Porn Hindi Kahani वतन तेरे हम लाडले
06-07-2017, 02:19 PM,
#21
RE: वतन तेरे हम लाडले
गोवा में सबने काफ़ी मस्तियाँ की सिर्फ़ रश्मि को छोड़कर क्योंकि राज के बगैर रश्मि को सब फीका और बेकार लगता था कभी वो सोचती कि उसे जय आदि के साथ आना ही नही चाहिए था . दो दिन गोआ में बिताकर जय ने कश्मीर जाने का प्लान बनाया सही मायने में ये सब करने के डॉली ने ही जय पर दवाब डाला था खैर जो भी हो अगले दिन प्लेन से वो जम्बू पहुँचे और फिर वहाँ से कश्मीर आ गये . और सफ़र में इतना थक चुके थे पूरी रात घोड़े बेच कर सोए .



सुबह सबसे पहले डॉली जगी और उसने सब उठाया और कहा कि जल्दी से तैयार हो जाएँ नाश्ते के बाद घूमने चलना है 
रश्मि ने उनके साथ जाने से फिर इनकार कर दिया और कहा कि आप लोग घूम आइए मैं यही रहूंगी . जय ने भी रश्मि की हालत को महसूस करके ज़्यादा ज़िद नही की . और कुछ देर बाद तीनों सैर के लिए निकल चुके थे जबकि रश्मि अपने हट में ही मौजूद रही। कुछ देर खाली बैठे बैठे जब वो बोर हो गई तो उठ कर बाहर निकल आई और हट की एक साइड पर मौजूद पेड़ों के बीच चलती हट से एक दूर निकल आई। यहाँ पहाड़ की हल्की सी ढलान थी और एक उपयुक्त जगह देख कर कर रश्मि बैठ गई। यहाँ से बहुत सुंदर दृश्य देखने को मिल रहा था। रश्मि इस नज़ारे को एंजाय करने लगी, हल्की हल्की ठंड के कारण रश्मि ने एक शाल भी ओढ़ रखी थी। 

जबकि दूसरी ओर डॉली और जय चेयर लिफ्ट पर बैठे एंजाय कर रहे थे और उनसे पिछली चेयर पर पिंकी अकेली बैठी थी। पिंकी ने ब्लू कलर की जींस पहन रखी थी उसके साथ एक टाइट टी शर्ट थी और ऊपर से एक ब्राउन कलर का मोटा और गर्म ऊपरी पहन रखा था। बालों को गठबंधन करके एक टट्टू डाली हुई और लांग बूट पहने पिंकी बहुत सुंदर लग रही थी। गोरा चेहरा और पिंक पिंक गालों वाली पिंकी को अब तक कई लड़के देखकर देखते ही रह गए थे, जो भी देखता वो अपनी नज़रें हटाना भूल जाता। चेयर लिफ्ट से उतरते हुए जय ने पिंकी को सहारा दिया और फिर तीनों केबल कार पर बैठकर गुल मर्ग पहुंचे और वहां बर्फ से खेलने लगे। वहाँ कुछ और परिवार भी आए हुए थे और कुछ कॉलेज के समूह भी थे। 

डॉली जय के साथ अकेले इस जगह पर एंजाय करना चाहती थी मगर पिंकी की वजह से वह कुछ उखड़ी-उखड़ी थी। लेकिन फिर अचानक ही एक लड़की ने पिंकी को देखकर चीख मारी और भागती हुई हाथ फैलाकर पिंकी की ओर आई पिंकी ने उसे देखा तो वह भी खुशी से निहाल हो गई और आने वाली लड़की से गले मिलने लगी। पिंकी ने गले मिलते ही लड़की से पूछा कि तुम यहाँ कैसे ??? तो उसने बताया तुम भूल गई, तुम्हें बताया तो था कि हम लोग भी कश्मीर आएंगे। मम्मा पापा और भाई के साथ कल रात ही यहां पहुंची हूं। 

ये पिंकी की विश्वविद्यालय के समय की दोस्त मिनी थी। इन दोनों की बहुत अच्छी दोस्ती थी और इस दोस्ती का असली कारण मिनी का भाई रोहित था जिसे सब प्यार से आरके कह कर बुलाते थे। आरके पिंकी को पसंद करता था और दोनों की बहुत अच्छी दोस्ती थी। पिंकी भी आरके पसंद करती थी और उससे शादी करना चाहती थी मगर अब तक आरके ने पिंकी की माँ से कोई बात नहीं की थी इस बारे में। मिनी और पिंकी अब बातें करने में व्यस्त थे कि आरके भी वहां पहुंच गया और पिंकी को देखकर बहुत खुश हुआ, उसने भी पिंकी से हाथ मिलाया और बोला तुम तो आज बड़ी प्यारी लग रही हो ... पिंकी ने इठलाते हुए कहा यह कौन सी नई बात है, मैं तो हमेशा ही प्यारी लगती हूँ। यह सुनकर मिनी भी हंसने लगी। फिर पिंकी ने दोनों का परिचय जय और डॉली से करवाया। 

मिनी ने जय से अनुमति ली कि वह पिंकी को अपने साथ लेजाए तो जय ने मना करना चाहा मगर डॉली ने उसे अनुमति दे दी। वह तो पहले ही पिंकी की मौजूदगी से परेशान थी क्योंकि हनीमून यात्रा पर भला बहन का क्या काम भाई के साथ। भाभी से अनुमति मिलते ही पिंकी मिनी के साथ चल पड़ी और जय को कह दिया कि वह भाभी के साथ ही वापस चले जाएं वो उन्हीं लोगों के साथ वापस पहुंच जाएगी डॉली ने भी जय का हाथ पकड़ा और दूसरी साइड पर चल दी जहां भीड़ थोड़ी कम थी वह एकांत में जय के साथ बैठकर इस रोमांटिक मौसम को एंजाय करना चाहती थी। वैसे भी मुम्बई वालों के लिए यह ठंडा मौसम भी बहुत अच्छा था।

पिंकी अब मिनी और आरके के साथ सैर करने लगी। पिंकी के दाईं ओर मिनी जबकि बाईं ओर आरके था जो रह रहकर पिंकी को छेड़ रहा था मगर पिंकी उसकी इन हरकतों का बुरा नहीं मान रही थी। क्योंकि वह भी आरके को पसंद करती थी। पिंकी ने दोपहर होने पर आरके और मिनी के मम्मी-डैडी के साथ ही खाना खाया और फिर वापस कश्मीर आ गए। शाम 5 बजे कश्मीर में ठंड का इज़ाफ़ा होगया था मगर पिंकी इस मौसम को एंजाय चाहता थी. आरके के मम्मी-डैडी जीपीओ चौक पर मौजूद होटल में अपने कमरे में चले गए जबकि पिंकी मिनी और आरके मॉल में मौसम को एंजाय और विंडो खरीदारी के लिए चले गए। अब पिंकी और आरके एक दूसरे का हाथ पकड़े मॉल में फिर रहे थे। आने जाने वाले भोंडे प्रकार के लड़के हसरत भरी निगाहों से आरके को देखते और उसकी किस्मत पर ईर्ष्या करते जो इतनी सुंदर लड़की के साथ फिर रहा था। 

तीनों काफी देर तक मॉल में फिरते रहे और तीनों ने मिलकर आयस्क्रीम भी खाई फिर आरके मिनी और पिंकी को लेकर प्रस्ताव राईड की ओर ले गया। मिनी ने तो मोशन राईड पर बैठने से साफ इनकार कर दिया जबकि पिंकी के चेहरे पर भी थोड़े डर के आसार थे मगर आरके के कहने पर वह अंदर चली गई और चेयर पर बैठकर सीट बेल्ट बांध ली। पिंकी ने चेयर पर हत्थे को मजबूती से पकड़ रखा था। पिक्चर शुरू हुई और चेयर में भी हरकत शुरू हो गई। शुरुआत में तो पिंकी पकड़ करके बैठी रही मगर जैसे ही सामने चलने वाली मूवी में ट्रेन पटरी से नीचे गिरी तो पिंकी को लगा कि जैसे उसकी अपनी चेयर भी हवा में उड़ने लगी है और वह अब नीचे गिर जाएगी, वह तुरंत ही चेयर के हत्थे को छोड़ के साथ वाली चेयर पर बैठे आरके कंधों पर हाथ रख लिए और उसे कसकर पकड़ लिया, 

पिंकी की यह हालत देखकर आरके हंसने लगा जबकि पिंकी की चीखें ही खत्म नहीं हो रही थीं, वह तो अब सामने लगी स्क्रीन पर देख ही नहीं रही थी जबकि उसकी चेयर अभी भी कभी उसको हवा में उड़ाती तो कभी पीछे से गिराती मगर उसने आरके को नहीं छोड़ा और मजबूती से उसे पकड़ कर बैठी रही। आरके ने भी एक हाथ पिंकी की कमर के चारों ओर लपेट लिया। और उसे कसकर पकड़ कर हौसला देने लगा। कुछ ही देर में मूवी खत्म हो गई और आरके ने सीट बेल्ट खोल दी। मगर पिंकी अब तक डरी हुई थी और वह आरके के साथ लिपटी हुई थी, आरके ने हाथ आगे बढ़ा कर उसकी सीट बेल्ट खोली और उसे नीचे उतरने में मदद की। पिंकी काँपते पैरों के साथ नीचे उतरी और आरके के सीने पर थप्पड़ मारते हुए बोली मैंने कहा था न मुझे नहीं बैठना इसमें मगर आप ने मेरी सुनी ही नहीं। आरके ने यह सुनकर एक ठहाका लगाया और बोला अरे मुझे क्या मालूम था कि मेरी पिंकी इतनी डरपोक है। यह कह कर उसने फिर से अपना हाथ उसके कंधे पर रख कर उसे अपने से करीब कर लिया। 

अब रात के 9 बजने वाले थे। इस दौरान जय ने 2 बार पिंकी को कॉल करके खैरियत मालूम की और पिंकी ने जय को संतुष्ट किया कि आप चिंता न करें मैं बिल्कुल ठीक हूँ। अब मिनी आरके और पिंकी वापस अपने होटल में आ चुके थे जहां उसके मम्मी डैडी आराम करने के बाद सैर करने निकल गए थे। अपने कमरे में आते ही मिनी बेड पर ढह गई। एक दिन की यात्रा और आज सारे दिन की सैर ने उसको थका दिया था। जबकि पिंकी की थकान आरके के साथ ने खत्म कर दी थी। अब पिंकी और आरके दोनों एक दूसरे के साथ सोफे पर बैठे बातें कर रहे थे। जबकि मिनी बेड पर आंखें बंद किए लेटी थी। शायद उसकी आंख लग गई थी। 

आरके ने पिंकी का हाथ पकड़ा और उसे अपने दोनों हाथ में लेकर उसे प्यार करने लगा जबकि पिंकी भी आरके के साथ बैठी और ज़्यादा पिंक हो गई थी। शर्म से उसके हल्के गुलाबी गाल अब पहले से अधिक गुलाबी हो चुके थे। आरके ने पिंकी का हाथ अपने हाथ में लिया और ऊपर उठा कर अपने होंठों के करीब लाकर उसके नरम नरम हाथ पर अपने होंठ रख दिए। और अपना एक हाथ पिंकी के कंधे पर रख कर उसे अपने पास कर लिया। पिंकी ने भी अपना सिर आरके के कंधे पर रख दिया। बहुत समय बाद उसे अपने प्रेमी के इतने करीब होने का मौका मिला था। जिससे पिंकी बहुत खुश थी।


पिंकी के हाथ पर प्यार करते हुए आरके ने हल्की आवाज में पिंकी के कान में फुसफुसाते करते हुए आई लव यू जान कहा, जिस पर पिंकी थोड़ा कसमसाई और जवाब में आई लव यू टू आरके को कहा। आरके ने पिंकी के चेहरे के नीचे अपना हाथ रख कर उसका चेहरा ऊपर उठाया और उसकी तरफ प्यार से देखने लगा। आरके को अपनी ओर यों देखते हुए पाकर पिंकी शर्म से लाल हो गई और अपनी नज़रें झुका लीं। जबकि आरके पिंकी की सुंदरता पर मरा जा रहा था। वह अपनी किस्मत पर रश्क कर रहा था। योंही पिंकी को देखते हुए वह थोड़ा आगे झुका और पिंकी के नरम गुलाबी होठों पर अपने होंठ रख दिए। अपने होठों पर आरके के होठों का स्पर्श पाते ही पिंकी को एक झटका लगा और वह वह पीछे हट गई और आरके को मना किया आरके प्लीज़ अभी यह सब ठीक नहीं। 

इस पर आरके बोला कि जान तुम इतनी सुंदर लग रही हो कि मुझसे रहा ही नही गया, तुम्हारे यह नरम गुलाबी होंठ मुझे अपनी ओर खींच रहे हैं और तुम्हारे इस सुंदर चेहरे को देख कर चाँद भी शर्मा रहा है ... अपनी तारीफ सुन कर पिंकी के चेहरे पर खुशी और शर्म के मिश्रित भाव थे जिन्होने 21 वर्षीय पिंकी की सुंदरता में और वृद्धि कर दी थी। कहते हैं महिला की शर्म और हया ही उसका असली हुश्न होता है। और विनय हया जब पिंकी जैसी सुंदर लड़की के चेहरे पर हो तो उसके हुस्न को चार चांद लग जाते हैं। यही वजह थी कि आरके बार बार पिंकी को अपने पास कर रहा था। उनके बीच कोई शारीरिक संबंध नहीं था मगर आज आरके का बस नहीं चल रहा था कि वह पिंकी को अपने सीने से लगाकर बहुत सारा प्यार करे। 

आरके ने एक बार फिर पिंकी के होंठों पर होंठ रख दिए, इस बार पिंकी ने भी आरके के होंठों पर अपने होंठ गोलाई में घुमाते हुए हल्के से चूम लिया जिस पर आरके बहुत खुश हुआ लेकिन फिर पिंकी तुरंत ही सोफे से खड़ी हो गई और आरके से कहने लगी कि वह उसे भाई के पास में छोड़ आए वहां उसकी भाभी अकेली होंगी। आरके अपनी जगह से खड़ा होकर पिंकी के सामने आकर खड़ा हो गया और सिर से पाँव तक पिंकी को देखने लगा, उसने जैसे ही पिंकी की बात सुनी ही नहीं थी। पिंकी कमरे में आकर अपना गर्म कोट उतार चुकी थी अब वह टाइट टी शर्ट और जींस पहने आरके के सामने खड़ी थी। जिससे पिंकी के शरीर के उभार बहुत स्पष्ट हो रहे थे।

पिंकी के 34 आकार के मम्मे टी शर्ट में फंसे थे और उसकी 32 की गाण्ड जींस में बहुत स्पष्ट दिख रही थी। पिंकी न केवल सुंदर चेहरे की मालिक थी बल्कि उसका नसवानी हुश्न भी देखने लायक था। आरके फिर पिंकी के पास आया और अपना हाथ उसकी कमर के चारों ओर लपेट कर उसको अपने पास कर लिया। पिंकी ने भी बिना कोई प्रतिरोध किए उसके पास आ गई मगर उसकी आँखें झुकी हुई थी, पिंकी के 34 आकार के गोल मम्मे आरके के सीने को छू रहे थे, आरके ने पिंकी के चहरे ऊपर उठाया और फिर से अपने होंठ पिंकी के होंठों पर रख दिए। इस बार पिंकी ने आरके का साथ देना शुरू किया तो आरके का हौसला बढ़ा और उसने पिंकी और भी अधिक मज़बूती के साथ अपने साथ लगा लिया और पिंकी के सुंदर गुलाब की पत्ती जैसे होठों को चूसने लगा। पिंकी ने भी अपना एक हाथ आरके की गर्दन पर रखा और उसके होंठों को चूसने लगी। दोनों एक दूसरे के होंठों से रस पी रहे थे। पिंकी के लिए यह सब कुछ नया था इसलिए उसे अपने होठों पर एक आदमी के होठों का स्पर्श बहुत प्यारा लग रहा था। 

कुछ देर होंठ चूसने के बाद अब आरके के होंठ पिंकी की सुराही दार गर्दन को चूम रहे थे और पिंकी अपना चेहरा ऊपर किए अपनी गर्दन पर आरके के होंठों के गर्म स्पर्श को महसूस कर के अपने होश गंवा रही थी। आरके का हाथ पिंकी की कमर से नीचे सरकता हुआ उसके चूतड़ों पर आकर रुका था। और अब हल्के हल्के उसके चूतड़ों को दबा रहा था। पिंकी ने अपने एक हाथ से आरके का हाथ अपने चूतड़ों हटाना चाहा मगर आरके ने पहले से अधिक मजबूती से उसके एक साइड के चूतड़ को पकड़ कर दबा दिया जिससे पिंकी के मुँह से एक सिसकी निकली। अब आरके पिंकी की गर्दन से होता हुआ उसके सीने तक आ गया था और अपने होंठों से पिंकी की सुंदर मलाई जैसी सफेद छाती पर प्यार कर रहा था। जबकि उसका दूसरा हाथ अब तक पिंकी के चूतड़ों पर था। पिंकी ने अपने एक हाथ से उसके बालों में प्यार करना शुरू कर दिया था जबकि आरके ने अपना दूसरा हाथ पिंकी के कूल्हे पर रख दिया और धीरे धीरे उसका हाथ ऊपर की ओर सरकता हुआ उसके पेट पर आ गया। पेट से होता हुआ उसका हाथ बूब्स के पास आया तो पिंकी ने तुरंत ही आरके को मना किया और उसका हाथ पकड़ कर ज़्यादा ऊपर जाने से रोक लिया। 

आरके भी ज्यादा ज़िद नहीं की और अपना हाथ पिंकी के मम्मों से कुछ नीचे रोक लिया मगर अब उसने अपने होंठ फिर से पिंकी के होंठों पर रख दिए थे और पिंकी अब पहले से अधिक तीव्रता से आरके के होंठों को चूस रही थी। यहां तक कि अब आरके की ज़ुबान पिंकी के मुँह के अंदर पिंकी की ज़ुबान को छू रही थी और पिंकी बीच-बीच में अपना मुंह बंद करके आरके की ज़ुबान को चूसने लगी। दोनों इस बात से अनजान थे कि मिनी सोई नहीं थी, बल्कि थकान की वजह से आंखें बंद किए लेटी थी, होंठ चूसने की आवाज को सुनकर मिनी ने आँखें खोलकर देखा तो उसका भाई उसकी बेस्ट फ्रेंड के होंठ चूसने में व्यस्त था और उसकी प्रेमिका भी उसके भाई के होठों का फुल मज़ा ले रही थी, यह देखकर मिनी हौले से मुस्कुराई और फिर आँखें बंद करके लेट गई। आरके ने एक बार फिर से कोशिश की और अपना हाथ पिंकी की शर्ट के ऊपर से ही उसके गोल और बाहर निकले हुए मम्मे पर रख दिया। इस बार वह अपना हाथ पिंकी के मम्मों पर रखने में सफल तो हो गया और हौले से उसके बाएं मम्मे को दबा भी दिया मगर फिर पिंकी ने उसके हाथ पर अपना हाथ रख कर उसके हाथ को अपने मम्मों से हटा दिया मगर उसके होठों को चुस्ती रही । आरके ने उसके कसे हुए टाइट बूब्स का स्पर्श महसूस कर लिया था जिसकी वजह से उसकी पेंट के अंदर उसके लंड ने सिर उठाकर पिंकी की चूत को सलाम किया था। पिंकी को भी अपनी चूत पर अब आरके के लंड का उभार महसूस होने लगा। 

आरके के चुंबन में तीव्रता आ रही थी कि अचानक पिंकी ने अपने होंठों को आरके के होंठों से अलग कर लिया और उससे दूर होकर खड़ी हो गई। वह गहरी गहरी साँस ले रही थी, उसके चेहरे पर शर्म और चुंबन से मिलने वाले आनंद के मिश्रित भाव थे। आरके ने प्यार से पिंकी को एक बार फिर अपने पास किया और बोला- क्या हुआ जान अच्छा नहीं लगा क्या ??? पिंकी कुछ न बोली मात्र शरमाती रही और फिर पिंकी के मोबाइल की घंटी बजने लगी। पिंकी ने जल्दी से अपने बैग से फोन निकाला तो जय की कॉल थी। वो खाने पर पिंकी का इंतजार कर रहा था। पिंकी ने आरके को कहा कि अब प्लीज़ वह उसे उसके भाई के पास छोड़ आए वहां उसके भाई और भाभी उसका इंतजार कर रहे हैं। यह सुनकर आरके ने मिनी को उठाया और उसे साथ लेकर पिंकी को छोड़ने निकल गया। पिंकी के चेहरे पर हल्की मुस्कान थी और वह प्यार भरी नज़रों से आरके को देख रही थी, आरके भी खुश था कि आज उसने पिंकी के सुंदर होठों से रस पी लिया था जबकि मिनी पिछली सीट पर बैठी दोनों के चेहरों पर मौजूद भाव को देख कर अंदर ही अंदर खुश हो रही थी।
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06-07-2017, 02:20 PM,
#22
RE: वतन तेरे हम लाडले
कर्नल इरफ़ान को जैसे ही पता चला कि मेजर राज उसकी सुरक्षा को नाकाम कर वहां से फरार हो गया है तो उसने हर छोटे बड़े लॉरी अड्डे, रेलवे स्टेशन, पुलिस चौकी और जामनगर से मिलने वाले सभी शहरी मार्गों परसीक्योरटी हाई अलर्ट कर दिया था ।


पुलिस तक यह खबर पहुंचाई गई थी कि एक बड़ा आतंकवादी जो इस्लामाबाद में बम विस्फोट करने की साजिश कर रहा है जामनगर में मौजूद है और उसको ढूंढने वाले को 10 लाख रुपये इनाम दिया जाएगा। भुट्टो सोसायटी के 3 किलोमीटर के दायरे में हर तरफ पुलिस मौजूद थी और उनके पास मेजर राज की तस्वीरे भी मौजूद थीं। मेजर राज के लिए किसी भी मामले यहाँ से निकलना संभव नहीं था। 

मेजर राज भी इस बात से अच्छी तरह बाख़बर था कि अब तक हर तरफ पुलिस और आईएसआई के एजेंटस मेजर राज को ढूंढ रहे होंगे। वह इसी बारे में सोच रहा था और यही बात सोचते हुए उसने अमजद को संबोधित करके पूछा कि हम कहाँ जा रहे हैं ?? तो अमजद ने बताया जामनगर शहर में प्रवेश करेंगे और वहाँ एक छोटी स्लम में हमारा सहारा है वहां जाएंगे। मेजर राज ने अमजद से कहा कि हमारा शहर में जाना ठीक नहीं मुझे हर तरफ पुलिस ढूंढ रही होगी और शहर में प्रवेश के सभी रास्तों पर पुलिस मौजूद होगी। मेजर की यह बात सुनकर अमजद मुस्कुराया और बोला कि हम भी कच्ची गोलियां नहीं खेलते हैं, आप चिंता न करें। मगर मेजर राज कैसे चिंता न करता, उसको अच्छी तरह मालूम था कि कर्नल इरफ़ान हर संभव प्रयास करेगा उसको फिर से पकड़ने की। और अगर इस बार मेजर राज पकड़ा गया तो उसका बचना संभव नहीं होगा। 

मेजर राज अब इसी सोच में गुम था कि अचानक ही अमजद ने गाड़ी सड़क से कच्चे रास्ते पर उतार ली। मेजर राज ने अमजद से पूछा कि कच्चे रास्ते पर क्यों कार उतारी है तो अमजद के बजाय समीरा ने कहा कि अब शहर यहां से पास ही है और 3 किलोमीटर की दूरी पर पुलिस का नाका होगा। इसलिए कुछ ज़रूरी काम करना है शहर में प्रवेश करने से पहले। कुछ दूर जाकर अमजद ने वीराने में कच्चे मिट्टी के घर के पास गाड़ी रोक ली तो सब लोग गाड़ी से उतर गए। मेजर राज भी कार से नीचे उतर आया और इस जगह की समीक्षा लेने लगा इतने में समीरा उसके पास आई और उसको एक सफेद रंग की सलवार कमीज पहनने को दी, मेजर के कपड़े बहुत गंदे थे वह काफी दिनों से जेल में था। राणा काशफ और मेजर राज का स्वास्थ्य थोड़ा एक जैसी ही था इसलिए समीरा ने कार की डिग्गी से राणा काशफ का एक सूट निकालकर मेजर राज को दिया। उसकी सिलाई इंडियन सलवार कमीज की तर्ज पर थी। मेजर राज ने एक दीवार की ओट में जाकर कपड़े चेंज कर लिए और जब वापस आया तो उसने देखा कि सब लोग ही सलवार कमीज पहन चुके हैं सिवाय समीरा के जो अब तक लाल रंग का वही पहने हुए थी। उसके बाद सरमद आगे बढ़ा और मेजर राज के चेहरे पर हल्का मेकअप करने लगा, नकली मूंछें लगाई गईं जो किसी पहलवान की मूंछें मालूम हो रही थीं, उसके अलावा उसके चेहरे पर हल्के हल्के दाने बना दिए गए जिससे वह अब बिल्कुल भी पहचान में नहीं आ रहा था। 

फिर समीरा ने आगे बढ़कर मेजर एक कार्ड पकड़ाया, यह एक पुलिस वाले का कार्ड था। कार्ड पर इंस्पेक्टर संराज ठाकुर का नाम दर्ज था समीरा ने बताया कि अब वह एक पुलिस वाला है मगर सिविल कपड़ों में , जबकि समीरा ने सीआईडी इंस्पेक्टर सोनिया कपूर का कार्ड पर्स में रखा और इसी तरह राणा काशफ, अमजद और सरमद के पास भी पुलिस वालों के कार्ड मौजूद थे। इस सारी तैयारी के बाद सब लोग फिर से कार में बैठे और कच्चे रास्ते पर आगे चलते हुए एक राज मार्ग पर चढ़ गए। 5 मिनट की यात्रा के बाद मेजर राज को कुछ दूर वाहन दिखाई दिए , करीब जाने पर पता चला कि यह पुलिस का नाका है। अमजद ने नाके पर पहुंचकर गाड़ी रोक दी, अमजद ने दाढ़ी तो असली ही रखी हुई थी मगर अब उसके सिर पर फिर से पठान वाली पगड़ी मौजूद थी। 

नाके पर गाड़ी रोककर अमजद खुद उतर गया जबकि दूसरी ओर सोनिया कपूर यानी कि समीरा भी नीचे उतर गई नाके पर खड़ा एक पुलिस वाला भागता हुआ उनकी कार के पास आया और चिल्लाता हुआ बोला तुम दोनों वापस कार में बैठो, जब तक निकलने को न कहा जाए बाहर नहीं निकलना, सभी वाहनों की तलाशी होगी। हम एक आतंकवादी की खोज कर रहे हैं। इस दौरान वह पुलिस वाला अमजद के बिल्कुल करीब पहुंच गया जबकि उसकी नजरें समीरा के सूट में नजर आने वाले शरीर पर थीं। अमजद ने जेब से एक कार्ड निकाला और अपना परिचय करवाया, समीरा ने भी अपने पर्स से कार्ड निकाल कर अपना परिचय करवाया तो पुलिस वाले ने अमजद को सलयूट मारा और बोला आप जा सकते हैं सर मगर अमजद ने जाने की बजाय उससे पूछा कि अब तक कोई संदिग्ध नजर आया ??? इस पर पुलिस वाला बोला सर हम हर कार की तलाशी कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ऐसा व्यक्ति नजर नहीं आया। अमजद ने पुलिस को समझाते हुए कहा देखो अपना काम बहुत ध्यान से करो, किसी भी वाहन को छोड़ना नहीं चाहे कितना ही बड़ा आदमी क्यों न हो। और ध्यान रखना, हो सकता है वह आतंकवादी हमारी पुलिस की ही वर्दी में यहां से भागने की कोशिश करे। इसलिए कोई पुलिस वाला वाहन भी आए तो उसको भी अच्छी तरह जाँच करना। उनके कार्ड की ज़रूर जाँच करना। आईएसआई हर तरफ सादे कपड़ों में जा रही है इसी तरह पुलिस की खुफिया टीमें भी सादे कपड़ों में निगरानी कर रही है अगर कोई वर्दी में अकेला व्यक्ति दिखे तो उसे छोड़ना मत। उसकी अच्छी तरह से तलाशी लेना। वह आतंकवादी बहुत चालाक है वह निश्चित रूप से पुलिस वाला बनकर निकलने की कोशिश करेगा 

अमजद की बात पूरी हुई तो पुलिस वाले ने मुस्तैदी दिखाते हुए अमजद को सलयूट और राइट कहता कहता वापस अन्य वाहनों के पास जाकर तलाशी लेने लगा जबकि समीरा और अमजद वापस अपनी अपनी सीट पर बैठ गए और अमजद ने पुलिस नाके से कार गुजार ली। नाके से गुजरने के बाद मेजर राज ने मुस्कुराते हुए अमजद पूछा यह क्या नाटक था ??? तो अमजद मुस्कुराया और कहा यहां की पुलिस और भारत की पुलिस समझो एक ही समान है। किसी काम की नहीं। खुद पुलिस वाला बन कर उसको कह रहा हूँ कि आतंकवादी पुलिस वाला बनकर निकलने की कोशिश करेगा तो किसी पुलिस वाले की कार भी बिना तलाशी जाने न दे और इस पागल ने हमारी ही कार बिना तलाशी जाने दिया। अब पीछे आने वाली पुलिस वाहनों की ज़रूर जाँच करेगा हालांकि वह वास्तव में पुलिस की गाड़ियाँ होंगी। यह कह कर कार में मौजूद सभी लोग हंसने लगे। 

कर्नल इरफ़ान खुद अपने जेल में मौजूद था। उसके साथ आईटी विशेषज्ञ, चिकित्सक और उंगलियों के निशान की टीम भी मौजूद थी। गलियारे का दरवाजा खोलकर कर्नल इरफ़ान जैसे ही अंदर दाखिल हुआ तो उसे सामने ही एजेंट की लाश मिली जिसका शरीर 2 भागों में विभाजित हो चुका था। शव से खून बह कर दरवाजे तक पहुंचा हुआ था जबकि उसका चेहरा पहचानने योग्य था। उसके साथ उसके शरीर पर यातना के निशानों को भी स्पष्ट देखा जा सकता है। कर्नल इरफ़ान के साथ उसकी टीम ने भी गलियारे में प्रवेश किया। सुरक्षा प्रणाली को डी सक्रिय कर दिया गया था तो कोई कैमरा अबकी बार ऑनलाइन नहीं हुआ। साथ मौजूद डॉक्टर एजेंट के शव का निरीक्षण करने लगे जबकि कर्नल इरफ़ान गलियारे में मौजूद कंट्रोल रूम में गया जहां कैप्टन सोनिया का शव मौजूद था उसकी लाश को कपड़े से ढक दिया गया था। मेजर राज ने कपड़ा उठा कर देखा तो कैप्टन सोनिया का शरीर पूरा नंगा था, उसके नग्न शरीर को देखकर कर्नल इरफ़ान मुंह ही मुंह में बड़बड़ाया "जिसने अपने शरीर का उपयोग करके अपने कई दुश्मनों को नीचा कर दिया था आज वही शरीर तुम्हारी जान ले गया। " यह कह कर वह फिर से चादर कैप्टन सोनिया के शरीर पर डाल दी और दूसरे एजेंट के शव को देखने लगा। उसके शरीर पर यातना के निशान नहीं थे लेकिन उसकी गर्दन मोड़ कर मारा गया था। 

डॉक्टरों ने सभी शवों का पोस्टमार्टम शुरू कर दिया था मगर कर्नल इरफ़ान को इससे कोई सरोकार नहीं था, वह देखते ही समझ गया था कि किस की मौत कैसे हुई। फिर आईटी टीम की मदद से कर्नल इरफ़ान ने कैमरा रिकॉर्डिंग निकलवाई, कर्नल देखना चाहता था कि मेजर राज जोकि लोहे की राड के साथ जकड़ा हुआ था तो उसने अपने आप को मुक्त कैसे करवाया। और जब कर्नल ने देखा कि कैप्टन सोनिया कैसे मेजर राज के लंड के लिए बेताब हो रही थी और ज़्यादा जोरदार धक्के लगवाने के लिए कैप्टन सोनिया ने खुद ही मेजर राज के पैरों को खोला था और बाद में मेजर राज ने कूद लगाकर कैप्टन सोनिया को जीवन की कैद से मुक्त करवा दिया था। उसके बाद गलियारे से निकलते हुए जैसे मेजर राज ने अपना चेहरा छुपाया और कैप्टन सोनिया का चेहरा कैमरे के सामने किया तो एजेंट वन और टू की मौत और मेजर राज का भाग कर सुरक्षा गेट तक जाना और वहां सुरक्षा अधिकारी की गर्दन पर चाकू रख कर गेट खुलवाना, सब कुछ कर्नल इरफ़ान ने बिल्डिंग में लगे कैमरों की मदद से देख लिया था। 

कर्नल इरफ़ान जो कैप्टन सोनिया की क्षमताओं की हमेशा प्रशंसा करता रहा था आज कर्नल को सोनिया पर बेहद गुस्सा आ रहा था वह गुस्से में फिर बड़बड़ाने लगा कि पहले अपनी चूत से दूसरों की मौत मौत का समान तैयार करती थी मगर आज अपनी चूत की खुजली मिटाने के चक्कर में खुद मौत को दावत दे बैठी फिर कर्नल ने सुरक्षा कर्मी को बुलाया जिसने मेजर राज के लिए गेट खोला था। जैसे ही वे सुरक्षा अधिकारी कर्नल इरफ़ान के सामने आया कर्नल ने बिना कोई बात कहे जेब से बंदूक निकाली और उसके सिर में 3 गोलियां उतार दी और वह अधिकारी लहराता हुआ जमीन पर आ गिरा इन सभी वीडियो को देखकर कर्नल इरफ़ान समझ गया था कि मेजर राज कोई साधारण एजेंट नहीं बल्कि वह रॉ का विशेष एजेंट है और उसे पकड़ने के लिए कर्नल इरफ़ान को ही इस मिशन का नेतृत्व करना चाहिए। 

अंत में कर्नल इरफ़ान ने मेन गेट के बाहर लगे कैमरे की वीडियो देखना शुरू किया, 15 मिनट के वीडियो में मेजर राज के निकलने के बाद वीरानी के अलावा कर्नल को कुछ नजर नहीं आया जैसे ही कर्नल इरफ़ान इस वीडियो को बंद करने लगा अचानक मेजर को वीडियो में एक साया नजर आया जिसने कर्नल को वीडियो बंद करने से रोक दिया। छाया एक स्थान पर रुका हुआ था उसका मतलब था कि जिस भी व्यक्ति की साया है वह मेन गेट के पास ही खड़ा है और कैमरा रेंज से अपने आप को बचा कर खड़ा है मगर उसकी परछाई को कैमरे ने पकड़ लिया था। कर्नल इरफ़ान वीडियो ध्यानपूर्वक देख रहा था, कुछ देर के बाद साया अपनी जगह से हिला तो कर्नल इरफ़ान ने साये से अनुमान लगा लिया कि यह किसी लड़की का साया है क्योंकि इसमें साया लंबे बाल मे दिख रहा था। अब कर्नल इरफ़ान और भी जिज्ञासा के साथ वीडियो देखने लगा। कुछ देर के बाद वह छाया अपनी जगह से पीछे की ओर जाने लगी और फिर गायब हो गई . 

कर्नल इरफ़ान अभी भी वीडियो को ध्यानपूर्वक देख रहा था अचानक कर्नल इरफ़ान ने देखा कि कैमरे में एक कार बहुत गति के साथ गुज़री है। कर्नल इरफ़ान ने वीडियो रीवायंड किया और फिर से देखा मगर पहचान नहीं पाया। फिर कर्नल ने आईटी टीम की मदद ली और उन्हें कहा कि वह इस वीडियो का सबसे अच्छा फ्रेम निकालें जिसमें कार में मौजूद लोगों का अनुमान लगाया जा सके और अगर उनकी आकृति भी नजर आ जाए तो सबसे बेहतर होगा। 

आईटी टीम ने कुछ ही मिनट में वीडियो के इस हिस्से के अनगिनत फ्रेम्स बना लिए और फिर उसमें से 20 ऐसे फ्रेम निकाले जिसमें कार बहुत स्पष्ट दिख रही थी, मगर कार ड्राइविंग सीट का शीशा बंद था और वहां से धूप रीफलैक्ट रही थी जिसकी वजह से सुरक्षा कैमरा चालक को तो सही तरह सुरक्षित नहीं कर पाया मगर इन फ्रेम्स से कर्नल इरफ़ान को इतना पता चल गया था कि गाड़ी ड्राइव करने वाली लड़की है जिसने लाल रंग का लिबास पहन रखा है। 

कर्नल इरफ़ान ने बाकी फ्रेम्स भी देखे मगर किसी भी फ्रेम में लड़की की शक्ल स्पष्ट नहीं थी लेकिन कुछ फ्रेम्स ऐसे थे जिसमें कार का नंबर देखा जा सकता था। और साथ ही साथ कार का मॉडल भी पहचान लिया था। कर्नल इरफ़ान ने तुरंत ही सभी पुलिस टीम को कार का नंबर मॉडल और कलर बता दिया और शहर में प्रवेश करने वाले सभी रास्तों पर लगे सुरक्षा कैमरों की जाँच का भी आदेश दिया ताकि वे देख सकें किस कार ने शहर में कब और किस समय प्रवेश किया और कार में कौन मौजूद था। कर्नल इरफ़ान ने आईएसआई को भी टास्क दिया कि शहर में मौजूद बैंक और अन्य शॉपिंग प्लाजा या दूसरी बिल्डिंग में लगे कैमरों के डेटाबेस को भी चेक किया जाय किसी न किसी कैमरे से तो इस कार के बारे में पता चल ही जाएगा । 

उसके साथ साथ कर्नल इरफ़ान ने अपने साथ आईटी टीम को यह कार्य भी दे दिया कि वे पता लगाएं कि इस बिल्डिंग में जितने भी सुरक्षा अधिकारी मौजूद थे उनके पास मोबाइल थे या नहीं और जिनके मोबाइलज़ पर कॉल आईं उनके नंबर को ट्रेस किया और जिन नंबर से कॉल आई उनको भी ट्रेस किया जाए ताकि पता लगाया जा सके कि सुरक्षा व्यवस्था में तो कोई शामिल नहीं था जिसने मेजर राज को यहां से निकलने में मदद की हो या बाहर आने वाली लड़की जिसका मात्र छाया नजर आ सकी थी उसका एक सुरक्षा अधिकारी से संपर्क रहा हो। 

अमजद ने अब गाड़ी एक कच्ची सड़क पर उतार दी थी तो ऐसा मालूम हो रहा था कि अब उनका रुख किसी गांव की ओर है। इस दौरान पीछे बैठे मेजर राज की आंख भी लग गई थी क्योंकि जब वह कैद हुआ था या तो बेहोश रहता था या फिर होश में आकर अपनी रिहाई के तरीके सोचता रहता था। मानसिक रूप से वह काफी थक चुका था इसलिये इसे जल्दी ही नींद आ गई। कच्ची सड़क पर जब वाहन को कुछ झटके लगे तो मेजर राज की आंख खुली थी। उसने अमजद से पूछा कि हम कहाँ पहुँच गए हैं तो उसने बताया कि बस कुछ ही देर में हमारा ठिकाना आ जाएगा जो आबादी से कुछ दूर है। यह सुनकर राज चुपचाप बैठ गया। रात का समय था कार से बाहर कुछ खास नजर नहीं आ रहा था सिर्फ अंधेरे का राज था। लेकिन इतना जरूर पता लग रहा था कि उनके आस पास या तो कुछ फसलें हैं या फिर खेत आदि हैं, जिनमें कोई फसल नहीं होगी। 

कुछ ही देर के बाद मेजर को दूर एक घर दिखने लगा जिसमें हल्की हल्की रोशनी थी। गाड़ी धीरे धीरे उसी घर की ओर जाने लगी और कुछ ही देर के बाद घर के सामने जाकर रुक गई। पहले समीरा गाड़ी से उतरी और उसने जल्दी से दरवाजा खोला और अंदर चली गई उसके बाद बाकी लोग भी उतरे और मेजर राज भी राणा काशफ और सरमद के साथ अंदर चला गया जबकि अमजद कार पार्क करने के लिए साथ ही एक खाली प्लाट से ले गया। यह एक छोटा सा घर था जिसके अंदर कमरे एक रसोई और शौचालय था। इस घर से कुछ आगे कुछ अधिक घर थे और देखने में यह कोई छोटा सा गांव या कस्बे जैसा लगता था जहां थोड़े थोड़े दूरी पर एक साथ 5, 6 घर मौजूद थे। 

अंदर जाकर मेजर राज सरमद और राणा काशफ के पीछे चलता हुआ एक कमरे में जाकर बैठ गया। कमरे में दीवारों पर कुछ आधुनिक प्रकार के हथियार मौजूद था और कुछ नक्शे आदि लगे हुए थे। मेजर राज एक नक्शे को ध्यानपूर्वक देखने लगा तो यह इस्लामाबाद का नक्शा था। अब मेजर राज नक्शे को देख ही रहा था कि एक लड़की अंदर दाखिल हुई। सलवार कमीज पहने सिर पर दुपट्टा लपेटे और गले को अपने लंबे दुपट्टे से अच्छी तरह कवर कर लड़की बेझिझक अंदर प्रवेश कर गई। उसके हाथ में एक ट्रे थी जिसमे बड़े बड़े गिलास मौजूद थे। लड़की वह गिलास पहले सरमद और फिर राणा काशफ आगे लेकर गई और फिर अंत में मेजर राज के सामने आई। जब यह लड़की मेजर राज के पास आई और बोली कि आप भी एक गिलास उठा तो मेजर राज की हंसी निकल गई। 
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06-07-2017, 02:20 PM,
#23
RE: वतन तेरे हम लाडले
इस दुपट्टे में लिपटी लड़की कोई और नहीं बल्कि समीरा ही थी जिसने कुछ समय पहले हाफ बाजू वाला लाल सूट पहन रखा था जिसमें उसका शरीर बहुत स्पष्ट दिख रहा था और उसकी बाहें बहुत ही सेक्सी लग रही थी . समीरा ने गुस्से से मेजर को देखा और बोली इसमें हंसने वाली कौनसी बात है ??? मेजर राज ने हंसते हुए कहा अब कुछ देर पहले तुम क्या थी और अब क्या हो गई हो ??? यह कह कर वह फिर हंसने लगा और एक गिलास उठा लिया। राज को हंसता देख अब सरमद और राणा काशफ भी हंस रहे थे। मेजर राज ने ग्लास की तरफ देखा तो उसमें गरम दूध था जो समीरा ने घर आते ही चूल्हे पर गर्म किया था। राज ने एक घूंट दूध पिया तो उसको आराम मिला। काफी दिनों के बाद उसे कोई शक्ति प्रदान करने वाली खुराक मिली थी। मेजर ने 2 घूंट और भरे और पूरा गिलास खाली कर दिया। गर्म गर्म शुद्ध दूध ने कुछ ही मिनट में राज के शरीर को आराम पहुंचा दिया था। अब वह एक बार फिर समीरा की ओर देखकर मुस्कुराने लगा कि नीचे बिछी हुई चटाई पर आलती पालती मारे आराम से दूध पीने में व्यस्त थी। 

उसको देखकर सरमद मुख़ातिब हुआ और बोला वास्तव में समीरा हमेशा ऐसे ही कपड़ों में रहती है यही हमारा पारंपरिक पोशाक है, लेकिन जब कभी किसी मिशन पर निकलना होता है तो मजबूरी के कारण ऐसे कपड़े भी पहनना पड़ जाते है जो यहाँ की संस्कृति के अनुसार होता है तो किसी को जल्दी शक न हो। अगर यह इसी ड्रेस में मिशन पर जाएगी तो बड़ी आसानी से पकड़ी जाएगी मगर अपने सेक्सी पोशाक की वजह से लोग उसको कोई मॉडर्न लड़की समझते हैं जिसका संबंध किसी बड़े घराने से होगा और इस पर किसी को आसानी से संदेह नहीं होता। मेजर राज अब समझ गया था कि ये तो वाकई मुजाहिदीन हैं और उन्हें मेजर जनरल सुभाष ने लक्ष्य दिया था कि मेजर राज को कर्नल इरफ़ान की कैद से निकलवाए समीरा ने जासूसी करने के लिए आगे जाना था इसीलिए उसने मॉर्डन सूट पहना ताकि वह अपने हुलिए आम सी लड़की लगे जो शायद रास्ता भूल कर इस घर में पहुंच गई है। मेजर राज ने इसी सोच में गुम समीरा को देखा तो वह खा जाने वाली नजरों से मेजर राज को घूर रही थी जो कुछ देर पहले समीरा पर हँस रहा था। 

इतने में अमजद भी अंदर आ गया था और वह भी नीचे बिछी हुई चटाई पर बैठ गया और ट्रे में पड़ा हुआ अंतिम गिलास उठाकर एक ही सांस में सारा गिलास खाली कर गया। इससे पहले कि मेजर राज अमजद से आगे का प्लान पूछता उसे मोबाइल फोन की बेल सुनाई दी। मोबाइल फोन की घंटी बजी तो समीरा ने तुरन्त अपने पास पड़े महिलाओं के बैग से मोबाइल फोन निकाला और उस पर किसी से बात करने लगी। मोबाइल फोन देखकर मेजरराज की छठी इंद्री ने खतरे की घंटी बजा दी थी।

मेजर राज ने अमजद से पूछा कि यह मोबाइल किसका है? तो अमजद ने बताया समीरा का ही होता है लेकिन हम ने कभी उसको अपने कार्यों के लिए उपयोग नहीं किया, उसकी कुछ लड़कियां दोस्त बनी हुई हैं वही इस फोन पर बात करती हैं। मेजर ने समीरा को देखा तो वह बहुत हंसमुख मूड में अपने एक दोस्त से खुश गपियां लगाने में व्यस्त थी। मेजर ने नीचे पड़े बैग में देखा तो यह वही बैग था जो समीरा के हाथ में उस समय भी था जब उसने पहली बार समीरा को देखा था। अब की बार मेजर ने दोबारा अमजद से पूछा जब समीरा जेल के पास गई थी तो क्या तब भी उसके पास फोन मौजूद था तो अमजद बोला कि हां उसके पास हर समय फोन रहता है मगर खतरे की कोई बात नहीं हम कभी भी इस फोन को आईएसआइ या आज़ादकश्मीरी मुजाहिदीन के साथ संपर्क नही किया । । । । । 

अभी अमजद की बात पूरी नहीं हुई थी कि मेजर राज तुरंत समीरा की तरफ बढ़ा और उससे मोबाइल पकड़ कर दूसरी साइड पर मौजूद लड़की से मुखातिब होकर बोला अगर जान प्यारी है तो तुरंत इस सिम और मोबाइल को तोड़ कर फैंक दो और कुछ समय के लिए चिप जाओ, यह कह कर मेजर राज ने फोन बंद कर दिया और समीरा का हाथ पकड़कर उसे खींचता हुआ बाहर ले गया और बाकी लोगों को भी बाहर आने को कहा। मेजर राज समीरा को घसीटते हुए ले जा रहा था और समीरा गुस्से से मेजर को देख रही थी वह अपने आप को छुड़ाना चाहती थी मगर मेजर की पकड़ उसके हाथ पर बहुत मजबूत थी। अमजद और उसके साथी भी मेजर के पीछे आए जब वह कमरे से निकले तब तक मेजर समीरा को घसीटते हुए घर के मुख्य दरवाजे से बाहर ले गया था। 

मोबाइल अब भी मेजर के हाथ में था। अमजद भागता हुआ आया और राज की तरफ गुस्से से देखते हुए बोला यह क्या हरकत है ?? मेजर ने उसकी बात का जवाब दिए बिना उसे बोला कि मुझे तुम लोगों से ऐसी मूर्खता की उम्मीद नहीं थी अपनी मौत का सामान साथ लिए घूम रहे हो तुम लोग। अब चलो तुरंत गाड़ी में बैठो और इधर से निकलो वर्ना कर्नल इरफ़ान के आदमी किसी भी समय यहां पहुंच कर हम सब का कीमा बना देंगे। अमजद उसकी बात सुनकर गाड़ी की ओर जाने लगा तो मेजर राज भी उसके पीछे हो लिया उसने अब तक समीरा का हाथ नहीं छोड़ा था और समीरा चिल्ला रही थी कि मैं आ रही हूँ छोड़ो मेरा हाथ मगर मेजर मानो उसकी बात ही नहीं सुन रहा था। 

अमजद ने कार का दरवाजा खोला और ड्राइविंग सीट पर बैठ गया, मेजर राज ने पिछला दरवाजा खोला और समीरा को अंदर धक्का दिया और खुद भी समीरा के साथ बैठ गया, समीरा ने गुस्से से भरे हुए स्वर में कहा तुम्हें समस्या क्या है मैं अपने दोस्त से बात कर रही थी किसी जासूस से नहीं। मेजर राज ने समीरा को गुस्से से देखा और बोला अपनी बकवास बंद करो और चुपचाप बैठी रहो। इतनी देर में राणा काशफ कार की फ्रंट सीट पर बैठ चुका था जबकि सरमद दूसरी ओर से आकर पिछली सीट पर समीरा के साथ बैठ गया था। अमजद ने गाड़ी स्टार्ट की और बोला कहाँ चलना है, मेजर ने कहा जिधर ये रोड जा रहा है इसी तरफ चलो तो अमजद ने गियर लगाया और कार रात के सन्नाटे में शोर करती हुई चल पड़ी। अब कोई एक किलोमीटर ही गाड़ी आगे गई होगी कि मेजर राज ने पिछले दरवाजे का शीशा खोला और मोबाइल सड़क से दूर फेंक दिया। इसके बाद मेजर राज ने अमजद को कहा अब कार वापस मोड़ लो और जिधर से हम आए हैं उसी ओर ले चलो। 

अमजद ने बिना कोई सवाल किए कार वापस मोड़ ली, वह जानता था कि मेजर राज रॉ में है निश्चित रूप से उनसे कोई गलती हुई है जिसका मेजर को पता लग गया है तो उस समय उसकी बात मानने में ही बुद्धिमानी है। अब गाड़ी फुल स्पीड में उसी रास्ते से वापस जा रही थी जिसमें कच्चे रास्ते से ये लोग अपने ठिकाने पर पहुंचे थे। मेजर राज ने अब अमजद को कहा कार की हेड लाइट पूर्ण रूप से बंद कर दो। कोई भी लाइट जलनी नहीं चाहिए। अमजद ने कहा इस तरह ड्राइविंग करना बहुत मुश्किल होगा कच्ची सड़क है कार सड़क से नीचे उतर गई तो खेतों में चली जाएगी। मगर मेजर राज ने कहा जैसा कि रहा हूँ वैसा ही करो। अमजद ने अब बिना कोई सवाल किए कार की रोशनी बंद कर दीं और गति भी स्लो करके बहुत सावधानी के साथ ड्राइव करने लगा। 

कुछ देर होने के बाद मेजर राज ने अमजद को गाड़ी रोकने को कहा और जैसे ही अमजद ने गाड़ी रोकी मेजर राज गाड़ी से उतरा और अमजद को भी उतरने को बोला, अमजद कार से बाहर आया तो मेजर कार की ड्राइविंग सीट पर बैठ गया और अमजद को पिछली सीट पर समीरा के साथ बैठने को कहा। कार में बैठते ही मेजर ने गियर लगाया और कार फिर से उसी कच्ची सड़क पर चलने लगी। लेकिन अब की बार कार की गति पहले की तुलना में बहुत तेज थी। जबकि कि मेजर राज इन मार्गों से परिचित नहीं था मगर उसको अंधेरे में ड्राइविंग की विशेष ट्रेनिंग दी गई थी, उसकी नजरें रोड पर थीं और वह काफी आगे होकर बैठा पूरे ध्यान के साथ रोड को देख रहा था और कार लगातार कच्चे रास्ते से तेजी के साथ मुख्य सड़क की ओर बढ़ रही थी। 

अमजद मेजर राज को अनजान रोड पर इस कौशल के साथ अंधेरे में गाड़ी चलाते देख कर हैरान हो रहा था, अमजद जो पिछले 1 साल से इस क्षेत्र में रह रहा था और कच्चे रोड से परिचित था वह भी अंधेरे में इतनी स्पीड के साथ ड्राइव की हिम्मत नहीं कर सकता था जिस गति से मेजर राज कार चला रहा था। अचानक ही मेजर राज ने स्टेअरिंग मोड़ा और कार कच्चे रोड से उतरकर रोड साइड पर लगे पेड़ों में से होती हुई एक मैदान में उतर गई जहां कुछ झाड़ियां मौजूद थीं। यहां पहुंचकर मेजर राज ने कार का इंजन बंद कर दिया। अमजद ने पूछा क्या हुआ कार सड़क से नीचे क्यों उतारी तो मेजर राज ने दूसरी तरफ इशारा किया जहां धीरे धीरे प्रकाश बढ़ रहा था आगे सड़क मुड़ रही थी और उसी मोड़ से प्रकाश आगे बढ़ रहा था

कुछ ही देर बाद वहां से वाहनों की एक लंबी कतार गुजरने लगी, उसमें कुछ पुलिस वाहन जबकि सबसे आगे सेना की जीप थी जिसमें पाकिस्तानी सेना के जवान अपनी बंदूकें संभाले चौकन्ने बैठे थे और पुलिस वाले भी हथियारों से लैस थे ।

यह करीब 10 गाड़ियां थीं जो तूफानी गति से उसी तरफ जा रही थीं जहां कुछ देर पहले मेजर राज और बाकी लोग दूध पी रहे थे। जब यह वाहन गुजर गये तो फिर मेजर राज ने कार स्टार्ट की और फिर सड़क पर चढ़ाकर मेन रोड की तरफ जाने लगा, लेकिन इस बार उसकी कार की रोशनी ऑनलाइन थीं और गति पहले से डबल थी। 

पुलिस और सेना के वाहन देखकर अमजद और उसके साथी इतना तो समझ ही गए थे कि यह बल उन्हीं का पीछा करते करते यहां तक पहुँचा है मगर वह समझ नहीं पाया था कि आखिर वह यहां तक कैसे पहुंचे ... अब की बार अमजद ने मेजर राज से पूछा क्या वह इस मोबाइल फोन के माध्यम से हम तक पहुँचे है ??? मेजर राज ने कहा हां बस मोबाइल फोन से हमारे ठिकाने का पता लगा उन्हें। और अगर समीरा की दोस्त का फोन न आता और मुझे पता ही नहीं लगता कि यहां हमारे पास एक फोन भी मौजूद है तो अब तक हम उनकी गोलियों से भुन चुके होते। अमजद ने फिर पूछा कि लेकिन यह कैसे संभव है जबकि हमने इस फोन से कभी किसी सुरक्षा एजेंसी से संपर्क नही किया और न ही भारत में किसी से संपर्क किया यह तो महज समीरा अपनी दोस्तों से बात करने के लिए इस्तेमाल करती है तो फोन पर कैसे किसी को शक हो सकता है। ??

मेजर राज ने मिरर से एक बार अमजद और फिर समीरा को देखा और बोला कि जब समीरा जेल के पास गई तो उस समय निश्चित रूप से उसका मोबाइल ऑनलाइन था। और कर्नल इरफ़ान आसानी से टेलीकॉम कंपनियों से यह डेटा ले सकता है कि जब मैं वहाँ से भागा इस समय इस क्षेत्र में कौन कौन से मोबाइल नंबर ऑनलाइन थे। और कोई भी खुफिया एजेंसी का आदमी पहले यही बात सोचेगा कि अंदर मौजूद कोई न कोई सुरक्षा अधिकारी बाहर वालों से संपर्क में था तो वह तुरंत फोन रिकॉर्ड भी जाँच करेगा और वहां मौजूद सभी फोन नंबर की जानकारी भी निकलवाई है। 

जैसे ही कर्नल इरफ़ान ने यह जानकारी ली होगी तो उसमें समीरा का नंबर भी आया होगा और यह फोन ठीक उसी समय इस क्षेत्र में मौजूद था जब मुझे उस जेल से निकले कुछ ही मिनट ही हुए थे। इसलिए कर्नल इरफ़ान तुरंत समझ गया होगा कि यह मेजर राज के एक साथी का फोन है। और फिर कर्नल इरफ़ान बड़ी आसानी से इस फोन की वर्तमान लोकेशन पता करवा सकता है इसके अलावा यह फोन पहले किस लोकेशन पर इस्तेमाल हुआ वह सारी जानकारी भी कर्नल इरफ़ान निकाल चुका होगा। इसलिए अब किसी भी ऐसे ठिकाने पर जाने की कोशिश न करना जहां तुम लोग पहले रह चुके हैं। इन सभी लोकेशनज़ के बारे में कर्नल इरफ़ान को पता हो चुका होगा और वहां वह अपनी सेना भेज चुका होगा। लेकिन हमारी वर्तमान लोकेशन यही घर था इसीलिए उसने पहले ही लोकेशन पर अपनी सेना भेजी है हमारा सफाया करवाने के लिए। 

मेजर की बात पूरी होने पर अमजद ने एक लंबी हूँ हूँ हूँ हूँ ........ और फिर चुपचाप बैठ गया। अब मेन रोड आ चुका था और कार पूर्व की ओर मेन रोड पर 120 गति से जा रही थी। कुछ ही देर में एक पेट्रोल पंप पर मेजर राज ने गाड़ी रोकी और अमजद से पूछा कि उसके पास पाकिस्तानी मुद्रा मौजूद है ??? तो अमजद ने कहा हां पैसों की कोई समस्या नहीं यहाँ हमारे पास पाकिस्तानी मुद्रा ही होती है। अमजद की बात सुनकर मेजर ने एक पंप के साथ कार लगाई और पंप वाले को टैंक फुल करने को कहा। इसके साथ ही उसने अमजद को नीचे उतरने के लिए कहा और पंप पर मौजूद एक दुकान में चला गया जहां से वो खाने-पीने का सामान आदि लेने लगा। 


अमजद इस समय पठान के हुलिए में था और दुकान पर बैठा आदमी भी पठान था। दोनों ने एक दूसरे को सलाम कहा। और आपस में बातें करने लगे, जबकि मेजर राज जरूरी सामान लेने में व्यस्त था।इतने में वहां मौजूद टीवी पर एक ब्रेकिंग न्यूज चली जिसमें बताया जा रहा था कि पाकिस्तानी सेना ने जामनगर में बेदी रोड पर मौजूद आतंकवादियों के ठिकाने पर हमला किया है। वहां से आतंकवादी भाग निकले लेकिन उनके ठिकाने से हथियार, लाहोर, इस्लामाबाद और पाकिस्तान के अन्य बड़े शहरों के नक्शे बरामद हुए हैं। यह खबर चली तो अमजद ने टेढ़ी नजरों से मेजर राज को देखा तो उसने आँखों ही आँखों में इशारा किया शुक्र करो हम बच गए हैं। । 

मगर इससे अगली खबर और भी खतरनाक थी टीवी पर अब एक नीले रंग की कार की हल्की सी झलक दिखा रहे थे कार में मौजूद लोग तो नज़र नहीं आ रहे थे मगर समाचार कास्टर बता रही थी कि एक नीले रंग की कार जिसकी नंबर प्लेट जाली है आतंकवादियों के उपयोग में है और कुछ समय पहले इस कार पर टी एन 59, ए क्यू 1515 की नंबर प्लेट लगी हुई थी और कार में कम से कम 3 आतंकवादी मौजूद हैं जिनमें एक लड़की भी शामिल है। यह खबर चली तो मेजर राज तुरंत अमजद के पास आया और जितना माल वह उठा चुका था उसकी पेमेंट करने को कहा। अमजद ने तुरंत जेब से कुछ नोट निकाले और दुकानदार को दिए वो अभी बिल बना रहा था और साथ ही कह रहा था आतंकवाद से सभी परेशान हैं उसकी बात सुनकर अमजद ने कहा बस पैसे दी खेड है पूरे। पैसे दे पिछे गलत कम करदे ने कद्दू ते दुश्मन ते कहे ते चलदे ने। 

अमजद आवाज मे स्पष्ट घबराहट मौजूद थी क्योंकि वो अब तक इसी कार में सवार थे जिसका नंबर अभी टीवी पर बताया गया था और कार में समीरा भी मौजूद थी। मगर अच्छी बात यह थी कि इस दुकान और कार के बीच में पंप मौजूद था इसलिये कार स्पष्ट नजर नही आ रही थी और उसका नंबर भी स्पष्ट नहीं था। इस बात को मेजर राज ने पहले ही देख लिया था इसलिए उसके चेहरे पर आतंक के आसार नहीं थे मगर उसको यहां से निकलने की जल्दी जरूर थी। खबरों में कहा जा रहा था कि आतंकवादी अपना ठिकाना छोड़कर सेखु रोड से सेखु बंदरगाह की तरफ गए हैं और रास्ते में उनका मोबाइल भी मिला है। 
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06-07-2017, 02:20 PM,
#24
RE: वतन तेरे हम लाडले
यह खबर सुनते ही मेजर राज को थोड़ा संतोष हुआ क्योंकि यहां भी उसके शातिर दिमाग ने कर्नल इरफ़ान को गलत रास्ते से भेज दिया था। अपने ठिकाने से आगे जिन्ना रोड से कार ले जाकर रास्ते में मोबाइल फेंका और फिर वापसी का उद्देश्य मेजर राज का यही था कि जब कर्नल इरफ़ान के लोग यहां पहुंचेंगे तो यही अनुमान लगाएंगे कि मेजर राज अपने साथियों के साथ ही मार्ग पर आगे है और चलती गाड़ी से अपना मोबाइल यहाँ फेंक दिया। जबकि मेजर राज ने मोबाइल फेंकने के बाद वापसी की यात्रा की थी और अब वह जिन्ना रोड और जिन्ना बंदरगाह से दूर राज मार्ग नंबर 6 पर गैस स्टेशन पर खड़ा था। मेजर राज दिमाग़ से काम कर रहा था और उसे थोड़ा समय मिल गया था आगे का प्लान करने के लिए। मगर वह जानता था कि कर्नल इरफ़ान जल्द ही दोबारा उसका पता लगा लेगा तो सबसे पहले इस कार से पीछा छुड़ाना था। 

पैसे देने के बाद मेजर राज और अमजद जल्दी से वापस कार में आए पंप वाले को भी पेट्रोल के पैसे दिए और अबकी बार मेजर राज पीछली सीट पर बैठ गया और अमजद ड्राइव करने लगा। कार में बैठ कर मेजर राज ने पहले सरमद काशफ और समीरा को ताजा खबर सुनाई कि उनके पहले ठिकाने पर सेना ने हमला कर दिया और हथियार आदि कब्जे में ले लिए हैं, उसके साथ साथ उनको हमारी कार और उस पर लगी नंबर प्लेट का भी पता चल चुका है और वे यह भी जानते हैं कि हमारे साथ एक लड़की भी है। 

यह खबर सुनाने के बाद मेजर राज ने अमजद को देखा जो कार ड्राइव कर रहा था और उससे पूछा कि अब हम कहां जा रहे हैं? तो अमजद ने बताया कि अब हमारा रुख मुल्तान की ओर है। यह भी पंजाब का ही एक शहर है और जामनगर से कोई 3 घंटे की दूरी पर है। मेजर राज ने कहा कि मुल्तान तक कई छोटे शहर आएंगे रास्ते में, और हमें किसी भी जगह पर पुलिस रोक सकती है तो सबसे पहले इस कार से छुटकारा पाओ और दूसरी बात हम सब एक साथ नहीं जाएंगे बल्कि अलग जाएंगे ताकि किसी को शक न हो हम पर। 

अमजद ने कुछ दूर जाकर गाड़ी रोक ली और नीचे उतर कर दिग्गी को खोला यह एक नई नंबर प्लेट निकाल कर कार पर लगाने लगा, जबकि उसने समीरा को कहा कि वह भी गाड़ी से अपने कपड़े निकाले और अपना हुलिया बदल ले। समीरा ने पीछे पड़े बैग से कपड़े निकाले और अंधेरे में जाकर अपने कपड़े बदल लिए। वापस आई तो उसने एक टाइट जींस पहन रखी थी और साथ में एक शर्ट थी जिसमें से उसके शरीर के उभार काफी स्पष्ट हो रहे थे। मेजर राज ने एक नज़र उस पर डाली और दिल ही दिल में उसकी सुंदरता की प्रशंसा करने लगा। 

अमजद नंबर प्लेट बदल चुका था। नंबर प्लेट बदलने के बाद वह बोला कि इस कार को तुम लोग मुझ पर छोड़ दो। मैं यही गाड़ी लेकर मुल्तान तक जाउन्गा जबकि सरमद और राणा काशफ बस से मुल्तान पहुंचेंगे।और समीरा तुम मेजर राज के साथ जाओ, आप भी बस में जाओ मगर राणा काशफ और सरमद अलग बस में होंगे और मेजर राज और तुम अलग बस में। और मुल्तान पहुंचकर तुम मेजर राज को गाइड करोगी कि हमारे ठिकाने तक कैसे पहुंचना है जबकि काशफ और सरमद दोनों खुद ही पहुंच जाएंगे। 

अब सब लोग फिर से कार में बैठे और कुछ ही दूर एक बस स्टॉप पर गाड़ी रोक ली। वहाँ अमजद ने राणा काशफ और सरमद को कार से उतारा और उनको साथ में कुछ सामान दिया और कहा कि मेजर राज ने पेट्रोल पंप से खरीदा था। उन्होंने वह सामान उठाया और सामने खड़ी बस में बैठ गए जो चलने के लिए तैयार थी। जब बस चल पड़ी तो बस के पीछे अमजद ने गाड़ी चलाना शुरू कर दी और अगले बस स्टॉप पर पहुंचकर बस स्टॉप से कुछ पहले गाड़ी रोक ली। 

यहां मेजर राज ने अपनी जेब में हाथ डाला और जेब से एक मोबाइल फोन निकाला। अमजद ने मेजर के हाथ में फोन देखा तो तुरंत बोला यह कहाँ से मिला ??? तो मेजर राज ने बताया तुम्हारे पठान भाई का उठाया है पेट्रोल पंप से और यह कह कर मेजर राज ने मोबाइल में एक नंबर सेव किया और ओटिस एप्लिकेशन के साथ एक कॉल मिलाई। यह नंबर भारत का था। कुछ देर के बाद आगे से एक महिला की आवाज आई तो मेजर राज ने पूछा कैसी हो मिनी ??? आगे मिनी की आवाज़ आई तुम कौन बोल रहे हो ??? तो मेजर राज ने कहा अरे वाह, इतनी जल्दी भूल गई अपने प्रेमी को ??? साथ जीने मरने की कसमें खाकर अब पूछ रही हो तुम कौन ??? मिनी ने फिर कहा सीधी तरह अपना नाम बताओ नहीं तो फोन बंद कर रही हूँ ...मेजर राज अबकी बार बोला सुनो तो जानेमन, अपनी एक तस्वीर ही ओटिस एप्लिकेशन पर दो बहुत समय हो गया तुम्हें देखे हुए। 

मेजर राज की बात खत्म ही हुई थी कि आगे से फोन बंद कर दिया गया। अमजद ने मुस्कुराते हुए मेजर राज की ओर देखा और पूछा यह क्या सीन है मेजर ?? मेजर राज ने आँख मारते हुए कहा मेरी पुरानी प्रेमिका है सोचा उसको थोड़ा तंग ही कर लूं। मेजर की बात सुनकर अमजद ने ठहाका लगाया और बोला नहीं मेजर साहब प्रेमिका तंग करने के लिए तो फोन नहीं किया होगा ऐसी स्थिति में। तो मेजर राज ने उसे बताया कि यह मेजर मिनी का फोन था। मेजर मिनी मेजर राज के साथ ही कैडेट कॉलेज में पढ़ती थी और दोनों ने एक साथ ही आर्मी ज्वाइन की थी। और अब मेजर राज की पोस्टिंग मुम्बई में थी जबकि मेजर मिनी की पोस्टिंग पंजाब में थी। फोन करने का उद्देश्य अपने सही सलामत होने की सूचना भारत भिजवाया था। ओटिस एप्लिकेशन कॉल को अब पाकिस्तानी सेना या भारत आर्मी ट्रेस आउट नहीं कर सकती इसलिए ओटिस एप्लिकेशन से कॉल की है। लेकिन स्पष्ट रूप से इसलिए नहीं बताया कि सावधानी आवश्यक है। क्या मालूम पाकिस्तानी आर्मी के पास ओटिस एप्लिकेशन के डेटाबेस का उपयोग किया लेकिन भारतीयसेना को इसका पता न हो इसलिये स्पष्ट संदेश नहीं दिया। अमजद ने कहा मगरआगे मौजूद महिला ने तो फोन बंद कर दिया गुस्से में ?? तो मेजर राज ने कहा कि वह भी भारतीय सेना की ट्रेंड मेजर है उसे भी पता है कि फोन पर बात करनी है और क्या नहीं। उसने मेरी आवाज़ पहचान ली है इतना काफी है। अब वह उच्च अधिकारियों तक खुद ही यह बात पहुंचा देगी। 

मेजर राज की बात समाप्त हुई तो उन्हें पीछे से एक और बस आती दिखाई दी। अमजद ने समीरा को कहा चलो तुम अपना बैग उठाओ और मेजर साहब के साथ इस बस में मुल्तान पहुँचो मैं इसी कार से मुल्तान तक जाउन्गा समीरा जो अब फ्रंट सीट पर बैठी थी उसने पीछे मुड़ कर अपना बैग उठाया और कार से उतर गई मेजर राज भी कार से उतरा और अमजद को अपना ख्याल रखने को कह कर बस में सवार हो गया। बस करीब खाली ही थी। रात का समय था इसलिये बस में अधिक सवारियां मौजूद नहीं थीं। 

मेजर राज पीछे वाली सेट पर गया और समीरा को भी वहीं बुला लिया, समीरा आई और शीशे वाली साइड पर बैठ गई जबकि मेजर राज उसके साथ वाली सीट पर बैठ गया। मेजर के हाथ में भी कुछ रस के डिब्बे और खाने का सामान था, जबकि मोबाइल फोन मेजर ने बस में चढ़ने से पहले उसके टायर के नीचे रख दिया था।जैसे ही बस चली मोबाइल के टुकड़े हो गए और मेजर की यहाँ उपस्थिति का सबूत मिट गया। 

कॉल डिस्कनेक्ट करते ही मेजर मिनी ने खुशी से याहू का नारा लगाया और अपने कमरे में खुशी के मारे डांस करने लगी। उसने मेजर राज की आवाज पहचान ली थी और वह जान गई थी कि मेजर राज अब दुश्मन के चंगुल से मुक्त हो चुका है। कुछ देर खुशी से पागलों की तरह नृत्य करने के बाद उसे ख्याल आया कि उसे यह सूचना तुरंत मुख्यालय को देनी चाहिए। उसने तुरंत ही अपने कमरे में मौजूद टेलीफोन उठाया और हेड क्वार्टर कॉल मिलाई। आगे मेजर अमर ने फोन अटेंड किया तो मेजर मिनी ने तुरंत मेजर जनरल सुभाष से बात करवाई, मेजर अमर ने होल्ड करने को कहा और मेजर जनरल सुभाष की एक्सटेंशन मिला दी। रात के 11 बजे मेजर जनरल ने अपने टेलीफोन पर कॉल रिसीव की तो मेजर मिनी ने एक ही सांस में उन्हें अपने और मेजर राज के बीच होने वाली बातचीत का बताया और यह भी बताया कि उसने स्पष्ट बात नहीं बस अपनी आवाज सुनाने के लिए इस तरह के ढंग से कॉल की है ताकि अगर किसी तरह कॉल ट्रेस भी हो जाए तो ऐसा लगे जैसे पाकिस्तान से कोई थर्ड क्लास प्रेमी भारत में किसी लड़की को फोन करके तंग कर रहा है। मेजर जनरल ने यह खुशखबरी सुनी तो उन्होंने मिनी को भी बधाई दी और बोले शुक्र है अमजद ने अपना काम कर दिखाया अन्यथा मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नही थी कि वह इस काम में सफल होंगे क्योंकि आज तक जो भी कर्नल इरफ़ान की कैद में गया वह जीवित सलामत वापस नहीं आया। 

मेजर जनरल को यह सूचना देने के बाद मिनी ने तुरंत जय के मोबाइल पर कॉल की। जय हनीमून से वापस आ चुका था और अब अपने कमरे में पत्नी के साथ व्यस्त था। जय जो तब डॉली को चौदनेमें व्यस्त था उसे डॉली की तेज सिसकियों में अपना मोबाइल अटेंड करने का होश ही नहीं था। डॉली जय के लंड पर बैठी पूरी ताकत के साथ उछल कूद में व्यस्त थी। एक बार कॉल अटेंड नहीं हुई तो मेजर मिनी ने फिर से कॉल, अब की बार जय ने फोन उठा कर देखा कि इस समय कौन तंग कर रहा है। डॉली ने जय के लंड पर छलाँगें मारते मारते जय को फोन अटेंड करने से रोका मगर इतनी देर में उसकी नजर अपने मोबाइल स्क्रीन पर पड़ गई थी वह मेजर मिनी नाम देख चुका था। मेजर मिनी का नाम देखते ही उसने डॉली को अपने लंड से उतरने को कहा और खुद ही उठ कर बैठ गया, डॉली को इस तरह जय का फोन फ़ोन उठाना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा था क्योंकि वह इस समय जय के लंड से पूरी तरह आनंद ले रही थी। 

जय ने कॉल अटेंड करते ही कहा जी मिनी कुछ पता लगा भाई का ??? तो मिनी ने चहकते हुए कहा हां वह जय साहब आजकल पाकिस्तान भ्रमण पर निकले हुए हैं और कुछ ही देर पहले मेरे साथ फोन पर फ्लर्ट करके हटे हैं।यह सुनते ही जय का चेहरा खुशी से खिल उठा। मिनी ने जय से कहा तुम यह खबर जल्दी से आंटी को भी दो और रश्मि को भी बताओ कि उन्हें भी सकून मिल जाए यह कह कर मिनी ने कॉल कट कर दी और जय ने तत्काल अपनी पैंट और शर्ट पहनी और शर्ट के बटन बंद किए बिना ही भागा भागा माँ के कमरे में गया और उन्हें राज के सही सलामत होने की सूचना दी। माँ यह खबर सुनते ही पूजा घर में गिर गईं और प्रभु का धन्यवाद करने लगी, पूजा से उठने के बाद उन्होंने जय को अपने गले से लगा लिया और बोलीं कि चल जल्दी से भाभी को भी बता। 

जय उसी हालत में रश्मि का दरवाजा खटख्टाने लगा। रश्मि अपनी नाइटी पहने सो रही थी जब कि रश्मि के पास कोई नहीं था जिसके लिए वह नाइटी पहनती मगर उसको आदत थी कम कपड़ों में सोने की और हल्की फुल्की नाइटी पहनने से उसे आराम की नींद आती थी। दरवाजे पर दस्तक की आवाज़ सुन वह बिस्तर से उतरी और पूछने लगी कौन है ??? 

बाहर से आवाज आई भाभी में जय ... आपके लिए खुशखबरी है, बड़े भाई से संपर्क हो गया है ..... यह सुनते ही रश्मि की नींद उड़ गई और वह दौड़ती हुई दरवाजे तक आई और दरवाजा खोल दिया। दरवाजा खोलते ही वह फिर से जय से मुखातिब हुई और बोली फिर कहो क्या कह रहे थे तुम ??? उसकी आँखों में खुशी के साथ अनिश्चितता के भाव थे। जय ने एक बार फिर कहा कि राज भाई से संपर्क हो गया उनकी कोलीग मेजर मिनी का फोन आया है भाई ने उनसे बात की है और अपने राजी-खुशी से होने की खबर दी है। 
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06-07-2017, 02:20 PM,
#25
RE: वतन तेरे हम लाडले
यह सुनते ही रश्मि जय से लिपट गई और रोने लगी, जय भी इस बात से अनजान कि उसकी अपनी शर्ट के बटन खुले हैं और उसकी भाभी इस समय एक सेक्सी नाइटी पहने हुए है रश्मि की कमर के चारों ओर अपने हाथ लपेट दिए। जब कि तब जय या रश्मि दोनों के मन किसी भी बुरी सोच या बुरे विचार से मुक्त थे मगर एक भाभी नाइटी पहने अपने जवान देवर के सीने से लगी खड़ी थी। कुछ देर बाद जय को अपने सीने पर भाभी के नरम नरम मम्मों का स्पर्श महसूस हुआ तो उसने एकदम रश्मि को ध्यान से देखा जो अब तक अपना सिर जय की छाती पर रखे रो रही थी। यह खुशी के आंसू थे, इसलिये जय ने रश्मि को रोने से नहीं रोका मगर अब उसकी नजरें अपनी भाभी के शरीर पर थीं। रश्मि के कंधे बिल्कुल नंगे थे और पीछे से कमर भी पूरी नंगी थी, बस रश्मि के चूतड़ों के ऊपर एक स्कर्ट नुमा छोटी छोटी पट्टी मौजूद थी और नीचे उसकी गोरी गोरी टाँगें देखकर जय को अपने शरीर में सुई जैसी चुभन होती हुई महसूस होंगे लगीं। फिर जय ने रश्मि को अपने सीने से थोड़ा पीछे हटाया तो रश्मि हट गई मगर उसके हाथ अपनी आँखों पर थे और वह अब भी लगातार रोये जा रही थी। 

जबकि जय की नजरें अपनी भाभी के गोरे शरीर का नज़ारा करने में व्यस्त थीं। काले रंग की नेट वाली निघट्य में रश्मि का गोरा शरीर ऐसे झलक रहा था जैसे कोई पत्थर का मोती हो। नाइटी का गला खुला होने की वजह से रश्मि के बूब्स का उभार भी बहुत स्पष्ट था। रश्मि के मम्मे जोकि डॉली के मम्मों से छोटे थे मगर इंसान की प्रकृति है कि उसे अपनी पत्नी के अलावा हर औरत का शरीर ही सुंदर लगता है और इस समय जय का भी यही हाल था। उसका मन कर रहा था कि वह उसके हाथ उठाए और अपनी भाभी के बूब्स को जोर से दबा दे, मगर उसने अपने ऊपर नियंत्रण रखा और ऐसी किसी भी हरकत से अपने आप को रोक लिया 


अब जय की नजरें अपनी भाभी की गोरी चिट्टी थाईज़ का निरीक्षण कर रही थीं जो मांस से भरी हुई थीं और उनको दबाने का निश्चित रूप से बहुत मज़ा आने वाला था लेकिन अब की बार भी जय ने अपने आप को बहुत मुश्किल से किसी भी ऐसी हरकत से रोक लिया अब वह रश्मि के शरीर से अपनी आँखें सेकने में व्यस्त था कि रश्मि की आवाज उसके कानों में पड़ी, रश्मि कह रही थी कि माँ को भी बता दो कि राज ख़ैरियत से है। रश्मि की आवाज सुनकर जय होश में वापस आया तो उसने रश्मि को कहा कि वह बता चुका हूँ। बस अब आप दुआ करें कि भाई खैरियत से स्वदेश वापस आ जाएं। यह सुनकर रश्मि बोली- मैं माँ से मिल लेती हूँ, यह कह कर रश्मि कमरे से निकली और राज की मां के कमरे की ओर जाने लगी तो अब की बार जय ने हाथ आगे बढ़ाकर रश्मि के कंधे पर रख दिया और बोला रूको भाभी ... रश्मि ने रुककर जय को देखा और कहा, हां बोलो ?? जय ने नजरें नीचे झुका लीं और बोला भाभी अपने कपड़े पहन लें। यह कह कर वह ऐसे ही नजरें झुकाए वापस अपने कमरे में चला गया और रश्मि ने जब अपने ऊपर नज़र डाली तो उसे एक झटका लगा कि वह नाइटी पहने कितनी देर जय के सीने पर सिर रख कर खड़ी रही और अब भी माँ से मिलने जा रही थी। रश्मि के चेहरे पर लाज की शिकन सी आई और अपने ऊपर गुस्सा भी आया कि वह ऐसी हालत में कमरे से बाहर क्यों आ गई। मगर फिर यह सोचकर मुस्कुराने लगी कि राज की सूचना मिलने पर उसे अपना होश ही कहाँ था ... यह सोच कर वह मुस्कुराती हुई वापस कमरे में चला गई और कपड़े पहनने लगी। 

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मेजर मिनी को जब राज की आवाज सुनाई दी थी वह बहुत खुश थी। वह मेजर राज से बेपनाह प्यार करती थी, मेजर राज भी उसे पसंद करता था मगर कुछ कारणों की वजह से वैवाहिक रिश्ते में नही बँध सके थे। मिनी को इस बात का दुख था मगर वह एक मीचोर लड़की थी, पारंपरिक लड़कियों की तरह उसने रश्मि से कोई लड़ाई मोल नहीं ली बल्कि उसने खुशदीली के साथ रश्मि को मेजर राज की पत्नी स्वीकार कर लिया था। यही वजह थी कि राज से बात होते ही मुख्यालय सूचना देने के बाद उसे तुरंत रश्मि का ही ख्याल आया, मगर रश्मि का नंबर पास न होने की वजह से उसने जय को कॉल की क्योंकि वह जानती थी कि जब से मेजर राज लापता हुआ है रश्मि की उदासी किसी क्षण भी खत्म नहीं हो सकी इसलिये उसे यह सूचना तुरंत देना बहुत जरूरी था। 

जय से फोन पर बात करने के बाद अब वो फिर से मेजर राज के विचारों में गुम थी। जब मेजर की शादी तय हुई थी राज और मिनी की मुलाकात नहीं हो सकी थी न ही मिनी मेजर राज की शादी पर जा सकी थी क्योंकि शादी वाले दिन मेजर मिनी अपनी ड्यूटी में व्यस्त थी और उसे छुट्टी नहीं मिल सकी थी। मिनी को अब मेजर राज की शरारतें याद आ रही थीं कि वह मिनी के साथ करता था। यूँ तो दोनों कॉलेज के समय से अच्छे दोस्त थे मगर दोनों में पहली बार शारीरिक संबंध तब स्थापित हुआ जब मेजर राज और मिनी दोनों कैप्टन के पद पर थे। जबकि दोनों की पोस्टिंग अलग शहरों में थी मगर एक मिशन के दौरान राज और मिनी मेजर पवन सिंघ के साथ ट्रेन में पंजाब से दिल्ली जा रहे थे। गर्मियों के दिन थे और रेलवे की हालत का स्तर खराब होने के कारण रेलवे में यात्रियों की संख्या बहुत कम थी। मेजर पवन सिंघ सर्वोपरि स्वभाव के अधिकारी थे और वह हमेशा मिनी और राज को एक दूसरे से दूर रखने की कोशिश करते थे मगर उनकी अपनी नज़रें मिनी के शरीर को 24 घंटे घूरती रहती थीं। 
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06-07-2017, 02:20 PM,
#26
RE: वतन तेरे हम लाडले
मिनी इस बात से अच्छी तरह अवगत थी कि मेजर पवन सिंघ उसके शरीर का दीवाना है मगर उसने कभी इस बात का बुरा नहीं माना था क्योंकि वह जानती थी कि उसके शरीर की बनावट है ही इतनी सेक्सी कि कोई भी पुरूष उसको पाने की इच्छा कर सकता हैं इसलिए उसने कभी किसी को नहीं रोका कि वह उसे घूर घूर कर क्यों देखता है। इस यात्रा के दौरान मेजर पवन सिंघ हर समय कैप्टन मिनी को अपने दाएं और कैप्टन राज को अपने बाईं ओर रखते और खुद दोनों के बीच में ही रहते जहाँ उन्हें मौका मिलता वह बहाने बहाने से कभी कैप्टन मिनी के कंधे पर हाथ रख देते तो कभी उसकी कमर पर थपकी दे कर अपनी ठरकी पूरी करते।

रात के 2 बजे से शताब्दी एक्सप्रेस दिल्ली के लिए चली तो मेजर पवन सिंघ ने ट्रेन के प्रथम श्रेणी के हिस्से में अपनी सीट बुक करवाई। मेजर ने पहले मिनी को ट्रेन पर चढ़ने के लिए आमंत्रित किया, मिनी ने जैसे ही सीढ़ी पर पैर रखा तो राज ने भी कोशिश की कि वह मिनी के पीछे ही चढ़ जाए मगर बीच में मेजर पवन सिंघ आ गए और उन्होंने हाथ राज का लाभ लिया था। राज भी जानता था कि मेजर की नीयत खराब है मिनी पर मगर वह भी उसे कुछ नहीं कि सकता था। एक तो वह वरिष्ठ था और दूसरे जब मिनी ने कभी इस बात का बुरा नहीं माना तो राज कैसे बुरा मानता मिनी अब ट्रेन की दूसरी सीढ़ी पर ही थी कि पवन सिंघ ने भी दूसरी सीढ़ी पर अपना पैर रख दिया। मेजर पवन सिंघ का शरीर मिनी के शरीर से टकराया तो मिनी ने पीछे मुड़ कर देखा और मेजर पवन सिंघ को क्रोध नज़रों से घूरा, मेजर का मानना था कि शायद मिनी माइंड नहीं करेगी मगर उसकी नज़रों में मौजूद गुस्सा देख कर मेजर ने दूसरा विकल्प चुना और सॉरी बोल पड़ा। 

इसके बाद तीनों ट्रेन में मौजूद अपनी अपनी जगह पर बैठ गए। चूंकि यह एसी डब्बा था उसमें अलग केबिन बने हुए थे, हर केबिन में 6 बर्थ थे और केबिन का दरवाजा बंद करके बंद किया जा सकता था। मिनी पहले अंदर दाखिल हुई और उसने ऊपर वाली बर्थ पर कब्जा कर लिया जबकि मेजर पवन सिंघ और कैप्टन जय नीचे वाली बर्थ पर बैठ गए। ट्रेन स्टेशन से चली तो मेजर पवन सिंघ ने मिनी को बर्थ से नीचे आने के लिए कहा, मिनी नीचे आई और कैप्टन राज की बर्थ पर उसके साथ बैठ गई। अब मेजर पवन सिंघ ने दोनों को ऑपरेशन के बारे में बताना शुरू किया। और दोनों को समझाने लगा कि कैसे दुश्मन पर काबू पाना है और कैसे दुश्मन की नजरों में आए बिना तीनों ने संपर्क में रहना है। सुबह बजे तक मेजर का व्याख्यान जारी रहा जिसे सुनकर अब मिनी को नींद आने लगी थी। मगर सौभाग्य से मेजर का व्याख्यान यहीं खत्म हो गया था तो उसने मिनी को बैग से चिप्स निकालने के लिए कहा जो उसने स्टेशन से खरीदे थे। 

मिनी ने एक पैकेट पवन सिंघ को निकाल कर दिया और दूसरा पैकेट राज के साथ शेयर कर लिया। मेजर पवन सिंघ का तो जैसे दिल ही टूट गया, लेकिन वह कुछ नहीं कर सकता था। फिर मिनी ने जूस के पैकेट निकाले तो तीनों ने जूस पिये उसके बाद मिनी ने राज को शेरो शायरी का मुकाबला करने को कहा और दोनों ने एक से बढ़कर एक शेर सुनाना शुरू कर दिया। मेजर पवन सिंघ जो उम्र में दोनों से काफी बड़े थे और शेरो-ओ-शायरी का शौक नहीं था उन्हें नींद आने लगी तो उन्होंने ऊपर वाली बर्थ पर कब्जा किया और चादर लेकर सो गए। कुछ ही देर में मेजर के खर्राटे शुरू थे।


ट्रेन एक स्टेशन पर पहुंची तो सेरो शायरी खेल कर अब दोनों थक चुके थे। 25 वर्षीय मिनी कॉलेज के दिनों से ही राज को पसंद करती थी जिसकी उम्र अब 26 साल थी। जब ज़्यादा करने को कुछ नहीं रहा तो दोनों एक ही बर्थ पर एक दूसरे के पास होकर बैठ गए और अपने भविष्य के बारे में बात करना शुरू कर दिया। जो कुछ देर के बाद इश्क और आशिकी की बातों में बदल गई मिनी अब अपना सिर राज के कंधे पर रख के बैठी थी और उसे अपने परिवार के बारे में बताने लगी। जबकि राज ने भी कहा कि वह अपने परिवार को उसके घर भेजेगा ताकि वह मेरे लिए तुम्हारा हाथ मांग सकें। 
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06-07-2017, 02:21 PM,
#27
RE: वतन तेरे हम लाडले
मिनी ने राज के कंधों से अपना सिर उठाया और खुशी से बोली सच ??? कैप्टन राज ने उसके माथे पर एक चुंबन दिया और कहा मेरी जान वाकई सच। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। यह कह कर राज ने मिनी के सुंदर होठों पर अपने होंठ रख दिए और एक लंबा चुंबन दिया, इस दौरान मिनी की आँखें बंद थीं जैसे अगर उसने आँखें खोलीं तो यह सपना टूट जाएगा। राज भी दुनिया से बेखबर अपने होंठ मिनी के होंठों पर रखकर सब कुछ भूल गया था कि अचानक उन्हें मेजर पवन सिंघ की आवाज सुनाई दी। दोनों हड़बड़ा कर पीछे हटे और मेजर को देखने लगे जो बेहोशों की तरह सो रहा था, वास्तव में यह आवाज मेजर पवन सिंघ के ख़र्राटों की थी, मिनी और राज ने एक दूसरे देखा और धीरे से हंसने लगे, फिर राज आगे बढ़ा और उसने एक बार फिर अपने होंठ मिनी के होंठों पर रखते हुए उन्हें चूसने लगा। 

मिनी भी कैप्टन राज का साथ देने लगी और अपने होंठों को गोल गोल घुमा कर कैप्टन राज के होंठों को चूसने लगी। मिनी के हाथ कैप्टन राज की गर्दन पर थे जबकि राज ने अपने हाथ मिनी की कमर पर रखे और धीरे धीरे मिनी को अपने करीब खींचते हुए अपने सीने से लगा लिया था। 

यूँ तो दोनों में यह चूमा चाटी कॉलेज के समय से ही चल रही थी मगर आज उसकी तीव्रता काफी अधिक थी। मिनी पूरी जवान और भावनाओं से भरपूर एक कुंवारी लड़की थी और आज बहुत दिनों के बाद वह अपने प्रिय दोस्त के होठों का रस चूस रही थी। मिनी ने अपना मुंह खोल कर राज को ज़ुबान अंदर करने की अनुमति दी और फिर राज की ज़ुबान से अपनी जीभ टकराने लगी। राज और मिनी दोनों की कोशिश थी कि वे अपनी ज़ुबान को दूसरे के मुंह में डाले और अंदर तक मज़ा लें। राज का एक हाथ सरकता हुआ मिनी की कमरे से उसके कूल्हों तक आ चुका था और वहां से नीचे फिर चूतड़ राज के हाथ में थे। ऐसा पहली बार हुआ था कि राज ने अपना हाथ मिनी के चूतड़ों पर रखा था इससे पहले उनके बीच किस और डॉकिंग ज़रूर हुआ था मगर कभी मिनी के मम्मे या उसके चूतड़ों पर राज ने हाथ नहीं लगाया था। और आज अगर मिनी के चूतड़ पकड़े भी तो अपने सीनियर के सामने जो ऊपर वाली बर्थ पर जोरदार खर्राटे मार रहा था। 

अपने चूतड़ों पर मर्दाना हाथ पकड़ महसूस कर मिनी की भावनाएँ और भी मचलने लगी और अब उसने अपनी एक टांग उठाकर राज की कमर के आसपास की तो राज ने उसके चूतड़ पकड़ कर उसे गोद में उठा लिया और मिनी ने अपनी दोनों पैर राज की कमर के गिर्द लपेट दिए . मिनी के 36 आकार के चूतड़ राज के हाथ में थे और वह उन्हें दबाने के साथ मिनी के होंठों को भी भरपूर मजे से चूस रहा था। होठों से होते हुए राज के होंठ अब मिनी की गर्दन को चूसने में व्यस्त थे और मिनी अपना सिर पीछे की तरह गिराए राज को पूरा मौका दे रही थी कि वह उसकी गर्दन के अधिकांश भाग को अपने होठों से चूम सके। राज कभी मिनी की सुराही दार गर्दन पर अपनी जीभ फेरता तो कभी उसको दांतों से काटने लगता और मिनी की उफ़ उफ़, आह आह की सिसकियाँ राज के कानों में रस घोल रही थीं। 

राज अभी चलता हुआ ट्रेन की खिड़की के साथ हुआ और मिनी की कमर को ट्रेन के साथ लगाकर सहारा दिया मिनी ने अभी भी अपनी टाँगें राज की कमर के गिर्द लपेट रखी थीं। अब एक बार फिर दोनों ने एक दूसरे होंठ चूसना शुरू कर दिए थे जबकि राज का हाथ अब मिनी के चूतड़ों को छोड़ कर उसकी गर्दन की मालिश कर रहा था। यह हाथ गर्दन की मालिश करते हुए मिनी के सीने तक आया और फिर मिनी के दाएँ मम्मे को अपने हाथ में पकड़ लिया। 36 आकार का मम्मा राज के हाथ में आया तो उसे लगा जैसे कोई खजाना मिल गया हो, उसने मिनी के मम्मों को ज़ोर से दबाया तो मिनी मुंह से एक लंबी सिसकी निकली ऊच च च च च च च च च .... ... दोनों के बीच यह सब पहली बार हो रहा था मगर आश्चर्य की बात थी कि मिनी ने ना तो राज को नितंबों को पकड़ने से रोका था और न ही मम्मे दबाने पर कुछ कहा। शायद वह आज अपनी जवानी राज पर न्यौछावर करने के लिए तैयार थी और अपनी प्यास बुझाने के लिए भी बेताब थी। 

तभी राज के हाथ मिनी की शर्ट के बटन खोलने लगे। 3 बटन खोलने के बाद राज ने मिनी की शर्ट को साइड पर हटाया तो लाल ब्रा में छिपे मम्मों के ऊपर वाला हिस्सा राज को दिखने लगा। राज ने अपना हाथ फिर मिनी के दाएँ मम्मे पर रखा अबकी बार उसके हाथ ने मिनी की ब्रा को छुआ था। जैसे ही राज ने मिनी के मम्मे को हाथ से दबाया तो एकदम से ठक ठक की जोरदार आवाज आई। कम्पार्टमेंट के बाहर टीटी आया था ..... दरवाजे पर नॉक सुनते ही मिनी ने राज की कमर के आसपास लिपटे पैर साइड पर फैलाए और उसकी गोद से उतर कर अपनी शर्ट के बटन बंद करने लगी जबकि राज ने कुछ देर गहरी गहरी सांस ली और फिर दरवाजा खोल दिया।

मिनी को अभी तक सांस नियंत्रण करना मुश्किल हो रहा था उसकी सांस तेज तेज चल रही थी टीटी ने दोनों को ध्यानपूर्वक देखा और बोला टिकट चेक काराव तो राज ने अपनी जेब से और मिनी ने अपनी जेब से टिकट निकालकर चेक करवा दिए . टीटी ध्यानपूर्वक मिनी के खुले बालों की समीक्षा रहा था जो इस प्रक्रिया के दौरान बिखर गए थे और उसकी आंखों में सेक्स का नशा अब तक मौजूद था, फिर टीटी ने कहा यह तीसरे साहब जो हैं उनका टिकट? तो राज ने उनके बैग से टिकट निकालकर चेक करवा दिया, टीटी अब वहां से चला गया, लेकिन जाते जाते उसके चेहरे पर द्वि अर्थ हंसी थी, वह समझ गया था कि दोनों गर्म शरीर एक दूसरे से लड़ने में व्यस्त थे और उसने आकर डिस्टर्ब कर दिया। टीटी के जाते ही राज ने दरवाजा बंद किया तो मिनी फिर छलांग मार कर राज की गोद में चढ़ गई और जंगली बिल्ली की तरह उसकी शर्ट के बटन खोल कर उसके सीने पर प्यार करने लगी। 

थोड़ी देर के बाद मिनी पहली बर्थ पर लेटी हुई थी और राज ने उसकी शर्ट उतार दी थी। मिनी की लो वेस्ट जींस (लो वेस्ट जीन्स) और उसके बदन पर लाल रंग का ब्रा राज के लंड को खड़ा करने के लिए पर्याप्त था। राज मिनी के ऊपर झुका और उसके फोम वाले अंडर वायर्ड ब्रा से बनने वाली मिनी की क्लीवेज़ के बीच अपनी ज़ुबान फेरने लगा। मिनी की ब्रा ने मिनी के मम्मों को आपस में मिला कर रखा था और उन्हें ऊपर भी उठा दिया था जिसकी वजह से उसकी क्लीवेज़ बहुत सेक्सी हो रही थी और ऐसे लग रहा था जैसे मिनी के मम्मे 36 की बजाय 38 के होंगे। कुछ देर के बाद जब राज ने खूब जी भरकर मिनी की क्लीवेज़ मे ज़ुबान फेर ली तो उसने मिनी का ब्रा भी उतार दिया। ब्रा की कैद से मुक्त होते ही मिनी के मम्मे ऐसे थिरकने लगे जैसे जेली अपने बर्तन से निकलकर हिलती है। 

गोरे मलाई जैसे बूब्स पर हल्के ब्राउन रंग का छोटा सा बिंदु था और उस पर ब्राउन निपल्स जैसे फ्रेश क्रीम केक के ऊपर चेरी का दाना पड़ा हो। राज ने अपनी ज़ुबान मुंह से बाहर निकाली और जीभ की नोक से चेरी को यानी कि मिनी के निपल्स को छेड़ने लगा। जैसे ही राज की जीभ की नोक ने मिनी के निप्पल को छुआ उसके शरीर में करंट दौड़ गया, उसका शरीर बीच से दोहरा हुआ कमर हवा में ऊपर उठ गई और मम्मे भी उसी हिसाब से ऊपर आ गए और सिर पीछे की ओर झुक गया। मिनी के ऊपर उठी कमर के नीचे राज ने हाथ दिया और उसके ऊपर लेट कर मिनी के निपल्स पर ज़ुबान से छेड़ने लगा। जैसे ही निपल्स से जीभ लगती मिनी की एक सिसकी निकलती और वो अपनी हर सिसकी पर मेजर पवन सिंघ की ओर देखती ऐसा न हो कि वे उठ जाए। लेकिन हर बार उसे मेजर पवन सिंघ जोरदार खर्राटे मारता हुआ नज़र आता।


मेजर पवन सिंघ की नींद पूरी रेजिमेंट में मशहूर थी सब जानते थे कि मेजर पवन सिंघ एक बार सो जाये तो अपनी नींद पूरी किए बिना उसकी आंख नहीं खुलती और यह बात कैप्टन राज और मिनी अच्छी तरह से जानते थे इसीलिए वे बेखौफ होकर एक दूसरे के शरीर से अपनी गर्मी मिटाने में लगे हुए थे। 5 मिनट तक मिनी के मम्मों को चूसने के बाद कैप्टन राज मिनी के बल खाते पेट पर अपनी जीभ फेरता हुआ उसकी नाभि तक ले आया और फिर अपनी जीभ की नोक मिनी की नाभि में घुमाने लगा जिससे मिनी को अजीब सा मज़ा मिलने लगा। मिनी इस मज़े से बिल्कुल अनभिज्ञ थी। उसकी सिसकियों में अधिक वृद्धि हो गई थी मगर उसकी आह आह आह, ऊच ऊच च च, बंद, उफ़ उम उम आवाज ट्रेन की छक छक में कहीं गुम हो रही थीं। नाभि से होता हुआ अब राज मिनी की नाभि से नीचे मिनी के शरीर को चूस रहा था जिससे मिनी की बेताबी और बढ़ने लगी थी 

तो राज ने मिनी की जींस के बटन खोल कर उसकी ज़िप खोली तो मिनी ने तुरंत ही अपने चूतड़ हवा में उठाकर राज को जीन्स उतारने की दावत दे डाली। राज ने भी बिना समय बर्बाद किए मिनी की जीन्स पूरी उतार दी। मिनी की लाल रंग की पैन्टी चूत के ऊपर से गहरे लाल रंग की हो रही थी जिसका मतलब था कि मिनी की चूत से निकलने वाला पानी मिनी की पैन्टी को काफी देर से गीला कर रहा था। राज ने मिनी की गीली पेंट देखते ही अपनी ज़ुबान को उसकी पैन्टी पर रख दिया और उस जगह पर अपनी जीभ फेरना शुरू की, लाल रंग की पैन्टी उसके गोरे बदन पर क़यामत ढा रही थी उसके पतले पतले पैर बालों से मुक्त थाईज़ और थाईज़ की मस्त चिकनाई राज की प्यास को और बढ़ा रहे थे। राज ने जैसे ही अपनी ज़ुबान मिनी की पैन्टी पर रखी उसने एक बार अपनी टांगों को खोला और फिर राज के सिर को बीच में लेकर दबा लिया कुछ देर राज मिनी की चूत को पैंटी के ऊपर से ही चूसता रहा और फिर उसने पीछे हटकर मिनी की पैन्टी भी उतार दी। 

पैन्टी उतरते ही मिनी ने अपनी चूत को दोनों हाथों से छुपा लिया, उसकी आँखों में शरारत थी, राज ने उसकी ओर देखा और बोला अपनी इस प्यारी सी चूत को चूमने नहीं दोगी क्या ??? तो मिनी ने कहा ये चूत इतनी आम नहीं कि हर किसी को दिखाई जाए
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06-07-2017, 02:21 PM,
#28
RE: वतन तेरे हम लाडले
.... इस पर राज बोला हर किसी को नहीं मैं तो तुम्हारा सबसे अच्छा दोस्त हूँ और अच्छे दोस्त को चूत दिखाने में कोई हर्ज नहीं। यह सुनकर मिनी ने अपने हाथ चूत से हटाए और चूत राज के सामने कर दी जैसे उस पर कोई एहसान कर रही हो। राज ने मिनी की चूत के होंठ देखे जो आपस में मिले हुए थे और बालों से मुक्त थे, उसकी चूत का दाना भी नजर नहीं आ रहा था, राज नीचे झुका और अपनी ज़ुबान मिनी की अनछुई चूत के लबों के बीच रख दी जिससे मिनी के शरीर में एक करंट दौड़ गया और उसने अपनी दोनों टाँगें राज की गर्दन के आसपास लपेट दी राज ने भी जी भर कर मिनी की कुंवारी चूत को खाया और खूब चूसा, कुछ ही देर के बाद पुरस्कार के रूप में मिनी की चूत ने राज की सेवा से खुश होकर गरमगरम सिरप निकाल दिया जिसको राज बिना रुके पीता चला गया। 

अब राज पीछे हटा और दूसरी साइड वाली बर्थ पर लेट कर मिनी को अपने पास आने को कहा, मिनी बर्थ से उठी और राज की ओर आने लगी राज ने उसके गोल गोल सुडौल मम्मे देखे जो चलने से हिल रहे थे मगर बिना ब्रा के भी उसके मम्मे नीचे नहीं लुढ़के थे बल्कि ऊपर को उठे हुए आपस में जुड़े हुए अब भी काफी सुंदर क्लीवेज़ बना रहे थे। इस समय मिनी किसी अजंता की संगमरमर की मूर्ति लग रही थी मिनी राज के ऊपर झुकी और उसके निपल्स पर अपनी जीभ फेरने लगी जबकि राज अपना हाथ मिनी के पीछे ले गया और उसके नरम और भरे हुए चूतड़ों को दबाने लगा। राज ने मिनी का एक हाथ पकड़ा और अपने लंड के ऊपर रख दिया। मिनी को जब अपना हाथ लोहे की तरह कठोर लंड पर पड़ता लगा तो उसने फटी फटी आँखों सेराज की पैंट को देखा जहां राज के लंड की बनावट काफी स्पष्ट दिख रही थी। इतना बड़ा लंड देखकर मिनी की आँखों में डर के आसार दिखने लगे वह समझ गई थी कि आज उसकी कुंवारी चूत की खैर नहीं। 

राज ने मिनी को कहा ऐसे क्या देख रही हो चलो पेंट उतारो और कुलफी चूसो। मिनी राज की बात सुन कर मुस्कुराई और पेंट उतारते हुए बोली ठंडी ठंडी कल्फ़ी तो बहुत बार चूसी है आज देखते हैं कि आग से भरी कल्फ़ी कैसी होती है जैसे ही मिनी ने राज की पेंट उतारी राज का 8 इंच का लंड एक स्प्रिंग की तरह खड़ा होकर बाहर निकल आया। राज ने नीचे अंडर वेअर नहीं पहना था।

अभी राज की पेंट घुटनों तक ही उतरी थी कि मिनी राज के लंड का आकार देखकर उसी को देखती रह गई। राज ने पूछा ऐसे क्या देख रही हो ?? तो मिनी ने कहा यह तो बहुत बड़ा है। मुझे बहुत दुख होगा। राज ने मिनी को सांत्वना देते हुए कहा चिंता मत करो सब के लंड इतने ही होते हैं और लंड हर लड़की की चूत में जाता है केवल पहली बार तकलीफ होती है बाद में तो बहुत मज़ा मिलता है। मगर मिनी ने कहा नहीं मेरी दीदी ने बताया कि उनके पति का लंड बस 5 इंच ही लंबा है और मोटाई में एक इंच है जबकि तुम्हारा लंड 7 से 8 इंच लंबा और 2 इंच मोटा है ... 

राज ने कहा मेरी जान तुम चिंता मत करो कुछ नहीं होगा बहुत मज़ा आएगा तुम्हें। यह कह कर राज ने मिनी से कहा चलो अब अपनी कुल्फि को चूसो, मिनी ने राज के लंड को पकड़ा और उसकी टोपी पर अपनी जीभ की नोक फेरने लगी। मिनी की ज़ुबान को राज के लंड की टोपी से नमकीन पानी निकलता महसूस हुआ, मिनी ज़ुबान मुंह में वापस डाल कर उसके स्वाद को महसूस करने लगी तो राज ने पूछा कैसा स्वाद है मेरी जान ??? 

मिनी बोली काफी अजीब स्वाद है, लेकिन अच्छा है। यह कह कर वह फिर राज के लंड के ऊपर झुकी और उसकी टोपी पर अपनी जीभ फेरने लगी। फिर वो अपनी ज़ुबान राज के लंड पर फेरते हुए उसकी जड़ तक ले गई और वहां से फिर ज़ुबान ऊपर से फेरना शुरू की। कुछ देर ऐसे करने के बाद अब मिनी ने अपने नरम और गरम होंठ राज के लंड पर रखे और उसको चूमने लगी, पहले लंड की टोपी को चूमा फिर पुर लंड पर अपने होंठ फेरने लगी। राज को यह सब बहुत अच्छा लग रहा था। अब मिनी ने अपना मुँह खोला और राज की टोपी मुँह में लेकर उस पर अपनी ज़ुबान फेरने लगी तो मिनी ने राज के लंड को अपने मुँह में और अधिक अंदर किया और राज के लंड की चुसाइ लगाने लगी। मिनी का चुसाइ लगाने का यह पहला अनुभव था मगर वह अश्लील फिल्मों में काफी बार चुसाइ होते हुए देख चुकी थी इसलिए वह इसी तरह लंड की चुसाइ लगा रही थी जैसे उसने फिल्मों में देखा था। कुछ देर जब वह राज के लंड की चुसाइ कर चुकी तो राज अपनी जगह से उठ कर बैठ गया और मिनी को बर्थ पर लेटने को कहा। मिनी बर्थ पर लेट गई और अपनी टाँगें खोल दी

वह चुदाई के लिए तैयार थी मगर राज ने मिनी के पैर वापस मिला दिए और उसके पेट के ऊपर अपनी टाँगें फैला कर बैठ गया। मिनी ने पूछा यह क्या? तो राज बोला तुम्हारी चूत से पहले तुम्हारे इन नरम नरम मम्मों की चुदाई करना चाहता हूँ। मिनी ने मम्मों की चुदाई भी फिल्मों में देख रखी थी और उसके मम्मे थे भी चोदने लायक। मिनी ने राज के लंड को पकड़ा और उसको अपने दोनों बूब्स के बीच फंसा कर अपने बूब्स को दोनों हाथों से पकड़ कर और करीब कर लिया जिससे राज का लंड मिनी के नरम नरम मम्मों के अंदर फंस गया। अब राज ने धक्के लगाने शुरू किए तो उसका लंड मिनी के मम्मों में फंसने लगा। मिनी ने मम्मों से लंड निकाला और एक बार मुंह में लेकर उस पर अच्छी तरह थूक दिया तो फिर से उसने अपने बूब्स के बीच राज का लंड रखा और मम्मों को आपस में जकड़ कर पकड़ लिया। अब की बार राज ने धक्के लगाए तो लंड गीला होने के कारण धाराप्रवाह से मिनी के मम्मों में धक्के लगाने लगा।

राज को मिनी के नरम नरम मम्मों का एहसास बहुत अच्छा लग रहा था और उसका मन कर रहा था कि इन्हीं मम्मों को चोदता चोदता वह अपना वीर्य निकाल दे। मिनी भी बहुत मजे के साथ अपने मम्मे चुदवा रही थी वह बड़े शौक़ से लंड को अपने बूब्स से निकलता हुआ देखती और फिर तुरंत ही लंड वापस मिनी के मम्मों की क्लीवेज़ से नीचे जाता हुआ उसके मम्मों में गुम हो जाता। कुछ देर ऐसे ही मिनी के मम्मों को चोदने के बाद राज ने मिनी को बर्थ पर बिठाया और खुद खड़ा हो गया और फिर मिनी के मम्मों की चुदाई शुरू कर दी। मिनी भी नजरें झुकाए मम्मों से लंड निकलना और फिर से वापस गायब हो जाना बहुत शौक से देख रही थी। पहले मम्मों से टोपी निकलती हुई नज़र आती और फिर आधा लंड बाहर निकल आता जो मिनी की गर्दन के पास आकर वापस चला जाता। 
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06-07-2017, 02:21 PM,
#29
RE: वतन तेरे हम लाडले
राज 3 मिनट तक ऐसे ही मिनी के मम्मों को चोदता रहा अब उसके मम्मों के बीच वाली जगह लाल हो चुकी थी। अब राज ने मिनी केमम्मों को छोड़ा और उसे फिर से लेटने को कहा। मिनी फिर लेट गई तो राज ने अपने लंड की टोपी मिनी की चूत पर रखी और उसको जोर जोर से चूत पर मारने लगा। जिससे मिनी की उत्सुकता और लंड की मांग और बढ़ने लगी। उसके साथ साथ मिनी की चूत ने थोड़ा-थोड़ा पानी भी छोड़ना शुरू कर दिया जो अब कैप्टन राज की टोपी से लग चुका था। 

जब राज ने देखा कि अब मिनी चुदाई के लिए पूरी तरह से तैयार है तो उसने मिनी को बताया कि अपने दोनों हाथ अपने मुंह पर रख ले। मिनी समझ गई कि उसकी कुंवारी चूत में विस्फोट का समय आ गया है। उसने अपने दोनों हाथों को अपने मुंह पर रख कर जोर से दबा दिया और इंतजार करने लगी कि कब उसकी चूत से खून की धार निकलती है और उसकी कुंवारी चूत कली से फूल बनती है। राज ने अपना एक घुटना बर्थ पर रखा और मिनी की एक टांग उठाकर अपने कन्धे पर रखी और लंड को चूत के ऊपर रख कर अपने हाथ से मिनी की चूत के होंठ खोल कर उनके बीच लंड की टोपी फँसाई और फिर एक धक्का जो मारा राज ने मिनी का पूरा शरीर हिल कर रह गया और उसके मुंह से एक जोरदार चीख निकली, तो उसने अपने मुंह को हाथ से दबा कर न रखा होता तो उसकी ये चीख वास्तव में ऊपर सोए हुए मेजर पवन सिंघ को नींद से उठा देती। मगर ऐसा नहीं हुआ। लेकिन मिनी की आंखों में आंसू थे। और वह दर्द भरी नज़रों से राज को देख रही थी। 

राज जानता था कि अगर इस अवसर पर मिनी पर दया की तो उसको आगे आने वाला मज़ा नहीं दे सकेगा इसलिए उसने मिनी के आँसू की परवाह किए बिना एक और धक्का मारा तो मिनी को लगा जैसे लोहे की गर्म रॉड उसके शरीर में प्रवेश होकर उसको चीरती हुई आगे निकल गई हो। कैप्टन राज के लंड का करीब 6 इंच हिस्सा मिनी की चूत में गायब हो चुका था। और मिनी की एक दिलख़राश चीख ने पूरे डब्बे को हिलाकर रख दिया था। यह तो शुक्र था कि पूरा कंपार्टनमनट खाली था अन्यथा अन्य लोगों तक मिनी की यह दिलख़राश चीख जरूर जाती। अलबत्ता इस चीख से ऊपर लेटे मेजर पवन सिंघ की नींद में इतना खलल जरूर पड़ा कि उन्होंने एक बार अपने कान में उंगली फेरी और करवट लेकर दूसरी ओर मुंह करके फिर से खर्राटे लेने लगे। 

नीचे राज मिनी के ऊपर झुक कर उसके होंठों को चूस रहा था ताकि उसका दर्द कुछ कम किया जा सके। मगर वह अपने लंड को बिल्कुल भी हरकत नहीं दे रहा था। मिनी की आंखों से निकलने वाले आंसू राज ने अपने होठों से पी लिए थे। काफी देर राज मिनी के होंठ चूसता रहा और जब मिनी के चेहरे पर परेशानी के आसार कुछ कम हुए तो नीचे कप्तान राज ने अपने लंड को धीरे धीरे गति देना शुरू किया वह कोई एक इंच के करीब लंड बाहर निकालता और फिर आहिस्ता से इतना ही लंड वापस अंदर डाल देता 


5 मिनट तक इसी तरह चुदाई करने के बाद अब मिनी की थोड़ी थोड़ी सिसकियाँ शुरू हो गईं थीं जिसका मतलब था कि अब उसको लंड की हरकत से मज़ा आने लगा है। अब राज ने अपने कूल्हों को थोड़ा तेज तेज हिलाना शुरू किया तो मिनी की सिसकियों में भी इजाफा होने लगा, जब कि उसको अभी भी तकलीफ हो रही थी मगर इस असुविधा के साथ मिलने वाला मज़ा भी कुछ कम नहीं था। 

अब कैप्टन राज सीधा बैठ कर मिनी के दोनों पैरों को फैलाकर उसकी टाइट योनी को स्पीड के साथ धक्के लगा रहा था जिससे कभी मिनी के मुंह से चीख निकलती तो कभी वह आह आह, ऊच, उम उम उम उम की आवाज़ें निकालने लगती। राज का 8 इंच लंड अपनी तेज गति से मिनी की चूत में जा रहा था। थोड़ी देर इसी तरह धक्के लगाने के बाद अब राज ने मिनी को खड़ा होने को कहा, मिनी खड़ी हो गई तो राज ने उसे बोला कि ऊपर वाली बर्थ पकड़ कर खड़ी हो जाए और गांड मेरी तरफ कर ले, मिनी ने ऐसे ही किया, जिस बर्थ पर मेजर पवन सिंघ सो रहा था मिनी ने इस बर्थ पर अपने हाथ जमा लिए और अपनी पीठ राज की ओर कर के गांड बाहर निकाल कर खड़ी हो गई राज ने मिनी को पैर खोलने को कहा तो मिनी ने अपनी टाँगें चौड़ी की, राज ने अपना एक हाथ मिनी के पेट के आसपास किया और दूसरे हाथ से लंड को पकड़ कर मिनी की चूत पर रख दिया और धीरे धीरे दबाव बढ़ाने लगा।

चूत गीली होने के कारण लंड धीरे धीरे चूत के अंदर फिसलता हुआ उतर गया। जब पूरा लंड मिनी की चूत में चला गया तो राज ने एक बार फिर पीछे से धक्के लगाने शुरू किए जिससे मिनी के मम्मे हवा में नृत्य करने लगे। राज ने जेली की तरह हिलते हुए मम्मों को अपने हाथों से पकड़ लिया और उन्हें दबाने लगा और इस दौरान उसने अपने धक्कों की गति में वृद्धि कर दी मिनी की चूत एक बार पहले पानी छोड़ चुकी थी और फिर उसे अपनी चूत में पानी जमा होता लग रहा था, जब राज ने अपने धक्कों का पांचवां गियर लगाया तो कुछ ही मिनटों में ही मिनी चूत ने राज के लंड पर अपनी पकड़ मज़बूत कर ली और उसके लंड जोर से दबाया और साथ ही चूत की दीवारों से पानी बहने लगा। टाइट चूत में फंसे लंड से जब गरम पानी गिरा तो उसने भी जवाब देना उचित समझा और अपनी टोपी से गरम धारें मारना शुरू कर दी 

अचानक दरवाजे पर दस्तक हुई तो मिनी होश आया, राज के साथ होने वाली यह पहली चुदाई याद करके मिनी का हाथ उसकी सलवार में जा चुका था और वह अपनी चूत सहला रही थी, लेकिन दरवाजे पर दस्तक ने उसको विचारों की दुनिया से बाहर निकाला तो उसे होश आया कि वह इस समय राज के साथ नहीं बल्कि अपने कमरे में अकेली राज के लंड याद कर कर के अपनी चूत को तंग कर रही थी।
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06-07-2017, 02:22 PM,
#30
RE: वतन तेरे हम लाडले
अमजद के पुराने ठिकाने पर जैसे ही कर्नल इरफ़ान टीम पहुंची उन्होंने सबसे पहले उस घर को घेर लिया और कमांडो कार्रवाई करते हुए पहले अंदर बेहोश करने वाली गैस राउंड फायर किए और फिर दीवारों को फलाँगते हुए अंदर चले गए, बारी बारी दोनों कमरों की ओर फिर किचन की तलाशी लेने पर भी जब उन्हें कोई व्यक्ति न मिला तो उन्होंने कर्नल इरफ़ान को सूचना दी कि वो लोग यहाँ से निकल चुके हैं। कर्नल इरफ़ान जो बाहर मौजूद कारों में ही एक कार में ही मौजूद था वह अब खुद घर के अंदर प्रवेश किया और खुद को सांत्वना देने के लिए एक बार फिर से घर की तलाशी ली मगर वहाँ कोई होता तो मिलता। फिर कर्नल इरफ़ान ने वहां मौजूद कुछ राइफल्स को अपने कब्जे में लिया और अपने जवानों को कहा इन राइफल्स के साथ आधुनिक हथियार भी जोड़ दो और मीडिया को बुलवाकर वीडियो बनवाओ कि ये आधुनिक हथियार आतंकवादियों के ठिकाने से मिले है। 

उसके बाद कर्नल इरफ़ान बाहर आ गया और सेटलाइट फोन के माध्यम से त्वरित संपर्क के लिए अपनी आईटी टीम को फोन किया जो पहले ही बेल पर रिसीव हो गया, कर्नल इरफ़ान ने अपनी आईटी टीम को वही मोबाइल नंबर ट्रेस आउट करने को कहा जो कुछ देर पहले समीरा के पास था, कर्नल की टीम ने महज कुछ मिनटों में नंबर ट्रेस कर लिया और कर्नल को बताया कि आपकी लोकेशन से मात्र 5 किमी आगे वो फोन एक कच्चे घर के पास मौजूद है। और नंबर भी ऑनलाइन है। कर्नल ने अपने विशेष टेबलेट पर जीपीएस के माध्यम से मोबाइल नंबर की लोकेशन मंगवाई और अपनी टीम को लेकर आगे चल पड़ा। कुछ ही दूर जाकर इरफ़ान ने जब अपने टैबलेट की स्क्रीन पर देखा तो अब इसमें एक लाल रंग की लाइट ब्लिंक कर रही थी जिसका मतलब था कि कर्नल अब मेजर राज से 2 किलोमीटर ही दूर है। और टेबलेट पर यह दूरी लगातार कम हो रही थी अंततः हरी लाइट जो कर्नल को अपनी लोकेशन बता रही थी और लाल रंग की लाइट जो मेजर राज की लोकेशन होनी चाहिए थी अब एक दूसरे के ऊपर आ गई थीं। यहाँ एक छोटा सा घर था जो मिट्टी की दीवारों से बना था और शायद इसमें एक ही कमरा था, 

कर्नल इरफ़ान के आदेश पर सभी गाड़ियों ने इस घर के चारों ओर घेरा डाल लिया और फिर कोमा वाली गैस राउंड फायर किए और कमांडो कार्रवाई के विशेषज्ञ जवानों ने मुखौटा चढ़ाकर कच्चे मकान पर धावा बोल दिया।मात्र 2 मिनट के बाद कमांडो बाहर निकले तो उनके हाथ में ही मोबाइल फोन था। कर्नल को जब कमांडो ने मोबाइल लाकर दिया तो उसने गुस्से से मोबाइल जमीन पर दे मारा। उसका विश्वास था कि अब मेजर राज मिलेगा लेकिन वह यहां भी कर्नल चकमा दे गया था। अब कर्नल इरफ़ान ने अपने काफिले को तेजी के साथ आगे बढ़ने को कहा। अब कर्नल का काफिला कुछ ही आगे बढ़ा था कि उसे एक फोन कॉल आई यह कॉल सीआईडी के एसीपी की थी। उसने कर्नल इरफ़ान को बताया कि कुछ ही देर पहले राज मार्ग नंबर 6 पर एक नीले रंग की मारुति से 2 लोग रिलायंस गैस स्टेशन की दुकान पर खरीदारी करने आए थे जिनमें एक सिख था जबकि दूसरा व्यक्ति बड़ी मूंछों वाला सफेद सलवार कमीज में था। 

सिख दुकानदार से बातें करता रहा, जबकि दूसरे व्यक्ति ने वहां से रस के 8 डिब्बे और चिप्स के कुछ पैकेट खरीदे और जाते हुए दुकानदार का मोबाइल चोरी कर लिया। दुकानदार ने उस व्यक्ति के जाने के बाद जब अपना मोबाइल उठाना चाहा तो वह वहां मौजूद नहीं था। दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे की मदद से दुकानदार ने देख लिया कि उसका मोबाइल इसी व्यक्ति ने उठाया है जो कुछ ही देर पहले उसकी दुकान में मौजूद था और फिर पेट्रोल डलवा कर वहां से नीले रंग की मारुति में निकल गए। लेकिन अंधेरा होने के कारण गाड़ी का नंबर वह नोट नहीं कर सका और न ही कोई कैमरा उस जगह मौजूद था, जो कार का नंबर नोट करता है। 
यह सूचना मिलते ही कर्नल इरफ़ान ने सीआईडी को आदेश दिया कि वह जामनगर से मुल्तान और लाहोर जाने वाले सभी रास्तों पर अपने लोगों को हाई अलर्ट कर और जहां भी यह सिख और बड़ी मूंछों वाला व्यक्ति दिखे उसको तत्काल गिरफ्तार कर लिया जाए। उसके साथ साथ दुकान वाले के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज भी कर्नल इरफ़ान ने माँगा ली और उसका मोबाइल नंबर भी मंगवाया। कर्नल को कुछ ही देर में फुटेज और नंबर प्राप्त हो गए। नंबर कर्नल इरफ़ान ने आईटी टीम को दिया जोकि अब बंद था और ट्रेस नहीं हो पा रहा था, लेकिन उसकी अंतिम लोकेशन अब से कोई 20 मिनट पहले जामनगर बाईपास रोड पर थी जहां एक सड़क लाहोर से जबकि एक सड़क मुल्तान की ओर जाती थी। तीसरी सड़क पाकिस्तान के बड़े शहर इस्लामाबाद की ओर जाती थी मगर वह यहां से बहुत दूर था इसलिये इस बात की संभावना कम थी कि मेजर राज और उसके साथी इस्लामाबाद जाएंगे। 

ये निर्देश देकर कर्नल इरफ़ान ने अपने स्मार्ट फोन में प्राप्त वीडियो देखी जिसमें मेजर राज बड़ी-बड़ी मूंछों के साथ मैकअप में था और खरीददारी कर रहा था। जब मेजर राज बिलिंग के लिए अमजद के पास आया तो यहां वह कैमरे के ठीक सामने और बहुत करीब था, कर्नल इरफ़ान ने उसे पहचान लिया कि यह मेजर राज ही है जिसने हुलिया चेंज कर रखा है लेकिन अमजद से वह परिचित नहीं था कि यह व्यक्ति कौन है। अब कर्नल ने अपनी टीम को तुरंत वापसी का आदेश दिया और जामनगर बाईपास रोड की तरफ जाने लगा। कर्नल ने अपनी एक टीम को बाईपास रोड से लाहोर जाने वाले रास्ते से भेज दिया और खुद मुल्तान जाने वाले रास्ते पर चल दिया, जहां से कुछ देर पहले ही मेजर राज और अमजद के साथ अलग बसों में बैठकर मुल्तान की ओर रवाना हुए थे। कर्नल इरफ़ान को पूरा विश्वास था कि अब की बार वह मेजर राज को पकड़ लेगा और वह कर्नल के हाथों से बच नहीं पाएगा। 

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समीरा अपनी सीट पर बिल्कुल चुपचाप बैठी थी जबकि राज कर्नल इरफ़ान के बारे में सोच रहा था कि अब उस घर में मेजर राज को न पाकर और मोबाइल तक पहुंच कर जो मेजर ने कार से बाहर फेंका था कर्नल इरफ़ान की अगली रणनीति क्या हो सकती है ?? बस भी धीमी गति से अपनी मंजिल की ओर दौड़ रही थी। मेजर राज संतुष्ट था कि उसके पास अब कुछ समय है मुल्तान जाकर ही अब वह कर्नल इरफ़ान के बारे में सोचेगा। 

अब मेजर ने अपना ध्यान चुप बैठी समीरा की ओर किया और उससे पूछा कि वह कब से अमजद और उसकी टीम के साथ काम कर रही है ??? तो समीरा ने बताया कि वह अमजद की मुँह भूली बहन है और बचपन से ही देखा है कि पाकिस्तानी सेना ने किस तरह सिंधी लोगो पर अत्याचार कितने किए। समीरा ने बताया कि उसका संबंध सिंध से है और वहाँ उनका पूरा परिवार पाकिस्तानी आर्मी के अत्याचार की भेंट चढ़ गया। तब से अमजद ने मुजाहिदीन के साथ मिलकर पाकिस्तानी आर्मी के खिलाफ जिहाद शुरू किया और अब पिछले 3 साल से वह पाकिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में पाकिस्तानी सेना को निशाना बनाते हैं और पीड़ित लोगों के अत्याचार का बदला लेते हैं। 

मेजर राज ने पूछा कि तुम्हारी उम्र क्या है तो समीरा ने बताया कि वह 20 साल की है और पिछले 10 साल से अमजद के साथ है। पहले वह बच्ची थी तो अमजद के लिए जासूसी का काम करती थी पाकिस्तानी पुलिस के लोग बच्ची समझ कर थाने में भी आने देते थे और अपनी चौकियों तक भी पहुँच देते थे समीरा को, समीरा उनके लिए चाय बनाकर ले जाती और एक चाय का कप 5 रुपये में बेचती। लेकिन उसका मूल उद्देश्य अमजद के लिए जासूसी करना होता था। 

राज ने समीरा के सीने पर नज़र डालकर मन ही मन में सोचा कि 20 साल की उम्र में ही समीरा के मम्मे काफी जबरदस्त हैं, लगता है जैसे किसी 28 साल की पकी उम्र वाली महिला के मम्मे हों फिर मेजर राज ने समीरा से पूछा कि वह पढ़ी लिखी है तो समीरा ने बताया कि उमरकोट में वह पांचवीं कक्षा तक पढ़ सकी थी उसके बाद स्कूल छोड़ दिया मगर अमजद के साथियों में कुछ पाकिस्तान से आए हुए पढ़े लिखे लोग थे जो अमजद और उसके साथियों को पढ़ाते थे। उनकी पढ़ाई का उद्देश्य स्कूल कॉलेज की डिग्री नहीं बल्कि अमजद के साथियों को इस योग्य बनाना था कि वह किसी भी उच्च स्तर प्रोफ़ाइल से मिलें तो उसे यह महसूस न हो कि वह किसी अजनबी से बात कर रहा है। और फिर समीरा ने 3 साल पहले पाकिस्तान के एक कॉलेज में एडमिशन लिया था जहां वह अपनी पढ़ाई पूरी कर रही थी। यहां भी समीरा का उद्देश्य डिग्री के बजाय अपने आप को समाज के साथ अप-टू-डेट रखना था, कंप्यूटर शिक्षा और विशेषज्ञता के साथ समीरा को मोबाइल प्रौद्योगिकी का भी शौक था। यह बात सुनकर राज ने कहा वैसे आप को मोबाइल प्रौद्योगिकी का शौक है और इतना नहीं पता कि दुश्मन के इलाके में भारतीयकैदी को छुड़ाने आई हो और साथ अपना मोबाइल भी लाई हो .... यह कहते हुए मेजर राज के चेहरे पर मुस्कान थी, समीरा उसकी बात सुनकर लज्जित हुई और बोली मुझे पता नहीं था कि कर्नल इरफ़ान इतना तेज होगा। मेजर राज ने समीरा को कहा वह कर्नल कोई साधारण सैनिक नहीं, मेजर होकर इस बात को समझ गया तो वह तो मुझसे बहुत अधिक बुद्धिमान और शातिर व्यक्ति है उसके साथ आईएसआई का सक्रिय सदस्य भी है वह। अगर वह चाहे तो इस दुकान वाले मोबाइल से हमारा पता लगा सकता है। .. 


इस बात के बाद राज कुछ पल मौन हुआ और फिर तुरंत ही उसके ज़हन में ख़तरे की घंटी बजी। जो बात अब उसने समीरा को कही थी वह पहले वह खुद क्यों नहीं सोची ??? फिर मेजर राज ने अपने ज़हन पर ज़ोर दिया तो उसे याद आया कि दुकान में सुरक्षा कैमरा भी मौजूद थे तो वास्तव में मेजर राज का चेहरा नजर आया होगा। यह सोचते ही मेजर राज ने समीरा पूछा कि बस स्टॉप कहां होगा तो समीरा ने बताया कि बस कुछ ही दूर जाकर एक छोटा सा कस्बा आएगा वहां बस कुछ मिनट के लिए रुकेगी. मेजर ने समीरा से कहा बस फिर स्टॉप पर उतरने के लिए तैयार हो जाओ और जूस के डिब्बे और अन्य खाद्य वस्तुए समीरा को पकड़ा दीं उसके बाद मेजर ने समीरा को कहा कि वह कंडेक्टर से टिकट के पैसे वापस लेने की कोशिश करता है ताकि अगर आगे जाकर बस की तलाशी ली जाए और बस की इनवेसटीगेशन हो तो उसको किसी प्रकार का संदेह नहीं होगा राज और समीरा पर। क्योंकि आम लोग ही किराए के लिए लड़ाई करते हैं जबकि इस तरह के गुप्त एजेंसी के लोग तो पैसा पानी की तरह बहाते हैं। मेजर राज अपनी सीट से उठने ही लगा था कि समीरा ने उसको हाथ से पकड़ कर वापस खींच लिया। 

मेजर राज झटके से वापस बैठा तो उसका दायाँ हाथ समीरा के सीने पर लगा और उसे समीरा के नरम नरम मम्मों का स्पर्श महसूस हुआ। समीरा ने भी शायद इस बात को महसूस कर लिया था मगर उसने तुरंत ही इस बात को इग्नोर करते हुए राज को कहा तुम बैठो मैं बात करती हूँ। मेजर ने पूछा क्यों क्या हुआ है ?? तो समीरा ने उससे पूछा, क्या तुम्हें सिंधी बोली आती है ???

मेजर राज ने न में सिर हिलाया तो समीरा ने कहा इसलिए कह रही हूँ मुझे बात करने दो ताकि उसे लगे हम सिंध के ही रहने वाले हैं। इस तरह बिल्कुल भी संदेह नहीं होगा। अब पहली बार मेजर राज ने समीरा को प्रशंसा नज़रों से देखा और समीरा आगे जाकर बस वाले से कहने लगी कि हमें अगले स्टॉप पर उतार दो मेरी तबीयत खराब है मैं यहाँ मौसी के घर रुकूंगी, मगर हमारा टिकट मुल्तान तक का है तो हमें बाकी किराया वापस कर दो। 

समीरा यह सब बातें सिंधी में कर रही थी, राज दूर बैठा उसकी बोली को समझने की कोशिश कर रहा था, कुछ बातों का मतलब राज को समझ में आया लेकिन कुछ बातें उसके सिर के ऊपर से गुजर गई। थोड़ी सी तकरार के बाद समीरा आधा कराया वापस लेने में सफल हो गई और इतने में बस स्टॉप भी आ गया। मेजर राज और समीरा बस स्टॉप पर उतर गए। मेजर ने पहले बस स्टॉप पर मौजूद शौचालय का इस्तेमाल किया और अपनी मूंछें उतार ने साथ साथ अपना मुँह भी पानी से अच्छी तरह धोया ताकि मेकअप उतर सके जो सरमद ने किया था। अब राज अपने मूल हुलिए में था और काफी तरोताज़ा लग रहा था। मुंह धोने के बाद राज वापस निकला तो दूसरी ओर जामनगर जाने वाली बस खड़ी थी। मेजर राज समीरा का हाथ पकड़ कर उस बस के पास गया और 2 टिकट जामनगर के लेकर बस में सवार हो गया। 

समीरा ने परेशान नज़रों से पूछा कि हमें तो मुल्तान जाना है, मुझे और तुम बस बदलना चाहते हो, परंतु यह वापसी क्यों ??? राज ने समीरा से कहा क्योंकि अगर हमने वापसी की यात्रा ना की तो मुल्तान जाने वाली हर बस की तलाशी होगी और कर्नल इरफ़ान के आदमी मुझे ब आसानी पकड़ लेंगे जबकि जामनगर जाने वाली बसों की तलाशी नहीं होगी क्योंकि कर्नल इरफ़ान के अनुसार हम लोग जामनगर छोड़कर बाहर किसी शहर की ओर जा रहे हैं इसलिये केवल जामनगर से बाहर जाने वाली बसों की तलाशी होगी। इस पर समीरा ने कहा मगर कर्नल इरफ़ान को हमारे बारे में कैसे पता होगा कि हम मुल्तान जा रहे हैं और कार के बजाय बस में हैं ?? मेजर राज ने समीरा को घूरते हुए देखा और बोला क्योंकि वह कर्नल इरफ़ान है, समीरा नहीं। यह कह कर मेजर राज एक सीट पर बैठ गया, और समीरा भी उसके आगे से होती हुई उसके साथ वाली सीट पर बैठ गई। जब समीरा मेजर राज के आगे से गुजरी तो उसकी टाइट पैंट में से समीरा के चूतड़ स्पष्ट नजर आ रहे थे, पेंट टाइट और नितंबों बड़े हों तो वह किसी भी आदमी को दीवाना बना देते हैं। मेजर राज के लिए भी यह एक पल का नज़ारा पागल करने के लिए पर्याप्त था। इससे पहले कि मेजर राज समीरा के चूतड़ों को ध्यानपूर्वक देखता समीरा अपनी सीट पर बैठ चुकी थी और राज दिल ही दिल में समीरा की खूबसूरती का कायल हो गया था। 

जामनगर वापस जाते हुए समीरा और अमजद ने देखा कि उनकी बस के पास से वाहनों का एक काफिला तेजी से गुजरा है जो मुल्तान की ओर जा रहा था। यह वही काफिला था जिसने अमजद पुराने ठिकाने पर हमला किया था। कारवां गुज़र गया तो राज ने समीरा को संबोधित करते हुए कहा, देख लो, मैंने कहा था न कि कर्नल इरफ़ान कोई मामूली आदमी नहीं उसकी खोपड़ी में शैतान का मन है। उसे पता लग गया कि हम मुल्तान जा रहे हैं। अब प्रार्थना करो अमजद उनके हाथ न लगे, क्योंकि वह उसी कार में जा रहे हैं जिस कार पता कर्नल इरफ़ान ने लगाया है। यह सुनकर समीरा परेशान हो गई और अमजद और बाकी दोनों की सुरक्षा की दुआएं मांगने लगी। 

कोई 30 मिनट के बाद समीरा और राज जामनगर बस स्टेशन पर उतर गए और पैदल ही चलते हुए बस स्टैंड से दूर एक साइड पर जाने लगे जहां कुछ चहल पहल थी। रात का 1 बजने वाला था मगर जामनगर में अब भी चहल पहल थी और बाजार जीवन किसी न किसी हद तक चल रहा था। चलते चलते अचानक मेजर राज ने समीरा से पूछा कि अब हम कहां जाएंगे ??? तो समीरा भी सोच में पड़ गई कि जामनगर में इस ठिकाने के अलावा हमारे पास और कोई ठिकाना नहीं था और हो सकता है वहाँ अब भी जासूस मौजूद हों राज ने कहा कहा कि हां वहां तो हम नहीं जा सकते और कोई जगह ढूँढनी होगी। अब समीरा और राज दोनों ही सोच में गुम थे। मेजर राज ने पहले एक होटल में रहने का सोचा लेकिन फिर यह सोच कर अपना इरादा त्याग दिया कि शायद कर्नल इरफ़ान ने सभी होटल्स में राज की फोटो दे रखी हो और वह जैसे ही होटल में जाए होटल प्रशासन कर्नल इरफ़ान को उसकी सूचना दे दें । 

अब राज यही सोच रहा था कि समीरा बोली यहां से थोड़ी ही दूर एक डांस क्लब है जो सारी रात खुला रहता है। वहाँ जाते हैं। मेजर राज ने समीरा को ध्यान से देखा और बोला तुम्हें पता भी है कि डांस क्लब का माहौल कैसा होता है ??? इस पर समीरा ने कहा कि जासूसी का काम भी करती हूँ, और ऐसे डांस क्लब में अक्सर पाकिस्तानी आर्मी के कुत्ते भी आते हैं महिलाओं के शरीर का मज़ा लेने तो मैं मखतफ डांस क्लब में न केवल जासूसी कर चुकी हूँ बल्कि यहां के एक डांस क्लब में बतौर डांसर भी परफॉर्म कर चुकी हूँ .... मेजर राज ने फटी फटी आँखों से समीरा की तरफ देखा और बोला तुम और डांसर ???? तो समीरा ने कहां हां इसमें ऐसी कौन सी बात है? जासूसी करने के लिए यह सब करना ही पड़ता है। फिर समीरा बोली बल्कि ऐसा करते हैं इसी डांस क्लब में चलते हैं जहां डांसर हूँ, वहाँ का प्रबंधक मुझे जानता भी है, वह हमें बिना शक किए रात बिताने के लिए कमरा भी दे देगा और हमारी रात भी आराम से गुजर जाएगी .. .. 

मेजर राज ने समीरा की ओर शरारती नज़रों से देखा और बोला तो तुम्हारा कहने का मतलब है कि तुम और मैं एक ही कमरे में सोएँगे ??? समीरा ने मेजर की बात मानते हुए कहा हां ... और केवल सोएँगे और किसी चीज की उम्मीद नहीं रखना। लेकिन प्रबंधक के सामने आप यही शो करना है कि तुम मेरे प्रेमी हो और हम "प्यार" के उद्देश्य के लिए यहां आए हैं। मेजर राज ने अंजान बनते हुए कहा कौन से उद्देश्य के लिए ?? समीरा ने गुस्से से मेजर को देखा और बोली वैसे तो तुम्हें हर बात समझ आ जाती है कर्नल इरफ़ान क्या करेगा किधर जाएगा यह भी समझ आ जाती है, मेरी बात समझ क्यों नहीं आई तुम्हें ???

समीरा की यह बात सुनकर मेजर खिलखिला कर हंस पड़ा और बोला अच्छा बाबा ठीक हैं गुस्सा क्यों करती हो। चलो चलें। मगर मेरी शर्त है कि आज रात में तुम्हारा डांस देखूंगा। समीरा बोली हां ठीक है वैसे भी हमारे पास पैसे कम हैं प्रबंधक से कुछ पैसे अग्रिम मांगू तो वह दे देगा मगर इसी शर्त पर होगा कि आज रात वहाँ डांस करूं। ... 

कुछ ही देर में समीरा और मेजर राज एक लोकल ढाबे के सामने मौजूद थे जहां पान सिगरेट और कोल्डड्रिंक आदि उपलब्ध थीं। समीरा ढाबे वाले के पास गई और उससे पूछा कि सिक्सी आया है आज? ढाबे वाले ने समीरा के बड़े मम्मों की समीक्षा करते हुए कहा हां आया हुआ है। और आज बड़े लोग आए हैं अगर पैसे चाहिए तो आज एक गर्म डांस कर दे। यह सुनकर समीरा राज का हाथ पकड़े ठाबे की एक साइड पर गई जहां कई वाहन खड़े थे और सामने ही एक गेट मौजूद था। हर तरफ अंधेरा था। समीरा ने गेट खोला और सीधे अंदर चली गई, मेजर राज भी उसके पीछे पीछे चला गया। अब उन्हें हल्के हल्के संगीत की आवाज सुनाई दे रही थी। जैसे-जैसे मेजर समीरा के पीछे अंदर जा रहा था संगीत की आवाज तेज होती जा रही थी। फिर समीरा ने एक कमरा खोला और मेजर को अंदर ले गई। अंदर विभिन्न टेबल लगी हुई थी जहां पुरुष और महिलाए कुर्सियों पर बैठे थे। पुरुषों की संख्या अधिक थी महिला 5 से 6 ही थीं। मगर वो शरीर से ही आवारा किस्म की महिला लग रही थीं जो अपने किसी आशिक के पास रात बताने आई हो। 

समीरा ने मेजर राज को एक कुर्सी पर बैठने को कहा और बोली प्रबंधक से मिलने जा रही हूँ तुम यहीं रहो और किसी से ज्यादा बात करने की जरूरत नहीं बस चुप कर के सामने मौजूद लड़कियों का डांस देखते रहो।मेजर ने ठीक है कहा और समीरा उसी दरवाजे से वापस चली गई जिस दरवाजे से आई थी। अब मेजर सामने मौजूद मंच की तरफ देखने लगा जहां दो डानसरशीला की जवानी पर बहुत ही सेक्सी डांस कर रही थीं। हाफ डीप नेक ब्लाऊज़ पहने वो डाँसर कभी अपना लक हिलाती तो कभी अपने मम्मे हिला हिला कर सामने बैठे लोगों को सेक्सी लुक दे रही थीं। राज अपनी जगह से उठा और थोड़ा आगे जाकर बैठ गया जहां से वो डांसर्स के शरीर का सही तरह निरीक्षण कर सके। दोनों डांसर का रंग गोरा था और मम्मे कम से कम भी 38 के थे। जब वह आगे झुक कर अपने मम्मे हिलाती तो हॉल में मौजूद सभी पुरुष सीटियाँ बजाते।

मेजर के साथ उसी टेबल पर एक और पुरुष भी बैठा था जिसने काफी पी रखी थी और वह बार बार एक डांसर की ओर फलाईनग किस उछाल रहा था। अब गाना चेंज हो गया था और सलमान खान की फिल्म का मशहूर गाना मुन्नी बदनाम हुई चल रहा था। इस पर भी दोनों डानसरज़ का शरीर थिरकने लगा था। कुछ देर बाद एक डांसर जिसने लाल रंग का ब्लाऊज़ पहन रखा था, लेकिन यह ब्लाऊज़ कम और ब्रा अधिक था जिसमे से उसके 38 आकार के मम्मों का ज्यादातर हिस्सा दिख रहा था अपना बदन हिलाती हुई वो डाँसर मंच से नीचे उतर आई मेजर राज की टेबल पर बैठे एक अन्य व्यक्ति के सामने आकर डांस करने लगी, उसने अपनी पीठ व्यक्ति की ओर की और नितंबों को बाहर निकालकर उन्हें हिलाने लगी, उस व्यक्ति ने डांसर के चूतड़ों पर एक चमाट मारी और अपनी जेब से अपना बटुआ निकालकर उसमें से कुछ पैसे निकाले और डांसर के स्कर्ट में पैसे फंसा दिए। 
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