Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास
08-11-2018, 02:17 PM,
RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास
किचन में पहुँच कर वो ऋतु को उतारता है और उसे प्लेट्स ले कर टेबल पे आने के लिए कहकर अपने रूम में जाता है और वोड्का की एक बॉटल अपनी अलमारी से निकाल कर टेबल पे आ कर नंगा ही बैठ जाता है, और अपने लिए ड्रिंक बनाने लगता है.

ऋतु का दिमाग़ रवि के बारे में ही सोच रहा था, कैसा होगा वो, खाना खाया होगा या नही? 
और जिस्म यहाँ नंगा किचन में खड़ा था, एक जंग छिड़ी हुई थी दिमाग़ और जिस्म में, जब रमण ने अपने कपड़े उतारे तो वो समझ गई थी, कि थोड़ी देर में चुदाई का समारोह फिर शुरू होगा, हालाँकि उसकी चूत थोड़ा सूज गई थी, फिर भी वो लार टपकाने लगी थी.
अपनी रिस्ति हुई चूत के साथ वो प्लेट्स उठा कर टेबल पे जाती है और खाना सर्व करती है.
रमण उसे अपनी गोद में बिठा लेता है और जैसे ही रमण के लंड का अहसास उसे अपनी चूत पे महसूस होता है दिमाग़ हार जाता है और जिस्म की प्यास की जीत हो जाती है.
रमण खाने के साथ साथ से थोड़ी पिलाता भी रहता है और उसने अपना एक हाथ उसके उरोज़ पे ही रखा हुआ था. रमण का लंड उसकी जांघों के बीच ठुमकीयाँ लगा रहा था और ऋतु भी अपनी गान्ड हिला हिला कर उसे अपनी जांघों के बीच रगड़ रही थी, कभी अपनी जांघें खोलती और कभी सख्ती से दबा लेती.

रमण उसके उरोज़ को हल्के हल्के सहला रहा था. ऋतु के निपल सख़्त होने लगे और उसकी चूत से बहता हुआ रस रमण के लंड को गीला करने लगा.

दोनो खाना ख़तम करते हैं और रमण वहीं टेबल पे बैठे बैठे वोड्का का दौर चालू रखता है.
ऋतु पे वोड्का का असर होने लगता है और उसके अंदर छुपी रंडी बाहर आने लगती है.

ऋतु अपना चेहरा मोड़ कर रमण के होंठों को अपने होंठों में जाकड़ लेती है और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगती है रमण भी अपना हाथों का कसाव उसके उरोज़ पे बढ़ा देता है और ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगता है. 

तभी ऋतु का मोबाइल बजता है. ऋतु रमण की गोद से उठ कर अपने रूम में भागती है, जहाँ उसका मोबाइल बज रहा था. कॉल रवि की थी. 
ऋतु कॉल रिसीव करते ही : कहाँ है तू, जल्दी घर आ .
ऋतु की साँस फूली हुई थी, और रवि को समझते देर ना लगी कि वो क्या कर रही होगी.
रवि : बस मेरे जाते ही पापा की गोद में चली गई.
ऋतु : रवि वो … वो… 
रवि : खैर तेरी मर्ज़ी, अब मैं कभी वापस नही आउन्गा, और पापा को बोल देना, मैं इंडिया वापस नही जा रहा. मम्मी को मैं फोन कर के बता दूँगा.
रवि फोन काट देता है. ऋतु उसका फोन ट्राइ करती है, पर रवि ने फोन स्विच ऑफ कर दिया था. ऋतु को तेज झटका लगता है.
वो अपने कमरे का दरवाजा बंद कर बिस्तर पे गिर पड़ती है और रोने लगती है. उसने जो सोचा था, सब उल्टा हो गया.
थोड़ी देर बाद रमण उसे दरवाजा खोलने के लिए बोलता है, पर वो नही खोलती और उसे कह देती है, उसका मूड ऑफ हो गया है वो जा कर अपने कमरे में सो जाए.

रमण बहुत कोशिश करता है कि वो दरवाजा खोल दे, पर वो नही खोलती, हार कर रमण अपने कमरे में चला जाता है.
वो सोने की कोशिश करता है, पर नींद उसकी आँखों से गायब थी, उसे बस ऋतु का जवान नंगा बढ़न ही दिखता रहता है
ऋतु बिस्तर पे लेटी हुई रवि के बारे में सोच रही थी, आख़िर रवि को हुआ क्या है. वो उसे अपनी पत्नी तो नही बना सकता, समाज क्या सोचेगा, और अगर वो उसके साथ अपने पिता से भी प्यार करती है तो इसमे ग़लत क्या है. रवि को भी तो मोका मिलेगा माँ से प्यार करने का. क्या रवि अपना प्यार बाँट नही सकता? एक छोटी सा परवार ही तो है, दो मर्द और दो औरतें, क्या चारों आपस में प्यार नही कर सकते. आज नही तो कल वो समझ ही जाएगा, फिर बुरा नही मानेगा. इतना भी नही सोचा उसने कि मैने उसे अपनी सील तोड़ने दी थी, क्यूँ नही समझता वो मेरे दिल की बात. मुझे दो लंड मिलेंगे तो उसे भी दो चूत मिलेंगी. और बाहर का कोई नही है, सब अपने ही तो हैं जिनसे हम बहुत प्यार करते हैं.बस इस प्यार को थोड़ा और बढ़ा रहे हैं. कैसे समझाऊ उसे?

रवि के बारे में सोचते सोचते,उसका हाथ अपनी चूत पे चला जाता है, अफ कितनी बुरी तरहा से चूस रहा था, मेरा मूत तक निकाल दिया, और अब नाराज़ होके चला गया है, अब मुझे लंड चाहिए, क्या करूँ, खुद चला गया, तो मुझे पापा के पास ही तो जाना पड़ेगा, बेवकूफ़ कहीं का, यहाँ होता तो अभी मुझे चोद रहा होता.

ऋतु के जिस्म में उत्तेजना फैलने लगती है. लड़की जब ताज़ा चुदि हो, तो उसके अंदर लंड का आकर्षण बढ़ जाता है, उसकी चूत बार बार खुजलाने लगती है,जिसे सिर्फ़ एक तगड़ा लंड ही मिटा सकता है.

ऋतु खुद को रोक नही पाती और उठ कर कमरे का दरवाजा खोल देती है.
एक पल सोचती है फिर रमण के कमरे की तरफ बढ़ जाती है.

रमण नंगा ही बिस्तर पे लेटा हुआ था और करवटें बदल रहा था. उसकी हालत देख ऋतु के चेहरे पे मुस्कान आ जाती है.

कमरे के अंदर जाने की जगह वो दरवाजे पे खटका करती है और रमण की नज़र उसपे पड़ जाती है, वो रमण की तरफ कातिलाना मुस्कान के साथ देखती है और अपने कमरे की तरफ बढ़ जाती है. ऋतु चाहती थी कि रमण उसके पीछे आए और ये ना लगे कि वो रमण के बिस्तर पे गई थी, शायद इस तरहा वो रमण को ये दिखाना चाहती थी कि रमण को उसकी ज़्यादा ज़रूरत है. रमण फटाफट एक वाइन की बॉटल थाम कर 3-4 घूँट भरता है और ऋतु के कमरे की तरफ बढ़ जाता है, बॉटल उसके हाथ में ही थी, और उसका लंड जो मुरझाने के समीप था उसमे फिर जान आ जाती है.
रमण ऋतु के कमरे में घुसता है तो देखता है कि वो पेट के बल लेटी हुई है.
रमण उसके पास जा कर बैठ जाता है और उसकी पीठ पे हाथ फेरने लगता है. ऋतु की सिसकी निकल जाती है जैसे ही उसे रमण के हाथ का अहसास अपनी नंगे बदन पे होता है.

रमण उसकी पीठ पे उपर से नीचे हाथ फेरता है और फिर उसके कंधों को चूमने लगता है. ऋतु हल्की हल्की सिसकियाँ लेती रहती है.

रमण फिर उसकी पीठ पे थोड़ी वाइन गिरा देता है और उसे चाटने लगता है, रमण की हरकतों से ऋतु के जिस्म में तरंगें लहराने लगती हैं और वो लेटी ही नागिन की तरहा बल खाने लगती है. उसे बहुत मज़ा आ रहा था.

रमण उसकी पीठ चाट्ता है नीचे कमर पे आता है और फिर थोड़ी वाइन गिरा कर से चाटता है.

‘हाई क्या कर रहे हो उफफफफफफफफ्फ़’

रमण कोई जवाब नही देता और चाट्ता हुआ उसकी गान्ड तक पहुँच जाता है.
इसके बाद जो रमण करता है वो ऋतु के जिस्म को उछलने पे मजबूर कर देता है और उसकी सिसकियाँ तेज हो जाती है.

रमण उसकी गान्ड फैलाकर उसके छेद पे वाइन गिराता है और ज़ोर ज़ोर से उसकी गान्ड के छेद को चाटने और चूसने लगता है.

ओह म्म्म्म मममाआआआअ उूुुुउउइईईईईईईईईईई

रमण तुला हुआ था ऋतु की गान्ड को चूसने में और उसकी गान्ड का छेद उत्तेजना के मारे खुल और बंद होने लगा. रमण उसकी गान्ड के छेद में अपनी जीब घुसा देता है.

आआआआआआऐययईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई

ऋतु मस्ती में चीखती है, रमण उसकी गान्ड में अपनी जीब कभी डाल रहा था कभी निकल रहा था और कभी चाट रहा था, कभी चूस रहा था. 
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08-11-2018, 02:17 PM,
RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास
अपनी गान्ड में होती हुई सुरसूराहट को ऋतु बर्दाश्त नही कर पाती और बिना चुदे ही झाड़ जाती है.

रमण आज उसे इतना मज़ा देने के मूड में था कि ऋतु फिर कभी उसे मना ना कर पाए और इस मज़े के लिए हमेशा तयार रहे.

रमण काफ़ी देर तक ऋतु की गान्ड पे वाइन डालता रहता है और उसे चाट ता रहता है, ऋतु के जिस्म में उत्तेजना अपनी चर्म सीमा पे पहुँच जाती है और वो अपनी मुठियों में चद्दर को जाकड़ लेती है और अपनी गान्ड का दबाव रमण के मुँह पे करने लगती है. 

रमण उसकी दोनो जांघे थाम लेता है और अपने चेहरे को उसकी गान्ड में घुसाए रखता है, उसकी जीब ऋतु की गान्ड के छेद पे अपना कमाल दिखाती रहती है और ऋतु तड़प तड़प के ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगती है.

आआआअहह चूसो चूसो मेरी गान्ड चूसो और ज़ोर से चूसो
आ उम्म्म ओह उउउइईईईईईईईईईईईई 

ऋतु से और बर्दाश्त नही होता वो खुद ही अपना उरोज़ मसल्ने लगती है और अपने दूसरे की हाथ की उंगलियाँ अपनी चूत में घुसा लेती है.

रमण उसके मज़े और उसकी उत्तेजना को बढ़ाता ही जा रहा था.

थोड़ी देर बाद रमण उसकी गान्ड थोड़ी और उपर उठाता है और पीछे से ही उसकी चूत पे अपनी ज़ुबान फेरने लगता है. रमण की ज़ुबान जैसे ही ऋतु की चूत को छूती है ऋतु झाड़ ने लग जाती है और उसका जिस्म ढीला पड़ जाता है. इतना मज़ा उससे बर्दाश्त नही होता और वो लगबघ बेहोश सी हो जाती है. रमण उसकी चूत से बहते हुए कामरस को पी जाता है और फिर उसे पलट कर पीठ के बल लिटा देता है.

रमण उसके खूबसूरत बदन को निहारता रहता है जब तक ऋतु के जिस्म में कुछ हलचल नही होती.

ऋतु को जब होश आता है तो आँखें खोल कर रमण को देखती है, उसे शरम आ जाती है, जिस तरहा रमण उसके नंगे बदन को निहार रहा था और वो अपनी आँखें बंद कर लेती है.

रमण धीरे धीरे उसके उपर झुकता है और उसके होंठों पे अपनी ज़ुबान फेरने लगता है, ऋतु अपने होंठ खोल देती है और रमण उसके लबों का रस चुराने लगता है. ऋतु भी उसके होंठ को चूसना शुरू कर देती है.

होठों को चूस्ते चूस्ते रमण उसके उरोज़ को दबाने और निचोड़ने लगता है. ऋतु फिर गरम होने लगती है और ज़ोर ज़ोर से रमण के होंठ को चूसने लगती है. दोनो में जैसे होड़ सी लग जाती है कौन कितनी ज़ोर से चूस्ता है. 

और ऋतु भी रमण के निपल पे अपने नाख़ून लगाती है. रमण उसके उरोज़ को निचोड़ता है तो ऋतु उसके निपल को.

दोनो ही एक दूसरे के साथ आक्रामक से हो जाते हैं. कोई पीछे हटने को तयार नही था.

हालात यहाँ तक पहुँच जाती है कि दोनो के होंठ सूज जाते हैं, उनमे से खून लगबग रिसने सा लगता है और साँसे उखाड़ने लगती है. और मजबूरन दोनो को अलग हो कर अपनी उखड़ती हुई सांसो को संभालना पड़ता है.

ऋतु की साँसे जैसे ही संभालती हैं, वो आक्रामक हो कर रमण को नीचे कर देती है और उसके उपर चढ़ जाती है. फिर जिस तरहा रमण ने उसकी पीठ पे वाइन गिरा के चाट चाट कर उसे तडपाया था वो उसकी छाती पे वाइन गिरा कर चाटने लगती है और उसके एक निपल को बुरी तरहा चूसने लगती है, दूसरे पे अपनी नाख़ून फेरने लगती है.
वो उसके निपल इतनी ज़ोर से चुस्ती है जैसे उनमे से दूध निकाल कर मानेगी और इतनी ज़ोर से अपने हाथों से उसके निपल के निचले हिस्से को दबा कर उठती है मानो उसके जिस्म में पूरा उरोज़ बना के छोड़ेगी.

दर्द और शिद्दत से रमण तड़पने लगता है और इन सब हरकतों का असर उसके लंड पे पड़ता है जो झटके खाना शुरू कर देता है. कभी एक निपल और कभी दूसरा ज़ोर ज़ोर से चूसना और कभी तो दाँतों में दबा लेना .

ऋतु के इस आक्रमण से रमण अंदर तक हिल जाता है, उसकी बीवी सुनीता भी बहुत कामुक है, पर उसने कभी इतना आक्रामक रूप नही दिखाया था जो आज ऋतु दिखा रही थी.
रमण के निपल से उठती हुई तरंगे सीधा उसके लंड पे घात कर रही थी, उसके अंडकोषों में उबाल ले के आ रही थी.

रमण बुरी तरीके से झड़ना चाहता था वो ऋतु की चूत की गर्माहट का सकुन चाहता था, पर ऋतु उसे कुछ भी करने का मोका नही दे रही थी. उसका लंड पत्थर की तरहा सख़्त हो चुका था और तोप की तरहा खड़ा हुआ था. झटके मार मार कर इशारे कर रहा था, मुझे भी तो देखो, मुझे क्यूँ तड़पने के लिए छोड़ दिया है.

ऐसा लग रहा था जैसे ऋतु उसका रेप कर रही हो. रमण के हाथ खुले थे पर उसका दिमाग़ और उसका दिल ऋतु के क़ब्ज़े में आ चुका था. रमण सोच रहा था कि वो ऋतु को अपना गुलाम बना लेगा, पर चाल उल्टी पड़ गई, वो खुद ऋतु के हाथों का खिलोना बन के रह गया था. 

ऋतु रमण के निपल्स को चूस और काट कर इतनी उत्तेजना उसके जिस्म के अंदर भर देती है कि जब उसका हाथ पीछे जाकर रमण के लंड को थामता है, तो उसकी हाथों की कोमलता का अहसास रमण को चूत की तरहा लगता है और वो चीखता हुआ झड़ने लगता है.

ऊऊऊऊओह गगगगगगगगगगूऊऊऊऊद्द्दद्ड

रमण की पिचकारियाँ ऋतु के जिस्म पे गिरने लगती हैं और वो इस तरहा बैठ जाती है कि आधे से ज़्यादा उसका रस उसके उरोजो पे गिरे.

रमण की पिचकारियाँ जब ख़तम हो जाती हैं और उसका लंड ढीला पड़ने लगता है तो ऋतु उसकी बगल में लेट जाती है और उसके सर को पकड़ के अपने उरोजो की तरफ खींचती है जो रमण के वीर्य से सने हुए थे.

रमण उसकी आँखों में देखता है और ऋतु किसी विजयता की तरहा आँखों ही आँखों से हुकुम देती है उसके उरोज़ को चाट कर सॉफ करने के लिए.

ऋतु ने रमण को इतना मज़ा दिया था कि रमण की हालत किसी गुलाम की तरहा हो जाती है और वो जिंदगी में पहली बार अपने ही रस को चखता है, पहले उसे कुछ अजीब लगता है फिर उसे भी मज़ा आने लगता है और वो किसी कुत्ते की तरहा अपनी जीब लपलपाते हुए अपने ही वीर्य को चाटने लगता है और ऋतु के जिस्म के हर उस हिस्से को चाट कर सॉफ करता है जहाँ जहाँ उसका वीर्य गिरा था. ऋतु की आँखों में जो जीत की चमक थी वो देखने लायक थी.

एक अभिसार खेल में अनुभवी आदमी आज एक गुलाम की तरहा उसकी आँखों के इशारे को मान रहा था.

ऋतु के दिमाग़ में ख़तरनाक आइडिया आने लगते हैं. और इन सबकी वजह वो प्यार था जो उसे अपनी माँ से था. 

ऋतु ने कसम खा ली थी कि वो रमण की हैसियत एक गुलाम की तरहा बना के रख देगी जिसपे वो और उसकी माँ हुकूमत करेंगे. उसे रवि का साथ चाहिए था, वो क्या जानती थी, कि वक़्त के पेट में ये साथ जो वो चाहती है वो कहीं और से आना लिखा है.

कारण ये था कि सुनीता को गान्ड मराने से डर लगता था इसलिए वो हमेशा रमण को मना कर देती थी, एक दिन रमण ने बहुत पी रखी थी, और उसकी गान्ड मारने के पीछे पड़ गया था, सुनीता के मना करने के बाद उसने 2-3 थप्पड़ उसे मार दिए थे, जिसकी गूँज ऋतु के कमरे तक पहुँच गई और वो आ कर दरवाजा खटखटाने लगी.
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08-11-2018, 02:18 PM,
RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास
उस रात सुनीता ऋतु के साथ ही सोई. अपनी माँ की वो बेइज़्ज़ती ऋतु भूली नही थी. अब वक़्त आ गया था वो बदला लेने के लिए. चूत के आशिक़ को चूत का गुलाम बनाने के लिए.
जिस्म की प्यास मिटाने के साथ साथ ऋतु के दिल में छुपी हुई नफ़रत भी अपना खेल खेलने लगी .

जब रमण ने उसका सारा जिस्म अपने वीर्य को चाट कर सॉफ कर दिया तो ऋतु बिस्तर से उठ के खड़ी हो गई, वो इतना झाड़ चुकी थी की बिना चुदाई के मूत का प्रेशर बन गया था.

इठलाती हुई गान्ड मटकाती हुई वो कमरे में बने बाथरूम की तरफ बढ़ती है और रमण को पीछे आने का इशारा करती है.

रमण उसके पीछे जाता है ये सोच कर की वाइन की वजह से वो दोनो साथ साथ नहाएँगे और जिस्मो को सॉफ करेंगे.
पर ऋतु का मक़सद कुछ और ही था. रवि के साथ जब उसका मूत निकला था वो उत्तेजना की चरम सीमा पे थी.

पर रमण को वो जॅलील करना चाहती थी.

बाथरूम में घुस कर वो शवर ऑन करती है और नीचे खड़ी हो जाती है. रमण जैसे ही अंदर घुसता है वो शवर हल्का कर देती है और रमण को इशारे से ज़मीन पे लेटने को बोलती है. 

रमण जैसे ही नीचे लटता है वो उसके उपर चढ़ जाती है और अपनी चूत बिल्कुल उसके मुँह पे रख देती है.

‘मेरी चूत बहुत अच्छी लगती है ना, चलो अपना मुँह खोलो, आज मेरी चूत का अमृत पीना.’

रमण अपना मुँह खोलता है और ऋतु का बाँध जो उसने मुश्किल से रोका हुआ था टूट जाता है और उसका मूत रमण के मुँह में गिरने लगता है.

रमण घबरा जाता है, वो उठने की कोशिश करता है तो ऋतु उसे झड़क देती है.

‘पी ना बेटीचोद, मज़ा आएगा, अब से रोज तुझे अपना अमृत पिलाउन्गि, पिएगा ना’

मरता क्या ना करता रमण उसका मूत पीने लगता है. ऋतु की चूत की चाहत में वो अंदर ही अंदर टूटता सा जा रहा था.ऋतु उसके पोरुश की धज्जियाँ दा रही थी, और वो बेबस हो के रह जाता है.

अपना मूत उसे पिलाने के बाद ऋतु उसे शवर के नीचे खड़ा करती है और अपना बदन उसके बदन से रगड़ने लगती है.

‘क्यूँ बेटीचॉड, मज़ा आया ना, मेरा अमृत पी कर’

ऋतु ने पापा की जगह रमण को बेटीचोद बुलाना शुरू कर दिया था. रमण को बहुत बुरा लग रहा था पर वो चुप रह जाता है. वो ऋतु को नाराज़ नही करना चाहता था.

‘बोल ना, मज़ा आया या नही’

‘हां’

‘गुड, चलो अब आपके इनाम की बारी है’ कह कर ऋतु घुटनो के बल बैठ जाती है और रमण के लंड को मुँह में भर के चूसने लगती है. 

अहह ऋतु के नर्म मुँह का अहसास अपने लंड पे पा कर रमण सिसक पड़ता है.
शवर का गिरता हुआ पानी रमण के लंड से होता हुआ ऋतु के मुँह में जा रहा था,
ऋतु थोड़ा पीछे हट ती है और रमण की गान्ड को अपनी और धकेल कर उसे शवर से बाहर करती है. अब ऋतु को पानी का नही रमण के लंड का स्वाद मिल रहा था.

थोड़ी देर रमण के लंड को चूसने के बाद, वो रमण के आँड को मुँह में भर लेती है और ज़ोर से चूसने लगती है.

रमण दर्द से तड़प्ता है, उस दर्द में भी उसे मज़ा मिल रहा था. 

ऋतु उसके दूसरे आँड को मुँह में भर के चुस्ती है और रमण बिलबिला उठता है, उसके अंडकोष में हलचल मचने लगती है, और जब ऋतु उसके सुपाडे को अपने नाकुन से कुरेदने लगी तो रमण ने छूटने की कोशिश करी, पर उसके मुँह में फसे अपने आँड को नही निकाल पाया.

उसके जिस्म में उत्तेजना की लहरें तीव्र गति से उठ रही थी, ईस्वक़्त वो अपना लंड ऋतु की चूत में डालना चाहता था, पर ऋतु उसे कोई मोका नही दे रही थी. वो उसके लंड पे उपर से नीचे तक अपने नाख़ून फेरने लगती है और उसके आँड को और भी ज़ोर से चूसने लगती है.

आआआअहह गगगगगगगगगगूऊऊऊऊद्द्द्द्द्द्दद्ड

चीखता हुआ रमण झड़ने लगता है और ऋतु फिर से उसकी पिचकारी अपने उरोज़ पे लेती है और जैसे ही रमण की आखरी बूँद भी उसके उरोज़ पे गिर जाती है, रमण रेत के टीले की तरहा भरभराता हुआ फर्श पे बैठ जाता है.

तडपा तडपा कर ऋतु ने उसे दो बार झाड़ा दिया था.

रमण जैसे ही नीचे बैठता है ऋतु उसके पास जा कर अपने उरोज़ उसके मुँह के आगे कर देती है और रमण एक बार फिर से अपने वीर्य को चाटने लगता है.

इस खेल में ऋतु की उत्तेजना भी काफ़ी बढ़ गई थी और अब उसे अपनी चूत में लंड चाहिए था. 

ऋतु रमण को खींच कर शवर के नीचे खड़ा करती है और खुद उस के साथ चिपक कर उसके होंठ चूसने लगती है, साथ ही साथ वो रमण के लंड को सहलाने लगती है जो फिर अपने रूप में आने लगता है.

‘जानू मज़ा आया ना’

‘इतना मज़ा तो तेरी माँ ने भी कभी नही दिया’

‘देखते जाओ कितना मज़ा देती हूँ तुम्हें’

रमण का लंड फिर खड़ा हो चुका था और ऋतु की चूत भी बहुत रस बहा रही थी. वॉशबेसिन का सहारा ले कर ऋतु झुक जाती है और अपनी गान्ड रमण की तरफ कर देती है.

रमण पीछे से उसकी चूत चाट ता है और खड़ा हो कर अपना लंड उसकी चूत में फसा कर ज़ोर का धक्का मारता है और अपना आधा लंड एक बार में ही उसकी चूत में घुसा देता है. 

आआआआआईयईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई आराम से 

ऋतु चीख पड़ती है, पर रमण पे अब भूत सवार हो चुका था. वो ऋतु की कमर पकड़ कर एक झटका और मारता है और पूरा लंड उसकी चूत में पेल देता है.

ऊऊऊऊऊम्म्म्ममममममममाआआआआआआ
ऋतु ज़ोर से चीखती है.

रमण अब उसके उपर झुक कर उसके दोनो उरोज़ पकड़ के भिचता है और सटा सॅट अपना लंड उसकी चूत में पेलने लगता है.

अहह ऊऊहह उूउउफफफ्फ़ उउउम्म्म्मम

ऋतु सिसकती रहती है और रमण उसे चोदने में मस्त हो जाता है.
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08-11-2018, 02:18 PM,
RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास
ऋतु की सिसकियाँ रमण के अंदर छुपे जानवर को बाहर निकाल देती हैं, जिसे अपनी बेटी को चोदने में ज़्यादा मज़ा आ रहा था.

‘ले साली रंडी, ले मेरा लंड अपनी चूत में, ले ले ले, मूत पिलाती है मुझे रंडी, आज फाड़ दूँगा तेरी चूत’

‘बेटी चोद ज़्यादा चौड़ा मत हो, मूत तो मेरा तू रोज पिएगा नाश्ते में---- चोद साले--- देखूं तो सही कितना दम है तेरे लंड में---- चोद भडवे चोद---- बस इतना ही दम है --- ज़ोर से पेल ना ----ऐसी चूत फिर कभी नही मिलेगी……..चोद बेटीचोद’

रमण उसकी बात सुन कर पागल सा हो जाता है और एक मशीन की तरहा सतसट उसकी चूत में लंड पेलने लगता है.

आआआआऐययईईईईईईईईईईई चोद मदर्चोद…….दम नही है क्या

ऋतु उसे और भड़काती है और रमण इतनी तेज चुदाई करता है कि उसकी साँस फूलने लगती है, उम्र का तक़ाज़ा सामने आने लगता है, ऋतु अब तक दो बार झाड़ चुकी थी, वो रमण को नीचा दिखाना चाहती थी……… 

‘ बस इतना ही दम है, चोद ना बेटी चोद’

रमण अपनी पूरी जान लगा कर उसे चोदने लगता है पर अपनी फुल्ती हुई साँस के आगे हार खा जाता है, बेशक उसका लंड खड़ा था क्योंकि वो दो बार झाड़ चुका था, पर उसके जिस्म में वो हिम्मत नही बची थी……..ऋतु उसे अच्छी तरहा निचोड़ चुकी थी…………हांफता हुआ वो पीछे गिर पड़ता है. 

चाहे ऋतु की खुद की हालत बुरी हो चुकी थी, पर चेहरे पे मुस्कान लाती हुई रमण को और जॅलील करती है….. बस इतना ही दम था…. थू….और थूक देती है रमण के चेहरे पे……

‘अब कभी माँ और मेरे बीच मत आना---- तुझ में जान नही है…. हां जब हमारा दिल करेगा--- तुझे चोदने का मोका देते रहेंगे’

रमण को विश्वास नही हो रहा था ----- उसकी अपनी बेटी उसे कितना जॅलील कर रही है…. वो खुद को कोसने लगता है…. जिस्म की प्यास ने उसकी क्या हालत कर के रख दी.

ऋतु अपनी गान्ड मटकाते हुए बाथरूम से बाहर चली जाती है रमण को अकेला छोड़---- एक पछतावे के साथ.

अपने बिस्तर पे पहुँच कर वो रवि को स्मस भेज देती है.

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उधर, सोए हुए विमल की नींद खुल जाती है, अब भी उसके मुँह में सुनीता का निपल था, विमल फिर से सुनीता का निपल चूसने लगता है. जैसे ही सुनीता को अपने निपल पे फिर से हरकत का अहसास होता है, उसकी नींद भी खुल जाती है.

विमल के जिस्म में उत्तेजना बढ़ती है,और वो एक निपल को चूस्ते हुए सुनीता के दूसरे उरोज़ को थाम लेता है और हल्के हल्के दबाने लगता है.

अहह सुनीता सिसक पड़ती है और विमल के सर को ज़ोर से अपने सीने पे दबाने लगती है. उसकी चूत में भी खुजली मचनी शुरू हो जाती है. ना चाहते हुए भी वो बहेकने लगती है और उसके हाथ विमल को सहलाने लगते हैं. विमल उसके दोनो उरोज़ को कभी चूस्ता कभी दबाता और कभी निपल्स को उमेठने लगता. सुनीता के जिस्म में प्यास बढ़ने लगती है और वो अपनी जांघे आपस में रगड़ने लगती है. उसकी पकड़ विमल पे सख़्त हो जाती है और वो विमल को कस के अपने साथ चिपका लेती है.

विमल के लिए उसकी प्यासी ममता उसे सारे बंधन तोड़ने पे मजबूर कर रही थी. वो विमल के साथ चिपकती जा रही थी और अपनी एक टाँग उठा कर विमल की जांघों पे रख दी. विमल का खड़ा लंड अब उसकी चूत पे दस्तक दे रहा था.

‘अहह विमू, चूस बेटा, चूस, पीले सारा दूध’

उसकी सिसकी सुन विमल आक्रामक हो जाता है और जगह जगह उसके उरोज़ पे लव बाइट छोड़ने लगता है. सुनीता की सिसकियाँ और भी बढ़ जाती हैं. 

आह्ह्ह्ह उफफफफफफफ्फ़ उम्म्म्ममममम ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह

विमल उसके उरोज़ को चूस कर, काट कर लाल सुर्ख कर देता है और फिर उपर उठ कर वो सुनीता के होंठों को अपने होंठों के क़ब्ज़े मे ले लेता है और उसके दोनो होंठ चूसने लग जाता है.

सुनीता तड़प के रह जाती है और अपना जिस्म विमल के जिस्म से रगड़ने लगती है. उसके होंठों को चूस्ते हुए विमल उसके उरोज़ का भी मर्दन करने लगता है.

विमल ने उसके दोनो मम्मों को अपने पंजों में दबा रखा था, और हल्के हल्के दबा कर सुनीता की कामुकता को हवा दे रहा था.

‘ओह विमू, मेरे बच्चे, आज मुझ में समा जा, बहुत दूर रही हूँ तुझ से आज मुझे बहुत प्यार कर, मैं भी तुझे बहुत प्यार करना चाहती हूँ’ सुनीता अपने होंठ उस से अलग कर अपने दिल की बात बोल पड़ती है, और फिर पागलों की तरहा उसके होंठ चूसने लगती है.

जिस बचपन के प्यार को सुनीता ना पा सकी आज वो उसी जवानी को अपने अंदर समेट कर उस कमी को पूरा करना चाहती थी.

बहुत कोशिश करी थी सुनीता ने, कि बात यहाँ तक ना पहुँचे, पर जब भी विमल उसके पास होता, वो ना चाहते हुए भी खुद को रोक नही पा रही थी, उसकी प्यासी ममता उसे मजबूर कर रही थी, और आज वो उस धारा में पूरी तरहा बहना चाहती थी.

विमल उसके जॉगिंग सूट को उतार कर फेंक देता है, और अपनी शर्ट भी उतार देता है.
सुनीता की आँखों में एक कसक थी, एक प्यार था, एक निमंत्रण था.
विमल झुक कर उसकी आँखों को चूमता है, उसके गालों को चूमता है और फिर उसके नाज़ुक लबों को चूसने लगता है

उसके सामने अपने उपरी जिस्म के नंगा होने पर सुनीता के चेहरे पे शर्म की लाली छा जाती है और वो अपनी आँखे बंद कर लेती है.

विमल उसके चेहरे को अपने हाथों में थाम कर से चुंबनो से भरने लगा तो सुनीता की सिसकियाँ छूटने लगी.

‘अहह उम्म्म्म खूब प्यार कर मुझे, कब से तरस रही हूँ तेरे प्यार के लिए’

विमल फिर सुनीता की गर्दन और कंधों को चूमता हुआ उसके उरोज़ निहारने लगता है.
उसकी तरफ से कोई हरकत होती ना पा कर सुनीता अपनी आँखें खोलती है और उसे अपने उन्नत उरोजो को निहारता हुआ पाती है. एक मुस्कान उसके चेहरे पे आ जाती है.
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08-11-2018, 02:18 PM,
RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास
‘ऐसे क्या देख रहा है?’

‘देख रहा हूँ, आप कितनी सुंदर हो, दिल करता है आपके इस सुंदर रूप को अपनी आँखों से पीता रहूँ.’

‘ढत्त, अब तो बूढ़ी हो चुकी हूँ’

‘अरे नही आज भी किसी कॉलेज में जाने वाली लड़की से भी बहुत खूबसूरत हो’
अपनी तारीफ अपने बेटे के मुँह से सुन सुनीता गर्व महसूस करती है और हाथ बढ़ा कर विमल को अपने सीने में दबा लेती है.

विमल के होंठ उसके उरोज़ पे घूमने लगते हैं और सुनीता उसके बालों में प्यार से हाथ फेरते रहती है.

दोनो प्यार के इस नये बंधन में खो जाते हैं और समय का ध्यान ही नही रहता. विमल का दिल उसके उरोजो से हटना ही नही चाह रहा था और सुनीता भी बड़े प्यार से उसके होंठों के अहसास को अपने उरोज़ पे महसूस करती हुई आनंद की दुनिया में खो जाती है.

इतने मे विमल के रूम की बेल बजती है. दोनो को होश आता है, फटाफट कपड़े ठीक करते हैं. दोनो की आँखों में नशा तैर रहा था.

सुनीता दरवाजा खोलती है तो सामने सोनी खड़ी थी, बिल्कुल तयार और किसी परी की तरहा सुंदर लग रही थी.

‘मासी आप यहाँ, मैं तो आपको ढूंडती रह गई उठने के बाद, मम्मी पापा भी तयार हो चुके हैं, फटाफट तयार हो जाओ’

‘नही सोनी हम कहीं जा नही पाएँगे, विमल के पैर में चोट लग गई है और मैं उसे अकेला नही छोड़ूँगी’

सोनी लपकती है विमल के पास.

‘क्या हुआ भाई, कहाँ लगी, ज़्यादा लग गई क्या, कैसे चोट लगी?’
उसके सवालों की झड़ी लग जाती है, आँखों में नमी आ जाती है, बहुत प्यार जो करती है विमल से.

‘अरे कुछ नही थोड़ी मोवा आ गई है, कल तक ठीक हो जाउन्गा – तू जा मस्ती कर’
‘मस्ती कर – तेरे बिना क्या मस्ती होगी?’

सोनी विमल की आँखों में गौर से देखती है और उसके चेहरे पे शरारती मुस्कान आ जाती है वो विमल के कान के पास जा कर फुसफुसाती है 
‘लगता है तूने मासी को पटा लिया है और मैने आ कर डिस्टर्ब कर दिया---- चल मोका अच्छा है मैं जा रही हूँ--- कर ले आज अपने मन की पूरी—लेकिन कल नहीं छोड़ूँगी तुझे’

विमल देखता रह जाता है और सोनी चली जाती है – सुनीता दरवाजा खुला ही रखती है क्यूंकी वो जानती थी कि विमल की चोट के बारे में सुन कर रमेश और कामया ज़रूर आएँगे.

वो दोनो भी आ कर विमल का हाल पूछते हैं, कामया रुकना चाहती थी, पर सोनी उसे साथ खींच कर ले जाती है.

उनके जाने के बाद, सुनीता रूम सर्विस से कुछ खाने के लिए मँगवाती है. विमल और वो दोनो चुप चाप खाते हैं . दोनो के बीच कोई बात नही होती. शायद शर्म की दीवार बीच में आ गई थी.

खाने के बाद सुनीता विमल से ये कह कर कि वो नहा कर अभी आती है अपने कमरे में जा कर सूटकेस से अपने कपड़े निकालती है और बाथरूम में घुस जाती है.
अपना जॉगिंग सूट उतारती है और देखती है की उसकी पैंटी तो पूरी गीली पड़ी है. अपनी चूत को सहलाती हुई मुस्काती है और बाथ टब में घुस जाती है.
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08-11-2018, 02:18 PM,
RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास
होटेल से बाहर निकलने के बाद सोनी टिफिन टॉप जाने की ज़िद करती है और रमेश उसकी बात मान लेता है. वो तीन घोड़ों का इंतेज़ाम करता है. पर सोनी डरने का बहाना करती है कि वो रमेश के साथ बैठेगी.
कामया सोनी की इस हरकत से हैरान रह जाती है, पर कुछ कह नही पाती.
खैर तीनो घोड़ों पे बैठ जाते हैं. सोनिया आगे और रमेश उसके पीछे बैठता है.. कामया के घोड़े पे वजन ज़्यादा नही होता, इस लिए वो थोड़ा आगे हो जाता है और रमेश का घोड़ा पीछे.
सोनी के मादक हुस्न का साथ रमेश पे असर करने लगता है और उसका लंड हरकत में आ जाता है. सोनी को उसका खड़ा लंड अपनी गान्ड पे महसूस होता है और वो घोड़े की चाल के साथ हिलती हुई रमेश के लंड को अपने गान्ड से दबाने लगती है.

रमेश के मज़े बढ़ जाते हैं इस तरहा, लग यही रहा था कि घोड़े की चाल से दोनो हिल रहे हैं पर सोनी कुछ ज़्यादा ही हिल रही थी और रमेश के लंड की चुभन को अपनी गान्ड पे महसूस करती हुई अपनी चूत को गीली करती जा रही थी..
रमेश अपने हाथ आगे बढ़ा कर उसकी जांघों पे रख देता है और उसकी पीठ से चिपक कर उसके बालों से आती हुई सुगध को अपने अंदर उतारने लगता है. रमेश की उत्तेजना बढ़ती है और वो सोनी की जांघों को सहलाने लगता है.

रमेश का बस चलता तो सोनी के उरोज़ थाम लेता पर उसे डर था कि कहीं सोनी इतराज ना करे और कहीं कामया पीछे मूड के ना देख ले . रमेश धीरे धीरे अपना एक हाथ सोनी की जांघों के जोड़ पे रख देता है, बिल्कुल उसकी चूत के पास. सोनी महसूस कर रही थी, किस तरहा रमेश उत्तेजित होता जा रहा है. उसका लंड और भी सख़्त हो चुका था और सोनी की गान्ड की घिसाई कर रहा था. 

रमेश को कभी इतनी उत्तेजना नही चढ़ि थी, शायद, बेटी को चोदने के ख़याल ने उसे बहुत उत्तेजित कर दिया था. उसका लंड इतना सख़्त हो चुका था की सोनी की गान्ड का दबाव उसपे भारी पड़ रहा था. पॅंट में कसे उसके लंड में दर्द होना शुरू हो गया था और वो चाह रहा था कि ये सफ़र जल्दी ख़तम हो और वो कहीं कोने में जा कर अपने लंड की अकड़ को ढीला कर सके.

अपनी उत्तेजना में आ कर वो सोनी की चूत को कस के दबा देता है और अपनी सिसकी को रोकने के लिए सोनी अपने होंठ अपने दांतो तले दबा लेती है.

आधे घंटे के सफ़र ने दोनो को ही बहुत गरम कर दिया था सोनी की पूरी पैंटी गीली हो चुकी थी और रमेश का भी बुरा हाल था. जब ये टिफिन टॉप पहुँचे तो रमेश लगभग छलाँग लगा कर घोड़े से उतरा और सीधा वहाँ बने टाय्लेट की तरफ भागा. उसकी हालत देख कर सोनी मुस्कुरा पड़ी.

सोनी जा कर कामया के गले लग जाती है.

‘मेरे साथ नही बैठ सकती थी?’

‘क्यूँ जलन हो रही है क्या?’

‘क्या बक रही है?’

‘तो बुरा क्यूँ मान रही हो अगर पापा के साथ बैठ गई. वैसे मोम डार्लिंग, पापा के साथ आपको बढ़ा मज़ा आता होगा ना – बहुत लंबा मोटा है उनका’

‘चुप कर बेशरम’

सोनी कुछ कहनेवाली थी कि रमेश को आता देख कर चुप हो जाती है.

फिर तीनो, वहाँ की ताज़ी हवा का लुफ्त उठाते हैं और वहाँ की सीनरी का मज़ा लेते हुए अलग अलग पोज़ में एक दूसरे की फोटो खींचते हैं.
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08-11-2018, 02:18 PM,
RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास
उधर सुनीता बाथरूम में ऐसे नहाती है जैसे आज उसकी सुहागरात हो. अपने जिस्म को मल मल कर सॉफ करती है, अन फ्रेंच से अपनी चूत, टाँगों और बाहों के अनचाहे बालों को सॉफ करती है और बहुत ही उत्तेजक पर्फ्यूम से अपने बदन को नहला देती है.

इस सब में उसे एक घंटे के करीब लग जाता है.

अपने जिस्म को सुगांधित बनाने के बाद वो बाथरूम से बाहर निकलती है और हल्क मेकप करती है. हल्के मेकप में भी वो किसी अप्सरा से कम नही लग रही थी.

अपने सूटकेस में फिर वो कपड़े ढूँडने लगती है और एक ट्रॅन्स्परेंट हल्के गुलाबी रंग की साड़ी और मॅचिंग डीप गले वाला ब्लाउस पहन लेती है.

फिर खुद को शीसे में निहारती है और खुद को देख शरमा जाती है. इस बात की तस्सल्ली होने पर कि वो अच्छी दिख रही है, वो विमल के कमरे की तरफ बढ़ जाती है.

सुनीता जैसे ही विमल के कमरे में घुसती है, विमल की आँखें चोंधिया जाती है, हुस्न का ऐसा रूप उसने कभी नही देखा था, उसका सोया हुआ लंड एक दम छलांगे मारने लगता है.

उफफफफफफफ्फ़ सुनीता को देख कर तो शायद रंभा और मेनका भी शरमा जाएँ, यही तो वजह थी कि रमेश उसके पीछे पागल था.

सुनीता मूड के दरवाजा बंद करती है और शरमाती सकूचाती विमल की तरफ बढ़ती है, विमल बिस्तर से उतर पड़ता है, और लंगड़ाता हुआ सुनीता की तरफ बढ़ता है. सुनीता भाग कर उसके पास आ जाती है.

‘पगले तू क्यूँ बिस्तर से उठा, अभी तेरी चोट ठीक नही हुई है’

‘जब कोई हुस्न की मलिका सामने हो तो उसका आदर तो करना ही पड़ता है – ये तो कुछ भी नही था अगर 20 किमी भी चलना पड़ता तो चलके इस हुस्न की देवी का सत्कार करता’

‘ओह विमू, क्यूँ मुझे चने के झाड़ पे चढ़ा रहा है’

‘नही मासी सच कह रहा हूँ, आप को देख कर तो परी भी शर्म के मारे मुँह ढक लेंगी’

‘चल चल बेवकूफ़ मासी का मज़ाक उड़ा रहा है’

विमल बिस्तर पे बैठने से पहले फ्रश पे बैठ जाता है और सुनीता का हाथ थाम लेता है.

‘मासी मेरी फ्रेंड बनोगी?’

सुनीता उसकी इस हरकत से शरमा जाती है.

‘चल पागल, मासी से भी कभी ऐसे बोलते हैं, तेरी माँ की तरहा हूँ मैं’

‘ओह मासी आप नही जानती, आप जैसी फ्रेंड मिल जाए तो मेरे सारे दोस्त जल जाएँगे’

‘हाई ये क्या बोल रहा है----- चल पहले बिस्तर पे लेट’

सुनीता उसे सहारा दे कर बिस्तर पे लिटा देती है.
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08-11-2018, 02:18 PM,
RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास
इससे पहले कि सुनीता उसे लिटा कर अलग होती, विमल उसे लप्पेट लेता है.

‘विमू छोड़’

‘नही मासी आज मुझे इस सुंदर सागर में डूब जाने दो’

और विमल उसकी नाभि को चूमने लगता है.

उूुुुुुउउफफफफफफफफ्फ़ ववववववववववीीईईईइइम्म्म्मम्मूऊऊउउ

मत कर ऐसे, मैं तेरी गर्ल/फ्रेंड नही हूँ

‘तो बन जाओ ना’ और विमल उसकी नाभि में खो जाता है

अहह, ऊऊफफफफफ्फ़, उम्म्म्मममम
सुनीता सिसकने लगती है

‘आह छोड़ विमू, मुझे कुछ हो रहा है’

ओह म्म्म्म ममाआआआ

विमल उसकी नाभि को चाट ते हुए उपर बढ़ता है और उसके उरोज़ की घाटी में अपनी ज़ुबान फेरने लगता है.

सुनीता के जिस्म में तरंगे उठने लगती है और उसका सिसकना बढ़ जाता है

‘विमू ओह विमू, मेरा बच्चा…….अहह’ सुनीता विमल के सर को अपनी छाती पे दबा लेती है.

विमल उसके ब्लाउस के बटन खोलने लगता है और उतार के अलग कर देता है
गुलाबी ब्रा में उसके गुलाबी रंगत के उरोज़ क्यमत ढा रहे थे. विमल ब्रा के उपर से ही उसके उरोज़ चूसने लग जाता है और सुनीता भी अब लाज शरम छोड़ कर उसके साथ चिपक जाती है.

‘ओह विमू मेरी जान -------प्यार कर मुझे--- बहुत प्यार कर---- बहुत तरसी हूँ तेरे लिए’

‘ओह मासी आप कितनी खूबसूरत हो, काश मैं आप के साथ शादी कर सकता’

‘उसकी क्या ज़रूरत है….अब तेरे पास आ तो गई हूँ’

‘नही मासी कोई और आप को छुए---- मुझ से बर्दाश्त नही होगा…… आप सिर्फ़ मेरी बन जाओ’

‘ये मुमकिन नही मेरे लाल---- तेरे मोसा का क्या होगा…. मैं उनकी बीवी हूँ’

वो सब बाद में देखेंगे……अभी तो आप सिर्फ़ मेरी हो’

कह कर विमल सुनीता के होंठ चूसने लगता है और सुनीता भी उसका साथ देने लगती है. दोनो की ज़ुबान एक दूसरे से पेच लड़ाती है और दोनो एक दूसरे का थूक पीते हुए एक दूसरे से लिपट ते रहते हैं.

सुनीता की सिसकियाँ विमल के मुँह के अंदर ही दम तोड़ती रहती हैं.

सुनीता के होंठ चूस्ते हुए विमल उसकी ब्रा खोल देता है और उसके दोनो उरोज़ मसल्ने लगता है.

उूुुुुुउउम्म्म्ममममममम 

विमल इतनी ज़ोर से उसके उरोज़ मसलता है की सुनीता लगभग चीख ही पड़ती है.
दोनो एक दूसरे के होंठ छोड़ने को ही तयार ना थे और विमल सुनीता के उपर ही लेट कर अपना लंड उसकी चूत पे दबाने लगता है.

सुनीता इतनी गरम हो चुकी थी, कि उस से रहा नही जा रहा था, उसकी चूत में जैसे हज़ारों चीटियाँ एक साथ रेंगने लगी.

विमल का भी बुरा हाल हो रहा था.
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08-11-2018, 02:19 PM,
RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास
विमल उसके उपर से उठ कर अपने सारे कपड़े उतार देता है. जैसे ही सुनीता की नज़र उसके लंबे मोटे लंड पे पड़ती है उसकी आँखें फटी रह जाती है.

विमल सुनीता को खड़ा कर उसकी साड़ी और पेटिकोट जिस्म से अलग करता है अब. सुनीता का गदराया जिस्म सिर्फ़ एक पैंटी पहने हुए था. विमल धीरे धीरे उसकी पैंटी उतारता है और उसकी चूत से निकलती हुई सुगंध उसे अपनी और खिच लेती है. विमल अपना मुँह उसकी चूत पे लग कर अपनी ज़ुबान फेरने लग जाता है और सुनीता तड़प कर उसे अलग कर बिस्तर पे लेट जाती है. अपनी दोनो टाँगे चौड़ी कर विमल को उपर आने का इशारा करती है.

विमल बिस्तर पे आ कर उसकी जांघों के बीच अपना मुँह डाल कर उसकी चूत को उपर से ही चाटने लगता है.

अहह विमू चाट बेटा चाट, चूस ले मेरी चूत
उूुुउउम्म्म्मममम मज़ा आ रहा है और चाट ज़ोर से चाट.
डाल दे अपनी जीब अंदर.

विमल उसकी चूत को अपनी उंगलियों से फैला कर अंदर झाँकता है और अपनी ज़ुबान अंदर डाल कर उसके निकलते हुए रस को चाट ने लगता है. 

आआआआऐययईईईईई म्म्म्म माआआआअ 

सुनीता ज़ोर से सिसक पड़ती है और विमल उसे अपनी जीब से चोदने लगता है.
सुनीता उसके सर को अपनी जांघों में दबा लेती है और अपनी चूत उसके मुँह पे मारने लगती है.

ऊऊऊऊहह गगगगगगगगगूऊऊऊऊओद्द्द्द्द्द्द्द्द्दद्ड

सुनीता ज़ोर ज़ोर से सिसकती है, पूरे कमरे में उसकी सिसकियों का शोर फैलने लगता है.
चूस बेटा चूस, ज़ोर ज़ोर से चूस, अहह बहुत मज़ा आ रहा है 
सुनीता खुद ही अपने निपल उमेठने लगती है. और चीखती हुई अपना लावा छोड़ देती है.

गगगगगगगगगगाआआआऐययईईईईईईईईईईईईईईईईईई म्म्म्मचमममममममम

विमल लपलप उसकी चूत से निकलते ही सारे रस को पी जाता है और बगल में गिर कर हाँफने लगता है.

सुनीता अपने आनंद से बाहर आती है और विमल को देखती है, उसे विमल पे बहुत प्यार आता है और झुक कर उसके चेहरे को चाट कर सॉफ करती है और अपने ही रस का आनंद लेती है.

सुनीता से रहा नही जाता वो विमल के लंड को सहलाने लगती है और सोचती है, इतना मोटा अंदर कैसे जाएगा, सोच सोच कर काँपने लगती है.

सुनीता कुछ पल सोचती है, फिर विमल के लंड को चाट्ना शुरू कर देती है.

आआहह म्म्म्म ममाआआआआसस्स्स्स्स्स्स्सिईईईईईईईईईईईईईईईई

विमल सिसक पड़ता है उसे लगता है, कुछ देर अगर उसका लंड और चाटा गया तो अभी झाड़ जाएगा.

वो सुनीता को अपने नीचे ले कर उसकी चूत पे अपने लंड को घिसने लगता है.
सुनीता की चूत में सरसराहट मच जाती है और वो अपनी टाँगें पूरी चौड़ी कर लेती है.

अहह मत तडपा अब डाल दे अंदर

और विमल अपने लंड का सुपाडा उसकी चूत के मुँह पे रख के धक्का लगा देता है
सुनीता को लगता है जैसे आज पहली बार चुद रही हो, विमल का मोटा लंड थोड़ा ही अंदर घुस पाता है और दर्द के मारे सुनीता की चीख निकल जाती है.

म्म्म्म ममाआआआआआररर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर गगगगगगाआयईईईईईईईईई

विमल थोड़ा रुकता है और फिर एक झटका और मारता है मुस्किल से 2 इंच ही अंदर घुसता है और सुनीता फिर ज़ोर से चीखती है.

ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊम्म्म्ममममममममममाआआआ

विमल सुनीता पे झुक कर उसके होंठ चूस्ता है और होंठों को अपने मुँह में दबा कर फिर एक झटका मारता है और उसका आधा लन्ड़ अंदर घुस जाता है.

सुनीता की चीख दबी रह जाती है और वो विमल की पीठ पे मुक्के बरसाने लगती है.
इतना दर्द तो पहली चुदाई में भी नही हुआ था. उसकी आँखों से लगातार आँसू बहने लगते हैं.

विमल अब धीरे धीरे अपने आधे घुसे लन्ड़ को अंदर बाहर करने लगता है आर थोड़ी देर बाद सुनीता का दर्द ख़तम हो जाता है उसे मज़ा आने लगता है और वो अपनी कमर हिलाने लगती है.

अभी सुनीता को नही पता था कि आधा लंड तो अभी बाहर ही है.
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08-11-2018, 02:19 PM,
RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास
विमल अपनी थोड़ी स्पीड बढ़ाता है और फिर एक झटका मार देता है, इस बार उसका पूरा लंड अंदर घुस जाता है.

और सुनीता की तो जैसे आँखें फटी रह जाती है., दर्द की अधिकता से वो बेहोश सी हो जाती है.

विमल उसके निपल चूसने लगता है और कोई हरकत नही करता.

करीब 5 मिनट बाद सुनीता होश में आती है और कराह उठती है.

‘हाई रे तूने तो मार ही डाला’

‘बस मासी अब चला गया अंदर, अब दर्द नही होगा’

‘शर्म नही आती कितना दर्द दिया मुझे, ऐसे भी करते हैं क्या, आराम से नही कर सकता था.’

‘मासी डार्लिंग आराम से तुम्हें बार बार दर्द होता’ और विमल अपना लंड उसकी चूत में अंदर बाहर करने लगता है.

आह आह आह अफ फ उम्म्म्म ओह

सुनीता दर्द से सिसकती रहती है. थोड़ी देर में सुनीता की चूत अपना रस छोड़ देती है और विमल का लंड अंदर फिसलने लगता है, अब सुनीता को मज़ा आने लगता है और वो अपनी गान्ड उछालने लगती है और विमल के साथ ताल से ताल मिलाने लगती है.

विमल धीरे धीरे अपनी स्पीड बढ़ाता रहता है और सुनीता भी उसी स्पीड के साथ अपनी गान्ड उपर करती रहती है.

कमरे में फॅक फॅक की आवाज़ें गूंजने लगती है.

आह चोद मुझे ज़ोर से चोद, और अंदर डाल, फाड़ दे मेरी चूत

सुनीता के मुँह में जो आता वो बड़बड़ाती रहती और विमल से चिपकती रहती है, 
चोद डाल अपनी माँ को, मैं ही तेरी असली माँ हूँ.

सुनीता मज़े की इंतिहा में सच बोल जाती है और विमल को एक झटका लगता है. वो रुक जाता है. फिर सोच कर कि मासी भी तो माँ जैसी होती है, सुनीता को ज़ोर ज़ोर से चोदने लगता है.

सुनीता दो बार झाड़ जाती है, पर विमल का स्टॅमिना बहुत था, वो बस मशीन की तरहा सुनीता को चोदने में लगा रहता है.

जब सुनीता 4 बार झाड़ जाती है तब विमल अपने चर्म पर पहुँचता है उसका लंड अंदर फूलने लगता है और सुनीता समझ जाती है वो झड़ने वाला है.


आअहह म्म्मासआआसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सिईईईईईईईई

विमल चीखता हुआ अपना रस उसकी चूत में छोड़ने लगता है और सुनीता की चूत उसके लंड को कस कर दबा लेती है, जैसे एक एक बूँद निचोड़ने के बाद ही छोड़ेगी.

दोनो के जिस्म पसीने से लथपथ थे और दोनो ही हाँफ रहे थे. रमण तो 5 मिनट में ही ढह जाता था पर विमल आधे घंटे से उसकी छूट की कुटाई कर रहा था. इतना मज़ा उसे कभी नही आया था.

उसकी चूत भी विमल के लंड के साइज़ के हिसाब से फैल जाती है. अब तो सुनीता को रमण के लंड का अपनी चूत में पता भी नही चलेगा.

कितनी ही देर विमल सुनीता के उपर ही गिर कर हांफता रहता है, और फिर उसकी बगल में लेट जाता है.

सुनीता अपनी आँखें बंद रख अपनी चुदाई के आनंद से खुद को सराबोर करती रहती है.

जब दोनो की साँसे संभलती हैं तो सुनीता विमल को चूमने लगती है.

‘ आइ लव यू बेटा, थॅंक्स, ……….आज तूने मुझे पूरी औरत बना दिया’

दोनो फिर गहरे चुंबन में खो जाते हैं.
रमेश, कामया और सोनी काफ़ी देर गुज़ार चुके थे टिफिन टॉप पे अब वापस जाने का समय था.
वापसी के लिए सोनी ने नया नखरा सामने रख दिया, कि वो पैदल ही उतरेगी, नज़रों का मज़ा लेते हुए.
कामया हरगिज़ पैदल उतरने के लिए तैयार नही हुई.

तो आख़िर में तय ये हुआ कि कामया घोड़े से जाएगी, और रमेश , सोनी के साथ पैदल आएगा. आधे रास्ते जा कर घोड़ा इनका इंतेज़ार करेगा. क्यूंकी रमेश जानता था कि सोनी पूरा रास्ता पैदल नही तय कर पाएगी.

कामया तो घोड़े पे नीचे उतरने लगती है और सोनी मस्ती मारते हुए रमेश के साथ नीचे उतरती है पैदल, जगह जगह रुक कर वो सेक्सी पोज़ में अपनी फोटो खिचवाती रहती है. उसकी अदाएँ देख कर रमेश की हालत खराब होने लगती है, उसकी पॅंट में तंबू बन जाता है, जिसे छुपाने के लिए वो अपनी शर्ट बाहर निकाल लेता है.

50 मीटर भी नही उतरे होंगे कि सोनी ने कम से कम 10 बार रुक कर अपनी फोटो खिचवाई और रमेश को घायल करती रही.

अब रमेश की किस्मत कहो कि रास्ता एक दम खाली था, और कोई टूरिस्ट ना उतर रहा था और ना ही चढ़ रहा था.

थोड़ा रास्ता उतरने के बाद सोनी जान भुज कर लड़खड़ाती है और उसे संभालने के चक्कर में रमेश अपने से लिपटा लेता है.
सोनी रमेश के गले में अपनी बाँहें डाल देती है और उसके गालों पे किस करती है.

‘थॅंक्स पा, नही तो मैं गिर जाती’

रमेश और भी कस के उसे अपने से चिपकता है और सोनी को रमेश के खड़े लंड का आभास अपनी चूत पे होने लगता है.

रमेश के हाथ उसकी पीठ पे घूमने लगते हैं, और सोनी जान भुज कर अपनी चूत रमेश के लंड पे दबा देती है, इतना इशारा रमेश के लिए काफ़ी था, वो सोनी के चेहरे को अपने हाथों में थाम कर अपने होंठ उसके होंठ पे रख देता है. दोनो के जिस्म में बिजली की लहरें उत्पात मचाने लगती है और सोनी अपने होंठ खोल देती है. रमेश की ज़ुबान उसके मुँह में घुस जाती है और डन गहरे स्मूच में खो जाते हैं.

तभी................................................
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