Desi Sex Kahani एक आहट "ज़िंदगी" की
08-05-2018, 12:27 PM,
#51
RE: Desi Sex Kahani एक आहट "ज़िंदगी" की
गतान्क से आगे..............


जैसे ही उसने अपना लंड हल्का सा मसला..उसे सबसे पहला चेहरा रितिका का याद आ गया..उसके

साथ बिताया हुआ आज का वो लम्हा याद आ गया...

बस यही सोचते हुए वो पलंग पे उठ बैठा.....


अंकित :- उफ़फ्फ़....चाहे जितनी भी हॉट लड़कियाँ आ जाए ज़िंदगी में..पर में शायद ही रितिका को भूल

पाउन्गा..मुझे फोन करना चाहिए उसे.....नही नही..इतनी रात नही..

पर...कर लेना चाहिए...क्या पता कुछ बात हो जाए..(वो अपने आप से बात करने लगा)


उधर


रितिका हॉल में बैठी थी..और अपने लॅपटॉप पे कुछ कर रही थी...रात के 12 बज रहे थे..लेकिन रितिका काम

मे लगी हुई थी...लेकिन हर 2 मिनट में वो रुक जाती कुछ सोचने लगती..और फिर से काम में लग जाती

शायद सुबह हुई घटना के बारे में ही सोच रही थी...अचानक उसके फोन पे रिंग बजी...


उसने नंबर देखा...


अंकित.....इतनी रात को......(रितिका बोलती है और फोन कट कर देती है)


1 मिनट बाद फिर से फोन आता है....वो फिर से कट कर देती है..


रितिका :- आइ कॅंट टेक युवर कॉल में जानती हूँ तुम क्या पुछोगे और मेरे पास उसका कोई जवाब नही है...


लेकिन फोन पे फोन बजने लगता है अंकित.....आख़िर कार रितिका फोन उठा ही लेती है..


रितिका :- अंकित इतनी रात में क्यूँ फोन कर रहे हो...


अंकित :- मेरा फोन क्यूँ कट कर रही थी आप..


रितिका :- इतनी रात को में कैसे बात करूँ..में सो रही थी..


अंकित :- झूठ आप सो नही रही थी.....


रितिका :- तुम्हे कैसे पता..


अंकित :- अब इतना तो जान ही जाता हूँ...मगर मुझे तो बस ये पूछना था कि ऐसा क्या हुआ सुबह

जो आप इतना गुस्सा हो गयी..हमने जो भी किया उसमे दोनो की सहमति थी..


रितिका :- (अपनी जगह से खड़ी होती हुई) हाँ थी...लेकिन उस समय में बहक गयी थी...मेरे दिमाग़ पर

मेरे शरीर ने क़ब्ज़ा कर लिया था..लेकिन में ऐसा नही कर सकती..मेरा एक बेटा है अंकित..में उससे

चीट नही कर सकती...बिल्कुल नही..


अंकित :- चीट...कैसा चीट..आपने कोई ग़लत थोड़ी किया है..क्या दिल की बात सुनना ग़लत बात है..


रितिका :- ये दिल नही शरीर की भूक थी..जो में पूरा करने चली गयी..


अंकित :- ये शरीर की भूक नही थी मेडम ये आपके दिल में खो गया प्यार उभर के आया था..

जो इतने सालों से अंदर दफ़न है..और अगर आप उस प्यार को शरीर के साथ बाँटना चाहती है तो वो

ग़लत नही है....


रितिका :- नही अंकित...ऐसा नही है..मेरे दिल में ऐ...सा....कुछ नही है.. (अटकते हुए बोली)


अंकित :- अच्छा...तो जब सुबह आपको मेरे दिए गये दर्द से तकलीफ़ हो रही थी..तब अपने मुझे क्यूँ

नही हटाया..जब आपको साँस लेने में तकलीफ़ हो रही थी तब क्यूँ नही मना किया..बोलो..


रितिका साइलेंट हो गयी इस बात को सुन के..


अंकित :- रितिका... में जानता हूँ हम दोनो एक दूसरे को प्यार नही कर सकते..ये सिर्फ़ एक अट्रॅक्षन है

और वो ऐसा अट्रॅक्षन जिससे हम पीछा नही छुड़वा सकते..इसका तो सिर्फ़ एक ही सल्यूशन है..कि सब कुछ

भूल जाओ और सिर्फ़ अपने दिल की सुनो.. नीड इट .. नही तो आप भी खुश नही रह पाएँगी और ना ही

हेलो हेलो....


अंकित पूरा बोलता उससे पहले रितिका ने फोन कट कर दिया.....


वो अपने चेहरे को अपने हाथों से ढक के..भावुक हो गयी..और कमरे के अंदर चल पड़ी...


इधर अंकित..


कल ज़ाउन्गा मिलने इनसे..हर कीमत पे...ये ऐसा नही कर सकती...बिल्कुल नही..मेरे भी कुछ जज़्बात हैं..

और में जानता हूँ वो भी चाहती है..पर किसी तरह अपने दिल को मार रही है...


और पलंग पे लेट जाता है....


टाइम निकलता गया रात गहराती गयी...2 बज गये..लेकिन अंकित करवट बदल रहा था...और कल के

बारे में सोच रहा था..उसकी आँखों से नींद गायब थी...


इधर रितिका का भी यही हाल था...उसकी आँखों में भी नींद गायब थी....उसकी आँखों के सामने

सुबह हुए अंकित और उसके बीच जो इतना प्यार का सागर फूटा था वो याद आ रहा था...


जिसकी वजह से वो बार बार करवट बदल रही थी..


ये क्या किया अंकित आज...तुमने मेरे साथ..दिमाग़ से ही नही निकल रहा..ये सब ग़लत है..में अपने

शरीर के लिए अपने बेटे को धोका नही दे सकती..पर क्या करूँ तुम्हारे दिए गये उस छोटे से पल

में इतना कुछ था..की मेरा दिमाग़ मेरे शरीर के आगे हर मान रहा है..

और फिर से वही सुबह की घटना सोचने लगती है....कि कैसे अंकित उसके शरीर पे अपने होंठो से प्यार भरी

मालिश कर रहा था....


बस यही सोचते सोचते उसका हाथ नीचे चला गया अपनी चूत पे..और उसे एक झटका लगा...

चूत के उपर से उसका पाजामा गीला था...

उसकी आँखें पूरी खुल गयी....और उसके मुँह से हल्का सा निकला..नही......


और फिर शरम में उसने अपनी आँखों पे अपने हाथों की पट्टी बाँध ली......
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08-05-2018, 12:27 PM,
#52
RE: Desi Sex Kahani एक आहट "ज़िंदगी" की
अगली सुबह...


आज अंकित काफ़ी देर तक सोता रहा..कौलेज तो जाना नही था इसलिए मज़े में सो रहा था..

10 से 11 बज गये लेकिन वो भाई साहब नही उठे..


वो तो जब उसकी माँ ने कान के पास आके चिल्लाना शुरू किया तब जाके भाई साहब की आँखें

खुली..


अंकित अंकित..उठ जा..कितना सोएगा...कामवाली सफाई करने आ जाएगी और तू सोता रहिओ...फिर खुद

करियो सफाई..


बस अब काम की बाते सुन के आँखें कैसे ना खुलती.भाई साहब अचानक उठ के बैठ गये...


अंकित :- (अंगड़ाया लेते हुए) हाँ हाँ उठ रहा हूँ ना...यार.....(और पीछे तकिये लगा के उसपे

टैक लगा के बैठ गया)


उसकी मम्मी बाहर चली गयी कमरे से....


उठते ही जनाब नी फोन चेक किया..


अंकित :- ऊ तेरी.... 11 मिस...किसके हैं देखूं तो...ओह्ह्ह सारे दिशा के हैं....

(और फिर पढ़ने लगा)


हाहाहा...हल्की हँसी हँसने लगा...साले कैसे ब्रा पेंटी के मसेज भेज रही है...सच में बहुत ही

ज़्यादा कंटक और कमीनी लड़की है ये...एक ही दिन में 11 नों-वेज मेसेज...साली..हाहाहा..

(अंकित पढ़ते हुए बोला और मुस्कुरा रहा था)


तभी उसकी मम्मी अंदर कमरे में आई और बेड के सामने पड़े कुछ कपड़े उठाते हुए बड़बड़ाने

लगी..

सारे काम तो मुझे ही करने पड़ते हैं घर पे...महाराज को देर तक सुल्वा लो..उसके बाद तफ़री

करवा लो ये नही कि अपनी मम्मी की मदद कर दे..नही वो तो करनी नही है...सारा दिन निथल्ले की तरफ

पड़े रहो...(बोलते हुए कमरे के बाहर चली गयी


अंकित :- (अपने आप से) बिना सुने तो मेरा दिन कहाँ शुरू होता है.....

और फिर उठ के बाथरूम में घुस जाता है..


और फ्रेश होते टाइम सोचने लगता है...कि साला आज जो भी हो जाए रितिका की तो बॅंड बजानी ही है..

बहुत हो गया.....अब मुझसे और कंट्रोल नही होता...सही टाइम देख के जाउन्गा...और आज आर या

पार वाला काम कर ही दूँगा...(उसकी आँखों में एक अलग ही रिक्षन और चमक थी)


दोफर को पलंग पे लेटा रहा और फिर थोड़ी देर बाद चुनमुनियाडॉटकॉम खोल के बैठ गया.....


अंकित :- आज क्या पढ़ुँ...क्या पढ़ु..साला अब कोई अच्छा रायटर का बच्चा नही क्या...सब की स्टोरी तो पढ़ ली

(स्क्रोल करते हुए नीचे आने लगा) ओ तेरी की..अबे इस्पे भी स्टोरी लिखने का नही छोड़ा हाहहा..

साले बड़े कमिने लोग है...किस ने लिखी है..


और फिर खोल के पढ़ने लगता है....

3 से 4 से 5 से 6 बाज जाते हैं लेकिन अंकित स्क्रीन से नही हटता....आख़िर कर वो लॅपटॉप की स्क्रीन बंद करता

है..उसकी आँखें बड़ी हो गयी थी...


अंकित :- थर्कि ये नही है साला हम है..बुरा हाल कर दिया इसने तो...कसम से...लाजवाब लिखा हुआ था..

अब तो मेरा दिमाग़ काम करना बंद कर चुका है.....मेरे दिमाग़ में से तो वो गोआ वाला सीन

नही निकल रहा (बोलते हुए वो टाइम देखता है 6:05 हो गये थे) ओ तेरी की..जल्दी करना चाहिए ये टाइम

ही सही है मेरे लिए......


बोलते हुए वो उठ जाता है और फ्रेश होके रितिका के घर के लिए निकल जाता है...


सही 6:20 पे वो गेट के बाहर खड़ा होता है..वो सामने पार्क में नज़र गढ़ाता है आर्नव वहाँ नही

था....उसे थोड़ी चिंता होती है...


लेकिन..


अंकित :- आज तो कुछ भी हो जाए आर्नव हो या तार्नव .. आज तो काम ख़तम कर के ही जाउन्गा..


वो आगे बढ़ाता है और डोर बेल बजाता है.....एक बार बजता है कोई आवाज़ नही आती..दूसरी बार बजाता

है...तब भी नही आती..उसके बाद वो इकट्ठी तीन चार बार बजा देता है...

तब जाके अंदर से उसे रितिका की मीठी आवाज़ आती है..


कमिंग..........


बोलते हुए रितिका गेट खोलती है..और बाहर खड़े अंकित को देख के उसका चेहरा गंभीर बन जाता है..

इसे पहले अंकित कुछ बोले..


रितिका :- आर्नव घर पे नही है...वो आंटी के साथ घूमने गया है..और में इस वक़्त बिज़ी हूँ..

(अंकित रितिका को पूरा नही देख पा रहा था क्यूँ कि उसने अपना चेहरा ही गेट के बाहर निकाल रखा था)


रितिका और अंकित ने कुछ एक आध मिनट के लिए आँखों ही आँखों में देखा..और रितिका गेट बंद कर

ने लगी...पर उसे ये उम्मीद नही थी..कि अंकित ऐसा कुछ करेगा....

उसने दरवाजी पे हाथ लगा के उससे बंद करने से रोक दिया...


रितिका उसे घूर्ने लगी...


अंकित :- मुझे काम है..


रितिका :- मेने कहा ना मुझे कुछ काम है..तुम जाओ प्लीज़...(सॉफ्ट टोन में बोलते हुए)


अंकित :- नही मुझे भी कुछ कम है..(हर्ष टोन में बोलते हुए)


रितिका :- अंकित प्लीज़ जाओ..(वो दरवाजे को बंद करने के लिए पुश करती रही...)


लेकिन अंकित ने अपने हाथ की ताक़त से उसे पीछे ढकलने लगा...और आख़िर वो उसमे सफल भी हुआ..

रितिका पीछे की तरफ हो गयी..उसके नाज़ुक हाथों में इतनी जान कहाँ थी..अंकित अंदर घुसा और

उसने दरवाजे को अंदर से बंद कर लिया..

क्रमशः...........................
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08-05-2018, 12:28 PM,
#53
RE: Desi Sex Kahani एक आहट "ज़िंदगी" की
गतान्क से आगे..............

लेकिन अंकित ने अपने हाथ की ताक़त से उसे पीछे ढकलने लगा...और आख़िर वो उसमे सफल भी हुआ..

रितिका पीछे की तरफ हो गयी..उसके नाज़ुक हाथों में इतनी जान कहाँ थी..अंकित अंदर घुसा और

उसने दरवाजे को अंदर से बंद कर लिया..


रितिका :- ये क्या कर रहे हो अंकित.....


इस बात पर अंकित मुद्दा और उसने रितिका को देखा...शायद अभी ही आई थी ऑफीस सी...

सारे पहन रखी थी लाइट रेड महरून टाइप कि ट्रांसपेरेंट थी हल्की सी...और एक ग़ज़ब की सेक्सी लग रही थी..

अंकित तो वैसी भी आज बहुत ज़्यादा उत्तेजित था..और रितिका को ऐसे देख के वो तो और ज़्यादा भड़क गया

आग में घी का काम हो गया ये तो..


रितिका ने अंकित को अपनी तरफ घूरते हुए देख लिया..और उसने अपने आप को समेटती वो घूम गयी..


रितिका :- प्लीज़ जाओ यहाँ से...क्या चाहते हो...


अंकित :- वही जो आप भी चाहती हो..


रितिका :- में कुछ नही कहती..ये सिर्फ़ तुम्हारी सोच है...


अंकित :- अच्छा...सिर्फ़ मेरी सोच है....(बोलता हुआ वो धीरे धीरे कदम आगे बढ़ा रहा था)


इधर रितिका उसके कदमो को अपने करीब आते सुन उसकी दिल की धड़कने तेज चल रही थी....


अंकित की नज़र रितिका के उस न्यूड बॅक पे थी जो पीछे से काफ़ी खुली हुई थी..ब्लाउस ही ऐसा था कि

बॅक तो हद से ज़्यादा खुला हुआ था और बस एक पतली सी स्ट्रॅप्स से बंद था.....


अंकित ने करीब आते ही रितिका की बॅक को अपने हाथ से सहला दिया......

बस इससे तो रितिका की पूरी आँखें खुल गयी और उसका पूरा बदन काँपने लगा....वो कुछ बोल

पाती या कुछ कर पाती....


अंकित ने शोल्डर पे से हल्की सी साड़ी हटा के रितिका के कूल्हो पे अपने तपते होंठ रख दिए...


अंकित.त.........हल्की सी आवाज़ मुँह से निकली और फिर उसकी आँखें बंद हो गयी....


फिर अंकित अपने होंठ नीचे करते हुए आने लगा और बड़ी तेज़ी से उसने पीठ पे अपने होंठो की

बरसात कर दी......

रितिका की आँखें बंद हो गयी...दिल और दिमाग़ इस शरीर के सामने हारने लगी....रितिका मदहोशी में

अपनी गर्दन हिलाने लगी..उसका चेहरा लाल हो गया था वो बहुत गहरी साँसें ले रही थी...


उसके चेहरे को देख के कोई नही कह सकता था कि वो नही चाहती कि ऐसा हो...उसके चेहरे पे एक

नशा चढ़ चुका था......


उधर अंकित ने तो पीठ पे चुंबनों की बौछार करनी बंद नही करी..वो तो मन बना के आया

था कि आज तो सब कुछ लूट लेगा इस हसीना का....

अचानक उसने अपने हाथ आगे बढ़ाए और उस ब्लाउस की स्ट्रिप्स जो हुक से बंद थी..उसे खोल दिया.


कत्तिथल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल अजीब सी आवाज़ करके वो खुल गया....

और ये आवाज़ रितिका के कानो में बखूबी पड़ गयी..और जैसे ही पड़ी..उसने अपनी आँखें खोल ली..


मानो जैसे अभी अभी एक कड़वे सपने से जागी हो...और एक दम से आगे होके मूड गयी और अपनी

बूब्स के आगे हाथ लगा लिए...उसकी साड़ी हल्की सी साइड से गिरी हुई थी...हल्का सा क्लीवेज दिखाई दे

रहा था....ब्लाउस के हुक खुलने की वजह से वो ढीली हो गयी थी...पर रितिका ने आगे हाथ लगा रखा

था जिसकी वजह से वो नही गिरी पूरी...

रितिका की आँखों में पानी भर गया था और वो अंकित को घूर रही थी...


अंकित का फेस रियेक्शन चेंज नही हुआ वो रितिका को देखते हुए आगे बढ़ा...और अपने हाथ आगे

बढ़ा के उसे कमर से पकड़ लिया.....


रितिका अपने एक हाथ से उसे हटाने की कॉसिश करने लगी..लेकिन पकड़ इतनी मजबूत थी कि वो नही हट

रही थी...


रितिका :- तुम...ऐइस..आ.आ....की....उ.न....कर..रही ह.हो... (अटकती हुई)


अंकित :- आपके लिए.....(इतना बोलता है)


और अपने होंठ आगे बढ़ा के रितिका की नेक पे रख देता है..और वहाँ बेइन्तिहा चूमने लगता है..

बिल्कुल पागलों की तरह...


आहह...रितका के मुँह से हल्की सी आवाज़ निकलती है....एक हाथ जो अंकित के हाथ को कमर से हटाने में

लगा था..वो तो ढीला पड़ता जा रहा था..बस नाम का हटा रही थी वो...


और जो दूसरे हाथ से उसने पल्लू पकड़ रखा था...वहाँ से भी वो हट गया..और अंकित के सर के पीछे

आ गया...
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08-05-2018, 12:28 PM,
#54
RE: Desi Sex Kahani एक आहट "ज़िंदगी" की
रितिका :- अंकित...आ.आ.ह..प्लीस..ए...मत.टीटी.त.. करूऊ (बोलते बोलते उसकी आँखें मदहोशी में बंद हो रही

थी) और वो अंकित के बालों को पकड़ के पीछे खिचने में लगी हुई थी..


प्लीज़..ए.ए..ए.ए... मत करो...ये सब ठीक नही हाइयैई........


अंकित ने अपनी होंठ हटा लिए और रितिका की आँखों देखने लगा..


अंकित :- अगर ये ठीक नही है...तो फिर क्यूँ भेजा मुझे वो लेटर क्यूँ वो सब किया क्या वो ग़लत नही

था...और अभी...खुद से क्यूँ बताया कि आर्नव घर पे नही है....इससे सिर्फ़ यही मतलब निकलता है कि

आपके दिल में भी वही है जो मेरे दिल में है..हम दोनो को अपनी अपनी परेशानी बतानी है...

और आप भी यही चाहती है...पर आपको एक अजीब सी डोर ने बाँध रखा है जो आज में तोड़ के

रहूँगा..क्यूँ कि ना तो में आपको परेशानी में देख सकता हूँ..और ना ही खुद परेशान

हो सकता हू....

(इतनी बाते उसने आँखों में आँखें डाल के बोली)


और रितिका को कमर से पकड़ की पीछे दीवार से सटा दिया..और अपने हाथ आगे करके...

उसके शानदार बूब्स के सामने से उसकी साड़ी का पल्लू हटा दिया जो सीधी जाके फर्श पर गिर गया

और फिर आगे बदः के उसके सीने से चिपक गया जिस्शे अंकित की चेस्ट में रितिका के बूब्स घुस गये

और फिर से..


पागलों की तरह कभी गालों तो कभी नेक और कभी ब्लाउस को शोल्डर पे से हटा के वहाँ

होंठो केए बरसात करने लगा...

रितिका ना कहते हुए भी हार चुकी थी..उसके हाथ अपने आप अप अंकित के सर के पीछे चले गये

और उसकी आँखें बंद हो गयी....और उसके मुँह से हल्की हल्की आह..निकलने लगी...

उसके शरीर ने उसके दिल और दिमाग़ पे आख़िर कर क़ब्ज़ा कर ही लिया...(इसमे अंकित की बातों का बहुत असर

था कि वो अब हार मान चुकी थी...)



अंकित का एक हाथ शरीर को सहलाता हुआ उसके पेट पे पहुच गया और उसकी उस न्यूड पेट की नाभि

पे रख वहाँ अपनी उंगलियों से ट्विस्ट करने लगा...

रितिका के पेट ने तो नाचना शुरू कर दिया इस प्रहार से...गहरी गहरी साँसे चल रही थी उसकी..


अंकित तो पागलों की तरह चुम्मा चाटी कर रहा था पूरी गर्दन पे...मानो कोई अनोखी चीज़

मिल गयी हो..(वैसे उसके लिए अनोखी ही है)


दूसरे हाथ से अंकित रितिका के चेहरे को सहला रहा था और रितका भी उसके हाथों पे अपना चेहरा घिस रही

थी...अब उसने अपने दिमाग़ की बाते सुननी बंद कर दी...

दिल और शरीर की बातों में खो गयी....और इस सुख का आनंद लेने लगी...


अंकित ने अपना हाथ रितिका के चेहरे से हटाया और ब्लाउज की तरफ बढ़ा के उसे शोल्डर पे से गिरा

दिया अब पीछे से तो खुला हुआ ही था...शोल्डर से गिरने की वजह से वो लटक सा गया मगर

अंकित की चेस्ट रितिका से चिपकने की वजह से वो पूरा नही गिरा..


अंकित ने वहाँ जीभ निकाली और शोल्डर पर अपनी छाप छोड़नी शुरू कर दी.


आहह..रितिका सिसकती हुई उसके बालों में हाथ फैरने लगी..उसके शरीर में गुलगुली होने

लगी....


कुछ सेकेंड तक ऐसे ही रितिका को गुलगुली करने के बाद उसने अपना चेहरा उठाया और रितिका की आँखों

में देखने लगा..रितिका के हाथ बराबर अंकित के बालों में चल रहे थे...

रितिका भी उसकी आँखों में देख रही थी...

दोनो की आँखों में एक ही बात मुझे नज़र आ रही है..


कि अब बस और नही.....और नही....इंतजार होता इस पल को ज़िने दो...


बस देखते ही देखती अंकित के होंठ आगे बढ़ने लगे...और करीब बढ़ते चले गये..


और आख़िर कर रितिका के उन रसीले होंठो पे पड़ गये..और उन्हे चूसने लगी....

बड़ी ही बहरामी से अंकित रितिका के होंठ चूस रहा था..तो रितिका भी पीछे नही हाटी..और वो

भी उसी जोश के साथ किस करने लगी...


सर का नशा अब सर चढ़ चुका था...और वो पूरी ढोल बजाते हुए आगे बढ़ रहा था..

क्रमशः...........................
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08-05-2018, 12:28 PM,
#55
RE: Desi Sex Kahani एक आहट "ज़िंदगी" की
गतान्क से आगे..............


अंकित के हाथ आगे बढ़ते हुए रितिका के उन आधे क़ैद बूब्स पर आ रहे थे....और कुछ ही सेकेंड

में जब दोनो की जीभ एक दूसरे से लड़ाई लड़ रही थी..तो उसने उन बूब्स पर हाथ रख दिए और

उन्हे कस कस्स के दबाने लगा...

अपने हाथों से जितना मसल सकता था मसल्ने लगा..मानो कोई फॉर्म की बॉल हो...बड़ी ही

बुरी तरह से....

किस में भी वही जुनून दिखाई दे रहा था......


रितिका का ब्लाउज ऐसे बुरी तरह निचोड़ दिए जाने से बूब्स के कुछ हिसों के उपर से हट गया था

जिसे रितिका के वो सुंदर या यूँ कहें बेहद सुंदर बूब्स उजागर होने लगे थे..


पर..


अंकित के ऐसा करने पर रितिका को दर्द हो रहा था..और इस बार अंकित को ये पता चल गया..

क्यूँ कि रितिका के हाथों में उसके बाल काफ़ी ज़्यादा कस गये थे...


अंकित ने अपना चेहरा अलग किया...और अपने हाथों से उसके बूब्स दबाना बंद कर दिया..और उसकी

आँखों में देखने लगा...

रितिका की साँसे बहुत तेज़ी से चल रही थी...यूँ कही उखड़ चुकी थी....


रितिका :- (उखड़ी साँसों में) क्या..इसे प्यार...से करना....कहते..आ.आ.. हैं.....


अंकित को रितिका की ये बात दिल को छू गयी...उसे समझ आ गया कि वो क्या कर रहा था..वो अभी जो

कर रहा था वो उसकी वासना था...उसे एहसास हुआ कि लड़की कोई खिलोना नही कि उससे जबर्जस्ती किसी भी

तरह मोड़ दिया...

उसे ये भी समझ आया..कि ये लड़कियाँ सिर्फ़ 2 बूँद प्यार की प्यासी होती है अगर वो दे दिया तो ये सब कुछ

देने को तैयार हो जाती है...


अंकित को समझने में देर ना लगी..वो आगे बढ़ा और रितके के कान के पास जाके उसके कान के

नीचे वाले हिस्से को अपने होंठों में दबा के उसे बड़े प्यार से चूसने लगा...


ह्म्‍म्म्मममममममममममममममम.....एक आवाज़ रितका के मुँह से निकली..


अंकित ने होंठ हटाए और फिर वो बोला...सॉरी......

और फिर कान में अंदर अपनी जीभ डाल के उसे चाटने लगा...रितिका को गुलगुली होने लगी लेकिन

उससे इस एहसास का मज़ा बहुत आ रहा था...


फिर अंकित अपना चेहरा वहाँ से हटा नीचे झुक गया और अपनी जीभ नाभि में डाल के वहाँ ट्विस्ट

करने लगा....

आहह रितिका के हाथ सिसकी लेते हुए अंकित के सर के पीछे आ गये...

उसने एक हाथ से अपना ब्लाउज आगे लगाए रखा था...जिससे वो ना गिरे...

पर एक साइड से उसके आधे बूब्स तो क्लियर्ली दिख रहे थे..शोल्डर पे से ब्लाउज गिरने की वजह से वो

हवा में झूल रहा था आधी जगह से..


रितिका की आँखें बंद हो गयी थी..अंकित उसके तपते हुए पेट अपने गीले ठंडे होंठो की बरसात

जो कर रहा था..उसका पेट कांप रहा था...और पैर भी साथ साथ हिल रहे थे...उसके लिए खड़ा होना

काफ़ी मुश्किल था....


फिर अंकित उपर उठा रितिका को ऐसी ही देखता रहा...उसकी आँखें बंद थी...तेज तेज साँसे ले रही थी..


फिर अचानक...


अंकित ने अपने हाथ आग बढ़ाए और उसे अपनी गोदी में उठा लिया..रितिका एक पल के लिए चौंक

गयी...लेकिन फिर आँखों खोल के अंकित को देखने लगी...

अंकित भी उसकी आँखों में देखने लगा...और चल पड़ा उसे उठाए बेडरूम की तरफ....

साड़ी का पल्लू नीचे गिरा हुआ ज़मीन को सॉफ कर रहा था लेकिन इस वक़्त साड़ी इतनी ज़रूरी नही थी

ज़रूरी था तो इन दोनो का आपस में मिलन होना..जो दोनो के लिए ही बेहद ज़रूरी था..


कमरे में पहुच के अंकित ने बड़े प्यार से रितिका को बेड पे रखा..और उसके हाथ को अपने

हाथ में पकड़ लिया..और हथेली के उपर अपने होंठ फिराने लगा..और किस करने लगा..और वहाँ

से किस करते हुए वो आगे बढ़ता चला गया और अपनी जीभ निकाल के अपने रस से रितिका के

हाथ को भिगो दिया और शोल्डर पे पहुच के वहाँ अपने होंठ रख के उन्हे चुस्सने लगा...


रितिका को इस सेंसुअल भरे खेल में बड़ा ही मज़ा आ रहा था हल्की हल्की बहुत हल्की सिसकी लेते

हुए आँखें बंद कर ली थी...


अंकित वहाँ से हटा और कुछ सेकेंड तक इस कमसिन जवानी को देखने लगा...पता नही कैसे काबू कर

रखा था इसने..नही तो इस बाला को ऐसी हालत में पलंग पर देख ले तो कोई भी राक्षस की तरह टूट

पड़े और पूरा खा जाए..हड्डी तक ना छोड़े....


पलंग पर लेटी उपर से आधा नंग शरीर चेहरा इतना खूबसूरत पानी से भरा चेहरा उसपर आधी

खुली ब्लाउज जिसमे से वो सुंदर चुचियाँ खिड़की में से झक रही थी..और नीचे सपाट सुंदर

पेट...जिसके बीच में एक सुंदर होके...और नीचे आगे देखो तो घुटनो तक चढ़ि हुई साड़ी....


कोई भी लड़का दीवाना हो जाए....और पागल होके टूट पड़े...

लेकिन अंकित को पता था कि उसे क्या करना है.....


वो आगे बढ़ा और अपनी एक उंगली को पेट के कोने से फिराते हुए दूसरे कोने तक आया...और साथ

साथ पेटिकोट में धँसी साड़ी को भी खोल लिया.....


रितिका की कमर अपने आप ही हवा में उठ गयी....और अंकित ने फुर्ती दिखाते हुई नीचे फँसी साड़ी

भी खीच ली...और अब पूरी साड़ी शरीर पे से हट चुकी थी...उसने उस साड़ी को वहीं ज़मीन पे छोड़ दिया

और रितिका की टाँगो पे अपनी उंगलियाँ चलाते हुए अपने होंठो की रगड़ मारते हुए धीरे धीरे

पेटिकोट के उपर आने लगा और उपर आकर उसका नाडा भी खोल दिया.......और उसे हल्का सा

नीचे कर दिया....

रितिका का शरीर बुरी तरह से हिल रहा था....उसने अपनी एक उंगली अपने दाँत के बीच में दबा रखी थी..


हल्का सा नीचे होने की वजह से उसकी पेंटी की लाइन दिखनी शुरू हो गयी...

अंकित ने होंठ आगे बढ़ा के ठीक जहाँ पेंटी की लाइन थी उसपे उपर रख दिए और वहाँ चाटने

लगा...


आ..न.न...क......आअहह सिसकी लेती हुई रितिका उछल सी गयी....


क्रमशः...........................
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08-05-2018, 12:28 PM,
#56
RE: Desi Sex Kahani एक आहट "ज़िंदगी" की
गतान्क से आगे..............

अंकित धीरे धीरे साँप की तरह रेंगता हुआ रितिका के शरीर के उपर चढ़ने लगा..और अपनी गर्दन

नीचे कर के...होंठो को पेट के उपर से चिपकाता हुआ उपर आने लगा और अपनी जीभ निकाल

कर साइड में से मम्मो से होते हुए उपर जाने लगा मानो कोई क्लीनिंग कर रहा हो....

रितिका तो पागल सी हो गयी..उसकी शरीर में झुनझुनी सी फैलने लगी..हालत बुरी होती जा रही थी..

अंकित ने सेम आइस ही दूसरी तरफ भी किया अपनी जीभ से.....

और हाथ आगे बढ़ाकर ब्लाउज को उस तरफ से भी शोल्डर से गिरा दिया था....


अब बस रितिका के मम्मो के उपर एक मात्र कपड़ा सा पड़ा हो...मानो किसी फल या सब्ज़ी के उपर

कपड़ा रख दिया हो .....

अंकित उस नज़ारे को देखने लगा उसका हथियार तो ऐसे सख़्त हो गया था मानो कोई पोल रोड

के साइड में सीधा खड़ा हो...

रितिका को अपने पेट के उपर उस भारी चीज़ का आभास बखूबी हो रहा था जिससे उसकी जान और बुरी

तरह से निकल रही थी...उसकी चुनमुनिया ने अंदर अंदर ही अपनी पानी की सेना बाहर निकालनी शुरू कर दी थी..

जिससे उसका टाट यानी कि उसकी पेंटी उस पानी की सेना में सनती जा रही थी....


फिर अंकित ने बड़े ही मज़ेदार अंदाज़ में ब्लाउज को रितिका के मम्मो पे से हटाया जिसे

देख कर रितिका को भी एक बार को कामुकता भरी मुस्कान देनी पड़ी....


वो अंकित ने किया ऐसा था ... कि उसने अपना चेहरा आगे बढ़ाया और अपने दाँतों से पकड़ के उसके

ब्लाउज को खीच लिया वो भी बहुत धीरे धीरे..जिससे कि उसकी चुची धीरे धीरे उसकी आँखों के

सामने आने लगी....और जब उन चुचो के निपल सामने आए तो अंकित का मुँह खुल गया

और ब्लाउज वहीं पेट पे रितिका के गिर गया..


वाहह क्या बनाया है इतने सुंदर और गोल गोल मक्खन जैसे खरबूज़ पर ये बहुत ही

लाइट कलर के पिंक पिंक निपल्स.....मानो इसकी सुंदरता को और बढ़ा रहे हों.....

अंकित के मुँह से लार टपकने लगी....


रितिका ने जब अंकित को उसके मम्मो पे ऐसे घूरते पाया तो वो शरमा गयी..उसके गाल और उसकी

नाक एक दम लाल सुर्ख हो गयी..उसने अपने हाथों से उसे ढक लिया और अपनी आँखें बंद कर ली..


रितिका :- प्लीज़..डोंट सी देम लाइक दिस....


अंकित की उस कामुकता से भरी आवाज़ को सुन के और भी ज़्यादा गरम हो गया उसके चेहरे पे एक कातिलाना

स्माइल आ गयी...


अब और नही बसका हो रहा था उसके कि कुछ और करे..अब तो वो बस वो कर देना कहता था जिसके

लिए दोनो कब से सूखे पड़े हैं..आज वो यहाँ पानी का तसमा ले आना चाहता था...जिसमे दोनो

ही डूब जाए....और परम सुख का अनुभव लेते रहे....


अंकित ने अपने हाथ धीरे धीरे आगे बढ़ाए और रितिका के हाथों को उसकी चुचियों से हटाने

लगा...रितिका ने भी देरी नही की और ना ही उसे रोकने का कोई दम लगाया.....और उसके हाथ पीछे

की तरफ होते चले गये....और कुछ ही सेकेंड में दोनो हाथ पीछे की तरफ फैल गये...जिसकी वजह

से...


सामने वो उभरी हुई चुचियाँ जिसके निपल ऐसे खड़े हो रहे थे मानो जंग में लड़ने जा रहे

सिपाही खड़े हो सामने एक अद्भुत तरीके से उजागर हो गये...जिसे देख कर अंकित की आँखें

फटी की फटी रह गयी...

उसने तो सपने में भी नही सोचा होगा कि वो ऐसी चुचियाँ ज़िंदगी में देखेगा कभी....


अंकित ने धीरे धीरे हाथ आगे बढ़ाने शुरू करे..उसके दिल की धड़कन तेज चल रही थी...रितिका ने

जब आँखें खोल के देखा कि अंकित अपने हाथ आगे बढ़ा रहा है तो उसके भी दिल की धड़कन तेज़ी

से चलने लगी..और उसकी वजह से उसकी चुचियाँ उपर नीचे तेज़ी से हो रही थी...


अंकित का हाथ बेहद करीब आके रुक गया.....उसने रितिका की आँखों में देखा और कुछ सेकेंड तक

ऐसे ही देखते रही..


और फिर....आख़िर कर हाथों का शरीर का एक असली मिलन हुआ...


अंकित के हाथ रितिका के मम्मो पे पड़ड़ ही गये और उन्हे हल्का सा दबा दिया...


आआआआहह...रितिका ने अपनी गर्दन उपर की तरफ करते

हुए एक लंबी सी सिसकी ली..


आअहह जब ठंडे हाथों के स्पर्श में वो सॉफ्ट मक्खन जैसे चुचें और कड़क निपल

हाथ में चुबहे तो अंकित के मुँह से भी आह निकल ही गाइिईई...........


अंकित के हाथ रितिका के मम्मो पे पद ही गये और उन्हे हल्का सा दबा दिया...


आआआआहह...रितिका ने अपनी गर्दन उपर की तरफ करते

हुए एक लंबी सी सिसकी ली..


अंकित ने अपने हाथ उन मम्मो पे चलाने शुरू किए...जिससे वो चुची हाथों के नीचे दब के

इधर उधर होने लगी और घूमने लगी...


जैसी गोल गोल चक्की चल रही हू.....अंकित की हथेली में वो तने हुए थोड़े मोटे निपल्स

चुभ रहे थे..

फिर अंकित ने हाथ हटाया और उंगली से निपल्स के साथ खेलने लगता...

कभी इधर से मारता तो कभी उधर से उन पर उंगली से मारता ... मानो बॉल लटकी हो रस्सी से और

उसे बॅट से मार रहा हो...


आह उूुुुुुुउउ उफफफफफफफफफफफ्फ़...अंकित.........रितिका के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी....
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08-05-2018, 12:29 PM,
#57
RE: Desi Sex Kahani एक आहट "ज़िंदगी" की
अब अंकित से भी रहा नही जा रहा था उसने अपना चेहरा नीचे किया और अपनी लंबी जीभ बाहर निकाली

और निपल ले टॉप पे अपनी जीभ को रख के उसको हल्का सा चख लिया....


आआहह ह्म्‍म्म्मममममम.....रितिका ने सिसकी लेते हुए अपने होंठ दबा लिए...


लेकिन अंकित के चेहरे पे एक मुस्कुराहट आ गयी...उससे अब कंट्रोल तो नही हो रहा था..लेकिन वो रितिका

और टीज कर के ही उसके साथ करना चाहता था.....


फिर उसने अपने दोनो होंठो के बीच में अपने निपल दबा ली और जैसे कोई बच्चा निपल वाली

बॉटल से दूध पीता है सेम वैसे ही पीने लगा......


आह न..ओ.हह..ह....ह्म्‍म्म सीईईईईईई ...अंकित...म..त काओरूऊओ.... (अंकित के पीछे बालों पे हाथ फेरते

हुए बोल रही थी)


हाथ आगे बढ़ा के उसके बड़े ही फ्लफी दूसरे चुचे पे रख के उसे हल्का हल्का प्रेस

करने लगा..मानो कोई हॉर्न बजा रहा हो......


कुछ ऐसे ही 2 मिनट तक निपल को अपने मुँह में भर के उसे प्यार करने के बाद वहाँ से हटा.

हटते ही उसके पास चमकते निपल्स आ गये...जो उसके थूक़ से शाइन मार रहे थे...उसके बाद

उसने सेम दूसरे चुचे के साथ भी किया....


निपल्स को तो उसने अच्छे से चूसा ....और रितिका को बहुत बुरी तरह से टीज़ भी किया..उसका हाल तो

खराब पड़ा था.....


फिर अंकित ने जीभ निकाली..और दोनो मम्मो के बीच की दरार में घुसा दी और वहाँ से अपनी

छाप छोड़ता हुआ उपर आने लगा..


एक अजीब सी गुदगुदी और झुनझुनी सी फैल गयी..


अहह ओह ह्म्‍म्म्मममम उसके हाथ अंकित के बालों में बुरी तरह से घुसे हुए

थे और वहाँ चल रहे थे....


जीभ वो गर्दन से लाता हुआ वो रितिका के होंठो के करीब आ गया.....दोनो एक दूसरे की सांस

को अपने अपने गरम होंठो पे महसूस कर रहे थे....

अंकित ने रितिका के हाथ अपने पीछे से हटाए और उन्हे फिर से पीछे की तरफ फैला दिया...

फिर अंकित ने अपने होंठ आगे बढ़ा के रितिका के होंठ पे रखा और उन्हे चूसने लगा ही था

रितिका भी अपनी होंठो का उपयोग करके उन्हे चूसने लगी ही थी..कि अंकित ने अपना चेहरा हटा लिया

रितिका ने आँखें खोल के गुस्से भरी प्यारी नज़रों से अंकित को देखा..


अंकित मुस्कुरा दिया और फिर अपने होंठ आगे करके किस करने के पोज़िशन में आया रितिका तो पूरी

टायर थी ... उसने अपने होंठ आगे करके अंकित को चूमने की कॉसिश की लेकिन अंकित ने फिर से एक बार

अपना चेहरा पीछे कर लिया..


इस बार रितिका की आँखों में जो गुस्सा था वो एक औरत के शरीर के साथ हो रहे मज़ाक का था...

जो अंकित समझ रहा था लेकिन उसे मज़ा आ रहा था...


अंकित ने मन में सोचा...क्यूँ ना थोड़ा और तडपाया जाए..बहुत मज़ा आ रहा है...इसमे...


अंकित ने सोचने के बाद अपना चेहरा आगे किया और फिर से होंठो को रितिका के पास लाने लगा..

रितिका ने भी पिछली 2 बार की तरह अपने होंठ आगे बढ़ाए....दोनो के होंठ आपस में हल्के से

जुड़ ही गये थे कि अंकित ने अपना चेहरा पीछे किया..लेकिन...


लेकिन इस बार वो कामयाब नही हुआ....क्यूँ कि रितिका ने अपने हाथ पीछे ले जाके उसे कस्स के

अपनी तरफ खीच लिया जिसे दोनो के होंठ चिपक गये ......

और अंकित की तो ऐसी तैसी कर दी...क्यूँ कि जो किया सिर्फ़ रितिका नी ही किया...उसके होंठो को बुरी तरह

से चूसने लगी...मानो वो अंकित से पिछली 2 बार की की गयी शरारत का बदला ले रही हो...उसे बुरी

तरह से चूस रही थी..चांट रही थी..अंकित तो बस उसके इशारों पे नाच रहा था....


अचानक अंकित के शरीर में दर्द भरी ल़हेर दौड़ गयी......उसने किसी तरह से रितिका के हाथ को पीछे

हटाया और खुद पीछे हो गया.....उसने अपना हाथ अपने होंठ पे लगाकर देखा तो निचला होंठ

पे खून उभर आया....वो गुस्से भरी आँखों से रितिका को देखने लगा....

(अब ऐसे देखने से क्या होगा....जब एक भूकि बिल्ली को ऐसे चोदेगा तो फिर वो तो ऐसे ही काटेगी ना)


रितिका ने अपने हाथ आगे बढ़ाए और अंकित के चेहरे पे रखे...लेकिन अंकित ने उन्हे झटक दिया..

वो जानती थी कि अंकित में गुस्सा बहुत है..लेकिन वो ये भी जानती थी कि इस वक़्त वो उसे शांत भी कर सकती

है..


इसलिए उसने दुबारा हाथ आगे बढ़ाया और आगे गालों पे रख के उसके चेहरे को अपनी तरफ खिचा

अंकित घूरती आँखों से खिचा चला गया....दोनो के चेहरे बेहद नज़दीक आ गये...

फिर रितिका ने अपनी जीब बाहर निकाली और उस उभरे हुए खून पे रख दिया और उसे वहाँ से चाट

गयी....


उफफफफफफ्फ़ अंकित के दिल में ये आया...क्यूँ कि ऐसा करने पर उसके पूरी शरीर में मस्ती की ल़हेर दौड़ गयी


फिर रितिका वहाँ चाटती रही...और अपने होंठों से बड़े प्यार से उसे चूसने लगी.....आख़िर कार खून

निकलना बंद हुआ...दोनो ने एक दूसरी की आँखों में देखा...


और फिर अंकित ने आगे बढ़ के रितिका के होंठों पे अपने होंठ रख दिए..और उन्हे प्यार से बेहद्द

कोमलता से उस कोमल रस का पान करने लगा....


इधर रितिका का हाथ अंकित की टी-शर्ट पे गया और उसने उसे उपर खिचने लगी....लेकिन गर्दन पे जाके

अटक गयी...अंकित को समझते देर ना लगी बस 3 सेकेंड के लिए उसने अपनी गर्दन पीछे की टीशर्ट बाहर निकली

और फिर से जुड़ गये होंठ..

लेकिन इस बार अंकित के शरीर में एक और मस्ती की लेहर दौड़ पड़ी..क्यूँ की इस बार नंगी चेस्ट पे

उसे रितिका के चुचों का एहसास हुआ और कड़क हो रहे निपल्स की चुभन हुई उसे.....


अंकित के मुँह से घुटि हुटी आवाज़ रितिका के मुँह में ही निकल गयी...दोनो एक दूसरे की जीब से

लड़ाई लड़ रहे थे.....


क्रमशः...........................
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08-05-2018, 12:29 PM,
#58
RE: Desi Sex Kahani एक आहट "ज़िंदगी" की
गतान्क से आगे..............



कुछ 5 मिनट तक ऐसे ही होंठो और जीब को चाटने के बाद अलग हुए..दोनो की साँसे चढ़ि

हुई थी....


अंकित :- रितिका ...


स्शह होंठो पे उंगली रखते हुए......


रितिका :- कुछ मत बोलो...अब ब्लिकुल नही...अब तुम्हे जो करना है वो करो लेकिन कुछ मत बोलो..


अंकित उसकी बात को समझ जाता है और फिर नीचे की तरफ आने लगता है और पलंग से उतर जाता है..

और अपनी बेल्ट खोल के जीन्स उतार देता है...रितिका उसे अपनी आँखों से घूर्ने लगती है....


जैसे ही जीन्स नीचे उतारती है रितिका के दिल की धड़कन किसी सूपर एक्सप्रेस ट्रेन की तरह भागने लगती

है.....अंदर कच्छे में अंकित का लंड...जिसका आज पता चलने वाला था..

कच्छे के अंदर से तो वो काफ़ी ख़तनाक था किसी भी चूत के लिए क्यूँ कि कच्छा पूरा फूला पड़ा

था और अंदर पड़ा लंड बाहर से अलग चमक रहा था...


अंकित रितिका के पास आया उसका पेटिकोट खिचा रितिका की कमर अपने आप ही उपर उठ गयी और अंकित ने

उसका पेटिकोट खिच के उतार दिया और फैंक दिया ज़मीन पर..


अंकित का लंड एक हल्का सा झटका ख़ाता है कच्छे के अंदर ही ऐसे कोमल सुंदर हॉट हॉट लेग्स को

देख के.....रितिका ये देख लेती है...उसकी तो साँसे बिना कुछ करे ही उखाड़ रही थी.....उसके चुचें

उपर नीचे तेज़ी से हो रहे थे.....


अंकित की नज़र जब पेंटी पे गई तो उसके लंड ने दो चार और झटके मारे क्यूँ की पेंटी चूत वाली

जगह से बेहद गीली पड़ी थी..और उस शरीर पे एक मात्र सिर्फ़ वही बची थी...इतना कातिलाना शरीर लग

रहा था रितिका का.....

छोटी सी कच्छि थी बस...पूरी शरीर पे..और उसके नीचे वो टाँगे ..अंकित ने अपने हाथ आगे

बढ़ाए और उपर से टाँगों को अपने हाथ से सहलाता हुआ नीचे आने लगा...

रितिका के पैर बुरी तरह से कांप गये......


फिर अपने होंठ आगे बढ़ा के अंकित ने अपने होंठ रितिका की थाइस पे रख दिए और वहाँ चूमने

लगा..


अहह...बड़े ही प्यारी सिसकी उसके मुँह से निकली....उसको आज इतना सुकून मिल रहा था मानो कोई

उसके शरीर की सेवा कर रहा था....


फिर अंकित ने रितिका की पेंटी में अपनी उंगली फँसा दी....


अचानक रितिका नी उसके हाथ के उपर अपना हाथ रख दिया....दोनो एक दूसरे की आँखों में देखने

लगे..

अंकित की आँखों में सॉफ पता चल रहा था कि वो पूछ रहा हो कि प्लीज़ रितिका अब और नही...


और शायद रितिका नी उसकी बात को समझ लिया.....और उसने अपना हाथ हटा लिया और अपनी आँखें बंद

कर ली....


अंकित ने उंगली फँसाई और उसे खिचने लगा नीचे...रितिका ने वो मस्त भारी भरकम गान्ड हवा में

उठा ली और अंकित ने आख़िर रितिका की पेंटी नीचे आसानी से धीरे धीरे खिचनी चालू कर दी....

अंकित का दिल भी ज़ोरों से धड़क रहा था और यही हाल रितिका का भी था....


आख़िर के सामने वो सोना वो हीरे जैसी....चीज़ जिसके लिए हर एक आदमी मरता है एक नज़र पाने के

लिए ना जाने क्या क्या कर जाता है वो अब अंकित के सामने आ जाती है......


अंकित की आँखें जैसे ही रितिका की उस गुलाबी फूली हुई अपनी रस से भरी पड़ी हुई थी तो अंकित के लंड

की बॅंड बज गयी..और उसका लंड कच्छे के अंदर से पलंग पे लगने लगा इतने ज़बरदस्त झटके मार रहा

था वो कच्छे के अंदर से.....


अंकित ने अपने होंठों पे जीब फिराई....उसने आज तक ऐसी चूत नही देखी थी..कितनी ही सेक्स मूवीस देखी

हो उसने..लेकिन इस जैसी चूत कभी नही देखी..

अभी तो कुछ हुआ नही..और ये उबलते हुए पानी की तरह चूत रस बहा रही थी.....

अंकित का हाथ ऑटोमॅटिकली अपने लंड पे चला गया और उसे उसने हल्का सा मसल डाला...


रितिका की हालत बुरी थी एक तरफ तो वो शर्मा रही थी लेकिन दूसरी तरफ उसके साथ आने वाले पल की खबर

से उसका शरीर उसकी चूत के ज़रिए अपनी बात को अंकित के सामने रख रहा था...


अंकित ने अब रितिका को टीज़ करने का प्लान कॅन्सल कर दिया..और अपना हाथ फँसा के कच्छे में घुसाया

और उसे नीचे कर दिया..कच्छा सरकता हुआ नीचे गया..और घुटनो में जाके अटक गया..अंकित खड़ा हुआ

और टाँगों में से निकाल कर फैंक दिया...



कच्छा उतार के अंकित पलंग पे आया और अपने हाथ से रितिका की टाँगों को फैलाता है.....

जो दोनो टाँगें आपस में जुड़ी हुई थी..उन्हे उसने खोल के अलग किया...


रितिका बहुत ज़्यादा घबरा रही थी और शरमा रही थी..

उसने अपनी आँखें नही खोली थी...दिल तेज़ी से धड़क रहा था वो जानती थी कि आगे क्या होने वाला है...


अंकित ने अपना चेहरा आगे बढ़ा के रितिका की चूत के पास धीरे धीरे ले गया....


हाई..क्या मदमस्त खुशबू आ रही है...अंकित आँखें बंद कर के वहाँ सूंघटा है....उसका लंड उसके पेट पे बार बार लग रहा था....
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Reply
08-05-2018, 12:30 PM,
#59
RE: Desi Sex Kahani एक आहट "ज़िंदगी" की
अंकित ने अपनी जीब बाहर निकाली और बस हल्का सा छूट को छू दिया...


ससिईईईईईईईईईईईईईईई..हा..आहहह........रितिका के मुँह से सिसकी निकल पड़ी...


और अंकित ने जब टेस्ट किया तो उसकी तो हालत और खराब हो गयी...इतना स्वादिष्ट टेस्ट था कि वो तो

फिर टूट पड़ा...


और रितिका की फूली हुई छूट पे अपने होंठों के साथ जीब रख के उसे चूसने लगा..


हाअ..आहह सिई ओह्ह्ह्ह गूड्ड़..द.द.....ओह मयी...आहह

नू.आ.अहहह प्पलेआसए दॉंत्त...आहह ससीई ओह्ह्ह.......ड्डोंत्त..आहह.,...


रितिका के हाथ अंकित के सर के पीछे गये और उसे कस के अपनी चूत पे दबा दिया और ज़ोर ज़ोर से

सिसकियाँ लेने लगी..उसकी आवाज़ें पुर कमरे में गूंजने लगी...वो मना तो कर रही थी लेकिन अंकित के

सर को और अपनी चूत पे दबा के...


अंकित तो मानो आज सारा लिक्विड पी के ख़तम करना चाहता था..लेकिन वो क्या जाने जितना पियोगे उतना मिलेगा

ये ऐसा दरिया है जहाँ कभी सूखा पड़ता ही नही है....


अंकित ने अपनी जीब चूत के अंदर घुसा दी और जैसे ही घुसाइ वहाँ से तो चूत के पानी की

बाढ़ सी आने लगी..मानो कोई डॅम खोल दिया हो....वो बुरी तरह से सक करने लगा....


आहहह ओह्ह्ह फुक्कककककक ओह्ह्ह यस.....लाइक इट अंकित्त...यू आर टू गुड...ह्म्‍म्म्म

सीसीईईईईईईईईईईईईईई ... प्लीज़...फक्क्क मी नाउ..ओह्ह्ह मयी..आइ कॅंट टेक दिस अनीमोर....

(वो अपने एक हाथ से तकिये को पकड़ के पागलों की तरह अपनी गरदान हिला रही थी...)


अंकित तो अपने मज़े से चूसने में लगा हुआ था...उसको तो चूत को सफ़ाचट करना था...एक तो

बिना बाल की चूत उपर से इतनी मदमस्त आकार देने वाली..कौन चाहेगा कि वो हटे....लेकिन रितिका की

सिसकियाँ बढ़ती जा रही थी..


ओह्ह्ह्ह प्लीज़....नॉवववव....अंकित.त...आहह (चिल्लाते हुए बोली)


इतनी ज़ोर से चिल्लाई कि अंकित ने अपना सर चूत से हटा के रितिका की तरफ देखा..रितिका भी उसी को देख रही

थी...


अंकित के मुँह के चारों तरफ रितिका का पानी लग गया था....रितिका अंकित को ऐसी बंदर की शक्ल मे

देख कर मन ही मन हँसी आ गयी...


रितिका बड़ी मुश्किल से बोली... प्लीज़...फक मे नाउ.....(रितिका के मुँह से ये शब्द सुन के अंकित के कानों

को विश्वास नही हुआ)


एक औरत जब वासना में उतरती है...तो वो किसी भी आदमी को पीछे छोड़ देती है ... फिर उसे सिर्फ़ अपने शरीर

की प्यास को बुझाने वाला चाहिए..अगर कोई ना करे...तो उससे बड़ा यमराज दुनिया में कोई नही होता

और ये बात अंकित जानता था कि अगर ये बिल्ली को दूध नही दिया तो ये नोच नोच के काट डालेगी..


इसलिए अंकित खड़ा हो गया और अपने लंड को चूत के करीब लाने लगा....रितिका की लंड को देख के

उसकी आँखे फट गयी..

कम से कम 6 से 7 इंच के बीच का था और काफ़ी मोटा था.....



अंकित का लंड सूखा था...और वो ब्लोव्जोब चाहता था लेकिन उसने मन में सोचा कि नही..आज पहली बार

ब्लोजॉब नही..जो भी सुख देना है में दूँगा आज कोई सुख नही लूँगा....


इसलिए उसने अपनी 3 उंगली रितिका की चोट पे रख के वहाँ रगड़ा अपनी चूत को..


आहह उफफफफफफफफफफफ्फ़........सिसकी छूट पड़ी..


फिर अंकित ने उसी हाथ से अपने लंड को मसला...जिसे लंड पूरा गीला हो गया...अब रितिका की चूत इतना

बहा रही थी अपना आमरस जैसा पानी तो थोड़ा सा अंकित ने उसका उपयोग करके उसका इस्तेमाल भले

काम के लिए कर लिया...


लंड पे पानी लगाने के बाद उसके सुपाडे को चूत पे रखा...

ससिईईईई आहह हल्की सिसकी छूट पड़ी...और अपने हाथ से लंड को पकड़ती हुए अंदर चूत में

धकेलने लगा...कुछ थोड़ा सा अंदर गया..कि रितिका के मुँह से एक चीख निकल गयी...


आहह


अंकित समझ गया कि ये फिलहाल दर्द की चीख है वो फ़ौरन रितिका के उपर लेट गया और उसके होंठ भीच

लिए......अपने होंठों में...

और नीचे से अंकित ने हल्का सा ही पुश किया था..लेकिन चूत इतनी चिकनी थी कि लंड फिसलता हुआ अंदर

ही जा घुसा जड़ तक..

रितिका की उंगघह......जैसी आवाज़ अंकित के मुँह में ही घुट गयी..उसकी आँखो से पानी निकल

गया....


क्रमशः...........................
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08-05-2018, 12:30 PM,
#60
RE: Desi Sex Kahani एक आहट "ज़िंदगी" की
गतान्क से आगे..............


अंकित उसके चेहरे और उसके बूब्स को सहलाने लगा और 2 मिनट के लिए कोई हरकत नही की...


कुछ मिनट बाद रितिका की शक्ल नॉर्मल दिखने लगी...जो अंकित को पता चल गया..और फिर उसने अपनी कमर

हिलानी शुरू कर दी.....उसने होंठ हटा लिए रितिका के उपर से..


उसने लंड बाहर खिचा....और पcछ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह की आवाज़ के साथ अंदर घुस गया पूरा..


आहहह उहह.....सिसकी लेते हुए अंकित को अपने से चिपका लिया और अपने नाख़ून

गढ़ा दिए पीठ पे...


अहह एक मीठे दर्द की सिसकी निकालते हुए अंकित धक्का लगाने लगा...पहले कुछ बहुत धीरे

धक्के लगे..


आह ऊहह उहह येस्स....अंकित....ओह्ह माइ......फक्क मी......आइ कॅंट टोलेरती दिस...प्लीस..ए..ए..

इतने सालों से किसी तरह अपने आप को रोक रखा था....नाउ प्लीज़....फक मईए हार्डर हर्दरर प्लीज़


रितिका के मुँह से सुन के अंकित तो पागल सा हो गया और अपने लंड को तेज़ी से चूत के अंदर बाहर करने

लगा...पकच पकक्चह आजीब अजीब सी आवाज़ें आने लगी....


अहहह ओह अंकित..येस..स..स.स.स.स.स.मयी गोड्ड़....डार्लिंगग.ग..ग.ग...फ्कूककककककक......


अँकति धका धक धक्के लगा रहा था दोनो का शरीर पसीने में नहा गया था....

पचह पचह लंड और चूत के मिलन से आवाज़ें आ रही थी......


आहहह ओह्ह फुक्ककककक अनक़ित्त्त.....आइ कंटत्तत्त आइ कंटत्त्टतत्त मेईएईिन अब नही रुक सकती..प्लीज़

फुक्ककक मी मोर ... हार्डर...

(चिल्लाते हुए सिसकी ले रही थी)


अंकित ने अपना चेहरा रितिका के कंधों में छुपा रखा था और वो ज़ोर ज़ोर से धक्के मार

रहा था.....लंड बड़ी तेज घुसने के साथ अंदर बाहर हो रहा था...


आहहह अंकित.त.त.त..त.त.....श बाब्बयययी मययी बबब्बययी.....आइ अम्म...आई आमम्म्म कुम्मीणटज्ग...ग.ग..ग

ई अम्म कुम्मीणटज्ग.ग...बबबी...आइ आम कुम्मीणटज्ग.ग..ग.ग.ग.ग.ग.गगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगग....


बोलती हुए रितिका की कमर ने जो झटके मारे हैं बसपुछो ही मत एक के बाद एक 4 झटके

मारे और मानो आज तो दम तोड़ दिया फिर इतना तेज बहाव कि सतह अंदर से निकल के आजू

बाजू वाले इलाक़ों को डुबोने लगा.......


उसकी आँखें पूरी खुली हुई थी....वो तो जैसे किसी स्वर्ग में घुस चुकी थी..


इधर जब रितिका का पानी निकल के चूत सिकुड़ने लगी...तो अंकित का डबल प्रेसर उसके लंड पे पड़ा

एक तो गरम बहता पानी उपर से कसाव....इससे अंकित की भी हालत खराब हो गयी...


आआहह रितिका...ओह आइ आम कुम्मीणत्ग त्तोटूऊऊऊऊऊओ


और कुछ 4 या 5 धक्के लगाने के बाद उसने भी अपना गरम ढेर सारा पानी रितिका की चूत में

एक के बाद एक 3 झटके मारे और अपना सारा पानी उसकी चूत के अंदर ही छोड़ दिया.....

और हान्फता हुआ रितिका के उपर ही लेटा रहा...

रितिका ने अपनी बाहें डाल के अंकित को बाँध रखा था..दोनो की साँसे ज़ोरों से चल रही थी..

और आँखें दोनो की बंद थी.......


आज दोनो ने अपनी अपने शरीर और दिल की सुनी जिससे दोनो को एक ऐसे सुख का आनंद प्राप्त हुआ जिसे शब्दों में बयान करना बेहद ही मुश्किल है...


रितिका और अंकित दोनो ने स्वर्ग का रास्ता देख लिया....जिसे वो बता नही सकते..


दोनो हान्फते हुए एक दूसरे के उपर पड़े थे.......अंकित का चेहरा रितिका के शोल्डर पे पड़ा हुआ था

और रितिका छत की तरफ देखते हुए अंकित के बालों में हाथ फिरा रही थी..
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