kamukta kahani शादी सुहागरात और हनीमून
08-17-2018, 02:53 PM,
RE: kamukta kahani शादी सुहागरात और हनीमून
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गतान्क से आगे…………………………………..

रीमा तो अपने जीजू के साथ मगन थी और अंजलि संजय से लगी हुई थी. लेकिन रजनी...

मेरे नेंदोई वो सुबह की गाड़ी से वापस चले गये थे.

सीढ़ी से उतरते समय नीचे सोनू मिला. मेरे मन में एक बात कौंधी,

हे तू रजनी को...वो बेचारी अकेली है उस का ख्याल क्यों नही रखता.

पर वो...गुड्डी...वो ... वो सोच में पड़ गया.

अर्रे तूने गोविंदा की पिक्चरे नही देखी क्या, एक साथ दो दो...तो तू किस हीरो से कम है.

मन तो उसका भी कर रहा था. मेने और पलिता लगाया.

अर्रे तेरे ही शहर में अगले साल वो मेडिकल की कोचिंग जाय्न करना वाली है, तेन्थ के बाद. एक साल से भी काम समय है. एलेवेन्थ, ट्वेल्फ्त वहीं से करेगी कोचिंग के साथ और अकेले रहेगी. तू उसका लोकल गार्डियन बन के रहेगा.पूरे दो साल...सोच वो एलेवेन्थ, ट्वेल्थ में होगी अकेले, तेरे तो मज़े हो जाएँगे, पटा ले.... माल है.

सच्ची कह रही हो, वो कोचिंग के लिए आ रही है. सच में ए-वन माल है...

लेकिन कहीं गुड्डी ने देख लिया ना तो और जलेगी. फिर दो के चक्कर में एक जो पट रही है वो भी ना हाथ से ...

अर्रे जलेगी तो और जल्दी पटेगी. बस तू देख के आ गुड्डी कहाँ हैं, आधे घंटे तक मे उसे उलझा के रखूँगी तब तक तू उसे चारा डाल. वो शायद किचन में ही होगी.

बस तुम उसको आधे घंटे तक बिज़ी रखना, तब तो मे चारा क्या चिड़िया को पूरा चुग्गा खिला दूँगा, बस देखती जाओ. और वो ये जा, वो जा.

पीछे से सीढ़ियो पे आवाज़ हुई. अंजलि थी, लेकिन बड़ी जल्दी में...मेने जब सामने देखा तो संजय था.

उसके पीछे से रजनी चली आ रही थी, अकेले. मुझे देख के उस का चेहरा खिल उठा. मेने मुस्करा के उस से पूछा, हे सोचा क्या.... वो समझ नही पर, बोली क्या भाभी. मेने उसे याद दिलाया, मेने बोला था ना, 'तेरे भैया की प्यास मे बुझाती हूँ और मेरे भैया की तुम बुझा देना, ' तो तूने बोला था कि सोचूँगी. तो सोचा क्या.

खिलखिला के वो जा रही अंजलि और संजय की ओर इशारे से बोली,

भाभी आप का एक भाई तो बुक हो गया.

तब तक सोनू किचन की ओर से लौट के आ गया. उसने मुझे इशारे से बताया कि गुड्डी किचन में ही है. सोनू टी शर्ट और जीन्स में बहुत स्मार्ट लग रहा था. रजनी उसे एक टक देख रही थी. सोनू की ओर इशारा करके मे बोली,

इस के बारे में क्या इरादा है.

ठीक लग रहा है, ट्राइ कर के देख सकती हूँ...देखूँगी. वो अदा से बोली.

तब तक सोनू पास आ गया था. मेने दोनों से कहा,

हे तुम ट्राइ करो और तुम अपने माल का ख्याल करो...मे तो चली किचन में. मेरी अच्छि ढूढ़नी हो रही होगी.

रजनी सोनू के साथ गयी, सीढ़ियों से कस के हंसते हुए रीमा उनके साथ उतर रही थी. और मे किचन में जा पहुँची.

किचन में तो घमासान मचा था. मेरी जेठानी, गुड्डी के साथ मेरी मन्झलि ननद भी...और वो मुझे देख के ( और शायद इसीलिए और ) अनदेखा करते हुए बोल रही थीं,

कितना काम बचा हुआ है. मुझे अभी सारी पॅकिंग करनी है, 7 बजे ट्रेन है. उसके बाद रजनी लोगों की भी ट्रेन साढ़े आठ बजे है. रास्ते के लिए भी खाना बना के पॅक होना है. फिर सभी लोगों के विदाई का समान...उपर से पिक्चर का अलग से प्रोग्राम बना लिया...दुल्हन के उपर ज़िम्मेदारी होती है. वो कुछ नही, बस बछेड़ियों की तरह...लड़कियो के साथ कुदक्कड़ ...मची हुई है. और करें कल की छोकरि से शादी...मेरा क्या काम काज में आउन्गि...पर घर की ज़िम्मेदारी.

मेरी जेठानी ने आँख के इशारे से मना किया कि मे बुरा ना मानूं. मे क्यों बुरा मानती. जैसे क्लास में कोई शरारती बच्चा देर से आए और चुप चाप बैठ के अपने काम करने लगे मे भी काम में लग गयी. मेने चारो ओर देखा, काम फैला पड़ा था. कुछ देर बाद मेने हिम्मत कर के मन्झलि ननद जी से कहा कि हम लोग किचन के काम सम्हाल लेंगे वो जाके पॅकिंग कर लें.

उन्होने हम लोगों की ओर देखा और भूंभूनाते हुए चली गयीं.

हम सब ने चैन की सांस ली यहाँ तक कि किचन में काम करने वाले महाराज और उनका साथ दे रहे रामू काका ने भी.

मेने जेठानी जी से समझ लिया कि क्या बनाना है. पता चला कि परेशानी पॅक किए जाने वाले खाने की थी. मांझली ननद जी को कुछ और पसंद था, उनके बच्चे को कुछ और, फिर जेठानी जी ने सोचा था कि जो इस समय सब्जी बन रही है वही कुछ उनके लिए पॅक कर दी जाए जो उनको सख़्त नागवार गुज़रा. लड़के की शादी में लड़कियो की विदाई भी पूरी दी जाती है, उसका भी हिसाब किताब सेट होना था, पॅकिंग होनी थी. मेने कहा 'दीदी, ऐसा है आप जा के ननद जी लोगों की जो विदाई है उसका इंतज़ाम करें मे यहाँ सम्हाल लूँगीं.' वो अचरज से बोली, अकेले. मेने हंस के गुड्डी की पीठ पे हाथ फेराते हुए कहा, ये है ना मेरी सहेली. काम करने के लिए ये काफ़ी है, मे तो इसका सिर्फ़ साथ दूँगी.

वो भी चली गयीं, अब बचे सिर्फ़ मे और गुड्डी.

परेशानी सिर्फ़ यही थी...टू मेनी कुक्स ...इन्स्ट्रक्षन देने वाले कयि और काम करने वाले कम...

मेने देखा एक स्टोव रखा हुआ था, गुड्डी से मेने बोला उसे जलाने को और शाम को ले जाने वाली सब्जी उस पे चढ़वा दी. फिर मेरी नज़र माइक्रोवे ओवन पे पड़ी. फिर मेने पूछा, ननद जी के बच्चो के लिए कौन सी सब्जी बनाने के लिए वो बोल रही थीं. वो कटी रखी थी. उसे मेने खुद बना के ओवन में रख दिया और रामू को पॅक होने वाली पूड़ी के लिए आटा गूथने के लिए बोला. गुड्डी से मेने कहा कि ऐसा करते हैं कि स्टोव पे सब्जी जैसे ही हो जाएगी कड़ाही चढ़ा देंगे, पूड़ी के लिए.

अलमारी में मेने ढूँढा, अल्यूमिनियम फ़ॉल भी मिल गया पॅक करने को. वो भी मेने निकाल के समझा दिया कि ले जाने वाली पूड़ी इसमें पॅक करके कैस रोल में रख देंगें. दस मिनट में ही मे ओवेन से सब्जी उतार चुकी थी और चीज़ें रास्टेन पे थीं. गुड्डी को मेने सब समझा दिया और कहा कि वो यहाँ से हीले नही बस सब चीज़ें मेने जैसे बोली है, देखती रहे बस मे ज़रा दीदी के पास से होके आ रही हूँ कि उनकी विदाई वाली पॅकिंग कैसे चल रही है.

गुड्डी बोली, ' आप ने तो...अभी यहाँ कितना तूफान मचा हुआ था और बस दस मिनट में,

अर्रे कमाल तो सब तेरा है, काम तो तू कर रही है, बस तू देखती रहना हिलना नही और उस के गाल पे एक प्यार से चपत लगा के मे बाहर निकल आई.

मे देखना चाहती थी कि सोनू और रजनी का मामला कितने आगे बढ़ा.

सीढ़ी के नीचे एक कमरा था. उसमें शादी की मिठाइयाँ, बाकी सब समान रखा जाता था. उधर कोई आता जाता नही था. मेरा शक था कि वो दोनो उधर ही...और जब मे दरवाजे के पास पहुँची तो मेरा शक सही निकाला. अंदर से हल्की हल्की आवाज़ें आ रही थीं, दरवाजा उठंगा हुआ था. दबे पाँव ...पंजो के बल...मेने देखा, सोनू उसे छेड़ रहा था,

बच्ची, छोटी सी बच्ची...

हे, मे अंजलि दीदी से सिर्फ़ एक साल ही छोटी हूँ, और उन्हे देखो, संजय तो उनसे नही कहता कि ...और नई भाभी भी तो, तुम्हारी दीदी भी मुझसे मुश्किल से तीन साल... वो इतरा के बोली.

तू बच्ची नही है बड़ी हो गयी है. सोनू उससे एक दम सॅट के बैठा था और उसका एक हाथ उसके कंधे के उपर था. उसे और अपने पास खींच के वो बोला.

एक दम...मे टीनएजर हूँ और वो भी पिच्छले पूरे दो सालों से, बच्ची कतई नही हूँ.

' चलो मे मान लेता हूँ कि तुम टीनएजर हो...अगर एक क़िस्सी दे दो. सोनू ने उसे और चढ़ाया.

लेकिन वो गुड्डी की तरह आसानी से हत्थे चढ़ने वाली नही थी.

हे ...हे चलो...मे ऐसे मानने वाली नही हूँ वो झटक के बोली. पर सोनू भी...

तो कैसे मनोगी बोलो ना...ऐसे मनोगी...और उसने सीधे उसक होंठो पे जब तक वो संभली एक ..पच्चक से...क़िस्सी ले ली.

मुझे लगा कि रजनी अब गुस्सा हो के उठ जाएगी और कहीं वो सोनू को....

गुस्सा तो वो हुई पर...गुस्से से वो बोली, क्या करते हो जूठा कर दिया, अभी मे भाभी से शिकायत करती हूँ.

हे हे मे तो डर गया क्या शिकायत करोगी...दीदी से. चिढ़ाते हुए सोनू ने और छेड़ा.

मे कहूँगी ... कहूँगी की...कि तुमने मेरी...ले ...ले ली.

अर्रे ऐसा मत बोलना...वो समझेंगी कि उनकी इस प्यारी ननद की पता नही मेने क्या ले ली.

मे बोलूँगी सॉफ सॉफ डरती थोड़े ही हूँ कि तुमने मेरी...क़िस्सी ले ली.

अगर वो पूच्छें कि कैसे...ली. मुस्कराते हुए सोनू ने कहा.

अब रजनी के लिए भी मुस्कराहट दबानी मुश्किल हो रही थी.

अबकी बार उसने सोनू के होंठो पे एक झटक से क़िस्सी ली और बोली, ऐसे.

अब वो खिलखिला के हंस रही थी, जल तरंग की तरह.

फिर तो सोनू ने भी...पुच्च...पुच्च्पुचक...पुच्चि...पुच्च पुच्च.

अब वो जब रुके तो सोनू ने उसके कसी फ्रॉक से, झलक रहे टीन उभार को साइड से...उंगली के टिप से...हल्के से छूआ, दबाया.

मुझे लगा कि अब वो ज़रूर गुस्सा ...कहीं सोनू को. लेकिन गुस्से की आवाज़ में वो बोली भी और उसने सोनू का हाथ वहीं बूब्स के स्वेल के साइड में पकड़ लिया...लेकिन हटाया नही.

ये क्या करते हो.

तेरा दिल ढूँढ रहा हूँ...जब तुम इतनी प्यारी हो तो तुम्हारा दिल भी...

मेरा दिल ...ग़लत जगह ढूँढ रहे हो, थोड़ी देर पहले यहीं था लेकिन अब मेरे पास नही है.

कहाँ गया ...कौन ले गया... सोनू ने उसके चेहरे के पास अपने होंठ ले जाके पूछा.

एक पल के लिए उसने सोनू के हाथो पे रखा अपना हाथ हटा दिया. सोनू को मौका मिल गया,

उसने एक झटके में उसके रूई के फाहे जैसे मुलायम उरोजो पे अपने हाथ हल्के से दबा के पूछा,

कौन है वो चोर ...बताओ तो उसकी मे ऐसी की...

उभार पे रखे उसके हाथ पे अपने हाथ रख के वो हल्के से बोली,

हे उसकी बुराई ना करो...मे उसको बहुत प्या... फिर वो रुक गयी और बोली, वो...वो बहुत अच्छा है, यही मेरे पास ही है वो फिर ढेर सारी चाँदी की घंटियों की तरह, खनखना के हंस दी.

हँसी तो फँसी...चलो इन लोगों की गाड़ी तो पटरी पे चल निकली. मे दबे पाँवों से वहाँ से खिसकी और अपनी जेठानी के कमरे में जा पहुँची.

वो तीन साड़ियाँ ले के कुछ उधेड़ बुन में पड़ीं थीं. मेरे पूछने पे वो बोली,

अर्रे यार इसमें से कौन सी सारी वो मझली ननद जी की विदाई के लिए निकालू. एक उनके लिए है, एक उनकी देवरानी को देनी होगी और एक रजनी की मा के लिए.

अर्रे तो पूच्छ लीजिए ना, उनसे जो उन्हे पसंद होगा बता देंगी. बूढो की तरह मे बोली.

अर्रे यही फरक है नई बहू में...तू समझती नही. वो चालू हो जाएँगी...जो तुम्हे पसंद हो मेरा क्या है और बताएँगी भी नही.

मे मान गयी उन की बात. पल भर सोचती रही फिर बोली,

दीदी, ऐसा करते हैं आप तीनो साड़ियाँ उनके पास ले जाइए और उन्हे सब बात बता दीजिए.

लेकिन उन्हे अपने लिए सारी पसंद करना के लिए मत बोलिए. सिर्फ़ उनसे कहिए कि आपको उनकी देवरानी की पसंद नही मालूम...क्या वो हेल्प कर सकती हैं. जब वो सेलेक्ट हो जाएगी तो फिर पूच्छ लें कि रजनी की मम्मी के लिए कौन सी सारी ठीक रहेगी.

वो तुरंत चली गयी और लौट के आईं तो उनके चेहरे पे खुशी झलक रही थी,

तूने बहुत सही आइडिया दिया...दोनो उन्होने खुशी खुशी बता दिया.

यही तो दीदी...उन्हे खुद बोलना नही पड़ा कि उन्हे ये वाली चाहिए और उपर से ये भी हो गया कि हर काम उनसे पूच्छ पूच्छ के होता है. मे ने कहा लेकिन वो अभी भी थोड़ी परेशान लग रही थीं क्या बात है दीदी... वो बोली, अर्रे यार अभी मे सब मेहनत से लगा रही हूँ फिर कोई आएगा देखने इनको क्या दिया, उनको क्या दिया...मेरी सारी मेहनत बेकार हो जाएगी और फिर जलन अलग.

बात उनकी एक दम सही थी. मे फिर बोली,

दीदी ऐसा करते हैं ना...सब गिफ्ट रॅप कर देते हैं फिर कोई खोलेगा भी नही अर्रे मेरी बन्नो, गिफ्ट रॅप का समान कहाँ से मिलेगा. आइडिया तो तेरा सही है...पर मेरी निगाह तब तक मेरे रिसेप्षन में मिले गिफ्ट्स पे पड़ गयी थी. मेने सम्हल के उन्हे अनरॅप किया और फिर सब कपड़े समान को गिफ्ट रॅप करना शुरू कर दिया...और साथ सब पे नाम भी और डिज़ाइन भी...लेकिन मे इस तरह बैठी थी कि मेरी निगाह एक साथ किचन पे और जिस कमरे में रजनी सोनू थे साथ साथ थी.

क्रमशः…………………………….
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08-17-2018, 02:53 PM,
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शादी सुहागरात और हनीमून--39

गतान्क से आगे…………………………………..

तभी मेने देखा कि सोनू...किचन के दरवाजे पे...और किचन के अंदर वो घुसा...गुड्डी के साथ कुछ मीठी मीठी बातें...फिर गुड्डी ने उसे पानी दिया और वो वापस...उसी ओर जहाँ रजनी थी.

हे तुम यहाँ हो और किचन में... सहसा उन्हे याद आया.

अर्रे है ना वो गुड्डी रानी... मे पॅक करते हुए बोली.

अर्रे वो बच्ची है...तुम चलो. अब हो तो गया. मे कर लूँगी, थोड़ा ही तो बचा है, अगर किचन में कुछ गड़बड़ हुआ ना तो ... मैं किचन की ओर चल दी.

वहाँ वास्तव में गड़बड़ हो गया था.

सबसे बड़ी गड़बड़ की बात ये थी कि सब ठीक चल रहा था. गुड्डी ने सब्जी बना दी थी. पूड़ी छन रही थी और दस - पंद्रह मिनट में सब काम ख़तम होने वाला था.

पर मे तो चाहती थी कि कम से कम आधे घंटे और...गुड्डी किचन में ही रहे.

मेने चारों ओर देखा फिर मुझे आइडिया आया, हे स्वीटडिश तो कुछ बनाई नही.

मिठाई रखी है काफ़ी...महाराज ने आइडिया दिया. लेकिन उसकी बात बीच में काट के मे बोली नही कुछ फ्रेश होना चाहिए. तब तक मुझे दलिया में रखी गाजर दिख गयी. मेने गुड्डी की ओर देख के कहा, हे सोनू को गाजर का हलवा बहुत पसंद है. गुड्डी एक दम से बोली मुझे भी गाजर बहुत पसंद है और मे गाजर का हलवा भी बहुत अच्छा बनाती हूँ. तब तो अब पक्का हो गया गाजर का हलवा बनाते हैं. महाराज बोला, उसमें तो बहुत टाइम लगेगा, काटने, फिर...तब तक दुलारी वहाँ आई. वो बोली अर्रे फ्रिड्ज में ढेर सारी गाजर कटी रखी है पहले मिक्स सब्जी बनाने वाली थी लेकिन बाद में प्रोग्राम बदल गया. अर्रे तुम...तुम्हारे बिना कहाँ काम चलता है ज़रा सा ले आओ ना मेरी अच्छि...मेने मस्का लगाया. थोड़ी ही देर में दुलारी महाराज और रामू ने मिल के सारी गाजर...तब तक मेने चाय चढ़ाई और उन लोगों को भी दी. सब खुश. हलवा बनाने के लिए जब मेने कढ़ाई चढ़ाई तो उन लोगों से कहा कि आप लोगों ने आज बहुत मेहनत की. थोड़ी देर आराम कर लीजिए खाने लगाने के पहले मे बुला लूँगी. हलवा हम दोनो मिल के बना लेंगें महाराज और रामू खुशी खुशी चाय ले के बाहर चले गये.

हलवा बनाने के साथ गुड्डी खुश होके गुन गुना रही थी...

हमें तुम से प्यार इतना कि हम नही जानते मगर रह नही सकते तुम्हारे बिना...

अर्रे कौन है जिसके बिना रहना मुश्किल हो रहा है, ज़रा हम भी तो जाने...उस के गाल पे चिकोटी काट के मेने पूछा.

वो बिचारी शर्मा गयी.

अच्छा चलो, शरमाओ मत . मत बताओ लेकिन ये तो पक्का लग रहा है, कोई है. है ना...चलो पर मे अपनी ओर से दो तीन टिप्स दे देती हूँ, काम आएँगें. पहली टिप तो ये की शरमाना छोड़ो....अगर दिल दिया है तो बिल भी दे दे और जल्दी. क्योंकि दिल देने वाली तो बहुत मिल जाती हैं लेकिन बिल देने वाली कम मिलती हैं. किसने सचमुच का दिल दिया या कौन डाइयलोग मार रही है कौन जानता है. लेकिन लड़कों को असल में तो बिल चाहिए और अगर जिसके लिए तुम ये गा रही हो ना उसको अगर बिल दे दिया तो पक्का विश्वास हो जाएगा उसको....कि ये चाहती है मुझको और मेरे लिए कुछ भी कर सकती है, सिर्फ़ ज़बान से नही. फिर तो वो उसका एक दम दीवाना हो जाएगा क्योंकि एक तो उसका पक्का विश्वास हो जाएगा और दूसरा एक बार में उसका मन थोड़े ही भरने वाला है. एक बार स्वाद लग गया तो फिर तो वो बार बार चक्कर काटेगा. दूसरी बात ये कि बात ये सिर्फ़ लड़कों की नही है यार, मज़ा तो हम लड़कियो को भी खूब आता है.

अब उसकी तरफ मेने देखा तो मेरी निगाह एक दम बदल गयी थी. गुलाबी कुर्ते में, छलक्ते हुए उसके उभार, वो मस्त गदराई चून्चिया मेने कस के उसकी चून्चि थाम के अपनी बात जारी रखी,

जब वो तेरी इन मतवाली चून्चियो को पकड़ के पेलेगा ना कस के एक बार में अपना तो वो मज़ा आएगा, मे बता नही सकती. पिछले 4 दिनों का जो मेरा एक्सपीरियेन्स है ना बस हर दम मन करता है कि पर दर्द तो नही होगा. वो मुझे टोक के बोली, नही थोड़ा बहुत होगा... तो सह लेना सभी सहते हैं आख़िर मेने भी सहा ही. बस ज़रा सा चिंटी काटने जैसे उस के बाद तो वो मज़ा आता है ने जब वो रगड़ता हुआ अंदर घुसता है . उईइ दर्द होता है उस का भी अलग ही मज़ा है. एक बार अंदर ले लेगी ना तो पूछून्गि रानी कि कैसे लगता है. तब तुम खुद उस के पीछे पड़ी रहेगी.

तब तक पता नही कैसे वीर्य का एक बड़ा सा कतरा, पता नही कैसे ( रजनी और अंजलि, हम लोगों की चुदाई ख़तम होते ही आ पहुँची थी. उनका सारा का सारा वीर्य मेरी चूत रानी के पेट में ही था और उन सबों के होते हुए मे पैंटी भी नही पहन पाई, इस लिए उसी कारण से एक बूँद सरकते हुए ) गुड्डी की निगाह सीधे वहीं थी. वो मुस्कराते हुए बोली,

क्यो दिन दहाड़े ही ओर क्या थोड़ी सी पेट पूजा कहीं भी कभी भी..मे भी हंस के बोली.

इस काम में न कोई जगह देखता है ना मौका. बस 20 30 मिनट का टाइम मिल जाय बस. करने वाले तो कार में, बाथ रूम में, पिक्चर हॉल में कहीं भी कर लेते हैं. एक बात ओर मौका मिल जाए तो छोड़ना नही चाहिए, फिर कब हाथ आए कौन जाने. ओर जब एक बार घर लौट जाएगी ना तो वहाँ तो इतने बंधन रहते हैं, इस लिए मेरी मन मौका मिलते ही इस सहेली की सील तुड़वा ले वरना बैठी रहेगी..

ये कह के मेने उस की सलवार के बीच, सीधे उस की चुन मुनिया पकड़ के दबा दी. उस की चूत की पुखुड़ियाँ जिस तरह से उभरी थीं, मे समझ गयी यह पक्की चुदासि है.

हल्के से मसलते हुए मे बोली, अब कब तक इसे बंद किए किए फ़िरेगी, ज़रा इससे भी चारा वारा डाल.

उसे तो अच्छा लग ही रहा था मुझे एक अलग ढंग का मज़ा आरहा था. सामने एक मोटी, लंबी लाल गाजर दिख गयी, उसे हाथ में लेके मे बोली, क्यों तुझे गाजर पसंद है ना.

वो बोली हां तो मे उसके जाँघो के बीच लगा के बोली, अर्रे मे इस मुँह के लिए पूच्छ रही हूँ. मेरा दूसरा हाथ उसके उभार पे था.

और वो शर्मा गयी. हंस के गाजर की टिप अपने होंठो के बीच लगा ली ओर कहा सच में तुम्हे तो असली में मिल रहा है, लेकिन मैने ये खूब लंबा और मोटा. उसको नापते हुए मे बोली.

वो भी चहकने लगी थी, बोली. क्यों उनका भी इतना बड़ा है.

हंस के मेने कहा, एक दम देख ये पूरे बलिश्त भर का है ओर उनका भी पूरे बित्ते भर का गाजर के चौड़े सिरे की ओर इशारा करके कहा ओर मोटा इससे भी ज़्यादा.

अब उसको दिखाते हुए मे बोली, मेरी एक सहेली है, पूरी वेजिटेरियन. उसकी सलाह तेरे काम आ सकती है. उसके हिसाब से शुरू सफेद पतले बैगान से करना चाहिए, चूत खूब फैला के वो उंगली ट्राइ करती थी लेकिन उसमें उसको वो मज़ा नही आया, कॅंडल टूट-ते टूट-ते बची, तो फिर वो सब्जियों पे. गाजर भी उस के हिसाब से अच्छि है क्योंकि एक ओर से एक दम पतली होती है, इस लिए तुम्हारी उमर की लड़कियो के लिए ठीक होती है. उसके बाद उसने ककड़ी ट्राइ किया ओर अब तो वो मोटे बैगन भी आसानी से.. और मेरी एक दूर की भाभी हैं वो तो सारी सब्जियाँ खास कर सलाद पूरी, गाजर मूली पहले अंदर लेती हैं फिर भाई साहब को खिलाती हैं.

फिर मेने वो मोटी गाजर उसकी सलवार के बीच में लगा के कस के रगाड़ि और हंस के कहा देख, मौके का फयादा ले लेना चाहिए. हम लड़कियो में यही कमज़ोरी होती है, पूरी ज़िंदगी ऐसे ही गुजर जाती है, फिर सोचती हैं वो लड़का मिला था लिफ्ट दे रहा था, इतनी बिनति कर रहा था. अगर ज़रा सा उसका मन रख लेती तो क्या बिगड़ जाता. झोका निकल जाने पे बस हाथ मलना फिर उमर भी धीरे धीरे पतंग की डोर की तरह ..ओर लड़के भी जवान छोकरियो की ओर. फिर शादी भी अगर देर से हुई तो फिर सास बच्चे के लिए हल्ला करेगी ओर उसके बाद बस बालो की तरह उमर सरक जाती है.

हां आप एक दम सही कह रही हैं. वो एकदम मेरी बात मान गयी. मकसद तो मेरा सिर्फ़ उसे अटकाने था, जब तक सोनू और रजनी का सीन चल रहा था, लेकिन लगे हाथ वो गरम भी हो गयी थी. उसे सोनू के साथ सोने के लिए मेने राज़ी भी कर लिया. उसके बाद मेने उसे अपनी चुदाई के बारे में खूब खुल के लंड बुर का ही इस्तेमाल करते हुए बताया. गुड्डी अच्छि ख़ासी गरम हो गयी.

साथ साथ मेरी उंगालियाँ उसके निपल्स - चूत को भी सलवार के उपर से रगड़ रहे थे. हलवा लगभग बनने वाला ही था. काजू किशमिश और ढेर सारे ड्राइ फ्रूट्स भी डाल दिए. तब तक महाराज और रामू भी आ गये. मेने उन से टेबल लगाने के लिए कहा और गुड्डी को बोला ज़रा मे टेबल का इंतज़ाम देख के आती हूँ, तुम इसे चलाती रहना और जब बन जाए तो उतार लेना. लेकिन मेरे आने से पहले कहीं हिलना नही. निकलने के पहले मेने उस के कान में बोला, हां एक बात और, उस समय ये ध्यान रखना की टाँगे एक दम चौड़ी, अच्छि तराहा फैली खुली रहे ना ज़रा भी सिकोड़ना मत.

मे उधर चल पड़ी जहाँ सोनू और रजनी थे. बाहर से ही मे कान लगा के खड़ी थी. कमरे के अंदर से क़िस्सी की आवाज़ें सुनाई पड़ रही थीं - मेने ध्यान से देखा, रजनी सोनू की गोद में थी और सोनू का एक हाथ सीधे उसके टीन बूब्स पे, एक उभारो के उपर से और दूसरा फ्रॉक के उपर से ही हल्के हल्के...उपर वाला हाथ सरक के कुछ ही देर मे उसकी गोरी चिकनी जांघून पे...उसकी जंघे सहम के अपने आप चिपक गयीं. पर सोनू की शैतान उंगालिया कहाँ मानने वाली, फ्रॉक हटा के वो और उपर घुस गयीं.
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08-17-2018, 02:53 PM,
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उयईीई...जिस तरह से वो चीखी, मे सॉफ समझ गयी कि उसने उसकी 'चुनमुनिया' पकड़ ली.

हे क्या करते हो, बेसबरे...डू1... वो हंस के बोली.

पता नही चला...लो अभी बताता हूँ. और उसने और कस के हाथ से फ्रॉक के अंदर रगड़ दिया.

मस्ती से रजनी का चेहरा गुलाबी हो रहा था. वो अपने उपर से कंट्रोल खो रही थी, वो बोली,

अभी...छोड़ दो ना प्लीज़..साल भर की तो बात है, फिर तो रहूंगी ही तुम्हारे पास ना...

हल्की सी पीली गुन गुणाती धूप उसके गुलाबी चेहरे पे खेल रही थी, जहाँ एक लट उसके गालों को सहलाती लटक रही थी. सोनू ने वहीं एक चुम्मि चुरा ली और मुस्करा के बोला,

और अगर तुमने वहाँ भी ना की तो...

जैसे तुम पूछोगे ही...ना - बड़े शरीफ हो जो... शिकायत से हंस के वो बोली.

जवाब में सोनू ने उसके फ्रॉक के अंदर उसके टीन बूब्स कस के भींच लिए और कहा की,

अगर मान लो तुम तीन महीने में ही वहाँ आ गयी तो...

रजनी ने ज़ोर से सिसकी भरी. लगता है उसकी उंगलियों ने फिर कुछ और - हंस के कहा,

जो एक साल के बाद होता वो कुछ दिन पहले हो जाएगा.

मे समझ गयी कि चलो अब इन दोनों की पटरी सेट हो गयी. लेकिन तीन महीने में कैसे...उस समय तो वो तेन्थ में ही जाएगी और कोचिंग तो ग्यारहवें से शुरू होती है...मे सोचती हुई डाइनिंग टेबल की ओर चल दी. रामू टेबल सेट कर रहा था. मेने सोचा ज़रा मांझली दीदी के कमरे में भी चल के देख लूँ क्या हो रहा है. वो एक होल्डल से जूझ रही थीं. उनसे बंद नही पा रहा था. मेने रामू को आवाज़ दी और उससे होल्डल बाँधने को बोला. वो बोली, खाने का क्या हॉल है कितना टाइम लगेगा. मेने बताया कि बस लग रहा है तो वो बोली कि अगर पॅक करने वाला खाना भी बन गया होता तो...वो पॅक कर लेती वारना फिर...मेने रामू को बोला कि होल्डल आके बाद जाके किचन से गुड्डी दीदी से ले लेगा.

और गुड्डी तो जब मे किचन की ओर लौटी तो... सोनू से लसी हुई थी. मे एक खंभे के पीछे से खड़ी होके देखने लगी, उसने पहले उसे गाजर के हलवे का स्वाद चखाया और पूछा,

हे अच्छा है ना. वो चटखारे ले के बोला, बहुत. फिर थोड़ा उसने अपने हाथ से गुड्डी को खिला दिया. उसक रसीले होंठो पे लगे हलवे को फिर उसने अपनी उंगली पे लगा के चाट लिया और बोला, अब और स्वादी1 हो गया. हंसते हुए गुड्डी किचन में भाग गयी. पीछे पीछे मे...

बहुत खुश लग रही थी वो. हम दोनो खाना परोसने की तैयारी में लग गये. थोड़ी देर में रजनी और अंजलि भी आ गयीं. सब ने मिल के पाँच मिनट में ही खाना टेबल पे लगा दिया.

टेबल पे भी सोनू और रजनी की चुघल जारी थी. गुड्डी मेरे साथ खाना निकालने में लगी थी.

पिक्चर के लिए पहले तो रजनी ने मना कर दिया कि उसकी 8 बजे ट्रेन है. सबने कहा, जेठानी जी ने भी लेकिन वो ना नुकुर करती रही. लेकिन जैसे ही सोनू ने एक बार कहा रजनी प्लीज़ तो वो झट से मान गयी.

खाना हो गया... ससुराल वालें हो और गाना ना हो. अंजलि बार बार संजय को साले साले कह के छेड़ रही थी और संजय भी...डाइनिंग टेबल पे भी चालू था. उसका एक हाथ अंजलि के कंधे पे...कभी उसके गोरे गोरे गाल छेड़ता कभी उभार ...अंजलि ने भी उसने उसके हाथ को हटाने की कोई कोशिश नही की लेकिन दुलारी को चढ़ा के गाली शुरू करवा दी...एक से एक सब में संजय और सोनू का नाम रीमा से जोड़ के...वो रीमा के साथ बैठे खाना खा रहे थे. और उनका भी हाथ अपनी साली के कंधे पे...संजय को चिढ़ाते हुए वो बोले, क्यों साले मेरे माल पे ही हाथ सॉफ करने का इरादा है.

संजय के एक ओर अंजलि और दूसरी ओर गुड्डी थी. अंजलि के उभार हल्के से छूते हुए और गुड्डी के गाल पे हाथ फेर के वो बोला, अर्रे जीजू मुझे मालूम नही था कि ये माल आपके हैं.

क्रमशः…………………………….
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08-17-2018, 02:54 PM,
RE: kamukta kahani शादी सुहागरात और हनीमून
शादी सुहागरात और हनीमून--40

गतान्क से आगे…………………………………..

पिक्चर की जल्दी थी. मे उपर कमरे में पहून्च के तैयार होने लगी. थोड़ी ही देर में रीमा, अंजलि और रजनी भी तैयार होके उपर आ गयीं, साथ में संजय. अंजलि ने एक कसा कसा सा टॉप और स्कर्ट पहन रखा था. मुझे उसे देख के कुछ याद आया. संजय से मेने पूछा, हे क्या हुआ मेरी प्यारी ननद के गिफ्ट का. वो बोला, अर्रे मे तो भूल ही गया था, रीमा के पास रखी है. रीमा ने निकाल के दिया एक गिफ्ट पॅक.

रजनी तो पीछे ही पड़ गयी हे खोल के दिखाओ, तो वो बोली, जो गिफ्ट लाया है वो खोले.

संजय तो तैयार ही था, झट से बोला,

खोलने के लिए मे तो हमेशा ही तैयार रहता हूँ, तुम ही नखड़े दिखाती हो.

और जब उसने खोला, दो बहुत ही सेक्सी...ब्रा और पैंटी के लेसी सेट, एक पिंक और दूसरा स्किन कलर का. अंजलि शर्मा गयी लेकिन हम सब उस के पीछे पड़ गये कि आज वो इसे पहन के चले. वो उधर अपनी' गिफ्ट ले के चेंज करने गयी और साथ में ये आए, जल्दी मचाते. देर हो रही है पिक्चर छूट जाएगी. मे बोली हम सब तैयार हैं बस अंजलि आ रही है थोड़ा चेंज करके. वो निकली तो हाफ़ कप पुश अप ब्रा में उसके छोटे छोटे उभार और उभर के सामने आ रहे थे. वो बिना समझे बोले अर्रे क्या चेंज करने गयी थी, यही टॉप स्कर्ट तो पहले भी पहन रखा था. मेने कहा अर्रे न्यू पिंच तो करो. वो बोले, लेकिन नया क्या है. रीमा ने अंजलि को चिढ़ाया, अर्रे बता दे ना जीजू इते प्यार से पूच्छ रहे हैं. चल मे ही बता देती हूँ, चड्धि बनियान, अब करिए ना जीजू न्यू पिंच .

वो बिचारे झेंप गये.

हम लोग आगे उतर रहे थे, वो मे और रीमा. पीछे से उईई की आवाज़ और रजनी की खिल खिलाहट सुनाई पड़ी. मे समझ गयी कि 'न्यू पिंच' हो गया.

नीचे उतरते ही मझली दीदी से सामना हो गया. हम लोगों को देख के वो बुद बुदाने लगीं, पहले नई दुल्हन कितने दिन बाहर नही निकलती थी, लेकिन अब...फिर ज़ोर से जेठानी जी से बोलीं अर्रे चादर वादर ओढ़ा देती नई दुल्हन को, तुम लोगों को तो कुछ नही लेकिन मुहल्ले वाले...दीदी, गुड्डी से बोली, ज़रा शॉल लेते आना. वो तीन चार शॉल ले के आ गयी.

कार में सोनू, गुड्डी रजनी, संजय और अंजलि एक साथ बैठे लेकिन रीमा ज़िद करके हम लोगों के साथ...मे, वो रीमा और मेरी जेठानी. देर हो रही थी इस लिए पहले पिक्चर हॉल में हम लोग घुस गये. ये वो ही था जिसकी अंजलि तारीफ़ कर रही थी. नया था, सॉफ और सिट्टिंग भी बड़ी कंफटेबल और अच्छी.

कोने वाले सीट पे जेठानी जी बैठ गयीं और उनके बगल में मे. मेरे बगल में वो थे और दूसरी ओर रीमा. अंजलि रीमा के साथ बैठी तो संजय भी उसके दूसरी ओर. गुड्डी उसके बगल में और फिर सोनू और रजनी. अंजलि की बात मैं एक दम मान गयी सीट वास्तव में बहुत कंफर्टेबल थी, लेग स्पेस भी और पुश बॅक भी काफ़ी थी.

जब मेरी नींद खुली तो इंटर्वल होने वाला था. इतनी अच्छि, गाढ़ी और लंबी नींद शादी के बाद पहली बार आई थी. बगल की सीट पे मेने देखा तो जेठानी जी की भी नाक बज रही थी. मेने कोहनी से टोक के उन्हे उठाया और मुस्करा के बोली,

दीदी, आप भी... उन्होने अपने को ठीक किया और हंस के बोली,

और क्या तुम सोचती हो सिर्फ़ तुम्ही...अर्रे तुम्हारे जेठ जी कौन से बूढ़े हो गये हैं. इनसे पाँच साल ही तो बड़े हैं. रात में सोने का चैन नही हैं इस घर में.

लगता है फॅमिली ट्रडीशन है... मे भी हंस के धीमे से बोली.

एक दम घर चल के सासू जी से पूछना पड़ेगा. वो बोली.

तब तक इंटर्वल हो गया. मेरी जेठानी ने गुड्डी से बुला के कुछ कहा और हम तीनों लॅडीस टाय्लेट में चल दिए. बाकी लोग भी बाहर निकल रहे थे. मे पहले ही निकल आई तो देखा कि रजनी और सोनू हंस हंस के कोल्ड ड्रिंक लिए हुए कुछ बातें कर रहे थे.

सोनू ने बोला,

लड़कियो को कॉक कोला पसंद होता है और ... उसकी बात काट के वो बोली,

लड़कों को पूसी...आइ मीन पेप्सी...लेकिन मुझे पेप्सी ही पसंद है इस लिए तुम्हारा अंदाज ग़लत है. वो मुस्करा के बोला नही मुझे मालूम है कि तुम्हे पेप्सी ही पसंद होगा इस लिए देख मे तेरे लिए पेप्सी ही लाया हूँ. और बिना उसके पूच्छे उसके सवाल का जवाब देता वो बोला,

इसालिए की पेप्सी के बहाने तुम कहना चाहती हो...प्लीज़ इनसर्ट पेनिस स्लोली इनसाइड.

वो हँसते हुए उसे मारने के लिए बढ़ी तो वो पीछे हट गया.

तब तक गुड्डी और जेठानी जी भी निकल आईं. मेने सोनू से कहा कि हम लोगों के लिए भी कोल्ड ड्रिंक लाए. रजनी ने मुस्करा के पूछा क्यों भाभी, कॉक या पेप्सी...उस के कंधे पे हाथ रख के उसकी मुस्कराती आँखो में झाँक उसका मतलब समझते मे हँसते हुए बोली, मुझे दोनो पसंद हैं.

सोनू गुड्डी को ले के स्टॉल पे चला गया.

अंजलि, संजय को दिखाते हुए एक खूब मोटा सा क्रीम रोल चाट रही थी, और संजय भी जहाँ उसके होंठ लगे थे वहीं पे उसे ले के वहाँ किस करते हुए चाटने लगा.

हॉल में घुसते हुए मेने जेठानी जी से कहा दीदी हल्की सी सर्दी लग रही है वो शॉल ...

एक शॉल मेने गुड्डी को दे दिया, जो उस के साथ सोनू और रजनी ने भी ओढ़ लिया. अंजलि बोली, भाभी एक शॉल मुझे भी. उसे दे के एक शॉल मेने खुद ओढ़ लिया और उन्हे और रीमा को भी ओढ़ा दिया फिर तो पिक्चर शुरू होने के साथ...और अब तो साली की आध भी था. मेरा आँचल ढालाक गया और उन का एक एक हाथ पहले तो मेरे ब्लाउस के उपर से और फिर ..बटन खुलने में देरी कहाँ लगती है...दूसरा हाथ ऑफ कोर्स उनकी साली के हवाले था. बीच में मेने गर्दन उठा के देखा तो संजय भी अंजलि के साथ...और सोनू के तो दोनो हाथो में लड्डू थे.

बीच बीच में मे पिक्चर भी देख लेती थी. डाडा, पिक्चर थी, बिंदिया गोस्वामी की. रे-रन था.

दीदी दुबारा सो गयी थीं शायद आज रात की तैयारी में.

जब हम लौटे तो सभी खूब मस्ती के मूड में थे, खास तौर से रजनी. वो एक बड़ा सा लॉलिपोप लेके शिश्न की तरह मस्ती से चाट रही थी., कभी सोनू को उसे चाटती तो कभी खुद ...पीछे से सोनू को पकड़ के मस्ती में गुन गुना रही थी एक दम मधुरी दीक्षित स्टाइल में... एक दो तीन चार...गिन गिन के.

सब लोग उन दोनों को ही देख रहे थे.

हम लोगों के लौटने के थोड़ी देर बाद ही मांझली ननद जी चली गयीं . उनकी विदाई के बाद उपर अपने कमरे में जाने के पहले किसी काम से मे पिच्छवाड़े की ओर गयी तो...उसी जगह जहाँ सुबह सोनू और गुड्डी की बातें मेने सुनी थीं...हल्की हल्की आवाज़ें आ रहीं थीं. मेने देखा तो गुड्डी नाराज़ लग रही थी और सोनू उसे मनाने में लगा हुआ था. वो गुस्से में बोल रही थी,

जाओ जाओ...उस चिकनी के पास जाओ जिससे चक्कर चला रहे हो...

अर्रे तू भी चक्कर में पड़ गयी...ये तो मेरा मास्टर प्लान था. उस के गाल छू के वो बोला.

चक्कर कौन सा चक्कर ...मे...तुम पक्के बेवफा हो. वो हाथ झटकते बोली.

अर्रे नही मेरी जान...वो तो अभी थोड़ी देर में चली जाएगी. मेरा ये चक्कर है कि सब लोग देखे...ये मानेंगे कि मेरा और रजनी का कोई चक्कर है. देख तू भी चक्कर में पड़ गयी ने. तो हम लोगों पे कोई भी शक नही करेगा, फिर मौका मिलते ही...समझी मेरी जान.
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08-17-2018, 02:54 PM,
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ये बोल के उसने उसके गुस्से से लाल गालों पे एक चुम्मि ले ली और हाथ सीधे उसके गदराए गुदाज उभारो पे... कुछ चुम्मि और मसलन का असर और कुछ बातों का...वो मुस्करा के बोली,

तू बड़ा ही चालू है...मान गयी मे. हाथ हटाओ ना...इतने कस कस के पिक्चर हॉल में दबाया था, अभी तक दर्द कर रहा है. वो उसी तरह दबाते सहलाते बोला,

क्या दबाया था, क्या दर्द कर रहा है बोलो न मेरी जान...

ये... उसने खुद सोनू का दूसरा हाथ भी अपनी छाती पे लगाते बोला.

फिर क्या था वो कस कस के उसकी गुदज, रसीली छूनचियाँ मसलने लगा और पूछा,

हे दे ना... और गुड्डी का हाथ पकड़ के अपनी जीन्स में टाइट बुल्ज़ पे लगा के कहा,

हे इसे पकडो ना, बेताब हो रहा है कितना. वो बिना हाथ हटाए बोली,

मेने मना किया है क्या देने को...तुम जब चाहो... और फिर हल्के से ' वहाँ ' दबा के बोली,

तुम भी बेसबरे हो और तुम्हारा ये भी..

मेरी जान तुम चीज़ ही ऐसी हो... कस के भींच के सोनू बोला. मे वहाँ से मुस्कराते हुए उपर अपने कमरे में चल दी ये सोचते हुए, कि सोनू भी...

कमरा बंद करके मेने सारी उतार दी. सिर्फ़ ब्लाउस पेटिकोट में, मे सारी तह कर के पलंग पे रख रही थी और झोके हुए जब मेने अपने उभारो को देखा तो जो पिक्चर हम लोगों ने देखी थी, उस का गाने गुन गुनाने लगी,

हमने माना हम पर साजन जोबनबा भरपूर है, ये तो महिमा..

तब तक पीछे से उन्होने आ के पकड़ लिया. मुझे नही मालूम था कि वो पहले से ही कमरे में हैं और बाथ रूम गये हुए हैं. मे कसमसाती रही पर...उनकी बाँहो से छूटने. कस के मेरे दोनो, चोली से छलक्ते जोबन दबाते वो बोले,

ज़रा हमें भी तो चखाओ इन भरपूर जोबनों का रस... झुकी हुई मे बोली,

क्यों पिक्चर हॉल में दो दो जोबन का रस लूट के मन नही भरा हो तो अंजलि को बुला दूं.'

अर्रे वो तो मे दोनों बहनों का ज़रा कंपेर कर रहा था , पिक्चर हॉल में. वो बोले.

किसका ज़्यादा रसीला लगा... मेने छेड़ा.

दोनों के अलग अलग मज्जे थे. निपल्स खींचते वो बोले.

बड़े डिप्लोमॅटिक हैं वो मुझे पता चल गया. ब्लाउस तो मेरा कब का फर्श पे था, ब्रा भी उन्होने खोल दी और पेटिकोट उठा के सीधे कमर तक... उनकी शर्ट भी नीचे मेरे ब्लाउस के उपर.

जैसे ही उनका उत्तेजित उत्थित लिंग वहाँ लगा,

हे क्या करते हो... चिहुनक के मे बोली. कोई आ जाएगा.

कोई नही आएगा... मेरी गीली पुट्टीओं पे सुपाडा रगड़ते वो बोले.

मेने टाँगे कस के फैला लीं.

वॅसलीन तो हमेशा तकिये के नीचे ही रहती थी.

फिर क्या था, गछगछ गछगछ...दो चार धक्को में लंड अंदर था.

इस तरह से चोद्ने में उन्हे बहुत मज़ा आता था. पूरी ताक़त से वो...कच कचा के मेरी भारी भारी रसीली चून्चिया दबाते हुए पेल रहे थे और मे सिसक रही थी चुद रही थी. कुछ ही देर में उनके धक्कों के ज़ोर से, मे पलंग पे गिर सी गयी. पर उन पे कोई फरक नही था. वो पीछे से उसी रफतार से, कभी मेरी चून्चि मसलते, कभी मस्त चुतड दबा के...पूरा सुपाडे तक लंड बाहर निकाल के, सतसट सतसट...मस्ती से मेरी भी हालत खराब थी. आँखे मुंदी जा रही थीं, जोबन कड़े हो के पत्थर के हो गये थे और चूत भी थराथरा रही थी, लंड को भींच रही थी.

मेरे गोरे भारी चुतड सहलाते सहलाते, उनकी उंगली चुतड के बीच की दरार पे...रगड़ने लगी.

हे ये क्या...वहाँ नही... मे चिहुनकि. जवाब उनकी उंगली ने दिया.

वो सीधे अब ...गांद के छेद पे...हल्के से दबाव के साथ रगड़ने लगी.

मे समझ गयी कि बन्नो आज भले ही तू इसे बचा ले हनिमून में तो ये बिना फाडे छोड़ने वाला नही.

मुझे भी एक नये तरह का मज़ा मिल रहा था. कस के चुतड से उनकी ओर धक्का देते हुए मेने लंड को ज़ोर से भींचा. फिर तो उन्होने कस कस के रगड़ रगड़ के, मुझे उसी तरीके से झुकाए हुए इस तरह चोदा की जल्द ही मे झाड़ गई और फिर मेरे साथ वो भी.

लंड उनका अभी भी सेमी एरेक्ट था, सफेद गाढ़े वीर्य से लिपटा, लथपथ. बुर से निकाल के उन्होने उसे छेड़ते हुए मेरे गांद के छेद पे रगड़ना शुरू कर दिया.

उन्हे हटा के मैं सारी पहन के नीचे की ओर आई. वो कमरे में ही आराम कर रहे थे. दरवाजे के पास से रुक के मे उन्हे चिढ़ाते हुए बोली,

हे अगर पीछे वाले का इतना मन कर रहा हो तो अंजलि को भेजू, बहुत मस्त है उसका पिछवाड़ा.

रीमा को भेज देना, उसके चुतड बहुत सेक्सी हैं, जब चलती है तो देख के खड़ा हो जाता है. वो हंस के बोले.

क्रमशः…………………………….
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08-17-2018, 02:54 PM,
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शादी सुहागरात और हनीमून--41end

गतान्क से आगे…………………………………..

कमरे के बाहर मुझे नीचे रजनी की मम्मी मिल गयीं. मे समझ गयी कि सोनू ने न सिर्फ़ रजनी को बल्कि उसकी मम्मी को भी पटा लिया है. वो तारीफ के पुल बाँधे जा रही थीं. उन्ही से मुझे पता चला कि सोनू ने ये कहा है कि वो लोग रजनी को 9 वें बाद ही 15-20 दिन के लिए भेज दें, वो डेनो ले लेगी कोचैंग का. वैसे भी सम्मर वोकेशन में करेगी क्या. और सोनू के रहते उन लोगों को कोई परेशानी वहाँ नही होने वाली. वो रहने खाने, हर चीज़ का इताज़ाम कर देगा. फिर मेडिकल का एंट्रेन्स जितनी जल्दी रजनी तैयारी शुरू कर दे. मेने भी उनकी हामी में हमीं भरी और उस कमरे की ओर मूडी जिधर से इन लोगों की आवाज़ें आ रही थीं.

मे कमरे के बाहर एक पल के लिए दरवाजे के पास रुक गयी और देखने लगी,

. अंदर संजय से चिपकी अंजलि, रीमा, सोनू और उस के अगल बगल गुड्डी और रजनी...पासिंग दा पार्सल हो रहा था. अंजलि को नॉनवेज जोक या लिमरिक सुनाने था. वो बोली, जोक तो नही ,

मे एक सच्ची बताती हूँ और बोली कि कल छोटी भाभी ( यानी मे), अपनी सासू जी का पैर छू रहीं थी. पैर छूते हुए उनकी सासू जी की सारी कुछ उपर हट गयी, तो भाभी ने उस ओर देखते हुए हाथ जोड़ लिए. सब लोगों ने पूछा बहू ये किसे प्रणाम कर रही हो तो वो बोली, अपने पति की जन्म भूमि और ससुर की कर्म भूमि को.

सब लोग हँसने लगे. घटना बिल्कुल झूठी थी, लेकिन मे भी मुश्किल से अपनी हँसी दबा पाई. रीमा बोली, अर्रे ये कोई नॉनवेज जोक थोड़े ही हुआ तो संजय बोला चल, मे सुना देता हूँ उस की ओर से. रीमा ने फिर छेड़ा, अर्रे भैया अभी से...भाभी की ओर से. अंजलि ने रीमा को खींचते हुए कहा और तू भी तो अभी से ननद की तरह झगड़ रही है. दोनों को रोक के संजय ने सुनाया,

कॉक-अ-डूडल-डू

आइ’म टेकिंग प्रेमा फॉर ए स्क्रू.

आइ होप शी’स गोयिंग टू डू दा डू

ऑर एल्स आइ’ल्ल हॅव टू वांक दा टू-टू

टिल दा डॅम थिंग ईज़ थ्रू

रीमा बोली, भैया, प्रेमा की जगह अंजलि बोल दो तो सब सही हो जाएगा. सोनू बोला अर्रे मे एक हिन्दी में सुनाता हूँ लेकिन तुम लोग बुरा मत मानना.

सुनाओ ना यहाँ हामी लोग तो हैं. रजनी बोली. गुड्डी की ओर देख के वो धीमी आवाज़ में चालू हो गया,

कोई कहे वो नारी उदासी, कोई कहे वो नारी चुदासि,

लंड प्रचंड की ड्रिल1 पड़ी जब, छा गयी घन घोर घटायें खंभ सा लंड घुसा दियो तो दूज से हो गयी पूरणमासी.

अब सारी लड़कियाँ उसके पीछे, ढपाधप धौल जमाने लगीं हे कैसी गंदी बातें करते हो...लेकिन गुड्डी उसे मार भी रही थी मुस्करा भी रही थी. तब तक मे अंदर कमरे में पहुँच गयी. सब चुप हो गये तो मे सबके साथ बैठ के बोली, हे चालू रहो मे भी खेलूँगी. सब तुरंत मान गये लेकिन खेल कुछ आगे बढ़ता कि रजनी की मम्मी आ गयीं. हे ट्रेन का समय हो गया है लेकिन ड्राइवर नही मिल रहा है. वो बोली और रजनी को चलने के लिए कहा. मम्मी सोनू हैं ना, पिक्चर तो यही ड्राइव कर के ले गये थे. मे भी बोली,

हे सोनू छोड़ आओ ना उन लोगों को.

चलने के पहले मे देख रही थी रजनी ने हल्के से सोनू का हाथ पकड़ के दबा दिया. सोनू ने कान में कहा बस तीन महीने की बात है, मई में तो मिलेंगे ना.

बाहर जब सब लोग उन लोगों को छोड़ने खड़े थे, मेने गुड्डी से कहा हे तू भी बैठ जा और लौटते हुए कुछ समान ही लेती आना मे तुझे लिस्ट दे देती हूँ. वो खुशी खुशी सोनू की बगल में जा के बैठ गयी. पीछे रजनी और उसकी मम्मी बैठीं थीं. जब वो चलने लगे तो मेने फिर रोक लिया और अंजलि से कहा हे तुम रीमा को कोई किताब देने की बात कर रही थी ना... तो वो बोली भाभी वो तो घर पे है और वहाँ तो ताला बंद है, सब लोग तो यहीं हैं. मे बोली, अर्रे यही तो मे कह रही थी, चाभी दे दे. गुड्डी जा रही है. लौटते हुए लेती आएगी उससे चाभी ले के मेने गुड्डी को कार में थमा दिया. वो मेरा मतलब समझ गयी और उसके चेहरे से खुशी छलक रही थी. समझ तो सोनू भी गया था लेकिन वो बड़बड़ा रहा था. गुड्डी से मे कान में बोली,

हे थोड़ी सी पेट पूजा कहीं भी कभी भी.

एक दम वो हँसी.

उनके जाने के बाद वो अपनी साली को आइस क्रीम खिलाने बाजार चले गये और मे कमरे में चल के पॅकिंग में लग गयी. कल दोपहर को ही हनिमून पे जाना था लेकिन पॅकिंग बिल्कुल भी नही हुई थी. उनकी बात को याद कर मे मुस्कराने लगे. मेने जब उनसे पूछा क्या समान उनका पॅक करूँ तो वो मुझे पकड़ के बोले कि बस ये वाला, उसके अलावा कुछ भी नही ले चलोगि तो भी चलेगा. फिर उन्होने अपने 'सीक्रेट कपबोर्ड' की ओर इशारा कर के कहा, मुझे क्या पसंद है वो तो तुम्हे मालूम ही है. सबसे पहले मेने वो खोल के, किताबें, सेक्स पिक्चर्स वालीं, कुछ मस्त राम की कहानियों की,

वीडियो कॅसेट'स, और फिर उनका फोटोग्रफी के समान, फिर कुछ वूलेन्स...सरीया दो तीन ही रखीं.

मे अपने थोड़े वेस्टर्न टाइप ड्रेस ले जाने चाहती थी लेकिन मे वो ले ही नही आई थीं. हां, नाइटी सेक्सी लाइनाये जो भी भाभी ने खरीदवाई थी...मे पॅकिंग कर ही रही थी कि, अंजलि आगाई और पीछे पीछे संजय भी. मेने बाकी का काम उस के हवाले कर दिया और नीचे की ओर चल दी.

दरवाजे के पास रुक के मेने उससे कहा हे, तू काम भी कर और आराम भी...मे दरवाजा बाहर से बंद कर देती हूँ. बाहर से दरवाजा बंद कर मे नीचे चली आई.

कैसे गुड्डे गुड्डी खेलते, गुड्डे गुड़िया से बच्चे, खुद गुड्डे गुड़िया बन जाते हैं और कुछ दिनों में उनके भी गुड्डे गुड़िया हो जाते हैं.

किचन में दीदी मेरी जेठानी, अकेली थीं घर लगभग खाली सा हो गया था. सिर्फ़ अंजलि के घर के लोग थे और गुड्डी...वो लोग भी कल चले जाने वाले थे. गुड्डी तो सोनू के साथ...सोच के ही मे मुस्करा पड़ी. दीदी बोली क्यों मुस्करा रही हो तो मेने बताया कि मे संजय और अंजलि को उपर अपने कमरे में बंद कर आई हूँ. वो भी मुस्करा पड़ीं. लेकिन बेचारी अंजलि...रीमा जल्द ही लौट आई और उसे मेरे कमरे से कुछ समान लेना था इस लिए उस ने जाके दरवाजा खोल दिया.
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08-17-2018, 02:54 PM,
RE: kamukta kahani शादी सुहागरात और हनीमून
खाना जल्द ही लग गया था लेकिन सोनू और गुड्डी का हम इंतजार कर रहे थे. वो लोग 2 घंटे बाद आए. जब बिना पूच्छे ही वो बोलने लगी, गाड़ी काफ़ी लेट हो गयी थी, उन लोगों को छोड़े बिना कैसे आते, फिर अपने समान की लिस्ट भी पकड़ा दी थी, किताब लेने में तो 10 मिनट भी नही लगा होगा. तो मे समझ गयी कि ...वो हो गया जो ...होना था.

रीमा उपर कमरे में...बात करते करते उसे देर हो गयी और वो कहने लगी कि मे यही सो जाती हूँ.

और वो भी ना उसे चिढ़ाने लगे की हां हां क्यों नही सो जाओ इतनी चौड़ी पलंग है लेकिन इस कमरे का एक रूल है कि तुम्हे नाइटी पहन के सोना होगा और वो भी बिना चड्धि बनियान के.

वो भी ...कहाँ पीछे हटने वाली थी तुरंत तैयार हो गयी. अब मे उसे समझाती...फिर वो भी घाटा तो उन्हे ही होगा. मे बोली अर्रे जेठानी जी बुरा मान जाएँगी. गुड्डी और अंजलि के साथ तुम्हारे सोने का इताज़ाम किया है उन्होने. जब किसी तरह उसे मना के मे ले गयी तो पता चला कि सीढ़ी का दरवाजा ही बंद था. मे समझ गयी कि किसकी शरारात होगी...अंजलि की.

लौट के हम आए तो ब्लॅक नेग्लिजी में वो बहुत सेक्सी लग रही थी हां बिना ब्रा पैंटी वाली शर्त ना उसने मानी ना मेने लेकिन परेशान उन्हे ही होना पड़ा. ( मेने देखा है कि ज़यादातर मर्द ..बातें चाहे जितनी बोल्ड कर लें लेकिन असली मौके पे...हिम्मत नही दिखा पाते. शराफत आड़े आजाति है.) मेने भी बोला और रीमा ने भी ...लेकिन वो सोफे पे लेट गये.

मे लाख कहती रही लेकिन वो नही माना, लेकिन वो तो जब रीमा ने धमकी दी कि वो उनके साथ सोफे पे आके सो जाएगी तो वो बिस्तर पे आए, लेकिन फिर भी रीमा की ओर नही, बीच में मे और वो किनारे एक दम लगता था कि गिर जाएँगे. और रीमा और, चिढ़ाते चिढ़ाते... डरते हैं जीजा जी साली से, क्यों जीजू मे इतनी बुरी तो नही. ये तो नही है कि दोनो बहने मिल के दबा देंगी. मेने ज़ोर से डाँट के चुप कराया तब जा के सोई वो. मेने उनसे कहा कि नाइट लॅंप भी बुझा दीजिए,

इससे ज़रा सी भी लाइट हो तो नींद नही आती. उन्होने फुट लाइट भी बुझा दी.

तुरंत ही वो हल्के हल्के खर्राटे लेने लगी.

मे समझ गयी कि कितना नाटक कर रही है वो क्योंकि मे इतने दिन उस के पास सोई थी और अच्छि तरह जानती थी कि वो ज़रा सा भी खर्राटे नही लेती. पर जिसके लिए नाटक था उसे तो विश्वास हो ही गया. वो एक दम मेरे पास चिपक आए. मेने उनके कान में पूछा उपवास करना है क्या. उनका तो पता नही लेकिन मेरा तो मन बहुत कर रहा था, उनकी बाहों में खोने का. वो नही बोले लेकिन मेरे हाथो को तो पता लग गया था. जब मेने उनके शॉर्ट के उपर हाथ लगाया तो ' वो अच्छि तरह तन्नाया था. मेने कस के 'उसे' दबा दिया और बोली, क्यों मन कर रहा है क्या. वो चुप रहे.

मेने शॉर्ट के अंदर हाथ डाल के उसे पकड़ लिया और कस के मुठियाने लगी. उनका तो पता नही लेकिन मे किसी 'उपवास' के मूड में नही थी. मेने फिर जीभ उनके कान में सहलाते पूछा,

क्यों मन कर रहा है क्या.

वो बोले, मन तो कर रहा है लेकिन कैसे वो जाग जाएगी तो.

एक झटके में मेने चमड़ी खिच कर उनका मोटा लाल सूपड़ा खोल दिया और उसे सहलाते बोली,

मेरे उपर छोड़ दो, वो घोड़े बेच के सो रही है. मे जानती हूँ उसे, एक बार सो गयी तो भूकंप भी आजाए तो वो जगने वाली नही. साइड से कर लेते हैं ना, बस तुम हल्के से करना, शोर मत मचाना.

मेरी पैंटी सरक गयी और उनकी शॉर्ट, फिर मेने खुद अपनी जंघे अच्छि तरह खोल के टाँग उन के उपर रख दी. फिर क्या था थोड़ी देर में ही उनका बेताब लंड मेरी प्यासी चूत में, वो मेरी कमर पकड़ के हल्के हल्के धक्के लगा रहे थे. कुछ देर तक तो उन्होने इस तरह किया लेकिन जिस तरह की चुदाई के हम दोनों आदि थे, जम के मज़ा नही आरहा था. मेने उन्हे इशारा किया कि मे पूरी तरह से रज़ाई उपर ले लेती हूँ और वो सीधे से उपर आ जाएँ. कुछ देर में हम दोनों के पूरे कपड़े फर्श पे थे और वो पूरी तरह से ताक़त के साथ गपगाप गपगाप, सूपड़ा बाहर निकाल के फिर सीधे बच्चेदानि तक...बहुत मज़ा आरहा था.

जिस तरह से उस के ख़र्राटों की आवाज़ें बढ़ गयी थी, मुझे अच्छि तरह पता चल गया था कि वो जाग भी रही है और टुकूर टुकूर देख भी रही होगी. लेकिन मे उस समय मस्ती में इतनी चूर थी कि अगर वो जाग के बगल में बैठ के भी देख रही होती तो मेरी चुदाई नही रुकने वाली थी.

वो कस कस के मेरी चून्चिया दबाते क्लिट को छेड़ते. आधे घंटे से ज़्यादा चोदने के बाद ही वो झाडे.

उसके बाद भी नींद न इनको आराही थी ना मुझे. कुछ देर बाद मे बाथ रूम गयी तो दबे पाँव पीछे पीछे ये भी और फिर वहाँ भी...मुझे बाथ टब के सहारे झुका के, अपने फॅवुरेट पोज़िशन में. और इस समय बिना किसी हिचक के मन भर के उन्होने चोदा और, मेने चुदवाया. लेकिन लौटने पे फिर वही मुझे रीमा के बगल में... और खुद किनारे पे. इतने दिनों के रात जगे से इन्हे भी अब नींद लग गयी और मुझे भी. एक बार मेरी नींद खुली. मैं पानी पीने के लिए उठी तो...अब मे किनारे पे थी.

हल्के से सरका के मेने उन्हे रीमा की ओर कर दिया. सुबह जब मेरी नींद खुली तो वो रीमा को पकड़े सो रहे थे और रीमा भी. चाइ बना के मे लाई तो पहले मेने रीमा को जगाया और सुबह सुबह उसने अपने जीजा जी के साथ उनके एक बलिश्त के ...(सुबह के समय उनका हमेशा खड़ा रहता है). झेंप गयी बेचारी. और वो भी जब उनके जगाने पे मेने उन्हे बताया. दिन भर दोनों को चिढ़ाती रही मे.

दोपहर को रीमा, संजय और सोनू मेरे मायके के लिए वापस चल दिए और उसके कुछ देर बाद हम दोनों टॅक्सी से बनारस के लिए. वहाँ से रात में मुघल सराय से कालका एक्सप्रेस पकड़नी थी, शिमला के लिए. तो इस तरह ख़तम होती है कहानी सुहाग रात के दिनों की. और उसके बाद हनिमून जो ट्रेन से ही शुरू हो गया...फिर शिमला और . दोस्तो ये कहानी यही ख़तम हो जाती है अगर इससे आगे क्यूट रानी ने अगर लिखी भी है तो मुझे मिली नही दोस्तो फिर मिलेंगे एक ओर नई कहानी के साथ तब तक के लिए अलविदा आपका दोस्त राज शर्मा

समाप्त
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