non veg kahani दोस्त की शादीशुदा बहन
06-06-2019, 01:09 PM,
#81
RE: non veg kahani दोस्त की शादीशुदा बहन
दीदी- फिर होना क्या था अम्मा जी। रामू भैया से चुदवाकर मेरी सारी खुजली शांत हो चुकी थी। फिर भी अपने सगे भाई दमऊ से चुदवाना... इस खयाल से ही मेरी फुद्दी में खुजली उठने लगी। मुश्किल से एक ही मिनट हुए होंगे की किसी ने कमरे में प्रवेश किया और मेरे दिल की धड़कन बढ़ने लगी। हाय... अब मेरा सगा भाई दमऊ मुझे याने अपनी सगी बहन को चोदने वाला है। वो भी बिना जाने। है उसे अगर पता चल गया की जिसे वो कोई दूसरी लड़की समझ रहा है वो उसकी सगी बहन है तो वो क्या करेगा? मेरा दिल घबरा रहा था। उसने कमरे में प्रवेश किया और सीधा पलंग के पास आकर मेरी दोनों टाँगें फैलाई और अपना मुँह मेरी फुद्दी के पास ले गया। फिर उसने मेरी फुद्दी के पास अपनी नाक लगाई और उसे बड़े प्यार से सूंघने लगा। मुझे कई दिन पहले की एक घटना याद आ गई। एक सांड़ एक गाय के पीछे पड़ा हुआ था और उसकी फुद्दी को बड़े ही प्यार से सूंघ रहा था। मुझे लगा की शायद मैं आज गाय बनी हुई हैं। और वो मेरा प्यारा सा सांड़। आज मेरी खैर नहीं। आज तो मेरी फुद्दी में मेरे सगे भाई का लण्ड घुसने ही वाला है। मुझे बड़े जोर की शर्म आ आ रही थी। पर अंधेरे के कारण मैं मजे में थी। मेरे भाई को पता नहीं था की मैं, उसकी सगी बहन हूँ। और मेरी फुद्दी में उसका लण्ड घुसने ही वाला है।
फिर दमऊ भैया ने अपना लण्ड मेरे मुँह के पास रख दिया। मैं पहले कुछ झिझकी कि कैसे अपने भाई के लण्ड को मुँह में ले सकती हूँ? फिर मेरे मन ने कहा- वो री अमृता वाह... अपनी फुद्दी में उसका लण्ड ले सकती है। पर अपने मुँह में नहीं। तू आज कौन सा व्रट थोड़े ही कर रखी है। अभी तो तूने रामू भैया का लण्ड भी तो चूसा था। रामू भैया का लण्ड चूस सकती है तो दमऊ भैया का लण्ड क्यों नहीं? भाई का दोस्त अगर तुझसे पूरा मजा ले सकता है तो तेरे सगा भाई का तो ज्यादा अधिकार है तुझपर, तेरी इस प्यारी सी फुद्दी पर। फिर उसे कौन सा मालूम पड़ने वाला है की ये तू है?
फिर मैं बड़े प्यार से उसके लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। पर मुझे लगा कि रामू भाई के और दमऊ भाई के लण्ड दोनों में कुछ अलगपन नहीं लगा। जबकी दोपहर को मैंने देखा था की दमऊ भाई के लण्ड से रामू भाई का लण्ड कुछ ज्यादा ही मोटा और बड़ा था। उस हिसाब से दमऊ का लण्ड पहले वाले लण्ड से थोड़ा पतला और छोटा होना चाहिए। पर मुझे कुछ भी अलग नहीं लगा, वही मोटाई... वही लंबापन... वही खुशबू... बल्कि कुछ अलग सी महक भी उसमें शामिल थी। और मैं चौंक गई। बहुत बार अपने पति का लण्ड चूस-चूसकर इस खुशबू से वाकिफ हो चुकी थी।
लण्ड की खुशबू में फुद्दी के रस की खुशबू भी शामिल थी। पर दमऊ भाई के लण्ड पर फुद्दी के रस की खुशबू कैसे हो सकती है? घर में केवल तीन जान... रामू भाई, दमऊ भाई, और औरत जात के नाम पर सिर्फ और सिर्फ मैं। तो क्या रामू भाई से चुदवाने के टाइम भी मैं जितना घबरा रही थी की शायद उनके लण्ड से चुदने के वक्त मुझे काफी दर्द होगा वैसा कुछ नहीं हुआ। फिर क्या बात है? मेरा सोच-सोचकर सिर चकराने लगा। इतने में दमऊ भाई, मेरे जांघों के बीच में बैठकर अपने लण्ड का सुपाड़ा एक धक्के के साथ घुसा चुके थे और अंजाने में मैंने भी अपना चूतड़ उछाल दिया था।
और दमऊ भाई के मुँह से निकला- “हे दीदी...”
मैं चौंक गई- “हे दीदी... इसका मतलब है कि रामू भाई ने इसे पूरा का पूरा वाकया सुना दिया है."
मैंने कहा- दमऊ भैया, प्लीज.. मुझे माफ कर दीजिए। पहले रामू भैया से और अब आपसे।
दमऊ- माफी तो मुझे चाहिए दीदी।
दीदी- क्यों भैया?
दमऊ- मैं दूसरी बार तेरी फुद्दी में अपना लण्ड घुसा रहा हूँ।
दीदी- दूसरी बार? पहली बार आपने कब मेरी फुद्दी मारी भैया? कहीं बेहोशी की दवाई देकरके तो आपने?
दमऊ- नहीं दीदी, अभी थोड़ी देर पहले ही तो तेरी फुद्दी में अपना लण्ड घुसाया था।
दीदी- तो... तो इसका मतलब है कि थोड़ी देर पहले रामू भैया को सोचकर मैं तुमसे ही चुदवा रही थी? और इतने में ही लाइट आ गई। मैंने देखा तो मैं नगी पलंग पे टाँगें फैलाये नीचे से अपना चूतड़ उछाल-उछालकर फुद्दी में लण्ड ले रही हूँ। और दमऊ भैया ऊपर से हुमच-हुमच करके अपना लण्ड मेरी फुद्दी में पेल रहे हैं। मारे शर्म के मैंने अपनी दोनों आँखें बंद कर ली। थोड़ा गुस्सा भी आया। दीदी- आपको शर्म आनी चाहिए दमऊ भैया? कोई इस तरह से अपनी ही सगी बहन को धोखे से चोदता है। भला? चलो हटो मुझे नहीं चुदवाना आपसे? मैंने दमऊ भैया से लिपटते हुए कहा।
दमऊ- आई आम सारी दीदी। मैंने कई बार कहने की कोशिश की। इस बात के गवाह मेरे इस कहानी को पढ़ने वाले सभी पाठक गवाह हैं की कई बार मैंने कहने की कोशिश की की दीदी मैं रामू नहीं... पर आपने मुझे बोलने का मौका ही नहीं दिया।
दीदी- पर... तुझे दुबारा दमऊ बनकर आकर चोदने में कोई शर्म नहीं आई?
दमऊ- “अरी दीदी... पहली बार जितना मजा आया ना... दूसरी बार करने को जी चाह रहा था। और एक बात...
आप अंधेरे में रामू भाई से चुदवा रही थीं। पर गलती से वो मैं था। पर आपको ये तो मालूम नहीं था ना। कल दिन में अकेले में आप रामू से फिर से चुदवाने की कोशिश करतीं और वो साफ-साफ मना कर देता तो आपको कितनी ठेस पहुँचती...”
दीदी- “अरे दमऊ भैया, ये तो मैंने सोचा भी नहीं था। पर रामू भाई कहाँ हैं? आप प्लीज अपने कमरे में चले जाइये। इससे पहले की रामू भाई इस कमरे में हम दोनों सगे भाई बहन को इस अवस्था में देखें... प्लीज आप... आप चले जाइये...”
दमऊ- उसकी चिंता ना कर बहन।
दीदी- नहीं, भैया नहीं... मैं ये जिल्लत बर्दस्त नहीं कर पाऊँगी। मैं ऊपर से तो अपने भाई को हटने को बोल रही थी पर मेरा शरीर... ये मानने को तैयार नहीं था, चूचियां फड़क रही थीं। जिसे दमऊ भाई एक को चूसते हुए दूसरे को दबा रहे थे। मेरे हाथ उनकी पीठ को सहला रहे थे। नाखून उनकी पीठ में चुभ रहे थे। मेरी फुद्दी अपना कामरस छोड़ रही थी। मेरे चूतड़ दमऊ भाई के हर धक्के का जवाब देने को अपने आप ताल से ताल मिलाकर उछल रहे थे, और फिर बारिष हुई.. जमकर बारिष हुई। इतनी झमाझम बारिष हुई की हम दोनों भाई बहन उसमें बहने लगे... बहने लगे। हमें कोई होश ना रहा। हम दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। पांच मिनट के बाद जब होश आया तो मैंने उसे धक्के देकर अपने ऊपर से नीचे गिराया और अपने कपड़े पहनने लगी। और दमऊ भाई के गालों पर मैंने थप्पड़ जड़ दिया।

दमऊ भाई पूरी तरह डर गया।
दीदी- तूने मुझे बर्बाद कर दिया दमऊ। अपनी सगी बहन को चोदते हुए तो शर्म नहीं आई। अब तो कपड़े पहन और मुझे जिल्लत से बचा। इससे पहले की रामू भैया हमें देख ले खिसक ले।
दमऊ- अरे दीदी, ये गेस्टरूम है.. आपका बेडरूम नहीं है।
दीदी- अरे सारी दमऊ भाई... मैं तो भूल ही गई थी की ये मेरा बेडरूम नहीं, गेस्टरूम है और मैं आई थी चुदवाने
को।
दमऊ- हाँ.. आप यहाँ आई तो थीं रामू से चुदवाने को पर चुदवा बैठी अपने भाई दमऊ से।
दीदी- वो भी धोखे से। पर भैया, रामू भैया कहाँ गये?
दमऊ- अरे दीदी, उनका एक अर्जेंट काल आ गया और उन्हें जाना पड़ा। और मेरी लाटरी निकल गई। फ्री में आपकी फुद्दी चोदने को मिल गई।
दीदी- तो तू मेरी फुद्दी चोदना चाहता तो था ही, आज मिल गई।
दमऊ- पर दीदी, आपको कैसे पता चला की मैं आपको चोदना चाहता हूँ।
दीदी- दोपहर को तुम्हारे मूठ समारोह समाप्त होने के बाद मैं आपके कमरे में गई थी और बेड के नीचे अपनी सगी बहन को चोदा नमक किताब पढ़ ली थी।
दमऊ- “चलो जो हुआ सो अच्छा हुआ..”
दीदी- क्या अच्छा हुआ? अब ससुराल जाकर मैं कौन से मुँह से अपने पति का सामना करूँगी की मैंने अपने सगे भाई से एक ही रात में तीन-तीन बार चुदवा लिया।
दमऊ- एक ही रात में तीन-तीन बार चुदवा लिया? लेकिन दीदी, मैंने तो आपको सिर्फ दो बार ही चोदा है।
दीदी- अरे भैया, दो बार चोदने के बाद अभी एक बार और भी चोदोगे ना मुझे, या नहीं चोदोगे? क्या मेरी फुद्दी इतनी बुरी है की सिर्फ दो बार चोदकर ही रुक जाओगे?
तो सासूमाँ... मैंने देखा की इतना सुनते ही दमऊ भाई का चेहरा खिल गया। उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और जगह-जगह चूमने लगा, चाटने लगा। और सासूमाँ, उस रात दमऊ भैया ने मुझे तीन बार नहीं पूरे चार बार चोदा था। और ये सिलसिला तब से चलते आ रहा है... चलते आ रहा है। मेरे दिल की एक तमन्ना थी की मैं रामू भैया के बिकाराल लण्ड से चुदवाऊँ कम से कम एक बार तो चुदवाऊँ। और भगवान ने मेरी सुन ली जब रामू भाई यहाँ पर आने वाले थे। मैंने दमऊ से कहकर एक ही स्लीपर बुकिंग करवाई।
सासूमाँ- और इस तरह तू रामू भाई के विशाल लण्ड को भी अपनी प्यारी सी फुद्दी में घुसेड़ ली, वो भी चलती बस के अंदर।
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06-06-2019, 01:09 PM,
#82
RE: non veg kahani दोस्त की शादीशुदा बहन
दीदी- और क्या करती सासूमाँ? मुझसे और बर्दस्त नहीं हो रहा था, और बर्दस्त तो अब भी नहीं हो रहा। मेरा निकलने ही वाला है। बस चम्पा रानी मेरी फुद्दी को चूसती रह। खा ले, पूरा खा ले। सासूमाँ मैं तो गई?
सासूमाँ- मैं भी गई बहूरानी और सासूमाँ की चूत ने भी पानी फेंक ही दिया।
चम्पा- बस... अम्माजी थोड़ी देर और उंगली चलाइए। हाँ हाँ मेरा भी निकला... निकला... ओहह... माँ... गई रे.. और चम्पा रानी भी पलंग के ऊपर ढेर हो गई।
दस मिनट तक तो तीनों को होश ही ना रहा। फिर चम्पा उठकरके अपने कपड़े ठीक करती हुई बोली- अम्माजी, मैं तो जाती हूँ किचेन में खाना बनाने। झरना दीदी भी आने वाली हैं।
सासूमाँ- अरे अभी उसे तीन घंटे पड़े हैं आने में। तू भी रुक ना।
चम्पा- “नहीं अम्माजी... मेरा कोटा पूरा हुआ। आप दोनों सास बहू मस्ती करो... अब मैं खाना बनाती हूँ। ठीक
दीदी- ठीक है चम्पा। पर दरवाजा खोलने से पहले हमें सचेत करते हुए जाना। कहीं ऐसा ना हो जाए कि कोई पड़ोसन आ जाये और हमें ऐसी अवस्था में देख ले।
चम्पा- ठीक है, अम्माजी।
दीदी- हाँ हाँ.. तो अम्माजी, आप भी कोई मजेदार किस्सा सुनाए ना।
सासूमाँ- अरे हाँ... चल बैठ पलंग पर मैं तुझे एक बढ़िया मजेदार किस्सा सुनाती हूँ तेरे ससुर के बारे में।
दीदी- अच्छा, बाबूजी के बारे में?
सासूमाँ- हाँ... तू ठीक से बैठ ना। और अभी उंगली करनी छोड़ फुद्दी में। थोड़ी देर बाद जब मजा आने लगे ना तब उंगली क्या फुद्दी को चाट भी लेना।
दीदी- ठीक है अम्मा जी... आप शुरू हो जायें लेकर लण्ड चूत का नाम।
सासूमाँ- “हाँ... तो सुन... अभी मेरी तेरे बाबूजी के साथ शादी नहीं हुई थी तब की बात है ये। फिर तेरे बाबूजी ने एक दिन बड़े प्यार से मुझे सुनाया था। और इतने सालों के बाद मैं तुझे ये कहानी सुना रही हूँ। बेटी बहुत ही। ध्यान से सुन...”
दीदी- तो क्या बताया बाबूजी ने आपको?
सासूमाँ- ऐसे नहीं बेटी... उन्हीं की जुबानी सुनो, उन्हीं की कहानी। “हमने चंदा किया गोरी मेमसाहब को चोदने
को..."
तेरे बाबूजी, दीनदयाल पहले एक कारखाने में काम किया करते थे। भले ही पढ़े लिखे थे। पर कोई काम ना मिलने तक उसी कारखाने में काम करने की सोच रखे थे। उसकारखाने में पंद्रह सौ कर्मचारी काम करते थे। और सभी की छुट्टी एक साथ शाम को 6:00 बजे के आस-पास होती थी।
दीदी- ऐसे नहीं सासूमाँ... आपके मुँह से अच्छी नहीं लग रही है ये कहानी।
सासूमाँ- तो तेरे बाबूजी को कहाँ से लाऊँ? वो तो बोमय गये हुए हैं, तीन दिन के बाद लौटेंगे। तब सुन लेना, उनका छोटा सा, पतला सा लण्ड पकड़ के, जो अब खड़ा ही नहीं होता।
दीदी- क्या बात करती है सासूमाँ? बाबूजी का लण्ड और पतला सा, छोटा सा? आपसे किसने कहा? उनका तो मोटा और बड़ा है, आपके बेटे के जैसा? और हाथ लगते ही झट से खड़ा हो जाता है।
सासूमाँ- वही तो... यही बात मैं तेरे मुँह से ना जाने कितने दिनों से सुनना चाहती थी बेटी। पर तूने कभी ना कहा। बता सच में तूने अपने बाबूजी से चुदवा लिया है ना?
दीदी- नहीं, मम्मीजी।
सासूमाँ- तब तुझे कैसे पता चला की उनका हाथ में आते ही झट से खड़ा हो जाता है?
दीदी- मैंने कई बार आप दोनों की चुदाई देखी है।
सासूमाँ- ओहो... तो ये बात है, पर तेरा मन करता है उनसे चुदाने को?
दीदी- “सच कहूँ तो सासूमाँ, हाँ..”
सासूमाँ- अरे तो इसमें शर्म की क्या बात है? मैं तेरे पति से चुदवाती हूँ तो तेरा भी हक बनता है उनसे चुदवाने का। अबकी बार उन्हें आने दे। उनसे तुझे चुदवा ही देंगी।
दीदी- लेकिन ऐसे नहीं अम्मा... अंधेरे में ज्यादा मजा आएगा। जब उन्हें मालूम ना होगा की कौन चुदवा रही है।
सासूमाँ- ठीक है, फिर वादा रहा।
* * * * * * * * * *हमने चंदा किया गोरी मेमसाहब को चोदने को
सासूमाँ- अच्छा चल तेरे ससुरजी की पर्सनल डायरी निकालते हैं, और पढ़ते हैं। खूब मजा आएगा।
दीदी- हाँ हाँ.. निकालो डायरी।
सासूमाँ- खोल दे पन्ना डिसेंबर 21 तारीख की।
दीदी- वाह... सासूमाँ, आपको तारीख तक याद है।
सासूमाँ- अरे इतनी धांसू स्टोरी है की क्या बताऊँ? बहू, मेरी फुद्दी तो बिना चुदाए ही पानी छोड़ देती है। हाँ... तो चल तू पढ़।
दीदी ने डायरी के पन्ने खोलकर पढ़ना शुरू किया।
तारीख 21 डिसेंबर।
मैं दीनदयाल इस तारीख को कभी भूल नहीं सकता। हम पंद्रह सौ के कर्मचारी कारखाने में काम करते थे। और रोज शाम को 6:00 बजे छुट्टी मिलती थी। हम लोग अपना-अपना टिफिन बाक्स लेकर जाते थे। याने दोपहर को कारखाने में ही खाना होता था।
एक दिन मेरे एक दोस्त कालिया ने कहा- अरे दीनदयाल, तूने कुछ सुना?
मैं- क्या? भाई कालिया, क्या सुना?
कालिया- अरे अपन कारखाने से घर जाने के टाइम एक बभगलो पड़ता हैं ना रास्ते में। एक गोरी मेमसाहब रहने लगी हैं। कल मैंने देखा, यार बेहोश होते-होते बचा।
मैं- क्यों भाई कालिया, बेहोश होते-होते कैसे बचा? क्यों उसे कोढ़ हो गया है क्या?
कालिया- अरे दीनू भैया, छी... छी... मेरे मूड को खराब क्यों कर रहे हो?
मैं- अच्छा... क्यों बेहोश होते-होते बचा ये तो बता?
कालिया- अरे दीनू भैया, क्या बताऊँ साली गोरी मेमसाहेब इतनी गोरी है की छू लो तो दाग पड़ जाए। आँखें ऐसी की आदमी उसी में डूब जाए, आँखें बड़ी-बड़ी, मुश्कुराहट ऐसी की देखने वाला फिदा हो जाये, चूचियां दोनों जैसे दो पहाड़ हों, बीच में घाटी, कमर एकदम पतली, चलती है तो क्या बताऊँ यारा दोनों कूल्हे आपस में टकराते हैं। तो लगता है सब कुछ भूलकर उसे ही देखता रहूं। यारा, एक बार उसे चोदने मिल जाये। बस... जिंदगी में और कुछ भी ना चाहिए।
मैं- क्या बोलता है कालिया? ऐसी खूबसूरत है वो लड़की?
कालिया- यार, फिल्मी हेरोयिन सब उसके आगे पानी भरें, ऐसी खूबसूरत है वो?
इतने में ही घंटी बजी, और हम फिर से काम पे लग गये। शाम को जब छुट्टी हुई तो कालिया फिर मेरे साथ ही हो लिया। और जब बँगलो के नजदीक पहुँचे तो। हाय... हाय... मैं खुद बेसुध सा रास्ते के ऊपर ही खड़ा रह गया। इतने में किसी ने मुझे झिंझोड़ा और मैं हड़बड़ा गया।
कालिया- “क्यों गुरू? मैंने ठीक कहा था ना...”
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06-06-2019, 01:10 PM,
#83
RE: non veg kahani दोस्त की शादीशुदा बहन
मैं- सच में कालिया, भगवान ने इसे बड़े फुर्सत से बनाया होगा।
दूसरे दिन सुबह कारखाने में।
कालिया- गुरू रात कैसी बीती?
दीनदयाल याने मैं- यारा कालिया क्या बताऊँ। साली रात भर मेरे सपने में थी। रात भर चुदवाती रही टाँगें उठाकर।
कालिया हँसते हुए- “इसीलिए गुरू आज जरा लंगड़ाते हुए चल रही थी...”
अब तो क्या मैं, क्या कालिया, क्या श्यमू, क्या भोलू... वो गोरी मेमसाहेब हर किसी के सपने में आने लगी। हर कुँवारा उसके ही नाम का मूठ मारने लगा। और हर शादीशुदा अपनी बीवी को चोदते समय ये कल्पना करने लगा की वो अपनी बीवी को नहीं, उस गोरी मेमसाहेब को चोद रहा है। उनकी बीवियां भी खुश... चलो पतिदेव सुधर गये, अच्छी चुदाई कर रहे हैं।
और ऐसे में एक दिन कालिया सुबह सुबह मेरे घर में आया- अरे गुरू, तुमने सुना? वो गोरी मेमसाहेब?
मैं- अरे बता... गोरी मेमसाहेब का क्या हुआ? किसी के साथ भाग गई या कोई रात को उसका बलात्कार तो नहीं कर दिया। अरे बता ना कालिया? देख मेरा जी घबरा रहा है। जल्दी बता दे मेरी सपनों की रानी को हुआ क्या
है?
कालिया- अरे गुरू आपके वो सपने की रानी। तो हम सभी 1500 कर्मचारियों की सपने की रानी है। आपको तो पता है कि सभी उसके नाम की ही मूठ मारते हैं। किसी लड़की को चोदते समय भी खयालों में वही होती है।
मैं- मैं जानता हूँ कालिया। अपने-अपने सपने में सभी उसे चोदते हैं। पर मेरे सपने में तो केवल और केवल मैं ही उसे चोदूंगा कहे देता हूँ। और किसी को छूने भी ना दूंगा गोरी मेमसाहेब को।
कालिया- ठीक है दीनू भैया, पर मेरे सपने में तो मैं चोद सकता हूँ ना तेरी उस गोरी मेमसाहेब को।
मैं- भाई तेरा सपना... तेरी मेमसाहेब, तेरी मेमसाहेब की फुद्दी, तेरा लण्ड... तू चाहे उसके फुद्दी में लण्ड डाल, उसके गाण्ड में लण्ड डाल या उसके मुँह में मुझे क्या?
कालिया- वाह गुरू... वो क्या कही आपने। मेरा लण्ड मेरी मरजी। वो वाहा आज लगता है दुबारा मूठ मारनी पड़ेगी।
मैं- “मूठ क्यों मरेगा पगले? सीधा जा बँगलो का दरवाजा खोल, घंटी बजा। दरवाजा खोलेगी तेरी वो गोरी मेमसाहेब। सीधा बाहों में ले लेना बाहों में उठाकर सीधा उसे पलंग में पटकना। कपड़े खोलकर पहले उसकी फुद्दी चाटना। उधर वो तेरा लण्ड अपने मुँह में लेकर चूसेगी। फिर उसकी टाँगें फैलाना। अपना लण्ड उसकी गोरी-गोरी मखमली चूत में घुसाना। ध्यान से कहीं खून ना निकल जाए। फिर धक्का लगाते जाना... लगते जाना... जब तक तेरा...”
कालिया- “हे भैया, निकल गया... निकल गया...”
मैं- अबे गधे, क्या निकल गया?
कालिया- गुरू, मेरा लण्ड का पानी निकल गया।
मैं- अबे हद कर दी। मेमसाहेब को चोदने की बात सुनते ही तेरा लण्ड उल्टी कर देता है तो असल में अगर चोदना पड़े तो? उनकी गोरी-गोरी फुद्दी देखते ही तू तो बेहोश ही हो जाए।
कालिया- सच में, हाँ... गुरू। उसी बात के लिए तो मैं आपके पास आया था।
मैं- उसी बात के लिए तो मैं आपके पास आया था। क्या मतलब है तेरा?
कालिया- सच गुरू, अपना गोरी मेमसाहेब को चोदने का सपना साकार हो सकता है।
मैं- तू पागल तो नहीं हो गया?
कालिया- सच गुरू, ऐसी फड़कती हुई खबर लाया हूँ की आप खुश हो जाएंगे।
मैं- अच्छा अच्छा... पहेलियां ना बुझा और बोल जो बोलने आया है।
कालिया- मुझे खबर मिली है गुरू की वो गोरी मेमसाहेब असल में फर्स्ट क्लास रंडी है।
मैं- कालिया, तेरा दिमाग तो नहीं खराब हो गया?
कालिया- सच कहता हूँ गुरू, पक्की खबर है।
और उसी दिन पूरे कारखाने में ये खबर आग की तरह फैल गई की गोरी मेमसाहेब पैसा लेकर चुदवाती हैं। हम सबके मन में एक आस सी जागी। दोपहर के बाद एकाएक कुछ खराबी के कारण बिजली काट गई और हम सब बाहर बैठके बातें करने लगे।
ढोलू- सच, दीनू भैया... आपने गोरी मेमसाहेब के बारे में सुना?
मैं- कौन सी बात ढोलू?
कालिया- अरे, गुरू सुबह आपको बताया तो था।
मैं- फिर भी कुछ तो लेती होगी? मेमसाहेब, आम रंडियों की तरह तीस-तीस रूपए में तो नहीं ना चुदवाती होगी?
ढोलू हँसते हुए- अरे किस जमाने में हो दीनू भैया। अभी आपको पता है... मैं कुछ दिन पहले मशीन ठीक करने नागपुर गया था। वहाँ मन किया तो रेड लाइट एरिया घूमने निकल गया।
सड़क पर एक लड़की मिली। बोली- चलना है?
मैंने पूछा- कितना लेगी?
उसने कहा- तीस रूपए।
मैं आगे बढ़ा।
दूसरी लड़की ने कहा- पचास रूपए।
तीसरी लड़की ने कहा- सत्तर रूपए।
जब पाँचवी लड़की ने सौ रूपए कहा।
तो मैं उसके संग हो लिया। चुदाई से पहले मैंने उससे पूछा- तुझमें ऐसे क्या खासियत है की बाहर सड़क वाली लड़की तो तीस रूपए में चुदाने को राजी और तेरी डिमांड सौ रूपए।
लड़की ने कहा- एक तो मैं खूबसूरत हैं।
तो जानते हो दीनू भैया।, मैंने कहा- चूत तो तेरी एक ही होगी। वहीं जाँघ के पास ही होगी। चूत में क्या खासियत है ये बता?
लड़की ने कहा- मेरी चूत में एक उंगली घुसा?
मैंने घुसाया।
उसने कहा- दूसरी घुसाओ... फिर तीसरी... फिर चौथी... अब पाँचवीं भी घुसाओ। अच्छा अब एक काम करो। दूसरे हाथ की एक उंगली घुसाओ।
कालिया- अबे तो ऐसे बोल ना की तूने उसकी फुद्दी में अपने दोनों हाथ की दसों उंगलियां घुसेड़ डाली।
ढोलू- हाँ कालिया।
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06-06-2019, 01:10 PM,
#84
RE: non veg kahani दोस्त की शादीशुदा बहन
फिर मैंने पूछा- अब?
तब लड़की ने कहा- अब चूत के अंदर ताली बजा।
तब मैंने ताली बजाने की कोशिश की।
लड़की ने पूछा- ताली बजी क्या?
तब मैंने कहा- नहीं बजी।
फिर लड़की ने हँसते हुए कहा- “वो तीस रूपए में चुदवाने वाली लड़की की चूत में दोनों हाथ डालकर ताली बजा सकते हो। समझे बुद्धू... अब निकाल सौ रूपए। साला... मेरा टाइम खोती करने आ गया...”
मैदान में सभी कर्मचारी कान लगाकर उनकी बातें सुन रहे थे। सारा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
दीदी- सासूमाँ, अब डायरी को आप पढ़िए। मेरी तो हँसी ही नहीं रुक रही है।
सासूमाँ- हाँ हाँ... इधर ला डायरी।
कारखाने में हमारे पास सभी कर्मचारी धीरे-धीरे इकट्ठे होने लगे। हमारी बातचीत में शामिल होने लगे।
ढोलू- सच्ची भैया, वो गोरी मेमसाहेब की तो मैं बजा ही दूंगा।
कालिया- अरे, जा जा... खुद की बीवी को तो कर नहीं सका। वो भाग गई, अपने यार के साथ।
ढोलू- वो बात नहीं है भैया। वो तो मेरी रोज-रोज की चुदाई के कारण परेशान हो गई थी।
कालिया- हाँ... तेरा हर बार खड़ा होता था। और चूत को देखते ही उसमें घुसने को बेताब हो जाता था। चूत में घुसते ही उल्टी कर देता था।
ढोलू- वो क्या बात है भैया? उस साली की चूत थी भी इतनी टाइट की मेरे लण्ड को बुरी तरह जकड़ लेती थी। लण्ड का रस तुरंत ही निकल जाता था।
मोनू- अरे कहाँ इतनी टाइट थी ढोलू भाई? मेरा तो आराम से चले जाता था।
ढोलू- क्या? इसका मतलब है तुम उसे चोद चुके थे?
मोनू- अरे नहीं नहीं भैया। मैंने तो खाली चूचियां दबाई थी। पूरी चुदाई तो इसकालिया ने की थी।
कालिया- अरे वो ढोलू भैया... एक दिन ये दीनू भैया चोद रहे थे तुम्हारी बीवी को। तो वो... मैं किसी काम से उधर निकला था। देख लिया तो बहती गंगा में मैंने भी हाथ धो लिया। बाकी मस्त थी यार तेरी बीवी।
ढोलू- और चलो मोनू भाई... मेरे सिर से एक बोझ आज उतर गया। मैंने तेरी बहन को चोद दिया था। और कालिया, मैंने तेरी अम्मा के संग चुदाई की थी। यार.. चलो हिसाब बराबर।
मोनू- क्या? वो साला तू था जो मेरी बहन को रोज चोदता था? मेरी बहन प्रेगनेन्ट हो गई साले और मैं सोच रहा था- मैंने तो बहन को एक रात ही चोदा था वो भी नशे में। मैंने क्या चोदा था वो खुद आकर चुदवाई थी।
ढोलू- हाँ... वो मेरी दिमाग की उपज थी। इस तरह बहन की प्रेग्नेन्सी के लिए तू जिम्मेवार हो गया।
मोनू- साले, दो हजार रूपए खर्च हो गये थे पेट सफाई में। वो अब तू देगा?
ढोलू- मैं क्यों दू? तूने मेरी बीवी की चुदाई की। मैंने तुझसे पैसे माँगे क्या?
मोनू- अच्छा चल ठीक है।
मैं- यार अपनी चुदाई पूराण बंद करो यहाँ। हम सब इकट्ठे हुए गोरी मेमसाहेब के बारे में बात करने को।
कालिया- हाँ गुरू, आपको पता है साली गोरी एक चुदाई के कितने लेती है?
मैं- कितना?
कालिया- पूरे पंद्रह सौ रूपए।
मैं- क्या?
कालिया- हाँ गुरू, हाँ पूरे पंद्रह सौ रूपए।
पर यारा इतनी खूबसूरत है साली की पंद्रह सौ रूपया तो क्या उससे भी ज्यादा हो तो भी उसके आगे कुछ नहीं।
कालिया- दोस्तों, मेरे पास एक बढ़िया आइडिया है। जिससे गोरी मेमसाहब में क्या खासियत है, उसकी चूची दबाने में कैसी लगती है, उसकी गोरी फुद्दी चाटने में कैसी लगती है? लण्ड घुसाने के टाइम कैसा महसूस होता है? सब हमें मालूम पड़ सकता है। इतना ही नहीं... साली नंगी कैसी दिखती है? लण्ड चूसने में कितना मजा देती है? ये सब हमें पल भर में मालूम पड़ सकता है।
सब लोग हैरान हो गये, कालिया की बातें सुनकर।
मैं- साले तेरे पास ऐसी कौन सी जादुई छड़ी है जिससे ये गुप्त बातें हमें पता चल सकती हैं?
कालिया- पहले बात तो गुरू मेरी बात मानें। पर आपको ये सब बातें मालूम पड़ सकती हैं। दूसरी बात आपने मुझे साला कहा मुझे अच्छा लगा। मेरी बहन ऐसे भी आपसे बहुत प्यार करती है। मैं तो साला बनने के लिए तैयार हूँ। आप बन जाओ ना मेरे जीजाजी।
मैं- वो सब बाद की बात है? पहले गोरी मेमसाहब के बारे में बोल।
कालिया- तो सब लोग ध्यान से सुनो... गोरी मेमसाहब को चोदे बिना ये सब बातें जानना नामुमकिन है। और मेरे पास गोरी मेमसाहब को चोदने का एक खूबसूरत प्लान है।
मैं- तू पागल हो गया है? साली एक चुदाई का 1500 रूपया लेती है। हमारी तनखाह कितनी है? किसी की 1000 तो किसी की 1200, तेरी तनखाह 1400 है तो मेरी तनखाह 1500 है।
ढोलू- हाँ और मेरी तनखाह है 1300, उसकी एक चुदाई से भी 200 कम।
मैं- अगर हम 1500 सौ देकर उस गोरी मेमसाहब से चुदाई कर लें तो... हमें जरूर ये सब बातें पता चल सकती हैं। पर फिर महीने भर का रासन-पानी, घर परिवार का खर्चा कैसे चलेगा... बताओ? हमारे घरवाले क्या हवा खाकर जियेंगे?
कालिया- अरे उससे भी मस्त आइडिया है मेरे पास की हींग लगे ना फिटकरी रंग भी चोखा आए। पैसे नहीं लगेंगे इतने।
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06-06-2019, 01:10 PM,
#85
RE: non veg kahani दोस्त की शादीशुदा बहन
मैं- तो क्या गोरी मेमसाहब को भीख में चुदाई माँगेंगे। मेमसाहब... एक चुदाई दे दे मेमसाहब। एक चुदाई दे दे। खड़े लण्ड के नाम पे दे दे। गीली चूत के नाम पे दे दे मेमसाहब?
कालिया- अरे पहले मेरी बात सुन तो लो।।
सब लोग कान खड़े करके कालिया की ओर देखने लगे।
सब लोग हमें, याने मैं दीनदयाल, कालिया, ढोलू, मोनू सब बीच में थे और सभी कर्मचारी हमें घेरकर खड़े थे।
मैं- यार कालिया, खुल के बता तेरे दिमाग में क्या है?
कालिया- मेरे बताने से पहले मेरी बात ध्यान से सुनो।
सब तरफ पिन ड्रॉप साइलेन्स। जैसे बिल्ली के आने पर चूहों में सन्नाटा छा जाता है। एकदम साँस रोके सब हमारी ओर ही देख रहे थे।
कालिया- देखो भाई, हमारी तनखा इतनी है नहीं की हम उस गोरी मेमसाहब को चोद सकें। और अगर चोद भी लिए 1500 रूपए जुगाड़ करके तो फिर परिवार के भूखे मरने की नौबत आ जाएगी।
मैं- अबे साले, वो सब छोड़? असल मुद्दे पर आ?
कालिया- ठीक है गुरू.. पर जब-जब आप मुझे साला बोलते हैं तो दिल में अजब सी ठंडक पहुँच जाती है गुरू। आप अगर मेरे जीजाजी बन गए तो मेरी बहन के भाग्य ही खुल जाएंगे। मेरी बहन भी आपसे बहुत ही ज्यादा प्यार करती है। बस आपके हाँ कहने की देर है।
मैं- “अबे साले, ओहो... सारी यार...”
कालिया- सारी काहे गुरू, आप मुझे सुबह शाम, घर में, बाहर में सब जगह साला बोल सकते हैं। बल्कि मैं तो सोचता हूँ मैं भी आपको गुरू की जगह जीजाजी कहना चालू कर दें। क्यों साथियों?
सबने ताली बजायी, मुझे मुबारकबाद दी। मैं ऐसे तो कालिया की बहन से मन ही मन प्यार करने लगा था। पर कहने की हिम्मत नहीं कर सकता था। अब जबकी उनकी बहन भी मुझ पर मर मिटी थी तो फिर क्या कहने। यहाँ तो दोनों तरफ है आग बराबर लगी हुई। मैं मुश्कुराया, तो कालिया की बांछे खिल गई।
कालिया- तो गुरू, ओहो... मेरे होने वाली जीजाजी, होने वाले क्या? हो गये समझलो। मैं आज ही घर में ये खुशखबरी सुनाता हूँ।
मैं- अरे यार, वो बात बाद की है। पहले अपन गोरी मेमसाहेब की।
कालिया- जीजाजी, गोरी मेमसाहेब की चूत भी दिलाऊँगा। मेरी बहनसे शादी करने की खुशी में अग्रिम दहेज।
मैं- पर मेरे पास उसे चुदाई के बदले में देने को 1500 रूपये नहीं है।
कालिया धीरे से मेरे कान के पास- “वो सब आप मुझ पर छोड़ दीजिए जीजाजी। पर मेरी बहन को भूल मत जाना..."
मैं- खुश होते हुए, ठीक है सालेसाब।
कालिया- हाँ तो भाइयों, मैं ये कह रहा था की हममें से किसी में ये औकात नहीं, और हिम्मत नहीं। पाकेट में पैसा नहीं की वो गोरी मेमसाहेब को चोद के आ सके। तो मेरे पास एक मस्त आइडिया है सुनो... हम सब गोरी मेमसाहेब की चूत में लण्ड घुसाकर चुदाई करने के लिए चंदा कर लेते हैं।
मैं- “पागल हो गया है क्या कालिया? साले चंदा माँगने जाएगा तो क्या बोलेगा? गोरी मेमसाहेब को चोदना है। चंदा दे दो? खड़े लण्ड का सवाल है बाबा, चंदा दे दो... दमदार चुदाई के नाम चंदा दे दो... रसभरी गोरी फुद्दी के नाम पर चंदा दे दो... गोरी मेमसाहेब की गोरी-गोरी चूचियों, गोरी-गोरी बिना झांट की फुद्दी के नाम पर चंदा दे दो..."
सब लोग ताली बजा-बजाकर हँसने लगे।
मैं- साले, ये तेरा प्लान सूपर-फ्लॉप है। उल्टे लेने के देने पड़ जाएंगे। पब्लिक चंदा तो देगी नहीं उल्टा हमें गाली देगी सो अलग से।
कालिया- अरे, आप मेरी पूरी बात तो सुन लो जीजाजी। बीच में ही अपना खड़ा लण्ड घुसेड़ देते हो। जैसे मेरी बात, बात नहीं हुई, वो गोरी मेमसाहेब की बिना झाँटों की फुद्दी हो गई।
मैं- हँसते हुए, अच्छा साले साब पूरी बात बता दो।
कालिया- देखो भाइयों, हम सब 1500 कर्मचारी हैं। और वो गोरी मेमसाहेब लेती है पूरे 1500 रूपये। तो हम सबके पास किसी एक के लण्ड में ये ताकत नहीं है की वो गोरी मेमसाहेब को चोदने को अपनी अंटी से 1500 रूपए निकलकर गोरी मेमसाहेब को चोदकर अपने परिवार को मुसीबत में डाले। तो मेरे पास एक शानदार आइडिया ये है की हम सब 1500 रूपया तो नहीं पर एक सिर्फ एक रूपया तो चन्दा दे ही सकते हैं।
सभी लोगों ने कहा- हाँ हाँ.. एक रूपया तो हम दे ही सकते हैं, गोरी मेमसाहेब को चोदने को।
तभी गगन बिहारी उठ खड़ा हुआ, बुजुर्ग कर्मचारी थे। सभी उसे खड़ा देखकर चुप हो गये।
गगन बिहारी- भाइयों, कालिया की बातें मैंने सुनी, और अच्छा भी लगा। पर भाइयों हम सब अगर एक-एक रूपया देंगे तो 1500 रूपया ही इकट्ठा होयेगा। और गोरी मेमसाहेब लेती है 1500 रूपए।
कालिया- हाँ... तो? मैं भी वही कह रहा हूँ गगन काका।
गगन बिहारी- अरे बेटा, गोरी मेमसाहेब लेती है 1500 रूपए एक चुदाई के। और चोदने वाले कितने हैं? पूरे 1500... तो भैया मुझे ये समझा की जो तू चंदा के 1500 रूपए इकट्ठे करेगा। तो गोरी मेमसाहेब तो सिर्फ एक से ही चुदवाएगी मेरे बंधु। सभी 1500 से थोड़े ही चुदवाएगी... अगर एक से चुदवाएगी तो बाकी 1499 क्या करेंगे? मूठ मारेंगे?
कालिया- अरे काकाजी... आप भी आ गये बीच में अपना लण्ड घुसेड़ने। उधर काकी की फुद्दी की गर्मी को तो मुझे शांत करनी पड़ती है। गोरी मेमसाहेब चोदने लण्ड पहले ही खड़ा कर दिये, धोती के अंदर। मेरी बात ध्यान से सुनिए सब लोग।
ढोलू- हाँ हाँ... बताइए कालिया भैया। 1500 रूपए में तो वो गोरी मेमसाहेब केवल एक जन से ही चुदवाएगी। तो बाकी 1499? हम क्या मूठ मारेंगे? बोलो बोलो... जवाब दो? ये हमारे खड़े हुए लण्ड का सवाल है... आपको जवाब देना ही होगा। आपको अपने लण्ड के चारों तरफ उगी हुई झांटों की कशम। आपके द्वारा चोदी गई हर चूत की कशम। आपके इन हाथों से दबाई गई हर चूचियों की कशम। आपको जवाब देना ही होगा।
कालिया- अरे कम्बख़्त जवाब दे ही तो रहा हूँ, सुनो... गोरी मेमसाहेब लेगी 1500 रूपया। हम सब जने हैं 1500 तो अगर हम सब जने एक-एक रूपया देंगे तो गोरी मेमसाहेब को चोदने लायक 1500 रूपये हो जाएंगे।
मैं- अबे साले, गोरी मेमसाहेब को चोदने लायक 1500 रूपया तो ठीक कह रहा है पर किसी एक जने के चोदने लायक पैसा। सबके चोदने लायक?
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06-06-2019, 01:10 PM,
#86
RE: non veg kahani दोस्त की शादीशुदा बहन
कालिया- अरे जीजाजी, आपका भी खड़ा हो गया... गोरी मेमसाहेब को चोदने को खड़ा हो गया है तो आज की रात मेरे घर चलो ना... बहन है ना मेरी... आपको पूरी संतुष्ट कर देगी।
मैं- अबे, तुझे शर्म नहीं आती? एक तो मुझे जीजाजी बोलता है, दूजा शादी से पहले ही अपनी बहन को किसी पराए आदमी से चुदने की बात करता है।
कालिया- आप कोई पराए थोड़े ही हैं जीजाजी। आप तो मेरे होने वाले जीजाजी हैं और आपने मुझसे वादा भी किया है कि गोरी मेमसाहेब को चोदते ही आप हफ्ते भर में ही मेरी बहन से शादी करेंगे।
मैं- वो सब तो ठीक है। पर पहले गोरी मेमसाहेब को तो चोद लूं। देखता नहीं... घर में नहीं है दाने और अम्मा चली भुनाने। साले जेब में 1500 रूपए नहीं और सभी चले हैं गोरी मेमसाहेब चोदने।
ढोलू- मुझे तो लगता है... दीनू भैया, ना नौ मन तेल होगा और ना राधा नाचेगी। ना हमारे पास 1500 रूपए होंगे और ना ही हम गोरी मेमसाहेब को चोद पाएंगे।
कालिया- साले मनहूस... मनहूस जैसी बातें ही करेगा। सालों सबको मैं गोरी मेमसाहेब से चुदवा दूंगा। मेरी बात का अगर विश्वास नहीं है तो गोरी मेमसाहेब के नाम की मूठ मारते रहो... और इस जनम में तो क्या अगले सट जन्मों तक तुम्हें गोरी मेमसाहेब की चूत की झाँटें भी देखने को नहीं मिलेंगी।
सब लोग एक साथ- हमें तुम पे पूरा विश्वास है कालिया भैया, आप प्लान बोलो।
कालिया- तो सब ध्यान से सुनो?
सब एकदम चुप होकर ध्यान से सुनने लगे।
कालिया- तो भाइयों हम सब 1500 जने एक-एक रूपया चंदा देंगे। हुआ कितना?
मैं- 1500 रूपया।
कालिया- अब मैं क्या करूंगा? 1500 जने अपने-अपने नाम की एक-एक पर्ची लिखके मुझे देंगे। एक डिब्बे में उसे रखा जाएगा। एक छोटा सा बच्चा उसमें से एक पर्ची उठाएगा।
जिसका नाम होगा वो गोरी मेमसाहेब को चोदने जायगा।
ढोलू- और बाकी के 1499 मूठ मारेंगे।
कालिया- बीच में अपना मनहस लण्ड घुसाया तो तेरी अम्मा चोद दूंगा।
ढोलू- तो चोद लो जाकर। पहले भी तो मौका देखकर अम्मा को चोद ही रहे हो।
कालिया- ठीक है, ठीक है। हाँ... तो वो 1500 रूपया लेकर जायेगा और गोरी मेमसाहेब को चोदकर आएगा। दूसरे दिन हम सब यहाँ फिर से इकट्ठे होएंगे। वो आदमी जो चोदकर आएगा वो उस गोरी मेमसाहेब के साथ अपनी चुदाई की पूरी कहानी हम सबको सुनाएगा। हम सबको लगेगा की हमने खुद गोरी मेमसाहेब की चुदाई की है। दूसरे दिन फिर हम चंदा करेंगे... वही एक-एक रूपया। पहले वाले दिन जिसका नंबर आया था उसकी पर्ची तो पहले ही बाहर होगी। याने की डिब्बे में होगी 1499 पर्ची। फिर से एक छोटा सा लड़का उसमें से एक पर्ची उठाएगा और हममें से एक नया बंदा चोदने जाएगा, उस गोरी मेमसाहेब की मखमली फुदी को चोदने को। इसी तरह तीस दिन में तीस जने चोद सकेंगे उस गोरी मेमसाहेब को।
मैं- वो वाह साले साहब... क्या धांसू प्लान बनाया तूने। इसी तरह महीन में हमारा रूपया लगेगा सिर्फ 30 और 30 जने एक महीने में उस गोरी मेमसाहेब की गोरे बदन का मजा ले लेंगे।
गगनबिहारी काका- हाँ बेटे, साल भर में 365 आदमी उस गोरी मेमसाहेब की मखमली फुद्दी में अपना लण्ड घुसेड़ चुके होंगे 4 साल में 1460 जाने और फिर अगले एक माह दस दिन में सभी जनों का याने हम सब 1500 जनों का लण्ड उस गोरी मेमसाहेब की फुद्दी में घुसेड़ चुके होंगे। गोरी मेमसाहेब को चोदने का हमारा सपना पूरा हो जाएगा।
कालिया- हाँ हर दिन एक-एक बंदा गोरी मेमसाहेब को चोदेगा। तो अगले 1500 दिनों में हम सब उसके गोरे बदन का लुफ्त उठाएंगे। बस हमें सबर रखना होगा, सबका नंबर आएगा, हर एक की बारी आएगी। अब सब लोग एक-एक रूपए देना चालू करें। इस डिब्बे में रखें। हाँ साथ में अपने-अपने नाम की पर्ची दूसरे डिब्बे में रखें। पल भर में एक डिब्बे में 1500 सिक्के और दूसरे में 1500 पर्चिया इकट्ठी हो गई।
कालिया- बस सिर्फ आधे घंटे बाद एक छोटा लड़का को बुलाया जाएगा। हमने ढोलू के बेटे को बुलाया है। तीन साल का बच्चा है। पर्ची का नाम वो पढ़ नहीं सकता। इसीलिए किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा।
ढोलू- हाँ हाँ... हमें मंजूर है।
कालिया मेरे कान में- जीजाजी... आप तैयार रहिए आज गोरी मेमसाहेब को चोदने के लिये... अपने लण्ड को भी तैयार रखिए उस गोरी मेमसाहेब की गोरी-गोरी फुद्दी से मिलने के लिये।
मैं- अरे साले, पर 1500 पर्चियों में से मेरा ही नंबर आएगा। कैसे?
कालिया- वो सब आप मुझपे छोड़ दीजिए और आप तैयार रहिए।
और आधे घंटे के बाद लड़के ने पर्ची निकली। गगनबिहारी काका को पर्ची दिया गया उन्होंने नाम पढ़ा। दीनदयाल।
और मैं आश्चर्य में आ गया कि साले कालिया ने क्या जादू चला दिया?
कालिया- मुबारक हो जीजाजी... आज आपके लण्ड के नाम गोरी मेमसाहेब की फुद्दी। हाँ अपना वादा नहीं भूल जाना। मेरी बहन के साथ शादी करने की।
मैं- हाँ हाँ साले साब नहीं भूलूंगा। वादा रहा।
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06-06-2019, 01:10 PM,
#87
RE: non veg kahani दोस्त की शादीशुदा बहन
कालिया- हाँ... तो दोस्तों, आज का नाम जैसा की गगनबिहारी काका ने पढ़ा। मेरे प्यारे जीजाजी का नाम निकला है। कल 1499 पर्ची बचेंगी। इसमें मेरे जीजाजी का नाम नहीं होगा। परसों 1498, तरसों 1497, इसी तरह पर्चियों का नंबर घटते जाएगा और गोरी मेमसाहेब को चोद चुके, उनके फुद्दी का रस चाट चुके हम कर्मचारियों की संख्या बढ़ती जाएगी।
मैदान में तालियों की गड़गड़ाहट पूँज उठी।
कालिया- ये लो जीजाजी 1500 रूपए और लण्ड को खड़ा किए चलो गोरी मेमसाहेब को चोदने को।
मैं- अरे साले... वो किराना दुकान वाले लालाजी से बड़ा रूपया करवा लेते हैं। 1500 सिक्का ज्यादा वजनी है यार।
मैं लालाजी की दुकान मेमसाहेब- अरे लालाजी, कुछ चिल्लर पैसे थे।
लालाजी- अरे भाया, तो ले आओ ना। हम तन्ने कमिशन भी देवंगा। दस रूपए सौ टका।
मैं- तो 1500 रूपए का कितना दोगे लालाजी?
लालाजी- 150 रूपए।
मैं- ये लो लालाजी।
लालाजी के नौकर ने रूपए गिने। लालाजी ने 500 के तीन नोट दिए और संग में 150 अलग से।
मैं- ये ले साले 150 की कमाई अलग से हो गई।
कालिया- जीजाजी ये आप ही रखिए। गोरी मेमसाहेब की चूत तो आपको मैंने आज के लिए गिफ्ट में दे दी। और दक्षिणा भी आपको मिल गई 150 के रूप में। ये मेरी तरफ से बहन की शादी की अग्रीम दहेज समझ लो। कल से हम लालाजी से चिल्लर देकर बड़े नोट करवा लेंगे और उस बंदे को देंगे जिसका नाम पर्ची में आएगा।
मैं- एक बात तो बताओ साले? पर्ची में मेरा नाम ही आएगा, ऐसा जोर देकर कैसे बोल रहा था।
कालिया हँसते हुए- वो गुप्त बातें हैं जीजाजी, आप जानकर क्या करोगे?
मैं- फिर भी बता दे साले।
कालिया- मैंने डिब्बा बदल दिया था। 1500 पर्ची में आज केवल आपका ही नाम लिखा था। लड़का कोई सा भी पार्ची निकलता तो आपका ही नाम निकलता।
मैं- मान गये साले... अपनी बहन की शादी के लिए तू जो कर रहा है।
कालिया- बस जीजाजी, मेरी बहन को हमेशा खुश रखना और शादी के बाद बाजारू लड़की के पीछे ना भागना। किसी नई लड़की को चोदने को मन करे तो मुझे बता देना। साली को उठाकर आपके लण्ड के आगे ना पटक दिया तो कालिया मेरा नाम नहीं। बस आप मेरी दीदी को खुश रखना।
मैं- तो चलें। गोरी मेमसाहेब के पास।
कालिया- अरे जीजाजी... उसके पास तो आपको अकेले जाना होगा। मैं चला गगनबिहारी काका के यहाँ। काकी की फुद्दी में लौड़ा डालने को।
मैं 1500 लिए गोरी मेमसाहेब के बँगलो का गेट खोला और अंदर दाखिल हुआ। अंदर से एक आदमी को बाहर आते देखकर मैं ठिठक गया। और वो... जब उसने मुझे देखा तो उसके पाँव के नीचे से जमीन खिसक गई। वो थर-थर काँपने लगा। मैं मन ही मन मुश्कुरा उठा।
मैं- अरे, मैनेजर साहब आप यहां?
और वो आदमी डर के मारे मेरे पाँव में गिर गया। बोला- दीनदयाल भाई प्लीज किसी को ना बताना की मैं यहाँ आया हूँ। मेरी बनी बनाई इज्ज़त खाक में मिल जाएगी। मेरी इज्ज़त तेरे हाथ में है दीनदयाल।
मैं- वही तो... मुझे कुछ लोगों ने कहा की तुम्हारे मैनेजर साहब इस बँगलो में गये हैं और तुम्हें बुला रहे हैं।
मैनेजर- अरे... क्या बोलते हो? दिन दयाल कौन थे वो?
मैं- “मैं तो उनको नहीं जानता साहब..."
मैनेजर- ये लो दिन दयाल... मुझे पता है तुम्हें किसी ने नहीं बताया है। बल्कि तुम्हें मालूम पड़ गया है की मैं यहाँ गोरी मेमसाहेब के साथ मजा लेने आया था।
मैं- पर भाभी तो बोल रही थीं की आप देल्ही गये हुए हैं।
मैनेजर- और क्या करता? दीनदयाल, उस मोटी के साथ कुछ मजा नहीं आता है।
मैं- क्या बात करते हो साहेब? जिसकी बीवी मोटी उसका भी बड़ा नाम है। बिस्तर पे लिटा दो तो गद्दे का क्या काम है?
मैनेजर- तुम्हारा कहना ठीक है दीनदयाल। पर इस मन का मैं क्या करूं? यही इंसान की सबसे बड़ी फितरत है। जो चीज जिसके पास होती है। वो उसे भाव नहीं देता।
मैं- हाँ.. जैसे आपके पास मोटी सुंदर मेमसाहेब हैं। पर आप गोरी छरहरी मेमसाहेब की फुदी मारने पहुँच गये यहाँ पर। जिसके पास पतली है वो मोटी खोजता है, जिसकी बीवी लंबी-लंबी वो नाटी की गाण्ड के पीछे-पीछे घूमता है की कहीं एक बार तो चोदने को मिले... तो नाटी का पति लंबी की टाँगों में लण्ड घुसाने की सोचता है।
मैनेजर- मेरे भाई, ये ले 1000 रूपए और अपना मुँह बंद रख मेरे भाई।
मैं- पर साब... मेरा प्रमोशन?
मैनेजर- “अरे तेरे प्रमोशन लेटर पे आज दस्तखत हो जाएंगे और तुझे मिल जाएंगे। और तनखाह भी बढ़ा दी जाएगी... बस..."
मैं- आपका बहुत बहुत धन्यबाद सिर जी।
मैनेजर- तो मैं ये समझू की मेरी ये बात और किसी तीसरे को नहीं मालूम पड़ेगी?
मैं- नहीं साब... आज कितनी तारीख है?
मैनेजर- अरे... आज पहली तारीख है क्यों?
मैं- अगले महीने की पहली तारीख तक तो किसी तीसरे को कानों-कान खबर नहीं होगी साब।
मैनेजर- अच्छा... अब समझा। ठीक है भाई, पहली तारीख की पहली तारीख मेरे केबिन में आकर 1000 रूपए ले जाना बस... अब मुझे जाने दे, वैसे तू यहाँ पर क्या करने आया था?
मैं- वो क्या है मैनेजर साब कि हमारे घर में भजन का कार्यकर्म है। तो मैं गोरी मेमसाहेब को निमंत्रण देने आया था।
मैनेजर- ठीक है यार, फिर मैं चलता हूँ।
मैं- बाइ बाइ मैनेजर साब।
मैंने सोचा- गोरी मेमसाहेब तो मेरे लिए लकी साबित हुई। कालिया की बहन से शादी... दहेज में 1500 दीनों तक रोज 150 रूपए की कमाई। (भूल गये क्या पाठकों 1500 सिक्के चिल्लर का 10 टका कमिशन मिलने वाला है।) तो 1500 दिन में मुझे 22500 की कमाई हो जाएगी। फ्री में प्रमोशन मिल गया। तनखाह भी बढ़ गई। साथ में मैनेजर साब महीने के महीने 1000 रूपया अलग से देंगे। वो तो मेरे लिए बोनस ही होगा। ये सब सोचते-सोचते मैं दरवाजे के पास पहुँच और बेल बजाया।
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06-06-2019, 01:11 PM,
#88
RE: non veg kahani दोस्त की शादीशुदा बहन
थोड़ी देर में दरवाजा खुला। और मैं बुत सा बनकर वहीं खड़ा का खड़ा रह गया।
दोस्तों, वही सुंदरता की मूरत मेरे आगे खड़ी थी। जिसे चोदने को सभी कर्मचारी ना जाने कितनी बार मूठ मार चुके थे। मैं तो यारों भौचुका होकर उसे सिर से पाँव तक देखने लगा। लग रहा था जैसे स्वर्ग से कोई अप्सरा नीचे जमीन पे उतार आई हो।
बाल एकदम धुंघराले, एक लट चेहरे पे आकर गजब ढा रही थी, गोरा सुंदर मुखड़ा, आँखें एकदम बड़ी-बड़ी, उन आँखों में जो देखे उस आँखों के समुंदर में ही डूब जाए, नाक एकदम तनी हुई, नाक में एक नथुनी पहन रखी थी जो उसकी नाक पे बहुत ज्यादा खिली हुई थी, गाल एकदम गुलाबी, होंठ? दोनों लाल-लाल होंठ ऐसे लग रहे थे। जैसे अगर मैं चूम लूं तो कहीं खून ना निकल जाये, आकर्षक सीना, दोनों कबूतर जैसे कपड़े फाड़कर बाहर आजाद होने को बेकाबू हो रहे हों। मैं और भी नापना चाहता था और उसकी सुंदरता के आगे जैसा बुत ही बन गया था।
तभी मेमसाहेब की छलकती आवाज ने मुझे चौंकाया- ओये... हेलो, कहाँ खो गये जनाब?
मैं जैसे नींद से जागा- “ओह्हश... सारी... सारी...”
मेमसाहेब- कहिए, क्या काम है? किससे मिलना है?
मैं- इस घर में और भी कोई आप जैसी खूबसूरत हसीना... जैसे स्वर्ग से उतरी हुई परी रहती है क्या?
मेमसाहेब के दोनों गाल शर्म से और भी लाल-लाल हो गये। और मैं उसे मुश्कुराता हुआ देखकर वहीं ढेर हो जाता पर मैंने बड़ी मुश्किल से अपने आपको संभाला।
मेमसाहेब मुश्कुराते हुए- नहीं.. मेरी जैसी खूबसूरत तो नहीं। हाँ... पर घर में नौकरानी भी तो है।
मैं- “अरी मेमसाहेब, मुझे नौकरानी से नहीं इस घर की महारानी से काम है...”
मेमसाहेब हँस पड़ी, जैसे वो सुंदर... वैसी ही उसकी हँसी भी। जैसे कहीं मोती झड़ रहे हों। मेमसाहेब ने पूछा- खैर क्या काम है बताइए?
मैं- जी... मैं.. वो काम के लिए आया हूँ।
मेमसाहेब के हँसी रुक गई। वो आश्चर्य से मुझे सिर से लेकर पाँव तक देखने लगी। क्क... क्या मतलब?
मैं- जी... मैं उस काम से आया हूँ।
मेमसाहेब- मैं समझी नहीं, कौन से काम से आए हैं आप?
मैं- जी... उसी काम से आया हूँ जो आप करती हैं।
मेमसाहेब- देखिए आप पहेलियां ना बुझाइये और साफ-साफ बताइए क्या काम है आपको मुझसे?
मैं भी गंभीर हो गया। साले कालिया ने मुझे फैसा तो नहीं ना दिया है। पर... अभी-अभी मैनेजर साहब भी तो बाहर निकल रहे थे। अगर ये मेम उस टाइप की ना होती तो वो मुझे प्रमोशन, तनखाह बढ़ने का वादा क्यों करते? मेरे हाथ में 1000 का नोट क्यों पकड़ाते? और हर माह 1000 का नोट देने का वादा भी तो किया था उन्होंने।
मैं- “जी... सच कहता हूँ। जो काम आप..."
मेमसाहेब- औकात देखी है अपने आपकी, जो मुँह उठाए इधर चले आए? मैं कोई सड़क छाप की रंडी नहीं हूँ। जो तीस-तीस रूपए में टाँगें फैला देती हैं।
मैं- अरे मेमसाहेब, मैं पैसा लाया हूँ।
मेमसाहेब- अरे मैंने कहा ना... सौ, दो सौ, पाँच सौ वाली नहीं हूँ मैं।
मैं- अरे मेमसाहेब मुझे पता है कि आप एक चुदाई के पूरे पंद्रह सौ रूपए लेती हैं। मैं भी पूरे 1500 रूपए लाया हूँ। ये देखिए.." और मैंने उसे 500-500 के तीन नोट दिखाए।
मेमसाहेब- “तुम्हारी औकात तो नहीं दिखती 1500 देकर चोदने लायक...”
मैं- औकात की क्या बात करती हैं मेमसाहेब। ये देखिए मेरे पास और 150 रूपए भी है एक जेब में। तभी मुझे मैनेजर का दिया हुआ 1000 का नोट का भी खयाल आया। मैं फिर बोला- और ये देखिए दूसरी जेब में ये देखिए पूरे 1000 के नोट हैं।
मेमसाहेब- खैर मुझे क्या? मुझे तो 1500 से मतलब है। इधर बढ़ाओ 1500 रूपए।
मैंने उसे 1500 रूपया दे दिया। उसने मुझे अंदर लिया और दरवाजा बंद कर दिया।
मेमसाहेब- “तो ये 1500 लेने के बाद मैं आज की रात सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी हुई। चलो पहले बाथरूम में । फ्रेश हो जाओ। अपने कपड़े बाथरूम के हैंगर में टाँग देना। फ्रेश होकर वहाँ पे लुंगी रखी है वो पहन लेना। वैसे भी वो लुंगी तुम्हारे तन पर थोड़ी देर ही रहेगी। फिर सारी रात को कपड़े खोल के मस्ती ही मस्ते करेंगे...” उसने मुझे आँख मरते हुए कहा।
मैं बाथरूम में गया। क्या शानदार बाथरूम था यारों। नीचे मेरा चेहरा दिख रहा था। मैं अपने पूरे कपड़े खोलकर साबुन रगड़-रगड़ के नहाया। इसीलिए दोस्तों की कहीं मेरे बदन का दाग ना लग जाए मेरी इस सपनों की रानी को। नहाने के बाद मैंने तौलिए से अपने बदन को पोंछा और लुंगी पहन ली। सामने ही आईना था जिसमें मैंने कंघी से बालों को सँवारा और बाथरूम का दरवाजा खोला। बाथरूम उसके बेडरूम से अटैच था। बाथरूम से निकलते ही बेडरूम में मैंने पाँव रखा।
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06-06-2019, 01:11 PM,
#89
RE: non veg kahani दोस्त की शादीशुदा बहन
बेड के ऊपर मेरे सपनों की रानी, मेरी जाने जाना, हुश्नपरी, जिसकी एक झलक पाने को मैं बेताब था वो पलंग पे बैठी हुई थी। और मेरी तरफ देखकर मुश्कुरा रही थी। उसने मुझे अपनी ओर देखता पाकरके एक आँख हल्के से दबाई और उंगली के इशारे से अपने पास बुलाया। उसने एक चद्दर ओढ़ रखा था। मैं जैसे ही उसके पास पहुँचा। उसने चद्दर को उतार फेंका और कमरे में जैसे भूचाल आ गया। मैं एकटक उसे ही देखने लगा।
* * * * *
इधर कमरे में दीदी और सासूमाँ दोनों ही नंगी होकर ससुरजी याने अपनी कहानी के सुपर हीरो दीनदयाल की स्टोरी पढ़ रहे थे। और जोश में आकर अपनी-अपनी फुद्दी में उंगली करते जा रहे थे।
दीदी- अरे सासूमाँ... आगे भी तो पढ़ो ना... फिर क्या हुआ? ससुरजी उस गोरी मेमसाहेब को चोद पाए की नहीं?
सासूमाँ- अरी बहू, तू आगे पढ़ने देगी तब ना पढ़ेगी। साली जोश में आकर मेरी फुद्दी में उंगली पेले जा रही है। पढ़ने का मन नहीं कर रहा है। बस एक बार मेरी फुद्दी में उंगली कर दे बेटी।
चम्पा कमरे में आते हुए- लाओ अम्माजी, आपकी फुद्दी में उंगली तो क्या मैं आपकी फुद्दी को जीभ से चाट देती हूँ। खाना बन चुका है। अब मैं भी फ्री हूँ।
सासूमाँ- “चम्पा, ये तूने ठीक किया... आ लग जा मेरी फुद्दी में...”
दीदी- पर मेरा क्या होगा सासूमाँ? मेरी फुद्दी का क्या होगा?
चम्पा- अरे भाभी आप चिंता क्यों करती हैं। मैं हूँ ना... अम्माजी का पानी निकलते ही आपकी फुद्दी और मेरी जीभ... बस खुश ना?
दीदी- हाँ.. ये ठीक रहेगा। तब तक मैं उंगली अंदर-बाहर कर देती हैं। सासूमाँ अब तो चूत चाटी भी चालू हो गई अब तो डायरी आगे पढ़ो।
सासूमाँ- हाँ तो सुनो।
दीनदयाल- और मैं उससे लिपट गया।
मेमसाहेब भी मुझसे लिपट गई। और अगले ही पल बोली- “नौजबान जो करना है जल्दी कर लो। इससे पहले की मेरे बदन की गर्माहट से तुम्हारी जवानी पिघल जाए और तुम मेरी फुद्दी को देखते ही अपने लण्ड से पिचकारी छोड़ दो, बिना चोदे ही अपनी लुंगी गीली कर दो। प्लीज... प्लीज मुझे कुछ तो आनंद दे दो। बहुत दिनों से प्यासी हूँ। प्लीज...” और उसने मेरी लुंगी को मेरे बदन से अलग कर दिया।
मैं बचपन से ही बहुत सफाई पसंद हूँ। लण्ड के चारों तरफ झांटों को हर तीसरे चौथे दिन सफाचट करके एकदम चिकना रखता हूँ। और लड़कियां भी मुझे सफाचट बुर वालियां ही पसंद हैं। मेरे लण्ड के सुपाड़े के ऊपर एक काला तिल मेरे लण्ड की खूबसूरती में चार चाँद लगता है। मेमसाहेब की नजर जैसे ही काले तिल से सुसज्जित मेरे सुपाड़े पर पड़ी जो एक पहाड़ी आलू की तरह ही फूल रखा था। तो वो चौंक गई।
मेमसाहेब- कौन हो तुम?
मैं- “मेरा नाम दीनदयाल है...”
मेमसाहेब- कहीं तुम्हारा घर राजनगर में तो नहीं है?
मैं- हाँ... पर आपको कैसे मालूम?
मेमसाहेब- मैं जो पूछ रही हूँ, केवल उसका जवाब दो।
मैं- हाँ... मेरे गाँव का नाम राजनगर ही है।
मेमसाहेब- फिर तो तुम्हारा नाम दीनू उर्फ दीनदयाल होना चाहिए।
मैं- हाँ मेमसाहेब हाँ... पर आपको कैसे मालूम?
मेमसाहेब- “मैंने तो तेरा गधे जैसे लण्ड के आगे आलू जैसे सुपाड़े के ऊपर काले तिल को देखकर तुम्हें पहचान लिया। अब देखना ये है की तुम मुझे पहचान पाते हो या नहीं? चलो, अब मुझे ये तो यकीन हो गया है की तुम मुझे मझधार में छोड़कर नहीं जाओगे। मुझे अब ये पता है की तुम्हारा मस्ताना लण्ड मेरी फुद्दी की बर्षों की प्यास जरूर बुझाएगा। मेरी फुद्दी की खुजली पूरी तरह मिटाए बिना अपने पिचकारी नहीं छोड़ेगा..."
मैं- पर मेमसाहेब... आप मेरे बारे में इतना कुछ कैसे जानती हैं? जबकी मैं आपको जानता तक नहीं हूँ।
मेमसाहेब- जान जाओगे मेरे प्रीतम... बहुत जल्दी ही जान जाओगे.. और मैं भी तो देखू की जैसे मैंने तुम्हारे लण्ड के तिल को देखकर तुम्हें पहचाना तुम भी मुझे पहचान पाते हो या नहीं? अब मजा आएगा।
मैं- क्यों पहेलिया बुझा रही हो मेमसाहेब... बता दो।
मेमसाहेब- “नहीं... मैं चाहती हूँ की तुम ही मुझे पहचानो। खैर चलो, आओ...”
मैं अपना सिर धुनते हुए, ये सोचने लगा की कौन है ये? जो मुझे पूरी तरह जानती है। मेरे नाम को भी जानती है, वो भी मेरे लण्ड के सुपाड़े के ऊपर के तिल को देखकर। इतना तो यकीन है की इसने मुझे नंगा देखा है। इतने में मेमसाहेब ने कमाल करना शुरू कर दिया था। उनके हाथ मेरे लण्ड को सहलाने लगे थे, और मेरा लण्ड उनके मखमली हाथों का स्पर्श पाकर फनफना उठा था। मैंने भी उसकी गोरी-गोरी चूचियों को पहले तो ब्रा के ऊपर से ही दबाना चालू किया। फिर ब्रा को खोल दिया। दोनों कबूतर आजाद हो चुके थे। और मेरे हाथ में आकर, मेरी मुट्ठी में दबकर अती प्रसन्न थीं उसकी चूचियां। मैंने एक चूची को मुँह में लेकर चूसना चालू कर दिया।
उसके मुँह से सिसकारी निकलनी शुरू हो गई- “अया... आहह.. दीनू बहुत अच्छे... बहुत अच्छा कर रहे हो... बहुत दिनों से जैसे मेरा ये बदन तुम्हारे बदन के स्पर्श को ही चाह रहा था। हाय दीनू.. चूचियां दबाना और चूसने का ढंग वैसा ही है जैसा बचपन में था...” मेमसाहेब बड़बड़ा रही थी।
और मैं उसकी चूचियां चूसते, दबाते हुए ये सोच रहा था- कौन हो सकती है ये? जिसे मैंने बाचपन में उसकी चूचियां दबाने का आनंद तक दे डाला था। और तभी मेरे दिमाग में बिजली सी रेंग उठी। बिजली?
मैं- बिजली... बिलजी, ये तू ही है बिजली? बता बिजली? तू ही है ना?
मेमसाहेब- “हाँ हाँ... मेरे सरताज, मेरे प्रियतम, मेरे माही, मेरे प्यारे दीनू ये मैं ही हूँ तुम्हारी और सिर्फ तुम्हारी बिजली रानी। और दुनियां वालों के लिए गोरी मेमसाहेब...”
और मुझे ध्यान आया। बिजली रानी मेरे पड़ोस में ही रहती थी। हम बचपन से ही साथ-साथ स्कूल जाते थे। और एक दिन बिजली रानी ने मुझे अपने घर बुलाया दोपहर को मैं जब उसके घर गया।
तब उसके पापा उसकी मम्मी को देखकर बोले- “चलो ऊपर स्टोर-रूम में चीनी बोरा फाइना है...” और दोनों ऊपर सीढ़ियां चढ़ने लगे।
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06-06-2019, 01:11 PM,
#90
RE: non veg kahani दोस्त की शादीशुदा बहन
मैंने बिजली से पूछा- बिजली, क्या बात है? तुमने मुझे क्यों बुलाया?
बिजली- अरे दीनू, मेरे पिताजी रोज दोपहर को आते हैं और मम्मी को कहते हैं कि चल ऊपर स्टोर-रूम में चीनी बोरी फाड़नी है।
मैं- तो बिजली रानी, चीनी बोरी फाड़ने जाते होंगे।
बिजली- चल देखते हैं?
मैं- मैं नहीं जाता, चीनी बोरी फाड़ते हुए देखने।
बिजली- चल ना दीनू... प्लीज़ज़ चल ना।
मैं और बिजली दोनों सीढ़ियां चढ़कर ऊपर गये। और खिड़की से झाँक करके देखा की बिजली की मम्मी साड़ी को कमर तक खिसकाये, अपनी झाँटदार बुर को बिजली के पापा से चटवा रही हैं। और फिर जब दोनों गरम हो गये तो दोनों की चुदाई चालू हो गई। मैं और बिजली भी गरम होने लगे। मैंने बिजली की चूची थाम ली तो उसने मेरे लण्ड को थमा।
दूसरे दिन... मैं उसके यहां कुछ जल्दी ही पहुँच गया। बिजली भी खुश, मैं भी खुश। उसकी मम्मी पड़ोस में, उसका बाप दुकान में और मैं और बिजली दोनों उसके स्टोर-रूम में।
मैंने बिजली की सलवार खोल दी। हाय... हाय... झाँटों के बिना उसकी फुद्दी बड़ी सुंदर लग रही थी। मैंने देखा फुद्दी के ठीक ऊपर एक काला तिल उसकी फुद्दी की सुंदरता में चार चाँद लगा रहा था। मैंने उसकी तारीफ की तो उसने भी मेरे लण्ड के सुपाड़े के ऊपर के तिल की तारीफ की। उसने मेरा लण्ड चूसा तो मैं भी उसकी फुद्दी के ऊपर टूट पड़ा।
थोड़ी देर में दोनों जब गरम हो गये। तब बिजली बोली- दीनू, अब टाइम आ गया है, चीनी बोरी फाड़ने का। माँ बोलती है रोज बहुत मजा आता है।
मैंने उसकी फुद्दी के छेद में लण्ड का सुपाड़ा लगाया, और एक हल्का सा धक्का लगाया, और बिजली की चीख निकल गई। उसने मुझे हटाना चाहा, पर मुझमें और रुकने की चाहत नहीं थी। मैंने दूसरा धक्का लगाया और मेरा लण्ड उसकी फुद्दी में आधा घुस चुका थाता। खून निकलना चालू हो गया, पर मैंने उसे बताया नहीं। मैंने अपना लण्ड थोड़ा सा बाहर निकाला और तीसरा और आखिरी धक्का लगाया तो मेरा लण्ड जड़ तक घुस चुका था। और बिजली दर्द से छटपटा रही थी।
बिजली- “दीनू.. मुझे नहीं फड़वानी चीनी बोरी... बाहर निकल... दीनू, बाहर निकल ले... सच में बहुत दर्द हो रहा है, पर मम्मी तो कहती थी कि बहुत मजा आता है। लगता है तेरा लण्ड पापा से भी बड़ा है। पर धीरे-धीरे दर्द कम हो रहा है। दीनू, हाँ हाँ ऐसे ही चूचियों को दबाते हुए धक्का लगाते रहो। देखो दीनू मैं भी मम्मी के जैसे चूतड़ उछालना सीख गई हूँ। है ना... देख सच में मुझे भी मजा आने लगा है। हाँ... दीनू, बोल ना... तुझे कैसा लग रहा है? मैं तो आसमान में उड़ रही हूँ दीनू। हे... मेरा तो पेशाब निकलने वाला है। अरे ... मेरा निकल रहा है रे... अरे रे, मैं आसमान से नीचे गिर रही हूँ..” और बिजली रानी शांत हो गई।
मैं अभी तक झड़ा नहीं था। मैं बदस्तूर धक्के मारता रहा।
इतने में बिजली फिर से गरमा गई- “हाँ हाँ दीनू, फिर से मजा आने लगा है। हाँ हाँ... धक्का बंद मत करियो... बंद मत करियो धक्का.. मेरे बापू का कभी-कभी पहले निकल जाता है तो मम्मी गुस्सा करती हैं। फिर रसोई से बैगन लेकर अपनी फुद्दी में घुसेड़ लेती हैं। पर दीनू, मैं बैगन, गाजर, मूली, केला, ककड़ी, कुछ भी नहीं घुसेड्गी... कुछ भी नहीं। मेरी फुद्दी को तो सिर्फ तेरा लण्ड ही चाहिए। सिर्फ और सिर्फ तेरा लण्ड... ये मस्ताना लण्ड... लण्ड के ऊपर आलू जैसे सुपाड़ा और उसपर काला सा तिल है... इसे मैं जिंदगी भर नहीं भूलूंगी... जिंदगी भर नहीं भूलूंगी...”
और मेरा भी पानी निकलने वाला था। मैंने धक्के की स्पीड तेज कर दी।
बिजली तीसरी बार गरम होने लगी, और चूतड़ उछलने लगी। बिजली बोली- “आई लोव यू.. दीनू, आई लव यू..”
मैं- बिजली, मेरा भी निकालने वाला है। पानी कहाँ निकालूं?
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