Hindi Adult Kahani कामाग्नि
09-08-2019, 01:59 PM,
#31
RE: Hindi Adult Kahani कामाग्नि
सुनील- मज़ा आ रहा है क्या?
शालू- मज़ा तो आ रहा है। थोड़ा अलग तरह का है लेकिन कुछ कुछ चूत में उंगली करने जैसा भी लग रहा है।
सुनील- ठीक है फिर हम यही किया करेंगे। लेकिन अभी तो इसमें उंगली ही बड़ी मुश्किल से जा रही है लंड कैसे जाएगा? कुछ सोचना पड़ेगा। आज इसे छोड़ के बाकी तू जो चाहे सब कर लेते हैं।

शालू- बाकी सब बाद में कर लेंगे कोई बात नहीं लेकिन अभी कपड़े उतार के नंगे तो हो। शर्म नहीं आती नंगी बहन के सामने पूरे कपड़े पहन कर खड़े हो! जल्दी उतारो मुझे बड़ा प्यार आ रहा है आप पर, अपने नंगे भाई को गले लगाने का मन कर रहा है।

फिर जैसे ही सुनील नंगा हुआ शालू उस से ऐसे चिपक गई जैसे बन्दर का बच्चा बंदरिया को कस के पकड़कर चिपका रहता है। उस दिन पहले तो दोनों भाई बहन ने बहुत साड़ी नंगी मस्ती की फिर अलग अलग तरह के चुम्बन और आलिंगन जो उन किताबों में बताए थे वो सब करके देखे। आखिरी में भाई ने बहन की चूत और बहन ने भाई का लंड चूस कर एक दूसरे को झड़ाया। अगले दिन सुनील गाँव के बढ़ई से एक कंगूरे जैसा कुछ बनवा लाया।

गांड का गुल्ला
बढ़ई को तो उसने यही कहा था कि पलंग का कंगूरा टूट गया है तो बना दो लेकिन सच तो कुछ और ही था। शहर जा कर वो एनिमा लगाने का सामान भी ले आया था।

उस रात सुनील ने वो लकड़ी का कंगूरा एक घी के डब्बे में डुबो कर रख दिया। उस रात दोनों भाई बहन साथ ही सोये और उन्होंने नंगे-पुंगे काफी मस्ती की चुदाई नहीं की। अभी घर वालों को शादी से वापस आने में 2-3 दिन और बाकी थे।

अगली सुबह शालू जब संडास से वापस आई तो सुनील ने उसे एनिमा लगाया और जब उसका मलाशय पूरा साफ़ हो गया तो उसी एनिमा की नली से उसकी गुदा में ४-६ बड़े चम्मच घी अन्दर डाल दिया और फिर घी में रात भर से डूबा हुआ वो लकड़ी का कंगूरा उसके गुदाद्वार पर रख कर दबाया तो फिर वही सिकुड़ने वाली समस्या सामने आई लेकिन ये सुनील ने लकड़ी का खिलौना बनवाया था इसमें ३ कंगूरे थे सबसे छोटा, मंझोला और फिर सबसे बड़ा और उसके बाद चपटा था जो अन्दर नहीं जा सकता था। धीरे धीरे करके सुनील ने तीनों कंगूरे शालू की गांड में डाल दिए। पर्याप्त मात्रा में घी होने की वजह से ज्यादा दर्द नहीं हुआ।

उसके बाद शालू अपने रसोई के काम में लग गई। शुरू शुरू में खिनचाव के कारण पिछाड़ी में थोड़ा दर्द था लेकिन धीरे धीरे वो काम काज में सब भूल गई और दो तीन घंटे में दर्द ख़त्म भी हो गया।
दोपहर में दोनों ने हल्का फुल्का ही खाना खाया और उसके बाद बेडरूम का दरवाज़ा बंद करके दोनों भाई-बहन अपनी उस अवस्था में आ गए जैसा ऊपर वाले ने उन्हें इस दुनिया में भेजा था।

नंगी शालू बिस्तर पर पलटी मार के लेट सुनील उसकी जाँघों के दोनों और अपने पैर घुटनों के बल टिका कर बैठ गया। उसका लंड उसकी नंगी बहन की खूबसूरती को सलाम ठोक रहा था। सुनील ने उस लकड़ी के चपटे हिस्से को पकड़ कर धीरे धीरे खींचना शुरू किया। पहला कंगूरा निकलने में थोड़ी मुश्किल हुई क्योंकि ये सबसे बड़ा था। थोड़ा दर्द भी हुआ लेकिन बीच वाला कंगूरा बिना किसी दर्द के निकल गया और छोटा वाला तो पता ही नहीं चला कि कब निकल गया।

सुनील ने बिना समय गंवाए अपने लंड पर थूक लगाया और शालू की गांड में डाल दिया। पर ये क्या उसके लंड का मुंड ही अन्दर गया था और शालू की गांड ने उसे कस कर पकड़ लिया। दरअसल अभी जो कंगूरे निकाले थे उनके निकलने की अनुभूति अलग थी और कोई भी गांड किसी वास्तु को निकालने में तो अभ्यस्थ होती है लेकिन अन्दर लेने के लिए नहीं … इसलिए ऐसा हुआ था।
खैर सुनील ने धीरज रखी और थोड़ी देर बाद जब गांड ढीली पड़ी तब धीरे धीरे लंड अन्दर डाला।

हालाँकि घी ने शालू की गांड काफी नरम और चिकनी कर दी थी और इतनी देर उस लकड़ी के डुच्चे की वजह से भी कुछ फर्क पड़ा था। आखिर लंड पूरा अन्दर गया और फिर सुनील ने अपनी बहन की गांड मारनी शुरू की। कुछ देर तक लेटे-लेटे गांड मराने के बाद शालू घोड़ी बन गई और फिर सुनील ने उसके दोनों स्तनों को अपने हाथों से मसलते हुए पकड़ा और शालू को ऊपर खींच लिया अब शालू भी घुटनों के बल खड़ी थी और सुनील पीछे से उसके उरोजों को मसलते हुए उसके साथ गुदा-मैथुन कर रहा था।

शालू के हाथ ऊपर उठे हुए थे और वो अपने पीछे खड़े अपने भाई के सर को अपनी ओर खींच रहे थे। इस अवस्था ने दोनों होंठों से होंठ जोड़ का चुम्बन भी कर रहे थे।
तभी सुनील ने अपना एक हाथ शालू के स्तन से हटा कर उसकी योनि की तरफ बढ़ाया। जैसे ही सुनील ने अपनी बहन की चूत का दाना छुआ, शालू ऊह-आह की आवाजें निकालने लगी। और जब सुनील ने उसे मसलना और रगड़ना शुरू किया तो शालू पगला गई और कुछ तो भी बड़बड़ाने लगी।
शालू- ऊऽऽऽह… आऽऽऽह… सुनील… सुनील… उम्म्ह… अहह… हय… याह… मज़ा आ रहा है सुनील… और करो… मस्त चोद रहे हो यार…
यह पहली बार था जब उसने अपने भाई को नाम से बुलाया था लेकिन वो अपने आपे में नहीं थी।

जल्दी ही दोनों भाई बहन झड़ने लगे। सुनील ने अपना सारा वीर्य शालू की गांड में ही छोड़ दिया जो इतनी कस गई थी कि सुनील का ढीला पड़ा लंड भी आसानी से नहीं निकल पाया। उसने कोशिश भी नहीं की और दोनों एक दूसरे के ऊपर गिर पड़े और काफी समय तक वैसे ही पड़े रहे।

इस तरह शालू ने पहली बार अपने ही भाई से गांड मराई। उसके बाद वो अक्सर अपने भाई के साथ कामक्रीड़ा करती लेकिन हमेशा गुदा या मुख मैथुन ही होता था। कभी उसके भाई ने उसे चोदा नहीं था। गांड मराई के अवसर भी परिवार के साथ होने के कारण कम ही मिल पाते थे लेकिन लंड चूसने का काम तो हर एक दो दिन में हो ही जाता था। घर का शायद ही ऐसा कोई कोना हो जिसमें उसने अपने भाई का लंड नहीं चूसा हो।

विराज ने सपने भी नहीं सोचा था कि शालू ने इतना बड़ा राज़ उस से छिपाया था। क्या विराज शालू से खफा हो जाएगा या उसे उसके भाई से पहली बार चुदवाने के लिए इजाज़त दे देगा? ये हम देखेंगे अगले भाग में।

दोस्तो, भाई बहन के सेक्स आनन्द से भरपूर मेरी कहानी का यह भाग आपको कैसी लगा?
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09-08-2019, 02:00 PM,
#32
RE: Hindi Adult Kahani कामाग्नि
दोस्तो, आपने पिछले भाग में पढ़ा कि कैसे शालू ने दो लंडों से चुदवाने की इच्छा ज़ाहिर की और दूसरे लंड के लिए अपने सगे भाई का प्रस्ताव रखा। शालू ने अपने पुराने राज़ खोले कि कैसे उसकी कामुकता ने उसे अपने भाई के नज़दीक पहुंचाया और कैसे अपने भाई से केवल गांड मरवा कर वो शादी तक अपनी चूत कुंवारी रखी।
अब आगे…

*नीचे सैंया ऊपर भैया*

यह सारी कहानी सुनाने के बाद शालू ने विराज से पूछा कि वो ये सब सुन कर नाराज़ तो नहीं है?
विराज- नहीं यार, अब क्या नाराजगी? मुझे वैसे भी गांड मारने का कोई खास शौक नहीं है। तूने मुझे कुँवारी चूत का मज़ा दिला दिया और क्या चाहिए? रही बात भाई की … तो अब उस बात पे क्या नाराज़ होऊंगा, अब तो मैं खुद मादरचोद बन के बैठा हूँ।


शालू- तो फिर अगर आपको ऐतराज़ ना हो तो मुझे आपसे चूत और भैया से गांड एक साथ मरवाने में बड़ा मज़ा आएगा।
विराज- ऐतराज़ क्या होगा? एक काम कर अभी राखी आने वाली है तो सुनील को यहीं बुलवा ले। बाकी सब मैं सम्हाल लूँगा।

अगले ही दिन शालू ने अपने भाई को संदेश भिजवा दिया कि इस साल राखी पर वो ही आ जाए और साथ में इशारे के तौर पर ये भी लिख दिया कि कुछ पुरानी यादें ताज़ा करनी हैं।
यह पढ़ कर सुनील समझ गया कि शायद उसकी बहन राखी पर उपहार में उसका लंड चाहती है। यह इशारा इसलिए था ताकि सुनील अकेला ही आये।

राखी को ज्यादा समय बचा भी नहीं था। सुनील ने अकेले जाने का कोई बहाना सोच लिया।

एक समस्या और थी वो ये कि माँ को बताना है या नहीं। शालू ने इस बारे में विराज को कहा तो उसने कहा कि वो माँ से बात करके पता करेगा।

फिर एक रात विराज सोने के समय अपनी माँ के कमरे में पहुँच गया और शालू के सरदर्द का बहाना बना कर उसने अपनी माँ को चोदा और चुदाई के बाद जब लंड चूत में ही फंसा था, वो अपनी माँ से चिपका उनके स्तनों को सहला रहा था।
विराज- माँ… एक बात बता?
माँ- पूछ?
विराज- मेरी कोई बहन होती तो तू उसको चोदने देती क्या?
माँ- चोदन तो तोय जा चूत बी ना मिलती… अब का करूँ, मो सेई चुदास सेन नी भई।

विराज- मेरा मतलब अगर मेरी बहन होती और हमसे भी रहा नहीं जाता और हम दोनों चुदाई करने लगते तो तू मना करती क्या?
माँ- और नी तो का…! अब बा की चूत बा के खसम के लाने… पर तू काय इत्तो खोद खोद के पूछ राओ है। थारी तो कोई भेन हैइज नी।
विराज- कुछ नहीं ऐसे ही पड़े पड़े मन में ख्याल आया इसलिए पूछ लिया। चल अब तू सो जा। मैं चलता हूँ अब।

विराज ने और ज्यादा पूछना सही नहीं समझा क्योंकि माँ को शक होने लगा था कि बात क्या है। इन सब बातों से ये भी नहीं लगा कि माँ को भाई-बहन की चुदाई मंज़ूर हो सकती है। विराज ने ये बात शालू को बताई और दोनों ने निर्णय लिया कि माँ को ये बात ना बताई जाए।

शालू- लेकिन फिर कैसे करेंगे? माँ की खिड़की तो आजकल सारा टाइम खुली रहती है। इतने दिन के बाद मस्त चुदाई मिलेगी। मुझे वो छोटे से मेहमानों के कमरे में नहीं चुदाना। ऊपर से बेचारे भैया ने आज तक हमेशा गांड ही मारी है कभी चोदा नहीं। पहली बार उनसे चुदवाऊँगी तो कुछ तो ख़ास होना चाहिए ना।
विराज- एक काम करेंगे, मैं सुनील के पास चला जाऊँगा और तुम माँ को कुछ बहाना बना कर वो कांच बंद कर देना।

आखिर राखी वाले दिन सुबह सुनील आ गया। रक्षाबंधन का मुँहूर्त दोपहर का था तो विराज सुनील से खेती-किसानी की बातें करने लगा। शालू जल्दी से नाश्ता ले कर आ गई। उसने विराज और सुनील को नाश्ता दिया और वापस रसोई में खाना बनाने के लिए जाने लगी तो सुनील ने उसे वहीं उनके साथ बैठने को कहा।
शालू ने विराज से नज़रें बचाते हुए सुनील से कहा- मैं तो अपना नाश्ता कर ही लूंगी.
और फिर आँख मार कर अपनी एक उंगली बड़े कातिलाना अंदाज़ में ऐसे चूसी जैसे लंड चूस रही हो।

सुनील समझ गया कि आज तो ये उसका लंड चूस कर ही राखी मनाने वाली है। लेकिन मौका कब मिलेगा ये सुनील को नहीं पता था।
सच तो ये था कि जब तक शालू और सुनील के बाबा जिंदा थे तब तक उन्होंने कभी सुनील को अपनी बहन से मिलने नहीं दिया। पिछली बार उनके गुजरने के बाद के कार्यक्रम में ही दोनों मिले थे लेकिन तब माहौल थोड़ा ग़मगीन भी था और भीड़-भाड़ भी बहुत थी। उसके बाद से अब तक मिलने का कभी मौका ही नहीं मिला था।

बहरहाल, नाश्ते के बाद खाना और खाने के बाद राखी बाँधने का कार्यक्रम हुआ और फिर सब बैठ कर परिवार और रिश्तेदारी की बातें करते रहे। थोड़ी देर बाद माँ तो अपने पोते राजन के साथ खेलने चली गईं और थोड़ी देर बाद विराज भी बोला कि वो पेशाब करने जा रहा है। जैसे ही कमरे में शालू और सुनील के अलावा कोई ना बचा वैसे ही शालू सुनील पर झपट पड़ी। वो उसके ऊपर चढ़ गई और उसके मुँह में अपनी जीभ डाल कर एक गहरा चुम्बन लिया, फिर उसका लंड सहलाने लगी।
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09-08-2019, 02:00 PM,
#33
RE: Hindi Adult Kahani कामाग्नि
शालू- अच्छे से तैयार कर लो इसको … आज रात को ये पहली बार मेरी चूत में घुसेगा।
सुनील- माना तेरी शादी हो गई, बच्चा भी हो गया लेकिन अभी यहाँ इन सब के बीच ये सब ना कर बहना। पकड़े गए तो सारी जिंदगी का रोना हो जाएगा।
शालू- वो सब आप मुझ पर छोड़ दो। आप तो बस आज अपनी बहन चोदने की तैयारी करो।
सुनील- क्या बात है! तेरे तो लगता है काफी बड़े बड़े पर निकल आये हैं।
शालू- इनको पर नहीं मम्मे कहते हैं भैया! बड़े तो भाभी के भी हो गए होंगे एक बच्चे के बाद!
शालू ने अपने स्तनों को मसलते हुआ कहा और फिर वापस अपनी जगह जा कर बैठ गई।

थोड़ी देर में विराज भी आ गया और उसने सुनील को खेत पर चलने के लिए पूछा। फिर दोनों खेत देखने चले गए।

शाम को आये, खाना वाना खाया और विराज सुनील को मेहमानों वाले कमरे में ले गया। वहां बैठा कर वो एक पुरानी स्कॉच की बोतल निकाल लाया जो उसे जय ने यूरोप से ला कर दी थी।
आज उसका साला जो आया था कुछ खास करना तो बनता था।
शालू ने चखना लाकर दे दिया।

विराज- सुनो! माँ सो जाएं तो बता देना।
शालू- ठीक है।

विराज ने दरअसल इशारे में शालू को वो खिड़की बंद करने को कहा था जिससे माँ उनके कमरे में देख सकती थी। इधर जीजा-साले की दारू पार्टी शुरू हुई उधर शालू माँ के पास गई।

शालू- माँ जी, ये तो भैया के साथ मेहमानों वाले कमरे में हैं। जीजा-साले की पार्टी चल रही है। कहो तो आपकी चूत-सेवा कर दूं? नहीं तो मैं फिर सोने जाती हूँ।
माँ- नईं री। आज तो भोत थक गई।
शालू- ठीक है फिर मैं जाती हूँ… अरे ये कांच! इसको बंद कर देती हूँ, भैया ने देख लिया तो अजीब लगेगा।

ऐसे बहाना बना कर शालू ने कांच पूरा ही बंद कर दिया। अब उसे केवल शालू-विराज के कमरे से खोला जा सकता था। उसके बाद शालू ने विराज को बता दिया कि माँ सो गईं हैं और वो भी सोने जा रही है। तब तक इन दोनों का पहला ही पैग चल रहा था। जब वो ख़त्म हुआ तो विराज ने भी अपने बेडरूम जाने की बात कही।
विराज- चलो साले साहब चलते हैं।
सुनील- अरे! अभी तो बस एक ही पैग हुआ है। चले जियेगा जल्दी क्या है?
विराज- यार इस शराब में वो नशा कहाँ जो तुम्हारी बहन में है। मैं तो कहता हूँ तुम भी चलो; दोनों मिल के साथ मज़े करेंगे।
सुनील- क्या जीजाजी आप तो एक ही पैग में टल्ली हो गए। वो मेरी बहन है। चलो ठीक है आप जा के मज़े करो, मैं यहीं रुकता हूँ।

विराज- अरे नहीं यार, मुझे चढ़ी नहीं है। और तुम तो ऐसे बोल रहे हो जैसे बहन है तो तुमने कुछ किया ही नहीं कभी। जो इतनी सब बातें करते थे लोग … वो क्या मुझे पता नहीं?
सुनील- अरे नहीं जीजाजी, आप गुस्सा मत हो वो सब तो अफवाहें उड़ा दी थीं लोगों ने आप भी कहाँ लोगों की बातों में आ गए।
विराज- अच्छा!!! अफवाहें थीं? चलो फिर मेरे साथ तुम्हारी बहन से ही पूछ लेते हैं।

इतना कह कर विराज सुनील का हाथ पकड़ कर साथ में अपने बेडरूम में ले गया। दरवाज़ा आधा खुला हुआ था, लाइट जल रहीं थीं और शालू एक चादर ओढ़ कर लेटी हुई थी।

विराज- शालू बताओ अभी तुम्हारे और सुनील के बीच क्या क्या हुआ है?
सुनील- देखो ना यार शालू, जीजाजी को एक पैग में ही चढ़ गई है पता नहीं क्या क्या बोल रहे हैं।
शालू ने एक झटके में अपनी चादर झटक कर अलग कर दी और बिस्तर से उठ कर खड़ी हो गई। चादर के अन्दर वो पूरी नंगी थी। सुनील तो सकते में आ गया उसे समझ ही नहीं आया कि हो क्या रहा है। वो इधर उधर देखने का नाटक करने लगा।

सुनील- शालू, ये क्या है तुमने भी पी रखी है क्या? ऐसे मेरे सामने नंगी क्यों आ रही हो?
शालू- इनको दारू नहीं, मेरा नशा चढ़ा है भैया। एक बार मेरे होंठों से पी लो तो तुमको भी चढ़ जाएगा।

इतना कह कर नंगी शालू ने अपने भाई को अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसके होंठों को चूसने लगी। सुनील उत्तेजना में पागल हुआ जा रहा था लेकिन फिर भी ऐसा दिखा रहा था जैसे खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रहा हो।
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09-08-2019, 02:00 PM,
#34
RE: Hindi Adult Kahani कामाग्नि
तभी विराज ने उसकी ग़लतफ़हमी दूर की- साले साहब शरमाओ नहीं, मुझे लोगों ने नहीं खुद शालू ने सब कुछ विस्तार से बता दिया है कि कैसे आपने इसकी गांड मारना शुरू किया था। मुझे कोई आपत्ति नहीं है। शालू की इच्छा थी कि वो हम दोनों से एक साथ चुदाए और गांड मराए, इसीलिए आपको बुलवाया था।
शालू- हाँ भैया, ये सच बोल रहे हैं मैंने ही इनको सब बताया था और इनको कोई तुम्हारे साथ मेरी चुदाई करने में मज़ा ही आएगा। तुम फिकर ना करो। हमाम में सब नंगे हैं।

तब तक विराज ने अपने कपड़े निकाल फेंके थे और वो शालू के साथ सुनील के कपड़े निकालने में उसकी मदद करने लगा। कुछ ही पलों में तीनों नंगे हो चुके थे लेकिन घबराहट के मारे सुनील का लंड खड़ा नहीं हुआ था।
शालू तुरंत घुटनों के बल बैठ कर अपने भाई का लंड चूसने लगी। सुनील ने अपने जीजा की तरफ देखा तो वो शालू को लंड चूसते हुए देख रहे थे और अपना लंड मुठिया रहे थे। अचानक दोनों की नज़रें मिलीं तो विराज मुस्कुरा दिया। इस से सुनील को बहुत साहस मिला और अब वो शालू का सर पकड़ कर अपनी कमर हिलाते हुए अपनी बहन का मुँह चोदने लगा।

विराज- ये हुई ना बात साले साब। आब आये ना सही लाइन पे।
सुनील- क्या जीजाजी! कौन पति अपने सामने अपनी बीवी को चुदवाता है? वो भी उसके भाई से? अब इतनी बड़ी बात हज़म करने में टाइम तो लगेगा ना।
विराज- और कौन लड़की चुदाई से पहले अपनी गांड मरवाती है? वो भी अपने भाई से? ये बात तो बड़ी जल्दी समझ आ गई थी साले साहब! हा हा हा…

इस बात पर सभी हँस पड़े। शालू को भी हँसी आ गई और उसने लंड-चुसाई छोड़ दी। माहौल हल्का होने से सुनील की घबराहट भी ख़त्म हो गई थी और उसका लंड भी अब अपनी बहन को सलामी देने लगा था।
विराज को लगा अब सब गर्म हो गए हैं और शालू नाम के मसालेदार गोश्त को बीच में डाल कर सैंडविच बनाने का समय आ गया है। लेकिन जब उसने शालू को बिस्तर की तरफ ले जाने के लिए हाथ बढ़ाया तो शालू ने बड़े ही घिघियाते हुए उस से अनुरोध किया- सुनो ना… भैया को आज पहली बार मौका मिल रहा है। हमेशा से मेरी चूत कुंवारी रखने के चक्कर में बस गांड ही मारते थे, कभी चोदा नहीं। आज राखी का दिन भी है तो पहले ज़रा भैया से चुदवा लेने दो ना। उसके बाद आप भी आ जाना हमारे साथ। प्लीज़…

जब भी मायके से कोई आता है तो बीवियों का सारा झुकाव उन्हीं की तरफ हो जाता है। जो बीवी, पति को अपनी जूती की नोक पर रखती हो, वो भी गिड़गिड़ाने लगती है। पति को भी पता होता है कि अभी विनती कर रही है लेकिन अगर बात ना मानी तो कल बेलन भी फेंक कर मार सकती है तो अक्सर पति अपना बड़प्पन दिखाते हुए हाँ कर ही देते हैं। विराज ने भी वही किया; ड्रेसिंग टेबल का स्टूल एक कोने में सरका कर बैठ गया।

उधर शालू अपने भैया का लंड पकड़ कर बड़े प्यार से उसे बिस्तर तक ले गई और उसे वहां लेटा कर खुद उसके ऊपर लेट गई। विराज ने पहले शालू को अपने परमप्रिय मित्र जय से चुदवाया था लेकिन तब वो भी चुदाई में शामिल था। आज जो दृश्य उसके सामने था वो तो विराज के लिए बिल्कुल नया था। उसकी धर्मपत्नी अपने नंगे भाई के गठीले बदन पर नंगी पड़ी हुई थी। उसके सुडौल स्तन उसके भाई के सबल सीने पर जैसे मसले जा रहे थे। उसकी कमर इस तरह लहरा रही थी मानो अपने भाई के लंड के साथ अठखेलियाँ कर रही हो।

अभी दोनों भाई बहन बस चुम्बन और आलिंगन में ही व्यस्त थे। ऐसा नहीं था कि लंड खड़ा नहीं था या चूत को गीली होने में कोई कसर बाकी थी लेकिन इतने सालों के बाद ये दो बदन मिल रहे थे, और वासना कोई लिंग-योनि के समागम का ही तो खेल नहीं है। और भी बहुत कुछ होता है जिसकी कामना मन और शरीर दोनों को होती है। काफी देर तक दोनों एक दुसरे की जीभें और होंठ चूसते-चाटते रहे। इसके साथ साथ सुनील अपने हाथों को अपनी बहन के पूरे नंगे शरीर पर फेर कर पुरानी यादें ताज़ा कर रहा था और शालू हल्के हल्के अपने तन को लहराते हुए मानो अपना नाज़ुक जिस्म अपने भाई की बलिष्ठ काया पर मसल रही थी।

विराज के मन में कहीं ना कहीं जलन की भावना भी आने लगी थी, उसके मन में प्यार भरी गाली उमड़ी ‘बहन का लौड़ा’
जैसे नाचने का मज़ा अलग होता है और नृत्य देखने का अलग वैसे ही ये जो वासना का नंगा नाच विराज की आँखों के सामने चल रहा था वो उसे कुछ ज्यादा ही मोहक लग रहा था। कई तरह के चुम्बनों और आलिंगनो ने बाद शालू उठी और उसने सुनील का लंड अपनी चूत के मुँह पर रख दिया।

शालू- बोलो, बना दूँ बहनचोद?
सुनील- जल्दी से बना दे मेरी बहन … बना दे अपने भाई को बहनचोद।
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09-08-2019, 02:01 PM,
#35
RE: Hindi Adult Kahani कामाग्नि
सुनील ने शालू के दोनों उरोज अपने दोनों हाथों से पकड़ कर मसलते हुए कह दिया। सुनील अब अधीर हो चुका था, शालू ने भी उसकी धीरज का इम्तेहान नहीं लिया और उसकी बात ख़त्म होने से पहले ही गप्प से अपने भाई का लंड पूरा अपनी चूत में घुसा कर उस पर बैठ गई। उसकी आँखें बंद हो गईं और वो किसी और ही दुनिया में खो गई। शायद वो अपने भाई को अपने अन्दर महसूस कर रही थी। फिर वो ऐसे लहराने लगी जैसे उसे ही देख कर कटरीना ने शीला की जवानी पर कमर हिलाना सीखा हो।

विराज के दिल में तो आग लगी हुई थी। उसका बस चलता तो अभी जाकर शालू को चोद डालता। आखिर उससे सहन नहीं हुआ और अपने आप उसका हाथ उसके लंड पर चला गया। जिंदगी में पहली बार वो खुद की मुठ मार रहा था। शुरू से ही वो और जय एक दूसरे की मुठ मारा करते थे। लेकिन आज इस कामुक नज़ारे को देख कर विराज बेबस हो गया था।

उधर शालू ने पहले लंड पर बैठे बैठे आगे-पीछे कमर हिला कर चुदाई की फिर कुछ समय तक घुड़सवारी की तरह उछल उछल कर अपने भाई के लंड को अपनी चूत में अन्दर-बाहर किया। ऐसे में उसके उछलते स्तनों को देख कर विराज की मुठ मारने की रफ़्तार अपने आप बढ़ गई।

आखिर जब थक गई या शायद उत्तेजना कुछ ज्यादा बढ़ गई तो उसने अपने स्तन अपनी भाई की चौड़ी छाती पर चिपका कर उसके अधरों से अधर जोड़ चूसने लगी। अब उसकी कमर ठीक वैसे ही हिल रही थी जैसे पुरुष चुदाई के समय हिलाते हैं। फर्क सिर्फ इतना था कि यहाँ एक बहन अपने भाई को चोद रही थी।

आखिर सुनील और विराज दोनों एक साथ झड़ गए। सुनील का फव्वारा अपनी बहन की चूत में छूटा और विराज का हवा में लेकिन उस बारिश की कुछ बूँदें शालू की नंगी पीठ पर भी गिरीं और तब उसे होश आया कि उसका पति भी उसी कमरे में है। उसने विराज की तरफ देखा और वैसे ही अपने भाई की छाती पर पड़े पड़े उंगलियों के इशारे से उसे अपनी ओर बुलाया। ना जाने अचानक उसे अपने पति की इस हालत पर प्यार आया या तरस लेकिन उसने विराज के वीर्य में सने लिंग को चूमा फिर सारा वीर्य चाट कर साफ़ कर दिया।

अगले दौर में विराज को भी शामिल होना था लेकिन अभी तो दोनों जीजा-साले के लंड झड़ के मुरझाए हुए थे। शालू ने दोनों के लंड एक साथ चूसने की कोशिश की लेकिन वो इतने छोटे थे कि अभी दोनों को इतना पास लाने का कोई मतलब नहीं था।

शालू अभी तक झड़ी नहीं थी तो वो एक एक करके दोनों के लंड चूसने में मूड में नहीं थी। ऐसे में उसको एक ही उपाय नज़र आया- सुनो जी! आप भैया का लंड चूस दो ना। जय भाईसाब का भी तो चूसते थे।
विराज- अरे लेकिन जय की बात अलग थी।
सुनील- क्या बात कर रही है शालू? जीजाजी क्या लौंडेबाज हैं?
शालू- अरे नहीं भैया, वो तो इनके बचपन के दोस्त हैं। दोनों ने साथ मुठ मारना सीखा था इसलिए। और आप भी ना… ये भी मेरे भैया ही तो हैं कोई गैर थोड़े ही हैं। मेरे भाई के लिए इतना नहीं कर सकते क्या?

शालू ने फिर अपने वही बच्चों वाले लहजे में कहा और विराज पिघल गया। वैसे भी ‘सारी खुदाई एक तरफ और जोरू का भाई एक तरफ!’
तो विराज ने सुनील का लंड चूसना शुरू किया और शालू ने विराज का। इधर सुनील ने शालू की टांगें पकड़ कर अपनी तरफ खींचीं और उसकी चूत चाटने लगा। विराज भी भले ही अपने साले का लंड चूस रहा था लेकिन उस पर लगा हुआ रस शालू की चूत का ही था। उसकी चूत की खुशबू और लंड की चुसाई ने दोनों लंडों को फिर खड़ा होने में देर नहीं लगने दी।

शालू तो वैसे ही झड़ने की तलब में तड़प रही थी। वो तुरंत विराज के लंड पर चढ़ बैठी और अपने भैया को गुदा-मैथुन का आमंत्रण दे दिया। फिर सारी रात शालू की चूत और गांड की वैसी ही कुटाई हुए जैसे दो मूसलों से एक ओखली में मसाला कूटा जाता है।

अगले दिन तीनों देर से उठे और फिर तीनों साथ में नहाये। वहां भी खड़े खड़े विराज और सुनील ने शालू के दोनों छेदों को खाली नहीं रहने दिया।

इस सब में सब लोग माँ को तो भूल ही गए थे। वो थोड़ी अनमनी सी नज़र आ रही थी। सुबह का नाश्ता आज लगभग खाने के टाइम पर मिला था।
शालू को लगा कि शायद इसी वजह से नाराज़ होंगी। जो भी हो, दिन इधर उधर की बातों और काम में निकल गया।

सुनील को वापस जाना था लेकिन उसे एक और रात के लिए रोक लिया। वो भी मना नहीं कर सका … कौन नहीं चाहेगा कि उसे एक और रात अपनी बहन चोदने को मिले।
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09-08-2019, 02:01 PM,
#36
RE: Hindi Adult Kahani कामाग्नि
रात को जब तीनों बेडरूम में मिले तो शालू ने फिर वही अपनी बच्चों जैसी राग अलापी- सुनिए ना… आज मेरा मन है कि पूरी रात मैं बस भैया से ही चुदवाऊँ … फिर पता नहीं कब मिलना हो।
विराज- अरे यार, फिर मैं क्या करूँगा? तुमको पता है मुझे मुठ मारने की आदत नहीं है। कल जिन्दगी में पहली बार मुठ मारी थी।
शालू- जाओ… जाकर अपनी माँ चोदो।

सुनील- शालू! ये क्या तरीका है अपने पति से बात करने का। एक तो भले इंसान ने हमको चुदाई करने का मौका दिया और तुम उनसे ऐसे बात कर रही हो?
शालू- अरे नहीं भैया, मैं गाली नहीं दे रही हूँ। वो सच में अपनी माँ चोदते हैं। यहाँ बैठे बैठे बोर होंगे इसलिए सलाह दे रही थी कि अपनी माँ के साथ चुदाई कर लें।

विराज ने कहा- ठीक है!
और वो अपनी माँ के कमरे की तरफ चला गया।

इधर सुनील को विश्वास नहीं हो रहा था कि ऐसा भी हो सकता है। वो भले ही खुद अपनी सगी बहन से साथ किशोरावस्था से ही सम्भोग कर रहा था लेकिन उसे लगा था कि वो ही ये काम कर रहा है बाकी दुनिया में कोई ऐसा नहीं कर सकता।
हाँ यह बात सच है कि हर घर में ऐसा नहीं होता लेकिन जो भी हो रिश्तों में चुदाई एक सच्चाई तो है। लेकिन फिर भी ये जितनी कहानियों में दिखाई देती है उतनी सच्चाई में नहीं क्योंकि समाज में इसे बहुत बुरी नज़र से देखा जाता है।

सुनील- तो क्या जीजाजी शादी के पहले से ही अपनी माँ को चोद रहे हैं?
शालू- नहीं, सच कहूँ तो अभी एक डेढ़ साल पहले मैंने ही अपनी सास को इन से चुदवाया है। लेकिन इच्छा इनकी बचपन से थी।
सुनील- हाँ, मुझे भी माँ के मम्मे बड़े पसंद थे। मैंने भी तेरे पैदा होने के बाद भी उनका दूध पीना नहीं छोड़ा था लेकिन फिर वो गुज़र गईं। खैर तूने कैसे अपनी सास चुदवा दी?
शालू- वो लम्बी कहानी है बाद में बताऊँगी, अभी तुम ये देखो।

इतना कह कर शालू ने वो दर्पण हटा दिया और सामने का दृश्य देख कर विराज के दिल की धड़कन बढ़ गई। विराज अपनी माँ को घोड़ी बना के चोद रहा था। विराज की माँ के लटके हुए स्तन हर धक्के के साथ झूला झूल रहे थे। इस दृश्य को देख सुनील एक बार फिर अपना धैर्य खो बैठा और पहले उसने अपने कपड़े निकाल फेंके और फिर अपनी बहन को नंगी कर के वहीं चोदने लगा।

उधर विराज को शालू की चुदाई की हल्की हल्की आवाजें सुनाई पड़ रहीं थीं क्योंकि सुनील उसे बड़ी जोर से पीछे से चूत में लंड डाल कर खड़े खड़े कांच के पास ही चोद रहा था और एक दर्पण खुला होने की वजह से ज्यादा प्रतिरोध भी नहीं था। विराज भी जोश में आकर अपनी माँ की चूत का भुरता बनाने लगा।
काफी देर बाद जब माँ-बेटा झड़ गए तो थोड़ा सुस्ताने के बाद माँ ने अपनी बात कही।

माँ- बेटा! सच्ची बतैये… कल से जे का चल राओ है?
विराज- क्या मतलब? कुछ भी तो नहीं?
माँ- मोए का तूने बच्चा समझी है। मोए सब समझ आ रई है। तू बता रओ है कि मैं अबेई जा के बहू से पूछ लऊं?
विराज- अब मैं क्या बताऊँ। आप समझदार हो… आपको जो भी समझ आया है सही ही आया होगा।
माँ- पर बहू ने तो कई थी के बा ने अपने भाई से कबऊ नी चुदाओ।

आखिर विराज से माँ को पूरी कहानी सुना दी। लेकिन माँ को यह बात पसंद नहीं आई। उनका साफ़ कहना था कि जब तक पति है तब तक किसी और से चुदवाना सही नहीं है। विराज ने भी उनको यह नहीं बताया कि किसी और से चुदवाने की शुरुवात उसी ने करवाई थी। माँ भी खुद अपने बेटे से चुदवा रहीं थीं तो ज्यादा कुछ बोल नहीं सकती थीं लेकिन उनको ये बिल्कुल अच्छा नहीं लगा कि कोई उनके बेटे की आँखों के सामने उसकी बीवी को चोद के जाए।

अगले दिन सुनील चला गया लेकिन फिर अक्सर घर से किसी ना किसी बहाने निकलता और एक दो रात अपनी बहन के घर रुक कर जाता। विराज की माँ ने साफ़ कह दिया था कि जब भी वो आये तो विराज उनके पास ही रहा करे। उनकी पुरानी सोच को ये बात समझ नहीं आ सकी कि विराज को भी अपनी पत्नी को उसके भाई से चुदवाने में मज़ा आता था। विराज की माँ अपनी बहू से खफा भी थी तो अब उसने साथ में चुदवाना बंद कर दिया था तो कभी कभी दोनों सुनील को शहर की किसी होटल में बुला कर एक साथ सामूहिक चुदाई कर लिया करते लेकिन अक्सर तो विराज को घर पर अपनी माँ ही चोदनी पड़ती।

उधर शीतल ने एक बच्चे को जन्म दिया। इस बार लड़का हुआ था जिसका नाम उन्होंने समीर रखा। विराज और शालू बधाई देने गए लेकिन अब उनके बीच चुदाई का रिश्ता नहीं बचा था। हाँ पर उनके बच्चों यानि कि सोनिया और राजन में दोस्ती का नया रिश्ता ज़रूर शुरू हो गया था।
अगले ही महीने शालू ने भी खुशखबरी दे दी। वो भी गर्भवती हो गई थी। इस बार विराज को जय की ज़रूरत नहीं थी, उसके पास चोदने के लिए उसकी माँ थी।
नौ महीने बाद जब शालू ने जब एक बेटी को जन्म दिया तो शायद उस बच्ची की किस्मत में माँ का प्यार नहीं था। विराज के सर पर दो बच्चों को पालने की ज़िम्मेदारी आ गई। ऐसे में जय और शीतल ने पूरी दोस्ती निभाई और विराज की बेटी नेहा को अपना दूध पिलाया लेकिन उसके एक साल की होने पर विराज की माँ उसे अपने पास ले आईं और उन्ही ने उसे पाला।

अब विराज की जिंदगी भी ज़िम्मेदारी के बोझ तले इतनी दब गई थी कि उसको ज्यादा चोदा-चादी के बारे में सोचने का समय नहीं मिलता था। कभी कभार माँ को चोद लेता था वरना ज्यादातर समय उसका खेती-बाड़ी और बच्चों की देखभाल में ही गुज़रता था। धीरे धीरे बच्चे बड़े होते रहे और माँ-बाप बूढ़े।

ज़माना हमेशा आगे बढ़ता है। अगर इस पीढ़ी में कामुकता का ये हाल है तो अगली पीढ़ी में क्या होगा?
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09-08-2019, 02:01 PM,
#37
RE: Hindi Adult Kahani कामाग्नि
अब तक आपने पढ़ा कि कैसे विराज और जय ने अपनी वासना की उड़ान भरी और उसमें उनकी पत्नियों और माँ-बाप की क्या भूमिका रही। अब उनकी वासना के लिए आगे कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा था लेकिन जैसे नदी अपना रास्ता खुद बना लेती है वैसे ही जिंदगी भी।

देखते हैं उनकी अगली पीढ़ी क्या गुल खिलाती है।
अब आगे…

जय और विराज वासना के जिन पंखों पर उड़े थे वो तो ज़िम्मेदारी के बोझ तले कमज़ोर पड़ गए थे। नेहा दस साल की हुई तब विराज की माँ भी गुज़र गईं और विराज अपने दो बच्चों के साथ बिलकुल अकेला रह गया। तब तक राजन के भी स्कूल की पढ़ाई पूरी हो गई थी। कुछ ही महीनों में वो कॉलेज की पढ़ाई के लिए शहर चला गया। उसका मेडिकल कॉलेज में सेलेक्शन तो हो गया था लेकिन हॉस्टल मिलने में कुछ समय लग गया तो कुछ महीने वो जय के घर ही रहा।


एक तरफ राजन की सोनिया के साथ बचपन वाली दोस्ती अब रोमांस में बदल रही थी तो दूसरी ओर विराज के सर पर नेहा की पूरी ज़िम्मेदारी आ गई थी। खाना बनाने से लेकर घर की साफ़-सफाई तक सारा काम विराज खुद करता था। नेहा थोड़ी बहुत मदद कर दिया करती थी लेकिन विराज उसे पढ़ाई में ध्यान लगाने के लिए ज्यादा जोर देता था।

इधर नेहा हाई-स्कूल में पहुंची और उधर राजन ने अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी कर ली थी। जब उसकी इंटर्नशिप चल रही थी तो वो अक्सर सोनिया से मिलने उसके शहर चला जाया करता था। अब उसके पास थोड़ा समय भी था और पैसे भी। ऐसे ही मिलते मिलाते दोनों चुदाई भी करने लगे। राजन किसी अच्छे से होटल में रूम बुक कर लेता और सोनिया कॉलेज बंक करके आ जाती और फिर पूरा दिन मस्त चुदाई का खेल चलता।

इंटर्नशिप पूरी होते ही राजन ने अपने पिता विराज और सोनिया के मम्मी-पापा दोनों को कह दिया कि उसे सोनिया से शादी करनी है।

वो दोनों तो पहले से ही पक्के दोस्त थे उन्हें क्या समस्या होनी थी। सोनिया की माँ थोड़ी नाखुश थी क्योंकि उसके हिसाब से विराज ठरकी था और उसे लगता था कि कहीं वो सोनिया पर पूरी नज़र ना डाले और क्या पता राजन भी अपने बाप पर गया हो और सोनिया को अपने दोस्तों से चुदवता फिरे।
लेकिन जब मियाँ, बीवी और बीवी का बाप भी राज़ी तो क्या करेंगी माँजी।
दोनों की शादी धूम-धाम से हुई और फिर सोनिया राजन के साथ दूसरे शहर में चली गई जहाँ राजन ने अपना क्लिनिक खोला था।

इधर जब नेहा ने जवानी की दहलीज़ पर कदम रखा तो विराज का मन भी डोलने लगा था। विराज का मन इसलिए डोला था कि एक तो विराज को काफी समय हो गया था स्त्री संसर्ग के बिना और उस पर नेहा बिलकुल अपनी माँ जैसी दिखती थी; लेकिन विराज नहीं चाहता था कि नेहा की पढ़ाई में कोई रुकावट आये इसलिए उसने नेहा को उसके भाई के साथ रहने के लिए शहर ये बहाना बना कर भेज दिया कि वहां पढ़ाई अच्छी हो जाएगी और साथ में कॉलेज की तैयारी भी कर लेगी।

नेहा ने भी इस बात को गंभीरता से लिया और पढ़ाई में अपना दिल लगाया। स्कूल की पढ़ाई के साथ साथ अच्छे कॉलेज में एडमिशन के लिए एंट्रेंस एग्जाम की भी तैयारी की। उधर एक बेडरूम में राजन और सोनिया की चुदाई चलती थी और दूसरे बेडरूम में नेहा की पढ़ाई। दिन में भी कभी उसका ध्यान उसके भैया-भाभी की चुहुलबाज़ी पर नहीं जाता था।

आखिर उसकी मेहनत रंग लाई और शहर के सबसे अच्छे कॉलेज में उसका सेलेक्शन हो गया। पहले सेमिस्टर के रिजल्ट्स भी अच्छे आये तब जा कर नेहा को थोड़ा सुकून मिला और उसने पढ़ाई के अलावा भी दूसरी बातों की तरफ ध्यान देना शुरू किया। ज़ाहिर है सेक्स उन बातों में से एक था। अब उसका ध्यान अपने भैया कि उन सब हरकतों पर जाने लगा था जो वो हर कभी नज़रें बचा कर सोनिया भाभी के साथ साथ करते थे। कभी किचन में भाभी के उरोजों को मसलते हुए दिख जाते तो कभी बाथरूम से नहा कर आती हुई भाभी के टॉवेल के नीचे हाथ डाल कर उनकी चूत के साथ छेड़खानी करते हुए।

इन सब बातों को सोच सोच कर नेहा रोज़ रात को अपनी चूत सहलाते हुए सो जाती। सब कुछ ऐसे ही चलता रहता अगर होली के एक दिन पहले सोनिया की नज़र, रंग खरीदते समय एक भांग की दूकान पर ना पड़ी होती। उसने सोचा क्यों ना थोड़ी मस्ती की जाए तो वो थोड़ी ताज़ी घुटी हुई भांग खरीद कर ले आई। अगले दिन सुबह वो भांग नाश्ते में मिला दी गई।

नेहा ने नाश्ता किया और चुपके से जा कर अपने सोते हुए भैया के चेहरे पर रंग से कलाकारी करके आ गई। सोनिया अभी किचन में ही थी कि राजन उठ कर बाथरूम गया तो देखा किसी ने उसे पहले ही कार्टून बना दिया है। उसने भी जोश में आ कर किचन में काम कर रही सोनिया को पीछे से पकड़ कर रंग दिया। उसका चेहरा ही नहीं बल्कि कुर्ती में हाथ डाल कर उसके स्तनों पर भी अपने हाथों के छापे लगा दिए।
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09-08-2019, 02:01 PM,
#38
RE: Hindi Adult Kahani कामाग्नि
सोनिया- अरे ये क्या तरीका है… अभी तो मैं काम कर रही हूँ। नाश्ता करने तक तो इंतज़ार कर लिया होता।
राजन- नाश्ते तक? तुमने तो मेरे जागने तक का इंतज़ार नहीं किया।

राजन ने अपनी शक्ल दिखाई तो सोनिया हँसी रोक नहीं पाई।

सोनिया- अरे बाबा, मैं तो नाश्ता बनाने में बिजी थी। ये देखो मेरे हाथ … यह ज़रूर नेहा का काम होगा।
राजन- इस नेहा की बच्ची को तो मैं नहीं छोडूंगा आज।

इतना कह कर राजन नेहा के कमरे की तरफ भागा। लेकिन नेहा रंग लगवाने के लिए तैयार नहीं थी वो भी इधर उधर भागने लगी। आखिर नेहा को किसी भी तरह पकड़ कर रंगने के चक्कर में राजन का एक हाथ उसकी छाती पर पड़ गया और उसने अपनी बहन के स्तन को दबाते हुए अपनी ओर खींचा। इससे नेहा शर्मा गई और जैसे ही राजन को अहसास हुआ कि क्या हो गया है तो वो भी थोड़ा सकुचा गया। यह पहली बार था जब उसने अपनी पत्नी के अलावा किसी और के उरोजों को छुआ था वो भी अपनी सगी बहन के।

इतने में नेहा भाग कर घर से बाहर निकली लेकिन उसकी किस्मत में रंगना ही लिखा था। उसके कॉलेज की कुछ सहेलियाँ और उनके बॉय-फ्रेंड्स इनके घर की तरफ ही आ रहे थे उन्होंने झटपट उसे पकड़ लिया और फिर तो नेहा की वो रंगाई हुई है कि समझो अंग अंग रंग में सरोबार हो गया। भीड़ में किसने उसके स्तनों का मर्दन किया और किसने नितम्बों का ये तो उसे भी नहीं पता चला।

लेकिन उसे मज़ा भी बहुत आया क्योंकि कई दिनों से वो खुद ही के स्पर्श से कामुकता का अनुभव कर रही थी। आज पहले अपने ही भैया के हाथों उसके उरोजों का उद्घाटन हुआ था और अब इतने लोगों ने उसे छुआ था कि उसके लिए इस सुख की अनुभूति का वर्णन करना संभव नहीं था। ऊपर से भजियों में मिली भांग ने भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था।

इधर सोनिया ने अपने हाथों से अपने पति को भांग वाले भजिये खिलाने शुरू किये। लेकिन राजन आज कुछ ज्यादा ही रोमाँटिक हो रहा था उसने भी अपने होंठों में दबा दबा कर वही भजिये सोनिया को खिलने शुरू किये। सोनिया भी मन नहीं कर पाई क्योंकि उनका पहला चुम्बन ऐसे भी राजन ने उसे चॉकलेट खिलने के बहाने किया था। इधर राजन और सोनिया को भांग का नशा चढ़ना शुरू हुआ उधर नशे में चूर और रंग में सराबोर नेहा ने दरवाज़े पर दस्तक दी।

राजन ने दरवाज़ा खोला तो उसके तो होश ही उड़ गए। उस भीगे बदन के साथ जिस नशीली अदा से वो खड़ी थी उसे देख कर राजन का लण्ड झटके मारने लगा। वो अन्दर आई तो उसके ठण्ड के मारे कड़क हुए चूचुक जो टी-शर्ट के बाहर से ही साफ़ दिख रहे थे और उसके पुन्दों के बीच की घांटी में फंसी उसकी गीली स्कर्ट जो उसके नितम्बों की गोलाई स्पष्ट कर रही थी उसे देख कर तो राजन का ईमान अपनी सगी बहन पर भी डोल गया। तभी सोनिया भी आ गई।

सोनिया- ननद रानी, बाहर ही पूरा डलवा चुकी हो या घर में भी कुछ डलवाओगी?
नेहा नशे में खुद पर काबू नहीं कर पाई और नशीले अंदाज़ में खिलखिला दी। सोनिया को नेहा की वजह से ही सुबह सुबह रंग दिया गया था उसका बदला तो उसे लेना ही था।

सोनिया- तुम्हारी वजह से मैं रंगी गई थी। बदला लिए बिना कैसे छोड़ दूं। अब बाहर तो कोई कोरी जगह दिख नहीं रही है तो अन्दर ही लगाना पड़ेगा।

इतना कह कर सोनिया ने नेहा के टॉप में हाथ डाल कर उसके मम्में रंग दिए। इस बात पर नेहा भी बिदक गई।
नेहा- भैया, भाभी को पकड़ो, मैं भी रंग लगाऊँगी।

राजन ने सोनिया को पीछे से ऐसे पकड़ लिया कि उसके दोनों हाथ भी पीछे ही बंध गए। नेहा कुर्ती के गले में हाथ डाल कर सोनिया के जोबन को रंगने जा ही रही थी कि उसने देखा वहां पहले ही रंग लगा हुआ है।

नेहा- क्या यार भैया! आपने तो इनके खरबूजे पहले ही रंग दिए हैं।
राजन- तो तू सलवार निकाल के तरबूजे रंग दे!

नेहा ने सलवार का नाड़ा खींचा और सोनिया की पेंटी में अपने दोनों हाथ डालकर उसके दोनों कूल्हों पर रंग लगाने लगी। इधर राजन ने सोनिया की कुर्ती निकालने की कोशिश की तो उसकी पकड़ कमज़ोर पड़ गई। उसने सोचा था कि कुर्ती तो पकड़ में रहेगी लेकिन सोनिया खुद उसमें से निकल भागी और तुरंत राजन के पीछे जा कर उसे धक्का मार दिया। अब सोनिया केवल ब्रा और पेंटी में थी।

राजन अभी ठीक से समझ भी नहीं पाया था कि क्या हुआ है, वो लड़खड़ा गया और नेहा के ऊपर जा गिरा। उसके हाथ में जो सोनिया की कुर्ती थी उसमें नेहा का सर फंस गया। राजन अभी नेहा का सहारा ले कर अभी थोड़ा सम्हला ही था कि, सोनिया ने राजन की अंडरवेयर नीचे खसका दी, और नेहा के हाथ उसके भाई के नंगे नितम्बों पर रख दिए। राजन का लण्ड भी फनफना के उछल पड़ा।

सोनिया- मेरी सलवार निकलवाओगे। ये लो अब अपनी तशरीफ़ रंगवाओ!
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09-08-2019, 02:01 PM,
#39
RE: Hindi Adult Kahani कामाग्नि
तीनों भांग के नशे में ज्यादा सोच नहीं पा रहे थे। सबसे कम सोनिया को ही चढ़ी थी क्योंकि उसे पता था इसलिए उसने बस उतने ही भजिये खाए थे जितने राजन ने उसे जबरन खिला दिए थे। राजन को अब चढ़ने लगी थी लेकिन नेहा पूरी तरह से भंग के नशे में गुम थी। नशा अपनी जगह था लेकिन सर पर कुर्ती फंसे होने की वजह से अब नेहा को कुछ दिख नहीं रहा था। वो मस्त अपने भाई के पुन्दों पर रंग मले जा रही थी और हँसे जा रही थी।

राजन को भले ही ज्यादा नशा नहीं था लेकिन आज सुबह ही उसने पहली बार अपनी बहन के स्तनों को कपड़ों के ऊपर से ही सही लेकिन महसूस तो किया था और उसके मन को कुछ वर्जित कल्पनाएँ जैसे छू कर निकल गईं थीं। अब जब उसकी बहन के कोमल हाथ उसके नग्न नितम्बों को सहला रहे थे तो वो कल्पनाएँ फिर वापस आ गईं और वो किम्कर्तव्यविमूढ़ हुआ वहीं खड़ा रह गया। इतने समय का फायदा उठाते हुए सोनिया नेहा के पीछे पहुँच चुकी थी और उसकी स्कर्ट भी खसकाना चाहती थी।

सोनिया- और तुमने मेरी सलवार खिसकाई थी… ये लो गई तुम्हारी स्कर्ट!

लेकिन जल्दीबाज़ी में और शायद कुछ नशे की वजह से सोनिया ने स्कर्ट के साथ साथ नेहा की पेंटी भी खिसका दी। राजन का लण्ड सीधे अपनी बहन की चूत से जा टकराया लेकिन तब तक राजन और नेहा भी अपनी हड़बड़ाहट से बाहर आ गए थे। नेहा गुस्से में पलटी और सोनिया के ऊपर टूट पड़ी।

नेहा- तुमने मुझे नंगी किया? मैं तुमको नहीं छोडूंगी भाभी!

सोनिया इस अचानक हमले से अपना संतुलन खो बैठी और फर्श पर तिरछी पड़ गई। नेहा ने इसका फायदा उठाते हुए उसकी पेंटी खींच ली। जब नेहा अपनी भाभी को नंगी करने की कोशिश में झुकी हुई थी तो उसके भैया उसके चूतड़ों के बीच उसकी चूत के दीदार कर रहे थे। राजन का लण्ड जैसे फटने को था उससे रहा नहीं गया और उसने अपना टी-शर्ट खुद निकाल फेंका और पूरा नंगा हो गया।

राजन ने तुरंत अपना लण्ड अपनी बहन के मुस्कुराते हुए भगोष्ठों (चूत के होंठ) के बीच घुसा दिया। नेहा चिहुंक उठी, और तुरंत सीधी होकर पलटी। तब तक उसके हाथ में उसकी भाभी की पेंटी आ गई थी, लेकिन अपने सामने अपने भाई को पूरा नंगा देख कर वो ठिठक कर वहीं खड़ी रह गई। उसके आँखें उसके तनतनाए हुए लण्ड पर जमी हुए थी और इसी का फ़ायदा उठा कर सोनिया ने पाछे से उसका टी-शर्ट खींच लिया। अब दोनों ननद-भाभी केवल एक-एक ब्रा में थी और राजन बिलकुल नंगा उनको देख कर अपना लण्ड मुठिया रहा था।

नेहा भी कैसे चुप रहती वो भी सोनिया से गुत्थम-गुत्था हो गई। दोनों करीब-करीब नंगी लड़कियों में एक दूसरे को पूरी नंगी करने के लिए कुश्ती चल रही थी। पहले नेहा ने सोनिया की ब्रा निकाल ली लेकिन खुद को सोनिया के चुंगल से नहीं निकाल पाई। आखिर जब नेहा की ब्रा सोनिया के हाथ आई तब तक नेहा पलट चुकी थी लेकिन तब भी सोनिया ने उसे नहीं छोड़ा था। अब सोनिया फर्श पर पीठ के बल लेटी थी और उसने पीछे से नेहा को उसके बाजुओं के नीचे से अपने हाथ फंसा कर उसके कन्धों को पकड़ा हुआ था। दोनों पूरी नंगी थीं और दोनों की नज़रों के सामने राजन नंगा खड़ा मुठ मार रहा था।

सोनिया- चला अपनी पिचकारी राजन! रंग डे अपनी बहन को अपने सफ़ेद रंग से।
नेहा- नहीं भाभी छोड़ो मुझे… ही ही ही… नहीं भैया प्लीज़… सू-सू मत करना प्लीज़!!!
सोनिया- अरे तुम चलाओ पिचकारी… ही ही ही।

नेहा शायद सोनिया की बात का मतलब नहीं समझी थी। दोनों भाँग की मस्ती में मस्त होकर हँसे जा रहीं थीं। राजन ने पहली बार अपनी बहन को नंगी देखा था और जिस तरह की नंगी लड़कियों की कुश्ती उसे देखने को मिल रही थी उसके बाद किसी भी आदमी को झड़ने में ज्यादा समय नहीं लग सकता खासकर जब उनमें से एक लड़की उसकी बहन हो।
राजन के लण्ड से वीर्य की फुहार छूट पड़ी और पहली बूँद नेहा के स्तन पर जा गिरी। सोनिया ने उसे नेहा के चूचुक पर मॉल दिया। इस से नेहा का भी मज़ा आ गया और उसका छटपटाना बंद हो गया।

राजन आगे बढ़ा और अगली 1-2 धार उसने नेहा और सोनिया के चेहरे पर भी छोड़ दीं। नेहा को अब तक ये तो समझ आ गया था कि ये पेशाब नहीं था। सोनिया ने वीर्य की कुछ बूँदें नेहा के चेहरे से चाट लीं और फिर नेहा को फ्रेंच-किस करके उसे भी भाई उसके भाई के वीर्य का स्वाद चखा दिया। फिर सबसे पहले सोनिया उठ खड़ी हुई और धीमी आवाज़ में मस्ती वाली अदा से राजन को छेड़ने लगी।

सोनिया- याद है… हमारी पहली होली पर तुमने मुझे ऐसे ही रंगा था… लेकिन तब इतना रंग नहीं निकला था तुम्हारी पिचकारी से।
राजन (शरमाते हुए)- अब क्या बोलूं… तब तुम अकेली थीं, अभी दो के हिसाब से…
सोनिया- हाँ हाँ पता है मुझे… आज दूसरी में कुछ ज्यादा ही इंटरेस्टेड हो रहे हो।
सोनिया (जोर से)- चलो सब चल के नहा लेते हैं। बहुत हो गई होली… (धीरे से) अब कुछ ठुकाई हो जाए।
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09-08-2019, 02:01 PM,
#40
RE: Hindi Adult Kahani कामाग्नि
राजन डॉक्टर था तो उसने पहले ही सोनिया को समझा रखा था कि होली पर कौन सा रंग इस्तेमाल करना चाहिए। ये सूखा वाला आर्गेनिक रंग था जिसे छूटने में ज्यादा देर नहीं लगती। जल्दी ही सबका रंग तो उतर गया लेकिन भंग का रंग थोड़ा बाकी था या शायद भांग तो उतर गई थी पर मस्ती अभी भी चढ़ी हुई थी। राजन और सोनिया शॉवर के नीचे बांहों में बाहें डाले एक दूसरे के नंगे बदन को सहला रहे थे और चुम्बन का आनन्द ले रहे थे।

नेहा उनकी तरफ ना देखने का नाटक करते हुए दूसरी तरफ मुँह करके खड़ी थी लेकिन झुक कर पैरों को साफ़ करने के बहाने से अपने पैरों के बीच से अपने भाई के लण्ड का दीदार कर रही थी जो अब वापस से सख्त लौड़ा बन चुका था। उधर चुम्बन टूटा तो राजन, सोनिया के उरोजों पर टूट पड़ा। तभी सोनिया की नज़र नेहा पर गई जो कनखियों से उनकी ही तरफ देख रही थी।

सोनिया ने राजन का कड़क लण्ड किसी हैंडल की तरह पकड़ा और उसे खीचते हुए राजन को नेहा के पीछे खड़ा कर दिया। नेहा उठने को हुई तो सोनिया ने अपने एक हाथ से उसकी पीठ को दबाते हुए दूसरे से राजन का लण्ड उसकी बहन की चूत के मुहाने पर रख दिया और फिर उसी हाथ से राजन का चूतड़ पर एक चपत जमा दी, ठीक वैसे जैसे घोड़े को दौड़ाने के लिए उसके पिछवाड़े पर मारी जाती है।

नेहा- आह! आऊ!! आऽऽऽ

बस इतना, और अपने भाई घोड़े जैसे लण्ड के तीन धक्कों से नेहा ने अपना कुँवारापन हमेशा के लिए खो दिया। लेकिन कुँवारेपन के बोझ तले अपनी जवानी को सड़ाना चाहता भी कौन है। नेहा तो खुद कब से अपनी चूत की चटनी बनाने के लिए एक मूसल ढूँढ रही थी, जो आज उसकी भाभी ने खुद अपने हाथों से लाकर उसकी चूत पर रख दिया था। दर्द ख़त्म हो चुका था और अब जो अनुभव नेहा को हो रहा था उससे उसे ऐसा लग रहा था कि बस ये चुदाई यूँ ही चलती रहे; कभी ख़त्म ही ना हो।

सोनिया इन दोनों की उत्तेजना बढाने के लिए गन्दी गन्दी बातें बोल रही थी और कभी नेहा के स्तनों को सहला रही थी तो कभी उसे चूम रही थी। काश नेहा की कामना सच हो पाती और ये भाई बहन की चुदाई कभी ख़त्म ही ना होती।
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