Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
08-18-2019, 01:13 PM,
#1
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दिल दोस्ती और दारू

दोस्तो आप भी सोच रहे होंगे कि ये कैसा नाम है इस कहानी का तो दोस्तो किसी शायर ने क्या खूब कहा है कि "आशिक़ बन कर अपनी ज़िंदगी बर्बाद मत करना......" लेकिन समय के साथ साथ बर्बादी तो तय है, जो मैने खुद चुनी....मैने वो सब कुछ किया ,जिसके ज़रिए मैं खुद को बर्बाद कर सकता था, और रही सही कसर मेरे अहंकार ने पूरी कर दी थी...अपनी ज़िंदगी के सबसे अहम 4 साल बर्बाद करने के बाद मैं आज इस मुकाम पर था कि अब कोई भी मुकाम हासिल नही किया जा सकता, पापा चाहते थे कि मैं भी अपने बड़े भाई की तरह पढ़ लिख कर बड़ा आदमी बन जाऊं...लेकिन मैने अपनी ज़िंदगी के उन अहम समय मे जब मैं कुछ कर सकता था, मैने यूँ ही बर्बाद कर दिया, घरवाले नाराज़ हुए, तो मैने सोचा कि थोड़े दिन नाराज़ रहेंगे बाद मे सब ठीक हो जाएगा....लेकिन कुछ भी ठीक नही हुआ, सबके ताने दिन ब दिन बढ़ने लगे...बर्बाद ,नकारा कहकर बुलाते थे सभी मुझे घर मे...और एक दिन तंग आकर मैं घर से निकल गया और नागपुर आ गया अपने एक दोस्त के पास, नागपुर आने से पहले सुनने मे आया था कि मेरा बड़ा भाई विपेन्द्र विदेश जाने वाला है, और उसके साथ शायद मोम डॅड भी जाएँगे....लेकिन मुझे किसी ने नही पुछा...शायद वो मुझे यही छोड़ जाने के प्लान मे थे...खैर मुझे खुद फरक नही पड़ता इस बात से,और आज मुझे नागपुर आए हुए लगभग 2 महीने से उपर हो चुके है, मेरा भाई विदेश गया कि नही, मेरे माँ-बाप विदेश गये कि नही , ये सब मुझे कुछ नही पता और ना ही मैने इन दो महीनो मे कभी जानने की कोशिश की और जहाँ तक मेरा अंदाज़ा था वो लोग मुझे मरा मानकर शायद हमेशा के लिए मेरे बड़े भाई के साथ विदेश चले गये होंगे
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08-18-2019, 01:13 PM,
#2
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
यदि कोई मुझसे पुछे कि दुनिया का सबसे बेकार, सबसे बड़ा बेवकूफ़, ईवन सबसे बड़ा चूतिया कौन है , तो मैं बिना एक पल गँवाए अपना हाथ उपर खड़ा कर दूँगा और बोलूँगा "मैं हूँ".यदि किसी को अपनी लाइफ की जड़े खोदकर बर्बाद करनी हो तो वो बेशक मेरे पास आ सकता था, और बेशक मैं उसकी मदद भी करता हूँ....

नागपुर आए हुए मुझे दो महीने से उपर हो गया था,जहाँ मैं रहता था , वहाँ से लगभग 20 कि.मी. की दूरी पर एक नयी नयी मेटलर्जिकल इंडस्ट्री शुरू हुई थी...काफ़ी धक्के मुक्के लगाकर कैसे भी करके मैने वहाँ अपनी नौकरी फिक्स की , बड़ी ही बड़जात किस्म की नौकरी थी, 12 घंटे तक अपने शरीर को आग मे तपाने के बाद बस गुज़ारा हो जाए इतना ही पैसा मिलता था....खैर मुझे कोई शिकायत भी नही थी....जैसे जैसे समय बीत रहा था, मैं उन फॅक्टरी की आग मे जल रहा था, जीने के सारे अरमान ख़तम हो रहे थे, और जब कभी आसमान को देखता तो सिर्फ़ दो लाइन्स मेरे मूह से निकल पड़ती...
आसमानो के फलक पर कुछ रंग आज भी बाकी है.........!!!
जाने ऐसा क्यूँ लगता है कि ज़िंदगी मे कुछ अरमान आज भी बाकी है.........!!!

और मेरी सबसे बड़ी बदक़िस्मती ये थी कि मेरा नाम भी अरमान था, जिसके अरमान पूरे नही हुए, या फिर यूँ कहे कि मेरे अरमान पूरे होने के लिए कभी बने ही नही थे.


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"अरमान...अरमान...उठ, वरना लेट हो जाएगा..."वरुण ना जाने कब से मुझे उठाने की कोशिश मे लगा हुआ था, और जब मैने बिस्तर नही छोड़ा तो हमेशा की तरह आज भी उसने पानी की एक बोतल उठाई और सीधे मेरे चेहरे पर उडेल दिया....
"टाइम कितना हुआ है..."आँखे मलते हुए मैं उठकर बैठ गया, और घड़ी पर नज़र दौड़ाई, सुबह के 8 बज रहे थे....भारी मन से मैने बिस्तर छोड़ा और बाथरूम मे घुस गया....

वरुण मेरा बचपन का दोस्त था और इसी की वजह से मैं नागपुर मे था, जहाँ हम रहते थे, वो एक कॉलोनी थी,जो कि शहर से दूर बना हुआ था,...इस कॉलोनी मे कयि बड़े बड़े रहीस लोग भी रहते थे, तो कुछ मेरी तरह घिस घिस कर ज़िंदगी गुजारने वालो मे से भी थे....मेरे साथ क्या हुआ, मैने ऐसा क्या किया ,जिससे सब मुझसे दूर हो गये, ये सब वरुण ने कयि बार जानने की कोशिश की...लेकिन मैने हर बार टाल दिया...वरुण प्रेस मे काम करता था, उसकी हालत और उसके शौक देखकर इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल नही था कि उसकी सॅलरी काफ़ी मोटी होगी और यदि मुझे कभी किसी चीज़ की ज़रूरत होती तो वो बिना कुछ कहे मुझ पर पैसे लूटा देता, ये जानते हुए भी कि मैं उसके पैसे कभी वापस नही करूँगा.....
"अब ब्रेकफास्ट क्या खाक करेगा , टाइम नही बचा है...."मैं बाथरूम से निकला ही था कि उसने मुझे टोका..."और पी रात भर दारू, साले खुद को देख ,क्या हालत बना रखी है..."

"अब तू सुबह सुबह भासन मत दे..."मैने झुझलाते हुए कहा....

"अकड़ देखो इस लौन्डे की,..."वरुण बोलते बोलते रुक गया, जैसे उसे कुछ याद आ गया हो....वो थोड़ी देर रुक कर बोला...
"वो तेरी आइटम आई थी, सुबह-सुबह...."

"कौन..."मैं जानता था कि वो किसकी बात कर रहा है, लेकिन फिर भी मैने अंजान बनने की कोशिश की...
"निशा..."
"निशा...."मैने अपना सेल फोन उठाया, तो देखा कि निशा की बहुत सारी मिस कॉल पड़ी हुई थी....
"क्या बोली वो..."
"मुझसे तो बस इतना बोल के गयी कि, अरमान जब उठ जाए तो मुझे कॉल कर ले..."
"ओके...."
निशा हमारी ही कॉलोनी मे रहती थी, वो उन अय्याश लड़कियो मे से थी, जिनके माँ-बाप के पास बेशुमार धन-दौलत होती है, जिसे वो अपने दोनो हाथो से भी लुटाए तो भी उनके बॅंक बॅलेन्स पर कोई फरक ना पड़े.....निशा से मेरी पहले मुलाक़ात कॉलोनी के गार्डेन मे ही हुई थी, और जल्द ही हमारी ये पहली मुलाक़ात बिस्तर पर जाकर ख़तम हुई,...निशा उन लड़कियो मे से थी, जिनके हर गली , हर मोहल्ले मे मुझ जैसा एक बाय्फ्रेंड होता है, जिसे वो अपनी हवस मिटाने के लिए इस्तेमाल करती है...इस कॉलोनी मे मैं निशा का बाय्फ्रेंड था, या फिर यूँ कहे कि मैं उसका एक तरह से गुलाम था.....वो जब भी ,जैसे भी चाहे मेरा इस्तेमाल करके अपने शरीर के हवस को पूरा करती थी...दिल मे कयि बार आया कि उसे छोड़ दूं, उससे बात करना बंद कर दूं, लेकिन मैने कभी ऐसा कुछ भी नही किया....क्यूंकी निशा के साथ बिस्तर पर बीता हुआ हर एक पल मुझे अपनी धिक्कार ज़िंदगी से बहुत दूर ले जाता था, जहाँ मैं कुछ पल के लिए सब कुछ भूल सा जाता था....
"चल ठीक है, मिलते है 12 घंटे के बाद..."वरुण ने मजाकिया अंदाज़ मे कहा....
हर रोज की तरह मैं आज भी उस स्टील प्लांट मे अपना खून जलाने के लिए निकल पड़ा,...मैं अभी रूम से निकला ही था कि निशा का कॉल फिर आने लगा...
"हेलो..."मैने कॉल रिसीव की...
"गुड मॉर्निंग शहाबजादे...उठ गये आप..."
"इतनी इज़्ज़त से कोई मुझसे बात करे, इसकी आदत नही मुझे...कॉल क्यूँ किया..."
"ओह हो...तेवेर तो ऐसे जैसे सच मे शहाबजादे हो...आज मोम-डॅड रात मे किसी पार्टी के लिए जा रहे है...घर बिल्कुल खाली है...."
"ठीक है, रात को खाना खाने के बाद मैं आ जाउन्गा..."
कुछ देर तक निशा की तरफ से कोई आवाज़ नही आई और जब मैं कॉल डिसकनेक्ट करने वाला था तभी वो बोली...
"खाना ,मेरे साथ ही खा लेना..."
"ठीक है, मैं आ जाउन्गा..."
निशा ने मुझे आज रात अपने घर पर बुलाया था, जिसका सॉफ मतलब था कि आज मुझे उसके साथ उसी के बिस्तर पर सोना है

निशा से बात करने के बाद मैं स्टील प्लांट की तरफ चल पड़ा, जहाँ मुझे 12 घंटे तक अपना खून जलाना था,...
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08-18-2019, 01:13 PM,
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RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
मैं हर रात इस आस मे सोता हूँ कि, सुबह होते ही मेरा कोई भी खास दोस्त मेरे पिच्छवाड़े पर लात मार कर उठाए और फिर गले लगाकर बोले कि"रिलॅक्स कुत्ते, जो कुछ भी हुआ, वो सब एक सपना था...अब जल्दी से चल ,फर्स्ट क्लास दम्मो रानी की है, यदि लेट हुए तो हथियार पकड़ कर पूरे पीरियड भर बाहर खड़ा रहना पड़ेगा...."

लेकिन हक़ीक़त कभी सपने या ख्वाब मे तब्दील नही होते...मैने अपने साथ कुछ बहुत बुरा किया था...ये भी एक हक़ीक़त थी....जिस स्टील प्लांट मे मैं काम करता था, वहाँ मेरी किसी से कोई पहचान नही थी और ना ही कभी मैने उनसे मिलने-जुलने की कोशिश की....जब कभी एक दूसरे की हेल्प पड़ती तो"ये...ओये...ग्रीन शर्ट...ब्लू शर्ट..."ये सब बोलकर अपना काम चला लेते....उस दिन मैं रात को 9 बजे अपने रूम पर आया...वरुण मुझसे पहले आ चुका था....
"चल , हाथ-मूह धो ले...दारू पीते है..."एक टेबल की तरफ वरुण ने इशारा किया, जहाँ एम.डी. की बोतल रखी हुई थी...
"मैं आज निशा के घर जा रहा हूँ..."
"अरे ग़ज़ब...मतलब आज पूरी रात, लाइव मॅच होने वाला है..."
"लाइव मॅच तो होगा, लेकिन ऑडियेन्स सिर्फ़ हम दोनो होंगे..."
"साला ,मुझे अभी तक ये समझ नही आया कि निशा जैसी हाइ प्रोफाइल क्लास वाली लड़की ,तुझसे कैसे सेट हो गयी....मैं मर गया था क्या.."एम.डी. की बोतल को खोलते हुए वरुण ने कहा"अरमान, एक काम कर...तू निशा से शादी कर ले...लाइफ सेट हो जाएगी...."
"सजेशन अच्छा है, लेकिन मुझे पसंद नही..."
"तो फिर एक और सरिया उठा के पिच्छवाड़े मे डाल लियो, ज़िंदगी और भी बढ़िया गुज़रेगी..."चिढ़ते हुए वरुण बोला...
"मैं चलता हूँ..."ये बोलकर मैं रूम से बाहर आया...
निशा की तरह मैं भी चाहता था कि वो हर रात मेरी साथ ही बिताए, यही रीज़न था कि मैने उसे अभी तक छोड़ा नही था...और एक सॅडेस्ट पर्सन से सेक्स करने की चाह ने भी उसे मुझे बाँध रखा था....वो हमेशा जब भी मुझसे मिलती तो यही कहती कि, तुम्हारे साथ बहुत मज़ा आता है और उसके ऐसा कहने के बाद मैं एक बनावटी मुस्कुराहट उसपर फेक के मारता हूँ, जिसका निशाना हर बार ठीक बैठता है......
"कम..."निशा ने दरवाजा खोलते हुए कहा, और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे जल्दी से अंदर खींच लिया....
"सब्र कर थोड़ी देर...."मैने अंदर ही अंदर हज़ार गालियाँ निशा को दी
अंदर आकर हम दोनो डाइनिंग टेबल पर बैठ गये, वो मेरे सामने वाली चेयर पर बैठी मुझे शरारत भरी नज़रों से देख रही थी, मैने भी उसकी आँखो मे आँखे डाली और इशारा किया कि मैं तैयार हूँ...मेरा इशारा पाकर वो एकदम से उठी और खाने की प्लेट को डाइनिंग टेबल पर रखकर सीधे मेरे उपर बैठ गयी.
"तुम डॉक्टर हो..."अपनी गहरे लाल रंग की शर्ट की बटन को खोलते हुए वो मुझसे पुछि....
"नही, मैं इंडिया का प्रेसीडेंट हूँ...कुछ काम था क्या..."मैने भी अपनी खाने की प्लेट डाइनिंग टेबल पर रखी और उसके जीन्स का लॉक खोलते हुए बोला...उसने अपने दोनो से मेरे सर को पकड़ा और प्यार से सहलाने लगी....
"अरमान, तुम जानते हो मुझे सबसे ज़्यादा क्या पसंद है..."
"चुदाई..."मैं मन ही मन मे चिल्लाया और निशा की तरफ देख कर ना मे सर हिलाया, अब मेरी नज़र निशा के चेहरे से होते हुए उसके सीने पर जा अटकी, जहाँ उसकी छाती के दोनो फूल बाहर खिलने के लिए तड़प रहे थे....निशा की कोमल गोरी कमर को सहलाते हुए मैने पकड़ा और उसे उपर उठा कर उसकी जीन्स को उसके घुटनो से भी नीचे कर दिया, अब वो मेरे सामने सिर्फ़ रेड ब्रा और पैंटी मे थी, उसके पूरे गोरे जिस्म मे ये रंग कयामत ढा रहा था...

मेरे सीने को सहलाती हुई निशा ने मेरी शर्ट को उतार कर फेक दिया और बेतहाशा मेरे सीने को किस करने लगी, इस वक़्त मेरे हाथ उसकी छातियो पर अटके हुए थे, मैने निशा के सीने के उन दोनो उभारों को कसकर पकड़ा और दबा दिया....
"आअहहस्सस्स....धत्त्त..."वो झूठे गुस्से के साथ बोली..

"नाइस ब्रा, काफ़ी अच्छा लग रहा है ,तुम पर...."उसकी ब्रा को उसके जिस्म से अलग करते हुए मैने कहा...
"यदि ये ब्रा, मेरे जिस्म पर इतना ही अच्छा लग रहा था तो फिर इसे उतारा क्यूँ...."
"क्यूंकी इस ब्रा के पीछे जो चीज़ है वो इससे भी खूबसूरत है"
उसकी छाती अब मेरे सामने नंगी थी, और मैं उसके उभारों को जब चाहे जैसे चाहूं दबा सकता था, वैसे तो मैं खुद को उसका गुलाम मानता था था,लेकिन सेक्स करते वक़्त वो मेरी गुलाम हो जाती थी...निशा के सीने के एक उभार को मैने प्यार से अपने मूह मे भर लिया और दूसरे को तेज़ी से मसल्ने लगा...
"मना किया ना...आहह उउउहह"मेरा हाथ हटाते हुए वो बोली"कितनी बार मना किया है, ज़्यादा तेज़ी से मत दबाया करो..."
मैं इस वक़्त निशा से बहस नही करना चाहता था, इसलिए मैने उसकी बात मान ली और अपने एक हाथ को उसकी छाती पर से हटा लिया और अपने हाथो से निशा के नंगे पेट को सहलाते हुए उसकी चूत पर अपना एक हाथ रख दिया...मेरे ऐसा करने पर वो किसी मछलि की तरह उछल पड़ी और सिसकारिया लेनी लगी,...मेरे पैंट मे बने हुए तंबू का उसे अहसास हो गया था, वो एक मादक सी आवाज़ मे बोली...
"जल्दी .....प्लीज़...आइ कॅन'ट वेट मोर....."मेरे लंड को पैंट के बाहर से ही सहलाती हुई निशा ने कहा....उसकी आवाज़ मे कंपन था...जो मुझे मदहोश कर रही थी...
मैने निशा को उपर उठाया और मैं खुद वहाँ खड़ा हो गया, चेयर को पीछे करने के बाद वो मेरे सामने घुटनो पर बैठी और मेरी तरफ देखते हुए मेरे लंड पर अपना हाथ फिरा रही थी, उसके बाद उसने मेरे लंड को पैंट से बाहर निकाला और अपने हाथो मे थामकर आगे पीछे करने लगी.....
"तुम जानते हो, तुम मे सबसे खास चीज़ क्या है...."मेरे लंड को अपने हाथो से सहलाती हुई उसने मुझसे पुछा....
"लंड...."
"बिल्कुल सही जवाब और आपको मिलती है एक चूत,जिसे आप आज रात भर रगड़ सकते है...."
निशा की इन चन्द लाइन्स ने मुझे और भी ज़्यादा पागल और मदहोश कर दिया और एक यही वक़्त था, जब मुझे उसकी चुदाई करने के अलावा और कुछ भी याद नही रहता, इन्ही चन्द पॅलो के लिए मैं आज भी निशा के साथ था....
"मेरे इनाम को पर्दे मे क्यूँ रखा है..."ऐसा कहते हुए मैने उसी वक़्त निशा को पकड़ कर ज़मीन पर लिटा दिया, और उसकी रशभरी गुलाबी चूत को पर्दे से बाहर किया...ये सब कुछ मैने इतनी जल्दी किया कि निशा हैरान रह गयी...और फिर मुस्कुराते हुए बोली...
"बहुत जल्दी हो रही है आपको.."
"तू कसम से माल ही ऐसी है..."
मेरा ऐसा कहते ही वो खुशी से मचल उठी, निशा को ज़मीन पर लिटाकर मैने एक बार फिर उसकी छाती को मसलना शुरू किया...
"आहह....उूुउउ....."निशा की प्यार भरी मचलन फडक रही थी और वो उतेजना की चरम सीमा पर पहुच कर दस्तक दे रही थी, वो इस वक़्त इतनी मदहोश हो गयी थी कि वो खुद के हाथो से अपने सीने के उभारों को रगड़ने लगी और मुझे इशारा किया कि ,मैं वो सब कुछ करूँ,जिसके लिए आज रात मैं यहाँ था....मैने निशा की गोरी चिकनी कमर को पकड़ा और उसे अपने लंड के ठीक उपर बैठा लिया, उसकी चूत इस वक़्त मेरे लंड के स्पर्श के लिए तड़प रही थी...मैने उसकी तड़प कम करने के लिए अपने हाथो से उसकी चूत को थोड़ा फैलाया और सीधे अपना लंड एक तेज धक्के के साथ अंदर घुसा दिया....
"अहह.......आहह"अपनी उंगली को दांतो से दबाते हुए वो बोली, उसका चेहरा इस वक़्त लाल पीला हो रहा था,...

मैं ज़मीन पर लेटा हुआ था और निशा मेरे उपर बैठी हुई अपनी गान्ड हिला कर मज़े लूट रही थी...इस तरह उसका दर्द भी कुछ कम हो गया था, और अब वो मस्ती भरी सिसकारियाँ ले रही थी...मैने एक बार फिर से अपने सबसे चहेती जगह को पकड़ा और ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा और तेज़ी से अपना लंड उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगा,...कभी निशा मेरे हाथो को पकड़ लेती तो कभी अपनी चिकनी गान्ड को मटकाते हुए आगे पीछे करती....मेरे तेज धक्को के साथ उसकी सिसकारियाँ भी बढ़ती जा रही थी, इसी बीच मैने उसके बूब्स को कयि बार बहुत तेज़ी से मसला , इतना तेज़ी से कि उसकी मस्ती भरी सिसकारियो मे अब दर्द झलक रहा था,लेकिन ये दर्द वो अपनी भारी गान्ड को आगे पीछे करके सह रही थी, हम दोनो इस पोज़िशन मे बहुत देर तक रहे,उसके बाद मैने निशा को अलग किया और घुटने पीछे की तरफ मोड़ कर बैठ गया और उसकी जाँघो को सहलाते हुए उसे भी अपने उपर बैठा लिया....
"स्शह...ये क्या कर रहे हो..."निशा बोली...
"कुछ नही, बस अपना काम कर रहा हूँ..."उसके नंगे बदन पर किस करते हुए मैं बोला और फिर अपने लंड को उसकी चूत से टिकाया और एक जोरदार धक्का मारा. इस पोज़िशन मे मैं पहली बार निशा को चोद रहा था,इसलिए वो तैयार ना थी , और जैसे ही मेरा लंड पूरा अंदर घुसा वो दर्द के मारे ज़ोर से चीखी, वो दर्द से तड़प उठी और मुझसे च्छुटने की कोशिश करने लगी,लेकिन मैने उसकी कमर को कसकर पकड़ा और उसकी चूत मे लंड अंदर बाहर करने लगा....निशा ने अपने हाथो से मेरे लंड को निकालने की भी कोशिश की ,लेकिन उसके हाथ मेरा काम बिगाड़ते उससे पहले ही मैने उसके दोनो हाथो को पकड़ कर पीछे जकड लिया, अब उसके पास असहाय होकर चुदने के आलवा और कोई रास्ता नही था,...निशा की सिसकारियाँ इस बीच लगातार निकल रही थी , जो मुझे और भी उतेज़ित कर रही थी, निशा की सिसकारियो मे दर्द सॉफ झलक रहा था....मैने निशा को ज़मीन पर वापस लिटाया और उसकी टाँगो को पकड़ कर उसे खुद की तरफ खींचा, उसके बाद मैने उसकी दोनो टाँगो को उपर उठाकर उसकी तरफ मोड़ दिया ,जिससे उसकी चूत मेरे सामने की तरफ आ गयी और बिना एक पल गँवाए मैने अपना लंड अंदर डाल दिया,निशा की चीख एक बार फिर पूरे घर मे गूँजी, उसका गोरा शरीर, दर्द और मस्ती से लाल पीला हो रहा था...
"मैं...अब...आहह....अरमान...आइ ल्ल्लूओवीए युवयू....सस्शह एसस्स्स्स्स्सस्स"
निशा झड गयी और उसकी गुलाबी चूत से पानी बाहर रिसने लगा , अब मैने उसके गालो को तेज़ी से सहलाया और बुरी तरह से निशा से लिपटकर और भी तेज़ी से अपना लंड घुसाने लगा...वो मुझे रोकने की कोशिश करने लगी ,लेकिन मैं नही रुका और लगातार अपना लंड उसकी चूत मे देता रहा, और कुछ देर के बाद मैं भी झड गया....मैं और निशा अब भी एक दूसरे से लिपटे हुए थे...हम दोनो एक दूसरे की आँखो मे आँखे डाल कर ना जाने क्या देख रहे थे....फिर उसने ऐसा कुछ कहा, जिसकी मैने कभी कल्पना तक नही की थी.......
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08-18-2019, 01:14 PM,
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RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
"दिलवालो के घर तो कब के उजड़ चुके....
दिल के आशियाने तो कब के जल चुके....."निशा से मैने सिर्फ़ इतना ही कहा ,जब उसने मुझसे शादी करने के लिए कहा...निशा ,मुझसे शादी करना चाहती है, ये सुनकर मैं कुछ देर के लिए जैसे कोमा मे चला गया था, मैं अब भी ज़मीन पर निशा के उपर लेटा हुआ था और मेरा लंड अब भी उसकी चूत मे अंदर तक धंसा था....मेरे द्वारा कही गयी इन दो पंक्तियो को सुनकर वो पल भर के लिए मुस्कुराइ और फिर मेरे सर पर हाथ फिराती हुई बोली
"तुमने अभी जो कहा, इसका मतलब क्या हुआ..."
"मैं तुमसे शादी नही कर सकता..."
जब मैने उसे ऐसा कहा तो मैने सोच लिया था कि उसके चेहरे पर नाराज़गी के भाव आएँगे, लेकिन ऐसा कुछ भी नही हुआ, वो मेरा सर सहलाती रही.....
"मैं मज़ाक कर रही थी..."वो बोली"आक्च्युयली, डॅड ने मेरी शादी कहीं और फिक्स कर दी है और नेक्स्ट वीक शायद लड़के वाले मुझे देखने भी आ रहे है...."
"गुड , लेकिन फिर मुझसे क्यूँ पुछा कि मैं तुमसे शादी करूँगा या नही..."मेरे हाथ धीरे धीरे उसके पूरे शरीर को सहला रहे थे....
"मैं जानना चाहती थी कि, तुम मुझसे प्यार करने लगे हो या नही..."मेरे हाथ की हरकतों से तंग आकर उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, और हँसती हुई बोली...
"और मैं तुमसे प्यार करता हूँ या नही, ये तुम क्यूँ जानना चाहती थी.."मैने उसके हाथ को दूर किया और फिर से अपना काम शुरू कर दिया, उसकी आँखो मे जिस्म की प्यास फिर से उतरने लगी...

"मैने ये इसलिए पुछा क्यूंकी, मेरे जितने भी बाय्फ्रेंड है, जब मैने उन्हे कहा कि अब मैं उनके साथ रीलेशन नही रख सकती, तो वो बहुत उदास हुए, कुछ तो बच्चो की तरह रोने लगे और बोलने लगे कि,....निशा प्लीज़ मत जाओ, मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ, तो बस मैं यही जानना चाहती थी कि, कहीं औरो की तरह तुम्हे भी मुझसे प्यार नही हुआ है, वरना आज की रात के बाद तुम भी उन लड़को की तरह रोना धोना शुरू करते...."

"डॉन'ट वरी, मैं ऐसा कुछ भी नही करूँगा...."मैने निशा के दोनो हाथो को कसकर पकड़ा और मेरा लंड जो उसकी चूत मे पहले से ही घुसा हुआ था, मैं उसे फिर से अंदर बाहर करने लगा....मेरी इस हरकत पे वो एक बार फिर मुस्कुरा उठी.....
"तुम्हे, एक बात बताऊ...आअहह..."
"हां बोलो..."
"उन लड़को ने कॉल कर कर के मुझे इतना परेशान कर दिया कि मुझे अपना नंबर तक चेंज करना पड़ा....ज़रा धीरे डालो, अभी अभी झड़ी हूँ तो थोड़ा दर्द हो रहा है..."
"यदि इस काम मे दर्द ना हो तो फिर मज़ा कैसे आएगा,..."मैने और भी तेज़ी से अपना लंड उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगी, निशा सिसकारी लेते हुए हांप भी रही थी, और अपने होंठो को दांतो से काटने लगी....
"प्लीज़ स्टॉप...."
"इस गाड़ी का ब्रेक फैल हो गया है..."
"इस गाड़ी को अभी रोको, रात बहुत लंबी है और सफ़र भी बहुत लंबा है...."उसने मेरी कमर को कसकर जकड लिया और बोली"तुम्हे क्या, तुम तो मेरे उपर लेटे हुए हो, यहाँ ज़मीन पर नीचे तो मैं लेटी हुई हूँ...उठो अभी..."
दिल तो नही चाहता था कि मैं उसे छोड़ू, लेकिन इसका अहसास मुझे हो गया था कि वो ज़मीन पर नीचे लेटकर बहुत देर तक मुझसे सेक्स नही कर सकती ,इसलिए मैने अपना लंड निकाला और खड़ा हुआ, उके बाद मैने मैने सहारा देकर उसे भी उठाया....
"अब बाकी काम बिस्तर पर करते है..."वो एक बार फिर मुस्कुराइ, और अपने कपड़े उठाकर अपने बेडरूम के तरफ बढ़ी....दिल किया कि निशा को पीछे से पकड़ कर वही लिटा कर चोद दूं, लेकिन फिर सोचा कि जब रात लंबी है तो पूरी रात सोकर इसे छोटी क्यूँ बनाई जाए.......
जैसे कि अक्सर रहिसों के घर मे किसी कोने मे शराब की कुछ बोटले रखी होती है, वैसा ही एक छोटा सा शराबखाना निशा के घर मे भी था...जहाँ एक से एक ब्रॅंडेड दारू रखी हुई थी,...
मैं उस छोटे से शराबखाने की तरफ बढ़ा और वहाँ की चेयर पर बैठकर अपना पेग बनाने लगा, दो -तीन पेग मारकर मैने अपने कपड़े पहने और निशा के पूरे घर को देखा, निशा का घर बाहर से जितना बड़ा दिखता था, वो अंदर से और भी बड़ा और आलीशान था , हर एक छोटी से छोटी चीज़ से लेकर बड़ी से बड़ी चीज़ ब्रॅंडेड थी,...

दारू पीने के बाद मैं क्या सोचने लगता हूँ ये मैं खुद आज तक नही समझ पाया, दारू पीने के बाद मेरे पूरे दिमाग़ मे दुनियाभर की बाते आती है, कभी कभी किसी नेता का भाषण तो कभी कभी किसी बाय्फ्रेंड की पोज़िशन, कभी कोई फिल्मस्टार आक्ट्रेस तो कभी कोई सोशियल वर्कर.....लेकिन इस वक़्त अभी जो मेरे ख़याल मे आ रहा था, वो निशा के बारे मे था,...दारू और निशा दोनो ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया था.....

लेकिन इस वक़्त अभी जो मेरे ख़याल मे आ रहा था, वो निशा के बारे मे था,...दारू और निशा दोनो ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया था.....
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निशा मे एक अजब सी कशिश थी , जो किसी भी मर्द को अपनी तरफ खींच सकती है, फिर चाहे वो निशा के फ्रॅंक बिहेवियर से अट्रॅक्ट हो या उसकी अजब सी शेप मे ढली हुई छाती से या उसकी कट्‌तश फिगर से....मैं निशा से उसकी छातियों की वजह से अट्रॅक्ट हुआ था, और यही कारण था कि मैं अक्सर उसके साथ सेक्स करते वक़्त उसके सीने के उभारों को पकड़ कर मसल्ने लगता था,...
"अरमान, ज़रा उपर तो आना...."
"कौन है बे..."आवाज़ सुनकर मैं बौखलाया, लेकिन फिर ऐसे लगा जैसे कि मुझे निशा ने आवाज़ दी हो,...
"उसी ने बुलाया होगा..."मैने खुद से कहा और से उठकर सीढ़ियो से उपर जाने लगा, मुझे निशा का बेडरूम मालूम था, इसलिए मैं सीधे वही पहुचा....
"निशा...."
"मैं अंदर हूँ बाथरूम मे..."
निशा की आवाज़ ने मेरा ध्यान बाथरूम की तरफ खींचा,
"इस वक़्त बाथरूम मे , क्या कर रही हो..."
"चूत सॉफ कर रही हूँ, यदि इंट्रेस्टेड हो तो आकर सॉफ कर दो..."
"हां ,जैसे दुनिया की सारी इंट्रेस्टिंग काम ख़तम हो गये है , जो मैं अंदर आकर तुम्हारी चूत सॉफ करूँ..."
"फिर मेरा टवल बिस्तर पर पड़ा है , वो दो...."
मैने बिस्तर पर नज़र डाली, वहाँ टवल के साथ साथ ब्लॅक कलर की ब्रा और पैंटी भी रखी हुई थी, मैने टवल उठाया और निशा को आवाज़ दी...
"दो..."बाथरूम का दरवाज़ा पूरा खोलकर निशा ने मेरी तरफ अपना हाथ बढ़ाया, वो पूरी की पूरी पानी मे भीगी हुई नंगी खड़ी थी ,जिसे देखकर मेरे लंड ने एक बार फिर सलामी ठोक दी पैंट के अंदर....
"अरे दो ना..."मुझे अपनी तरफ इस तरह से देखता हुआ पाकर वो बोली"इतने ध्यान से तो तुमने मुझे उस वक़्त भी नही देखा था, जब मैं तुम्हारे साथ पहली बार हम बिस्तर हुई थी..."
मैने कुछ नही कहा और उसके पूरे नंगे गोरे जिस्म को आँखो से नापते हुए उसे टवल दे दिया, और बिस्तर पर आकर लेट गया...एक बात जो मैं अक्सर सोचता कि दुनिया भर की लड़कियाँ बाथरूम मे जाते वक़्त टवल बाहर क्यूँ भूल जाती है....
"ब्रा भी देना...."एक बार फिर बाथरूम से आवाज़ आई और बाथरूम का दरवाज़ा खुला,
"ये लो..."ब्रा और पैंटी दोनो उसके हाथ मे पकड़ाते हुए मैं बोला और मेरी नज़र सीधे उसके सीने पर जा अटकी.....
"साइज़ मालूम है, इनका..."वो दरवाजे को पकड़ कर मस्ती मे बोली और जब मैने कुछ नही कहा तो वो बाथरूम का दरवाज़ा बंद करने लगी....
"निशा...वेट..."
"बोलिए जनाब..."
"जल्दी से बाहर आओ, तुम्हारे बिना चैन नही है..."मैं अपनी इस हरकत पर खुद शरमा गया.....
कुछ देर के बाद निशा बाहर आई, और मेरे बगल मे लेट कर मेरी तरह वो भी छत को देखने लगी...
"तुम सच मे शादी करने वाली हो..."निशा का एक हाथ पकड़ कर मैं बोला...वो अभी अभी नहा के आई थी ,जिसकी वजह से उसके पूरे जिस्म मे ठंडक सवार थी....मेरे सवाल को सुनकर वो थोड़ा हैरान हुई और मेरी तरफ अपना चेहरा करके बोली
"ये तुम क्यूँ पुच्छ रहे हो, "
"बस ऐसे ही..."
"हां यार, सच मे शादी कर रही है और आज की रात हम दोनो की आख़िरी रात होगी..."
"आख़िरी रात..."मैं बुदबुदाया...
"आख़िर तुम्हारे मन मे है क्या..."वो हैरान थी कि मैं अब क्यूँ उससे उसकी शादी के बारे मे पुच्छ रहा हूँ, जबकि पहली बार ही उसे मैने मैने सॉफ मना कर दिया था, खैर हैरान तो मैं खुद भी था....
"यू आर आ स्ट्रेंज मॅन...लेकिन आज कुछ ज़्यादा ही अजीब हरकते कर रहे हो..."मैने उसका जो हाथ पकड़ रखा था वो उसे सहलाती हुई बोली, उसका चेहरा अब भी मेरी तरफ था....निशा को अक्सर ऐसा लगता कि दुनिया भर का सारा सस्पेंस मेरे अंदर ही भरा पड़ा है....
"नही ऐसी कोई बात नही है, मैं तो बस ऐसे ही पुछ रहा था..."कोई तो बात थी जो मेरे अंदर खटक रही थी, ये मैं जानता था....
"अब सारी रात ऐसे ही बोर करोगे या फिर कुछ और........"
वो आगे कुछ और कहती उसके पहले ही मैने उसकी चूत के उपर अपना हाथ रख दिया....
"डाइरेक्ट पॉइंट पे हा..."वो एक बार फिर मुस्कुराते हुए बोली...
"पॉइंट पे तो अब आया हूँ..."मैने उसके पैंटी के अंदर हाथ डाल कर उसकी चूत को सहलाते हुए बोला और अपनी एक उंगली चूत के अंदर डाल दिया...कुछ देर पहले के वाकये से अभी भी उसकी चूत गीली थी...
हम दोनो एक दूसरे को देख रहे थे , आज पहली बार वो मुझे बहुत ही खूबसूरत दिख रही थी, दिल कर रहा था कि उसे चूम लूँ, लेकिन निशा को किस पसंद नही था...
"तुम क्या सोच रहे हो..."वो काँपती हुई आवाज़ मे मेरी तरफ देखकर बोली...जवाब मे मैने अपने दूसरे हाथ की उंगलियो को अपने होंठो पर रखकर इशारा किया कि मैं होतो को अपने होंठो मे भरना चाहता हूँ....मेरे इशारे से निशा थोड़ी अनकंफर्टबल हुई और मुझे कुछ देर तक ना जाने क्या देखती रही.....
"रियली यू वान्ट तो डू इट...???"अपने होंठ पे पर अजीब सी हरकत लाते हुए उसने मुझसे पुछा, मेरी एक उंगली अब भी उसकी चूत के अंदर बाहर हो रही थी.....
"यस...आइ वान्ट टू किस यू..."
मैने बस इतना कहा और वो मेरे होंठो के करीब आई, हम दोनो एक दूसरे की साँसे महसूस कर रहे थे, जो कि हम दोनो को और भी गरम कर रही थी....आज पहली बार निशा के लिए मेरे दिल मे कुछ फीलिंग्स आई थी और वो फीलिंग्स इसलिए थी क्यूंकी निशा आज मुझसे दूर जा रही थी, आज की रात हमारी आख़िरी रात थी, शायद इसीलिए वो मान भी गयी.....
"तुम सच मे बहुत अजीब हो..."मेरे होंठो को अपने होंठो से टच करके वो बोली"बट आइ लाइक यू..."
और इसके बाद मैने समय ना गँवाते हुए उसके होंठो को भर लिया....और उसके उपर आ गया....इसी बीच मैने उसको एक बार छोड़ा वो मेरे किस लेने से हांप रही थी उसके सीने के उभार बहुत जल्दी उपर नीचे हो रहे थे....
"एक बात बताओ"मैं बोला"जब तुम्हे मालूम था कि मैं कुछ देर बाद तुम्हारी ब्रा और पैंटी को उतार दूँगा तो तुमने पहना ही क्यूँ...."
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08-18-2019, 01:14 PM,
#5
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
मेरे ऐसा कहने की देर थी कि वो खिलखिला के हंस पड़ी, और मेरे सर पर अपना हाथ फिराने लगी.....
"तुम सच मे बहुत स्ट्रेज हो..."
"वो तो मैं हूँ..."
मैने दोबारा उसके होंठो को अपने होंठो से चिपका लिया और फिर जमकर चूसने लगा....मैं उसके होंठो को इतना ज़ोर से चूस रहा था कि उसके होंठो पर खून उतरने लगा , और होंठ के किनारे पे मुझे खून की कुछ बूंदे भी दिखी...लेकिन मैं रुका नही और उसे पी गया......

"बहुत टेस्टी है..."
"क्या..."
"तुम्हारे होंठ...लेकिन ज़रा आराम से, दर्द होता है..."निशा बोली.
निशा के बोलने का लहज़ा सीधे मेरे दिल पर लगा, मैं ये तो जानता था कि निशा के लिए मैं सिर्फ़ उसकी हवस मिटाने के हूँ,लेकिन आज वो कुछ बदली-बदली सी लग रही थी...उस पल जब उसने कहा कि "आराम से करो ,दर्द होता है...."तो मैं जैसे उस वक़्त उसका मुरीद हो गया, दिल चाहता था कि मैं बस ऐसे ही उसके उपर लेटा उसे प्यार करूँ और ये रात कभी ख़तम ना हो, दिल चाहता था कि कल की सुबह ही ना हो,लेकिन ये मुमकिन नही था....मेरे दिल मे निशा के लिए आज कुछ और ज़ज्बात थे, एक बार तो मेरे मन मे ख़याल भी आया कि कहीं मैं निशा से...........
नही ये हरगिज़ नही हो सकता, जिन रस्तो पर मैने चलना छोड़ दिया है तो फिर उन रस्तो से गुज़रने वाली मंज़िले मुझे कैसे मिल सकती है......
"यार अब इस सिचुयेशन मे कहाँ खो गये, करो ना..."
"इतनी जल्दी भी क्या है निशा..."मैने बहुत ही प्यार से कहा, इतने प्यार से मैने आज से पहले कब किसी से बात की थी , ये मुझे याद नही.....
"जल्दी तो मुझे भी नही है, लेकिन इसका क्या करे, साली चैन से एक पल जीने भी नही देती...."निशा का इशारा उसकी गरम होती चूत की तरफ था, जो मेरे लंड की राह तक रही थी कि मैं कब निशा को चोदना शुरू करूँ...
लेकिन मैं निशा के उपर से हट कर उसके बगल मे लेट गया और उसमे जो चीज़ मुझे सबसे ज़्यादा पसंद थी उसे सहलाते हुए मैने कहा....
"कुछ देर बात कर लेते है, तब तक तुम नॉर्मल हो जाओगी और तुम्हे दर्द भी कम होगा..."
आज निशा को मैने एक से बढ़कर एक झटके दिए थे और मुझे पूरा यकीन था कि उसे अब भी झटका लगा होगा, मेरा अंदाज़ा सही निकला वो मुझे हैरान होकर देख रही थी.....
"अरमान...आख़िर बात क्या है, सब कुछ सही तो है ना..."मेरे चेहरे को सहलाते हुए निशा ने मुझसे कहा...
"हाँ ,सब ठीक है..."मैं निशा की तरफ देखते हुए बोला लेकिन मेरे दिल मे कुछ और ही था, मैं कुछ अलग ही सपने बुन रहा था.....
"आज फिर दिल करता है कि किसी के सीने से लिपट जाउ....
उसकी आँखो मे आँखे डालकर सारे गम पी जाउ....
हम दोनो रहे साथ हमेशा इसलिए...
दिल करता है कि उसकी तकदीर को अपनी तकदीर से जोड जाउ....
मैं कुछ और भी कहना चाहता था निशा से लेकिन उसने मुझे आगे बोलने का मौका ही नही दिया और बीच मे बोल पड़ी....
"फिर क्या बात है...जल्दी करो सुबह होने वाली है और फिर हम कभी एक साथ नही रहेंगे..."
साँसे रुक गयी थी ,जब उसने छोड़ जाने के लिए कहा.....
दिल ना टूटे मेरा इसलिए...
दिल करता है कि अपने दिल को उसके दिल से जोड़ जाउ.....
"कमऑन अरमान...व्हाट आर यू थिंकिंग ,वो भी अब "वो मुझे बिस्तर पर शांत पड़ा देख कर झुंझला उठी, तब मुझे अहसास हुआ कि निशा के लिए मैं अब भी सिवाय एक सेक्स ऑब्जेक्ट के कुछ नही हूँ और उसके द्वारा कही गयी बातों का मैं 101 % ग़लत मतलब निकल लिया था...मुझे बुरा तो लगा लेकिन साथ ही साथ अपनी भूल का भी अहसास हुआ और अपनी भूल को सुधारने के लिए मैं वापस निशा के उपर चढ़ा.....

"यस अब आए ना लाइन मे, पुट युवर फिंगर इन माइ माउत देन शेक..."वो बोली और मैने वैसा ही किया, मैने अपनी उंगलिया उसके मूह मे डाली और उसकी जीभ से टच करने लगा और फिर कुछ देर बाद अपनी उंगलिया निकाल कर उसका सर पकड़ा और उसे अपनी तरफ खींचा......
"मेरे दूर जाने से यदि खुशी मिलती है तुझे तो बता दे मुझे......
तेरी इस खुशी के लिए मैं तुझे तो क्या इस दुनिया को छोड़ के चला जाउ.....

निशा के मूह से अपनी उंगलिया निकाली और उसे पकड़ कर अपनी तरफ खींचा, जिससे कि उसका चेहरा मेरे करीब आ गया , मैं उसकी हवस से भरी आँखो मे आख़िरी बार अपने लिए प्यार ढूँढ रहा था, लेकिन हुआ वही , मेरे अरमानो का हक़ीक़त से ना तो पहले कोई वास्ता था और ना ही अब था और जब मुझे यकीन हो गया कि वो वही पुरानी निशा है जिसने प्यार को हमेशा हवस की प्यास से नीचे समझा है, तो मैं उसको होंठो को अपने होंठो मे बुरी तरह जकड़ा....
"जानवर बन गये हो क्या..."मुझे तुरंत धकेल कर वो बोली और अपने होंठ पर हाथ से सहलानी लगी....
"सॉरी..."मैं वापस उसके करीब गया और उसकी कमर पर हाथ फिराते हुए उसकी ब्रा को उसके सीने से जुदा किया और एक बार फिर उसके होंठो को अपने होंठो मे बुरी तरह भर लिया...निशा ने इस बार भी पूरी कोशिश की मुझे दूर करने की, लेकिन वो इस बार नाकामयाब रही...लेकिन कुछ देर के बाद मुझे उसकी परवाह होने लगी, उसका दर्द मेरा दर्द बन गया, और मैने उसके गुलाबी होंठो को अपने होंठो से अलग कर दिया और उसकी गान्ड को पकड़ लिया और उसकी गान्ड पर हाथो से दवाब डाला.....
"डर्टी बॉय...."मेरी तरफ झुक कर मेरे कानो के पास आकर वो बोली.
मैने निशा से कुछ नही कहा और उसे पकड़ कर उल्टा घुमा दिया,अब उसकी पीठ मेरे सीने से और उसके नितंब मेरे लंड से टच हो रहे थे,..निशा शायद जान चुकी थी कि अब मैं क्या और कैसे करने वाला हूँ, और वैसे भी जिस लड़की को हर दिन अपने बिस्तर का साथी बदलने की बीमारी हो ,वो कम से कम सेक्स के पोज़िशन तो जान ही जाती है....निशा ने मेरे कहने के पहले ही अपने दोनो हाथ सामने की तरफ बिस्तर पर टिकाए और अपनी गान्ड मेरी तरफ करके थोड़ा झुक गयी और बोली...
"दिस ईज़ कॉल्ड रियल मस्त चुदाई...अब क्यूँ रुके हो, डाल दो अंदर और ऐसा डालना कि अंदर तक दस्तक दे जाए...."
दिल कर रहा था कि निशा का मर्डर कर दूं और फिर उसकी लाश के पास बैठकर ज़िंदगी भर रोऊ, दिल कर रहा था कि सामने की दीवार पर निशा का सर इतनी ज़ोर से दे मारू कि उसका सर ही ना रहे....वो मुझसे ऐसे बात कैसे कर सकती है , जबकि मैं उससे.......... और एक बार फिर दिल के अरमान हवस मे धूल गये, ये मेरे लिए पहली बार नही था.....
"कमऑन अरमान, फक मी...आइ आम वेटिंग..."अपनी गान्ड हिलाती हुई निशा बोली...
मैने अपने कपड़े उतारे और निशा की गान्ड पर अपने हाथ से दबाव बनाने लगा वो अभी से मस्ती भरी आवाज़ निकालने लगी, उसकी पैंटी को नीचे खिसका कर अपने हाथो से उसकी चूत को फैलाया , और अपने लंड को उसकी चूत से टीकाया और धीरे से अंदर की तरफ धक्का दिया....
"आआन्न्न्नह......."निशा की सिसकारिया चालू हो गयी ,अबकी बार खुद मेरे मूह से भी मादक आवाज़े बाहर निकल रही थी.
मेरा आधा लंड उसकी चूत मे दस्तक दे चुका था , जिसका मज़ा निशा अपने नितंबो को अगल बगल हिला कर ले रही थी, मैने एक और धक्का मारा और पूरा लंड उसकी चूत मे समा गया , उसके बाद मैने अपने धक्के तेज कर दिए, मेरे तेज धक्को के कारण उसका पूरा शरीर बुरी तरह हिल रहा था, मैं जब भी अपना लंड अंदर डालता वो अपनी कमर को मेरी तरफ धकेल देती और सामने की दीवार की तरफ अपना चेहरा करके एक लंबी सिसकारी भरती और उसके बाद जैसे ही मैं अपना लंड बाहर निकालता,वो फिर मस्ती मे चार चाँद लगा देने वाली आवाज़ के साथ पहले वाली पोज़िशन पर आ जाती.....एक बार के लिए मैं रुका और उसकी मस्त जाँघो को अपने हाथो से मसल्ते हुए और भी तेज़ी से उसे चोदने लगा, निशा से एक लगाव सा हो गया था मुझे उस वक़्त , इसीलिए जब वो चीखती तो मैं थोड़ी देर के लिए रुक जाता और फिर जब वो वापस नॉर्मल हो जाती तो मैं फिर से शुरू हो जाता...और कभी-कभी जब वो दर्द से चीखती तो मैं अपना लंड एक तेज झटके के साथ उसके चूत मे डाल देता और फिर उसके सीने को तेज़ी से दबाते हुए अपना लंड को उसकी चूत के अंदर ही हिलाने लगता , मेरा ऐसा करने पर निशा मेरी कमर को पकड़ कर मुझे दूर करने की कोशिश करती....

"ओह ययएएसस्सस्स....अरमनणन थन्क्स्स्स्स फॉर दिस..."वो ये नोल्ट बोलते इस बार भी मुझसे पहले झड गयी, मेरा लंड अब भी उसकी चूत मे था , जिसके कारण उसकी चूत से रिस्ता गरम पानी मुझे अपने लंड पर महसूस हुआ....मैं भी अब गेम ख़तम करने वाला था, इसलिए मैने निशा की कमर को पकड़ कर उसकी तरफ झुक गया और उसे बिस्तर पर पूरा औधा लिटाकर उसके उपर आ गया, उसकी चूत का रस पूरे बिस्तर मे फैल रहा था, मैने उसके नितंबो को अलग किया और अपने लंड को एक ही झटके मे अंदर तक घुसा दिया, और अपनी पूरी ताक़त के साथ निशा को चोदने लगा, वो बुरी तरह चीखी...तो मैने कहा कि, बस कुछ देर की बाद है, इसे सह लो....

उसने वैसा ही किया...बिस्तर के सिरहाने को पकड़ कर उसने अपने शरीर को टाइट कर लिया वो झड़ने लगी थी....और मैं उसकी कमर ,उसकी पीठ पर तेज़ी से हाथ फिराते हुई झड गया, मेरा लंड निशा की चूत मे ही था, निशा बहुत थक चुकी थी, साथ मे मैं भी हांप रहा था, मुझे निशा के उपर लेटे लेटे कब नींद आ गयी मालूम ही नही चला....
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08-18-2019, 01:14 PM,
#6
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
सुबह मेरी नींद एक गरम स्पर्श से खुली, जिसे अक्सर लोग ब्लो जॉब कहते है , मैं निशा के बिस्तर पर नंगा लेटा हुआ था और वो मेरे लंड पर अपने गरम गरम होंठ फिरा रही थी,...
"इससे अच्छी और खुशनुमा सुबह क्या होगी अरमान, जब कोई तुम्हे ब्लो जॉब देकर उठाए..."मेरे लंड को चूसना बंद करके अपने हाथ से सहलाते हुए निशा बोली...

करीब 10 मिनट. तक वो मेरे लंड को चुस्ती रही और उसके बाद मैं एक बार फिर झड गया, पिच्छली रात तीन बार झड़ने के कारण पेट मे बहुत दर्द हो रहा था, कमज़ोरी भी महसूस हो रही थी और सर भी बहुत भारी था.....

"मैं चलता हूँ..."बाथरूम से निकल कर मैने अपने कपड़े पहने...

"जाओ, आंड टेक केयर..."

मैं इस इंतज़ार मे अब भी खड़ा था कि कही शायद उसे मेरी आँखो मे कुछ ऐसा दिख जाए, जिससे वो मुझे दौड़ कर गले लगा ले, लेकिन ऐसा नही हुआ, यहाँ तक कि उसने मेरी आँखो की तरफ देखा तक नही, उसकी नज़र अब भी मेरे लंड पर थी, निशा मेरे लंड को देखकर मुस्कुरा रही थी.....

"तुम्हारा होने वाला हज़्बेंड क्या करता है...."

"तुम क्यूँ पुच्छ रहे हो..."

"जनरल नॉलेज के लिए, क्या पता ये क्वेस्चन आइएएस, आइईएस के एग्ज़ॅम मे आ जाए "

"इट'स नोट फन्नी अरमान...तुम जाओ, और आज के बाद समझ लेना कि हम एक दूसरे से मिले ही नही..."

मैने एक झूठी मुस्कान से निशा को देखा और बोला..."तन्हाई मे जीने वाले लोगो को अक्सर उनके छोटे से छोटे सहारे से इतनी मोहब्बत हो जाती है कि वो उनके लिए खुद को मिटा दे.....
यदि तुम्हे कभी किसी से प्यार हो तो मेरी बात पर गौर करना ,वरना लोग तो अपनो को पल भर मे भूल जाते है , मैं तो वैसे भी तुम्हारे लिए गैर हूँ...."

निशा के मन मे हज़ारो सवाल छोड़ कर मैं उसके घर से सीधे बाहर निकल गया, मैं अपने ही रूम की तरफ आ रहा था कि वरुण ने मुझे कॉल की...

"क्या भाई, आने का विचार है या उसी के साथ चिपके रहेगा..."मैने कॉल रिसीव की तो वरुण ताने मारता हुआ बोला...

"बस रूम पर ही आ रहा हूँ..."

"जल्दी आ, तेरे लिए सर्प्राइज़ है, और वो सर्प्राइज़ इतना बड़ा है कि , तू...."

मैं जहाँ था वही खड़ा हो गया और वरुण से बोला"क्या है वो सर्प्राइज़..."

"ह्म्म....तो पहले रूम पे ही आजा,.."और उसने कॉल डिसकनेक्ट कर दी

"फेंक रहा होगा वरुण..."यही सोचते-सोचते मैं रूम पर आया, मैने वरुण को आवाज़ दी लेकिन उसने कोई रेस्पॉन्स नही दिया और फिर जब बाथरूम के अंदर से मुझे शवर के चलने की आवाज़ आई तो मैं समझ गया कि वरुण अंदर है, मैने टाइम देखा 9:30 बज रहे थे, अब इतना टाइम नही था कि मैं आज काम करने जाता, और वैसे भी आज मेरा मूड नही था....मैने रूम की खिड़की खोली और खिड़की से बाहर देखने लगा....तभी मुझे एक आवाज़ सुनाई दी जिसने मुझे अंदर से झकझोर के रख दिया....ऐसा लगा कि दिल की धड़कने रुक गयी हो...

"क्या बात है बे, बहुत दिनो से हवेली मे नही आया..."

यदि मेरी जगह उस वक़्त कोई और होता तो शायद नज़र अंदाज़ कर देता इस आवाज़ को ,लेकिन मेरे लिए ये शब्द ,ये लाइन बहुत मायने रखती थी....मैं पीछे मुड़े बिना ही जान गया था कि मेरे पीछे कौन है , लेकिन इतने महीनो बाद वो कैसे यहाँ आया.....

अभी मैं सोच ही रहा था कि मेरे सर पर एक जोरदार मुक्का पड़ा, मारने वाले ने इतनी ज़ोर से मारा था जैसे कि जनम जनम का बदला ले रहा हो.....वो कोई और नही बल्कि मेरा खास नही मेरा सबसे खास दोस्त अरुण था, और मैं भी उसका सबसे खास दोस्त था.....

"अब साले लौंडीयों की तरह उधर ही देखते रहेगा या फिर गले भी मिलेगा...."उसकी आवाज़ मे मुझे अपने लिए वही अपनापन महसूस हुआ ,जो कॉलेज के दिनो मे हुआ करता था, मैं एक झटके मे पीछे मुड़ा और अरुण को कसर पकड़ कर गले लगा लिया.....मैं और अरुण एक दूसरे के लिए इतने खास थे कि यदि हम दोनो गे होते(जो कि नही थे) तो आज एक दूसरे से शादी कर लिए होते......

अपने गुस्से और मुझसे नाराज़गी का एक और सॅंपल देते हुए उसने मुझे कसकर एक लात मारी और बोला"साले गान्ड मरवा रहा था तू यहाँ, तेरा नंबर चेंज हो गया, घर से बिना बताए गायब है और यहाँ तक कि...यहाँ तक कि..."मुझ पर एक लात का प्यार और करते हुए बोला"यहाँ तक कि तूने मुझे भी नही बताया, कहाँ गयी तेरी वो बड़ी बड़ी बाते..."

हमारी दुनिया मे एक कहावत बहुत मश हूर है कि यदि डूबते को तिनके का सहारा मिले तो भी बहुत होता है ,लेकिन मुझे तो आज पूरा का पूरा एक जहाज़ मिल गया था अरुण के रूप मे.....

"साला , खुद को इंजिनियर बोलता है, तूने सब बक्चोद इंजिनीयर्स का नाम बाथरूम मे मिला दिया...."वो अब भी मुझ पर बहुत गुस्सा था....

"छोड़ बीती बातों को और बता यहाँ कैसे आया और वरुण कहाँ है, कहीं तूने उसका मर्डर तो नही कर दिया..."

"बिल्कुल ,सही समझा बे, उसकी डेत बॉडी बाथरूम मे पड़ी है, प्लीज़ पोलीस को इनफॉर्म करना...."


कुछ देर तक हम दोनो ने एक दूसरे को देखा और फिर ज़ोर से हंस पड़े....

"अब चल बता, तू यहाँ क्यूँ है..."अपनी हँसी रोक कर अरुण बोला, वो अब सीरीयस था....

"सब कुछ छोड़ छाड़ के आ गया मैं, घरवाले देश के बाहर है, ना तो उन्हे कोई फरक पड़ता है और ना ही मुझे..."

"तेरे भाई की शादी होने वाली थी , उस वक़्त जब तू घर छोड़ कर यहाँ आ गया था..."

"साला मेरी ग़लतियो की लिस्ट पकड़ के बैठ बया है...अब जान निकाल कर ही दम लेगा"मैने अंदर ही अंदर बहुत ज़ोर से चिल्लाया...

"वो सब तो छोड़"अरुण का चेहरा फिर लाल होने लगा," मुझे ये बता कि तूने मुझे कॉल क्यूँ नही किया, कॉलेज मे तो मेरा बेस्ट फ्रेंड बना फिरता था...."

अरुण के इस सवाल का मेरे पास कोई जवाब नही था और यदि मैं उससे कुछ कहता भी तो क्या ये कहता कि "मुझमे अब जीने की चाह नही है..."या फिर ये कहता कि"एंजल के जाने के बाद जैसे मेरे दिल ने धड़कना बंद कर दिया है..."

"कुछ बोलेगा..."वो मुझपर फिर चिल्लाया....

"रीज़न चाहिए तुझे, तो सुन....जब मैं अपनी बी.टेक की खाली डिग्री लेकर घर गया तो जानता है मेरे साथ क्या सलूक हुआ...घर पर बड़े भाई की शादी की बात चल रही थी इसलिए घर मे बहुत लोग आते जाते रहते थे, और जब कोई मेरे बारे मे पूछता तो सब यही कहते कि....हमारे खानदान मे सबसे खराब मैं हूँ, मैं ही एक अकेला शक्स हूँ, जिसने अपने खानदान का नाम डूबा दिया...ऐसा इसलिए हुआ क्यूंकी मेरे पास पैसा नही था, मेरे पास नौकरी नही थी.....यदि मुझसे कही भी थोड़ी सी भी ग़लती हो जाती तो मेरी उस ग़लती को मेरी एजुकेशन से जोड़ दिया जाता....मैं अपने ही घर मे रहकर पागल हुआ जा रहा था, और फिर जिस दिन लड़की वाले हमारे घर आए तो भाई ने एक छोटी सी बात पे सबके सामने मुझपर हाथ चला दिया....बस उसी समय मेरे दिल और दिमाग़ दोनो ने गला फाड़ -फाड़ के कहा कि बस बहुत हो गया, और मुझे सबसे बुरा तब लगा जब मुझे किसी ने नही रोका...सब यही चाहते थे कि मैं उनकी ज़िंदगी से चला जाउ, सो मैने वही किया...."इतना बोलते बोलते मैं बहुत एमोशनल हो गया था, अरुण को अपनी बीती ज़िंदगी के कुछ पल बताकर मैने अपने ज़ख़्म फिर हरे कर लिए थे....वरुण भी तब तक आ चुका था और दरवाज़े पर चुप चाप खड़ा मेरी बाते सुन रहा था......
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08-18-2019, 01:14 PM,
#7
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
कुछ देर तक हम तीनो मे से कोई कुछ नही बोला, और फिर अरुण ने अपना बॅग अपनी तरफ खीच कर खोला और MM की एक बोतल निकाल कर बोला...
"ये ले तेरा गिफ्ट..."
मेरी नम आँखो मे एक हँसी झलक आई "तू साले अभी तक भुला नही..."
ये हम दोनो की एक खास आदत थी कि हम दोनो ने एक दूसरे को गिफ्ट के तौर पर हमेशा दारू ही गिफ्ट की थी...और सबसे बड़ी बात ये कि अरुण ने ही मुझे दारू पीने की लत भी लगाई थी......
" आइ लव दारू मोर दॅन गर्ल्स..."बोलते हुए मैने उसके हाथ से बोतल छीनी और वरुण की तरफ देख कर बोला"आज रात का जुगाड़ हो गया बे..."
मेरे ऐसा कहने पर वरुण के साथ - साथ अरुण भी हंस पड़ा...
वरुण और अरुण ही मेरे प्रेज़ेंट लाइफ मे मेरे अपने थे, अरुण के पापा इंस्पेक्टर थे और अरुण रेलवे मे किसी अच्छी पोस्ट पर था...
"शादी हो गयी तेरी..."MM को एक किनारे रखकर मैने अरुण से पुछा....
"कहाँ शादी , अभी तो लाइफ एंजाय करनी बाकी है...शादी करते रहेंगे आराम से...."
"वरुण, ले पेग तो बना, सर दर्द कर रहा है...."
"अरमान, ये निशा कौन है बे "
"है , मोहल्ले मे रहने वाली एक लड़की..."मैं बोला....
"मैने सोचा नही था कि उसके जाने के बाद तू किसी लड़की के साथ रीलेशन बनाएगा..."अरुण जानता था कि मुझे उसका नाम लेना अब पसंद नही है, इसलिए उसने उसका नाम नही लिया....
"सोचा तो मैने भी नही था, लेकिन मालूम नही ये कैसे हो गया...."
"ले पकड़..."इसी बीच वरुण ने हम तीनो का पेग तैयार कर दिया , जिसे चढ़कर वरुण बोला"यार अरुण, मैने इससे कितनी बार इसकी बीती ज़िंदगी के बारे मे पुछने की कोशिश की, लेकिन इसने मुझे एक बार भी नही बताया और हर बार किसी ना किसी बहाने से टाल दिया...."
"दिमाग़ मत खा यार तू अब, एक और पेग बना...मस्त दारू है.."मैने एक बार फिर वरुण की बात को टालने की कोशिश की....लेकिन शायद आज मैं कामयाब नही रहूँगा इसका मुझे अंदाज़ा हो गया था.....
"आज तो खुलासा होकर ही रहेगा वरुण..."अपना पेग गले से नीचे उतार कर अरुण बोला"चिंता मत कर ,आज ये सब कुछ बकेगा...."
"मैं कुछ नही बताने वाला..."
"नही बताएगा..."
"बिल्कुल भी नही..."
"एक बार और सोच ले..."
"मैने बोल दिया ना एक बार..."
"फिर वो बाथरूम वाली बात मैं वरुण को बता दूँगा, सोच ले..."
अरुण ने मेरी दुखती नस को पकड़ लिया था, दो-तीन पेग मारने से सर भी एकदम फ्री हो गया था, एक दम बिंदास......
MM की बोतल खाली हो चुकी थी और मैं भी अब बिल्कुल तैयार था वरुण को वो सब बताने के लिए ,जो मैं नही बताना चाहता था....
"एक और पेग बना...."मैने कहा

हर वो चाह ख़तम हो जाती है , जिसकी हमे तमन्ना होती है...सपने हमारी बुरी हक़ीक़त के सामने दम तोड़ देते है और बचता है तो सिर्फ़ रख ,यादों की राख ,जिसके सहारे हम फिर अपनी बाकी की ज़िंदगी गुज़ारते है, कभी -कभी आपके साथ ऐसा कुछ हो जाता है जिसकी आपने कभी कल्पना तक नही की होती है....
"कॉलेज मे जाकर पढ़ाई करना बे, लौंडिया बाज़ी मे बिज़ी मत रहना और ना ही इस चक्कर मे पड़ना..."मेरा भाई मुझे जाते हुए नसीहत दे रहा था वो भी बड़े प्यार से...
"जी भाई..."
"दारू, सिगरेट इन सबको छुआ भी तो सोच लेना...."
"जी भाई..."
"और यदि लड़ाई झगड़े की एक भी खबर घर पर आई तो उसी वक़्त तेरा टी.सी. निकलवा दूँगा समझा..."
"जी भाई..."मेरा भाई मुझे ठीक उसी तरह समझा रहे थे ,जैसे कि आर्मी का कर्नल अपने आर्मी को इन्स्ट्रक्षन फॉलो करने के लिए कह रहा हो...विपेन्द्र भैया मुझे कॉलेज मे छोड़ने आए थे, और मेरे लाख मना करने के बावजूद मेरे रहने का इंतज़ाम हॉस्टिल मे कर दिया था और अभी जाते वक़्त मुझे सब बता के जा रहे थे कि मुझे क्या करना है और क्या नही करना है.....भाई के जाने के बाद मैं वापस हॉस्टिल आया, इस दौरान जो एक बात मेरे मन मे खटक रही थी , वो थी कल हमारी होने वाली रॅगिंग , कुछ दिनो पहले ही न्यूज़ पेपर मे पढ़ा था कि एक स्टूडेंट ने रॅगिंग से तंग आकर अपनी जान दे दी थी.... कॉलेज वालो ने एक अच्छा काम किया था और वो था कि फर्स्ट एअर का हॉस्टिल हमारे सीनियर्स से अलग था, लेकिन शाम होते-होते तक पूरे हॉस्टिल मे ये खबर फैल गयी कि आज रात को 10 बजे सीनियर्स हॉस्टिल मे रॅगिंग लेने आएँगे, जब से ये सुना था, दिल बुरी तरह धड़क रहा था, हर आधे घंटे मे पानी पीने के बहाने निकलता और देख कर आता कि कही कुछ हुआ तो नही है, वो पूरी रात साली मेरी ज़िंदगी की सबसे खराब रात थी,...पूरी रात मैं चैन से नही सो पाया, उस रात कोई नही आया और दूसरे दिन मेरी नींद मेरे रूम को किसी ने खटखटाया तब खुली....
"बहुत बेकार सोता है बे..."एक लड़का अपना बॅग लिए रूम के बाहर खड़ा था, और फिर मुझे पकड़ कर बाहर खींच लिया,
"ये, ये क्या कर रहा है..."मैने झल्लाते हुए बोला...
"चल मेरा समान उठवा यार...बहुत भारी है...."
"तू भी इसी रूम मे रहेगा..."
"बिल्कुल सही समझा, और मेरा नाम है अरुण...."
"अरमान..."मैने हाथ मिलाते हुए उससे कहा, और जब उसका पूरा समान रूम के अंदर गया तो मैं नहाने के लिए चल दिया....
आज उस आदत को छोड़े हुए तो बहुत दिन हो गये है, लेकिन उस समय मेरी एक अजीब आदत थी, मैं जिस भी लड़के से मिलता तो सबसे पहले यही देखता कि वो मुझसे ज़्यादा हॅंडसम है या नही, और अरुण को देखकर मैने खुद से चीख-चीख कर यही कहा था कि "मैं इससे ज़्यादा हॅंडसम हूँ...."
"तू आज कॉलेज नही जाएगा क्या..."कॉलेज के लिए तैयार होते हुए मैने अरुण से पुच्छा, अरुण हाइट मे मेरे जितना ही था, लेकिन उसका रंग कुछ सावला था....
"जाउन्गा ना..."
"9:40 से कॉलेज शुरू है..."
"तो...."बिस्तर पर पड़े पड़े उसने कहा...
"तो , तैयार नही होगा क्या ,9:20 तो कब के हो गये..."
"देख, मैं कोई लौंडिया तो हूँ नही , जो पूरे एक घंटे तैयार होने मे टाइम लगा दूँ और वैसे भी मैं घर से नहा के चला था तो आज नहाने का सवाल ही नही उठता..."
"लग गयी इसे हवा..."
इसके बाद मैने इतना देखा कि , 9:30 बजते ही उसने अपना बॅग उठाया और रूम मे लगे शीशे मे एक बार अपना फेस देखा और मेरे साथ हॉस्टिल से बाहर आ गया....
फर्स्ट एअर की क्लासस मे थोड़ा चेंज किया गया था, सीनियर्स हमारी रॅगिंग ना ले पाए ,इसलिए हमारी क्लास को एक घंटे पहले ही शुरू कर दिया था और सीनियर्स की क्लास छूटने के एक घंटे पहले ही हमारा डे ऑफ हो जाता था.....लेकिन कुछ सीनियर्स ऐसे भी होते है जिनके पिच्छवाड़े मे ज़्यादा खुजली होती है और वो हमारी टाइमिंग मे ही कॉलेज आ जाते थे,...
"अबे तेरी ब्रांच कौन सी है..."रास्ते मे मैने उससे पुछा...
"मेकॅनिकल..."अरुण ने जवाब दिया,
"मेरी भी मेकॅनिकल..."थोड़ा खुश होते हुए मैने कहा"मतलब कि हम दोनो एक ही क्लास मे बैठेंगे..."
"अबे रुक..."मुझे अरुण ने रोका, हम उस समय कॉलेज से थोड़ी ही दूर मे थे, या फिर कहे कि हम कॉलेज पहुच गये थे...
"क्या हुआ..."
"उधर देख, कुछ सीनियर्स खड़े है...पीछे के रास्ते से चल..."
"तुझे मालूम है दूसरा रास्ता..."
"मुझे सब मालूम है , चल आजा..."हम दोनो ने वही से टर्न मारा और कुछ देर पीछे चलने के बाद झड़ी झुँझटी मे उसने मुझे घुसा दिया....
"तुझे पक्का मालूम है रास्ता..."
"अबे मेरे भाई के कुछ दोस्त यहाँ से पास आउट हुए है , उन्होने ही मुझे बताया था इस रास्ते के बारे मे...."
जैसे तैसे करके हम दोनो आगे बढ़ते रहे और फिर मुझे कॉलेज की दीवार भी दिखने लगी, कॉलेज के अंदर जाने का एक और रास्ता है, ये मुझे अरुण ने बताया था...जब हम दोनो उस झड़ी-झुँझटी वाले रास्ते से निकल कर बाहर आए तो मुझे वो गेट दिखा , जिसके बारे मे अरुण ने कहा था, वो गेट कॉलेज मे काम करने वाले वर्कर्स के लिए था, जिनका घर वही पास मे था.....
"कोई फ़ायदा नही हुआ, "अरुण बोला"वो देख साली सीनियर गर्ल्स खड़ी है, लिए डंडा..."
दुनिया मे 99 % लड़किया खूबसूरत होती है और जो 1 % बचती है वो आपके कॉलेज मे रहती है, ऐसा मैने कही सुना था, लेकिन मेरी आँखो के सामने अभी 5-6 सीनियर लड़किया खड़ी थी , जो एक से बढ़कर एक थी, उन 5-6 सीनियर गर्ल्स को देखकर ही ऐसा लगने लगा था जैसे की दुनिया की 99 % खूबसूरत लड़किया मेरे कॉलेज मे ही पढ़ती हो....
"यार, क्या माल है..."मैने अरुण से कहा...
"चुप कर और उन्हे देखे बिना सीधे चल, यदि पकड़ लिया तो बहाल कर देंगी..."
"अबे ये लड़किया है, इतना क्यूँ डर रहा है...घुमा के दूँगा एक हाथ सब बिखर जाएँगी यही..."मैं मर्दाना आवाज़ मे बोला,
"अभी तो तू इनको बिखेर देगा, लेकिन जब इन्ही लड़कियो के पीछे पूरे सीनियर्स आएँगे तब क्या करेगा...."
"फाइनली करना क्या है, ये बता..."
"कुछ नही करना बस चुप चाप अंदर घुस जाना..."
"डन..."मैने ऐसे कहा जैसे कोई बहुत बड़ा मिशन पूरा कर लिया हो.
हम दोनो उन लड़कियो की तरफ बिना देखे सामने चले जा रहे थे, और जब हम ने उन लड़कियो को क्रॉस किया तो उस समय दिल की धड़कने बढ़ गयी, मन मचल रहा था कि उनको देखु, उनके सीने को देखकर अपने अरमान पूरा करूँ...लेकिन मैने ऐसा कुछ भी नही किया और चुप चाप सामने देखकर चलता रहा....
"ओये मा दे लाड़ले..."हम बस गेट से अंदर ही घुसने वाले थे कि उन लड़कियो ने आवाज़ दी....
"शायद मेरे कान बज रहे है..."
"नही बेटा ,ये कान नही बज रहे है , ये उन गोरी-गोरी चुहिया की आवाज़ है..."
"तो अब क्या करे, तेज़ी से अंदर भाग लेते है, कॉलेज के अंदर वो रॅगिंग नही ले पाएँगी..."
"अभी भागने का मतलब है इनका ध्यान खुद की तरफ खींचना, बाद मे ये और भी बुरी तरह से रॅगिंग लेंगी..."
"फाइनल बता , करना क्या है..."मेरे कदम वही रुक गये थे और पसीने से बुरा हाल था, उस वक़्त मैने सोचा था कि शायद अरुण मे थोड़ी हिम्मत होगी,लेकिन जैसे ही उसको देखा , तो जो मेरे मूह से निकला वो ये था...
"साला ये तो मुझसे भी ज़्यादा डरा हुआ है...."
"मा दे लाड़लो , सुनाई देता है क्या तुम दोनो को इधर आओ..."जिन लड़कियो को कुछ देर पहले मैं स्वर्ग की अप्सरा समझ कर लाइन मारने की सोच रहा था ,वो अब नरक की चुड़ैल बन गयी थी...
"जी...जी...मॅम , आपने हमे बुलाया..."अरुण उनके पास जाकर बोला, मैं उसके पीछे खड़ा था...
"तू हट बे..."अरुण को ज़ोर से धक्का देकर उन चुदैलो ने मेरी तरफ देखा...
"और चिकने क्या हाल है..."
"सब बढ़िया..."काँपते हुए मैने कहा, उस समय मैं पूरी तरह पसीने से भीग चुका था...
"सिगरेट पिएगा..."उनमे से एक लड़की ने सिगरेट निकाली और मेरी तरफ बढ़ाकर पुछि....
मैने एक दो बार सिगरेट पी थी, लेकिन किसी दूध पीते बच्चे की तरह, कश खींचा और फिर धुए को बाहर फेक दिया....मैं यहाँ ये सोच कर आया था कि जिस तरह मैं हमेशा से स्कूल मे टॉपर था , उसी तरह यहाँ भी टॉप करूँगा, और सिगरेट , शराब और लड़की को बस दूर से देखकर मज़ा लूँगा....
"चल सिगरेट जला..."उन चुदैलो मे से एक चुड़ैल ने सिगरेट मेरे मूह मे फँसा दी और तभी मेरे मन मेरे बड़े भाई के द्वारा कही गयी बात आई...
"यदि सिगरेट और दारू को छुआ भी तो सोच लेना..."
"जी भाई..."
"मैं सिगरेट नही पीता सॉरी..."उन लड़कियो ने जो सिगरेट मेरे मूह मे फँसाई थी उसे एक झटके मे मैने मूह से निकाल कर ज़मीन पर फेक दिया, जिससे उनका पारा आसमान टच कर गया...
"क्यूँ बे लौडे,तू क्या समझा कि पीछे के रास्ते से आएगा तो बच जाएगा और तुझमे इतनी हिम्मत कहाँ से आई जो तूने सिगरेट को फेक दिया..."
उनके मूह से गाली सुनी तो मुझे यकीन ही नही हुआ कि एक लड़की भी गाली दे सकती है, मैं आँखे फाड़-फाड़ के उन लड़कियो को देख रहा था....तभी उनमे से किसी का फोन बजा और वो सब चली गयी लेकिन जाते-जाते उन्होने मुझे धमकी दे डाली कि वो मुझे इस कॉलेज से भगाकर रहेगी.......
"तेरी तो लग गयी बेटा...."उनके वहाँ से जाने के बाद अरुण मेरे पास आया...
"अब क्लास चले..."
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08-18-2019, 01:15 PM,
#8
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
जब तक हम क्लास के अंदर नही पहुचे अरुण रॅगिंग के बारे मे बता-बता कर डराता रहा, लेकिन मैं ऐसे रिएक्ट कर रहा था ,जैसे कि मुझे कोई फरक ही ना पड़ता हो ,लेकिन असलियत ये थी कि ये सब सिर्फ़ एक दिखावा था, मैं खुद भी अंदर से बहुत ज़्यादा डरा हुआ था....
"वो देख उस चश्मे वाली को, देसी आम लग रही है, एक बार खाने को मिल जाए तो मज़ा आ जाए..."
सरीफ़ तो मैं भी नही था, लेकिन इस तरह खुले मे सबके सामने ऐसी बाते करने से मैं परहेज करता था , जिससे सबको अक्सर यही भरम होता था कि मैं बहुत बड़ा सरीफ़ हूँ और अक्सर मेरे एग्ज़ॅम के रिज़ल्ट इस बात पर मुहर लगा देते थे...लेकिन मुझे ये नही मालूम था कि मेरा जितना भी अच्छा वक़्त था वो ख़तम हो चुका था और मैं यहाँ अपनी ज़िंदगी की जड़े खोदने आया था.....
"फर्स्ट क्लास किसकी है...."मैने अरुण से पुछा,...
"अबे, मेरा भी आज पहला दिन है...और अभी से भेजा मत खा..."
फर्स्ट एअर मे सभी ब्रांच वालो का कोर्स सेम होता है, इसलिए दो-दो ब्रांच वालो को एक साथ अरेंज किया गया था, मेरी और अरुण की ब्रांच मेकॅनिकल थी , लेकिन हमारे साथ माइनिंग ब्रांच के भी स्टूडेंट्स थे, और मुझे जो एक बात मालूम चली वो ये थी कि ,मुझे सिर्फ़ अपने ब्रांच के सीनियर्स से डरने की ज़रूरत है और मैं हॉस्टिल मे रहता हूँ तो इसलिए मेरी रॅगिंग केवल हॉस्टिल के सीनियर्स ले सकते है, जो सीनियर लोकल है या फिर सिटी मे रहते है, वो यदि तुम्हारी रॅगिंग लें तो तुम उन्हे पेल सकते हो और यदि सिटी वाले कोई लफडा करे तो हॉस्टिल वाले साथ देते है, ऐसा रूल वहाँ चलता था.....
"कुछ भी बोल अजय , लेकिन कॉलेज मस्त है, यहाँ की माल भी मस्त है..."पीछे वाले बेंच पर अपने दोनो हाथ टिका कर अरुण बोला, इतने देर मे शायद वो मेरा नाम भूल गया था....
"अरमान, नोट अजय..."
"ले ना यार अब खा मत..."
"पता नही किससे पाला पड़ा है..."मैं बुद्बुदाया और फिर सामने देखने लगा....
"गुड मॉर्निंग स्टूडेंट्स..."अपने सीने से एक बुक चिपका कर एक मॅम अंदर आई, मॅम क्या वो तो पूरी माल थी माल , 5'8" लगभग हाइट , मॉडेल्स वाली कमर, गोरा रंग....उसे क्लास के अंदर आता देखकर सभी खड़े हो गये और कुछ लड़को का खड़ा भी हो गया ,
"साला ये कॉलेज है या गोआ का बीच, जिधर नज़र घूमाओ एक से बढ़कर एक दिखती है..."अरुण अपने ठर्कि अंदाज़ मे धीरे से बोला....
उसके बाद कुछ देर तक इंट्रोडक्षन चला, जिसमे हमे उस मॅम का नाम मालूम चला,...उस 5'8" हाइट वाली मॅम का नाम दीपिका था, और वो हमे कंप्यूटर साइन्स पढ़ने आई थी, साली जितनी ज़्यादा गोरी थी उतना ही काला उसका दिल था, क्लास मे आते ही उसने एक साथ 10 असाइनमेंट दे दिए और बोली कि हर 3 दिन मे वो एक असाइनमेंट चेक करेगी और तो और नेक्स्ट मंडे को टेस्ट का बोलकर उसने सबकी फाड़ के रख दी.....
"ये लौदी है कौन, इसकी माँ की..."अरुण रोने वाली स्टाइल मे बोला" बाहर मिले ये गान्ड मार लूँगा इसकी..."
"कंट्रोल भाई..."उसके कंधे को सहलकर उसे दिलासा देते हुए मैं बोला.....
"घंटा का कंट्रोल, इसे तो हवेली मे ले जाकर चोदुन्गा,..."
"हवेली...."
"तू बच्चा है अभी, राज कॉमिक्स पढ़, ये सब बड़े लोग करते है..."
अरुण क्या कहना चाहता था, ये तो मेरे सर के उपर से निकल गया, दीपिका मॅम ने आते ही सबकी फाड़ डाली थी, ये तो सच था, लेकिन सच ये भी था कि उस एक क्लास मे ही आधे से अधिक लड़के एक दूसरे को बोलने लगे थे कि "सीएस वाली मॅम तेरी भाभी है...."
दीपिका मॅम के मस्त लंबे-लंबे बाल थे,....सर के , और उसके बाल अक्सर उसके चेहरे पर आ जाते, जिन्हे किसी फिल्मी आक्ट्रेस की तरह अपने सामने आए बालो को वो पीछे करती, उस पीरियड मे हमारी क्लास की लड़कियो की फुल2 बेज़्जती होती थी, यूँ तो पूरा कॉलेज फुलझड़ियों से भरा पड़ा था ,लेकिन हमारे ब्रांच की लड़किया कॉमेडी सर्कस की भरती थी, सिवाय एक दो को छोड़ कर , उन्हे कोई नही देखने वाला था ,क्यूंकी जब हीरा सामने हो तो कोयले की चाह कौन करेगा....
"तुम्हारा नाम क्या है....""सुनाई नही देता क्या..."
"अबे तुझे बोल रही है ,खड़े हो..."अपनी कोहनी को अरुण ने मेरे पेट मे दे मारा और मैं जैसे अपने ख़यालो से बाहर आया...इस तरह मुझे खड़ा करने से मैं थोड़ा हड़बड़ा गया था, जिसके कारण कुछ स्टूडेंट्स हँसे भी थे.....
"येस मॅम..."मैं उठ खड़ा हुआ, मेरी हालत उस समय ठीक वैसी थी ,जैसे एक बकरे की हालत कसाई को देखकर होती है,
"पहले ही दिन, पहले ही क्लास मे बेज़्जती..."सच बताऊ, तो मेरी उस वक़्त पूरी तरह फटी हुई थी, ना जाने वो क्या बोल दे....
"तुम अपनी कॉपी लेकर इधर आओ..."दीपिका मॅम ने मुझे सामने बुलाया....

दिल की धड़कनें बढ़ने लगी और यही ख़याल आता रहा कि दीपिका मॅम कहीं कुछ पुच्छ ना ले, क्यूंकी अभी तक ना तो मैने कुछ लिखा था और ना ही कुछ पढ़ा था, अभी तक मेरा ध्यान सिर्फ़ और सिर्फ़ उसी पर था....
"यहाँ मैं कॉमेडी कर रही हूँ क्या...."
"नो मॅम..."अपना सर झुकाए मैं किसी बच्चे की तरह सामने खड़ा था, और उस समय का इंतज़ार कर रहा था ,जब वो गुस्से से चिल्लाती हुई मेरी कॉपी फेक दे और मैं फिर अपनी कॉपी उठाकर वापस अपनी जगह पर बैठ जाऊ.....
"नाम क्या है तुम्हारा..."
"अरमान...."
"क्या अरमान है तुम्हारे,...ज़रा सबको बताओ..."
"सॉरी मॅम, आगे से कुछ नही करूँगा...."ये तो मैने मॅम से कहा , लेकिन मैं उसे कुछ और भी बोल सकता था और वो ये था"मेरे अरमान ये है कि तुझे पटक-पटक कर चोदु, कभी आगे से तो कभी पीछे से...."
"सिट डाउन, और दोबारा मेरी क्लास मे कोई हरकत करने से पहले सोच लेना..."
अपना मूह लटकाए , मैं वापस अपनी जगह पर आया ,जहाँ अरुण बैठा मज़े ले रहा था....
"अब चुप हो जा..."खुन्नस मे मैने कहा और मेरी आवाज़ ज़रा तेज हो गयी ,जिससे वो 5'8" हाइट वाली फिर भड़की और मुझे एक बार फिर से खड़ा किया....
"वो मॅम उससे मैं कुछ पुछ रहा था..." दीपिका मॅम, मेरा गला दबाती उससे पहले ही मैने बोल दिया....
"तुम भी खड़े हो..."अबकी बार इशारा अरुण की तरफ था, और जब मॅम ने उसे खड़े होने के लिए कहा तो उसके चेहरे का रंग भी बदल गया,...
"क्या पुछ रहा था ये तुमसे..."
"वो मॅम, बाइनरी को ओकटल मे कॉनवर्ट करने की मेतड, पुछ रहा था..."झूठ बोलते हुए अरुण ने मेरी तरफ देखा और सारी क्लास ने हम दोनो की तरफ निगाहे डाली...
"गेट आउट...."
"क्या..."
"मेरी क्लास ने बाहर जाओ और आज का तुम्हारा अटेंडेन्स कट, और अगली क्लास मे आओ, तो ज़रा ध्यान से, क्यूंकी यदि नेक्स्ट क्लास मे तुमने कोई हरकत की तो असाइनमेंट डबल हो जाएगा.....इस आस मे कि मॅम का दिल थोड़ा दरियादिल हो और वो मुझे वापस नीचे बैठा दे , इसलिए मैं थोड़ी देर अपनी जगह पर खड़ा रहा,...लेकिन वो इस बीच हज़ारो बार मुझे बाहर जाने के लिए चिल्ला चुकी थी , और फिर उसने आख़िरी बार प्रिन्सिपल के पास ले जाने की धमकी दी...पूरी क्लास के सामने मेरी इज़्ज़त मे चार चाँद लग चुके थे, लेकिन जब दीपिका मॅम ने प्रिन्सिपल का नाम लिया तो मैं किसी भीगी बिल्ली की तरह क्लास से बाहर आया.......
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08-18-2019, 01:17 PM,
#9
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
मुझे अब भी याद है उस दिन मैं पूरे 40 मिनट. क्लास के बाहर खड़े रहा, और फिर जब दीपिका मॅम का पीरियड ख़तम हुआ और वो बाहर निकली...लेकिन मेरी तरफ गुस्से से अपनी नाक सिकोड कर वहाँ से आगे चली गयी, और जब मैं क्लास मे घुसा तो तब सभी की नज़रें मुझ पर ही टिकी हुई थी.....
"आओ बेटा अरमान, क्या पूरे हुए आपके दिल के अरमान..."
"चुप रह साले, वरना यही फोड़ दूँगा, मुंडा मत बांका..."
"ओ तेरी, सॉरी यार...यदि तुझे बुरा लगा हो तो..."अरुण बोला...
उस दिन उस क्लास मे दो लोग ऐसे थे, जिन्हे मैं चाहकर भी नही भुला सकता हूँ, एक तो मेरा खास दोस्त बना और एक लड़की ऐसी थी, जिसे देखकर ही मेरे मूह से गलियों की पवित्र धारा निकलने लगती थी....
"नवीन..."एक ने पहले अरुण की तरफ हाथ बढ़ाया और फिर मेरी तरफ....
नवीन माइनिंग ब्रांच का था, और वो भी थोड़ा सावला था, नवीन को देखकर एक बार फिर मैने खुद से चिल्लाकर कहा कि"मैं तो इससे ज़्यादा हॅंडसम हूँ...."
"भाई, अगली क्लास से थोड़ा संभाल कर..."मुझे नसीहत देने लगा वो.
दूसरी क्लास तो शुरू हो चुकी थी, लेकिन टीचर अभी तक नही आया था,लड़के हो या लड़कियाँ सभी सब्ज़ी-मॅंडी की तरह चीख रहे थे, और उसी दौरान एक लड़की सामने आई और हम सबको शांत रहने के लिए कहा....लेकिन हालत पहले जैसे ही रहे...जिससे वो लड़की सामने वाले बेंच पर बैठे लड़को से कुछ बोली, और सामने बेंच पर बैठे छूतियो मे सबको शांत रहने के लिए कहा, कुछ देर लगा सबको शांत करने मे....
"गुड मॉर्निंग फ्रेंड...माइ नेम ईज़ शेरीन...."
"तो क्या चुसेगी सब का..."अरुण ने एक पल बिना गवाए ये बोला, सुन तो सबने लिया था, लेकिन सब साले रियेक्शन ऐसे कर रहे थे, जैसे कानो मे रूई डाल के आए हो, सामने खड़ी उस लड़की ने भी सुन लिया था, लेकिन वो भी ऐसे रिएक्ट कर रही थी, जैसे उसने सुना ना हो.....
"ये तो चुदेगि, साली बीसी..."
"गान्ड मे लात मारकर बैठाओ इसको..."पहले अरुण और फिर उसके सुर मे सुर मिलाता हुआ नवीन बोला, मैं भी जोश मे आ गया और बोला
"इस इंट्रोडक्षन वाली लौंडिया को नंगी करके पूरे कॉलेज मे दौड़ाना चाहिए...."
"मैं बोलता हूँ कि मुट्ठी मार के साली के फेस पे डाल देना चाहिए, होशियारी छोड़ने आई है यहाँ...."
उधर शेरीन के बाद बाकी की लड़कियो ने भी अपना इंट्रोडक्षन दिया, ये सिलसिला और भी आयेज चलता यदि थर्रमोडीनॅमिक्स के सर वहाँ ना आए होते तो....बेसिकली हमारा सब्जेक्ट था,बेसिक मेकॅनिकल इंजिनियरिंग, (बीएमई) , लेकिन जो सर हमे पढ़ने आए थे, उनका खुद का बेस क्लियर नही था , पूरी क्लास के दौरान उसने क्या पढ़ाया कुछ समझ नही आया, साला बोला भी किस लॅंग्वेज मे था, ये भी समझ मे नही आया....पढ़ाई की तरफ मैं थोड़ा सेन्सिटिव था, और अपना पूरा सर बीएमई के पीरियड मे खपाने के बाद भी जब , कुछ समझ नही आया तो, एक डर दिल मे उठने लगा कि साला एग्ज़ॅम मे क्या होगा....
"क्या हुआ,..."
"यार कुछ समझ नही आ रहा..."
"तो टेन्षन किस बात की ये टॉपिक ही छोड़ दे...कौन सा तुझे टॉप मारना है"
"मुझे टॉप ही मारना है..."उस वक़्त तो अरुण से मैने ये कह दिया ,लेकिन ये जुनून मेरे सर से बहुत जल्द उतरने वाला था, ये मैं नही जानता था.........

"उसको देख, खुद को मिस वर्ल्ड समझ रही है..."अरुण ने उसी लड़की की तरफ इशारा किया, जो कुछ देर पहले सामने आकर इंट्रोडक्षन दे रही थी....

"मेरा बस चले तो इसका टी.सी. ही इसके हाथ मे दे दूं..."शेरीन की तरफ देखते हुए मैने कहा, कुछ देर पहले जब वो सामने आकर बोल रही थी तो उसकी आवाज़ नॅचुरल नही थी, वो अपनी अलग ही टोन मे बात कर रही थी, जो कि अक्सर लड़किया करती है.....नवीन उस वक़्त स्टडी मे लगा हुआ था, और मैं और अरुण उस लड़की को देखकर दिल ही दिल मे बुरा भला कह रहे थे,...तभी उसकी नज़र हम पर पड़ी , और मैने तुरंत अपनी नज़रें उसकी तरफ से हटा कर अपने कॉपी की तरफ कर ली.....

"ये कहीं ये ना सोच ले कि हम दोनो इसे लाइन दे रहे है..."मैने पेन पकड़ा और टीचर जो लिख रहा था उसे छापते हुए बोला....
"घंटा का लाइन, इतने बड़े कॉलेज मे ये अकेली ही है क्या, जो इसे लाइन देंगे...इसे देखकर तो दीपिका मॅम के क्लास मे खड़ा लंड भी सो गया...."
"तू मुझे बिगाड़ रहा है..."
"पका मत,..."
वो पीरियड तो ले देके निकल गया, लेकिन मैने जितना खाया पिया था, वो सब निकल लिया था, हमारे गुरु घंताल टीचर्स ने और रिसेस मे मैं और अरुण बाहर आए...
"बॅटरी लो है यार,चल कॅंटीन से आते है..."अपने पेट पर हाथ फिरा कर मैं बोला...
"चल आजा, माल ताडेन्गे उधर..."
वैसे तो सीनियर्स की क्लास लगी हुई थी उस वक़्त, लेकिन कुछ ऐसे भी होते है, जो क्लास बंक करके कॅंटीन पहुच जाते है, जब हम कॅंटीन के अंदर गये तो वहाँ आइटम्स तो थी, लेकिन साथ मे हमारे सीनियर्स भी थे और वो ऐसे बैठे हुए थे जैसे कॉलेज उनके बाप का हो....
"चुप चाप ,एक कुर्सी पकड़ ले, वरना लफडा हो जाएगा..."
मैं उस वक़्त कुछ नही बोला,और हम दोनो ने साइड की कुर्सी पकड़ ली....
"उसको देख..."अरुण का इशारा कॅंटीन मे एक तरफ बैठे हुए सीनियर की तरफ था, जो कि कुछ स्टूडेंट्स के साथ बैठा बाते कर रहा था....
"क्या हुआ..."मैने भी उसी तरफ देखा...
"उसका नाम वरुण है, साला 7 साल से इस कॉलेज मे पढ़ रहा है, लेकिन आज तक 4थ एअर मे ही लटका हुआ है..."
जब अरुण ने मुझसे कहा तब मैने उसकी तरफ गौर से देखा, वो अपने साथ बैठे स्टूडेंट्स मे से ज़्यादा एज का लग रहा था, और अपने पैर से टेबल के नीचे से दूसरी तरफ बैठी हुई लड़की के पैर को सहला रहा था....
"ये लड़किया भी ना जाने कैसों-कैसों से पट जाती है..."उस लड़की के लिए झूठा दुख व्यक्त करते हुए मैने अरुण से पुछा"ये 7 साल वाला है किस ब्रांच का..."
"अपने ही ब्रांच का है साला और कुछ लोग कहते है कि ये फाडू रॅगिंग लेता है..."
रॅगिंग सुनकर गला सुख गया, उस समय यही एक चीज़ थी जो मुझपर हावी थी, जब से मैं कॉलेज कॅंपस के अंदर घुसा था, यही चीज़ मुझे डरा रही थी....
"साला ,ये रॅगिंग बंद कर देना चाहिए..."पानी पीते हुए मैं बोला, पानी के पूरा एक ग्लास खाली करने के बाद थोड़ा सुकून आया,
"बंद है प्यारे, रागिंग तो सालो से बंद है लेकिन ये लोग ले ही लेते है..."
"ये साला कॅंटीन वाला कहाँ मर गया बीसी..."हाइपर होते हुए मैं बोला और मेरी आवाज़ पूरे कॅंटीन मे गूँज उठी , मेरा इतना कहना था कि सबकी नज़र एक बार फिर मेरी तरफ हुई, मुझे देखकर कुछ अपने काम मे लग गये, कुछ ऐसे भी थे, जो मेरी तरफ ही देख रहे थे, उनकी शकल से लग रहा था कि ,वो मुझे मन ही मन मे गलियाँ बक रहे है.....तभी वो 7 साल से कॉलेज मे पढ़ने वाला उठकर हमारी तरफ आया, उसके साथ कुछ लड़के भी थे और वो लड़की भी ,जो उसके सामने बैठी थी.....
"किस ब्रांच का है..."मेरे सामने वाली कुर्सी को खींचकर वरुण ने मुझसे पुछा...दिल किया कि उस कुर्सी को एक लात मारकर दूर कर दूं, लेकिन फिर उसके बाद होने वाले मेरे हाल का अंदाज़ा लगाकर मैं रुक गया....
"मेकॅनिकल, 1स्ट एअर..."वो रावण मेरे सामने वाली चेयर पर पूरा का पूरा समा गया था,
"मुझे जानता है..."
"ह..ह..हाँ.."गला एक बार फिर सूखने लगा और जैसे ही मैने पानी वाले ग्लास की तरफ हाथ बढ़ाया उस रावण ने मेरा हाथ पकड़ लिया और ज़ोर से दबाने लगा, दर्द तो कर रहा था, लेकिन मैने अपने मूह से एक आवाज़ तक नही निकाली और ना ही उससे बोला कि मेरा हाथ छोड़ दे,,..
"पानी बाद मे पीना, पहले मेरे सवालो का जवाब दे..."वो मेरे हाथो को अब भी पकड़े हुए था और अपना पूरा ज़ोर लगाकर दबाए पड़ा था...
"अबे बीसी,एमसी , छोड़ मेरे हाथ को वरना यही पटक पटक कर गान्ड मारूँगा...."उसकी आँखो मे आँख डालते हुए मैने सिर्फ़ आँखो से कह दिया....
"आँख नीचे करे बे..."वरुण के साथ जो लड़के आए थे, उनमे से एक ने मेरा सर पकड़ा और नीचे झुका दिया..गेम शुरू हो चुका था, और मुझे अंदाज़ा हो गया था कि अब कुछ ना कुछ बुरा ही होगा....
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08-18-2019, 01:18 PM,
#10
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
मेरे बाए हाथ की हड्डियो का कचूमर बना कर उसने मेरा हाथ छोड़ा और फिर मेरे गाल को पकड़ कर बोला"बेटा, औकात मे रहना सीखो और सीनियर्स को रेस्पेक्ट दो..."

वरुण की आइटम अपने चेयर से एक समोसा उठाकर लाई और उसका आधा टुकड़ा खाकर बाकी मेरे चेहरे पर थोप दी, उस वक़्त शायद मैं बहुत गुस्से मे था, दिल कर रहा था, कि उस लड़की को खींच कर ऐसा थप्पड़ मारू कि उसका सर ही अलग हो जाए, लेकिन गुस्से को पीना पड़ा, मैं उन्हे देखने के सिवा और कुछ नही कर सका.....वो सभी मुझपर कुछ देर हँसे और चले गये...तभी वरुण के साथ वाली लड़की ,जिसने मेरे चेहरे की ये हालत की थी, मेरी नज़र उसकी गंद पर पड़ी और मैने मन ही मन मे ये शपथ ली की, "इसको तो ऐसा चोदुन्गा कि इसकी चूत और गान्ड के साथ साथ मूह से भी खून निकल जाए....


अपना नाम मेरी बीती ज़िंदगी मे सुनकर मेरे खास दोस्त वरुण ने मुझे मेरी कॉलेज लाइफ से बाहर घसीटा....
"अबे, ये 7 साल से लगातार फैल होने वाले लड़के का नाम वरुण कैसे है..."
"अब तू ये उसके बाप से पुछ, कि उसने उसका नाम वरुण क्यूँ रखा..."
"ले यार एक और पेग बना..."अरुण ने अपनी खाली ग्लास मेरी तरफ बढ़ाई, और मैने वरुण की तरफ....
"रात हो गयी क्या..."मैने उठने की कोशिश की ,लेकिन सर घूम रहा था, इसलिए वापस बैठ गया...
"दिन है बे अभी...दोपहर के 12 बज रहे है..."वरुण ने पेग बनाकर ग्लास मेरी तरफ बढ़ाया और बोला"आगे बता, कॅंटीन के बाद क्या हुआ..."
"कॅंटीन के बाद..."
मुझसे यदि उस वक़्त कोई कुछ और पुछ्ता तो शायद मैं नही बता पाता, लेकिन मेरी कॉलेज मे बीती ज़िंदगी मुझे इस तरह याद थी कि रात को 12 बजे भी कोई उठा के पुच्छे तो मैं उसे बता दूं..
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उस दिन कॅंटीन की हरकत ने मुझे झंझोड़ कर रख दिया, अरुण भी चुप बैठा हुआ था, मैं बुरी तरह गुस्से मे था, और जब कॅंटीन वाला हमारा ऑर्डर लेकर आया तो मैं बोला...
"अब तू ही खा बीसी..."
मैं वहाँ से गुस्से मे उठा और कॅंटीन से बाहर आ गया, अरुण भी पीछे-पीछे था...
"अरमान, रुक ना बे,..."अरुण दौड़ कर मेरे सामने खड़ा हो गया और मुझे रोक कर बोला"भूल जा..."
" उस लौंडिया का क्या नाम है , बता साली को चोद के आता हूँ..."
"उसका नाम तो मुझे भी नही मालूम..."ऐसा बोलते बोलते अरुण ने मुझे गले लगा लिया, पता नही साले मे क्या जादू था की मेरा गुस्सा शांत होने लगा....
"दूर चल, मैं गे नही हूँ..."जब मेरा गुस्सा पूरी तरह शांत हो गया तो मैने कहा...
"एक बात बता, तुझे वरुण के साथ वाली लड़की माल लगी ना..."मुझसे अलग होते हुए अरुण ने मुझसे पुछा...
"माल तो है, इसीलिए तो उसका नाम पुछा"
"तो भाई, उसे भूल जा, वरना वरुण नंगा करके दौड़ाएगा..."
"वो उतनी भी हॉट नही है कि मैं उसके लिए पूरे कॉलेज मे नंगा दौड़ू...नाउ कॉन्सेंट्रेट ओन्ली ऑन दीपिका मॅम "
उसके बाद हम दोनो अपनी क्लास की तरफ आए, फर्स्ट एअर की सारी क्लास आस-पास ही थी, इसलिए रिसेस मे हर ब्रांच की लड़कियो को लाइन मारा जा सकता था....हम दोनो अपनी क्लास के बाहर खड़े स्टूडेंट्स के पास जाकर खड़े हो गये,जहाँ ग्रूप बना कर कुछ लड़के बाते कर रहे थे और जैसा कि मैने सोचा था टॉपिक गर्ल्स पर ही था.....
"कहाँ गये थे यार..."नवीन ने हम दोनो से हाथ मिलाया और पुछा...
"कॅंटीन..."अरुण ने जवाब दिया...
"कॅंटीन "उसकी आँखे ना जाने कितनी बड़ी हो गई ये जान कर जब उसने सुना कि हम दोनो कॅंटीन से होकर आए है....
"क्या हुआ..."उसकी बड़ी -बड़ी आँखो को देखकर मैने पुछा...
"रॅगिंग हुई ,तुम दोनो की..."
रॅगिंग....ये सुनकर मैं और अरुण एक दूसरे की आँखो मे झाँकने लगे और सोचने लगे कि इसे क्या बोला जाए...
"नही...किसी ने रॅगिंग नही ली..."
"आज तो बच गये ,लेकिन कल से उधर मत जाना, सीनियर्स डेरा डाल के रहते है उधर...."
"तो क्या हुआ, फटी है क्या..."ये लफ्ज़ मैने ऐसे कहा, जैसे कुछ देर पहले वरुण की उस हॉट आइटम ने नही बल्कि मैने उसके फेस पर समोसा डाला हो.....
"देख भाई, जानकारी देना अपना काम था..."नवीन बोला
"वैसे और कहाँ-कहाँ ये सीनियर्स पकड़ते है हमे..."
"तीन जगह फिक्स्ड है, फर्स्ट कॅंटीन, सेकेंड सिटी बस आंड थर्ड वन ईज़ हॉस्टिल...."
हम इस मसले पर कुछ देर और भी बात करते लेकिन उसके पहले ही वहाँ खड़े लड़को मे से किसी एक ने टॉपिक को चेंज करके, अपने कॉलेज की हसीनाओ पर गोल मारा.....और इस मामले मे सबसे पहला नाम जो आया वो था दीपिका मॅम,...सब यही चाह रहे थे कि दीपिका माँ उनसे सेट हो जाए, कुछ ठर्कियो ने तो ये तक बोल दिया था कि...
"आज कॉलेज से जाने के बाद दीपिका मॅम को सोचकर 61-62 करूँगा"
"तू भी बोल ले कुछ..."अरुण ने मुझे कोहनी मारी....
"मैं तो उस फूटिए वरुण की माल को चोदुन्गा, वो भी लेटा-लेटा कर..."
"वरुण..."ये नाम सुनकर सब चुप होकर मेरी तरफ देखने लगे,..उस सब मुझे ऐसे देख रहे थे जैसे कि मैने किसी का मर्डर करने का पब्लिक मे एलान कर दिया हो....
"मैने तो ऐसे ही बोल दिया..."मैने बात वही ख़तम करनी चाही...
"यार, ऐसे मत बोला कर, कहीं से वरुण को मालूम चल गया तो फिर पंगा हो जाएगा..."
नवीन की बाते सुनकर मैने चारो तरफ देखा और जब कन्फर्म हो गया कि ,हमारे गॉसिप को किसी ने नही सुना तो मैं बोला...
"डरता हूँ क्या, "
"देख, ज़्यादा शेर मत बनियो, वरना पॉल खुल जावेगी..."अरुण मेरे कान मे फुसफुसाया....
कुछ देर और कॉलेज की लड़कियो के बारे मे बाते करते हुए, हमने अपना समय बर्बाद किया और इसी बीच मुझे और भी कयी सारे फॅक्ट्स मालूम हुए जो कि हमारे कॉलेज मे बरसो से चले आ रहे थे....
1. जब तुम फर्स्ट एअर मे ही रहो ,तब ही कोई माल पटा लो,वरना पूरे 4 साल खाली हाथ से काम चलाना पड़ेगा और होंठ पर लड़की के होंठ की जगह बोरो प्लस लगा कर रहना पड़ेगा...."
2. हमारा कॉलेज सरकारी. था, इसलिए कॉलेज के प्रिन्सिपल और टीचर्स को भले ही रेस्पेक्ट ना दो ,लेकिन वहाँ काम करने वाले वर्कर और पेओन को सर कहकर बुलाना पड़ेगा, जिससे टाइम आने पर वो हमे लंबी लाइन से बचा सके....
उस दिन एक और ज़रूरी फॅक्ट जो मालूम चला वो ये था कि...
3. जब भी कोई माल पटाओ तो उसे जल्दी चोद दो, हमारे कॉलेज मे पढ़ने वालो का मानना था कि गर्लफ्रेंड को चोदने के बाद लड़किया, लड़को से किसी स्ट्रॉंग केमिकल बॉन्ड की तरह बँध जाती है....
उस दिन और भी कुछ मालूम चलता यदि रिसेस के बाद मॅतमॅटिक्स वाली मॅम ना आती तो....
"कितना बात करते हो तुम लोग,पूरे कॉरिडर मे तुम लोगो की आवाज़ आ रही है..."सामने वाली बेंच पर अपनी बुक्स रखकर मेद्स वाली मॅम ने डाइलॉग मारा....
मेद्स वाली मॅम का नाम दमयंती था, जो बाद मे हमारे बीच "दंमो रानी" के नाम से फेमस हुई

कॉलेज का पहला दिन किसी भी हिसाब से मेरे लिए ठीक नही रहा, पहले-पहल तो सीएस वाली मॅम ने मुझे बाहर भगा दिया और बाद मे कॅंटीन वाला लफडा...कॉलेज के पूरे पीरियड्स अटेंड करने के बाद ऐसा लग रहा था ,जैसे किसी ने सारी एनर्जी चूस ली हो,...
"थक गया यार..."रूम मे घुसते ही मैने अपना बॅग एक तरफ फेका और बिस्तर पर लुढ़क गया,
"चल ग्राउंड चलते है, शाम के वक़्त हॉस्टिल मे रहने वाली गर्ल्स आती है उधर..."
"गान्ड मराए गर्ल्स...मुझे तो नींद आ रही है..."
"ठीक है तू सो, मैं आता हूँ..."
मैं ज़्यादा थका हुआ था, इसलिए तुरंत नींद आ गयी, और जब मेरी नींद खुली तो अरुण मुझे उठा रहा था....
"क्या हुआ बे..."
"अबे रात के 8 बज गये..."
"तो..."मैने सोचा कुछ काम होगा.
"तो क्या..... रात के 8 बजे कोई सोता है क्या..."
"अब तू डिसाइड करेगा कि मुझे कितने बजे क्या करना है..."
"टाइम पास नही हो रहा था, तो सोचा तुझे उठाकर गप्पे-शप्पे मार लूँ...."
"टाइम पास नही हो रहा है तो जाकर मूठ मार..."और मैं वापस चादर ओढकर गहरी नींद मे चला गया.....
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पुरानी आदत इतनी जल्दी नही बदलती, जब मैं स्कूल मे था तब अक्सर सुबह 4 बजे उठकर पढ़ाई शुरू कर देता था, और उसी की बदौलत फर्स्ट अटेंप्ट मे ही मुझे बहुत ही अच्छा कॉलेज मिला था...उस दिन भी मैने 4 बजे का अलार्म सेट किया और जैसा कि पहले होता था , दूसरे दिन मेरी आँख अलार्म की वजह से सुबह 4 बजे खुल गयी, लाइट ऑन की और अरुण की तरफ देखा...अरुण आधा बिस्तर पर था और आधा बिस्तर के बाहर ही झूल रहा था....
"क्या खाक पढ़ु...कल तो सब सर के उपर से पार हो गया था..."बुक्स और नोटबुक खोलकर मैने ढेर सारी गालियाँ दी....
कुछ देर तक ट्राइ करने के बाद भी जब कोई फ़ायदा नही हुआ तो , मैने लाइट्स ऑफ की और चादर तान कर लेट गया....मेरी पुरानी आदत के अनुसार नींद तो आने से रही , इसलिए मैं कुछ सोचने लगा...जैसे कि किस टाइम पर किस सब्जेक्ट को उठाकर दिमाग़ की दही करनी है, फिर जैसे ही मेरे दिमाग़ मे सीएस सब्जेक्ट का ख़याल आया तो सबसे पहले मेरी बंद आँखो के सामने दीपिका मॅम का हसीन चेहरा और उसका हसीन जिस्म छा गया....वो मेरे सामने नही थी, लेकिन मैं उसे पूरा देख सकता था,...और इसी ख़यालात मे गोते लगाते हुए मेरा हाथ मेरे पैंट की तरफ बढ़ा और सुबह सुबह ही काम हो गया , उसके बाद जो नींद लगी वो सीधे सुबह के 8 बजे खुली....
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