Mastaram Stories ओह माय फ़किंग गॉड
10-08-2020, 12:39 PM,
#1
Mastaram Stories ओह माय फ़किंग गॉड
ओह माय फ़किंग गॉड

हेल्लो, सब मुझे बिन्नी नाम से पुकारते है. पूरा नाम यहाँ बताने की जरूरत नहीं है. मैंने काफ़ी सारी कहानिया पढ़ी है. अब मुझे लगता है कि मेरी कहानी भी बतानी चाहिए. ज्यादा वक्त नहीं लेते हुए मैं अपने बारे में बताता हूँ. मै 28 साल का नौजवान हूँ. मैं 5"10' लंबा और एक अच्छे चेहरे वाला लड़का हूँ. फिलहाल मैं सॉफ्टवेयर डेवलपर के तौर पर पिछले 3 साल से काम कर रहा हूँ. आपको पता चल गया होगा की मेरी जॉब कितनी बोरिंग होगी. सच में मैं काफी बोर हो गया था. तो बाकया इस गर्मी की है.

होली के बाद में घर आया था. मेरे घर में ऊपर मंजिल का काम चल रहा था. इसलिए में ऑफिस से छुट्टी लेकर कुछ दिनों के लिए घर पर ही रुक गया. काम काफी हद तक हो चूका था. कुछ छुट-पुट काम बचा हुआ था जो धीरे-धीरे चल रहा था. मेरे घर पर रुकने से मेरे परिवार को फुर्सत मिला और सब मिल कर रिश्तेदारों के पास घुमने चले गए. मैं घर में अकेला काफी बोर हो रहा था. बस टीवी और इन्टरनेट से दिन काट रहा था. मकान का काम भी चल रहा था.

हमारे यहाँ सुबह 9 बजे मिस्त्री-मजदूर आ जाते है. दोपहर को 1 बजे खाना खाने चले जाते है. घन्टे भर के आराम के बाद दुबारा काम पे लगते है और शाम को 5 बजे छुट्टी होती है. यहाँ औरतें भी काम करती है. मैं अनमने ढंग से कभी मिस्त्री का काम देखता तो कभी टीवी. इस तरह से दिन कट रहा था. गर्मी की वजह से बाहर भी नहीं जाता था. एक दिन काम कम होने की वजह से सिर्फ एक मिस्त्री, दो मर्द मजदूर और एक औरत मजदूर आये थे. जब मजदूरिन काम कर रही थी, तो उसकी साड़ी का आँचल थोड़ा गिर गया था और ब्लाउज दिख रहा था, जो की हाथ उठाने के समय ऊपर उठ जा रहा था. उस समय उसकी चुचिओं का निचला हिस्सा बाहर आ रहा था. मैं चोर नजरों से यह देख रहा था. एक दो बार देखने के बाद मजदूरिन से मेरी नजर मिल गयी. उसे मेरी चोरी का पता चल गया. उसने साड़ी ठीक की और बिना मेरी तरफ देखे काम करने लगी. मैं घर के अन्दर चला गया.

दोपहर को सब खाना खाने पास के चौक पे चले गए. सिर्फ मजदूरिन नहीं गयी. वह अपना खाना घर से लाती थी और यहीं खाती थी. वोह बाहर बरामदे में खाना खा रही थी और मैं अन्दर टीवी देख रहा था. अचानक वो अन्दर आई और बोली – “बाबु, पीने का पानी मिलेगा?”

मै किचन से पानी का जग ले उसे दिए. वो खड़े होकर जग से पानी पीने लगी. पानी पीते वक्त काफी पानी उसके छाती में गिर गया. पानी पिने के बाद उसने जग मुझे लौटाया और साड़ी व ब्लाउज में गिरा पानी पोंछने लगी. पानी से उसका ब्लाउज चुचियों से चिपक गया था, जिससे उसके खड़े निप्पल दिख रहे थे. यह देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया था. गर्मी में घर में ज्यादातर बनियान और बॉक्सर ही पहनता था. मेरा लंड बॉक्सर में तम्बू बना रहा था और वो इसे देख रही थी. मैं शर्म से बॉक्सर को ठीक करने लगा.

उसने बड़े आराम से पूछा – “बाबु, तुम्हारी शादी हो गयी है?”

मैं कहा – “नहीं”.

तो उसने कहा – “तो इसको कैसे शांत करते हो? हाथ से हिलाते हो?” मैं तो सन्न रह गया. जवाब देते नहीं बन रहा था.

फिर उसने मेरे बॉक्सर पर हाथ फेरते हुए कहा – “चलो, आज मैं हिला देती हूँ.” फिर उसने मुझे धक्के देकर कुर्सी पे बैठा दिया और मेरा बॉक्सर उतरने लगी. निचे मैंने कुछ नहीं पहना था. मेरा लंड उछल कर बाहर आ गया. उसने दोनों हथेलियों पे ढेर सारा थूक लिया और लंड पे मलने लगी. मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि यह सपना है या हकीकत? मैं आंख बंद कर सिसकारी ले रहा था. मजदूरिन ने दोनों हाथे से मेरे लंड को धीरे-धीरे आगे पीछे करने लगी. कभी वो मेरे सुपारा को दबाती, तो कभी मेरे गोलियों को. मैं तो जैसे जन्नत की सैर कर रहा था. अचानक उसने अपनी गति बढ़ा दी. मै आँख खोल कर देखा. वो मुझे देखकर मुस्कुरा दी.

10 मिनट के बाद मेरा पूरा शरीर जकड गया. मेरी धड़कन बढ़ गयी और एक तेज झटके के साथ मेरा बांध छुट गया. मेरा सारा का सारा वीर्य उसकी छाती और फ़र्श में जा गिरा. वो अब भी मेरी लिंग हो हिलाए जा रही थी. मेरे लंड से सारा रस निचोड़ने के बाद उसने अपनी साडी ठीक की और बाहर चली गयी. जाते वक्त मुस्कुराते हुए बोली – “बाबु, साफ़ कर लो.”

कुछ देर बाद सारे लोग आ गए. वह भी काम में लग गयी. वह वैसे वर्ताव कर रही थी जैसे कुछ हुआ ही नहीं. शाम को मैंने सारे लोगो का मेहताना दिया. पैसे लेते वक्त वह बोली – “बाबु, मालकिन नहीं है?”

मैंने कहा – “नहीं, माँ रिश्तेदारों के यहाँ गयी है. 2-3 दिनों में आ जाएगी.”

उसने बिल्कुल साधारण भाव से कहा – “ठीक है.” उस रात को मै सो नहीं पाया. हमेशा उसकी चुचिओं का ख्याल आ रहा था और मेरा लंड खड़ा हो रहा था. रात को मैंने बिस्तर पर ही हस्त-मैथुन किया और सो गया.

सुबह बाहर के दरवाजे की घन्टी की आवाज से मेरी नींद खुली. मुझे देर से उठने की आदत है. मैं झुंझला गया की इतनी सुबह कौन परेशान करने आ गया. घड़ी देखा, साढ़े सात बज रहे थे. मैंने दरवाजा खोला. देखा वह मजदूरिन खड़ी है बाहर. मैं तो हैरान हो गया की इतनी जल्दी कैसे आ गयी. सारे मिस्त्री-मजदूर 9 बजे के बाद ही आते है. मेरे दरवाजा खोलते ही वह अन्दर आ गयी. मैंने उसे गौर से देखा. वह आज बिल्कुल साफ़-सुथरी होकर आई थी. साफ़ कपड़े भी पहने थे. थोड़ा श्रृंगार भी की थी. मैंने अंदाजे से उसकी उम्र लगभग 28-30 होगी. छोटा कद, गदराई बदन, सांवला चेहरा, बड़ी आँखे, बड़े लेकिन सुडौल स्तन, सपाट पेट और औसत गांड. कुल मिलाकर औरत के हिसाब से ख़राब नहीं थी.

अन्दर आते वह देखकर मुस्कुराई, मेरे लंड पर हल्की थपकी देके पूछा – “रात को नींद कैसी रही?”

मैंने साधारण ढंग से कहा – “ठीक था.” मैंने पूछा – “इतनी जल्दी काम पे आ गयी? अभी तो कोई भी नहीं आता है.”

उसने एक सेक्सी मुस्कान देते हुए कहा – “बाबु, आप बड़े भोले हो. कुछ काम सबके सामने नहीं किये जाते है.”

जवाब में मैं भी मुस्कुराया.
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10-08-2020, 12:40 PM,
#2
RE: Mastaram Stories ओह माय फ़किंग गॉड

मुझे अपनी किस्मत पर भरोसा नहीं हो रहा था. आखिर मेरी बोरिंग जिंदगी में पहली बार कुछ दिलचस्प हो रहा था.

मैंने पूछा – “तुम्हारा नाम क्या है?”

उसने मुस्कुराते हुए कहा – “सोमलता”.

“अच्छा नाम है”, मैंने भी मुस्कुराते हुए जबाब दिया. वोह अन्दर आई और एक कुर्सी पर बैठ गयी. मैंने अभी तक ब्रश भी नहीं किया था. मैं कहा – “सुनो सोमलता, तुम बैठो. मैं जल्दी से ब्रश कर आता हूँ.”

वह मेरी और देखी, मुस्कुराई और बोली – “अरे बाबु, बाद में नहा ही लेना. अभी हमारे पास ज्यादा समय नहीं है.” और हल्की सी आँख भी मारी.

मैं जोर से हंसा. “एक कप चाय हो सकती है?” मैंने हँसते हुए पूछा.

“हाँ, क्यों नहीं”, उसने भी हँसते हुए कहा और मेरे साथ रसोई में आ गयी.

मै गैस ओवन चालू कर चाय बनाने लगा. वह मेरे पीछे खड़ी थी. उसने कहा – “बाबु तुम तो बाहर बड़े शहर में रहते हो. अच्छी नौकरी भी करते हो. जरूर तुम्हारी कोई लड़की दोस्त होगी. वोह क्या कहते है अंग्रेजी में? हाँ, गर्लफ्रेंड”.

मुझे हंसी आई. मैंने कहा – “हाँ थी. अब नहीं है.”

उसने बड़ी मासूमियत से पूछा – “क्यों?”

मुझे समझ में नहीं आ रहा था मैं क्या जबाब दूँ. मैं आखिर में कहा – “यार, हमारे बीच कुछ सही से जम नहीं रहा था इसलिए अलग हो गया”

उसने एक गहरी साँस लेकर कहा – “चलो अच्छा हुआ बाबु. जब नहीं जमे तो अलग होना ही अच्छा होता है.” फिर उसने चुहलबाजी से पूछा – “तो कब से यह तुम्हारा लंड चूत के लिए तरस रहा है?” और मेरे लंड को बॉक्सर के ऊपर से एक थपकी दी.

मै चाय कप में उड़ेलते हुए कहा – “लगभग 8 महीने हो गए”.

“ओ, बेचारा. कब से तरस रहा है”, यह कह उसने मेरे लंड को कपड़े के ऊपर से मसल दिया.

“अआह्ह”, मेरे मुंह से एक मीठी सिसकारी निकली. “मेरी छोडो. तुम अपने बारे में बताओ. तुमने मुझे कैसे अपने जाल में फंसा लिया?”, मैंने चाय का कप आगे बढ़ाते हुए पूछा और आँख मारी. हम सोफे पे बैठ गए अपने-अपने चाय के कप के साथ.

उसने चाय की एक चुस्की ली और सोफे पर पीठ गड़ाते हुए आराम से बैठ गयी. बैठने के दौरान उसकी साड़ी का पल्लू थोड़ा निचे खिसक गया. उसने गहरे बैंगनी रंग की ब्लाउज पहनी थी. निचे का सफ़ेद ब्रा का पता ब्लाउज के ऊपर से चल रहा था. उसकी चुचियाँ ब्रा पहनने की वजह से कसी हुई लग रही थी. उसने गहरे गले में कोई आदिवासी टैटू बनाया था, जो आदिवासी औरतो में आम बात है.

वह मेरी आँखों में देखी और बताना शुरू किया – “बाबु, 5 साल पहले मेरी शादी हुई. मेरा मरद दिल्ली में काम करता था. मै भी कुछ महीने वहां रही उसके साथ, शादी के बाद. फिर वोह मुझे अपने गाँव छोड़ गया. एक साल हो गए, न कभी घर आया न ही कोई खबर किया. सब कहते है कि उसने वहां शादी-बच्चे कर लिया है. मेरे सास-ससुर भी मर गए. मैं अकेली रहती हूँ और पेट पलने के लिए मजदूरी करती हूँ. गाँव के मर्दों से बहुत डर लगता है बाबु. सब अकेली औरत समझकर हमेशा पीछे लगे रहते है. दो दिन पहले जब मैं काम कर रही थी. मैं सामान लाने घर के पिछवाड़े में गयी. तुम तब पुराने बाथरूम में नहाने गए थे. मैंने जब टूटे दरवाजे से देखी तो तुम अपने लंड से खेल रहे थे. मैं समझ गयी की तुम्हारा भी मेरा जैसा ही हाल है. तुमसे चुदवाने से मुझे कोई डर भी नहीं है. और तुम तो अच्छे आदमी हो बाबु.” उसने बड़ी मासूमियत से मेरी तरफ मुस्कुरा दी.

मुझे न जाने क्यों उसपे बड़ा प्यार आ रहा था. इसमें हवस जैसी कोई बात नहीं थी. यह तो दिल की बात थी. मैं अपने आप पर ही हंस दिया.

सोमलता ने उत्सुकता से पूछा – “क्या हुआ बाबु?”

मैंने कहा – “कुछ नहीं.”

वह थोड़ा उदास हो कहा – “जानती हूँ. तुम सोच रहे होगे कि मुझ जैसी 35 साल की गंवार औरत के साथ क्या कर रहा हूँ. यही ना?”

मैं चाय का कप मेज पर रखा और उसके और नजदीक जाकर उसके दोनों कंधे पर हाथ रखकर कहा – “नहीं रे. मुझे अपने किस्मत पर भरोसा नहीं हो रहा है. इसलिए हंस रहा था. सबकुछ इतना अचानक हो रहा है ना.”

उसने अपना चेहरा मेरे सामने की और मेरी आँखों में गहराई से देखकर कहा – “मजाक मत करो बाबु. मैं कुछ पाने के लिए यह नहीं कर रही हूँ. तुम सच में मुझको अच्छे लगते हो.”

मैं दोनों हथेलियों से उसके नरम गालो को प्यार से दबाया और उसके होंठो को बिल्कुल अपने होंठो के पास लाते हुए कहा – “मुझे पता है रे.”

वह थोड़ा शरमाते हुए मुस्कुरा दी. हमारे होंठ इतने पास-पास थे की हमें एक-दुसरे के गर्म सांसो का अनुभव हो रहा था. अब मैंने अपने होंठो को उसके होंठो पर रख दिया. सोमलता की लम्बाई मुझसे लगभग एक फीट कम थी. मुझे झुकना पड़ा उसके होंठो को ठीक से पाने के लिए. उसके दोनों बांहों से मेरी कमर को कास कर पकड़ लिया. मेरी दोनों हथेलियाँ अभी भी उसकी गालो को थामे हुए थी.

सोमलता अपने आँखों और होठों को बंद किये हुए थी. मैं उसकी बाहरी होंठों को जोर-जोर से चूस रहा था. थोड़ी देर में उसने अपने होंठो को अलग किया और उसके उसके मुँह से अजीब सी तेज महक आई. शायद यह कच्चे प्याज की महक थी. मै अपने मुँह को परे हटा दिया. वह आँख खोलकर नजर मिलकर बोली – “क्या हुआ बाबु? अच्छा नहीं लगा?”

मै बस मुस्कुराकर रह गया. शायद उसको असली बात का पता चल गया. वह थोड़ा उदास हो गयी. मैंने उसको बाँहों के कसकर भर लिया और बड़े प्यार से कहा – “सोमलता रानी, कोई बात नहीं. मुझे तुम्हारी महक अच्छी लगी. बस आदत नहीं है ना” यह कहकर मैंने उसकी गांड को कसकर दबाया.

वह थोड़ा शरमाकर बोली – “बाबु तुम बड़े बदमाश हो” और मै जोर से हंस दिया. मैंने अपने होंठो को उसके होंठो से मिलाया और अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दिया.

सोमलता मेरे जीभ को धीरे-धीरे चूस रही थी. मैं तो जैसे सातवे आसमान में था. मै अपने हाथो को उसकी पीठ पर ले गया. उसकी पीठ नरम नहीं थी. थोड़ा सख्त था, क्योंकि वह मजदूरिन थी. लेकिन उसकी त्वचा काफी चिकनी थी. मैं उसकी पीठ को सहला रहा था और बीच-बीच में ब्लाउज के अन्दर ऊँगली डालकर उसकी ब्रा की फीते को खींचता भी था. वह तो जैसे पुरी तरह से मुझ में खो गयी थी. हम लगभग 15 मिनट से चुम्मा-चाटी कर रहे थे. अचानक वह रुक गयी और दोनों हाथों से मेरी छाती पर हल्का सा धक्का देकर अलग हो गयी.

मैंने हैरानी से पूछा – “क्या हुआ रानी?”

वह मेरी बॉक्सर की बॉर्डर को खींच कर बोली – “बाबु, ज्यादा समय नहीं. सारे काम करने वाले आ जायेंगे. हमे जल्दी काम निपटाना होगा. चलो तुम्हारे कमरे में चलते है.” वह बॉक्सर के साथ मुझे खीचने लगी.

मैं बोला – “मेरे कमरे में नहीं. वह कमरा रस्ते के सामने है. बाहर आवाज जाएगी. हम अंदर के कमरे में जायेंगे.” मैंने बाहरी गेट को अन्दर से बंद किया और सोमलता को कमर से पकड़कर अन्दर कमरे में ले गया.

अन्दर का कमरा कभी इस्तेमाल नहीं होता था. एक तो काफी अँधेरा था और सामानों से ठुंसा पड़ा था. कोई खाट भी नहीं था. मै एक गद्दा लाया और फर्श पर बिछाया. मैंने शरारत भरी नज़रो से सोमलता की और देखा. वह भी मंद-मंद मुस्कुरा रही थी. मैंने उसकी हाथ को खींचकर अपने करीब लाया. उसकी सांसे तेज चल रही थी. मैं काफी जोर से सोमलता को बाँहों में जकड़ा हुआ था. मेरा लंड लोहे जैसा सख्त हो गया था जो उसकी पेट से चिपका हुआ था. अब मैं उसकी चिकनी बदन का दर्शन करना चाहता था. मैं उसकी साड़ी के पल्लू को हटा ही रहा था कि उसने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे रोक दिया.

“क्या हुआ रानी?” मैंने पूछा.

वह इठलाते हुए बोली – “बाबु, आप आराम से बैठो. आज सब कुछ मैं करुँगी.”

मैं उसकी बायीं गाल पर एक चुम्मा जड़ते हुए ख़ुशी से कहा – “जैसे तुम्हारी इच्छा रानी” और मैं गद्दे पर गिर गया. दीवार से पीठ टिकाकर मैं ललचाई नजरों से सामने खड़ी सोमलता को देख रहा था. वह मेरी आँखों में देखकर धीरे-धीरे मुस्कुरा रही थी.

वह धीरे से अपना पल्लू हटायी और साड़ी को समेटते हुए अपने कमर से खोलने लगी. पुरी साड़ी को खोलकर बगल पड़ी कुर्सी में रक्ख दी. अब मेरी रानी ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी थी. गहरे बैंगनी रंग के ब्लाउज और अंदर से झांकता हुआ सफ़ेद ब्रा, कमाल लग रही थी. निचे सफ़ेद पेटीकोट पहने हुई थी. उसका पेट सपाट था लेकिन नाभि गहरी थी. स्तनों का आकर लगभग 36 होगा जो उसकी ब्लाउज में कैद थी. अब उसने अपनी ब्लाउज के हुक खोलना शुरू किया. मेरा लंड तो बॉक्सर फाड़ने को बेताब था. मैं बॉक्सर के ऊपर से उसको सहला रहा था. धीरे-धीरे सारे हुक खोलने के बाद उसने ब्लाउज को कंधे से सरकाना शुरू किया और मेरी धड़कन बढ़ने लगी. मुझे खुद अपनी धड़कन की आवाज सुनाई दे रही थी. लंड का तो हाल ना पूछो, ऐसा लगता था की शरीर का सारा खून लंड की नसों में आ गया है. अब सोमलता ने पूरा ब्लाउज उतार दिया. मेरे मुँह से निकला – “ओह माय फ़किंग गॉड !”
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10-08-2020, 12:40 PM,
#3
RE: Mastaram Stories ओह माय फ़किंग गॉड
अन्दर सफ़ेद ब्रा भले ही पुराना ढंग का हो लेकिन उसकी चूचियां कमाल की थी. ब्रा चुचियों के हिसाब से छोटी थी या फिर चुदास ने चुचियों को ज्यादा बड़ा बना दिया था. पुराना डिजाईन होने के कारण ब्रा चुचियों को पुरी तरह से ढके हुए था. लेकिन दो पहाड़ो के बीच की गहरी घाटी किसी भी लंड को पानी पानी कर सकता था. अब बारी पेटीकोट की थी. उसने एक झटके में नाडा खिंच दिए और पेटीकोट उसके पैरों में गिर गया. पेटीकोट को पैरो से उठाया और कुर्सी में रख दी. नीचे एक चड्डी पहनी थी जो कुछ कुछ मेरे बॉक्सर जैसा लग रहा था. वह चड्डी कम और मर्दों का फुल अंडरवियर ज्यादा लग रहा था जो ढीला-ढाला था. चड्डी से उसकी चूत की हालत का पता नहीं चल रहा था जो मेरी बेकरारी को और बढ़ा रही थी.

उसने अपने दोनों हाथ पीछे कर लिए और मुझे देखते हुए बोली – “कैसा है बाबु?”

मैंने गद्दे से उछलते हुए कहा – “मस्त है रानी. अब आजा अपने राजा के पास.”

वह थोड़ा हंसी और बोली – “बाबु, अभी इन कपड़ो को तो उतारने दो.” और अपने दोनों हथेलियों से बड़े बड़े दूध की टंकियो को मसलने लगी.

अब मेरा लंड मुझे तकलीफ दे रहा था. लंड का सुपारा लाल हो गया था और अपने साइज़ से 1 इंच ज्यादा बड़ा हो गया था. मैं अपनी ज़िन्दगी में कभी इतना ज्यादा उत्तेजित नहीं हुआ. लंड को अब ज्यादा देर बॉक्सर में रखना मुश्किल लग रहा था. मैंने गांड को ऊपर उठाते हुए बॉक्सर को घुटनों में लाया और लंड को बांये हाथ से सहलाने लगा.

यह देखकर सोमलता दौड़ कर मेरे पास आई और बगल में बैठ कर मासूमियत से कहा – “क्या कर रहे हो बाबु? मेरे होते हुए तुम खुद हाथ से हिला रहे हो.”

मैंने उसके गाल पे एक चुम्मी लेकर कहा – “डार्लिंग रानी, यह अब बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है.” यह कह कर मैंने उसको अपने और खीचा और ब्रा का हूंक खोलने लगा. हुक खुल नहीं रही थी और मैं ज्यादा जोर लगा रहा था.

उसने मुझे हल्का धक्का देकर अलग किया और बोली – “छोड़ो बाबु, तुम तो इसको तोड़ ही डालोगे. मैं खुद ही खोलूंगी.”

मैंने फिर उसे अपनी और खींचते हुए कहा – “क्यों चिंता करती हो रानी, नया लाकर दूंगा. वो भी नया डिजाईन का.”

फिर अलग होते हुए वह बोली – “नहीं बाबु, मैं कहा था ना, मैं कुछ पाने के लिए नहीं कर रही हूँ.” उसने अपनी पीठ मेरी तरफ़ घुमाकर ब्रा का हुक खोली और चड्डी उतारने लगी.

मेरे लंड में तो जैसे आग लग गयी. मैं उसको नंगी देखने के लिए उतावला हो रहा था. अब सोमलता मेरी और घूमी लेकिन उसकी चूचियां दाहिने हाथ से और चूत बांये हाथ से ढके थे. वह काफी धीरे धीरे बढ़ते हुए मेरे पास आई और बगल में बैठ गयी. भले यह औरत गंवार हो लेकिन अपने सेक्स पार्टनर को कैसा छेड़ा जाता है यह अच्छी तरह से जानती थी. वह मेरे सामने चिपककर बैठ गयी लेकिन हाथ अब भी उसकी इज्जत को ढके थे.

मेरी रानी ने अपने रसीले होंठो को मेरे होंठो के ऊपर रखा और मुझे अपनी बांहों के घेरे में कसकर पकड़ लिया. मेरा भी हाथ उसकी नंगी पीठ को सहला रही थी. वह इतनी जोर से मुझे चूम रही थी कि मुझे साँस लेना भी मुश्किल लग रहा था. हम दोनों एक दुसरे के नंगी पीठ को नापने में लगे थे. अब मेरी उँगलियाँ उसकी गांड के दरारों में जा पहुंची. उसकी कमर के नीचे और गांड के दरार में हल्का बाल था. मैं उस दरार को जोर-जोर से रगड़ने लगा. इस रगड़ ने उसको गरम कर दिया. वह बार-बार सिसिकारी मारती और मुझे जोर से कस लेती.

हम 10 मिनट से लगातार होंठो को चुसे जा रहे थे. कभी वह मेरी जीभ को चूसती तो कभी मैं. दोनों के लार मिल कर एक नया स्वाद पैदा कर रहे थे मुँह में. अब सोमलता मेरे होंठो को छोड़ कर मेरी गर्दन को चूमने लगी. चुमते चुमते अब वह मेरी छाती पर आ गयी. मेरी छाती पर बाल है. वह मेरे छाती के निप्पल को चूसती और हाथ से बदन के बाल भी खींचती. जब-जब वह मेरा बाल को खींचती, मुझे मीठा सा दर्द होता. यह मेरी ज़िन्दगी का सबसे अच्छा सेक्स अनुभव था. अब तो वह मुझे उकसाने के लिए मेरे निप्पल को दांत से काटने भी लगी थी. काटने पर मैं “आह” करता और वह मेरे बाल को खींचती. मैं फिर दर्द से “आह” करता. अब मेरा सब्र का बांध टूटने लगा. मैं उसकी चुचियों और चूत का दर्शन करना चाहता था और उसे मसलना चाहता था.

मैं सोमलता को कमर के नीचे से पकड़ा और अपने नीचे लाना चाहा. उसने मुझे रोका और धीरे से कान में बोली – “बाबु, आज तुम मुझे भोगो लेकिन मेरी तरह से. तुम आराम से लेटो, मैं तुम्हे मजा दूंगी. इसके बाद तुम जैसे चाहे वैसे मुझे भोगना. ठीक है.”

“ठीक है मेरी रानी!!!” – मैंने एक और दमदार चुम्मा उसके गाल पर जड़ दिया. अब मैं सीधे होकर गद्दे पर लेट गया और सोमलता के मज़े के लिए तैयार हो गया. अब मेरी रानी सोमलता ने अपने दोनों टांगों को चीरते हुए मेरे कमर पर बैठ गई. उसकी छाती बिल्कुल मेरे मुँह के सामने थी. मैं पहली बार उसकी नंगी रसदार चुचियों को देख रहा था. 36 डी साइज़ की चूचियां थोड़ी-सी लटकी थी, निप्पल का घेरा बड़ा और गहरे स्लेटी रंग का था. सेक्स की चुदास में निप्पल कड़े हो गए थे. मेरी हालत उस प्यासे जैसी हो गयी थी जिसके आँख के सामने ठंडी बियर की बोतलें रखी है लेकिन वो खुद पी नहीं सकता.

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10-08-2020, 12:40 PM,
#4
RE: Mastaram Stories ओह माय फ़किंग गॉड


सोमलता मेरी बेकरारी समझ के और नखरे कर रही थी. शरारत भरी नजरो से देखते हुए अपने दोनों हाथों से दूध के डब्बों को मसल रही थी. फिर अपने चुचियों को मेरी आँखों के सामने लाकर बोली – “बाबु, मेरी छातियों में बहुत दर्द है. थोड़ा दबा दो ना.” और मेरा दाहिना हाथ अपनी बायीं मम्मे पर रख दी.

मैं पुरी ताकत से उसको दबाने लगा. उसकी चूचियां जरा-भी नरम नहीं थे. सख्त मम्मे को दबाने में ज्यादा ताकत लगाना पड़ रहा था और मेरी ताकत उसकी मुँह से जोर की सिसकारी निकाल रही थी. मैंने उसके कान ने कहा – “रानी गला सुख रहा है. थोड़ा दूध पिलायोगी?”

वह मेरी कान खींचते हुए बोली – “मालकिन को बताऊ की तुम दूसरी औरतों से दूध मागते हो?”

मैंने हँसते हुए कहा – “बाद में बोलना. अभी मेरो प्यास मत बड़ा. जल्दी कर.”

उस ने उंगलियों से दायें मम्मे को दबाकर निप्पल आगे करते हुए मेरे मुँह में मम्मे घुंसा दी जैसे कोई माँ अपनी बच्चे को दूध पिला रही हो. मैं जोर जोर से निप्पल चूसने लगा और दांत से मम्मे को काटने भी लगा. दूसरा हाथ दूसरी मम्मे को ऐसे दबाये जा रहा था जैसे कोई पके आम से रस निकल रहा हो. मेरी इस चूची-क्रिया ने सोमलता को पुरी तरह से उत्तेजित कर दिया. वह आंखे बंद कर “उम्म्म्म, अआह्ह, माई री, उन्ह्ह्हह” कर रही थी. मैं लगभग 5 मिनट तक मम्मे बदल-बदल कर उसको मज़े देता और मज़े लेता रहा. वह मेरी गर्दन जोर से पकडे रही और बीच-बीच में मुझे झंकझोर भी देती.

अब मैं असली मज़े के लिए तैयार था. मेरा 8 महीने का उपवास टूटने वाला था. मैंने मम्मों को छोड़कर उसकी होंठो पर एक ज़ोरदार चुम्मा डालकर बोला – “अब असली खेल शुरू करे रानी?”

उसने सिर्फ हाँ में सर हिलाया और मुझे भी एक रसदार चुम्मा वापस किया. अब वह मेरी कमर से सरककर मेरे घुटनों पर आ गयी. मेरे लिंग को दोनों हथेलियों में लिया और प्यार से सहलाने लगी. मुँह से ढेर सारा थूक हथेली में लेकर लंड को गीला करने लगी. थोड़ा सा थूक अपनी चूत पर भी मलने लगी. उसकी चूत पर झांटो का जंगल था. मुझे चूत की दीवारों, भगनासा, छेद किसी भी चीज का पता नहीं चल रहा था. मैंने उसकी चूत में ऊँगली फिराई. उसकी चूत गीली हो चुकी थी और चिपचिपा रस निकल रहा था. मैं अपनी उँगलियों को सुंघा और मुँह में डालकर उसका स्वाद लिया. मदहोश करने वाली महक थी.

सोमलता ने मेरे माथे पे हलके से मरते हुए डांटा – “छि बाबु, यह भी कोई चाटने वाली चीज है. कितना गन्दा है.”

मैंने दुबारा ऊँगली मुँह में लिया और फिर से उसकी चूत टटोलने लगा. मैं जंगल में गड्ढा खोंज नहीं पा रहा था.

उसने मेरे हाथ को हटाया और कहा – “हटो! तुम तो छेद खोजने में ही दिन निकाल दोगे.” और मेरे लिंग को पकड़ कर चूत पे टिका दी. फिर झांटों को हटाकर लिंग के सुपारे को चूत का दरवाजा दिखा दिया.

मेरा सुपारा फूलकर लाल आलू जैसा हो गया था. उसने मेरे कंधे को पकड़कर एक धक्का दी और फक्क की आवाज का साथ लंड का आधा हिस्सा अन्दर चला गया. “आअह्ह्ह्ह” मैंने आँख बंद कर सिसकारी मारी. उसकी चूत की गर्मी मेरे लंड को पिघला रही थी. थोड़ी देर रूककर फिर से उसने धक्का दिया और इसबार पूरा ला पूरा लंड उसकी बुर में समचुका था.

वह “माई री” की चीख़ के साथ मेरे छाती पर लेट गयी.

मैंने उसकी चेहरे को उठाकर पूछा – “सब ठीक है रानी? तुम कहो तो मैं ऊपर आ जाऊ?”

उसमे मेरे गाल पर एक हल्का चुम्मा देकर कहा – “नहीं बाबु” और फिर से मेरे छाती पर दोनों हाथ टीकाकार धीरे-धीरे ऊपर निचे करने लगी. मेरा लंड जैसे किसी भट्टी में पेल रहा था. मेरे पेट में अजीब-सी हलचल शुरू हो गयी थी और आँख बंद होगयी थी. पूरा कमरा हमारी सिसकारी और चुदाई की आवाज से भर गया था. उसकी आपनी रफ़्तार बढ़ा ली. उसकी आँखें बंद थी, उछालने के साथ-साथ उसकी मम्मे भी उछल रहे थे जो मेरे लंड को और सख्त बना रहे थे. कुछ देर बाद वह जोर से सिसकारी मारी और निढाल होकर मेरी छाती पर गिर गयी. उसका चेहरा पसीने से भींगा और साँस तेज चल रही थी. कुछ देर बाद उसकी चूत में सिकुडन हुई और रस की धारा छुट गई. एक मिनट के बाद दुबारा वह अपनी गांड उछलने लगी और तेज रफ़्तार से.

अब मेरी बारी थी. मेरा लंड फूलने लगा. मैं सोमलता को बताया – “रानी, मैं भी आने वाला हूँ.”
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10-08-2020, 12:40 PM,
#5
RE: Mastaram Stories ओह माय फ़किंग गॉड


वह फ़ौरन मेरे ऊपर से हट गयो और मेरे लंड को दोनों हथेलियों में लेकर मेरी मुठ मरने लगी. 7-8 झटको के बाद मेरा लंड तेज तेज पिचकारी मरने लगा. मेरा बिर्य उछल कर उसके सिने और मेरे पेट पर आ गिरा. वह तबतक मेरे लंड को हिलाए जा रही थी जबतक की वह सिकुड़ नहीं गया.

इसके बाद उसने मेरे होंठो का रस चूसा और उठकर खड़ी हुई और धीरे-से पूछा – “बाबु, नहाने का कमरा किधर है?”

मैंने हलके से आँख खोलकर अपनी दायें और इशारा किया. मैं इस पल को महसूस कर रहा था आँख बंद कर. बाथरूम से नल की आवाज आ रही थी. थोड़ी देर में वह वापस आई तोलिये से अपने बदल को पोंछते हुए. मैं लेते हुए उसकी नंगी बदन को देख रहा था. वह अपने कपड़े पहनने लगी. मेरी और देखकर मुस्कुरा रही थी. उसकी नंगी बदन को देखकर मेरा लंड फिर से जागने लगा. वह सारे कपड़े पहन कर तोलिया रखने बाथरूम से गयी तो मैं भी पीछे से गया और उसको पीछे से पकड़ के उसकी मम्मो को दबाने लगा.

वह मेरी और पलटकर बोली – “बाबु, अभी और नहीं. सबके आने का वक़्त हो गया है” फिर मेरे लंड को देखी, मेरा लंड लगभग खड़ा हो चूका था. वह बोली – “इसको मैं ठीक करती हूँ”. बाथरूम में तेल की शीशी लेकर थोड़ा तेल हथेलियों में लगाकर मेरे लंड को मसलने लगी. मेरे लंड की पानी निकाल कर तोलिये से पोंछते हुए बोली – “बाबु, मालकिन कब आएगी?”

“परसों” मैंने कहा. “ठीक है मैं कल फिर आउंगी.”

सोमलता कमरे से बाहर चली गई. मैं बहुत खुश था क्योंकि यह मेरी जिंदगी की सबसे बढ़िया सेक्स था. मैं हमेशा से ही एक अच्छा बेटा, अच्छा छात्र, अच्छा कर्मचारी बनने में ही अपनी आधी जिंदगी गुजारी थी. मेरी पिछली प्रेमिका से मेरा नाता टूटने का कारण थी यही था. खैर पिछली जिंदगी तो बीत गयी, अब वक़्त मुझे इतना अच्छा मौका दे रही है मुझे इसका इस्तेमाल करना चाहिए. मैं नंगा ही कमरे से बाहर गया. वह बाहर बरामदे में बैठकर बाकी काम करने वाले का इंतज़ार कर रही थी. मैं मेन गेट बंद कर बाथरूम में गया, ब्रश किया, नहाया खासकर मेरे लिंग को अच्छे तरह से धोया. मैंने पाया की मेरे लंड के आस-पास झांट काफी बढ़ गए है. मैं अगले आधे घन्टे उसको कैंची से काटने में बिताये फिर अच्छे तरह से नहाये. नहाते नहाते फिर सोमलता की बदन, उसकी चूचियां, उसकी मस्ती मेरे दिमाग में घुम रही थी जो मेरे लंड को फुल-साइज़ में लाने लगी. मुझसे रहा नहीं गया और शावर में ही मुठ मरने लगा. मैं कल सुबह तक का इंतज़ार नहीं कर सकता था उसकी चूत पाने के लिए. मेरे पास आज और कल का समय था फिर मेरे परिवार के आने के बाद मुझे छुपकर मुठ मारकर की काम निकलना पड़ेगा.

मैं बाथरूम से बाहर निकला और सोमलता को फिर से बिस्तर में लाने का तरीका सोचने लगा. 9 बज गए थे. बाकी के काम करनेवाले आ गए थे, सोमलता बिल्कुल साधारण भाव से काम कर रही थी और मुझसे तो बिल्कुल साधारण थी. न ज्यादा चिपक रही थी ना ही ज्यादा भाग रही थी. एक औरत जो मेरे साथ सोई, मुझे जिंदगी का सबसे अच्छा सेक्स अनुभव दी, वह मेरे सामने मजदूरी कर रही है यह देखकर मुझे दुःख हो रहा था लेकिन मैं कुछ नहीं कर सकता था.

जैसे-तैसे दोपहर हुआ. बाकी सबके जाने के बाद वह खाना खाकर पानी पीने अन्दर आई. मैंने उसको लपक लिया और एक चुम्मा जड़ दिया होंठो पर.

वह मुझे धक्का देकर अलग हो गयी और बनावटी गुस्से से बोली – “तुम मर्दों को और कुछ नहीं सूझता क्या? हमेशा चूत और चूची में ही घुंसे रहते हो. अभी नहीं हो सकता. मुझे पानी पिलाओ.”

मैं शरारत से अपनी बॉक्सर नीचे करते हुए लंड हिलाकर बोला – “इसका पानी तो तुम खुद निकल कर पी सकती हो”

वह दौड़ कर मेरा बॉक्सर ऊपर कर धीरे से चिल्लाई – “क्या करते हो बाबु? थोड़ा ख्याल रखो, इस भरी दोपहर में ऐसा मत करो. जाओ पीने का पानी लाकर दो.”

मैं किचेन से पानी लाया और देते हुए बोला – “रानी, हमारे पास सिर्फ दो दिन है और मैं कल सुबह का इंतज़ार नहीं कर सकता. आज रात भर तुम यहाँ नहीं आ सकती?”

वह पानी पीकर जग मुझे देकर बोली – “मुझे घर जाना पड़ेगा और कल काम पर आना भी पड़ेगा”

मैंने बोला – “अरे उसकी चिंता मर करो. मैं देर रात को तुम्हे तुम्हरे गाँव से लेकर आऊंगा और कल की छुट्टी ले लो. बोलो की तबियत ख़राब है, काम पे नहीं आ सकती.”

वह जाते हुए बोली – “ठीक है. सोच के देखूंगी.”

मैं घुटनों पर बैठकर उसकी दोनों हाथो को पकड़कर विनती की – “प्लीज रानी”

वह हँसते हुए बोली – “ठीक है” और अपनी कमर कुछ ज्यादा ही लचकते हुए चली गयी.
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10-08-2020, 12:41 PM,
#6
RE: Mastaram Stories ओह माय फ़किंग गॉड

शाम को जब मैंने सारे लोगो का भुगतान किया तो वह ठेकेदार को बोली – “बाबु, मेरा सर बहुत दुःख रहा है मैं कल नहीं आ पाऊँगी. घर में आराम करुँगी.”

मैं कहा – “मेरे पास सरदर्द की दवा रक्खी है. तुम चाहो तो ले सकती हो.”

इतने में ठेकेदार बोला – “ठीक है. तू कल मत आ. वैसे कल काम भी कम है. हम लोग चलते है. तू साहब से दवा लेकर आ पीछे.”

सोमलता मेरे पीछे घर के अन्दर आई. मैंने उसे एक फ़ोन दिया जो पहले से ही साइलेंट मोड पर था और उसका नंबर नया था. मैं फ़ोन देकर बोला – “देख रात के 11 बजे मैं मोटर बाइक से आऊंगा और तुझे फ़ोन करूँगा. तू बस यह अपने साथ रखना. फ़ोन आने पर यह वाला बटन दबाना और मुझसे बात कर लेना” मैं उससे उसकी घर का पूरा नक्सा समझ लिया.

वह बोली – “बाबु एक दिक्कत है. मोटर साइकिल से आने पर आवाज होगी और रौशनी भी. आस पास के लोगो को पता चल जायेगा. तुम साइकिल से आना”

मैं बोला – “ठीक है” वह मुझसे फ़ोन ली, उसको पेटीकोट की जेब में डाली और चली गयी.

मैं रात की तैयारी में जुट गया. मार्किट गया, चिकेन खरीदा, एक पैकेट कंडोम लिया और घर आया. रात के खाने के लिए चिकेन-रोटी बनाया. फ्रिज में पहले से ही बियर की चार बोतलें थी. आज रात को मैं मेरी रानी पर चढ़ने वाला था. पूरा नियंत्रण मेरे हाथ में था. बस जल्दी से रात हो और 11 बजे.

रात के 10:30 बजे मैं घर से साइकिल लेकर निकला. उसका गाँव लगभग 6 km दूर है. रात के सुनसान शहर में गाँव पहुँचने में आधा घंटा लगा. मैं गाँव का बाहर एक बड़े झाड़ के पीछे रुक गया और उसको फ़ोन किया. पहली रिंग में ही उसने फ़ोन उठा लिया जैसे मेरा फ़ोन का इंतज़ार कर रही थी. मैंने उसे झाड़ के पीछे आने को कहा, दस मिनट में वह आती दिखी. घूँघट में पूरा चेहरा ढका था.

मेरे पास आकर बोली – “जल्दी से चलो. कोई देख लिया तो मुसीबत हो जाएगी.”

मैंने उसे साइकिल के सामनेवाले बार पे बैठाया और जोर-जोर से पैडल मरने मेन रोड पर आने के बाद मुझे आराम मिला. अब मैं बिल्कुल निश्चिंत था क्योंकि कोई देखना वाला नहीं था. मैं साइकिल चलाते उसकी गर्दन को चूम भी रहा था.

वह थोड़ा डरते हुए बोली – “बाबु, जल्दी से घर चलो. इस रात में पुलिस मिल गयी तो बहुत बड़ी मुसीबत में पड़ जाओगे.”

मैंने भी वक़्त को समझते हुए सारी ताकत से जोर लगते हुए घर पहुंचा. चुपचाप कोई आवाज नहीं करते हुए अन्दर दाखिल हुआ और सोमलता को अन्दर ले आया. अन्दर दरवाजा बंद करते हुए उसको जोर से अपनी बाँहों में लिया और होंठो को चूसने लगा.

मुझे परे हटाते हुए बोली – “बाबु थोड़ा सब्र करो. तुम्हारे पास मेरे लिए कोई कपड़े होंगे? ”

मैंने उसको मेरी टी-शर्ट और बॉक्सर दी.

वह लजाते हुए बोली – “इसको कैसे पह्नुगी?”

मैंने कहा – “रानी जैसे मैंने पहना है.”

वह मुस्कुराते हुए कपड़े लेकर बाथरूम चली गयी. मैं किचेन में खाना लगाने लगा. खाना टेबल पर रखा तब वह बाथरूम से बाहर आई. मैं उसको देखता ही रहा, क्या गजब की पारी लग रही थी. बाल खुले हुए थे, टी-शर्ट इसकी बड़ी-बड़ी मम्मो पर कसकर लगी हुई थी. अन्दर शायद उसने ब्रा नहीं पहना था.

मुझसे नज़र मिलाने के बोली – “क्या देख रहे हो बाबु? ठीक नहीं लग रही हूँ इस कपड़ो में?”

मैंने उसे अपनी और खींचते और उसकी गांड को देख के बोला – “रानी पुरी आइटम लग रही हो आज. जी करता है आज तुझे खा ही जाऊ.”

वह हँसते हुए बोली – “ठीक है. पहले चलो खाना खाते है.”

खाते हुए बोली – “बाबु, तुमने खाना बहुत ही बढ़िया बनाया है. तुम्हारी बीवी तुमसे बहुत खुश रहेगी. इतना प्यार करती हो, खाना भी अच्छा बनाते हो और सबका ख्याल रखते हो.”

मैं जवाव में मुस्कुरा दिया. खाना ख़तम करने के बाद मैं बियर को दो बोतले फ्रिज से निकली. वह तबतक अन्दर के कमरे में जा चुकी थी और गद्दे बिछाकर मेरा इन्तेजार कर रही थी. मैंने एक बोतल उसकी ओर बढ़ाई तो शरमाते हुए बोली – “बाबु मैं शराब नहीं पीती”

मैं बोतले उसकी हाथ में पकडाते हुए बोला – “रानी पीकर तो देखो”

बोली – “थोड़ा-सा पियूंगी” मैं हाँ में सर हिलाया और बियर की एक घूंट ली. मैं पुरी बोतल ख़तम कर चूका था तो वह चोथाई पिने के बाद बोतल मुझे दे दी. मैंने उसको भी पिया और खाली बोतलें बगल में रखते हुए उसको बाँहों में ले लिया.

वह बोली – “बाबु, खाने के तुरंत बाद चुदाई ठीक नहीं. थोड़ा आराम करते है.”

मैं कहाँ “ठीक है” लेकिन नंगे होकर. वह मेरे माथे पर हल्का चपत लगते हुए बोली – “बदमाश” और अपनी टी-शर्ट उतरने लगी.

मैंने उसको रोककर कहा – “नहीं रानी. आज यह काम मैं करूँगा. तुम मेरे कपड़े उतारो.” और मैं उसके सामने खड़ा हो गया

. वह मेरी शर्ट निकाली, फिर जीन्स फिर अंडरवियर. मेरा लंड तो औरत की महक सूंघकर की टनटना गया था. वह मेरे लंड को गौर से देखी फिर मेरे पेट में एक चिकोटी काटी और बोली – “बाबु तुम्हारा डंडा बहुत बदमाश है. हमेशा तंग करता है.”

मैं हंसा और उसकी टी-शर्ट उतरने लगा. टी-शर्ट खोलते ही मम्मे आजाद हो गए. फिर मैंने पेंट उतारी. अंदर उसने कुछ भी नहीं पहना था. मैं उसको गॉड में उठाकर मेरे बेडरूम में ले गया. बेड पर लेटाने के बाद मैं उसकी बगल मैं लेट गया. हम दोनों एक दुसरे की बदन को मल रहे थे. वह मेरे सख्त लिंग और गोटी को सहला रही थी और मैं उसकी मम्मों को मसाज कर रहा था.

आधे घन्टे तक हम बिना किसी आवाज के एक-दुसरे से बदन से खेलते रहे. अब खेल को आगे बढ़ाने का वक़्त था. मैंने उसको अपने नीचे लिया और उसको चूमने लगा. मेरा लंड उसकी जांघो के बीच में फंस गया. मैं उसको लगातार चूमे जा रहा था और उसकी मम्मो को दोनों हाथो से दबाया जा रहा था. वह चुदास में पागल हो रही थी और अजीब-अजीब आवाज कर रही थी. अपने नाखुनो से मेरे पीठ को खरोंचे जा रही थी. अब मैंने उसकी चुचियों को चुसना शुरू किया. एक को दबाता तो दुसरे को चूसता. वह एकदम चढ़ चुकी थी मेरे इस चुसाई से. मेरे सर को बालो से पकड़ कर अपनी चुचियों में और दबा रही थी और बके जा रही थी – “हाँ बाबु, जोर से चुसो.... चुसो और दूध निकाल दो.... पियो दूध अपनी छिनाल का.... मर गई रे.... हाँ रंडवे, अपनी माँ का भी इसी तरह से चूसा होगा तूने.... मैं तुझे अपनी दूध पिलाऊंगी... आजा मेरे राजा... मेरे बालम” बीच-बीच में गाली भी बक रही थी.

अचानक वो बैठ गयी और मेरे लंड को दोनों हाथो से पकड़कर बोली – “आज तो इसकी सारी पानी निकाल दूंगी” फिर हाथ में थूक लगाकर तेज़ी से मुठ मरने लागी. मेरा लंड 1 घन्टे से टनटना रहा था इसलिए ज्यादा वक़्त नहीं लगा. एक तेज़ धार के साथ मेरा पानी छुट गया और मैं निढाल हो गया. सोमलता मेरे बगल में लेट गयी और मुझे चूमने लगी और मेरे लंड को सहलाने लगी. उसने मेरा बिर्य को साफ़ भी नहीं किया जो उसकी हथेलियों और मेरी कमर में गिरा था. दस मिनट के बाद मेरा लिंग जागने लगा और एक और पारी के लिए तैयार होने लगा.
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10-08-2020, 12:41 PM,
#7
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अब मेरे लंड में खून भर चूका था और और अपने पुरे आकार में आ चूका था. मैंने एक तकिया लिया और उसकी गांड के नीचे लगा दिया. उसकी गांड ऊपर आ गयी और मुझे उसकी झांट भरी चूत का पूरा नजारा मिला. उसकी झांटे घनी और काली थी. मैं उँगलियों से उसे टटोलने लगा. आखिर उसकी चूत का दरवाजा मिल ही गया. चूत में दो उँगलियाँ डाली तो पता चला की उसकी चूत पहले ही पानी छोड़ चुकी थी. मैं उसकी गर्म चूत में तेजी से ऊँगली अन्दर-बाहर करने लगा. मेरी रानी अपनी गांड को उछाल रही थी और मस्त सिसकारी मर रही थी.

मैंने मन-ही-मन उसकी चूत को साफ़ करने का मन बना लिया. मेरी ऊँगली से चूत चुदाई में सोमलता को गर्म कर दिया और एक बार फिर उसका बदन अकड़ गया. उसने कस कर मेरे सर को पकड़ किया और एक गर्म पानी का फव्वारा छोड़ दिया. चूत से पानी बहते हुए गद्दे में टपकने लगा. कुछ देर के लिए वह खामोश लेटी रही फिर मेरे सर को खींचकर मेरे मुँह में उपनी जीभ डाल दी.

हम दोनों एक दुसरे को चुसे जा रहे थे और हमारी लार एक-दुसरे के मुँह में घुल रहे थे. अब मेरे कान के पास होंठ लाकर धीरे से बोली – “बाबु अब मत तड़पाओ. बस अब अपने डंडा डाल दो. बहुत दिनों से तरस रही हूँ लंड के लिए.”

मैंने उसकी चुचियों को मसलते हुए मस्ती में बोला – “सोमलता मेरी रानी, आज तेरा राजा तुझे और तेरी चूत को सोने नहीं देगा.”

मेरे पाकेट से कंडोम निकाला और अपने लिंग को पहना दिया. मेरा लंड कंडोम में लंबा मोटा काला नाग जैसा लग रहा था. मेरे मोटे-ताजे लंड को देखकर सोमलता की आँखे फट गयी. हाथो में लेकर बोली – “यह बहुत मज़ा देनेवाला लग रहा है बाबु. आज मेरी चूत रानी की प्यास मिट जाएगी.”

मैंने उसकी दोनों टांगो को अपने कंधे पर डाला और उसकी चूत के दरवाजे पर लंड को टिका दिया. लंड के सुपारा से उसकी चूत से दानो को रगड़ने लगा. वह बेक़रार होए जा रही थी और सिसकारी मर रही थी - “हम्म्म्म, आःह्ह्ह, म्म्म्म्म्म्म, आऐईई, अआह्ह” मैं जान-बुझकर उसको तड़प रहा था. वह अपनी जीभ को दांत से काट रही थी. मेरा लंड us वक़्त किसी लोहे जैसा सख्त था.

मैंने लंड को चूत की फांको के बीच टिककर एक ज़ोरदार धक्का मारा. लंड सरसराता हुआ पूरा-का-पूरा उसकी चूत में घुंस गया. वह दर्द से पागल हो गयी. 2 सेकंड रुकने के बाद मैंने लंड को आधा निकाला और धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करने लगा. उसका दर्द थोड़ा कम हुए और मेरे धक्के पर गांड उछालने लगी. फच-फच की आवाज से कमरा गूंजने लगा. मैंने गति बढ़ाई. मेरा पूरा शरीर पसीने से भींग गया. सोमलता आखें बंद कर हल्की आवाज में सिसकारी ले रही थी और गांड को उछालते हुए मेरी कमर को पकडे हुए थी. अचानक मुझे लगा की मेरा लंड फुल रहा है.

मैं धक्का लगाना बंद किया. थोड़ी देर रुका और लंड सामान्य हो गया. फिर से मैंने तेजी से धक्का लगाना चालू किया. उसकी चूत से पानी रिसने लगा और मेरा लंड ज्यादा आसानी से जाने लगा. 10-15 धक्को के बाद उसकी चूत मेरे लंड को कसने लगी. सोमलता का बदन कांपने लगा और मुँह से अजीब आवाज निकाल रही थी. मैंने वक़्त को देखकर और तेजी से धक्का लगाना शुरू किया. 8-10 धक्को के बाद वह झड गयी और कुछ देर में मेरा लंड भी प्रेम-रस छोड़ दिया. मैं उसके ऊपर गिर गया. मेरा लंड रुक-रुककर पिचकारी मारी और सारा मुठ कंडोम में छोड़ दिया. लेकिन लंड सिकुड़ने का नाम नहीं ले रहा था. मेरा गला सुख चूका था और सारा बदन पसीने से तर था. हम दोनों एक-दूसके को बाँहों में लेकर तेजी से साँस ले रहे थे. कुछ देर बाद लंड सिकुड़ कर बाहर आ गया मैंने कंडोम को उतारा और एक गांठ लगाकर उसको बगल में फेंककर सोमलता को बाँहों के लेकर उसकी बगल में सो गया. हम दोनों ही एक मस्त चुदाई से काफी थके थे, इसलिए जल्दी नींद भी आ गयी. बाकी की कहानी अगले दिन के लिए.

सुबह लगभग 7 बजे मेरी नींद खुली. सीने पर भार महसूस हुआ. मैंने देखा सोमलता मेरे बगल में चिपक के सोई थी लेकिन उसकी छाती मेरे सीने पर थी और मुझे सोते हुए देख रही थी. मैंने उसे देख मुस्कुराया और वह भी मुस्कुराई. अब उसकी आँखों से आंसू की बुँदे गिरने लगी.

मैं फिक्रमंद हो गया, उसकी गालो को हथेलियों में भरकर प्यार से पूछा – “क्या हुआ रानी? तुम रो क्यों रही हो.”

वह आंसू पोंछते हुए बोली – “कुछ नहीं बाबु. मेरी ज़िन्दगी में अचानक इतनी ख़ुशी पाकर रो पड़ी. जानते हो बाबु, 15 साल की उम्र में मेरी शादी हो गयी. आज अगर मेरा मरद मेरे साथ रहता तो तुम्हारे उम्र का मेरा बेटा होता. तुम बहुत अच्छे हो बाबु. सबका ख्याल रखते हो. तुम्हारी औरत बहुत खुश रहेगी.”

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10-08-2020, 12:41 PM,
#8
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मैंने उसको गालो को चुमते हुए बोला – “अब तुमको फ़िक्र करने की जरुरत नहीं है. मैं तुम्हारा मरद, बेटा सबकुछ हूँ. वैसे भी अब मुझे तुम्हे मजदूरी करते देख अच्छा नहीं लगता. कुछ करूँगा तुम्हारे लिए. ठीक है. चलो अब मुँह-हाथ धोकर कुछ खाते है.”

मैंने उसको खिंच कर उठाया. मैं बाथरूम में गया और वह कपड़े पहनने लगी. मुझे बाज़ार से खाने-पिने का सामान लाना था. मैं कपड़े पहन के तैयार हो गया. मैं उसको बोला – “सुनो मैं आधे घन्टे में आता हूँ. तब तक तुम तैयार होजाना.मैं बाहर से दरवाजा बंद कर दूंगा. ज्यादा आवाज मत करना. ठीक है?”

उसने हाँ में सर हिलाया. वह फिर मेरी टी-शर्ट और बरमूडा पहने हुए थी लेकिन अन्दर ब्रा था. in कपड़ो में वह बिल्कुल अलग लग रही थी. मैं बाज़ार निकला. जाते-जाते मैं आज के कार्यक्रम के बारे में सोच रहा था. आज कुछ अलग करना था. जैसे उसको कुतिया बनाकर चोदना है, उसको चूत की झांटो को साफ़ करना है, उसकी चूत को चुसना है, उसको मेरा लंड चुसवाना है वगैरह. गाँव की औरत है इसलिए शायद यह सब नहीं जानती है. बाजार में मैंने अन्डे, ब्रेड, चोकलेट बगैरह ख़रीदे. एक पैक औरतों के सेविंग रेजर भी लिए. आज मेरी रानी की चूत को चमकाकर रहूँगा. उसकी चिकनी चूत की कल्पना मेरा लंड खड़ा कर रही थी. हड़बड़ी में मैंने अंडरवियर भी नहीं पहना था. बगल में स्कूल जाती कुछ लड़कियां मुझे देख हंस रही थी, तब मुझे पता चला की मेरा बरमूडा चलता-फिरता तम्बू बन गया है. मैंने बाज़ार का थैला सामने कर उसको छुपाने की कोशिश की. यह मेरे लिए एक नया तजुर्बा था. 40 मिनट के बाद मैं घर आया तबतक सोमलता बाथरूम से निकल ड्राइंग रूम में आ गयी थी.

वह काफी खुश और ताज़ी लग रही थी. रंग भी काफी खुला लग रहा था. मैंने सोचा – “काश, मैं इसको हमेशा ऐसे ही रख पाता. कुछ तो करना पड़ेगा.” मैं चाय बनायीं, अंडे उबाले और हमने नास्ता किया. हमने नास्ता ख़तम किया ही था की गेट पर दस्तक हुई. मैंने इशारे से उसको चुप रहने और अन्दर के कमरे में जाने के लिए बोला.

बाहर देखा, एक मजदूर था. मुझे देख बोला – “बाबु, आज कोई काम नहीं होगा. आदमी कम है. 2 दिन बाद काम चालू होगा”

मैंने कहा – “ठीक है”

वह आदमी चला गया. मेरे मन में लड्डू फूटने लगे. वाह! आज दिन भर हमे तंग करनेवाला कोई नहीं है. आज दिन-भर हम काम-लीला करेंगे. मैं गेट बंद कर अन्दर गया तो सोमलता भी अन्दर के कमरे से ड्राइंग रूम में आ गयी – “कौन था बाबु? क्या बोल रहा था?”

मैंने दोनों बांहे उसके कंधे में डालते हुए कहा – “आज काम बंद रहेगा. कोई हमें परेशान नहीं करेगा.”

वह जवाब में मुस्कुराई. मैंने कपड़े उतारे और पूरा नंगा होते हुए बोला – “चलो जल्दी से कपड़े उतारो”

वह मेरी पीठ में चिकोटी काटते हुए बोली – “तुम बाबु हमेशा लंड पे सवार रहते हो”

मैंने उसकी गाल पर एक चुम्मा देते हुए कहा – “रानी आज साथ में नहायेंगे”.

“पर मैं तो नहा चुकी हूँ बाबु!” बहुत मासूमियत से वह बोली.

मैंने उसकी टी-शर्ट को ऊपर की और खींचते हुए बोला – “मेरे साथ तो नहाओ रानी. आज तुम पागल हो जाओगी.”

“अच्छा” हँसते हुए उसने मेरी गांड पर एक चपत लगा दी. आज मैं उसकी झांटो को साफ़ करनेवाला हूँ. वह सारे कपड़े उतार दी सिर्फ पेंटी रहने दी. उसकी कमर को धक्का देकर बाथरूम में ले गया. उसको एक टांग स्टूल पर रख खड़ा कराया और पेंटी उतार दी. उसकी चूत की झांटे काफी लंबी थी. मैं निचे बठकर झांटो में उँगलियाँ फिरने लगा.

वह बोली –“क्या इरादा है बाबु?”

मैंने उसकी आँखों में देखकर पूछा – “अच्छा रानी, तुम्हे in झांटो से दिक्कत नहीं होती है?”

वह बोली – “हाँ बाबु, दिक्कत तो होती है. पहले जब मरद था तो कटती थी. अब किसके लिए करूँ?”

मैंने उसकी झांटो के ऊपर एक चुम्मा जड़ते हुए बोला – “अब मैं हूँ ना मेरी रानी.” उसकी चूत से मादक महक आ रही थी.

मेरे माथे को हल्का धक्का दे डांटते हुए बोली – “छि बाबु, वहां गन्दा है, मुँह मत लगाओ”

मैं बोला – “अभी साफ़ कर देता हूँ.” प्लास्टिक बैग से क्रीम और रेजर निकाला और ढेर सारा फोमिंग क्रीम उसकी झांटो पर मलने लगा.

सोमलता थोड़ी डरी हुई लग रहू थी. डरते हुए बोली – “बाबु, कुछ होगा तो नहीं?”

मैंने उसको तसल्ली देकर कहा – “कुछ नहीं होगा मेरी रानी, सब औरतें ऐसे ही साफ़ करते है. देखना तुम पुरी चिकनी चमेली बन जाओगी”
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10-08-2020, 12:41 PM,
#9
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वह धीरे से हंस पड़ी. मैंने रेजर से चूत की दूर से छिलना शुरू किया. रेजर चलने से उसको गुदगुदी होती और वह कांपती. मैंने उसकी कमर को कसकर पकड़ते हुए बोला – “रानी हिलो मत. रेजर चलने में दिक्कत होता था”

आस-पास की बालो को साफ़ करने के बाद मैंने तोलिये से चूत को पोंछा. अब सिर्फ चूत का होंठो के झांट बचे थे जिसको साफ़ करने में सावधानी की जरूरत थी. सोमलता तो आँख बंद कर पुरे बदन को कसकर खड़ी थी. फिर से चूत पर क्रीम लगाया और चूत की होंठो को ऊँगली से खींचकर रेजर चलाना शुरू किया. जैसे-जैसे बाल साफ़ होते गए, उसकी चूत चमकने लगी. अब सारे बाल साफ़ हो चुके थे. मैंने पानी से अच्छी तरह धोया और स्किन क्रीम लगाया. उसकी बदन का रंग सांवला था लेकिन उसकी चूत की फांके गहरे गुलाबी थी और झांटो के हटने के बाद चमक रही थी. शायद चूत में ऊँगली करने के कारण पानी छोड़ रही थी.

मैंने एक छोटा आइना दिया और बोला – “देख लो. तुम्हरी चूत रानी कैसे चमक रही है”

वह शीशे के चूत के निचे लगाकर देखी और थोड़ा शरमा गई और मुझसे लिपट गई.

“अभी और काम बाकी है मेरी रानी” मैंने उसको अलग करते हुए कहा.

वह पूछी – “अब क्या”

मैंने उसकी बायीं हाथ को ऊपर उठाया और सिर के दूसरी और रखते हुए बोला – “ऐसी ही रहना” अब बारी-बारी से दोनों बगलों पर फोमिंग क्रीम लगाकर साफ़ किया. अब वह बिल्कुल एक शहरी औरत जैसी लग रही थी. “चलो हो गया. अब नहाते है” मैंने सेविंग का सामान बैग में रखते हुए कहा.

“आज मैं तुमको नहलाउंगी” मुझे स्टूल पर बैठाया और शावर चला दी. अब साबुन से मेरी पीठ मलने लगी. जोर-जोर से मेरी पीठ मलती हुई वोह मेरी छाती भी मलने लगी. साबुन लगाने के दौरान उसकी चूचियां मेरे शरीर को छू जाती जो मेरे लंड को इंच-इंच लंबा करती. अब वह मेरे सामने आ गयी और मेरी छाती, कमर और पैरो को साबुन लगाने लगी. मैंने उसकी चेहरे को देख रहा था. उसकी चेहरे में कहीं भी वासना नहीं था. बड़ी मासूमियत से मुझे साबुन लगा रही थी जैसे कोई माँ अपने बच्चे को नहलाती है. मुझे मलने के समय उसकी चूचियां हिल रही थी, जिसको देख मैं पागल हो रहा था. मेरा लंड तो अपना चमड़ा फाड़ना चाहता था. सोमलता ने मुझे खड़ा किया और मेरे कमर के निचे साबुन मलने लगी. मेरे लंड के आस-पास के इलाके को रगड़ने लगी. मेरे लंड को भी हाथ से पकड़कर रगड़ने लगी. मेरे मुँह से सिसकारी निकल रही थी.

उसने मेरी और देखा और हँसते हुए बोली – “बाबु यह हमेशा खड़ा रहता है क्या?”

मैंने भी मस्ती कहा – “रानी, तुम जैसी जवान औरत के हाथ में अगर खड़ा ना हो तो फिर किस काम का”

वह जोर से हंसी और बोली – “बहुत मस्त माल है बाबु तुम्हारा लंड. इसे पाकर तो मेरी जवानी वापस आ गयी. चलो तुम्हारा काम हो गया. इसका भी काम कर देती हूँ.” मेरे लंड की मुठ मारने लगी. साबुन के झाग के कारण काम आसन हो गया.

मुठ मारने में उसको काफी मेहनत करनी पड़ी. लगभग 25 मिनट में मेरा मुठ छुटा और लंबी पिचकारी मरते हुए सारा पानी उसकी चुचियों पर गिरा. अब वह शवोर चलाकर मेरे बदन में लगी साबुन को धोकर मुझे टॉवल से सुखाकर बोली – “बाबु जाओ. अब मैं नहाती हूँ.”

मैंने उसको पकड़ कर कहा – “रानी, अब मुझे नहलाने दे”

वह बोली – “आज नहीं, आज मुझे थोड़ा वक़्त चाहिए अकेले. अब जाओ भी” मुझे धक्का देकर निकलते हुए बोली.

मैं मायूस होकर नंगा ही बाथरूम से निकला. बॉक्सर डाला और नास्ता की तैयारी करने लगा. लगभग आधे घन्टे के बाद वह सिर्फ तोलिया लपेट कर बाहर आई. आज बहुत खुश और निखरा हुआ लग रही थी. तोलिया उसकी चुचियों को ढकने में नाकाम लग रहे थे. दो स्तनों की गहरी घाटी ज्यादा गहरी लग रही थी और आधा स्तन तो ढका ही नहीं था. निप्पल के गोल घेरे भी तोलिये के किनारे से दिख रहे थे.

वह खाने के टेबल के कुर्सी को खींचकर बैठते हुए बोली – “बहुत भूख लगी है बाबु, खाना लगाओ ना.”

मैंने हँसते हुए कहा – “इतनी भूख लगी है की कपड़े भी नहीं पहनी?”

वह मासूमियत से बोली – “क्या फायदा जब उतरना ही है”

मैं उसको चूमने वाला ही था की वह हाथ दिखाकर मुझे रोकते हुए बोली – “पहले खाना खा ले. बाद में मुझे खाना”

मैंने एक ठहाका लगाया और चाय, ब्रेड और अंडे का नास्ता करने लगा.

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10-08-2020, 12:41 PM,
#10
RE: Mastaram Stories ओह माय फ़किंग गॉड
हमदोनो टेबल पर आमने-सामने बैठे थे. मैं सिर्फ बॉक्सर पहना था और मेरी सोमलता तो टॉवल छाती से लपेटे हुए थी. जब वह बैठ खाना खा रही थी तो टॉवल सिर्फ उसकी कमर को ढक रहा था, उसकी गोरी चिकनी जांघे नंगी थी. उसकी जांघों का मस्त नज़ारा मेरे लंड को बहुत अच्छा लग रहा था जो रह-रहकर बॉक्सर फाड़ने को बेताब हो रहा था. मैं मन में सोचा – “आज इसको चुसाई का मज़ा देना है. लेकिन इससे पहले इसको राज़ी करना पड़ेगा. कल परिवार आ जायेगा तो फिर हमारा यह कार्यक्रम नहीं हो पायेगा.” मेरे दिमाग में एक तरकीब आया. नास्ता ख़त्म करने के बाद, मै उसको अपने कमरे ले ले गया. सारे दरवाजे-खिड़कियाँ बंद करने के बाद उसको एक चेयर पे बैठाया और बोला – “रानी, फिल्म देखोगी?”

वह फ़ौरन हामी भरते हुए बोली – “हाँ, कौन सी फिल्म बाबु?”

मैंने कहा – “देखो मज़ा आएगा” मैं दौड़ कर दो बियर फ्रिज से निकाल लाया और उसके बगल चेयर में बैठ गया. मैंने एक पोर्न विडियो लगाया था जिसमे एक सौतेली माँ बेटे को बताती है की उसकी गर्ल-फ्रेंड को कैसे चूमना है. बात चुम्मी से शुरू होकर चुदाई तक पहुँचती है. वह माँ उससे चूत चुसवाती है फिर उसका लंड चूसती है. दोनों डौगी स्टाइल में चुदाई करते है और आखिर में सौतेली माँ बेटे का मुठ मारती है, सारा बिर्य पि जाती है. यह विडियो धीमा होने के साथ-साथ काफी सेक्सी है. ना जाने मैंने कितनी बार इसको देख मुठ मारा है. विडियो की नायिका की फिगर उसकी उम्र के वावजूद लाजवाब था.

जैसे ही फिल्म शुरू होती है, सोमलता की आँखें बड़ी होनी शुरू होती है. मैं उसकी कुर्सी को अपने पास खिंच लेता हूँ. जब फिल्म का नायक अपनी सौतेली माँ की स्तन को मसलता-चूसता है तो सोमलता अकड़ कर सीधी हो जाती है. उसकी आँखें अब लैपटॉप स्क्रीन पर गड जाती है और उसे अपना ख्याल तक नहीं रहता. फिल्म आगे बढती है. अब नायक अपनी माँ की चूत को चूमना-चाटना शुरू करता है और साथ-साथ उसे अपनी ऊँगली से चोदता भी है. माँ जोर-जोर से सिसकारी लेती है और अपने बदन को उछलती है. यह गर्म दृश्य देखकर सोमलता गर्माने लगती है. उसका हाथ खुद-ब-खुद योंनी पर चला जाता है और उसे रगड़ने लगती है. उसकी चूचियां इतनी कास जाती है की वो जो तोलिया लपेटे हुए थी वह खुल का गिर जाता है. उसकी चूचियां सख्त और निप्पल सीधे खड़े हो जाते है. मैं अपने दायें हाथ से उसकी नंगी मांसल जन्घो को सहलाना शुरू करता हूँ. अब उसके मुँह से सिसिकारी निकलना आरंभ होता है. वह आँखें बंद कर सिसिकारी मारे जा रही है और ऊँगली से अपनी चूत को मसले जा रही है. मैंने उसकी हाथ को रोक अपनी ऊँगली से उसकी चूत के भागनासे को छेड़ना शुरू करता हूँ.

मेरी ऊँगली की हर हरकत पर उसकी आंह निकलती है. “आःह्ह्ह....... माई री......... हाय बाबु........... मै मर जाउंगी मेरे राजा........ सिसिसिसी.........................”

अब यह खेल कुर्सी पर खेलना असंभव था. मैंने उसकी कमर से उठाया और मेरे बिस्तर पर पटक दिया. वह मेरी और प्यासी नज़रो से देख रही थी. मानो वह कई दिनों की प्यासी है और मेरे पास शरबत का गिलास है. मै उसके पास गया और उसकी टांगो के निचे बैठ गया. उसकी दोनों हथेलियों को अपनी हथेलियों में लेकर पुरी बदन को अपने बदन के निचे लाया और उसकी होंठो का रस चूसने लगा. चूसने के दौरान मैं अपनी लिंग को उसकी चूत के ऊपर रगड़ भी रहा था. इसके बाद उसकी चुचियो की बारी थी. उसकी चूचियां इतनी सख्त हो गयी थी की मैं उसे मुँह से पकड़ नहीं पा रहा था. अब मैं उसकी नाभि के पास जीभ से चाटना शुरू करता हूँ. मेरी जीभ उसकी गहरी नाभि में जब-जब घुसती, तब-तब वह पेट तो सिकोड़ देती. अब मैं उसकी चूत के उपरी हिस्से को चाटते हुए उसकी क्लिट को छेड़ना शुरू करता हूँ. उसकी चूत के गुलाबी होंठ फूलकर पावरोटी जैसे हो गए. मैंने जीभ उसकी चूत के अन्दर डाल दी. वह उछल कर बैठ गयी. मैंने उसको निचे गिराया उसकी चुचियों पर हाथ रखा और फिर से चूत में जीभ डाल दी. वह सर को उठाकर आंहे भरे जा रही थी और उसकी चूत जीभ के लिए और गहरी जगह बानी रही थी. जब मैंने देखा की जीभ आसानी से अन्दर-बाहर हो रही है तो मैंने अपनी बीचवाली ऊँगली चूत में डाल दी. उसकी चूत अन्दर से काफी गर्म था.

उसकी सिसिकारी की आवाज बढती जा रही थी. मैंने ऊँगली को डालना चालू रखा और जीभ से चूत की क्लिट को चाटना भी. 10 मिनट के बाद सोमलता का बदन अकड़ने लगा. वह मेरे बालो को जोर से पकड़कर मेरे माथे को अपनी चूत में दबाने लगी. अब उसकी चूत गीली हो रही थी जो बता रही थी की वह चरम आनंद के पास पहुँच रही है. अब उसकी बदन के निचे का हिस्सा जोर जोर से कांपने लगा. मैंने चुसना और ऊँगली से छेड़ना जरी रखा. अचानक उसकी चूत ने जोर की पिचकारी मारी और मेरा मुँह उसकी योनिरस में भर गया. नमकीन गर्म पानी के स्वाद ने मुझे मदहोश कर दिया. सोमलता की मेरे बालो पर पकड़ ढीली हो गयी और वह ढीली होकर लेती रही. मैं ऊपर आकर उसकी बालो को सहलाने लगा. उसके चेहरे पर संतुष्टि का भाव था. कुछ देर के बाद उसकी बांहों में मुझे जकड़ा और मुझे अपने करीब खिंच लिया. उसकी चूचियां अब भी सख्त थी जो मेरे सीने में गड रही थी. वह मेरे कान के पास आकर धीरे से बोली – “बाबु, किसी ने पहली बार बिने चोदे मुझे इतना सुख दिया. तुम बहुत अच्छे हो.” अब वह मेरे लंड को टटोलने लगी. मुझे लगा की वह भी मुझे मुख-मैथुन का सुख देना चाहती है. लेकिन लगता है वह अभी भी इसके लिए तैयार नहीं थी.

मेरे लंड को पकड़ कर बोली – “बाबु, इसको प्यासा मत रखो. मेरी चूत में तो बारिश हो गयी. इसको भी डूबने का मौका दो.

” “ठीक है. चलो अब घोड़ी बन जाओ” मैंने उसको कमर से पकड़ कर घोड़ी जैसा स्थिति बनाने की कोशिश की. वह थोड़ा असहज महसूस कर रही थी क्योंकि यह उसका पहला बार था.

मैंने बड़ी मुस्किल से उसकी पोजीशन बनायीं और उसकी कमर को बाएं हाथ से कसकर लपेट लिया. उसकी गीली चूत को द्दो-चार बार ऊँगली से मसलने के बाद लंड में सूपड़ा योनी के द्वार पर रख दिया. मैं उसकी कान में बोला – “रानी तैयार हो मेरे लंड राजा के लिए?”

वह थूक निगलते हुए बोली – “हाँ मेरे सैंया राजा, डाल दो अपना डंडा”

मैंने धीरे से धक्का लगाया. लंड आधा जाकर फस गया. चूत की दिवार लंड को कसकर पकडे थी. उसकी गले से एक हल्की चीख निकली. मैंने फिर से ज़ोरदार धक्का लगाया. लंड चूत की दीवारों को फाड़ते हुए सीधे बच्चेदानी से जा टकराया. मेरे इस धक्के ने सोमलता की बदन को हिलाकर रख दिया और मेरा कमर जोर से उसकी गांड से टकराया. उसने बड़ी मुस्किल से अपनी चीख को बाहर आने से रोका. मैं कुछ सेकंड के लिए रुका, उसकी स्थिति को सही किया और धीरे से लंड को बाहर खिंचा. लंड के सुपाड़े को बिना बाहर निकाले फिर से धक्का दिया. अब कुछ कम तकलीफ हुई. अब मैं धीरे-धीरे धक्का लगता रहा. एक हाथ से उसकी चुचियों को बीच-बीच में मसलता भी था. अब मेरा लंड फूलने लगा. मैंने धक्के की रफ़्तार बढ़ाई. मेरा कमर जोर-जोर से उसकी गांड में टकराता गया. वह भी धक्के के ताल पर अपनी गांड को आगे-पीछे करने लगी. 20 थापों के बाद मेरा लंड झड़ गया. मै बिना लंड को निकले उसके ऊपर निढाल हो गया. मेरी सांसे जोर-जोर से चल रही थी. मेरा लंड सिकुड़ने तक उसकी चूत में अटका रहा और बाद में फच्च की आवाज के साथ बाहर निकल गया. हमदोनो लगभग 15 मिनट तक लेते रहे. बाद में वह उठकर बाथरूम में चली गयी और मैं लेटा रहा. मैंने घडी में वक्त देखा, दोपहर के 12 बज रहे थे.
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