Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
06-02-2019, 01:22 PM,
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
करीब एक घंटे बाद ही वहाँ एक स्कॉर्पियो खड़ी थी, जब असलम ने उन दोनो से चलने को कहा तो उन्होने उनके साथ आने से मना कर दिया,

फिर असलम ने उसे अपने ऑफीस का अड्रेस लिख कर दे दिया.. कल आकर मिलने का वादा लेकर वो दोनो वहाँ से निकल गये..

उन दोनो के जाने के 15 मिनिट बाद ही वो वॅन शहर की ओर जा रही थी, अब उस पर बाक़ायदा नंबर प्लेट थी…

कुच्छ देर बाद वो दोनो बंटी-बबली एक 3 स्टार होटेल के रूम में थे, और एक ही पलंग पर एक दूसरे की तरफ पीठ करके सो रहे थे…!

सुबह जब लड़के की आँख खुली तो उसने देखा कि पास सोई उसकी साथी लड़की की एक टाँग उसके उपर पड़ी थी, और एक हाथ उसके पेट पर था…

यह देख कर उसके चेहरे पर एक मीठी सी मुस्कान आगयि, और उसने धीरे से उसका हाथ और पैर अपने उपर से हटाए, और फ्रेश होने बाथ रूम में घुस गया…

बाहर आकर उसने दो चाय ऑर्डर की, जब चाय आगयि… तब उसने अपना एक हाथ उसके कंधे पर रख कर उसे सीधा किया और उसके माथे पर एक चुंबन लेकर उसे जगाया…

अरे उठो ! सुवह हो गयी, चाय पी लो…वो नींद में ही कुन्मुनाई, और उसका हाथ पकड़ कर अपने सीने में भींच लिया…

उसने फिर से आवाज़ दी और अपना हाथ खींचने लगा… वो उसके हाथ को और कस्ति हुई नींद में बड़बड़ाई…उउन्न्ं…सोने दो ना…भाई…

वो – उठो देखो कितना दिन निकल आया है, 9 बज गये… हमें असल्म के यहाँ भी जाना है…

कुच्छ देर की कोशिश के बाद वो उठ कर बैठ गयी, और उसने कहा – गुड मॉर्निंग भैया, और आगे उचक कर उसने उस युवक के गाल पर किस कर लिया…

चाय पीते हुए वो बोली – आप अकेले चले जाना, मे उस हराम्जादे की शक्ल भी नही देखना चाहती… अब तो मे सीधे उस कुत्ते के मूह पर थूकने ही जाउन्गि..

यह कहते -2 उसका सुंदर सा चेहरा लाल भभुका हो गया था, जिसे देख कर उस युवक ने फिर उसे और कुच्छ नही कहा…

उसके बाद वो दोनो तैयार हुए, और होटेल से बाहर आगये, अब वो युवक, वो रात वाला जोसेफ नही था… उसका हुलिया एक दम बदला हुआ था…

बाहर आकर वो दोनो अलग – अलग दिशाओं में निकल पड़े…
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मे अपने ऑफीस में बैठा आज का न्यूज़ पेपर देख रहा था जिसमें रात वाली घटना पूरे विस्तार के साथ छपी थी,

यहाँ तक कि कैसे दो गुण्डों को एक बिना नंबर की मारुति वॅन बचा कर ले गयी, उस वॅन को तलाश करने की कोशिश जारी है…

खबर पढ़ कर मेरे चेहरे पर स्माइल आगयि, और न्यूज़ पेपर सोफे पर फेंक कर अपने काम में लग गया..…!

शाम तक मे कोर्ट के कामों में उलझा रहा, इस बीच घर से निशा का फोन भी आया, भाभी से भी बात हुई…

उन्होने कई दिनो से घर ना आने का कारण पुछा तो मेने काम की व्यसतता बता कर उन्हें समझा दिया…

घर पर बातें करके मेने अभी फोन रखा ही था, कि वो फिरसे बजने लगा, देखा तो गुप्ता जी का लॅंड लाइन नंबर था,

कॉल रिसीव करते ही कानों में खुशी की आवाज़ सुनाई दी, मेने उसकी आवाज़ सुनते ही कहा – हां खुशी, बोलो कैसे फोन किया…!

खुशी – भैया, आप अभी क्या कर रहे हो..?

मे – क्यों कोई काम था ? मे अपने ऑफीस में ही हूँ, बस काम ख़तम करके निकलने की तैयारी में ही था, कि तुम्हारा फोन आगया…

वो – आप ऑफीस से सीधे यहीं आ जाओ, मे यहाँ अकेली हूँ मम्मी भैया के साथ किसी फंक्षन में गयी हैं, पापा का आने-जाने का कोई ठिकाना नही है…

मे – अरे तो तुम भी अपनी किसी फ्रेंड के पास चली जाओ,

वो – अब ज़्यादा बहाने मत बनाओ, और जल्दी आओ, वरना मे वहाँ आ जाउन्गि…

मेने हँसते हुए कहा – ठीक है आता हूँ, मेरे खाने का इंतेज़ाम करके रखना..

शाम को 7 बजे मेने अपना बॅग उठाया, ऑफीस बंद करवाया, और गुप्ता जी के बंगले की तरफ चल दिया…

गुप्ता जी के बंगले पर पहुँचते ही, खुशी मुझे हॉल में ही मिल गयी, मुझे देखते ही उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने कमरे में खींच कर ले गयी…!

जाते ही उसने गेट लॉक किया और मुझसे लिपट गयी, मेने उसके कंधे पकड़कर अलग किया और कहा – अरे मेरी बेबी डॉल सबर तो कर…!

वो मुझसे अलग होते हुए बोली – आपने जो वादा किया था, उस हिसाब से अब हमारे पास समय भी है और मौका भी, अब आपका कोई एक्सक्यूस नही चलेगा…

मेने उसके बेड पर बैठकर उसे अपनी गोद में बिठा लिया और हँसते हुए कहा – हां.. हां ठीक है मे कॉन्सा मना कर रहा हूँ, पर मुझे एक बात का जबाब देगी…

वो बोली – क्या..?

मे – तुम एक कमसिन नव यौवना, जवानी की दहलीज़ पर अभी-अभी कदम रखी हो, चाहोगी तो हज़ारों लड़के मिल सकते हैं, फिर तुम मेरे जैसे शादी शुदा इंशान के साथ ही ये सब क्यों करना चाहती हो…?

वो – क्योंकि मुझे आपसे ज़्यादा कोई हॅंडसम, और केरिंग मर्द नही मिला अभी तक…, अब मे आपको एक और बात बताना चाहती हूँ…!

मेने उसकी मोटी-मोटी मखमल जैसी चिकनी जांघे जो उसके छोटे से शॉर्ट के बाहर नंगी थी उन्हें सहलाते हुए पुछा – क्या..?

खुशी के मुलायम, थोड़े भारी गुदगूदे नितंबों के नीचे दबे मेरे लौडे ने अपना सर उठा लिया था, पॅंट के अंदर से ही उसने उसकी गान्ड के नीचे हलचल मचा रखी थी…

उसे फील करते ही, खुशी मदहोश होने लगी, और उसने मेरा एक हाथ अपनी जाँघ से उठाकर अपनी गदर कलमी आम जैसी चुचि पर रखकर दबाते हुए कहा –

उस दिन मेने मम्मी से सारे दिन कोई बात नही की, जब भी वो मेरे सामने पड़ती, मे मूह फेर्कर निकल जाती, वो मुझसे बात करना चाहती थी…

रात को जब मे अपने कमरे में पढ़ रही थी, तब वो मेरे कमरे में आई, मेने उन्हें अनदेखा कर दिया और अपनी पढ़ाई में लगी रही…

वो मेरे ठीक सामने आकर अपने घुटने टेक कर बेड पर बैठ गयी, और अपने दोनो हाथ से कानों को पकड़ कर बोली – खुशी बेटा एक बार मेरी तरफ देख तो सही.

उनकी आवाज़ में एक ममतामयी करुणा थी, जिसे मेने पहली बार सुना था, सो तुरंत मेने उनकी तरफ देखा…

मम्मी की आँखों में आँसू थे, उन्हीं आँसुओं भरी आँखों से वो अपने कान पकड़े हुए बोली – खुशी, मेरी गुड़िया मुझे माफ़ कर्दे…

तेरी माँ बहुत बुरी है… अपने बच्चों से किस तरह बर्ताव करती है…, पर तूने कभी ये सोचा कि मे ऐसी क्यों हूँ..?

मुझे आज अपनी मम्मी में माँ की ममता नज़र आई, जो अपनी बेटी के नाराज़ होने पर तड़प उठी थी…

मेने फ़ौरन उनके हाथ पकड़ कर उनके कानों से हटाए और उनके कलेजे से लग कर फफक पड़ी, हम दोनो माँ-बेटी बहुत देर तक रोते रहे फिर मेने उन्हें शांत करते हुए कहा-

मे आपसे नाराज़ नही हूँ मम्मी, हां थोड़ी दुखी ज़रूर थी, कि मेरी माँ ने बिना कुच्छ सोचे समझे अपनी बेटी को इतना गिरा हुआ समझ लिया,

मम्मी सुबक्ते हुए बोली – नही मेरी बच्ची, मेने तुझे गिरा हुआ नही समझा, बल्कि वो सब मेरे कम्बख़्त स्वाभाव बस मेरे मूह से निकल गया…

तू तो जानती है, घर की ज़िम्मेदारियाँ संभालते-2 कब मेरा स्वभाव चिड़चिड़ा हो गया, मुझे खुद पता नही चला, कोई समझाने वाला था नही, तेरे पापा ने घर की तरफ कभी ध्यान नही दिया…

तुम दोनो बच्चे पढ़ाई में लग गये, मे अपने दुख-सुख किसके साथ बाँटति..?

इन नौकरों के बीच रहकर अपनी मन मर्ज़ी चलती रही, और वही मेरी आदत बनती चली गयी…!

लेकिन आज जब तुम सब लोग मुझे अकेला छोड़ कर चले गये, तब मेने अंकुश से माफी माँगी, और उसकी बातों ने मुझे रियलाइज़ कराया…

मे उसके कंधे से लगकर खूब रोई, मेरा सारा गुस्सा, कुंठा, और घमंड मेरे आँसुओं के द्वारा बह गया, तब मुझे रियलाइज़ हुआ कि मे क्या से क्या बनती जा रही हूँ…!
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06-02-2019, 01:23 PM,
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
तभी मेने मन बना लिया था, कि मे अपनी गुड़िया से माफी माँगूंगी, शायद वो मुझे माफ़ कर्दे, लेकिन सारे दिन तूने मेरी तरफ देखा तक नही तो मे दर्द से तड़प उठी,

मुझसे रहा नही गया, और मे तेरे पास चली आई, अब तो मुझे माफ़ कर्दे मेरी गुड़िया…!

मम्मी की बातें सुनकर मेरी रुलाई फुट पड़ी, और मे एक बार फिर मम्मी के सीने से लग कर रो पड़ी…!

फिर मम्मी ने मुझे अलग करके प्यार से मेरे गाल को सहलाते हुए कहा – लेकिन बेटा ये ग़लत फ़हमी पैदा ही नही होती, अगर हम माँ-बेटी अपनी बातें एक दूसरे से कह सुन पाते…

अब मे चाहती हूँ, कि जो भी तेरे मन में हो वो मुझे खुलकर बता दिया कर, जिससे मे तुझे ग़लत और सही का फ़र्क बता सकूँ…!

वैसे तूने अंकुश को अपना भाई मानकर अच्छा किया है, वो लड़का सही मैने में एक भाई की तरह तेरी रक्षा कर सकता है..,

ये जमाना बहुत जालिम है बेटा, कदम-कदम पर झूठ और फरेब से ये दुनिया भरी पड़ी है,

वैसे मुझे अपनी बेटी पर पूरा भरोसा है, लेकिन फिर भी, तू किसी ऐसे वैसे लड़के के चक्कर में मत पड़ना, जो झूठे प्यार के वादे करके लड़कियों को बहला फुसलाकर उन्हें इस्तेमाल करते हैं, ब्लॅकमेल करके उन्हें चूस्ते रहते हैं,

बेटा मे तुझे इसलिए ये सब बता रही हूँ, कि इस उमर में इंसान के कदम बहक ही जाते हैं, जिसे हम प्यार समझते हैं, वो छनिक मात्र शरीर की ज़रूरत होती है,

मे ये नही कहती कि ये ज़रूरत पूरी ना हो, इस उमर में सभी करते हैं लेकिन किसी ऐसे हाथों में ना पड़ना कि वो इसका ग़लत फ़ायदा उठाए,

अंकुश एक ऐसा लड़का है, जो हज़ारों में तो क्या लाखों में एक है, भरोसेमंद है, ऐसा आदमी ढूँढने से भी नही मिलता है…जो हमें नसीब से मिला है…

तेरी ऐसी कोई ज़रूरत हो तो तू खुलकर उसे बता देना.., तू समझ रही है ना बेटी मे क्या कहना चाहती हूँ,

मे मूह फाडे मम्मी की बातें सुन रही थी, मे मम्मी की बातों का मतलव समझ रही थी, सच कहूँ तो जो इस उमर के हिसाब से इंसान की चाहत होती है, वो उन्होने बयान करदी थी..

शायद वो उनके अपने अनुभव रहे होंगे, या क्या पता उन्होने ये सब भोगा हो, लेकिन जो भी हो, ये एक ऐसी सच्चाई थी जिससे दो-चार होते-होते मे भी बची थी,

मे भी एक लड़के से अट्रॅक्ट हुई थी, लेकिन समय रहते उसकी सच्चाई मेरे सामने आ गयी और मेने उससे अपने संबंध ख़तम कर लिए…

मम्मी की बातों का मेरे उपर बहुत गहरा असर हुआ, और मन के किसी कोने में आपकी केरिंग छवि, एक मर्द की छवि में बदलने लगी, जो एक लड़की को उसके लड़की होने के एहसास से अवगत करा सकता है…

मे अवाक खुशी की बातें सुन रहा था, जब वो रुकी तो मेने पुछा – तुम्हारे उस लड़के से संबंध कहाँ तक पहुँचे थे..?

खुशी – बस मिलने मिलाने तक, लेकिन वो मुझे पाने के लिए हर संभव प्रयास में था, मे भी चाहती थी, कि हम शरीरक तौर पर एक हो जायें, बस एक उचित मौके की तलाश में थे…

लेकिन तभी मेरी एक सहेली ने उसकी सच्चाई बता दी, कि इसके कई और लड़कियों से भी संबंध हैं, और ये उन्हें ब्लॅकमेल कर रहा है…!

उसके बाद मेने उससे मिलना छोड़ दिया, चिढ़कर उसने उन गुण्डों का सहारा लिया जिनको आपने सबक सिखाया था…!

मे – क्या वो लड़का तुम्हारे कॉलेज में ही पढ़ता है…?

खुशी – नही, 12थ तक मेरे साथ था, लेकिन अब वो किसी दूसरे कॉलेज से इंजीनियरिंग कर रहा है, लेकिन उन लड़कों ने ही ये बात मुझे बताई, और ये भी कहा – कि अब वो तुम्हारे सामने कभी नही पड़ेगा…

मेने खुशी के अनारों को सहला कर कहा – तो तुम अभी तक वर्जिन ही हो..?

खुशी अपने चेहरे पर एक कामुक सी हँसी लाकर बोली – तो आपको क्या लगा कि मे ऐसे ही किसी को भी अपना ये खजाना यौंही ही लूटा……

इससे पहले की वो अपना वाक्य पूरा करती, मेने अपने होठ, उसके होठों पर चिपका दिए…..!

मेने खुशी को स्मूच करते हुए एक हाथ उसकी चुचि पर ले जाकर उसे मसल दिया.., और दूसरे हाथ से उसकी मुनिया को शॉर्ट के उपर से सहलाया…!

खुशी की आँखों में गुलाबी डोरे तैरने लगे…, उसने घूमकर मेरी तरफ मूह कर लिया और अपने आमों को मेरे सीने से रगड़ने लगी…!

खुशी मेरी गोद में मेरे दोनो तरफ को टाँगें फैलाकर बैठी थी, मेने उसके चेहरे को दोनो हथेलियों में लेकर पुछा – तो अपनी वर्जिनिटी खोने के लिए रेडी हो…!

वो – हां ! क्योंकि मुझे आपसे ज़्यादा केरिंग पार्ट्नर और नही मिल सकता..,

मेने उसके मोटे-मोटे कुल्हों को मसल्ते हुए कहा – सोच लो, तकलीफ़ होगी तुम्हें…

वो अपने होठों पर कामुक सी मुस्कान लाकर बोली – झेल लूँगी, लेकिन उसके बाद जो खुशी मिलेगी, वो ज़्यादा मायने रखती है मेरे लिए…!

मे – जैसी तुम्हारी मर्ज़ी, इतना कहकर मेने उसके टॉप को निकाल दिया…! बिना ब्रा के उसका मदमाता यौवन छल-छलाकर बाहर आगया…!



उसके 34 के बूब, एकदम सीधे तने हुए, लेशमात्र भी लटकन नही, जिनके शिखर पर एक-एक किस्मिश के दाने जैसे निपल… आअहह… क्या मस्त थे वो…

देखकर मेरा जी मचल उठा, और मेने उसके निपल को अपनी जीभ से चाट लिया…

आआहह….सस्स्सिईईई….ऊओह…और चाटो इन्हें….बहुत अच्छा लगता है मुझे…खुशी ने मादकता भरी आवाज़ में कहा….

आअहह…खुशी, तुम्हारी ये चुचियाँ वाकई ग़ज़ब की हैं, ये कहकर मेने एक को अपने मूह में भर लिया, और दूसरी को हाथ में लेकर ज़ोर्से मसल दिया…

आअहह…भैयाअ….धीरे..से म्मस्सालू…कहकर खुशी अपनी गान्ड को मेरे लंड के उभार पर रगड़ने लगी…!

खुशी ने मेरी शर्ट के बटन खोलकर उसे मेरे बदन से अलग कर दिया, और मेरे सीने के बालों को सहला कर मेरे निपल को जीभ से चाट लिया…

मेरे मूह से आहह… निकल गयी…, खुशी मेरे कशरति बदन पर हाथ फेर्कर बोली – क्या बॉडी बनाई है आपने, साले गुण्डों की क्या बिसात जो टक्कर ले पाते…

मेने उसके अनारों को मसल्ते हुए कहा – तू अब अपनी खैर मना…

वो मेरी जीन्स खोलकर उसे नीचे सरकाते हुए बोली – मुझे कोन्सि आपसे फाइट करनी है जो अपनी खैर मनाऊ…!

अच्छा देखते हैं, ये कहकर मेने उसे बेड पर धकेल दिया, और उसका शॉर्ट निकालते हुए बोला – अब जो फाइट होने वाली है वो उन गुण्डों से ज़्यादा ख़तरनाक होगी…!

खुशी की छोटी सी पैंटी, उसकी मोटी-मोटी, मक्खन जैसी चिकनी जांघों के बीच ठीक से चमक भी नही रही थी, मेने उसकी जांघों को सहलाते हुए उन्हें एक दूसरे से जुदा किया…

उसकी पैंटी थोड़ी सी गीली लग रही थी, मेने उसकी पैंटी के गीले भाग को जीभ लगा कर चाट लिया…!
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06-02-2019, 01:23 PM,
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खुशी किसी जलबीन मछली की तरह तड़प उठी, और उसने मेरे सर के बालों को अपनी मुट्ठी में जाकड़ लिया…!

मेने उसकी तरफ देखकर कहा – खुशी तेरा रस तो बड़ा टेस्टी है..., मेरी बात से वो बुरी तरह शर्मा गयी, और अपना सर दूसरी ओर घूमाकर मुस्करा उठी…!

फिर मेने उसकी इकलौती छोटी सी पैंटी को भी निकाल बाहर किया, वाउ ! क्या मुनिया थी उसकी, सफाचट, बिना बालों के एकदम चिकनी, लगता है जैसे कुच्छ समय पहले ही चिकनी की होगी…

मसल गुदगुदी सी, थोड़े से उसके होठ फूले हुए, लेकिन दोनो आपस में जुड़े हुए, दो इंच लंबी बीच की दरार…!

सच कहूँ दोस्तो ! इतनी सुंदर पुसी मेने आजतक नही देखी थी, देखकर मेरे मूह और लंड दोनो से लार टपकने लगी…!

मेने खुशी की दोनो टाँगों को चौड़ा करके एकदुसरे से जुदा किया, तबजाकर बमुश्किल उसकी फाँकें एक दूसरे से जुदा हुई, और उसकी पुसी के निचले भाग पर एक छोटा से छेद दिखाई दिया…

मेने अपनी जीभ की नोक बनाकर उस छेद को कुरेदा…., सस्स्स्सिईईई….आआहह… मुम्मय्यी…, खुशी सिसक पड़ी…,

उन्माद में आकर उसने अपनी मोटी-मोटी जांघों को भींचना चाहा, लेकिन बीच में मेरा सर था, सो उसने अपने दोनो केले के तने मेरे कंधों पर रखकर गान्ड उपर को उचका दी…,

मेने अपने दोनो हाथ उपर ले जाकर उसके दोनो उरोजो को हाथों में कस लिया और थोड़ा सख़्त हाथों से उन्हें मीँजने लगा…!

चुचियों की मींजाइ के साथ-साथ उसकी चूत की चटाई से खुशी की हालत ख़स्ता होने लगी, वो अपनी गान्ड को ज़ोर-ज़ोर से थिरका कर अपने सर के बालों को खींचने लगी…!

उसकी कोरी करारी मुनिया बेहद गीली हो चुकी थी, फिर जैसे ही मेने उसकी क्लिट जो अब थोड़ी बाहर उभर आई थी को अपने दाँतों के बीच दबा लिया,

और एक हाथ को नीचे लाकर अपनी उंगली के पोर को उसके छेद में थोड़ा अंदर तक डालकर रगड़ने लगा…!

खुशी उत्तेजना में आकर अपने सर को इधर से उधर पटाकने लगी, अब उसे अपने आप पर काबू रख पाना बहुत मुश्किल हो रहा था,

अंत में उसने मेरे सर को अपनी मोटी-मोटी जाँघो के बीच कस लिया और अपनी गान्ड को हवा में उठाकर झड़ने लगी,

एक मिनिट तक वो बदस्तूर रस छोड़ती रही, और मे उसके मीठे रस को चपर-चपर चाटने लगा, मानो कोई कुत्ता दूध पी रहा हो…

मेरा कुत्ता दूध पीते हुए ऐसी ही कुच्छ आवाज़ करता है, इसलिए लिख दिया…हहहे.

जब उसका स्खलन समाप्त हो गया, तो वो अपनी गान्ड को बिस्तेर पर लॅंड करके हाँफने लगी…!

मेने अपने होठों पर जीभ फेरते हुए उसकी तरफ देख कर कहा, ऊओउउंम्म पेट भर गया, कितना माल भर रखा है ख़ुसी…?

वो बुरी तरह से शरमा गयी, उसने बड़ी बेदर्दी से मेरे घुंघराले बालों को पकड़ कर अपने उपर खींच लिया, और मेरे चिप-चिपे होठों पर टूट पड़ी…!

मे पलट कर नीचे आगया, और उसे अपने उपर लिटाकर बोला – क्यों मेरी गुड़िया रानी, मज़ा आया…?

वो मेरे सीने में मूह छिपाकर बोली – ऊओह भैया, यू आर सो केरिंग गाइ…, मम्मी ने सच ही कहा था, आप भाग्यबस हमारे जीवन में आए हो..

ये मेने अभी तक कहानियों में या एक दो बाय्फ्रेंड में ही देखा पढ़ा था, आज सच में अनुभव करके पता चला की ब्लोवजोब होता क्या है…!

मेने उसके मोटे-मोटे चुतड़ों पर थपकी देकर कहा – ऊहह.. तो इसके बारे में पहले से ही पता है, हां…

फिर तो ये भी पता होगा, कि अब ब्लो जॉब देने की तुम्हारी बारी है…!

वो मेरे होठ चूमकर बोली – एक्सपीरियेन्स तो नही है, पर आप गाइड करते जाना, इतना कहकर उसने मेरे होठों से चूमना शुरू करते हुए नीचे की तरफ बढ़ने लगी…

अब सिसकने की मेरी बारी थी, खुशी हर वो पेन्तरा अपना रही थी, जो उसने पढ़ा और देखा था…

चूमते चाटते हुए वो मेरी कमर तक पहुँच गयी, मेरा लंड एक छोटी सी फ्रेंची के अंदर उच्छल कूद कर रहा था, हल्का सा गीलेपन का धब्बा उसपर लग चुका था…!

खुशी ने एक बार फ्रेंची के उपर से ही मेरे लौडे को नीचे से उपर की तरफ अपने हाथ से सहलाया…., फिर बड़ी कामुक अदा से अपनी उंगलियों को एलास्टिक में फँसाकर धीरे-धीरे वो उसे नीचे की तरफ सरकाने लगी…!

जैसे ही उसकी एलास्टिक मेरे लंड की सीमा से नीचे हुई, वो किसी स्प्रिंग लगे गुड्डे की तरह उच्छल कर बाहर आगया…!

कुच्छ देर तक अपने मूह पर हाथ रखे खुशी उसके रूप जाल मे फँसी उसे एकटक निहारती रही, फिर उसे अपनी मुट्ठी में कसते हुए बोली –

क्या सबके कॉक ऐसे ही होते हैं भैया…?

मेने शरारत से उसके अनारों को मसल्ते हुए कहा – क्यों तुम्हें पसंद नही आया…?

उसने उसे अपने गाल पर सटा कर उसकी गर्मी को फील करते हुए बोली – पसंद तो बहुत आया, लेकिन क्या सबके कॉक इतने ही बड़े और मोटे होते हैं…, इससे तो मेरी पुसी बुरी तरह फट जाएगी…मुझे तो इसे देखकर डर सा लगने लगा है…

मेने उसके छोटे-छोटे निप्प्लो को अपनी उंगलियों के बीच लेकर सहलाते हुए कहा – पहले तो तुम अपनी भाषा सुधारो खुशी, हिन्दी में इसे लंड कहते हैं, और तुम्हारी इसको….

पता है… आपको बताने की ज़रूरत नही है, खुशी ने मेरी बात को बीच में काटकर हँसते हुए कहा, वो सब बाद में बोलना सीख लूँगी, पहले आप मेरी बात का जबाब दो,

मेने कहा – सबके एक जैसे तो नही होते, कुच्छ बड़े-छोटे भी होते हैं…

वो – तो क्या इससे भी बड़े होते हैं…?

मे झिड़कते हुए बोला – अरे यार तुम सवाल बहुत करती हो, हो सकते हैं लेकिन मेने किसी का नही देखा… चलो अब बातें बंद करके इसे मूह लो,
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06-02-2019, 01:23 PM,
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
खुशी ने झेंपकर मेरे लंड को चूम लिया, और फिर उसके सुपाडे को पूरा खोलकर उसे चाटने लगी…,

उसपर हल्की सी प्री-कम की चिपकी थी, तो वो उसका स्वाद लेकर बोली – आपका भी टेस्टी है, ये कहकर उसने उसे अपने मूह में गडप्प कर लिया……!

खुशी पूरे इंटेरेस्ट के साथ मेरा लंड चूस रही थी, वो एक दम स्टील रोड की तरह शख्त हो चुका था, जो अब किसी भी चूत की सील फाड़ने में सक्षम था,

मेने अपना हाथ खुशी के सर पर रख कर उसने रुकने का इशारा किया, वो लंड मूह लिए हुए ही मेरी तरफ देखने लगी…

मेने कहा – बस अब बहुत हो गया, इसका रस मूह से ही पीना है या फिर…अपनी बात अधूरी छोड़ कर मे हँसने लगा…

वो मेरी बात समझकर रुक गयी, तो मेने उसे अपने बगल में लिटा लिया और उसके होठों को चूमकर उसके पूरे बदन पर हाथ फिराया,… वो मचल उठी…

फिर मे उसकी जांघों के बीच आकर अपने घुटने टेक कर बैठ गया, उसकी मखमली जांघों को सहलाकर उन्हें चूमने, चाटने लगा…

अपने हाथ को अपने थूक से गीला करके उसकी चूत के आस- पास सहलाया…

खुशी के अंदर बहुत चुदास भरी हुई थी, मेरा हाथ लगते ही उसकी चूत फिरसे चुहुने लगी.., मेने एक बार उसके रस को जीभ से चाटा…खुशी की सिसकी निकल गयी…!

अब वो वक़्त आ गया था, जिसके इंतेज़ार में खुशी ना जाने कितने दिनो से आस लगाए हुए थी, सो अपने लौडे को हाथ में लेकेर उसकी मुनियाँ के होठों पर रखकर उपर नीचे फिराया…

गरम लंड के एहसास को अपनी चूत की बंद फांकों के उपर महसूस करके, खुशी ने एक झूर-झूरी सी ली…

फिर मेने उसके बंद होठों को फैलाकर अपने सुपाडे लायक जगह बनाई, और अपना टमाटर जैसा गरम सुपाडा उस जगह में फिट कर दिया….

एक बार फिर उसके मांसल बदन को सहला कर उसकी चुचियों को मसल्ते हुए कहा – रेडी बेबी…?

उसने बंद आँखों से हुउंम्म…करके अपनी रज़ामंदी दी, और मेने एक हल्का सा धक्का उसकी कोरी चूत में लगा दिया…!

खुशी ने अपने होठ कसकर बंद कर रखे थे, फिर भी उसके मूह से उउउन्नग्ज्ग…जैसी आवाज़ निकल ही गयी, और मेरा सुपाडा उसकी चूत की पतली सी झिल्ली से जा टकराया…

मेने खुशी के होठ चूमकर उसके कान में फुफुसा कर कहा – यही वो दीवार है खुशी जो अब धराशाहि होनी है, और इसके उस पर तुम्हारे लिए असीम आनंद का खजाना छुपा है…

इसलिए थोड़ा सा सहन करना मेरी गुड़िया, उसने बंद आखों से ही सर हिलाकर हामी भर दी…

मेने अपना लंड थोड़ा सा बाहर को किया, और दूसरे ही पल एक करारा सा धक्का उसकी चूत में मार दिया….

छ्हाअर्र्र्र्र्र…की आवाज़ के साथ ही खुशी की सील टूट गयी, और मेरा आधे से भी ज़्यादा लंड उसकी कोरी गदर चूत में पेवस्त हो गया….

खुशी दर्द के मारे तड़प उठी, लाख कोशिश के बाद भी उसकी चीख निकल गयी...

म्म्म्माआआआआअ……मर गाइिईईईईईई…., दर्द से उसकी आँखें छल-छला गयी.

मेने उसके बालों में सहलकर कहा – बस हो गया मेरी बेहन, ये कहकर मे उसके होठों को चूसने लगा…

एक हाथ से उसके अनारों को सहलाता रहा..., कुच्छ देर में उसका दर्द कम हो गया, मेने फिर एक फाइनल कोशिश की और अपने लंड को जड़ तक उसकी नयी चूत में डालकर कर ठहर गया…

खुशी दर्द से कराह रही थी, मेने फिर से उसके निपल्स को चाटने मसल्ने से उसके दर्द को कम करने की कोशिश की…

कुच्छ देर बाद वो शांत हुई, तो मेने धीरे-धीरे अपनी कोशिश शुरू कर दी…और हल्के हल्के धक्के लगाकर उसे चोदने लगा…!

थोड़े से धक्के तेज करते ही खुशी दर्द से दोहरी हो गयी, धनुष की तरह पीठ मोड़ कर उसने अपना सिर बिस्तर से टिका लिया…,



धक्कों के कारण उसका मूह खुल गया, वो बुरी तरह कराहने लगी…

लेकिन मेने अब अपनी स्पीड कम नही की, कुच्छ देर के बाद उसकी चूत रस छोड़ने लगी, अब उसे भी मज़ा आने लगा था,

वो अब दर्द को दरकिनार करके, मज़े से मेरा लंड लेने लगी, उसकी दर्द भरी कराहें सिसकियों में बदल चुकी थी…!

एक बार खुशी को उपर से चोदने के बाद, मेने उसे अपने उपर बिठा लिया…, अब वो मेरे लंड के उपर बैठकर अपने मनमाने तरीक़े से चुदने लगी….!



मे खुशी को एक घंटे तक चोदता रहा, इस बीच वो अनगिनत बार झड़ी, मे भी दो बार अपना वीर्य उसकी चूत में भर चुका था,

आख़िर में घोड़ी बनाकर उसकी मोटी-मोटी गान्ड को दबाकर चोदने में मुझे सबसे ज़्यादा मज़ा आया, और इसी पोज़िशन के बाद हमने अपनी चुदाई ख़तम की…

खुशी के चेहरे पर संपूर्ण तृप्ति के भाव थे, वो मेरे बदन से बहुत देर तक चिपकी रही…!

मेने उसकी गान्ड मसल कर पुछा – अब तो खुश हो तुम, करली अपने मन की…!

थॅंक यू भैया, आपने मेरी इक्च्छा पूरी कर दी, ये कहकर खुशी ने मेरे लंड को चूम लिया…

फ्रेश होकर खुशी किचन से नौकरानी की मदद से अपन दोनो के लिए खाना वहीं बेडरूम में ही ले आई,

मीठी-मीठी छेड़-छाड़ और हसी-ठिठोली के बीच हम दोनो ने साथ मिलकर खाना खाया, कुछ देर रुक कर मे उसे एक किस करके उसके रूम से बाहर आ गया…
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06-02-2019, 01:23 PM,
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
मे अभी हॉल पार करके निकल ही रहा था कि तभी सेठानी की गाड़ी पोर्च में आकर रुकी, संकेत भी साथ में ही था…!
गाड़ी से उतरकर उनका अंदर आना हुआ और मेरा बाहर निकलना, मुझे देखते ही वो चहकते हुए बोली – अरे वकील बेटा ! चल दिए…!

मे – हां आंटी…! आप आ गई ? कैसी रही पार्टी…?

वो कामुक अंदाज में स्माइल करते हुए बोली – हमारी पार्टी तो ठीक ही रही, तुम बताओ, तुम्हारा काम पूरा हुआ कि नही…?

मेने चोन्क्ते हुए कहा – मेरा काम..? मेरा कॉन्सा काम था जो पूरा करना था,,?

वो बात को संभालते हुए बोली – अरे वही, जिसके लिए खुशी ने तुम्हें बुलाया था, कुछ गाइडेन्स चाहिए था ना उसे, अपनी फर्दर स्टडी के लिए…!

मे समझ गया, कि शायद खुशी ने इनको बहाना बता कर मुझे बुलाने के लिए कहा होगा सो तुरंत बोला – हां जी, हां जी ! हो गया…!

वो – खाना खाया या ऐसे ही जा रहे हो…

मे – हां जी, खाना भी हो गया…जी, अब में चलता हूँ, गुड नाइट..

वो नशीले अंदाज में बोली – ओके, गुड नाइट, टेक केर, आते रहा करो…!

मेरे वहाँ से निकलते ही संकेत अपनी मम्मी से बोला – मम्मी आपको नही लगता कि आप और खुशी दोनो वकील भैया को कुछ ज़्यादा ही लिफ्ट देने लगे हो…

उन्होने चोंक कर संकेत की तरफ देखा, और बोली – तुम कहना क्या चाहते हो..?

संकेत – मुझे लगता है, कि खुशी इनको कुछ ज़्यादा ही तबज्ज़ो देने लगी है, और आप भी उसे एनकरेज करती हो…

सेठानी – चलो अंदर चलो, बैठकर बात करते हैं, फिर वो उसे हॉल में ले आई, और सोफे पर बैठ कर दोनो बातें करने लगे…

सेठानी – संकेत ! तुम कहीं अपनी छोटी बेहन के बारे में कुछ ग़लत सलत तो नही सोच रहे…?

संकेत ने अपनी नज़र झुका ली लेकिन कुछ कहा नही, सेठानी समझ गयी कि जो उन्होने सवाल किया है, वही उसके मन में है…

देखो बेटा ! तुम भले ही उसके सगे भाई हो, लेकिन आज तक तुमने ऐसा कोई काम नही किया जिससे खुशी को तुम्हारे उपर भरोसा हुआ हो,

वहीं एक नेक दिल होने की वजह से उसने उसके साथ वो किया जो शायद ही कोई कर पाए, अपनी जान जोखिम में डालकर एक पराई लड़की के मान सम्मान की रक्षा की…जो किसी भी ग़ैरतमंद लड़की या औरत के लिए सबसे उपर होता है…

अब ऐसे में खुशी का अंकुश पर विश्वास करना क्या ग़लत है…? और आज तो मेने ही खुशी को उसे यहाँ बुलाने के लिए कहा था, ताकि वो अकेलापन महसूस ना करे..

वैसे भी आजकल जमाना बहुत खराब है, नौकरों पर भरोसा करके एक जवान लड़की को अकेला नही छोड़ा जा सकता था…

संकेत – सॉरी मम्मी, मेरा ये मतलब नही था, मे तो बस ऐसे ही बोल दिया, कि एक बाहर के आदमी पर ज़रूरत से ज़्यादा भरोसा करना ठीक नही…

सेठानी – कोई बात नही, जेलौस फीलिंग होती है इस उमर में कोई नयी बात नही है, वैसे उसी बाहर के आदमी के बहुत अहसान हैं इस घर पर,

अब जाओ जाकर सो जाओ, मे भी थक गयी हूँ…!

जब संकेत वहाँ से उठकर चला गया, तो सेठानी मन ही मन मुस्करा उठी, उन्हें अपनी चाल कामयाब होती नज़र आ रही थी……!
शहर का 5 सितारा होटेल रिवेरो, रात के अंधेरे में कुछ ज़्यादा ही जगमगाने लगता है, इसके अंदर की रंगिनियों की तो बात ही अलग है…

एक सामान्य आदमी के लिए तो इसके अंदर पहुचना एक सपने देखने जैसा ही है..…

होटेल रिवेरो का बेसमेंट, जो खुद किसी आलीशान महल से कम नही है, इसके विशाल हॉल में इस समय ऐसा जान पड़ता था मानो किसी राजा महाराजा का दरबार लगाने वाला हो…

एक विशालकाय मेज के पीछे एक बड़ी सी सुसज्जित कुर्सी जो इस समय खाली थी…, उस विशाल मेज के तीन तरफ शानदार कुर्सियों पर शहर की जानी मानी हस्तियाँ विराजमान थी…

उनमें से ही कुछ कुर्सियों पर उस्मान भाई, उसका बेटा असलम, बिल्डर योगराज, उसका बेटा गुंजन, कमिशनर का बेटा विकी और एमएलए का भतीजा सन्नी बैठे हुए थे…

पोलीस और नारकॉटिक डिपार्टमेंट के कुछ अफसरों के अलावा और भी बहुत से लोग थे… जिनका जिकर करना यहाँ ज़रूरी नही है…!

तभी हॉल का गेट खुला, और उस स्पेशल हॉल का दरवान एक नौजवान के साथ अंदर दाखिल हुआ…

सभी की नज़र उधर को मूड गयी…, वहाँ बैठे तमाम लोगों की नज़र उस नौजवान पर टिक जाती है, जो एक हॅटा-कट्टा, 6’2” के करीब लंबा, चौड़ा सीना, गोरे-चिट्टे चेहरे पर फ्रेंच कट दाढ़ी, नाक थोड़ी सी फूली हुई…

नीली आँखों वाले किसी हिन्दी फिल्म के हीरो जैसे इस युवक का व्यक्तित्व देख कर वहाँ बैठे सभी लोग जैसे उसमें खो से गये…

तभी असलम अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ, और तेज-2 कदमों से चलता हुआ उस नौजवान के पास पहुँचा और उसके गले से लगकर बोला….

वेलकम दोस्त, तुम्हारा हमारे ग्रूप में स्वागत है… सब मूह बाए उन दोनो की तरफ देखने लगे…

असलम ने वहाँ बैठे सब लोगों को संबोधित करके कहा – यही है वो शख्स जिसने कल मौके पर आकर हमारी जान बचाई थी… नाम है जोसेफ.

फिर उसने वहाँ बैठे सब लोगों से उसका परिचय करवाया… और उसे अपने पास वाली चेयर पर बिठा लिया…

जोसेफ उस चेयर, जो कि सबसे अलग टेबल के पीछे किसी राज सिंघासन की तरह सजी हुई थी को खाली देख कर चोंका, और उसने असलम से फुसफुसाकर उसके बारे में पुछा…

इससे पहले कि वो उसको कोई जबाब देता, कि उसी चेयर के ठीक पीछे वाली दीवार एक हल्की सी गड़गड़ाहट के साथ एक तरफ को सर्की, और उसमें से एक स्याह काले लबादे में लिपटी हुई, एक मोह्तर्मा प्रगट हुई, जिसकी केवल आँखें ही चमक रही थी…

उसे देख कर सब लोग एक साथ खड़े हो गये… वो दो कदम आगे बढ़कर उस सिंघासन नुमा कुर्सी पर बैठ गयी…

स्याह लबादे के अंदर से उस औरत की बस दो आँखें ही नुमाया हो रही थीं, जो वहाँ बैठे सभी लोगों का निरीक्षण करने लगी…

घूमते – 2 जब उसकी नज़र जोसेफ नाम के उस युवक पर पड़ी, तो वो उसे देखती ही रह गयी… फिर उसने अपनी खनकती आवाज़ में पास ही बैठे असलम से उसके बारे में पुछा…

जब उसने सब कुछ बता दिया, तो वो औरत बोली – ये तुमने अच्छा किया असलम, हमारे संघटन को ऐसे ही लोगों की ज़रूरत है…

इसे हमारे काम और संघटन के उसूलों के बारे में सब समझा देना, फिर वो सब लोग कल हुई घटना का विश्लेषण करने लगे कि ऐसा हुआ तो आख़िर कैसे…

इतनी पक्की खबर पोलीस के कानों तक कैसे पहुँची…ये सभी इसी तरह की चर्चा में लगे थे,
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06-02-2019, 01:24 PM,
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
लेकिन जोसेफ का ध्यान उन सब की बातों से हटकर उस औरत की आँखों का एक्स्रे करने और उसके बोलने के तरीक़े की तरफ ही था…

उसके दिमाग़ में उस औरत की धुंधली सी छवि बनने बिगड़ने लगी…और एक अंजाना सा सक़ पैदा होने लगा…पता नही क्यों उसे उसकी वो आँखें जानी पहचानी सी लग रही थीं…

जो शक़ अबतक उसके दिमाग़ में पनप रहा था, वो सही साबित होता दिखाई दे रहा था…

कुछ देर में वो मीटिंग ख़तम हो गयी, जिससे उसे कोई लेना देना नही था… असलम को दूसरे दिन मिलने का वादा करके वो वहाँ विदा हुआ.

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अगले पूरे दिन मैं अपने एक केस में उलझा हुआ था, कि तभी मेरा मोबाइल बजने लगा, स्क्रीन पर जो नंबर फ्लश हो रहा था, उसे देख कर मेरे चेहरे पर मुस्कान आगयि…

मेने कॉल पिक की, दूसरी तरफ से प्राची (रेखा जिसका रेप हुआ था की छोटी बेहन) की सुरीली आवाज़ सुनाई दी, मेरे हेलो बोलते ही वो बोली…

आप कहाँ हो अभी, मेने उसे बताया कि मे अपने ऑफीस में काम कर रहा हूँ…

वो बोली – मुझे आपसे मिलना था, आपके ऑफीस आ जाउ…?

मेने उसे शाम को घर आने का बोलकर कॉल कट कर दी…

उसी शाम 4 बजे असलम अपने नये दोस्त को लेकर अपने मेन अड्डे पर पहुँचा, जहाँ उसके धंधे का ज़्यादातर माल स्टोर होता था, और यहीं से सप्लाइ होता था…

ये शहर के बाहर इंडस्ट्रियल इलाक़े में एक बड़ा सा गॉडाउन जैसा था, जहाँ पर बहुत सारे आदमी सख़्त पहरे पर थे…

असलम ने बताया, कि ये हमारा मेन गॉडाउन है, यही से सब जगह ड्रग और हथियार सप्लाइ होते हैं…

बाहर से देखने पर ये एक बड़ी फॅक्टरी दिखाई देती है… लेकिन अंदर सब दो नंबर का माल भरा पड़ा था…

उसके बाद उसने वो सारी जगह दिखाई, जहाँ पर वो सब ड्रग और हथियार रखे हुए थे, जिन्हें इस शहर ही नही देश विदेश के लिए भी सप्लाइ किया जाता था…

ये फॅक्टरी किसी जगन सेठ के नाम से रिजिस्टर थी, जो मुंबई का बहुत बड़ा कारोबारी था,

दिखावे के लिए यहाँ बिजली के केबल बनाए जाते थे… लेकिन सामने असल तो कुछ और ही थी…

वहाँ से निकल कर शहर में एक दो डीलर्स से मुलाकात करवाई…., अपने धंधे के कामों के बारे में बातें बताता रहा…

फिर एक बीअर बार में जाकर दोनो ने बीअर पी, बीअर पीते हुए, असलम ने उसके अतीत के बारे में पुछ ताछ भी की…

इस बीच असलम ने रूबी के बारे में पुछा कि वो क्यों नही आई…,

जोसेफ ने कहा, कि वो सिर्फ़ काम के वक़्त ही मेरे साथ होती है, वाकी समय वो होटेल के कमरे से बाहर नही आती जब तक कोई काम उसे ना करना हो..……………!

देर रात जब मे अपने फ्लॅट में पहुँचा , घर खुला देख कर ही मे समझ गया कि प्राची आ चुकी है, क्योकि चाबियों का एक सेट उसके पास भी होता था…

जब मे घर के अंदर पहुचा तो वो सोफे पर बैठी टीवी देखते हुए मेरा इंतेज़ार कर रही थी…

वो शिकायत करते हुए बोली – कितनी देर कर दी, कब्से मे यहाँ आई हूँ.. चलिए अब जल्दी से फ्रेश हो जाइए, खाना ठंडा हो रहा है…

मे – खाना..? तुमने बनाया है…?

वो – हां ! मे तो यहाँ 7 बजे ही आगयि थी…

फिर हम दोनो ने साथ बैठ कर खाना खाया, और फिर सोफे पर बैठ कर टीवी देखते हुए बातें करने लगे…
मेने प्राची से कहा - ये कैसा भूत सवार है तुम्हारे सिर पर…?

अपनी पढ़ाई लिखाई छोड़ कर, पिच्छले 6-7 महीनों से फाइटिंग, ड्राइविंग, शूटिंग ये सब सीखने में लगी हो..

जिस उमर में हाथों में कलम और कंप्यूटर होने चाहिए उन हाथों में गन लेकर घूमती हो…

उसने मेरा हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा – मेने अपनी बेहन की चिता पर कसम खाई थी, कि जब तक उन दरिंदों का अंत होते हुए अपनी आखों से नही देख लूँगी, चैन से नही बैठूँगी…

कलम-कंप्यूटर तो बाद में भी आ सकते है अंकुश भैया, लेकिन मेरी बेहन अब कभी वापस लौट कर नही आएगी…, ये कहते हुए उसकी आँखें नम हो गयी..

मे – तुम्हारे घर वाले…. उनका क्या रुख़ है तुम्हारे इस फ़ैसले पर…?

वो – मम्मी मेरे साथ हैं, पापा से हम कोई भी वास्ता ही नही रखते… और ना ही अब उनसे कोई पैसे की मदद ले रहे हैं, एक तरह से वो हमसे अलग थलग ही समझो…

उन्होने लाख कोशिश की हमें मनाने की लेकिन हम में से कोई उनके साथ नही है, यहाँ तक कि मेरा छोटा भाई भी नही…

मे – लेकिन उन्हें पता तो होगा तुम्हारे मंसूबों के बारे में…

वो – पता भी हो तो भी मुझे अब कोई फरक नही पड़ता…,

मे – लेकिन मुझे फ़र्क पड़ता है प्राची, तुम मेरे साथ मिलकर अपनी बेहन के क़ातिलों से रिवेंज ले रही हो ये बात अगर उन्हें पता है तो जाहिर सी बात है वो इसे कहीं और भी लीक कर सकते हैं,

जो आदमी पैसों के लिए अपनी बेटी को मरते हुए देख सकता है, उसके लिए ये बातें हमारे दुश्मनो तक पहुँचाना क्या बड़ी बात है…

फिर जिस आसानी से हम अपने काम को अंजाम देना चाहते हैं, उसमें अड़चनें पैदा हो सकती हैं…

इसलिए पता करो, कि उन्हें इन बातों का पता तो नही है…

प्राची – लगता तो नही कि उन्हें कुछ भी पता हो, क्योंकि हम में से उनसे कोई बात भी नही करता, फिर भी में पता करूँगी, और ये ख़याल रखूँगी कि ये राज किसी के भी सामने उजागर ना हो…!

मे – लेकिन मेने तुमसे वादा किया है, कि मे उन हराम्जदो को उनके अंजाम तक पहुँचा कर ही रहूँगा… फिर तुम्हें अपनी जान जोखिम में डालने की क्या ज़रूरत है….?

प्राची अपना सर मेरे कंधे से टिकाते हुए बोली – जब आप बेगाने होकर मेरी बेहन को न्याय दिलाना चाहते हो, उसकी आत्मा को शांति दिलाना चाहते हो,

तो क्या थोड़ा सा ख़तरा मे नही ले सकती… एक से भले दो…और सच कहूँ तो हम तीनों ही आपके बहुत अभारी हैं..

मम्मी तो मानती हैं कि आप आम इंसान नही हो, कोई फरिस्ता हो, भला कॉन किसी दूसरे के लिए इतना सोचता है…

मेने उसकी पीठ पर हाथ से सहलाते हुए कहा – मे कोई फरिस्ता-वरिस्ता नही हूँ, बस मेरे जमीर ने कहा कि रेखा के हत्यारों को उनके किए की सज़ा मिलनी ही चाहिए, क़ानून के तहत नही दिला पाया, तो गैर क़ानूनी ही सही…

प्राची मेरे बदन से सटते हुए बोली – ये सोच किसी आम इंसान की तो नही हो सकती…आप सच में कोई फरिस्ता ही हो.. ये कह कर उसने मेरे गाल पर किस कर दिया…

मेने उसकी तरफ देखा, तो वो सर झुका कर बोली – सॉरी भैया…

मे – किस बात के लिए…?

वो – वो मे अपनी भावनाओं को काबू में नही कर पाई, और आपको किस कर लिया…आपको बुरा तो नही लगा..?

मे – तुमसे किसने कहा कि मुझे बुरा लगा…? मे तो तुम्हारे मासूम चेहरे को देख रहा था…तुम मेरे से छोटी हो, और तुम्हें पूरा हक़ है, अपना प्यार जताने का..

वो मेरे गले से लिपट गयी, और सुबक्ते हुए बोली – आप सच में बहुत अच्छे हो…
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06-02-2019, 01:24 PM,
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
मेने भी उसकी पीठ सहलाते हुए उसके माथे पर किस कर दिया…और बोला – अब तुम घर जाओगी, या यहीं सो जाओगी…

वो – अब तो बहुत रात हो गयी, अब सुवह ही चली जाउन्गि अगर आपको कोई प्राब्लम ना हो तो…

मेने उसके गाल पर हल्की सी चपत लगाते हुए कहा – बहुत मारूँगा तुझे इस तरह की बात की तो, भला मुझे तुझसे क्या प्राब्लम होने लगी…जहाँ तेरी मर्ज़ी हो वहाँ सो जा..

वो – मे तो आपके साथ ही सोउंगी… सच में उस दिन होटेल में बड़ी अच्छी नींद आई थी आपके साथ…

मे उसके चेहरे की तरफ देखने लगा, जहाँ मुझे सिर्फ़ मासूमियत के सिवा और कुछ नज़र नही आया…………………….!

रात का ना जाने कॉन्सा पहर था, किसी के मुलायम हाथों का स्पर्श अपने बदन पर पाकर मेरी नींद टूट गयी….

देखा तो मेरी टीशर्ट उपर को थी, लोवर भी नीचे खिसका हुआ था, और प्राची अपने कोमल हाथों से मेरे बदन को उपर से नीचे तक सहला रही थी…

मेरे बदन में झूर झूरी सी फैल गयी, और मेरे फ्रेंची में तंबू सा बनने लगा…

प्राची मेरे कंधे पर अपना सर टिकाए…नीचे को मूह करके मेरे बदन से खेल रही थी, अंडरवेर में बने तंबू को देख कर उसका हाथ अनायास ही मेरे लंड पर पहुँच गया, और वो उसे सहलाने लगी…

मेने कुछ देर चुप रहना ही ठीक समझा, मे देखना चाहता था, कि प्राची के आख़िर मन में क्या है… क्या वो मेरे साथ सेक्स करना चाहती है या, बस ऐसे ही पुरुष स्पर्श को फील करना चाहती है…

जब कुछ देर उसने मेरे लंड को सहलाया तो वो और ज़्यादा सख़्त हो गया, जिसे प्राची ने अपने हाथ में लेकर फील किया…

ज़िग्यासा वश उसने मेरे फ्रेंची को जैसे ही नीचे किया, मेरा नाग फन फैलाए सीधा खड़ा होकर उसको घूर्ने लगा…

मेने साफ-2 फील किया, कि मेरे फुल खड़े लंड को देख कर प्राची ने अपने बदन में फूरफ़ुरी सी ली…और वो उसे अपनी मुट्ठी में कसकर दबाने लगी…

उसने उसके सुपाडे को खोल कर देखा… लाल टमाटर की तरह चमकता सुपाडा देख कर वो मंत्रमुग्ध सी अपना सर नीचे को ले जाने लगी…

जैसे – 2 उसका सर नीचे को बढ़ रहा था, मेरी साँसें भी उसी गति से बढ़ने लगी…वो निरंतर उसे खोल-बंद कर रही थी…

आख़िर वो अपने मूह को उस तक ले ही गयी…, अब उसकी गरम – 2 साँसें मेरे लंड को छुने लगी थी…

उसकी गरम साँसों को महसूस करते ही, मेरा लंड झटके खाने लगा…

ना जाने क्या सोच कर उसने मेरे सुपाडे पर अपने तपते होंठ रख दिए और उसे चूम लिया…

ना चाहते हुए भी मेरे मूह से सस्सिईईईईईईईईईईईईईईईईईई……..सिसकी निकल गयी…

प्राची ने झट से मेरा लंड छोड़ दिया, और मेरी तरफ पलटी…

लेकिन मेरी आँखें अभी भी बंद थी… उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था, खुद उसे अपने दिल की धड़कनें साफ-साफ सुनाई दे रहीं थी….!

मेरी आँखें बंद देख कर उसने राहत की साँस ली, और कुछ देर अपनी साँसों को नियंत्रित करती रही….!

उसने कुछ देर और इंतेज़ार किया, लेकिन मेरी तरफ से कोई हलचल ना देख उसने फिर से उसे मुट्ठी में दबा लिया और उलट-पलट कर देखने लगी…

कुछ देर यूँही देखने के बाद उसने फिर से उसे चूमा और सुपाडे पर अपनी जीभ से चाट लिया…

मेने इस बार कस कर अपने होंठ भींच लिए, अब वो अपने होठों को गोल घेरे में करते हुए उसे अपने मूह में भरने लगी… एक दो बार धीरे-2 से अंदर बाहर किया…

लेकिन उसका भी अब कंट्रोल हटता जा रहा था, सो वो उसे जल्दी-2 अंदर-बाहर करने लगी… लाख कंट्रोल के बाद भी मेरा हाथ स्वतः ही उसके सर पर पहुँच गया..

और मे उसके सर को अपने लंड पर दबाने लगा…

प्राची मेरे लंड को मूह से बाहर निकालना चाहती थी, लेकिन मेरे हाथ के दबाब के कारण वो ऐसा नही कर सकी, तो उसने तिर्छि नज़र से मेरी तरफ देखा…

मे भी उसको ही देख रहा था सो बोला – अब तेरे जो मन में है वो कर प्राची.. शरमाने का अब कोई फ़ायदा नही है…

उसके चेहरे पर मुस्कराहट खेल गयी और वो उसे पूरे मन से चूसने लगी…

मे भी उसके सर पर हाथ रख कर उसको इशारे से गति देने लगा… जब चुसते – 2 उसका मूह दुखने लगा… तो उसने उसे बाहर निकाला और अपने हाथ से मसल्ने लगी…

मेने उसके कंधे पकड़ कर अपने उपर खींच लिया… और उसके पतले – 2 रसीले होठों को चूसने लगा…

कुछ देर उसके होंठ चूसने के बाद मेने उसको पुछा – क्या इरादा है प्राची…?

वो मदहोशी भरी आवाज़ में बोली – अब मत रुकिये भैया… मे इस आनंद की सीमा को पाना चाहती हूँ…प्लीज़ दे दीजिए मुझे…वो सुख…

मेने कहा – सोच ले ! बड़ी कठिन राह है, इस सुख की… झेल पाएगी…?

वो – मेरी चिंता मत करिए आप, बस मे आज वो सुख पाना चाहती हूँ…

मे - जैसी तेरी मर्ज़ी, तकलीफ़ तुझे झेलनी है, मेरा क्या………….!


मेने प्राची के सारे कपड़े निकाल दिए…. उसकी कंचन सी काया देख कर मे बौरा गया…

मेने उसे पलग पर लिटा दिया, और खुद के कपड़े निकाल कर पलंग के नीचे फेंक दिए, उसके बगल में बैठ कर एक बार उसके पूरे बदन पर हाथ फेरा…

जैसे जैसे मेरा हाथ उसके बदन पर घूम रहा था, उसका बदन किसी बिन पानी की मछली की तरह फडफडाने लगता…

उसके पेट से होते हुए उसकी कठोर 32” की गोल-गोल गेंद जैसी चुचियों को सहलाता हुआ, उसकी गर्दन, और फिर गालों से होते हुए…उसके पतले होठों पर अपनी एक उंगली उल्टी करके फिराई…

वो अपनी आँखें मुन्दे शरीर में होरहे सेन्सेशन में डूबी हुई थी…
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06-02-2019, 01:24 PM,
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
अब मे उसके टाँगों के बीच आकर घुटने टेक कर बैठ गया, और उसकी जांघों को अपनी जाँघो के उपर रख कर उसकी चुचियों को अपने हाथों में कस कर मसल दिया…

आअहह…………आराम…. सीईए……सीईईईईई….दरद होता है….

फिर मेने उसकी बगलों में हाथ डालकर उसको किसी बच्ची की तरह उठा कर अपनी गोद में बिठा लिया….

मेरा लंड इस समय ठीक 60 डिग्री पर था सो उसके गोद में बैठते ही उसकी चूत के होठों से सॅट गया…

उसकी पीठ को सहलाते हुए मेने उसके होठ चूसना शुरू कर दिया… प्राची तो मानो किसी प्लास्टिक की गुड़िया की तरह मेरे इशारों पर चल रही थी…

होठों को चूसने के बाद उसकी गर्दन को चूमते हुए उसकी चुचियों को चूमने चाटने लगा…

उसके कड़क हो चुके अंगूर के दानों को जीभ से चूसने लगा… प्राची मस्ती भरी सिसकियाँ लिए जारही थी…

उसके लिए तो आज ना जाने जिंदगी का ये कॉन्सा अनौखा सुख था, जिसके ना मिलने पर उसकी जान ही ना निकल जाए…

सुख सागर में गोते लगाते हुए वो किसी और ही अनूठी दुनिया में पहुँच चुकी थी.. फिर मेने धीरे से उसे पलग पर छोड़ दिया…और उसकी टाँगों को मोड़ कर उनके बीच में बैठ गया…

एक बार अपनी हथेली से उसकी रसीली कोरी करारी चूत को रगड़ा, और फिर प्यार से हाथ रख कर सहलाया…

जब मेने अपनी जीभ से उसकी मुनिया को चाट कर गीला किया, तो वो बुरी तरह से सिसकते हुए बोली - आअहह...सस्स्सिईइ...भैयाअ..कुकच..कारूव...…

मेने मुस्कराते हुए प्राची से पुछा – तुम तैयार हो ना… उसने हामी भर दी तो मेने अपने लंड को सहला कर, उसकी सांकरी सी सुरंग के छेद पर रखा और हल्के से दबा दिया…

वो एकदम सिहर गयी… मेने उसकी कड़क चुचियों को सहलाकर एक तगड़ा सा धक्का मार दिया….

मेरा लंड उसकी झिल्ली को तोड़ता हुआ… आधे से ज़्यादा उसकी चूत को चौड़ाते हुए अंदर फिट हो गया…

उसके कंठ से दिल दहलाने वाली चीख निकल गयी…भािईय्य्ाआअ…आआ……… मररर…गाइिईईईईईईईईईईईई…….माआअ…..

मेने प्यार से उसके बदन को सहलाया…होठों को चूमा…और कुछ देर ऐसे सी पड़ा रहा… फिर धीरे-2 कोशिश करके लंड को अंदर बाहर किया…

जब उसकी टाइट चूत गीली होने लगी और लंड को अंदर बाहर होने में आसानी होने लगी… तो मेने अपने धक्कों में तेज़ी लाते हुए चुदाई शुरू कर दी…

प्राची अब अपनी जिंदगी की पहली चुदाई का मज़ा लेने लगी थी, उसे ऐसा महसूस हो रहा था मानो कोई कारुन का खजाना मिल गया हो… !

वो बढ़ चढ़ कर अपनी कमर को हवा में उठा-उठाकर मेरे धक्कों का जबाब दे रही थी, एक बार झड़ने के बाद भी उसने कोई प्रति रोध नही किया…

मेरे धक्के निरंतर जारी रहे, वो फिरसे गरम हो गयी, और मेरे होठों को चूस्ते हुए चुदाई का भरपूर आनंद उठाने लगी…!

आधे घंटे के बाद वो फिरसे छेड़ छाड़ करने लगी…मेने भी उसे निराश नही होने दिया… और एक बार फिरसे उसकी कोरी चुदि चूत की सर्विस करदी….......................


सुवह हम देर तक सोते रहे, तकरीबन 8 बजे मेरी नींद मोबाइल के बजने से खुली… रिंग मेरे सीक्रेट नंबर पर थी, देखा तो असलम लाइन पर था…

मेने अलसाए हुए कॉल अटेंड की… दूसरी तरफ से उसकी घबराई और गुस्से से मिश्रित आवाज़ जिसमें कंपकपि साफ सुनाई दे रही थी…

असलम – जोसेफ… कहाँ हो तुम..?

मे – अपने रूम में हूँ, सो रहा था, बोलो क्या बात है…?

वो – गजब हो गया यार ! रात हमारे मैं गॉडाउन पर पोलीस की रेड पड़ गयी… सारा माल जप्त हो गया, हमारे कुछ लोग मारे गये, कुछ पोलीस की गिरफ़्त में हैं…

मे हड़बड़ाने की आक्टिंग करते हुए बोला – क्या बात कर रहे हो भाई… ऐसा कैसे हो गया…? कल ही तो हम लोग वहाँ जाकर आए थे…

वो – वही तो, वही तो मे जानना चाहता हूँ… कि आख़िर ऐसा क्यों हुआ जो पहले कभी नही हुआ था…? वो भी कल हमारे वहाँ जाने के बाद…?

मे – तुम कहना क्या चाहते हो…? कहीं तुम मेरे उपर शक़ तो नही कर रहे…?

असलम – तो फिर ये हुआ कैसे…?

मेने कुछ देर सोचने की आक्टिंग की फिर कहा – मुझे कुछ – 2 अंदाज़ा है, कि ये कैसे हुआ है…?

मे शाम तक तुम्हें कन्फर्म करता हूँ.. कि ये किसने और क्यों किया होगा..?

वो – क्या..? तुम्हें पता है… बताओ मुझे ये किसकी हिमाकत है…?

मे – अभी मुझे सिर्फ़ शक़ है… मे जल्दी ही तुम्हें पूरा पता लगा कर देता हूँ..

वो – लेकिन तुम पता कैसे करोगे.. तुम तो इस शहर में नये हो…!

मे – याद है मेने क्या कहा था… हम बंटी और बबली हैं… जिस शहर में होते हैं उसका सारा इतिहास-भूगोल पता कर लेते हैं…

वो – ठीक है, जल्दी पता करके मुझे उस हराम्जादे का नाम बताओ…

मे – तुम चिंता मत करो, जैसे ही कन्फर्म होगा मे तुम्हें सामने से फोन करूँगा…यह कहकर मेने फोन कट कर दिया…

प्राची अभी भी नंगी पड़ी सो रही थी, जो मेरी फोन पर बातें सुन कर उठ बैठी, और इस समय मेरे लौडे से खेल रही थी…

फोन कट होते ही मेरे होठों पर किस करके बोली – लगता है, कुछ बड़ा धमाका हो गया है…

मेने उसकी चुचियों पर हाथ फेरते हुए कहा – हाँ…जंग शुरू हो चुकी है, और अब शिकार को आगे करके शेर का शिकार करने का वक़्त आ गया है…
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06-02-2019, 01:24 PM,
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
वो मेरे लौडे पर अपनी मखमली जाँघ रगड़ते हुए बोली – अब क्या करने वाले हैं आप..?

मे – देखती जाओ, जल्दी ही तुम्हें बड़ी खुशख़बरी मिलेगी…कह कर मेने उसे अपनी गोद में खींच लिया और उसकी चूत में उंगली डालकर हिलाने लगा…

प्राची सीसीयाने लगी और अपनी गान्ड से मेरे लंड को मसाज देने लगी...

मेने एक बार फिर उसे पलंग पर लिटाया, और सुवह – 2 में हुए एरेक्षन से कड़क लंड को उसकी नयी चुदि चूत में डाल दिया…

वो हाए-हाए करते हुए मस्ती में झूमती हुई चुदाई का मज़ा लेने लगी..

आधे घंटे की मस्त चुदाई के बाद मेने अपना वीर्य उसके मूह, चुचियों समेत उसके पूरे बदन पर छिड़क दिया.. जिसे उसने बड़े नशीले अंदाज से अपने शरीर पर क्यूपेड लिया…!

सुवह – 2 की चुदाई से बदन एकदम हल्का फूलका हो गया था, सो प्राची के होठों की एक मस्त किस लेकर मेने पलंग से नीचे छलान्ग लगाई और बाथरूम में घुस गया…

पीछे प्राची पलंग पर बैठी अपने शरीर पर हाथ फेरती हुई होठों पर मुस्कान लिए, मुझे जाते हुए देखती रही…..!
तैयार होकर मेने प्राची को अपने साथ लिया, उसे उसके घर ड्रॉप किया और मे कोतवाली की तरफ बढ़ गया…

वहाँ भैया से मुलाकात करके सब स्थिति अपडेट की, जो लोग रेड में पकड़े गये थे.. उनकी सेवा चालू ही थी, लेकिन सालों ने अभी तक ज़्यादा कुछ बका नही था…

कुछ तो ऐसे थे, जिन्हें अभी तक ये भी मालूम नही था, कि फॅक्टरी की आड़ में ये धंधा भी होता था वहाँ…

पोलीस ने ऐसे लोगों को छांट कर अलग रखा था, वाकी जो घाघ थे, और मंझे हुए खिलाड़ी थे उनकी धुलाई जारी रही…

फिर मेने अपने अगले स्टेप के बारे में भैया को जब बताया, वो आँखें चौड़ी करके बोले – वाउ ! प्लॅनिंग तो सॉलिड है यार,… लेकिन संभलकर मामला कहीं उल्टा ना पड़ जाए…

मेने कहा – आप बेफिक्र रहो, बस इसी तरह पोलीस की हेल्प देते रहना, जल्दी ही हम इन्हें नेस्तनाबूद करके इस शहर को अपराध मुक्त कर सकते हैं…

भैया – यार ! लेकिन ये कमिशनर भेन का लॉडा मुश्किलें खड़ी करता जा रहा है… आज भी बौराया हुआ उल्टी-सीधी बकवास कर रहा था…

मे – ये अब तक आपके द्वारा लिए गये दोनो आक्षन की रिपोर्ट आइजी/डीआइजी और होम सीक्रेटरी को भेज दो, अपने आप ठंडा हो जाएगा… मेरे ख्याल से तो ये आपको इम्मीडियेट बॅक-अप करके रखना चाहिए था…

वो – ये तूने बिल्कुल सही कहा, हां ये ठीक रहेगा, मे अभी रिपोर्ट भेजता हूँ, और हिंट भी कर दूँगा, कि लोकल प्रेशर है, केस को दबाने के लिए…अब देखता हूँ इस हरामी, साले कमिशनर को.

कुछ और इधर-उधर की बातें करके मे कोर्ट चला आया……………..!


शाम को 4 बजे असलम के मोबाइल पर उसे एक मेसेज के साथ एक वीडियो क्लिप का लिंक मिला… जब उसने उसे खोल कर देखा तो उसकी आँखें चौड़ी हो गयी…

गुस्से से उसका चेहरा तमतमा उठा…अपने जबड़ों को कसते हुए वो अपने आप से ही गुर्राया….तेरी ये मज़ाल भोसड़ी के… हमें ही ट्रॅप करना चाहता है…

अब देख मे तेरी कैसे माँ छोड़ता हूँ मदर्चोद…

इससे पहले कि असलम गुस्से में कोई कदम उठाता, या किसी को फोन करता, उसका मोबाइल बजने लगा…

उसने कॉल पिक करके कान से लगाया और बोला – हां भाई बोल…

दूसरी तरफ से क्या बातें हुई… वो उसके जबाब में बस हां, हूँ, ठीक है… ऐसा ही करेंगे जैसे शब्द बोलता रहा…फिर कुछ देर के बाद कॉल एंड हो गयी..

उसने फिर किसी को एक कॉल की, उधर से कॉल कनेक्ट होने के बाद असलम ने उसको बोला…
हां भाई, मुझे तुझसे अर्जेंट काम है, आज शाम को 9 बजे **** रोड पर जो बंद फॅक्टरी पड़ी है, उसमें अजाना…

उधर से कुछ बोला गया… उसके जबाब में असलम ने कहा – वो मे अभी सीक्रेट रखना चाहता हूँ, मुझे लगता है, हमारे खिलाफ कोई बहुत बड़ी साजिश हो रही है…

तू समझ रहा है ना भाई… तेरे अलावा मे किसी पर फिलहाल भरोसा नही कर सकता..

उधर से -

असलम – ओके मिलते हैं फिर, ठीक 9 बजे , बाइ…

फिर उस बंदे को फोन लगाया जहाँ से पहले उसे फोन आया था, और उसको दूसरे के साथ हुई बात-चीत का पूरा व्योरा दिया…

उधर से उसे कुछ हिदायत भी दी गयी… जिसे वो गौर से सुनता और समझता रहा..

फिर असलम ने उसे कहा – ठीक है मे अकेला ही मिलता हूँ उससे, ज़रूरत पड़े तो संभाल लेना…! ओके बाइ…
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06-02-2019, 01:25 PM,
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
उसी शाम 8:45 को, शहर से **** रोड पर स्थित एक बंद फॅक्टरी में दो इंसान एक अंधेरे पोर्षन में खड़े किसी का इंतेज़ार कर रहे थे…

अभी 9 बजने में 5 मिनिट शेष थे, कि उन्हें रोड से नीचे उतरती हुई एक फोर व्हीलर की हेडलाइट दिखाई दी…

धीरे – 2 वो हेडलाइट फॅक्टरी के कॉंपाउंड में आकर रुक गयी…

उसमें से असलम बाहर निकला, वो अकेला ही था, फिर उसने जोसेफ को फोन लगाया…और कन्फर्म किया कि वो आ चुका है या नही…

उसके कुछ मिनटों के बाद ही एक और गाड़ी वहाँ आकर रुकी, उसमें से जो बंदा बाहर आया, वो कोई और नही बिल्डर योगराज का बेटा गुंजन था…

वो दोनो, गाड़ियों के पास से चल कर थोड़ा और अंदर की तरफ आए, और फॅक्टरी के कॉंपाउंड में जाकर आमने सामने खड़े होकर बातें करने लगे…

गुंजन – हां असलम बोल, यहाँ अकेले में क्यों बुलाया है मुझे…?

असलम – पिछले दिनो हमारे उपर पोलीस के दो बड़े-2 अटॅक हुए उसके बारे में तेरे से बात करनी थी…!

गुंजन – ये बात तो तू सबके साथ बैठ कर भी कर सकता था, फिर यहाँ क्यों बुलाया…?

असलम – अब पता नही है ना कि हम में से कॉन गद्दार है ? बिना अंदर के किसी आदमी के पोलीस के पास अंदर की खबर पहुँची कैसे..?

गुंजन – तो इसमें मे क्या कह सकता हूँ, और कैसे उस गद्दार को ढूंड निकालें, तेरे पास कोई प्लान है..?

असलम – हां है ! प्लान ही नही गद्दार कॉन है, ये भी पता है…!

गुंजन – क्या…? तुझे पता है… कॉन है वो..? बता साले को अभी पकड़ कर उसकी खाल खींचते हैं..

असलम – वो गद्दार तू है गुंजन, हराम्जादे… पोलीस से मिलकर हमें ट्रॅप करना चाहता था, रंडी की औलाद…

गुंजन – ये क्या बकवास कर रहा है तू…? होश में तो है, मे भला क्यों ऐसा करूँगा..? और ये तू किस बिना पर कह रहा है…

असलम – ये देख भोसड़ी वाले! और उसने मोबाइल में एक वीडियो क्लिप ऑन करके स्क्रीन उसके सामने कर दी, जिसमें वो एसपी के सामने बैठा दिखाई दे रहा है,

जो बातें उस वीडियो में सुनाई दे रही थी, वो भी पहले अटॅक से रिलेटेड इन्फर्मेशन देती हुई लग रही थी…

क्लिप देख कर गुंजन हक्का –बक्का रह गया…हकलाते हुए बोला – ये..ये.. झूठ है, म..मेरे खिलाफ ये कोई बहुत बड़ी साजिश है, मेने ऐसा कभी नही किया..

असलम – अब भी झूठ बोल रहा है मदर्चोद… मे ही बेवकूफ़ हूँ जो तेरे से अभी तक बातें कर रहा हूँ, तुझे तो सीधे गोली से उड़ा देना चाहिए था…

इतना कह कर उसने अपनी रेवोल्वेर निकाल कर गुंजन पर तान दी…

वो गिडगिडाते हुए बोला – मे सच कह रहा हूँ असलम ऐसा मेने कुछ भी नही किया…, मेरा विश्वास कर भाई… व.वउूओ…

उसके गिडगिडाने का असलम पर कोई असर नही हुआ, और उसने अपने अंगूठे से रेवोल्वेर का लीवर ऑन कर दिया…

मरता क्या ना करता, फुर्ती दिखाते हुए गुंजन ने भी अपना रेवोल्वेर निकाल लिया, इससे पहले कि वो उसे अपने निशाने पर ले पाता, असलम की रेवोल्वेर से एक गोली चली और सीधी उसकी छाती को भेदती चली गयी..

गुंजन के चेहरे पर आश्चर्य के सेकड़ों भाव उभर आए, इससे पहले कि वो कुछ बोल पाता, धडाम से ज़मीन पर गिर पड़ा…

असलम ने उसके मुर्दा शरीर पर थूका और एक गंदी सी गाली बक कर अपनी रेवोल्वेर का रुख़ नीचे किया ही था, कि एक गोली और चली,

और वो सीधी असलम की आँखों के बीच आकर उसके भेजे के चिथड़े उड़ाती हुई निकल गयी…!

असलम को तो ये भी जानने का मौका नही मिला कि उसका असल दुश्मन कॉन है…?

तभी जोसेफ और रूबी अंधेरे से निकल कर उन दोनो की लाशों के पास आए, रूबी के चेहरे पर उन दोनो के प्रति जमाने भर की घृणा थी…

उसने उन दोनो के उपर थूका, और पैर की ठोकरें मारने लगी… जोसेफ ने उसे रोकने की कोशिश की.. तो वो रोती हुई उसके सीने से लिपट गयी…

फिर आसमान की तरफ देख कर बोली …

देखो दीदी, तुम्हारी मौत का आधा बदला ले लिया है हमने… जल्दी ही वो दोनो हराम्जादे भी तुम्हारे पास आने वाले हैं…

उसे शांत करके मेने अपना रेवोल्वेर गुंजन के हाथ में दे दिया, और उसका रेवोल्वेर लेकर हम दोनो वहाँ से निकल लिए…!

दूसरी सुवह किसी अंजान कॉल से पोलीस को पता चला कि पुरानी फॅक्टरी में दो लाशें पड़ी हैं, आनन फानन में मौके पर पोलीस ने जाकर हालत का जायज़ा लिया…

दोनो डेड बॉडीस को मौकाए वारदात की सारी ज़रूरी कार्यवाही के बाद पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दिया…

पोलीस ने ये निष्कर्ष निकाला, कि दोनो ने एक दूसरे को गोली मार कर एक दूसरे को मार डाला.. उनकी बॉडी और उनके पास से मिले सारी चीज़ों को कस्टडी में ले लिया गया…

झगड़े का मोटिव असलम के पास से मिले मोबाइल की क्लिप से क्लियर हो गया, जो साफ-2 बयान कर रही थी, कि उन दोनो का संबंध ड्रग डीलिंग से था,

फिर किसी कारण से गुंजन पोलीस से मिल गया, और उसने अपने ही गॅंग के खिलाफ पोलीस को इन्फर्मेशन दे दी…

ये बात किसी तरह असलम को पता चल गयी, और उसने उसे अकेले में बुला कर मारना चाहा, लेकिन इससे पहले कि वो उसे उड़ाता, दम तोड़ने से पहले गुंजन ने भी उसका भेजा उड़ा दिया…

इस बिना पर पोलीस ने योगराज और उस्मान को भी गिरफ्तार कर लिया, लेकिन उनके वकील ने ये साबित कर दिया, कि उन दोनो का अपने बेटों के इस मामले से कोई संबंध नही था…

बहरहाल तो वो दोनो छूट गये थे, लेकिन जातिय तौर पर दोनो में दुश्मनी ठन चुकी थी… और दोनो एक दूसरे के खून के प्यासे हो गये…

दोनो की ही अपनी-अपनी पॉवेर थी, एक के पास पैसे की तो दूसरा नामी गुंडा था ही, जिसके पास अभी भी अपना गॅंग बचा था…

इस सबके बावजूद दो और शख्स थे, जो इस बात को पचा नही पा रहे थे, उनके गले से नीचे ये बात उतर ही नही रही थी, कि ये सब आपसी ग़लतफहमी के कारण हुआ है या फिर कोई गहरी साजिश है…?

एमएलए और कमिशनर ने उस्मान और योगराज को समझाने की पूरी कोशिश की, लेकिन जवान बेटों की मौत ने उन दोनो के सोचने समझने की शक्ति ख़तम करदी, वो कुछ भी सुनने और समझने को राज़ी नही थे…

एक दिन उस्मान को मौका मिल ही गया, और उसके आदमियों ने योगराज को मौत की नींद सुला दिया….!

पिता और भाई की मौत के बाद उनकी सारी प्रॉपर्टी की मालिक एक तरह से श्वेता ही हो चुकी थी,

क्योंकि योगराज की मिल्कियत उसकी पत्नी के नाम हो गयी, जो कि संभालने की पोज़िशन में नही थी, इसलिए सारा काम श्वेता और उसका पति पुष्प्राज ही संभालने लगे…!
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