Sex kahani अधूरी हसरतें
04-02-2020, 05:09 PM,
RE: Sex kahani अधूरी हसरतें
उसकी उखड़ती सांसे अभी दुरुस्त हुई भी नहीं थी कि शुभम के इस हमले की वजह से वह पूरी तरह से धरा साई हो गई,,, सुभम बड़े चाव से सुगंधा के मदनरस को चटाके लगाकर उसका मजा ले रहा था,,,, कुछ ही देर में शुभम सुगंधा की पूरी हुई कचोरी को चाट चाट कर सुगंधा को मस्त कर दिया और पूरे कमरे में ऊसकी गरम सिसकारी की आवाज गूंजने लगी,,, सुगंधा को आज ही ज्ञात हुआ था कि मर्द औरतों की बुर को भी चाटते हैं और उसमे औरतों का ही भला होता है,,,, उत्तेजना के मारे सुगंधा अपने दोनों हाथों से शुभम के बालों को पकड़ कर अपनी बुर पर दबाए हुए थी,,, सुगंधा के द्वारा यह हरकत कैसे हो गई, यह खुद सुगंधा को भी नहीं पता था। लेकिन जो भी हो रहा था उसमें सुगंधाको बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी वह लगातार शुभम के बालों को भींचते हुए उसके मुंह का अपनी जांघों के बीच दबाए हुए थी,,, और गरम सिसकारी लेते हुए वह बोले जा रही थी,

ओहहहहहह,,,,, मेरे राजा यह क्या कर रहे हो मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि तुम मेरी बुर चाट रहे हो। बहुत मजा आ रहा है बस ऐसे ही चाटते रहो,,,,आहहहहहहहह,,,, सससससहहहहहहह,,,, और जोर से अंदर तक जीभ डालकर चाटो,,,,, आहहहहहहहह,, आहहहहहहहहहह,,,,
( सुगंधा पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,, शुभम उसकी गरम बातें और उसकी सिसकारी की आवाज सुनकर और ज्यादा उत्तेजित हुए जा रहा था सुगंधा जैसी संस्कारी लड़की के मुंह से इस तरह की सिसकारी की आवाज तो औपचारिक तौर पर कुदरती ही थी लेकिन उसके मुंह से इतने गंदे भाषा का प्रयोग यह अजीब था लेकिन इसके पीछे का कारण खुद सुभम था जो अपने फोन पर गंदी गंदी बातें कर करके सुगंधा को पूरी तरह से खोल दिया था,,,, और उसी की वजह से आज दोनों मस्त होकर एक दूसरे को आनंद देने में लगे हुए थे शुभम पूरी तरह से फूली हुई कचोरी सामान बुर को चाट चाट कर लाल कर दिया था,,,, शुभम अपनीे बीच वाली उंगली को बुर में डाल कर अपने लंड के लिए रास्ता भी बना रहा था,,, शुभम कि उंगली का ही असर था कि वह इस समय शुभम के मोटे लंड को अपनी बुर में डलवाने के लिए तड़प रही थी,,, शुभम भी पूरी तरह से उत्तेजनाग्रस्त होकर बुर को चाटते हुए ही अपना पजामा उतार कर एकदम नंगा हो गया था,,, ऊसका लंड सुगंधा की बुर ेत में जाने के लिए तड़प रहा था,,,,
सुगंधा अपनी बुर चटवा कर पानी पानी हुएें जा रही थी।
सुहागरात के लिए फूलों से सजाया हुआ बिस्तर तितर-बितर हो चुका था,,, फुल चारों तरफ बिस्तर के नीचे गिरा पड़ा था जो कि इस बात का सबूत था कि बिस्तर पर बेहद घमासान युद्ध छीेड़ने वाला था,,, शुभम ने बुर में अपने लंड के लिए सांचा बनाने का कार्य संपूर्ण रूप से पूरा कर लिया था बस उसमे से अपने लंड को गुजारना बाकी था,, शुभम भी सुगंधा को चोदने के लिए बेस्ब्र हुए जा रहा था,, इधर उधर मजे लेकर अपने लंड को बहकाना मुश्किल हुएे जा रहा था। शुभम अच्छी तरह से जानता था कि अब उसका काम खत्म हो चुका था अब उसके लंड की बारी थी अब उसे नहीं बल्कि उसके लंड को अपना जौहर दिखाना था,,,। इसलिए वह अपना मुंह सुगंधा की पानी से तरबतर बुर पर से हटा लिया,,,, सुभम के होठो पर से सुगंधा का मदनरस टपक रहा था।,,, सुगंधा पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी चुदवाने की प्यास उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी।
शुभम बिस्तर पर से नीचे खड़ा हो गया,, नीचे खड़े होने का उद्देश्य मात्र इतना था कि वह सुगंधा को अपने मजबूत खड़े लंड के दर्शन कराना चाहता था,,, ताकि वहां उसके खड़े मोटे लंबे लंड को जिंदगी भर याद रखें क्योंकि आज नहीं तो कल उसे अपने पत्नी पति के लंड से चूदना ही था,,, और तब वह जब अपने पति के छोटे पतले लंड से चुदेगी तब वह ऊसके मोटे लंड को याद करके अपनी बुर गीली करे।,,, शुभम ठीक उसके बिस्तर के करीब खड़े होकर अपने लंड को हिलाते हुए बोला,,,

सुगंधा मेरी जान यह तुम्हारे लिए है,,,, यही लंड तुम्हारी बुर में जाएगा,,, लेकिन अपनी बुर में लेने से पहले थोड़ा इसे प्यार करो ताकि यह और अच्छे से तुम्हारी चुदाई कर सके,,,

( सुगंधा शुभम की बात सुनकर उसकी तरफ देखने लगी तो उसकी नजर उसके मोटे खड़े लंड पर पड़ी,,,, और वह उसे देखती ही रह गई लालटेन की रोशनी में शुभम का चेहरा तो साफ नजर नहीं आ रहा था लेकिन उसका मोटा खड़ा लंड साफ नजर आ रहा था जो कि छत की तरफ मुंह उठाए खड़ा था उसकी लंबाई और मोटाई देखकर सुगंधा डर के मारे सी हर गई उसके मुंह से कुछ भी नहीं निकल रहा था वह बस उसे देखे जा रही थी,,, देखती ही रह गई और शुभम नीचे की तरफ झुककर अपने मोटे लंड को उसके होठों पर रगड़ना शुरू कर दिया,,, सुगंधा कुछ समझ पातेी इससे पहले ही एक हाथ उसकी नंगी चुचियों पर रख कर के दबाना शुरू कर दिया जिसकी वजह से सुगंधा की तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी और उसके होंठ हल्के से खुल गए जिसकी वजह से शुभम ने चालाकी दिखाते हुए अपने लंड के सुपारी को उसके होठों के बीच प्रवेश करा दिया,,, सुगंधा को यह नहीं मालूम था कि यह क्या हो रहा है लेकिन फोन पर शुभम ने इस बारे में भी उसे बताया था इसलिए उसे इतना तो मालूम ही था कि जिस तरह से मर्द. औरतो की बुर को चाट कर खुद मजा लेते हैं और उन्हें भी मजा देते हैं उसी तरह से औरत लोग भी मर्दों के लिंग को मुंह में लेकर चूसते हुए खुद भी मजा लेती है और उन्हें भी मजा देती है। इसलिए सुगंधा भी इनकार ना करते हुए लंड़के सुपाड़े को मुंह में भरली,,, लेकिन उसे यह नहीं मालूम था कि क्या करना है कैसे करना है इसलिए शुभम उसकी चूची को दबाते हुए बोला,,,

मेरी जान अभी से तुम जैसे लॉलीपॉप मुंह में भर कर चुसते हैं उसी तरह चुसो तो तुम्हें भी बहुत मजा आएगा और मुझे भी,,,

सुगंधा के तनबदन मै कामाग्नि पूरी तरह से अपना असर दिखा रही थी। इसलिए वह शुभम की हर बात को मानने के लिए तैयार थी क्योंकि इसमें उसे भी मजा आ रहा था इसलिए वह लॉलीपॉप की तरह ही उसके लंड के सुपाड़े को चाटना शुरू कर दी। पहले तो उसका स्वाद उसे बड़ा अजीब लगा लेकिन जैसे-जैसे लंड के सुपाडे की गोलाई को अपने मुंह के अंदर महसूस करने लगी वैसे वैसे उसे चाटकर ऊसका मजा दुगना बढ़ता जा रहा था,,,, शुभम भी सुगंधा के इस तरह के लंड चाटने की वजह से पूरी तरह से चुदवासा हो चुका था,,, कुछ देर तक लंड चटवाने के बाद वह सुगंधा की जांघों के बीच अपनी जगह बना लिया,,,, शुभम को अपनी बुर की सरहद पर हथियार लेकर तैनात होता हुआ देखकर सुगंधा का दिल जोरों से धड़कने लगा वह शुभम के मोटे लंबे हथियार की वजह से डर का अनुभव कर रही थी उसका दिल जोरों से धड़क रहा था उसके बदन में कसमसाहट बढ़ती जा रही थी,,, लेकिन शुभम के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए उत्सुकता भी बढ़ती जा रही थी,, डर और चुदासपन का मिलाजुला मिश्रण उसके चेहरे पर नजर आ रहा था। तभी शुभम मोर्चा संभालते हुए अपने हथियार को सुगंधा की फुली हुई कचोरी के बीचोबीच रख दिया,,, मोटे लंड के सुपाड़े की गर्माहट को अपनी बुर पर महसूस करते हीैं खुशी के मारे उत्तेजना बस सुगंधा की बुर से नमकीन रस बुंद बन कर चुने लगी,,, सुगंधा की सांस अटक रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि शुभम का इतना मोटा लंड उसकी बूर में जाएगा कैसे,,,

लेकिन वह नहीं जानती थी कि अब तक ना जाने कितनी औरतों को अपने लंड की सवारी से अपने लंड का उन्हें दीवाना बना चुका सुभम ऊसकी बुर को चाटते हुए ही अपनी उंगली के सहारे उसकी बुर में अपने लंड के लिए जगह बना लिया था,,,, सुगंधा धड़कते दिल के साथ शुभम की अगली हरकत का इंतजार कर रही थी,,
सुभम भी ऊसकी बुर में लंड डालने के लिए तैयार हो चुका था वह लंड के सुपाड़े को बुर की लकीरों पर रगड़ते हुए धीरे से उसे अंदर की तरफ सरकाना शुरू किया,,, सुगंधा डर के मारे अपनी आंखों को बंद कर ली,, बुर गीली होने की वजह से शुभम का मोटा लंड धीरे धीरे अंदर की तरफ सरक रहा था,,, जैसे-जैसे वह अंदर की तरफ सरक रहा था वैसे वैसे सुगंधा के सांसों की गति तेज होती जा रही थी,,,, धीरे-धीरे करके शुभम ने अपने लंड की मोटे सुपाड़े को बुर की गहराई में उतार दिया,,, सुपाड़े को अंदर घुसते ही सुभम का काम आसान हो गया,,,, वह समझ गया कि थोड़े से ही प्रयास में उसका पूरा लंड बुर की गहराई में होगा,,, इसलिए वह इस बार सुगंधा की मोटी मोटी जांघों को पकड़कर हल्के से अपनी कमर को झटका दिया,,, और इस बार गीलेपन की वजह से शुभम का आधा लंड बुर की गहराई में घुस गया,,,,, आधे किले को शुभम फतेह कर लिया था,,,, लेकिन इस आधे किले को फतेह करने में सुगंधा तितर-बितर हुए जा रही थी शुभम के मोटे लंड को अपने दिल की गहराई में महसुस करके वह दर्द से बिलबिलाने लगी,,, उसे जिसका डर था वही हो रहा था उसे बेहद दर्द की अनुभूति हो रही थी अपने दांतों को दबाकर अपने दर्द को दबाने की कोशिश कर रही थी लेकिन यह उसके बस में बिल्कुल भी नहीं था जब उससे रहा नहीं गया तो वह सुभम से बोली,,,,।

आहहहहहहहह,,,,,, मुझे बहुत दर्द हो रहा है प्लीज इसे निकाल लो मैं नहीं कर पाऊंगी मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है प्लीज मुझ पर रहम करो,,,,
( शुभम जानता था कि यह क्षण भर का ही दर्द है इसके बाद तो मजा ही मजा है,,, इसलिए वह ऊसे समझाते हुए बोला।)

सुगंधा मेरी रानी बस थोड़ा सा सहन कर ले उसके बाद तुम्हें बहुत मजा आएगा,,,

नहीं मुझसे नहीं होगा बिल्कुल भी नहीं होगा मुझे नहीं मालूम था इतना दर्द होगा मुझ से बर्दाश्त नहीं हो रहा है तुम्हारा लंड भी बहुत मोटा है,,,।
( सुगंधा के मुंह से दर्द के मारे लंड शब्द निकल गया जिसकी वजह से उस शब्द पर ध्यान जाते ही वह शरमा गई और यही सही मौका शुभम को लगा और वह झुक कर सुगंधा की चूचियों को बारी-बारी से दबाते हुए उसे मुंह में भर कर पीने लगा,,,, शुभम सुगंधा का ध्यान दर्द पर से हटाना चाहता था कुछ देर तक यूं ही अपने लंड को सुगंधा की बुर में डाले हुए उसकी चूचियों को चूस चूस कर सुगंधाको मजा देने लगा और कुछ भी देखने सुगंधा को भी मजा आने लगा,,, दर्द से कराने की आवाज की जगह उसके मुंह से सिसकारी की आवाज आने लगी थी,, शुभम मौका देखते हुए आधे लंड को ही बुर के अंदर बाहर करते हुए चोदने लगा,,,, कुछ ही देर में सुगंधा को मजा आने लगा।,, शुभम का आधा लंड भी सुगंधा के लिए पूरे लंड के बराबर था, शुभम हल्के हल्के धक्के लगाते हुए सुगंधा को चोदने लगा, साथ ही दोनों चूचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर पी भी रहा था,,, ईससे सुगंधा का मजा दुगना होता जा रहा था,,, बुर में हो रहा दर्द छूमंतर हो चुका था और उसकी जगह,, बुर में मीठी मीठी चुभन होना शुरू हो गया था जो कि उसको अथाग आनंद की अनुभूति करा रहा था।
शुभम बहुत चालाक हो चुका था उसे मालूम था कि औरतों के साथ कब क्या करना है, वह अपना पूरा लंड
सुगंधा की बुर में नहीं डाल रहा था उसे मालूम था कि ऐसा करने पर उसे फिर से बहुत ज्यादा दर्द होने लगेगा और वह फिर से उसे मना करने लगेगी,, इसलिए वह उसे बातों में उलझा ते हुए बोला,,,।

कैसा लग रहा है मेरी जान,,,

सससहहहहह,,,,, बहुत अच्छा लग रहा है,,,( शिसकारी लेते हुए बोली,,)

मेरा लंड तुम्हारी बुर के अंदर महसुस तो हो रहा है ना तुम्हें,,,,


हां बहुत अच्छे से महसूस हो रहा है मुझे कोई यकीन नहीं हो रहा है कि मैं यह काम कर रही हूं,,,,।


ऐसा क्यों महसुस कर रही हो ( सुभम हल्के धक्के लगाते हुए बोला।)


क्योंकि मैं कभी सोच ही नहीं थी कि मैं इस तरह से तुम्हारे सामने आऊंगी,,,,
( सुगंधा शरमाते हुए बोली,,, शुभम उसके हाव-भाव देखकर समझ गया कि वो खुलकर नहीं बोल पा रही है और वह जानता था कि पूरा लंड उसकी बुर में उतारने के लिए उसका खुलना बेहद जरूरी है इसलिए वह बोला,,,)

ओहहहहहह,,,, सुगंधा मेरी जान शर्माओ मत जो भी है खुल कर बोलो खुलकर बोलोगी तभी हम दोनों ठीक तरह से अच्छे से मजे ले पाएंगे पर यह तो हमें जिंदगी भर करना है,ईसलिए शरमाने से कोई फायदा नहीं है।,,
बोलो जो भी बोलना है (शुभम दोनों चूचियों को मुट्ठी में भर कर भेजते हुए बोला जिससे सुगंधा की उत्तेजना बढ़ रही थी,,, शुभम की गजब की चुदाई और उसके हाथों की हरकतों से मस्त हो रही है सुगंधा समझ गई कि उसके लिए भी शर्म करना फुल कर मजा लेने में अवरोध पैदा कर रहा है इसलिए वह खुलकर बताते हुए बोली,, लेकिन वह कुछ बोलती ईससे पहले ही,,, शुभम के मोटे लंड की रगड़ को अपनी बुर की अंदरुनी दीवारों पर महसूस करके वह मस्त हाेने लगी और सिसकारी लेते हुए बोली,,,।

सससहहहहहहह,,,,,, आहहहहहहहहह,,,, सच कहुं,,, तो,,, मुझे इस बात का अंदाजा ही नहीं था कि चुद़वाने में इतना मजा आता है,,, इस बात का एहसास मुझे इस समय ही हो रहा है कि वास्तव में नारी का जीवन मर्द के बिना अधूरा है,,,, बस ऐसे ही करते रहो मुझे बहुत मजा आ रहा है।,,सससससहहहहहह,,,,,,, ऊमममममममममन,,,,,,,

सुगंधा बेहद मादक भरी पिचकारी भर रही थी और उसकी गरम सिसकारी को देखते हुए शुभम को यही सही मौका लगा अपना पूरा का पूरा लंड बुर की गहराई में उतारने के लिए,, और वह ईस बार पूरी तरह से अपनी बाहों में भर लिया और उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भरकर चूसते हुए अपनी कमर को इतना जोरदार से झटका दिया कि इस बार उसका पूरा मोटा लंड सुगंधा की बुर की अंदरूनी दीवारों को फैलाते हुए गहराई में उतर गया,,, सुगंधा से सुभम का यह झटका बर्दाश्त नहीं हुआ और वह दर्द के मारे जोर से चीखने ही वाली थी कि पहले से ही तैयार शुभम पागलों की तरह उसके होठों को चूसने लगा,,,, वह जोर से सीखना चाहती थी चिल्लाना चाहती थी क्योंकि उससे दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था लेकिन सुबह मुझे करके अपनी बाहों में जकड़े हुए उसके होठों को चूस रहा था जिसकी वजह से वह चीख नहीं पा रही थी,, तुरंत कुछ देर तक ऐसे ही उसके ऊपर लेटा रहा और उसके होठो को चूसता रहा,,वह सुगंधा की तरफ से होने वाली हरकत का इंतजार कर रहा था इसलिए वह अपने आप पर कंट्रोल रखते हुए अपने पूरे लंड को ऊसकी बुर की गहराई में डालकर होठों का रसपान करता रहा और कुछ देर बाद ही होठो की चूसाई की वजह से सुगंधा फिर से गर्म होने लगी और शुभम का साथ देते हुए उसके होठों को चूसना शुरू कर दी,,, शुभम समझ गया के लोहा गरम हो चुका है अब वार करना चाहिए,,, और वह माहौल को देखते हुए धीरे-धीरे अपनी कमर को ऊपर-नीचे करते हुए सुगंधा को चोदना शुरू कर दिया थोड़ी ही देर में पूरे कमरे में सुगंधा की सिसकारी की आवाज गूंजने लगी सुगंधाको बेहद आनंद की प्राप्ति होने लगी कुछ देर पहले दर्द से बिलबिला रही सुगंधा अब मस्ती भरी आंहें भर रही थी। फच्च फच्च की आवाज से पूरा कमरा गुंजरहा था। शुभम धीरे धीरे धीरे अपनी रफ्तार को बढ़ाना शुरू कर दिया,,, दोनों पागलों की तरह एक दूसरे में समाने के लिए जी जान लगा दे रहे थे,,। दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे। थोड़ी ही देर में घमासान युद्ध का अंत होने वाला था शुभम सुगंधा के गुलाबी होठों का रसपान करते हुए दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को दबाते हुए अपने लंड को उसकी बुर में पेले जा रहा था।,,, थोड़ी ही देर में सुगंधा का बदन अककने लगा,,, उस का स्खलन होने वाला था,, शुभम भी बिल्कुल करीब में ही था जोर जोर से धक्के लगाते हुए अगले पल ही वह झड़ने लगा सुगंधा भी अपना काम रस बहाने लगे दोनों एक दूसरे को कसके अपनी बाहों में भींचे हुए थे। सुगंधा अपनी सुहागरात को संतुष्टि पूर्वक मना चुकी थी,, शुभम अपने इरादे में कामयाब हो चुका था। सुगंधा के गुप्त द्वार को जिसके द्वारा खोलना था वह खेतों में पागलों की तरह पड़ा था,,, और जो सिर्फ उस द्वार को खोलने की इच्छा रखता था,,, वहीं आज उस द्वार में अपनी चाबी घुमा रहा था।

04-02-2020, 05:09 PM,
RE: Sex kahani अधूरी हसरतें
सुगंधा और शुभम दोनों बिस्तर पर लेटे हुए थे। सुगंधा जिंदगी की अपनी पहली चुदाई की वजह से एकदम खा चुकी थी पेट के बल लेटी हुई थी परंतु संपूर्ण रूप से नंगी ही थी शुभम अपनी कामयाबी पर प्रसन्न हो रहा था। वह मन में सोच रहा था कि अब उसे चले जाना चाहिए क्योंकि,,, सुगंधा काफी थक चुकी थी और उसकी आंख लग रही थी और वैसे भी यहां ज्यादा देर तक रुकना उसके लिए ठीक नहीं था किसी भी वक्त उसका छोटा मामा आ सकता था।,,, वह बिस्तर पर से उतरने वाला था की तभी उसकी निगाह फिर से नंगी लेटी हुई सुगंधा की गोलाकार नितंबो पर पड़ गई जो की लालटेन की रोशनी में चमक रही थी। हम अपनी लालच को रोक नहीं पाया और उसकी गोरी गोरी गांड को सहलाने लगा,,, बुझी हुई आग में अभी भी चिंगारी बाकी थी और यह चिंगारी तो मादकता से भरी हुई थी जो कि बहुत ही जल्दी आग पकड़ दी थी और ठीक वैसा ही हुआ शुभम के सहलाने के साथ साथ ही शुभम सुगंधा की गोरी गोरी गांड की वजह से एक बार फिर से उत्तेजित होने लगा,, और बेसुध सो रही सुगंधा को अपने हाथों से पीठ के बल लेटा कर उसकी दोनों टांगों को फेलाया और एक बार फिर से सुगंधा से एकाकार हो गया,,,, शुभम सुहागरात मनाते हुए सुगंधा को 3 बार चोदा और कमरे से बाहर निकल गया सुगंधा पूरी तरह से थक चुकी थी इसलिए गहरी नींद में सो रही थी काफी देर के बाद शुभम का मामा अपने शयनकछ मे पहुंचा तो काफी अंधेरा था वह लालटेन की रोशनी को थोड़ी सी बढ़ा दिया तो कमरे में उजाला ही उजाला हो गय उसकी नजर बिस्तर पर पड़ी तो,

उसकी नजर बिस्तर पर पड़ी तो बिस्तर का नजारा देखकर एकदम भौचक्का रह गया। बिस्तर पर उसकी पत्नी बिल्कुल नंगी लेटी हुई थी पेट के बल लेटी होने की वजह से उसकी चिकनी मखमली पीठ और उसकी गोल गोल गांड साफ नजर आ रही थी जिंदगी में पहली बार वह किसी औरत को नंगी देख रहा था वह अपनी बीवी के नंगे पन की खूबसूरती को देखकर एकदम सन्न रह गया। वह मन ही मन इतनी खूबसूरत बीवी पाकर प्रसन्न हुए जा रहा था, उसके बुद्धू पन का यही सबसे बड़ा सबूत था कि,, सुगंधाको इस तरह से नंगी बिस्तर पर लेटे रहने पर उसकी खूबसूरती से प्रसन्न हो रहा था ना कि उसे इस बात की हैरानी हो रही थी कि अपनी बीवी को सुहागरात के दिन उसकी गैर हाजिरी में इस तरह से संपूर्ण रूप से नंगी होकर लेटने की क्या जरूरत थीै इस बारे में तो वह सोच ही नहीं रहा था बिस्तर के नीचे उसके सारे कपड़े पड़े हुए थे उसकी साड़ी ब्लाउज ब्रा उसकी पेंटी,, बिस्तर तितर बितर हुआ था चादर पर सिलवटें पड़ी हुई थी लेकिन क्यों पड़ी हुई थी इतना सोच सके उसमे इतना दिमाग ही नहीं था,,, ऊसके बिखरे हुए बाल उसके होठों पर की लाली जोकी फीकी पड़ चुकी थी दरवाजा खुला हुआ था,,,, लेकिन वह ऐसा क्यों हुआ है इस बारे में बिल्कुल भी सोच नहीं रहा था। वह बस सु्गंधा को एक टक देखे जा रहा था। सुगंधा की खूबसूरत बदन के उतार-चढ़ाव को देख कर उसके बदन में ना जाने कैसी हलचल होने लगी,,,, सुगंधा के बदन का एक एक कटाव उसे अपनी तरफ आकर्षित कर रहा था।,,, उत्तेजना कौन हो रहा था लेकिन क्या करना है उसे कुछ समझ में भी नहीं आ रहा था,,,,। अगर उसकी जगह कोई और मर्द होता है तो अब तक सुगंधा पर चढ़ाई कर चुका था लेकिन वह खामोश नजरों से ढेर सारी मन मे खलबली लिए सुगंधा के नग्न बदन का दर्शन करता रहा,,,। उसकी जगह कोई और शख्स होता तो अपनी सुहागरात के दिन पत्नी को युं अकेले ही सुहाग की सेज पर नंगी लेटे हुए देखता और बिस्तर के इर्द-गिर्द गिरे हुए उसके कपड़ों को देखता तो मैं समझ जाता कि उसकी पीठ पीछे सुहागरात के दिन उसके ही शयनकछ में क्या हुआ है,,,, लेकिन वह सुगंधाको नींद से जगाने की भी तस्ती ना लेते हुए,,,, कुछ देर तक यूं ही देखता रहा और सुगंधा से थोड़ी दूरी बनाकर वहीं सो गया,,
दरवाजे पर हो रही दस्तक की आवाज सुनकर सुगंधा की नींद टूटी तो बंद खिड़की में से आ रही हल्की हल्की धूप को देखकर वह चौक गई क्योंकि समय काफी हो गया था,, बाहर उसकी भतीजी कोमल इतनी देर हो जाने की वजह से जगा रही थी,,,,,

चाची ओ चाची अरे अभी तक सो रही हो नीचे सब तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं जल्दी से नहा कर आ जाओ,,,,

आई,,,,,,, ( इतना कहते हुए सुगंधा हर बढ़ाते हुए बिस्तर से नीचे उतर गई वह अभी भी नींद के झोंके मे हीं थी,, वह लपक कर दरवाजे की तरफ जा रही थी,, लेकिन तभी उसे थोड़ा अजीब सा लगा तो वह अपने बदन पर नजर दौड़ाई तो एकदम से हक्की बक्की रह गई,,, वह एकदम से चौंक गई,,, सुबह संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में थी,,। एकदम नंगी अपने आप को देख कर वह शर्म से पानी-पानी हो गई,,, कमरे में नजर दौड़ाई तो बिस्तर के इर्द-गिर्द में ऊसके कपड़े गिरे पड़े थे। चारों तरफ बस उसके ही कपड़े बिखरे पड़े थे फर्श पर गिरी अपनी पैंटी और ब्रा को देखकर वह एकदम से शर्मिंदा हो गई वह अपनी हालत पर शरमाते हुए मन ही मन अपने आप को ही कोसते हुए बुदबुदाने लगी,,, उसे रात का सारा वाक्या याद आने लगा,, वह कभी सोची भी नहीं थी कि वाह यह सब इतनी आसानी से कर लेगी तभी,, उसे याद आया कि रात को उसके पति ने तीन बार उसकी चुदाई किया था,,, वह तो थक कर चूर हो चुकी थी,,,, इसलिए बेसुध होकर बिना कपड़े पहने ही सो गई थी,,,, कभी उनकी नजर बिस्तर पर पड़ी तो वह करीब जाते हुए बोली,,,,

यह महाशय को देखो,,, खुद कपड़े पहन कर सो गए और मुझे ऐसे ही नंगी लेटे रहने दीए,,,, अभी बताती हूं,,,।

सुनिए,,,, सुनिए कितनी सुबह हो गई है और आप अभी तक सो रहे हैं,,( सुगंधा झकझोरते हुए अपने पति को जगाने लगी,,,, ईस तरह से जगाने से उसकी नींद भी खुल गई,,, लेकिन सुगंधा द्वारा लगाए जाने पर वह थोड़ा सा चौक छा गया क्योंकि पहली बार उसे कोई औरत जगा रही थी,,,, इसलिए हड़ बढ़ाते हुए बोला,,,

कककककक,,, कौन,,,,,, क्या हुआ,,,,,,

अरे मैं हूं इतना घबरा क्यों रहे हो,,,,,

ओहहहहह तुम मै तो घबरा ही गया,,,,


ओह देख रहे हो धूप निकल आई है और तुम अभी तक सो रहे हो,,,,

हां वह क्या है ना कि रात भर जगा हूं इसलिए,,,
( उसकी बात सुनकर सुगंधा शर्मा गई,,, वह कुछ और कह रहा था और सुगंधा कुछ और समझ रही थी इसलिए वह बोली,,,।)

तो सो जाना चाहिए था ना किसने कहा था रात भर जागने के लिए,,,,

क्या करूं मेरे बस में कुछ नहीं था काम ही कुछ ऐसा था कि मुझे रात भर जागना पड़ा,,,,। ( तभी उसकी नजर सुगंधा के नंगे बदन पर पड़ी तो वह ऊपर से नीचे तक उसे घूर कर देखने लगा सुगंधा को इस बात का एहसास होते ही वह एक बार फिर से शर्मा गई क्योंकि वह फिर से कपड़े पहनना भूल गई थी और जल्दी से,,, अपनी पत्नी के पीछे की तरफ जाकर जल्दी जल्दी अपने कपड़े पहनने लगी,,, और कपड़े पहनते हुए बोली,,,


आप मुझे कपड़े पहनने के लिए भी नहीं जगाए,,,

तुम सो रही थी तो तुमको जगाना ठीक नहीं समझा,,,


हां मुझे जगाना ठीक नहीं समझे और मुझे ऐसे ही सोते रहने दिए और खुद कपड़े पहन कर सो गए,,
( यह बात सुनकर उसे कुछ समझ में नहीं आया लेकिन वह कुछ बोल भी नहीं पाया एक औरत से बात करने में वह हीचकीचा रहा था,,, सुगंधा के बात करते हैं समय वहां अपनी नजरों को इधर-उधर फेर ले रहा था,,, सुंगंधा से वहां से आंख मिलाकर बात नहीं कर पा रहा था। इस बात पर लगातार सुगंधा भी कॉल कर रही थी लेकिन उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की फोन पर जिस तरह से खुली बातें कर रहा था और कल सुहागरात के बाद,,, आपस में इतना खुल जाने के बावजूद भी जिस तरह के बाद नजरें चुराकर बातें कर रहा था यह बात सुगंधा के समझ के परे थे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की एक मर्द होकर भी यह औरतों की तरह क्यों शर्मा रहा है फोन वाले पति और सुहागरात वाली पति के समानता इस समय बिल्कुल भी मैच नहीं खा रही थी। यह बात उसे बड़ी अजीब लग रही थी,,,, तभी वह नजरे नीचे झुकाए बोला,,,

तुम रात को बिना कपड़ों के ही सोती हो क्या,,,,

नहीं तो,,, मेरी आंख लग गई थी तो मैं ऐसे ही सो गई,,

तो कपड़े उतारे ही क्यों थे पहनकर सोई होती,,,

आपने ही तो उतारे थे,,,,( सुगंधा शर्म और आश्चर्य के भाव लिए हुए बोली,,,,

( सुगंधा की बात सुनकर उसे भी कुछ अजीब सा लगा लेकिन वह कुछ बोल नहीं पाया वह ना जाने क्यों सुगंधा के अस्तित्व से घबरा भी रहा था और शर्मा भी रहा था,, इसका यही कारण था कि आज तक वह किसी भी औरत के करीब नहीं किया था और ना ही किसी को अपने करीब आने दिया था,,
सुगंधा को उसका सवाल कुछ अजीब सा लग रहा था,,, तभी उसका ध्यान उसकी आवाज पर गई तो वह लगभग चौक सी गई क्योंकि उसकी आवाज फोन पर की और ना ही रात वाली आवाज से किसी भी प्रकार का मेल खा रही थी दोनों आवाज बिल्कुल अलग अलग थी सुगंधा काफी हैरान हो गई उसे किसी अनहोनी घटना की आशंका लगने लगी,,,, तभी मन में कुछ सोच ही रही थी कि तभी फिर से कोमल दरवाजे पर आकर बुलाने लगी,, व दरवाजे की तरफ बड़ी ही थी कि तभी उसका पति भी बिस्तर से खड़ा हो गया,,,, एक बार फिर से सुगंधा का माथा ठनक गया क्योंकि जिसके साथ वह अपनी सुहागरात मनाते हुए हमबिस्तर हुई थी उसकी लंबाई कुछ ज्यादा ही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है,,। उसने अभी तक शादी के मंडप से लेकर के अब तक अपने पति पर जरा भी ध्यान ही नहीं थी थी वह तो केवल फोन पर हो रही बातों के दरमियान केवल आवाज को ही पहचानती थी,,, और उसी परिचित आवाज के बदौलत ही वह अपनी सुहागरात भी बनाई थी लेकिन आप उसका माथा ठनक रहा था सब कुछ सोच कर उसे चक्कर सा अाने लगा था,,,। तभी बार-बार दरवाजे पर हो रही दस्तक की वजह से उसने दरवाजा खोल दी,,,

क्या चाची कितना समय हो गया है और आप हैं कि अभी तक सो रही हैं नीचे सब लोग आपका इंतजार कर रहे हैं,,, चाचा कहां है? ( कोमल सुगंधा की तरफ देखते हुए बोली और सुगंधा नई नवेली दुल्हन होने के नाते लंबा सा घुंघट निकाल ली थी,,, सुगंधा की तरफ देखकर कोमल कमरे में नजर दौड़ाई तो उसका चाचा भी दरवाजे की तरफ बढ़ रहा था और उसे देखते ही कोमल बोली,,,

चाचा जी जल्दी करिए पापा आपको बुला रहे हैं,,,
( इतना कहकर कोमल सुगंधा को अपने साथ ले जाने लगी सुगंधा सोचने लगी कि यह मेरा पति है तो सुहाग रात कीसके साथ मनाई,,, उसका मन बहुत घबरा रहा था उसे यह सोच कर और ज्यादा घबराहट हो रही थी कि कहीं ऐसा तो नहीं हो गया कि शादी किसी और के साथ और सुहागरात कोई और मना के गया । नहीं ऐसा नहीं हो सकता हो सकता है मेरे मन का भ्रम हीं हो,, शायद शादी के टेंशन की वजह से मेरे मन में ऐसी अजीब से ख्याल आ रहे हैं और थकान भी काफी है,,,। हे भगवान जैसा मैं सोच रही हूं ऐसा बिल्कुल भी ना हो मैं तो मैं कहीं किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रह जाऊंगी,,, सुगंधा यह सब अपने मन में ही अपने आप से बातें किए जा रही थी,,, तभी कोमल सुगंधाको बाथरूम के सामने छोड़ते हुए बोली,,,

चाची जल्दी से नहा धोकर फ्रेश हो जाओ आस पड़ोस की औरतें तुम्हें देखने आने वाली है,,
( इतना कहकर कोमल चली गई और सुगंधा भारी मन के साथ नहाने के लिए बाथरूम मे घुस गई।)
04-02-2020, 05:10 PM,
RE: Sex kahani अधूरी हसरतें
शुभम बहुत खुश था क्योंकि जो उसने चाहा उसे प्राप्त कर लिया था,,,। सुगंधा के साथ शारीरिक संबंध बनाकर
शुभम की खुशी का ठिकाना नहीं था एक अजीब सा रोमांच उसके तन बदन को झकझोर रहा था,, क्योंकि उसने किसी और के हिस्से का लड्डू खुद खा लिया था,,, और दूसरे के लड्डू को खाने में जितना मजा मिलता है उतना खुद के लड्डू खाने में मजा नहीं आता बेहद हसीन रात गुजारा था उसनें सुगंदा के साथ,, और सबसे बड़ी बात यह थी कि सुगंधाको रत्ती भर भी शक नहीं हुआ था कि वह अपने पति के साथ नहीं बल्कि अपने ही भांजे के साथ सुहागरात मनाते हुए उससे जी भर कर चुदवा रही थी।,,, लेकिन सुबह उसे थोड़ा थोड़ा शंका होने लगा कि उसके साथ कुछ गलत हुआ है उसके मन में यह बात बार-बार आ रही थी कि रात को सुहागरात मनाते समय उसके साथ उसका पति नहीं कोई और था,,, क्योंकि सुबह में उसके पति कि मनोस्थिति रात के मुताबिक कुछ संकास्पद लग रही थी।
सुगंधा नहा धोकर तैयार हो चुकी थी लेकिन अब उसका मन बिल्कुल भी नहीं लग रहा था वह बार-बार भगवान से प्रार्थना कर रही थी जैसा वह सोच रही है वैसा बिल्कुल भी ना हो वरना अनर्थ हो जाएगा,,। रात को तीन तीन बार दमदार चुदाई के बाद उसे चलने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी,,, इसलिए उसकी चाल देखकर उसकी जेठानी और उसकी भाभी निर्मला आपस में बातें करके मुस्कुरा रही थी।,,, तभी सुगंधा सबके पैर छूने लगी,, सभी औरते हंस हंस कर ऊसे आशीर्वाद दे रही थी,,। जैसे ही वह निर्मला के पैरों को छूकर आशीर्वाद लेने लगी निर्मला आशीर्वाद देते हुए बोली,,,।

खुश रहो मेरी प्यारी भाभी,,,,( रिश्ते में सुगंधा निर्मला की भाभी लगती थी लेकिन निर्मला उससे उम्र में काफी बड़ी थी उसके हिसाब से सुगंधा उसके भी पाओ छू कर आशीर्वाद लेे रही थी।) लगता है कि हमारे छोटे भाई ने रात भर तुम्हें सोने नहीं दिया है। और तभी तुम्हारी चाल भी बदल गई है,,,,।
( निर्मला की बात सुनकर सुगंधा शर्मा गई और वह इस बात पर गौर की, की वास्तव में उसकी चाल बदल गई थी वह थोड़ा लंगड़ा कर चल रही थी,,, और चाल में बदलाव आता भी पैसे नहीं जिंदगी में पहली बार तो उसकी कोरी कसी हुई बुर में इतना मोटा लंड गया था वैसे भी शुभम का लंड कुछ ज्यादा ही मौटा था,,, अब तक लंड के लिए सुगंधा तड़प रही थी और केवल कल्पना में ही लंड के दर्शन करके अपने सपने को साकार करने के ख्वाब बुन रही थी,,,, और ख्वाब हकीकत में बदला भी तो ऐसा बदला की,, शुभम के मोटे लंड से ही उद्घाटन हुआ,,,, जिसको बुर में लेकर ऐसा एहसास होता की एक साथ दो-दो लंड बुर में गोते लगा रहे हो,,, इसलिए तो सुगंधा की कशी हुई बुर का गुप्त द्वार का मुक चौड़ा हो चुका था,,, और उसमे हल्का हल्का दर्द अभी भी सुगंधाको महसूस हो रहा था इसलिए बात थोड़ा लंगड़ा कर चल रही थी,,,, रात का ख्याल आते ही उसकी तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगती लेकिन शंकाओं के बादल उसके मन में अजीब अजीब सी भावनाओं को जन्म देने लगते सुगंधा अपने विचारों से एकदम परेशान हो चुकी थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार अपनी समस्या का समाधान ढूंढे भी तो कैसे इसलिए तो वह उन लोगों की मजाक का जवाब नहीं दे पाई,,,
आस पड़ोस की औरतें,, उसको देखने के लिए आ रही थी और उसकी खूबसूरती देखकर उनकी भी आंखें चमक जा रही थी, वह लोग सुगंधा को देख कर काफी खुश थी।,, मुंह दिखाई की रस्म पूरी हो चुकी थी। घर की औरतें आपस में हंसी मजाक कर रही थी, कुछ देर के लिए सुगंधा भी अपने शंका का के घेरे में से निकल कर बाहर आ चुकी थी।,,, बगल वाले कमरे में सोनल की मम्मी कोमल की चाची आपस में बातें कर रही थी वो लोग भी काफी खुश नजर आ रहीे थी। तभी कोमल की मम्मी कोमल की चाची से धीरे से बोली,,,

मुझे तो यह बिल्कुल भी यकीन नहीं हो रहा है कि अपना बुद्धू देवर रात को इतनी धमा चौकड़ी मचा सकता है,,,देख नही रही हो सुगंधा कैसे लंगड़ा कर चल रही है,,,

हां दीदी सच कह रही हो मुझे भी बिल्कुल यकीन नहीं होता है कि छोटे देवर इस तरह की हरकत कीए होंगे वह तो लड़कियों के नाम से दूर भागते हैं और कल रात को सुगंधा के साथ,,,, नहीं दीदी मुझे भी यकीन नहीं हो रहा है लेकिन सुगंधा की हालत को देखकर यकीन करना पड़ रहा है।,,,

ऐसा भी तो हो सकता है अपने देवर ने नहीं बल्कि सुगंधा ने हीं उकसाया हो,,, वैसे भी आजकल की लड़कियों का कोई भरोसा नहीं है (इतना कह कर दोनो फिर से हंसने लगी,, लेकिन यह बात सुगंधा के कानों में पड़ चुकी थी एक बार फिर से उसका मन संका से घिरने लगा,,,, फिर से उसे रात वाली बात याद आने लगी अब तो सुगंधा के मन में शंकाओं का तूफान उठने लगा क्योंकि जिस तरह से वह दोनों बात कर रही थी उसे देखते हुए सुगंधा को भी लगने लगा कि रात को जो कुछ भी हुआ वह गलत ही हुआ है,,,। लेकिन कौन ऐसा कर सकता है कौन इतनी हिम्मत दिखा सकता है कि सुहागरात के दिन ही पूरे परिवार की मौजूदगी में दुल्हन के कमरे में जाकर बात करो उसके साथ सुहागरात मनाए राय और सुबह आराम से बाहर चला जाए,,,, यह सब मैं उसे अपनी भी गलती नजर आने लगी,,
वह मन मे सोचने लगी की काश शादी से पहले अपने पति को देख ली होती कि किससे शादी करने जा रही है,,, उसे देख लियो की समझ ली होती पहचान ली होती तो कल रात जो हुआ वह नहीं होता तभी उसे ख्याल आया कि वह तो फोन पर रोजाना उससे बातें करती थी और उसकी संख्या को मजबूत करने वाला कारण यह भी था कि कल रात भी के साथ सुहागरात मनाई थी उसकी आवाज और फोन पर की आवाज दोनों मिलती जुलती थी लेकिन सुबह जिसके साथ कमरे में थी उसकी आवाज ना तो फोन वाली आवाज से मिलती जुलती थी और ना ही रात में सुहागरात मनाने वाली आवाज से कोई मेल खा रही थी,,,, वह बैठकर यह सब सोच कर हैरान हूंए जा रही थी,, तभी उसे याद आया कि वह जब बिस्तर पर बैठी थी तभी वह शख्श कमरे में आकर लालटेन की रोशनी को चलाकी के साथ एकदम कम कर दिया था,,,और जब वह लालटेन की रोशनी को बढ़ाने जा रही थी,, तब वह कैसे कूदकर जल्दी से उसके करीब पहुंच गया था वह बड़ी ही चालाकी के साथ उसे अपनी बाहों में लेकर रोशनी को बढ़ाने से मना कर दिया था,,, यह सब सोचकर सुगंधा का शक यकीन में बदलने लगा उसे लगने लगा के रात में सुहागरात मनाने वाला शख्श उसका पति नहीं कोई और ही था,,,, तभी तो सुबह में,,, रात वाले शख्स की लंबाई और उसके पति की लंबाई में भी काफी अंतर था,,,,
अब सुगंधा का माथा ठनकने लगा,,,, यह उसके साथ क्या हो रहा है यह सोच कर ही उसे चक्कर आ रहा था,,, अगर सुहागरात मनाने वाला तक कोई और था दो उसका पति रात भर कहा था वह क्यों नहीं कमरे में आया और सुबह में कमरे में क्या कर रहा था यह सब सवालों का जवाब वह ढूंढना चाह रही थी लेकिन उसे जवाब नहीं मिल रहा था,,, तभी उसे याद आया कि फोन क्यों ना फोन करके देखें कि उठाता कौन है,,,,
वह कॉल करने के लिए उतावली हो गई लेकिन फोन वह अपने कमरे में ही छोड़ आई थी,,। और अभी इस समय वह यहां से जा नहीं सकती थी कि घर के सभी लोग मौजूद थे और सभी लोग ऊससे मिलजुल रहे थे।

शुभम अपने कमरे में आराम कर रहा था,,, बड़ी चालाकी के साथ उसने जीत हासिल किया था लगभग लगभग उसने घर की सभी औरतों की चुदाई कर चुका था और उसे इस खेल में बेहद मजा भी आ रहा था शहर में केवल वहां निर्मला के साथ ही शारीरिक संबंध बनाकर अपने आप को संतुष्ट कर पा रहा था लेकिन यहां तो रोज उसे नईं नहीं नई बुर मिल रही थी चोदने के लिए,, लेकिन सभी औरतों की अलग अलग रसीली बुर का स्वाद चखने के बावजूद भी,,, उसे आत्म संतुष्टि नहीं हो रही थी और वह जानता था कि सबसे ज्यादा आत्म संतुष्टि से कहां मिलती थी और किसके साथ मिलती थी काफी दिनों से उसने अपनी मां की बुर का स्वाद नहीं चखा था। इसलिए रोज नई नई बुर चोदने के बाद भी वह संतुष्ट नहीं था। शादी के लिए गांव आया था और शादी हो चुकी थी दो-तीन दिन बाद उसे वापस शहर जाना था। यही सब सोचते हुए वह बिस्तर पर करवट बदल रहा था उसे क्या मालूम था कि जिसके साथ वह रात को सुहागरात मनाया था,, ऊसको ईस बात की शंका हो गई थी कि उसके साथ कुछ गलत हुआ है। लेकिन इस बात से भी शुभम को कोई फर्क नहीं पड़ता था क्योंकि वह जानता था कि अगर जनता जान भी जाएगी कि उसके साथ सुहागरात मनाने वाला वह है तो भी ऊसका कुछ नहीं बिगड़ेगा क्योंकि यह बात वह घर में किसी और को बता भी नहीं सकती,,, अगर बता भी देती है तो कोई यकीन नहीं करेगा उस पर ही उंगलियां उठने लगेंगी,,, बेफिक्र होकर अपने कमरे में आराम कर रहा था और दूसरी तरफ सुगंधा इसी उधेड़बुन में लगी हुई थी कि आखिरकार रात को कमरे में कौन आया था और कौन उसकी कुंवारी इज्जत को चटखारे लगाकर चट कर गया,,,,।

शाम ढलने लगी थी सुगंधा की बेकरारी और बेचैनी दोनों बढ़ती जा रही थी क्योंकि अभी तक उसे इस बात का पता नहीं चल पाया था कि वह शख्स कौन है जिससे उसकी इज्जत लूट ले गया,,, सुबह से अभी तक उसके पति से आमना-सामना भी नहीं हुआ था,,,, उसके मन में इस बात को लेकर भी घबराहट और शंका हो रही थी कि कहीं सच में उसकी जेठानी लोग सच तो नहीं कहती हैं,,, अगर सच में ऐसा हो गया तो उसकी जवानी बर्बाद हो जाएगी यही सब सोच सोच कर उसका मन बैठा जा रहा था।,, तभी उसे ख्याल आया कि फोन करके देखु फोन कौन उठाता है,, क्योंकि इतना तो तय हो गया था कि वह चाहे कोई भी हो है घर का ही,, वो ऐसी मुसीबत में फंस चुकी थी किसी को बता भी नहीं सकती थी,,, उसे ईस समस्या का समाधान खुद ही ढूंढना था। वह अपने कमरे में जाकर तुरंत उसी नंबर पर कॉल कर दी,,,
शुभम उस समय खेतों में इधर उधर टहल रहा था फोन की स्क्रीन पर देखा तो सुगंधा का नंबर था का नंबर देखकर मुस्कुरा दिया लेकिन उठाया नहीं,,, क्योंकि ऐसा करने पर वह फंस भी सकता था। काफी देर तक यूं ही घंटी बजती रही लेकिन शुभम कॉल रिसीव नहीं किया,
तभी वह सोची कि क्यों ना पहले वाले नंबर पर फोन करके देखें,,, और जैसे ही वह पहले वाले नंबर पर फोन करने लगी तो घंटी कमरे मे ही बजने लगी

कमरे में बजरी मोबाइल की घंटी की आवाज सुनकर सुगंधा चौक गई और इधर उधर ढुढ़ने लगी,,, मोबाइल उसके पति की जेब मै बज रही थी,,, वह जल्दी से पेंट में से मोबाइल निकाली और मोबाइल देखने के लिए यह वही नंबर था जिस पर वह पहले फोन किया करती थी लेकिन सामने से कोई जवाब नहीं मिलता था। अब सब कुछ सुगंधा को समझ में आने लगा था,,,, वह अपनी किस्मत पर रोने लगी,,, उसे लगने लगा कि अब उसकी जिंदगी बर्बाद हो गई है,,, उसकी जेठानी जो बातें उसके पति के बारे में कह रही थी वह सच ही कह रही थी। क्योंकि पहले वाला फोन नंबर देख कर उसे समझ में आ गया था आजकल के लड़के वैसे भी लड़कियों से बातें करने के लिए बहाने ढूंढते रहते हैं और ऐसे में उसका पति वह फोन लगा ती थी फिर भी बात नहीं करता था।,,,, वह बिस्तर पर बैठ कर आंसू बहाने लगी,,, उसे जैसा पति चाहिए था वह दूसरे नंबर वाला जैसा होना था। वजह से पति की कामना रखती थी वैसा रात वाला था ना कि सुबह वाला। ऐसा पति चाहती थी जो कि उससे ढेर सारा प्यार करें रोमांटिक बातें करें अपनी बाहों में लेकर उसकी जवानी के रस को निचोड़ डालें ना कि ऐसा पति जो निहायती निठ्ठला हो औरतों के करीब में आता हूं और प्यार किया जाता है इस बारे में उसे कुछ भी पता ही ना हो,,, वह मन में यही सब सोचकर आंसू बहाए जा रही थी और इस बारे में पता लगाने की कोशिश कर रही थी आखिरकार उसे फोन पर बातें करने वाला शख्स और उसके साथ सुहागरात मनाने वाला वह है कौन? वैसा मन में सोच रही थी कि तभी कोमल फिर आ गई उसे बुलाने के लिए क्योंकि खाने का समय हो गया था,,,।
सब लोग खाना खाने बैठे थे औरतें कमरे के अंदर खा रही थी और मर्द लोग कमरे के बाहर खाना खा रहे थे निर्मला भी खाना खाने बैठी थी लेकिन शुभम नहीं आया था,,, इसलिए वह कोमल को शुभम को बुला लाने के लिए बोली तो कोमल शुभम को बुला कर ले आई,,, ऐसा नहीं था कि कोमल इतनी आसानी से शुभम के साथ यहां तक आ गई शुभम बेहद शातिर और औरतों का शौकीन हो चुका था इसलिए अंधेरे का लाभ लेकर कोमल को दीवार से सटा दिया था और उसके गुलाबी होठों को चुसते हुए उसके दोनों नारंगीयों को जोर जोर से दबा कर मजे ले रहा था और कोमल की नर्म नर्म गांड पर भी हाथ फेर रहा था,,,, वह तो कोमल को दीवार से सटाए हुए ही उसकी चुदाई करना चाहता था लेकिन कोमल ही जबरदस्ती करके उसे मना कर दी क्योंकि कोई भी उधर आ सकता था।
शुभम सीधे उस कमरे में चला गया जहां पर सभी औरतें लोग खाना खा रही थी,,,, उसे उसे बिल्कुल भी पता नहीं था कि उस कमरे में सुगंधा भी बैठ कर खाना खा रही थी। वह जाते ही बोला,,,,।

क्या हुआ मम्मी आप क्यों मुझे बुला रही है,,।
( यह आवाज सुनते ही सुगंधा बुरी तरह से चौक गई मुंह तक लाया हुआ निवाला मुंह के करीब ह़ी अटक गया,,, क्योंकि यह आवाज वही आवाज कि जिसे वर्क फोन पर सुनकर मस्त हो गई थी,,, और इसी आवाज के चलते हैं उसे बिल्कुल भी कुछ भी गड़बड़ होने की भनक तक नहीं लगी और वह इस आवाज वाले शख्श के साथ जिंदगी की पहली रात बीता डाली,,,, वह तुरंत उस परिचित आवाज वाले शख्स की तरफ देखने लगी,,, लेकिन वह थोड़ा घूंघट डाले हुए थी एकाएक घूंघट उठाकर नहीं देख सकती थी,, फिर भी उसे लालटेन की रोशनी में काफी कुछ नजर आया था,, लंबे कद काठी चौड़े सीने को अच्छी तरह से पहचान रही थी लेकिन चेहरा ठीक से नजर नहीं आ रहा था अगर घूंघट थोड़ा उठा देती तो उसे चेहरा भी नजर आ जाता इसलिए वह पानी पीने के बहाने हल्के से घुघट उठाई तो उसका चेहरा भी नजर आ गया,,,, सुगंधा कुछ सेकेंड तक शुभम को ही देखती रह गई इतनी देर में शुभम की भी नजर सुगंधा पर पड़ गई दोनों की नजरें आपस में टकराई और सुभम में अपनी नजरें नीचे झुका दिया,,,, तभी निर्मला बोली,,,

अरे खाना नहीं खाना है क्या सब लोग खाना खा रहे है जाकर खाना खा लौ,,,,

जी मम्मी मैं जा रहा हूं इतना कहकर वह कमरे के बाहर निकल गया,,,
( वह तो चला गया था लेकिन सुगंधा के मन में तूफान छोड़ गया था क्योंकि सुगंधा को पक्का यकीन हो गया था कि फोन पर बात करने वाला यही लड़का है और कल उसके साथ सुहागरात मनाने वाला भी यही लड़का है। अब सुगंधा की बेचैनी और ज्यादा बढ़ती जा रही थी।)
04-02-2020, 05:10 PM,
RE: Sex kahani अधूरी हसरतें
( वह तो चला गया था लेकिन सुगंधा के मन में तूफान छोड़ गया था क्योंकि सुगंधा को पक्का यकीन हो गया था कि फोन पर बात करने वाला यही लड़का है और कल उसके साथ सुहागरात मनाने वाला भी यही लड़का है। अब सुगंधा की बेचैनी और ज्यादा बढ़ती जा रही थी।)
घर के सभी लोग खाना खा चुके थे सुगंधा का पेट तो भर चुका था लेकिन जिस्म की भूख ने उसे परेशान कर रखा था। लेकिन जिस्म की भूख के साथ साथ उसके मन में उसके पति को लेकर अजीब अजीब से ख्यालात भी आ रहे थे। कमरे में अकेली बैठी वह अपने पति का इंतजार कर रही थी लेकिन उसे अब यह नहीं मालूम था कि कमरे में आएगा कौन उसका असली पति जिसके साथ उसने सात फेरे लेकर शादी की है या फिर सुहागरात मना कर चला जाने वाला वह लड़का,, जिसका चेहरा उसके सामने स्पष्ट हो चुका था।,,,,, सुगंधा पूरी तरह से जवान हो चुकी थी और समझदार भी अपने शरीर की जरूरतों को अच्छी तरह से समझती थी लेकिन इस समय उसके मन पर क्या गुजर रहा है यह बात सिर्फ वही जानती थी उसके साथ धोखा हुआ था उसकी इज्जत के साथ खेला गया था उसे क्या मालूम था कि शादी वाले दिन ही जो काम उसके पति को करना चाहिए था वह काम कोई और कर के चला गया था । जिन कोमल अंगों को उसके पति के द्वारा मसले जाना वह कोई और मसल कर उसका आनंद ले चुका था। जिस द्वार के लिए उसने कभी गैरों के सामने अपनी टांगे नहीं खोली थी,,, उस द्वार को खुद कोई और अपने हाथों से टांगो को खोल कर उस का उदघाटन कर के चला गया था,,,, सुगंधा के मन में इस समय बहुत घबराहट हो रही थी उसका मन इधर-उधर दौड़ रहा था इस बात से ज्यादा घबराहट हो रही थी कि कहीं वास्तव में उसका पति उसकी जेठानी के कहे मुताबिक एक दम निठ्ठल्ला ना हो। और अगर कहीं ऐसा हो गया तो उसकी जवानी बर्बाद हो जाएगी जिंदगी की हरी-भरी सावन देखने से पहले ही उसका बदन सूखाग्रस्त हो जाएगा,,, यह सोचकर सुगंधा मन ही मन में घबराने लगी,,, वैसे ही नहीं घबरा रही थी उसका घबराना भी जायज था क्योंकि वह सुबह में ही देख चुकी थी अपने पति के निठल्ले पन को,,, भला दुनिया का कौन मर्द एैसा होगा जिसकी आंखों के सामने बेहद खूबसूरत औरत भरे हुए बदन की मालकिन संपूर्ण नग्न अवस्था में बिस्तर पर पेट के बल लेटी हुई हो और उसकी खूबसूरती लालटेन की रोशनी में अपना आभा बिखेर रही हो उसके गोलाकार गुदाज नितंब अपनी मादक गोलाईयो से पूरे वातावरण को मादकता से भर रही हो और ऐसे में कोई मूर्ख यह सब देखते हुए भी अनजान बनकर फिर तो बैठा रह जाए तो दुनिया में उससे बड़ा बेवकूफ कौन होगा,,,, परोसी हुई स्वादिष्ट व्यंजन की थाली को कोई भी नहीं ठुकराता,,, क्योंकि ऐसी स्वादिष्ट व्यंजन से भरी हुई थाली को खाने के लिए हर कोई ललचाता है,,, उसे खाने की भरपूर कोशिश करता है। लेकिन जहां तो जवानी से भरपूर काया को उसने पूछा तक नहीं,,,, यही सब सोचकर सुगंधा परेशान हुए जा रही थी और अपनी किस्मत को कोसे जा रही थी,,, जिंदगी में पहली बार लंड का स्वाद चख चुकी सुगंधा,,, फिर से मोटे लंड को तरसने लगी,,,, उसकी चुस्त कसी हुई बुर को शुभम ने जिस तरह से अपने मोटे लंड को ऊसमें डालकर उसे ढीला किया था,,, एक बार फिर से सुगंधा उसी लंड को अपनी बुर के अंदर महसूस करने के लिए तड़पने लगी,,,, ना जाने क्यों इतना कुछ हो जाने के बावजूद भी जिस पर उसे क्रोध आना था लेकिन जवानी की आग के सामने उसका क्रोध पिघलने लगा था,,,, उसकी मदमस्त जवानी से भरपूर काया शुभम के चौड़े सीने में समाने के लिए मचलने लगी,,, वह उसके हाथो शादी की पहली रात को ही दागदार होने के बावजूद भी उसे अपने अंदर महसूस करने के लिए तड़पने लगी,,,। इसमें उसका दोष नहीं था अब तक कुछ नहीं अपनी जवानी को बड़े ही जतन से संभाल कर रखे हुए थी सिर्फ अपने पति के लिए लेकिन उसका यह जतन भी कोई काम नहीं आया क्योंकि जिसके लिए उसने अपनी जवानी बचा कर रखी थी उसे तो कोई और लूट ले गया था और जिसके लिए रखी थी वह तो अपने निठल्ले पन से ही ऊपर नहीं आ रहा था,,, क्योंकि नई नई शादी में तो मर्द अपनी पत्नी को अकेला छोड़ते ही नहीं है। और यह है कि अभी तक मुंह दिखाने नहीं आया,,, ऐसे में उससे क्या उम्मीद रखती उससे अच्छा तो वह बैगाना ही था जॉकी बुरी तरह से थके होने के बावजूद भी वह उसके थके होने की बिल्कुल भी परवाह किए बिना ही तीन तीन बार अपने मुसल जेसे मोटे लंड से उसे झूला झूला कर चला गया।,,,
सुगंधा की बेचैनी बढ़ती जा रही थी उसे अपनी टांगों के बीच खुजल़ी होती हुई महसूस हो रही थी,,, उसे वह पल याद आ रहा था जब सुभम बेझिझक उसकी बुर को जीभ से चाट चाट कर उसका नमकीन पानी पी गया था। खुद उसके मोटे लंड को उसके मुंह में डालकर चुस्वाया था। औरतों के जीवन में संभोग का क्या महत्व है उसी ने इस बात को महसूस करायां था। सुगंधा का बदन इस समय शुभम की बाहों में आाने के लिए छटपटा रहा था।,,,, इस समय कमरे में उसकी बेबसी को समझने वाला कोई नहीं था उसकी तड़प को उसके आनंद में बदलने वाला कोई नहीं था उसके मन में चल रही हलचल को अपनी आगोश में ले कर थामने वाला कोई नहीं था।,,, माथे की बींदी की चमक चूड़ियों की खनक और पायल की छनक साजन के बिना अधूरी लग रही थी। लेकिन उसके जीवन में उसका साजन कौन था यय खुद वह तय नहीं कर पा रही थी। क्योंकि उसकी जिंदगी में सब कुछ बिखर सा गया था।,,,, माथे में सिंदूर किसी और के नाम का था और बदन पर हस्ताक्षर कोई और कर गया था।,,,, सुगंधा अपने बिखरे हुए अरमानों को समेटने की कोशिश कर रही थी,,,।

दूसरी तरफ शुभम कमरे में लेटे हुए अपनी मां का इंतजार कर रहा था काफी समय गुजर गया था लेकिन वह अभी तक कमरे में नहीं आई थी,,, उसे औरतों की हंसने की आवाज आ रही थी वह समझ गया था कि घर की सभी औरतें गप्पे लड़ा कर समय व्यतीत कर रही हैं,,, शुभम का लंड जोर मार रहा था,,, उसे चोदने की तलब लगी थी वैसे भी सुगंधा की अनचुदी बूर को चोड़कर उसका लंड काफी उत्तेजित हो चुका था,,,, अभी घड़ी में उतना ही समय हो रहा था कि समय शुभम सुगंधा के कमरे में गया था इसलिए उसे सब याद आ रहा था उसने सुगंधा की कमसिन जवानी को अपनी बाहों में लेकर उसके मधुर रस का पान किया था। सुगंधा के गुदाज बाहों में समा कर उसने जो किसी और की बीवी के साथ सुहागरात मनाते हुए समय गुजारा था जय समय उसे जिंदगी भर याद रहने वाला था।,,, सुगंधा के साथ बिताए हुए पल को याद करके शुभम के होठों पर मुस्कान और लंड पर उत्तेजना की ऐठन फैलने लगी,,, शुभम जानता था कि वह सुगंधा के भोलेपन और उसकी मासूमियत का फायदा उठाया था क्योंकि शुभम की चालाकी पर बिल्कुल भी शंका न जताते हुए वह पूरी तरह से अपने आप को शुभम को समर्पित कर दी थी। सुगंधा की भरपूर जवानी का मजा लेते हुए शुभम को जरा भी थकान महसूस नहीं हो रही थी बल्कि उसका लंड बार बार खड़ा हो जा रहा था तो,, उसके छोटे मामा के आने का डर था वरना सुबह तक सुगंधा की चुदाई करता रहता।,,,
सुहागरात याद करके शुभम का लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था,,।वह बिस्तर पर लेटे लेटे पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को मसल रहा था।ऊससे रहा नहीं जा रहा था ऊसकी मा को काफी समय हो गया था। शुभम से रहा नहीं जा रहा था दिमाग में कुछ और चल रहा था अगर वह अपनी मां का इंतजार करता रह गया तो उसे नींद आ जाएगी और वह सोकर अपना कीमती समय बर्बाद नहीं करना चाहता था क्योंकि दो तीन दिन ही रह गए थे उसे वापस शहर जाने में,,,, जब इंतजार करते करते हैं कुछ और समय बीत गया तो उससे रहा नहीं गया और वह कमरे से बाहर आ गया अपनी मां को बुलाने के लिए,,, धीरे धीरे औरतों के हंसी की आवाज कम होने लगी थी ऐसा लग रहा था कि एक एक करके सब लोग अपने कमरे की तरफ चले गए थे,,, शुभम घर से बाहर आकर देखा कि बरामदे में केवल उसकी मां और कोमल ही बैठ कर बातें कर रहे थे जैसे वह उनकी तरफ आगे बढ़ा तो वह दोनों उठकर पीछे की तरफ जाने लगे,,, निर्मला ने तो सुभम को नहीं देखी थी,, लेकिन कोमल ने शुभम को अपनी तरफ आते हुए देख ली थी और उसे देख कर मुस्कुराई भी थी । इतनी रात को घर के पीछे की तरफ जाते हुए देखकर शुभम समझ गया कि यह दोनों घर के पीछे पेशाब करने के लिए ही जा रहे हैं,,, इसलिए वह भी चुपचाप इन दोनों के पीछे जाने लगा लेकिन इस बात की खबर कोमल को थी कि शुभम पीछे आ रहा है लेकिन यह बात उसने निर्मला से नहीं बताई थी। कोमल शुभम के कमीनापन से पूरी तरह से वाकिफ थी। उसी पक्का यकीन था कि वह ऐसे और निर्मला को के साथ करते हुए जरूर देखेगा और वह भी देखना चाहती थी कि वह कैसे अपनी मां की बड़ी बड़ी नंगी गांड को देखेगा और उन्हें पेशाब करते हुए देख कर उसके चेहरे का रंग कैसे रंगीन होता है इस समय कोमल को बिल्कुल भी डर नहीं लग रहा था कि कोई उन दोनों को पेशाब करते हुए देखने वाला है क्योंकि शुभम ने कोमल को भी अपने रंग में रंग लिया था और कोमल तो वैसे भी जानती थी कि शुभम अपनी मां को भी चोदता है और उसकी मां भी उसी से खुल कर चुदवाती है तो शर्म जेसा दोनों में कुछ भी नहीं था। और वैसे भी सुभम से वह खुद भी चुदवा चुकी थी इसलिए वह भी इस समय थोड़ा सा बेशर्म हो गई थी,,,।
शुभम फिर से उसी दीवार की ओट में छिपा हुआ था जहां पर कोमल पहले छुप कर देख रही थी वह देख रहा था कि कोमल और उसकी मां थोड़ी सी दूरी बना कर खड़े हो चुके हैं शुभम का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि बहुत दिनों बाद वह ऐसा नजारा देखने जा रहा था। काफी दिन हो गए थे वह अपनी मां को पेशाब करते हुए नहीं देखा था गांव में दाखिल होते समय ही अपनी मां के खूबसूरत नितंबो के दर्शन करते हुए उसे पेशाब करते हुए देखा था। इसलिए इस समय उसकी उत्सुकता कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थी,,,,
04-02-2020, 05:10 PM,
RE: Sex kahani अधूरी हसरतें
शुभम फिर से उसी दीवार की ओट में छिपा हुआ था जहां पर कोमल पहले छुप कर देख रही थी वह देख रहा था कि कोमल और उसकी मां थोड़ी सी दूरी बना कर खड़े हो चुके हैं शुभम का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि बहुत दिनों बाद वह ऐसा नजारा देखने जा रहा था। काफी दिन हो गए थे वह अपनी मां को पेशाब करते हुए नहीं देखा था गांव में दाखिल होते समय ही अपनी मां के खूबसूरत नितंबो के दर्शन करते हुए उसे पेशाब करते हुए देखा था। इसलिए इस समय उसकी उत्सुकता कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थी,,,,
शुभम का दिल जोरों से धड़क रहा था उसकी आंखों के सामने,,, दो बेहद खूबसूरत जवान जिस्म की मालकिन,
कोमल और निर्मला अपने अपने नितंबों का प्रदर्शन करने वाली थी,, यह नजारा किसी भी मर्द के लिए बेहद हसीन नजारा था,,, एक साथ दो दो नितंबों के दर्शन करना बड़ी किस्मत की बात होती है और यहां तो एक नितंब पर जवानी का पानी चढ़ रहा था,,,, और दूसरी नितंब दो जवानी के ना जाने कितने सावन को देख चुकी थी। मर्दों की वासना भरी आंखों की लोलुपता और संभोगमय थपेड़ों को झेल कर उम्र के इस पड़ाव में निर्मला के नितंबों की लचक और मादकता और ज्यादा बढ़ चुकी थी,,, जिसे देखने के लिए हर कोई बेताब और परेशान रहता है। एक तरह से कहा जा सकता था कि कोमल जवानी का शोरूम थी तो निर्मला जवानी से भरपूर गोदाम थी। जिसमें अथाग जवानी भरी हुई थी,,, और रत्ती भर जवानी कम होने का नाम नहीं ले रही थी शुभम की प्यासी नजरे दोनों पर टिकी हुई थी निर्मला तो इस बात से बिल्कुल अनजान थी कि उसका बेटा उसे चोरी छिपे देख रहा है लेकिन कोमल यह बात बखूबी जानती थी और इसी बात के चलते उसके तन बदन में रोमांच का अनुभव हो रहा था। कोमल अपने सलवार की डोरी खोलने को बिल्कुल तैयार थी,, लेकिन अपनी सलवार की डोरी खोलने से पहले वह एक नजर पीछे की तरफ घुमाई और शुभम को देखने लगी शुभम की नजर और कोमल की नजर आपस में टकरा गई, कोमल शुभम को देख कर मुस्कुराते हुए अपनी एक आंख दबा दी, शुभम थोड़ा सा झेंप से गया,,, वह कुछ समझ पाता इससे पहले ही निर्मला अपनी साड़ी को एकाएक कमर तक उठा दी,,,, निर्मला साड़ी के नीचे कुछ भी नहीं पहनी थी,,, जिसकी वजह से वह साड़ी के अंदर बिल्कुल नंगी थी,,, शुभम अपने आप को संभाल पाता इससे पहले ही अपनी मां कीे मस्त गांड के दर्शन करके वह मदहोश होने लगा,,, एकदम गोरी गोरी और चिकनी बेदाग खूबसूरत गांड को देखकर एकाएक शुभम के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,, कोमल अपनी सलवार की डोरी खोलते खोलते निर्मला की मदमस्त आकर्षक गांड को देख कर सम्मोहित होते हुए बोली,,।

बुआ तुम्हारी गांड तो इस उमर में भी बेहद खूबसूरत लगती है,,,।,,
( कोमल जानबूझकर इस बात को थोड़ा सा तेज बोली थी ताकि शुभम सुन सके निर्मला कोमल की यह बात सुनकर हसने लगी और बोली,,,)

नहीं बेटा तुम्हारी भी बहुत अच्छी है,,, जरा खोल कर दिखाओ,,,,।
( निर्मला की बात सुनते ही कोमल सलवार की डोरी खोलने लगी,, इस समय कोमल बिल्कुल भी शर्मा गई थी क्योंकि उसके बदन में भी उत्तेजना का असर हो रहा था और दूसरा से उसने शुभम से चुदाई का आनंद ली थी,,, उसकी वजह से शुभम के सामने उसकी सर में आया सब कुछ चली गई थी और वैसे भी निर्मला के सामने शर्मा ने जैसा कुछ भी नहीं था क्योंकि निर्मला की असली करतूत को अच्छी तरह से समझ गई थी,, और इस समय का सबसे बड़े बेशर्म ओं के साथ थी इसलिए शर्म करने की उसे बिल्कुल भी आवशयकता जान नहीं पड़ रही थी। इसने तो निर्मला भी बात सुनते ही अपनी सलवार की डोरी खोल कर पेंटी सहित अपनी सलवार को जांघों तक नीचे सरका दी,,,, शुभम के तो होश फाख्ता हो रहे थे,,, वह तो आंखें फाड़े दोनों के बदन से टपकती जवानी को देख कर मदहोश हुए जा रहा था।,,,
पजामे में उसका लंड गदर मचाने लगा,,, कोमल अपनी सलवार को जांघा तक सरका कर मुस्कुरा रही थी, निर्मला को उसकी कुर्ती की वजह से ठीक से उसकी गोलाकार गांड नजर नहीं आ रही थी,, इसलिए वह अपने एक हाथ से कोमल की कुर्ती को थोड़ा ऊपर उठाकर,, कोमल की मस्त गोरी गोरी खरबूजे सी गोलाई लिए हुई गांड को देखकर और उसकी खूबसूरती को देखकर मुस्कुरा दी,,, शायद यह निर्मला का कॉमन के गोलाकार में कमरों के प्रति आकर्षण की वजह से ही था जो वह उसके नितंबों को स्पर्श करने की लालच को रोक नहीं पाई और अपना आप उसके नरम नरम नितंबों पर रखकर उसे दबाते हुए बोली,,,,

वाह कोमल बहुत खूबसूरत गांड है तुम्हारी,, जब मैं भी तुम्हारी उम्र की थी तो मेरी भी बिल्कुल ऐसी ही थी,,,
( ऐसा कहते हुए निर्मला लगातार उसकी गांड को हथेली में भरकर दबाते हुए उसे खींच ले रही थी और यह क्रम लगभग लगातार चल रहा था एक औरत होने के बावजूद भी एक लड़की की गोरी गांड को दबाने में निर्मला को न जाने क्यों बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी,,, और कोमल भी ना जाने क्यों,,, एक औरत के इस तरह के स्पर्श से कामोत्तेजना अनुभव कर रही थी उसे निर्मला का स्पर्श उसका दबाना मसलना बेहद आनंदमय लग रहा था,,, और कुछ ही सेकंड में निर्मला की हरकतों की वजह से कोमल के चेहरे की मुस्कुराहट कामोत्तेजना दर्पण बन गई थी,, उसके होठों पर मुस्कुराहट की जगह मादकता की सिसकारी फैलने लगी और निर्मला भी जैसे कि कोमल की गांड को छोड़ना ही नहीं चाहती थी । वह लगातार मसले जा रही थी और कोमल उत्तेजित हुए जा रही थी,,। ऐसा कामुकता भरा दृश्य देखकर शुभम का माथा ठनक रहा था,,। उससे यह उत्तेजना से भरपूर दृश्य बर्दाश्त नहीं हो रहा था। यह नजारा इतना उत्तेजक था कि इसके लिए कोई शब्द बयां नहीं कर सकता था। इस नजारे के बारे में बस इतना ही कहा जा सकता था कि कामोत्तेजना की पराकाष्ठा की परिभाषा दृश्य नुमा शब्दों से बयां हो रही थी।,,,
कोमल तो निर्मला की हरकतों से पूरी तरह से मदहोश होने लगी थी निर्मला जो की पेशाब करने आई थी इस समय सब कुछ भूल कर कोमल के नितंबों से खेल रही थी,,, शुभम की उत्तेजना पल-पल बढ़ती जा रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी आंखों के सामने जो कुछ हो रहा है वह हकीकत है। एक औरत औरत के जिस्म से खेल रही थी उसके नितंबों को सहला रही थी मसल रही थी दबा रही थी।,,, दोनों एक दूसरे में इतना ज्यादा खो गए की कोमल के मुंह से सिसकारी की आवाज आने लगी निर्मला कोई आता है का पाना मुश्किल हुआ जा रहा था कि वह जो कुछ भी कर रही है सही कर रही है गलत कर रही है, वह तो कोमल की जवान खूबसूरत सुडोल गांड को देखकर मदहोश होने लगी थी।,,, धीरे-धीरे दोनों एक दूसरे के नितंबों को सहलाते हुए मस्त होने लगे। शुभम यह देखकर हैरान हुए जा रहा था,,एक तो जिंदगी में पहली बार वह औरत को औरत के बदन के साथ खेलते हुए देख रहा था यह देख कर उसकी उत्तेजना परम शिखर पर पहुंचने लगी थी और ऊपर से यह देखकर हैरानी हो रही थी कि कोमल यह जानते हुए भी कि वह हम दोनों को देख रहा है फिर भी बेशर्म बनते हुए बिल्कुल भी शर्म ना करके उसकी आंखों के सामने ही अपनी सलवार उतार कर अपनी गोरी गोरी गांड को दिखा रही थी,,, और तो और उसकी मां के साथ मस्ती भी कर रही थी निर्मला तो इस बात से अनजान थी कि उसका बेटा पीछे से देख रहा है लेकिन वह तो सब कुछ जानती थी और जानते हुए भी यह हरकत कर रही है। यह सब देख कर शुभम के शैतानी दिमाग में कुछ और सुझने लगा। उसके मन में दोनों को एक साथ भोगने की इच्छा जागरूक होने लगी,, जिस तरह से उसकी मां को मल के साथ मदहोश हुए जा रही थी वह चाह रहा था कि उसकी मां कुछ और ज्यादा हरकत करें ताकि वह दोनों भी एक दूसरे के साथ मस्ती करने का पूरा इरादा मन में रखने लगे।,,,
कोमल और निर्मला दोनों एक दूसरे को देखे जा रहे थे,, दोनों एक दूसरे की आंखों में डुबते चले जा रहे थे। कोमल तो निर्मला के हाथों की हरकत की वजह से पूरी तरह से मदहोश हुएे जा रही थी। निर्मला कोमल के नितंबों के साथ खेलते खेलते इतनी ज्यादा मस्त होने लगी कि वह अब उसकी नरम नरम गांड चपत लगाने लगी,, जिससे कोमल को भी बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी और उसके मुंह से सिसकारी की आवाज निकल जा रही थी।,,, कोमल भी हल्के हल्के निर्मला की बड़ी बड़ी गांड को सहलाना शुरू कर दी थी,,, सच पूछो तो दोनों को बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी एक दूसरे के अंगों से खेलते हुए दोनों मस्त होने लगे दूसरी तरफ सुभम की हालत पल-पल खराब हुए जा रही थी,,, उससे रहा नहीं गया और वह अपने पजामे को नीचे करके अपने खड़े लंड को हिलाना शुरू कर दिया,,,।
जिस तरह से निर्मला कोमल की गांड पर चपत लगा रही थी उसी तरह से कोमल ने भी निर्मला की बड़ी बड़ी गांड पर चपत लगाना शुरू कर दी। दोनों की गोरी गोरी गान कुछ ही देर में टमाटर की तरह लाल हो गई,,,।
तभी कोमल की नजर पीछे गई तो वह शुभम की हालत देखकर एकदम से चुदवासी हो गई,,, उसकी बुर में खुजली होने लगी, उसकी बुर शुभम के मोटेे लंड के लिए तड़पने लगी,,,, वह एक टक शुभम की बर्फ देखे जा रही थी,,,, उसका दिमाग भी बड़े जोरों से घूमने लगा,,, इस समय अपनी प्यास बुझाने का तरीका ढूंढने लगी,,, निर्मला जोर जोर से चपत लगाते हुए कोमल की गांड को मसल रही थी,,,, निर्मला को समझ नहीं पा रही थी बस उसके अंगों से खेलती चली जा रही थी,,, इस बात का भी उसे भान नहीं रहा कि वह उसके भाई की लड़की है बस उसकी मदमस्त गांड को मसले जा रही थी,, कोमल अपनी दुआ निर्मला की गांड से खेलते हुए कुछ सोच रही थी कि तभी निर्मला अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाई और अपनी एक उंगली को कोमल की रसीली बुर में डाल दी,,,, यूं एकाएक निर्मला की हरकत की वजह से कोमल चौक गई लेकिन उत्तेजना के मारे ऊसके मुंह से गरम सिसकारी निकल गई,,ससससहहहहहहहहह बुआ,,,,,,, यह क्या कर रही हो,,,,
( कोमल के इतना कहते ही निर्मला जैसे नींद से जागी हो इस तरह से होश में आते हुए बोली,,,।)

सॉरी बेटा सॉरी ना जाने मुझे क्या हो गया,,,,( इतना कहते हुए निर्मला अपना हाथ उसके नितंबों पर से हटा ली,,, लेकिन अपनी मां की इस तरह की हरकत देख कर शुभम पूरी तरह से कामोत्जीत हो गया,,, वह जोर-जोर से अपना लंड हीलाने लगा,,।,,,,
निर्मला अपनी हरकत की वजह से शर्मिंदा थी,,, कोमल के दिमाग में कुछ और चल रहा था शुभम ठीक उन दोनों के पीछे ही खड़ा था और जिस तरह से वह अपना मोटा लंड हिला रहा था उसे देखते हुए कोमल की बुर तड़पने लगी थीे उसके लंड को अपनी बुर मे लेने के लिए,,, कोमल कुछ सोचकर निर्मला के सामने शर्माने की एक्टिंग करती हुई और जाते-जाते शुभम को हाथों से कुछ इशारा करती गई लेकिन शुभम उसे सारे को समझ नहीं पाया था

कोमल वहां से दूर हटकर शुभम को मौका देना चाहती थी ताकि वह उसकी मां के साथ कुछ ऐसी वैसी हरकत करे जिसे देखकर कोमल दोनों को ब्लैकमेल कर सके,,, कोमल के मन में कुछ और चल रहा था और शुभम अपनी ही युक्ति लगा रहा था,,, कोमल के जाते ही शुभम अपना काम शुरू करना चाह रहा था, वह चाह रहा था कि वह अपनी मां के साथ कुछ ऐसी हरकत करे जिसे कोमल देखने और ऐसे में वह दोनों को भोग सके निर्मला तो शर्मिंदा कर उसे अपने किए पर पछतावा होने लगा लेकिन उसे जोरों से पेशाब भी लगी थी वह नीचे बैठ कर पेशाब करने जा ही रही थी कि उसे नीचे बैठते बैठते शुभम ठीक उसके पीछे आकर उसे बाहों में भर लिया और वह कुछ समझ पाती ईससे पहले ही वह अपने लंड के सुपाड़े को उसकी गीली बुर में उतार दिया,,,, निर्मला उसे रोकने की और उसे समझाने की पूरी कोशिश करती रह गई थी ऐसा ना करें यहां कोमल है लेकिन वह उसकी एक नहीं सुना क्योंकि वह तो जानता ही था और जानबूझकर फसना चाह रहा था यह सब दिखाना चाह रहा था,,, निर्मला अपने आप को छुड़ााने की पूरी कोशिश करती रही, लेकिन शुभम कहां मानने वाला था वह तो जानबूझकर ऐसा कर रहा था,,, वह जबरदस्ती उसकी बुर में लंड को अंदर बहार करके उसे चोदने लगा,,, झोपड़ी में से छुप कर देख रही कोमल इसी मौके के इंतजार में थी उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव छाने लगे और वह तुरंत झोपड़ी से बाहर निकलते हम दोनों के सामने आकर खड़ी हो गई और ऐसा बर्ताव करने लगी कि उसे बहुत गुस्सा आ रहा है यह देख कर निर्मला घबरा गई और शुभम भी घबराने की अदाकारी दिखाने लगा,,,,।
04-02-2020, 05:10 PM,
RE: Sex kahani अधूरी हसरतें
कोमल को अपने सामने क्यों गुस्से में खड़े देखकर निर्मला बुरी तरह से घबरा गई थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें,, शुभम भी अपने चेहरे पर डर के भाव लिए हुए कोमल को देख रहा था,,, उसका लंड अभी भी निर्मला की बुर के अंदर घुसा हुआ था। जिसे वो आहिस्ता से अपनी कमर को पीछे करके निकाला कोमल की नजर शुभम के खड़े लंड पर भेजो कि निर्मला की बुर में जाकर उसके मदन रस से पूरी भीग चुकी थी,,, कोमल ऊसके खड़े लंड को देखते हुए बोली,,

यह सब क्या है सुभम,,, ओर बुआ यह क्या हो रहा है,,,,
( निर्मला एकदम घबरा चुकी थी,,, जल्दी से अपनी साड़ी को नीचे की तरफ गिरा दी और घबराते हुए कोमल की तरफ देखने लगे कोमल से क्या कहना है या उसके समझ में बिल्कुल भी नहीं आ रहा था वह रोने जैसी हो गई,,, निर्मला को डरी हुई देखकर कोमल बोली)

मुझे तुम दोनों से यह उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थे यह क्या हो रहा था।,,, (कोमल बोले जा रही थी और बार-बार सुभम के खड़े लंड की तरफ देखे जा रही थी,,, इस लंड से एक बार कोमल छूट चुकी थी इसलिए शुभम के लंड पर उसका लगाव कुछ ज्यादा ही था।,,, दोनों पूरी तरह से खामोश थे शुभम तो सब कुछ जानकर भी अनजान बन रहा था वह चाहता था कि कोमल और ज्यादा उसकी मां को डराए और ऐसा हो भी रहा था कोमल अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली)

मुझे तुम दोनों से ऐसी उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी तुम तो जानते हो ना कि तुम दोनों मां-बेटे हो फिर भी इस तरह की,,,, छी,,,,,, मुझे तो सोच कर घिन्न आती है। मैं कभी सपने में भी नहीं सोच सकती की, मां बेटे के बीच इस तरह के संबंध होगे,,,, और वह भी मेरे ही घर में,,,
बुआ तुम कुछ बताओगी की यह सब क्या हो रहा था,,,
( निर्मला क्या बोलती बोलने जैसा कुछ था ही नहीं वह तो फफक फफक कर रोने लगी,, उससे कुछ बोला नहीं जा रहा था अब तक जिस काम को वह इतनी सफाई से करते आ रहे थे आज उसकी कामलीला पकड़ी गई थी अब उसके पास सफाई देने के लिए कोई शब्द नहीं बचे थे,,, वह बस रोए जा रहीे थी। उसे रोता हुआ देखकर शुभम और कोमल को लगने लगा कि उनका काम बन गया है,,,, निर्मला साड़ी में मुंह छुपाए रोए जा रही थी और कोमल शुभम की तरफ देख कर उसे आंख मारते हुए उसकी युक्ति काम कर गई है इस तरह का इशारा कर रही थी,,,। शुभम बाजी संभालते हुए बोला,,।

कोमल इस तरह से जोर जोर से मत बोलो कोई जग जाएगा तो गजब हो जाएगा,,,

क्या गजब हो जाएगा गजब तो तुम दोनों मिलकर कर रहे हो किसी को पता चलेगा तो वह क्या सोचेगा मैं खुद हैरान हूं तुम दोनों के बीच इस तरह के संबंध देखकर,,, तुम दोनों को बिल्कुल भी शर्म नहीं आती।
( जिस तरह से कोमल बोल रही थी उसे सुनकर निर्मला की हालत खराब हुई जा रही थी वह सिसक सिसक कर रो रही थी। शुभम और कोमल अच्छी तरह से समझ गए थे कि निर्मला पूरी तरह से डर गई है,, फिर भी शुभम उसे शांत कराते हुए बोला,,,।)

देखो कोमल ऐसे मत चिल्लाओ कोई जग जाएगा तो गजब हो जाएगा एक काम करो तुम हमारे साथ चलो हम वही तुम्हे समझाते हैं,,,।

समझने समझाने के लिए कुछ बचा ही नहीं है मैं अभी सबको बता देती हूं कि तुम दोनों के बीच क्या चल रहा है।

नहीं कोमल नहीं ऐसा बिल्कुल मत करना मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूं,,।( निर्मला रोते हुए कोमल के सामने हाथ जोड़ते हुए बोली,,, निर्मला एकदम सदमे में हो चुकी थी उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था बस रोए जा रही थी और गिड़गिडाए जा रही थी,,, उसके मन में पूरी तरह से डर बैठ गया था कि कोमल किसी को बता देगी तो सब कुछ बर्बाद हो जाएगा,,, निर्मला को ईस तरह से रोता हुआ देखकर कोमल बहुत खुश हो रही थी क्योंकि उसकी मनोकामना पूर्ण होने वाली थी वह निर्मला को डराने के उद्देश्य से बोली,,,।)

बुआ अब बचा ही क्या है बर्बाद होने के लिए एक मां होकर अपने बेटे से चुदवा रही हो,,, इससे ज्यादा बर्बादी ओर क्या हो सकती है,,,,( कोमल अब अश्लील शब्दों का प्रयोग बखूबी बड़े इत्मीनान से कर लेती थी उसे अब इन शब्दों से कुछ लगाव सा होने लगा था और उसे अच्छा भी लगता था इन अश्लील शब्दों का प्रयोग करते हुए, कोई और समय होता तो निर्मला का ध्यान इस ओर जरूर जाता लेकिन इस समय हालात कुछ और थे इसलिए निर्मला इस बात पर बिल्कुल भी गौर नहीं कर रही थी कि, कोमल अश्लील शब्दों का प्रयोग बहुत ही खुले तौर पर कर रही थी वह, तो इस समय घबराई हुई थी।,,,, वह बस रोए जा रही थी, उसे इस बात का डर सता रहा था कि कहीं कोई आ ना जाए,,,, इसलिए वह जल्दी से जल्दी यहां से निकल जाना चाहती थी शायद शुभम उसकी यह कशमकश को भाप गया था। वह अपनी मां से बोला,,,।

तुम चिंता मत करो मम्मी मैं कोमल को समझा देता हूं,,,

क्या समझाओगे तुम और क्या समझुंगी में,,,,
( कोमल बोल रही थी और शुभम अपनी मां की बांह पकड़ के उसे आगे की तरफ करते हुए उसे कमरे में जाने के लिए बोला,,, निर्मला शर्मिंदा होकर वहां से जल्दी जल्दी अपने कमरे की तरफ चली गई,,,,। जब दोनों को इत्मीनान हो गया कि निर्मला अपने कमरे में चली गई है तब शुभम कोमल को आंख मारते हुए बोला,,,।

वाह कोमल तू तो एकदम चलाक हो गई है,,, मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि तुम यह सब इतनी आसानी से कर ली,,,

क्या करूं शुभम मेरा ऐसा कोई बिल्कुल भी ईरादा नहीं था,,, लेकिन तुम्हारी मां की बड़ी बड़ी गांड देख कर ना जाने मुझे क्या होने लगा,,, और तुम्हारी मां जिस तरह से मेरी गांड से खेल रही थी मेरे तन बदन में अजीब सा सुरूर छाने लगा,,,, तुम शायद नहीं जानते उस दिन तुमसे कराने के बाद ना जाने मुझे क्या होने लगा और मेरा मन बार-बार तुम्हारा लेने को कर रहा है।,,,,, इसलिए मुझे यह सब नाटक करने को मजबूर होना पड़ा क्योंकि छुप छुप कर मजा लेने से अच्छा था कि आज मैं खुलकर मजा लूं और यह तभी संभव हो सकता था,, जब इस तरह का कोई नाटक हो जाता,,,।

सच कहूं तो कोमल तुम दोनों को इस तरह से पीछे देख कर खास करके तुम दोनों की नंगी नंगी गांड देखकर मेरी भी इच्छा ऐसी होने लगी कि तुम दोनों की साथ में लूं,,,, इसलिए यह सब जानते हुए भी कि तुम इधर हो,,, मैं जानबूझकर मम्मी को चोदना शुरू कर दिया था ताकि तुम यह सब देख लो और हम दोनों का काम हो जाए,,,

मे हीं तो तुम्हें इशारा करके यह सब करने के लिए कही थी (कोमल मुस्कुराते हुए बोली)

हां लेकिन कोमल मैं तुम्हारे ईसारे को समझ नहीं पाया था मेरे दिमाग में कुछ और आईडिया चल रहा था और तुम्हारे दिमाग में कुछ और,,,

चलो कोई बात नहीं लेकिन हम दोनों का काम तो बन गया।,,,, लेकिन शुभम मुझे बहुत शर्म आ रही है यह सब तो मैंने कर ली लेकिन बुआ के सामने,,,,, क्या करूं कैसे करूं मेरे को समझ में नहीं आ रहा है,,,,

यार डरो मत सब कुछ हो जाएगा मैं हूं ना,, मैं सब कुछ संभाल लूंगा और वैसे भी,,, डरने जैसा कुछ भी नहीं है,, मुझे साफ साफ दिखाई दे रहा था कि मम्मी को तुम्हारी गोल गोल गाडं से खेलने में बहुत मजा आ रहा था,,। और तुम भी मजा ले रही थी देखना कितना मजा आएगा जब हम तीनों एकदम नंगे होकर एक दूसरे के अंगों से खेलेंगे,,,
( शुभम समझा रहा था और कोमल रोमांचित हुए जा रही थी। तभी कोमल बोली।)

लेकिन कुछ गड़बड़ हो गई तो,,,,

अरे कुछ गड़बड़ नहीं होगी मैं सब संभाल लूंगा और वैसे भी जब ओखली मे सिर दे ही दिया है तो मुसल से क्यों डर ना।

मुझे तो तुम्हारे ही मुसल से डर लगता है।


फिर भी लेने के लिए मचल रही हो,,,

अब कर भी क्या सकते हो तुमने जो मेरी आदत खराब कर दि है।
( इतना कहकर कोमल मुस्कुराने लगी और शुभम भी मुस्कुरा दिया,,, शुभम कोमल का हाथ पकड़ कर अपने कमरे की तरफ जाने लगा,,,,
दूसरी तरफ सुगंधा अपने पति का बेसब्री से इंतजार कर रही थी अजीब से हालात सामने पेश आ रहे थे।
एक तरफ प्यासी घटाओ का बादल था जोकि बरसकर निर्मला और कोमल दोनों को तृप्त करने वाला था,,, और एक तरफ शंकाओं का बादल था जिसमे तृप्त करने वाली घटाओ के बरसने के आसार नजर नहीं आ रहे थे फिर भी अपने मन को मनाने के लिए और अपनी शंका को यकीन में बदलने के लिए सुगंधा बेचैन मन से बिस्तर पर बैठे बैठे अपने पति का इंतजार कर रही थी,,,
कोमल और शुभम कमरे के बाहर खड़े थे अंदर निर्मला आंसू बहाए जा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या होने वाला है,,, कोमल भी घबराई हुई थी वासना और अतर्प्त भावनाओं के आधीन होकर कोमल इतना बड़ा कदम तो उठा लीे थी,,, लेकिन उसके मन में अजीब अजीब सी भावनाएं आ रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह कैसे अपनी बुआ के सामने उनके ही बेटे के हाथो अपने कपड़े उतरवाएगी और एकदम नंगी होगी,, कैसे वो शुभम से निर्मला की आंखों के सामने चुदवाएगी,, ना जाने उसके बारे में वो क्या समझेगी,, यही सब ख्याल उसके मन में आ रहा था और वह घबरा रही थी लेकिन एक अजीब सा रोमांच उसके तन बदन को उत्साहित कर रहा था यह सब करने के लिए वह भी अपनी आंखों के सामने शुभम को अपनी मां को चोदते हुए देखना चाहती थी।,, इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर रही थी।
वैसे भी शुभम पर उसको पूरा भरोसा था। मैं जानती थी कि शुभम पक्का मादरचोद है और वह सब कुछ संभाल लेगा,,, वह यह सब सोच ही रही थी कि तभी शुभम दरवाजे पर दस्तक देते हुए बोला।

मम्मी दरवाजा खोलो,,,,
( इतना सुनते ही निर्मला बिस्तर पर से नीचे खड़ी हो गई उसे यह जानने की उत्सुकता ज्यादा थी कि आखिर हुआ क्या इसलिए वह दरवाजा खोले बिना ही बोली,,,।)

क्या हुआ कोमल मानी,,( निर्मला शंका जताते हुए बोली),,

मान भी गई और मेरे साथ भी आई है पहले तुम दरवाजा तो खोलो मैं सब कुछ बताता हूं,,,,
( निर्मला को समझ नहीं पाई की शुभम यह क्या बोल रहा है अगर मान गई तो वह उसके साथ क्यों आई है,,, निर्मला के मन मे भी ढेर सारे सवाल उठ रहे थे,,, लेकिन इन सब सवालों का जवाब दरवाजा खुलने के बाद ही मिलने वाला था,, इसलिए वह दरवाजा खोलने के लिए आगे बढ़ी,,,,।
04-02-2020, 05:10 PM,
RE: Sex kahani अधूरी हसरतें
निर्मला का दिल जोरों से धड़क रहा था पता नहीं क्या होने वाला था यह सोच कर वह परेशान हुए जा रही थी कि आखिर कोमल यहां क्या करने आई थी। सब सोचते थे वो कमरे का दरवाजा खोल दी,,, सामने कोमल मंद मंद मुस्कुरा रही थी मुस्कुराहट देखकर कोमल और ज्यादा परेशान हो गई आखिरकार हुआ क्या जो इस तरह से मुस्कुरा रही है अपने सवालों के जवाब ढूंढ ही रही थी कि तब तक कोमल और शुभम दोनों कमरे में अंदर आ गए और शुभम ने दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दिया,,,,।

यह सब क्या है शुभम कोमल तो इतनी ज्यादा क्रोधीत थी तो यहां आकर इस तरह से मुस्कुरा क्यों रही है,,।

गुस्से में तो बहुत थी मम्मी लेकिन मैं ही इसे समझा बुझा कर इधर लाया हूं यह तो बिल्कुल भी नहीं मान रही थी अपनी मम्मी अपने पापा से बताने जा रहीे थी।
( यह सुनकर निर्मला के चेहरे के भाव बदलने लगे)
लेकिन अब डरने की कोई बात नहीं है कोमल यह बात किसी से नहीं कहेगी,,,। लेकिन यह राज राज रखने के लिए हम तीनों को समझौता करना पड़ेगा,,,।

समझौता कैसा समझौता बेटा यह तु क्या कह रहा है मुझे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है।

मम्मी हम दोनों का राज अब कोमल जान चुकी है। और इसका मुंह बंद करने का बस यही एक तरीका है।

कौन सा तरीका (निर्मला आश्चर्य के साथ बोली)

मम्मी मैं साफ-साफ तुम्हें बताता हूं। यह कोमल भी हम दोनों के साथ मजा लेना चाहती है।

क्या यह क्या कह रहा है तू (कोमल की तरफ आश्चर्य से देखते हुए)

मम्मी ईसका कहना है कि, यह भी देखना चाहती है कि,, इसमें कौन सा ऐसा सुख मिलता है, जिस को पाने के लिए तो मां बेटो ने अपने रिश्तो की भी परवाह नहीं किए,,,
( यह सुनकर निर्मला कोमल की तरफ आश्चर्य से देखे जा रही थी जो कि कोमल नीचे सर झुकाए मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,,,।)

और यह मेरे साथ यहा तक आ गई,,,,

लेकिन बेटा यह कैसे हो सकता है,,,।

क्यों नहीं हो सकता बुआ,,,( कोमल बीच में लपक कर बोल दी,,, ।)

जब तुम मां बेटे की बीच हो सकता है तो मेरे साथ क्यों नहीं,,,, और वैसे भी बुआ घर के पीछे जो तुमने मेरे नितंबों को दबा दबा कर मेरे बदन में भी ना जाने कैसी आग लगाई हो उसे अब तक तुम ही बुझा सकती हो,,,,।

( यह सुनकर निर्मला को राहत हुई उसका डर उसके बदन से उड़न छू हो गया था क्योंकि जो राज, राज नहीं रह गया था उसे फिर से एक बार राज रखने के लिए निर्मला का राजी होना बेहद जरूरी था और वह भी मुस्कुराते हुए हामी भर दी,,,। दोनों का मुस्कुराता हुआ देखकर शुभम का लंड दोनो जवानीयो कोसलाम ठोकने लगा। शुभम की बांछे खिल गई थी,,, उसका लंड पेंट में गदर मचाए हुए था,, आज की रात उसके लिए बेहद खास थी क्योंकि जिंदगी में पहली बार बार एक साथ दो औरतों को एक ही बिस्तर पर भोगने जा रहा था,,,,। निर्मला कोमल की तरफ बड़े ध्यान से देख रही थी, उसे भी कोमल के अंगों को दबाने उसे सहलाने में बेहद आनंद की अनुभूति हुई थी इसलिए उसके होठों पर मादक मुस्कान फेलने लगी। कोमल इस समय उत्तेजित हुए जा रही थी। वह अभी आगे क्या होने वाला है इस बारे में सोच ही रही थी कि तभी निर्मला ने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच ली,, इस तरह से एकाएक खींचे जाने की वजह से कोमल निर्मला के बदन से टकरा गई,,, इस तरह से टकराने से निर्मला के बड़े-बड़े खरबूजे कोमल के छोटे-छोटे नारंगियो को दबा दिए। जिसकी वजह से उत्तेजना के मारे कोमल के मुंह से आह निकल गई। निर्मला उसे अपनी बाहों में भर कर उसके होठों पर अपने होट रख कर उसे चूसना शुरू कर दी,,, पल भर में ही कोमल कामोत्तेजीत हो गई,,, उसे इतनी जल्दी निर्मला से इस तरह की उम्मीद नहीं थी,,, निर्मला एक पल की भी देरी किए बिना उसके होठों को चूसते हुए अपने दोनों हथेली में उसकी छोटी-छोटी भरावदार गांड को लेकर दबाना शुरू कर दी कोमल कि सांसे तीव्र गति से चलने लगी,,,, कोमल भीं मस्त होने लगी और उसके हाथ भी निर्मला के भरावदार बदन के चारों तरफ घूमने लगी,,, कोमल को इस तरह से साथ देते हुए देखकर निर्मला मन ही मन खुश होने लगी,,,,
दोनों को इस तरह से अकेले मजा लेते हुए देखकर शुभम भला कब शांत बैठने वाला था वह कोमल के पीछे जाकर उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसकी गर्दन को चूमना शुरू कर दिया,,, साथ ही पजामे में बने तंबू को सलवार के ऊपर से ही उसके नितंबों पर रगड़ना शुरू कर दिया,,, दोनों तरफ से हो रहे है प्रहार की वजह से कोमल पूरी तरह से मस्त होने लगी शुभम की मोटे लंड को अपनी गांड के ऊपर रगड़ता हुआ महसूस कर के कोमल की मस्ती सातवें आसमान पर पहुंच गई। निर्मला कोमल के टिकोरो को दबाने में मस्त थी। वह भी दोनों हाथों से निर्मला की बड़ी-बड़ी चुचियों को दबाना शुरू कर दी निर्मला जो कि उसके नितंबों को दबा दबा कर मजे ले रही थी वहीं कोमल के नितंबों पर सलवार के ऊपर से रगड़ रहे लंड को अपने हथेली के इर्द-गिर्द महसूस करके निर्मला से रहा नहीं गया और वह
अपने दोनों हाथों से अपने बेटे के पर जाने को नीचे की तरफ सरकार कर उसके खड़े लंड को अपनें हाथ में लेकर हिलाने लगी और हिलाते हुए उसे सलवार के ऊपर से ही कोमल की गांड पर रगड़ना शुरू कर दी।,,
कमरे में तीनों एक दूसरे के अंगों से मजे ले रहे थे और दूसरी तरफ सुगंधा अपने आप को ठगे जाने का एहसास लिए बिस्तर पर बैठ कर अपने निठ्ठले पति का इंतजार कर रही थी।

शुभम निर्मला और कोमल कमरे के बीचो बीच खड़े होकर एक दूसरे के अंगों को मसल रहे थे सहला रहे थे। निर्मला पागलों की तरह कोमल की गुलाबी होठों को अपने मुंह में भरकर पिए जा रही थी। शुभम कोमल की गोरी गर्दन को अपने होटो से चुमें जा रहा था। दोनों मजे हुए खिलाड़ियों के बीच में कोमल अभी कच्ची खिलाड़ी थी इसलिए उसकी सिसकारी की आवाज पूरे कमरे में गूंजने लगी थी,,, उत्तेजना के मारे से बम का लंड खूंटे की तरह खड़ा हो गया था। अभी तक तीनों के बदन पर
कपड़ों का ढेर लगा हुआ था और उन्हें बदन पर से दूर करने का शुभारंभ निर्मला ने ही कि,,, निर्मला ने कोमल के हाथ को पकड़ कर उसके पीछे की तरफ ले जा कर के शुभम के लंड पर रख दी, एक अपनी हथेली में गर्म चीज का एहसास होते ही वह झेप गई,,, लेकिन अपने ही पहचान करके कि वह शुभम का मोटा खड़ा लंड है तो उत्तेजित होकर उसे अपनी हथेली में दबोच ली,, यह देखकर निर्मला मन ही मन प्रसन्न होने लगी,,, और वो अपने दोनों हाथों से कोमल के सलवार की डोरी को खोलने लगी कोमल आज एकदम खुलकर मजा लेना चाहती थी इसलिए निर्मला की एक भी हरकत का और ना तो शुभम की हरकत का कोई विरोध कर रहीे थी बल्कि उन दोनों की हरकतों का मजा लूट रही थी।,, अगले ही पल निर्मला ने सलवार की डोरी खोल कर उसी नीचे की तरफ छोड़ दी जो की सीधे उसके पैरों में जाकर गिरा,,, कोमल की उत्तेजना और उत्सुकता के साथ साथ उसके उतावले पन का एहसास इसी बात से झलक रहा था कि पैरों में गिरी सलवार को घर खुद ब खुद अपने पैरों के सहारे से ही उसे निकाल फेंकी,,, जब तक वह पैरों से अपनी सलवार को निकाल कर बाहर फेंक दी इसी दौरान निर्मला ने अपने ब्लाउज के बटन खोल दिए थे जिसे कोमल अपने हाथों से उसे बाहर निकाल रही थी, शुभम यह देखकर बेहद हैरान था कि कोमल इतनी जल्दी ही उन दोनों के बीच में इतनी सहज हो गई थी जिसकी उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी। लेकिन यह उसके लिए ही अच्छा था ताकि वह खुलकर मजे ले सके।,,, निर्मला के फैंसी ब्लाउज अलग होते ही बड़ी बड़ी छातियों को छुपाई हुई उसकी लाल रंग की ब्रा और भी ज्यादा खूबसूरती के सांचे में ढल गई। अपनी बुआ की बड़ी बड़ी चूची को देख कर कोमल दंग रह गई और वह फटी आंखों से लाल रंग की ब्रा में केद खरबूजे जैसी चुचीयों को देखे जा रही थी। शुभम यह देख कर बोला।

जी भर के देख लो कोमल कितनी बड़ी बड़ी चुचियां है मेरी मम्मीं की।

हां सच में सुभम मैंने अब तक ईतनी खूबसूरत चुचीयां नही देखी हुं । तभी तो तुम्हें इतना मजा आता है ईन्हे दबाने में,,,,( इतना कहकर कोमल अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही सहलाने लगी,,, यह देखकर निर्मला बोली,,,।)

तुम भी इसे दबाकर मजा ले सकती हो कोमल,,,,
( और इतना कहकर वह घूम गई और अपनी पीठ को कोमल की तरफ करते हुए बोली,,,)

लो पहले अपने हाथों से ही मेरे ब्रा का हुक खोल कर दोनों कबूतरों को आजाद कर दो ताकि तुम मेरे उड़ते हुए कबूतरों को अपनी हथेलियों में पकड़ कर दबोच सको,,,,

बुआ मेरी तुम्हारे दोनों कबूतरों को अपनी हथेली में दबोच ना चाहतेी हूं,,,( और इतना कहने के साथ ही कोमल अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर निर्मला की ब्रा के हुक को खोल दी,, शुभम यह सब देख रहा था और खुद भी अपने नंगे लंड को अब कोमल की गांड पर रगड़ रहा था जोकि अभी भी पेंटी के अंदर केद थी,,,, शुभम का खुंठा पूरी तरह से तैयार था,, कोमल की रसीली बुर के अंदर जाने के लिए लेकिन अभी काफी समय था।,,, अगले ही पल कोमल अपने हाथों से निर्मला की लाल रंग ंकी ब्रा को निकाल फेंकी,,, निर्मला वापस कोमल की तरफ मुंह करके खड़ी हो गई कोमल तो बस देखती ही रह गई इस उम्र में भी निर्मला की चुचीया तनी हुई थी उसमें जरा भी लचक नहीं थी। यह देखकर कोमल से रहा नहीं गया और वहां अपने दोनों हाथ को आगे बढ़ाकर सीना तान कर आसमान में उड़ने कोे तैयार दोनों कबूतरों को अपनी हथेली में दबोच ली,,, और कॉमन इतनी तेजी से दोनों कबूतरों को दबोची थी कि निर्मला के मुंह से,,,, सीईईईईई की आवाज निकल गई और यही हाल कोमल का भी हुआ उत्तेजना के मारे उसके मुंह से भी सिसकारी निकल गई,,, दोनों खरबूजे को अपने दोनों हाथों में लेकर दबाते हुए कोमल बोली,,,

वाह बुआ तुम्हारी चूचियां तो वाकई में बेहद लाजवाब है,,। सच कहूं तो मुझे बहुत मजा आ रहा है मेरी तो अभी छोटी छोटी है।,,, तुम्हारी दोनों चूचियों को देखकर मेरी भी इच्छा होती है कि मेरी भी एैसी बड़ी बड़ी चूचीया हो।,,, ( कोमल निर्मला की दोनों चुचियों को दबाते हुए मस्त हुए जा रही थी ।
कोमल इतनी ज्यादा काम भावना के आधीन हो कर मस्त हो गई थी कि उसने अपनी सारी मर्यादाओं को पीछे छोड़ आई थी,,, वह मन में यही सोच रही थी कि जब एक मां खुद अपनी बेटे के साथ सारी मर्यादा लांघ कर शारीरिक संबंध बनाकर मजे ले सकती है,तो वह तो शुभम की चचेरी बहन और निर्मला की भतीजी थी। उसे इन दोनों के सामने खुलकर मजा लेने से कोई एतराज नहीं था और वैसे भी जो तुमने जिस तरह से उसकी तन बदन में काम होना जागरूक किया था उसको बुझाना भी बेहद जरूरी था,,,। एक बार के संभोग से उसका मन भरने वाला नहीं था। बल्कि उस दिन के संभोग के बाद से तो वह और ज्यादा प्यासी हो गई थी।,,,
कोमल निर्मला के दोनों खरबूजा को दबाकर मजा ले रही थी उसे यह नहीं मालूम था कि उसे मुंह लगाकर पीने में भी बेहद आनंद की प्राप्ति होती है। और यही निर्मला भी चाहती थी कि कोमल उसकी बड़ी-बड़ी चुचियों को मुंह में भरकर पीए,,, इसलिए वह कोमल से बोली,,,,

कोमल दबाने से ज्यादा तो इसे मुंह में भरकर पीने में मजा आता है,,, तू भी से मुंह में भर कर पी तुझे बहुत मजा आएगा,,, और सच कहूं तो औरतों की चूचियां बढ़ती भी इसी वजह से,, मेरी चूचियों को भी तेरे फूफा जी और अब तेरा भाई खूब पीता है तभी तो यह इतनी सुंदर हुई है,,,। तूने अभी तक किसी को अपने दूध पिलाया नहीं है इसलिए तेरे टिकोरे अभी छोटे हैं,,, देखना जब तेरे दोनों की करो को मेरा बेटा दबा दबा कर मुंह में भरकर पिए गाना तो यह भी जल्दी जल्दी नारंगी हो जाएंगे और नारंगी के बाद खरबूजे,,,,( कुर्ती के ऊपर से ही निर्मला कोमल की दोनों चूचियों को दबाते हुए बोली,,,, )

सच कह रही हो बुआ मैं भी अपनी दोनों चूचियों को बड़ी करना चाहती हूं तुम्हारी तरह,,,,

अगर सच में बड़ी करना चाहती है तो शुभम से दबवाया कर और उसे पिलाया कर,,, तब जाकर बड़ी बड़ी हो जाएंगी,,,,
( शुभम जोकी कोमल की गांड पर अपने लंड के सुपाड़े को रगड़ रहा था वह दोनों की बातों को सुनकर मस्त हुए जा रहा था,,,, कोमल से रहा नहीं गया और वह निर्मला की बात मानकर निर्मला की चुची पर मुंह भिड़ा दी,,,, और कुछ ही देर में कोमल छोटे बच्चे की तरह बारी बारी से दोनों चुचियों को मुंह में भर कर पीना शुरू कर दी,,, शुभम कामोत्तेजना से भरा जा रहा था उसे रहा नहीं जा रहा था और वह घुटनों के बल बैठकर कोमल की पेंटी को नीचे की तरफ सरकाने लगा,,,,।

एक तरफ कमरे में जहां शुभम दो दो औरतों के साथ ऊनकी जवानी का रस पीने को बेकरार था,, अपनी मर्दानगी की ताकत से दोनों औरतों की रसीली बूर की दीवारों को फैलाने के लिए मचल रहा था। वहीं दूसरी तरफ कमरे में,, अपनी जिंदगी की हसीन सुहागरात को बेहद हसीन बनाने के ख्वाब देख रही सुगंधा,, अपने पति के निठल्ले पन से वाकिफ होने लगी थी,, क्योंकि उसका पति कमरे में आ चुका था लेकिन बिस्तर पर एक किनारे बैठ कर बिना कुछ बात किए बस ईधर उधर देख रहा था।,,, दोनों कमरों मे जवानी से छलकती औरतें मौजूद थी,,, जो अपने प्यार के सागर में सब कुछ डुबो देना चाहती थी लेकिन दोनों कमरों का नजारा कुछ अलग ही था,,,,। एक कमरे में एक दुल्हन थी जो अपनी विवाहीत जीवन की शुरुआत अपनी सुहागरात से करने वाली थी,, और तड़प रही थी, अपनी जवानी के रस को अपने पति को पिलाने के लिए,,, लेकिन पति इतना नहीं था अगला नकारा था कि जवानी से लबालब अपनी पत्नी की तरफ नजर उठा कर देखने भर की ताकत नहीं थी तो ऐसे में बहुत कि प्यास किया बुझाता।

दूसरी तरफ जवानी की ओखली पूरी तरह से मुसल से कुटवाने के लिए तैयार थी। ।।
04-02-2020, 05:11 PM,
RE: Sex kahani अधूरी हसरतें
दूसरी तरफ जवानी की ओखली पूरी तरह से मुसल से कुटवाने के लिए तैयार थी। ।।
कमरे का माहौल पूरी तरह से गर्म होता जा रहा था निर्मला कोमल और शुभम तीनों में से किसी ने इस बात की कभी कल्पना भी नहीं की थी कमरे में इस तरह से वह तीनों एक साथ जवानी के रस मे डूबेंगे। निर्मला के चेहरे पर उन्माद साफ तौर पर छलक रहा था कुछ देर पहले निर्मला घबराहट के मारे सोचने समझने की शक्ति खो बैठी थी चित्र सी कोमल उसे धमका रही थी उसे देखते हुए निर्मला पूरी तरह से डर गई थी और उसे लगने लगा था कि अब वह अपने ही परिवार में बदनाम हो जाएगी,,, लेकिन जिस तरह से शुभम ने समझा बुझा कर उसे जवानी के मजे लूटने के लिए कमरे में लाया था उसे देख कर निर्मला काफी खुश और आश्चर्य में थी।
लेकिन इस समय कमरे में मौजूद तीनों शख्स एक दूसरे के बदन पर खेल रहे थे। कोमल अपनी शर्म हया को त्याग कर अपनी बुआ की बड़ी-बड़ी चुचियों को दबा दबा कर पीने में व्यस्त हो गई थी। निर्मला इस तरह से कोमल के द्वारा चूची पीने पर वह मदहोशी के आलम में मस्त हुए जा रही थी,, जिंदगी में पहली बार वह किसी औरत के हाथों से अपनी सुडोल बदन को इस तरह से दबावा रही थी मसलवा रही थी,,,, निर्मला कभी सोचा भी नहीं थी कि एक स्त्री होने के बावजूद भी किसी गैर स्त्री का उसके बदन को इस तरह से चुमना चाटना दबाना उसे इतना अच्छा लगेगा,,,, औरत के साथ मजे लेने का यह उसका पहला अवसर था इसलिए इसके बारे में उसे इसके प्रति आनंद की अनुभूति की कल्पना भी नहीं थी लेकिन घर के पीछे जिस तरह से वह कोमल के नितंबों से खेल रही थी उसे उस पल बेहद आनंद की अनुभूति हुई थी इसलिए वह इस समय कमरे में अपनी उसी आनंद को और ज्यादा बढ़ाने के उद्देश्य से कोमल को और कस कस के दबा दबा कर चुचीयां पीने के लिए उकसा रही थी,,, और साथ ही अपने दोनों हाथों से कोमल की भरावदार गांड को दबाए भी जा रही थी,,,
दोनों औरतों को इस तरह से आपस में मजे लेकर मस्ती करते हुए देखकर शुभम पूरी तरह से कामा तूर हो चुका था। उस का मुसल ओखली में जाने के लिए छटपटा रहा था शुभम घुटनों के बल बैठकर धीरे-धीरे करके कोमल की चड्डी को नीचे की तरफ सरका दिया और चड्डी को बिना पैरों से निकाले ही घुटनों तक लाकर छोड़ दिया।,,, शुभम सांसे उत्तेजना के मारे तीव्र गति से चल रही थी वह आंखों में नशा लिया कोमल की गोलाकार गांड को देखे जा रहा था। जो कि अभी भी कुर्ती से ढकी हुई थी जिसे शुभम अपने हाथों से पकड़कर थोड़ा सा ऊपर उठाते हुए, कोमल की गोरी गोरी गांड पर अपनी नाक रगड़ कर उसकी मादक खुशबू को महसूस करने लगा।,,, कोमल के नितंबों से आ रही बेहद नाटक खुशबू शुभम के लिए नशे का काम कर रही थी, उसकी आंखों में खुमारी छाने लगी थी।,,, शुभम से कोमल के बदन से आ रही उत्तेजक खुशबू बर्दाश्त नहीं हो रही थी।,, और वह अपनी नाक को कोमल की मुलायम गांड की दोनों फांकों को हाथों से पकड़कर फैलाते हुए बीच की दरार में अपनी नाक को ऊपर से नीचे की तरफ रगड़ने लगा,,, शुभम की इस हरकत की वजह से कोमल का बदन कसमसानेे लगा,,,, शुभम जीस तरह की हरकत कर रहा था उसकी वजह से कोमल की कमर दाएं बाएं पानी की लहर की तरह लहरा रही थी जिससे यह नजारा और भी ज्यादा उत्तेजक हुए जा रहा था।,,, कोमल को जरा सा भी संभलने का मौका नहीं मिल रहा था। कोमल अपने ऊखड़ती हुई सांसो को दुरुस्त नहीं कर पा रही थी। सुभम नीचे से लगा हुआ था तो निर्मला ऊपर से उसकी आग को और ज्यादा बढ़ाते हुए अपने दोनों हाथों में कुर्ती के ऊपर से ही उसकी दोनों कबूतरों को दबा दबा कर दाना खिला रही थी। कोमल इस तरह की उत्तेजना का सामना करते हुए पूरी तरह से कामातुर हो चुकी थी। वह भी पागलों की तरह छोटे बच्चे की तरह निर्मला का दूध पिए जा रही थी,,, शुभम पर तो जैसे,, काम का भूत सवार हो गया था वह अपनी नाक को नितंबों की दरार के बीचो-बीच रगड़ते हुए। कोमल की भूरे रंग के छेद कर अपनी नाक रख कर उसकी खुशबू को अपने अंदर उतार रहा था,, जिससे उसकी उत्तेजना में निरंतर बढ़ोतरी हो रही थी शुभम की यह हरकत कोमल के बदन में हलचल बढ़ा रही थी,। कोमल समझ नहीं पा रही थी कि सुभम यह क्या कर रहा है लेकिन जो भी कर रहा था उससे उसका आनंद दुगुना होता जा रहा था तभी शुभम ने ऐसी हरकत कर दिया कि पल भर में भी कोमल की बुर से मदन रस की पिचकारी छूट पड़ी,,, इसमें कोमल का दोष बिल्कुल भी नहीं था अपनी उत्तेजना पर काबू कर पाने में वह अभी पूरी तरह से कच्ची थी,,,। वैसे भी बदन की उत्तेजना क्या होती है इस बात से वाकिफ भी शुभम ने हीं कराया था,,,। इसलिए तो शुभम ने जब अपनी जीभ निकालकर कोमल की नितंबों के लकीर के बीचो-बीच के उस भूरे रंग के संवेदनशील क्षेंद पर रखकर उसे चाटना शुरू किया तो कोमल का भेरू जवाब दे गया और वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाई और नियंत्रण खोने की वजह से,,, उसका इस कमरे में पहला स्खलन हो गया। उसका बदन पूरी तरह से अकड़ गया था और उसकी बुर से मदन रस नीचे फर्श पर चूने लगा,,, जिस तरह से अकड़ते हुए कोमल के मुंह से हल्की सी सिसकारी की आवाज आई थी। निर्मला को समझते देर नहीं लगी थी कोमल झड़ रही थी। इसी बात की पुष्टि करने के लिए अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर कोमल की जांघो के बीचो-बीच बुर पर रख दी,, जिसमें से अभी भी मदन रस का स्राव हो रहा था,,,यह देख कर निर्मला मुस्कुराते हुए बोली,,,।
वाह कोमल रानी तुम तो अभी से पानी छोड़ रही हो अभी तो पूरी रात बाकी है।,,, (इतना कहने के साथ ही कोमल की उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए निर्मला ने अपनी नाजुक हथेली में कोमल के कोमल अंग को दबोच ली। जिससे कोमल के मुंह से सिसकारी निकल गई,,।

आहहहहहहहह,,, बुआआआआ,,,,,,,,


क्या हुआ मेरी प्यारी कोमल रानी,,,, अभी से सिसकारी छुटनें लगी,,,,,( इतना कहने के साथ ही निर्मला ने कोमल को संभालने का मौका ना देते हुए अपनी बीच वाली उंगली को सीधे उसकी रसीली पुर के अंदर बिना रुके घुसादी,,, बुर पूरी तरह से गीली होने की वजह से निर्मला की बीच वाली लंबी उंगली पूरी की पूरी बुर के अंदर समा गई,,,,,,।


आहहहहहहहहह,,, मर गई रे बुआआआ,,,,,,,,,,,
( कोमल को निर्मला की हरकत की वजह से दर्द का का एहसास हो रहा था लेकिन निर्मला बिना रुके अपने बीच वाली उंगली को धीरे धीरे उसके घर के अंदर बाहर करने लगी और उंगली से उसकी बुर को चोदते हुए बोली,,,,।)

तुम्हारा अभी से यह हाल है कोमल रानी अभी तो मेरी सिर्फ ऊंगली गई है,,,, तब तुम इतना छटपटा रही हो,,, तब क्या होगा जब मेरा बेटा तुम्हारी बुर में अपना मोटा लंबा लंड डालकर तुम्हे चोदेगा,,,,,।
( निर्मला को कोमल की बुर अभी तक कुंवारी ही लग रही थी उसे यह नहीं मालूम था कि जिस बुर में उंगली डालकर उसे मोटे तगड़े लंड से डराने की कोशिश कर रही है ऊसी बुर के अंदर उसका बेटा अपना मोटा बड़ा लंड डालकर उसे पेल चुका था। लेकिन कोमल भी इस बात को निर्मला के सामने जाहिर नहीं होने देना चाहती थी इसलिए बात को घुमाते हुए बोली,,,,।


बुआ मुझे तुम डरा रहे हो बाकी मैं आपसे चली जाऊं और तुम अकेले ही शुभम के लंड से चुद कर मजा ले सको,,, लेकिन आज मैं भी तय करके आई हूं कि आज की रात में भी तुम्हारे साथ मजा लूंगी और तुम्हारे बेटे के लंड को अपनी बुर में लेकर चुदवाऊंगी,,,,,,
04-02-2020, 05:11 PM,
RE: Sex kahani अधूरी हसरतें
( दोनों की बातों से मस्त होकर शुभम लगातार अपनी जीभ से उस भूरे रंग के छेद को चाटते हुए छेड़ रहा था,,, शुभम को कोमल की खूबसूरत गांड की गुलाबी छेद के ऊपरी भूरे रंग के छेद को चाटने में ज्यादा मजा आ रहा था,,,,। कोमल भी निर्मला को अपना इरादा बता कर दोनों हाथों से उसकी चूचियों को दबाते हुए पिए जा रही थी।,,,
तीनों लगे हुए थे निर्मला अपनी बीच वाली उंगली को अब बड़ी तीव्र गति से कोमल की जड़ के अंदर बाहर करते हुए उसे चुदाई का सुख प्रदान कर रही थी।,,,
पागलों की तरह कोमल की गांड चाटे जा रहा था। कमरे का माहौल पूरी तरह से गर्मा चुका था,,, कमरे के बीचो-बीच कोमल और निर्मला खड़े होकर एक दूसरे के अंगों से खेल रहे थे और शुभम अपने घुटनों के बल नीचे बैठकर कोमल की मदभरी गांड चाट रहा था। शुभम अपनी जीभ को सुई की तरह नुकीली करके धीरे धीरे कोमल की गांड के भूरे रंग के छेद में डालना शुरू कर दिया था। कोमल की चूस्त छेद को देख कर शुभम को इतना तो समझ में आ रहा था कि से ज्यादा अंदर कुछ भी जाने वाला नहीं है फिर भी वह जबरदस्ती अपनी जीभ को अंदर की तरफ ठेले जा रहा था। लेकिन शुभम की यही जबरदस्ती कोमल की मदहोशी का कारण बन रही थी रह रह कर उसके मुख से गर्म सिसकारी पूरे कमरे में सुनाई दे रही थी,,आलम यह हो गया था की मस्त हो चुकी कोमल अपने नितंबों को गोल-गोल घुमाते हुए अपनी सुडोल गांड को शुभम के चेहरे पर रगड़ने लगी थी,,,, जिसकी गर्मी और मादक खुशबू में खोकर शुभम एकदम से चुदवासा हो गया था। कोमल की गांड को चाटते हुए एक हांथ से लंड को सहला रहा था।
धीरे-धीरे तीनों पूरी तरह से कामोत्तेजित चुके थे।,,,,
शुभम दोनों हाथों से कोमल की गांड को दबा दबा कर एकदम लाल टमाटर की तरह कर दिया था।,,, शुभम से बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था उसे अब अपने लंड को गुलाबी छेद में डालने के लिए तड़प बढ़ती जा रही थी।,,, खड़ा हो गया और कोमल की कुर्ती पकड़कर ऊपर की तरफ सरकाने लगा,,, कोमल भी मौके की नजाकत को समझते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर कर दी ताकि शुभम आराम से उसकी कुर्ती को निकाल सके और देखते ही देखते शुभम ने उसके बदन से कुर्ती को निकालकर नीचे फेंक दिया,,, शुभम ठीक उसके पीछे खड़ा होने की वजह से उसके टनटनाए लंड का स्पर्श कोमल अपने नितंबों पर बराबर महसूस कर रही थी,,,, मोटे तगड़े लंड का स्पर्श नितंबों पर होते ही कोमल की बुर फुदकने लगी और उससे रहा नहीं गया और वह अपना एक हाथ पीछे की तरफ ले जाकर शुभम के मोटे लंड को पकड़ कर हिलाने लगी।,,,
यह सब देखकर निर्मला की प्यास बढ़ती जा रही थी और वह अपने हाथों से अपनी साड़ी को खोलने लगी देखते ही देखते वह पूरी तरह से नंगी हो गई,

निर्मला को पूरी तरह से नंगी अपनी आंखों के सामने खड़ी हुई देखकर कोमल आश्चर्य से फटी आंखों से उसे देखे जा रही थी। कोमल की नजरें ऊपर से नीचे की तरफ घूम रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि कोई औरत इतनी उम्र में भी खूबसूरत हो सकती है निर्मला कोमल की नज़रों को भाप गई थी,,, इसलिए उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए वह खुद ही अपने हाथों से दोनों चूची को पकड़ कर उसकी तरफ आगे बढ़ते हुए बोली,,।

क्या देख रही हो कोमल रानी,,,?

कुआं में देख रही हूं कि इस उम्र में भी क्या औरत इतनी खूबसूरत हो सकती है।

तो तुझे क्या लग रहा है यह सच है या सपना?

मुझे तो यह सपना ही लग रहा है क्योंकि मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि कोई औरत इस उमर में इतनी ज्यादा खूबसूरत हो सकती है।,,,
( कोमल इतना कह रही थी कि निर्मला अपना हाथ आगे बढ़ाकर कोमल की बुर पर अपनी हथेली रखते हुए बोली,,,।)

मेरी कोमल रानी तुम्हारी बुर देख कर मुझे अपनी जवानी के दिन याद आ गए ( एैसा कहते हुई निर्मला अपनी हथेली को हल्के हल्के उसकी गुलाबी बुर पर फिरा रही थी,,, कोमल के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी और उसके मुंह से हल्की सी सिसकारी की आवाज आने लगी,,,,।)

सससहहहहहह,,,, बुअा क्या कर रही हो बुआ,,,,

जवानी का मजा कैसे लिया जाता है यह तुम्हें सिखा रही हूं,,।

आहहहहहहहह,,,,, बुआ मुझे पता नहीं क्या हो रहा है,,
( कोमल सुभम के लंड को अपनी गांड पर रगड़ते हुए बोली,,,।)

कुछ नहीं हो रहा है यह तुम्हें मजा आ रहा है और ऐसे ही लिया जाता है मजा,,,, लाओ जरा ठीक से तो देख लो तुम्हारी मुनीया कैसी है,, देख लूं जरा कि मेरे बेटे का मोटा लंड तुम्हारी बुर में घुसेगा भी या नहीं,,,,,
( ऐसा कहते हुए निर्मला घुटनों के बल बैठ गई शुभम यह सब देख रहा था और उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान हुए जा रहा था क्योंकि उसकी नहीं है ना कि कोमल बदन का हर कटाव उसके तन बदन में आग लगा था,,, कोमल पूरी तरह से मस्त हुए जा रहेी थीे और अब वह शुभम के लंड के सुपाड़े को अपनी गांड के बीच की दरार के बीचो-बीच रगड़ना शुरू कर दी थी। जिससे कोमल की भी हालत पल पल खराब हुए जा रही थी।,,,
घुटनों के बल बेठी निर्मला बड़े ध्यान से कोमल की खूबसूरत बुर की बनावट को देख रही थी और गहरी सांसे लेते हुए कोमल उत्सुकता से निर्मला की तरफ देखे जा रहीे थी,,, निर्मला से रहा नहीं जा रहा था और वह अपना हाथ आगे बढ़ाकर अपनी उंगलियों से कोमल की बंद सिपी को खोलने की कोशिश करते हुए बोली,,,,

वाहह कोमल ऐसा लग रहा है कि तुमने अभी एक बार भी अपनी बुर के अंदर लंड नहीं ली हो।,,,, सच कह रही हुं ना मै।,,,,,,

हां,,, बुआ,,, आज तक मैंने इसे किसी को छूने भी नहीं दि हुं।

इसका मतलब है इसका उद्घाटन मेरे बेटे के द्वारा ही होगा।,,,,
( जवाब में कोमल कुछ नहीं बोली बस शर्मा कर दी गई जबकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि शुभम ने उसकी बुर का उद्घाटन पहले हीं कर चुका है। लेकिन यह बात निर्मला नहीं जानती थी और ना ही कोमल यह चाहती थी कि यह बात निर्मला को पता चले इसलिए वह कुछ नहीं बोली बस निर्मला की हरकतों का आनंद ले रही थी और खुद भी शुभम के मोटे सुपाड़े से खेल रही थी।,,,
निर्मला की हरकतों की वजह से उसके बदन की गर्मी बढ़ती जा रही थी निर्मला हल्की-हल्की अपनी उंगलियों के द्वारा कोमल की नाजुक बंद सीपी को खोलने की कोशिश कर रही थी,,, जोकि बुर की अंदरूनी दीवारों से हो रहे स्त्राव की वजह से बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी निर्मला को कोमल की बुर से छेड़खानी करने में मजा आ रहा था। निर्मला के मन में कुछ और भी चल रहा था अब तक उसने अपने बेटे से ही अपनी बुर चटाते आई थी,, इसलिए आज उसका मन है कह रहा था कि वह भी कोमल से अपनी बुर चटवाए,, और उसी से अपनी दूर चला कर यह देखना चाहती थी कि औरत की बुर जब औरत चाटती है तो कैसा महसूस होता है,,,, लेकिन वह सीधे-सीधे कोमल को यह नहीं कह सकती थी कि ले मेरी बुर चाट ले,, क्योंकि उसके मन में हो रहा था कि हो सकता है की कोमल यह कार्य करने से इंकार कर दें क्योंकि उसके लिए यह सब बिलकुल नया नया था और बुर पर अपना मुंह रखकर जीभ से चाटने में हो सकता है उसे अच्छा ना लगे और वह इंकार कर दें और सारा मजा किरकिरा हो जाए,,,, और ऐसा बाप होने नहीं देना चाहती थी इसलिए वह अपनी हरकतों से कोमल को इतनी ज्यादा कामविभोर से लिप्त कर देना चाहती थी कि ताकि वह जो भी वह बोले वह करने के लिए तैयार हो जाए,,,,,, ईसलिए निर्मला अपनी नशीली आंखों से कोमल की आंखों में झांकते हुए अपने गुलाबी होठों के पीछे से अपनी रशीली जीभ को बाहर निकाली,,, कोमल को समझ पाती इससे पहले ही निर्मला ने अपनी जीभ को नुकीली आकार में करके कोमल के देखते ही देखते उसकी रसीली बुर की पतली दरार पर हल्के से स्पर्श करके,,, उसकी कामाग्नि को और ज्यादा भड़का दि,,, कोमल तो पूरी तरह से अचंभित हो चुकी थी उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था,,, एक औरत औरत की बुर से इस तरह मुंह लगाकर प्यार करेगी लेकिन यह हकीकत था जिसे वह अपनी फटी आंखों से देख रही थी सुभम भी पूरी तरह से चुदवासा हो गया था,,, कोमल खुद अपने गांड के भूरे रंग के छेद पर शुभम के मोटे लंड को रगड़ रही थी,,,, इस दौरान शुभम ने कोमल के ब्रा के हुक को खोल कर उसकी ब्रा भी उसके बदन से अलग कर दीया था। कोमल संपूर्ण का नग्न अवस्था में खड़ी थी और उसकी गोरे बदन को देखकर शुभम अपने आप पर बिल्कुल भी सब्र नहीं कर पाया और पीछे से उसे अपनी बाहों में भरते हुए उसकी दोनों कबूतरों को अपनी हथेलियों में भर कर दबोच लिया,,,,,, इसी बीच कोमल के बदन में झटका सा महसूस हुआ क्योंकि इस दौरान निर्मला अपनी जीभ सहित अपनी गुलाबी होठों के बीच जितना हो सकता था उतना कोमल की करणपुर को अपने मुंह में भरने की कोशिश करते हुए पूरी तरह से कोमल की बुर को अपने होटो के बीच भींच ली । इतनी ज्यादा अत्यधिक उत्तेजना को अपने बदन में महसूस करके निर्मला की हरकत की वजह से उसके तन बदन में कंपन होना शुरू हो गया निर्मला अपने दोनों हाथों से उसकी नरम गरम नितंबों को दबाते हुए उसकी बुर चाटने का आनंद उठाने लगी और कोमल इतने ज्यादा उत्तेजना बर्दाश्त ना कर पाने की शक्ल में गरम गरम सिसकारी छोड़ने लगी और उसके हाथ से शुभम का मोटा तगड़ा लंबा लंड भी छूट गया क्योंकि वह खुद अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर शुभम की कमर पकड़ कर अपने बदन से चिपका ली,,, शुभम का मोटा लंड कोमल के नितंबों के नीचे गदर मचाते हुए सीधे उसकी बुर के सामने उसका सुपाड़ा पहुंच गया जहां पर निर्मला अपने गुलाबी होठों से कोमल की बुर चाट रही थी,,,,, अपनी आंखों के सामने अपनी बेटे के मोटे तगड़े लंड के बदामी रंग के सुपाड़े को देख कर,,, निर्मला की उत्तेजना और खुशी का ठिकाना नहीं रहा और वह कोमल की बुर चाटते चाटते गप्प से शुभम कै सुपाड़े को मुंह में भर कर चूसने लगी,,,, कोमल के लिए यह नजारा बेहद उत्तेजक था उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था यूं तो उसने शुभम और उसकी मां को चुदाई करते हुए देख चुकी थी। लेकीन इस समय वह जीस उत्तेजक दृश्य का दर्शन कर रही थी उसे देखकर उसकी हालत खराब हो चुकी थी,,, उसे यकीन कर पाना मुश्किल हो रहा था कि एक मा इस तरह से अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी। कोमल की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी। कोमल और कस के शुभम की कमर को पकड़ कर अपने बदन से सटाए हुए थी ऐसा लग रहा था कि जेसे वह शुभम को उसकी बुर में लंड डालने के लिए प्रोत्साहित कर रही हो,,,,

एक तरफ जहां जवानी से भरपूर मादकता छलक रही थी पूरे कमरे में मदहोशी का आलम छाया हुआ था,,,
वहीं दूसरी तरफ सुगंधा की सुहागरात नीरस होती जा रही थी,,, सुगंधा का पति ठीक है कि सुगंधा से बात भी नहीं कर पा रहा था क्या देखकर सुगंधा की आंखों में आंसू आ गए वह समझ गई थी उसकी जिंदगी खराब हो गई है।

04-02-2020, 05:11 PM,
RE: Sex kahani अधूरी हसरतें
कमरे में उत्तेजना की परिभाषा को द्रश्यात्मक तरीके से परिभाषित करते हुए शुभम अपनी कमर को होले होले कोमल की नरम नरम नितंबों पर आगे पीछे करते हुए हिला रहा था,,, जिसकी वजह से उसका मोटा तगड़ा
लंड कोमल की कोमल दरारों के नीचे के भाग में रगड़ खाते हुए आगे पीछे हो रही थी,,, कोमल के लिए शुभम की यह हरकत संभोग से कम नहीं थी,,, एक तो पहले से ही शुभम की मां अपनी जीभ से हरकत करते हुए उसकी बुर में आग लगा रही थी और दूसरे यह शुभम अपनी मौसम की गर्मी से बुर के मदन रस को पिघला रहा था। यह सब कोमल के लिए असहनीय था।,,, और ऊपर से उसकी आंखों में खुमारी का नशा बढ़ता ही जा रहा था,, रह रहकर निर्मला कभी अपने बेटे के मोटे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी तो कभी कोमल की रसीली बुर पर जीभ लगाकर उसके रस को गटक ने लगती,,,,
कोमल पूरी तरह से कसमसा रही थी और इस कशमकश की वजह से कमर के नीचे का भाग गोल गोल घूम रहा था जिसकी वजह से कोमल का मजा दोगुना होता जा रहा था। गर्मी का महीना और उपर से कमरे का गर्म दृश्य तीनों के बदन मे काम भावना की तपिश भर रहा था। तीनों के बदन से पसीनेकी बूंदें टपक रही थी।,,, आज पहली बार निर्मला बुर चाटने का आनंद ले रहीे थी उसे आज यह बात अच्छी तरह से समझ में आ गई थी कि मर्दों को घर जाने में कितना मजा आता है तभी तो वह या भी नहीं देखते कि बुर की सफाई ठीक से हुई भी है या नहीं बस उस पर टूट पड़ते हैं,,, और अपनी जीभ से ही चाट चाट कर उसे साफ कर देते हैं।,,, निर्मला की तरह से समझ गई थी कि जितना मजा बुर चुदाई का औरतों को मिलता है उतना ही मर्दों को भी प्राप्त होता है तभी तो वह इस समय पूरे जी जान से कोमल की बुर चाटने में लगी हुई थी।
शुभम कोमल की दोनों कबूतरों को अपने हथेली में भर कर होले होले से उसे पुच कार रहा था,,, कोमल के दोनों संतरों का रंग लाल टमाटर की तरह हो गया था। क्योंकि शुभम दोनों चुचियों को सहलाते-सहलाते उत्तेजना बस जोर से दबा दे रहा था। और इस वजह से कोमल की आह निकल जा रही थी।,,,,

सससहहहहहहह,,,,,, आहहहहहहहह शुभम यह क्या कर रहे हो तुम दोनों मां-बेटे मिलकर मेरे बदन में यह कैसी आग लगा रहे हो,,,, मुझसे यह बदन की गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही है,,,,।आहहहहहहहहह सुभम,,,,
( कोमल मदहोश होते हुए बोली)

ओहहहहहहह कोमल मेरी जान मेरी रानी आग तो तुमने मेरे बदन में लगा दी हो,,,, तुम्हारा खूबसूरत बदन जी मैं आ रहा है कि ईसें अपने सीने में भींच लु। मुझसे तुम्हारी जवानी बर्दाश्त नहीं हुई है। मेरा लंड तड़प रहा है तुम्हारी बुर मे जाने के लिए,,,,,

ससससहहहहहह तो डाल दो ना रोका किसने है मैं भी तो तड़प रही हुं तुम्हारे लंड को अपनी बुर में लेने के लिए,,,,।

( कोमल और कुसुम के बीच हो रही अश्लील वार्तालाप को सुनकर निर्मला की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी थी,,, उन दोनों के बीच की गंदी बातचीत की वजह से बिल्कुल भी हैरान परेशान नहीं थी क्योंकि जब दोनों के बीच और खुद उसके बीच की मर्यादा की दीवार ही गिर गई हो तो अपने शब्दों में संस्कार के ईंटों को जोड़कर कौन सी दीवार खड़ी कर लेंनी थी। इसलिए वहां उन दोनों की बातचीत से और ज्यादा उत्तेजित होकर इस बार अपने बीच वालेी ऊंगली को फिर से कोमल की गुलाबी बुर के छेद में डाल दी और इस वजह से कोमल के मुख से सिसकारी फूट पड़ी।


ससससहहहहहहहह,,,,, आहहहहहहहहहह बुआ,,,,,,,,, यह क्या कर रही हो,,,।

कोमल रानी तुम्हारी बुर में जगह बना रही हुं ताकि मेरी बेटे का मोटा लंड तुम्हारी बुर के अंदर आराम से जा सके,,,,,

तो ऊंगली क्यों उसी को डलवा दो,,,


बडी़ जल्दी पड़ी है तुम्हें लंड लैंने की,,,,,,,

क्या करूं बुआ तुमने जो मेरे बदन में आग लगाई हो मैं तड़प रही हूं तुम्हारे बेटे के लंड को लेने के लिए,,,


ले लेना अभी तो सारी रात बाकी है मेरा बेटा तुम्हारी अच्छे से चुदाई करेगा (इतना कहते हुए निर्मला अपने बेटे के लंड पकड़ कर उसके सुपाड़े का उसी तरह से उसकी गुलाबी बुर के दरार रगड़ने लगी,,,,)


आहहहहहहहहहहह,,, बुआ तड़पा क्यों रही हो,,,,


मेरी जान यहीं तड़प तो तुम्हें लंड निगलने में मदद करेगा,,,,,,
( निर्मला शुभम कै लंड के सुपाड़े को उसकी बुर के बीचो-बीच रगड़ रही थी जिसकी गर्मी कोमल बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। वह मजदूर थी वाईएनएन जताना चाहती थी कि शुभम ने उसे पहले भी चोद चुका है इसलिए वह अपने बदन में उठ रही चुदास की लहर को अपने अंदर दबाने के लिए अपने नितंबों को गोल गोल आकार में घुमाते हुए शुभम के मोटे और लंड की रगड़ को अपने अंदर महसूस करते हुए मस्त हुए जा रही थी। शुभम दोनों की मद भरी बातें सुनकर मस्त हो चुका था उसका भी सब्र टूट चुका था वह भी चाहता था कि जल्द से जल्द बा कोमल की फोटो में अपना लंड डाल कर उसे चोदे ले लेकिन अभी ऐसा करने पर उसकी मां नाराज हो सकती थी और वह उसे नाराज नहीं करना चाहता था निर्मला के मन में कुछ और ही चल रहा था वह सबसे पहले चुद़वाना चाहती थी। क्योंकि जितनी आप और को मत दीजिए बनाने के लिए उसे कहीं ज्यादा निर्मला मचल रही थी अपने बेटे के लंड को लेने के लिए,,, और वह कोमल के सामने चुदवा कर अपनी
प्यास को बुझा कर तृप्त होना चाहतीे थी,, कोमल ने जब से उसे और शुभम को चुदाई करते हुए पकड़ी थी तब से एक तरफ उसके मन में डर भी था लेकिन एक तरफ उसकी इच्छा यह भी हो रही थी कि वहां कोमल के सामने ही अपने बेटे से चुदवाए,, और अब उसकी यह ख्वाहिश पूरी होने वाली थी इसलिए,,, निर्मला खड़ी हुई और देखते ही देखते अपने बदन पर से सारे वस्त्र उतार फेंकी,,, कोमल और निर्मला दोनों एकदम नंगी हो चुकी थी शुभम कहां पीछे हटने वाला था वह भी खड़ा खड़ा यह देखता रहा और अपने भी वस्त्र उतार कर फेंक दिया। कमरे में तीनों संपूर्ण का नग्न अवस्था में खड़े थे शुभम की आंखों के सामने दो दो औरतें अपनी जवानी से लबालब बदल लिए उसकी आंखों के सामने खड़ी थी जिसे देख कर शुभम ललचा रहा था। उसका लंड छत की तरफ मुंह ऊठाए खड़ा था शुभम के टनटनाए हुए लंड को देख कर कोमल की बुर फुदकने लगी। वह गरम आहें भरते हुए बोली,,,,

शुभम तुम्हारा लंड तो ऐसा लगता है किसी जानवर का लंड है जिस तरह से मुंह ऊठाए खड़ा है,, मुझे तो डर लग रहा है।

डर क्यों लग रहा है कोमल रानी,,,( कोमल की बातें सुनकर शुभम अपने लंड को मुठीयाते हुए बोला,,)

इतना मोटा मेरी बुर ( नजरें झुका कर बुर की तरफ देखते हुए ) में जाएगा कैसे,,,,

( यह सुनकर निर्मला बोली)

चला जाएगा मेरे को मजा नहीं एक बार और अब जब चुदवासी हो जाती है तो गधे का लंड भी ले लेती है।
( निर्मला मुस्कुरा कर बोली।)

तुमतो ले लो की दुआ तुमको ना जाने कितनी बार ली हो लेकिन मेरे में कैसे जाएगा,,,

चला जाएगा मैं हूं ना सब ठीक कर दूंगी,,,


वैसे कहूं तो बुआ तुम ने अपने बेटे को क्या खाकर पैदा की हो उसका लंड भी एकदम गधे के लंड की तरह है।


तुम्हें कैसे पता कि शुभम का लंड गधे के लंड की तरह है तुमने देखी हो क्या गधे का?

बुआ यहा खेतों में अक्सर दिख ही जाते हैं घास चरते हुए अपना वह लटका कर घूमते रहते हैं।( कोमल एक्जाम छिनार पन दिखाते हुए बोली,,, उसे अब बिल्कुल भी शर्म महसूस नहीं हो रही थी। यह देखकर निर्मला और सुभम दोनों हैरान थे लेकिन दोनों मन ही मन खुश हो रहे थे कि इस तरह का खुलापन हीं चुदाई में और ज्यादा आनंद देता है।,,,, निर्मला कोमल की बात सुनकर हंसते हुए बोली।

एकदम छीनार होते जा रही हो,,,

तुम से बड़ी नहीं बुआ,,,,, ( कोमल भी निर्मला की बात का जवाब देते हुए हंस कर बोली,, जवाब में निर्मला भी बस मुस्कुरादी,,, क्योंकि निर्मला के लिए बोलने लायक कुछ भी नहीं था वैसे भी कोमल सच ही कह रही थी। निर्मला सच में इस समय किसी छीनार से कम नहीं थी।
दोनों को शुभम देखते हुए उत्तेजित हुए जा रहा था। उसका लंड पूरी तरह से तैयार था बुर नुमा गुफा मे जाने के लिए,,, उसके लिए दो दो औरते तैयार थी अपनी टांग फैलाने के लिए,, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि दोनों में से कौन सबसे पहले अपनी टांगे खोलेगी यह फैसला निर्मला को ही करना था निर्मला बखूबी जानती थी की सबसे पहले कमरे में शुभम का लंड कौन अपनेी बुर में लेगा।,,,
कमरे का माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका था आधी रात बीत चुकी थी बदन की गर्मी और वातावरण की गर्मी तीनों के बदन में अपना असर दिखा रही थी। तीनों के बदन पर पसीने की बूंदें चमक रही थी। तीनों एक दूसरे को बारी बारी से देख कर मस्त हुए जा रहे थे।,,, तभी निर्मला बोली,,,,

अब हमें खिड़की खोल देना चाहिए क्योंकि देखो हम तीनों की हालत कैसी पसीने से तरबतर हो चुके हैं।


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