Indian Sex Story परिवार हो तो ऐसा
09-20-2018, 01:55 PM, (This post was last modified: 09-21-2018, 01:42 PM by sexstories.)
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Heart  Indian Sex Story परिवार हो तो ऐसा
परिवार हो तो ऐसा 

लेखक- राज अग्रवाल
राज खिड़की के पीछे छुप कर देख रहा था कि किस तरह वो मोटा और लंबा लंड उसके मुँह के अंदर बाहर हो रहा था... उसके होठों ने उस लंड को अपनी जीब से जकड़ा हुआ था.. और उसकी लंबाई और मोटाई का मज़ा ले उसे चूस रहे थे.. उसके मुँह उपर नीचे हो रहा था.. और गौरव बड़े प्यार से उसे देख रहा था.

कमरे के अंदर के नज़ारे को देखते हुए राज ने अपने लंड को अपनी शॉर्ट्स से आज़ाद किया और अपनी मुट्ठी उसके इर्द गिर्द कस दी.. उसके दिल मे आ रहा था कि काश गौरव के लंड की जगह उसके खुद का लंड उस प्यारे मुँहे के अंदर बाहर हो रहा होता. जिस तेज़ी से उसका मुँह उस लंड के उपर नीचे हो रहा था.. राज अपने लंड को उसी तरह मुठियाने लगा.. वो उसके मुँह के साथ ताल से ताल मिला रहा था... उसका दिल तो चाह रहा था कि काश यहा खिड़की के पीछे होने की जगह वो कमरे के अंदर होता.. पर वो ऐसा कर नही सकता था..

राज की नज़रें उस लड़की के उपर गढ़ी हुई थी जो मुँह को उपर नीचे कर बेडरूम के अंदर उस लंड को चूस रही थी.. वो पतली थी...किसी खिलाड़ी की तरह... उसके लंबे बाल बार बार उसके चेहरे के आगे आ जाते लेकिन वो अपने बालों को रह रह कर पीछे कर देती... राज उसके सुंदर चेहरे की देख रहा था... गोल चेहरा पतले बारीक होंठ.. और उसकी गुलाबी जीब जो उस लंड पर फिरक रही थी... गोरा चिकना बदन और सबसे प्यारी उसकी नीली आँखे... जो किसी को भी आकर्षित कर सकती थी ... मदहोश कर सकती थी...

राज की आँखे उसके चेहरे से थोड़ा नीचे फिसली... जहाँ उसे दो प्यारी और भरी हुई चुचियाँ दीखाई दी.. जो किसी पके हुए आम की तरह अपने बॉयफ्रेंड के छाती पर झूल रही थी.. उसका बॉयफ्रेंड लेट कर अपनी प्रेमिका की जीब का मज़ा अपने लंड पर ले रहा था.... उसकी पतली कमर और गोल गोल कूल्हे... देख राज का मन मचलने लगा.

वो जितना जोरों से अपने बॉयफ्रेंड के लंड को चूस्ति राज उतनी जोरों से अपने लंड को मसल्ने लगता... लड़की ने अपना चेहरा उठाया और उस लंड को अपनी मुट्ठी मे भर मुठियाने लगी.. राज देखता रहा... राज को मालूम था कि गौरव का लंड पानी छोड़ रहा है और वो लड़की उसके पानी को अपने मुँह मे ले पी रही है... राज से सहन नही हो रहा था और वो ज़ोर ज़ोर से अपने लंड को मसल्ने लगा... आख़िर उसके लंड ने पानी की धार छोड़ी.. जो खिड़की के नीचे दीवार पर जा गिरी...

राज सोच रहा था कि काश प्रीति उसके लंड को गौरव के लंड की तरह मुँह मे ले चूस्ति और वो भी अपने वीर्य की पिचकारी उसके गले तक छोड़ता... पर वो अपनी सग़ी बेहन के साथ ऐसा कर तो नही सकता था ना.. इसलिए वो सिर्फ़ देखता रहा और इंतेज़ार करता रहा कि क्या वो दोनो आगे बढ़ते है.. लेकिन उसने देखा कि उसकी छोटी बेहन अपने बॉय फ़्रेंड गौरव से सिर्फ़ बात करने मे लगी हुई है तो उसने घर के अंदर जाने की सोची.. उसके माता पिता घर आते ही होंगे. वो हॉल मे आ टीवी देखने लगा और दो प्रेमियों का इंतेज़ार करने लगा कि वो कब बाहर आते है.

राज के माता पिता किसी पार्टी मे गये थे और तीनो को घर पर अकेला ये सोच कर छोड़ गये थे कि शायद तीनो बैठ कर कोई पिक्चर देखेंगे.. लेकिन उनके जाते ही प्रीति और गौरव दोनो बेडरूम मे खिसक गये थे... और प्रीति जाते जाते राज को ये कह गयी कि वो ध्यान रखे... राज को गुस्सा भी आ रहा था और जलन भी हो रही थी... कि वो बैठ कर अपनी ही बेहन की पहरेदारी करे और वो अपने प्रेमी के साथ बेडरूम मे गुलचर्रे उड़ाए... टीवी देखते देखते उसे उकताहत होने लगी.. तभी उसके दिल मे आया कि वो देखे तो ज़रा कि उसकी प्यारी छोटी बेहन आख़िर अपने प्रेमी के साथ कर क्या रही है... इसलिए वो घर के बाहर गलियारे मे आ गया कि शायद खिड़की से कुछ देखने को मिल जाए.. उसे ये देख कर हैरानी हुई कि दोनो नादान प्रेमी अपने उत्तावलेपन मे ना तो कमरे की लाइट ही बुझाई थी और ना ही खिड़की पर पड़े पर्दे डाले थे....उसे दोनो साफ साफ दीखाई दे रहे थे..... उसने देखा कि गौरव ने प्रीति के ट्रोप को उसके सिर पर से उठा उतार दिया था और उसकी ब्रा मे क़ैद कूचियों दीखाई दे रही थी.

राज बचपन से अपनी बेहन की चुचियों को देखता आ रहा था तब से जब उसकी छाती पर चुचिया एक घुंडी के आकार मे उबरने लगी थी... तब से लेकर वक्त के साथ बदलते उसकी ब्रा और पॅंटी का साइज़ भी उसे मालूम था....

गौरव अब प्रीति की चुचियों को चूस रहा था.. और राज ये सब देख जज्बाती हो रहा था... जैसे ही गौरव ने उसके निपल को दाँतों के बीच लेते हुए खींच कर काटा राज को लगा कि उसका लंड मचलने लगा था ये सब देखकर... अपनी ही बेहन को इस तरह अपने प्रेमी के साथ मस्ती करते देख वो उत्तेजित हो रहा था...

प्रीति ने गौरव को धक्का दे बिस्तर पर पीठ के बल लीटा दिया था... और उसने उसकी पॅंट खींच कर नीचे कर दी थी... और उसके लंड को मुँह मे ले चूस रही थी... राज खुद अपनी गिर्ल्फ्रेंड के साथ इतना आगे नही बढ़ पाया था जितना कि प्रीति बढ़ चुकी थी...

ये सब सोचते ही राज का लंड एक बार फिर खड़ा होने लगा था.. लेकिन तभी प्रीति और गौरव हॉल मे आकर सोफे पर बैठ गये... राज ने उनसे कुछ ड्रिंक लेने के लिए पूछा... और अपने ड्रिंक लाने के लिए उठ गया.

जैसे ही राज प्रीति के बगल से गुज़रा उसके पॅंट के अंदर तने लंड का उभार उसकी नज़रों से छिपा ना रह सका.. वो हैरत से अपने भाई के खड़े लंड को देखती रही.... उसने तुरंत अपनी निगाह गौरव के चेहरे पर डाली कहीं वो भी तो नही देख रहा... लेकिन वो तो टीवी पर मूवी देखने मे व्यस्त था...

आज से पहले प्रीति ने कभी अपनी निगाह राज की जांघों के बीच नही डाली थी... आख़िर वो उसका भाई था... लेकिन आज जब वो बगल से गुज़रा तो वो चाह कर भी अपनी नज़रें उस पर से नही हटा पाई. प्रीति का मुँह अभी भी अपने बॉयफ्रेंड के वीर्य के स्वाद से भरा था... और साथ ही उसकी चूत भी झाड़ कर शांत नही हुई थी... राज के लंड का उभार देख उसे महसूस हुआ कि उसकी पॅंटी गीली हो गयी थी.... शायद रस से भरी उसकी चूत चुह रही थी.

प्रीति को विश्वास नही हो रहा था कि अपने ही भाई के लंड के ख़याल से वो उत्तेजित हो सकती है.. उसने अपने ख़यालों को झटका और अपना सारा ध्यान टीवी पर लगा दिया... थोड़ी ही देर मे राज हाथ मे कोल्ड ड्रिंक लिए आया और उसके पास बैठ गया... अब प्रीति बीच मे थी और गौरव उसकी दूसरी तरफ.

प्रीति अपने आपको नही रोक पाई और उसकी निगाह एक बार फिर अपने भाई की जांघों के बीच चली गयी... वैसे तो उसका लंड कुछ ढीला पड़ चुका था लेकिन उसका उभार अभी भी पॅंट के उपर से दीखाई दे रहा था... उसकी चूत मे फिर सरसराहट मचने लगी.

मूवी ख़तम होने से कुछ देर पहले ही राज और प्रीति के माता पिता आ गये थे... इसलिए वक्ती तौर पर अपने भाई के लंड का ख्याल प्रीति के दीमाग से निकल गया था... लेकिन उसी रात वो अपने कमरे मे बिस्तर पर नंगी लेटी... टाँगे फैलाए... अपनी उंगलियों को ज़ोर ज़ोर से चूत पर मसल रही थी.. वो अपनी चूत को झाड़ा अपनी उत्तेजना शांत करना चाहती थी.... वो हर बार अपने बॉयफ्रेंड गौरव को और उसके लंड को याद करने की कोशिश करती तो हर बार राज के लंड का उभार उसकी आँखों के सामने आ जाता.
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09-20-2018, 01:56 PM,
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RE: Indian Sex Story वपरिवार हो तो ऐसा
प्रीति पलंग पर लेटी अपनी चूत को मसल रही थी और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया... उसे विश्वास नही हुआ कि उसकी चूत आज भाई के लंड के ख्याल से ही झाड़ गयी थी..

प्रीति के कमरे के ठीक बगल के कमरे मे राज अपने बिस्तर पर यह ख्याल लिए लेटा था... हर बार उसके जहाँ मे प्रीति का चेहरा आ जाता... वो नज़ारा आ जाता जब वो अपने बॉयफ्रेंड का लंड कितने प्यार से चूस रही थी... वो सोचने लगा प्रीति की चुचियों के बारे मे... और उसे लगा कि उसका लंड उसकी सोच का साथ दे रहा है.. उसने अपने लंड को अपनी मुट्ठी मे कस लिया... उसने थोड़ा सा तेल अपने हाथों मे लगाया और अपने लंड को ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगा... भीचने लगा... वो सोचने लगा कि किस तरह गौरव का लंड प्रीति के गुलाबी होठों को छूता हुआ उसके मुँह के अंदर बाहर हो रहा था कि उसने अपने लंड के पानी को एक रुमाल पर छोड़ दिया.

दोनो भाई बेहन अपने ही ख़यालों मे खोए सो गये... दोनो एक दूसरे को नंगा देखना चाहते थे.. उनके स्पर्श का एहसास करना चाहते थे.... थोड़े दीनो बाद की बात है.. एक सुबह राज अपने वीडियो कॅमरा को देख रहा था जो उसे उसके पिताजी ने गिफ्ट किया था... वो घर के बाथरूम मे था और उसे छिपाने के लिए कोई ऐसी जगह ढूंड रहा था जहाँ उसकी बेहन की नज़र ना पड़े... फिर उसकी नज़र शेल्फ पर पड़ी जहाँ बाल्टी मे गंदे कपड़े धोने के लिए रखे जाते थे.. उस बाल्टी मे कई छेद थे... उसे लगा कि अगर वो कॅमरा को अछी तरह टवल मे लपेट... उसका लेंस सही दिशा मे रख कपड़ों के साथ छुपा देगा तो किसी की नज़र नही पड़ेगी.

उसे पता था कि उसकी मा ने अभी कल ही सारे कपड़े धोए है इसलिए दो तीन दिन तक कोई इसे छेड़ने वाला नही है.. उसने बाल्टी से कपड़े निकाले...और अपना कॅमरा छुपा वापस उसमे कपड़े डालने लगा कि उसकी नज़र अपनी बेहन की पॅंटी पर पड़ी.. वो एक सॅटिन की महीन पॅंटी थी.. वो उसे देखने लगा.

पॅंटी को देख उसे कुछ होने लगा था.. उसने उसे उठा उसकी जांघों के बीच के हिस्से को सूँघा और अपनी जेब मे रख ली... वो वापस अपने बेडरूम मे आकर बिस्तर पर लेट गया... और इंतेज़ार करने लगा अपनी बेहन का बाथरूम मे जाने का.. उत्सुकता मे उसका लंड खड़ा हो रहा था कि पता नही कब उसकी बेहन शवर के नीचे नहाएगी तो कमेरे मे क्या क्या क़ैद होगा..

अपनी बेहन के ख़यालों मे खोए राज ने अपने लंड को अपनी शॉर्ट्स से बाहर निकाला और अपनी बेहन की पॅंटी को उसके चारों ओर लपेट दिया.. फिर अपने लंड को ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगा... सॅटिन की पॅंटी जब उसके लंड पर फिसलती तो उसे बहोत मज़ा आता उसका लंड झड़ने को तय्यार हो गया.. एक बार फिर उसने अपनी बेहन के उस द्रिश्य को याद करने लगा जब वो अपने बॉय फ़्रेंड के लंड को अपने गले तक ले चूस रही थी... और उसके लंड ने उसकी बेहन की पॅंटी मे पानी छोड़ दिया.

राज को शवर का पानी गिरने की आवाज़ आ रही थी... वो पानी के रुकने का बेसब्री से दरवाज़े के बाहर इंतेज़ार करने लगा... तभी प्रीति एक टवल मे लीपटि बाथरूम से निकली.. राज ने नेज़रें उठा कर उसकी तरफ देखा... प्रीति उसे देख मुस्कुरा रही थी... राज बाथरूम मे घुसा और उसने दरवाज़ा बंद कर लिया.

उसने जल्दी जल्दी अपनी शॉर्ट्स उतारी और स्नान करने लगा.. उसे तो जल्दी थी वो वीडियो देखने की ... वो जल्दी जल्दी नहा कर अपने कमरे मे वापस जाना चाहता था. जल्दबाज़ी मे उसने बाथरूम का दरवाज़ा भी बंद नही किया था...

राज की हालत खराब थी उसका लंड था कि शांत होने का नाम ही नही ले रहा था.. प्रीति के ख़याल ने उसे फिर गरमा दिया था.. उसने अपने लंड के चारों और साबून लगाई और सुबह से दूसरी बार मूठ मारने लगा.... वो ज़मीन पर बैठ मुठिया ही रहा था कि तभी बाथरूम का दरवाज़ा खुला और प्रीति अचानक आ गयी...

"ओह्ह्ह सॉरी में अपना हेर ब्रश भूल गयी थी...."

वैसे तो प्रीति ने उसकी तरफ नही देखा था..लेकिन अपना ब्रश लेकर वापस बाहर जाते हुए उसने एक सरसरी सी निगाह राज पर डाली थी और राज को विश्वास था कि उसका खड़ा लंड उसकी नज़रों से नही छुप पाया होगा...

प्रीति अपने पलंग पर बैठी हुई थी.. उसका एक हाथ उसकी चूत पर था जिसकी दो उंगलियाँ अंदर घुसी हुई थी और दूसरे हाथ से वो अपनी चुचि मसल रही थी...

"हे भगवान कितना बड़ा और मोटा है.." उसने अपने आप से कहा.... उसके भाई का लंड उसके दिमाग़ मे स्थिर कर गया था.. जब राज बाथरूम मे था तो वो जान बुझ कर अंदर घुसी थी लेकिन उसे उम्मीद नही थी कि वो अपने खड़े लंड को हाथ मे लिए खड़ा होगा... और इतने मोटे लंड की तो उसे कतई उम्मीद नही थी... पॅंट के उपर से दिखते उभार को देख वो समझ गयी थी उसके भाई का लंड मोटा और लंबा है लेकिन इतना होगा ये उसने नही सोचा था.

राज अपने कमरे मे वापस आ गया था और कमेरे की व्यू फाइनडरर मे अपनी आँख गढ़ाए हुए था... उसने कैसेट रीवाइंड कर दी थी... पूरी नही क्यों कि हो सकता है कि प्रीति के पहले कोई बाथरूम मे गया हो.....तभी उसे अपनी मा का चेहरा नज़र आया तो उसने कॅसेट को फास्ट फॉर्वर्ड कर दिया क्यों कि वो अपनी मा को नंगी नही देखना चाहता था....

लेकिन राज की नज़र तो जैसे व्यू फाइनडरर पर गढ़ कर ही रह गयी... उसकी मा शवर से अभी निकली ही थी और अपना एक पावं सींक पर रखी थी और वो अपनी चूत की झांते सॉफ कर रही थी.. उसकी टांग उठी हुई थी और कॅमरा का लेंस ठीक उसके उपर था और उसकी चूत दीखाई दे रही थी... राज का लंड एक बार फिर तन कर खड़ा हो गया.

राज की नज़रे अब अपनी मा के बदन पर गढ़ के रह गयी... आज से पहले कभी उसने अपनी मा को एक औरत के नज़रिए से नही देखा था.. लेकिन आज वो अपने आपको रोक नही पाया... दीखने मे उसकी मा बहोत सुंदर थी.. बस प्रीति से थोड़ी मोटी थी..... लेकिन हा उसकी चुचियाँ उसे थोड़ी छोटी थी...लेकिन निपल काफ़ी बड़े थे.. जो उसे आकर्षित कर रहे थे... वो एक बार फिर अपने लंड को मुठियाने लगा... कि उसकी मा कपड़े पहनने लगी.

राज कॅसेट को फॉर्वर्ड कर वापस वहीं ले आया जब उसकी बेहन बाथरूम मे घुसती है.. अपने लंड को मसल्ते हुए देखता रहा कि उसकी बेहन ने अपना नाइट गाउन उतार दिया... जब भी उसे प्रीति की चुचियाँ या फिर चूत दीखाई देती तो वो कमेरे का पॉज़ बटन दबा बड़े प्यार से देखने लगता... उसे प्रीति की चूत इतनी अछी तरह नही दीखी जितनी अछी तरह मा की दीखी थी... वो सोचने लगा कि अगर ये कॅसेट वो टीवी क़ी बड़ी स्क्रीन पर देखेगा तो कैसा रहेगा..... उसके लंड ने एक बार फिर पानी छोड़ दिया तो उसने कॅमरा को ऑफ कर उसे अपनी अलमारी मे रख दिया...और कॉलेज जाने के लिए तय्यार होने लगा.
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09-20-2018, 01:56 PM,
#3
RE: Indian Sex Story वपरिवार हो तो ऐसा
प्रीति भी उसी कॉलेज मे पढ़ती थी.. अब हर वक्त उसकी निगाह लड़कों के जांघों के बीच लगी रहती और वो सोचती रहती कि क्या इन मे से किसी लड़के का लंड उसके भाई जितना मोटा और लंबा होगा... दोपहर को खाने के वक्त जब वो गौरव के साथ खाना खा रही थी तो टेबल के नीचे हाथ डाल उसने उसके लंड को सहलाना शुरू कर दिया.. वो उसके खड़े लंड को अपने हाथ मे ले उसे राज के लंड से मापना चाहती थी... बाद मे टाय्लेट मे बैठी वो अपनी चूत मे उंगली करते वक्त सोचती रही कि क्या वो कभी अपने भाई के लंड को हाथ मे पकड़ पाएगी.. या फिर कभी उसे अपने मुँह मे ले चूस पाएगी.

तीन चार दिन बाद राज वापस उस पुरानी बाल्टी मे प्रीति की पॅंटी ढूड़ने लगा... उसकी पॅंटी को अपने लंड से लपेट मूठ मारने मे उसे मज़ा आने लगा.. उसकी पॅंटी मे अपना विर्य छोड़ने मे उसे अनोखा आनंद आने लग गया था... जब से उसने अपनी मा को चूत की झांते सॉफ करते देखा था उसने उनकी पॅंटी भी लेकर उसमे मूठ मारी थी.

"राज क्या तुमने मेरी.... " राज के कमरे मे घुसते हुए प्रीति चौंक पड़ी और अपनी बात पूरी नही कर पाई.. उसने देखा कि उसका भाई पलंग पर बैठा अपने खड़े लंड को ज़ोर ज़ोर से मुठिया रहा था... उसने कोई चीज़ अपने लंड पर लपेट रखी थी... .. जैसे ही उसकी नज़र प्रीति पर पड़ी उसने जल्दी से पलंग पर पड़े तकिये को उठा अपनी जांघों पर रख अपने आपको ढक लिया.

प्रीति हैरत भरी नज़रों से अपनी पॅंटी को देख रही थी जो उसके लंड से छूट नीचे ज़मीन पर गिर पड़ी थी.. "ये क्या कर रहे हो तुम?" प्रीति ने हैरत मे पूछा.

"ह्म्म सॉरी." राज इतना ही कह पाया... उसने अपनी शरम से अपनी नज़रे घूमा ली... वैसे प्रीति तो ये सोच कर उसके कमरे मे बिना खटखटाए घूसि थी कि शायद वो अपने भाई को अपना लंड मसल्ते एक बार फिर देख ले... लेकिन उसी की पॅंटी लपेटे वो मूठ मार रहा होगा ये उसने नही सोचा था..

क्रमशः.......
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09-20-2018, 01:56 PM,
#4
RE: Indian Sex Story वपरिवार हो तो ऐसा
परिवार हो तो ऐसा - पार्ट--2

गतान्क से आगे........

"क्या तुम मेरी पॅंटी मे मूठ मार रहे थे?" प्रीति ने शिकायत करते हुए कहा.

"प्रीति प्लीज़ मुझे माफ़ कर देना .. वो क्या था ना मेने तुम्हारी पॅंटी वो धोने वाले कपड़ों की बाल्टी मे पड़ी देखी तो पता नही मुझे क्या हो गया... " राज ने जवाब दिया.

"हे भगवान... मुझे अभी भी विश्वास नही हो रहा कि तुम ऐसा भी कर सकते हो... क्या मैं मा को बताउ ये बात?"

"नही प्लीज़ नही..." राज ने घबराते हुए कहा... "प्लीज़ मत कहना... इसके बदले मे मैं तुम्हारे हिस्से का सारा काम कर दूँगा.. या फिर तुम जो कहोगी मैं करूँगा.. लेकिन मम्मी से मत कहना... मैं प्रॉमिस करता हूँ कि में दुबारा ऐसा नही करूँगा."

"ठीक है फिर आज से दो हफ्ते तक मेरे हिस्से का काम तुम करोगे.."

"थॅंक्स प्रीति."

"रूको अभी... एक काम और है." प्रीति ने कहा. "अब क्या है?" "मुझे अपना लंड दीखाओ" "क्या...?" राज चौंक पड़ा.

"हां में देखना चाहती हूँ.. पॅंट के उपर से काफ़ी मोटा और लंबा दीखता है.. में देखना चाहती हूँ कि मेरे भाई का लंड सही मे दीखने मे कैसा है." प्रीति ने कहा.. वो मन ही मन खुश थी कि आज उसे मौका मिल गया था... आज वो पास से अपने भाई के लंड को देखेगी.. जिसके बारे मे सोचते हुए उसने कितने सपने देखे थे. राज ने अपनी जाँघ पर पड़े तकिये को हटा दिया.. उसका लंड उसकी जाँघो के साथ सटा हुआ था. लंड थोड़ा ढीला पड़ चुका था.... "वाउ" प्रीति के मुँह से निकला... वो आश्चर्य चकित नज़रों से उसे देखती रही और वो उसके नज़रों के सामने और लंबा और मोटा होता गया... फिर पूरी तरह तन कर खड़ा हो गया... "मैं इसे च्छुना चाहती हू.." प्रीति ने कहा.. उसकी नज़रे अपने सामने खड़े लंड से हटाए नही हट रही थी.


राज प्रीति को कहता तो क्या कहता... उसे तो विश्वास नही हो रहा था कि वो इस तरह फँस जाएगा... वो लंड पकड़े पलंग पर बैठा था और उसकी बेहन की पॅंटी उसके पैरों मे पड़ी थी.....

प्रीति अपने भी के सामने नीचे बैठ गयी और उसके लंड को नीचे से पकड़ कर देखने लगी... 'ओह कितना मोटा है...मेरी तो मुट्ही मे भी नही आ रहा...' उसने अपने मन मे कहा... उसने अपनी उंगलियाँ उसके लंड के इर्द गिर्द कस ली..और उसे निहारने लगी.. "राज तुम्हे पता है... मेने आज तक इतना मोटा और लंबा लंड पहले कभी नही देखा... पॉर्न मूवीस मे भी नही.." प्रीति धीरे से फुस्फुसाइ..

"थॅंक्स प्रीति..." राज अपनी ही बेहन के मुँह से ये सुन शर्मा गया..

"राखी को तो चूसने मे और चुदवाने मे बहोत मज़ा आता होगा."

"उम्म्म आज तक उसने ऐसा कुछ किया ही नही....." राज ने जवाब दिया.

"मैं अभी तक कुँवारा हूँ."

"तुम झूठ बोल रहे हो ... मुझे विश्वास नही होता कि तुमने इस लंड से कभी किसी को नही चोदा है....मेरी सहेलियाँ तो इसे देख पागल हो जाएँगी.. " प्रीति ने कहा.

"मुझे लगता है कि राखी डरती है मुझसे... एक बार उसने इसे हाथों से भीच मुझे मुठिया था.. और कुछ नही बस हमेशा कहती थी कि मेने सब कुछ शादी के लिए बचा के रखा है... " राज ने कहा.

प्रीति अब उसके लंड को मसल उसकी चमड़ी उपर नीच कर रही थी... वो अस्चर्य्य से अपनी बेहन को अपने लंड को मसल्ते देख रहा था.

"में ये तो नही कहती कि उसका सोचना ग़लत है.. लेकिन हां वो बहोत ही प्यारी चीज़ से वंचित है... अगर तुम मेरे भाई नही होते तो में तुम्हे अभी अपना बॉय फ़्रेंड बना लेती.. आज तक मेने किसी से चुदवाया नही है.. लेकिन में जानती हूँ की इस घोड़े जैसे लंड से चुदवाने मे बहोत मज़ा आएगा.. बहोत ही खुशनसीब होगी वो जो इससे चुदेगि.."

प्रीति ने उसके लंड को मुठियाते हुए कहा.

"तुम भी कम सेक्सी नही हो.. अगर तुम मेरी बेहन नही होती तो तुम्हारे पीछे पीछे भागता अपनी गर्ल फ्रेंड बनाने के लिए और तुम्हारी ये प्यारी प्यारी चुचियों को बहोत प्यार करता.." राज ने उसकी चुचियों पर नज़र गढ़ाते हुए कहा.

प्रीति अपने भाई की बात सुनकर शर्मा गयी.. उसके निपल तन कर खड़े हो चुके थे... उसे इस खेल मे मज़ा आ रहा था उसने सोचा मेरा भैया है तो क्या हुआ क्यों ना इस खेल को थोडा और आगे बढ़ाए जाए.... "चलो तुम भी च्छू कर देख लो... अब तुमने मुझे छूने दिया तो में कैसे मना कर सकती हूँ... " प्रीति ने उसके लंड को छ्चोड़ा और अपना टॉप निकाल दिया... उसकी भारी चुचियाँ गुलाबी रंग के ब्रा मे क़ैद थी.... उसने अपना हाथ पीछे किया और ब्रा का हुक खोल अपनी ब्रा निकाल दी... जैसे की कोई पंछी पिंजरे से आज़ाद होता है वैसे उसकी चुचियाँ फड़फदा कर आज़ाद हो गयी... राज की तो आँखे फटी की फटी रह गयी... जिन चुचियों को वो सपने मे देखता आया था आज वो उसके सामने थी... उसकी बेहन की चुचियाँ.. ओह्ह्ह कितनी प्यारी है... उसने अपने दोनो हाथ बढ़ा उन दो गोल नारंगियों पर रख दिए... कितनी मुलायम है... ठीक किसी मखमली गेंद की तरह... वो धीरे धीरे उन्हे भींचने लगा... उसने उसके खड़े निपल को पकड़ लिया और अपनी और खींचा... प्रीति कराह उठी...

राज का लगा कि प्रीति को दर्द हुआ है तो उसने अपनी नज़रे उपर उठा उसे देखा... पर प्रीति की आँखे बंद थी और वो उन्माद मे मुस्कुरा रही थी... वो और ज़ोर से भींचने लगा मसल्ने लगा... और प्रीति के होठों पर मुक्स्कुराहट और गहरी होती गयी..
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09-20-2018, 01:56 PM,
#5
RE: Indian Sex Story वपरिवार हो तो ऐसा
जब राज ने उसके निपल को पकड़ अपनी ओर खींचा था तो प्रीति लड़खड़ा कर उसकी गोद मे बैठ गयी थी.. उसने महसूस किया कि राज का खड़ा लंड स्कर्ट के उपर से उसकी गंद से टकरा रहा है... "हे भगवान अगर मेने पॅंटी नही पहनी हुई होती तो ज़रूर इसका लंड मेरी चूत पर ठोकर मार रहा होता" उसने सोचा.

प्रीति की चुचियाँ अब राज के चेहरे के सामने थी.. प्रीति ने देखा कि राज ने अपनी जीब बाहर निकाल ली थी और उसके निपल को सहला रही थी.. एक सरसरी सी उसके बदन मे दौड़ गयी और उसका बदन कांप उठा... उसके भाई ने उसकी चुचियों पर अपनी जीब फिराई थी और उसे बहोत अछा लगा था...

उत्तेजना मे राज अपना मुँह खोल उसके निपल को मुँह मे भर चूसने लगा... एक गहरी सांस लेकर वो उसकी चुचि को ज़्यादा से ज़्यादा अपने मुँह मे भर चूस रहा था... प्रीति उसकी गोद मे बैठी सिसक रही थी.. उन्माद मे उसके मुँह से अया.. आअहह निकल रहा था... उसने अपना हाथ नीचे किया और उसके खड़े लंड को पकड़ लिया... राज भी सिसकने लगा.. दोनो को इस खेल मे मज़ा आ रहा था.

अचानक प्रीति राज की गोद से खड़ी हो गयी.. "अब मेरे लिए अपने लंड का पानी छुड़ा कर दीखाओ." प्रीति ने कहा.

"नही प्रीति हमे ये सब नही करना चाहिए.. हम पहले ही काफ़ी कुछ कर चुके है जो हमे नही करना चाहिए था.." राज ने उसे समझाते हुए कहा..

"ओह्ह्ह राज अब मान भी जाओ ना... में जानती हूँ की तुम मेरे जाते ही अपना लंड मुठीयकर पानी छोड़ोगे.. " प्रीति ने मुस्कुराते हुए कहा.

"अछा बाबा.. मान लेता हूँ.. लेकिन इससे मुझे क्या मिलेगा. " राज ने शैतानी मे कहा.

"मिल तो रहा है तुम्हे भी.. में मम्मी से नही कहूँगी कि तुम मेरी पॅंटी अपने लंड पर लापेट मूठ मार रहे थे.. और हो सकता है कि तुम्हे दुबारा मेरी चुचियों को चूसने का मौका मिल जाए.. " प्रीति ने जवाब दिया.

प्रीति की बात सुनकर राज की आँखों मे चमक आ गयी.. "एक शर्त पर में मूठ मारूँगा अगर तुम मुझे अपना पानी तुम्हारी चुचियों पर छुड़ाने दोगि तब.."

थोड़ी देर सोच कर प्रीति ने अपने भाई की बात मान ली. वो उसके सामने नीचे बैठ गयी... और ज़मीन पर से अपनी पॅंटी उठा उसे पकड़ा डी.

राज ने उसके हाथों से पॅंटी लेकर उसे अपने लंड पर लपेट ली और अपने लंड को मुठियाने लगा... प्रीति अपनी चुचियों को हाथों मे पकड़ अपने भाई के सामने मसल्ने लगी.. वो देख रही थी कि किस तरह उसकी पॅंटी को लपेटे राज मूठ मार रहा था... राज मूठ मारता रहा और उसका लंड पानी छोड़ने को तय्यार हो गया.. उसने अपने लंड को प्रीति की चुचियों की ठीक सीध मे कर दिया... एक पिचकारी चूत कर प्रीति की दाईं चुचि पर गीरी फिर दूसरी उसकी बाईं चुचि पर उसने लंड को थोड़ा उठा दिया तो तीसरी उसकी बेहन के गालों पर गीरी...


"बहुत बदमाश हो तुम" प्रीति उसके हाथों से पॅंटी लेकर अपने गालो पर लगे वीर्य को सॉफ करने लगी..

"थॅंक्स भाई" कहकर प्रीति ने अपना टॉप ब्रा और पॅंटी उठाई और कमरे से बाहर जाने लगी... उसने मूड कर देखा राज पलंग पर वैसे ही बैठा था.. उसका वीर्य उसकी चुचियों से नीचे की ओर बह रहा था..

"शायद हम फिरसे ये सब करेंगे.. मुझे मज़ा आ गया.." कहकर वो हंसते हुए अपने कमरे की ओर भाग गयी.. जिससे की उसके माता पिता आने से पहले वो सफाई कर तय्यार हो जाए..

दूसरे दिन राज फिर पुरानी बाल्टी मे अपनी बेहन की पॅंटी ढूंड रहा था.. वो कल की घटना को याद कर रहा था जब उसकी बेहन ने उसे लंड का पानी अपनी चुचियो पर छोड़ने दिया था.. ज़रूर वो भी उत्तेजित होगी नही तो मुझे ऐसा करने नही देती.. और अगर उत्तेजित थी तो उत्तेजना के निशान उसकी पॅंटी पर ज़रूर होंगे जो उसने कल पहन रखी थी.. वो उसी पॅंटी को ढूंड रहा था.

तभी उसे एक आसमानी रंग की पॅंटी दीखाई पड़ी.. उसे यकीन था कि ये पॅंटी कल इस बाल्टी मे नही थी.. उसने मुस्कुराते हुए वो पॅंटी अपनी जेब मे रख ली... और अपने कमरे मे आ गया...

कमरे मे आकर उसने फिर वीडियो कॅमरा निकाल लिया.. आज फिर उसने फिल्म उतारी थी पहले की तरह... वीडियो देखते हुए वो अपनी बेहन की पॅंटी को सूंघटा रहा और अपने लंड को पॅंट से आज़ाद कर दिया जो तन कर पूरी तरह खड़ा हो चुका था.

वो याद करने लगा कि किस तरह प्रीति ने किस तरह उसके लंड को पकड़ा था.. किस तरह उसके लंड को मसला था.. और उसका मुँह उसके लंड के कीतने करीब था.. काश वो उसके लंड को भी वैसे ही चूस्ति जैसे कि उसने अपने बॉय फ़्रेंड गौरव का लंड चूसा था... वो उसकी पॅंटी को अपने लंड पर लपेट ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगा और उसके लंड ने पॅंटी मे अपना पानी छोड़ दिया.

आज प्रीति कॉलेज से जल्दी घर आ गयी.. उसने देखा कि राज हॉल मे सोफे पर बैठा टीवी देख रहा है.. राज को देखते ही उसका दिल मचलने लगा.. उसका दिल करने लगा कि राज आज फिर उसकी चुचियों को चूसे.. वो आकर राज के बगल मे बैठ गयी और उसे ललचाई नज़रों से देखने लगी..

राज की समझ मे नही आ रहा था कि वो क्या करे... उसने प्रीति की आँखों मे छुपी वासना को पहचान लिया था.. उत्तेजना मे बहक एक बार उसने उसके साथ जो किया इस पर वो अपने आपसे शर्मिंदा था.. आख़िर प्रीति उसकी बेहन थी...

"प्रीति मुझे लगता है कि जो कुछ हमने कल किया वो हमे दुबारा नही करना चाहिए" राज ने कहा.

प्रीति हैरत भरी नज़रों से अपने भाई को देखने लगी.. "क्या कह रहे हो? मुझे तो लगा था कि तुम्हे काफ़ी मज़ा आया था?" प्रीति ने पुचछा.

"हां मज़ा तो बहोत आया था लेकिन तुम मेरी बेहन हो और हमारे बीच ये सब ठीक नही है." राज ने जवाब दिया.

"तो क्या इसी लिए अपना खड़ा लंड लिए यहाँ बैठो हो?" प्रीति ने उसे पूछा और उसके लंड को उसकी जीन्स के उपर से पकड़ लिया..
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09-20-2018, 01:56 PM,
#6
RE: Indian Sex Story वपरिवार हो तो ऐसा
"देखो प्रीति सवाल ये नही है कि मुझे अछा लगता है कि नही... बस हमारे बीच ये सही नही है." राज ने अपनी बात पर ज़ोर देते हुए कहा.

"लेकिन में इसे दूसरे ढंग से सोचती हूँ, " प्रीति ने जवाब दिया, "ना तो में तुमसे शादी करने वाली हूँ ना ही तुम्हारे बच्चे पैदा करना चाहती हूँ... मेने तुम्हारे जैसा मोटा और लंबा लंड नही देखा और जब तक कि मुझे तुम्हारे जैसा दूसरा लंड नही मिल जाता में तुम्हे अपने हाथ से जाने नही दूँगी.."

"लेकिन फिर भी में यही कहूँगा कि मुझे नही लगता कि हमारे बीच दुबारा ये सब होगा." राज ने कहा.

"तुम्हे लगता है.. अरे तुम्हे खुद को पता नही कि होगा कि नही.." प्रीति ने उसे चिढ़ाते हुए अपनी दो उंगलियाँ अपने मुँह मे ली और उन्हे चूसने लगी.. "अगर में ये कहूँ कि में तुम्हारा लंड चूसना चाहती हूँ तो?

राज उठ कर जाना चाहता था कि प्रीति की बात सुनकर रुक गया, और प्रीति हँसने लगी, "देखा इसी बात पर रुक गये ना?"

"क्या कहा तुमने.. तुम मेरा लंड चूसना चाहती हो?" राज ने पूछा.

"हां और क्या.. अरे इस घोड़े जैसे लंड को कौन चूसना नही चाहेगा..हां लेकिन तुम्हे मेरे लिए भी कुछ करना होगा."

"हुम्म"

"हां सीधी सी बात है.. में तुम्हारा लंड चूस चूस कर तुम्हारा पानी छुड़ा दूँगी और बदले में तुम मेरी चूत चूस कर मुझे झाड़ा देना." प्रीति ने कहा.

राज सोचने लगा... उसने कभी जिंदगी मे कभी किसी लड़की की चूत नही चूसी थी और अगर वो ठीक ढंग से अपनी बेहन की चूत चूस उसे खुश ना कर पाया तो वो उस पर हँसेगी.. इसलिए उसने उससे सच कहना ही उचित समझा, "ऐसा है प्रीति मेने पहले कभी ये किया नही है.. मेने सिर्फ़ कीताबों मे पढ़ा और देखा है... लेकिन मे कोशिश करना चाहता हूँ." राज ने कहा.

"वैसे आज तक मेरी चूत भी किसी ने नही चूसी है.. इसलिए क्यों ना हम दोनो ये नया अनुभव साथ साथ ले.. कुछ सीखने को ही मिलेगा." प्रीति बोली.

"ठीक है... कहाँ करना चाहोगी?" राज ने पूछा.

"मेरे कमरे मे" प्रीति ने जवाब दिया. और उठ कर अपने कमरे मे जाने लगी.. राज भी उसके पीछे पीछे चल दिया... उसका लंड जीन्स के अंदर बुरी तरह मचल रहा था.

जब दोनो प्रीति के कमरे मे पहुँचे तो प्रीति ने उसे कपड़े उतारने को कहा... राज ने जल्दी जल्दी अपने कपड़े उतारे और बिस्तर पर लेट गया... उसे डर था कि कहीं उसकी बेहन का इरादा ना बदल जाए...

प्रीति ने अपने भाई एक विशाल लंड को देखा और उछल कर बिस्तर पर उसकी टाँगो के बीच आ गयी... उसने उसके लंड को अपने हाथों मे लिया फिर अपनी जीब उसके सूपदे पर फिराने लगी.. लंड उसके कोमल हाथों मे फड़फदा रहा था.. वो अपनी जीब उसके चारों ओर फिराने लगी...


राज के मुँह से सिसकारियाँ फुट रही थी.. उसने नज़रे नीचे कर देखा कि उसकी बेहन अपने मुँह को खोल उसके लंड को अंदर ले रही है...पहले उसने उसके सूपदे को मुँह मे भर चूसा फिर पूरे लंड को अंदर ले चूसने लगी... राज के बदन मे उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी..

प्रीति अपना पूरा मुँह खोल उसके लंड को अंदर तक लेने की कोशिश कर रही थी. लेकिन राज का लंड इतना मोटा और लंबा था कि उसके मुँह मे आधा लंड ही समा पाया.. उसने बाकी बचे लंड को अपनी मुट्ठी मे भींच लिया और अपने मुँह को उपर नीचे कर चूसने लगी.. अपने थूक से लंड को चिकना कर वो उसे चूस रही थी.. राज सिसक रहा था

"ओःःः हाआँ चूवसो मेरी बेहन श कितना अच्छा लग रहा है... आज तक

किसी ने मेरा लंड नही चूसा ऑश.. तुम्हारा मुँह कितना कोमल है.."

"हे भगवान राज! मुझे तो विश्वास ही नही हो रहा कि तुम्हारा लंड इतना मोटा और लंबा है.. मेरे तो मुँह भी नही आ रहा " प्रीति ने राज से कहा, "और मुझे नही लगता कि कोई लड़की इतने विशाल लंड को पूरा अपने मुँह मे ले सकेगी." कहकर वो एक बार फिर उसके लंड को चूसने लगी.

राज के लंड की नसें तनने लगी थी.. वो पूरे उबाल पर था.. उसने उसके सिर को पकड़ा और अपने लंड को और अंदर थेल्ते हुए अपने वीर्य की पिचकारी उसके मुँह मे छोड़ दी..

जब राज का वीर्य उसके गले से टकराया तो प्रीति चौंक पड़ी.. उसका पूरा मुँह उसके वीर्य से भर गया... थोड़ा वीर्य उसके होठों के किनारे से छूकर उसकी तोड़ी को भीगोने लगा... राज ने अपना लंड उसके मुँह से निकाला तो दूसरी पिचकारी उसके चेहरे पर छूटी... तीसरी उसके गालों पर..

राज भी एक बार तो घबरा गया... "तुम ठीक तो हो?" उसने पूछा.

"हां वैसे तो ठीक हूँ... मुझे नही मालूम था कि तुम्हारा लंड इस कदर पानी छोड़ेगा... बस थोड़ा चौक गयी थी.." उसने कहा, "ठीक है अब मुझे बाथरूम जाकर इसे सॉफ करने दो फिर तुम मेरी चूत चूसना" वो बाथरूम मे भाग गयी.. उसने अपने आपको सॉफ किया और वापस अपने कमरे मे आ गयी.

कमरे मे आते हुए उसने अपनी जीन्स उतारी और साथ ही पॅंटी को भी उतार दिया.. वो उछल कर बिस्तर पर लेट गयी और अपनी टाँगो को पूरी तरह फैला दिया..
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09-20-2018, 01:56 PM,
#7
RE: Indian Sex Story वपरिवार हो तो ऐसा
राज उसकी टाँगो के बीच आया और अपनी उंगली उसकी चूत पर फिराने लगा.... एक सनसनी सी मच गयी प्रीति के शरीर मे.. उसकी चूत की पंखुड़ीयाँ फड़फड़ने लगी... राज ने अपनी उंगली उसकी चूत के अंदर डाली और उसे उसके रस मे भीगो अपने मुँह मे ले चूसने लगा..

जब प्रीति ने देखा की उसका भाई क्या कर रहा है तो उसने पूछा. "अछा लग रहा है क्या?"

"इतना बुरा भी नही है." राज ने जवाब दिया और उसकी टाँगो के बीच झुक अपनी जीब उसकी चूत पर रख दी..

प्रीति ने अपना हाथ नीचे किया और अपनी उंगली को भी अपने ही रस से भीगो उसका स्वाद चखने लगी..

राज ने उसकी चूत को अपने हाथों से फैलाया और अपनी जीब उसके अंदर डाल गोल गोल घुमा कर चाटने लगा... वो उसकी चूत के हर हिस्से को बड़े प्यार से चाट रहा था... प्रीति की चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी और राज चटकारे ले लेकर चाट रहा था...

प्रीति ने खुद अपने हाथों से अपनी चूत को और फैला कर चौड़ा कर दिया.. "हां अब अंदर तक जीब डाल कर चॅटो.. हां चारों तरफ चॅटो मेरी चूत को ऑश हां ."

जैसा प्रीति कहती गयी वो करता रहा.. प्रीति कहती कि उसे क्या अच्च्छा लग रहा है वो वैसे ही चाटने और चूसने लगता.. प्रीति की चूत और गरमा कर झड़ने के करीब आ चुकी थी.. वो सिसक रही थी..

"हाई भगवान..... हां.. यहीं..डालो अपनी जीब को ..हां और ज़ोर ज़ोर से चूसो..ऑश और ज़ोर से.. . " वो ज़ोर से चिल्लाई और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया..

प्रीति ने अपने भाई को अपनी चूत से अलग किया और उसे थॅंक्स कहा. उसने कहा कि आज पहली बार चूत चूस्वाकार उसे मज़ा आ गया.. उसने कहा कि वो गौरव को भी इस तरह चूत चूसने के लिए कहेगी...

जब राज जाने लगा तो प्रीति ने उसे ज़मीन पर पड़ी अपनी पॅंटी और जीन्स देने के लिए कहा... जिसे राज ने उठा कर उसकी तरफ उछाल दिया..

प्रीति ने पॅंटी पहन ली और उसे उपर तक चढ़ा ली जिससे उसकी चूत पॅंटी से चिपक सी गयी.. फिर वो अपनी चूत को पकड़ मसल्ने लगी.... ये सब देख राज का लंड फिर खड़ा होने लगा... प्रीति ने अब एक उंगली अपनी चूत मे घुसा दी थी..

राज ने अपने लंड को पकड़ा और ज़ोर ज़ोर से मुठियाने लगा... प्रीति उसे देख मुस्कुराती रही... फिर उसने अपनी पॅंटी निकाल कर राज की तरफ उछाल दी...

"ये लो तुम्हे मेरी पॅंटी लपेट मूठ मारने मे मज़ा आता है ना तो लो इसे और खेलो अपने आप से... लेकिन आज इसमे पानी मत छोड़ना शायद रात को एक बार फिर तुम्हारे लंड का स्वाद चखने मे आ जाउ... " प्रीति ने कहा.

क्रमशः.......
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09-20-2018, 01:57 PM,
#8
RE: Indian Sex Story वपरिवार हो तो ऐसा
परिवार हो तो ऐसा - पार्ट--3

गतान्क से आगे........

प्रीति ने राज को कमरे से बाहर किया और अलमारी से दूसरी पॅंटी निकाल पहन ली फिर जीन्स पहन कर अपनी डायरी लीखने बैठ गयी..

जब बेटी जवान होने लगती है.. तो हर मा अपनी बेटी को उँछ नीच समझाने लगती है.. उसे दुनिया के बारे मे सेक्स के बारे मे समझती है.. कि क्या अछा और क्या बुरा है.. वैसे ही प्रीति की मा ने भी उसे

समझाया था.. और इस दौरान दोनो मा बेटी आपस मे काफ़ी खुल गयी थी.. प्रीति अक्सर मा से सेक्स एक बारे मे पूछती और समझती रहती थी...

रात को खाना खाने के बाद दोनो मा बेटी किचन मे खड़ी बर्तन सॉफ कर रही थी कि अचानक प्रीति ने अपनी मा से पूछा, "मा क्या पिताजी का लंड बहोत मोटा और लंबा है?"

प्रीति की बात सुन वसुंधरा के हाथ से प्लेट छूट गयी और उसके टूकड़े टूकड़े हो गये.. "ये क्या पूछ रही हो? तुम्हारा दीमाग तो खराब नही हो गया है?" वसुंधरा ने अपनी बेटी की ओर देखते हुए कहा.

"नही बस सोच रही थी.. वो क्या है ना आज में ग़लती से बाथरूम मे घुस गयी तो देखा की राज शवर के नीचे नहा रहा था.. और तब मेने उसके लंड को देखा.. सच मे मा बहोत मोटा और लंबा था..

इसलिए सोचने लगी क्या पिताजी का भी इतना ही मोटा और लंबा है. या फिर सभी ऐसे होंगे मेने पहले कभी नही देखा है" प्रीति ने अंजान और भोली बनते हुए कहा.

वाशुंढरा ने कई बार प्रीति को उसके बॉय फ्रेंड के साथ देखा था..और उसे विश्वास था कि दोनो ने चुदाई का मज़ा लिया होगा... इसलिए उसे विश्वास नही हुआ कि उसने कभी लंड नही देखा होगा.. लेकिन फिर भी वो अपनी सग़ी बेटी से इस कदर की बातें नही कर सकती थी...

"पहली बात तो में इस बात का जवाब नही दूँगी क्यों कि तुम्हे इससे कोई मतलब नही होना चाहिए कि तुम्हारे पिताजी का कैसा है.. और दूसरी बार जब भी राज के कमरे मे या बाथरूम मे जाओ तो खटखटा कर जाना.. समझी.. " वसुंधरा ने कहा.

प्रीति ने बहोत कोशिश की अपनी मा से कुछ जानकारी ले ले लेकिन वो अपने प्रयास मे सफल नही हो सकी... दोनो अपने अपने ख़याल लिए सोने चली गयी.. प्रीति सोच रही थी कि अगर राज का लंड इतना मोटा और लंबा है तो पिताजी का कैसा होगा.. और वहीं वाशुंढरा सोच रही थी कि क्या सही मे राज का लंड इतना मोटा और लंबा है..की प्रीति आज उसे ये सवाल पूछ बैठी.

जब वो अपने कमरे मे पहुँची तो अपनी सोच से काफ़ी गरमा चुकी थी.. कमरे मे पहुँच उसने देखा कि उसका पति बलदेव करवट लिए सो रहा है.. उसने उसे सीधा किया और उसके लंड को अपने मुँह मे ले चूसने लगी.. उसका लंड सही मे काफ़ी लंबा और मोटा था.. लेकिन वो कभी कभार उसके लंड को चूस्ति थी.. उसे चुदवाने मे काफ़ी मज़ा आता था.. पर आज वो खुशी खुशी उसके लंड को बड़े प्यार से चूस रही थी.. बलदेव के लंड ने थोड़ी ही देर मे पानी छोड़ दिया जिसे वसुंधरा पी गयी.

"थॅंक्स जान... आज क्या होगया तुम्हे.. मुझे बहोत अछा लगा.." बलदेव ने अपनी पत्नी से कहा.

"पता नही बस मेरे दिल किया आज तुम्हारे लंड को चूसने का.. वैसे भी कई दिन हो चुके थे इसे चूसे.." वसुंधरा ने जवाब दिया.

"हाँ बहोत दिन तो हो चुके थे.. क्या में भी तुम्हारे लिए कुछ करूँ?"

"नही अभी नही.. अभी बस में सोना चाहती हूँ.. शायद सुबह..." फिर दोनो ने एक दूसरे को चूमा और सो गये.

प्रीति अपने पलंग पर लेटी हुई शाम को राज के साथ की मस्ती के ख़यालों मे खोई हुई थी.. वो फिर गरम हो गयी थी. उसकी चूत मे चिंतियाँ चलने लगी थी... उसने सोचा कि क्यों ना थोड़ी मस्ती और की जाए... उसने घड़ी की तरफ देखा रात के 1.00 बज चुके थे.. सभी सो चुके होंगे उसने सोचा.. वो पलंग से उत्तरी और पंजों के बल चलते हुए राज के कमरे तक आ गयी.. कमरा खुला हुआ था.. वो अंदर आई और धीरे से दरवाज़ा बंद कर दिया.

प्रीति ने देखा कि राज पीठ के बल सो रहा था.. उसने उसके शॉर्ट्स की ज़िप नीचे की और उसके लंड को बाहर निकाल लिया.. उसपर झुकते हुए उसने उसके लंड को अपने मुँह मे ले लिया. और चूसने लगी.. राज नींद मे कसमसाया लेकिन उसकी आँख नही खुली... उसका लंड तनने लगा और थोड़ी ही देर वो पूरी तरह खड़ा था... तभी राज की आँख खुल गयी..

उसका बदन उत्तेजना मे कांप रहा था.. उसका लंड फड़फदा रहा था .. उसने देखा कि उसकी छोटी बेहन उसके लंड को अपने मुँह मे ले चूस रही है... वो समझ गया कि उसकी बेहन चुपके से उसके कमरे मे आ उसके लंड को चूस रही है.. उसने कुछ नही कहा और पीछे की ओर लेट कर मज़ा लेने लगा.

प्रीति अपने मुँह को उपर नीचे कर तेज़ी से उसके लंड को चूसने लगी... राज नीचे से अपनी कमर उठा अपनी लंड को और उसके गले के अंदर पेलने लगा... प्रीति ने एक हाथ से उसकी गोलैईयों को अपनी मुट्ठी मे भरा और दूसरे हाथ को लंड के इर्द गिर्द कसते हुए उसके लंड को चूस्ति रही... जब उसके लंड ने पानी छोड़ा तो वो सारा पानी पी गयी...


प्रीति फिर उसके पलंग से खड़ी हुई और उसे 'गुड नाइट' कहते हुए कमरे से बाहर चली गयी..

राज पलंग पर लेटा हुआ अपनी छोटी बेहन के ही ख़यालों मे खोया हुआ था.. उसे अस्चर्य हो रहा था कि उसकी बेहन क्या छीनाल बनती जा रही थी... प्रीति की काम अग्नि बढ़ती ही जा रही थी.. और ये अगन उन दोनो के कहाँ ले जाएगी ये सब सोचते सोचते वो सो गया...

सुबह राज शवर मे अपने बालों को शॅमपू से धो रहा था कि तभी उसे बाथरूम के दरवाज़े की खुलने की आवाज़ सुनाई दी. वो चिल्ला कर प्रीति से कहने ही वाला था कि क्या रात को दिल नही भरा जो सुबह सुबह भी चली आ रही हो.. तभी उसे अपनी मम्मी की आवाज़ सुनाई पड़ी.. "माफ़ करना राज में समझी बाथरूम मे प्रीति है.. मुझे सिर्फ़ कपड़े धोने वाली ब्रश चाहिए थी"

"ठीक है मम्मी आप ले लीजिए" कहकर उसने गहरी साँस ले ली... कितना बचा था वो सब कुछ कहने से.. उसने आँख खोली और देखा कि बाथरूम का दरवाज़ा बंद हो गया था..

वसुंधरा फटी सी आँखों से बाथरूम से बाहर निकल कर आई.. प्रीति सही कह रही थी.. उसके बेटे का लंड वाकई मे बहोत लंबा और मोटा था... अभी वो खड़ा नही था.. अगर तन कर खड़ा होता तो ज़रूर उसके पति के लंड से एक इंच लंबा ही होता.... जब से प्रीति ने कहा था तब से वो अपने आप को रोक नही पा रही थी और आज जान बूझ कर वो बहाना बना अपने बेटे का लंड देखने बाथरूम मे चली गयी थी..

पूरे दिन वसुंधरा अपने बेटे के लंड के बारे मे ही सोचती रही... वो सोच रही थी कि अगर पूरी तरह तन कर खड़ा होगा तो कैसा लगेगा... शायद किसी ना किसी दिन उसे पता चल ही जाएगा... उसने बहोत कोशिश कि वो ऐसा कुछ ना सोचे आख़िर वो उसकी मा थी लेकिन वो ऐसा कर ना सकी... उत्तेजना के मारे वसुंधरा का बुरा हाल था. वो अपने आप को रोक नही पा रही थी.. इसलिए शाम को वो अपने बिस्तर पर पीठ के बल लेटे हुए थी.. उसकी स्कर्ट कमर तक चढ़ि हुई थी और उसने पॅंटी निकाल दी थी.... और एक लंबे मोटे नकली लंड (डिल्डो) को अपनी चूत के अंदर बाहर कर रही थी... मोटे लंबे लंड के ख़यालों मे खोई वो अपनी चूत की गर्मी शांत करने मे लगी रही...

वाशुंढरा सोच रही थी कि अपने पति से भी मोटे और लंबे लंड से चुदवाने मे कितना मज़ा आएगा... वो और ज़ोर से उस नकली लंड को अपनी चूत के अंदर बाहर करने लगी... और आख़िर मे उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया...

वाशुंढरा ने अपनी चूत को और अपने आपको टवल से सॉफ किया और पॅंटी पहन अपने कपड़े ठीक कर लिए... अपने बेटे के खड़े लंड को देखने की उसके जिग्यासा और बढ़ गयी... वो उसके लंड को देखने के बहाने ढूँदने लगी.. वो उसके बेडरूम मे गयी और छिपने की सोचने लगी.. लेकिन उसे लगा कि उसके लिए तो उसे घंटो इंतेज़ार करना होगा.. इसलिए वो कमरे से वापस आने लगी तो उसकी नज़र उस वीडियो कमेरे पर पड़ी जो उसके पति बलदेव ने राज को उसके जनमदिन पर गिफ्ट किया था.

वसुंधरा उसके कंप्यूटर को ऑन कर देखने लगी.. राज के लंड को देखने का आइडिया उसके दीमाग मे आ गया था...

वसुंधरा का पति बलदेव एक कंप्यूटर इंजिनियर था और उसे कंप्यूटर से बड़ा लगाव था.. इसलिए उसने घर के हर कमरे मे कंप्यूटर लगा रखा थाऔर साथ ही कंप्यूटर से वेबकाम अटॅच था... साथ ही उसके पास एक लॅपटॉप भी था जिसे वो जब जी चाहे किसी भी कंप्यूटर से जोड़ अपना काम कर सकता था.

वसुंधरा राज के कंप्यूटर पर उसका मेस्संगेर ऑन कर दिया और उसका प्रोफाइल ओर लॉगिंग आईडी देखने लगी.. उसके लॉगिंग दी को उसने अछी तरह याद कर लिया.. उसने देखा कि राज ने अपना वेब कॅम अटॅच किया हुआ है शायद रात को चाटिंग के लिए या फिर अपनी गिर्ल्फ्रेंड के लिए..

सब कुछ अछी तरह देखने के बाद उसने कंप्यूटर को बंद किया और सब कुछ पहले जैसा कर राज के कमरे से बाहर आ गयी.. उसका दिल उछाल रहा था.. जो कुछ उसने सोचा था.. उससे उसे अपने ही बेटे के लंड को बहोत करीब से देखने का मौका मिल जाएगा...
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09-20-2018, 01:57 PM,
#9
RE: Indian Sex Story वपरिवार हो तो ऐसा
वही प्रीति अपनी मा से हुई बात चीत सोच रही थी. कि पिताजी का लंड लंबा और मोटा है कि नही... वो अपने ही बाप का लंड देखना चाहती थी... और एक दिन उसने मन बना ही लिया.. एक दिन जब सुबह जब उसे पक्का यकीन था कि उसका बाप बाथरूम मे है वो अपने मेकप के समान के बहाने बाथरूम मे घुस गयी...

प्रीति का पिता बलदेव शवर के नीचे नहा रहा था.. एक सरसरी निगाह अपने बाप के लंड पर डालते हुए प्रीति माफी माँग बाथरूम से बाहर आ गयी... उसे ये देख कर खुशी हुई की उसके बाप का लंड काफ़ी बड़ा था....

एक हफ्ते बाद की बात है.. बलदेव को ओफ्फिस मे काम था इसलिए वो लेट आने वाला था. और प्रीति अपनी सहेली के घर पर थी... राज ने अपनी मा को कहा कि वो अपने कमरे मे है और इंटरनेट पर सरफिंग कर रहा है...

वसुंधरा नेउससे कहा ठीक है और अपने कमरे की ओर भागी... और उसने अपना कंप्यूटर ऑन कर लिया... मेसेंजर रूम मे जाकर उसने अपने बेटे का स्क्रीन नेम टाइप किया और इंतेज़ार करने लगी..

>गीली छूट> हाई.. कैसे हो? मेने तुम्हारा प्रोफाइल पढ़ा जो मुझे अछा लगा..." वसुंधरा ने मेसेज भेज दिया.

>राज_मस्ताना> उम्म, थॅंक्स.

अपने कमरे मे राज अचानक आए मेसेज को देख चौंक पड़ा था.... आज से पहले कभी किसी ने सामने से इस तरह उसे मेसेज नही दिया था..

उसने कई लड़कियों की आईडी पर मेसेज दिया था लेकिन कभी किसी ने जवाब नही दिया था.. वो खुस हो गया...

>गीली चूत> नही शुक्रिया की कोई बात नही.. क्या तुम बिज़ी हो?

>राज_मस्ताना> नही कुछ खास नही.>गीली चूत> क्या कुछ मस्ती करना चाहोगे?

>राज_मस्ताना> निर्भर करता है कि तुम्हारे दीमाग मे क्या है.

>गीली चूत> वो तुम्हे मेरे स्क्रीन नेम से ही समझ जाना चाहिए.

>राज_मस्ताना> में भी यही सोच रहा था.

>गीली चूत> क्या तुम कभी उत्तेजित नही होते?

>राज_मस्ताना> होता क्यों नही हूँ

>गीली चूत> तो फिर उसके लिए क्या करते हो?


>राज_मस्ताना> उम्म कुछ ना कुछ तो करना ही पड़ता है.

>गीली चूत> तो क्या तुम मेरी गर्मी शांत करने के लिए मेरी मदद करोगे?

>राज_मस्ताना> मुझे कुछ ख़ास पता नही है इस बारे मे.. तुम दिखाने मे कैसी हो?

"गीली चूत> ह्म्म... मेरे बाल काले है जो मेरे कंधों तक आते है... मेरी आँखे नीली है... पतली कमर... चुचियाँ बहोत बड़ी तो नही लेकिन फिर भी भारी भारी है.. और प्यारी गुलाबी बिना बालों की चूत.... क्या सब सुनकर मस्ती करना चाहोगे?

उसकी बात सुनकर राज चौंक पड़ा... बिना बालों की चूत ने उसे फिर अपनी मया की ओर खींच लिया... वो फिर उस दिन कॅमरा मे देखी अपनी मा की बिना बालों की चूत के बारे सोचने लगा.

>राज_मस्ताना> क्या सही मे तुम्हारी चूत पर एक भी बॉल नही है?

>गीली चूत> हन मुझे अपनी चूत सफ़ा चट रखना अछा लगता है. क्या तुम मेरी मदद करोगे जिससे में अपनी इस गीली चूत को खुश कर सकूँ...

>राज_मस्ताना> में तुम्हारी मदद करना चाहता हूँ.. पर उसके लिए मुझे क्या करना होगा?

>गीली चूत> क्या तुम्हारे पास वेब कॅम है? तुम मुझे अपना लंड दिखा सकते हो..

>राज_मस्ताना> लेकिन में कैसे विश्वास करूँ कि तुम सही में कोई औरत हो? औरत के नाम के पीछे तुम कोई बुड्ढे इंसान भी हो सकते हो जो मेरा लंड देखना चाहता हो? क्या तुम मुझे अपनी बिना बालों की चूत वेब कॅम पर दीखा सकती हो.. वैसे तुम्हारी उम्र क्या है?


>गीली चूत> हाँ में तुम्हे अपनी चूत दीखा सकती हूँ और हां किसी औरत से उसकी उम्र नही पूछनी चाहिए.. अगर तुम्हे मेरी चूत अछी ना लगे.. तो मुझे इग्नोंरे कर देना.. इसके बाद.

>राज_मस्ताना> ठीक है तुम अपना कॅम ऑन करो में अपना करता हूँ. एक अंजान औरत की बिना बालों की चूत देखने को मिल रही है. ये सोच कर ही उसका लंड पॅंट फाड़ कर बाहर आने को तय्यार हो गया.. उसने अपना वेब कॅम ऑन कर दिया... उसे एक परछाई दीखने लगी और वो कॅम चॅट टू कॅम चॅट मे उसके साथ हो गया.. उसने देखा कि वो एक कुर्सी पर डेनिम स्कर्ट पहने बैठी हुई थी.. उसकी नंगी कमर दीखाई दे रही थी..

>गीली चूत> जो दीखा वो अछा लगा?

>राज_मस्ताना> हां.. लेकिन में तुम्हारा चेहरा और तुम्हारी चुचियाँ देखना चाहता हूँ.

>वो सब फिर कभी आज तो शुरुआत है.. लगता है तुम्हारी पॅंट फॅट जाएगी.. उतारना चाहोगे?

>राज_मस्ताना> हां राज खड़ा हुआ और अपनी जींस उतार दी.. वो अंदर अंडरवेर पहने हुआ था. वो वापस कुर्सी पर बैठ गया.. अंडरवेर से उसके लंड का उभार दीख रहा था... उसने स्क्रीन पर देखा कि वो औरत कुर्सी से थोड़ा उठ अपनी स्कर्ट उतार रही है..

>गीली चूत> तुम्हारी अंडरवेर मे तो अछा ख़ासा तंबू बना हुआ है.

>राज_मस्ताना> हां लेकिन अभी ये पूरी तरह खड़ा नही हुआ है.

>गीली चूत> सही मे या फिर तुम ऐसे ही कह रहे हो.

>राज_मस्ताना> में मज़ाक नही कर रहा.. एक बार अपनी चूत दीखाना और में ये साबित कर दूँगा. दूसरी तरफ वाली औरत खड़ी हो गयी... राज को उसकी पतली टाँगे दीखने लगी.. जब वो वापस कुर्सी पर बैठी तो उसकी काले रंग की पॅंटी से चूत दीख रही थी...

>गीली चूत> क्यों मेरी पॅंटी पसंद आई.

>राज_मस्ताना> हां मुझे पॅंटी बहोत पसंद है...उन्हे देख में गरमाने लगता हूँ.. पर तुमने कहा था कि मैं तुम्हारी चूत देख सकता हूँ.

राज सही मे गरमाने लग गया था.. उस औरत को इस तरह पॅंटी मे बैठे देख उसका लंड थिरकने लगा.. वो अपने लंड को अपनी अंडरवेर के उपर से ही मसल्ने लगा.. उसका लंड अच्छी तरह तन कर खड़ा हो गया.

>गीली चूत> तुम सही कह रहे थे.. यहाँ से तो तुम्हारा लंड काफ़ी विशाल लगता है.

वसुंधरा अपनी चूत को सॅटिन की काली पॅंटी के उपर से मसल रही थी.. उसकी चूत पूरी तरह गीली हो पॅंटी को भीगो रही थी. उसे विश्वास नही हो रहा था कि आज इस तरह वो अपने ही बेटे का लंड देखने को मचल रही थी.. और जो उसे दीखाई दे रहा था उससे तो उसके बेटे का लंड सही मे काफ़ी विशाल था.

>राज_मस्ताना> क्या तुम्हारी पॅंटी अछी तरह गीली हो गयी है.?

>गीली चूत> हां लेकिन पहले में तुम्हारे लंड को अछी तरह देखना चाहती हूँ फिर में अपनी पॅंटी को अपने रस से और अछी तरह गीली कर दूँगी.

>राज_मस्ताना> काश मेरे पास तुम्हारी ये पॅंटी होती.. तो में इसे अपने लंड के चारों और लपेट तुम्हारे लिए मूठ मारता.

वसुंधरा तो एक बार चौंक पड़ी.. लेकिन वो तो उसके लंड को अछी तरह देखने के लिए मरी जा रही थी...

>गीली चूत> प्लीज़ मुझे अब दीखा दो ना.

हे भगवान ये तो मेरा लंड देखने के लिए पागल हुई जा रही है.. राज ने सोचा.. लेकिन अपनी चूत नही दीखा रही राज ने तय कर लिया कि वो पहले अपना लंड नही दीखायगा.

;राज_मस्ताना& मुझे लगता है कि तुम पहले मुझे अपनी चूत दीखाओ.. वैसे भी तुम मेरा चेहरा देख चुकी हो लेकिन मेने तुम्हारी पॅंटी के अलावा कुछ नही देखा.. साबित करो कि तुम्हारी चूत गीली है.. मुझे अपनी गीली उंगली दिखाओ.
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09-20-2018, 01:57 PM,
#10
RE: Indian Sex Story वपरिवार हो तो ऐसा
वाशुंढरा समझ गयी कि उसका बेटा इस तरह नही मानेगा इसलिए उसने अपनी उंगली पॅंटी के साइड से अंदर डाल अपनी चूत मे घुसा दी और जब उसकी उंगली अछी तरह गीली हो गयी तो कॅमरा को ठीक अपने हाथ के उपर कर दिया और अपनी उंगली और अंगूठे को इस तरह पॅंटी से बाहर निकाला कि रस की कुछ बूंदे उनमे आ गयी.

>गीली चूत> मुझे लगता है कि तुम इस रस को चखना चाहोगे?

>राज_मस्ताना> हां सीधे तुम्हारी चूत से लेकिन पहले में तुम्हारी चूत देखना चाहता हूँ.

>गीली चूत> लो ठीक है.. लो देखो.


वसुंधरा समझ गयी उसका बेटा उसकी चूत देख कर ही मानेगा इसलिए उसने अपनी पॅंटी को साइड से पकड़ हटा दिया उसकी चूत सही मे बिना बालों की थी.. और रस से चमक रही थी.

>राज_मस्ताना> वाउ.. अब अपनी पॅंटी को उतार दो.

>गीली चूत> नही पहले तुम अपना लंड दीखाओ.

राज ने तुरंत अपने लंड को अंडरवेर से बाहर निकाला जिससे गीली चूत उसे देख सके.

>गीली चूत> बहोत अछा है लेकिन ज़रा कॅमरा के लेंस को ज़ूम करो जिससे में इसे अछी तरह देख सकूँ.

राज ने वैसे ही किया जैसा कहने को कहा गया था और उसे लाइन से तीन चार मेसेज आ गये उसके लंड की तारीफ मे.

वसुंधरा को राज के साथ इस खेल मे मज़ा आ रहा था. और उसे लगने लगा कि वो इस मध्यम से उससे बहोत कुछ जान सकती है जो शायद हक़ीकत मे वो अपनी मा से कहते हुए शरमाये.

>गीली चूत> लड़किया तो इस लंड से चुदवाते चुदवाते पागल हो जाती होंगी.

>राज_मस्ताना> मुझे पता नही.

>गीली चूत> तुम ये कहना चाहते हो कि तुमने अपने इस मूसल लंड को आज तक किसी चूत मे नही घुसाया.

>राज_मस्ताना> हां.

>गीली चूत> लॉल. इसमे उदास होने की बात नही है.. मुझे विश्वास है कि वो दिन अब ज़्यादा दूर नही है.

वसुंधरा को अस्चर्य भी हो रहा था और साथ ही खुश भी थी कि उसके बेटे ने अभी तक चुदाई का स्वाद नही चखा है.

>राज_मस्ताना> लेकिन हां मेने अपना लंड चूस्वाया है.

>गीली चूत> फिर तो दोनो को खूब मज़ा आया होगा.

>राज_मस्ताना> हां बहोत और मुझे लगता है कि वो दोबारा फिर मेरा लंड चूसेगी.

>गीली चूत> हां अगर उसकी जगह में होती तो में भी यही करती.

>राज_मस्ताना> अब अपनी पॅंटी उतारो

वसुंधरा अब तक इतना गरमा चुकी थी कि अब उसे परवाह नही थी कि वो अपने ही बेटे को अपनी चूत दीखाने जा रही है.. उसके सामने तो उसके बेटे का विशाल लंड था.. वैसे भी उसे सिर्फ़ चूत ही तो दीखाई देनी थी.. उसने अपनी पॅंटी उतार दी.

और कुर्सी पर पसर कर अपनी टाँगे फैला दी और दूसरी तरफ से आते मेसेज पढ़ती रही.. राज उसकी चूत की तारीफ किए जा रहा था.. वो लीख रहा था कि उसकी इच्छा उसकी चूत को चूसने की हो रही है और वो अपने लंड को उसकी चूत मे घुसाना चाहता है.


>गीली चूत> क्या तुम मेरे लिए अपने लंड का पानी छ्चोड़ोगे?

>राज_मस्ताना> हां अगर तुम अपनी चूत मे अपनी उंगली अंदर बाहर करो तो.

>गीली चूत> हां क्यों नही.

>राज_मस्ताना> लेकिन मे फिर थोड़ी देर के लिए कुछ लीख नही पाउन्गा.

>गीली चूत> में भी कहाँ लीख पाउन्गि.. तुम अपने लंड को मसलो में अपनी चूत मे उंगली करती हूँ.

>राज_मस्ताना> ओके

तो भाइयो आपने देख लिया होगा कि मा बेटे का रोमांस चल रहा है फरक

सिर्फ़ इतना है कि मा तो जानती है की सामने कौन है लेकिन बेटे

को पता नही कि ये गीली चूत उसकी मा है

आगे की कहानी अगले पार्ट मे आपका दोस्त राज शर्मा

क्रमशः.......
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