Porn Hindi Kahani दिल दोस्ती और दारू
12-15-2018, 01:31 AM,
RE: Porn Hindi Kahani दिल दोस्ती और दारू
आराधना की ये हरक़त मुझे कुच्छ ऑड सी लगी क्यूंकी जहाँ कुच्छ देर पहले मेरे सामने उसकी ज़ुबान ढंग से नही खुल रही थी ,वही अब एका एक उसने मेरा हाथ पकड़ा और बैठने के लिए कहा....
"क्या हुआ "
"वो कल वाले लड़के कॅंटीन मे आए है...मुझे उनसे दर लगता है..."
"डर मत,मेरा नाम बता देना..."
"मतलब ? मैं कुच्छ समझी नही..."
"इतना ही समझती तो फिर लड़की ही क्यूँ होती...उनसे बोल देना कि तू मेरी गर्ल फ्रेंड है...फिर वो तुझे कुच्छ नही करेंगे...और सुन..."फिर से आराधना के करीब जाकर मैने कहा"और जब तू उन्हे ये बताएगी कि तू मेरी गर्ल फ्रेंड है तो ये देखना कि तेरी उस एश मॅम का रिक्षन क्या होता है... अब चलता हूँ,बाइ"

ऑडिटोरियम मे मैने भले ही छत्रु के सामने लंबी-लंबी हांक दी थी लेकिन रिसेस के बाद मैं छत्रु को दिए गये अपने ही चॅलेंज से घबराने लगा था...और जैसे-जैसे छत्रु का पीरियड आ रहा था, मेरी हालत और भी ख़स्ता हो रही थी...

छत्रपाल सर हमे दो सब्जेक्ट पढ़ाते थे ,पहला सब्जेक्ट था 'वॅल्यू एजुकेशन' ,जिसमे हर हफ्ते उनकी सिर्फ़ एक क्लास रहती थी और दूसरा सब्जेक्ट था इंजिनियरिंग एकनामिक ,जिसमे वो हफ्ते भर मे 5 बार अपने दर्शन दे देते थे...एक तो छत्रु खुद बोरिंग था ,उपर से उसके दोनो बोरिंग सब्जेक्ट....उनके पीरियड लेने के बाद पूरे क्लास की हालत ऐसी हो जाती थी ,जैसे कि सब अभी-अभी अपने शरीर का आधा ब्लड डोनेट करके आए हो....बोले तो थकान मे एक दम डूबे हुए.

इंजिनियरिंग एकनामिक का आज सेकेंड लास्ट पीरियड था और मैं चाह रहा था कि छत्रु अपनी क्लास लेने ना आए,वरना वो मुझे टॉपिक देकर ,कल तक याद करने को कहेगा...

"और उचक...ऑडिटोरियम मे तो बड़े शान से बोल रहा था कि ,सर क्लास मे टॉपिक दे देना...अब क्या हुआ..."जैसे ही ईई का पीरियड शुरू हुआ, मैने सोचा"एक काम करता हूँ, सर को क्लास के बाद खोपचे मे ले जाकर बोल दूँगा कि सर, ये सब मेरे से नही होगा...आप किसी और को देख लो....लेकिन फिर तो घोर बेज़्ज़ती होगी...कहाँ फँस गया यार..."
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और फिर उस दिन छत्रु के क्लास मे ना आने की मेरी रिक्वेस्ट को भगवान ने आक्सेप्ट कर लिया ,क्यूंकी छत्रु उस दिन अपनी क्लास लेने नही आया....छत्रु के क्लास मे ना आने से उसे चाहने वाले जहाँ दुखी थे,वही कुच्छ लोग मेरे जैसे भी थे ,जिन्हे अत्यंत प्रसन्नता हुई थी...लेकिन सबसे ज़्यादा खुश तो मैं था...
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अब जब छत्रपाल सर जी ने क्लास बंक किया तो मेरा सारा डर दूर हुआ और मैं एश पर पूरे मन से कॉन्सेंट्रेट करने लगा..तब मेरे सामने कल वाले सवाल फिर से पैदा हो गये ,जिन्हे मैने कल पार्किंग मे एश के जाने के बाद सोचा था....
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"इतना चुप क्यूँ है बे, कही चड्डी गीली तो नही कर दी तूने..."मेरी तपस्या मे रुकावट डालते हुए अरुण ने खाली क्लास मे मेरे इतना चुप रहने का कारण पुछा....

"अब यदि इसे कहूँगा कि बस ऐवे ही...तो ये लवडा दिमाग़ चाट जाएगा और फिर मुझे चैन से बैठने नही देगा..."अरुण की तरफ देखते हुए मैने कहा"मैं सोच रहा था कि 'व्हाई ईज़ दा अर्त आन एल्लिपसड'...इसलिए प्लीज़ चुप रह..."
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अरुण को चुप कराकर मैं वापस अपनी तपस्या मे लीन हो गया और एश की अजीब हरक़तो का स्मरण करने लगा....लेकिन मुझे कोई ऐसा ढंग का जवाब नही मिला,जो मेरे अंदर उठे मेरे उन दो सवालो का जवाब देती हो....लेकिन मैने हार नही मानी और एक बार फिर से अपनी साधना मे लीन हो गया....
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"अबे इतना मत सोच...गूगल मे देख ले कि अर्त एल्लिपसड क्यूँ है..."
"थॅंक्स...अब चुप रह..."
"यार तुझसे एक बात कहनी थी..."
"सुन रहा हूँ बोल..."
"पहले मेरी तरफ तो देख..."मेरा थोबड़ा पकड़ कर अरुण ने अपनी तरफ घुमाया और बोला"मैं आजकल कुच्छ ज़्यादा ही स्पर्म डोनेट कर रहा हूँ....कोई तरीका है क्या ,जिससे मैं अपनी इस डोनेशन मे कटौती कर सकूँ..."

अरुण ने जब मेरा थोबड़ा अपनी तरफ घुमाया तभिच मेरा दिल किया कि घुमा के एक हाथ उसे जड़ दूं और उसका थोबड़ा बिगाड़ दूं...लेकिन फिर मैने खुद पर कंट्रोल किया और उसपर भड़कते हुए बोला...
"इसे रोकने का सिर्फ़ एक ही तरीका है, तू अपना लंड काट दे...और मुझे अब डिस्टर्ब मत करना ,वरना ये काम मैं खुद कर दूँगा..."
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अरुण इसके बाद कुच्छ नही बोला ,यहाँ तक कि उसने मुझे फिर मुड़कर देखा भी नही...जिसका फ़ायदा मुझे ये हुआ कि मैं बड़े इतमीनान से अपना जवाब ढूँढने मे लगा रहा...लेकिन मुझे दूर-दूर तक जवाब नही मिला....तब मैने सोचा कि आज फिर पार्किंग मे एश से मिलते है, जिसमे दिव्या का ,एश के साथ ना होना...कंडीशन अप्लाइ होगा....

कल की तरह मैने आज भी कॉलेज के ऑफ होते ही सौरभ को पटाया ताकि वो कुच्छ बहाना मारकर अरुण को अपने साथ ले जा सके और आज मेरा बहाना बना 'छत्रु के साथ इंपॉर्टेंट टॉकिंग '

अरुण और सौरभ तो कल की तरह हॉस्टिल चले गये लेकिन आर.दिव्या कल की तरह आज पहले नही निकली....आज दोनो साथ मे ही अपने घर के लिए रवाना हुए,जिससे कॉलेज के बाद एश से पार्किंग मे बात करने के मेरे प्लान ने वही दम तोड़ दिया....
" मा दी लाडली दिव्या ,लवडी जब देखो तब बीच मे अपनी गान्ड फसाती रहती है...रंडी ,छिनार कही की...ये मर क्यूँ नही जाती, म्सी...एक दिन इन दोनो भाई बहनो का कत्ल मेरे हाथो ज़रूर होगा..."दिव्या के तारीफो के पुल बाँधते हुए मैं हॉस्टिल चला गया....
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आंकरिंग मे पार्टिसिपेट करने का एक बड़ा फ़ायदा मुझे हुआ था,वो ये कि अब रात को मैं लिमिट मे दारू पीने लगा था, ताकि सुबह मैं नशे मे सोता ना रहूं...क्यूंकी आंकरिंग की प्रॅक्टीस हर दिन फर्स्ट पीरियड के टाइम ही होती थी...

हर दिन ऑडिटोरियम मे छत्रु ,हमे अब्राहम लिंकन के जीवन के वही पन्ने रोज पकड़ा देता और स्टेज पर एक-एक करके सबसे बुलवाता था...जब कयि दिन तक ऐसे ही बीत गये तो मुझे छत्रु के आंकरिंग के इस मेतड से नफ़रत होने लगी, लेकिन मैं छत्रु को कभी कुच्छ बोल नही पाया...मैं स्टेज पर जाता ज़रूर था लेकिन छत्रपाल के प्रति एक खुन्नस मे सब कुच्छ बोलता था....यदि छत्रपाल को मुझे नीचा दिखाने का कोई एक मौका मिलता तो वो उस एक मौके को दो मौको मे तब्दील करके मुझपर वॉर करता और मैं....मुझे तो जानते ही होगे ,मैं भी उसपर अपने डाइलॉग्स की फाइरिंग करता था...
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पिछले कुच्छ दिनो से आराधना भी ऑडिटोरियम मे प्रॅक्टीस करने के लिए आने लगी थी...वो इस कॉलेज मे और हम सबके के बीच नयी थी...इसलिए वो शुरू मे थोड़ा-थोड़ा घबराती थी लेकिन फिर बाद मे उसने अपने अंदर बहुत हद तक सुधार ला लिया था....ऑडिटोरियम मे मेरे और आराधना के बीच बहुत बातें होती, वो धीरे-धीरे मुझसे खुलती जा रही थी और बीच-बीच मे जब उसका मुझे चिढ़ाने का मान होता तो मुझे 'अरमान सर' कहकर बुलाती...
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जहाँ कल की आई लौंडी ,आराधना मुझसे धीरे-धीरे खुल रही थी,वही एश अब भी मुझसे बात करने मे कतराती थी...वो मुझसे जब भी बात करती तो उसके अंदर एक घबराहट हमेशा रहती थी....

वैसे तो मैं पिछले हफ्ते ही एश से बात करने की सोच रहा था ,लेकिन अभी तक ऐन वक़्त आने पर टालने के कारण अभी तक एश से बात नही कर पाया था, इसलिए मैने सोचा कि आज एश से अपने उन दो सवालो का जवाब माँग ही लूँ....

मेरा पहला सवाल ये था कि 'एश ने मेरा नंबर. अपने मोबाइल पर क्यूँ सेव करके रखा हुआ है...' और दूसरा सवाल ये कि ' एश की मामी की लड़की को मेरे बारे मे पता कैसे चला'

वैसे मेरे ये दोनो सवाल ज़्यादा अहमियत तो नही रखते थे लेकिन इन्ही दो सवालो के कारण मुझे एक आस दिखाई दे रही थी कि शायद... एसा के लेफ्ट साइड मे मैं भी हूँ. मेरे ये दोनो सस्पेक्ट भले ही मेरे उम्मीद के मुताबिक़ मुझे परिणाम ना दे लेकिन मुझे कोशिश तो करनी ही थी क्यूंकी मेरा पर्सनली ऐसा मानना है कि ज़िंदगी के सफ़र मे सक्सेस वही होता है ,जो घने अंधेरे मे भी एक चिंगारी की बुनियाद पर उस अंधेरे को दूर कर दे, ना कि वो जो उस भयंकर अंधेरे से डरकर लौट जाए...
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ऑडिटोरियम मे मैं आज 10 मिनिट पहले ही पहुचा.उस वक़्त वहाँ छत्रपाल सर को छोड़ कर सभी आ चुके थे यानी की 10 मिनिट पहले आने पर भी मैं हर दिन की तरह आज भी लेट था....
"हाई...गुड मॉर्निंग."एश के साइड वाली सीट पर बैठकर मैने कहा...
"हाई..."
"तुम लोग यहाँ इतना पहले आकर क्या करते हो...कहीं ऐसा तो नही की तुमलोग रात को घर जाते ही नही..."
"तुम्हारा क्या मतलब कि मैं रात को यहाँ रुकी थी..."मुझसे बहस करने के मूड मे एश बोली...

"कुच्छ नही यार, मज़ाक कर रहा था..."बहस शुरू होती ,उससे पहले ही बहस को ख़त्म करते हुए मैने कहा...
"मुझे मज़ाक बिल्कुल भी पसंद नही..."

"मुझे भी मज़ाक नही पसंद...वैसे मेरा एक सवाल है..." अगाल-बगल देखते हुए पहले मैने ये कन्फर्म किया कि हमारी बात कोई सुन तो नही रहा और जब ये कन्फर्म हो गया तो मैने धीरे से कहा..."तुम्हारे मोबाइल मे मेरा नंबर क्यूँ है.."

"तुम्हारा नंबर क्यूँ है का क्या मतलब "अपनी आँखे बड़ी-बड़ी करते हुए एश ने उल्टा मुझसे ही सवाल किया....

"दरअसल मैं ये पुछना चाहता हूँ कि...हम दोनो के बीच एक समय काफ़ी घमासान तकरार हुई थी और एक लड़की को जहाँ तक मैं जानता हूँ उसके अकॉरडिंग तुम्हारे पास मेरा नंबर नही होना चाहिए..."

"तुम्हारा नंबर. मेरे मोबाइल मे उस घमासान लड़ाई के पहले से ही सेव था...और मुझे याद भी नही रहा कि तुम्हारा नंबर. मेरे मोबाइल मे सेव है,वो तो उस दिन देविका ने ना जाने कहाँ से तुम्हे कॉल कर दिया...दट'स ऑल "
"ये डेविका कौन ? "
"डेविका मेरी मामी की लड़की है ,जिसने तुम्हे कॉल करके धमकी दी थी...."

"ऐसा क्या....खम्खा मैं कुच्छ और समझ बैठा था , लेकिन फिर यहाँ एक और सवाल पैदा होता है कि तुमने मेरा नंबर. पहले क्यूँ सेव किया था...मतलब कि जब मैं अपने मोबाइल पर किसी का नंबर. सेव करता हूँ तो कुच्छ सोचकर ही करता हूँ...तुमने क्या सोचा था "एश को लपेटे मे लेते हुए मैने उसी के जवाब मे उसी को फँसा दिया...खुद को बहुत होशियार समझ रेली थी 

"तुम्हारा मैने क्यूँ सेव किया था..."स्टेज की तरफ एश देखकर सोचने लगी...और मैं इधर अपनी चालाकी पर खुद को शाबाशी दे रहा था....

"मुझे याद नही..."

"ये तो कोई जवाब नही हुआ..."

"अब मुझे याद नही तो क्या करूँ...वैसे भी तुम कितनी पुरानी बात पुच्छ रहे हो और मैं भूल गयी कि मैने तुम्हारा नंबर क्यूँ अपने मोबाइल मे सेव किया था..."
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बोल ले झूठ, बिल्ली....मेरे पहले सस्पेक्ट को चारो तरफ से धराशायी करने के बाद मैं एश पर अपने दूसरे सवाल का प्रहार करता ,उससे पहले मैने एश से कहा"एक और सवाल है मेरा...दिल पे तो नही लोगि.."

"यदि तुम्हारा दूसरा सवाल भी पहले वाले की तरह वाहियात रहा तो बेहतर ही रहेगा कि मत पुछो...क्यूंकी मैं अब कोई जवाब नही देने वाली..."

"ठीक है....मैं अब ये पुच्छना चाहता हूँ कि तुम्हारी मामी की लड़की डेविका को मेरे बारे मे कैसे पता चला,जिसके बाद उसने मुझे कॉल किया..."

"मैने पहले ही कहा था कि उसने शरारत करने के लिए मेरा मोबाइल उठाया और अचानक ही तुम्हारे नंबर. पर कॉल कर दिया..."

"डेविका की एज क्या होगी..."

"क्य्ाआ...."

"एज...मतलब उम्र, डेविका की उम्र कितनी होगी..."

"20 , लेकिन तुम ये क्यूँ पुच्छ रहे हो.."

"वो बाद मे बताउन्गा...पहले ये बताओ कि क्या वो साइको है या फिर थोड़ी सी सटकी हुई है...."

"वो मेरी कज़िन है ,ज़रा ढंग से उसके बारे मे बात करो...ये सटकी हुई का क्या मतलब होता है..."

"सॉरी...पर तुम्हे अजीब नही लगता कि एक 20 साल की पढ़ी-लिखी लड़की ,जिसे कोई दिमागी बीमारी नही है...वो तुम्हारे मोबाइल से ऐसे ही किसी का नंबर. डाइयल कर देती है और फिर बाद मे तुम्हे अपनी उस करतूत की जानकारी भी दे देती है...ये बात कही से हजम नही होती एश...सच बताओ..."

"मुझसे अब बात मत करना...."वहाँ से उठकर एश जाते हुए बोली...

"जिसका डर था, वही हुआ....ये तो बुरा मान गयी..."वहाँ पर चुप-चाप बैठकर मैं एश को वहाँ से जाते हुए देखता रहा.
मेरे पहले सवाल का जो जवाब एश ने दिया था, मुझे उसके उस जवाब पर भी शक़ था...लेकिन अब तो वो बात करने को भी तैयार नही थी. लेकिन आज मैं ठान के ही आया था कि अपने ये दोनो संदेह दूर करके ही रहूँगा, इसलिए मैं अपनी जगह से उठकर एश के दाए तरफ फिर से बैठ गया....

"तू तो भड़क गयी,इसीलिए मैं तुझे बिल्ली कहता हूँ...और सुन ज़्यादा गुस्सा होने की ज़रूरत नही है,वरना अभिच अपुन पूरे कॉलेज मे ये बात फैला देगा कि तूने मुझे सुबह कॉल करके ब्लॅक मैल किया...ब्लॅक मैल मतलब मैं अपनी तरफ से कोई भी कहानी जोड़ दूँगा और तू तो जानती ही है कि मैं कहानी बनाने मे कितना माहिर हूँ...इसलिए एश जी आपसे नम्र निवेदन है कि आप मुझे मेरे दूसरे प्रश्न का स्पष्ट उत्तर दे...."

"तुम मुझे धमकी देने की कोशिश कर रहे हो...."अपनी आवाज़ तेज़ करते हुए एश बोली...

"मैं धमकी देने की कोशिश नही कर रहा...मैं तो धमकी दे रहा हूँ और आवाज़ थोड़ा नीचे रखो, वरना शुरुआत यही से हो जाएगी..."
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ऑडिटोरियम मे बैठे सभी स्टूडेंट्स जब हमारी तरफ ही देखने लगे तो एश का मुझपर उफान मारता हुआ गुस्सा थोड़ा ठंडा हुआ और वो अपने दाँत चबाते हुए धीरे से बोली....
"कॉलेज ख़त्म होने के बाद पार्किंग मे मिलना ,अभी छत्रपाल सर ऑडिटोरियम मे आ गये है, समझे...."

"इस छत्रु की तो...."मैं पीछे पलटा तो देखा कि छत्रु अपनी कलाई मे बँधी घड़ी मे टाइम देखते हुए सामने स्टेज की तरफ आ रहा था....
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छत्रपाल जी हर दिन की तरह आज भी सामने खड़े हो गये और सबसे वही करवाया ,जो पिछले एक हफ्ते से हो रहा था...पहले-पहल तो मैने छत्रपाल के द्वारा एक पेज पकड़ा कर माइक मे बुलवाने की टेक्नीक पर मैने कुच्छ खास गौर नही किया...लेकिन बाद मे मैने ध्यान देना शुरू किया और जो बात मुझे पता चली वो ये कि छत्रु हमारी प्रॅक्टीस के पहले दिन से ही सेलेक्षन करने लगा था.... 

छत्रपाल सर स्पीच के दौरान एक दम सामने वाली रो पर बैठ जाते और सामने वाली की टोन ,बोलने की स्टाइल और इंटेरेस्ट पर गौर करते थे. सभी स्टूडेंट्स प्रॅक्टीस के पहले दिन से ही उस दिन का इंतज़ार कर रहे थे कि कब छत्रपाल सर उनमे से 6 को सेलेक्ट करे और 2-2 की टीम बना कर 3 ग्रूप बनाए और वो अपनी फाइनल प्रॅक्टीस शुरू कर सके....लेकिन जैसा मेरा मानना था उसके अनुसार वो 6 लोग तो आज से 2-3 पहले ही सेलेक्ट हो चुके थे.....जिसकी जानकारी सिर्फ़ और सिर्फ़ छत्रु को थी....
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12-15-2018, 01:31 AM,
RE: Porn Hindi Kahani दिल दोस्ती और दारू
इसकी भनक मुझे तब लगी जब छत्रपाल सर डेली हमसे अब्राहम लिंकन की जीवनी हमे स्टेज मे बुलाकर पढ़वाते थे .क्यूंकी ना तो लिंकन जी के उपर हमे कोई एसे लिखना था और ना ही गोल्डन जुबिली के मौके पर लिंकन जी का कोई टॉपिक था....आक्च्युयली छत्रपाल इन 7 दिनो मे ये अब्ज़र्व कर रहा था कि किस स्टूडेंट्स का इंटेरेस्ट कितना है और यदि मेरी सोच सही है तो वो उन्ही स्टूडेंट्स को सेलेक्ट करेगा जिन्होने पूरे हफ्ते फुल इंटेरेस्ट के साथ अपनी स्पीच दी हो....

मैं छत्रपाल के इस ट्रिक को भाँप गया था या फिर दूसरे शब्दो मे कहूँ तो ऐसी ही सेम टू सेम ट्रिक मेरे स्कूल मे भी मेरे टीचर अप्लाइ करते थे और यदि तीसरे शब्दो मे कहूँ तो ' आंकरिंग करने का ये महा फेमस तरीका है' जो हर उस बंदे को मालूम होगा ,जिसने गूगल मे थोड़ी सी मेहनत की होगी.....
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आराधना को काउंट करके अब टोटल 12 स्टूडेंट्स हो गये थे,जिनमे से 6 को सेलेक्ट करना था और 6 को ऑडिटोरियम से बाहर का रास्ता दिखाना था...कुच्छ लड़के जो खुद को ओवरस्मार्ट दिखाते थे वो पिछले एक-दो दिनो से लिंकन जी के बारे मे बोलते वक़्त जमहाई ले लेते थे तो कभी-कभी अपना हाथ-पैर खुजलाने लगते थे. उन ओवर-स्मार्ट लड़को मे कुच्छ लड़के ऐसे भी थे,जो एक-दो दिनों से छत्रपाल सर से ये पुछने लगे थे कि ,वो उन्हे 2-2 के ग्रूप मे डिवाइड क्यूँ नही करते....मतलब सॉफ था कि इन सबको छत्रपाल बट्किक करने वाला था.


जिस दिन मैने एश से सवाल पुछा उस दिन भी तक़रीबन 4-5 स्टूडेंट्स ने लिंकन जी के बारे मे वही पुरानी स्पीच देने मे आना कानी की...कुच्छ ने तो बोरिंग तक का दर्जा दे डाला...लेकिन उनमे कुच्छ ऐसे भी स्टूडेंट्स थे जो छत्रपाल के दिए-हार्ड फॅन थे और उन्होने ऑडिटोरियम मे कभी अपना मुँह नही खोला और उनमे मैं भी शामिल था....
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उस दिन लास्ट पीरियड मे मेरे मोबाइल मे एश ने एक मेस्सेज टपकाया कि वो छुट्टी के बाद पार्किंग मे मेरा इंतज़ार करेगी...एश के इस मेस्सेज के तुरंत बाद मैं ये समझ गया कि मुझे पिछले कयि दिन की तरह आज भी अरुण को चोदु बनाकर ,सौरभ के साथ भेजना है....

"अरुण, तेरे मोबाइल मे मेस्सेज पॅक है क्या..."

"ये मेस्सेज तुम जैसे गीदड़ करते है, भाई शेर है इसलिए डाइरेक्ट कॉल करता है...."
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अरुण से ना मे जवाब मिलने के बाद मैने अपने ही मोबाइल से एश को मेस्सेज सेंड करने का सोचा और लिखा कि 'दिव्या को अपने साथ मत रखना,वरना मैं वापस लौट जाउन्गा...'

कॉलेज ख़त्म होने बाद मैं पार्किंग की तरफ बढ़ा ,जहाँ एश अपनी कार के बाहर खड़े होकर मुझे इधर-उधर ढूँढ रही थी और दिव्या जा चुकी थी....
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"हेलो..."एक प्यारी सी स्माइल मारते हुए मैने कहा"तो बिना समय गँवाए सीधे पॉइंट पर आ जाओ..."

"एक मिनिट....मुझे सोचने दो....हां, याद आ गया. यू नो अरमान ,यू आर आ हॉट टॉपिक ऑफ डिस्कशन इन और कॉलेज ऐज वेल ऐज इन और होम....."

"मेरी इंग्लीश उतनी बुरी भी नही है लेकिन कसम से कुच्छ भी समझ नही आया...."

"तुम मेरे घर मे और गौतम के घर मे डिसकस करने का एक हॉट टॉपिक हो...और जिस दिन देविका ने तुम्हे कॉल किया उसके एक दिन पहले ही मैं तुम्हारे बारे मे उससे बात कर रही थी...इस तरह से वो तुम्हारे बारे मे जान गयी..."

"सच...."मैं बस इतना कह पाया क्यूंकी जो बात एश ने मुझे बताई थी ,वो मेरे लिए बिल्कुल नयी थी.इसलिए उसपर यकीन करना मुश्किल हो रहा था.

ए ~लंगर~ फुटबॉल मॅच

मुझे इतना तो मालूम था कि मैं अपने बुरे करमो के चलते कॉलेज मे बहुत फेमस हूँ लेकिन मैं इतना फेमस हूँ कि इस शहर के सबसे रहीस घरो मे मेरे बारे मे बात होती है ,ये मैं नही जानता था.....एश के उस जवाब पर मैने यकीन तो नही किया था,लेकिन अंदर ही अंदर खुद पर गर्व भी कर रहा था....

एश की बात सुनकर मेरा सीना तुरंत दो इंच चौड़ा हो गया और दिल किया की गॉगल लगाकर कोई डाइलॉग मारू लेकिन फिर कुच्छ सोचकर मैने अपना ये गॉगल लाकर डाइलॉग मारने का विचार छोड़ दिया और एसा से आगे पुछा....
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"मैं इतना ज़्यादा पॉपुलर हूँ ,जानकार खुशी हुई....वैसे मेरे बारे मे क्या डिसकस करते हो तुम लोग...."

"मेरे और गौतम के घर मे ऐसा कोई दिन नही होता,जब तुम्हे बुरा-भला ना कहा गया हो...तुम यकीन नही करोगे पर सब लोग तुमसे बे-इंतेहा नफ़रत करते है..."

"मुझे भी कुच्छ ऐसी ही उम्मीद थी... "

उस दिन पार्किंग प्लेस मे एश को अपने शब्दो के जाल मे फँसा कर मैने बहुत कुच्छ जान लिया.जैसे कि बीच-बीच मे एश की मॉम एश से पूछती है कि 'वो लफंगा सुधरा या अब भी वैसी मार-पीट करता है....'

मुझे लेकर एश और गौतम के घर मे सेम सिचुयेशन रहती है ,बोले तो मेरा नाम जेहन मे आते ही उनके मुँह से मेरे लिए गालियाँ बरसती है....खैर ये सब दिल पे लेनी की बात नही है और ना ही बुरा मानने की बात है क्यूंकी ये सब तो हमान नेचर की प्रॉपर्टीस है....
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"वो सब तो ठीक है एश, लेकिन क्या तुम्हे नही लगता कि ऐसे ही किसी के भी सामने अपने घर की प्राइवेट बातें शेयर करना ग़लत है...."

जब मैं अपनी बुराई सुनकर पक गया तो मैने एश को रोकने के लिए कहा,क्यूंकी वो नोन-स्टॉप मेरे दिल पर डंडे पे डंडे मारे जा रही थी.मेरे टोकने के बाद एश को जैसे अपनी ग़लती का अहसास हुआ और उसने अपना हाथ अपने होंठो पर रख लिया.....

"तुम्हारे घरवालो के मेरे प्रति उच्च विचारो की जानकारी तो मुझे हो गयी, लेकिन अब ये बताओ कि मेरे बारे मे तुम्हारा क्या सोचना है...मतलब कि क्या तुम भी अपना दिल खोलकर मुझे बुरा-भला कहती हो..."

"मैं नही बताउन्गी...अब मैं एक लफ्ज़ भी आगे नही बोलूँगी..."

"बता दे बिल्ली, वरना मैं.....मैं...."

"वरना क्या...तुम मुझे फिर से धमकी दे रहे हो..."

"चल ठीक है जा..."

"मैं क्यूँ जाउ, तुम जाओ..."

"अरे जा ना..."

"पहले तुम जाओ..."

"ऐसा क्या, ले फिर मैं नही जाता,बोल क्या करेगी बिल्ली..."

"फिर मैं भी नही जाउन्गी, बिल्लू,बिलाव,बिल्ला...."

"खिसक ले इधर से ,ये मैं लास्ट वॉर्निंग दे रहा हूँ....वरना "

"वरना क्या...हाआन्ं ,बोलो वरना क्या...क्या कर लोगे तुम..."मुझे चॅलेंज करते हुए एश एक कदम आगे बढ़ी.....

"कमाल है यार,इसे तो मुझसे डर ही नही लगता..."एश के एक कदम आगे बढ़ने के बाद मैने खुद से कहा और एश की'वरना क्या...' का जवाब सोचने लगा....

"एश ,देख अब तो चुप-चाप यहाँ से जाती है या मैं अपनी सूपर पवर दिखाऊ..."

"जब तक तुम नही जाओगे, तब तक मैं भी नही जाउन्गी..."

"तू जा यहाँ से नही तो मैं तुझे किस कर लूँगा...फिर मत बोलना कि मैने ऐसा क्यूँ किया...."
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मेरे किस करने वाले जवाब का एश के अंदर जबरदस्त रिक्षन हुआ और वो तुरंत अपनी कार मे बैठकर वहाँ से चली गयी.....

"मुझसे आर्ग्युमेंट करती है,अब आ गयी ना लाइन पे... "
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गोलडेन जुबिली के फंक्षन के लिए अब तैयारिया जोरो से चल रही थी.सिंगगिंग,डॅन्सिंग एट्सेटरा. जैसे प्रोग्राम की प्रॅक्टीस तो कॉलेज के समय ही हो जाती थी ,लेकिन स्पोर्ट्स वगेरह की प्रॅक्टीस कॉलेज के बाद शुरू होती थी...हर ब्रांच की एक-एक टीम बना दी गयी थी, जो कि एक तय किए हुए दिन मे दूसरे ब्रांच से भिड़ने वाली थी...इन शॉर्ट कहे तो कॉलेज मे इस समय कॉंपिटेटिव महॉल था, जिसमे कॉलेज के लगभग आधे से अधिक स्टूडेंट्स झुलस रहे थे....कॉलेज के उस कॉंपिटेटिव महॉल से मेरे खास दोस्त अरुण,सौरभ की तरह सिर्फ़ वो ही लोग बचे थे,जो गोल्डन जुबिली के इस गोल्डन मौके पर किसी भी फील्ड मे आक्टिव नही थे....

8त सेमिस्टर. मे आते तक मुझे और हॉस्टिल मे रहने वाले मेरे कुच्छ दोस्तो को शाम के वक़्त कोई सा गेम खेलने की आदत लग चुकी थी,जिससे हमारे शरीर मे एक नयी एनर्जी घुस जाती थी और फिर रात को हम लोग पेल के दारू पीते थे....लेकिन आजकल हम जिस भी ग्राउंड मे शाम के वक़्त एनर्जी लेने जाते वहाँ ब्रांच वाइज़ लौन्डे प्रॅक्टीस करते हुए मिलते थे,इसलिए अब हमारा ग्राउंड हमारे हॉस्टिल का कॉरिडर बना....जहाँ हम लोग क्रिकेट,फुटबॉल बड़े आराम से खेलते थे......
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"मैं,अरमान भाई की टीम मे रहूँगा..."पांडे जी को जब अरुण ने अपनी टीम मे लिया तो राजश्री पांडे एक दम से चिल्ला उठा....

"मर म्सी, जा चूस ले अरमान का..."पांडे जी का कॉलर पकड़ कर उसे अरुण ने मेरी तरफ धकेला और बोला"भाग लवडे मेरी टीम से...."

"सौरभ डार्लिंग मेरी तरफ..."मैने अपनी टीम के अगले खिलाड़ी को सेलेक्ट किया...

"तो फिर ये कल्लू कन्घिचोर मेरी तरफ..."कल्लू को हाथ दिखाते हुए अरुण ने कहा"आ जा बे कालिए..."
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मैने और अरुण ने 4-4 लौन्डो की टीम बनाई और कॉरिडर मे फुटबॉल खेलने के लिए आ पहुँचे....इस बीच एक और लौंडा वहाँ आया और उसने भी खेलने की इच्छा प्रकट की....

"जा पहले अपने लिए कोई जोड़ीदार लेकर आ...ऐसे मे तो एक तरफ 5 और एक तरफ 4 लौन्डे रहेंगे..."उस लड़के से अरुण ने कहा...

"सुन बे अरुण...तू रख ले इसे, तुम जैसे गान्डुल 5 क्या 50 भी हो जाए तब भी मुझे कोई फ़र्क नही पड़ता..."

"मैं क्यूँ रखू, तू ही रख ले और बेटा गान्डुल कौन है ये तो मॅच के बाद ही पता चलेगा,जब मैं तेरे हाथ-पैर तोड़ दूँगा..."

"ठीक है फिर...आजा बे,इधर खड़ा हो जा..."उस नये लौन्डे को अपनी तरफ आने का इशारा करते हुए मैने खुद से कहा"एक बार फिर से अरुण को चोदु बना दिया , आइ'म सो स्मार्ट...अब तो 100 मैं जीत के ही रहूँगा...."

जब कॉरिडर मे दोनो टीम तैनात हो गयी तो मैं सबसे पहले राजश्री के पास गया और बोला.."तू जा के गोलकीपिंग कर बे लोडू और बेटा यदि एक बार भी फुटबॉल इस पार से उस पार गयी तो सोच लेना..."

"अरमान भाई..आप फिक्र मत करो...एक बार मैं राजश्री खा लूँ,उसके बाद तो कोई माई का लाल मुझे हरा नही सकता..."

पांडे जी को गोलकीपर बनाने के बाद मैं सौरभ के पास गया और बोला"सुन बे, तू डिफेन्स करना और जो कोई भी फुटबॉल लेकर तेरे पास आए, साले का हाथ-पैर तोड़ देना....मैं फॉर्वर्ड खेलूँगा..."
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वैसे तो मुझे फुटबॉल खेलना नही आता था लेकिन जैसे हमलोग लंगर डॅन्स करते थे,वैसे ही हम लोग लंगर फुटबॉल खेल रहे थे,जहाँ कोई रूल्स नही...बस फुटबॉल गोल होनी चाहिए ,उसके लिए चाहे कोई सा भी तरीका अपनाया जाए....जब मैं अपनी टीम की तरफ से फॉर्वर्ड खेलने आया तो मुझे देखकर अरुण भी फॉर्वर्ड खेलने के लिए आगे आ गया....कल्लू कंघीचोर मुझे कवर करने के लिए मेरे पास ही खड़ा था और अरुण मेरे ठीक सामने मुझे गालियाँ दे रहा था.....

"थ्री....टू....वन...स्टार्ट"

तीन तक की गिनती समाप्त होने के बाद मैने फुटबॉल को अपनी पहली ही किक मे अरुण के थोब्डे को निशाना बनाना चाहा, लेकिन फुटबॉल से मेरा पैर ही टच नही हुआ बोले तो अरुण के थोबडे को बिगाड़ने का मैने एक सुनहरा अवसर मिस कर दिया और कल्लू फुटबॉल लेकर आगे बढ़ा...

"सौराअभ....आगे मत जाने देना, मुँह मे लात मारना इस कालिए के..." अपना पूरा दम लगाकर मैं चीखा...जिसके बाद कल्लू डर के मारे जहाँ था ,उसने फुटबॉल को वही छोड़ा और वापस लौट आया....

"ऐसे तुमलोग मार-पीट करोगे तो मैं नही खेलूँगा... "कल्लू अरुण के पास जाकर मुझसे बोला...

"अबे अरमान, 100 के लिए तू इतना नीचे गिर जाएगा...मैने कभी सोचा नही था, थू है तुझपर..."

"अभी कल के मॅच मे जब तू मेरी तरफ था ,तब तो बहुत बोल रहा था कि मार उस कालिए को....इसलिए अब अपनी ये नौटंकी बंद कर और गेम शुरू कर...."मैने कहा और पलट कर सौरभ को आवाज़ दिया "थाम ले बे फुटबॉल और यदि अब कल्लू इस एरिया मे आया तो उचकर उसके मुँह मे जूता घुसा देना...."
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12-15-2018, 01:33 AM,
RE: Porn Hindi Kahani दिल दोस्ती और दारू
असलियत मे मैं और मेरी टीम ऐसा कुच्छ भी नही करने वाली थी ,ये तो सिर्फ़ हमारा मॅच जीतने का प्लान था,जो मैने अभी-अभी बनाया था...जिससे सामने वाली टीम के लौन्डे हमारी तरफ डर के मारे ना आ सके....लेकिन मॅच के शुरुआती हालत देखकर मुझे अंदाज़ा हो चला था कि आज तो यहाँ वर्ल्ड वॉर ३र्ड होने वाला है.

कल्लू को डरा हुआ पाकर अरुण ने उससे अपनी पोज़िशन चेंज की और खेल फिर से शुरू हुआ....

मैं फुटबॉल लेकर आगे बढ़ा तो डिफेन्स करने के लिए कल्लू मेरे सामने आ गया और मैने फुटबॉल को मारने के बहाने उसके पैर मे एक किक जड़ दी जिसके बाद वो लन्गडाते हुए सामने से हट गया....अरुण मेरे पीछे था ,इसलिए मैं तूफान की तरह सामने वाली टीम की धज्जिया उड़ाते हुए आगे बढ़ता गया लेकिन मेरे आख़िरी शॉट को उनके गोलकीपर ने रोक लिया....
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"तुझे बोला था ना बे कालिए कि बीच मे मत आना, लेकिन तू माना नही...अब चूस..."पीछे अपनी टीम की तरफ जाते हुए मैने कल्लू से कहा,जो अपने पैर सहला रहा था....

अरुण की टीम से अरुण ही फुटबॉल को इधर-उधर नचाते हुए हमारी तरफ ला रहा था . अरुण को पेलने का मेरा कोई प्लान नही था लेकिन दिक्कत ये भी थी कि मुझे ढंग से फुटबॉल खेलना भी नही आता था कि मैं उसे बिना चोट पहुचाए उससे फुटबॉल छीन लूँ, इसलिए अरुण को पेलने के बहाने से मैं आगे बढ़ा और सीधे जाकर उसे अपने दोनो हाथो से पकड़ लिया...

"सौराअभ ,फुटबॉल छीन कर आगे बढ़ और यदि कल्लू बीच मे आया तो जूता उतारकर सीधे मुँह मे मारना लवडे के..."चीखते हुए मैने सौरभ को आवाज़ दी....

"ये तो गद्दारी है बे, छोड़ मुझे...ये तो नियम के खिलाफ है"आँखे दिखाते हुए अरुण बोला...

"अच्छा बेटा, आज ये नियम के खिलाफ हो गया...कल तू जब मेरी टीम मे था,तब तो तू ही ऐसे फ़ॉर्मूला यूज़ कर रहा था...."

"कल की बात कुच्छ और थी...आज ये सब नही चलेगा..."

"ऐसे-कैसे नही चलेगा...पापा जी का राज़ है क्या...चल खिसक इधर से..."जब सौरभ ने गोल कर दिया तो अरुण को छोड़ते हुए मैने कहा...

"अब देख बेटा,अरमान अपुन क्या कहर ढाता है..."

कहर ढाने की धमकी देकर अरुण अपनी टीम के पास गया और उनसे कुच्छ बाते करने लगा.हम लोग 1-0 से लीड कर रहे थे,जिसे देखकर अरुण की गान्ड फटने लगी और उसने कल्लू से जाकर कहा कि यदि तुझे कोई मारे तो तू भी उसे मारना....

अरुण की टीम ने लगभग 5 मिनिट तक अपनी प्लॅनिंग बनाई ,जिसके बाद कल्लू एक बार फिर मेरे पास आकर खड़ा हो गया और तो और उनका गोलकीपर भी किक मारने के बाद हमारी तरफ बढ़ा....अरुण की टीम का ये कदम एक तरह से हैरतअंगेज़ कारनामा था और जब तक मैं कुच्छ समझता उसके पहले ही कल्लू ने मुझे ज़ोर से पकड़ कर दीवार से सटा दिया और उधर अरुण ने पीछे से सौरभ की गर्दन पकड़ ली ,जिससे सौरभ अपनी जगह से हिल तक नही पाया....हमारे बाकी दो प्लेयर्स को भी ऐसे ही पकड़ कर गिरा दिया गया और अरुण के टीम के गोलकीपर ने अपने गोल पोस्ट से फुटबॉल लाकर हमारे गोल पोस्ट मे डाल दी 
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"इसकी माँ का...ये तो फुटबॉल के नियम की धज्जिया उड़ा दी बे तुमने...तुम्हारा गोलकीपर कैसे इतना अंदर आ सकता है..."हैरान-परेशन सा कुच्छ सेकेंड्स के लिए मैं जैसे कोमा मे चला गया था...

"अब बोल लवडे अरमान,क्या बोलता है...तुझे लगता है कि सिर्फ़ तू ही एकलौता ऐसा है...जो प्लान बना सकता है...अब तो तू गया काम से..."

अरुण के इन भयंकर वाक़्यो को सुनकर मेरा खून खौल उठा और मैने अपनी टीम के चारो मेंबर को अपने पास बुलाया और उन्हे समझाया कि हमे क्या करना है...हमारे 5 मिनिट के ब्रेक के बाद हमारे प्लान के मुताबिक़ पांडे जी ने फुटबॉल को पैर से किक करने की बजाय हाथ मे पकड़ा और तेज़ी से सामने वाले पाले की तरफ भागा...अब हमारा ये फुटबॉल मॅच फुटबॉल मॅच ना होकर रग्बी मॅच बन गया था, जिसमे बॉल को हाथ मे लेकर भागना होता है...पांडे जी की इस हरक़त से अरुण और उसकी पूरी टीम के होश उड़ गये और वो पांडे जी को रोकने के लिए तुरंत दौड़ पड़े...लेकिन तभिच पांडे जी ने बॉल मेरी तरफ फेका,जिसे मैने बिना देर किया लपक लिया और अरुण की टीम के गोलकेपर को हाथो से घसीट कर फुटबॉल के साथ गोल कर दिया.....
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"अरुण लंड, अब बोल...कैसा लगा मेरा प्लान...अब तू गया बेटा..."

"अब देख मैं क्या करता हूँ..."बोलकर अरुण ने फिर से अपनी टीम को अपने पास बुलाया और 5 मिनिट तक उनसे डिसकस करता रहा....
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डिस्कशन के बाद जब गेम शुरू हुआ तो अब फुटबॉल का गेम हॅंडबॉल का गेम बन गया. अरुण और उसके टीम वाले पांडे जी के रग्बी गेम की तरह फुटबॉल को लेकर दौड़े नही बल्कि उन्होने दूर-दूर मे खड़े अपने टीम के लौन्डो को फुटबॉल फेक कर फुटबॉल पास किया और हमारे निकम्मे गोलकीपर सर राजश्री पांडे जी की बदौलत हमने भी दूसरा गोल खा लिया.....जिसके बाद अरुण ने फिर मुझे हेकड़ी दिखाई....
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मेरे और अरुण की टीम के बीच खेला गया वो फुटबॉल मॅच ,एक फुटबॉल मॅच ना होकर यूनिवर्सल मॅच हो गया था, जिसमे कभी कोई फुटबॉल खेलता ,तो कोई रग्बी खेलता और जिसका दिल करता वो हमारे उस फुटबॉल मॅच को हॅंडबॉल का गेम भी बना देता था. बोले तो ~लंगर~ फुटबॉल मॅच...जिसमे कोई रूल्स नही ,बस फुटबॉल गोल होनी चाहिए ,जिसके लिए चाहे कोई सा भी साम दाम दंड भेद अपनाना पड़े...
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"अबकी बार गोल होने के बाद जिसके अधिक पॉइंट रहेंगे,वो मॅच जीतेगा...क्या बोलता है..."हान्फते हुए अरुण ने मुझसे कहा...

"ठीक है...ये लास्ट गोल..अब तक का स्कोर बराबर है, इसलिए जो इस बार गोल दागेगा मॅच और 100 उसके..."मैने भी हान्फते हुए कहा..."लेकिन उसके पहले 5 मिनिट का ब्रेक लेते है...क्या बोलता है "

"मैं भी यही सोच रहा था..."

हमारा वो लंगर फुटबॉल मॅच तक़रीबन एक घंटे तक चला ,जिसमे दोनो टीम ने हाथ-पैर से 10-10 गोल दागे थे....इसलिए 5 मिनिट के ब्रेक के बाद जो भी टीम गोल करती वो एक पॉइंट की लीड लेकर विन्नर रहती.

अपने रूम मे आकर मैने पानी का बॉटल खोला और पूरा बॉटल खाली कर दिया....लेकिन तब भी आधी प्यास बाकी थी...मेरे जैसा हाल वहाँ बैठे अरुण, सौरभ ,पांडे जी और उन सभी का था जो मॅच खेल रहे थे....पांडे जी इतने थक गये कि ज़ोर-ज़ोर से हान्फते हुए ज़मीन पर औधे लेट गये और बोले की 'अरमान भाई...अब मेरे मे हिम्मत नही बची है...आप संभाल लो...'

'एक तो गया काम से...सौरभ तेरे मे कुच्छ दम बाकी है या तू भी तेल लेने जाएगा..."

"मैं खेलूँगा...."

"चल फिर बाहर आ, प्लान बनाते है..."

पांडे जी को वही ज़मीन मे छोड़ कर मैं, सौरभ और बाकी दो के साथ बाहर आया और प्लान बनाने लगा....

आख़िरी गोल हमारी तरफ हुआ था, इसलिए फुटबॉल लेकर हमलोग मॅच स्टार्ट करने वाले थे...जब अरुण की टीम सामने तैनात हो गयी तो मैने सौरभ को उनके बीच भेजा और अपने टीम के एक लौन्डे के हाथ मे फुटबॉल देकर रग्बी वाले गेम की तरह भागने के लिए कहा....उस लौन्डे ने ठीक वैसा ही किया लेकिन हाफ पिच पर अरुण ने मेरी टीम के उस लौन्डे को पकड़ लिया जिसके तुरंत बाद प्लान के मुताबिक़ सौरभ, जो पीछे खड़ा था...उसने अरुण की गर्दन को ठीक वैसे ही दबोच लिया ,जैसे की अरुण ने पहले सौरभ की गर्दन को दबोचा था....

अरुण की टीम का गोलकीपर अबकी बार अपनी ही जगह पर खड़ा रहा लेकिन अरुण को सौरभ के चंगुल से छुड़ाने के लिए कालिया आगे आया और तभिच मैने अपना बदला पूरा करने के उद्देश्य से घुमा कर एक लात कालिए को दे मारी और कालिया सीधे दीवार से जा भिड़ा ,जिसके बाद दीवार ने सर आइज़ॅक न्यूटन के थर्ड लॉ का पालन करते हुए कालिए को नीचे ज़मीन पर गिरा दिया....

"मुझसे भिड़ता है बोसे ड्के..अब जा के इलाज़ करवा लेना..."कालिए के शरीर को जगह-जगह से तोड़ने के बाद मैने उससे कहा....

अरुण को सौरभ ने फँसा रखा था और कालिया नीचे ज़मीन पर लेटा कराह रहा था. अब अरुण की टीम मे सिर्फ़ दो लोग बचे थे और वो दोनो गोल पोस्ट मे जाकर अपना हाथ फैला कर खड़े हो गये....

"तुम दोनो को मालूम नही क्या कि मैं बॅस्केटबॉल मे माहिर हूँ...बेटा जब मैं उस छोटे से छेद मे(रिंग) बॅस्केटबॉल घुसा देता हूँ तो फिर यहाँ मुझे गोल करने से कैसे रोकोगे बे..."

मेरा इतना कॉन्फिडेन्स देखकर उन लड़को का डर और भी बढ़ गया और वो दोनो अपने दोनो हाथ फैला कर एक-दूसरे के बगल मे खड़े हो गये....
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12-15-2018, 01:33 AM,
RE: Porn Hindi Kahani दिल दोस्ती और दारू
हमारे हॉस्टिल का कॉरिडर ज़्यादा चौड़ा नही था ,इसलिए जब वो दोनो अपने हाथ फैला कर खड़े हो गये तो पूरा का पूरा गोल पोस्ट उन दोनो के बॉडी से ढक गया....इसलिए गोल करने मे मुझे अब बड़ी दिक्कत हो रही थी...लेकिन ज़्यादा देर तक नही...मैने फुटबॉल को अपने हाथ मे लिया और घुमाकर उन दोनो मे से एक के पेट मे दे मारा.....

"आआययययीीई.....गान्ड फट गयी बे..."बोलते हुए वो लड़का,जिसके पेट मे मैने अभी-अभी फुटबॉल तना था,वो वही अपना पेट पकड़ कर बैठ गया...

अब जब एक घायल हो चुका था तो मेरे लिए गोल करने का काम बेहद आसान हो गया था और फिर मैने बिना समय गँवाए आख़िरी गोल दाग दिया....
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"ला दे 100 "आख़िरी गोल करने के बाद मैं अरुण के पास गया और उससे बेट के पैसे माँगे....

"ले लेना ना बाद मे...कही भागे जा रहा हूँ क्या...."

"चल बाद मे दे देना..."अपने रूम की तरफ आते हुए मैने विन्नर वाली स्माइल अरुण को दी...लेकिन मेरे रूम मे घुसने से पहले ही कालिया मुझे कुच्छ बोलने लगा...

"क्या हुआ बे, मैने तो तुझे पहले ही वॉर्न किया था कि मेरे रास्ते मे मत आना...लेकिन नही,...तेरी ही गान्ड मे बड़ी खुजली थी..."

"लवडे, मुझे कल अपनी बहन को लेकर हॉस्पिटल जाना था...लेकिन अब नही जा पाउन्गा...आआअहह"

"अबे तो दर्द से कराह रहा है या चुदाई कर रहा है...दर्द मे भी कोई ऐसे कराहता है क्या..आआअहह "

"बात मत पलट अरमान...तूने ये सही नही किया...."

"अब ज़्यादा नौटंकी मत कर बे कल्लू..."कालिए को सहारा देकर उठाते हुए मैने कहा "वैसे तेरी बहन कॉलेज मे पढ़ती है,ये मुझे आज ही पता चला...कौन है वो..."

"फर्स्ट एअर मे है...नाम है आराधना शर्मा..."

"आराधना शर्मा... खा माँ कसम "जबरदस्त तरीके से चौुक्ते हुए मैने कल्लू से पुछा....

मुझे इस तरह से शॉक्ड होता देख कल्लू भी बुरी तरह चौका और डरने लगा कि कही मैं उसे फिर ना पेल दूं . मैं इसलिए इतनी बुरी तरह चौका था क्यूंकी आराधना और कल्लू के फेस मे कोई मेल-जोल नही था.

आराधना उतनी गोरी भी नही थी, लेकिन कल्लू जैसे निहायत काली भी नही थी...आराधना एवन माल भले ना हो लेकिन ऐसी तो थी ही कि यदि वो चोदने का प्रपोज़ल दे तो मैं मना ना करूँ वही कल्लू एक दम बदसूरत मेंढक के जैसे मुँह वाला था और तो और साला कंघी भी चुराता था....

"ऐसे क्या देख रहा है बे, फिर से मारेगा क्या..."

"आराधना तेरी सग़ी बहन है या फिर तेरे चाचा,मामा,काका,फूफा,तौजी....एट्सेटरा. एट्सेटरा. की बेटी है..."

मेरे द्वारा ऐसा सवाल करने पर पहले तू कल्लू मुझे खा जाने वाली नज़रों से देखने लगा लेकिन जब उसे ऐसा लगा कि वो मेरा कुच्छ नही उखाड़ सकता तो वो थोड़ा मायूस और थोड़े गुस्से के साथ बोला...

"आराधना मेरी दूर की बहन है...तुझे उससे क्या..."

"तभी मैं सोचु कि तुझ जैसे कालिया की बहन आराधना कैसे हो सकती है..." आराधना ,कल्लू की दूर के रिश्ते की बहन है ये जानकार मैं बड़बड़ाया और वहाँ से अपने रूम मे आया....
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मेरे रूम मे इस वक़्त सौरभ, अरुण के साथ पांडे जी भी मौज़ूद थे,जो फुटबॉल मॅच के दौरान लगी चोट को सहला रहे थे...अरुण के हाथ और गर्दन के पास की थोड़ी सी चमड़ी घिस गयी थी,वही सौरभ सही-सलामत था......

"देख लिया बे,मुझे चॅलेंज करने का नतीजा, अब अगली बार से औकात मे रहना..वरना इस बार गर्दन के पास की थोड़ी सी चमड़ी उखड़ी है,अगली बार पूरा गर्दन उखाड़ दूँगा...."शहन्शाहो वाली स्टाइल मे मैं अपने बेड पर बैठते हुए बोला"मुझे देख ,मैं कैसे मॅच के बाद भी रिलॅक्स फील कर रहा हूँ..."

"ज़्यादा बोलेगा तो 100 के बदले मे मैं लंड के 100 बाल थमाउन्गा..."आईने मे देखकर अपनी गर्दन को सहलाते हुए अरुण ने कहा"और बेटा, आईने मे देख ,तेरा माथा फोड़ दिया है मैने..."

अरुण के इतना बोलने के साथ ही मेरा हाथ खुद ब खुद मेरे सर पर गया और जैसे ही मैने अपना हाथ अपने माथे पर फिराया तो थोड़ी सी जलन हुई....

"खून निकल रहा है क्या बे सौरभ..."

"थोड़ी सी खरॉच है बे...बस और कुच्छ नही...और ये बता तू उस कन्घिचोर से किस लौंडिया के बारे मे बात कर रहा था..."

"ऐसिच है एक आइटम...उसी के बारे मे बात कर रहा था..."बात को टालते हुए मैने कहा...क्यूंकी यदि मैं उन्हे आराधना के बारे मे बताता तो फिर उन्हे पूरी कहानी बतानी पड़ती कि मैं कैसे कॅंटीन मे आराधना से मिला और वो आंकरिंग की प्रॅक्टीस करने भी आती है...ब्लाह..ब्लाह. 
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अगले दिन जब मैं कॉलेज के लिए हॉस्टिल से निकल रहा था तो जो बात मेरे दिमाग़ मे थी ,वो ये कि एश का मुझे देखकर क्या रियेक्शन होगा, वो मुझसे बिहेव कैसे करेगी...मुझसे बात भी करेगी या नही...क्यूंकी कल शाम के वक़्त पार्किंग मे मैने उसे कहा था कि 'यदि वो मुझसे पहले नही जाएगी तो मैं उसकी पप्पी ले लूँगा' . उस वक़्त तो मैने ये कह दिया था लेकिन बाद मे जब मैने इसपर गौर किया और इतमीनान से सोचा तो मुझे ऐसा लगा कि मुझे एश को वो नही बोलना चाहिए था....इसलिए मैं ऑडिटोरियम की तरफ जाते वक़्त थोड़ा घबरा भी रहा था .

"एक काम करता हूँ, ऑडिटोरियम मे जाते ही एश को बोल दूँगा कि वो कल वाली बात का बुरा ना माने...वो तो मैने ऐसे ही मज़ाक मे कह दिया था....एसस्स..यह्िच बोलूँगा,तब वो मान जाएगी..."

ऑडिटोरियम की तरफ जाते वक़्त मैने बाक़ायदा वो लाइन्स भी बना डाली, जो मुझे एश से बोलना था.उस दिन एश मुझे ऑडिटोरियम के बाहर अकेली खड़ी मिली और मैने दिल ही दिल मे उपरवाले का शुक्रिया अदा किया क्यूंकी यदि इस वक़्त एश मुझे कुच्छ उल्टा सीधा भी कह देती तो कोई और नही सुनता....वरना यदि एश किसी तीसरे के सामने मुझपर चिल्लाती तो मेरा अहंकार जो मुझमे कूट-कूट कर भरा हुआ है...वो अपनी इन्सल्ट होते हुए देख तुरंत बाहर आता और जिसका नतीज़ा एश की सबके सामने घोर बेज़्जती के रूप मे निकलता....

"गुड मॉर्निंग, यहाँ खड़ी मेरा इंतज़ार कर रही थी क्या "हमेशा की तरह हँसते-मुस्कुराते हुए मैने कहा....इस उम्मीद मे कि एश भी हँसते-मुस्कुराते हुए जवाब देगी...

"तुमसे कोई मतलब कि मैं यहाँ खड़ी होकर क्या कर रही हूँ...अपने काम से मतलब रखो..."चिड़चिड़ेपन के साथ एश ने मेरा स्वागत किया....

कसम से यदि उस वक़्त वहाँ एश की जगह कोई और लड़की होती ,यहाँ तक की आंजेलीना सिल्वा की जगह आंजेलीना जोली भी होती और वो मेरे गुड मॉर्निंग का ऐसा चिड़चिड़ा जवाब देती तो मैं सीधे घुमा के एक लाफा मारता ,लेकिन वो लड़की एश थी इसलिए मैं शांत ही रहा....ये सोचकर की शायद उसका मूड खराब होगा.
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"पक्का ,आज अंकल जी ने किराए के पैसे नही दिए होंगे...इसीलिए इतना भड़क रही है. लेकिन टेन्षन मत ले ,मैं बहुत रहीस हूँ....बोल कितना रोक्डा दूँ...तू कहे तो ब्लॅंक चेक साइन करके दे दूं..."एसा का मूड ठीक करने के इरादे से मैने ऐसा कहा....लेकिन एश पर इसका उल्टा ही असर हुआ.

एश और भी ज़्यादा मुझपर भड़क गयी और उसने कुच्छ ऐसे बाते बोल दी ,जो सीधे तीर के माफ़िक़ मेरे दिल मे चुभि, वो बोली...
"तुम्हे लगता है कि मैं तुमसे बात भी करना पसंद करती हूँ...हाआंन्न , तुम जैसे लड़को को मैं अच्छी तरह से जानती हूँ, जहाँ कोई रहीस लड़की दिखी नही कि उसके पीछे पड़ गये....गौतम के साथ तुमने जो किया ,उसके बाद तो मुझे तुम्हारी नाम से भी घिन आती है...और जितना रुपये तुम्हारे ग़रीब माँ-बाप तुम्हे एक महीने मे भिजवते है ना उतना तो मैं हर दिन बार,पब वगेरह मे टिप दे देती हूँ...ब्लडी नॉनसेन्स...पता नही कहा-कहा से चले आते है,भिखारी..."
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एश के मुँह से ऐसे-ऐसे लफ्ज़ सुनकर मुझे पहली बार मे तो यकीन ही नही हुआ कि एश ने मुझसे ही वो सब कहा है...मेरा कान ऐसे सन्न हुआ जैसे किसी ने ज़ोर से मेरे कान मे झापड़ दे मारा हो....एकपल के लिए मुझे समझ ही नही आया कि मैं क्या करूँ, लेकिन एश ने ऐसे-ऐसे शब्द बोल दिए थे कि मेरे अहंकार ने मेरे प्यार को तुरंत मात दे दी और मैं बोला...
"देखो, मेरे मोबाइल मे कॉल तेरी तरफ से आया था ना कि मैने तुझे कॉल किया था...इसलिए ऐसा सोचना भी मत कि मुझे तुझ जैसी लड़की से बात करने मे रत्ती भर की भी दिलचस्पी है...वो तो ऑडिटोरियम मे देखा कि तुझसे बाकी लड़कियाँ बात नही करती इसलिए तरस खाकर तेरे पास दो दिन क्या बैठ गया, दो चार बाते क्या कर ली...तूने तो उसका उल्टा-सीधा ही मतलब निकल लिया...फूल कही की...और तूने मेरे माँ-बाप को ग़रीब कहाँ ? तेरी तो...अबे जितने पैसा तेरी पूरी ग़रीब फॅमिली एक महीने मे उड़ाती है है ना उतना तो मेरा सिर्फ़ दारू का बिल रहता है....और तू खुद को बहुत रिच समझती है..."जेब से गॉगल निकाल कर पहनते हुए मैने कहा"जितनी कि तू नही होगी,उतने का तो सिर्फ़ मेरा गॉगल है..अब चल साइड दे, अंदर वो छत्रु मुझसे आंकरिंग की टिप्स लेने के लिए मेरा इंतज़ार कर रहा होगा..."

मैने तुरंत एश को पकड़ कर एकतरफ खिसकाया . मेरे द्वारा अपनी इन्सल्ट होते देख एश की आग और भी भड़क गयी और जब मैने उसे छुआ तो वो चीखते हुए बोली"डॉन'ट टच मीईई...."

"सॉरी कि मैने तुझ जैसी को छुकर अपना हाथ गंदा कर लिया और सुन ,अगली बार मुझसे ज़ुबान संभाल कर बात करना वरना ऐसी बेज़्जती करूँगा कि 24 अवर्स मेरे लफ्ज़ झापड़ की तरह कान मे बज़ेंगे...अब मुझे घूर्ना बंद कर,वरना मेरा मूड खराब हुआ तो एक-दो झापड़ यही लगा दूँगा....साली आटिट्यूड दिखाती है..."
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एश के साथ घमासान लड़ाई करके मैं ऑडिटोरियम मे घुसा और पहली बार मुझे एश के साथ मिस्बेहेव करने का कोई मलाल नही था, बल्कि मेरा दिल कर रहा था,अभिच बाहर जाकर उसपर म्सी,बीसी,बीकेएल,एमकेएल...की भी वर्षा कर दूं...लेकिन मैने जैसे-तैसे खुद को कंट्रोल किया और ऑडिटोरियम मे एक कोने मे चुप-चाप बैठकर खुद को ठंडा करने लगा....


"साली खुद को समझती क्या है, अभी मूड खराब हुआ तो दाई चोद दूँगा, लवडा समझ के क्या रखी है मुझे..."

मैं बहुत देर तक एक कोने मे अकेले बैठ कर एश को बुरा-भला कहता रहा लेकिन मेरा गुस्सा था कि ठंडा होने का नाम ही नही ले रहा था...ऑडिटोरियम मे बाकी स्टूडेंट्स भी आ गये थे बस छत्रपाल किसी कोने मरवा रहा था....

"आज उस बीसी छत्रपाल ने ज़्यादा होशियारी छोड़ी तो मारूँगा म्सी को...फिर लवडे की सारी आंकरिंग गान्ड मे घुस जाएगी दयिचोद साला..."मेरा गुस्सा एसा से डाइवर्ट होकर छत्रपाल पर आ गया .

"गुड मॉर्निंग...सर, इतने अकेले क्यूँ बैठे हो..."

आवाज़ सुनकर मैने आवाज़ की तरफ अपना चेहरा किया तो देखा कि आराधना खड़ी थी और मंद-मंद मुस्कान के साथ अपने हाथ मे एक पेपर लिए खड़ी थी....

"क्या है..."मैने चहक कर कहा, जिससे वो थोड़ा पीछे हो गयी...

"गुस्सा क्यूँ होते हो सर, बस इतना ही तो पुछा कि आप अकेले क्यूँ बैठे हो..."

"तुझसे कोई मतलब कि मैं यहाँ कोने मे बैठू या सामने स्टेज पर लेटा रहूं...मेरा मन मैं चाहे तो ऑडिटोरियम के छत पर जाकर बैठू, तुझे क्या...और यदि तूने अगली बार मुझे सर कहा तो तेरा गला दबा दूँगा...अब भाग यहाँ से..."

जो गुस्सा एश या फिर छत्रपाल पर उतारना चाहिए था, वो उस बेचारी आराधना पर उतर गया...किसी महान आदमी ने सही ही कहा है कि हर वक़्त उंगली नही करनी चाहिए...और आराधना ने वही उंगली करने वाला काम कर दिया था. मेरा ऐसा रौद्र रूप देखकर आराधना वहाँ से तुरंत भाग खड़ी हुई और मैं वही तब तक बैठा रहा जब तक छत्रपाल ने मेरा नाम लेकर मुझे स्टेज पर नही बुला लिया.....

आज छत्रपाल ने अपने उन 6 स्टूडेंट्स को सेलेक्ट कर लिया था, जो गोल्डन जुबिली के फंक्षन मे आंकरिंग करने वाले थे और उन 6 स्टूडेंट्स मे से मैं और एश भी थे...आराधना को छत्रपाल ने अडीशनल के तौर पर सेलेक्ट किया था,ताकि बाइ चान्स यदि कोई किसी कारणवश फंक्षन मे ना आ पाए तो आराधना उसकी भरपाई कर दे.....
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जिन 6 स्टूडेंट्स को छत्रपाल ने सेलेक्ट किया था, उनमे से 3 लड़के और 3 लड़किया थी और अब 2-2 के ग्रूप बनने वाले थे. 
अकॉरडिंग तो छत्रु, हर ग्रूप मे एक लड़का और एक लड़की रहने वाले थे ,इसलिए मैं इस समय स्टेज पर खड़ा होकर यही दुआ कर रहा था कि एश मेरे साथ ना फँसे वरना मेरे हाथो उसका खून हो जाएगा....लेकिन उस म्सी छत्रपाल ने वही किया, जो मैं नही चाहता था...साले ने मुझे एश के साथ जोड़ दिया और हाथ मे दो पेज पकड़ा कर माइक के पास जाने के लिए कहा....

मेरी किस्मत भी एक दम झंड है. जो मैं चाहता था, छत्रपाल ने सेम टू सेम वैसा ही किया था...मतलब कि मैं सेलेक्ट भी हो गया था और मेरी जोड़ीदार एश बनी थी...लेकिन मुझे अब ये पसंद नही आ रहा था....जब छत्रपाल ने 7 को सेलेक्ट करके बाकियो को ऑडिटोरियम से बाहर का रास्ता दिखाया तो मैने सोचा कि छत्रु के पास जाकर ये कहा जाए कि 'सर, मुझे एश के आलवा किसी और के साथ रख दीजिए' लेकिन फिर मैने ऐसा नही किया...

मैने ऐसा इसलिए नही किया क्यूंकी मेरा प्यार एश के लिए उमड़ आया था बल्कि इसलिए क्यूंकी मुझे पूरा यकीन था कि एश ,छत्रपाल सर के इस सेलेक्षन पर ऑब्जेक्षन ज़रूर उठाएगी...और जब एश ये काम करने ही वाली थी तो फिर मैं क्यूँ अपना नाम खराब करू क्यूंकी वैसे भी मेरा नाम बहुत ज़्यादा खराब है.
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मैं छत्रपाल के पास ही स्टेज पर खड़ा था और जब एश को स्टेज पर अपनी तरफ आते देखा तो मेरा पारा फिर चढ़ने लगा....जहाँ एक ओर मैं इतना गरम हो रहा था,वही दूसरी तरफ एश ऐसे शांत थी...जैसे हमारी लड़ाई कुच्छ देर पहले ना होकर एक साल पहले हुई हो....एश के शांत बर्ताव के बाद भी मुझे उम्मीद थी कि वो च्छत्रु के पास जाएगी और मेरे साथ आंकरिंग करने को मना कर देगी, लेकिन वो चुप-चाप स्टेज पर आई और मेरे बगल मे आकर खड़ी हो गयी.....

"जाना...जाती क्यूँ नही छत्रु के पास और जाकर बोल दे कि तुझे मेरे साथ रहना पसंद नही..."एश जब मेरे बगल मे खड़ी हुई तो मैने चीखे मार-मार कर खुद से कहा....

छत्रपाल ने हम दोनो की तरफ हाथ किया और स्टेज पर थोड़ा आगे आने के लिए कहा...फिर वो हम दोनो से बोला...
"स्टार्टिंग के थर्टी मिनिट्स तुम दोनो आंकरिंग करोगे , ओके...उसके बाद 20-20 मिनिट्स तक बाकी के दो ग्रूप आएँगे जिसके बाद तुम दोनो फिर से आंकरिंग करोगे...."एश के हाथ मे एक पेज पकड़ाते हुए छत्रपाल ने कहा"ये मेरा इनिशियल प्लान है ,बाकी का बाद मे बताउन्गा....अब तुम दोनो, अरमान और एश..शुरू हो जाओ..."
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छत्रपाल ने 'शुरू हो जाओ' ऐसे बड़े आराम से कह दिया ,जैसे उसके बाप का राज़ हो. एश का तो पता नही लेकिन मैं इस वक़्त बिल्कुल भी मूड मे नही था और सबसे अधिक हैरानी मुझे इस बात से थी कि एश हम दोनो के सेलेक्षन पर कोई ऑब्जेक्षन क्यूँ नही उठा रही, क्यूंकी जितना मैने एश को समझा है उसके अनुसार वो एक नकचड़ी लड़की है....लेकिन इस वक़्त वो एक दम शांत थी और मेरे साथ ऐसे खड़ी थी,जैसे कि हम दोनो के बीच कुच्छ हुआ ही ना हो...साला सच मे लौन्डियोन को समझने की कोशिश करना मतलब खुद के गले मे फाँसी लगाने के बराबर है....
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मुझे नही पता कि एश उस समय स्टेज पर क्या सोचकर छत्रपाल के सेलेक्षन का विरोध करने के बजाय चुप-चाप खड़ी थी लेकिन मेरे लिए अब समय के साथ बीत रहा हर पल, हर सेकेंड मुझे जैसे धिक्कार रहा था और जब ये असहनिय हो गया तो मैं खुद छत्रपाल के पास गया....

"सर, मेरी उस लड़की से थोड़ी सी भी नही बनती...क्या आप मुझे किसी और के साथ फिट कर सकते है ? "धीमे स्वर मे मैने छत्रपाल से कहा...

"बकवास बंद करो और जाकर उसके साथ खड़े रहो...मैं यहाँ तुम्हारी पसंद की लड़की के साथ तुम्हारी जोड़ी बनाने का काम नही कर रहा हूँ...समझे,.."दाँत चबाते हुए छत्रपाल ने मुझसे कहा...

"लेकिन सर, वो लड़की मुझे ज़रा भी पसंद नही है... मतलब कि वो गौतम की करीबी है और आपको तो पता ही होगा कि हमारे बीच क्या हुआ था..."पुरानी कब्र खोदते हुए मैने अपना पक्ष मज़बूत करना चाहा...ताकि छत्रपाल मान जाए.

"मुझे कोई फ़र्क नही पड़ता कि तुम कौन हो और वो कौन है...यदि गोल्डन जुबिली के फन्शन मे आंकरिंग करनी है तो उसी के साथ करो...नही तो गेट उधर है,वहाँ से बाहर जाओ और फिर दोबारा कभी मत आना..."
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मैने आज तक कॉलेज मे सिर्फ़ ऐसे ही काम किए थे, जिससे मेरा नाम सिर्फ़ खराब हुआ था लेकिन गोल्डन जुबिली के फंक्षन मे आंकरिंग करके मैं थोड़ा नाम कामना चाहता था ताकि मेरे यहाँ से जाने के बाद लोग मुझे सिर्फ़ मेरी बुराइयो के कारण याद ना रखे....वो जब भी गोल्डन जुबिली के फंक्षन का वीडियो देखेंगे तब-तब वो मुझे याद करेंगे और मेरे कॉलेज की लड़किया जो यदि 10 साल बाद भी मेरे कॉलेज मे आएँगी वो गोल्डन जुबिली के उस सुनहरी शाम के वीडियो मे मुझे आंकरिंग करता देख ,आपस मे ज़रूर पुछेन्गि कि' यार ये हॅंडसम बॉय कौन है ' . ये सब, जैसे मेरा दिमाग़ मे बैठ चुका था और मुझे यकीन था कि फ्यूचर मे ऐसा ही होगा....इसलिए मैने उस दिन ऑडिटोरियम मे छत्रपाल की बात मान ली और उसके कहे अनुसार चुप-चाप एश के पास जाकर खड़ा हो गया.....लेकिन मैं तब भी हैरान हुआ था और आज भी हैरान हूँ कि आख़िर एश ने उस दिन कोई ऑब्जेक्षन क्यूँ नही उठाया ?
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"वेट...वेट...वेट..."वरुण ने मेरा मुँह दबाकर मुझे रोकते हुए बोला"बस एक मिनिट रुक, मैं मूत कर आता हूँ..."

"ये ले...सालाअ...चूतिया.."

"बहुत देर से कंट्रोल करके बैठा था,लेकिन अब और कंट्रोल नही होता...बस एक मिनिट मे आया..."बोलते हुए वरुण अपना लंड दबाते हुए बाथरूम की तरफ भागा....
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"मतलब कि तू ये कहना चाहता है कि एश तेरे ही ग्रूप मे रही...हाऐईिईन्न्न..."

"अब तू ए.सी.पी. प्रद्दूमन जैसे फालतू सवाल करेगा तो मैं तेरी जान ले लूँगा, समझा..."सिगरेट को होंठो के बीच फसाते हुए मैने आगे की कहानी बयान करनी शुरू की...
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12-15-2018, 01:34 AM,
RE: Porn Hindi Kahani दिल दोस्ती और दारू
उस दिन साला मैने छत्रपाल और एश को ऑडिटोरियम मे कैसे झेला, ये मैं ही जानता हूँ.यदि नाम कमाने का लालच ना होता तो मैं सीधे ऑडिटोरियम से बाहर आता...खैर मैने ऐसा नही किया,इसलिए इस बारे मे ज़्यादा बोलने का कोई मतलब नही लेकिन उसी दिन रात को जब मैं दारू पीने के बाद इस पूरे मसले को नये सिरे से देख रहा था तो तभिच मेरे दारू मे टॅन 1400 ग्रीम के दिमाग़ मे ये बात आई कि...'कही छत्रपाल मेरे साथ कोई गेम तो नही खेल रहा...यदि ऐसा है तो फिर छत्रपाल का बॅकग्राउंड चेक करना पड़ेगा बीड़ू,वरना ये तो मईक हाथ मे पकड़ा कर पिछवाड़े मे सरिया डालेगा... '


लड़कियो से मेरे कनेक्षन के मामले मे मेरी 8थ सेमेस्टर की लाइफ बाकी के सेमएस्टेर्स के मुक़ाबले बहुत ही बढ़िया चल रही थी..जहाँ पहले एक तरफ मेरे कॉलेज मे ऐसी एक भी लड़की नही थी ,जो मुझे मुस्कुरा कर देखे वही इस सेमेस्टर के स्टार्टिंग मे मेरी एश से बात चीत शुरू हुई तो वही दूसरी तरफ आराधना से भी मेरी थोड़ी-बहुत पहचान हुई थी, लेकिन कल एश ने मुझे खुद से दूर तो किया ही साथ मे आराधना डार्लिंग भी मुझसे खफा हो गयी...जिसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहले जहाँ वो ऑडिटोरियम मे घुसते ही मुझे एक प्यारी स्माइल के साथ गुड मॉर्निंग विश करती थी...वही अब वो एक तरफ अपना गाल फुलाए बैठी हुई थी....
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"सोच रही होगी कि मैं उसके पास जाकर उसे सॉरी बोलूँगा...चूस ले फिर मेरा सॉरी के नाम पर..."आराधना की तरफ देखते हुए मैं बड़बड़ाया और फिर अपनी लाइन्स याद करने लगा....
वैसे तो हमे गोल्डन जुबिली के फंक्षन मे आंकरिंग के वक़्त जो-जो बोलना था, उसका मनुअल मिलने वाला था,लेकिन फिर भी छत्रपाल ने सबको सॉफ हिदायत दी थी कि प्रॅक्टीस के दौरान कोई भी मनुअल को च्छुएगा तक नही... हमसे इतना हार्ड वर्क करने के पीछे च्छत्रु का एक लॉजिक था ताकि लौन्डे फंक्षन के वक़्त कही भी ना रुके....अगेन आ बकवास ट्रिक्स यूज़्ड बाइ छत्रपाल 
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"क्या मैं यहाँ बैठ सकती हूँ..."

आवाज़ मुझे पहचानी सी लगी और मैं जानता भी था कि इस आवाज़ का मालिक कौन है ,लेकिन फिर भी मैने कन्फर्म करने के लिए उपर की तरफ देखा...

"पूरा ऑडिटोरियम खाली है ,कही भी बैठ जा,कौन रोक रहा है...लेकिन यहाँ मेरे पास नही..."मैने बिना कुच्छ सोचे, बिना कोई पल गँवाए एश को देखते ही कह मारा...

"लेकिन मैं तो यही बैठूँगी....तुम्हे कोई दिक्कत हो तो उठकर दूसरी जगह बैठ जाना..."कहते हुए वो ठीक मेरे बगल मे बैठ गयी...

एश को अपने ठीक बगल वाली चेयर पर बैठा देख मैं वहाँ से उठा और दो कुर्सी छोड़ कर तीसरी पर आ बैठा और आँखे बंद करके मनुअल याद करने लगा.....

"क्या कर रहे हो...ह्म"

"मैं ये याद कर रहा था कि मैने किसको-किसको लोन दिया है... अब चुप रहना वरना मेरा मुँह खुल जाएगा..."एश को खा जाने वाली नज़रों से देखकर मैने कहा और फिर आँखे बंद कर ली...

लेकिन एसा मुझे डिस्टर्ब करने से बाज़ नही आई ,वो बीच-बीच मे मुझे कुच्छ ना कुच्छ बोलती ही रहती...लेकिन मैं फिर किसी सन्यासी की तरह अपनी तपस्या मे लीन ही रहा,मैने दोबारा अपनी आँख नही खोली....लेकिन इस बीच मैं अपनी आँखे बंद करके मनुअल याद करने के बजाय एश के बारे मे सोच रहा था...

"ये मुझसे बात क्यूँ करने लगी...बड़ी उल्लू है यार, जब लड़ाई हुई है तो कुच्छ दिन तो निभाना ही चाहिए...या तो इसकी याददाश्त चली गयी है या फिर शायद इसे इसकी ग़लती का अहसास हो गया है और ये मुझसे अब सॉरी बोलने वाली है "
यही सब सोचते हुए मैने अपनी आँख खोली और एश की तरफ देखा..मैने जैसे ही एश की तरफ देखा तभी मुझे एक जोरदार हिचकी आई क्यूंकी एश अपनी जगह से उठकर मेरे ठीक बगल मे बैठी हुई चॉक्लेट खा रही थी....उसकी इस हरक़त पर मेरा सर चकराने लगा और जितना मुश्किल उसे समझना मेरे लिए पहले था ,वो मुश्किल अब और भी बढ़ गयी थी....पता नही एश ऐसा क्यूँ कर रही थी..कही गौतम से इसका ब्रेक अप तो नही हो गया ?
कही ये मुझपर फिदा तो नही हो गयी ?
या फिर ये आर.दिव्या का तो कोई माइंड गेम नही ?

एश के उस प्यार भरे लेकिन ख़तरनाक बर्ताव को देख कर ऐसे कुच्छ पायंट्स मेरे दिमाग़ मे आने लगे थे और उन पायंट्स पर मैं गहराई से सोचता उससे पहले ही एसा ने मेरी तरफ एक चॉक्लेट बढ़ाते हुए कहा...

"कल के लिए सॉरी अरमान, वो मैं कल थोड़ा अपसेट थी,इसलिए इतना सब कुच्छ बोल गयी..लेकिन बाद मे मुझे रियलाइज़ हुआ कि ग़लती मेरी थी...इसलिए तुम्हारे लिए ये चॉक्लेट लाई हूँ..."

"बच्चा समझ के रखी है क्या मुझे जो मैं चॉक्लेट खाउन्गा...मर्द हूँ सीधे जंग के मैदान मे गोली खाउन्गा...बोल जय हिंद..."कड़क कर मैने कहा,जिसके बाद एश तुरंत खड़ी हुई और एक कुर्सी छोड़ कर बैठ गयी....

"ऐज युवर विश..."जो चॉक्लेट वो मुझे देने वाली थी, उसे खुद के मुँह के अंदर डालते हुए बोली"अरमान, वैसे सॉरी तुम्हे भी बोलना चाहिए...क्यूंकी तुमने भी मुझे बहुत कुच्छ कहा था..."

"मैं लड़कियो को सॉरी बोल दूँगा तो ये दुनिया नही पलट जाएगी...."
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उस दिन की हमारी प्रॅक्टीस बड़ी जोरदार हुई ,एश से फिर मेल-जोल बढ़ जाने के कारण मैं एक दम जोश मे था और उसका प्रभाव मेरे परर्फमेन्स मे दिखा, यहाँ तक कि छत्रपाल जो कभी किसी को 'गुड...नाइस' से ज़्यादा नही बोलता, उसने उस दिन मेरी तारीफ की....

जब हमारे प्रॅक्टीस का टाइम ख़त्म हुआ तो छत्रपाल ने मुझे दबी मे लेजा कर कहा कि 'यदि मैं चाहू तो एश की जगह किसी दूसरी लड़की को सेलेक्ट कर सकता हूँ ,लेकिन एक शर्त पर की परर्फमेन्स गिरनी नही चाहिए....'

छत्रपाल ने तो मुझे आराधना के साथ तक ग्रूप बनाने को बोल दिया और साथ मे ये भी कहा कि यदि आराधना मेरे साथ रही तो एश को फिर बाहर बैठना पड़ेगा...यदि यही ऑफर च्छत्रु ने मुझे कल दिया होता तो यक़ीनन मैं इसे आक्सेप्ट कर लेता लेकिन आज की बात अलग थी और आज का दिन भी मेरे लिए बहुत खास था...इसलिए मैने छत्रपाल के नये प्लान पर तुरंत ताला मारा और क्लास की तरफ बढ़ा.....जब मैं क्लास मे पहुचा तो वहाँ से टीचर गायब था, बोले तो हर पीरियड के बीच मिलने वाले 5 मिनिट के गॅप को किसी दूसरे टीचर ने गॅप नही किया था.....मैं अपनी जगह पर जाकर हर दिन की तरह चुप-चाप बैठ गया और सामने बोर्ड पर नज़र डाली और बोर्ड पर जो लिखा था उसे देखकर जैसे मुझे हार्ट अटॅक आ गया....मैने एक बार अपनी आँखे मलि और फिर बोर्ड की तरफ देखा...बोर्ड पर राइटिंग तो सुलभ की थी ,लेकिन नाम मेरा लिखा हुआ था,...मेरे नाम के आगे दो शब्द और लिखे हुए थे और वो दो शब्द थे 'हॅपी बर्तडे'
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12-15-2018, 01:34 AM,
RE: Porn Hindi Kahani दिल दोस्ती और दारू
मेरे कॉलेज मे या फिर कहे कि सभी कॉलेज मे लौन्डे सिर्फ़ तीन ही चीज़ ऐसी है जिससे सबसे ज़्यादा घबराते है...पहला एग्ज़ॅम के दिनो मे ,दूसरा जिस दिन एग्ज़ॅम का रिज़ल्ट आने वाला होता है और तीसरा तब जब उनका बर्तडे होता है....हमारी छोटी सी टोली मे जिसका भी बर्तडे होता उसके लिए बहुत बड़ा केक तो लाया जाता था लेकिन फिर बर्तडे बॉय को ठोक-ठोक कर केक का सारा पैसा वसूल भी कर लिया जाता था. जिसका बर्तडे होता था उसको सब मिलकर साले ऐसे मारते जैसे जन्मो जनम की दुश्मनी का बदला ले रहे हो...10, 15 ,20 कितने भी लौन्डे हो ,वो सब एक साथ बर्तडे बॉय के उपर टूट पड़ते और पिछवाड़े को मार-मार कर ऐसे सूज़ा देते थे कि जैसे किसी ने नंगा करके पिछवाड़े मे घंटो हंटर बरसाए हो....इसके बाद ना तो बैठते बनता था और ना ही सोते...फिर कोई पिछवाड़े पर हाथ भी रख ले तो ऐसा दर्द होता जैसे किसी ने धारदार चाकू घुसा दिया हो....


वैसे तो सब खुशी मे मारते थे लेकिन कुच्छ लौन्डे ,जिनको खाने के लिए केक नही मिलता था,वो फिर बर्तडे बॉय को खुन्नस मे मारते थे....बर्तडे के दिन ठुकाई का प्रकोप तो इतना था कि कॉलेज मे कयि लौन्डे अपने फ़ेसबुक अकाउंट से बर्तडे हाइड करे हुए थे...
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सामने बोर्ड पर 'हॅपी बर्तडे अरमान...'लिखा देख मेरी साँसे उल्टी चलने लगी...क्यूंकी मेरे दिमाग़ ने तुरंत आगे होने वाली ठुकाई का एक द्रिश्य मुझे दिखा दिया था...

मेरे क्लास मे घुसते ही लौन्डे मुझे गले लगाकर बर्तडे विश करने लगे तो वही लड़किया मेरी तरफ अपना हाथ बढाकर मुझे'हॅपी बर्तडे' बोलने लगी...लेकिन अपुन ने अपने क्लास की लौन्डियो से हाथ मिलाना तो दूर, थॅंक्स तक नही कहा ,अरे थॅंक्स कहना तो दूर मैं उनको पलटकर देखा तक नही ,वरना साली लंच टाइम पे फुदक-कर मेरे सामने खड़ी हो जाएगी और पार्टी-पार्टी की गुहार मारने लगेगी 

लड़कियो को मैने जिस तरह इग्नोर किया उसके ठीक उल्टा लौन्डो से गले मिलकर 'थॅंक्स यार...थॅंक्स भाई' कहा.
मुझे बर्तडे विश करते हुए जो मुझे मज़बूती से,जाकड़ कर गले लगाता(फॉर एक्स. अरुण, सौरभ, सुलभ) ,मैं उसकी तरफ दयादृष्टि से देखता था क्यूंकी यही वो लौन्डे थे,जो मुझे ठोकने वाले थे....बोले तो जो जितनी मज़बूती के साथ मुझे गले लगता ,वो बाद मे उतनी ही मज़बूत लात मेरे पिछवाड़े मे मारने वाला था.....
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"आज तो बेटा मैं नुकीले जूते पहन कर आया हुआ हूँ...तेरा खून कर दूँगा..."मेरे बैठते ही अरुण ने दाँत दिखाते हुए मुझे दूसरी बार हॅपी बर्तडे कहा....

"मैं तो लोहे के रोड से पेलुँगा बेटा इसलिए गान्ड मे तेल-मालिश पहले से किए रहना..."अरुण के सुर मे सुर मिलाते हुए सौरभ ने भी मेरे दिल की धड़कने बढ़ा दी...

लेकिन मेरे दिल की धड़कने बढ़कर रुकने को तब हुई ,जब सुलभ ने मुझसे कहा कि वो आज रात , जन्वरी के ठंड से कडकते महीने मे एक बाल्टी पानी मेरे उपर डाल देगा....."

"तुम लोगो ने मुझे मारने के लिए अपने ये जो अलग-अलग एक्सपेकशन बना कर रखे हो ना, उसको वापस वही डाल लो,जहाँ से निकाले हो....पिछले तीन सालो मे तो मेरा कुच्छ उखाड़ नही पाए और अबकी बार भी मैं कोई ना कोई जुगत लगा कर बच ही जाउन्गा...."

"अरे लंड मेरा बचेगा...तू देख आज रात को...और बेटा माफी माँग ,वरना हॉस्टिल की छत से सीधे नीचे फेकुंगा..."सौरभ ने कहा...
"चल बे...देख लूँगा तुझे..."
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उस दिन कॅंटीन मे लौन्डो ने पेल के मेरी जेब खाली करवाई, पहले अपने पैसे से जितना वो कॅंटीन मे हफ्ते भर मे खाते थे, उतना वो उस एक दिन मे खा गये....और जब बिल पे करने की बारी आई तो मेरी आँखो के सामने अंधेरा छाने लगा...सबके सामने मेरी बेज़्ज़ती ना हो ,इसलिए मैं उठकर काउंटर के पास गया और काउंटर मे बैठे हुए आदमी से बाद मे बिल देने की रिक्वेस्ट की...

"ऐसे थोड़े ही चलता है भैया कि जेब मे माल नही और पेट भरकर चल दिए....कल,परसो, नर्सो,सरसो...कुच्छ नही, बिल तो आज ही देना पड़ेगा,वो भी अभी..."

"मान जा यार, कल दे दूँगा..."

"पैसे दो नही तो कंप्लेन करूँगा..."

"एक बात बताऊ, मैं जेब मे पैसे लेकर नही चलता...तू कहे तो चेक साइन करके दे देता हूँ...बॅंक से जाकर निकाल लेना..."

"अपने को तो कॅश चाहिए..."

"वो तो नही है...फिर एक और काम कर एटीएम स्वप कर ले..."वॉलेट से आत्म निकलते हुए मैने कहा...जबकि मुझे मालूम था कि एटीम स्वप करने वाली मशीन कॅंटीन मे नही है....

"ये सब बखेड़ा तुम अपने पास ही रखो,अपने को तो कॅश चाहिए..."

"चूस ले मेरा फिर...कल लेना पैसे..."

कॅंटीन वाला जैसे-तैसे मान तो गया लेकिन उसे मनाने मे मुझे आधा घंटा लग गया...मेरे दोस्त खा-पीकर क्लास की तरफ चले गये और उनके जाने के बाद मैं एक दूसरी टेबल पर बैठकर गहरी चिंता मे डूबा हुआ था कि इतने पैसे कहाँ से आएँगे, अभी तो साला रात मे हॉस्टिल वाले दारू पिएँगे...वो अलग...जी तो करता है कि दो-तीन दिन के लिए कही भाग जाउ, सारा लफडा ही ख़तम 

"ओये...दो रस-मलाई भेज इधर..."गहरी चिंता से उबरने के लिए मैने ऑर्डर दिया"साला ये बर्तडे...बर्तडे ना होकर ,एक आफ़त हो गयी है...इनके बर्तडे आने दो, बीसी 5000 का तो मैं अकेले नाश्ता करूँगा और 10,000 का दारू पियुंगा, फिर लवडे दूसरी बार से पार्टी लेना भूल जाएँगे...."


"चम्मच क्या पपाजी लाकर देंगे, जा भागकर चम्मच लेकर आ..."कॅंटीन मे काम करने वाले लौन्डे को मैने हड़काया, जब वो बिना चम्मच के दो रस-मलाई मेरी टेबल पर रखकर चला गया...

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रस-मलाई का रस्पान करने के बाद जैसे मुझे थोड़ा सुकून मिला और मैने एक जोरदार अंगड़ाई मारकर जमहाई ली तो मुझे आराधना कॅंटीन मे अपनी सहेलियो के साथ बैठी हुई दिखाई दी....आराधना को मैने कल एश के कारण धमकाया था,लेकिन आज जब एश से बात-चीत शुरू हो गयी तो मैने सोचा कि इससे भी बातचीत शुरू कर ही लेते है,वैसे भी ग़लती इसकी नही थी....इसलिए मैने आराधना को दो उंगलियो से इशारा करके अपने पास बुलाया...मेरे बुलाने पर आराधना तो वहाँ आई ही साथ मे उसकी सहेलिया भी उसी के साथ वहाँ आ गयी...अब सबके सामने आराधना से वैसी बात करना जैसी बात मैं करने वाला था, वो मैं करता तो मेरे अहम के लिए ये धर्म संकट होता, इसलिए मैने हड़का कर आराधना की सहेलियो को वहाँ से भगाया और आराधना को अपने पास बैठने के लिए बोला....
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"देख...ये गाल फूला कर मत बैठ,मैं कल थोड़ा अपसेट था ,इसलिए तुझपे बरस पड़ा था..."एश ने जो सुबह ऑडिटोरियम मे मुझे कहा था, वही मैने आराधना को चिपका दिया....

"इसका मतलब आप मुझे सॉरी बोल रहे हो "

"सॉरी मैने कब कहा ...वो तो मैं एक्सप्लेन कर रहा था कि मैं तुझपर कल क्यूँ भड़का था...अब फुट यहाँ से..."
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उस दिन जब मैं कॅंटीन के बिल और रात को हॉस्टिल मे होने वाले खर्चे को लेकर परेशान था तभी कुच्छ ऐसा हुआ,जिसने मुझे अपार खुशी दी और वो अपार खुशी मुझे एश के मेसेज के कारण हुई थी....बोले तो उसने अपुन को मेसेज भेजकर बर्तडे विश किया था....

"अरुण...मुँह मे लंड लेगा तो एक खुशी की बात बताता हूँ..."एश का मेस्सेज पढ़ने के बाद चलती हुई क्लास के बीच मे मैने अरुण से कहा...

"बोसे ड्के ,धीरे बोल...वरना ये छत्रपाल तेरे मुँह मे लंड देगा..."मेरे पेट मे एक मुक्का मारते हुए अरुण बोला"और तू खुश क्यूँ हो रहा है..."

"ये देख...तेरी भाभी ने मुझे बर्त डे विश किया है..."मोबाइल डेस्क पर रखकर मैने अरुण को एसा का मेस्सेज दिखाया...

" तू लवडे खुश तो ऐसे हो रहा है,जैसे उसने आइ लव यू लिखकर भेजा हो..."

"बेटा तू समझ नही रहा है...आज उसने मुझे बर्तडे विश किया, फिर धीरे-धीरे करके गुड नाइट, गुड मॉर्निंग के मेस्सेज करेगी और फिर एक दिन ऐसिच वो 'आइ लव यू' का मेस्सेज भी मुझे टपका देगी...आइ नो.."

"लाड मेरा नो...आइ लव यू, का मेस्सेज भेजने के लिए...गौतम ज़िंदा है अभी...उसके बचपन का प्याआआआर...."

"मुँह बंद कर साले...और तू यदि लड़कियो के बारे मे इतना ही जानता तो दिव्या से गान्ड थोड़ी ही मरवाता...बेटा देख लेना, वो एक ना एक दिन आइ लव यू ज़रूर बोलेगी...क्यूंकी मैने फ़िल्मो मे देखा है कि अक्सर लड़किया अपने बचपन के दोस्त से सेट तो होती है,लेकिन कॉलेज मे उन्हे किसी दूसरे लड़के से सच्चा प्यार हो जाता है..."

"देख लेना तू...एश के नाम पर चुदेगा ,फिर मत बोलना कि मैने तुझे आगाह नही किया था..."

"मुँह बंद कर बे लोडू, तुझ जैसा छोटा आदमी ऐसी छोटी ही बात करेगा...साले कभी तो कुच्छ अच्छा बोला कर..."कहते हुए मैने अपना चेहरा अरुण की तरफ से फेर्कर बोर्ड की तरफ कर लिया....
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उस दिन एश ने दो और मेस्सेज किए, जिनमे से एक मे उसने लिखा कि' सॉरी,मुझे तुम्हे बर्तडे विश नही करना चाहिए था' और दूसरे मे लिखा कि' क्या तुम मुझसे पार्किंग मे मिलोगे...'

"बड़ी अजीब लड़की है यार...कही इसका दिमाग़ सटक तो नही गया, ना जाने क्या-क्या सोचते रहती है...."एश के मेसेज पढ़ने के बाद मैने कहा....
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12-15-2018, 01:35 AM,
RE: Porn Hindi Kahani दिल दोस्ती और दारू
उस दिन एश ने जब खुद मुझे पार्किंग मे मिलने के लिए कहा तो मेरे मन मे एक ख़याल कौधा कि 'ये साला कॉलेज का पार्किंग है या हमारा लवर पॉइंट '

एश से इस सेमेस्टर मे मैं जितनी बार पार्किंग मे मिला था ,उतना तो मैं पिछले चार साल मे शायद उससे मिला भी नही होऊँगा और आज फिर मुझे अपने लवर पॉइंट मे अपने लवर से मिलने जाना था....

उस दिन मुझसे बहुत बड़ी ग़लती हुई थी और वो ये कि ना जाने कैसे एश से पार्किंग मे मिलने वाली बात को मैं भूल गया...दोस्ती-यारी..हँसी-मज़ाक मे कॉलेज के लास्ट पीरियड तक आते-आते तक तो जैसे मैं ये भूल ही चुका था कि मुझे एश से मिलना भी है ,उपर से क्लास के लौन्डे ने पूरी क्लास मे ये खबर भी फैला दी कि 'दा डार्क नाइट राइज़स' ह्ड प्रिंट मे आ चुकी है,इसलिए क्लास ख़त्म होने के बाद हम जिन-जिन लौन्डो को राइज़स डाउनलोड करनी थी...वो न्यू इट बिल्डिंग या फिर लाइब्ररी की तरफ और उनमे से एक मैं भी था.....अरुण को बॅटमॅन कुच्छ खास पसंद नही था,इसलिए वो सौरभ के साथ सीधे हॉस्टिल की तरफ हो लिया और मैं, सुलभ के साथ लाइब्ररी मे जा पहुचा....लाइब्ररी रात के 10 बजे तक खुली रहती थी लेकिन कॉलेज के बाद वहाँ एक्का-दुक्का स्टूडेंट ही दिखते थे...इसलिए डाउनलोडिंग स्पीड भी पेल के आती थी...


कॉलेज के बाद लाइब्ररी के सुनसान होने की वजह ये थी कि गर्ल्स हॉस्टिल मे ऑलरेडी वाईफ़ाई लगा हुआ था और लौन्डो को जो डाउनलोड करना होता था ,वो दिन मे ही क्लास बंक करके डाउनलोड कर लेते थे....
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" पहले हमारे हॉस्टिल मे भी वाईफ़ाई चलता था लेकिन इस साले टकलू प्रिन्सिपल ने बाद मे वाईफ़ाई हटवा दिया...वरना कॉलेज के बाद यहाँ आने की ज़रूरत नही होती ..."डार्क नाइट राइज़स ,को डाउनलोडिंग मे लगाकर मैने सुलभ से कहा,इस बात से अंजान कि एश उधर पार्किंग मे मेरा इंतज़ार कर रही है...

"सो तो है...ओये बीसी"

"ऐसे पवित्र शब्द निकालने की कोई वजह...बक्चोद लाइब्ररी मे तो गाली मत दिया कर...वरना अभी वो लाइब्ररी का इंचार्ज इन्सल्ट करके भगा देगा तो क्या इज़्ज़त रह जाएगी तेरी..."

"होना क्या है...यदि उसने ऐसा किया तो उस लवडे की लौंडिया को छोड़ूँगा नही....तूने देखा है उसे ,कैसे मरवा-मरवा का गोल-गप्पा हुए जा रही है...और मैं चौका इसलिए क्यूंकी वो तेरे हॉस्टिल वाला कल्लू शर्मा को चश्मा लग गया है, वो देख साला इधरिच ही आ रहा है..."

"अजीब है यार..."कल्लू को अपनी तरफ आता देख मैने थोड़ी उँची आवाज़ मे कहा, ताकि कल्लू भी सुन सके...मैं बोला"कैसे-कैसे लौन्डो को चश्मा लग जाता है यार, साले अभी तक फर्स्ट एअर क्लियर नही है और चश्मा लगाकर पढ़ाकू की औलाद बनकर घूम रहा है...."

"बोल तो ऐसे रहा है जैसे तू कॉलेज का टॉपर हो..."हम दोनो के पास बैठते हुए कल्लू ने कहा.."और मैने फर्स्ट एअर की सारी बॅक लास्ट एअर मे ही क्लियर कर ली थी...अब सिर्फ़ 5थ सेमिस्टर. के 3 और 6थ सेमिस्टर. के 4 है...इन्ही बॅक को क्लियर करने के लिए दिन रात पढ़ाई करता हूँ,इसीलिए चश्मा लगा है..."

"बेटा ये पढ़ाई करने के कारण चश्मा नही लगा है, ये तो 3जीपी क्वालिटी मे बीएफ देख-देख कर हिलाने का नतीज़ा है...अबे कालिए खुद को देख और मुझे देख...कितना बदसूरत दिखता है तू..."

"बदसूरत भले ही हूँ,लेकिन लौंडिया पटा कर बैठा हूँ...तेरी तरह रॅनडा तो नही हूँ..."

"म्सी..."कल्लू का सर पकड़ कर मैने लाइब्ररी की टेबल मे पटक दिया और बोला"औकात से बाहर बोलता है...बेटा मैं लौन्डियो को भाव नही नही देता,वरना लौन्डियो की तो मैं नादिया बहा सकता हूँ...फ़ेसबुक पर 1332 लड़कियो की फ्रेंड रिक्वेस्ट पेंडिंग पड़ी है अभी...बात करता है..."अपनी शेखी झाड़ते हुए मैने कहा...

"बोल ना कि गे है...और तेरा लंड खड़ा नही होता..."

"फिर औकात से बाहर बोला तूने लवडे..."एक बार फिर मैने कालिए का सर पकड़ा और पहले की तरह टेबल पर दे मारा...

"बेटा,मुझपर गुस्सा उतारने से कुच्छ नही होगा...तू रॅनडा था ,रन्डवा है और रन्डवा रहेगा..."बोलकर कल्लू वहाँ से उठा और लाइब्ररी से भाग खड़ा हुआ....

कल्लू की बात सुनकर मेरा रोम-रोम ब्लास्ट फर्नेस मे जलने लगा...मैं कल्लू को मारने के लिए उसके पीछे भागा...लेकिन तभी सुलभ ने 'डाउनलोडिंग फैल हो जाएगी' की गुहार मारकर मुझे रोक दिया, वरना कल्लू तो आज मेरे हाथो शाहिद ही होने वाला था जैसे-तैसे मैं अपमान का घूट पीकर बैठ तो गया, लेकिन सुलभ के सामने अपनी बेज़्ज़ती से मैं थोड़ा निराश और परेशान था क्यूंकी कल कॉलेज मे सुलभ यही बात पूरे लौन्डो को बताने वाला था और तो और मुझसे ये कहते भी नही बन रहा था की 'देख यार...ये बात किसी और को मत बताना...'
.
जब डार्क नाइट राइज़स डाउनलोड हुई तो हम दोनो लाइब्ररी से निकल कर बाहर आए...हम दोनो पार्किंग के पास से भी गुज़रे,लेकिन तब भी मुझे ये याद नही आया कि एश ने मुझे पार्किंग मे मिलने के लिए बुलाया था क्यूंकी मेरे दिल-ओ-दिमाग़ मे तो कालिया के वो शब्द घूम रहे थे,जो उसने मुझसे लाइब्ररी मे कहे थे....

"सुलभ...सुन तो.."

"बोल.."

"यदि मैने तीन हफ्ते के अंदर इस कल्लू की बहन को पटाकर नही छोड़ा तो तू मेरा लंड काट देना...लेकिन तब तक आज लाइब्ररी वाली बात किसी को मत बताना...."

"रहने दे,तुझे ये कल्लू की बहन को छोड़ने वाली पार्तिक़या लेने की कोई ज़रूरत नही है...मैं वैसे भी किसी को नही बताउन्गा, बेफिकर रह..."

"कमान से निकला तीर..मुँह से निकला शब्द...लंड से निकला मूत...गान्ड से निकला ***...जिस तरह वापस नही होते,उसी तरह अरमान की प्रातिक़या कभी वापस नही हो सकती..."

"यदि ऐसा ही है तो फिर खा कसम आल्बर्ट आइनस्टाइन की...लेकिन मुझे लगता नही कि तू ये कर पाएगा..."

"अब तो आइनस्टाइन चाचा की कसम ले ली है, इज़्ज़त तो रखनी ही पड़ेगी...बोले तो अब आराधना डार्लिंग तीन हफ़्तो के अंदर चुद कर ही रहेगी..."

उसके बाद सुलभ ने अपना रास्ता नापा और मैने हॉस्टिल का रास्ता नापा...
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उस दिन मेरा बर्तडे था...लेकिन दूसरे जहाँ चाहते है कि उनके बर्तडे के दिन सब उसे विश करे...वही मैं चाहता था कि किसी को मेरा बर्तडे मालूम तक ना चले....इसकी कोई ख़ास वजह तो नही थी बस वजह यही थी कि बर्तडे के दिन जानवरो की तरह पड़ने वाली मार से मैं बहुत घबराता था. लेकिन अब तो जंग का बिगुल बज चुका था और लौन्डे अपने-अपने बर्तडे के दिन मेरे द्वारा हुई ठुकाई का बदला लेने के लिए हॉस्टिल मे तैयार खड़े थे कि ,कब मैं हॉस्टिल के अंदर घुसू और वो मेरी ठुकाई शुरू करे....


8थ सेमेस्टर मे मनाया गया मेरा बर्तडे कयि कारणों से मेरे लिए यादगार साबित हुआ...

पहला कारण ये कि एश ने प्यार से मुझे ऑडिटोरियम मे चॉक्लेट गिफ्ट किया, जिसे मैने लेने से इनकार कर दिया 
दूसरा कारण ये कि ज़िंदगी मे पहली बार एश ने मेरा इंतज़ार किया और मैं उससे मिलने नही गया 
तीसरा कारण जो मेरे बर्तडे को यादगार बनाने के पीछे था,वो ये कि मैने उसी दिन आराधना को चोदने की प्रातिक़या की थी...
और चौथा कारण ये था कि ज़िंदगी मे पहली बार मैं जैल गया ,वो भी तब जब हमारे डिस्ट्रिक्ट का एस.पी. ही मेरे खिलाफ हो...

यदि मैं चाहता तो पिछले तीन साल की तरह इस साल भी बर्तडे के दिन मार खाने से बच सकता था ,लेकिन अबकी बार मैने खुद ही मार खाने का सोचा...क्यूंकी ये कॉलेज मे मेरा आख़िरी साल था इसलिए मैं कॉलेज मे बनाए गये अपने आख़िरी बर्तडे को यादगार बनाना चाहता था...फिर भले ही वो यादगार पल मेरी ठुकाई से ही क्यूँ ना जुड़ी हो....

मैं हँसते-मुस्कुराते हुए हॉस्टिल के अंदर घुसा तो जिन लौन्डो ने मुझे पहले देखा वो गला फाड़कर मेरा नाम चिल्लाने लगे कि'सब जल्दी आ जाओ बे, अरमान आ गया है...'

उसके बाद फोर्त एअर के लड़को ने मुझे उठाया और मेरे रूम मे लेजा कर मुझे बंद कर दिया...उन लोगो को शायद ये डर था कि मैं कही भाग ना जाउ, लेकिन उन्हे क्या पता कि बकरा खुद बलि चढ़ने आया था....

मुझे रूम मे बंद करने के तक़रीबन 10 मिनिट बाद लड़को ने गेट खोला और गेट खुलने के कुच्छ ही सेकेंड्स के बाद अरुण ने मेरा हाथ पकड़कर सौरभ को पैर पकड़ कर उठाने के लिए कहा....

"मारो साले को, पूरे चार साल की कसर निकाल देना..."

इसके बाद जो मार मुझे पड़ी, वो साली अब तक मुझे याद है...बहुत देर तक फोर्त एअर के लड़के मेरी धुलाई करते रहे और जूनियर्स वहाँ खड़े होकर मज़ा ले रहे थे...इसके बाद उन लोगो ने मुझे मेरे बिस्तर पर लेजा कर पटक दिया और अरुण,सौरभ को भी बाकी लड़को ने पेलने के लिए उठा लिया...

"अबे ओययय्ए...मुझे क्यूँ मार रहे हो बे...मेरा बर्तडे थोड़ी है..."जब लौन्डो ने अरुण का हाथ-पैर पकड़ कर उठाया तो अरुण की गान्ड फट गयी और वो बोला...
"तुम दोनो अरमान के रूम पार्ट्नर हो, लात तो तुम दोनो भी खाओगे...देख क्या रहे हो बे, मारो लवडो को...."फोर्त एअर के झुंड मे से किसी ने कहा और फिर अरुण ,सौरभ के पिछवाड़े को लाल करके उन्हे भी मेरी तरह उनके-उनके बिस्तर पर फेक दिया गया.....साले बिना मतलब के चुद गये 

"कसम से ,यदि मुझे मालूम होता कि तेरे रूम पार्ट्नर होने के कारण मैं भी लात खाउन्गा तो मैं फर्स्ट सेमेस्टर मे ही रूम चेंज कर लेता...सालो ने मार-मार के पिछवाड़ा सूजा दिया..."दर्द से कराहते हुए सौरभ बोला"वैसे अरमान तेरे तकिये के नीचे तेरा गिफ्ट है...देख तो..."

"गिफ्ट "मैने बड़ी उम्मीद के साथ अपना तकिया उठाया लेकिन मेरे अरमानो पर पानी तब फिरा जब मैने देखा कि वहाँ सिवाय कॉंडम के कुच्छ नही था...

"बोसे ड्के ,ये कॉंडम को गिफ्ट कहता है तू... दिखा दी ना तूने अपनी औकात...कम से कम 32 जीबी का पेन ड्राइव तो दिया होता ,बक्चोद..तेरे मुँह मे अरुण का लंड..."

"अबे अरमान, मेरा गिफ्ट देखने के लिए दाई तरफ पलट और बिस्तर उठा कर देख...."

अबकी बार बड़ी उम्मीद से मैं दाई तरफ पलटा और बिस्तर के नीचे देखा तो वहाँ दारू का एक क्वॉर्टर रखा हुआ था....

"अरे गजब...सारी तबीयत खुश हो गयी...लेकिन बमपर देता तो मैं और ज़्यादा खुश होता, खैर कोई बात नही इससे काम चला लूँगा..."

क्वॉर्टर निकालकर मैने फाटक से अपने लिए पेग बनाए और दर्द कम करने के लिए एक के बाद एक 2 पेग पी गया.....

"आअहह....तुम दोनो कोई वरदान माँगो बे मुझसे, मैं भगवान हूँ "

"आज रात को बार मे पार्टी दे फिर..."

"तथास्तु..."बोलते मैने फिर एक पेग चढ़ाया और सिगरेट सुलगा कर बिस्तर पर वापस लेटकर जगजीत सिंग का ग़ज़ल गाने लगा...

"ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो
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12-15-2018, 01:35 AM,
RE: Porn Hindi Kahani दिल दोस्ती और दारू
भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी.
मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन,
वो काग़ज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी."
रूम के नशे मे जगजीत सिंग की ग़ज़ल ने मुझे कुच्छ ऐसा रमा दिया कि मैं फिर से उठा और एक पेग मारकर वापस बिस्तर पर लुढ़क कर ग़ज़ल गाने लगा...
"मुँहल्ले की सबसे निशानी पुरानी,
वो बुढ़िया जिसे बच्चे कहते थे नानी.
वो नानी की बातों में परियों का डेरा

,
वो चेहरे की झुरिर्यों में सदियों का फेरा."
"वैसे अरमान, कुच्छ लड़को के मुँह से सुना कि आंकरिंग मे तेरे साथ एश है...."ग़ज़ल के सुर और मेरे सुर मे बेसुरा राग घोलते हुए अरुण ने अपनी टाँग अड़ाई...लेकिन उसने एश का नाम लिया तो मैं रूम के नशे और जगजीत साब के ग़ज़ल मे और रम गया...
मैने अरुण के सवाल का जवाब दिए बिना ग़ज़ल की आगे की पंक्तियो को आगे बढ़ाया....
"भुलाए नही भूल सकता है कोई,


वो छोटी सी रातें वो लंबी कहानी.


कड़ी धूप मे अपने घर से निकलना,


वो चिड़िया, वो बुलबुल,वो तितली पकड़ना."
"अबे तूने जवाब नही दिया...चढ़ गयी क्या..."

"थोड़ी देर चुप नही रह सकता बक्चोद...कितना आनंद आ रहा था, साले एक तो तू खुद बेसुरा ,उपर से तेरी आवाज़ बेसुरी..."

"वो सब तो ठीक है...लेकिन पहले ये बता कि जो मैने सुना वो सही है क्या..."

"शत प्रतिशन सही है....एश अपुन के ग्रूप मे ही है..."

इसके बाद अरुण कुच्छ नही बोला और मैने मुँह ज़ुबानी याद जगजीत सिंग की वो ग़ज़ल पूरी की....रात को करीब 8 बजे, हम तीनो अपने प्लान के मुताबिक़ चुप-चाप हॉस्टिल से बार जाने के लिए निकले...लेकिन हॉस्टिल के बाहर लौन्डो ने मुझे पकड़ लिया और पार्टी देने के लिए कहने लगे....

"अबे तुम्ही लोगो के लिए दारू लेने जा रहा हूँ,तुम सब अंदर तैयार बैठना...मैं आधे घंटे मे दारू लेकर आता हूँ..."बहाना बनाते हुए मैं बोला...

"इतना सज-धज कर दारू लेने जा रहे हो बे तुम तीनो... "जिस लड़के ने हमे हॉस्टिल के बाहर पकड़ा था, उसने मेरी ओर देखकर पुछा...

"बेटा भाई..हमेशा कपड़े वपडे पहनकर टिप-टॉप रहता है,क्या पता कब कोई लड़की मिल जाए...तू हॉस्टिल के अंदर जाकर सबको बोल दे कि कोई खाना ना खाए...मैं आधे खांते मे सबके लिए दारू और खाना लेकर आता हूँ..."

"ईईसस्स...आज तो फिर मज़ा आ जाएगा..."वो लड़का खुशी के मारे वहाँ से कूदता हुआ हॉस्टिल के अंदर गया और मैं अरुण,सौरभ ,पांडे जी के साथ बार के लिए निकल पड़ा....

सिटी से मैने नवीन और सुलभ को भी पकड़ा और जोरदार पार्टी करने के इरादे से बार की तरफ बढ़े लेकिन हमे क्या पता था कि बार की तरफ जाने वाला रास्ता हमे बार नही बल्कि जैल पहुचाने वाला था......

बार जाते वक़्त मैने मन ही मन मे एक बजेट बना लिया था कि इतने रुपये से आगे खर्च नही करना है...लेकिन बार मे दारू और लड़कियो के बीच मेरा सारा बजेट गड़बड़ा गया....हमने पेल के दारू की बोटले खाली की और सिगरेट से अपना कलेजा जलाया. हम लोग नशे मे इतने टन हो गये थे कि एक दूसरे तक को नही पहचान रहे थे.....

"तू कौन है बे लवडे और मेरे पीछे-पीछे दुम हिलाते क्यूँ आ रहा है....भिखारी है क्या..."बार से निकलते वक़्त जब मैने पीछे अरुण को आते हुए देखा तो उससे बोला...

"मैं....मैं हूँ सम्राट आरूनोड...लेकिन मेरे राज्य के लोग प्रेम से मुझे अरुण कहते है..."

"तू मुझे जाना पहचाना क्यूँ लग रहा है बे...पक्का तूने मेरा लंड मुँह मे लिया होगा एक-दो बार...हट सामने से..."अरुण के पीछे से आते हुए सौरभ ने अरुण को धक्का देकर नीचे ज़मीन पर गिरा दिया और मेरे पास आकर आसमान की तरफ देखने लगा....फिर अपना सर खुजाते हुए बोला"साला ,मेरी हेलिकॉप्टर कहाँ गया, कुच्छ देर पहले तो यही पार्क किया था...पता नही कहा गया, कल ही तो खरीदा था..."

मेरे ,अरुण और सौरभ के बाद पांडे जी बार से बाहर निकले और हम तीनो को देखते ही चिल्लाए...
"दूध माँगॉगे तो खीर देंगे...
कश्मीर माँगॉगे तो चीर देंगे...
मा तुझे सलाम.....सैनिको क़ैद कर लो इन देशद्रोहियो को.... "

"अबे चुप बे पांडे,..."उसके सर पर एक मुक्का मारते हुए सुलभ ने कहा..."ये क्या चूतियापा लगा रखा है बे तुम चारो ने...एक खुद को सम्राट कहता है, दूसरे का हेलिकॉप्टर नही मिल रहा और तू पाकिस्तान से जंग लड़ रहा है...बीसी ,यदि मुझे मालूम होता कि तुम चारो इतना बड़ा लफडा करोगे तो मैं आता ही नही....नवीन , ये जो बाइक लेकर आए है उसे तू चला और अपनी बाइक की चाभी मुझे दे...इनके भरोसे रहा तो आज स्वर्ग के दर्शन हो जाएँगे..."

सुलभ और नवीन हमे बाइक पर बिठाकर रूम की तरफ चल पड़े...आधी रात होने के कारण पूरी सड़कें सुनसान थी,बस बीच-बीच मे कोई बिके या कार हमारे पास से गुजर रही थी...नवीन के रूम की तरफ जाते वक़्त मेरी बगल से एक कार गुज़री तो मैने नवीन को बाइक तेज़ करने के लिए कहा....

"क्या हुआ बे..."

"अबे स्पीड बढ़ा...उस कार वाले को मैं जानता हूँ..."

"ठीक है फिर...लेकिन ज़रा संभाल कर बात करना..."

"अपने बाप को मत सीखा कि कैसे बात करनी है...बस जब इशारा करू तो बाइक की स्पीड और तेज़ कर देना..."

नवीन ने बाइक की स्पीड बढ़ाई और हमे ओवर्टेक करके आगे बढ़ चुकी कार के ठीक बगल मे बाइक चलाने लगा....कार की सभी विंडो बंद थी इसलिए मैने हाथ से इशारा करके कार की विंडो खोलने के लिए कहा....

पहले तो कार वाले ने मेरी बात बहुत देर तक टाल दी लेकिन फिर उसने कार की विंडो खोल ही दी और मेरे तरफ सवालिया निगाह से देखने लगा.....

"क्या अंकल...एक दम मज़े मे या कोई परेशानी है..."

"आइ'म फाइन..हू आर यू..."

"वो सब हटाओ और ये बताओ कि कार आपकी है..."

"हां..."

इसके बाद मैं जो बोलने वाला था उसे सोचकर ही मैं हँसन लगा और फिर हँसते हुए बोला"कार देखकर मज़ा नही आया चाचा जान, बहुत सस्ती लग रही है....मुझे तो यही कार फ्री मे मिल रही थी,लेकिन मैने इतनी छोटी कार लेने से मना कर दिया, आप चोदु बन गये..... "

"अबे ये क्या बक रहा है...सठिया गया है क्या..."नवीन ने तुरंत बाइक की स्पीड बढ़ा दी और कार वाले को बहुत पीछे छोड़ दिया......

"अरमान, अब मैं तेरे साथ कभी भी ,कही भी नही जाउन्गा...फ्री-फोकट मे लफडे करने का तुझे बड़ा शौक है...काश की मैं तेरे साथ फर्स्ट एअर मे ना बैठा होता, लेकिन मेरी ही मति मारी गयी थी...."

"बेटा तेरा लेवेल ही नही है मेरे साथ रहने का...मैं खुद आज के बाद तेरे साथ नही आउन्गा...आज के बाद क्या, अभी, इसी वक़्त मैं तुझसे दोस्ती तोड़ता हूँ, बाइक रोक...."

"चल बे,..."

"रोक बाइक,वरना मैं कूद जाउन्गा..."

"चुप चाप बैठा रह, वरना मेरे हाथो पिटेगा तू अरमान..."

"तू बाइक रोकता है या मैं कूद जाउ...."

"अबे कूदना मत...."नवीन चिल्लाकर बोला"मैं बाइक रोकता हूँ, लेकिन तू प्लीज़ यार, कूदना मत..."

"अब आया ना लाइन पर..."

नवीन ने सड़क के किनारे बाइक रोकी और मुझसे एक के बाद एक सवाल करने लगा, जैसे की 'मैने बाइक क्यूँ रुकवाई'...'मेरा आगे क्या करने का प्लान है' वगेरह-वगेरह....लेकिन मैने उसे कुच्छ नही कहा और उसके हर सवाल के बाद उसे शांत रहने का इशारा करता था....

ये सिलसिला तब तक चलता रहा,जब तक कि सुलभ भी हमारे पास नही आ गया....

"क्या हुआ नवीन, तूने बाइक क्यूँ रोक दी..."सुलभ ने नवीन से पुछा...लेकिन नवीन कुच्छ कहता ,उसके पहले ही मैने सौरभ, अरुण को पकड़कर बाइक से उतरने के लिए कहा....

"क्या हुआ...कुच्छ बताता क्यूँ नही..."अबकी बार सुलभ ने गला फाड़कर नवीन से पुछा...

"पता नही, अरमान ने कहा कि बाइक रोक...इसलिए मैने रोक दिया..."
.
"आ जाओ बे..."नवीन की बाइक पर बैठकर मैने अरुण,सौरभ और पांडे जी को पीछे बैठने के लिए कहा...

"ये...ये क्या कर रहा है..."

बाइक के सामने नवीन तुरंत खड़ा हो गया और मुझे रोकने की कोशिश करने लगा.....

"जनरल, आप आग्या दे, मैं अभी इसको मौत के घाट उतार दूँगा..."पांडे जी ने कहा....पांडे जी के दिमाग़ मे जंग का जुनून अभी तक सवार था...

मैने कुच्छ कहने की अपेक्षा कुच्छ करने का प्लान किया और बाइक स्टार्ट करके जबरदस्त स्पीड के साथ नवीन के साइड से निकल लिया.....

जब बाइक चलाते वक़्त मुझे नींद आने लगी तो मैने हॉस्टिल की तरफ जाने वाले हाइवे के किनारे बिके खड़ी की और पांडे जी को बाइक चलाने के लिए कहा.....पांडे जी के सर पर तो अभी जंग का जुनून सवार था, वो भला ना क्यूँ करते...पांडे जी बाइक की कमान अपने हाथ मे ली और तेज़-तर्रार स्पीड से हॉस्टिल की तरफ बाइक को उड़ाने लगे.....
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"आप देखना अरमान भाई, मैं कैसे हॉस्टिल के अंदर एंट्री मारता हूँ...बोले तो एक दम हीरो के माफ़िक़..."कहते हुए पांडे ने बाइक लेजा कर सीधे गेट पर ठोक दी...

हम पीछे बैठे तीनो तो इधर-इधर गिरे,लेकिन पांडे जी हवा मे उड़ कर सीधे गेट के दूसरी तरफ जा पहुँचे.....

"ये साला पांडे हमे कहाँ ले आया है...इसकी माँ का..."सौरभ ज़मीन पर नीचे पड़े-पड़े कराहने लगा"ये तो हॉस्टिल नही लगता, बीसी पांडे...कहाँ ठोक दिया बे..."

"मुझसे तो उठा तक नही जा रहा...पता नही कहा गिरा हूँ..."

बाइक की गेट से टक्कर के बाद राजश्री पांडे कहाँ गया ,पता नही...लेकिन हम तीनो जहाँ गिरे थे,वही से एक-दूसरे का बस नाम ले रहे थे.....ना तो किसी मे उठने का ताक़त था और ना ही किसी मे इतनी समझ कि कोई जेब से मोबाइल निकालकर किसी को मदद के लिए बुलाए....

"अबे कहीं,हम लोग मर तो नही गये..."

"नही बे...एक ज्योतिषी ने मुझसे कहा था कि मैं 50 साल के पहले नही मरूँगा..."मैने कहा...

लेकिन उसके बाद जो हरक़त हुई ,उसने मेरा कान फाड़ दिया...हुआ ये था कि अचानक ही जिसके गेट पे पांडे जी ने बाइक ठोका था,उस घर के अंदर से एका-एक विसिल की आवाज़ आने लगी...पहले किसी एक ने विसिल बजाई,फिर दो फिर तीन....वो सब विसिल बजाकर बीच-बीच मे चिल्ला भी रहे थे....

"ये म्सी इतना भौक क्यूँ रहे है बे अरमान..."

"एक मिनिट..."मैने अपनी गर्दन उस घर के तरफ की ,जिसके अंदर से विसिल की तेज़ आवाज़े आ रही थी...और फिर उस घर के बाहर का बोर्ड पढ़ा...."सूपरिंटेंडेंट ऑफ पोलीस...एस.एल.डांगी...."

वो बोर्ड पढ़ते ही मेरा गला ऐसे सूखा, जैसे मुझे किसी ने हफ़्तो पहले बिना पानी के रेगिस्तान मे भेजा हूँ...मेरी चारो तरफ से फटने लगी और मैं खड़ा ना होने की हालत मे ना होने के बावज़ूद ,अपना पूरा दम लगाया और जैसे-तैसे खड़ा हुआ....

"भागो बीसी, उस म्सी पांडे ने बाइक हॉस्टिल के गेट मे नही बल्कि डांगी के घर मे ठोकी है...गान्ड मे जितना ज़ोर है, भागो...वरना ये साले गान्ड मे गोली डाल देंगे...."

मुझमे खड़े होने की बिल्कुल भी ताक़त नही थी ,वो तो एस.प. का डर था, जिसकी वजह से मैं लड़खड़ाते हुए जैसे-तैसे करके खड़ा हुआ...लेकिन तभी गेट से तीन गार्ड जो कुच्छ देर पहले विसिल बजा रहे थे, वो तीनो लंबी नली वाली बंदूक लेकर बाहर आए....

पहले तो वो तीनो गेट के बाहर आकर इधर इधर टॉर्च मारने लगे और जब मैं उन्हे खड़ा दिखाई दिया तो वो तीनो मुझपर लपके....एक ने मेरे दोनो हाथो को कसकर पकड़ा तो दूसरे ने अपने हाथ मे रखी लंबी नली वाली बंदूक से सीधे मेरे घुटनो मे मारा....

"मदर्चोद...."लड़खड़ा कर गिरते हुए मैने अपनी मुश्किले और बढ़ा ली...

क्यूंकी इसके बाद वो तीनो मुझपर बरस पड़े और गालियाँ बकने लगे....इसके बाद उन तीनो मे से दो ने मुझे छोड़ा और मेरे साथ और कौन-कौन है ,ये जानने के लिए इधर-उधर फिर से टॉर्च मारने लगे....

"तेरे साथ और कौन-कौन है....जल्दी बता,वरना गोली मार दूँगा..."

"अरे मैं कोई आतंकवादी थोड़े ही हूँ,जो ऑन दा स्पॉट पेल दोगे....हॅंड्ज़ अप...मेरा मतलब तुम लोग मुझसे हॅंड्ज़ अप करने को कहो और मैं सरेंडर करता हूँ...."

"तू ऐसे नही मानेगा..."बोलते हुए वो पोलीस वाला मेरी कमर के उपर चढ़ गया और मेरे दोनो हाथ को पीछे की तरफ करके मरोड़ने लगा.....

"बीसी ,दर्द हो रहा है छोड़..."
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12-15-2018, 01:35 AM,
RE: Porn Hindi Kahani दिल दोस्ती और दारू
"बीसी,गाली देता है..."मेरे हाथ को और ज़ोर से मरोड़ कर वो बोला....

तब तक अरुण और सौरभ को बाकी दोनो हवलदारो ने ढूँढ लिया और उन दोनो को पकड़ कर गेट के पास बिठा दिया.....

"इधर ही बैठ ,ज़रा सा भी हिला तो गान्ड मे गोली मार दूँगा...."अरुण और सौरभ को गेट के पास बैठाते हुए उन पोलीस वालो ने कहा....

लेकिन लगता है मेरा खास दोस्त अरुण , अब भी राजा आरूनोड के कॅरक्टर मे था, उसने बिना कुच्छ सोचे -समझे ,बिना आगे-पीछे की परवाह किए...आव ना देखा ताव और हवलदार को एक तमाचा जड़ दिया...

अरुण के इस तमाचे से कुच्छ देर तक तो खुद तमाचा खाने वाला हवलदार भी शॉक्ड रहा...लेकिन उसके बाद जो रियेक्शन उन तीनो पोलीस वालो का हुआ, वो बताने लायक नही है.....हम तीनो को पेल-पेल के वो पोलीस वाले हमारी जान ही ले लेते, यदि गेट के दूसरी तरफ से किसी ने उन्हे आवाज़ देकर रुकने के लिए ना कहा होता तो......

"उन दोनो को छोड़ कर खड़े हो जाओ ,लगता है साहब आ रहे है..."मेरे उपर इतनी देर से जो हाथी का वजन लिए हुए बैठा था, वो आवाज़ सुनते ही मेरे उपर से हट गया और एस.पी. को सलाम करने की पोज़िशन मे आ गया.....

डांगी जी हाथो मे एक रिवॉल्वर लिए हुए गेट से बाहर आए और हम तीनो को देखकर सवालिया नज़रों से अपने गार्ड्स की तरफ देखा....

"वो...वो साहब, ये तीनो ने गाड़ी से गेट को टक्कर मार दी थी और जब हम इन्हे उठाने आए तो हम पर हमला कर दिया और गालियाँ भी बकने लगे....."
.
अब तो मेरी हालत ऐसे होने लगी,जैसे हफते पहले नही बल्कि महीनो पहले किसी ने बिना पानी के रेगिस्तान मे घुसेड दिया हो...डर इतना लगा कि पुछो मत और अंदर से सिर्फ़ एक ही आवाज़ आ रही थी कि "बस एक बार इन सबसे छुटकारा मिले ,उसके बाद तो दारू का नाम तक नही लूँगा...."

"इन तीनो को थाने लेजा कर बंद कर दो, जीईसी कॉलेज के लड़के लगते है..."

इतना बोलकर एस.प. अंदर खिसक लिया और 5 मिनिट के अंदर पोलीस जीप ने हमे लेजा कर जैल के अंदर पटक दिया.....
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मेरे बर्तडे के दिन मेरी ऐसी दुर्गति होगी मैने सोचा तक नही था...हमे सलाँखों के पीछे फेक दिया गया वो भी बिना किसी कंबल और रज़ाई के....ठंड तो इतनी थी कि यदि दुनिया की सबसे हॉट लौंडिया भी हमारे सामने नंगी खड़ी हो जाए तो ठंड के मारे लंड तक खड़ा ना हो....वैसी ठंड मे मैं और मेरे दोस्त पूरी रात पोलीस स्टेशन मे बंद रहे....

कुच्छ शराब के नशे का असर था तो कुच्छ हमे पड़ी मार का असर था, जिसके कारण मेरी पलकें भारी होकर घंटे-दो घंटे मे बंद हो गयी....वरना ऐसी ठंड मे तो मैं हफ़्तो तक नही सो पाता.....
.
बचपन मे मैं एक जादू हर रोज देखा करता था...मैं जब बहुत छोटा था तब मैं अक्सर रात को टी.वी. देखते हुए या तो सोफे पर सो जाता था या फिर अपने भाई के साथ खेलते हुए नीचे ज़मीन पर ही सो जाता था, लेकिन जब दूसरे दिन सुबह मेरी आँख खुलती तो मैं बिस्तर मे पड़ा होता....उस वक़्त मैं इसे एक मॅजिक मानता था लेकिन जैसे-जैसे बड़ा हुआ तो सब कुच्छ समझने लगा.दरअसल वो कोई मॅजिक नही था वो तो मेरे मम्मी-पापा थे जो मुझे उठाकर बिस्तर पर सुला देते थे...

और आज जब मेरी आँख ठंड मे मरते हुए बंद हो रही थी तो मैं बचपन का वो जादू फिर से देखने की चाहत मे था. मैं चाहता था कि अगली सुबह जब मेरी आँख खुले तो मैं यहाँ जैल मे ना होकर अपने बिस्तर पर रहूं और उठते ही अपना सर खुजा कर अपनी माँ से इस बारे मे पुछु कि"मैं इधर कैसे आया...."
.
दूसरे दिन वो मॅजिक तो नही हुआ, जो बचपन मे अक्सर होता था,लेकिन पता नही रात को किसी ने मेरे उपर कंबल डाल दी थी...दूसरे दिन जब मेरी आँख खुली तो समय का कोई अता-पता नही था, बस इतना मालूम था कि सूरज निकल चुका है....

मैं उठकर बैठ गया और अरुण, सौरभ की तरफ देखा....फिर जैल की सालाँखों की तरफ देखा और याद करने लगा कि कल रात आक्चुयल मे हुआ क्या था...

कल रात की घटना याद करते ही मेरे हाथ-पैर फूल गये, सर चकराने लगा...कुच्छ समझ मे ही नही आ रहा था कि क्या करू, किससे क्या बोलू...जिससे हम सब वहाँ से निकल सके....

मैं,अरुण और सौरभ वैसे थे तो एक ही जगह, लेकिन होश मे आने के बहुत देर बाद तक लगभग घंटे भर बाद तक हम तीनो मे से कोई कुच्छ नही बोला...हम तीनो सिर्फ़ एक-दूसरे का मुँह ताक रहे थे...
.
"तुम मे से कोई एक बाहर आओ...साहब को बात करनी है..."सलाँखो के दूसरी तरफ से हवलदार ने गेट खोला और हमसे बोला....

"अरमान तू जा और जाते ही पैर पकड़ लेना...."सौरभ ने अपना कंबल समेट कर मुझसे कहा...

सौरभ के बोलते ही मैं कंबल से बाहर निकला और हवलदार के पीछे-पीछे जाने लगा....हवलदार मुझे सीधे पोलीस स्टेशन के बाहर ले गया और जब मैने आस-पास देखा तो समझ गया कि ये हमारे कॉलेज के पास वाला पोलीस स्टेशन है....

बाहर धूप की छान्व मे दो कुर्सिया रखी हुई थी ,जिसमे से एक पर डांगी जी बैठ कर चाय की चुस्किया ले रहे थे और दूसरी कुर्सी शायद मेरे लिए थी....हवलदार के पीछे चलते हुए मैं डांगी के पास पहुचा और सर झुका कर खड़ा हो गया...डांगी ने हवलदार को वहाँ से जाने के लिए कहा और मुझे अपने सामने वाली चेयर पर बैठने का इशारा किया....

"कल रात मैने इन्हे कंबल देने के लिए कहा था...इन्होने कंबल दिया था क्या..."

"ह..."

"क्या..."

"ह..हा..हां...दिया था.."

"किस कॉलेज मे पढ़ते हो..."

"जीईसी...जीईसी मे..."

"कल रात क्या हुआ था..."

मैने पहली बार एस.प. की तरफ देखा और बोला"सर, 2 मिनिट दीजिए...याद करके बताता हूँ..."

जवाब मे डांगी जी चाय की सिर्फ़ चुस्किया लेते रहे...वैसे तो मुझे पूरा याद था कि कल रात क्या हुआ था...लेकिन एस.पी. के सामने मैं ऐसे ही कुच्छ भी बोलने का मतलब था कि खुद के गले मे फाँसी का फँदा फसाना....इसलिए मैने उनसे दो मिनिट का समय माँगा ,ये सोचने के लिए कि मुझे क्या बोलना चाहिए.

दो मिनिट का बोलकर मैं पूरे 5 मिनिट तक चुप बैठा रहा.तब तक डांगी जी की चाय भी ख़त्म हो चुकी थी और वो अब मेरी तरफ ही देखे जा रहे थे.....

"ज़य माँ काली, जय भद्रा काली...हर-हर महादेव...."अंदर ही अंदर भगवानो के नाम का उच्चारण करते हुए मैने बोलना शुरू किया"कल मेरा बर्तडे था, इसलिए हम लोग पार्टी मनाने एक होटल गये थे..."

"बर्तडे था...ओह, हॅपी बर्तडे..."

"थॅंक यू सर..."एस.पी. ने जब मुझे बर्तडे विश किया तो मेरे दिल की घबराहट और जीभ की लड़खड़ाहट थोड़ी कम हुई, बोले तो अपुन थोड़ा रिलॅक्स फील करने लगा क्यूंकी एस.पी. अपुन को एक अच्छा इंसान लगा...मैने आगे कहा"तो जब हम लोग पार्टी करके आ रहे थे तो गाड़ी मेरा दोस्त पांडे चला रहा था और उसकी आँख लग गयी,जिसके कारण बाइक सीधे आपके बंग्लॉ के गेट से टकरा गयी..."

ये बोलने के तुरंत बाद मुझे राजश्री पांडे का ख़याल आया, क्यूंकी वो बाइक और गेट के बीच हुई टक्कर के बाद से मुझे नही दिखा था....

"साले का कहीं उपर का टिकेट तो नही कट गया...."मैने सोचा और इनोसेंट सी शक्ल बनाते हुए डांगी जी से पुछा कि मेरा चौथा साथी कहाँ है...

"वो बेहोश हो गया था ,अभी फिलहाल ठीक है..."

"वो है कहाँ...."

"हॉस्पिटल मे...कल रात ही मैने उसे हॉस्पिटल मे अड्मिट करवा दिया था..."

"बहुत भलामानुस पोलीस अधीक्षक है यार...खम्खा मैं इसे गाली देता रहता था..."जब मुझे पता चला कि डांगी ने पांडे जी को हॉस्पिटल मे अड्मिट करा दिया है तो मैने सोचा और एस.एल. डांगी के लिए इज़्ज़त मेरे दिल मे अपने आप आ गयी....
डांगी जी ने चाय ख़त्म करने के बाद एक हवलदार को अपने पास बुलाया..

"इन तीनो का नाम, पर्मनेंट अड्रेस,मोबाइल नंबर लेकर इन्हे जाने दो और कोई केस फाइल मत करना...."अपनी जगह पर खड़े होते हुए उन्होने कहा"और हां, इनकी बाइक भी छोड़ देना, स्टूडेंट है...ज़ुर्माना शायद ना भर पाए..."
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12-15-2018, 01:36 AM,
RE: Porn Hindi Kahani दिल दोस्ती और दारू
एस.पी. के मुँह से ऐसे अल्फ़ाज़ सुनकर मेरा दिल किया कि अभिच खुशी से नाचू लेकिन मेरा नाच देखकर कही एस.पी. का मूड सटक गया तो प्राब्लम हो सकती है...इसलिए मैं चुप-चाप खड़ा और बस चुप-चाप खड़ा ही रहा,लेकिन मैने डिसाइड कर लिया कि बिना किसी मुसीबत के छूटने के कारण आज रात जोरदार दारू पिएँगे.... 


एस.पी. सर ने इसके बाद मुझसे कुच्छ नही कहा और वहाँ से जाने लगे...उन्हे जाता देख मुझे ख़याल आया कि थॅंक्स तो कहना ही चाहिए,क्यूंकी यदि कोई दूसरा पोलीस वाला होता तो 20-25 हज़ार घुसते और घर मे खबर भी पहुच जाती...लेकिन ऐसा कुच्छ भी नही हुआ था,इसलिए मैं डांगी जी का शुक्रिया अदा करने के लिए उनके पीछे दौड़ा.....
"थॅंक यू ,सर...वरना मुझे लगा था कि आज तो गये काम से..."

जवाब मे एस.पी. ने सिर्फ़ एक फीकी सी मुस्कान दी और आगे बढ़ गये...

"इस मेहरबानी की कोई खास वजह ,सर..."

"वजह..."उसी फीकी मुस्कान के साथ एस.पी. पीछे पलटे और होंठो को चबाते हुए बोले"तुम्हे पता नही होगा, पर तुम्हारे जितना बड़ा मेरा भी एक लड़का था.पिछले साल उसके बर्तडे पर वो मेरे पास आया और मुझे बोला कि 'डॅड, मुझे आज रात बर्तडे सेलेब्रेट करने के लिए कुच्छ पैसे चाहिए'...उसे जितने रुपये चाहिए थे,मैने उसे दिए जबकि मुझे मालूम था कि वो मेरे दिए हुए रुपयो को सिर्फ़ शराब मे उड़ा देगा....वो अपने बर्तडे की रात मुझे 'आइ लव यू,डॅड' बोलकर गया और फिर कभी वापस नही आया...."बोलते हुए डांगी जी अचानक रुक गये....उनके रुकने का कारण मैं समझ गया कि आगे क्या हुआ होगा...लेकिन मैं उनसे क्या बोलू ,ये मेरी समझ के बाहर था...क्यूंकी ऐसी सिचुयेशन की मैने कभी कल्पना तक नही की थी और ना ही मेरे पास ऐसी सिचुयेशन के लिए कोई रेडीमेड डाइलॉग थे...इसलिए मेरे पास सिवाय चुप रहने के कोई दूसरा रास्ता नही था....
.
"मेरा बेटा ,वापस नही आया क्यूंकी उसने बहुत शराब पी रखी थी और वापस आते वक़्त उसकी बाइक किसी भारी वाहन से टकराई थी...वो टक्कर इतनी भयानक थी कि जब तक मैं वहाँ पहुचा,मेरा बेटा मर चुका था..."एस.पी. बोलते-बोलते फिर चुप हो गये और रुमाल निकालकर अपने आँखो मे रख लिया...
और मैं पहले की तरह अब भी बेजुबान सा वही ,उनके पास खड़ा था...उन्होने आगे कहा...
"मेरे बेटे के साथ-साथ बाइक पर दो और लड़के थे और वो दोनो भी नही बचे... रिपोर्ट के बाद पता चला कि शराब सिर्फ़ मेरे बेटे ने पी रखी थी,बाकी दोनो व्यर्थ मे ही अपनी जान गँवा बैठे...अब शायद तुम समझ गये होगे कि मेरी इस मेहरबानी की क्या वजह थी...मैं चाहता तो कल रात ही तुम सबको छोड़ सकता था लेकिन मैने तुम्हे अंदर किया जिसका कारण ये था कि तुम लोग बिल्कुल भी होश मे नही थे और मैं नही चाहता था कि कोई और दुर्घटना तुम्हारे साथ हो....बेटा, ज़िंदगी मिली है मौज़-मस्ती करने के लिए ना की नरक बनाने के लिए....चलता हूँ..."
.
एस.पी. तो वहाँ से चले गये लेकिन उनके शब्द मेरे कान मे बहुत देर तक गूंजते रहे और मैं बिना किसी होश-हवास के वहाँ तब तक खड़ा रहा ,जब तक की अरुण और सौरभ ने मुझे आवाज़ नही दी....

"ये तो कमाल हो गया बे..एस.पी. ने तीनो को ऐसे ही छोड़ दिया...या तो मैं किसी दूसरे देश मे आ गया हूँ ,जहाँ दारू पीकर गाड़ी चलाना और पोलीस वाले को गाली देना अपराध नही माना जाता या फिर इस देश का क़ानून बदल गया है,जिसकी भनक मुझे नही लगी है...."

"देश भी वही और क़ानून भी वही है..." आगे चलते हुए मैने कहा...
.
पोलीस स्टेशन से बाहर निकलने के बाद हमे पता चला कि हम तीनो के कपड़े जगह-जगह से फट चुके है और बॉडी मे इधर-उधर थोड़ी बहुत छोटे भी है....अरुण नवीन की ख़टरा हो चुकी बाइक को सड़क पर रेंगते हुए मेरे साथ चल रहा था और सौरभ हमारी कल की फूटी किस्मत पर सोच विचार करते हुए थोड़ा पीछे चल रहा था....

हमारी किस्मत कल रात तो फूटी ही लेकिन साथ मे हमारा एक और चीज़ भी टूट-फुट कर बिखर चुका था और वो चीज़ था हमारा जेब....कहने का मतलब कि कल रात जितना उड़ाया उसका तो कोई हिसाब नही था लेकिन नवीन की बाइक का पांडे जी ने जो हशरा किया था उसे देख कर तो गला सूख रहा था और पॅंट गीली हो रही थी....

"ले अरमान ,अब तू नवीन की बाइक लुढ़का...मैं थक गया "

"हाओ लवडा...जैसे मैं ग्लूकोस की दस-बारह बोतल चढ़ा कर आया हूँ...चुप चाप बाइक ले चल..."बोलकर मैं अपनी कॅल्क्युलेशन करने लगा कि नवीन की बाइक कितने मे बन जाएगी...
.
हाइवे पर मैं ,अरुण आगे चल रहे थे और सौरभ हमसे पीछे चलते हुए कुच्छ सोच रहा था...कि तभी उसके मुँह से कुच्छ शब्द सुनाई दिए.

"गुलाबी आँखे जो तेरी देखी, दीवाना ये दिल हो गया...

सम्भालो मुझको ओ मेरे यारो...."

"ओये अरमान, ये लवडा कही सटक तो नही गया...थाने से ही इसके चल चलन मुझे कुच्छ ठीक नही लग रहे..."अरुण ने अपनी स्पीड थोड़ी बढ़ाई और मेरे पास आकर बोला...

"कुच्छ नही हुआ, गुलाबी ड्रेस पहन कर एक लौंडी स्कूटी से गुज़री है ,उसे ही देख कर गला फाड़ रहा है..."

"चल ठीक है लेकिन आज के बाद तूने यदि दारू का नाम भी लिया तो तुझे चखना बना गप्प कर जाउन्गा , साला एस.पी. बढ़िया लौंडा था,इसलिए ऐसिच ही छोड़ दिया वरना कोई दूसरा होता तो लॉलिपोप थमा देता..."

"अबे ,एस.पी. फॅन है मेरा...इसलिए छोड़ दिया,वरना तेरे जैसे झाटु के तो सीधे मुँह मे लंड देता....चल पापा बोल..."
.
इसके बाद हम जब तक हॉस्टिल नही पहुच गये तब तक अरुण चुप ही रहा...लेकिन हॉस्टिल के बाहर नवीन की ठुकी हुई बाइक को खड़ा करने के बाद उसने जोरदार अंगड़ाई ली और बोला..."चल मूत कर आते है..."

"मैं भी यहिच बोलने वाला था ,चल...."मैने कहा..

"रूको बे, मेरा भी मूड है..."

इसके बाद हम तीनो हॉस्टिल से थोड़ी दूर झाड़ियो की तरफ गये और पॅंट खोलकर खड़े हो गये और वहाँ इधर-उधर पड़े पत्थरो पर फव्वारा मारकर हॉस्टिल के अंदर आए....

जिस वक़्त हम तीनो हॉस्टिल पहुँचे उस वक़्त तक़रीबन 12 बज चुके थे ,इसलिए डिसाइड किया कि अब सीधे लंच के बाद की क्लास अटेंड करेंगे.आज की आंकरिंग की प्रॅक्टीस तो छूट चुकी थी और मैं मन ही मन यही विनती कर रहा था कि छत्रपाल नाराज़ ना हो...इसके साथ मेरे मन मे और भी काई बाते चल रही थी, जैसे की पांडे जी को हॉस्पिटल से उठा कर लाना है, नवीन की बाइक चुद चुकी है..उसे इसकी इन्फर्मेशन भी देनी है, नवीन गुस्सा ना करे, इसका भी प्लान सोचना है...और तो और तुरंत 10-12 हज़ार का इंतज़ाम करना,जिससे की नवीन कि बाइक को ठीक करवाया जा सके....

"अबे तुम दोनो ऐसे क्यूँ पड़े हो, कॉलेज नही जाना क्या..."बाथरूम से नहा-धोकर मैं अपने रूम मे आया और अपने दोनो प्रिय मित्रो को बिस्तर पर औधा लेटा देख मैं भूंभुनाया....

"हिम्मत नही है ,तू जा कॉलेज..."

"इतने मे ही गान्ड फट गयी, फलो तुम देश की सेवा क्या करोगे..."

"नही करनी देश की सेवा और अब तू कट ले इधर से..."
.
अरुण और सौरभ तो हॉस्टिल मे जाते ही सो गये और मैं सीधे कॅंटीन जा पहुचा...कॅंटीन मे हर दिन की तरह आज भी मस्त भीड़ थी...मस्त भीड़ मतलब ,हर दिन के तरह आज भी वहाँ एक दम करारी माल थी ,जो मज़े ले-ले कर...ले-ले कर अपना पेट भर रही थी....मेरे जेब मे पैसे तो थे नही ,इसलिए फ्री मे खाने की सेट्टिंग करने मैं सीधे काउंटर वाले के पास गया और उसे मनाया ,बड़ी मुश्किल से जब कॅंटीन वाला मान गया तो मैने सीधे ही 4 समोसे का ऑर्डर दिया और एक खाली टेबल पर आकर चुप-चाप बैठ गया....

कल के हुए कांड से मेरा दिमाग़ हिल चुका था और दिमाग़ के हिलने के कारण एक चीज़ जो मैने गौर की वो ये कि आज मैने कॅंटीन मे बैठी किसी भी लड़की को देखकर मन ही मन मे...'रंडी..चुड़ैल..लवडी...चुदा ले...' जैसे शब्दो का प्रयोग नही किया...जबकि बाकी दिन मैं कॉलेज की किसी लड़की को बस देख लूँ मेरे मन का स्पीकर बस शुरू ही हो जाता था,लेकिन आज वो स्पीकर साइलेंट था....ये साला मुझे हो क्या गया है...मेरे मुँह से गाली क्यूँ नही निकल रही..
.
"अरमाआं....आज तुम ऑडिटोरियम मे क्यूँ नही आए..."मुझ पर चीखते-चिल्लाते हुए एक लड़की ,जिस जगह मैं बैठा था, वहाँ पर खड़ी होकर बोली....

"कौन है बे तू...मेरा मतलब कौन है आप..."

"दिमाग़ हिल गया है क्या..."वो लड़की जो खड़ी थी वो मेरे सामने वाली चेयर पर विराजमान होते हुए बोली

"एक मिनिट..."बोलते हुए मैने अपने सर पर एक मुक्का मारा और उस लड़की की तरफ देख कर बोला"एश ,हाई..."

"याद आ गया कि मैं कौन हूँ..."

"भूला ही कब था जो याद करने की ज़रूरत हो...वो तो इस समय मेरे दिमाग़ मे ढेर सारे एमोशन्स और फीलिंग्स चल रहे है, इसलिए ज़ुबान थोड़ी फिसल गयी...."

"तुम इतने लापरवाह कैसे हो...आज तुम्हारी वजह से छत्रपाल सर ने मुझे बहुत डाँट सुनाई..."

"एश...दिल पे मत लेना लेकिन अभी फिलहाल तुम यहाँ से पतली गली पकड़ लो..मतलब कि यहाँ से चली जाओ...क्यूंकी मेरा 1400 ग्राम के दिमाग़ मे ऑलरेडी 1400 किलो का लोड है..."

"मैं कहीं नही जा रही और ना तुम कहीं जा रहे हो...मुझे तुमसे बहुत ज़रूरी बात करनी है... "

एश के ऐसा बोलते ही मैं थोड़ा एग्ज़ाइटेड हो गया और सोचने लगा कि कही एसा मुझे आइ लव यू तो नही बोलने वाली .

"मेरी ,दिव्या से लड़ाई हो गयी आज..."

"ओह ग्रेट...."इतना सुनते ही मैं बीच मे बोला..

"क्या "

"मेरा मतलब था टू बॅड, वो तो ऐसे ही ज़ुबान फिसल गयी...तुम आगे बोलो "

"फिर उसने कहा कि वो मुझसे कभी बात नही करेगी..."

"मिंडबलविंग न्यूज़ है ये तो..."

"आआययईए "

"मेरा मतलब कि माइंड-डिस्टर्ब करने वाली न्यूज़ है ये...वो तो मेरी ज़ुबान फिसल गयी...वैसे मुझे बहुत दुख हुआ ये सुनकर...क्या बताऊ एक दम से रोना आ रहा है, वो तो मैं ही जानता हूँ कि मैने कैसे अपने मोती जैसे आँसुओ को रोक कर रखा है...तुम आगे बोलो"(अबे आइ लव यू ,अरमान बोल...बिल्ली )
.
इसके बाद एश ने जो पकाना शुरू किया ,उससे मुझे जोरदार नींद आने लगी , मैने कयि बार जमहाई भी मारी और एक-दो बार तो खुली आँख से झपकी भी मार ली....
.
"लेकिन तुम ये सब मुझे क्यूँ बता रही हो... "

"मेरे क्लास की बाकी लड़किया मुझे आरोगेंट समझती है और वो सब दिव्या की तरफ है..."एमोशनल होते हुए दिव्या ने मेरी तरफ देखा और मुझसे पुछा"क्या मैं आरोगेंट हूँ... "

"हां..."

"क्या "

"मेरा मतलब ना था,वो तो ज़ुबान फिसल गयी..."एश से पीछा छुड़ाने के लिए मैं खड़ा हुआ और वहाँ से चलने का सोचा...लेकिन फिर सोचा की ऐसे ही खाली-पीली जाने मे मज़ा नही आएगा ,इसलिए कोई डाइलॉग मार कर जाना चाहिए....गॉगल मेरे आँख मे पहले से ही लगा हुआ था ,इसलिए मैने सिर्फ़ डाइलॉग के अकॉरडिंग अपने फेस के एक्शप्रेशन को चेंज किया और बोला...

"इतना उदास होने की ज़रूरत नही है क्यूंकी तूफ़ानो से हमेशा पेड़ नही गिरते, कभी-कभी तूफान पेड़ की जड़े मज़बूत भी कर देते है...अब चलता हूँ "

कॅंटीन से निकल कर मैं सीधे अपनी क्लास की तरफ बढ़ा और मेरी मुलाक़ात आराधना से हुई...उसके साथ उसकी कुच्छ फ्रेंड्स भी थी . कयडे के मुताबिक़ मुझे आराधना को इग्नोर मारकर सीधे क्लास की तरफ बढ़ना चाहिए था और आराधना को चुप-चाप निकल लेना चाहिए था. मैं तो क़ायदे मे ही रहा लेकिन आराधना को पता नही क्या खुजली थी, जो ठीक मेरे सामने हिलती-डुलती मुस्कुराती हुई खड़ी हो गयी....
"गुड आफ्टरनून सीईईईइइर्ररर....हिी"
(ये ऐसी सेक्सी-सेक्सी आवाज़ निकाल कर साबित क्या करना चाहती है )

मुझे देखकर आराधना मुस्कुरा तो रही ही थी,साथ मे उसकी सहेलिया भी अपना बिना ब्रश किया हुआ दाँत मुझे दिखा रही थी...

''अबे इनको हुआ क्या है, कहीं मेरी ज़िप तो नही खुली है '' मन ही मन मे ऐसा सोचकर मैने नीचे देखा ,ज़िप बंद थी...

"हाई सर..."मेरे चुप रहने के कारण आराधना एक बार फिर बोली....

"बाइ मॅम...."बोलते हुए मैं तुरंत वहाँ से आगे बढ़ गया ,क्यूंकी मुझे आराधना की शक्ल देखकर ही मालूम चल गया था कि वो बहुत पकाने वाली थी....

इस समय मेरे अंदर कयि सारे सोच विचार चल रहे थे और जैसे ही मैं गेट के पास पहुँचा, मेरा मोबाइल भी बज उठा...मैने मोबाइल निकाला, कॉल बड़े भैया की थी,लेकिन मैने कॉल डिसकनेक्ट करके मोबाइल को साइलेंट मे किया और क्लास के अंदर एंट्री मारी.....
.
"कैसे उतर गया नशा..."मेरे बैठते ही सुलभ ने मुझसे पुछा...

"मत पुछ भाई, सारी रात पोलीस स्टेशन मे गुज़ार कर आ रहे है, नवीन की बाइक का रेप हो चुका है और मैं इस वक़्त बहुत सारी उलझन मे फँसा हुआ हूँ...और तो और मुझे आल्बर्ट आइनस्टाइन को लेकर आराधना को चोदने की जो कसम खाई थी उसे भी पूरा करना है ,साथ मे छत्रपाल की लाइन्स भी याद करनी है....लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत अभी ये है कि साला 10-12 हज़ार का जुगाड़ कहाँ से करू....तेरे पास हो तो उधारी दे ना..."

"बिल गेट्स की औलाद समझ कर रखा है क्या...जो तूने इधर माँगा और मैने तुझे उधार दे दिया...."

"चल कोई बात नही,शाम तक कुच्छ ना कुच्छ तो सोच ही लूँगा, अभी तो ये बता की सीएस ब्रांच मे कोई तेरे जान-पहचान वाला लड़का है क्या, जो भरोसेमंद हो..."

"नही है..."बिना एक पल गँवाए सुलभ ने जवाब दिया...
.
सुलभ अपना एक हाथ डेस्क पर रखकर अपना थोबड़ा उस हाथ पर टिकाए हुए था और जब उसने एक सेकेंड सोचे बिना ही ना मे जवाब दे दिया तो मेरा पूरा खून जल गया और मैने उसका वो हाथ,जो डेस्क पर रख था उसे पकड़ कर हिला दिया जिसके बाद सुलभ के सर और डेस्क का एक प्यारी आवाज़ के साथ अद्भुत मिलन हुआ.

"अब बोल ,है कोई पहचान का..."

"एक मिनिट रुक..सोचने दे.."अपने सर को सहलाते हुए सुलभ ने कहा..."एक लौंडा है , नाम है अवधेश गिलहारे...सीएस का बंदा है और एक दम भरोसेमंद है...वैसे काम क्या है..."

"टॉप सीक्रेट, तू आज शाम को मेरी मीटिंग फिक्स कर दे,..."

"मीटिंग फिक्स करने पर मुझे क्या मिलेगा "

"लंड मिलेगा ,चाहिए... बोल तो अभी दे दूं..."
.
जैसा शक़ मुझे कॅंटीन मे हो रहा था ,उस शक़ का कीड़ा क्लास मे भी मेरे अंदर पैदा हुआ....मैने क्लास की लड़कियो को देखा और सोचा कि अभिच मैं इन्हे महा भयंकर गालियाँ दूँगा...एक-दो को गाली दी भी..लेकिन फिर मुझे खुद बुरा लगा कि मैं क्यूँ इन्हे फालतू मे गालियाँ दे रहा हूँ...बेचारी कितनी अच्छी है.दूसरे ब्रांच की लड़कियो की तरह ये कम से कम भाव तो नही खाती वो बात अलग है कि इन्हे कोई भाव नही देता......कॉलेज के दूसरी लड़कियो की तरह ये किसी लड़के का जेब भी नही मारती...कितनी सुशील, संस्कारी, मेहनती, बलवान ,पहलवान लड़किया है.हम मेकॅनिकल वालो को तो गर्व होना चाहिए कि हमारे क्लास मे इतनी शक्तिशाली नारियाँ है. 

अपने क्लास की नारी शक्ति का दिल ही दिल मे प्रशंसा करते हुए मैं उन्ही नारियों की तरफ होंठो मे मुस्कान लिए देख भी रहा था कि एक नारी की नज़र मुझ पर पड़ी और मुझे मुस्कुराता हुआ देख, उसने बहुत धीरे से कुच्छ कहा और यदि मैने उस नारी की लिप रीडिंग सही की थी तो उसके अनुसार वो नारी मुझे "कुत्ता,कमीना, बेशरम..." कह रही थी

"अबे तेरे को गाली दे रही है क्या..."

"हां..."

"क्यूँ ?"

"क्यूंकी ,दा क्वालिटी आंड क्वांटिटी ऑफ दा 'ग्र'(गिविंग रेस्पेक्ट) ईज़ नोट प्रपोर्षनल टू दा 'ट्र'.दा वॅल्यू ऑफ ट्र ईज़ डाइरेक्ट्ली डिपेंड्स अपॉन दा हमान फॅक्टर.विच ईज़ डिनोटेड बाइ 'ह'. "

"बस भाई रहने दे...सब समझ गया..."
.
कॉलेज के बाद मैने नवीन को कल की घटना के बारे मे सब कुच्छ बता दिया.पहले-पहल तो नवीन की गान्ड ही फट गयी और पेलम पेल गुस्से के साथ मुझसे भिड़ने को तैयार हो रहा था लेकिन जब मैने उसे आश्वासन दिया की मैं उसकी बाइक एक हफ्ते के अंदर पहले की माफ़िक़ चका चक करवा दूँगा तो वो कुच्छ ठंडा हुआ और मुझे ढेर सारी वॉर्निंग देकर चलता बना....

कल की बर्तडे पार्टी मे मैने क्या पाया ये तो मालूम नही लेकिन नवीन अब मेरे साथ कभी भी किसी पार्टी मे नही जाएगा, ये उस वक़्त मुझे यकीन हो चुका था,फिर चाहे वो वेलकम या फेरवेल पार्टी ही क्यूँ ना हो...क्यूंकी वो महा-फेमस कहावत है ना कि 'दूध का जला छाछ भी फूक फूक कर पीता है '
.
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