Kamukta kahani हरामी साहूकार
03-19-2019, 12:30 PM,
RE: Kamukta kahani हरामी साहूकार
भले ही आज पिंकी को काफ़ी दर्द का सामना करना पड़ा था,
उसका शरीर टूट सा चुका था पर जो मज़ा उसे चुदाई करवाकर मिला था, उसमे वो इस दर्द को भूल ही चुकी थी, और उसे पता भी था की ये दर्द तो सिर्फ पहली बार ही होता है, अब तो सिर्फ मजा ही मजा मिलेगा , इसलिए वो उस दर्द को भुलाकर सिर्फ़ मज़े में डूबी हुई, नंगी ही लाला से लिपटी उस जंगल में पड़ी हुई थी...

लाला भी एक तरफ लुढ़क कर अपनी साँसे काबू में लाने लगा....
अभी तो पार्टी शुरू हुई थी...
अभी तो एक राउंड और लगाना था...
और इसके लिए निशि को मदद के लिए बुलाने की आवश्यकता थी...

जंगल में सही मायनो में मंगल हो रहा था आज..

*************
अब आगे
*************

गहरी साँसे लेते हुए लाला ने निशि की तरफ देखा, जो अपनी बुर को बुरी तरह से मसलती हुई लाला के ढीले लंड को देख रही थी जैसे उसे खा ही जाएगी....
लाला भी उसकी चूत का दर्द समझ रहा था पर वो ये भी जानता था की इस वक़्त अगर उसने पिंकी को ऐसे ही छोड़ दिया तो वो दुबारा उसके नीचे आने वाली नही है, लाला का यही सिद्धांत रहा था शुरू से की एक चूत को इतना संतुष्ट कर दो की अगली बार वो खुद ही उसके लंड को ढूँढते-2 उसकी दुकान तक पहुँच जाए और यही राज था लाला के लंड की महिमा का..

लाला उसे इस वक़्त पूरे मज़े तो नही पर थोड़े तो दे ही सकता था, यही सोचकर उसने इशारा करके निशि को अपने पास आने को कहा...
वो तो कब से इसी पल का इंतजार कर रही थी, लाला की उंगली का इशारा पाते ही वो हिरनी की तरह उछलती हुई उनके सामने आकर बैठ गयी...

लाला : "अरे , तेरी सहेली की सील टूटी है आज और तू एक कोने में बैठी है...चल जाकर वहां से थोड़ा पानी और कपड़ा लेआ और इसकी चूत सॉफ कर...''

एक पल के लिए तो उसका चेहरा ही लटक गया, कहाँ तो उसे लाला का लंड अपनी चूत में जाता हुआ दिख रहा था और कहाँ लाला उससे पिंकी की चूत सॉफ करवा रहा है..

पर मना वो कर नही सकती थी, इसलिए कोने में पड़े एक डिब्बे में पानी भरकर वो पिंकी के पास आई और कपड़े से उसकी चूत को अच्छी तरह सॉफ करने लगी...

निशि देख पा रही थी की लाला ने कितना कोहराम मचाया है उसकी सहेली की चूत में , पहले एक कली की तरह थी वो चूत , जिसकी दो पंखुड़िया एक दूसरे से चिपकी रहती थी, उन्हे अपनी उंगलियो से अलग करके अपनी जीभ को बीच में डालना पड़ता था निशि को, पर अब आलम ये था की लाला ने उन पंखुड़ियो को फैलाकर इतना चौड़ा कर दिया था की अंदर का लाल दरवाजा उसे ऐसे ही दिखाई दे रहा था...

निशि ने उस लाला की लेस से लिबड़ी चूत को पानी से अच्छी तरह से सॉफ किया और कपड़े से सॉफ करके उसे चमका डाला..



पिंकी को भी उसके हाथ का स्पर्श गुदगुदा सा रहा था, निशि ने लाला को देखा तो लाला ने उसे आँखो का इशारा करके आगे बढ़ने को कहा, बस फिर क्या था, वो अपनी लपलपाती जीभ लेकर किसी नागिन की तरह उसकी चूत पर कूद पड़ी...

उसके इस हमले से पिंकी भी चोंक गयी,
क्योंकि उसे तो लाला ने सिर्फ़ चूत सॉफ करने को कहा था, और वो भी पानी से ये तो अपनी जीभ से सॉफ करने लग गयी...

पर वो कुछ बोल ही नही पाई, क्योंकि निशि की अनुभवी जीभ और होंठो ने उसकी सॉफ सुथरी और ताज़ा चुदी चूत पर बुरी तरह से कब्जा जमा लिया था और वो उसे ऐसे चाट रही थी जैसे फ्रूट सलाद की कटोरी उसके सामने रख दी हो लाला ने...



और सच में निशि को फ़र्क सॉफ महसूस हो रहा था उसकी चूत का...
पहले वो उसकी चूत में जीभ डालती थी तो वो अंदर फँस सी जाती थी, अब ऐसा नही हो रहा था...
शायद ताज़ा-2 लंड अंदर गया था कुछ देर पहले, इसलिए वो गेप बन गया था..

निशि की जीभ उसकी रेशमी चूत में मखमल की भाँति तेरने लगी....
लाला ने जो चोट पिंकी की अंदरूनी दीवारों पर अपने लंड से पहुँचाई थी, निशि की जीभ इस वक़्त उसपर दवा जैसा काम कर रही थी...
इसलिए पिंकी को भी उसकी गर्म जीभ अंदर लेने में मज़ा आने लगा और वो उसके सिर को अपनी जाँघो के अंदर दबा कर हमेशा की तरह बोली

''आआआआआआआआअहह मेरी ज़ाआाआआआअँन ...... एक तू ही है जो मुझे अंदर तक समझती है...''

जवाब में निशि मुस्कुरा दी..

पर अपनी जीभ नही निकाली उसने पिंकी की चूत से..


वो उसे अपनी जीभ से ऐसे कुरेद रही थी की शायद लाला के लंड से निकले पानी का कोई मोती अब भी उसे अंदर मिल जाए...

लाला भी उन दोनो की इस जुगलबंदी को देखकर अपने लंड को पानी से सॉफ करके चमकाने में लगा था..

निशि ने अपने कपड़े उतार दिए थे क्योंकि चूत चाटते हुए उसे अपनी चूत और चुचि भी तो मसलनी थी..



कुछ देर बाद जब लाला को लगा की पिंकी अच्छी तरह से उत्तेजित हो चुकी है तो उसने निशि को वहीं रोक दिया

''बस कर निशि ....अब तू साइड में हो जा...बाकी मुझपर छोड़ दे...''

बेचारी का मन तो नही कर रहा था पर लाला से वो बहस नही कर सकती थी...

पिंकी की चूत भी पुलकित हो उठी ये सोचकर की अब एक बार फिर से लाला उसकी चुदाई करेगा...

पर इस बार उसने चुदाई की कमान अपने हाथ में लेने का निश्चय कर लिया था क्योंकि वो जानती थी की एक मर्द को असली खुशी तभी मिलती है जब सामने से भरपूर मज़ा देने वाली पार्ट्नर मिले..

पिंकी : "लाला, अब आप यहाँ लेट जाओ, अब मैं आपको जन्नत की सैर करवाउंगी ...''

एक लड़की जब सामने से मर्द को ऐसे बोले तो उसे पता होता है की आज उसकी लाइफ में कितना रोमांच आने वाला है..

लाला तो ये सुनते ही खुश हो गया और अपनी टांगे चौड़ी करके ज़मीन पर लगाए बिस्तर पर लेट गया..

पिंकी सामने आकर खड़ी हो गयी और बड़े ही सैक्सी तरीके से चलती हुई उसके शरीर के दोनो तरफ टांगे करके वो धीरे-2 उसके चेहरे पर पहुँच गयी...
लाला को लगा था की वो उसके लंड को चूसेगी पर उसका इरादा कुछ और ही था...

वो अपनी चूत को लाला के चेहरे के ठीक उपर तक ले आई, निशि के चूसने से उसकी चूत पहले ही पनिया रही थी, उपर से लाला के साथ कुछ अलग करने की सोच ने उसकी चूत के रस को टपकने पर मजबूर कर दिया और एक खट्टी और करारी बूँद सीधा जाकर लाला के खुले मुँह में जा गिरी, जिसे वो एक चटोरे की तरह चाट गया...

पिंकी ने जब ये देखा तो वो खिलखिलाकर हंस दी, क्योंकि इस वक़्त वो लाला को अपनी चूत का पानी इस तरह से पीला कर अपने आपको किसी देश की राजकुमारी से कम नही समझ रही थी..

उसने लाला को खुश करने के लिए अपनी चूत को नींबू की तरह पकड़कर निचोड़ डाला और परिणामस्वरूप लाला के मुँह और चेहरे पर पिंकी की चूत से निकले पानी की बारिश हो गयी...

लाला उस पानी की मिठास का तो पहले से ही दीवाना था, वो उसे झट्ट से पी गया और अपने चेहरे पर भी उंगलिया फेरकर उसे सॉफ किया और अपनी उंगलिया भी चटखारे मारकर चाट गया...

पर असली मज़ा तो उसे तब मिला जब पिंकी की उड़नतश्तरी नुमा गांड ने उसके चेहरे पर आकर लेंड किया..
पिंकी ने लाला की घनी दाढ़ी मूँछो की भी परवाह नही की और उसके घने बालों पर अपनी गद्देदार चूत और गांड को रगड़कर उसे मसल डाला..

लाला को तो ऐसा लगा की उसकी साँसे ही घुट जाएगी, पर बीच-2 में उसे हवा लेने की जगह मिल ही जाती, अपनी जीभ को उसने कड़ा करके उपर की तरफ निकाल लिया जिसपर अपनी चूत के होंठो को घिसकर पिंकी ऐसे मचल रही थी जैसे उसकी चूत पर लाला की जीभ नही बल्कि कोई नाग बैठा हो...

और झटके देते हुए उसने अपने शरीर को आगे की तरफ गिराया और एक ही बार में लाला के नाग यानी रामलाल को मुँह में लेकर सड़प-2 करके चाटने लगी..



और साथ ही साथ अपनी चूत पर हो रही गुदगुदी को महसूस करके वो उत्तेजित भी हो रही थी..

''आआआआआआआआआहह लाला.......................उम्म्म्मममममममममममम........ मजाआा आआआआआअ गय्ाआआआआआआआआआअ.... चाआटो मेरी बुर को.... उम्म्म्ममममम.... डाााल दो अपनी जीईभ अंदर...... घुसेड दो अपने होंठ मेरी चूssssssत में लाला........पूरा घुस जा मेरी चूत में लाला.....''

ये आजकल की लड़किया भी ना....
लाला के लंड को अंदर ले ले ढंग से ,वही इनके लिए बहुत है...
लाला को अंदर लेकर तो चूत का पंचनामा ही हो जाना है...

पर बेचारी की उत्तेजना ही थी जो इस वक़्त उससे ये सब कहलवा रही थी और ये लाला की जीभ का ही कमाल था की वो इतनी जल्दी उत्तेजना में आकर ये भी भूल चुकी थी की उसकी फटी हुई चूत में कुछ देर पहले तक तो खून रिस रहा था, अब दोबारा वहीं लंड अंदर जाएगा तो क्या हाल होगा...
पर चुदाई की ललक ही ऐसी होती है, वो इन सब बातों के बारे में नही सोचती...
और पिंकी पर अभी उसी चुदाई की भूतनी सवार थी.

लाला ने उसकी चूत को आइस्क्रीम की तरह चाट डाला...
अब वो अंदर और बाहर से पूरी तर बतर हो चुकी थी...
अंदर अपने रस से और बाहर लाला की लार से..
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03-19-2019, 12:30 PM,
RE: Kamukta kahani हरामी साहूकार
यही मौका था अब, एक बार फिर से उस करिश्माई लंड को अपनी चूत में लेने का...
और यही सोचकर वो मछली की तरह फिसल कर सीधी हो गयी और लाला के लंड पर अपनी चूत को टिका दिया..., लाला के हाथ उसके नन्हे उरोजों पर थे, पिंकी की आँखो में इस वक़्त डर के बदले हवस थी, और उसके होंठो पर ढेर सारा शहद ...



लाला ने उसके कुल्हो को पकड़ा और नीचे से जोरदार झटका मारकर अपना रॉकेट उसकी चूत के सोरमंडल में दाखिल कर दिया...

पिंकी के होंठ खुले रह गये इस एहसास से....
और वो उन खुले होंठो के साथ लाला के मुँह पर जा गिरी,
लाला ने भी देर ना की और उसके होंठो के शहद को जीभ से चाट लिया...

बेचारी खुल कर मज़े से चीख भी ना पाई और ना ही ये बता पाई की लाला के लंड ने इस बार उसे कितना मज़ा दिया है...

पर जल्द ही लाला के झटको ने उसकी पकड़ को ढीला कर दिया और वो चिल्लाती हुई, लाला के घोड़े पर बैठकर ज़ोर से बोली

''आआआआआआआअहह लाला .................. अब आया है असली मज़ा चुदाई कााआआअ.... उफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ क्या मजेदार एहसास है तेरे लंड का लाला ....... ओह.... इतना मोटा लंड ..... मेरी छोटी सी चूत में .....जाकर जो मज़े दे रहा है...... सच में लाला........ बता नही सकती........ जो फील हो रहा है....... ..... ज़ोर से चोद लाला...... अब ना रहम कर मुझपर...... बहुत तरसी हू रे तेरे इस निगोडे लंड को अंदर लेने के वास्ते...... उम्म्म्ममममममम..... अब चोद डाल मुझे...... अपनी रंडी बना ले लाला.... एक रंडी की तरह चोद मुझे...... पेल अपनी रंडी पिंकी को लाला..... जोर से पेल .....''

लाला तो उसके हर शब्द को उसका हुक्म मानकर उसकी दुर्गति बनाने में लगा हुआ था....
अब उसे उस जादुई पुड़िया की शक्ति का एहसास हो रहा था....
कोई और मौका होता तो वो हाँफने लगता या झड़ चुका होता ऐसे झटको को महसूस करके...
पर आज ये चुदाई लंबी चलने वाली थी, इतनी लंबी की पिंकी की चाहत ख़त्म हो जाती पर लाला के लंड की पिचकारी नही निकलने वाली थी जल्दी...

लाला ने उसके गुलाबी निप्पल्स को उमेठकर उसके अंदर की रंडी को और बाहर निकालने की कोशिश की,
और हुआ भी यही,
अपने आप को रंडी-2 कह रही पिंकी पर निप्पल खीचाई का इतना बुरा असर हुआ की उसका शरीर ऐसे काँपने लगा जैसे उसके अंदर की भूतनी शरीर त्याग कर बाहर आ रही है,
और ऐसा करते हुए वो बुरी तरह से झड़ने लगी.

लाला के लंड पर पिंकी की चूत के रस का अभिषेक हो गया,
लाला पूरा गीला हो गया, पर इसी गीलेपन ने उसके लंड को पिस्टन बनाकर और भी ज़्यादा ख़तरनाक कर दिया और अब लाला उसकी नन्ही सी गांड को पकड़ कर जोरों से धक्के मारकर उसकी बची खुशी जान निकालने में लगा हुआ था..



पिंकी तो बेहोशी की अवस्था में पहुँच चुकी थी,
लाला के शरीर पर उसका फूल सा बदन घिस्से खा रहा था,
उसके नुकीले निप्पल लाला की छाती पर शूल से चुभ भी रहे थे और उसके मुम्मो का मुलायमपन उसे गुदगुदा भी रहा था....

कुल मिलाकर आज लाला अपने जीवन की सबसे मस्त चुदाई का मज़ा खुल कर ले रहा था..

दूर बैठी नंगी निशि अपनी चूत को मसलते हुए अपने मुम्मे भी बारी-2 से दबा रही थी,



निशि की चूत भी लाला की चुदाई देखकर मस्त हुए जा रही थी...
2 दिन पहले ही नंदू के लंड ने उसका उद्घाटन किया था, इसलिए उसे भी पता था की चूत की खुजली कैसी होती है...

वो जानती थी की आज लाला उसे चुदाई का मज़ा नही दे पाएगा पर घर जाकर वो नंदू के लंड को अंदर लेकर अपनी इस प्यास को बुझा लेना चाहती थी...

इसलिए वो उनके कार्यकर्म के ख़त्म होने का इंतजार कर रही थी ताकि जल्दी से घर जाकर अपनी चूत मराई का प्रोग्राम शुरू कर सके..

पर लाला के करारे झटके देखकर उसे लग नही रहा था की आज ये बुड्ढा जल्दी झड़ने के मूढ़ में है....
वैसे भी आज उसे लाला किसी और ही रंग मे रंगा हुआ दिख रहा था...
इतनी देर तक तो नंदू भी नही टीका था उसके सामने, वो भी झड़ गया था..

पर वो ये नही जानती थी की आज लाला ने वो जादुई पूडिया खाई है, इसलिए वो पिंकी की चूत का बैंड बजाने में लगा है..

लाला अब नीचे से धक्के मारता हुआ थक चुका था,
उसने पिंकी के निढाल से शरीर को नीचे उतारा और उसे गद्दे पर लिटा कर उसकी टांगे फेला दी

बुरी तरह चुदाई करवाने के बाद भी उसके रूप रंग में कोई कमी नही आई थी, अब भी वो हरामन एक नंबर का माल लग रही थी..



लाला ने उसकी रेशमी टंगड़ी कबाब को उपर उठाया और उसकी चाशनी से भरी इमरती जैसी चूत पर अपना क्रीम रोल लगाकर अंदर धकेल दिया...
चूत तो पहले से ही गीली थी, एक कसक के साथ पिंकी ने उसे अपने अंदर ले लिया

लाला के झटके एक बार फिर से शुरू हो गये,
उसका पूरा शरीर उपर से नीचे तक हिल रहा था,
झटकों से उसके नन्हे बूब्स उपर नीचे होकर गुल्लक की तरह खनक रहे थे...



पिंकी ने लाला के निप्पल्स को पकड़कर उन्हे सहलाना शुरू कर दिया...
वो जानती थी की अब उसे ही लाला को जल्द से जल्द झाड़वाने पर मजबूर करना होगा वरना वो उसकी चूत की रेलगाड़ी बना कर पता नही किस स्टेशन तक ले जाएगा...

और उसके सहलाने का असर जल्द ही होने लगा...
लाला का लंड अपनी अकड़ खोने लगा और जल्द ही उसके लंड ने ढेर सारा रस उस कच्ची कमसिन की चूत में उडेल दिया, जिसे महसूस करके ना चाहते हुए भी वो एक और बार झड़ने पर मजबूर हो गयी...

''आआआआआआअहह लाला...................... उम्म्म्मममममम.... आज तो तूने मार डाला मुझे......... पूरा शरीर हिला डाला तूने तो........ ''

लाला ने मुस्कुराते हुए कहा : "यही तो असली चुदाई होती है मेरी जान....अब रोज लंड लेना सीख ले, तभी इस जवानी का असली मज़ा ले पाएगी...''

उसने भी मुस्कुराते हुए सिर हिला कर रोज चुदने की सहमति दे डाली....
क्योंकि अंदर से वो भी जानती थी की अब इस चुदाई के बिना एक दिन भी रह पाना उसके लिए भी मुश्किल होगा..

उसके बाद लाला उस नंगे फूल से बदन को उठाकर पास बने पानी के तालाब में ले गया,
निशि भी वहां आ गयी और तीनो ने साथ मिलकर अच्छे से एक दूसरे के शरीर को मसला और रगड़ -2 कर सॉफ किया...

ठंडे पानी ने पिंकी के शरीर मे सुफूर्ती सी भर दी थी...

उसका मन तो कर रहा था की एक बार और ट्राई किया जाए पर अब काफ़ी समय हो चुका था....
पिंकी और निशि ने स्कूल बंक किया था, टाइम देखा तो करीब 2 बजने को थे....
चुदाई करते हुए समय का पता ही नही चला...
उन सबने अपने-2 कपड़े पहने और वापिस गाँव की तरफ चल दिए ताकि पिंकी और निशि अपने स्कूल टाइम के हिसाब से ही घर पहुँच जाए...

लाला ने उन्हे गाँव के बाहर उतारा जहाँ से उन दोनो ने रिक्शा कर लिया और अपने-2 घर पहुँच गयी...
पिंकी की तो हालत बुरी थी, वो बुखार का बहाना करके, बदन दर्द की गोली लेकर सो गयी ताकि लाला के दिए दर्द से उसे शाम तक आराम मिल सके..

और निशि घर जाकर अपने कमरे को सजाने संवारने का काम करने लगी...
आज की रात वो अपने भाई नंदू को कच्चा चबा लेना चाहती थी...

पर बेचारी ये नही जानती थी की आज उसकी लाइफ में कितना बड़ा धमाका होने वाला है..
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03-19-2019, 12:30 PM,
RE: Kamukta kahani हरामी साहूकार
उसका मन तो कर रहा था की एक बार और ट्राई किया जाए पर अब काफ़ी समय हो चुका था....
पिंकी और निशि ने स्कूल बंक किया था, टाइम देखा तो करीब 2 बजने को थे....चुदाई करते हुए समय का पता ही नही चला... उन सबने अपने-2 कपड़े पहने और वापिस गाँव की तरफ चल दिए ताकि पिंकी और निशि अपने स्कूल टाइम के हिसाब से ही घर पहुँच जाए...

लाला ने उन्हे गाँव के बाहर उतारा जहाँ से उन दोनो ने रिक्शा कर लिया और अपने-2 घर पहुँच गयी...
पिंकी की तो हालत बुरी थी, वो बुखार का बहाना करके, बदन दर्द की गोली लेकर सो गयी ताकि लाला के दिए दर्द से उसे शाम तक आराम मिल सके..और निशि घर जाकर अपने कमरे को सजाने संवारने का काम करने लगी...आज की रात वो अपने भाई नंदू को कच्चा चबा लेना चाहती थी...

पर बेचारी ये नही जानती थी की आज उसकी लाइफ में कितना बड़ा धमाका होने वाला है..

**************
अब आगे
**************

नंदू को इस बात की चिंता थी की उसकी बहन को ये ना पता चल जाए की वो उसके अलावा अपनी माँ की भी चुदाई कर रहा है और उसकी माँ को इस बात की चिंता थी की कहीं उसकी बेटी को ये ना पता चल जाए की वो अपने बेटे यानी उसके भाई से चुदवा रही है..

हालाँकि अपने बेटे से चुदवाने के बाद एक पल के लिए तो उसमें वो हीन भावना भी आई थी की कैसी औरत हूँ मैं , अपने ही बेटे से चुदवा लिया...
दुनिया थूकेगी उसपर अगर ये बात किसी को भी पता चल गयी....
और उसने मन ही मन निश्चय भी कर लिया था की अब वो ऐसा दोबारा नही करेगी...
पर घर जाते-2 उसका ये निश्चय एक और बार चुदाई करवाने की जिद्द में बदल गया...
अब ये साली चुदाई होती ही ऐसी चीज़ है, कहां तो वो बरसो से बिना चुदे , बिना लंड अपने अंदर लिए अपनी जिंदगी गुज़ार रही थी, और कहां एक ही दिन की चुदाई ने उसके अंदर की चुदक़्कड़ को बाहर आने पर मजबूर कर दिया.

इसलिए जैसे ही वो दोनो माँ बेटे घर पहुँचे, नंदू की माँ उसपर लगभग टूट ही पड़ी,
पूरे रास्ते साइकल पर बैठकर वो उसके लंड को महसूस करती आ रही थी
और अंदर आते ही उसने उसके उसी हथियार को पकड़कर अपने क़ब्ज़े में ले लिया और अपने नंगे पेट पर रगड़ते हुए सिसकारी मारते हुए बोली : "अहह ...नंदू...... तेरे इस हथियार ने तो मेरी हालत खराब कर दी है...बस मन करता है की हर पल इसे अंदर लेके रखू...''

नंदू भी पूरे रास्ते अपनी माँ के नर्म कूल्हों को महसूस करके उत्तेजना के शिखर पर पहुँच चूका था...
पर अंदर ही अंदर उसे अपनी बहन निशि का डर भी सता रहा था...
शाम का समय था, इस वक़्त या तो वो अपने घर पर होती है या फिर पिंकी के घर,
घर तो वो थी नही, इसलिए उसके आने से पहले वो उस बात का फायदा उठा लेना चाहता था ताकि रात का झंझट ही ना रहे अपनी माँ को चोदने का..
और वैसे भी उसकी माँ इस वक़्त इतनी उत्तेजित थी की शायद पिंकी के सामने भी वो उसपर इसी तरह से टूट पड़ती...

वो इन्ही ख़यालो में खोया हुआ था की उसे अपने लंड पर कुछ गीला-2 महसूस हुआ,
नीचे देखा तो उसकी माँ उसके लंड को आइस्क्रीम की तरह चूस रही थी....
इस उम्र की औरत को ये शोंक कैसे हो गया भला...
अब उस बेचारे को क्या पता था की लंड चूसने की ललक तो हर औरत में होती है,
बस उसे उस बात को करवाने वाला मर्द होना चाहिए,
और एक बार जब उसे लंड चूसने का चस्का लग गया तो वो हर बार चुदाई की शुरूवात लंड चूसकर ही करेगी...

नंदू की माँ भी अपने बेटे के लंड को चूसकर उसका चॉकलेटी मज़ा ले रही थी....
अपने दूसरे हाथ से उसने उसकी धोती को निकाल फेंका और अपने ब्लाउज़ के बटन खोल कर अपने मुम्मे भी बाहर निकाल लिए...2 मिनट में ही दोनो माँ बेटे पूरे नंगे थे...
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03-19-2019, 12:30 PM,
RE: Kamukta kahani हरामी साहूकार
उसका मन तो कर रहा था की एक बार और ट्राई किया जाए पर अब काफ़ी समय हो चुका था....
पिंकी और निशि ने स्कूल बंक किया था, टाइम देखा तो करीब 2 बजने को थे....चुदाई करते हुए समय का पता ही नही चला... उन सबने अपने-2 कपड़े पहने और वापिस गाँव की तरफ चल दिए ताकि पिंकी और निशि अपने स्कूल टाइम के हिसाब से ही घर पहुँच जाए...

लाला ने उन्हे गाँव के बाहर उतारा जहाँ से उन दोनो ने रिक्शा कर लिया और अपने-2 घर पहुँच गयी...
पिंकी की तो हालत बुरी थी, वो बुखार का बहाना करके, बदन दर्द की गोली लेकर सो गयी ताकि लाला के दिए दर्द से उसे शाम तक आराम मिल सके..और निशि घर जाकर अपने कमरे को सजाने संवारने का काम करने लगी...आज की रात वो अपने भाई नंदू को कच्चा चबा लेना चाहती थी...

पर बेचारी ये नही जानती थी की आज उसकी लाइफ में कितना बड़ा धमाका होने वाला है..

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अब आगे
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नंदू को इस बात की चिंता थी की उसकी बहन को ये ना पता चल जाए की वो उसके अलावा अपनी माँ की भी चुदाई कर रहा है और उसकी माँ को इस बात की चिंता थी की कहीं उसकी बेटी को ये ना पता चल जाए की वो अपने बेटे यानी उसके भाई से चुदवा रही है..

हालाँकि अपने बेटे से चुदवाने के बाद एक पल के लिए तो उसमें वो हीन भावना भी आई थी की कैसी औरत हूँ मैं , अपने ही बेटे से चुदवा लिया...
दुनिया थूकेगी उसपर अगर ये बात किसी को भी पता चल गयी....
और उसने मन ही मन निश्चय भी कर लिया था की अब वो ऐसा दोबारा नही करेगी...
पर घर जाते-2 उसका ये निश्चय एक और बार चुदाई करवाने की जिद्द में बदल गया...
अब ये साली चुदाई होती ही ऐसी चीज़ है, कहां तो वो बरसो से बिना चुदे , बिना लंड अपने अंदर लिए अपनी जिंदगी गुज़ार रही थी, और कहां एक ही दिन की चुदाई ने उसके अंदर की चुदक़्कड़ को बाहर आने पर मजबूर कर दिया.

इसलिए जैसे ही वो दोनो माँ बेटे घर पहुँचे, नंदू की माँ उसपर लगभग टूट ही पड़ी,
पूरे रास्ते साइकल पर बैठकर वो उसके लंड को महसूस करती आ रही थी
और अंदर आते ही उसने उसके उसी हथियार को पकड़कर अपने क़ब्ज़े में ले लिया और अपने नंगे पेट पर रगड़ते हुए सिसकारी मारते हुए बोली : "अहह ...नंदू...... तेरे इस हथियार ने तो मेरी हालत खराब कर दी है...बस मन करता है की हर पल इसे अंदर लेके रखू...''

नंदू भी पूरे रास्ते अपनी माँ के नर्म कूल्हों को महसूस करके उत्तेजना के शिखर पर पहुँच चूका था...
पर अंदर ही अंदर उसे अपनी बहन निशि का डर भी सता रहा था...
शाम का समय था, इस वक़्त या तो वो अपने घर पर होती है या फिर पिंकी के घर,
घर तो वो थी नही, इसलिए उसके आने से पहले वो उस बात का फायदा उठा लेना चाहता था ताकि रात का झंझट ही ना रहे अपनी माँ को चोदने का..
और वैसे भी उसकी माँ इस वक़्त इतनी उत्तेजित थी की शायद पिंकी के सामने भी वो उसपर इसी तरह से टूट पड़ती...

वो इन्ही ख़यालो में खोया हुआ था की उसे अपने लंड पर कुछ गीला-2 महसूस हुआ,
नीचे देखा तो उसकी माँ उसके लंड को आइस्क्रीम की तरह चूस रही थी....
इस उम्र की औरत को ये शोंक कैसे हो गया भला...
अब उस बेचारे को क्या पता था की लंड चूसने की ललक तो हर औरत में होती है,
बस उसे उस बात को करवाने वाला मर्द होना चाहिए,
और एक बार जब उसे लंड चूसने का चस्का लग गया तो वो हर बार चुदाई की शुरूवात लंड चूसकर ही करेगी...

नंदू की माँ भी अपने बेटे के लंड को चूसकर उसका चॉकलेटी मज़ा ले रही थी....
अपने दूसरे हाथ से उसने उसकी धोती को निकाल फेंका और अपने ब्लाउज़ के बटन खोल कर अपने मुम्मे भी बाहर निकाल लिए...2 मिनट में ही दोनो माँ बेटे पूरे नंगे थे...
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03-19-2019, 12:30 PM,
RE: Kamukta kahani हरामी साहूकार
अपनी माँ की मोटी छातियां देखकर नंदू से भी भला कैसे रुका जाता,
वो भी अपना पूरा जबड़ा खोलकर उनपर टूट पड़ा, ऐसे काटने लगा जैसे रबड़ की बॉल को चूहा कुतर रहा हो..

गोरी को मज़ा तो आ रहा था पर उसे अपनी चूत में हो रही खुजली की ज़्यादा चिंता थी....
वो अपने मुम्मे चुस्वाते-2 पास पड़ी खटिया पर गिर पड़ी और अपनी टांगे खोलकर नंदू को अपने उपर लिटा लिया...

निशाना एकदम सही लगा पहली ही बार में
और नंदू का फौलादी लौड़ा उसकी चिकनी चूत में उतरता चला गया..



''आआआआआआआआआआआहह .उम्म्म्ममममममममममममममममम..... मजाआा आआआआ गय्ाआआआआअ...... पूरे गाँव में तेरे जैसा लंड किसी का नही होगा......लिखवा ले मुझसे....''

वो भी जानती थी की वो झूट बोल रही है...
लाला का लंड उसके बेटे के लंड के मुक़ाबले ज़्यादा मोटा और शानदार था..

और वहीं नंदू भी सोचने लगा, की कह तो ऐसे रही है जैसे पूरे गाँव के लंड चख रखे है उसकी माँ ने...

पर ये वक़्त इन बेकार की बातों पर ध्यान देने का नही था...

ये वक़्त था लंड और चूत के मिलन का मज़ा लेने का...

और नंदू ने वही किया


अपनी माँ के दोनो हाथों को नीचे दबा कर उसने अपने लंड से उन्हे जोरों से पेलना शुरू कर दिया...

पूरी खटिया चूं -2 करने लगी नंदू के लंड के झटकों से

और उन झटकों से गोरी के मोटे मुम्मे हर बार उपर नीचे होकर उसे एक अलग ही मज़ा प्रदान कर रहे थे..




वो अपनी ही मस्ती में मग्न थे की पीछे से निशि की आवाज़ आई..

''भैय्याआआआआ........माँ आआआआआ.....ये क्या कर रहे हो आप दोनो.....''

अपनी बेटी की आवाज़ सुनते ही गोरी की तो हालत ही खराब हो गयी...

और ऐसा ही कुछ हाल नंदू का भी हुआ....
उसका शेर जैसा लंड एक ही पल में चूहा बनकर अपनी माँ के बिल से बाहर निकल आया...
दोनो ने आनन-फानन में नीचे गिरे कपड़ो से अपने नंगे शरीर को ढका...
नंदू को तो नंगा वो देख ही चुकी थी, आज अपनी माँ को भी अपने भरंवा शरीर को छुपाते हुए वो पहली बार देख रही थी...

कुछ देर तक तो कोई कुछ नही बोला

फिर निशि की आवाज आयी

''ये हो क्या रहा है माँ .....कोई बताएगा मुझे...''

निशि ने गुस्से से बिफरते हुए कहा...

उसे गुस्सा इस बात का नही था की उसकी माँ चुदाई करवा रही थी
बल्कि इस बात का था की वो चुदाई नंदू से करवा रही थी...
जिसपर वो पूरी तरह से अपना हक समझकर बैठी थी अभी तक.

स्कूल से आने के बाद वो अपने कमरे में जाकर सो गयी थी...
उसे क्या पता था की नीचे उसकी माँ और भाई ये गुल खिला रहे होंगे...
वो तो सपने में भी नंदू से चुदाई करवा रही थी और सिसकारियाँ मार रही थी...
और जब वैसी ही सिसकारियां उसे नीचे से आती हुई सुनाई दी तो उसकी आँख झट्ट से खुल गयी...
बाहर निकलकर देखा तो उसे विश्वास ही नही हुआ...
उसकी माँ बरामदे में ही अपनी टांगे फेलाए खाट पर लेटी थी और नंदू उसे घपा-घप पेल रहा था..
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03-19-2019, 12:30 PM,
RE: Kamukta kahani हरामी साहूकार
पहले तो उसने सोचा की वो चुपचाप उपर चली जाए पर फिर कुछ सोचकर वो वापिस पलटी और गुस्से के मारे वो चिल्ला पड़ी..

नंदू ने भी नही सोचा था की जिस बात को वो उससे छिपाना चाहता था वो इतनी बुरी तरह से सामने आएगी...

निशि फिर से गरजी : "एक माँ अपने ही बेटे के साथ ऐसा घिनोना काम कैसे कर सकती है....??? ''

और फिर नंदू की तरफ घूमकर बोली : "और तुम, तुम्हे भी शरम नही आई...इतनी ही जवानी में उबाल आ रहा था तो शादी कर लो ना...ऐसे अपनी ही माँ की चूत मारते हुए तुम्हे भी शरम नही आई....इसी चूत में से निकले हो ना...अब उसी में अपना लंड पेल रहे थे....''

गोरी और नंदू भी उसके लंड ,चूत वाले शब्दो को सुनकर हैरान थे

पर उसके उन शब्दो पर आपत्ति करने की हालत में दोनो ही नही थे...

निशि अपनी माँ के सामने जाकर खड़ी हो गयी और बोली : "मुझे पता है माँ की तुम बरसो से प्यासी हो, पिताजी के जाने के बाद तुमने अपनी पूरी जिंदगी हम दोनो के लालन पोषण में लगा दी...हर शरीर को इस सुख की ज़रूरत होती है मैं मानती हूँ ...पर अपने ही बेटे से चुदवाकर आप क्या साबित करना चाहती हो...इस हिसाब से तो आपसे बचपन से लेकर अब तक जो भी मैने सीखा है, मुझे भी शायद यही करना चाहिए...''

ये कहते हुए हुए उसके चेहरे पर एक कुटिल सी मुस्कान आ गयी....
उसकी माँ ने उसकी बात सुनी और उसका मतलब समझकर चौंकते हुए उसकी तरफ देखा और तब तक वो अपने सीने पर पड़ी चुन्नी को एक तरफ उछाल चुकी थी...
और वो कुछ और कर पाती इससे पहले ही निशि ने अपने स्कूल की ड्रेस , जो की नीले रंग की एक लंबी कुरती थी, उसे भी खींचकर उसने उतार डाला...
नीचे तो वो हमेशा से ही ब्रा नही पहनती थी, इसलिए एक ही पल में वो अपनी माँ और भाई के सामने अपनी भरी हुई छातियाँ लेकर टॉपलेस खड़ी थी...



गोरी के साथ-2 नंदू की भी हालत खराब सी हो गयी...

गोरी ने जल्दी से अपने नंगे शरीर को ढकने वाले कपड़े उसपर डाल दिए ताकि उसका भाई निशि के नंगे योवन को ना देख पाए...
नंदू तो क्या-2 देखा चुका था ये भला उसे क्या पता था..
पर अपनी तरफ से तो वो अपनी बेटी की नंगी जवानी को उसके भाई के सामने आने से बचाना चाहती थी...
पर इन सबमें वो ये भूल गयी की उसका खुद का शरीर अब नंगा हो चुका है...



गोरी : "पागल हो गयी है क्या...क्या कर रही है ये....''

निशि ने बड़े शांत स्वर में उत्तर दिया : "वही, जो आप कर रही थी अभी...जैसे आपके शरीर की कुछ
ज़रूरते है वैसी ही मेरी भी है...''

गोरी जो इस वक़्त पूरी नंगी खड़ी थी , वो ज़ोर से चिल्ला पड़ी : "तू पागल हो गयी है क्या...अपनी उम्र तो देख, अभी तू बच्ची है...ये सब करने का वक़्त नही है तेरा...''

निशि : "मैं कितनी बड़ी हो चुकी हूँ ये मैं आपको अभी दिखा सकती हू,अगर आप मुझे और भाई को एक मिनट के लिए अकेला छोड़ दे तो...''

गोरी की आँखे फैलती चली गयी अपनी बेटी की बाते सुनकर...
उसकी तो समझ में नही आ रहा था की आज उसके साथ ये हो क्या रहा है...


पहले तो वो खुद अपने बेटे से चुदवाते हुए पकड़ी गयी थी,
उपर से उसकी बेटी भी उसी दलदल में कूदने को तैयार हो रही थी जिसमें वो अपने बेटे के साथ मज़े ले रही थी...

वो जानती थी की इस उम्र में ऐसी चुदसी चड़ना आम बात है...
पर अपनी ही आँखो के सामने वो अपनी बेटी और बेटे को चुदाई करते हुए कैसे देख पाएगी भला..

और यही था निशि का मास्टरस्ट्रोक...

वो जान तो पहले ही चुकी थी की नंदू अपनी माँ का दीवाना है...
और जब भी मौका मिलेगा, वो उसके अलावा अपनी माँ को भी चोदने से पीछे नही हटेगा...

और वो भी यही चाहती थी की जब भी उसकी चुदाई की इच्छा हो तो उसकी माँ बीच में ना आए...
आज अपनी माँ को रंगे हाथ पकड़कर वो उन्हे उसी दबाव में रखकर अपने मन की बात पूरी कर लेना चाहती थी ताकि आगे से घर पर एक साथ चुदाई के लिए मना ना कर सके...
वरना जिस तरह की सख्त माँ थी वो, उन्हे किसी दूसरे तरीके से मनाना आसान काम नही था...

और निशि की बातें सुनकर नंदू भी अब उसका गेम प्लान समझ चुका था और मन ही मन वो अपनी बहन की तारीफ भी कर रहा था...
करता भी क्यों नही, उसे अब बिना किसी डर के अपनी माँ और बहन को चोदने का मौका जो मिलने वाला था और वो भी बिना किसी दबाव के..

और इसी बीच निशि ने अपना आख़िरी दाँव भी फेंक दिया

वो बोली : "और अगर भाई ने मेरे साथ ये सब करने से मना कर दिया या आपने मुझे रोका तो मुझे मजबूरन गाँव के दूसरे मर्दों के सामने अपना बदन पेश करना पड़ेगा...और ये कहने की ज़रूरत नही है की ऐसे जवान जिस्म के कितने दीवाने है इस गाँव में ...''

ये सुनते ही गोरी की माँ और भी ज़्यादा सकते में आ गयी...
यानी चुदाई का भूत तो उसपर बुरी तरह चढ़ ही चुका था, और अब वो सीधे शब्दों में धमकी दे रही थी की मुझे भी नंदू का लंड लेने दो वरना बाहर जाकर मैं भी चुदवाउंगी..

और ऐसा करते हुए उसकी माँ हरगिज़ नही देख सकती थी..

पूरे गाँव में उसकी इज़्ज़त थी,
अपनी बेटी की इस नादानी भरी बातों से वो उस इज़्ज़त को गँवाना नही चाहती थी..

अब गोरी का दिल पिघलने लगा...
वो अपनी बेटी की बात पर सोचने के लिए मजबूर हो गयी...

वो सोचने लगी की ऐसा करने में कोई बुराई भी तो नही है...
घर की बात घर में ही रहेगी...
ना तो उसका राज बाहर निकलेगा और ना ही उसकी बेटी के पैर...

और रही बात अपने ही भाई से चुदवाने की तो इसमें भला हर्ज ही क्या है,
वो भी तो यही कर रही थी..
अपने बेटे से चुदवाकर उसने पहले ही मर्यादा की सारी सीमाएँ लाँघ ली थी,
ऐसे में भला वो किस मुँह से अपनी बेटी को ऐसा करने से रोकती..

ये सब सोचते-2 उसके हाथ से वो कपड़ा ना जाने कब नीचे गिर गया जिससे उसने निशि की छातियों को धक रखा था...

और एक बार फिर नंदू के सामने निशि की सुडौल चुचिया तनकर खड़ी थी...
और उससे कुछ ही दूरी पर उसकी माँ पूरी नंगी...



उसने शायद सपने में भी नही सोचा था की ऐसा दृशय देखने को मिलेगा..

अपनी आँखो के सामने अपनी माँ और बहन को नंगा देख रहा था वो.

गोरी का मन तो निशि की दलील सुनकर मन चुका था...
पर उसे नंदू की चिंता थी...
उसने आशाभरी नज़रों से नंदू को देखा तो निशि झट्ट से उनके मन की बात समझकर बोल पड़ी : "आप भाई की चिंता ना करो...वो भी शायद नही चाहेंगे की उनकी बहन गाँव में जाकर किसी और से चुदे ...बोलो भैय्या, चोदोगे ना मुझे...''

ऐसा कहते हुए उसने बड़े ही सैक्सी तरीके से अपनी भाई नंदू को एक आँख मार दी और उसे होंठ गोल करके एक फ्लाइंग किस्स सप्लाइ कर दी..

नंदू बेचारे के हाथ से उसकी धोती फिसलकर नीचे गिर गयी जब उसकी बहन ने इतने सैक्सी तरीके से अपनी माँ के सामने चुदाई के लिए पूछा...

चुदाई तो वो उसकी 2 दिन से कर ही रहा था...
पर आज जो परिस्थितियां बनी थी उनमें निशि उसे एक बार फिर से कुँवारी चूत की तरह दिखाई दे रही थी,
जो अपनी माँ के सामने ही अपने भाई से चुदने की परमिशन माँग रही थी.

जैसे ही नंदू की धोती नीचे गिरी, उसका विशालकाय लंड जो फिर से एक बार तन कर खड़ा हो चुका था, निशि और गोरी की आँखो के सामने आ गया...

इसका मतलब सॉफ था, नंदू भी राज़ी था...

लंड राज़ी तो सब राज़ी...

निशि ने मुस्कुराते हुए अपनी पायजामी भी उतार डाली और उन दोनो की तरह वो भी अब पूरी नंगी होकर उनके सामने खड़ी थी...
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03-19-2019, 12:30 PM,
RE: Kamukta kahani हरामी साहूकार
इस वक़्त निशि की शक्ल उस बिल्ली की तरह लग रही थी जो अपने सामने लटक रहे लंड नुमा चूहे को कच्चा खा जाने के मूड में थी

थोड़ा अजीब ज़रूर लग रहा था सबको एक दूसरे के सामने नंगा खड़े होने में
पर एक अलग ही तरह का रोमांच भी महसूस हो रहा था उन्हे...

पहल निशि ने ही की,
वो आगे बड़ी और उसने बड़ी ही नज़ाकत से नंदू के फुफकारते हुए लंड को पकड़ लिया...
उसपर अभी भी उसकी माँ की चूत का रस लगा हुआ था, जिसे सॉफ करने का उसके पास बहुत अच्छा तरीका था..

वो झट्ट से नीचे बैठी और पलक झपकते ही अपने भाई के लंड को निगल कर जोरों से चूसने लगी..



ये शायद गोरी की ज़िदगी का सबसे बड़ा झटका था...

थोड़ी देर पहले जिस लंड को वो खुद चूस रही थी, अब उसकी बेटी चूस रही है
और वो भी उससे बाड़िया तरीके से..
मतलब सॉफ था,
ये उसकी लाइफ की पहली चुसाई नहीं थी...
यानी ये काम वो पहले भी कर चुकी है...

निशि ने लंड चूसते - 2 अपनी माँ की तरफ देखा और बोली : "माँ , ऐसे ही खड़ी रहोगी तो कुछ नही मिलने वाला...अब ये लाज शर्म छोड़ो और आओ यहाँ ...वरना सारी मलाई मैने ही खा जानी है...''

इतनी बेशर्मी से निशि अपनी माँ से बोल रही थी...
पर इस बार उसकी बात पर हैरान होने के बजाए गोरी मुस्कुरा दी,
उसे भी पता चल चुका था की अब उसके बस में कुछ भी नही है...
और वैसे भी उसकी बेटी सही ही तो कह रही थी,
ऐसे खड़े रहने से कुछ नही मिलने वाला...
निशि ने भी तो हिम्मत की है, तभी उसके हाथ में इस वक़्त नंदू का लंड था...

इसलिए उसकी बात मानकर वो आगे आई और घुटनो के बल उसके साथ वहीँ बैठ गयी,
दोनो ने मुस्कुराते हुए एक दूसरे की तरफ देखा और एक साथ अपने मुँह को आगे करके नंदू के लंड पर जीभ रख दी..



नंदू की लाइफ का शायद सबसे उत्तेजना से भरा पल था ये...
जिस माँ को वो पूरी जिंदगी चोदने के सपने देखता रहा और जिस जवान बहन के जिस्म की उसने मन में कई बार तारीफ की थी, वो दोनो इस वक़्त नंगी होकर उसके सामने बैठी थी और उसका लंड चूस रही थी...
आज तो उसे मौत भी आ जाए तो उसे कोई गम नही होगा, उसे उसकी लाइफ की सबसे बड़ी खुशी आज मिल चुकी थी..

और जल्द ही लंड चूसते - 2 उन दोनो माँ बेटियों ने नंदू के लंड को पहले से भी ज़्यादा लंबा और सख्त कर दिया... डबल पावर का यही असर होता है

और अब उस डबल पावर वाले लंड को इस्तेमाल करने का वक़्त आ चुका था..

और इस बार निशि ने कोई दरियादिली नही दिखाई...
उसने नंदू को धक्का देकर ज़मीन पर लिटाया और उसके उपर खुद सवार हो गयी...

उसकी आँखो के सामने अभी तक पिंकी और लाला की चुदाई की पिक्चर चल रही थी...
और जैसे-2 पिंकी ने आज लाला से चुदवाया था, ठीक वैसे ही वो नंदू के लंड से मज़ा लेना चाहती थी...
और इन सबके बीच वो ये बिल्कुल भूल चुकी थी की उसकी माँ भी वहां मोजूद है,
जो शायद एक बार फिर से हैरानी की उसी अवस्था में पहुँच चुकी थी जैसे वो कुछ समय पहले थी, जब उसने देखा की कैसे निशि ने नंदू के उस मोटे लंड को अपनी नन्ही सी चूत में आसानी से ले लिया है....
यानी लंड चुसाई तो कुछ भी नही था, वो पहले चुदाई भी करवा चुकी थी...

अगर ये निशि का पहली बार होता तो इतने मोटे लंड को अंदर लेने में उसकी मा मर जानी थी, पर ऐसा कुछ नही हुआ, उसके मुँह से चीखों के बदले सिर्फ़ रसीली सिसकारियाँ ही निकल रही थी...
जैसे-2 वो मोटा लंड उसकी चूत में समाता जा रहा था, उसकी आँखे बंद और होंठ खुलते जा रहे थे...



और अंत में जब उसने पूरा लंड अपनी चूत में ले लिया तो उसके चेहरे की मुस्कान देखने लायक थी...
एक विजयी मुस्कान लिए वो धीरे-2 नंदू के घोड़े पर बैठी हिचकोले खाने लगी...

नंदू के हाथ भी उपर आए और उसने निशि की नन्ही बूबीयों को मसलना शुरू कर दिया और नीचे से अपनी गांड उठा कर उसकी चूत में झटके मारने भी शुरू कर दिए..

पूरे घर में दोनो की आंनद में डूबी सिसकारियाँ तैर रही थी..

''आआआआआआआआआआआआआआअहह ओफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ उम्म्म्ममममम...... एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स.... भाईईईईईईईईई.... ऐसे ही चोदो मुझे...................... अहह ...चोदो अपनी बहन को.....मारो अपनी रंडी बहन की चूत .....''



जिस बुरी तरह से वो बके जा रही थी, नंदू को लग रहा था की ऐसा ना हो की ये उनकी आख़िरी चुदाई साबित हो...
कोई भी माँ अपनी बेटी की ऐसी हरकतें देखकर चुप नही बैठ सकती...

अपनी माँ की तरफ देखा उसने तो उन्हे एक अलग ही दुनिया में पाया...

शायद निशि को चुदते देखकर उन्हे अपनी जवानी के दिन याद आ गये थे,
ठीक ऐसे ही वो भी लंड लेते हुए एक रंडी बन जाया करती थी और अपनी चूत में आए लंड का कचुंबर निकाल कर ही दम लेती थी...

उन्हे ऐसा करते देखकर वो फर्श पर बैठी हुई अपनी चूत मसलने में लगी थी...

और धीरे-2 बुदबुदा भी रही थी...

''हाँ ...बेटा....चोद इस रंडी को....साली की चूत में बहुत आग लगी हुई है.... अपने ही भाई से चुदवा रही है छिनाल की जनी .....इसकी चूत का बेंड बजा दे रे नंदू....फाड़ दे इसकी चूत, जिसमें इतनी खुजली हो रही है....अहह''

इतना कहते-2 उसकी चूत ने ढेर सारा पानी वही ज़मीन पर निकाल दिया...

दूसरी तरफ नंदू भी झड़ने के काफ़ी करीब था,
ऐसी परिस्थिति में आकर तो अच्छे - अच्छों के लंडो का पानी जल्दी निकल जाता है,
फिर नंदू की क्या मिसाल थी..

निशि तो उस घोड़े पर कूदते-2 दो बार झड़ भी चुकी थी....
जिस जगह पर वो बैठी थी, उसके नीचे का फर्श भी उसके रज से भीग चुका था...
शायद एक बार उसका सुसु भी निकल गया था बीच में ...
और अब एक और बार वो झड़ने वाली थी जिसमें उसकी चूत में विस्फोट की स्थिति उत्पन कर दी थी....
और वो विस्फोट जल्द ही हो भी गया...
जिसे महसूस करते ही वो पागल कुतिया की तरह बिलबिलाती हुई, अपने भाई के लंड पर लोटनियां मारती हुई झड़ने लगी..

''आआआआआआआआआआआआहह.....भाई.................मेरी ज़ाआाआआअंन्न...... उम्म्म्ममममममम........ वाााआआअहह.... क्या मजाआाआआआअ दिया है तूने आआआआअजज...... उम्म्म्मममममममममम.......... आई लव यू भाई....''

नंदू की तोप ने भी कई गोले उसकी चूत में दाग दिए थे....
और आख़िरी में आकर जब निशि ने आई लव यू बोला तो उन दोनो के होंठ एक दूसरे से ऐसे चिपके जैसे बरसों तक नही छूटने वाले ....




और फिर निशि का शरीर फिसलकर नीचे आ गया....
वो थोड़ा टेडी हुई और नंदू के लंड के आस पास पड़ी मलाई को चपर -2 करके चाट गयी....




और फिर बिना अपनी माँ को देखे, अपने कपड़े उठाकर , अपनी गांड मटकाते हुए उपर अपने कमरे की तरफ चल दी...

इस वक़्त उसे ऐसा फील हो रहा था जैसे एक चतुर बिल्ली ने अपनी चालाकी से दूसरी बिल्ली के हिस्से की मलाई खा ली हो...
उस मलाई के निशान अभी भी निशि के होंठों पर थे, जिनपर एक बार फिर से जीभ फेराकार वो उसे निगल गयी और मुस्कुराते हुए अपने कमरे में घुस गयी...

और पीछे छोड़ गयी उत्तेजना से भरी, आधी चुदाई करवाकर, फुफकारती हुई अपनी माँ
जिसकी नज़र अभी भी अपने बेटे के सिकुड़े हुए लंड पर थी....

एक बात तो पक्की थी की आज की रात नंदू की शामत आने वाली थी....

बस देखना ये था की गोरी नंदू को कितनी जल्दी और कैसे अपनी चुदाई के लिए तैयार कर पाती है..
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03-19-2019, 12:31 PM,
RE: Kamukta kahani हरामी साहूकार
और फिर बिना अपनी माँ को देखे, निशि अपने कपड़े उठाकर , अपनी गांड मटकाते हुए उपर अपने कमरे की तरफ चल दी...

इस वक़्त उसे ऐसा फील हो रहा था जैसे एक चतुर बिल्ली ने अपनी चालाकी से दूसरी बिल्ली के हिस्से की मलाई खा ली हो... उस मलाई के निशान अभी भी निशि के होंठों पर थे, जिनपर एक बार फिर से जीभ फेराकार वो उसे निगल गयी और मुस्कुराते हुए अपने कमरे में घुस गयी...

और पीछे छोड़ गयी उत्तेजना से भरी, आधी चुदाई करवाकर, फुफकारती हुई अपनी माँ , जिसकी नज़र अभी भी अपने बेटे के सिकुड़े हुए लंड पर थी....एक बात तो पक्की थी की आज की रात नंदू की शामत आने वाली थी....बस देखना ये था की गोरी नंदू को कितनी जल्दी और कैसे अपनी चुदाई के लिए तैयार कर पाती है..

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अब आगे
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नंदू अपनी आँखे बंद किए गहरी साँसे ले रहा था की तभी उसे अपनी चेहरे पर किसी और की गर्म साँसों का एहसास हुआ...
आँखे खोली तो उत्तेजना से लाल, अपनी माँ की आँखे दिखाई दी उसे...



उन आँखो की आग बता रही थी की अंदर से वो कितनी गर्म है...

गोरी का हाल इस वक़्त ये था की अगर नंदू वहाँ ना होता तो वो ऐसे ही नंगी घर से बाहर निकल जाती और सामने जो भी पहला मर्द उसे दिखता वो उससे अपनी चूत मरवा लेती.

पर वो जानती थी की ऐसी नौबत नही आएगी,
क्योंकि उसका जवान बेटा उसकी खातिरदारी के लिए वहां मोजूद था..
बस देर थी उसे एक बार फिर से चुदाई के लिए तैयार करने की.

गोरी का चेहरा देखकर नंदू समझ गया की उसकी माँ क्या चाहती है...
पर उसकी हिम्मत नही हो रही थी एक बार फिर से चुदाई करे...
वैसे भी कसी हुई चूत मारने के बाद लंड में उतनी ताक़त बचती ही नही है जितनी फेले हुए भोंसडे को चोदने के बाद बचती है...
कड़क चूत तो लंड की आख़िरी बूँद तक निचोड़ लेती है अपने गन्ने की मशीन जैसी पकड़ से...

इसलिए उन्हे मना करने के लिए जैसे ही नंदू ने अपना मुँह खोला, उसकी माँ ने अपने लरजते हुए होंठ उसके होंठो पर रख कर उन्हे चूसना शुरू कर दिया...

गोरी के होंठ इस वक़्त कामग्नी में जलकर इतने मुलायम हो चुके थे की नंदू को ऐसा लग रहा था जैसे वो बिना छिलके के अंगूर चूस रहा है...
सिर्फ़ रस ही रस निकल रहा था उन होंठो से.



गोरी के गोरे-2 मुम्मे उसके कंधो पर रगड़ खा रहे थे...
वो उन्हे धीरे- उसके बदन पर घिस्स भी रही थी और अपने हाथों से उसके सीने के बालों को सहला भी रही थी...

शायद ये उसका तरीका था नंदू के लंड को खड़ा करने का...
और वो तरीका कामगार साबित हो भी रहा था...
नंदू के लंड ने होले -2 झटके मारने शुरू कर दिए.

गोरी को जैसे ही उसके लंड के फड़फड़ाने का एहसास हुआ, वो किसी नागिन की तरह मचलकर , अपने मुम्मे उसके पूरे शरीर पर रगड़ती हुई, नीचे की तरफ आ गयी , और ऐसा करते हुए उसने अपनी जांघे नंदू के चेहरे के बहुत करीब रख दी...
और फिर उसने एक ही झटके में अपने बेटे के अधखिले लंड को मुँह में लेकर ज़ोर से चुभलाना शुरू कर दिया...
उसपर अभी तक उसकी बेटी के होंठो का गीलापन था, जिसे उसने अपनी गर्म लार से ढक सा दिया...


उधर नंदू के नथुनों में भी जब उसकी माँ की चूत से निकल रही देसी दारू जैसी गंध टकराई तो वो बावला सा हो गया और उसने अपनी माँ की मोटी जाँघ पकड़कर अपने सिर के दूसरी तरफ खींच लिया...
अब गोरी अपने बेटे के मुँह के सिंहासन पर अपनी चूत का आसान जमाए, उसे अपनी देसी दारू पीला रही थी...
और साथ ही साथ उसके लंड की कच्ची ताड़ी भी पी रही थी.

दोनो के शरीर एकदम बुरी तरह से गुत्थम गुत्था होकर ज़मीन पर लोटने लगे,
जैसे साँप का जोड़ा आपस में प्यार कर रहा हो सावन के महीने में.



कुछ ही देर मे गोरी की मेहनत ने नंदू के लंड को पहले जैसा बना दिया..

और फिर वो अपनी अधूरी चुदाई को पूरा करने के लिए नंदू के शरीर पर लेटे -2 ही पलट कर सीधी हो गयी...
और एक बार फिर से दोनो के होंठ आपस में जा भिड़े...
इस बार उन दोनो को ही अपने अंगो का स्वाद दूसरे के होंठो से चखने को मिला..
पर कुछ ही देर में पहले जैसा स्वाद फिर से आने लगा..

गोरी ने नशीली आँखो से अपने बेटे को देखा और एक जोरदार सिसकारी मारते हुए उसके खड़े लंड पर बैठ गयी..

''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स.....अहह.......... साआआाअले....भेनचोद ..... मैं तो तुझे मादरचोद ही समझती थी...तू तो भेनचोद भी निकला..... अब तो तेरे दोनो हाथ खीर में है.... जब चाहे , जिसे चाहे चोद सकता है तू तो.....''

नंदू भी अपनी माँ के इस रूप को देखकर हैरान था...
कहाँ तो वो ये सोचकर ही घबराए जा रहा था की उसकी माँ को निशि और उसके बारे में पता चला तो क्या कयामत आएगी...
पर यहाँ तो इस कयामत ने उसकी किस्मत ही खोल कर रख दी...
अब तो उसकी माँ खुद ही उसे उकसाने के लिए उसकी बहन के नाम का इस्तेमाल कर रही थी...
उसे भेनचोद और माँ चोद जैसी गंदी गालियाँ देकर वो अपने अंदर की गंदगी बाहर निकाल रही थी ताकि नंदू भी उस गंदगी में नहाकर, सब कुछ भूल जाए और पूरे मज़े लेकर उसकी चुदाई करे.

और नंदू पर उन रसीली गालियों का असर कुछ इस तरह से हुआ की उसने अपनी माँ की गांड के दोनो पाटों को ट्रेक्टर के हेंडल की तरह पकड़ा और अपने लंड के एक्सीलेटर को ज़ोर से दबाकर चुदाई की स्पीड ऐसी बड़ाई की गोरी दोहरी होकर उसकी छाती पर लुढ़क गयी...

बेचारी के मुँह से सिर्फ़ उहह आह की आवाज़ें ही निकल पा रही थी....
वैसे भी इतने मस्त लंड को लेकर वो कुछ और बोलना भी नहीं चाहती थी...




गोरी की आँखे बंद थी ....
और मन में सुकून भी था....
आज बरसों बाद वो अपने घर में रहकर चुदवा रही थी...
इसी घर में अपने पति से चुदाई करवाकर उसने इतने सुशील बच्चे पैदा किए थे,
जो आज उसके काम आ रहे थे...

वो मस्ती में भरकर, नंदू के बालों में उंगलिया फेरने लगी और ज़ोर-2 से चिल्लाने लगी...

''आआआआआआआआअहह नंदू...... मेरे बच्चे ..... उम्म्म्ममममममममम....... चोद अपनी माँ को .......फाड़ दे मेरी चूत आज..... आहहहह ....... म्*म्म्मममममम....''

उपर अपने बिस्तर पर आँखे मूंदकर लेती हुई निशि भी मुस्कुरा दी अपनी माँ की चीखे सुनकर...
और मन ही मन बोली 'अरी माँ .....थोड़ा कम चिल्ला...पड़ोसी जाग जाएँगे...सबको खबर लग जाएगी की गोरी अपने बेटे का लंड ले रही है... हे हे..'

पर नीचे तो गोरी को इस बात से जैसे कोई फ़र्क ही नही पड़ रहा था...
वो तो अपनी ही मस्ती में नंदू के लंड की सवारी करके अपनी प्यास बुझाने में लगी हुई थी...

और जल्द ही उसकी घिसाई रंग लाई और उसकी रस भरी चूत ने ढेर सारा पानी अपने बेटे के लंड पर छोड़ दिया..



''आआआआआआआआआहह उम्म्म्ममममममममममममम...... मजाआाआअ आआआआअ गया....... नंदुऊऊुुुुुुुुउउ''


नंदू भी अपनी बंदूक की नोक पर उस गर्म चिकनाई को महसूस करके हुंकार उठा....
उसने नोट किया था की जब भी उसकी माँ झड़ती थी तो उसकी चूत से एक अजीब सी सुगंध बाहर निकलती थी...
उसका मन तो कर रहा था की अभी अपनी माँ को बिस्तर पर पटके और उसकी चूत में मुँह घुसा कर उस सुगंधित रसमलाई को खा जाए...
पर वो ऐसा नहीं कर पाया...
क्योंकि उसके लंड ने भी झड़ने के संकेत देने शुरू कर दिए थे....
और जल्द ही उसने भी अपनी माँ के रस में अपनी मलाई मिलाकर एक नयी मिठाई का निर्माण कर दिया...



''आआआआआआआआआआआअहह ओह माआआआआआअ..... मजाआाआ आ ग्याआआआआआआअ कसम से...... क्या चूत है रे तेरी.....''

जवाब में गोरी ने मुस्कुराते हुए अपने बेटे के चेहरे पर अपने मुम्मे रगड़कर उसके पसीने को सॉफ किया.....
आख़िर इतनी मेहनत जो की थी उसने....

उसके बाद सॉफ सफाई करके गोरी अपने बेटे के साथ नंगी ही लिपटकर सो गयी.
अब तो उसे निशि का भी कोई डर नही था.

अगले दिन स्कूल मे जाते हुए निशि ने पिंकी को रात वाली सारी बातें बताई...
पिंकी को तो एक बार में विश्वास भी नही हुआ की निशि की माँ भी इस खेल में कूद चुकी है..
पर एक बात की खुशी उसे ज़रूर थी की अब हर तरफ एक जैसा माहौल है...
उसके घर में भी उसकी माँ अब कोई रोक टोक नही करती थी उसपर..
क्योंकि वो खुद भी तो लाला के लंड की दीवानी थी..
और अब निशि के घर में भी कोई टोकने वाला नही होगा, इसका मतलब ये था की उसकी लाइफ का पहला क्रश यानी नंदू अब उसकी चुदाई के लिए बिल्कुल मना नही करेगा...
निशि और उसमें तो पहले से ही इस बात का सौदा हो चुका था, और निशि के अपने भाई से चुदवाने के बाद अब पिंकी का नंबर था, नंदू के लंड की लंबाई नापने का, और इसके लिए निशि के पास एक जोरदार प्लान था..

अगले दिन नंदू का जन्मदिन था...
वैसे तो आज तक नंदू ने कभी अपना जन्मदिन नही मनाया था,
सिर्फ़ निशि को ही शॉंक था, पर इस बार वो अपने प्यारे भाई के बर्थडे को एक यादगार दिन बना देना चाहती थी...
ताकि नंदू भी उसके बर्थडे पर जी जान से उसे खुश करने में कोई कसर ना छोड़े...

लेकिन कल के धमाल से पहले उन्हे एक और धमाल करना था आज...

और वो था लाला पर जोरदार हमला..

ये प्लान पिंकी का था,
उसे पता था की उसके और निशि के अलावा नाज़िया भी लाला से चुदवा चुकी है...
और आज पिंकी का प्लान लाला का स्टेमीना चेक करने का था...

इसलिए स्कूल जाते ही उसने नाज़िया को एक कोने में लेजाकर अपना प्लान समझाया जिसे सुनकर उसकी आँखो में भी चमक आ गयी...
शायद स्कूल के बाद मिलने वाले मज़े को महसूस करके उसके दिल की घंटिया अभी से बजने लगी थी..



आज लाला के रामलाल की घंटी बजने वाली थी इन तीन तिकडियों के हाथों ...
अब देखना ये था की चूत - लंड के खेल में ये तीनो जीतेंगी या वो दोनो...
यानी लाला और उसका रामलाल.
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Reply
03-19-2019, 12:31 PM,
RE: Kamukta kahani हरामी साहूकार
अगले दिन नंदू का जन्मदिन था...वैसे तो आज तक नंदू ने कभी अपना जन्मदिन नही मनाया था, पर इस बार वो अपने प्यारे भाई के बर्थडे को एक यादगार दिन बना देना चाहती थी...ताकि नंदू भी उसके बर्थडे पर जी जान से उसे खुश करने में कोई कसर ना छोड़े...
लेकिन कल के धमाल से पहले उन्हे एक और धमाल करना था आज...
और वो था लाला पर जोरदार हमला..

ये प्लान पिंकी का था, उसे पता था की उसके और निशि के अलावा नाज़िया भी लाला से चुदवा चुकी है...
और आज पिंकी का प्लान लाला का स्टेमीना चेक करने का था...इसलिए स्कूल जाते ही उसने नाज़िया को एक कोने में लेजाकर अपना प्लान समझाया जिसे सुनकर उसकी आँखो में भी चमक आ गयी...शायद स्कूल के बाद मिलने वाले मज़े को महसूस करके उसके दिल की घंटिया अभी से बजने लगी थी.. 

आज लाला के रामलाल की घंटी बजने वाली थी इन तीन तिकडियों के हाथों ...अब देखना ये था की चूत - लंड के खेल में ये तीनो जीतेंगी या वो दोनो...यानी लाला और उसका रामलाल.

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अब आगे
************

इधर स्कूल में वो तीनो अपनी प्लानिंग बना रही थी और उधर लाला आज सुबह से ही अपने घर में बैठा अपने रामलाल को तेल पीला रहा था...
वही ख़ास किस्म का तेल जो उसके लंड को हर तरह की जंग के लिए तैयार रखता था.

वो तेल में नहलाकर उसे अपने पालतू की तरह प्यार और दुलार दे रहा था..

''ले बेटा.....जी भरकर पी ले....यही तेल निकालना है तूने इस गाँव की छोरियों का...साली आजकल तो छप्पर फाड़कर गिर रही है तुझपर...तेरे भी मज़े है और मेरे भी...''

अपने लंड को मसलते-2 वो उसे रगड़ने ही लग गया...
साले ठरकी लोगो की यही प्राब्लम होती है, लंड खड़ा हुआ नही की उसे झाड़ने के बारे में सोचने लगते है...



पर फिर अचानक लाला को ध्यान आया की इतनी सारी चुतों के होते हुए वो भला अपने हाथो को ये तकलीफ़ क्यो दे...
इसलिए उसने मूठ मारने का ख्याल वही त्याग दिया..

ये शायद उसके लिए भी अच्छा था,
क्योंकि उसे पता नही था की उसके उपर आज किस तरह का हमला होने वाला है.

कुछ देर बाद लाला नहा धोकर अपनी दुकान पर आकर बैठ गया.

उसकी चंचल नज़रें हर बार की तरह गली से निकल रही छरहरे जिस्म की लड़कियाँ और भरे जिस्म वाली औरतों पर थी....
अपने एक्सपीरियेन्स का लाभ उठा कर वो आती हुई जवान छोरियों की छाती देखा करता था
और जाती हुई औरतों की गांड.

क्योंकि लड़कियां अपनी नयी - नयी उभरी छातियों को और भी उभार कर चलती थी और औरतें अपनी चुदी हुई रसीली गांड को मटकाकर..



लाला ने हाथ अंदर डालकर अपने अजगर यानी रामलाल को धोती से बाहर निकल लिया और काउंटर के नीचे छुपाकर उसे रगड़ने लगा

''सस्स्स्स्स्स्सस्स....अहह.... रामलाल..... देख ले बेटा....ये जो लोंडिया अपना सीना ताने मेरे सामने से निकल रही है ना, कुछ महीनो बाद इनकी बुर का उद्घाटन भी तू ही करेगा...अभी तो जी भरकर देख ले बस....''

और साथ ही साथ लाला को ये उम्मीद भी थी की आज कोई तो उसकी दुकान पर आ जाए जिसे वो जी भरकर पेल सके...
क्योंकि अपने लंड को तेल पिलाने के बाद उसे अक्सर चूत की कमी महसूस हुआ करती थी..

और लाला की उम्मीद जल्द ही पूरी होती दिख गयी क्योंकि उसे दूर से पिंकी आती दिख गयी.

लाला : "अहह....रामलाल....देख आ गयी नयी नवेली चुड़क्कड़ नंबर वन....इस गाँव की सबसे हसीन लोंडिया , तेरे सपनो की रानी पिंकी...''

लाला उसे देखकर खुश हो ही रहा था की उसके पीछे से निशि निकलकर उसके साथ चलने लगी...
लाला की खुशी एकदम डबल हो गयी और उसके हाथ लंड पर और तेज़ी से चलने लगे

लाला : "बेटा रामलाल....आज लगता है तेरी किस्मत में डबल मज़ा लिखा है....एक की चूत मारूँगा और एक की गांड .....''

और तभी उसे उनके पीछे से निकलकर नाज़िया को आगे आते देखा.

और इस बार खुश होने के बजाए लाला के चेहरे पर चिंता के बादल आ गये..

क्योंकि अपनी उम्र और अपने लंड की केपेसीटी वो भी जानता था...
आज तक उसने कई बार डबल मज़ा लिया था पर एक साथ 3 को पेलने के बारे में तो उसे सपने भी नही आए थे.

उसकी चिंता इतनी गहरी थी की उसका कड़क घीए जैसा लंड, मुरझाए हुए खीरे की तरह लटक कर नीचे झूलने लगा...
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03-19-2019, 12:31 PM,
RE: Kamukta kahani हरामी साहूकार
तब तक काम पीपासा में लिपटी वो तीनो हुस्न की देवियाँ उसकी दुकान तक पहुँच गयी

पिंकी : "लाला...आज हमे देखकर खुश नही हुए....''



पिंकी भी मन ही मन हंस रही थी लाला का चेहरा देखकर,क्योंकि वो भी जानती थी की लाला का उन्हे देखकर क्या हाल हो रहा होगा..

लाला सकपकाते हुए बोला : "अर्रे नही तो...मैं ...मैं भला क्यो खुश नही होऊँगा....तुम्हे देखकर...''



उसने बोलते-2 तीनो के चेहरे की तरफ देखा और हर किसी की आँखो में चुदने की बेकरारी वो सॉफ देख पा रहा था..

निशि बोली : "अगर खुश हो तो हमे भी खुश कर दो ना लाला....चलो अंदर...''

लाला : "अंदर ??....तु ...तुम तीनो के साथ...??''

इस बार नाज़िया बोली : "क्यों ...डर लग रहा है क्या लाला....संभालना मुश्किल होगा क्या हमें एक साथ...''

इतना कहकर तीनो कच्ची कलियाँ खिलखिलाकर हंस दी और एक दूसरे के हाथ पर हाथ मारकर ये भी साबित किया की वो एक साथ ही चुदेगी आज तो...

लाला तो जैसे धर्मसंकट में पड़ चुका था...
हालाँकि तीन चूतें एक साथ मिलने के नाम से ही उसके अंदर अजीब सा रोमांच जागने लगा था पर वो ये भी जानता था की अब वो अपनी जवानी के दिनों वाला बांका जवान नही रहा है, उन दिनों में अगर ये ऑफर मिला होता तो 3 क्या 30 को भी अपने कमरे में ले जाता और सबको पेल डालता..

पर आज भी लाला में इतना गरूर तो जिंदा था ही की वो मज़ाक का पात्र नही बनना चाहता था,
इसलिए अपनी आवाज़ में थोड़ा रोब लाते हुए वो बोला : "देखो छोरियों , लाला ने कभी डरना सीखा ना हे ...वो तो मने तुम तीनों की चिंता हो रई थी वरना म्हारको क्या, एक साथ तीनों आ जाओ...''

इतना कहकर लाला बड़े रोब से उठकर अंदर की तरफ चल दिया...
वो तीनों भी खिलखिलाकर हँसती हुई एक के पीछे एक अंदर आ गयी..
लाला ने दूकान का शटर डाउन कर दिया.

आज लाला उन्हे उपर अपने बेडरूम में ले गया,
भले ही उसका बेड ख़स्ता हालत में था पर वहां चोदने का मज़ा अलग ही था...
एक लंबा सा सोफा भी था जिसपर लिटाकर अलग से चुदाई की जा सकती थी...

बैडरूम में पहुँचते ही तीनो लाला से ऐसे लिपट गयी जैसे बेल किसी पेड़ की शाखा पर लिपटती है...
लाला को हर तरफ से नर्म मुलायम मुम्मो ने घर लिया, उनके गर्म हाथ लाला के जिस्म पर ऐसे फिसलने लगे जैसे साँप..
और तीनो के हाथ रह-रहकर लाला की धोती के उपर से ही अंदर क़ैद रामलाल से टकरा रहे थे...
और रामलाल भी उस हमले को पहचानकर अपने बंकर में खड़ा हो चुका था, उनपर जवाबी हमला करने के लिए...
पर उससे पहले उसका बंकर से बाहर निकलना ज़रूरी था, जो लाला के हाथ में था..

लाला की तो बुरी हालत थी, एक साथ तीन कमसिन चुतों ने उसपर हमला जो कर दिया था...
पर इसका भी इलाज था लाला के पास...

उसने तीनों को एक तरफ किया और खुद एक कोने में रखे सोफे पर बाहुबली की तरह जाकर बैठ गया और बोला : "अर्रे...एक ही बार में सब मज़ा ले लोगी क्या...पहले मुझे अपने हुस्न का जलवा तो दिखाओ...तभी तो असली मज़ा मिलेगा...''

लाला उन्हे बातों मे उलझा कर कोई और प्लान बना लेना चाहता था...
और वो तीनो उसकी बातों में आ भी गयी...

तीनो ने स्कूल ड्रेस पहनी हुई थी....
सफेद रंग की सलवार और उपर नीले रंग का सूट...

तीनो ने मुस्कुराते हुए एक दूसरे की तरफ देखा और फिर धीरे-2 अपनी कमर मटकाते हुए अपनी-2 सलवार निकाल डाली....और फिर उपर की कमीज़ भी...

नाज़िया को छोड़कर उन दोनो ने अंदर कुछ भी नही पहना हुआ था...
इसलिए उपर के कपड़े उतारते ही पिंकी और निशि के नंगे जिस्म सामने आ गये....
लाला कभी निशि की चिकनी चूत देखता तो कभी पिंकी की भरी हुई छातियाँ, और इसी बीच नाज़िया भी अपनी ब्रा पेंटी उतारकर नंगी हो गयी और घूमकर अपनी गांड मटकाकर लाला को रिझाने लगी, क्योंकि उन तीनों में उसी की गांड पर सबसे ज़्यादा चर्बी थी, और जिस लोंडिया का जो अंग सबसे नशीला होता है वो उसका इस्तेमाल करना कभी नही भूलती..
चाहे वो उसकी छाती हो या रसीले होंठ ।
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