे आराधना तो बेहोश ही हो गयी. उसके जुवैसी लिप्स को टच करते ही तो पुछो मत कि पंकज की क्या हालत थी. बहुत सॉफ्ट्ली ही वो उसके उपर के होठ को ऐसे चूसने लगा जैसे कोई बहुत ही आराम से ऑरेंज खा रहा हो. ऐसे टाइम मे कंट्रोल करना बेहद मुश्किल होता है लेकिन पंकज अपनी सीमाए नही तोड़ सकता था. आराधना अपनी जवानी के फुल शबाब पर थी, आज उसकी लाइफ का एक खास दिन था- पहली बार इतनी शॉर्ट नाइटी, पहली बार अपने बाथरूम मे किसी मर्द के साथ और पहली बार उसके अनटच लिप्स को किसी ने छुआ था. उसकी आँखे बंद हो चुकी थी लेकिन उसके लिप्स मे अभी तक कोई मूव्मेंट नही थी, वो भी मजबूर थी. जवानी का ये दिन भी आया तो अपने फादर ही साथ. अभी तक उसको ना तो आइडिया था और ना ही उसे कोई गाइड करने वाला था कि आख़िर वो कैसा रिएक्ट करे.

आराधना धीरे धीरे और करीब जाती जा रही थी पंकज के. लेकिन एक चीज़ ऐसी थी जो उनके बीच की दूरी को मेनटेन किए हुए थी - पंकज का तना हुआ लंड जो की आराधना के पेट से टच हो रहा था. पंकज ने बहुत कोशिश की रोकने की लेकिन धीरे धीरे उसके दोनो हाथ आराधना के चेहरे पर पहुँच गये थे और अब उसने आराधना का चेहरा अपने दोनो हाथो मे पकड़ लिया था. पंकज धीरे धीरे उसके होंठो को चूसने की स्पीड बढ़ा रहा था. और अब उसने आराधना के नीचे वाले लिप्स को भी चूसना शुरू कर दिया था. आराधना के बूब्स ऐसे उपर नीचे हो रहे थे जैसे पता नही उसे कितना साँस चढ़ रहा हो. आराधना ने भी लास्ट टाइम तक वेट किया लेकिन एक जवान उमर की लड़की कब तक वेट करे, आराधना ने भी अब पंकज को सपोर्ट करना शुरू कर दिया. दोनो के होंठो का बेहद ही गहरा मंथन चल रहा है.

" ऊन्ह..... ऊन्न्नह की आवाज़े आराधना के मूँह से आनी शुरू हो गयी थी. पंकज अपना एक हाथ आराधना के चेहरे से हटाता है और बाथरूम के डोर को धक्का दे देता है. बाथरूम का गेट धड़क से बंद हो जाता है और अब वो दोनो एक ही रूम मे और बाथरूम मे बंद थे. आराधना ने भी वो आवाज़ सुनी लेकिन कोई ऑब्जेक्षन नही किया. पंकज वापिस अपना हाथ ले जाकर उसके चेहरे पर रख लेता है. पंकज अब उसके होंठो को बहुत मजबूती से चूस रहा था और आराधना भी फुल सपोर्ट कर रही थी. किस करते करते ही पंकज अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाने लगता है और ले जाकर सीधा आराधना के बूब्स पे रख देता है. आराधना को जैसे 440 वॉल्ट का करेंट लग गया हो. वो एक झटके के साथ पंकज से अलग हो जाती है. और उससे थोड़ी दूरी पर खड़ी हो जाती है.

उसकी साँसे बहुत तेज चल रही थी और बूब्स उपर नीचे हो रहे थे. वो इसी हालत मे पंकज से नज़रे मिलाती है और नीचे की तरफ ले जाती है. पंकज का लंड अब और भी बाहर आ गया था. पॅंट की ज़िप मे भी जितनी ताक़त थी उतनी ताक़त वो लगा चुकी थी. आराधना आइडिया लगा भी और नही भी कि आख़िर क्या साइज़ होगा उसका. पंकज की भी हालत खराब होती जा रही थी और ज़्यादा खराब आराधना के हार्ड, सॉलिड बूब्स को टच करने से हो गयी थी.

" आराधना तुम वाकई मे बड़ी हो चुकी हो" पंकज ने बहुत स्लो वाय्स मे आराधना के बूब्स की ओर देखते हुए कहा.

आराधना शरमा कर अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लेती है और थोड़ी देर बाद घूमी हुई सिचुयेशन मे ही पंकज के लंड की तरफ तीर्छि निगाहो से देखती हुई बोलती है -" शायद इतनी बड़ी नही हुई हू". उसकी साँसे बहुत तेज चल रही थी. बहुत सॉफ्ट वाय्स मे पंकज को ये मेसेज देना चाहती थी कि वो शायद तैयार नही पंकज का लंड लेने के लिए.

पंकज -" कुच्छ चीज़े ऐसी होती है खुद अपनी जगह बना लेती है". पंकज का हाथ अपने लंड पर पहुँच चुका था और उसका इशारा अपने लंड की तरफ ही था . आराधना खड़ी खड़ी तीर्छि निगाहो से ये सब देख रही थी

आराधना -" मुझे नही लगता कि जगह बनेगी. जगह बिगड़ने के ज़्यादा आसार लग रहे है". आराधना ने फिर से लो वाय्स मे पंकज को समझाना चाहा.

पंकज -" आराधना अगर तुम बुरा ना मानो तो क्या मे एक काम कर सकता हू?"

आराधना -" क्या?" आराधना बहुत घबराई हुई थी

पंकज -" मुझे पॅंट मे बहुत परेशानी हो रही है. क्या मे इसे उतार लू?"

आराधना की पीठ अभी अपनी डॅडी की तरफ थी. लेकिन जब उसने अपने डॅडी के मूँह से ये बाते सुनी तो बिना कुच्छ सोचे हुए ही आराधना के मूँह से " यस" निकल गया. फिर से उसकी आँखे बंद हो गयी थी. पंकज टाइम ना वेस्ट करते हुए अपनी पॅंट की ज़िप खोलता है और उपर से खोल कर उतार देता है. अब वो बस एक फ्रेंची मे था, एक डॅशिंग हॉट मॅन लग रहा था वो. आराधना फिर से तीर्छि निगाहो से देखती है और - " ऊऊऊऊऊओ". उसका मूँह आश्चर्य से खुला रहा जाता है क्यूंकी लंड का फ्रंट हिस्सा फ्रेंची से बाहर आ चुका था. वो इतना भयानक लग था जैसे किसी मिज़ाइल का फ्रंट हिस्सा हो. " क्या ये रियल है" वो अपने मन मे सोचती है.

" क्या....... क्या आप कपड़े भी सही साइज़ के नही पहनते है". आराधना ने शिकायत करते हुए कहा. उसका इशारा पंकज की फ्रेंची की तरफ था

पंकज -" आराधना, बहुत से मौको पर कोई भी साइज़ छोटा पड़ जाता है." ये बात बोल कर पंकज आराधना की तरफ कदम बढ़ाता है. आराधना की तो जैसे साँसे रुक जाती है. लेकिन हिम्मत करके वो अपनी जगह से हट जाती है और डोर के पास पहुँच कर खड़ी हो जाती है. अब पंकज के सामने आराधना नही मिरर था जिसमे वो खुद भी अपने विकराल लंड को देख सकता था.

पंकज अपनी नज़रे मिरर से हटा कर आराधना पे डालता है. जो कि उसके साइड मे ही खड़ी थी, पंकज की भी हालत खराब थी. उसके चेहरे पे लस्टी भाव अब क्लियर थे, आराधना की नज़रे भी लस्टी थी.

पंकज -" आराधना, अब तुम बच्ची नही हो सब समझती हो. प्लीज़ अब मेरा और इम्तिहान मत लो". पंकज ज़्यादा टाइम नही लगाना चाहता था और वैसे भी उसकी हालत बहुत खराब होती जा रही थी.

आराधना -" डॅड, ऐसी बाते ना करो प्लीज़.......". वो एक लंबी सी साँस लेती है.

पंकज आराधना की तरफ दोबारा बढ़ता है लेकिन आराधना बाथरूम के डोर की तरफ अपना फेस कर लेती है और अब उसकी पीठ पंकज की तरफ थी. पंकज ठीक उसके पीछे जाकर खड़ा हो जाता है और उसी कमर पे हाथ रखता है. -" आआहह......." एक बहुत बड़ी सिसकारी के साथ आराधना पंकज की तरफ घूम जाती है. अब पंकज उसके इतने करीब था की आराधना के बूब्स पंकज के सीने से टच हो रहे थे.
दोनो की नज़रे मिलती है और जैसे एक दूसरे के होंठो से लिपट जाते है. बाथरूम मे फिर से लव गेम स्टार्ट हो जाता है. आराधना भी अपनी पूरी जान लगा कर पंकज के होठ चूस रही थी. पंकज अपने हाथ को बढ़ा कर आराधना के बूब्स तक ले जाता है. और धीरे से दबा देता है. वाउ क्या फीलिंग थी दोनो के लिए, आराधना किस करने मे लगी हुई थी लेकिन अपने एक हाथ को ले जाकर पंकज का हाथ अपने बूब्स से हटा देती है.

पंकज फिर से अपना हाथ उसके बूब्स पे रख देता और इस बार फिर से आराधना उसके हाथो को हटा देती है. लेकिन फिर भी वो पंकज के होंठो को चूसने मे पूरी एनर्जी के साथ लगी हुई थी. पंकज फिर से एक बार ट्राइ करता है और अपना हाथ उसके बूब्स तक ले जाता है लेकिन सेम रिज़ल्ट.

पंकज अपना एक हाथ नीचे ले जाकर फ्रेंची नीचे कर देता है और इसका अहसास आराधना को नही होने देता. इस बार पंकज आराधना का हाथ पकड़ता है और सीधा अपने लंड पे रख देता है. आराधना तो जैसे बेहोश ही हो गयी, उसे लगा कि जैसे उसने अपना हाथ किसी जलती हुई रोड पे रखा दिया हो. वो फिर से अपना हाथ हटा लेती है और इस बार अपना कनेक्षन किस से भी तोड़ लेती है. और फिर से दूसरी तरफ घूम जाती है. सांसो की स्पीड बहुत तेज हो चुकी थी.

पंकज -" आराधना क्या हुआ?"

आराधना -" आपके साथ मे ये सब नही कर सकती". वो खुल के बोल ही गयी आख़िर

पंकज -" लेकिन हम ने क्या किया है आराधना. दो जवान बॉडी मिली और दोनो को ही प्यार की ज़रूरत थी सो हमारे बीच हो गया. तुम घबरा क्यू रही हो".

आराधना -" आप क्या चाहते है कि अपनी वर्जिनिटी मे आपके साथ खो दू. अपने शरीर को आपको सोन्प दू. जज़्बात मेरे अंदर भी है और मे भी चाहती हू कि अब मे.... लेकिन ये सब मे आपक्से साथ नही कर सकती".

पंकज -" किसने कहा कि तुम अपनी वर्जिनिटी खो दोगि. वी अरे हॅविंग फन ओन्ली. "

आराधना अब पंकज की तरफ घूम जाती है

आराधना -" आपका ये अपने अंडरवेर से बाहर आ गया है. मे भी काफ़ी आगे जा चुकी हू आपके साथ तो अब वर्जिनिटी खोने मे कितना टाइम लगेगा. क्या पता मे खुद ही सारा कंट्रोल खो दू इसीलिए प्लीज़ ये सही नही है." आराधना की नज़रे पंकज की लंड की तरफ थी.

पंकज -" इसे टच करना चाहोगी?".

आराधना -" मेरे सब्र का इम्तिहान मत लो. मे भी जवान हू लेकिन आप समझो.". पंकज ने अब आब देखा ना ताव आराधना का हाथ पकड़ा और उसे अपने लंड पे रख दिया.

आराधना -" आइ आम आ वर्जिन गर्ल. ये मॉन्स्टर है और मुझे इससे डर लग रहा है".

पंकज -" ये तेरी पुसी मे नही जाएगा. बस ऐसे ही थोड़ी शांति मिल जाएगी". अपने डॅड के मूँह से पुसी जैसे शब्द सुन कर आराधना शॉक्ड हो गयी लकिन वो समझ भी सकती थी कि वो अभी एग्ज़ाइटेड भी है तो ऐसी बाते मूँह से निकल रही है.

पंकज -" इस ब्यूटिफुल नाइटी मे तेरा बदन वैसे भी कुच्छ खास छुप नही पा रहा क्यूँ तू इसे अपने शरीर से अलग ही कर दे. जैसे मुझे आराम मिला है अपने कॉक के आज़ाद होने के बाद तो तुझे भी तेरे बूब्स आज़ाद होने से बहुत चैन मिलेगा".

आराधना -" आआअहह.... वैसे ही इतनी छोटी नाइटी है. इसे उतार कर मे रिस्क नही लेना चाहती."


बातो बातो मे पता भी नही चला कि कब आराधना पंकज के लंड को खिलाने मे बिज़ी हो गयी थी. सच तो ये था कि उसकी चूत इतना पानी छोड़ रही थी कि बॉटल भर जाए लेकिन वो शो नही कर रही थी.

" अब तू इतनी जवान हो चुकी है कि इसका टेस्ट चख सकती है" पंकज ने इशारा किया अपने लंड की तरफ.

" क्यूँ मोम से टेस्ट करा के मन नही भरा". आराधना ने नखरीले अंदाज़ मे कहा

" काश इस कॉक को तेरे जैसे ब्यूटिफुल और जवान लिप्स नसीब हो पायें". पंकज तो जैसे फ़ैसला कर चुका है था कि ऐसी बातो को बंद नही करेगा.

" आपको मैं कब से ब्यूटिफुल लगने लगी. आपको तो मोम और सिमरन ही अच्छी लगती है". आराधना ने पंकज के लंड को खिलाते खिलाते बोला

" बेटे अब मे तुझे कैसे बताऊ?". पंकज ने भी फिर से आराधना को पास खींचते हुए कहा. आराधना ने अपने हाथ पंकज के लंड से नही हटाए

" क्या मुझे और भी फ्रॅंक होना पड़ेगा. अब तो शायद आप हर बात शेर कर सकते है". आराधना ने पंकज की आँखो मे झाँकते हुए कहा

" बेटे सिमरन मे तो एक बात है. लेकिन तेरी मों के साथ अब वो बात नही है. मैं उसको फक करता हू लेकिन वो पहले वाला टेस्ट नही है". पंकज ने अब फक जैसे शब्द यूज़ करने शुरू कर दिए थे

" तो क्या आप सिमरन को भी.....". आराधना बीच मे रुक जाती है

" सिमरन को भी क्या?". पंकज ने उससे पुछा

" मेरा मतलब है कि क्या सिमरन और आपके बीच फिज़िकल रीलेशन बने है. क्यूंकी आप कह रहे है कि सिमरन मे एक बात है".

" अब तुझसे क्या छुपाना. सिमरन एक बार मुझे ब्लो जॉब दे चुकी है. लड़की स्टाइलिश है". पंकज ने कहा

" ओह...... तो वो मेरे डॅड को ब्लो जॉब दे रही थी और मुझे कुच्छ आइडिया भी नही था."

" सब अचानक हो गया था एक दिन. उसके बाद कभी चान्स ही नही मिला. बेटा नाराज़ मत होना लेकिन तुम भी ट्राइ करो ना" पंकज ने प्यार से कहा

आराधना -" क्या ट्राइ करना है"

पंकज -" ब्लो जॉब"

आराधना -" आपको इसे देख के समझ नही आता कि ये पासिबल नही है". आराधना का इशारा लंड की तरफ था. पंकज थोड़ा सा हॅपी भी था क्यूंकी आराधना का इशारा साइज़ की तरफ था. अगर यानी साइज़ इश्यू ना हो तो वो अग्री हो जाएगी.

फिर पंकज के माइंड मे एक अलग प्लान ने जनम लिया

पंकज -" लेकिन पता है कि सिमरन की एक चीज़ बहुत मस्त है?"

आराधना -" क्या????"

पंकज -" उसकी पुसी??"

आराधना -" ओह्ह्ह्ह, तो आप देख चुके है......."

पंकज -" नही उस दिन ही मेने भी उसके साथ ओरल सेक्स किया था तो देखी थी".

आराधना -" क्य्ाआआ...... आपने उसकी पुसी को..... "

पंकज -" क्या गजब की पुसी है उसकी बता नही सकता"

आराधना -" ऐसा क्या खास है उस सेकेंड हॅंड पुसी मे"

पंकज -" सेकेंड हॅंड? नही नही तुम्हे कुच्छ ग़लत फ़हमी हुई है. उसकी तो एक दम फ्रेश है".

आराधना -" लगता है आपको पता ही नही कि फ्रेश होती क्या है. आपने तो मोम और सिमरन की ही देखी है और मुझे तो पूरा यकीन है कि दोनो ही सेकेंड हॅंड है. " आराधना अब अपनी जेलासी अपनी मोम पे भी निकाल रही थी.
पंकज -" आराधना ज़रूर तुम्हे कुच्छ ग़लत फ़हमी हुई है. सिमरन जैसी पुसी तो किस्मत से दिखती है" पंकज अपने सारे हथियार यूज़ कर रहा था

आराधना -" मुझे तो पहले से ही शक था कि वो बिच आप पे कुच्छ ऐसा जादू करेगी कि थाउज़ंड टाइम सेकेंड हो चुकी पुसी भी फ्रेश लगने लगेगी". आराधना ने गुस्सा सा दिखाते हुए कहा.

पंकज -" तुम्हारा क्या मतलब है थाउज़ंड टाइम सेकेंड हॅंड हो चुकी पुसी से".

आराधना -" थाउज़ंड टाइम फक्ड पुसी. अब तो समझ आ गया होगा अगर नही आया तो इससे ज़्यादा मे समझा नही सकती".

पंकज - "सिमरन और फक्ड.... ज़रूर तुम्हे कुच्छ ग़लत डाउट्स है. वो फ्रेश है और मैं एक एक्सपीरियेन्स्ड मेन हू. मेने खुद देखा है उसकी ब्यूटिफुल पुसी को. ऐसी पुसी है जो वन्स इन आ लाइफ टाइम दिखती है.".

आराधना का पारा अब बहुत हाइ हो चुका था. उसने गुस्से मे अपने हाथ पंकज के लंड से हटा लिए. और फिर से दूसरी साइड घूम जाती है. "मेरी ही ग़लती है कि मेने उसे घर आने दिया. पता नही कौन सा मेक अप करती है अपनी पुसी का जो मेरे डॅड को मेरी बात का यकीन ही नही हो रहा. या फिर मेरे डॅड को पता ही नही है कि फ्रेश पुसी होती क्या है. वैसे भी आज तक आपने सिमरन और मोम की पुसी को देखा है और मुझे तो पूरा यकीन है कि दोनो ही सेकेंड हॅंड है". आराधना अपनी फ्रस्ट्रेशन को मिटाते हुए बोलती है.

पंकज -" बेटी ऐसा तो चलता ही रहता है. लड़कियो मे ये जेलस तो चलती ही रहती है, तभी तो सिमरन भी मुझे कह रही थी कि आराधना भी अब वर्जिन नही है.". पंकज अपना आख़िरी दाव खेल चुका था

आराधना के तो जैसे पाँव तले ज़मीन ही खिसक गयी. उसका चेहरा लाल पड़ गया गुस्से से. " अभी फोन मिलाती हू उस कुतिया को. उसकी हिम्मत कैसे हुई मेरे डॅड को ये झूठ बोलने की. पूरा कॉलेज जानता है कि आइ आम स्टिल वर्जिन, लेकिन ये तो मेरी इज़्ज़त की धज्जिया उड़ाने मे लगी हुई है". आराधना गुस्से मे बाथरूम का गेट खोलने लगती है लेकिन पंकज उसका हाथ पकड़ लेता है.

पंकज -" क्या कहोगी उससे कि तूने मेरे डॅडी से ऐसी बात क्यू कही. पता है वो सबसे पहली बात ये बोलेगी कि तुझे किसने बोला. सोच क्या इज़्ज़त रह जाएगी तुम्हारी और मेरी." पंकज ने उसे समझाते हुए कहा

आराधना को ये बात समझ आती है तो वो थोड़ा शांत हो जाती है. लेकिन तभी पंकज के मूँह से जो शब्द निकलते है उनसे आराधना की गुस्से की सीमा टूट जाती है.

पंकज -" तुम रिलॅक्स रहो बेटा. किसी से लड़ने की ज़रूरत नही है. और मे सच कह रहा हू कि अगर तुमने किसी के साथ कुच्छ कर भी लिया है तो इसमे बुराई क्या है. ओल्ड टाइम ख़तम हो चुका है, आज कल शादी तक कौन वेट करता है. फिज़िकल नीड्स हर किसी की होती है, लेकिन प्लीज़ मुझे तो बता दो कि वो कौन खुश नसीब है जिसने तुम्हे चखा है". पंकज अपने एमोशनल टॉर्चर से आराधना को और एग्ज़ाइटेड कर चुका था.

आराधना ने ऐसा रिएक्ट किया जिसकी कभी पंकज ने उम्मीद भी नही की थी. वो गुस्से मे बाथटब की तरफ चलती है और वहाँ पहुँच कर अपने दोनो हाथ अपनी पैंटी पे ले जाती है और एक झटके मे उसे उतार देती है. उस छोटी सी और कोमल सी पैंटी को वो पंकज के चेहरे पर फेंक कर मारती है. पंकज ये सब बहुत मासूमियत के साथ देख रहा था, उसे अपना प्लान सक्सेस्फुल होता नज़र आ रहा था.

अब आराधना बिना पैंटी के थी. वो गुस्से मे पता नही क्या कर चुकी थी. वो बाथटब के एक कॉर्नर पे बैठती है और दोनो गोरी गोरी और स्लिम टाँगो को खोल देती है. अपनी आखे बंद करके और चेहरा साइड मे करके वो पंकज से कहती है-

आराधना -" आओ, देखो इसे. क्या आपको लगता है कि ये फक्ड है, सेकेंड हॅंड है. क्या आपको लगता है कि मेरा कोई बॉय फ्रेंड डेली मुझे कॉंडम लगा के फक करता है जैसे वो बिच खुद करती है. खड़े क्यू है, आइए देखिए. आपको तो एक्सपीरियेन्स है ना पहचान करने का कि कौन सी पुसी फ्रेश है और कौन सी नही". आराधना गुस्से मे सब बोल देती है.
आराधना की दोनो टाँगो के बीच, उसकी कोमल, मुलायम, कुँवारी, अनटच पुसी थी. मामूली से बाल भी थे उस पर, पंकज ये सब देख रहा था और उसे पूरा यकीन था कि उसने कभी ऐसी टाइट पुसी नही देखी है. अपनी लेग फैलाए हुए आराधना सूपर सेक्सी लग रही थी.

पंकज थोड़ा सा बढ़ता है और आराधना की पुसी के करीब आकर रुक जाता है. आराधना की आँखे बंद थी लेकिन वो फील कर सकती थी कि पंकज उसकी तरफ बढ़ रहा है. पंकज थोड़ा सा आगे बढ़ता है और अपना हाथ उसकी फुल टाइट पुसी पे रख देता है.

"आाऐययईईईईईईईईई.......... ये क्या कर रहे है..........." आराधना ने आँखे बंद रखते हुए ही कहा

" फील कर रहा हू, लेकिन दिखने मे तो सब पुसी एक जैसी होती है. मुझे इसकी गहराई और चौड़ाई नापनी पड़ेगी". ये बात बोलते ही पंकज अपनी एक उंगली उसकी चूत मे घुसा देता है. फुचह...... उसकी चूत पूरी तरीके से भीगी हुई थी, पंकज एक मजबूत इंसान था और उसकी फिंगर भी मोटी थी. आराधना की चूत पे ये पहला मर्दाना टच था, वो तो जैसे पागल हो गयी लेकिन अपने आप को कंट्रोल किए हुई थी.

" आआईयईईई.......ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ज..... डॅड..... क्या कर रहे है....... मुझे पेन हो रहा है". आराधना ने आँख बंद करते हुए शिकायत करी

" एक फिंगर से ही तुम्हारी ये हालत है तो शादी कैसे करोगी. हज़्बेंड बहुत डेंजर होते है, हर पोज़िशन और हर जगह मंथन करते है वो अपनी वाइफ के साथ... वैसे मान गया कि तुम्हारी पुसी बहुत टाइट और फ्रेश है".

" तो....... प्लीज़ अब बाहर निकाल....... लीजिए...... इसे...... आअहह"

पंकज इस मौके को खोना नही चाहता था. उसने आराधना की दोनो टाँगो को कस कर पकड़ा और अपने मूँह को उसकी पुसी वाली जगह पर लगा दिया. उसने आराधना की पुसी को ऐसे मूँह मे भर लिया जैसे उसे खा जाएगा.

" दद्द्द्डदयययययी....... आआईयईईईईईईई.............. आआहह..... ये..... क्या कर...... रहे है. मुझे छोड़ दीजिए........ ओह......" आराधना का चेहरा जैसे उत्तेजना से भर गया था. लेकिन पंकज नही हटा और उसकी चूत को चाटने लगा ही रहा. बीच बीच मे अपना मूँह हटा कर वो अपनी एक फिंगर को अंदर फक घुसा देता था और फिर बुरी तरीके से उसकी चूत का मंथन करता था.

" आआआआ........ प्लीज़.......... औहह........". आराधना तो जैसे धरती पे थी ही नही.

पंकज उसकी चूत को दीवानो की तरह चाट रहा था. साथ ही पंकज खुद भी बहुत एग्ज़ाइटेड हो रहा था. वो किसी भी चीज़ मे टाइम वेस्ट नही करना चाहता था तो एक हाथ से अपने मोटे लंड को खुद भी हिलाने लगता है. आराधना की चूत मे बेहद ज़्यादा कम्पन्न्न्न्न आने लगी थी. पंकज अपनी जीभ को ऐसे हीला रहा था उसकी चूत मे जैसे कोई बच्चा अपनी मा का दूध पीता है.

" प्लीज़....... स्टॉप इट..... मर जाउन्गि......... आअहह........ डर्टी मॅन प्लीज़ स्टॉप........." आराधना की चूत से पानी की नादिया बह रही थी. वो सूख की चरम सीमा पे थी और पंकज भी अपने लंड को खुद ही हिलाने मे लगा हुआ था.

आराधना का एक हाथ ऑटोमॅटिकली अब अपने लेफ्ट बूब्स पर पहुँच गया था. वो धीरे धीरे उसे दबाने लगती है. पंकज को पता चल चुका था कि वो पूरी गरमा चुकी है. पंकज भी अपने लंड को हिलाने मे और उसकी चूत को चाटने मे बिल्कुल पीछे नही हट रहा था. ना जाने क्या हुआ कि आराधना अपना एक हाथ बढ़ाकर पंकज का एक हाथ पकड़ लेती है और सीधा ले जाकर अपने बूब्स पे रख देती है. पंकज ने तो जैसे पता नही क्या सोच रखा था और तुरंत ही हाथ उसके बूब्स से हटा लेता है. आराधना की बॉडी मे तो जैसे आग लगी हुई थी और वो फिर पंकज का हाथ पकड़ती है और फिर से अपने बूब्स पे रखती है लेकिन सेम रिज़ल्ट.

उसकी आँखे अभी भी बंद थी. " लव....... मी..... डॅड प्लीज़......... आहह........ आाऐययईईईईईईईईईईई....... यू ........... आर वेरी ....... सेक्सी ............ आअहह......... उंह................". आराधना ने खुद भी अपना हाथ अपनी चूत पे पहुँचा दिया और खुद भी अपने भंगूर को हिलाने लगी. वो जितनी टांगे खोल सकती थी उतनी उसने खोल ली थी. लेकिन वो जितनी एग्ज़ाइटेड थी कि बताया नही जा सकता. पंकज खूद भी बहुत एग्ज़ाइटेड हो चुका था. और तेज़ी से अपने मोटे लंड को हिला रहा था.

" मे......... आअहह............ दड्दयययययययी........ फकक्क्क्क्क्क्क्क...... मी....................... आअहह. आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह.... आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ..... आहह ..... आ.... आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ..... आअह ....." और आराधना को अपना स्वर्ग प्राप्त हो जाता है. उसकी टांगे कांप रही थी. पंकज अपने लंड को तेज़ी से हिलाने मे लगा हुआ और तभी... पिच्छ... पिच... पिचह.... पिचह. 5 शॉट्स मे सारा वीर्य आराधना के चेहरे पे गिर जाता है. लेकिन आराधना तो जैसे होश मे ही नही थी.

आराधना की साँसे तेज चल रही थी. लेकिन धीरे धीरे वो नॉर्मल हो रही थी. अब उसने अपनी आँखे खोली और पंकज के चेहरे की तरफ देखा और एक प्यारी सी स्माइल दी. पंकज अपनी फ्रेंची और पॅंट उपर कर चुका था.

आराधना उसकी तरफ सवालिया निगाहो से देखती है लेकिन कुच्छ बोलती नही. पंकज अपनी पॅंट को बाँध लेता है और अपने हॅंड वॉश करता है. हॅंड वॉश करके वो बाथरूम के गेट को खोलने लगता है. आराधना उसके एक हाथ को पकड़ती है लेकिन वो छुड़ा लेता है और बाथरूम के बाहर आ जाता है. आराधना बिना पैंटी के ही भाग कर बाहर आती है, जब तक पंकज मेन गेट तक पहुँच गया था. वो मूड कर आराधना की तरफ देखता है. आराधना बिना पैंटी के बिल्कुल शरमा नही रही थी और उसे एक सेक्सी स्माइल देती है. लेकिन पंकज गेट खोलता है और बाहर.

दोनो के दिलो मे हज़ारो सवाल के साथ ये रात कट जाती है. आराधना को समझ नही आ रहा था कि क्या कोई मर्द इतना भी शरीफ हो सकता है कि बस इतना ही करके छोड़ देता है. लेकिन आराधना को मर्दाना टच मिल चुका था.

नेक्स्ट मॉर्निंग - स्मृति सफाई कर रही है और उपर आराधना कॉलेज के लिए तैयार हो रही थी. उसके फेस पे एक शानदार ग्लो थी, पूरे मन के साथ वो कॉलेज के लिए तैयार हो रही थी. पंकज भी उठ कर हॉल मे आ जाता है और न्यूसपेपर पढ़ने लगता है.

आराधना नीचे उतर कर आने लगती है. उसने आज फिटिंग का येल्लो सूट आंड चुस्त पाजामी पहनी हुई थी उसे नीचे आता हुआ देख पंकज देखता है और आराधना उसे फिर से एक स्माइल के साथ इशारे मे गुड मॉर्निंग बोलती है. पंकज अपना चेहरा न्यूसपेपर की तरफ कर लेता है. आराधना को उसका ये बिहेवियर बड़ा अजीब लगा.

" बेटी ब्रेकफास्ट कर ले". स्मृति आराधना से कहती है.

" मुझे भूख नही है". आराधना गुस्से मे बोलती है. और मैन डोर की तरफ बढ़ने लगती है. वो एक दम से पीछे मूड कर देखती है तो पंकज की निगाहे उसके हिप्स पर ही थी. आराधना फिर से एक स्माइल दे कर बाहर जाते हुए बोलती है -" मोम, आज मे जल्दी आ जाउन्गि कॉलेज से". ये बोलते हुए उसकी निगाहे पंकज की तरफ ही थी. और आराधना कॉलेज चली जाती है

स्मृति सफाई करके अपने बेडरूम मे जाती है और नहाने की तैयारी करती है. जब वो वॉर्डरोब से कपड़े निकाल रही थी तो वैसे ही उसको फ़ेसबुक मसेज की टोन आती है. वो मेसेज चेक करती है तो ये उस लाइयन का ही था

लाइयन - सेक्सी, यू देअर?

स्मृति - मेरे पास टाइम नही है, नहाने जा रही हू. जल्दी बको क्या बकना है.
लाइयन- क्या बात है मेडम बहुत गुस्से मे लग रही है?

स्मृति - तुमसे मतलब. जल्दी बोलो क्या बात है?

लाइयन - स्मृति जी. अब तो हमे चॅट करते हुए इतने दिन हो गये हैं लेकिन फिर भी आप हम से ऐसे बात करती है जैसे हम कोई अंजान है.

स्मृति - है तो अंजान ही. फ़ेसबुक प्रोफाइल भी ऐसा है जो फेक ही लगता है. मुझे क्या पता कि तुम कौन हो.

लाइयन- एक शरीफ लड़का हू.

स्मृति - वाह वाह!! शरीफ और तुम? भूल गये पार्टी मे अपनी भाभी वाली बात. शरीफ लोग ऐसा काम करते है?

लाइयन - स्मृति जी शरीफ हू इसीलिए तो उस भाभी का भला कर दिया. नही तो मुझे क्या शौक है समाज सेवा का.

स्मृति - बड़े आए समाज सेवा वाले. उस दिन चॅट के बीच से कहाँ गायब हो गये थे? यू आर आ फ्रॉड रियली. मेरे बारे मे सब जानते हो लेकिन अपने बारे मे कभी कोई हिंट नही देते.

लाइयन - पता है आपसे चॅट करने के लिए कितने पापड बेलता हू और आप है कि मुझे ही फ्रॉड कह रही है. क्या मैं कभी आप जान के कहीं जा सकता हू, उस दिन मेरी बॅटरी ख़तम हो गयी थी.

स्मृति - बहुत लो पॉवर है तुम्हारी बॅटरी मे.

स्मृति अक्सर ऐसी बाते करती नही है लेकिन आज थोड़े फन्नी मूड मे थी तो उसने ये टाइप कर दिया.

लाइयन - मेरी बॅटरी की पॉवर देखना चाहोगी?

स्मृति - मुझे कोई शौक नही है. मेरी खुद की बॅटरी भी बहुत स्ट्रॉंग है.

स्मृति उसकी डबल मीनिंग बातो को समझ रही थी.

लाइयन - आज कल तो सब दो दो बॅटरी रखते है, खास कर लॅडीस तो आप क्यू नही ट्राइ करती.

स्मृति - ज़रूरत नही है मुझे.

लाइयन - लो वोल्टेज रिक्वाइर्मेंट है तुम्हारी, तभी तो एक बॅटरी से ही काम चला लेती हो. मेरी जानकारी मे तो ऐसी ऐसी लॅडीस है जो होल नाइट मुझसे बॅटरी चार्ज करती है.

स्मृति - और तुम कर देते हो?

लाइयन - समाज सेवक हू ना. आप कहें तो आपकी बॅटरी भी फुल चार्ज कर दू. सच बोल रहा हू कि आपको ज़रूरत है.

स्मृति - किस की?

लाइयन - एक बड़े चारजर की जो आपकी मे फिट आ सके.

स्मृति - मुझे ज़रूरत नही है.

लाइयन - तो ऐसे ही स्केरी हाउस मे अपनी गान्ड रगड़ रही थी आप उसके लंड को हाथ मे लेकर.

स्मृति को ऐसे लगा जैसे कहीं बॉम्ब ब्लास्ट हो गया हो. उसके हाथ से मोबाइल छूट जाता है और वो अपने बेड पे ऐसे बैठ जाती है जैसे उसमे जान ही ना हो. एसी रूम मे उसे पसीने आने को हो जाता है. माइंड काम करना बंद कर देता है. उसके दिमाग़ मे बहुत सारे सवालो ने जनम ले लिया था जैसी कि -

1. इसको कैसे पता चला कि स्केरी हाउस मे क्या हुआ?

2. कहीं ये ही तो नही था वो जिसने मेरे साथ वो हरकत करी.

3. अगर ये मुझे जानता है तो कहीं हमारे घर मे ये किसी और को तो नही जानता.

4. कुशल भी स्केरी हाउस मे ही था. कहीं कुशल को इस लाइयन ने कुच्छ बता तो नही दिया.

5. अगर वो ये ही था तो ये कुच्छ बोला क्यू नही. क्या इसका टारगेट बस मास्टरबेशन करना था?
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12-01-2018, 01:13 AM,
#28
RE: antervasna फैमिली में मोहब्बत और सेक्स
स्मृति पागल हुए जा रही थी और उसे डर भी लग रहा था. उसने हिम्मत से पेश आने का फ़ैसला किया. और टाइपिंग दोबारा शुरू करती है.

स्मृति - क्या बकवास कर रहे हो तुम. कौन सा स्केरी हाउस?

लाइयन - स्मृति जी आप मुझे ग़लत मत समझिए. हम तो आपके...... ओह सॉरी आपकी बॅटरी के दीवाने है. मुझे पता है कि आप सनडे को शॉपिंग करने कहाँ गयी, क्या क्या खरीदा और स्केरी हाउस मे क्या हुआ.

स्मृति - तुम्हे कैसे पता कि हम सनडे शॉपिंग करने के लिए गये?

लाइयन - आपने ही तो बताया था.

स्मृति - तो इसका मतलब तुम हमारा घर भी जानते हो?

लाइयन - आप जैसी ब्यूटिफुल. सेक्सी, और हॉट फ्रेंड का घर क्या, सब कुच्छ पता होना चाहिए.

स्मृति - सॉफ सॉफ बोलो कि स्केरी हाउस वाली बात कैसे जानते हो?

लाइयन - क्यूंकी मैने ही वो सब किया.

स्मृति - क्या

लाइयन - अगर एक बार टाइपिंग किया समझ नही आया तो दोबारा टाइप कर देता हू कि मैने ही वो सब किया.

स्मृति - यू सोन ऑफ आ डॉग. मैने तुम्हे अपना दोस्त समझा, तुम्हारी इतनी बेहूदा बातो के बावजूद तुमसे दोस्ती रखी और तुमने मुझे ये सिला दिया. तुम्हे पता है कि तट वाज़ अटेंप्ट ऑफ रेप, तुम लाइफ टाइम के लिए जैल जा सकते हो.

लाइयन - स्मृति जी रिलॅक्स. अगर मे चाहता तो ये बात आपको कभी नही बताता और ना ही आप पोलीस स्टेशन जाती रिपोर्ट लिखाने कि आपका रेप करने की कोशिश की गयी है. लेकिन मैने आपको बताया क्यूँ कि मैने भी आपको दोस्त माना है.

स्मृति - दोस्त के साथ कभी कोई ऐसी हरकत करता है जैसी तुमने करी.

लाइयन - अगर मैं आपसे आकर ये कहता कि आपकी बॉडी मुझे अच्छी लगती है. आपकी चूत को मैं टच करना चाहता हू तो क्या आप अग्री हो जाती. मैने वोही किया जो सही लगा. माँगने से भीख भी नही मिलती तो मैने छीन लिया.

स्मृति - अच्छा!! तुम्हे क्या मिला ये सब कर के.

लाइयन - तुम्हारी रसीली चूत का टेस्ट. और मेरा लंड तुम्हारे हाथ मे था तो मुझसे लकी कौन हो सकता है. वैसे आपके हज़्बेंड है बहुत लकी, एक दम पटाखा वाइफ मिली है.

स्मृति - देखो मुझसे ये गंदी गंदी बाते ना किया करो. मैं एक शरीफ लेडी हू, तुमने मेरे साथ बहुत ग़लत किया है. अब तुम मुझसे क्या चाहते हो?

लाइयन - मैने पहले भी कहा है कि चूत को अगर चूत ना काहु तो क्या कहु. वैसे भी आपकी वाली रियल चूत है, बाकी तो सब एक छेद लेकर घूमती है.

स्मृति - मुझे तुम्हारी ये बकवास नही सुन नि है. मुझे ये बताओ कि तुम्हे मुझसे क्या चाहिए.

लाइयन - बस एक बार मिलना. जिसमे तुम मेरी गर्ल फ्रेंड बन कर मुझसे मिलो.

स्मृति - मैं तीन बच्चो की मा और तेरी गर्ल फ्रेंड. बस्टर्ड किसी और को ढूँढ ले ना. मैं तेरी गर्ल फ्रेंड कैसे बनके आ सकती हू.

लाइयन - आपको ग़लत फ़हमी है कि आप कोई आंटी टाइप लेडी लगती है. आप तो आज भी ऐसे लगती है जैसे कोई कुँवारी कली. पिंक लिप्स, वाइट चीक्स, टाइट बूब्स, सॉलिड गान्ड और मस्त स्लिम हाइट. ये चीज़े आज कल लड़कियों मे कहाँ मिलती है.

स्मृति - ज़्यादा बाते ना बनाओ. मुझसे मिलना क्यू चाहते हो?

लाइयन - बस एक बार तुम्हारी खूबसूरती को बहुत करीब से देखना चाहता हू. डरो मत कुच्छ ग़लत नही होगा.

स्मृति - अगर मैं ना आना चाहू तो?

लाइयन - बेकार मे फिल्मी सीन बनाने से क्या फ़ायदा. मैं कोई रिक्शा वाला या ऑटो वाला नही जो आपको ब्लॅक मैल करे. और मैं ये बोलू कि मैं ये कर दूँगा और वो कर दूँगा तो क्या वो सही है.

स्मृति - क्या गॅरेंटी है कि तुम दोबारा मिलने की ज़िद नही करोगे. और क्या गॅरेंटी है कि तुम मेरे साथ कोई बद तमीज़ी नही करोगे.

लाइयन - मैं कोई आइटम तो हू नही जो गॅरेंटी कार्ड दे सकु, लेकिन हाँ एक प्रॉमिस है कि दोबारा मिलने की ज़िद नही करूँगा. रही बात बद तमीज़ी की तो वो नही करूँगा. तुमने मेरे लंड को इतनी ज़ोर से दबाया मैने तो शिकायत नही करी कि तुमने बद तमीज़ी करी.

स्मृति - मेरा बस चलता तो काट ही देती.

लाइयन - चलिए आप गुस्सा थूक दीजिए और ये बताइए कि कब मिलना है.

स्मृति - तुम बताओ?

लाइयन - बुधवार ईव्निंग? 8 PM

स्मृति - कहाँ?

लाइयन - मेरे फ्रेंड के फार्म हाउस पे एक पार्टी है वेडनेसडे ईव्निंग को वहीं पे.

स्मृति - फार्म हाउस ही क्यू?

लाइयन - मुझे कोई ऐतराज नही है अगर आप कहीं और मिलना चाहे तो लेकिन बस मे यही सोच रहा था कि फार्म हाउस शहर की भीड़ से दूर है. अगर कहीं और मिले और आपको किसी ने देख लिया तो मुश्किल हो जाएगी. वैसे भी एक ही बार मिलना है तो मैं भी नही चाहता कि आपके परिवार पे कोई मुश्किल आए.

स्मृति - लगता तो नही है कि इतना अच्छा सोचते हो मेरी फॅमिली के बारे मे. लेकिन छोड़ो और बताओ कि मुझे कहाँ से पिक करोगे?
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12-01-2018, 01:13 AM,
#29
RE: antervasna फैमिली में मोहब्बत और सेक्स
लाइयन - मैं कहीं से पिक नही करूँगा. आपको डाइरेक्ट आना होगा वहाँ पे. और प्लीज़ एक रिक्वेस्ट और है.

स्मृति - बोलो

लाइयन - कोई भी शॉर्ट ड्रेस पहन कर आइए गा. जो आपकी थाइस से नीचे ना हो.

स्मृति - इतनी कंडीशन तो कभी मैने अपने बाप की भी नही सुनी. मैं नही आने वाली करले जो करना है.

लाइयन - मुझे पता था कि आप ऐसे ही गुस्सा हो जाएँगी. लेकिन सुन तो लीजिए कि मैने उस ड्रेस के लिए क्यूँ बोला?

स्मृति - भोंक जल्दी

लाइयन - ये उस पार्टी का ड्रेसा कोड है. मेरा बस चले तो मैं बुर्क़ा पहन के आपको वहाँ बुलाऊ लेकिन क्या करे जब ऐसे नही हो सकता है.

स्मृति - मेरे पास कोई ऐसी ड्रेस नही है.

लाइयन - मैने कहा ना कि आपके बारे मे मुझे सब डीटेल्स है. मुझे पता है कि एक शॉर्ट ड्रेस और एक लोंग ड्रेस भी खरीदी है आपने. अरे आपने तो वो ड्रेस भी खरीद ली जो मैने आपको पहले बताई थी. कमाल है आप भी वैसे मुझसे लड़ती भी है और मेरी बातो को इतना ध्यान रखती है.

स्मृति अपने मन मे सोचा रही थी कि ये हरामी इतनी बाते कैसे जानता है.

स्मृति - अपनी बकवास बंद करो. मुझे अब नहाने जाना है. लेट हो रही हू.

लाइयन - ठीक है तो वेडनेसडे ईव्निंग मिलते है.

स्मृति - अब कितनी बार कहु की आ जाउन्गि.

लाइयन - अभी तक तो एक बार भी नही कहा.

स्मृति - चलो अब कह दिया कि आ जाउन्गि. बस!!!

लाइयन - एक बात कहु?

स्मृति - जल्दी बक मुझे नहाने जाना है.

लाइयन - ठीक है तो जाओ.

स्मृति - जल्दी बक कि क्या बात है..

लाइयन - बताऊ?

स्मृति - जल्दी बता...

लाइयन - इतनी प्यारी चूत तुम्हे उपर वाले ने दे कैसे दी. उपर वाला भी पक्ष पात करता है.

स्मृति - बस हो गयी ख़तम बकवास. अब मैं नहाने जाउ?

लाइयन - जी हाँ जाइए प्लीज़. बाइ

स्मृति - बाइ

लाइयन - टेक केअर

स्मृति साइंड ऑफ......

स्मृति का सर अभी तक चकरा रहा था कि आख़िर ये कैसे हो गया. एक लड़के ने उससे चॅट करनी शुरू और नौबत यहाँ तक आ गयी.

खैर अब वो इस मॅटर को वेडनेसडे को ख़तम करना चाहती थी तो रिलॅक्स होकर नहाने चली गयी.

आराधना कॉलेज पहुँच गयी थी. आज उसे पिक करने सिमरन नही आई थी. घर पर कुच्छ ना खाने की वजह से आराधना सीधा कॅंटीन मे जाती है. कॅंटीन मे घुसते ही उसकी निगाहे सबसे पहले सिमरन से मिलती है लेकिन सिमरन अपने चेहरा फिरा लेती है.

आराधना जूस ऑर्डर करती है और सिमरन से थोड़ी दूरी पर बैठ जाती है. थोड़ी देर बस सिमरन उठ कर चल देती है. लेकिन आराधना उसे आवाज़ लगाती है -

आराधना -" कहाँ चली?"

सिमरन -" तुझसे मतलब"

आराधना -" ओये होये आज तो मेडम का पारा कुच्छ ज़्यादा ही हाइ है".

सिमरन -" तो तेरी क्या पूजा करू"

आराधना -" कर ले पूजा, हो सकता है माता खुश हो जाए" आराधना अपना एक हाथ ऐसे उठाते हुए बोलती है जैसे कोई आशीर्वाद दे रही हो.

सिमरन -" किया ना कल माता ने खुश, इतनी बाते सुना कर".

आराधना सिमरन का हाथ पकड़ कर प्यार से उसे बिठाती है.

आराधना -" आ गया था गुस्सा लेकिन तू मेरी पक्की दोस्त है तो मैं माफ़ कर देती हू". इतनी बात सुन कर सिमरन को फिर गुस्सा आ जाता है.

सिमरन - " बड़ी आई माफ़ करने वाली. ऐसी क्या ग़लती कर दी मैने जो तूने मुझे माफ़ कर दिया."

आराधना -" क्या दोबारा वो तीन कॉंडम लाकर दिखाऊ"

सिमरन - " ओह्ह्ह तो अभी तक उसी बात के पीछे पड़ी है. हाँ मैने सेक्स किया, तीन बार किया और करती रहूंगी. कर ले जो करना है. अगर नही रखनी तुझे दोस्ती तो कोई बात नही. "

आराधना-" ऐसा नही है मुझे दोस्ती नही रखनी. लेकिन तू सोच क्या शादी से पहले ये सब करना सही है"

सिमरन -" महारानी साहिबा, आप अपनी पुसी को बचा कर रखो. मुझे मत सिखा ये सब, मैं तो अपने बॉय फ्रेंड के साथ खूब एंजाय कर रही हू और करती रहूंगी".

आराधना - " बॉय फ्रेंड क्या, एंजाय तो तू और मर्दो के साथ भी कर रही है"

सिमरन उसकी इस बात से शॉक्ड रह जाती है.

सिमरन -" किस मर्द के साथ?"

आराधना -" क्या तूने मेरे डॅड को ब्लो जॉब नही दी".

ये बात सुनते ही सिमरन के चेहरे का रंग जैसे फीका पड़ गया.

सिमरन -" तुझसे ये बात किसने बोली"?

आराधना -" मैने खुद देखा था तुझे".

सिमरन -" अपने बॉय फ्रेंड के साथ मैने सेक्स किया तो तूने इतना बड़ा ड्रामा कर दिया और तूने मुझे तेरे डॅड को ब्लो जॉब दी और तू देख कर चुप रह गयी. इतनी भोली तो तू नही लगती. सच सच बता कि कैसे ये कहानियाँ बना रही है तू"

आराधना सिमरन का हाथ पकड़ कर अपने सर पर रखती है.

आराधना -" खा मेरी कसम कि तूने मेरे डॅड को ब्लो जॉब नही दी?"

सिमरन अपने हाथ हो हटा कर उससे थोड़ा पीछे होकर बोलती है.

सिमरन -" ज़्यादा तेज मत बन. हाँ मैने ब्लो जॉब दी, और ब्लो जॉब ही नही, तेरे डॅड का सारा रस चूसा मैने लेकिन मैं ये जान ना चाहती हू कि तू कैसे जानती है?" सिमरन का गुस्सा उसके चेहरे पे दिख रहा था

आराधना -" मैने खुद देखा था......" अब आराधना खूब घबरा रही थी और उसकी आवाज़ हकलाने लगी थी.

सिमरन -" मैने तो सच बता दिया तुझे लेकिन तू सच नही बोल रही. अब अगर सुन ना चाहती है तो सुन.... एक लड़की होने के नाते अगर मैने तेरी डॅडी की हेल्प कर दी तो क्या बुरा करा."

आराधना -" हेल्प? ऐसे करती है तू हेल्प सबके डॅडी की"
सिमरन -" तुझे चाहे समझ आए ना आए लेकिन मुझे तो दिखता है ना. देखा नही था तूने उस दिन कि तुझे कैसी नज़रो से देख रहे थे जब तूने वो साड़ी पहनी थी. आदमी की सबसे बड़ी कमज़ोरी लड़की ही होती है, तेरे डॅड किसी के लिए तरस रहे थे तो मैने अपना थोड़ा प्यार उन्हे दे दिया तो क्या बुरा किया. और मुझे डर नही किसी का कि मैने कुच्छ ग़लत किया."

आराधना -" अगर यही प्राब्लम तेरे डॅडी के साथ होती तो क्या तू उन्हे भी ब्लो जॉब दे देती?"

सिमरन -" ब्लो जॉब? अबे अपना सब कुच्छ दे देती. तू अपने ये ड्रामे अपने पास रख, मेरा लाइफ स्टाइल अलग है. एक बाहर का लड़का आता है, हमे फाँसता है और हमारा काम कर के भाग जाता है तो इससे तो अच्छा है कि प्यार की दो बूंदे हम अपने डॅड को दे दे लेकिन तू ये सब क्यू पुच्छ रही है. मुझे तो लग रहा है कि तेरा दिल ही तेरे डॅड पे आ गया है?"

आराधना -" तुझे ऐसी बाते करते हुए शरम आनी चाहिए?"

सिमरन -" हम सब लड़कियो मे यही परेशानी है. शरम शरम और शरम. जहाँ कहीं पे किसी को अच्छी बात समझता है तो तुझे शरम आनी चाहिए. वैसे ये सब बाते छोड़ और प्लीज़ बता ना कि तुझे कैसे पता चला कि तेरे डॅड और मेरे बारे मे"

आराधना -" बस मुझे पता है." और आराधना वहाँ से उठ कर चल देती है.

सिमरन -" कहीं ऐसा तो नही कि तूने अपने डॅड के साथ कुच्छ ट्राइ किया और उन्होने तुझसे कह दिया कि उन्हे सिमरन पसंद है". सिमरन उसके पीछे से बोलती है उसको उकसाने के लिए. ये बात सुनकर आराधना रुक जाती है और पीछे मूड कर बोलती है -

आराधना -" तुझे बहुत प्राउड है अपने उपर? "

सिमरन -" क्यू ना हो. उपर वाले ने बनाया बहुत नाप तोल के है". सिमरन ने अपनी टी-शर्ट के कॉलर पकड़ कर खड़े करते हुए कहा

आराधना -" आज के बाद अगर मेरे डॅड की तरफ देखा भी तो सही नही होगा." आराधना उसे उंगली दिखाती है.

सिमरन -" अच्छा तो तूने फ़ैसला कर लिया है कि तू ही देखेगी अपने डॅडी की तरफ". सिमरन उसकी तरफ आँख मारते हुए बोलती है.

आराधना -" अगर ज़रूरत पड़ी तो मैं वो सब कर सकती हू जो तूने किया मेरे डॅड के साथ. लेकिन अब तेरी परच्छाई भी नही पड़ने दूँगी उन पर".

सिमरन -" अगर तेरे मे गट्स होते तो वो भला मेरे पास आते ही क्यू. भूखे को खाना नही दोगि तो ऐसा ही होगा". सिमरन उसे चॅलेंज करते हुए बोलती है

आराधना -" अब उन्हे इतना खाना मिलेगा कि अगर तू अगर अपने सेकेंड हॅंड खाने के साथ पैसे भी देगी ना तो वो तेरे पास नही आएँगे".

सिमरन -" रात रात मे क्या जादू हो गया मेरी सहेली पे. बड़ा प्यार उमड़ रहा है अपने डॅडी के लिए. सच बता अगर कुच्छ बात है तो शायद मे तेरी हेल्प कर पाऊ".

आराधना -" मुझे तेरी किसी हेल्प की ज़रूरत नही"

सिमरन - " जैसी तेरी मर्ज़ी लेकिन मुझसे क्यू गुस्सा हो रही है".

आराधना - " नही गुस्सा नही हू". और फिर दोनो नॉर्मल हो जाते हैं. लेकिन सिमरन के माइंड मे चल रहा था कि कुच्छ तो बात है तभी इसे वो ब्लो जॉब वाली बात पता चल गयी.
प्रीति अपने रूम मे उठ चुकी है और नींद की ही हालत मे अपने रूम से बाहर निकल कर टाय्लेट की तरफ चल देती है. जैसे ही टाय्लेट के गेट को खोलने वाली थी तो खुद ही उसका गेट खुल जाता है और उसमे से कुशल बाहर निकल कर आता है. प्रीति की नींद थोड़ी खुल जाती है क्यूंकी उसे उम्मीद थी कि कुशल थोड़ी बदतमीज़ी कर सकता है.

लेकिन उसका सोचना ग़लत साबित हुआ. क्यूंकी कुशल निकलते ही सीधा अपने रूम मे जाता है. यहाँ तक कि वो प्रीति की तरफ देखता भी नही.

प्रीति को होश आता है तो उसे लगता है कि इसे क्या हुआ. इतना शरीफ कैसे हो गया ये. वो सोचने पे मजबूर हो जाती है और कुशल को अपने रूम मे जाते हुए देखती रहती है लेकिन वो पीछे मुड़कर नही देखता है

प्रीति सोचते सोचते ही टाय्लेट मे घुस जाती है. उसको ये भी लग रहा था कि उसे कोई ग़लत फ़हमी हुई है. खैर वो अपने आप को फ्रेश करती है और बाहर आ जाती है. अपनी रूम की तरफ धीरे धीरे जाते हुए वो कुशल के रूम मे झाँक कर देखती है. कुशल बेड पर अपना मोबाइल हाथ मे लेकर बैठा हुआ था और वो किसी गहरी सोच मे था. प्रीति उसकी तरफ रुक कर देखती है लेकिन वो बाहर नही देखता.

प्रीति वहाँ से आगे बढ़ने की सोचती है लेकिन तभी उसके माइंड मे एक प्लान आता है. " उन्न्ह उन्न्नह, वो ऐसे खाँसती है जैसे गले मे कुच्छ अटक गया हो. कुशल उसकी तरफ देखता है और प्रीति हंस कर पलके झपका झपका कर देखने लगती है.

कुशल -" लगता है तुझे तो टीबी हो गया, तेरा टाइम पूरा हुआ". ये बात सुन कर प्रीति को तो जैसे झटका ही लग गया और वो पाँव पटक कर अपने रूम मे भाग जाती है. और बेड पर उल्टा लेट जाती है. उसको यकीन नही हो रहा था कि ये क्या हो गया है कुशल को.

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स्मृति नहा चुकी थी और मॉर्निंग मेक ओवर कर रही थी. उसके माइंड मे यही चल रहा था कि लाइयन कितना हरामी निकला, मुझे अपना फ्रेंड बनाया, मेरा पीछा किया, मैने क्या क्या खरीदा ये अब देखा उसने आंड लास्ट मे स्केरी हाउस मे मुझे अपना विक्टिम बनाया. कमाल की प्लॅनिंग करता है ये हरामी. लेकिन अब वो सॅटिस्फाइ थी कि वेडनेसडे को उससे मिल कर ये सारा गेम ही ख़तम कर देगी और उसके बाद अपनी फ़ेसबुक प्रोफाइल को भी चेंज कर देगी.

" लेकिन पंकज से क्या बोल कर जाउन्गि?". उसके माइंड मे यही सवाल चल रहा था. उसने प्लान बनाया क़ी आज बच्चे भी सोए हुए है और आराधना भी बाहर गयी हुई है, क्यू ना पंकज को पटाउँ वेडनेसडे नाइट पर्मिशन के लिए. यही सोचकर वो अपने आप को तैयार करने लगती है. उसने आज लाइट पिंक कलर का सूट पहना और लाइट लीप स्टिक आंड आइ शॅडो लगाने के बाद वो चाइ बनाने के लिए किचन मे चली जाती है. स्मृति की बॉडी की सबसे खास बात उसकी हाइट आंड उसकी स्लिम बॉडी थी. पंकज बाहर हॉल मे अभी तक न्यूज़ पेपर ही पढ़ रहा था.

थोड़ी देर बाद स्मृति ट्रे मे चाइ लेकर आ जाती है. वो स्लो वाय्स मे गाना गुन गुना रही थी. काफ़ी हॅपी नज़र आ रही थी वो. वो पंकज को मुस्कुराते हुए चाइ देती है. पंकज बिना न्यूसपेपर से आँखे हटाए उससे चाइ ले लेता है. स्मृति बाते करना शुरू करती है -

स्मृति -" क्या बात है आज कल बहुत हॅंडसम होते जा रहे हो". स्मृति उसे खुश करना चाहती थी.

पंकज -" क्या बात है, तुम भी बिजली गिरा रही हो चारो तरफ. दिन पे दिन औरत कम और लड़की ज़्यादा लगती हो". पंकज की निगाहे स्मृति के बूब्स पर थी.

स्मृति -" और बताओ, सब सही चल रहा है बिज़्नेस वग़ैरा".

पंकज -" उपर वाले की दुआ से सब सही है"

स्मृति -" अच्छा क्या वेडनेसडे को आप फ्री है?"

पंकज -" क्यूँ?"

स्मृति -" नही वो मेरी एक फ्रेंड ने एक पार्टी रखी है. अगर आप फ्री हो तो मेरे साथ चलो". स्मृति ने अंधेरे मे तीर छोड़ा.

पंकज -" अरे नही यार. तुम किसी और के साथ चली जाओ. ये लॅडीस पार्टी हमारे समझ से बाहर है. " स्मृति की तो जैसे मन की मुराद पूरी हो गयी

स्मृति -" लेकिन मैं किसे लेकर जा सकती हू?" स्मृति ने नकली गुस्सा करते हुए कहा

पंकज -" कुशल को ले जाओ. " पंकज ने न्यूसपेपर पढ़ते हुए कहा

स्मृति -" मैं एक अडल्ट पार्टी की बात कर रही हू. वहाँ बच्चो का क्या काम. वहाँ ड्रिंक, डॅन्स और पता नही क्या क्या होगा. बच्चो पर इसका क्या फ़र्क पड़ेगा". स्मृति का टारगेट अकेले जाना था इसीलिए वो इतनी बाते बना रही थी.
पंकज - " अगर अडल्ट पार्टी है तो क्या कुशल बच्चा है? कम ऑन डियर, अब सब बच्चे बड़े हो गये है. अगर तुम उससे कंफर्टबल नही हो तो आराधना को ले जाओ".

स्मृति -" आराधना ओल्ड आइडियास वाली है, उसे वो पार्टी पसंद नही आएगी".

पंकज -" हा हा हा हा हा".

स्मृति -" हंस क्यू रहे हो".

पंकज -" नही तुम कह रही हो कि आराधना ओल्ड आइडियास वाली लड़की है. वो तुमसे भी अड्वान्स है बस थोड़ा गाइड करो उसे".

स्मृति -" आप ही गाइड करो. मैं तो अकेले ही चली जाउन्गि और जल्दी आ जाउन्गि 

पंकज -" इससे बेहतर तो कुच्छ हो ही नही सकता. "

स्मृति -" आप तो चाहते ही मुझे अकेले भेजना हो". स्मृति ने झुटे नखरे दिखाते हुए कहा लेकिन उसकी खुशी का कोई ठिकाना नही था.

पंकज -" इस बार चली जाओ, अगली बार से मैं साथ ही चलूँगा... ओके".

स्मृति झूठा गुस्सा दिखाते हुए चाइ पीने लगती है लेकिन उसके मन मे लड्डू फुट रहे थे. चाइ ख़तम करने के बाद स्मृति वापिस किचन मे चली जाती है और प्लॅनिंग करने लगती है कि कैसे जाना है और कैसे आना है. लेकिन उसके चेहरे पर टेन्षन नही दिख रही थी.

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उधर उपर प्रीति को टेन्षन खाए जा रही थी कि आख़िर कुशल को क्या हुआ है. " कहीं वो मुझसे सच मे तो गुस्सा नही हो गया?" उसके दिल मे बहुत सारे सवाल चल रहे थे और टेन्षन मे वो बहुत पागल सी हुए जा रही थी.

उसने फिर से प्लान बनाया कि क्यू ना उसके रूम मे जाया जाए और पता किया जाए कि आख़िर क्या चल रहा है उसके दिमाग़ मे. वो नहाने चली जाती है, और बाथरूम मे अपनी बॉडी को अच्छे बॉडी वॉश टॉनिक से धोती है. बालो को भी शॅमपू करती है. जो उसकी सबसे बेस्ट ब्रा थी, नहाने के बाद वो उसे पहनती है.

उसका एक मन कहता है कि चल देखा जाएगा जो होगा लेकिन आज ब्रा पहन कर ही उसके रूम मे चलती हू वैसे भी आराधना दीदी भी अपने रूम मे नही है. लेकिन फिर से वो डर जाती है कि कहीं दाव उल्टा ना पड़ जाए और वो कहीं उसे दबोच ना ले.

फाइनली उसने पिंक टाइप स्ट्रिंग वेस्ट पहनी जिसमे उसके शोल्डर्स विज़िबल थे. बहुत ही ज़्यादा सेक्सी लग रही थी वो. उसने अपने बालो को हेर ड्राइयर से सूखाया और उन्हे खुला ही रहने दिया. लिप्स पे लिप बॉम लगाया लेकिन लिपस्टिक नही और वैसे भी उसके लिप्स ऑलरेडी पिंक ही थे.

अब वो अपने रूम से निकल कर कुशल के रूम की तरफ चल देती है. उसका दिल धक धक कर रहा था, पाँव काँप रहे थे. वो जाते जाते रुक जाती है और फिर से सोचने पे मजबूर हो जाती है -" सोच ले बेटा, वैसे भी बहुत परेशान कर चुकी है तू. कुशल अभी एक भूखे शेर की तरह है, अगर अकेले मे मिल गयी तो बच नही पाएगी.". उसका माइंड उसे रुकने के लिए बोलता है लेकिन अगले ही पल उसका स्ट्रॉंग माइंड जागता है " ऐसे कैसे कुच्छ भी कर देगा वो. आइ आम ऑल्सो ए फ्री गर्ल, मेरी बिना मर्ज़ी के वो कुच्छ नही कर सकता " और वो कॉन्फिडेन्स के साथ उसके रूम की तरफ चल देती है.
उसके गेट पे पहुँच कर वो रुक जाती है. उसका गेट खुला हुआ था. प्रीति थोड़ा सा आगे बढ़ती है और देखती है कि कुशल अभी भी बेड पे बैठा हुआ है और मोबाइल मे देख कर कुच्छ सोच रहा है. एक सेक्सी स्टाइल मे प्रीति उसके गेट से चिपक कर बोलती है. 

प्रीति उसी पोज़िशन मे कुशल से बोलती है -

प्रीति -" कुशल...... कुशल..... ?" प्रीति बहुत ही लो वाय्स मे उसे आवाज़ लगाती है. कुशल का ध्यान एक दम से झटका ख़ाता है और वो प्रीति की तरफ देखता है

कुशल -" हाँ क्या बात है?"

प्रीति -" इतना गुस्से मे क्यू है?"

कुशल -" तुझसे मतलब, तू बता कि तुझे क्या चाहिए?"

प्रीति -" ओह्ह्ह इतना आटिट्यूड..."

कुशल -" सीधी बात करो तो आटिट्यूड. नखरे तो ऐसे दिखाती है कि जैसे मेरी बीवी हो".

प्रीति -" ( बहुत ही लो वाय्स मे) - आधी बीवी तो बना ही लिया है".

कुशल -" क्या कहा तूने?"

प्रीति -" कुच्छ नही.... मैं तो बस इतना कह रही थी कि नखरे तो तू दिखा रहा है".

कुशल -" मेरे पास बहुत कुच्छ है तुझे दिखाने के लिए लेकिन अब मन नही है".

प्रीति -" क्यूँ ऐसा क्या हो गया ".

कुशल -" तू सही कहती थी. तेरे पीछे टाइम खराब करने से कुच्छ फ़ायदा नही. "

प्रीति -" पीछे टाइम खराब करने से कुच्छ फ़ायदा वाकई मे नही है, अगर करना है तो आगे टाइम खराब कर ना". प्रीति फिर से लो वाय्स मे बोलती है.

कुशल -" क्या कहा तूने?"

प्रीति -" मैने कहा कि ऐसा क्या हो गया कि तू ये कह रहा है कि टाइम खराब करने से कुच्छ फ़ायदा नही है."

कुशल -" ज़्यादा भोली मत बन. तुझे नही पता कि मेरा टाइम कैसे खराब हो रहा है"

प्रीति -" कैसे हो रहा है.........." प्रीति बहुत ही कामुक आवाज़ मे बोलती है

कुशल -" चाहू तो अभी तेरी चूत को अपने लंड से खोल दू. और इतना खोल दू कि उसके बाद तेरी चूत मे अगर कोई लंड भी जाएगा तो तुझे पता भी नही चलेगा. लेकिन अब मूड नही है. "

प्रीति -" कितनी गंदी गंदी बाते करता है तू. "

कुशल -" तो किसने बोला कि मुझसे बात कर. तू अपनी चूत को बचा के रख, और मुझसे दूर रहा कर नही तो सच मे तुझे एक दिन दोनो साइड से चोद दूँगा. अब अगर मे चुप हू तो खुद आकर मुझे छेड़ रही है."

प्रीति -" अगर तुझसे बात करने आ गयी तो क्या मैं तुझे छेड़ रही हू?"

कुशल -" अँधा नही हू मैं. तुझे खुद शरम नही आती मेरे जज़्बातो से खेलते हुए."

प्रीति -" आज तो कुच्छ ज़्यादा ही गुस्सा आ रहा है तुझे. देख तू कभी मेरी मजबूरी भी समझ..." इससे पहले की प्रीति अपनी बात पूरी कर पाती की कुशल चिल्ला कर पड़ता है.

कुशल -" मजबूरी, मजबूरी, और मजबूरी. भाड़ मे जाए तू और तेरी मजबूरी. चूत की कमी नही है इंडिया मे, तू कोई स्पेशल नही है. सच बोल रहा हू कि तरसेगी लंड को तू. घर बैठे बिठाए तुझे वो प्यार देने को तैयार था जिसके लिए अब तू बाहर धक्के खाएगी लेकिन तुझे समझ नही आया."

प्रीति उसके करीब जाती है उसे शांत करने के लिए.

प्रीति - " चल तू गुस्सा मत हो. ग़लती तुझसे हुई और ग़लती मुझसे भी हुई, हमे कुच्छ ऐसा करना ही नही चाहिए था.".

कुशल -" फिर से एक नया ड्रामा. कहाँ सीख के आती है तू ये सब, मुझे कुच्छ नही सुन ना ये सब."

प्रीति -" देख मैं भी एक इंसान हू लेकिन हू तो लड़की ही."
कुशल -" अगर तू लड़की है तो तूने ये जब क्यू नही सोचा जब मेरा लंड चूस रही थी और अपनी चूत मुझे दिखा रही थी. जब चूत मरवाने की बारी आई तो लड़की होना याद आ गया तुझे. " कुशल का चेहरा लाल होता जा रहा था

प्रीति -" ओके......... ओके!! मैं सोच के बताउन्गि इस बारे मे."

कुशल -" हा हा हा हा. किसी ग़लत फ़हमी मे मत रह. मुझे तेरी चूत की कोई ज़रूरत नही है. तू वर्जिन रह".

कुशल गुस्से मे रूम से बाहर भाग जाता है. और प्रीति उसकी इस आक्टिविटी से शॉक्ड रह जाती है. वो सोचने पर मजबूर हो जाती है कि अब तक मेरा इतना बड़ा दीवाना आज मुझसे बात करने को ही तेय्यार नही है.

उसके चेहरे पर टेन्षन के सॉफ भाव दिखाई दे रहे थे. उसको ऐसा लग रहा था जैसे उसके हाथ से कुच्छ खो गया हो. समझ नही आ रहा था उसे कि वो क्या करे और क्या ना करे.
आराधना पता नही क्यू आज कॉलेज मे अपना मन नही लगा पा रही थी. और जैसे ही लास्ट सेशन की बेल बजती है वो तुरंत तेज़ी से अपने मस्त हिप्स मटकाते हुए कॉलेज के गेट की तरफ भागने लगती है. उसको सिमरन गेट पर अपनी कार मे मिल जाती है.

सिमरन -" आजा स्वीटी... मैं ड्रॉप कर दूँगी.". आराधना अपने अधूरे मन के साथ उसकी कार मे बैठ जाती है. आज सिमरन कार कुच्छ स्लो चलाती है.

आराधना -" क्यू इसे साइकल की तरह चला रही है. इससे अच्छा तो मैं पेदल ही चली जाती." आराधना गुस्सा दिखाते हुए बोलती है.

सिमरन -" कार स्लो नही लेकिन हाँ तुझे घर पहुँचने की कुच्छ ज़्यादा ही जल्दी है. क्यू आज कोई तुझसे मिलने आ रहा है क्या "

आराधना -" नही.... नही ऐसा कुछ... नही है". आराधना सिमरन की बात सुनकर घबरा जाती है. सिमरन स्लो स्पीड पे जाते जाते आराधना को घर छोड़ देती है.

आराधना घर मे आने के टाइम बहुत हॅपी थी. " हाई डॅडी". वो बहुत एनर्जी के साथ अपने डॅडी को ग्रीट करती है और उन्हे पहुँच कर हग कर लेती है. पूरी जान से अपने बूब्स उनके सीने मे दबा देती है.

पंकज -" कैसा रहा कॉलेज का दिन?"

आराधना -" पता नही क्यू मन नही लगा". आराधना हंसते हुए अपने डॅड को बताती है

पंकज -" पढ़ाई मे मन लगाना ज़रूरी है". पंकज सीरीयस होते हुए बोलता है. आराधना को उसकी इस बात से बहुत झटका लगता है.

इतने मे स्मृति भी वहाँ आकर पूछती है आराधना से -" बेटे थक गयी होगी तो खाना खा ले".

"मुझे भूख नही है". और आराधना गुस्से मे उपर अपने रूम मे भाग जाती है. वो अपने डॅड के रिएक्ट से हॅपी नही थी. खैर इतने टाइम वो अपने कपड़े चेंज करती है और फ्रेश होती है.

कुशल घर के बाहर जा चुका था और स्मृति अपने रूम मे थी. अब ग्राउंड फ्लोर पे बाहर बस पंकज ही बैठा हुआ था. आराधना को कॉलेज से आए हुए भी एक घंटे से ज़्यादा हो चुका था.

तभी मेन गेट से एक और एंट्री हुई. वाइट टॉप और वाइट मिनी स्कर्ट मे, बेल्ली पिन भी लगाई हुई थी. खुले हुए बाल और एक स्टाइलिश चाल मे एक लड़की एंट्री लेती है. हॉल फिर से मादक खुसबु से भर गया. शी वाज़ नन अदर दॅन सिमरन. डॅम हॉट... क्या लुक्स थे आज उसके.

पंकज को अपनी सीट से उठने पे मजबूर होना पड़ा. उसका मूँह खुला हुआ था.

सिमरन -" हाई अंकल!!!!ल"

पंकज -" आओ बेटा, आख़िर आ ही गयी याद तुम्हे". सिमरन के चेहरे पे एक सेक्सी स्माइल थी.

वो अंदर आते ही सोफे पे बैठ जाती है.

पंकज -" और सुनाओ".

सिमरन -" कुच्छ नही अंकल, बस ऐसे ही घर पे कोई नही था तो सोचा कि आराधना से मिलने आ जाउ".

पंकज -" कभी हम से भी मिलने आ जाया करो ". पंकज फिर से उसकी तरफ भूखी नज़रो से देखता है.

लेकिन सिमरन बस स्माइल करके चुप हो जाती है. तभी पंकज की निगाहे सिमरन की नेक पर बने ड्रॅगन टॅटू पर जाती है.

पंकज -" क्या तुम्हे ये टॅटूस पसंद है?"

सिमरन -" यस अंकल, आइ लाइक टॅटूस. इससे मेरी लुक्स और भी स्टाइलिश और सेक्सी हो जाती है".

पंकज मन मे सोचता है कि और कितना सेक्सी बनेगी. तभी बीच मे ही सिमरन खड़े होते हुए फिर बोलती है.

सिमरन -" मेरे बॉडी के अलग अलग पार्ट मे टॅटूस बने हुए है, क्या आप देखना चाहेंगे".

पंकज -" क्यूँ नही ......" पंकज तो जैसे सम्मोहित होता जा रहा था.

और डिफरेंट सी अदा मे सिमरन खड़ी होती है और अपना साँस अंदर लेते हुए और मिनी स्कर्ट को थोड़ा नीचे करती है. टी - शर्ट को थोड़ा सा उपर करती है. उफफफ्फ़ क्या सीन था.

पंकज का हाथ ऑटोमॅटिकली सिमरन के सपाट पेट की तरफ बढ़ने लगता है.

" सिमरन........" उपर से नीचे आती हुई आराधना पूरी जान से चिल्लाति है. पंकज अपना हाथ पीछे खींच लेता है.
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Reply

12-01-2018, 01:14 AM,
#30
RE: antervasna फैमिली में मोहब्बत और सेक्स
आराधना की आवाज़ सुनकर पंकज अपना हाथ पीछे खींच लेता है और अपना मूँह दूसरी तरफ कर लेता है. सिमरन भी अपनी टी-शर्ट नीचे कर लेती है. आराधना धीरे धीरे नीचे उतर कर आ जाती है, उसका चेहरा गुस्से से लाल हो रहा था लेकिन वो अपने गुस्से को ज़ाहिर नही कर सकती थी.

आराधना -" तू कब आई". आराधना हंसते हुए बड़े प्यार से सिमरन से पूछती है.

सिमरन -" बस अभी आई थी, सोचा कि अपनी फ्रेंड से मिल आउ".

आराधना -" फ्रेंड से या फ्रेंड के डॅड से?". आराधना बहुत ही लो वाय्स मे उसको ये ताना देती है

सिमरन -" जब जानती है तो पुच्छ क्या रही है". सिमरन भी लो वाय्स मे उसको रिप्लाइ करती है.

" अरे भाई दोनो क्या घुसर पुसर कर रही हो". पंकज पूछता है

" कुच्छ नही पापा, मैं तो बस सिमरन को उपर ले जाने के लिए कह रही थी". आराधना रिप्लाइ करती है

" अंकल आप भी चलिए ना, उपर बैठ कर बात करेंगे". सिमरन पंकज से रिक्वेस्ट करती है.

" चलो मैं थोड़ी देर मे आता हू". पंकज रिप्लाइ करता है

अब आराधना और सिमरन दोनो चुप चाप उपर की ओर चल देती है. आराधना बहुत शांत थी, और धीमे धीमे कदमो मे उपर चलती जा रही थी. वो दोनो आराधना के रूम मे एंटर करते है और रूम के अंदर एंटर होते ही आराधना अपने रूम को बहुत पॉवर के साथ बंद कर देती है. "धदमम्म्म"

आराधना -" अब तो सॉफ सॉफ बोल कि तू क्या चाहती है?". आराधना गुस्से मे सिमरन से पूछती है

सिमरन -" मैं? मैं क्या चाहती हू तू क्यू पुच्छ रही है"

आराधना -" कितनी बड़ी आक्टर है तू. कहीं फ़िल्मो मे काम ढूंड ले ना".

सिमरन -" तू दिला दे." सिमरन बहुत ही प्यार से उसके गाल पकड़ के बोलती है.

आराधना -" साली तुझे बस पॉर्न मूवी मे काम मिल सकता है. अब ये बता कि क्या दिखा रही थी मेरे डॅड को तू?"

सिमरन -" चूत"

आराधना -" क्या कहा तूने?" सिमरन की बात सुन कर आराधना अपने मूँह पे हाथ रख लेती है.

सिमरन -" चूत दिखाने की कोशिश कर रही थी कि तू आ गयी. अब खुश....."

आराधना -" मुझे तुझसे ये आशा नही थी कि तू ऐसी भी है. इतनी गंदी भाषा तो रोड के गँवार यूज़ करते है".

सिमरन -" अबे कमाल तो तूने कर रखा है. इतना शक कहाँ से आ गया तेरे दिल मे, और सबसे पहले अपने आप को पहचान कि तू क्या चाहती है. तू यहाँ छुपा कर रख ले अपने डॅड को".

सिमरन अपना हाथ आराधना के बूब्स पे रखती हुई उसे बोलती है.

सिमरन की ये बात ख़तम ही हुई थी कि गेट खुलता है. सामने पंकज खड़ा था, वो देखता है कि सिमरन का हाथ आराधना के बूब्स पे था और आराधना का फेस बिल्कुल लाल हो रहा था. आक्चुयल मे आराधना का फेस लाल गुस्से की वजह से था लेकिन पंकज कुच्छ और सोचता है.

" ओह्ह्ह सॉरी....." और पंकज बाहर जाने लगता है. तभी सिमरन उसे आवाज़ लगाती है.

सिमरन -" अरे अंकल अभी आए और अभी चल दिए. आइए ना कुच्छ बाते तो हो जाए". सिमरन उसे रूम के अंदर लाते हुए बोलती है. आराधना को अभी भी गुस्सा आ रहा था जिस वजह से उसका फेस और भी लाल हो रहा था लेकिन पंकज को ये लग रहा था कि शायद मेरे बीच मे आने से आराधना को बुरा लग रहा है.

" कहीं इनके बीच लेज़्बीयन रीलेशन तो नही" पंकज अपने मन मे सोचता है.

" नही नही ऐसा नही हो सकता. आराधना लेज़्बीयन नही हो सकती है. वो ये मुझे प्रूव दे चुकी है". वो फिर से अपने मन मे सोचता है. और आकर बेड पर बैठ जाता है. बेड के राइट हॅंड पे आराधना खड़ी थी और पंकज के ठीक सामने सिमरन चेर लेकर बैठ जाती है.
सिमरन -" और सुनाओ कुच्छ अंकल".

पंकज -" आराधना को क्या हुआ है. वो इतनी सीरीयस क्यू लग रही है".

सिमरन -" खुद ही पुछ लीजिए आप अंकल". इससे पहले कि पंकज कुच्छ बोलता आराधना खुद ही बोलने लगती है.

आराधना " कुच्छ नही डॅडी... आइ.... आम ओके.".

पंकज -" तो तेरा चेहरा इतना लाल क्यू हो रहा है?". इससे पहले कि आराधना कुच्छ बोलती-

सिमरन -" अंकल इस एज मे तो हर चीज़ लाल रहती है." ये बात सिमरन बहुत ही रोमॅंटिक अंदाज़ मे बोलती है. उसकी सेक्सी आइज़ पंकज की नज़रो से मिली हुई थी. जिस टाइम सिमरन ये बात बोलती है तो अपनी टाँग उठा कर वो दूसरी टाँग के उपर रखती है. उसकी इस छोटी सी स्कर्ट मे उसकी पैंटी सॉफ नज़र आ जाती है. उसने ब्लू कलर की पैंटी पहनी थी. अब पंकज सॉफ उसकी पैंटी देख सकता था, लेकिन आराधना को कुच्छ अहसास नही था क़ि पंकज को क्या दिख रहा है.

पंकज भी रोमॅंटिक अंदाज़ मे सिमरन से बोलता है.

पंकज -" लाल का तो पता नही लेकिन नीला ज़रूर है आज कल कुच्छ.". ये बात सुनकर सिमरन की हँसी छूट जाती है. सिमरन अपनी हँसो को कंट्रोल करते हुए कहती है

सिमरन -" अरे अरू खड़ी क्यू है, बैठ जा ना".

आराधना " नही नही मैं ठीक हू. तू बैठ आराम से".

सिमरन -" मुझे कहाँ बैठना, मुझे अब चलना चाहिए. मैं तो बस ऐसे ही अपनी फ्रेंड को देखने आ गयी थी".

पंकज -" अभी तो तुमने मुझे बुलाया और अभी तुम चल दी. ये तो कोई बात नही हुई". पंकज ने शिकायत करते हुए कहा

सिमरन -" नही अंकल. मैं फिर आउन्गि, आप बैठो और आराधना से बात करो ना". ये बात बोलते बोलते सिमरन खड़ी हो गयी थी.

पंकज -" अरे आराधना, तू ही बोल अपनी फ्रेंड को रुकने के लिए ना."

आराधना -" वो खुद ही आई और खुद ही जाना चाहती है तो हम क्या कर सकते है. आप ही रोक लीजिए वैसे भी आपके रोकने से तो ये सच मे ही रुक जाएगी". आराधना ने फिर से शब्द के तीरो को चलाया.

पंकज - " सिमरन चलो अब तो रुक ही जाओ. मैं छोड़ आउन्गा तुम्हे घर पे. बोलो क्या पीना पसंद करोगी- चाइ, कॉफी?"

सिमरन -" अंकल ग्रेट ईव्निंग है. मेरा तो घर जाकर मस्त बियर पी कर सोने का प्लान है. आप चाइ कॉफी पीजिए".

पंकज -" चलो तो ठीक है, आज तुम्हारे साथ बियर पी लेते है. तुम बैठो यही मैं लेकर आता हू".

पंकज बाहर जाने लगता है. आराधना गेट के करीब जाकर देखती है कि पंकज कहाँ है. अब वो रूम से दूर जा चुका था. आराधना फिर से सिमरन पे चिल्लाने लगती है -

" यही बाकी रह गया था कि मेरे बाप के साथ बैठ कर पीना. सच बोल रही हू कि गजब लड़की है तू". आराधना बोलती है.

सिमरन -" आराधना ग्रो अप यार. क्या हो जाएगा अगर हम बैठ कर दो बियर पी लेंगे. प्लीज़ यार अपनी मेनटॅलिटी चेंज कर. मैं अभी जा सकती हू लेकिन तेरे डॅडी ही ज़िद कर रहे है. मैं हर बात मज़ाक मे लेती हू लेकिन वाकई मे तू बहुत सीरीयस ले रही है. जो कुच्छ बात थी वो मैं तुझे बता चुकी हूँ अब तू शक करना बंद कर".

आराधना -" मुझे अच्छा नही लगता कि मेरे डॅड के इतने करीब तू जाए. अगर तू मेरी फ्रेंड है तो प्लीज़ ये गेम बंद कर." आराधना की वाय्स बहुत सॉफ्ट हो चुकी थी.

सिमरन -" अरू, यू आर माइ बेस्ट फ्रेंड. तेरे लिए तो मैं कुच्छ भी कर सकती हू. सच बता तुझे तेरे डॅड अच्छे लगते है?

आराधना -" बहुत......". आराधना एग्ज़ाइटेड होकर बोलती है.

सिमरन -" डॅड के जैसे या एक मर्द के जैसे?". सिमरन उसके दिल की सारी बात निकलवाना चाहती थी.

आराधना -" पता नही".

आराधना अपना मूँह फिरा लेती है. उसकी साँसे तेज हो चुकी थी.

सिमरन खड़ी होकर उसके पास जाती है. उसका चेहरा अपने हाथो मे लेती है और अपनी तरफ घुमाती है.

सिमरन -" मैं तेरी फ्रेंड हू अगर मुझसे शेर करेगी तो शायद मे तेरी कुच्छ हेल्प कर पाऊ. सच बता कहीं तेरे दिल मे तेरे डॅड के लिए कुच्छ रोमॅंटिक जज़्बात उमड़ रहे है क्या?"

आराधना चुप रहती है. सिमरन अपने हाथ को उसके कान पर रख कर नीचे उसके बूब्स की तरफ ले जाकर बोलती है -

सिमरन -" कहीं तेरी इच्छा तो नही होने लगी है कि तेरे डॅड तेरी बॉडी के साथ खेले. तेरे इन मस्त बूब्स को दबाए. पूरी रात तेरे बदन को मसले और तेरी चूत....". इससे पहले की सिमरन कुच्छ और बोलती आराधना उसके मूँह पर अपना हाथ रख कर चुप करा देती है.

आराधना -" प्लीज़....... कुच्छ मत बोल."

उसकी नज़रे झुकी हुई थी और वो साँसे तेज तेज ले रही थी.

सिमरन -" तू कहेगी तो आज रात ही तेरा काम करा दूँगी. मर्दो को कैसे कंट्रोल करना होता है सब तरीके मुझे पता है. बता अगर रेडी है तो?"

आराधना -" नही...." उसकी आवाज़ मे दम नही था. ये देख कर सिमरन को हँसी आने लगती है.

सिमरन -" जैसी तेरी मर्ज़ी....." और वो मूड कर अपनी चेर पे दोबारा जाने लगती है. तभी आराधना बोलती है -

आराधना -" सुन......."

सिमरन -" हाँ बोल"

आराधना -" क्या मैं तुझपे पूरा भरोसा कर सकती हू?"
सिमरन -" तेरे सामने कोई और ऑप्षन है तो उस पर कर ले. वैसे मैं तुझे बता दू कि लाइफ मे कुच्छ भी करने के लिए किसी पे भरोसा करना ज़रूरी है. जो तू करती नही है, तुझे तो बस शरीफ बन ने का शौक है."

आराधना -"तो सुन जो तूने कहा मैं वो सब चाहती हू........". आराधना ने अपने दिल के हाल बयान कर दिए. सिमरन जैसे चिल्ला के पड़ी खुशी के मारे और जाकर उसके गले से लग जाती है. " ओये होये रानी...... ऐसा शॉट मारा कि बॉल ही बाउंड्री पर. डाइरेक्ट डॅड से ही ........" सिमरन खुशी मे ही बोलती है.

" अब तू मज़ाक मत उड़ा. मैने तुझे अपने दिल की बात बता दी है. चाहती हू कि तू मेरी हेल्प करे" आराधना बोलती है.

सिमरन -" मेरी जान अभी तू अपनी इस फ्रेंड के गट्स नही जानती है. तेरे डॅड को तेरा आशिक ना बना दिया तो कहना. लेकिन तुझे मेरी हर बात मान नी पड़ेगी. "

आराधना -" मैं कुच्छ भी करूँगी....."

तभी पंकज की एंट्री होती है रूम मे. उसके हाथ मे बियर की कुच्छ बॉटल्स थी. " क्या करने को कह रही है आराधना". पंकज बोलता है.

सिमरन -" कुच्छ नही अंकल बस ऐसे ही जनरल टॉक चल रही थी."

पंकज -" सो हियर आर दा बियर्स.". पंकज उन्हे एक छोटे से टेबल पे रखते हुए बोलता है.

रूम मे बस एक ही चेर थी और एक छोटा सा टेबल. उस चेर पे सिमरन बैठी होती है. टेबल पे बियर रखने के बाद पंकज एक बियर को खोलता है और उसे सिमरन को ऑफर करता है - " बियर टू आ ब्यूटिफुल गर्ल". सिमरन उसे ले लेती है.

" अंकल आप भी लीजिए ना...." सिमरन उसे रिक्वेस्ट करती है.

" मैं तो ज़रूर लूँगा..." पंकज डबल मीनिंग वाली बात कहता है.

"चियर्स.........." और दोनो अपनी बॉटल्स को आपस मे टकराते है.

सिमरन -" अंकल और बताइए"

पंकज -" पुछो ना"

सिमरन -" आपको क्या कुछ अच्छा लगता है?"

पंकज -" बहुत कुच्छ" पंकज की निगाहे सिमरन के बूब्स पर थी.

आराधना ये सब देख कर जले भुने जा रही थी. तभी सिमरन को एक फोन कॉल आता है और वो सीरीयस हो जाती है.

" कब ......... ओके मैं आती हू..." सिमरन कॉल डिसकनेक्ट कर देती है.

" अरू, अंकल मुझे जाना होगा. घर पे कोई प्राब्लम हो गयी है". सिमरन बोलती है

पंकज -" सब ठीक तक तो है ना बेटी"

सिमरन -" सब ठीक है अंकल लेकिन बाद मे बताउन्गि कि क्या हुआ है. ओके अंकल मैं चलती हू". सिमरन अपनी बियर टेबल पे रखती हुई बोलती है.

पंकज -" चलो मैं तुम्हे नीचे तक छोड़ देता हू".

और फिर वो दोनो नीचे चले जाते है. आराधना का मूड बिल्कुल खराब हो जाता है. उसको गुस्सा आ रहा था.

थोड़ी देर वेट करने के बाद वो सिमरन को फोन मिलाती है.

सिमरन -" हेलो"

आराधना -" तो मेरे दिल की बात लेना चाहती थी तू"

सिमरन -" यार समझा कर. एक प्राब्लम हो गयी है मैं बाद मे बता दूँगी"

आराधना -" और उसका क्या?"

सिमरन -" उसका किसका?

आराधना -" जो तूने कहा था कि आज रात करा देगी"

सिमरन -" मैं सच बोल रही हू कि करा दूँगी. भरोसा रख बस मेरे उपर. मैं कल आती हू"

आराधना -" ठीक है." और आराधना गुस्से मे फोन काट देती है.

आराधना खून के कड़वे घूँट पीकर सो जाती है.

वेडनेसडे शाम के 4 बज चुके थे. स्मृति के दिल की धड़कने बढ़ी हुई थी क्यूंकी जैसे जैसे टाइम बीत रहा था तो उसे अहसास भी होता जा रहा था कि उस लाइयन से मिलने का टाइम करीब आ रहा है. आज दोपहर खाना भी सही से नही खाया उसने, पता नही क्यूँ उसके गले से नीचे ही नही उतर रहा था.

" पता नही कौन है और कैसा है. क्या मैं उससे मिल कर ग़लत तो नही कर रही हू? कहीं वो ऐसी कोई हरकत दोबारा तो नही कर देगा जो उसने स्केरी हाउस मे करी थी?, कहीं ये कोई ब्लॅक मेलर तो नही है?". स्मृति के माइंड मे पता नही कितने सवाल आ रहे थे. उसका मोबाइल उसके हाथ मे ही था की तभी फ़ेसबुक मेसेंजर पे मेसेज रिसीव होता है. वो लाइयन ही था -
लाइयन - स्मृति जी, यू देअर?

स्मृति - हाँ जी कहो......

लाइयन - तो आज का प्लान पक्का है ना?

स्मृति - कौन सा प्लान?

स्मृति ने उसे जान बुझ कर ऐसा दिखाया जैसे वो सब भूल ही गयी हो. वो भाव खा रही थी.

लाइयन - क्या आप भूल गयी कि आज आपको मिलने आना है. वेडनेसडे ईव्निंग, फार्म हाउस, कुच्छ याद आया?

स्मृति - हाँ हाँ, तुमने बोला तो था. लेकिन मुझे याद नही.....

लाइयन - आपको घर से निकलने मे कुच्छ ही घंटे रह गये है और आप कह रही है कि कुच्छ याद नही. ऐसा ना कहो नही तो आपके इस दोस्त का दिल टूट जाएगा.

स्मृति - ओके ओके. इतनी ज़िद कर रहे हो तो आ जाउन्गि. लेकिन मैं तुम्हे पहचानूँगी कैसे?

लाइयन - आप टेन्षन ना ले. आप आ जाइए और मैं पहचान लूँगा.

स्मृति - मुझे कैसे पता चलेगा कि जो मुझे पहचानेगा वो लाइयन ही है मीन्स वो तुम ही हो.

लाइयन - पहचान ने के लिए तो बहुत सारी चीज़े है जिन्हे आप फील कर चुकी है.

स्मृति - तुम फिर से शुरू हो गये. मैं झूठे प्रॉमिस नही करती इसीलिए आ रही हू, अभी तो तुम्हारी कोई भी हरकत ऐसी नही है जिनसे इंप्रेस होकर मैं आउ. और वैसे भी ये तुमसे लास्ट मीटिंग है, उसके बाद ना चाटिंग ना मीटिंग.

लाइयन - आपसे एक मीटिंग हो जाए बस मुझे और कुच्छ नही देखना. मैं आपसे मिल कर समझ लूँगा कि मैने यहीं जन्नत यहीं देख ली मैने.

स्मृति - बाते बनाना कोई तुमसे सीखे. ठीक है मैं आ जाउन्गा लेकिन घर जल्दी आना है मुझे. समझे?

लाइयन - जी मेडम समझ गया. आप टेन्षन ना लो आप जल्दी से जल्दी घर चली जाना. लेकिन पहन कर क्या आ रही हो आप?

स्मृति - क्यू बताऊ?

लाइयन - अब इतना तो बता ही दो.

स्मृति - सर्प्राइज़.

लाइयन - चलो हम आपके सर्प्राइज़ का वेट करेंगे. बाइ

स्मृति - बाइ

दोनो की चाटिंग फिर से ख़तम हो जाती है. अब लगभग 4.45 PM हो चुके थे. अपने मोबाइल को बेड पर फैंक कर वो बाथरूम मे घुस जाती है. वो गाने गुन गुना रही थी जिससे सॉफ दिख रहा था कि वो बहुत हॅपी थी. बाथरूम मे आज अच्छा टाइम स्पेंड किया उसने, पूरी बॉडी वॉश की और हेर वॉश किए. हेर एक अच्छे ड्राइयर से सुखाए और उन्हे स्टाइल देना शुरू कर देती है. उसकी लेग्स ऐसे चमक रही है जैसे कभी उन पर कोई बाल था ही नही.

ऊम्र की झलक ना तो उसकी बॉडी पर थी और ना ही उसके फेस पर. ऐसी शाइनिंग तो जवानी मे भी लड़कियो को नसीब नही होती है. अपनी बॉडी के हर अंग को वो क्लीन कर चुकी थी, शायद ये मीटिंग के लिए नही बल्कि नॉर्मली वो क्लीन कर ही लेती थी.

वॉर्डरोब से नयी ब्रा और पैंटी का सेट निकालती है. ब्रा पॅडेड थी एक्सट्रा क्लीवेज के लिए, अक्सर छोटे बूब्स वाली लड़किया इन्हे पहनती है लेकिन पता नही स्मृति ने इसे पहन ने का फ़ैसला क्यू किया जबकि उसके बूब्स तो वैसे ही अपने मे रेकॉर्ड थे. टवल को उतार कर वो ब्रा को पहनती है, ब्रा उसको ऐसे आई जैसे बनी ही उसके लिए है. एक्सट्रा पॅडेड होने के कारण उसके बूब्स जैसे बिल्कुल उपर की तरफ आ गये थे. किसी भी मर्द के लिए ऐसा सीन देखना जैसे अपनी जवानी को भड़काना है लेकिन अनफॉर्चुनेट्ली वहाँ कोई था नही.

स्मृति अपनी पैंटी भी पहन चुकी थी. अब अपने वॉर्डरोब से वो एक येल्लो शॉर्ट ड्रेस निकालती है. उसे हॅंगर पे रहते हुए ही वो उठा कर देखती है और देख कर स्माइल करती है, वो खुद भी समझ गयी थी कि आज वो कितनी सेक्सी लगने जा रही थी.

उसने घड़ी मे फिर टाइम देखा, 5.30 हो चुके थे. " अब मुझे फाइनली रेडी हो जाना चाहिए". स्मृति अपने मन मे सोचती है और उस ड्रेस को लेकर बाथरूम मे घुस जाती है. बाथरूम मे जितना हॉट मेक अप वो कर सकती थी उसमे उसने पूरी ताक़त लगा दी. उसे खुद भी समझ नही आ रहा था कि आख़िर क्यूँ वो इतनी एग्ज़ाइटेड है.

करेक्ट 7 PM स्मृति अपने रूम से बाहर आती है. "ओह माइ गॉड....." पंकज उसे देख कर आश्चर्य से खड़ा हो जाता है. " क्या बात है, ऐसी कभी जवानी मे तो नही दिखी तू जैसी आज दिख रही है". पंकज उससे मज़ाक मे बोलता है. स्मृति ने येल्लो शॉर्ट ड्रेस पहनी हुई थी. 

" देखने वाले की नज़र पे डिपेंड करता है कि क्या दिखाई देता है उन्हे और क्या नही". स्मृति भी अपने मूँह स्टाइल मे उपर करते हुए बोलती है.

" कैसी पार्टी होगी जिसमे मेरी बीवी इतनी हॉट बन कर जा रही है". पंकज फिर से बोलता है.

" वो तो मैं बचपन से ही हॉट हू..... अच्छा लाओ गाड़ी की चाबी देना". स्मृति बोलती है.

पंकज उसे गाड़ी की चाबी दे देता है और बोलता है कि आराम से जाना.

स्मृति बाहर आती है. जैसे ही गाड़ी के पास आती है तो उसे कुशल दिखाई देता है, उसने भी जीन्स और टी-शर्ट पहना हुआ था. स्मृति उसे देख कर रुक जाती है.

" कहीं जा रहा है क्या?". स्मृति कुशल से सवाल करती है

" मोम देख कर तो आपको लग रहा है कि आप कहीं जा रही है." कुशल रिप्लाइ करता है

" बाते मत बना और बता कि कहाँ जा रहा है?". स्मृति फिर से उससे बोलती है

" मोम एक फ्रेंड की बर्तडे पार्टी है, वहीं जा रहा हू और रात को आने मे थोड़ा लेट हो जाउन्गा". कुशल बोलता है.

स्मृति ने कार के डोर को अब तक ओपन कर लिया था. वो उसने बैठते हुए बोलती है -

" इटस ओके. लेकिन ड्रिंक करने की कोई ज़रूरत नही है. ओके?"

" मोम आज कल बिना ड्रिंक के भला कोई पार्टी होती है. हाँ लेकिन फिर भी मे ज़्यादा नही पीऊँगा." कुशल रिप्लाइ करता है

स्मृति -" चल ठीक है. अपना ख्याल रखियो. बाइ." और कार का गेट बंद कर लेती है. कार को वो बाहर निकाल कर उस फार्म हाउस के लिए रवाना हो जाती है.

वो उस एरिया से वाकिफ़ तो नही थी लेकिन उसको आइडिया था तो वहाँ तक ड्राइव करके चली जाती है. करीब चालीस मिनिट की ड्राइव के बाद वो उस एरिया मे पहुँच जाती है. उसके बाद वो एक छोटी सी शॉप के सामने अपनी गाड़ी रोकती है, मिरर खोलती है.

" भैया ये ------ फार्म हाउस कहाँ होगा". वो शॉपकीपर से पूछती है

" मेडम यहाँ से सीधा, टी पॉइंट से राइट और रोड बस उस फार्म हाउस पे ही ख़तम होगा". ये बात बोलते हुए उस शॉपकीपर के मूँह पे एक अलग सी ही स्माइल थी. स्मृति अपनी कार आगे बढ़ा देती है. " कितना बद तमीज़ आदमी था". वो अपने मन मे सोचती है. और उसके बताए उसे रास्ते पर चल देती है.
उस रोड पर कोई ज़्यादा पॉप्युलेशन नही थी. थोड़ी ही देर के ड्राइव के बाद वो उस रोड पर पहुँच जाती है. फार्महाउस के आउटर लुक से काफ़ी इंप्रेस होती है.

" चलो स्टॅंडर्ड तो सही है इस लाइयन का". अपने मन मे सोचती है. फार्म हाउस के चारो तरफ धीमी लाइटिंग थी जो कि काफ़ी रोमॅंटिक फीलिंग दे रही थी. फार्म हाउस के राइट साइड मे ही बहुत बड़े स्पेस मे ही पार्किंग स्पेस दिया गया था जिसमे असिस्ट करने के लिए लोग भी थे. स्मृति को एक पार्किंग गाइ असिस्ट करता है और वो अपनी कार पार्क कर देती है. पार्किंग गाइ से ही वो पूछती है कि मेन एंट्रेन्स कहाँ है और वो उसे प्रॉपर गाइड कर देता है.

स्मृति अपने हिप्स को मटकाते हुए आगे बढ़ती बढ़ती है. जैसे जैसे वो मेन एंट्रेन्स के करीब पहुँच रही थी वैसे वैसे म्यूज़िक की आवाज़ उसके कानो तक और क्लियर होती जा रही थी.

स्मृति मेन एंट्रेन्स तक पहुँच जाती है, जहाँ एक हॅंडसम लड़का और एक सेक्सी लड़की रिसेप्षन पे खड़े हुए थे. उंसके साइड मे सेक्यूरिटी गार्ड्स भी खड़े थे. रिसेप्षन के दोनो लोग स्मृति को ग्रीट करते है

रिसेप्षन - "हेलो मॅम".

स्मृति - " हाई".

रिसेप्षन - " सो मेडम प्राइवेट ऑर सोशियल?" वो स्मृति से ये सवाल पूछते है

स्मृति - " आइ डॉन'ट नो इफ़ इट ईज़ सोशियल ऑर प्राइवेट. सम्वन इन्वाइटेड मी हियर आक्च्युयली".

रिसेप्षन - " एनी आइडी रिक्वाइयर्ड मेडम दट यू आर अबव 18 यियर्ज़". स्मृति इस बात को सुनकर काफ़ी हॅपी हुई क्यूंकी उसे ऐसा लगा कि आज भी वो लोगो डाउट है कि वो 18 की है या नही.

स्मृति -" क्या आप लोगो को मुझे देख कर डाउट है कि मैं इस एज से कम हूँ."

रिसेप्षन -" नो मॅम. ये एक फॉरमॅलिटी है ऐज इनसाइड एन्वाइरन्मेंट ईज़ फॉर अडल्ट्स ओन्ली.". ये बात सुनकर स्मृति का माथा ठनकता है लेकिन वो रिसेप्षन पे कुच्छ नही दिखाती.

स्मृति - " लेकिन ये सोशियल ओर प्राइवेट क्या है?"

रिसेप्षन - " मॅम हम लोगो की प्राइवसी का ख्याल रखते है. हमारे दो सेगमेंट है. सोशियल जो कि आपके एंटर होते हो आपको दिख जाएगा -सोशियल मे सभी लोग होते है. ड्रिंक, डॅन्स, चॅट, वॉक ओर वहटेवेर लेकिन आपको सबकी प्राइवसी का ख्याल रखना पड़ेगा. किसी भी मेंबर का नाम ओर पर्सनल आइडेंटिटी पुछ्ना अलोड नही है. दिस पार्टी ईज़ फॉर फन ओन्ली. "

स्मृति - " और प्राइवेट क्या होता है"

रिसेप्षन -" प्राइवेट मीन वन सेपरेट एरिया जहाँ बस आप और आपके पार्ट्नर होंगे".

स्मृति डाउट्स मे थी कि ये चक्कर क्या है और ये कैसी पार्टी है. लेकिन वो रिसेप्षन वालो को डाउट नही कराना चाहती थी. रिसेप्षन वाले स्मृति के हाथ पर एक स्टंप लगाते है और उसे एल फेस मास्क पहन ने को देते है. उस फेस मास्क को देख कर स्मृति के माइंड मे बहुत सारे सवाल आते है -

स्मृति -" ये फेस मास्क क्यू?"

रिसेप्षन -" मेडम ये एक अडल्ट प्लेस है जहाँ लोग एंजाय करने आते है. हमे उनकी और आपकी प्राइवसी का ख्याल रखना है. अंदर जाने वाले सभी मेम्बेरा को ये पहन ना ज़रूरी है".

स्मृति -" अगर कोई ना पहने या अंदर उतार दे तो "

रिसेप्षन -" अगर कोई ना पहने तो वो अंदर नही जा सकता और अगर कोई अंदर उतारेगा तो सेक्यूरिटी उसे सस्पेंड करके बाहर भेज देगी"

स्मृति भी सोचती है कि अच्छा है किसी को पता भी नही चलेगा कि मैं कौन हू और वो उस फेस मास्क को लगा लेती है. आक्चुयल मे वो फेस मास्क नही बस आइ मास्क था.

स्मृति अंदर एंटर हो जाती है. अंदर एंटर होते ही उसे समझ आ जाता है कि ये कोई अडल्ट पार्टी है. ये एक बहुत बड़े स्पेस मे था. राइट साइड मे बार टाइप काउंटर बने हुए थे जिन पर गर्ल्स आंड बाय्स ड्रिंक कर रहे थे. बीच मे चेर आंड टेबल लगे हुए थे जिन पर काफ़ी कपल्स बैठे हुए थे. लेफ्ट साइड और स्ट्रेट म्यूज़िक डीजे लगा हुआ था जिस पर भी कपल्स डॅन्स कर रहे थे.

सभी गर्ल्स ने आइ मास्क और बाय्स ने फुल फेस मास्क पहना हुआ था. माहौल काफ़ी रंगीन था. सभी गर्ल्स ने शॉर्ट ड्रेस ही पहनी हुई थी और बाय्स ने जीन्स आंड टीशर्ट.
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