Aunty ki Chudai आंटी और उनकी दो खूबसूरत बेटियाँ
02-07-2019, 01:11 PM,
#31
RE: आंटी और उनकी दो खूबसूरत बेटियाँ
"उफ्फ्फ्फ़...मेरे राजा जी...तुम तो जादूगर हो...अपनी बातों में फंसा कर 
तुमने मुझे चोद ही डाला...अब और मत तड़पाओ, मैं कल से तड़प रही हूँ...मेरी 
प्यास बुझा दो।" रिंकी अब मदहोश हो चुकी थी और खुलने भी लगी थी। 



"उम्म्म्म...हूँन्न......ऐसे ही मेरे सोनू......आज इस कमीनी चूत की सारी गर्मी निकाल दो...चोदो... आआह्ह्ह्ह...और चोदो..." 



रिंकी के शब्दों ने जैसे आग में पेट्रोल का काम किया और मैंने ताबड़तोड़ अपने लंड को उसकी चूत में पेलना शुरू किया। 



अब तक रिंकी और मैं चुदाई के सबसे साधारण आसन से चुदाई किये जा रहे थे 
लेकिन मैंने अब उसे दूसरे तरीके से चोदने का मन बनाया। मैंने एक ही झटके 
में अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकल लिया। लंड बाहर निकलते ही रिंकी ने 
चौंक कर मेरी तरफ देखा और मुझसे पूछने लगी,"क्या हुआ...? बाहर क्यूँ 
निकाला... इसे जल्दी से अन्दर डालो ना !" इतना कहकर रिंकी ने अपने हाथ 
बढ़ाये और मेरे लंड को पकड़ कर खींचने लगी। लंड चूत के रस से बिल्कुल गीला था
तो रिंकी के हाथों से फिसल गया। लंड हाथों से फिसलते ही रिंकी उठ कर बैठ 
गई और पागलों कि तरह मुझसे लिपट कर मेरे ऊपर चढ़ने लगी। 



मैं सोच रहा था कि उसे घोड़ी बनाकर उसके पीछे से उसकी चूत को चोदूँगा लेकिन 
उसने मुझे धकेल कर लिटा दिया और खुद बैठ कर मेरे लंड को अपने हाथों से पकड़ 
लिया और मुठ मारने लगी।
"हम्म्म्म...आज मैं तुझे नहीं 
छोडूंगी...कच्चा चबा जाऊँगी तुझे...हुन्न्न..." रिंकी मेरे लंड से खेलते 
हुए कह रही थी और अचानक से झुक कर उसने मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया।




मैंने कई बार ब्लू फिल्मों में ऐसा देखा था कि लड़की चुदवाते चुदवाते लंड 
बाहर निकाल कर फिर से चूसने लगती है और फिर चूत में डालकर चुदवाती है। 
रिंकी की इस हरकत ने मुझे यह सोचने पे मजबूर कर दिया और मुझे यकीन हो चला 
था कि उसने जरुर ब्लू फ़िल्में देखीं हैं और वहीं से यह सब सीखा है। 



खैर मेरे लिए तो उसकी हर हरकत मज़े का एक नया रूप दिखा रही थी। मैं मस्त होकर अपना लंड चुसवाने लगा। 



थोड़ी देर मज़े से लंड को चूसने के बाद रिंकी उठी और मेरे दोनों तरफ पैर करके
मेरे लंड को अपने हाथों से पकड़ा और अपनी चूत के मुँह पे लगा कर बैठने लगी।
चूत तो पहले से ही गीली और खुली हुई थी तो मेरा सुपारा आसानी से उसकी चूत 
के अन्दर प्रवेश कर गया। सुपाड़ा घुसने के बाद रिंकी ने लंड को हाथों से छोड़
दिया और दोनों हाथ मेरे सीने पे रख कर धीरे धीरे लण्ड को चूत के अन्दर 
डालते हुए बैठने लगी। जैसे जैसे लंड अन्दर जा रहा था, रिंकी के चेहरे के 
भाव बदल रहे थे। आधा लंड अन्दर हो चुका था... 



रिंकी ने मेरी आँखों में देखा और अपने होंठों को दांतों से दबा कर एकदम से बैठ गई। 



"आअह्ह्ह्ह...माँ......बड़ा ही ज़ालिम है ये...पूरी दीवार छील के रख दी 
तुम्हारे लंड ने...उफ्फ्फ..." रिंकी ने मादक अदा के साथ पूरा लंड अपनी चूत 
में उतार लिया और थोड़ी देर रुक गई। 



मैं उसे प्यार से देखता रहा और फिर अपने हाथ बढ़ा कर उसकी कोमल चूचियों को 
थाम लिया। जैसे ही मैंने उसकी चूचियाँ पकड़ीं, रिंकी ने अपनी कमर को थोड़ी 
गति दी और हिलने लगी। मैं मज़े से उसकी चूचियाँ दबाने लगा और मज़े लेने लगा। 
रिंकी बड़े प्यार से अपनी कमर हिला हिला कर लंड को अपनी चूत से चूस रही थी।
मैं बयाँ नहीं कर सकता कि कुदरत के बनाये इस खेल में कितना आनंद भरा है। ये तो उस वक़्त बस मैं समझ रहा था या रिंकी...। 



"उम्म्मम्म...आह्ह्ह्ह...रिंकी मेरी जान...मैं दीवाना हो गया 
तुम्हारा......ऐसे ही खेलती रहो..." मैं मज़े से उसकी चूचियाँ दबाते हुए उसे
जोश दिलाता रहा और वो उच्चल उछल कर चुदवाने लगी। 



"हाँ...सोनू, तूने तो मुझे ज़न्नत दिखा दिया...मैं तुम्हारी गुलाम हो गई 
रजा...उफ्फ्फ...उम्म्म्म..." रिंकी अपने मुँह से तरह तरह की आवाजें निकलती 
रही और लगातार कूद कूद कर लंड लेती रही। 



मैं थोड़ा सा उठ गया और मैंने उसकी चूचियों को अपने मुँह में भर लिया। उसकी 
चूचियों को चूसते हुए मैंने अपने हाथों को पीछे ले जाकर उसके कूल्हों को 
पकड़ लिया और उसे अपनी ओर खींच कर खुद से और भी सटा लिया। अब उसकी चूत और 
मेरा लंड और भी चिपक गए थे और एक दूसरे की चमड़ी को घिस घिस कर चुदाई का मज़ा
ले रहे थे। रिंकी ने अपने बाहें मेरे गले में डाल ली थीं और मैं उसकी 
चूचियों का रस पान करते हुए अपनी तरफ से भी धक्के लगा रहा था। 



काफी देर तक इसी अवस्था में चोदने के बाद मैंने रिंकी को पकड़ कर पलट दिया और अब मैं उसके ऊपर था और वो मेरे नीचे। 



मैंने अब पोजीशन बदलने की सोची और रिंकी के ऊपर से उठ गया। 



रिंकी ने फिर से सवालों भरे अंदाजा में मेरी तरफ देखा। मैंने मुस्कुरा कर 
रिंकी का हाथ थमा और उसे बिस्तर से नीचे उतार दिया। हम दोनों खड़े हो चुके 
थे। मैं रिंकी के पीछे हो गया और उसे दीवार की तरफ घुमा दिया जिस तरफ आदमकद
आइना लगा था। अब स्थिति यह थी कि मैं रिंकी के पीछे और रिंकी की पीठ मेरी 
तरफ थी और हमारे सामने बड़ा सा आइना था जिसमे हम दोनों मादरजात नंगे दिखाई 
दे रहे थे।
रिंकी ने एक नज़र आईने पे डाली और उस दृश्य को देखकर एक बार के लिए शरमा सी गई। 



मैंने अपने हाथ आगे बढ़ा कर उसकी चूचियों को फिर से थामा और उसकी गर्दन पर 
चुम्बनों की बरसात कर दी। रिंकी ने भी मेरे चुम्बनों का जवाब दिया और अपने 
हाथ पीछे करके मेरे लंड को पकड़ लिया और अपने चूतड़ों की दरार के बीच में 
रगड़ने लगी। मैंने धीरे धीरे उसे आगे की तरफ सरका कर आईने के एकदम सामने कर 
दिया और अपने हाथों से उसके हाथों को आगे ले जाकर शीशे पर रखवा दिया और उसे
थोड़ा सा झुकने का इशारा किया। 



रिंकी ने आईने में मेरी तरफ देख कर एक मुस्कान के साथ अपनी कमर को झुका 
लिया और अपनी गांड को मेरी तरफ बढ़ा दिया। मैंने उसके चिकने पिछवाड़े पे अपने
हाथ रखे और सहला कर एक जोर का चांटा मारा। 



"आऔच...हम्म्म्म...बदमाश...क्या कर रहे हो...?" रिंकी ने एक सेक्सी आवाज़ में मुझे देखते हुए कहा। 



मैंने भी मुस्कुरा कर उसकी कमर को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और अपने 
लंड को उसकी गांड की दरार में सरकाते हुए चूत के मुँहाने पे रख दिया। चूत 
पूरी चिकनाई के साथ लंड का स्वागत करने के लिए तैयार थी। 



मैंने अपना अंदाजा लगाया और एक जोर का झटका दिया। 



गच्च...की आवाज़ के साथ मेरा आधा लंड उसकी चूत में समां गया और रिंकी ने एक 
मादक सिसकारी भरी और आईने में अपनी चूत के अन्दर लंड घुसते हुए देखने लगी। 
मैंने बिना किसी देरी के एक और करारा झटका मारा और पूरे लंड को उसकी चूत की
गहराई में उतार दिया।
"ओह्ह्ह्ह...मेरे राजा...चोद 
डालो मुझे...फाड़ डालो आज इस हरामजादी को...रात भर लंड के लिए टेसुए बहा रही
थी..." रिंकी ने मज़े में आकर गन्दे गन्दे शब्दों का इस्तेमाल करना शुरू 
किया और मैं जोश में आकर उसकी जबरदस्त चुदाई करने लगा। 



"फच्च...फच्च...फच्च...फच्च उह्ह्ह...आअह्ह्ह्ह...उम्म्मम्म..." बस ऐसी ही आवाजें गूंजने लगी कमरे में। 
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02-07-2019, 01:11 PM,
#32
RE: आंटी और उनकी दो खूबसूरत बेटियाँ
हम दोनों दुनिया से बेखबर होकर अपने काम क्रीड़ा में मगन थे और एक दूसरे को आईने में देख कर लंड और चूत को मज़े दे रहे थे... 



मैंने अब अपनी स्पीड बढ़ाई और राजधानी एक्सप्रेस की तरह अपने लंड को उसकी 
चूत में ठोकने लगा। मैं अपने आप में नहीं रह गया था और कोशिश कर रहा था कि 
पूरा का पूरा उसकी चूत में समां जाऊं... 



मैंने उसकी कमर थाम रखी थी और उसने आईने पे अपने हाथों को जमा रखा था। 
मैंने आईने में देखा तो उसकी चूचियों को बड़े प्यार से हिलते हुए पाया, 
मुझसे रहा नहीं गया, मैंने हाथ आगे बढ़ा कर उसकी चूचियाँ पकड़ लीं और उसकी 
पीठ से साथ लाकर लम्बे लम्बे स्ट्रोक लगाने लगा। 



"आह्ह्ह्हह......सोनू...चोदो...चोदो ...चोद......मुझे..आअज चोद चोद कर मेरी
चूत फाड़ डालो...हम्म्म्म...ऊम्म्मम्म......और तेज़... और तेज़..." रिंकी 
बिल्कुल हांफ़ने लगी और उसके पैरों में कम्पन आने लगी। उसने अपनी गांड को 
पीछे धकेलना शुरू किया और मुझे बोल बोल कर उकसाने लगी... 



मैंने भी अपना कमाल दिखाना चालू किया और जितना हो सके उतना तेजी से चोदने लगा। 



"ये लो मेरी रानी...आज खा जाओ अपनी चूत से मेरा पूरा लंड...पता नहीं कब से 
तुम्हारी चूत में जाने को तड़प रहा था...उम्म्म्म...और लो ...और लो..." 
मैंने भी उत्तेजना में उसकी चूचियों को बेदर्दी से मसलते हुए उसकी चूत का 
बैंड बजाना चालू किया। 



अब हम दोनों को वक़्त करीब आ चुका था, हम दोनों ही अपनी पूरी ताक़त से एक 
दूसरे को चोद रहे थे। मैं आगे से और रिंकी पीछे से अपने आप को धकेल कर मज़े 
ले रही थी। 



तभी रिंकी ने अपने मुँह से गुर्राने जैसे आवाज़ निकलनी शुरू की और तेज़ी से हिलने लगी... 



"गुऊंन्न......गुण...हाँ...और और और और... चोदो... आआआ...ऊम्म्मम... और तेज़
मेरे राजा...चोदो... चोदो... चोदो... उफ्फ्फ... मैं गईईई...." रिंकी ने 
तेज़ी से हिलते हुए अपनी कमर को झटके दिए और शांत पड़ गई... उसकी चूत ने ढेर 
सारा पानी छोड़ दिया था जो मेरे लंड से होते हुए उसकी जाँघों पर फ़ैल गया था,
आईने में साफ़ दिखाई दे रहा था।
मैं अब भी अपनी उसी गति से उसे चोदे जा रहा था... 



"हम्म्म...मेरी रानी...मेरी जान...ये ले... मैं भी आया... क्या गर्मी है 
तुम्हारी चूत में... मैं पागल हो गया रिंकी... हम्म्म्म..." मैं अब अपनी 
चरम सीमा पे था। 



रिंकी थोड़ी सी निढाल हो गई थी इसलिए उसकी पकड़ आईने से ढीली हो रही थी। 
मैंने एक झटके के साथ उसे पकड़ कर बिस्तर की तरफ पलट दिया। अब रिंकी की 
टाँगे बिस्तर से नीचे थी और वो पेट के बल आधी बिस्तर पे थी। मेरा लंड अभी 
भी उसकी चूत में था। 



मैंने एक जोर की सांस ली और सांस रोक कर दनादन उसकी चूत के परखच्चे उड़ाने लगा। 



फच्च...फच्च...फ्च... फ्च्च...की आवाज़ के साथ मैंने तेज़ी से उसकी चूत में 
अपना लंड अन्दर बाहर करना शुरू किया और उसे बेदर्दी से चोदने लगा। 



"ओह्ह्ह...सोनू... बस करो... मर जाऊँगी... अब और कितना चोदोगे जान... 
हम्म्म्म..." रिंकी इतनी देर से लंड के धक्के खा खा कर थक गई थी और झड़ने के
बाद उसे लंड को झेलने में परेशानी हो रही थी। उसने अपना सर बिस्तर पे रख 
कर अपने दोनों हाथों से चादर को भींच लिया और मेरे लंड के प्रहार को झेलने 
लगी। 



"बस हो गया मेरी जान...मैं आया, मैं आया...ओह्ह्ह्ह...ये लो... ले लो मेरे 
लंड का सारा रस..." मैंने तेज़ी से चोदते हुए अपने आखिरी के स्ट्रोक मारने 
शुरू किये... 



तभी मेरे दिमाग में आया कि अब मैं झड़ जाऊँगा और ऐसे ही रहा तो सारा पानी 
उसकी चूत में ही झड़ जाएगा...चाहता तो मैं यही था कि उसकी चूत में ही झाड़ूं 
लेकिन बाद में कोई परेशानी न हो यह सोच कर मैंने रिंकी का मत जानने की सोची
और तेज़ चलती साँसों के साथ चोदते हुए उससे पूछा,"रिंकी मेरी जान...कहाँ 
लोगी मेरे लंड का रस...? मैं आ रहा हूँ।" 



मेरी आशा के विपरीत रिंकी ने वो जवाब दिया जिसे सुनकर मैं जड़ से खुश हो गया। 



"अन्दर ही डाल दो मेरे रजा जी... इस चूत को अपने पानी से सींच दो... मुझे 
तुम्हारे लंड का गरम गरम पानी अपनी चूत में फील करना है।" रिंकी ने हांफते 
हुए कहा। 



मैं ख़ुशी के मारे उसकी कमर को अपने हाथों से थाम कर जोरदार झटके मारने लगा... 



"आअह्ह...आह्ह्ह्ह......ऊओह्ह......रिन्कीईईइ..." एक तेज़ आवाज़ के साथ मैंने
एक जबरदस्त धक्का मारा और अपने लंड को पूरा जड़ तक उसकी चूत में ठेल कर 
झड़ने लगा। 



न जाने कितनी पिचकारियाँ मारी होंगी, इसका हिसाब नहीं है लेकिन मैं एकदम से
स्थिर होकर लंड को ठेले हुए उसकी चूत को अपने काम रस से भरता रहा। 



हम दोनों ऐसे हांफ रहे थे मानो कई किलोमीटर दौड़ कर आये हों।
मैं निढाल होकर उसकी पीठ पर पसर
गया। रिंकी ने भी अपने दोनों हाथों को बिस्तर पर फैला दिया और मुझे अपने 
ऊपर फील करके लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी। हम दोनों ने अपनी अपनी आँखें बंद
कर लीं थीं और उस अद्भुत क्षण का आनन्द ले रहे थे। 
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02-07-2019, 01:11 PM,
#33
RE: आंटी और उनकी दो खूबसूरत बेटियाँ
चुदाई के उस आखिरी पल का एहसास इतना सुखद होता है यह मुझे उसी वक़्त महसूस हुआ। हम दोनों उसी हालत में लगभग 15 मिनट तक लेटे रहे। 



मैं धीरे से रिंकी के ऊपर से उठा और रिंकी के नंगी पीठ को अपने होंठों से 
चूम लिया। रिंकी की आँखें बंद थी और जब मैंने उसकी पीठ को चूमा तो उसने 
धीरे से अपनी गर्दन हिलाई और पीछे मुड़ कर मेरी तरफ देख कर मुस्कुराने लगी। 



मेरा लंड अब तक थोड़ा सा मुरझा कर उसकी चूत के मुँह पे फँसा हुआ था। मैंने 
खड़े होकर अपने लंड को उसकी चूत से बाहर खींचा तो एक तेज़ धार निकली चूत से 
जो हम दोनों के रस और रिंकी की चूत का सील टूटने की वजह से निकले खून का 
मिश्रण दिख रहा था। 



रिंकी वैसे ही उलटी लेती हुई थी और उसकी चूत से वो मिश्रण निकल निकल कर बिस्तर पर फैलने लगा। 



मैंने रिंकी की पीठ पर हाथ फेरा और उसे सीधे होने का इशारा किया। रिंकी 
सीधे होकर लेट गई और अपने पैरों को फैला कर मेरे कमर को पैरों से जकड़ लिया 
और अपने पास खींचा। ऐसा करने से मेरा मुरझाया लंड फिर से उसकी चूत के 
दरवाज़े पर रगड़ खाने लगा। चूत की चिकनाहट मेरे लंड के टोपे को रगड़ रही थी। 
अगर थोड़ी देर और वैसा ही करत रहता तो शायद मेरा लंड फिर से खड़ा होकर उसकी 
चूत में घुस जाता। 



मैंने वैसे ही खड़े खड़े रिंकी की आँखों में देख और उसे आँख मारते हुए अपने हाथ उसकी तरफ बढ़ा दिए। 



रिंकी ने मेरे हाथों में अपने हाथ दिए और मैंने उसे खींच कर उठा दिया। उठते
ही रिंकी मुझसे ऐसे लिपट गई जैसे कोई लता किसी पेड़ से लिपट जाती है। हम 
दोनों एक दूसरे को हाथों से सहलाते रहे।
तभी रिंकी को बिस्तर से उठाते 
हुए मैं अलग हो गया उर हम दोनों खड़े हो गए। खड़े होते ही रिंकी की टाँगें 
लड़खड़ा गई और उसने मेरे कन्धों को पकड़ लिया। मैंने उसे सहारा देकर अपने सीने
से लगा लिया। रिंकी मेरे सीने में अपना सर रख कर एकदम चिपक सी गई और ठंडी 
ठण्डी साँसे लेने लगी। 



मैंने झुक कर उसके चेहरे को देखा, एक परम तृप्ति के भाव उस वक़्त उसके चेहरे पे नज़र आ रहे थे। 



रिंकी ने अपना सर उठाया और मुझसे लिपटे लिपटे ही बिस्तर की तरफ मुड़ गई... 



"हे भगवन......यह क्या किया तुमने..." रिंकी ने बिस्तर पर खून के धब्बे देख कर चौंकते हुए पूछा। 



"यह हमारी रास लीला की निशानी है मेरी जान... आज तुम कलि से फूल बन गई हो।" मैंने फ़िल्मी अंदाज़ में रिंकी को कहा। 



"धत...शैतान कहीं के !" रिंकी ने मेरे सीने पे एक मुक्का मारा और मेरे गालों को चूम लिया। हम दोनों हंस पड़े। 



तभी हमारा ध्यान दीवार पर लगी घड़ी पर गया तो हमारा माथा ठनका। 



घड़ी में 3 बज रहे थे...यानि हम पिछले 3 घंटे से यह खेल खेल रहे थे। हम 
दोनों ने एक दूसरे को देखा और एक बिना बोले समझने वाली बात एक दूसरे को 
आँखों से समझाई। रिंकी ने मेरे होंठों को चूम लिया और मुझसे अलग होकर अपने 
कपड़े झुक कर उठाने लगी। 



उसके झुकते ही मेरी नज़र उसके बड़े से कूल्हों पर गई और एक सुर्ख गुलाबी सा छोटा सा छेद मेरी आँखों में बस गया। 



वो नज़ारा इतना हसीं था कि दिल में आया कि अभी उसे पकड़ कर उसकी गांड में 
अपना लंड ठोक दूँ। लेकिन फिर मैंने सोचा कि जब रिंकी को मैंने अपने लण्ड का
स्वाद चखा ही दिया है तो चूत रानी की पड़ोसन भी मुझे जल्दी ही मिल जायेगी। 



यह सोच कर मैं मुस्कुरा उठा और अपनी निक्कर और टी-शर्ट उठाकर पहन ली। रिंकी
ने भी अपनी स्कर्ट पहन ली थी और अपनी ब्रा पहन रही थी। मैंने आगे बढ़ कर 
उसकी ब्रा को अपने हाथों से बंद किया और ब्रा के ऊपर से जोर से चूचियों को 
मसल दिया। 



"ऊह्ह्ह...क्या करते हो सोनू... आज ही उखाड़ डालोगे क्या...अब तो ये 
तुम्हारी हैं, आराम से खाते रहना।" रिंकी ने एक मादक सिसकारी के साथ अपनी 
चूचियों को मेरे हाथों से छुड़ा कर कहा और फिर बाहर निकलने लगी क्यूंकि उसका
टॉप बाहर सोफे पे था।
रिंकी मेरे आगे आगे चलने लगी, 
उसकी टाँगें लड़खड़ा रही थीं। मैं देख कर खुश हो रहा था कि आज मेरे भीमकाय 
लंड ने उसकी चूत को इतना फैला दिया था कि उससे चला नहीं जा रहा था... 



खैर धीरे धीरे रिंकी बाहर आई और अपना टॉप उठाकर पहन लिया। मैं भी अपने कपड़े
पहन कर बाहर हॉल में आ चुका था। मैंने रिंकी को एक बार फिर से अपनी बाहीं 
में भर और उसके गालों को चूमने लगा। 



"अब बस भी करो राजा जी, वरना अगर मैं जोश में आ गई तो अपने आप को रोक नहीं 
पाऊँगी...हम्म्म्म..." रिंकी ने मुझे अपनी बाँहों में दबाते हुए कहा। 



"तो आ जाओ न जोश में... मेरा मन नहीं कर रहा तुम्हें छोड़ के जाने को।" 
मैंने उसके होंठों को चूमते हुए मनुहार भरे शब्दों में अपनी इच्छा जताई। 



"दिल तो मेरा भी नहीं कर रहा है जान, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है और सबके
वापस आने का वक़्त हो चुका है। अब आप जाओ और मैं भी जाकर अपने प्रेम की 
निशानियों को साफ़ कर देती हूँ वरना किसी की नज़र पड़ गई तो आफत आ 
जाएगी।"...रिंकी ने मुझे समझाते हुए कहा। 



मैंने भी उसकी बात मान ली और एक आखिरी बार उसकी चूचियों को दबाते हुए उसकी स्कर्ट के ऊपर से उसकी चूत को अपनी मुट्ठी में दबा दिया। 



"उफ्फ्फ...दुखता है न... मत दबाओ न जान... पहले ही तुम्हारे लंड ने उसकी 
हालत ख़राब कर दी है...अब जाने दो।" रिंकी ने तड़प कर मेरा हाथ हटाया और मुझे
प्यार से धकेल कर नीचे भेज दिया। 



मैं ख़ुशी ख़ुशी सीढ़ियाँ उतर कर नीचे आने लगा। 



तभी मेन गेट पर आवाज़ आई और गेट खुलने लगा। मैं तेज़ी से नीचे की तरफ भागा और अपने कमरे में घुस गया। 



कमरे से बाहर झाँका तो देखा कि प्रिया गेट से अन्दर दाखिल हुई... मैंने चैन
की सांस ली कि सही वक़्त पर हमारी चुदाई ख़त्म हो गई वरना आज तो प्रिया हमें
पकड़ ही लेती... 



मैं अपने बिस्तर में लेट गया और थोड़ी देर पहले बीते सारे लम्हों को याद करते करते अपनी आँखें बंद कर लीं... 



ख्यालों में खोये खोये कब नींद आ गई पता ही नहीं चला... 



"सोनू...सोनू...उठ भी जा भाई...तबियत कैसी है?" नेहा दीदी की आवाज़ ने मेरी 
नींद तोड़ी और मैं उठकर बिस्तर पर बैठ गया और सामने देखा तो नेहा दीदी और 
सिन्हा आंटी हाथों में ढेर सारा सामान लेकर मेरे कमरे के दरवाज़े पर खड़ी 
थीं... 
-  - 
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02-07-2019, 01:12 PM,
#34
RE: आंटी और उनकी दो खूबसूरत बेटियाँ
मैंने मुस्कुरा कर उनका अभिवादन किया और बिस्तर से उठ कर नेहा दीदी के 
हाथों से सामन लेकर अपने ही कमरे में रख दिया। सिन्हा आंटी ने मेरी तरफ देख
कर अपनी वही कातिल मुस्कान दी और सीढ़ियों की तरफ चल पड़ी। नेहा दीदी भी 
उनके साथ ऊपर चली गईं और मैं अपने बाथरूम में घुस गया।

रिंकी की अक्षतयोनि का शील भंग करने के बाद:

दिल तो मेरा भी नहीं कर रहा है जान, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है और सबके वापस आने का वक़्त हो चुका है। अब आप जाओ और मैं भी जाकर अपने प्रेम की निशानियों को साफ़ कर देती हूँ वरना किसी की नज़र पड़ गई तो आफत आ जाएगी।”…रिंकी ने मुझे समझाते हुए कहा।

मैंने भी उसकी बात मान ली और एक आखिरी बार उसकी चूचियों को दबाते हुए उसकी स्कर्ट के ऊपर से उसकी चूत को अपनी मुट्ठी में दबा दिया।

“उफ्फ्फ…दुखता है न..। मत दबाओ न जान..। पहले ही तुम्हारे लंड ने उसकी हालत ख़राब कर दी है…अब जाने दो।” रिंकी ने तड़प कर मेरा हाथ हटाया और मुझे प्यार से धकेल कर नीचे भेज दिया।

मैं ख़ुशी ख़ुशी सीढ़ियाँ उतर कर नीचे आने लगा।

तभी मेन गेट पर आवाज़ आई और गेट खुलने लगा। मैं तेज़ी से नीचे की तरफ भागा और अपने कमरे में घुस गया।

कमरे से बाहर झाँका तो देखा कि प्रिया गेट से अन्दर दाखिल हुई..

मैंने चैन की सांस ली कि सही वक़्त पर हमारी चुदाई ख़त्म हो गई वरना आज तो प्रिया हमें पकड़ ही लेती…

मैं अपने बिस्तर में लेट गया और थोड़ी देर पहले बीते सारे लम्हों को याद करते करते अपनी आँखें बंद कर लीं…

ख्यालों में खोये खोये कब नींद आ गई पता ही नहीं चला…

“सोनू…सोनू…उठ भी जा भाई…तबियत कैसी है?” नेहा दीदी की आवाज़ ने मेरी नींद तोड़ी और मैं उठकर बिस्तर पर बैठ गया और सामने देखा तो नेहा दीदी और सिन्हा आंटी हाथों में ढेर सारा सामान लेकर मेरे कमरे के दरवाज़े पर खड़ी थीं…

मैंने मुस्कुरा कर उनका अभिवादन किया और बिस्तर से उठ कर नेहा दीदी के हाथों से सामान लेकर अपने ही कमरे में रख दिया। सिन्हा आंटी ने मेरी तरफ देख कर अपनी वही कातिल मुस्कान दी और सीढ़ियों की तरफ चल पड़ी। नेहा दीदी भी उनके साथ ऊपर चली गईं और मैं अपने बाथरूम में घुस गया।

बाथरूम से निकल कर मैं अपने कमरे में आया और कपड़े बदल कर बाहर अपने अड्डे पे जाने का सोचा। तभी मुझे याद आया कि मेरा यार पप्पू तो शहर में है ही नहीं। मैं थोड़ा सा चिंतित हुआ और फिर ऐसे ही अपने टेबल के सामने कुर्सी पे बैठ गया। शाम हो चली थी और सूरज ढलने को बेताब था। मैंने कुछ सोचा और फिर उठ कर अपने घर कि छत पे जाने का इरादा किया। मुझे यही ठीक लगा और मैं कमरे से निकल कर सीढ़ियों से चढ़ने लगा।

छत पे जाने के लिए मैं सीढ़ियाँ चढ़ रहा था और जब मैं घर के पहले तल्ले पे पहुँचा तो मुझे सिन्हा आंटी के घर से सारे लोगों की हंसने की आवाज़ आ रही थी। शायद आंटी और नेहा दीदी सब के साथ मिलकर बाज़ार से लाये हुए सामान दिखा रही थीं और आपस में हसी मजाक चल रहा था।

एक बार के लिए मैंने भी उनके साथ बैठने का मन बनाया लेकिन फिर सोचा कि औरतों के बीच मैं अकेला मर्द बेकार में ही बोर हो जाऊँगा। यह सोचते हुए मैं ऊपर चढ़ने लगा और छत पर पहुँच गया। हमारे घर की छत बहुत लम्बी और चौड़ी है और छत के बीचों बीच सीढ़ी घर बना हुआ था। मैं अपने छत के किनारे पर पहुँच गया और रेलिंग पर बैठ कर डूबते हुए सूरज को निहारने लगा।

मेरा मन बहुत खुश था, हो भी क्यूँ न… इतनी मस्त और हसीन बदन को भोगा था मैंने।

मैं अब तक उसी खुमारी में खोया हुआ था। मैं अपने साथ अपना आई पॉड लेकर आया था, मैंने अपने कानों में इयर फ़ोन लगाया और अपने मनपसंद गाने चला दिए।

मुझे संगीत का बहुत शौक था और आज भी है। मैं अपनी धुन में गाने सुन रहा था और छत के चारों तरफ नज़रें दौड़ा रहा था कि तभी मेरे कंधे पर किसी के हाथ पड़े और मैंने चौंक कर पीछे मुड़ कर देखा।

मेरी आँखें चमक उठीं….मैंने प्रिया को अपने पीछे प्लेट में कुछ लिए खड़े पाया। वो मेरे पीछे खड़ी मुस्कुरा रही थी। मैंने अपने कानों से इअर फ़ोन बाहर निकाल लिए और उसे देख कर मुस्कुराने लगा।

“तो जनाब यहाँ बैठ कर गाने सुन रहे हैं और मैं सारा घर ढूंढ रही हूँ।” प्रिया ने एक प्यारी सी अदा के साथ मुझसे कहा।

“अरे बस थोड़ा थक सा गया था, और आज पप्पू भी शहर में नहीं है तो मैं कहीं घूमने नहीं गया और यहाँ आ गया।” मैंने प्रिया का हाथ थाम कर कहा।

“यह लो, मम्मी हम सब के लिए आपकी फेवरेट गुलाब जामुन लेकर आई हैं। जल्दी से खा लो।” प्रिया ने प्लेट मेरी तरफ बढ़ा दी।

मैंने प्रिया के हाथों से प्लेट ले ली और गरमागरम गुलाब जामुन को देखकर मेरे मुँह में पानी भर आया।

तभी मेरे दिमाग में एक शैतानी का प्लान आया और मैंने प्लेट प्रिया को वापस देते हुए कहा,”प्रिया, यह प्लेट तुम ले जाकर नीचे रख दो…आज इस गुलाब जामुन को कुछ नए तरीके से खाऊँगा।”

प्रिया ने चौंकते हुए मेरी तरफ देखा और प्लेट को वापस ले लिया और वहीं रेलिंग पे रख दिया।

“आप और आपके अलग अलग अंदाज़ !” प्रिया ने बच्चों जैसी शकल बनाकर मेरी ओर देखा और मेरे हाथों से आई पॉड लेकर उसका इयरफ़ोन अपने कानों में डाल लिया।

मैं प्रिया के पीछे हो गया और उसकी कमर को अपनी बाँहों में जकड़ लिया। प्रिया ने भी किसी रोमांटिक फ़िल्मी सीन की तरह अपना सर मेरे सीने पर रख दिया और हम दोनों ढलती हुई शाम के धुंधले सूरज को देखते रहे। बड़ा ही रोमांटिक और फ़िल्मी सीन था।

थोड़ी देर में घर के सारे लोग छत पर आ गए। यह सब का रोज़ का काम था, घर की सारी औरतें शाम को छत पे टहलने आ जाती थीं। अब छत पे मैं, प्रिया, नेहा दीदी और सिन्हा आंटी थे। रिंकी कहीं नज़र नहीं आ रही थी तो मैंने आंटी से पूछा- रिंकी कहाँ है।आंटी ने बताया- उसके पेट में थोड़ा दर्द है, वो लेटी हुई है।

मेरे होठों पे एक हल्की सी मुस्कान आ गई, मैं जानता था कि उसके पेट नहीं कहीं और ही दर्द हो रहा है।

हम सब थोड़ी देर टहलने के बाद नीचे आ गए और अपने अपने काम में जुट गए। नेहा दीदी ऊपर आंटी के साथ खाना बनाने में लग गई और प्रिया अपनी पढ़ाई में। रिंकी पहले ही अपने रूम में लेटी हुई थी।

मैं अपने कमरे में आ गया और अपने कंप्यूटर पे बैठ गया। मेज पर वही प्लेट रखी थी जो प्रिया छत पर लेकर गई थी। मैंने सोच लिया था कि आज रात इस गुलाब जामुन का सारा रस प्रिया की चूत में डालकर चाट जाऊँगा। मैं यही सोच कर ही उत्तेजित हो गया था।

आँखें थी तो कंप्यूटर की स्क्रीन पर लेकिन उनमें तो बस एक ही चेहरा समाया हुआ था। मैं जानता था कि आज प्रिया फिर से मेरे पास आएगी नोट्स के बहाने और कल रात का अधूरा काम आज पूरा करेगी। रिंकी के आने का कोई सीन नहीं था। जैसी जबरदस्त चुदाई उसकी हुई थी, उस वजह से कम से कम दो दिनों तक तो वो मुझे अपने आप पर हाथ भी नहीं रखने देगी।

खैर, मुझे तो आज मेरी प्रिया के साथ ज़न्नत की सैर करनी थी। मैं इंतज़ार करने लगा। काफी वक़्त हो गया था या यूँ कहें कि मुझसे वक़्त कट नहीं रहा था। बार बार घड़ी पे नज़र जा रही थी और दरवाज़े की तरफ भी आँखें जा रही थीं।

तभी प्रिया दौड़ती हुई नीचे आई और मेरे कमरे में घुस गई। मैं कुर्सी पे बैठा नेट पे सेक्सी तस्वीरें देख रहा था जिसमे लड़के लड़कियों की नंगी चुदाई के सीन थे। प्रिया के आने पर भी मैंने जानबूझ कर वो बंद नहीं किया क्यूंकि मैं उसे उत्तेजित करना चाहता था।

उसने आते ही कुर्सी के पीछे से मेरे गले में अपनी बाहें डाल दीं और मेरे गालों पे अपने गाल रगड़ने लगी और कंप्यूटर की स्क्रीन पर नज़र डाली। स्क्रीन पर एक तस्वीर थी जिसमें एक लड़का लड़की की चूत चाट रहा था।

“ओहो….तो जनाब ये सब देख रहे हैं….बड़े शरारती हैं आप !” प्रिया ने ये कह कर मेरे गालों पे दांत गड़ा दिए।

जवाब में मैंने अपना एक हाथ पीछे लेजाकर उसकी एक चूची को दबा दिया।

“आउच….क्या तुम भी, जब देखो मस्ती….चलो जल्दी से खाना खा लो….फिर मेरे नोट्स भी तो बनाने हैं।” प्रिया ने मुझसे अलग होते हुए कहा और मेरी तरफ देख कर हंसने लगी…

मैं कुर्सी से खड़ा हुआ और उसे अपनी तरफ खींच कर गले से लगा लिया। वो कसमसा कर मुझसे छूटने लगी और इस खींचातानी में मेरे हाथों में फिर से उसकी चूचियाँ आ गई और मैं उन्हें दबाने लगा। उसने ब्रा पहन राखी थी इसलिए चूचियाँ सख्त लग रही थीं। मैं मज़े से दबा रहा था और वो मेरे हाथ हटा रही थी….

“छोड़ो ना, सब ऊपर इंतज़ार कर रहे हैं….जल्दी चलो….पहले खाना खा लो फिर लगे रहना अपने इन दोनों कबूतरों के साथ। मैं कहाँ भागी जा रही हूँ….” प्रिया ने मुझे खुद से अलग किया और मेरा हाथ पकड़ कर बाहर ले आई।

प्रिया मेरे आगे आगे सीढ़ियों पे चढ़ने लगी और मैं उसके पीछे पीछे। मैंने एक और शरारत करी और उसके पिछवाड़े के एक चिमटी काट ली।

“धत्त, शैतान कहीं के….” प्रिया ने डाँटते हुए कहा और आँखें दिखने लगी, लेकिन उसकी आँखें मुस्कुरा रही थीं और उनमे साफ़ साफ़ ये दिख रहा था कि उसे भी मेरी छेड़ छाड़ में मज़ा आ रहा है।

हम ऐसे ही मस्ती करते करते ऊपर खाने की मेज तक पहुँच गए और खाने के लिए बैठ गए। सभी लोग वहीं थे। नेहा दीदी और रिंकी एक साथ मेरी तरफ और प्रिया मेरे ठीक सामने। प्रिया के बगल में एक कुर्सी खाली थी जिस पर आंटी बैठने वाली थी। आंटी भी आ गईं और हम सब एक दूसरे से बातें करते करते खाना खाने लगे।

सब नार्मल ही थे लेकिन रिंकी चुपचाप थी। पता नहीं क्यूँ….
मैंने सोचा शायद उसे अभी भी दर्द हो रहा होगा और वो तकलीफ में होगी इसीलिए शांत है।

प्रिया ने रिंकी से पूछ ही लिया…. “क्या बात है रिंकी जी, आप इतनी चुप क्यूँ हैं?”

प्रिया ने अपने शरारती अंदाज़ में रिंकी से पूछा।

“कुछ नहीं यार, बस तबियत ठीक नहीं है और पूरे बदन में तेज़ दर्द है।” रिंकी ने मुस्कुराते हुए प्रिया से कहा।

“ओहो….तो चल मैं आज तुझे एक बढ़िया सी मसाज़ दे देती हूँ….तेरी सारी तकलीफें दूर हो जाएँगी।” प्रिया ने जोर से हंसते हुए कहा और उसकी बात सुनकर सब हंसने लगे।

धीरे धीरे हम सब ने अपन अपना खाना ख़त्म किया और रोज़ की तरह अपने अपने कमरे में चले गए। जब मैं सीढ़ियों से उतर रहा था तो पीछे से सिन्हा आंटी ने आवाज़ लगाई- सोनू बेटा, यह लेकर जाओ….

आंटी मेरे पीछे एक प्लेट लेकर आई और खड़ी हो गईं।

उनके हाथों में एक प्लेट में चार गुलाब जामुन थे और ढेर सारा रस था। मैंने वो देख कर हल्के से मुस्कुरा दिया और आंटी से कहा- आंटी मैंने तो खा लिया है….प्रिया ने लाकर दिया था छत पे !
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02-07-2019, 01:12 PM,
#35
RE: आंटी और उनकी दो खूबसूरत बेटियाँ
मैंने जानबूझ कर यह नहीं बताया कि वो गुलाब जामुन नीचे मेरे कमरे में रखे हुए हैं और मैं उन्हें कुछ अलग तरीके से खाना चाहता था।

“कोई बात नहीं बेटा, मैं जानती हूँ कि गुलाब जामुन तुम्हें बहुत पसंद हैं… ज्यादा खा लोगे तो कोई प्रॉब्लम नहीं हो जाएगी…” आंटी ने हंसते हुए वो प्लेट मेरी तरफ बढ़ा दी।

मैं भी मुस्कुराते हुए प्लेट ले ली और नीचे उतर गया। अपने कमरे में जाकर मैंने सारी मिठाइयों को अलग करके एक प्लेट में रख दिया और सारा रस एक अलग कटोरी में डाल दिया।

शायद आप लोगों को यह एहसास हो रहा होगा कि मेरे दिमाग में क्या शैतानी चल रही होगी उस वक़्त।

खैर मैं मुस्कुराते हुए सारा सामान बेड के साइड टेबल पर रख दिया और बाथरूम में घुस गया। वैसे तो मैं अपने सारे अनचाहे बालों को हमेशा साफ़ रखता हूँ लेकिन आज फिर से रेजर लेकर अपने लण्ड के आसपास के बालों को साफ़ किया और बढ़िया से आफ्टर शेव लोशन लगा दिया ताकि मेरी प्रिया रानी को अच्छी खुशबू मिले जब वो मेरे लंड से खेले।

मैंने बाहर आकर अपने बिस्तर को ठीक किया और बैठ कर प्रिया का इंतज़ार करने लगा। कंप्यूटर पर अपने सेक्सी फिल्मों के खजाने से मैंने ढूंढ कर एक फिल्म निकाली जिसमें चूत और लण्ड की चुसाई के ढेर सारे अलग अलग तरीके दिखाए थे। उनमें से एक में लड़का और लड़की एक दूसरे के पूरे बदन पे कुछ टेस्टी लिक्विड डालकर एक दूसरे को चाट रहे थे और मज़े ले रहे थे। मैं यह देख कर काफी उत्तेजित हो गया था और ऐसा ही करने का मन बना लिया।

नीचे आये हुए काफी देर हो चुकी थी और किसी की आवाज़ भी नहीं आ रही थी यानि सब लोग अपने अपने कमरे में सो चुके थे।

तभी किसी के सीढ़ियों से उतरने की आवाज़ सुनाई दी और मेरा दिल धड़कने लगा। मुझे पता था कि यह मेरी प्रिया ही है और मेरा सोचना सही था।
प्रिया अपने हाथों में किताबें लेकर मेरे दरवाज़े पर खड़ी हो गई और मुझे देखकर एक कातिल अदा के साथ मुस्कुराने लगी।

मैंने जल्दी से कंप्यूटर बंद कर दिया, मैं नहीं चाहता था कि प्रिया वो फिल्म देख ले क्यूंकि मैं आज उसे सरप्राइज देना चाहता था।

मैंने कुर्सी से उठ कर उसका स्वागत अपनी बाहें फैला कर किया और उसने इधर उधर देख कर यह सुनिश्चित किया कि कहीं कोई देख न रहा हो और वो भाग कर मेरी बाहों में समां गई, उसके हाथों से किताबें छूट कर नीचे गिर गईं और हम दोनों एक दूसरे से ऐसे लिपट गए जैसे कई जन्मों के बिछड़े प्रेमी हों।

हम वैसे ही थोड़ी देर तक एक दूसरे की बाहों में चिपके हुए खड़े रहे फिर मेरी नज़र दरवाज़े और खिड़कियों पर गई। मुझे रिंकी की याद आ गई और मैं मुस्कुराकर प्रिया से अलग हो गया। मैंने बढ़ कर दरवाज़ा और खिड़की बंद कर दिए। वापस घूम कर मैंने प्रिया का हाथ थाम कर उसे अपने साथ बिस्तर पर बिठा दिया। हम दोनों बिस्तर पे एक दूसरे के सामने बैठ गए और मैं प्रिया को गौर से देखने लगा।

आज प्रिया ने एक ढीली सी सफ़ेद रंग टी-शर्ट पहनी हुई थी और नीचे लाल रंग का ढीला सा शलवार के जैसा पजामा पहना हुआ था जैसा कि लड़कियाँ अक्सर पहनती हैं। मुझे यकीन था कि उसने अन्दर कुछ नहीं पहना होगा लेकिन आज उसकी चूचियाँ बिल्कुल खड़ी खड़ी सी दिख रही थीं। शायद मेरे पास होने की वजह से वो उत्तेजना में थी और इस वजह से उसकी चूचियाँ फूल गई थीं।

मैं वैसे ही उसे घूरे जा रहा था और उसके रूप का रसपान कर रहा था। प्रिया मेरी तरफ देख कर मुस्कुराये जा रही थी। हम दोनों में से कोई भी कुछ नहीं कह रहा था। तभी प्रिया की नज़र साइड टेबल पर रखे हुए गुलाब जामुन और रस की कटोरी पर गई और उसने तुरंत मेरी तरफ देख कर पूछा- अरे ! ये अभी तक ऐसे ही पड़े हैं…आपने खाए क्यूँ नहीं?

“आपका इंतज़ार कर रहा था ताकि आप आओ और अपने हाथों से हमें खिलाओ !” मैंने मुस्कुराते हुए कहा।

“आले ले…मेला बच्चा….मेरे हाथों से खानी है मिठाई….पहले बता देते तो छत पे ही अपने हाथों से खिला देती।” प्रिया ने बड़े प्यार से एक तोतली आवाज़ में मेरे सर पे हाथ फेरते हुए मुझे अपने पास खींच कर अपने गले से लगा लिया।

ह्म्म्म…..इतना हसीं पल था कि आज भी उस पल को याद करके मैं सिहर उठता हूँ। 

खैर, प्रिया ने प्लेट उठाई और चमचे से काट कर आधा गुलाब जामुन मेरे मुँह में डाल दिया। मैंने भी अपना मुँह खोल कर खा लिया और फिर उसके हाथों से लेकर आधा बचा हुआ गुलाब जामुन उसे खिलाया। प्रिया खाना नहीं चाहती थी लेकिन मैंने प्यार से उसे देखा तो वो मन नहीं कर पाई। जब मैंने प्रिया को मिठाई खिलाई तो थोड़ा सा रस उसके होठों से बाहर आ गया और उसके निचले होठों से होता हुआ नीचे आने लगा। मैंने झट से अपने होंठ लगा दिए और उस रस की बूँद को अपने होठों से चूम कर खा लिया।

प्रिया ने मेरी इस हरकत पे मुझे प्यार से देखा और आगे बढ़ कर मेरे होठों पे एक पप्पी ले ली।

हम दोनों ने ऐसा करके तीन गुलाबजामुन खा लिए और जब प्रिया अगली गुलाबजामुन उठाने जा रही थी तो मैंने उसे रोक दिया और प्लेट उसके हाथों से लेकर वापस मेज पर रख दिया।

“क्या हुआ, मन भर गया मिठाई से…..तुम्हें तो बहुत पसंद है ये !” प्रिया ने मुझे देख कर पूछा।

“खाऊँगा बाबा, लेकिन अभी नहीं और ऐसे नहीं…..” मैंने प्रिया को आँख मारी और उसे लेकर धीरे से बिस्तर पे लेट गया।

लेट कर मैंने उसे अपने से बिल्कुल सटा लिया और अपना एक पैर उठाकर उसके ऊपर रख दिया और उसे और भी करीब कर लिया। अब मैंने उसके बालों में अपनी उँगलियाँ फिराईं और धीरे धीरे अपनी उँगलियों को उसके चेहरे पे फिराने लगा…

उसकी आँखों, उसके नाक… उसके गाल… फिर उसके होठों पे मेरी उँगलियों ने सिहरन करनी शुरू कर दी। प्रिया चुपचाप उस लम्हे को महसूस करके मुझसे लिपट कर लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी…
मैंने प्रिया को आँख मारी और उसे लेकर धीरे से बिस्तर पे लेट गया।

लेट कर मैंने उसे अपने से बिल्कुल सटा लिया और अपना एक पैर उठाकर उसके ऊपर रख दिया और उसे और भी करीब कर लिया। अब मैंने उसके बालों में अपनी उँगलियाँ फिराईं और धीरे धीरे अपनी उँगलियों को उसके चेहरे पे फिराने लगा…

उसकी आँखों, उसके नाक… उसके गाल… फिर उसके होठों पे मेरी उँगलियों ने सिहरन करनी शुरू कर दी। प्रिया चुपचाप उस लम्हे को महसूस करके मुझसे लिपट कर लम्बी लम्बी साँसें ले रही थी…

मैं काफी देर तक वैसा ही करता रहा और प्रिया के चेहरे को निहारता रहा। प्रिया ने अपनी आँखें खोलकर मुझे प्यार भरी नज़रों से देखा और पूछा- ऐसे क्या देख रहे हो इतनी देर से…आज पहली बार देख रहे हो क्या?

“तुम्हें नहीं पता मैंने सारा दिन इंतज़ार किया है इस पल का…तुम्हारा यह हसीं चेहरा देखने के लिए मेरी आँखें तरस रही थीं… अब जाकर मेरे सामने आई हो तो जी भर के देखने दो मुझे !” मैंने थोड़ा सा गंभीर होकर उसे देखते हुए कहा।

उसे क्या पता था कि मैंने आज दिन भर क्या किया है… लेकिन एक बात थी दोस्तो, प्रिया के लिए मेरे दिल में एक अलग खिंचाव था जिस वजह से उसके पास होने से मुझे न तो रिंकी का ख्याल आता और न ही सिन्हा आंटी का।

खैर, मेरी बात सुनकर प्रिया ने मेरे गालों पे एक साथ कई चुम्बन ले लिए और उठकर बैठ गई और मुझे भी बिठा दिया।

“इतना प्यार करते हो मुझसे?” प्रिया ने मेरी आँखों में झांकते हुए पूछा।

मैंने कुछ न कहते हुए उसके होठों को अपने होठों से पकड़ कर एक जोरदार और लम्बी किस्सी देनी शुरू कर दी। मैंने अपनी जीभ को उसके होठों के रास्ते उसके मुँह में डाल दिया और उसने अपनी बाहें मेरे गले में डाल दीं।

अब मैंने उसके होठों को चूमते हुए धीरे से अपने हाथों को उसकी कमर पे रखा और सहलाने लगा। मेरे हाथ जितना उसे सहलाते वो उतने ही जोर से मेरे होठों को चूसती और मुझे अपनी तरफ खींचती। उसकी साँसें सीधे मेरी साँसों से मिल रही थीं और एक मदहोश कर देने वाली महक मुझे मदहोश किये जा रही थी। हम जन्म जन्मान्तर के प्रेमियों की तरह एक दूसरे से प्रेम कर रहे थे।

अब हम दोनों के शरीर गर्म हो चुके थे, हम अब अपने प्रेम के अगले पड़ाव पे बढ़ने लगे। मैंने प्रिया को थोड़ा सा अलग करते हुए अपने हाथों के लिए थोड़ी सी जगह बनाई और अपने हाथ उसकी चूचियों पे रख दिए…उफ्फ्फ्फ़…प्रिया की चूचियाँ रिंकी की चूचियों से कहीं ज्यादा प्यारी थी, पकड़ते ही दिल करता था कि उन्हें उखाड़ कर अपने पास ही रख लूँ !

जब मैंने अपने हाथ रखे तो मुझे एहसास हुआ कि आज उसने ब्रा पहन रखी है। लेकिन वो ब्रा भी बहुत नर्म थी और शायद सिल्की थी क्यूंकि मेरे हाथ टी-शर्ट के ऊपर से भी फिसल रहे थे। मैं मंत्रमुग्ध होकर उसकी चूचियों में खोया हुआ था। धीरे धीरे उसकी चूचियों पे मेरे हाथों का दबाव बढ़ने लगा और प्रिया के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी।

प्रिया ने अपना मुँह मेरे मुँह से छुड़ा लिया और अपनी गर्दन इधर उधर करके अपनी चूचियों की हो रही मालिश का मज़ा लेने लगी। थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद प्रिया ने मेरी आँखों में देखा और धीरे से मेरे कान के पास आकर कहा, “आज आपके लिए एक सरप्राइज है मेरे पास।”

मैं चौंका, सरप्राइज तो मैं प्रिया को देने वाला था फिर यह क्या सरप्राइज देना चाहती है??

मैं सोच ही रहा था कि प्रिया ने बिस्तर से उठ कर खड़े होकर मुझे अपनी आँखें बंद करने को कहा। मैं उत्तेजित हो गया, पता नहीं वो क्या करने वाली थी।

मैंने अपनी आँखें बंद करने का नाटक किया पर कनखियों से देख रहा था…

“ओये…शैतान, चलो बंद करो अपनी आँखें…वरना सोच लो !” प्रिया ने धमकाते हुए कहा।

मैंने सॉरी कहा और सच में अपनी आँखें बंद कर लीं और अपने सरप्राइज का इंतज़ार करने लगा। मुझे थोड़ी थोड़ी आहट सुनाई दे रही थी जैसे कोई कपड़े उतारते वक़्त आती है…

मैंने एक बार आँखें खोलने की सोची लेकिन तभी फिर से प्रिया की आवाज़ आई…”अभी नहीं… जब मैं बोलूँ तब खोलना अपनी आँखें !”
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02-07-2019, 01:12 PM,
#36
RE: आंटी और उनकी दो खूबसूरत बेटियाँ
मेरी बेताबी बढ़ती जा रही थी,”जल्दी करो न बाबा…तुम तो जान ही ले लोगी ऐसे तड़पा कर !”

“हम्म्म्म…अब खोलो…” प्रिया ने एक मादक आवाज़ में कहा…
मैंने धीरे धीरे अपनी आँखें खोलीं…मेरा मुँह खुला का खुला रह गया और आँखें तो बस पत्थर की हो गई…पलकों ने झपकना ही बंद कर दिया उस वक़्त…

सामने प्रिया सुर्ख मैरून रंग के टू पीस बिकनी में खड़ी थी…बाल खुले, होठों पे मेरे होठों का रस जो उन्हें चमकीला बना रहा था… उसकी 34 साइज़ की बड़ी बड़ी चूचियाँ जो कि उस खूबसूरत से बिकनी में संभाले नहीं संभल रही थीं और लगभग 75 प्रतिशत बाहर ही थीं… उसका चिकना पेट… पेट के ठीक नीचे प्यारी सी नाभि… और वी शेप की डोरियों वाली छोटी सी पैंटी जिसने सिर्फ उसकी हसीं चूत को सामने से ढक रखा था.. उसकी चिकनी सुडौल जांघें…

“ओह माई गॉड… प्रिया… मेरी परी…” मेरे मुँह से बस ये दो तीन शब्द ही निकल सके वो भी रुक रुक कर…

मैं अपनी साँसें रोक कर उसे देखता रहा और प्रिया किसी मॉडल की तरह अपने बदन को घुमा घुमा कर मुझे दिखा रही थी।
कसम से दोस्तो, उस वक़्त मैं ऐसा महसूस कर रहा था जैसे मेरे सपनों की रानी सीधा आसमान से उतर कर मेरे सामने खड़ी हो गई हो। मैं कब बिस्तर से उतरा और कब प्रिया के पास पहुँच गया पता ही नहीं चला। मैं प्रिया के सामने खुद भी एक मूरत की तरह खड़ा हो गया और उसे एकटक निहारने लगा। मेरे मुँह से शब्द ही नहीं निकल रहे थे। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं अजंता की गुफाओं में हूँ और एक सुन्दर सी मूर्ति मेरे सामने है।

मैंने धीरे से अपने हाथ आगे बढ़ा कर उसके बदन को छूने की कोशिश की लेकिन डरते डरते कि कहीं मैली न हो जाये। मैंने अपनी उँगलियों से उसके माथे से लेकर उसके पूरे चेहरे को छुआ और फिर धीरे धीरे नीचे उसके गर्दन और सीने पे आ गया…

उफ्फ्फ़… मानो संगेमरमर की तराशी हुई बेहतरीन कलाकृति को छू रहा हूँ। मैं मंत्रमुग्ध सा बस उसके बदन के हर हिस्से को इंच इंच करके नाप रहा था।

प्रिया के मुँह से हल्की हल्की सिहरन भरी सिसकारियाँ निकल रही थीं और उसके चेहरे के भाव बदल रहे थे। मैं उसके बदन को निहारते हुए नीचे अपने घुटनों के बल बैठ गया और अपनी उँगलियों को उसके पेट से होते हुए उसकी नाभि तक ले आया। जैसे ही उसकी नाभि में अपनी उंगली रखी, उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरी तरफ ऐसे देखने लगी जैसे वो बिल्कुल असहनीय उत्तेजना से भर गई हो।

मैं भी कहाँ रुकने वाला था, मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और उसकी नाभि में घुसा दी।

“सीईईइ… उम्म्म्म… क्या कर रहे हो सोनू… मुझे अजीब सा लग रहा है !” प्रिया ने एक सिसकारी के साथ मेरे सर पे अपना हाथ रखा और मेरे बालों में उँगलियाँ फिराईं।

मैं मज़े से उसकी नाभि और उसके आस पास अपनी जीभ फिराने लगा। एक अजब सी महक आ रही थी उसके बदन से जो कि दीवाना बनाने के लिए काफी थी। मैंने अपनी जीभ को थोड़ा नीचे करके उसकी नाभि और चूत के बीच वाले हिस्से पे यहाँ वहाँ चाटने लगा। बिल्कुल मक्खन के जैसी चिकनी थी वो जगह। मैं बड़े मज़े में था और इस अद्भुत पल का आनन्द ले रहा था।

प्रिया भी मेरा साथ दे रही थी और हम दोनों पूरी दुनिया से बेखबर अपने अपने काम में लगे हुए थे।

काफी देर तक ऐसे ही खड़े खड़े प्रिया मज़े लेती रही और मैं अठखेलियाँ करता रहा। फिर मुझे याद आया कि मैंने आज की रात को खास बनाने के लिए कुछ सोच रखा था। मैं तुरंत उठ खड़ा हुआ और प्रिया को अपने गले से लगा कर एक प्यारी सी किस्सी देते हुए उसे बिस्तर पर बिठा दिया।

प्रिया मेरी तरफ सवालिया निगाहों से देखने लगी और मैं अपने कमरे के एक कोने की तरफ बढ़ा। प्रिया मुझे गौर से देख रही थी और यह जानने की कोशिश कर रही थी कि आखिर मैं कर क्या रहा हूँ।

मैंने कोने से एक चटाई निकाली और बिस्तर के बगल में नीचे फर्श पे बिछा दिया। फिर एक मोटी सी चादर लेकर चटाई के ऊपर डाल दी और उस पर बैठ गया।

प्रिया ने मुस्कुरा कर मेरी तरफ देखा,”ये क्यूँ…नीचे क्यूँ बिछाया है ये बिस्तर…इरादा क्या है??” प्रिया ने आँख मारते हुए पूछा।

प्रिया शायद यह सोच रही थी कि मैंने बस इसलिए बिस्तर नीचे लगाया है ताकि जब हम चुदाई करें तो बिस्तर की चरमराहट से कहीं कोई जाग न जाये। लेकिन उसे नहीं पता था कि मेरे दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। मैं जानता था कि आज जो मैं करने वाला था उसकी वजह से बिस्तर ख़राब हो सकता था। यही सोच कर मैंने यह इन्तजाम किया था।

मैंने प्रिया को अपने पास बुलाया अपनी बाहें फैला कर और प्रिया भी देरी न करते हुए नीचे मेरे पास आकर मुझसे लिपट गई। हम दोनों बैठे हुए थे और एक दूसरे को गले लगाये हुए चूमे जा रहे थे। चूमते चूमते मैंने प्रिया को धीरे से अपनी बाहों का सहारा देकर लिटा दिया।

अब प्रिया मेरे सामने उस मैरून रंग की बिकनीनुमा ब्रा और पैंटी में सीधी लेटी हुई थी और अपने हाथों को अपने सर के पीछे सीधा करके अपने सीने को उभार कर मुझे रिझा रही थी। मैं तो पहले ही उसपे लट्टू हो चुका था.

मैं उसे उसी अवस्था में छोड़ कर उसके पैरों की तरफ मुड़ गया और अपने होंठों से उसके दोनों पैरों को चूमते हुए ऊपर की तरफ बढ़ने लगा। जैसे जैसे मैं उसके पैरों से ऊपर बढ़ रहा था उसकी सिसकारियाँ बढ़ती जा रही थीं और उसकी गर्दन इधर उधर होकर उसकी बेचैनी का सबूत दे रही थी।

मैंने उसके पूरे बदन को नीचे से लेकर ऊपर की तरफ चूमा और फिर उसकी जांघों के पास आकर रुक गया। मेरी नज़र उसकी छोटी सी वी शेप की पैंटी पर गई तो देखा कि एक बड़ा सा हिस्सा गीला हो चुका था। शायद यह मेरे होंठों का कमाल था जिसने प्रिया को मदमस्त कर दिया था और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया था।

ऐसा होना लाज़मी भी था, आखिर जवानी का जोश था…संभाले नहीं संभलता।

मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ठीक उसकी चूत के मुँह पर अपने होंठ रखे और दो तीन बार चूम लिया।

“हम्म्म्म…ओह मेरे रजा जी…कितना तड़पाओगे…” प्रिया ने चूत पे होंठों को महसूस करते ही कहा।

“अभी तो बस शुरुआत है जान…अभी तो बहुत कुछ बाकी है।” मैंने भी अपन मुँह उठाकर उसकी तरफ देखते हुए कहा।

“आज सारी रात यहीं रखने का इरादा है क्या…?” प्रिया ने मदहोशी बहरे शब्दों में मेरी आँखों में आँखें डालकर पूछा।

प्रिया की बात सुनकर मैं मुस्कुराया और फिर से उसके चूत पे एक पप्पी दे दी और उसका हाथ पकड़ कर बिठा दिया।

प्रिया के बैठते ही मैंने देरी किये बिना अपने हाथ उसकी पीठ पे लेजाकर उसके ब्रा की डोरी खोल दी। डोरी खुलते ही उसकी चूचियों ने जैसे चैन की सांस ली हो… वो एकदम से थिरक कर हिलने लगी। ब्रा का एक छोर उसके गले में बंधा था, मैंने उसे भी खोल डाला और उतार कर साइड में रख दिया।

यूँ तो प्रिया मुझसे कभी भी शर्माती नहीं थी लेकिन आज पता नहीं क्यूँ जैसे ही मैंने उसे नंगा किया उसने अपने हाथों से अपनी चूचियों को छुपा लिया और किसी नई नवेली दुल्हन की तरह अपना सर नीचे कर लिया।

कसम से कहता हूँ उसकी यह अदा देखकर मेरा प्यार और भी बढ़ गया। मैंने भी एक नए नवेले पति की तरह उसके चेहरे को अपने हाथों से ऊपर उठाया और उसके लरजते होंठों पर अपने होठों से प्यार का प्रमाण रख दिया।

प्रिया शरमा कर मुझसे लिपट गई। मैंने उसे अलग किया और अपनी बाहों का सहारा देकर वापस बिस्तर पर लिटा दिया…

कमरे में अच्छी रोशनी थी और ऊपर से उसका चमकीला बदन… मेरी नज़रें टिक ही नहीं पा रही थीं। मैंने एक नज़र उसे जी भर के देखा और फिर अपने हाथ बढ़ा कर साइड टेबल के ऊपर से गुलाबजामुन वाली प्लेट उठा ली।

प्रिया की नज़र जब उस प्लेट पर गई तो उसने बड़े ही अजीब से अंदाज़ में मुझे देखा और चौंक कर मेरे अगले कदम का इंतज़ार करने लगी।

मैंने प्लेट में रखे चम्मच से गुलाब जामुन को बिल्कुल आधा आधा कटा और प्रिया की तरफ देखते हुए आधे हिस्से को उसकी एक चूची के नोक पर रख दिया। उसकी चूचियाँ वैसे ही बिल्कुल खड़ी खड़ी थीं इसलिए उसकी नोक्क पे गुलाब जामुन बिल्कुल ऐसे स्थिर हो गया जैसे कोई चुम्बक हो। फिर मैंने दूसरा हिस्सा भी दूसरी चूची पर रख दिया।
प्रिया को बिल्कुल भी एहसास नहीं था कि मैं ऐसा भी कर सकता हूँ। उसे छत पर कही हुई मेरी बात याद आ गई और उसने मुस्कुराते हुए मुझसे पूछा,”तो जनाब इसी अंदाज़ के बारे में कह रहे थे?”

मैंने बिना कोई जवाब दिए बस उसको देख कर मुस्कुराया और फिर से अपने काम में लग गया। प्लेट में अब दो और गुलाब जामुन बचे थे। मैंने एक नज़र उन पर डाली और फिर प्लेट को बगल में रख दिया। अब बारी थी उस कटोरी की जिसमे मैंने सारा रस इकठ्ठा किया था। मैंने वो कटोरी उठाई और अपनी जगह को बदल कर इस बार प्रिया के जांघों के दोनों तरफ अपने पैरों को फैला कर ऐसे बैठ गया जैसे मैं किसी घोड़ी पर बैठा हूँ।

प्रिया अब और भी ज्यादा चौंक कर मुझे देख रही थी। मैंने उसे आँख मारी और आराम से उसकी जाँघों पे अपने आप को सेट करके बैठ गया। मेरा तनतनाया हुआ लंड मेरे निकर के अन्दर से निकलने को बेचैन हो रहा था और इस अवस्था में सीधे उसकी चूत पर दस्तक देने लगा। प्रिया ने अपना एक हाथ बढ़ा कर मेरे लंड को एक बार सहला दिया। मैं खुश हो गया और मुझसे ज्यादा मेरा ज़ालिम लंड खुश हो गया और ठुनक कर प्रिया को धन्यवाद कहा।
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02-07-2019, 01:12 PM,
#37
RE: आंटी और उनकी दो खूबसूरत बेटियाँ
प्रिया ने मेरे लंड को थाम रखा था और अगर ऐसे ही रहती तो मैं आगे का कार्यक्रम नहीं कर पाता। मैंने उसकी ओर देखा और उसे अपने हाथ ऊपर करने का इशारा किया।

प्रिया मेरा इशारा समझी नहीं या फिर समझ कर भी न समझने का नाटक कर रही थी, वो लंड छोड़ ही नहीं रही थी।

“प्लीज जान…अपने हाथ ऊपर करो और मैं जो करने जा रहा हूँ उसका मज़ा लो…” मैंने उसे समझाते हुए कहा।

“हाय राम…पता नहीं तुम क्या क्या करोगे…मुझसे रहा नहीं जा रहा है…” प्रिया ने अपनी हालत मुझे व्यक्त करते हुए कहा और फिर अपने हाथों को ऊपर अंगड़ाई लेते हुए हटा दिया।
प्लीज जान…अपने हाथ ऊपर करो और मैं जो करने जा रहा हूँ उसका मज़ा लो…” मैंने उसे समझाते हुए कहा।

“हाय राम…पता नहीं तुम क्या क्या करोगे…मुझसे रहा नहीं जा रहा है…” प्रिया ने अपनी हालत मुझे व्यक्त करते हुए कहा और फिर अपने हाथों को ऊपर अंगड़ाई लेते हुए हटा दिया।

अब मैंने उसे मुस्कुरा कर देखा और कटोरी से धीरे धीरे उसकी नाभि में रस की बूँदें गिराने लगा… जैसे ही रस की बूँदें उसकी नाभि में गिरीं, प्रिया ने एक सिसकारी भरी और उसका पेट थरथराने लगा।

मैंने एक साथ कुछ 10-12 बूँदें गिराई होंगी कि उसकी छोटी सी नाभि पूरी तरह से भर गई और थोड़ा सा रस नाभि से होकर नीचे की तरफ बहने लगा। मैंने फट से कटोरी को साइड में रखा और झुक कर बह रहे रस को अपनी जीभ से चाट लिया और अपनी जीभ को उसकी त्वचा पे रखे हुए ही ऊपर की तरफ चाटते हुए उसकी नाभि तक पहुँचा और अपनी जीभ की नोक उसकी नाभि में डाल दी।

“उम्म… सोनू… तुम तो पागल ही कर दोगे…!” प्रिया ने एक जोरदार आह भरी और अपनी आँखें बंद कर लीं।

मैंने अपनी जीभ को निरंतर उसकी नाभि में घुमाते हुए जी भर कर चूमा और चाटा और प्रिया को आहें भरने पर मजबूर कर दिया। प्रिया मेरी इस हरकत से तड़प रही थी और लगातार हिल रही थी। मैं उसकी जाँघों पर बैठ था इस वजह से वो बस कमर से ऊपर ही हिल पा रही थी। उसकी गर्दन इधर से उधर हिल हिल कर उसकी बेताबी का सबूत दे रहे थे।

मैंने फिर से रस की कटोरी उठाई और इस बार उसके पूरे पेट पर थोड़ी थोड़ी बूँदें गिरा दी और वापस झुक कर उसके पूरे पेट को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया।

प्रिया कुछ ज्यादा ही हिल रही थी… उसकी गलती नहीं थी, असल में मैं समझ रहा था कि उसे कितनी बेचैने और सिहरन हो रही थी। मुझे डर था कि उसके ज्यादा हिलने की वजह से उसकी चूचियों पे रखे गुलाबजामुन कहीं गिर न जाएँ। मैंने अपने हाथ आगे बढ़ा कर उसके दोनों हाथों को थाम लिया और उसे हिलने से रोका।

अब प्रिया बस तड़प रही थी और मुँह से अजीब अजीब सिसकारियाँ निकले जा रही थी। मैंने रस की कटोरी से थोड़ा सा रस दोनों चूचियों पे रखे हुए गुलाब जामुनों पे गिराया और एक गुलाब जामुन को अपने होठों में दबा लिया, होठों से गुलाब जामुन को पकड़ कर मैंने उसे उसकी चूचियों की निप्पल पर रगड़ा और फिर अपना मुँह उसके मुँह के पास ले जा कर आधा गुलाब जामुन खुद खाया और आधा उसके मुँह में डाल दिया। प्रिय ने भी उत्सुकतावश अपना मुँह खोलकर गुलाबजामुन खा लिया और फिर मेरे होठों को अपने होठों से पकड़ कर जोर से चूसने लगी।

मैंने अपने होंठ छुड़ाये और दूसरी चूची के ऊपर रखे गुलाब जामुन के साथ भी ऐसा ही किया।

गुलाबजामुन के हटने से उसके खड़े खड़े निप्पल बिल्कुल सख्त होकर मुझे आमंत्रण दे रहे थे। उसके निप्पल पे गुलाब जामुन का ढेर सारा रस लगा हुआ था, मैं रुक नहीं सका और अपने होठों के बीच निप्पलों को जकड़ लिया और सारा रस चूसने लगा।

“हम्म्म्म…मेरे मालिक…मेरे राजा…मैं मर जाऊँगी…!” प्रिया की बहकी हुई आवाज़ मेरा जोश और बाधा रही थी और मैं मस्त होकर उसकी चूचियों को चूस रहा था। एक चूची को चूस चूस कर लाल करने के बाद मैंने दूसरी चूची को मुँह में भरा और वैसे ही चूस चूस कर लाल कर दिया।

उसकी चूचियों को मैंने सूखने नहीं दिया और फिर से रस डाल-डाल कर दोनों चूचियों को चूसता रहा। प्रिया मेरे सर को पकड़ कर आहें भरते हुए इस अद्भुत खेल का मज़ा ले रही थी।

काफी देर तक उसकी चूचियों की चुसाई के बाद मैंने अपनी जगह बदली और इस बार उसकी जांघों से नीचे खिसक कर उसके घुटनों के ऊपर बैठ गया। मेरे हाथ अब उसकी बिकनी के दूसरे और बचे हुए हिस्से पे थे यानि कि उसकी पैंटी पर। मैंने अपनी हथेली को एक बार उसकी चूत पर फिराया और धीरे से चूत को अपनी मुट्ठी में भर लिया।

“हाय…सोनू…ऐसे ना करो…उफ्फ्फफ्फ्फ़…” प्रिया ने अचानक से चूत को मुट्ठी में भरने से कहा।

मैंने बिना कुछ कहे उसकी कमर पर बंधे डोरियों को खोल दिया और उसकी पैंटी केले के छिलके के सामान उतर गई। मैं उसके पैरों पर बैठा हुआ था इस वजह से उसकी टाँगें पूरी तरह से सटी हुई थीं और उसकी जांघों ने उसकी मुनिया को दबा रखा था। मैंने स्थिति को समझते हुए उसके घुटनों के ऊपर से उठ कर उसकी टांगों को चौड़ा किया और अब उसकी जांघों के बीच घुस कर बैठ गया। सबसे पहले मैंने उसके पैंटी को अपने हाथों से निकाल कर फेंक दिया और फिर उसकी हसीं गुलाबी चूत का दीदार करने लगा।

क्या चमक थी यारों… बिल्कुल रोम विहीन… चिकनी और फूली हुई चूत… वैसे तो अब तक मैंने न जाने कितनी चूत चोद ली हैं लेकिन आज भी प्रिया की चूत को टक्कर देने वाली चूत नहीं मिली।

खैर, मैंने उसकी चूत को झुक कर चूम लिया। जैसे ही मैं झुक कर उसकी चूत के पास पहुँचा मेरे नाक में उसकी चूत के खुशबू ने अपना घर कर लिया। अब तक की मेरी हरकतों ने न जाने कितनी बार उसकी चूत का पानी निकाल दिया था और उसकी वजह से वो मदहोश करने वाली खुशबू निकल रही थी और मुझे और भी दीवाना बना रही थी।

मैंने अब देरी नहीं की और रस की कटोरी को अपने हाथों में लेकर पहले चूत के उपरी हिस्से को भिगो दिया और अपनी जीभ को वहाँ रख कर चाटने लगा। मेरी खुरदुरी जीभ का स्पर्श पाकर प्रिया की चूत मचल उठी और फड़कने लगी… मैंने उस हिस्से को अपने मुँह में भर लिया और चूचियों की तरह चूसने लगा। मैं इतने जोर से चूस रहा था कि प्रिया को मेरा सर पकड़ना पड़ा और उसने मेरा सर हटा दिया। मैंने अपना सर उठाया तो देखा कि वो जगह थोड़ी सी काली पड़ गई थी…वह ढेर सारा खून इकट्ठा हो गया था।

अब मैंने थोड़ा सा रस उसकी चूत की दरार पे डाली, उसकी चूत की दरार से होता हुआ वो रस उसकी चूत के पूरे मुँहाने पे लग गया और थोड़ा सा चूत से होता हुआ उसकी पड़ोसन तक भी पहुँच गया। मैंने अपनी जीभ को पूरी तरह से बाहर निकला और उसकी चूत के सबसे नीचे रख कर ऊपर की तरफ एक सुर में चाट लिया।

“उफ्फ्फ़…ओह सोनू, इतना मज़ा… कहाँ से सीखा ये सब… ओह्ह्ह… तुम सच में जादूगर हो !”…प्रिया ने अपनी चूत की दरारों पर मेरी जीभ की छुअन महसूस करते ही मेरे सर पे अपना हाथ रखते हुए कहा।

एक तो उसकी चूत से निकला रस और ऊपर से मेरे पसंदीदा गुलाबजामुन का रस, दोनों ने मिलकर वो स्वाद पैदा किया कि मैं अपनी सांस रोक कर अपनी जीभ को धीरे धीरे ऊपर नीचे करने लगा और उस हसीं मुनिया का स्वाद लेने लगा।

जितना मज़ा प्रिया को आ रहा था उससे दोगुना मज़ा मुझे आ रहा था। जी कर रहा था कि यह वक़्त यहीं रुक जाए और मैं जीवन भर उसकी चूत को ऐसे ही चाटता रहूँ…

प्रिया तड़प तड़प कर अपनी कमर उठा रही थी और चूत की चुसाई का भरपूर आनंद ले रही थी। अब मैंने फिर से रस लिया और अपने एक हाथ की दो उँगलियों से उसकी चूत का मुँह खोलकर उसके गुलाबी छेद में ढेर सारा रस भर दिया। उसकी चूत का मुँह छोटा सा था इसलिए ज्यादा रस अन्दर नहीं जा सका और बाहर की तरफ बह निकला।

मैंने झट से कटोरी को नीचे रखा और अपनी जीभ से बाहर बहते हुए रस को सुड़क करके चाट लिया और फिर जीभ को थोड़ा नुकीला करके उसकी चूत के अन्दर डाल दिया।

“हुम्म्मम… बस करो जान… बर्दाश्त नहीं हो रहा है… ओह माँ… बस करो… आअह्ह्ह…” प्रिया ने आह भरी और मेरे बालों को जोर से पकड़ कर खींच लिया।

मैं उसकी किसी भी बात पर ध्यान न देकर बस चूत की चुसाई में लगा रहा और अब दोनों हाथों से उसकी चूत को चौड़ा करके अपनी जीभ को जितना हो सके अन्दर तक डाल-डाल कर चूसने लगा। मैं अपने होश में नहीं था और उसकी हसीं चूत को पूरा खा जाना चाहता था। मैं भरपूर आनंद के साथ अपने काम में लगा रहा और चूस चूस कर उसकी चूत को मस्त कर दिया…

चूचियों की तरह ही मैंने चूत को भी सूखने नहीं दिया और बार बार रस डाल कर चूत को चाटता रहा।

बीच बीच में प्रिया की चूत ने पानी छोड़ा जिसकी वजह से मीठा और नमकीन दोनों स्वाद मुझे मज़े देता रहा। मेरा मुँह दुखने लगा था लेकिन छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा था।

लगभग आधे घंटे तक तक उसके चूत को चूसते चूसते मैंने उसे चरम पर पहुँचा दिया और प्रिया ने एक जोरदार सिसकारी के साथ ढेर सारा पानी अपनी चूत से बाहर धकेला। मेरा पूरा मुँह उसके काम रस से भर गया। मैंने बड़े स्वाद लेकर उस सारे रस को अपने गले से नीचे उतार लिया। प्रिया के साथ साथ मेरे मुख पर भी तृप्ति का भाव उभर आया। प्रिया तो मानो बिल्कुल निस्तेज और ढीली सी होकर अपने हाथ पैर पसर कर वैसे ही लेटी रही। बस उसकी चूचियाँ उसके तेज़ साँसों के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे।

मैंने हाथ बढ़ा कर उसकी चूचियों को थामा और उन्हें प्यार से मसलने लगा। प्रिया ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं और मेरी तरफ ऐसे देखने लगी जैसे मुझे हजारों धन्यवाद दे रही हो, उसके होठों पे एक बड़ी ही प्यारी सी मुस्कान थी जैसा कि अक्सर उस वक़्त आता है जब कोई बहुत खुश होता है। शायद मेरे होठों ने उसके चूत को इतना सुख दिया था कि वो अंतर्मन से खुश हो चुकी थी।

फिर प्रिया ने जबरदस्ती मुझे अपनी चूत से उठा दिया और मुझे अपने ऊपर खींच लिया। मैं उसके ऊपर लेट गया और उसे अपनी बाहों में भर कर अपने बदन से रगड़ने लगा। इन सबके बीच मेरा मस्त लंड और भी ज्यादा अकड़ गया था और मेरी निकर फाड़ने को पूरी तरह तैयार था। प्रिया को मेरे लंड का एहसास अपनी चूत पर होने लगा और वो अपनी चूत को लेटे लेटे ही लंड के साथ रगड़ने लगी।

लण्ड का वो हाल था कि अगर उसके बस में होता तो निकर के साथ ही उसकी चूत में घुस जाता, लेकिन यह संभव नहीं था।
अब प्रिया ने मेरे गालों को अपने हाथों से पकड़ कर एक प्यारी सी पप्पी दी और मुझे उठने का इशारा किया। मैं धीरे से उसके ऊपर से हट गया और उसके बगल में लेट गया।

प्रिया बिजली की फुर्ती से उठी और मेरे कमर पर ठीक वैसे ही बैठ गई जैसे मैं उसके ऊपर बैठा था। प्रिया पूरी नंगी मेरे ऊपर बैठी थी और उसकी हसीं गोल गोल चूचियाँ मेरे ठीक सामने थीं। मैंने फिर से उसकी चूचियों को पकड़ा लेकिन उसने मेरे हाथ हटा दिए और मेरी तरफ देख कर आँख मार दी।

“अब मेरी बारी है जान…अब आप देखो मैं क्या करती हूँ…बहुत तड़पाया है आपने !”…प्रिया ने बड़े ही कातिलाना अंदाज़ में कहा और मेरे कमर से थोड़ा नीचे सरक गई।

नीचे सरक कर उसने अपने हाथ मेरी तरफ बढ़ाये और मेरे हाथों को पकड़ कर मुझे थोड़ा सा उठा कर बिठा दिया और बिना किसी देरी के मेरी टी-शर्ट एक झटके में निकाल दी। उसने वापस मुझे धक्का देकर लिटा दिया और फिर अपनी नाज़ुक नाज़ुक उँगलियों से मेरे सीने के बालों से खेलने लगी। उसने गर्दन घुमाकर कुछ ढूँढने जैसा किया और फिर पीछे की तरफ मुड़कर कुछ उठाया। वो और कुछ नहीं वही रस वाली कटोरी थी।

कटोरी को देख कर मैं मुस्कुरा उठा और प्रिया भी मुस्कुराने लगी। उसने कटोरी से थोड़ा सा रस मेरे सीने पे और मेरे दोनों निप्पलों पे डाल दिया और झुक कर एक ही सांस में मेरे निप्पल को अपने होठों में भर लिया। वो भी बिल्कुल मेरे ही अंदाज़ में उन्हें जोर जोर से चूसने लगी और फिर धीरे धीरे अपनी जीभ को मेरे पूरे सीने पे जहाँ जहाँ रस गिरा था वहाँ वहाँ चाटने लगी।

मुझे नहीं पता था कि जब मैं उसकी चूचियों और सीने को चाट रहा था तो उसे कैसा फील हो रहा था लेकिन जब उसने वही हरकतें मेरे साथ की तो मैं ख़ुशी से सिहर गया। अब मुझे एहसास हो रहा था कि उसकी चूत ने इतना पानी क्यों निकला था। मेरे लंड ने भी प्री कम की कुछ बूँदें छोड़ीं जिसका एहसास मुझे हो रहा था। मेरा लंड बार बार झटके खा रहा था।
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02-07-2019, 01:13 PM,
#38
RE: आंटी और उनकी दो खूबसूरत बेटियाँ
प्रिया झुक कर मेरे सीने और बदन के बाकी हिस्से को चाट और चूम रही थी और मैं अपने हाथ को उसके नितम्बों के ऊपर ले जा कर सहला रहा था। उसके पिछवाड़े की दरार में मैंने अपनी उँगलियों को ऊपर नीचे फिराना शुरू किया और तभी मेरी उँगलियों ने उसकी गोल गुलाबी छोटी सी गांड के छेद को छुआ। मैंने एक दो बार उस छेड़ को उंगली से सहलाया और धीरे से अपनी एक उंगली को उस छेड़ में थोड़ा अन्दर डालने की कोशिश की।

“आउच… यह क्या करे रहे हो… बड़े शैतान हो तुम…”प्रिया ने अचानक से अपना मुँह उठा कर मुझे देखा और बनावटी गुस्से से मुझे कहा।
मैंने बस उसकी तरफ देखकर एक स्माइल दी और फिर अपनी उंगली उसकी गांड के छेद से हटा कर वापस से उसके बड़े से पिछवाड़े को सहलाने लगा।

अब प्रिया मेरे पैरों के ऊपर से नीचे उतर गई और मेरे निक्कर को अपने हाथों से पकड़ कर नीचे खींच दिया। फिर वही हुआ जैसा पिछली रात को हुआ था। लंड की वजह से निक्कर फिर से अटक गई। मैं नहीं चाहता था कि ज्यादा देर अपने लंड को प्रिया के हाथों से दूर रखूं, इसलिए मैंने खुद ही अपनी कमर उठा कर लंड को ठीक करते हुए निक्कर को निकाल दिया।

निक्कर निकलते ही मेरा मुन्ना बिल्कुल अकड़ कर फुफकारने लगा। प्रिया की आँखें फ़ैल गईं और फिर उनमें वही चमक दिखने लगी जो कि पिछली रात को नज़र आई थी। उसने झट से मेरे लंड को अपने हाथों में जकड़ लिया और झुक कर लंड के सुपारे पर एक किस्सी कर दी। किस करते ही मेरे लंड ने उसे ठुनक कर सलाम किया जिसे देख कर प्रिया के मुँह से हंसी निकल गई।

“शैतान…बड़ा मज़ा आ रहा है न… खूब ठनक रहे हो… अभी बताती हूँ।” प्रिया ने मेरे लंड को देखकर कहा मानो वो उससे ही बातें कर रही हो।
निक्कर निकलते ही मेरा मुन्ना बिल्कुल अकड़ कर फुफकारने लगा। प्रिया की आँखें फ़ैल गईं और फिर उनमें वही चमक दिखने लगी जो कि पिछली रात को नज़र आई थी। उसने झट से मेरे लंड को अपने हाथों में जकड़ लिया और झुक कर लंड के सुपारे पर एक किस्सी कर दी। किस करते ही मेरे लंड ने उसे ठुनक कर सलाम किया जिसे देख कर प्रिया के मुँह से हंसी निकल गई।

“शैतान…बड़ा मज़ा आ रहा है न… खूब ठनक रहे हो… अभी बताती हूँ।” प्रिया ने मेरे लंड को देखकर कहा मानो वो उससे ही बातें कर रही हो।

प्रिया ने मेरे लंड को एक बार फिर से अच्छी तरह से अपने हाथों से सहलाया और फिर मेरे अन्डकोशों को मुट्ठी में भर कर एक दो बार दबाया और मेरी तरफ देखने लगी।

मैंने उसकी आँखों में देख कर उससे आगे बढ़ने के लिए इशारा किया। प्रिया को पता था कि मैं क्या चाहता हूँ…

प्रिया ने फिर से रस वाली कटोरी उठाई और सारा का सारा रस मेरे लंड में ऐसे डालने लगी मानो नहला रही हो। मेरा लंड गुलाबजामुन के रस से सराबोर हो गया और उस गाढ़े रस की वजह से चमकने लगा। लंड की नसें रस से सराबोर होकर और भी उभर गईं थीं और मोटे से रस्से के सामान दिख रही थीं मानो रस्सियों से लंड को लपेट दिया हो।

प्रिया ने कटोरी को अलग रख दिया और अब मेरे दोनों जांघों के बीच अपने आप को स्थपित कर लिया। प्रिया के बाल अब तक खुले हुए थे, उसने अपने दोनों हाथों से अपने बालों को बाँध कर जूड़ा बना लिया ताकि लंड चूसते वक़्त वो उसे परेशान न करें।

प्रिया की समझदारी ने एक बार फिर से मेरा मन मोह लिया। जब वो अपने बाल ठीक कर रही थी मैंने अपने हाथों को बढ़ा कर उसकी चूचियों को जोर से दबा दिया।

“उह्ह्ह्ह…तुम भी ना ! इतने जोर से कोई दबाता है क्या…” प्रिया ने चीख कर कहा।

“औरों का तो पता नहीं लेकिन मैं तो ऐसे ही दबाता हूँ !” मैंने उसकी कमर को पकड़ कर अपनी तरह खींचते हुए कहा और हंसने लगा।

“अच्छा जी…बड़ा मज़ा आता है मुझे दर्द देकर…?” प्रिया ने अपने हाथों को मेरे हाथों पर रखते हुए कहा और फिर मुस्कुराते हुए मेरे हाथों को हटा कर वापस से अपनी पोजीशन ठीक की और फिर झुकती चली गई।

प्रिया ने अपनी जीभ पूरी बाहर निकाल ली और मेरे टनटनाये लंड को बिना अपने हाथों से पकड़े जीभ की नोक से लंड को ऊपर से नीचे एक लम्बी सी दिशा में चलाया।

“ओह्ह… मेरी रानी… तुम लाजवाब हो !” मेरे मुँह से आह निकली और मैं तड़प उठा।

प्रिया ने वैसे ही बाहर से लंड के चारों तरफ लगे रस को अपनी जीभ से चाट चाट कर साफ़ किया और फिर लंड के अगले भाग को अपने होठों में भर लिया।

अब प्रिया ने अपना कमाल दिखाना शुरू किया और आइस क्रीम की तरह लंड को मज़े से चूसने लगी। हालांकि मेरे लंड को पूरा मुँह में लेना मुश्किल था लेकिन प्रिया पूरी कोशिश कर रही थी कि उसे जितना हो सके अपने मुँह में भर ले।

मैं मज़े से अपनी कमर को थोड़ा थोड़ा हिलाते हुए अपना लंड उसके मुँह में दे रहा था। मेरे मुँह से बस हल्की हल्की सिसकारियाँ ही निकल पा रही थीं… क्यूंकि जैसे ही मैं कुछ बोलने की सोचता, प्रिया पूरे लंड को मुँह में भर लेती और मेरी साँसें ही अटक जातीं।

“उम्म्म… हाँ… मेरी जान, तुम सच में कमाल हो… चूसो जान… और चूसो…” इस बार मैंने सांस रोक कर उससे कहा और अपने हाथ बढ़ा कर उसका सर पकड़ लिया।

प्रिया ने अपना मुँह थोड़ा अलग किया और अपनी जीभ फिर से निकाल कर मेरे अन्डकोशों को चाटने लगी। अभी तक उसने अपने हाथों को अलग ही कर रखा था, शायद इसलिए कि कहीं गुलाबजामुन के रस से उसके हाथ चिपचिप न हो जाएँ…

खैर अब तक उसने लंड और आस पास लगे सारे रस को चाट लिया था इसलिए अब उसने अपने दायें हाथ से मेरा लंड पकड़ा और खूब तेज़ी से लंड को हिलाने लगी जैसे कि मुठ मारते वक़्त किया जाता है। साथ ही साथ वो अपने होंठों के बीच मेरे अण्डों को पकड़ कर चुभला भी रही थी। कुल मिलकर ऐसी स्थिति थी कि मैं अपने पूरे होशोहवास खो रहा था। प्रिया की नाज़ुक हथेली और नाज़ुक होठों की मस्ती ने मुझे मस्त कर दिया था।

प्रिया ने अब मेरे लंड की तरफ अपने नज़रें उठाई और धीरे से मेरे लंड के चमड़े को खोलकर मेरा सुपारा बाहर किया। सुपारा अभी तक लाल हो चुका था और प्रिया के मुँह के रस से भीग कर चमक रहा था।

प्रिया ने अपने होंठों से खुले हुए सुपारे को चूमा और फिर से अपने हाथ को पीछे ले जा कर रस वाली कटोरी फिर से उठा लिया। अब तक सारा रस लगभग ख़त्म हो चुका था लेकिन फिर भी प्रिया ने अपनी उँगलियों से कटोरी के अन्दर का रस इकट्ठा किया और फिर लगभग 8-10 बूँदें सुपारे पर गिरा दीं। रस मेरे सुपारे के ठीक ऊपर मेरे लंड के छेद से होता हुआ चारो तरफ फ़ैल गया। अब सुपारा बहुत ही प्यारा दिख रहा था क्यूंकि उसके ऊपर रस की गाढ़ी सी परत चढ़ गई थी।

प्रिया ने एक खा जाने वाली नज़रों से लंड को देखा और फिर से अपनी जीभ को मेरे लंड के छेद पे रखा और धीरे धीरे जीभ की नोक को रगड़ा।

“उफफ्फ… आह प्रिया… ले लो पूरा अन्दर… ऐसे मत करो, गुदगुदी होती है…” मैं थोड़ा सा तड़प कर बोलने लगा।

“आप बस ऐसे ही लेटे रहो मेरे सरकार… मुझे जो करना है वो तो मैं करके ही रहूँगी !” प्रिया ने मुझे देखकर हंसते हुए कहा और वापस अपने काम में लग गई। उसने अपनी जीभ को सुपारे के चारों तरफ घुमा घुमा कर सारा रस चाट लिया और फिर अपना मुँह खोल कर पूरे सुपारे को मुँह में भर लिया।

फिर शुरू हुआ प्रिया का रफ़्तार भरा लंड चूसने का कार्यक्रम और उसने तेज़ी से लंड को पूरा निचोड़ डाला। मेरी तो साँसें ही रुकने लगी थीं। मैं बड़ी मुश्किल से अपने आपको संभाल रहा था। आज प्रिया मेरे लंड को तोड़ डालने के मूड में थी। उसने अब अपना एक हाथ भी लगा दिया और हाथ से हिलाते हुए लंड को चूसने लगी…

मैं अब काबू रखने की हालत में नहीं था, मैंने उसका सर पकड़ कर हटा दिया और उठ कर बैठ गया। अगर ऐसा नहीं करता तो शायद उसके मुँह में ही झड़ जाता। मैं बैठ कर लम्बी लम्बी साँसें लेने लगा और प्रिया मुझे खा जाने वाली नज़रों से घूरने लगी।

मैंने अपनी साँसों को नियंत्रित किया और प्रिया को एक झटके से अपनी तरफ खींच लिया। प्रिया का फूल सा बदन मेरे ऊपर आ गया और मैंने उसे लिपटा कर नीचे लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ कर उसके होंठों को अपने होठों में लेकर चूसने लगा। मैंने उसकी चूचियों को बेदर्दी से पकड़ कर मसलना शुरू किया और अपने सांप को उसकी चूत के मुँह पर रगड़ने लगा। लण्ड और चूत दोनों इतने गीले थे कि अगर मैं कोशिश करता तो एक ही झटके में लंड अन्दर हो जाता लेकिन मुझे यह ख्याल था कि प्रिया अभी तक कुंवारी थी और मेरा लंड उसकी नाज़ुक चूत को फाड़ सकता था।

मुझे रिंकी वाली बात भी याद आ गई, मैंने रिस्क नहीं लिया और उसके ऊपर से उठ कर उसके पैरों की तरफ आ गया।

मैंने प्रिया की जांघों को अपने हाथों से सहलाया और फिर धीरे से उसके पैरों को ऊपर उठा कर अपने कंधे पर रख लिया। पैरों को उठाने की वजह से मेरा लंड अब उसकी चूत के ठीक मुहाने पर सैट हो गया और ठुनक ठुनक कर उसकी चूत को चूमने लगा।

मैंने भी अपने लंड को अपने हाथों से पकड़ कर उसकी चूत की दरारों में घिसना शुरू किया और प्रिया की तरफ हसरत भरी नज़रों से देखने लगा।
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02-07-2019, 01:13 PM,
#39
RE: आंटी और उनकी दो खूबसूरत बेटियाँ
प्रिया के चेहरे पर उत्तेजना के भाव दिख रहे थे साथ ही उसकी आँखों में एक अजीब सा डर नज़र आ रहा था। वो जानती थी कि अब असली काम होने वाला है और मेरा लम्बा चौड़ा लंड उसकी चूत की धज्जियाँ उड़ाने वाला था। प्रिया मेरी तरफ ऐसे देख रही थी मानो वो यह कहना चाह रही हो कि जो भी करना धीरे करना।
मैं उसकी हालत समझ रहा था, मैंने उसे प्यार से देखा।

“प्रिया मेरी रानी… घबराना नहीं… थोड़ा सा दर्द तो होगा लेकिन मैं ख्याल रखूँगा…” मैंने उसे समझाते हुए कहा।

“डर तो लग रहा है जान, लेकिन मैं अब बर्दाश्त नहीं कर सकती…तुम आगे बढ़ो, मैं संभाल लूंगी…!” प्रिया ने मुझे शरमाते हुए देख कर कहा।

मैंने उसकी जांघों को थम लिया और अपने सुपारे को उसकी नाज़ुक सी चूत के अन्दर दबाव के साथ घुसाने लगा। चिकनाई इतनी ज्यादा थी कि लंड बार बार फिसल जा रहा था। मैंने फ़िर से अपने लंड को पकड़ा और इस बार थोड़ा दम लगा कर लंड को ठेल दिया।

“आअह… सोनू… धीरे…” प्रिया की टूटती आवाज़ आई।

मैंने देखा कि सुपारे का अगला हिस्सा थोड़ा सा उसकी चूत में फंस गया था। अब अगले धक्के की बारी थी और मैंने फ़िर से एक हल्का धक्का मारा… लंड का सुपारा थोड़ा और अन्दर गया और आधा सुपारा उसकी चूत के मुँह में अटक गया।

प्रिया ने अपने दांत भींच लिए थे और अपनी मुट्ठी से चादर को पकड़ लिया था। मैं जानता था कि ज्यादा जोर जबरदस्ती करने से उसकी हालत ख़राब हो सकती है। मैंने अपने सुपारे को वैसे ही फंसा कर रगड़ना चालू किया और उसकी जांघों को सहलाता रहा।

प्रिया इंतज़ार में थी कि कब धक्का पड़ेगा और उसकी चूत फटेगी। उसकी मनोदशा साफ़ साफ़ दिख रही थी।

मैंने ऐसे ही रगड़ते रगड़ते सांस रोक ली और एक जोरदार सा धक्का मारा।

“आई ईईईई ई ईईइ… मर गईईईईई…” प्रिया जोर से चीख पड़ी।
आधा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ अन्दर जा चुका था। प्रिया की चीख ने मेरी गाण्ड फाड़ दी। मैं डर ही गया, वो तो भला हो मेरा कि मैंने दरवाज़े के साथ साथ खिडकियों को भी बंद कर दिया था। वरना उसकी चीख पूरे घर में फ़ैल जाती और सब जाग जाते।

मैंने तुरंत उसके जांघों को छोड़ कर उसके ऊपर झुक कर अपने होंठ उसके होठों पर रख दिए और उसका मुँह बंद कर दिया। लेकिन उसकी घुटी घुटी सी आवाज़ अब भी निकल रही थी। उसकी आँखें फैलकर चौड़ी हो गई थीं और उसने मेरी पीठ पर अपने नाख़ून गड़ा दिए।

मैंने सुन रखा था कि किसी कुंवारी लड़की की सील तोड़ते वक़्त उसका ध्यान बंटा दिया जाना चाहिए ताकि वो सब सह सके।

मैं भी उसी बात को ध्यान में रखकर उसके होंठों को चूमते हुए उसकी चूचियों को पकड़ कर सहलाता रहा। करीब 8-10 मिनट के बाद प्रिया की पकड़ मेरे पीठ से थोड़ी ढीली हुई और मैं समझ गया कि उसका दर्द कम हो रहा है।

मैं तब थोड़ा ऊपर उठा और एक बार फिर से उसकी जांघों को थाम कर अपने लंड को उतना ही घुसाकर धीरे धीरे अन्दर-बाहर करने लगा।

जैसे ही लंड ने हरकत करनी शुरू की, प्रिया को फिर से दर्द का एहसास होने लगा।

“प्लीज सोनू… धीरे करो न… बहुत दर्द हो रहा है… उफ्फ्फ्फ़… अगर पता होता कि इतना दर्द होता है तो मैं कभी नहीं लेती अपनी चूत में तुम्हारा यह ज़ालिम लंड !” प्रिया दर्द से कराहते हुए हिल भी रही थी और मुझसे शिकायत भी कर रही थी।

मैंने मन में सोचा,” अभी तो असली दर्द बाकी है मेरी जान…पता नहीं झेल पाओगी या नहीं।”

यह सोचते सोचते मैंने लंड को आगे पीछे करना और उसकी जाँघों को सहलाना जारी रखा। लंड की रगड़ ने चूत को पानी छोड़ने पर मजबूर कर दिया और उसकी चूत ने पानी छोड़ा। लंड चिकनाई को महसूस कर थोड़ा सा और आगे सरका।

“आआह्ह्ह… सोनू… सोनू… दुखता है…” प्रिया को फिर से दर्द का एहसास हुआ।

“बस मेरी जान…अब नहीं दुखेगा…” मैंने उसे सहलाते हुए कहा और अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर उसकी एक चूची को पकड़ कर मसलने लगा।

चूचियों पर हाथ पड़ते ही प्रिया ने अपनी कमर को थोड़ा सा ऊपर उठाया और मुझे यह इशारा मिला कि अब शायद उसे भी अच्छा लगने लगा था। मैं इसी मौके की तलाश में था, मैंने देरी करना उचित नहीं समझा और अपनी सांस को रोक कर उसकी चूचियों को दोनों हाथों से पकड़ लिया और झुक कर उसके होठों को अपने होठों से कैद कर लिया। मैं जानता था कि इस बार जो दर्द उसे होने वाला था वो उसकी हालत ख़राब कर देगा और वो जोर जोर से चिल्लाने लगेगी।

मैंने धीरे धीरे उसकी चूत में अपने लंड को रगड़ते रगड़ते अचानक से एक भरपूर दम लगा कर जोरदार धक्का मारा और इस बार किला फ़तेह कर लिया।

“गगगगगूं… गगगगगगूं…उह्ह्ह्हह्ह्ह्ह… !” प्रिया की घुटन मेरे मुँह में दब कर रह गई और उसने मेरे सर के बालों को इतनी जोर से खींचा कि मैं बर्दासश्त नहीं कर पाया और मेरे होंठ उसके होठों से अलग हो गए।
“ऊऊह्हह्ह ह्हह माँ… मुझे नहीं करना…निकालो…प्लीज…मर गईईईई…” प्रिया ने छूटते ही जोर से आवाज़ निकाली और मुझे धक्के देकर खुद से अलग करने लगी।

उसकी आँखें बाहर को आ गईं और उनमे आँसुओं की मोटी मोटी बूँदें भर गईं। उसके होंठ थरथराने लगे… लेकिन कोई शब्द ही नहीं निकल रहे थे मानो उसका गला ही बंद हो गया हो।

उसने अपनी गर्दन इधर उधर करके अपने बेइंतेहा दर्द का प्रमाण दिया और मुझे निरंतर अलग करने के लिए धक्के देती रही।

मैंने उसका चेहरा अपनी हथेलियों में लिया और उसके आँखों को चूमकर बोला,”बस प्रिया… यह आखिरी दर्द था… थोड़ा सा सह लो… अब सब कुछ ठीक हो जायेगा… अब तो बस मज़े ही मज़े हैं।”

“नहीं सोनू… प्लीज मेरी बात मान लो… बहुत दुःख रहा है… आईई… ओह्ह्ह्हह्ह माँ… मुझसे नहीं होगा…” प्रिया ने लड़खड़ाती आवाज़ में मुझसे कहा और मुझसे लिपट कर रोने लगी।

मैं थोड़ा घबरा गया लेकिन अपने आपको संभाल कर मैंने उसके होंठों को एक बार फिर से चूसना शुरू किया और साथ ही साथ उसकी चूचियों को भी फिर से मसलना शुरू किया।

लंड अब भी पूरा का पूरा उसकी चूत में घुसा हुआ था और ऐसा लग रहा था मानो किसी ने जोर से मुट्ठी में जकड़ रखा हो। मैं बिल्कुल भी हिले बिना उसके होठों और उसकी चूचियों से खेलता रहा और अपने बदन से उसके बदन को धीरे धीरे रगड़ता रहा।

लगभग 15 मिनट के बाद प्रिया ने मेरे होठों को अपने होठों से चूसना शुरू किया और अपने हाथों को मेरे पीठ पर ले जा कर मुझे सहलाने लगी। धीरे धीरे उसने अपनी कमर को थोड़ी सी हरकत दी और अपनी गांड को ऊपर की तरफ किया।

मैं उसका इशारा समझ चुका था और मैंने उसकी आँखों में देखकर मुस्कान भरी और अपनी कमर को थोड़ा सा ऊपर किया। लंड थोड़ा सा बाहर आया, लंड के बाहर आते ही मुझे कुछ गरम गरम सा तरल पदार्थ अपने लंड से होकर बाहर आता महसूस हुआ। मैंने उत्सुकतावश अपना सर नीचे करके देखा तो मेरी आँखें खुली की खुली रह गईं। मैंने देखा कि खून की एक मोटी सी धार प्रिया की चूत से निकल रही थी और निकल कर मेरे लंड से होते हुए नीचे बिछी चादर पर फ़ैल रही थी।

प्रिया को भी शायद कुछ महसूस हुआ होगा तभी उसने अपने पैरों को हिलाकर कुछ समझने की कोशिश की लेकिन मैंने उसे कोई मौका नहीं दिया।

अगर उसने वो देख लिया होता तो निश्चित ही मुझे खुद से अलग कर देती और चोदने भी नहीं देती।

मैंने बिना वक़्त गवाए अपने लंड को बाहर खींच कर फिर से एक धक्का मार कर अन्दर ठेल दिया।

फच्च …एक आवाज़ आई और मेरा लंड वापस उसकी चूत की गहराइयों में चला गया और प्रिया के मुँह से फिर से एक सिसकारी निकली।
मैंने बिना वक़्त गवाए अपने लंड को बाहर खींच कर फिर से एक धक्का मार कर अन्दर ठेल दिया।

फच्च …एक आवाज़ आई और मेरा लंड वापस उसकी चूत की गहराइयों में चला गया और प्रिया के मुँह से फिर से एक सिसकारी निकली।

मैंने बिना रुके अपने लंड को आगे पीछे करना शुरू किया और मंद गति से उसकी चुदाई करने लगा। मेरे हाथ अब भी उसकी चूचियों से खेल रहे थे जिसकी वजह से प्रिया अपना दर्द भूल कर उस पल का आनंद ले रही थी।
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02-07-2019, 01:13 PM,
#40
RE: आंटी और उनकी दो खूबसूरत बेटियाँ
थोड़ी देर वैसे ही चोदते रहने के बाद प्रिया की चूत पूरी तरह मेरा साथ दे रही थी और मज़े के साथ मेरे लंड का स्वागत कर रही थी। अब मैंने अपनी कमर को उठाया और अपने हाथों को ठीक से एडजस्ट करके प्रिया के पैरों को और फैला लिया ताकि उसकी चूत की सेवा ठीक से कर सकूँ।

मैंने एक बार झुक कर प्रिया को चूमा और फिर अपने लंड को पूरा बाहर निकाल कर एक जोरदार धक्के के साथ अन्दर ठेला।

“ह्म्मम्म… सोनू… मेरे मालिक…” प्रिया बस इतना ही कह पाई और मैंने ताबड़तोड़ धक्के पे धक्के लगाने शुरू किये।

“प्रिया…अब तो बस तुम जन्नत की सैर करो।” मैंने प्रिया को इतना कह कर अपनी चुदाई की स्पीड बढ़ानी शुरू की।

कमरे में अब फच..फच की आवाज़ गूंजने लगी और साथ ही साथ प्रिया के मुँह से निकलती सिसकारियाँ मेरा जोश दोगुना कर रही थीं। मैं मज़े से उसकी चुदाई किए जा रहा था। अब तक जिस दर्द की वजह से प्रिया के चेहरे का रंग उड़ा हुआ था वही दर्द अब उसे मज़े दे रहा था और उसने मेरे हाथों को अपने हाथों से थाम लिया और अपनी कमर उठा उठा कर चुदने लगी।

“हाँ मेरे रजा…और करो…और करो…आज जी भर के खेलो …हम्म्म्म…उह्ह्ह्ह…” प्रिया अपनी आँखों को बंद करके जन्नत की सैर करने लगी।

“हाँ मेरी रानी… इस दिन के लिए मैं कब से तड़प रहा था… आज तुम्हारी और मेरी हम दोनों की सारी प्यास बुझा दूँगा।” मैंने भी प्रिया का साथ देते हुए उसकी बातों का जवाब देते हुए चोदना जारी रखा।

मैंने अपनी स्पीड अब और बढ़ा दी और गचा गच चुदाई करने लगा। अब तक उसकी चूत ने काफी पानी छोड़ा था और लंड को अब आसानी हो रही थी लेकिन उसकी चूत अब भी कसी कसी ही थी और मेरे लंड को पूरी तरह जकड़ कर रखा था। बीच बीच में मैं अपना एक हाथ उठा कर उसकी चूचियों को भी मसलता रहता जो प्रिया की मस्ती को और बढ़ा रहा था। “आह्ह्हह…आअह्ह्ह…ओह्ह्ह…मेरे राजा… और करो… हम्म्म्म…” प्रिया की यह मस्तानी आवाज़ मेरे हर धक्के के साथ ताल से ताल मिलाकर मुझे उकसा रहे थे।

मैंने और तेज़ी से धक्के देने के लिए अपने पैरों को एडजस्ट किया और निरंतर धक्कों की बरसात कर दी। मैं जब स्पीड बढ़ाई तो प्रिया के मुँह से एक सांस में लगातार आवाजें निकालनी शुरू हो गई…

“हाँ… हाँ… हाँ… मेरे सोनू… ऐसे ही… और तेज़ी से करो… और तेज़… उफ्फ्फ्फ़..” प्रिया मेरा नीचे दबी हुई चुदते चुदते बहकने सी लगी।

मुझे थोड़ी सी मस्ती सूझी और मैंने चुदाई को और रंगीन बनाने के लिए प्रिया को एक ही झटके में उठा लिया और उसे अपनी गोद में ऐसे बिठा लिया कि मेरा लंड अब भी उसकी चूत में ही रहा और उसके दोनों पैर मेरे कमर के दोनों तरफ हो गए। लंड रुक गया था जो प्रिया को मंज़ूर नहीं था शायद।

गोद में आते ही उसने अपनी कमर खुद ही हिलानी शुरू की और लंड को जड़ तक अपनी चूत में समाने लगी। मैंने उसे अपने सीने से चिपका लिया और नीचे से अपने कमर को हिलाते हुए लंड उसकी चूत में डालने लगा।

यह आसन बड़ा ही मजेदार था यारों ! एक तरफ प्रिया की चूत में लंड बिना किसी रुकावट के अन्दर बाहर हो रहा था, वही, दूसरी तरफ उसकी चूचियाँ मेरे मुँह के सामने हिल हिल कर मुझे उन्हें अपने मुँह में लेने को उकसा रही थीं।

मैंने भी देरी न करते हुए उसकी एक चूची को अपने मुँह में भर लिया और चूची को चूसते हुए धक्के मारने लगा।

“उफ्फ्फ… ह्म्म्म… खा जाओ मुझे… उम्मम्म…” चूचियों को मुँह में लेते ही प्रिया ने मज़े में बोलना शुरू किया।

मैंने भी उसे थाम कर उसकी चूची को चूसते हुए जोरदार चुदाई का खेल जारी रखा। हम दोनों के माथे पर पसीने की बूँदें उभर आई थीं। हम दोनों एक दूसरे को अपने अन्दर समां लेने की कोशिश करते हुए इस काम क्रीड़ा में व्यस्त थे।

तभी प्रिया ने मुझे धीरे से धक्का मारा और मुझे नीचे लिटा दिया और झट से मेरे ऊपर आ गई। मेरे अचानक से नीचे लेटने की वजह से “पक्क” की आवाज़ के साथ लंड उसकी चूत से बाहर आ गया।

“उई ईई ईईईईइ… कितना दर्द देगा ये तुम्हारा…”प्रिया के चूत से निकलते हुए लंड ने चूत की दीवारों को रगड़ दिया था जिस वजह से प्रिया के मुँह से यह निकल पड़ा लेकिन उसने आधी बात ही कही।

“कौन तुम्हें दर्द दे रहा है जान…” मैंने मस्ती भरे अंदाज़ में पूछा।

“यह तुम्हारा…”…प्रिया ने मेरे लंड को हाथों से पकड़ कर हिलाया और मेरी आँखों में देखने लगी लेकिन उसने उसका नाम नहीं लिया और शरमा कर अपनी आँखें नीचे कर लीं।

“यह कौन…उसका नाम नहीं है क्या…?” मैंने जानबूझ कर उसे छेड़ा।

“यह तुम्हारा लंड…” इतना कह कर उसने अपना सर नीचे कर लिया लेकिन लंड को वैसे ही हिलाती रही।

लंड पूरी तरह गीला था और अकड़ कर बिल्कुल लोहे के डण्डे के समान हो गया था।

मैंने थोड़ा उठ कर प्रिया को एक चुम्मी दे दी और फिर उसे अपने ऊपर खींच लिया। प्रिया ने मुझे वापस धकेला और मेरे कमर के दोनों तरफ अपने पैरों को फैला कर बैठने लगी। उसकी बेचैनी इस बात से समझ में आ रही थी कि उसने अपना हाथ नीचे ले जा कर लंड को टटोला और जैसे ही लंड उसके हाथों में आया उसके चेहरे पे एक मुस्कान आ गई और उसने लंड को पकड़ कर अपनी मुनिया के मुहाने पर रख लिया और धीरे धीरे लंड पे बैठने लगी। लंड गीलेपन की वजह से उसकी चूत में समाने लगा और लगभग आधा लंड प्रिया के वजन से चूत में घुस पड़ा।

प्रिया ने अपनी गांड उठा उठा कर लंड को उतना ही घुसाए हुए ऊपर से चुदाई चालू करी।

“ह्म्म्म…ओह्ह्ह्हह…मेरी रानी…हाँ…और अन्दर डालो…” मैंने तड़पते हुए प्रिया की झूलती हुई चूचियों को सहलाते हुए कहा।

“किसने कहा था इतना बड़ा लंड रखने के लिए…हम्म्म्म… मेरी चूत फाड़ दी है इसने और तुम्हें और अन्दर डालना है…” प्रिया अब पूरी तरह खुल चुकी थी और मज़े से लंड और चूत का नाम लेते हुए चुदवा रही थी।

“जैसा भी है अब तुम्हारा ही है जान… इसका ख्याल तो अब तुम्हें ही रखना है न..” मैंने भी प्रेम भरे शब्दों में प्रिया को जवाब दिया।
“हाँ…अब ये बस मेरा है… उम्म्मम्म…कैसे चोदे जा रहा है मुझे… उफ्फ्फफ्फ.. अगर पता होता कि चुदाई में इतना मज़ा है तो कब का तुम्हारा यह मूसल डाल लेती अपनी चूत में !” प्रिया ने ऊपर नीचे उछलते हुए कहा और मज़े से अपने होठों को चबाते हुए लंड को अपनी चूत से निगलने लगी।

“हाँ… और चुदवा लो मेरी जान… पूरा अन्दर घुसा लो …उम्म्म्म… हाँ हाँ हाँ… ऐसे ही।” मैंने भी प्रिया का जोश बढ़ाया और उसकी कमर को थाम कर अपनी कमर हिला हिला कर नीचे से लंड को उसकी चूत में धकेलने लगा।

“ओह मेरे सोनू… आज तुम्हारे लंड के साथ साथ तुम्हें भी पूरा अन्दर डाल लूँगी अपनी चूत में… हाय राम… कितना मज़ा भरा है तुम्हारे लंड में…उफ्फ्फ्फ़ !” प्रिया मेरी बातों का जवाब देते हुए और भी जोश में उछलने लगी।

मैंने उसकी कमर को पकड़ा हुआ था और उसकी उछलती हुई चूचियों का दीदार करते हुए चुदाई का भरपूर आनन्द ले रहा था। हम काफी देर से चुदाई कर रहे थे और सारी दुनिया को भूल चुके थे। हमें ये भी एहसास नहीं था कि घर में कोई भी जाग सकता था और सबसे बड़ी बात कि सिन्हा आंटी प्रिया को ढूंढते ढूंढते नीचे भी आ सकती थी। लेकिन हम इस बात से बेखबर बस अपनी अपनी प्यास बुझाने में लगे थे।

इतने देर से चुदाई करने के बावजूद कोई भी पीछे हटने का नाम नहीं ले रहा था। मेरा तो मुझे पता था कि दोपहर में ही मेरा टैंक खाली हुआ था तो इस बार झड़ने में वक़्त लगेगा। लेकिन प्रिया न जाने कितनी बार झड़ चुकी थी फिर भी लंड अपनी चूत से बाहर नहीं करना चाहती थी।

आज वो पूरे जोश में थी और जी भर कर इस खेल का मज़ा लेना चाहती थी। प्रिया की जगह उसकी बड़ी बहन रिंकी में इतना ज्यादा स्टैमिना नहीं था।

खैर मैं अपनी चुदाई का खेल जारी रखते हुए उसकी मदमस्त जवानी का रस पी रहा था।

इस पोजीशन में काफी देर तक चुदाई करने के बाद मैंने प्रिया को अपने ऊपर से नीचे उतारा और उसे घुमा कर घोड़ी बना दिया। प्रिया ने झुक कर घोड़ी की तरह पोजीशन ले ली और पीछे अपनी गर्दन घुमा कर मुझे एक सेक्सी स्माइल दी और धीरे से मुझसे बोली- जल्दी डालो ना जान…जल्दी करो !

प्रिया तो मुझसे भी ज्यादा उतावली हो रही थी लंड लेने के लिए। मैंने भी अपना लंड अपने हाथों में लेकर उसके गोल और भरी पिछवाड़े पे इधर उधर फिराया और फिर उसकी गांड की दरार में ऊपर से नीचे तक घिसते हुए उसकी चूत पर सेट किया और उसकी कमर पकड़ ली। मैंने एक बार झुक कर उसकी नंगी पीठे पर किस किया और अपनी सांस रोक कर एक जोरदार झटके के साथ अपना आधा लंड उसकी चूत में पेल दिया।

मैंने सुना था कि घोड़ी की अवस्था में लड़कियों या औरतों की चूत और कस जाती है, इस बात का प्रमाण मुझे अब मिल रहा था। प्रिया की चूत तो पहले ही कसी और कुंवारी थी लेकिन इस पोजीशन में और भी कस गई थी वरना जितने जोर का झटका मैंने मारा था उतने में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस जाना चाहिए था। चूत के कसने की वजह से लंड ने जब अन्दर प्रवेश किया तो प्रिया के मुँह से एक हल्की से चीख निकल गई।

“आऐ ईईइ…अर्रम से मेरी जान…इतने जोर से डालोगे अपने इस ज़ालिम लंड को तो मेरी चूत का चिथड़ा हो जायेगा।” प्रिया ने अपनी गर्दन घुमा कर मुझे दर्द का एहसास कराते हुए कहा।

पर मैं कहाँ कुछ सुनने वाला था मैं तो अपनी धुन में मस्त था और उसकी कसी कुंवारी छुट को फाड़ डालना चाहता था। मैंने एक और जोर का झटका मारा और अपने लंड को पूरा अन्दर पेल दिया।

“आह्ह्ह… जान… प्लीज आराम से चोदो न… हम्म्म्म… मज़े देकर चोदो मेरे मालिक, यह चूत अब तुम्हारी ही है…उफफ्फ्फ्फ़…मार लो…! ” प्रिया मस्ती में भर कर अपनी गांड पीछे धकेलते हुए चुदने लगी।

“हाँ मेरी जान, अब यह चूत सिर्फ मेरी ही रहेगी… और मेरा लंड हर वक़्त इसमें समाया रहेगा…उम्म्म्म…ऊह्ह्ह्ह…दीवाना हो गया हूँ तुम्हारी चूत का… अब तो बिना इसे चोदे नींद ही नहीं आएगी… ओह्ह्ह्ह… और लो मेरी जाने मन… जी भर के चुदवाओ…” मैंने भी चोदते चोदते प्रिया को कहा और अपने हाथ आगे बढ़ा कर उसकी लटकती चूचियों को पकड़ लिया।

मेरे ऐसा करने से मेरी पकड़ प्रिया के ऊपर और टाइट हो गई और लंड उसकी चूत में पूरी तरह से समां कर अपना काम करने लगा।

“हाँ… मेरे साजन… हाँ… चोदो मुझे… चोदो… चोदो… चोदो… उफ्फ्फ…” प्रिया अपने पूरे जोश में थी और अपनी गांड पीछे धकेल धकेल कर लंड को निगल रही थी।
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