XXX Hindi Kahani घर का बिजनिस
09-04-2018, 10:22 PM,
#11
RE: XXX Hindi Kahani घर का बिजनिस
घर का बिजनिस -9

जैसे ही मैं घर आया तो देखा कि अम्मी बैठक में अपने किसी ग्राहक के साथ थीं और बुआ दीदी के साथ बाहर ही बैठी हुई थी। मुझे देखकर दीदी हल्का सा मुश्कुरा दी।

बुआ ने कहा- हाँ आलोक, क्या बना? पता किया पायल का या नहीं?

मैं- हाँ, पता तो किया है बुआ और पायल ने हमें गलत बताया है…?

बुआ- क्या कोई ट्रिप नहीं जा रहा कालेज़ की तरफ से?

मैं- “बुआ, ट्रिप तो जा रहा है लेकिन 3 दिन बाद… पायल ने हमें जो बताया है उसके हिसाब से ट्रिप दो दिन बाद है…”

दीदी- भाई हो सकता है कि पायल से गलती हो गई हो और वो ये ही बताना चाहती हो कि ट्रिप 3 दिन बाद है…”

मैं- “हाँ, हो तो सकता है… इसके लिए ऐसा करते हैं कि पायल को आने दो एक बार फिर पूछ लेंगे…”
दीदी- हाँ भाई, ये ठीक है…”

अभी हम ये बातें ही कर रहे थे कि बापू और अम्मी बैठक में से बाहर निकल आए और अम्मी अभी नंगी ही थी और वो सीधा बाथरूम की तरफ चली गई।

तो बापू हमारे पास आ गये और पूछे- हाँ आलोक क्या बना पायल का?

मैंने बापू को भी बता दिया तो बापू ने कहा- “चलो कोई बात नहीं, आती है तो पूछ लेना…”

फिर बुआ और दीदी की तरफ देखकर कहा- “तुम दोनों तैयार हो जाना और शाम के 4:00 बजे आलोक के साथ फ्लैट के लिए निकल जाना। हो सकता है कि रात तुम लोगों की वहाँ ही गुजरे…”

बुआ ने कहा- हाँ भाई, काम जो ऐसा है जिसमें सारी रात दुकान चलती है और दिन में सोना पड़ता है हेहेहेहेहे…”

बापू भी हँस पड़े और उठकर बाहर चले गये फिर हम सबने मिलकर खाना बनाया और तब तक पायल और ऋतु भी घर आ गये थे तो अम्मी ने कहा- “खाना खाते हुये सबके सामने पूछ लेना पायल से, ठीक है…”

मैंने अम्मी की बात सुनकर हाँ में सर हिला दिया और जब हम सब खाना खाने बैठे तो मैंने कहा- “पायल कब जाना है तुम्हारा ट्रिप? और कितने पैसे चाहिए हैं तुम्हें?

पायल- “भाई दो दिन बाद जाना है और मुझे ₹5,000 चाहिए हैं बस…”

मैं- अच्छा, लेकिन तुम्हारे टीचर तो बता रहे थे कि ट्रिप 3 दिन बाद जाना है। लेकिन तुम दो दिन का बता रही हो एक दिन तुम्हें किसके साथ रहना है?

मेरी बात सुनते ही पायल के हाथ से निवाला गिर गया और वो हकलाते हुये- “वो… ब…भाई न…नहीं तो दो दिन बाद ही है…”

अम्मी ने पायल को घूरते हुये कहा- “क्यों पायल? तुम्हें एक दिन पहले कहाँ जाना है? हाँ…”

पायल ने अपना सर झुका लिया और कुछ नहीं बोली।

तो पापा ने पायल से कहा- चलो अभी खाना खाओ बाद में बात करेंगे इसपे ओके… अभी कोई बात नहीं करेगा…”

फिर सबने खामोशी से खाना खाया लेकिन पायल से कुछ खाया नहीं जा रहा था और ऋतु पायल की ऐसी हालत देखकर खिली जा रही थी।

खाना खाने के बाद बापू ने कहा- “पायल तुम और आलोक, तुम दोनों मेरे रूम में आओ और हाँ बाकी कोई नहीं आएगा…” और उठकर जाने लगे।

तो अम्मी ने कहा- अगर आप नाराज ना हो तो मैं भी आ जाऊँ?

अम्मी की बात सुनकर बापू ने कुछ सोचा और हाँ में सर हिलाते हुये बोले- “ठीक है आ जाओ तुम भी…” और रूम में चले गये।

बापू के जाने के बाद मैं अम्मी और पायल के साथ रूम में गया तो बापू ने पायल को घूरते हुये कहा- पायल, मुझे तुमसे ये उमीद नहीं थी कि तुम ऐसी निकलोगी…”

पायल- सारी बापू, गलती हो गई मुझसे प्लीज़्ज़… बापू मुझे मफ कर दो…”

अम्मी बापू को चुप रहने का इशारा करते हुये बोली- पायल, तुझे पता है कि तुम्हें और ऋतु को पढ़ने और किसी अच्छी जगह शादी करने के लिए मैं तुम्हारी बुआ और दीदी क्या कर रही हैं…” और तुम क्या कर रही हो?

पायल रोते हुये अम्मी से बोली- “अम्मी, मुझसे गलती हो गई। मैं अब ऐसा कुछ भी नहीं करूंगी…”

बापू अम्मी से बोले- “आज के बाद इसका पढ़ना बंद करो। ये बाहर नहीं जाया करेगी और अगर इसको इतना ही शौक चढ़ा है तो इसे भी लगाओ काम पे। चलो कुछ पैसे ही कमाकर लाया करेगी…”

पायल- नहीं बापू, प्लीज़्ज़… मुझे मफ कर दो। अब मैं ऐसा कोई काम नहीं करूंगी…”

बापू ने पायल की कोई बात नहीं सुनी और अम्मी के इशारा पे रूम से बाहर चले गये तो अम्मी ने कहा- पायल, किसके साथ मुँह काला करती फिर रही है? तू अब बता जरा?

पायल ने सर उठाकर एक बार अम्मी और एक बार मेरी तरफ देखा और फिर सर झुका लिया।

तो मैंने कहा- पायल, सुना नहीं… अम्मी क्या पूछ रही हैं?

पायल ने अम्मी की तरफ देखा और बोली- “नहीं अम्मी, मैंने अभी तक ऐसा कोई काम नहीं किया है…”

अम्मी ने पायल की तरफ देखा और कहा- “चलो ठीक है। मैं मान लेती हूँ। लेकिन सच बता? क्या तू ये एक दिन किसी हरामजादे के साथ ही गुजरने वाली थी ना?

पायल ने अपना सर कुछ और झुका लिया तो मैं और अम्मी दोनों ही समझ गये कि पायल अपने किसी बायफ्रेंड के साथ पूरा एक दिन और रात गुजरने वाली थी।

अम्मी ने फिर से कहा- क्या वो तेरे साथ शादी करना चाहता है?
पायल ने सर उठाकर अम्मी की तरफ देखा और हाँ में सर हिला दिया।

अम्मी ने पायल से कहा- “उसका नंबर बताओ जरा मैं बात करना चाहती हूँ उसके साथ…”

पायल ने उस लड़के का नंबर बता दिया तो अम्मी ने मुझे नंबर मिलाने के लिए कहा। जैसे ही मैंने नंबर मिलाया तो अम्मी ने मुझसे मोबाइल ले लिया और स्पीकर ओन कर दिया। 2-3 रिंग आने के बाद ही काल रिसीव हो गई तो अम्मी ने कहा- मैं पायल की अम्मी बात कर रही हूँ… आप कौन हो?

लड़का- जी आंटी, कोई काम था क्या मेरे साथ?

अम्मी- हाँ, पायल बोल रही थी कि तुम उसके साथ शादी करना चाहते हो… क्या ये सच है?

लड़का- जी आंटी, मैं पायल से बहुत प्यार करता हूँ…”

अम्मी- “ठीक है, तुम अपने पापा का नंबर दो जरा मैं उनसे तुम्हारी शादी की बात करना चाहती हूँ…”

लड़का अम्मी की बात से घबरा गया और बोला- “जी आंटी, वो पापा तो कहीं आउट आफ सिटी गये हुये हैं अभी बात नहीं हो सकेगी…”

अम्मी- ठीक है, अगर तुम पायल से शादी करना चाहते हो तो अभी अपने 2-3 दोस्तों को लेकर यहाँ आ सकते हो?

लड़का- क्यों आंटी? अभी क्या करना है?

अम्मी- मैं पायल के साथ तुम्हारी शादी करना चाहती हूँ… क्या आ सकते हो?

लड़का- “वो… आंटी, मैं अभी शादी की जिम्मेदारी को बर्दाश्त नहीं कर पाऊँगा… सारी…” और इसके साथ ही काल भी कट कर दी।

फोने बंद होते ही अम्मी ने पायल की तरफ देखा और कहा- “क्यों बेटी, पता चल गया अपने प्यार का…”
अम्मी की बात सुनते ही पायल ने अपना सर झुका लिया।

तो अम्मी ने मुझसे कहा- “तुम जाओ, मैंने पायल के साथ कुछ बात करनी है…”

अम्मी की बात सुनकर मैं समझ गया कि अब अम्मी पायल को क्या समझायेंगी इसीलिए मैं वहाँ से बाहर निकल आया और बुआ के रूम की तरफ चल पड़ा जहाँ दीदी भी बैठी हुई थी।

मुझे देखते ही बुआ ने कहा- “आ गया मेरा राजा… क्या हुआ? कुछ हमें भी बता दो?

मैं हँसता हुआ बुआ के पास जाकर बैठ गया और बोला- बुआ, आप पहले तो मुझे ऐसे नहीं बोलती थी अब क्या हो गया है?

बुआ ने हँसते हुये दीदी की तरफ देखा और फिर मुझे देखा और बोली- पहले कभी तूने मुझे चोदा नहीं था ना… अब क्यों चोदता है मुझे?

बुआ की बात सुनकर दीदी बुरी तरह शर्मा गई और सर झुका के बैठ गई।

तो मैंने कहा- “बुआ, आप भी ना कुछ तो सोचा करो। दीदी भी बैठी है यहाँ हमारे साथ…”

बुआ ने कहा- यार, टेंशन क्यों लेते हो? ये भी अब हमारे जैसी ही है इससे क्या शरमाना? आज नहीं तो कल इसे भी तो तुम्हारा लण्ड लेना ही है ना अपनी फुद्दी में…”

दीदी बुआ की बात से झेंप गई और बोली- बुआ, अगर आपने ऐसी बातें ही करनी हैं तो मैं यहाँ से जाती हूँ…” और उठकर खड़ी हो गई।

तो बुआ ने दीदी का हाथ पकड़ लिया और बिठाते हुये बोली- “अच्छा बाबा अब नहीं बोलती, तू बैठ यहाँ…”

दीदी के बैठते ही बुआ ने मुझसे पूछा- हाँ, अब बताओ क्या बना पायल का?

मैंने बुआ को जो हुआ था सब बता दिया।

तो बुआ खुश हो गई और बोली- “चलो अच्छा है कि पायल अभी तक बची हुई है वरना ये मुफ़्ती तो बर्बाद ही कर देते उसे और हमें पता भी नहीं चलता…”

मैं हाँ में सर हिला दिया और बुआ से पूछा- अब आप लोगों का कल का क्या इरादा है?

बुआ ने कहा कल से मैं और तुम्हारी बहन शाम 4:00 बजे ही तुम्हारे फ्लैट पे जाया करेंगे और सुबह वापिसी हुआ करेगी और तुम्हारी अम्मी यहाँ आने वाले छोटे मोटे ग्राहक निपटा दिया करेंगी और तुम्हारे बापू हमारे लिए ग्राहक ढूँढ़कर तुम्हारे पास भेज दिया करेंगे और इसके लिए हमारी पिक भी उन्होंने ले ली हैं।

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09-04-2018, 10:22 PM,
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घर का बिजनिस -10

बाकी का सारा दिन इसी तरह गुजर गया कुछ टाइम घर पे और बाकी दोस्तों के साथ आवारागार्दी और मूवी देखने में और रात के दो बजे मैं घर आया तो अम्मी ने दरवाजा खोला और मुझे देखते ही पूछा- बेटा कहाँ गया था?

तो मैंने अम्मी को देखा और कहा- “कहीं नहीं अम्मी, बस जरा दोस्तों के साथ टाइम पास करने गया था…” और सीधा रूम में आकर सो गया

सुबह जब उठा तो 10:00 बज रहे थे। मैं उठा और बाहर बने बाथरूम में नहाने के लिए घुस गया और फिर कपड़े बदलकर बाहर आया और नाश्ता माँगा जो कि दीदी ने तैयार करके दिया और मेरे पास ही बैठ गई। मैं नाश्ता करने लगा तो दीदी ने कहा- “भाई पता है, आज से पायल भी हमारे साथ ही जाया करेगी…”

मैं- अच्छा, किसने बताया तुम्हें? हाँ।

दीदी- भाई, वो बुआ बता रही थी मुझे रात को जब आप बाहर गये हुये थे।

मैं- और क्या बता रही थी बुआ तुम्हें, मुझे भी तो बताओ। क्या पायल के लिए भी कोई मिल गया है?

दीदी- नहीं भाई, मिला तो नहीं लेकिन पायल को वहाँ इसलिए भेज रहे हैं कि वो सब कुछ देखे और इसके लिए तैयार रहे। किसी भी वक़्त कोई मिल सकता है तो पायल वहाँ मौजूद हो।

मैं- चलो अच्छा है और तुम सुनाओ मजे से हो ना कोई परेशानी तो नहीं है?

दीदी- “नहीं भाई, कोई परेशानी नहीं अगर हुई तो आप किसलिए हो…” और फिर मेरे नाश्ता करने के बाद बर्तन उठाकर ले गई और मैं अम्मी के रूम की तरफ चल पड़ा जहाँ कोई भी नहीं था।

मैं अभी बाहर निकला ही था कि दीदी ने कहा- भाई किसे ढूँढ़ रहे हो आप?

मैंने कहा- दीदी, अम्मी का पता है वो कहाँ होंगी इस वक़्त?

दीदी ने कहा- भाई, वो अम्मी… इस वक़्त ना बैठक में हैं और सर झुका लिया।

तो मैं दीदी के पास गया और दीदी को अपने साथ लिपटा लिया और बोला- दीदी, आप इतना शरमाती क्यों हो?

दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया और चुपचाप खड़ी रही तो मैंने दीदी का चेहरा थोड़ा ऊपर उठाया और दीदी की आँखों में देखते हुये दीदी के गालों पे हल्की सी किस कर दी, जिससे दीदी का सारा जिश्म कांप उठा और दीदी अपने आपको मुझसे छुड़वाकर अपने रूम में भाग गई।

दीदी के जाने के बाद मैं बाहर हाल में ही बैठ गया और टीवी देखने लगा। कुछ देर के बाद अम्मी रूम में आ गई और नहाने चली गईं। उनकी वापसी तक मैं ऐसे ही बैठा रहा और अम्मी का इंतेजार करता रहा। अम्मी नहाकर आई और मेरे पास ही बैठ गई।

तो मैंने कहा- अम्मी, बुआ और पायल कहाँ हैं? घर में नजर नहीं आ रही।

अम्मी ने कहा- बेटा, वो पार्लर गई हैं तैयार होने के लिए।

मैंने कहा- लेकिन अम्मी, पायल वहाँ क्या करेगी?

तो अम्मी ने कहा- देखो बेटा, वहाँ जब लोग आयेंगे काम के लिए तो उन्हें जिस चीज की भी जरूरत हो पायल को ही भेजना इस तरह इसका डर भी खतम हो जायेगा।

मैंने अम्मी को कोई जवाब नहीं दिया और चुप हो गया और फिर बाकी दिन भी गुजर गया तो शाम 4:00 बजे मैं अपनी दो बहनों और बुआ को लेकर फ्लैट पे आ गया और उन्हें ड्रेस चेंज करने को बोला। जब तीनों ने ड्रेस चेंज कर ली तो कोई भी किसी से कम नहीं लग रही थी और पायल की गाण्ड तो मेरे लण्ड पे कयामत ढा रही थी। फिर हम वहाँ हाल में ही बैठ गये और इधर-उधर की बातें करके टाइम पास करने लगे।

कुछ ही देर के बाद बापू की काल आ गई उन्होंने कहा- “यार, दो आदमी भेजे हैं तुम्हारी तरफ और पैसे मैं ले चुका हूँ ठीक है…”

मैंने कहा- जी बापू और कोई बात?

तो बापू ने कहा- नहीं, बस ये ही बताना था और हाँ… उनमें से जो पहले भी आया था ना अंजली के लिए अरविंद उसे अंजली ही पसंद है। और दूसरे के पास अपनी बुआ को भेज देना।

मैंने बापू की बात सुनकर काल काट की और दीदी की तरफ देखा और कहा- “लो दीदी, लगता है आपका तो अरविंद आशिक हो गया…”

दीदी मेरी बात सुनकर हल्का सा हँस पड़ी।

तो मैंने कहा- “बुआ, आप भी तैयारी करो आपका भी काम है…”

बुआ ने कहा- “आने दे यार, जो भी है देख लूँगी साले हरामी को…” और हेहेहेहेहे करके हँसने लगी।

इस सबसे पायल थोड़ा घबराई हुई थी, लेकिन जाहिर नहीं होने दे रही थी। तभी दरवाजे की घंटी बजी तो मैं उठकर गया तो देखा कि अरविंद और उसके साथ एक और आदमी भी था जिन्हें मैं अंदर लाया और बिठा दिया।

अरविंद के साथ आने वाले ने बैठते ही पायल को अपनी तरफ खींच लिया क्योंकि अरविंद साहब दीदी को पकड़कर बैठ गये थे।

मैंने फौरन पायल का हाथ पकड़कर वहाँ से उठा दिया और बुआ को उसकी तरफ कर दिया और बोला- ये नहीं, भाई साहब आपने इसके पैसे दिए हैं।

उस आदमी का नाम जो मुझे बाद में पता चला कि बिनोद है। हँस पड़ा और बोला- “क्यों भाई, इसमें और उसमें क्या फरक है?

मैंने कहा- “ये अभी खुली नहीं है, नयी है। और तुमने इसके पैसे नहीं दिए हैं…”

मेरी बात सुनकर उसने दाँत निकाल दिए और बुआ को अपनी तरफ खींच लिया। लेकिन अरविंद साहब ने मेरी तरफ देखा और बोले- क्या सच में अभी सील पैक है ये लड़की?

मैंने कहा- जी सर, अभी तक किसी ने हाथ भी नहीं लगाया इसे।

अरविंद साहब ने अपनी पाकेट से मोबाइल निकाला और बापू को काल करके कहा- “यार, ये जो दूसरी लड़की है ना इसकी सील किसी और से नहीं खुलवाना। मैं कल तुम्हें पैसे दे दूँगा और कल इसकी खोलूंगा। ठीक है? और फिर काल कट करके दीदी के साथ लग गया।

पायल मेरे पास बैठकर बड़ी दिलचस्पी से ये सब देख रही थी।

तभी अरविंद साहब ने कहा- जाओ यार, बोतल ही ले आओ थोड़ा मजा ही कर लूँ। ऐसे मजा ही नहीं आ रहा है।
मैंने पायल को कहा- “जाओ और रूम की अलमारी से शराब की बोतल और गिलास ले आओ…”

पायल गई और 4 गिलास और शराब की बोतल ले आई जो कि उसने अरविंद साहब के सामने रख दी।

अरविंद साहब ने दीदी को कहा- “वो खुद बनाकर उसे पिलाए…”

दीदी उठी और शराब को दो गिलासों में डाल लिया और उस देने लगी।

तो अरविंद ने दीदी को एक हाथ से पकड़कर अपनी झोली में बिठा लिया और बोला- यहाँ बैठकर खुद भी पियो और मैं भी पियूंगा, मुझे इसी तरह मजा आएगा।

अब दीदी अरविंद की गोदी में बैठी शराब की चुस्कियां भर रही थी और अरविंद शराब की चुस्कियों के साथ दीदी की चूचियां को भी मसल रहा था जिससे दीदी का चेहरा लाल होता जा रहा था। अरविंद ने वहाँ बैठकर खुद भी 3 पेग लगाए और दीदी को भी 3 पेग लगवा दिए जिससे दीदी हल्के नशे में हो गई थी और तब अरविंद ने दीदी को अपने साथ लिया और रूम की तरफ चल पड़ा।

बिनोद और बुआ जो कि पहले ही एक रूम में जा चुके थे।

उसके बाद पायल ने मेरी तरफ देखा तो उसका चेहरा लाल तमाटर हो रहा था और उसकी आँखों में इस वक़्त सिर्फ़ एक ही चीज नजर आ रही थी और वो थी सेक्स… सिर्फ़ सेक्स की भूख। अब रूम में से दीदी की आवाजें सुनाई देने लगी थीं- “आअह्ह… सस्स्सीए… उन्नमह… हाँ… खा जाओ… प्लीज़्ज़… ऊओ… इसी तरह… हाँ जोर से चाटो…”

क्योंकि बुआ वाला रूम जरा आगे था और दरवाजा भी लाक था जिसकी वजह से वहाँ से कोई आवाज नहीं सुनाई दे रही थी।

पायल भी दीदी और अरविंद के रूम से आने वाली आवाज़ों को सुनकर काफी गरम हो रही थी और बैठी अपनी रानों को भींच रही थी।

मैंने अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया और टीवी लगाकर बैठ गया क्योंकि सच तो ये था कि इन आवाज़ों की वजह से मेरा अपना हाल भी पतला हो रहा था और दिल कर रहा था कि पायल को यहाँ ही गिरा लूँ और चोद डालूं। लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकता था क्योंकि पायल की सील अभी खुली नहीं थी।

कोई 30 मिनट के बाद अरविंद साहब ने आवाज दी।

तो मैंने पायल की तरफ देखा और कहा- जाओ सुनो, क्या बोल रहे हैं?

पायल उठकर रूम में गई और कुछ देर के बाद घबराई हुई वापिस आ गई और बोली- “भाई, उन्होंने ये पैसे दिए हैं कि कुछ खाने के लिए मंगवा दो। उन्हें भूख लगी है…”

मैंने कुछ देर तक सोचा और पायल को कहा- “तुम ऐसा करो कि ये सामने के बाथरूम में घुस जाओ और जब तक मैं ना बोलूं बाहर नहीं आना, वरना आज ही काम खराब हो जायेगा…”

पायल के बाथरूम में जाकर लाक करने के बाद मैं फ्लैट से निकला और करीब की ही मार्केट से खाना पैक करवा के ले आया। जैसे ही मैं फ्लैट में आया तो देखा कि दीदी और अरविंद बाहर हाल ही में नंगे बैठे हुये थे और दीदी नशे में अरविंद के साथ चिपटी हुई थी।

मैंने पायल को आवाज दी तो वो भी बाथरूम से बाहर आ गई और दीदी को इस तरह नशे में अरविंद के साथ चिपका देखकर शर्मा गई।

मैंने पायल को खाने का सामान दिया जिसे वो किचेन में ले गई और खाना बर्तनों में लगाकर उनके सामने रख दिया।

अरविंद भी उस वक़्त अच्छे खासे नशे में था खाना देखकर बोला- “आ जाओ यार, तुम लोग भी आ जाओ हमारे साथ ही खाना खाओ…” और दीदी को भी खाने के लिए बोलकर खाने पे टूट पड़ा।

खाना खाने के बाद अरविंद ने एक बार फिर से दीदी को अपनी तरफ खींच लिया और किस करने लगा और दीदी की चूचियां दबाने लगा जिससे दीदी शराब और सेक्स के नशे में गरम हो गई और अरविंद के लण्ड को अपने हाथ में लेकर हिलाने लगी। कुछ देर बाद अरविंद ने दीदी को पकड़कर सोफे पे ही सीधा कर दिया और दीदी की चूत को लाल्लप्प सर्ल्लप्प की आवाज के साथ चाटने लगा।

जिसे देखकर पायल भी काफी गरम हो गई और अपनी जीन्स के ऊपर से ही अपनी फुद्दी को रगड़ने लगी।
कुछ देर तक अरविंद दीदी की साफ और प्यारी फुद्दी को चाटता रहा और फिर दीदी की टाँगों को उठाकर अपने लण्ड को दीदी की फुद्दी में घुसा दिया जिससे दीदी के मुँह से सस्सीए… आहिस्ता करो… प्लीज़्ज़… उन्म्मह… की आवाज करने लगी।
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09-04-2018, 10:22 PM,
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RE: XXX Hindi Kahani घर का बिजनिस
घर का बिजनिस -11

अरविंद का लण्ड मेरे लण्ड से काफी छोटा था, लेकिन मोटा मेरे जितना ही था। अब वो दीदी की फुद्दी में अंदर-बाहर करने लगा और बोला- “आअह्ह… साली क्या चीज है तू? कितनी गर्मी है तेरी फुद्दी में? उन्नमह…”

दीदी भी अब अपनी गाण्ड को अरविंद के लण्ड की तरफ उछाल रही थी और साथ ही- “आअह्ह जान… मेरी फुद्दी की गर्मी निकाल दो… मजा आ रहा है… थोड़ा तेज़्ज़ ऊओ…”

अरविंद अब दीदी की फुद्दी मारने में अपनी जान लगा रहा था। लेकिन जैसे-जैसे अरविंद अपनी रफ़्तार बढ़ा रहा था, दीदी भी अपनी गाण्ड को उसके लण्ड की तरफ दबाती और साथ ही- “हाँ, अब मजा आ रहा है और तेज़्ज़ करो उन्म्मह…” की आवाज भी करने लगती।

पायल कुछ देर तक ये सब देखती रही और फिर उठकर वाश-रूम की तरफ भाग गई। पायल के वहाँ से इस तेजी से उठते ही मैं समझ गया कि वो बाथरूम में क्या करने गई है लेकिन मैं उसे छोड़कर दीदी की चुदाई देखने में लग गया जहाँ अब अरविंद- “आअह्ह… साली मैं गया…” की आवाज कर रहा था।

लेकिन दीदी- “नहीं, प्लीज़्ज़… अभी नहीं थोड़ा और करो… प्लीज़्ज़… आअह्ह… थोड़ा तेज़्ज़ करो… उन्म्मह…” की आवाज कर रही थी।

लेकिन अरविंद ने दीदी की किसी बात पे भी ध्यान नहीं दिया और दो 3 तेज झटकों के साथ ही दीदी की फुद्दी को अपने पानी से भर दिया और अपना लण्ड दीदी की फुद्दी से बाहर खींच लिया। बगल में बैठ गया और हाँफने लगा।

दीदी क्योंकि अभी फारिग़ नहीं हुई थी इसलिए अपनी फुद्दी में अपनी दो उंगली को घुसाकर तेजी के साथ अंदर-बाहर कर रही थी और आअह्ह… उन्म्मह… की आवाज करते हुये फारिग़ होने की कोशिश कर रही थी।

उस वक़्त मेरा दिल तो कर रहा था कि मैं उठूं और दीदी की फुद्दी में अपना लण्ड घुसाकर उसे ठंडा कर दूँ। लेकिन अभी मैं ऐसा नहीं कर सकता था क्योंकि अभी बाहर के लोग भी यहाँ मौजूद थे। कुछ ही देर में दीदी भी ठंडी हो गई और अपनी आँखें बंद करके लंबी-लंबी सांसें लेने लगी। तभी पायल भी बाथरूम से वापिस आ गई।

कोई 20 मिनट के बाद अरविंद उठा और बोला- “जरा देखो, ये बिनोद अभी तक रूम में क्या कर रहा है? उससे पूछो की जाना नहीं है क्या कि रात यहाँ ही रुकना है और खुद भी उठकर रूम की तरफ चला गया जहाँ उसके कपड़े पड़े हुये थे।

मैं उठा और जाकर दूसरे रूम को खटखटाया।

तो बिनोद ने पूछा- क्या बात है?

तो मैंने उससे कहा- “अरविंद साहब बोल रहे हैं कि अभी बस करो, जाना भी है…”

बिनोद ने कहा- “ठीक है, मैं आता हूँ। तुम चलो…”

और जब मैं वापिस आया तो अरविंद कपड़े पहनकर वापिस आ चुका था और पायल को ₹5000 दे रहा था और बोल रहा था- “अभी ये रख ले कल तेरे पैसे भी दे दूँगा और तुझे भी अपने लण्ड का मजा चखा दूँगा…”

पायल ने मेरी तरफ देखा तो मैंने हाँ में इशारा किया। तो उसने वो पैसे पकड़ लिए और फिर उसने मुझे भी ₹5000 दिए और दीदी को ₹10,000 दिए। तब तक बिनोद भी रूम में से निकल आया था। बिनोद के आते ही अरविंद भी उठ खड़ा हुआ और दोनों फ्लैट से निकल गये और मैं भी उनके साथ गया और जाकर फ्लैट का दरवाजा लाक करके आ गया तो देखा की दीदी अभी तक वैसे ही सोफे पे बैठी अपनी आँखों को बंद किए लंबी-लंबी सांसें ले रही थी और पायल वहाँ नजर नहीं आ रही थी।

मैं समझ गया कि अभी वो बुआ के पास गई होगी।

मैं दीदी के पास आकर बैठ गया और हिम्मत करके दीदी के कंधे पे हाथ रखा और दीदी को अपनी तरफ खींच लिया और बोला- दीदी, आप ठीक हो ना?

दीदी जो कि पहले ही हल्के नशे में थी। आँखों को बिना खोले ही बोली- हाँ भाई, मैं ठीक हूँ।

मेरा लण्ड जो कि दीदी को इस तरह नंगी बैठे देखकर खुद भी नहीं बैठ रहा था कुछ करने के लिए मजबूर कर रहा था और वैसे भी दीदी नशे में थी तो मुझे क्या मना करती? ये ख्याल आते ही मैंने एक हाथ दीदी की गाण्ड पे रख दिया और घुमाने लगा और दूसरा हाथ दीदी की चूचियां पे रख दिया। लेकिन पता नहीं क्यों मेरा दिल नहीं किया और मैं पीछे हट गया।

तभी बुआ ने कहा- “क्यों आलोक? पीछे क्यों हो गये? कर लो जो करना है…”

मैंने कहा- “नहीं बुआ, दीदी अभी नशे में है अभी नहीं जब दीदी नशे में नहीं होंगी तब मैं करूंगा जिससे मुझे और दीदी दोनों को मजा आए…”

बुआ ने हँसते हुये कहा- अगर तब अंजली नहीं मानी तो क्या होगा? हाँ।

मैंने कहा- नहीं बुआ, मैं जानता हूँ कि जब दीदी मेरा लण्ड देखेगी तो मुझे कभी भी मना नहीं करेगी।

बुआ ने कहा- चलो ठीक है, ये बताओ कि खाने के लिए कुछ है या नहीं? बड़ी भूख लग रही है।

मैंने पायल को आवाज दी जो कि बुआ के रूम में ही रुक गई थी और उसके आते ही मैंने बुआ के लिए कुछ खाने के लिए कहा तो वो किचेन से खाना उठा लाई जो कि उसने पहले ही बुआ के लिए रख दिया था और फिर बुआ ने खाना खाया और हम सुबह तक वहाँ ही रहे और फिर घर आ गये। घर आकर मैं अपने रूम में चला गया और कपड़े उतार के एक चादर बाँध ली और सोने के लिए लेट गया।

तभी अम्मी मेरे रूम में आ गई और बोली- “आलोक, ऐसा करो कि मेरे रूम में जाकर सो जाओ आज…”

मैंने कहा- “क्यों अम्मी यहाँ क्या हुआ? सोने दो ना प्लीज़्ज़…”

अम्मी मेरी बात पे हँस पड़ी और बोली- “मेरे रूम में जाने से तुम्हारा ही फायदा है जाओ शाबाश…”

मैं उठकर कपड़े पहनने लगा तो अम्मी ने कहा- आलोक, मेरे रूम में भी तुमने सोना ही है जाओ इसी तरह ही चले जाओ।

मैं अम्मी की बात सुनकर अम्मी के रूम की तरफ चल पड़ा।

और जैसे ही रूम में जाने लगा तो अम्मी ने कहा- “लाइट ओन नहीं करना और जाकर बेड पे लेट जाओ…”

मैं अम्मी की बात पे थोड़ा हैरान भी हुआ लेकिन फिर भी कुछ नहीं बोला और जाकर अम्मी के बेड पे लेट गया तो तब पता चला कि वहाँ कोई और भी था जो कि अपने ऊपर चादर लेकर लेटा हुआ था। क्योंकि मैं अंदर आते वक़्त दरवाजे को बंद कर आया था और पर्दे भी गिरे हुये थे जिसकी वजह से रूम में काफी अंधेरा था जिससे मुझे साफ नजर नहीं आ रहा था। लेकिन इतना नजर तो आ ही रहा था कि मेरे पास बेड पे कोई लेटा हुआ है। मैंने हाथ बढ़ा के उसे हिलाना चाहा तो मेरा हाथ किसी की नरम चूचियों से टकरा गया तो मैं समझ गया कि ये बुआ ही होगी और कोई नहीं हो सकता।

मैंने बुआ के ऊपर से चादर खींच ली और अपना हाथ बुआ की चूचियों की तरफ बढ़ा दिया जो कि चादर के नीचे नंगी ही थीं लेकिन बड़ी सख़्त हो रही थीं। लेकिन बुआ की चूचियों से कुछ छोटी भी थीं। इस बात को महसूस करते ही मैं चौंक गयाि ये कौन है जो यहाँ इस तरह मेरे पास नंगी लेटी हुई है और अम्मी ने भी मुझे इसके पास सोने के लिए बोल दिया है।

अभी मैं लाइट ओन करने का सोच ही रहा था कि वो अचानक मुझे लिपट गई और अपने तपते हुये होंठों को मेरे होंठों पे रख दिया और किस करने लगी। जिससे मैं भी बिना ये जाने कि आखिर ये है कौन? किस करने और चूचियों को दबाने में लग गया।

मैं क्योंकि काफी जोर से उसकी चूचियाों को दबा रहा था जिसकी वजह से उसके मुँह से से- “भाई, आराम से करो ना… प्लीज़्ज़… दर्द होता है इस तरह…”

आवाज सुनते ही मैं खुशी से पागल हो गया क्योंकि वो कोई और नहीं बलकि मेरी बड़ी बहन अंजली ही थी जो कि आज मेरे साथ इस तरह नंगी लेटी हुई थी और मुझसे चुदवाना भी चाहती थी। अब मैं फिर से दीदी को किस करने लगा और साथ ही दीदी की चूचियों को भी मसलने लगा था और दीदी अपने हाथों से मेरे सर को सहला रही थी।

कुछ देर के बाद मैंने दीदी को किस करना बंद कर दिया और दीदी की चूचियों पे अपने मुँह को रख दिया और बारी-बारी से दीदी की चूचियों को दबाने लगा और दीदी के निपल्स को चूसने लगा। अब दीदी मेरे सर को अपनी चूचियां पे दबा रही थी और- “उन्म्मह… भाई…? की आवाज भी करती जा रही थी। अब मैं दीदी की चूचियों से नीचे आया और दीदी के पेट को अपनी जुबान से चाटने लगा और जुबान को दीदी के पेट पे घुमाने लगा और आहिस्ता-आहिस्ता नीचे की तरफ जाने लगा जिससे दीदी और भी ज्यादा मचलने लगी और सिसकियां भरने लगी।

अब मैं दीदी की फुद्दी से थोड़ा ही ऊपर अपनी जुबान को घुमा रहा था। लेकिन दीदी की फुद्दी की तरफ नहीं जा रहा था कि तभी दीदी ने मेरे सर को अपनी फुद्दी की तरफ दबया तो मैंने अपने मुँह को दीदी की फुद्दी की तरफ ले जाने की जगह दीदी की रानों की तरफ आ गया और चाटने और चूमने लगा जिससे दीदी और भी मचलने लगी थी।

जब दीदी ने देखा कि मैं उन्हें जानबूझ के ताटा रहा हूँ तो दीदी ने मेरा सर पकड़ लिया और जबरदस्ती अपनी फुद्दी की तरफ कर दिया और बोली- “भाई, प्लीज़्ज़ यहाँ से चाटो ना…” जैसे ही मैंने दीदी की गिली फुद्दी पे अपनी जुबान घुमाई, दीदी का जिश्म एक बार थोड़ा से अकड़ गया और दीदी के मुँह से- “सस्सीई… आअह्ह… भाई हाँ… इसी तरह यहाँ पे प्लीज़्ज़… ऊओ… भाई इतना मजा…” दीदी की फुद्दी चाटने में मुझे बुआ की फुद्दी से भी ज्यादा मजा आ रहा था जिससे कि मैं दीदी की फुद्दी के अंदर तक अपनी जुबान को घुसाकर चाटने की कोशिश करने लगा, जिससे मेरे साथ दीदी को भी मजा आ रहा था।

दीदी अब मजे की शिद्दत पे थी- “और आअह्ह… भाई, खा जाओ अपनी दीदी की फुद्दी को… रंडी बना दो मुझे… उन्म्मह… ऊओ… अम्मीई, मैं गई…” और इसके साथ ही मेरे मुँह को अपनी फुद्दी के साथ दबा लिया और फारिग़ हो गई…”
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09-04-2018, 10:22 PM,
#14
RE: XXX Hindi Kahani घर का बिजनिस
घर का बिजनिस -12

दीदी के फारिग़ होते ही मैंने दीदी की फुद्दी से निकलने वाला सारा पानी चाट लिया और उठकर दीदी के ऊपर लेट गया और किस करने लगा। दीदी भी मुझे पागलों की तरह किस करने लगी और मेरे साथ लिपटने लगी थी जिससे कि मुझे और भी मजा आने लगा। मैंने इसी तरह लेटे हुये अपने एक हाथ से अपने लण्ड को दीदी की फुद्दी के मुँह पे रख दिया और हल्का सा दबा दिया जिससे मेरे लण्ड का सुपाड़ा दीदी की फुद्दी में घुस गया तो दीदी ने किस करना बंद कर दिया।

मैंने कहा- क्यों दीदी? क्या हुआ? भाई का लण्ड अपनी फुद्दी में नहीं लेना क्या?

दीदी ने मेरे सर को अपने साथ लगा लिया और मेरे कान में बोली- “भाई, मैं तो आप ही की हूँ जो आपका दिल चाहे कर लीजिए। मैं आपको मना नहीं करूंगी…”

दीदी की बात सुनते ही मैंने अपने लण्ड पे दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया जिससे मेरा लण्ड दीदी की फुद्दी में अपना रास्ता बनाता हुआ घुसने लगा।

लण्ड कोई 4” इंच से थोड़ा ज्यादा ही गया था कि दीदी के मुँह से- “भाई, आराम से दर्द हो रहा है…” क्योंकि अरविंद का लण्ड भी कोई 4” से थोड़ा ही बड़ा था जिसकी वजह से दीदी की फुद्दी ने मेरे लण्ड को भी उतनी ही जगह दी थी।

तो मैंने कहा- क्यों दीदी? क्या आप अपने भाई का पूरा लण्ड अपनी फुद्दी में नहीं लोगी?

दीदी ने कहा- “भाई, मैंने आपको मना तो नहीं किया। आज आपका जो दिल चाहे करो लेकिन प्लीज़्ज़ जरा आराम से दर्द होगा…”

मैंने दीदी की बात सुनकर कहा- “दीदी, आप परेशान नहीं हो, मैं आपका भाई हूँ ज्यादा दर्द नहीं दूंगा…” और इसके साथ ही दीदी की टाँगों को दीदी के कंधों की तरफ मोड़ दिया और एक तेज झटका दिया जिससे मेरा लण्ड दीदी की फुद्दी में पूरा घुस गया।

और दीदी के मुँह से- “आऐ… आअम्मीईई… मर गई… ऊओ… भाई, रुक जाओ… मुझे दर्द हो रहा है… अभी हिलना नहीं… प्लीज़्ज़ आअह्ह…”

मुझे अपना लण्ड आगे दीदी की फुद्दी में किसी चीज के साथ टकराता हुआ लग रहा था जिससे मैं समझ गया कि वो दीदी की बच्चेदानी है जिससे मेरा लण्ड टकरा रहा है और दीदी को दर्द हो रहा है। इतना महसूस करते ही कि मेरा लण्ड दीदी की फुद्दी में बच्चेदानी से टकरा रहा है मेरा बुरा हाल हो गया और मुझसे रुकना मुहाल हो रहा था।

दीदी ने हल्की सी आवाज में कहा- भाई, आराम से करना प्लीज़्ज़ जोर नहीं लगाना।

मैंने दीदी के मुँह से ये बात सुनते ही दीदी की फुद्दी में अपने लण्ड को हिलाना शुरू कर दिया जो कि बड़ा ही टाइट होकर अंदर-बाहर हो रहा था जिससे मुझे लग रहा था कि मैं दीदी को ज्यादा देर तक नहीं चोद सकूंगा। मेरी इस प्यार भरी और आराम से होने वाली चुदाई दीदी को भी उतना ही मजा दे रही थी, जितना मजा मुझे आ रहा था। दीदी अपनी गाण्ड को भी मेरी तरफ दबा के मजा ले रही थी।

और साथ ही दीदी सिसकी- “आअह्ह… मेरा भाई… उंन्ह… मजा आ रहा है भाई… बस इसी तरह ही करना… भाई, मेरा होने वाला है… उन्म्मह… भाई, आपके लण्ड ने मुझे अपना दीवाना बना दिया है… भाई, भाई मैं गई…”

इतना बोलते ही दीदी का जिश्म अकड़ गया और तभी मुझे दीदी की फुद्दी में अपने लण्ड को कोई गरम सी चीज महसूस हुई। जिसके बाद मेरा लण्ड दीदी की फुद्दी में आराम से अंदर-बाहर होने लगा और मैं भी दीदी के बाद कोई एक मिनट में ही फारिग़ हो गया और दीदी के साथ लिपट के लेट गया।

कुछ देर मैं इसी तरह दीदी के साथ लिपट के लेटा रहा और जब साइड पे होने लगा तो दीदी ने कहा- “भाई क्या हुआ? लेटे रहो ना इसी तरह…”

मैं- क्यों दीदी? आपको मेरा इस तरह आपके साथ लेटना अच्छा लग रहा है?

दीदी- हूंन… भाई, बहुत अच्छा लग रहा है।

मैं- दीदी, क्या आपको मेरे साथ ज्यादा मजा आया है या उस अरविंद के साथ?

दीदी- भाई, आपको ज्यादा मजा किसके साथ आया? पहले आप बताओ फिर मैं भी बता दूँगी, अम्मी के साथ बुआ के साथ या? (इतना बोलते ही दीदी खामोश हो गई)

मैं- दीदी, सच पूछो तो मजा तो सब के साथ आया लेकिन जो मजा आपने दिया है वो मैं कभी भूल नहीं सकूंगा

दीदी- भाई, मुझे भी आपके साथ मजा आया है दिल करता है कि आप अपने उसको मेरे अंदर इसी तरह घुसाकर लेटे रहो और कभी भी बाहर नहीं निकालो

मैं- “अच्छा दीदी, अभी आप सो जाओ शाम को जाना भी है और नींद भी पूरी होनी चाहिए ना हमारी…”

दीदी- अच्छा भाई, लेकिन आप मेरे साथ इसी तरह लिपट के सो जाओ मुझे अच्छा लगेगा।

मैंने दीदी की बात को मान लिया और इसी तरह लेटा रहा और कब नींद आई पता ही नहीं चला, और अम्मी के हिलाने से ही मेरी आँख खुली देखा तो हम दोनों बहन भाई अभी तक नंगे ही एक साथ बेड पे सो रहे थे।

अम्मी ने हँसते हुये कहा- चलो बेटा 3:00 बज चुके हैं और अब उठकर नहा लो। फिर खाना खाकर तैयार हो जाओ। जाना नहीं है क्या?

मैंने भी हँसते हुये कहा- अच्छा मैं उठ रहा हूँ। और इतना बोलते ही दीदी को अपनी तरफ खींच लिया और एक किस करके दीदी को भी उठा दिया और बोला- “चलो दीदी, 3:00 बज गये हैं जाना नहीं है क्या?

फिर हमने बारी-बारी नहाकर खाना खाया और तैयार हो गये। तो बापू ने मुझे कुछ बोतल शराब भी पकड़ा दी और कहा- “बेटा, ये अपने साथ फ्लैट में ले जाओ…”

फिर हम चारों घर से फ्लैट की तरफ निकल आए और मैं उन सबको फ्लैट में छोड़ कर बाजार की तरफ चला गया और कुछ खाने पीने का सामान लाकर बुआ को पकड़ा दिया, जो कि बुआ ने किचेन में रख दिया। फिर हम वहाँ हाल में ही बैठकर टीवी देखने लगे और इंतजार करने लगे कि बापू कब काल करेंगे और काम शुरू होगा।

पायल काफी टेशन में नजर आ रही थी।

तभी दीदी ने पूछा- पायल क्या बात है? परेशान क्यों हो तुम?

पायल ने दीदी की तरफ देखा और बोली- नहीं दीदी, बस आपको तो पता है कि मेरा पहली बार है इसीलिए थोड़ा दिल घबरा रहा है।

बुआ ने पायल की बात सुनकर उसे अपनी तरफ खींच लिया और कहा- “देख पायल, ये जो काम है ना हर लड़की ने करना ही होता है इसमें क्या डरना? बलकि मजा लो क्योंकि इसमें हर तरफ से अपना ही फायदा है, मजे भी लो और पैसे भी…”

पायल ने बुआ की तरफ देखकर हाँ में सर हिला दिया और कहा- “जी बुआ, आप ठीक कहती हो…”
तभी बापू की काल भी आ गई।

मैंने काल रिसीव की तो बापू ने कहा- “आलोक, तुम बाहर आ जाओ। बिल्डिंग के बाहर ब्लैक प्राडो खड़ी होगी। उसमें दो आदमी होंगे, उन्हें अपने साथ फ्लैट में ले जाओ। ये लोग पायल के साथ ही वक़्त गुजारेंगे…”

मैंने हैरानी से बापू को कहा- “लेकिन बापू, पायल ने तो अभी तक एक के साथ भी नहीं किया है और आपने दो भेज दिए उसके लिए?”

बापू ने कहा- “परेशान नहीं हो… मैं जानता हूँ कि पायल को कुछ नहीं होगा और अगर अरविंद आ जाये तो अंजली को उसके साथ रूम में भेज देना…”

मैंने- “ओके…” कहा और काल कट करके नीचे चला गया, जहाँ गाड़ी में दो लोग बैठे हुये थे। मैं जैसे ही उनके पास गया कि उनमें से एक ने कहा- क्या तुम ही आलोक हो?

मैंने हाँ में सर हिला दिया।

तो उसने कहा- क्या तुम सच में अपनी बहनों को चलाते हो? और तुम्हारी छोटी बहन अभी कुँवारी है?

मैंने कहा- “जी, आप सही जगह पे ही आए हो। आ जाओ फ्लैट में चलते हैं…”

वो लोग गाड़ी में से निकले और बोले- कुछ पीने का इंतजाम भी है या नहीं? अगर नहीं है तो अभी बता दो मैं ड्राइवर को बोल दूँ?

मैंने कहा- नहीं, इसे आप जाने दो, हर चीज यहाँ पहले से ही है आप चलो तो सही।
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09-04-2018, 10:22 PM,
#15
RE: XXX Hindi Kahani घर का बिजनिस
घर का बिजनिस -13

जैसे ही हम फ्लैट में दाखिल हुये तो मुझे पायल नजर नहीं आई। मैंने उनको वहाँ हाल में ही बिठा दिया तो उनमें से एक जिसका नाम फहीम था उसने दूसरे की तरफ देखते हुये कहा- “यार अकबर, ये वाली (दीदी) लगती है… वैसे है कमाल…”

मैंने कहा- “नहीं भाई, आप वाली ये नहीं है… अभी आ जाती है…” और इसके साथ ही दीदी की तरफ देखा।

तो दीदी ने कहा- “जरा वाश-रूम गई है अभी आ जाती है…”

अकबर ने हँसते हुये मेरी तरफ देखा और बोला- “आलोक साब, लगता है कि दो का सुनकर ही तुम्हारी बहन की फटने लगी है…” और दोनों हाहहाहा करके हँसने लगे।

मैंने उनकी किसी बात का बुरा नहीं माना और खामोशी से बैठा रहा कि तभी पायल भी वाश-रूम से आ गई। जिसे देखते ही फहीम सिटी बजाने लगा और बोला- “यार अकबर, माल तो ये भी कम नहीं है साली के मम्मे तो देख?”

अकबर भी पायल को ही घूर रहा था बोला- “नहीं यार, मम्मे छोड़… साली की गाण्ड देख, क्या चीज है? यार लगता है कि इस बार हमारे पैसे सही जगह पे लगे हैं…”

फिर फहीम ने कहा- यार आलोक, जरा कुछ माहौल तो बनाओ ऐसे क्या खाक मजा आएगा?

मैंने पायल की तरफ देखा और बोला- “जाओ अंदर से एक बोतल निकाल लाओ…”

पायल मेरी बात सुनकर रूम में चली गई और शराब की एक बोतल निकाल लाई और साथ में दो गिलास भी ले आई और उनके सामने रख दिए।

बुआ ने दीदी से कहा- चलो अंजली, हम दूसरे रूम में बैठ जाते हैं…” और दोनों वहाँ से चली गई तो अकबर ने पायल को हाथ से पकड़कर अपनी गोदी में बैठा लिया और पायल की चूचियां को मसलने लगा और फहीम शराब गिलासों में डालने लगा।

अकबर ने कहा- “यार आलोक, एक गिलास और ला दो। ये भी हमारे साथ ही पिएगी वरना हमें सही मजा नहीं आएगा…”

मैं उठा और जाकर दो गिलास और उठा लाया जिसमें से एक गिलास में फहीम ने पायल के लिए भी शराब डाल दी जिसे पायल ने पकड़ लिया और बुरा सा मुँह बनाते हुये पी ही गई।

दो-दो पेग लगाकर वो दोनों उठे और पायल को साथ में लेकर रूम में घुस गये। कोई 20 25 मिनट तक रूम से कोई आवाज नहीं आई। लेकिन फिर अचानक पायल की दर्द से डूबी हुई चीख सुनाई दी- “आऐ… प्लीज़्ज़… रुको… भाई मुझे बचाओ… नहीं… प्लीज़्ज़… बस करो और नहीं… मेरी फट गई है… अम्मीईई जीए…”

पायल की इन चीखों की आवाज सुनकर दीदी और बुआ भी अपने रूम से निकल आई और आकर मेरे पास बैठ गई और रूम से आने वाली आवाज़ों को सुनने लगी जो कि अब आहिस्ता-आहिस्ता दर्द की जगह मजे की सिसकियों में बदलती जा रही थीं।

दीदी ने मेरी तरफ देखा और कहा- भाई, पायल इन दोनों को बर्दाश्त कर लेगी क्या?

बुआ ने फौरन ही कहा- “अरे यार, मैंने तुम्हें पहले भी कहा था कि परेशान ना हो पायल आराम से करवा लेगी…”

अब रूम में से- “ससीए… आअह्ह… आराम से करो… उंनमह… हाँ इसी तरह करो… ऊओ… अब अच्छा लग रहा है…” की आवाज आ रही थी जिसे सुनकर दीदी भी काफी गरम हो रही थी।

मैंने अपना हाथ अभी दीदी की रान पे रख ही था कि फ्लैट की बेल बजने लगी जिसे सुनकर मैं चौंक गया और जाकर देखा तो अरविंद साहब ही थे।

मुझे देखते ही हँस पड़े और बोले- मेरी जान कहाँ है? किसी और के साथ तो नहीं लिटा दिया उसे भी?

मैंने कहा- “नहीं सर, ऐसा भला किस तरह हो सकता है। दीदी तो बस आप ही की दीवानी हो गई है। बोल रही थी कि अगर अरविंद साहब नहीं आयेंगे तो मुझे किसी और के साथ कुछ करने के लिए नहीं बोलना…” इतना बोलते-बोलते हम दोनों हाल में आ चुके थे और दीदी भी मेरी बात सुन चुकी थी।

जिसकी वजह से दीदी अरविंद साहब को देखकर मुश्कुराती हुई उठी और उसके सीने से लग गई और बोली- “कसम से, आप नहीं आते ना तो मैं आपसे नाराज हो जाती…” दीदी ने ये बात इस अदा के साथ कही थी कि मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि दीदी इतनी अच्छी आक्टिंग भी कर सकती हैं।

अरविंद दीदी की बात सुनकर खुश हो गया और बोला- “अंजली, मेरा दिल कर रहा है कि मैं तुम्हें एक घर खरीद के दे दूँ जहाँ सिर्फ़ मैं ही तुम्हारे पास आया करूं और तुम्हें कोई भी हाथ ना लगाये…”

दीदी ने कहा- “जान, आप मुझे जहाँ भी रखना चाहो मैं रहूंगी और किसी को भी अपने बदन को हाथ नहीं लगाने दूँगी लेकिन अपने घर वालों को नहीं छोड़ सकती…”

अरविंद ने कहा- “तो इसमें क्या है? बस तुम लोग तैयारी करो 2-3 दिन में ही तुम्हारे नाम से एक घर खरीद लूँगा जहाँ तुम सब रहना। लेकिन वहाँ जो भी हो तुम्हें किसी और के साथ नहीं देख सकूंगा याद रखना…”

दीदी अरविंद की बात सुनते ही उसके साथ बुरी तरह लिपट गई और- आई लोव योउ जान, आप मुझे कितना प्यार करते हो… और इतना बोलते ही उसे किस करने लगी।

बुआ भी दीदी की आक्टिंग से काफी खुश नजर आ रही थी और बुआ ने मुझे आँख मारी और दीदी की तरफ इशारा भी किया जिसको मैं समझ गया और सर झुकाकर मुश्कुरा दिया।

अब अरविंद दीदी को अपने साथ लेकर सोफे पे बैठ गया और शराब की बोतल पकड़कर बोला- “ये क्या भाई? एक ही गिलास है एक और लाओ। हम अपनी जान को अपने हाथों से पिलायेंगे…”

बुआ गिलास के लिए किचन की तरफ गई तो अरविंद ने पहली बार रूम में से आने वाली पायल की- “आअह्ह… इस्स… और थोड़ा जोर से करो… उन्म्मह…” की आवाज़ों को सुना और बोला- जान, लगता है तुम्हारी बहन की सील भी खुल ही गई है?

दीदी ने भी हँसते हुये कहा- हाँ जी, आज ही उसकी भी नथ खुली है।

अब पायल की भी आवाजें आना बंद हो चुकी थी। कुछ देर के बाद मैं उठा और रूम में चला गया जहाँ पायल की चुदाई हो चुकी थी। रूम का नजारा बड़ा ही प्यारा था। रूम में बेड पे बीच में पायल पूरी नंगी लेटी हुई थी और उसकी टांगें खुली हुई थीं और फुद्दी पहली चुदाई और खून की वजह से कुछ लाल और सूजी हुई लग रही थी। अकबर और फहीम उस वक़्त पायल के दायें बायें लेटे हुये लंबी-लंबी सांसें ले रहे थे और पायल की आँखें बंद थीं और वो भी लंबी-लंबी सांस ले रही थी।

एक बार तो मेरा दिल किया कि मैं अभी अपने लपड़े निकाल दूँ और पायल की सूजी हुई फुद्दी में अपना लण्ड घुसा दूँ। लेकिन अभी मैं ऐसा नहीं कर सकता था क्योंकि वो एक साथ दो लण्ड अपनी फुद्दी में ले चुकी थी और उसकी फुद्दी की हालत भी मुझे काफी खराब नजर आ रही थी।

मैंने पायल को हिलाया तो उसने अपनी आँखें खोलकर मेरी तरफ देखा और हल्का सा हँस पड़ी, तो मैंने कहा- चलो उठो, शाबाश… मैं तुम्हें बाथरूम में ले चलूं…”

पायल ने थोड़ी हिम्मत की और उठकर खड़ी हुई तो उसकी टांगें लड़खड़ा गईं। मैंने पायल को अपने हाथों पे उठा लिया जिससे मेरा एक हाथ अपनी छोटी बहन की गाण्ड पे और दूसरा कमर पे आ गया तो मैं उसे इसी तरह बाथरूम में ले गया। जैसे ही बाथरूम में आकर मैंने पायल की तरफ देखा तो वो मेरी तरफ ही देख रही थी और हल्का सा मुश्कुरा रही थी। शायद इसकी कुछ वजह शराब भी थी जो कि पायल ने भी पी हुई थी। मैंने पायल को नीचे उतार दिया और उतातेर वक़्त हल्के से उसकी गाण्ड को दबा दिया।

तो पायल और भी खुश हो गई और बोली- “भाई, दर्द हो रहा है, आप ही मुझे साफ कर दो ना प्लीज़्ज़…”

मैंने फौरन पायल की बात मानी और उसे नीचे लिटा दिया और शलवार को खोल दिया और पीछे होकर अपनी पैंट और शर्ट के बाजू को मोड़ लिया और पायल के जिश्म को अपने हाथों से मल-मल के साफ करने लगा।

पायल ने अपनी टाँगों को भी खोल दिया और बोली- “भाई, जहाँ से मैं गंदी हूँ वहाँ से साफ करो ना…”

मैं पायल की बात से खुश हो गया और जल्दी से साबुन उठाकर पायल की फुद्दी और रानों के साथ पेट को भी मलने लगा। पायल ने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपने भाई के हाथों से मजा लेकर सफाई करवाने लगी। अभी मैं पायल के जिश्म पे लगा साबुन साफ कर ही रहा था

कि तभी अकबर भी बाथरूम में घुस आया और बोला- क्या बात है यार? अपनी बहन की खिदमत हो रही है?
मैंने अकबर की बात का कोई जवाब नहीं दिया।

तो उसने फिर कहा- “अच्छी बात है… खिदमत करनी चाहिए क्योंकि इसी की कमाई तो खानी है सारी ज़िंदगी…” और हाहाहाहा करके हँसने लगा।

मैंने जल्दी से पायल को साफ किया और उसी तरह उठाकर रूम में ले आया और बेड पे लिटा दिया और पायल को उसके कपड़े भी दे दिए। पायल ने अपने कपड़े पहन लिए तो अकबर और फहीम भी वाश-रूम से फारिग़ हो चुके थे और फिर उन्होंने पायल को एक किस की और चूचियां को दबाकर वहाँ से निकल गये।

मैं भी उनके साथ ही जाने के लिए रूम में से निकला तो हाल में अरविंद साहब दीदी को डोगी बनाकर चुदाई में लगे हुये थे।

मैंने उन दोनों को फ्लैट के बाहर छोड़ा और फिर से फ्लैट में आ गया और अरविंद के साथ होने वाली दीदी की चुदाई देखने लगा जो कि अब अपने जोरों पे चल रही थी। दीदी उस वक़्त- “आअह्ह… हाँ जान… और तेज करो… उंन्ह… मेरी जान आज तुमने क्या खाया है? फाड़नी है क्या मेरी? उउफफ्फ़…” की आवाज कर रही थी।

अरविंद भी दीदी की गाण्ड को पकड़कर अपने लण्ड को पूरा दीदी की फुद्दी में से निकालता और फिर से पूरी ताकत से घुसा देता और- “हाँ जान… ये ले… ऊओ… मैं आजज्ज तेरी फुद्दी को फाड़कर रख दूँगा… उंनमह…”

दीदी भी उसके हर धक्के के जवाब में अपनी गाण्ड को पूरी ताकत से दबाती और- “हाँ फाड़ दे मेरी फुद्दी… उन्म्मह… भाई इसे बोलो कि जोर से करे… पूरा घुसाकर चोदे मुझे… उन्म्मह… मैं गई जान… आअह्ह… थोड़ा और… उंनमह…” की आवाज के साथ ही दीदी का जिश्म झटके खाने लगा और दीदी की फुद्दी ने पानी छोड़ दिया जिससे दीदी का जनून ठंडा हो गया।

दीदी के फारिग़ होने के बाद अरविंद भी कुछ ही देर में दीदी की फुद्दी में ही फारिग़ हो गया और बगल में होकर लेट गया तो दीदी भी सीधी होकर लेट गई और अपनी फुद्दी को मेरे सामने करके अपनी एक उंगली के साथ मसलने लगी और मुश्कुराने लगी।

उस रात एक बार और दीदी ने अरविंद से चुदवाया और बुआ ने भी दो आदमियों को ठंडा किया और फिर हमने खाना खाया और आराम करने के लिए लेट गये।वो सारा दिन हमें फ्लैट में ही गुजरना था क्योंकि पायल ने वापिस जाने से मना कर दिया था। मैं जब सोकर उठा तो दिन का एक बज चुका था। मैं फौरन नहाने के लिए घुस गया और फिर फ्लैट से करीब ही बनी मार्केट गया और खाने का सामान लेकर वापिस आया तो दीदी जाग चुकी थी और मुझे देखते ही बोली- “चलो अच्छा हुआ भाई कि आप खाने का सामान ले आए…”

मैं- “दीदी जब यहाँ रहना है तो खाना भी बनाना ही पड़ेगा ना…”

दीदी- “हाँ, वो तो है और मेरे लाए हुये सामान को उठाकर देखने लगी और फिर नाश्ते का सामान निकालकर हम दोनों नाश्ता करने लगे।

नाश्ते से फारिग़ हुये ही थे कि मैंने दीदी से कहा- “दीदी, आप अभी तक नहाई नहीं हो क्या?

दीदी- “नहीं भाई, अभी मैं शाम को ही नहा लूँगी…”

मैंने दीदी की गाण्ड की तरफ देखते हुये कहा- चलो दीदी, नाश्ता तो हो गया अब क्या प्रोग्राम है आपका?

दीदी मेरी नजर को समझ गई और बोली- “जो मेरे प्यारे से भाई की मर्ज़ी है, वो ही होगा यहाँ…”

मैंने दीदी को अपनी तरफ खींच लिया और किस करने लगा और साथ ही दीदी के चूचियों को भी दबाने लगा जिससे दीदी भी गरम होने लगी और मुझसे लिपट गई और अपनी जुबान को मेरे मुँह में घुसाकर मेरा साथ देने लगी। दीदी ने उस वक़्त सिर्फ़ एक लूज निक्कर और पतली सी शर्ट ही पहनी हुई थी जिसमें दीदी का जिश्म और भी कयामत नजर आ रहा था।

मैं फौरन अपनी शलवार और कमीज निकालकर नंगा हो गया और दीदी को भी नंगा कर दिया और दीदी की टाँगों को उठाकर बीच में बैठ गया और दीदी की क्लीन फुद्दी को देखने लगा।

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09-04-2018, 10:22 PM,
#16
RE: XXX Hindi Kahani घर का बिजनिस
घर का बिजनिस -14

दीदी ने जब देखा कि मैं सिर्फ़ उनकी फुद्दी को हो देखे जा रहा हूँ कुछ कर नहीं रहा तो दीदी ने कहा- आलोक, क्या बात है? क्या देख रहे हो?

मैंने कहा- दीदी, मैं आपकी इस प्यारी सी फुद्दी को देख रहा हूँ जिसने मुझे अपना बना लिया है।

दीदी ने कहा- “अच्छा जी, अगर अपना बना लिया है तो तुम्हें इसने ये नहीं बताया कि आपने खुद तो नाश्ता कर लिया है लेकिन ये अभी तक भूखी है, हाँ…”

मैंने दीदी की फुद्दी पे एक किस की और कहा- दीदी, एक बात कहूं मानोगी?

दीदी ने कहा- हाँ आलोक, बोलो क्या बात है?

मैंने दीदी की आँखों में देखते हुये कहा- “दीदी, आज मैं आपकी फुद्दी नहीं बलकि आपकी ये गाण्ड मारना चाहता हूँ…”

दीदी मेरी बात से चौंक गई और कुछ सोचने के बाद बोली- “नहीं आलोक, तुम्हारा बहुत बड़ा है। मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा प्लीज़्ज़… नाराज नहीं होना भाई…”

मैंने कहा- दीदी, प्लीज़्ज़ मान जाओ ना… क्या आपको मेरे साथ कोई प्यार नहीं है? आप मेरी इतनी सी बात भी नहीं मान सकती हो?

दीदी ने कहा- “आलोक, तेरा बहुत बड़ा है, ये मेरी गाण्ड फाड़ देगा…”

मैंने कहा- “दीदी, आप प्लीज़्ज़ एक बार कोशिश तो करो अगर आपका दिल नहीं किया तो नहीं करूंगा…”

दीदी ने कहा- “भाई, दिल तो मेरा भी करता है कि मैं गाण्ड में भी करवाऊँ लेकिन तुम्हारा बहुत बड़ा है…”

मैंने दीदी की मिन्नतें शुरू कर दीं।

तो दीदी सोच में पड़ गई और कुछ देर के बाद बोली- “ठीक है आलोक, तुम तेल की बोतल ले आओ…”

मैं दीदी की बात से खुश हो गया और तेल ले आया।

तो दीदी ने कहा- आलोक, जो करना है और जितना भी करना है एक ही झटके में कर देना बार-बार का दर्द मुझसे नहीं बर्दाश्त होगा।

मैंने कहा- लेकिन दीदी, इस तरह तो ज्यादा दर्द होगा और आपकी चीखें भी बाहर तक जा सकती हैं…”

दीदी ने कहा- तुम परवाह नहीं करो, मैं अपने मुँह में कपड़ा डाल लूँगी जिससे आवाज दब जायेगी।

मैंने फौरन दीदी को डागी बना दिया और दीदी की गाण्ड पे तेल से मालिश करने लगा और साथ ही अपने लण्ड को भी तेल से अच्छी तरह भिगो दिया और दीदी की गाण्ड के सुराख के साथ लगा दिया और दीदी को कहा- दीदी, क्या मैं घुसा दूँ?

दीदी ने अपने मुँह में कपड़ा घुसा लिया और हाँ में सर हिला दिया। दीदी के सर का हिलना था कि मैंने दीदी की गाण्ड को पकड़कर एक पूरी ताकत का झटका दिया, जिससे मेरा लण्ड दीदी की नरम और मुलायम गाण्ड को खोलता हुआ जड़ तक घुस गया।

लण्ड के घुसते ही दीदी बुरी तरह से तड़पी और मुँह से गूउुउन्ण… गऊवन्न… की आवाज के साथ ही बेड पे गिर गई और मेरे नीचे से निकलने की कोशिश करने लगीं।

क्योंकि मैं पहले से ही तैयार था इसलिए मैं लण्ड के घुसते ही दीदी के साथ लिपट गया और मजबूती से पकड़ लिया, जिससे दीदी अपनी गाण्ड में से मेरे लण्ड को निकालने में नाकाम रही। दर्द के मारे दीदी की आँखों में से आँसू निकल रहे थे और दीदी अपने हाथ पीछे करके मुझे अपने लण्ड को बाहर निकालने को बोल रही थी लेकिन मैंने लण्ड नहीं निकाला और इसी तरह लण्ड को घुसाए दीदी के साथ लिपटा रहा।

कुछ देर के बाद दीदी ने मुँह से कपड़ा निकाल दिया और बोली- “आलोक, प्लीज़्ज़ भाई… अभी निकाल लो… मेरी गाण्ड फट गई है… आअह्ह… भाई मान जाओ… प्लीज़्ज़ बाहर निकाल लो ना…”

मैंने दीदी से कहा- “दीदी, जो दर्द होना था हो गया है अब आपकी गाण्ड मेरे लण्ड से चुदवाने के लिए तैयार है और आप ही मना कर रही हो…”

दीदी ने कहा- “भाई, थोड़ा देर में कर लेना लेकिन अभी नहीं… प्लीज़्ज़… बाहर निकालो…”

मैंने दीदी को कोई जवाब नहीं दिया और अपने लण्ड को हल्का सा बाहर खींच के फिर से घुसा दिया जिससे दीदी के मुँह से- आऐ… आलोक… बहनचोद… ये क्या कर रहा है? मेरी गाण्ड फट गई… उउफफ्फ़ माँ… भाई, प्लीज़्ज़… निकालो मैं मर जाऊँगी…”

लेकिन अब मैं दीदी की कोई बात नहीं सुन रहा था और आराम-आराम से दीदी की गाण्ड में अपने लण्ड को अंदर-बाहर करने लगा जिससे दीदी को भी अब दर्द कम होने लगा था और मेरे लण्ड पे जो दीदी की गाण्ड की पकड़ थी अब कुछ ढीली हो गई थी जिससे मेरा लण्ड अब कुछ आराम से दीदी की गाण्ड में जा रहा था।

अब दीदी- “आअह्ह… भाई, बस इसी तरह करो… तेज नहीं करना… इस तरह अच्छा लग रहा है… उन्म्मह… हाँ भाई अब कुछ मजा मिल रहा है…”

मेरा लण्ड अब जैसे ही दीदी की गाण्ड के अंदर घुसता तो दीदी अपनी गाण्ड को दबा लेती और फिर ढीला छोड़ देती जिससे मुझे अनोखा ही मजा आने लगा और मैंने अपनी स्पीड को भी बढ़ा दिया और साथ ही-
“आअह्ह… दीदी, क्या गाण्ड है आपकी? कसम से मजा आ गया… उन्म्मह… दीदी, मेरा होने वाला है दीदी…”

दीदी भी अब- हाँ भाई हो जाओ… उन्म्मह… नहीं भाई, जोर से नहीं… उन्म्मह… भाई अभी कुछ अच्छा लगने लगा है। हाँ बस इसी तरह आराम से करो।

मैं इसके बाद एक दो मिनट में ही दीदी की गाण्ड में फारिग़ हो गया और दीदी के ऊपर ही गिर गया और हाँफने लगा कि तभी दीदी के मुँह से- पायल तुम यहां?

मैं फौरन दीदी के ऊपर से उठा तो मेरा आधा खड़ा लण्ड दीदी की गाण्ड से पुकचाआक्क की आवाज के साथ बाहर निकल आया जिससे पायल बड़े प्यार भरी नजरों से देखने लगी और साथ ही मुश्कुराने लगी।

मैंने पायल की तरफ देखा और कहा- पायल तुम कब उठी?

पायल- अभी थोड़ी ही देर हुई है भाई, क्यों नहीं उठना चाहिए था क्या?

मैं- नहीं, ऐसी बात नहीं है। चलो तुम नहा लो फिर बुआ के साथ ही नाश्ता कर लेना।

पायल हल्का सा मुश्कुराई और बोली- “भाई, मेरा दिल तो कर रहा है कि मैं भी दीदी वाला नाश्ता ही कर लूँ…”

दीदी- “पायल, जब तुम्हारा दिल चाहे कर लेना, जितना ये मेरा भाई है उतना ही तुम्हारा भी है…”

पायल- भाई, क्या दीदी सच बोल रही हैं?

मैं- “हाँ पायल, जब तुम्हारा दिल करे मैं अपनी छोटी बहन को मना थोड़ी ना करूंगा…” और हँस पड़ा।

पायल- “ठीक है भाई, फिर तैयार रहना आप मैं किसी भी वक़्त आपसे अपना हिस्सा माँग सकती हूँ…”

दीदी- “पायल, मैंने और आलोक ने कहा ना कि तुम्हें कोई भी मना नहीं करेगा। चल अभी जाकर नहा ले और बुआ को भी उठा दे…”

पायल दीदी की बात सुनकर वापिस रूम की तरफ मुड़ गई और दरवाजा के पास जाकर फिर मुड़ी और मेरे लण्ड की तरफ देखकर ठंडी सांस भरी और रूम में चली गई।

पायल के जाते ही मैंने दीदी की तरफ देखा और कहा- दीदी, क्या आपने अरविंद की ओफर को सच में मान लिया है?

दीदी- हाँ भाई, मेरा ख्याल है कि ये ही ठीक रहेगा। क्योंकि इस तरह मैं इस जलालत से बची रहूंगी और पैसा भी कमा लूँगी…”

मैं- “हाँ दीदी, बात तो आपकी ठीक है लेकिन इस तरह तो आप मुझे भी पास नहीं आने दोगी…”

दीदी- क्यों? तू कोई बाहर का थोड़ी है। मेरा अपना है और जो मजा तेरे साथ है वो कोई बाहर का आदमी तो नहीं दे सकता ना…”

मैंने दीदी को एक किस किया और उठकर नहाने चला गया और फिर वापिस आकर ड्रेस पहनी और तैयार हो गया। क्योंकि काम का टाइम भी होने वाला था कि तभी बापू की काल आ गई। बापू ने कहा- “आलोक, अंजली को बोलो कि वो तैयार हो जाये…”

मैंने हैरानी से कहा- लेकिन, वो क्यों बापू?

बापू ने कहा- वो… अभी अरविंद साहब आ रहे हैं मेरे साथ और हम अंजली को साथ लेकर जायेंगे। अरविंद साहब ने अंजली के लिए एक कोठी पसंद की है और अब अंजली सिर्फ़ उनके लिए ही बुक रहा करेगी। ठीक है…”

मैंने कहा- ठीक है बापू, जैसे आप बोलो और काम का क्या करना है आज छुट्टी है क्या?

बापू ने कहा- हाँ, आज छुट्टी करो और ऐसा करो कि तुम लोग घर ही चले जाओ। यहाँ रुकने का क्या फायदा है?

मैंने कहा- “जी बापू, जैसे आप कहो…” और काल कट करके दीदी को आवाज दी और कहा- “दीदी आप तैयार हो जाओ, बापू आ रहे हैं अरविंद साहब को लेकर, आपने साथ जाना है…”

दीदी मेरी बात सुनकर बोली- ठीक है भाई, मैं तैयार हूँ।

तो पायल ने कहा- भाई, हमने क्या करना है?

मैंने कहा- हम अभी घर जायेंगे और आराम करेंगे आज छुट्टी है।

पायल ने फौरन ही इनकार कर दिया और बोली- “वो कहीं भी नहीं जाएगी और यहाँ ही रहा करेगी…”

लेकिन बुआ ने कहा- मुझे तो घर जाना ही होगा, कुछ सामान भी ले आऊँगी वहाँ से।

बापू कोई एक घंटे के बाद आए और दीदी के साथ बुआ को भी ले गये कि घर छोड़ते जायेंगे और निकल गये। उन लोगों के जाने के बाद मैंने टीवी लगा लिया और देखने लगा लेकिन पायल रूम की तरफ गई और रात की बची हुई शराब उठा लाई और साथ ही दो गिलास भी ले आई और मेरे सामने रख दिए।

मैंने कहा- पायल, ये क्यों लाई हो यहाँ?

पायल ने कहा- भाई, आज आपके साथ पीना चाहती हूँ। क्या पियोगे मेरे साथ? ये बात बोलते हुये पायल की आँखों में सेक्स का नशा मुझे साफ नजर आ रहा था। और मैं समझ गया कि मेरी छोटी बहन मुझसे क्या चाहती है।

मैंने हाँ में सर हिला दिया और कहा- लेकिन आज अगर पिलानी है तो तुम्हें ही पिलाना पड़ेगी।

पायल मेरी बात सुनकर खुश हो गई और उठकर मेरे पास बैठ गई और दो पेग बना दिए और एक गिलास मेरी तरफ बढ़ा दिया। मैंने अपना गिलास पकड़ लिया और शराब के सिप लेने लगा।

पायल मेरे साथ जुड़ के बैठ गई और बोली- भाई, एक बात कहूं, मानोगे क्या?

मैं- हाँ बोलो, क्या बात है मेरी जान?

पायल- भाई, वो ऋतु को भी हम अपने साथ मिला लेते हैं।

मैं हैरानी से पायल की तरफ देखने लगा और बोला- “पायल, तुम्हें पता है कि तुम क्या बोल रही हो? ऋतु अभी सिर्फ़ 19 साल की है…”

पायल- “भाई, आपको नहीं पता कि लड़की 18 साल की होते ही काम के लिए पक जाती है अब ये खाने वाले की मर्ज़ी की उसे कब खाता है…”

मैं समझ गया था क्योंकि ऋतु ने पायल को हमारे सामने नंगा किया था और अब पायल ये चाहती थी कि ऋतु की भी चुदाई हो जाये। ये एक जलन थी जो कि पायल को ऋतु के साथ थी इसलिए मैंने पायल को अपनी तरफ खींच लिया और कहा- देखो पायल, मैं अकेला क्या कर सकता हूँ? लेकिन हाँ बापू और अम्मी के साथ बात करूंगा। ठीक है?

पायल खुश हो गई और बाकी की शराब एक ही घूंट में पी गई और दूसरा पेग बनाने लगी और बोली- भाई, कसम से मेरा दिल करता है कि ऋतु के साथ पहली बार आप ही करो।

पायल की बात सुनकर पता नहीं क्या हुआ कि मेरा लण्ड शलवार को फाड़कर बाहर आने के लिए मचल गया और मैंने भी बाकी की शराब को एक ही घूंट में अपने अंदर उतार दिया और गिलास पायल को पकड़ा दिया और बोला- “नहीं पायल, ऐसा किस तरह हो सकता है भला? अम्मी और बापू नहीं मानेगे इस बात को और वैसे भी ऋतु अभी इतना बर्दाश्त नहीं कर पाएगी…”

पायल- “भाई, आप इस बात को छोड़ो कि ऋतु बर्दाश्त कर सकती है या नहीं? बस आप उसके साथ पहली बार सोने के लिए तैयार रहो क्योंकि लड़की को जितना बड़ा लण्ड मिलता है लड़की उतना ही खुश होती है…”

मैं पायल की बात सुनकर मचल सा गया कि मुझे भी अपनी किसी बहन की सील को तोड़ना चाहिए… देखूं तो सही कि इसमें कितना मजा आता है?

अभी मैं ये सोच ही रहा था कि पायल ने मुझे एक पेग बनाकर पकड़ा दिया जिसे मैं एक ही सांस में चढ़ा गया और पायल को पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और किस करने लगा। पायल भी काफी गरम हो रही थी और मेरी जुबान को अपने मुँह में भर के चूसने लगी और मेरे साथ लिपटने लगी। अब मैंने पायल को किस करने के साथ उसकी शर्ट में भी हाथ घुसा दिया और उसकी चूचियों को दबाने लगा, कभी अपनी जुबान पायल के मुँह में घुसा देता, और कभी उसकी जुबान को अपने मुँह में भर के चूसने लगता।

तभी पायल ने अपना एक हाथ नीचे की तरफ किया और मेरे लण्ड को अपने हाथ से पकड़कर सहलाने लगी जिससे मुझे मजा भी ज्यादा आने लगा। कुछ देर के बाद मैंने पायल को पीछे किया और उसकी शर्ट को भी निकाल दिया जिससे अब मेरी छोटी बहन सिर्फ़ पिंक कलर की ब्रा और निक्कर में ही मेरे सामने रह गई। पायल की चूचियां ब्रा में ऐसे लग रही थी कि जैसे दो कबूतर पकड़कर किसी पिंजरे में बंद कर दिए गये हों और वो आजाद होने के लिए फड़फड़ा रहे हों। मैंने जल्दी से पायल की ब्रा को भी खोल दिया और अपनी बहन की प्यारी और मुलायम चूचियों को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा।

पायल ने मेरे सर को अपने चूचियां के साथ दबा दिया और- “उन्म्मह… भाई, खा जाओ मेरे चूचियों को… आअह्ह…” की आवाज के साथ मुझे और भी गरम करने लगी।

पायल की सिसकियों को सुनकर मैं और भी गरम हो गया और एक चूची को चूसने के साथ दूसरी को अपने हाथ से दबाने और मसलने लगा, क्योंकि मैं जरा जोर से दबा रहा था और साथ ही पायल की चूचियों पे काट भी रहा था, जिससे पायल मुझे मना करते हुये बोली- “आऐ… भाई, नहीं सस्स्स्सीई… आअह्ह… भाई प्लीज़्ज़… ऐसा नहीं करो… दर्द होता है…” और मुझे अपनी चूचियों से हटाने लगी।

फिर भी मैं अपने काम में लगा रहा लेकिन चूचियां को दबाने में अब मैं ज्यादा ताकत नहीं लगा रहा था जिससे पायल को भी दर्द की जगह मजा आने लगा और वो सिसकी- “आअह्ह… भाई हाँ अब अच्छा लग रहा है ऐसे ही चूसो… उन्नमह…”
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09-04-2018, 10:23 PM,
#17
RE: XXX Hindi Kahani घर का बिजनिस
घर का बिजनिस -15

अब मैंने पायल की चूचियों को छोड़ दिया और नीचे आ गया और एक ही झटके के साथ पायल की निक्कर को भी निकाल दिया, जिससे की पायल मेरी आँखों के सामने नंगी हो गई और मैं पायल के नंगे जिश्म को देखकर खो सा गया। क्या प्यारा जिश्म था मेरी बहन का? सबसे खास बात मेरी बहन की गाण्ड थी जो कि काफी भारी और नरम थी, जो किसी भी बहनचोद का लण्ड खड़ा करके छुड़वा सकती थी। फिर मैं नीचे की तरफ झुका और पायल की फुद्दी को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा।

जिससे पायल के मुँह से आअह्ह की आवाज निकली और पायल ने मेरे सर को अपने हाथों से अपनी फुद्दी की तरफ दबा दिया और सिसकी- “हाँ भाई, मुझे अपनी रंडी बना लो… भाई खा जाओ अपनी बहन की फुद्दी को…”

अब मैं अपनी जुबान को बाहर निकालकर पायल की फुद्दी के ऊपर से नीचे की तरफ घुमाता और सररलाप्प की आवाज के साथ किसी कुत्ते की तरह चाटने लगता, तो कभी अपनी जुबान को पायल की फुद्दी में घुसाने की कोशिश करने लगता, तो कभी पायल की फुद्दी पे हल्का सा काट भी लेता।

जिससे पायल मचल जाती थी। पायल मेरी इन हरकतों की वजह से अब आअह्ह भाई, आप बहुत अच्छे हो… भाई, खा जाओ अपनी बहन की फुद्दी को भाई… उंनमह…” और सिसकियां भरते हुये मुझे अपनी फुद्दी की तरफ दबाने लगती।

अब मैं उठा और पायल की फुद्दी के साथ अपने लण्ड को लगा दिया और पायल की तरफ देखा जो कि मेरी तरफ ही देख रही थी। मैंने कहा- क्यों बहना? अब मेरा लण्ड तुम्हारी फुद्दी में जाने के लिए तैयार है घुसा दूँ क्या?
पायल ने मेरी आँखों में देखते हुये कहा- भाई, डाल दो अंदर। लेकिन आराम से करना प्लीज़्ज़… आपका बहुत बड़ा और मोटा है कहीं मेरी फाड़ ही ना दे?

मैं पायल की बात सुनकर अपने लण्ड को पायल की फुद्दी की तरफ दबाने लगा जिससे मेरा लण्ड बड़े आराम के साथ पायल की फुद्दी में जाने लगा। और पायल- “आअह्ह… भाई मजा आ रहा है बस इसी तरह करो…”
मुझे काफी हैरानी हो रही थी, क्योंकि पायल सिर्फ़ दो बार चुदवाई थी लेकिन उसकी फुद्दी में मेरा आधे से ज्यादा लण्ड घुस चुका था लेकिन उसे कुछ भी दर्द नहीं था, बलकि वो मजा ले रही थी जो कि मेरे लिए हैरानी की बात थी। मैंने पायल को आवाज दी।

तो उसने आँखें खोलकर मेरी तरफ सवालिया नजरों से देखा।

तो मैंने कहा- “पायल, कोई तकलीफ तो नहीं हो रही मेरी जान? हाँ…”

पायल मेरी बात सुनकर हल्का सा मुश्कुराई और बोली- “भाई, आपने कल जिनसे मुझे चुदवाया था अगर आप उनके लण्ड देख लेते तो आप ये बात नहीं पूछते। लेकिन एक बात ये है कि आपके लण्ड का मजा उन दोनों से ज्यादा है पता नहीं क्यों?” और साथ ही आँखों को बंद कर लिया।

अब मैंने जरा झटका दिया तो मेरा लण्ड अपनी बहन की फुद्दी में आराम से घुस गया।

तो पायल के मुँह से- आऐ भाई, मैंने आपको बोला भी था कि झटका नहीं प्लीज़्ज़… आराम से मजा लो और मुझे भी आज की रात एंजाय करने दो क्योंकि कल का सारा दिन हमें कोई भी तंग नहीं करेगा, जितना दिल करे कर लेना… लेकिन मजा के लिए… ठीक है?”

मैंने कहा- ठीक है जान जी, जैसे आप कहो…” और इसके साथ ही अपने लण्ड को पायल की फुद्दी से बाहर निकाल लिया और फिर से घुसा दिया लेकिन आराम से।

जैसे ही मेरा लण्ड अपनी छोटी बहन की फुद्दी में पूरा जाता पायल अपनी फुद्दी को अंदर से भींच लेती और फिर ढीला कर देती जिससे मुझे और भी मजा आता था। अब मैं पायल को बड़े प्यार से चोद रहा था और पायल की चूचियों को भी चूस रहा था और दबा रहा था।

जिससे मेरे साथ पायल भी मजे से बेहाल हो रही थी और सिसकी- हाँ भाई, बड़ा मजा आ रहा है मेरी जान… उन्नमह… बस भाई, ऐसे करते रहो… भाई मुझे अपनी रंडी बना लो… भाई मुझे रोज इतना मजा दिया करोगे ना? हाँ भाई, बोलो ना भाई… बताओ करोगे ना रोज मेरे साथ?

मैं भी अब अपनी छोटी बहन का दीवाना हो रहा था और बोला- “हाँ पायल, मैं रोज तुम्हें चोदा करूंगा और खुद अपने हाथों से चुदवाया करूंगा मेरी जान, मेरी गश्ती बहन आअह्ह…”

अब पायल मेरे साथ बुरी तरह लिपट गई और मुझे किस करने लगी और साथ ही अपनी टाँगों को मेरी कमर पे कस लिया और अपनी गाण्ड को मेरी तरफ दबाने लगी और बोली- “हाँ भाई, मैं गई… ऊओ… भाई अपना पानी मेरी फुद्दी में ही निकालो… भाई मुझे अपने बच्चे की माँ बना लो… भाई आअह्ह…” और इसके साथ ही उसका जिश्म एक बार अकड़ गया और फिर ढीला पड़ गया।

क्योंकि पायल फारिग़ हो गई थी और उसकी फुद्दी का पानी मुझे अपने लण्ड पे मजा दे रहा था जिससे मेरा लण्ड भी पायल की फुद्दी में आराम से अंदर-बाहर होने लगा था जो कि और भी मजा दे रहा था। अब मैंने भी अपनी रफ़्तार को बढ़ा दिया औ- “हाँ पायल, ले लो अपने भाई का पानी अपनी फुद्दी में… आअह्ह… पायल, मैं गया… उन्नमह…” की आवाज के साथ ही पायल की फुद्दी में ही फारिग़ हो गया और पायल के ऊपर ही गिर गया और लंबी-लंबी सांसें लेने लगा।

और पायल मेरे बालों में ऊँगलियां घुमाने लगी।

कुछ देर के बाद मैं पायल के ऊपर से उठा और बगल में होकर लेट गया।

तो पायल उठी और शराब का एक पेग बनाकर खुद पकड़ लिया और एक मुझे बना दिया।

तो मैंने कहा- पायल, क्या तुम पहले भी पीती रही हो?

पायल- नहीं भाई, पहले कभी नहीं पी लेकिन अब दिल करता है कि जब पूरी आजादी है तो जो दिल चाहे करूं अब मुझे कौन रोकेगा?

मैं- “पायल, तुम्हें तो पहले भी किसी ने मना नहीं किया था और अब भी कोई मना नहीं करेगा जो दिल चाहे करो ये तुम्हारी अपनी जिंदगी है…”

पायल- भाई, एक बात बोलूं, क्या मानोगे?

मैं- हाँ, बोलो क्या बात है? जिसके लिए तुम्हें मेरी नाराजगी का डर है?

पायल- भाई, मैं चाहती हूँ कि आपके साथ मिलकर किसी और के साथ भी सेक्स करूं।

मैं- क्या मतलब? मैं समझा नहीं तुम्हारी बात, खोलकर बोलो जो बात है।

पायल- भाई, मैं चाहती हूँ कि आप अपने साथ कोई दो दोस्त बुला लो और पूरी रात मुझ सेक्स का मजा दो।
मैं हैरानी से पायल की तरफ देखा और बोला- लेकिन पायल, इस तरह करने का क्या फायदा होगा?

पायल- बस भाई, मेरा दिल करता है कि मैं एक साथ ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ सेक्स करूं।

मैं पायल की बात सुनकर सोच में पड़ गया और बोला- “देखो पायल, बात ये है कि अगर तुम्हारा दिल इतना ही चाहता है तो थोड़ा सबर करो और पहले अपनी गाण्ड का सुराख भी खोलवा लो, उसके बाद जब तुम ज्यादा लोगों के साथ सेक्स करोगी तो तुम्हें ज्यादा मजा आएगा…”

पायल- हूँ भाई, अगर ये बात है तो मैं कल ही किसी से अपनी गाण्ड खुलवा लूँगी।

मैं- हाँ, जरा बताओ तो सही कि मेरी बहन ने अपनी गाण्ड किससे खुलवानी है? क्या मेरे अलावा भी मेरी बहन किसी को इतना चाहती है कि उसे अपनी इतनी प्यारी गाण्ड का तोहफा दे?

पायल- “नहीं भाई, लेकिन बात ये है कि जब मेरी गाण्ड का सुराख खुलेगा तो आपके सामने ही खुलेगा और घर में ही हेहेहेहेहे…”

मैं जरा गुस्से से बोला- क्या मजाक है पायल? जो बात है सीधी तरह क्यों नहीं करती हो इतना ड्रामा क्यों कर रही हो?

पायल- “भाई, मैं अभी आपसे इस पे कोई बात नहीं करूंगी। हाँ कल आपको पता चल ही जायेगा क्योंकि सब कुछ आपके सामने ही होगा…” और शराब पीने लगी।
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09-04-2018, 10:23 PM,
#18
RE: XXX Hindi Kahani घर का बिजनिस
घर का बिजनिस -16

पायल की बातों ने मुझे हैरान कर दिया था क्योंकि वो 2-3 दिन में ही इतना बोल्ड हो गई थी कि दीदी और बुआ भी नहीं हो सकी थी और परेशानी की बात ये थी कि आखिर पायल किससे अपनी गाण्ड मरवाना चाहती है? कौन है वो?
मैंने उस रात दो बार और भी पायल की चुदाई की और उससे पूछता भी रहा कि आखिर वो किससे चुदवाना चाहती है? लेकिन उसने मुझे कुछ भी नहीं बताया।

सुबह मैं उठा और नहाने के बाद नाश्ता ले आया और पायल को भी उठा दिया जो कि वैसे ही नंगी सो रही थी। पायल ने उठकर हाथ मुँह धोया और आकर नाश्ता करने बैठ गई। पायल उस वक़्त भी नंगी ही थी फिर हमने नाश्ता खतम किया और मैंने बापू को काल की और पूछा- “कब आ रहे हो?

तो बापू ने कहा- यार बस 5 मिनट में हम तुम्हारे पास होंगे।

मैंने काल कट की और पायल की तरफ देख जो कि अभी भी नंगी ही बैठी हुई टीवी देख रही थी और कहा- पायल तुम अभी कपड़े पहन लो बापू आ रहे हैं।

पायल ने हैरानी से मेरी तरफ देखा और बोली- क्यों भाई? बापू आ रहे हैं तो क्या हुआ? मैं कपड़े क्यों पहनूं?

मैंने कहा- वो बात ये है कि हो सकता है कि बापू के साथ कुछ और लोग भी हों इसलिए तुम अपने कपड़े पहन लो।

पायल कुछ देर हैरानी से मेरी तरफ देखती रही और फिर उठकर अपने रूम में चली गई लेकिन उसने कपड़े नहीं पहने और बेड पे लेट गई और अपने ऊपर एक चादर ले ली। मुझे पायल की इन हरकतों से बड़ी उलझन हो रही थी लेकिन मैंने पायल को कुछ नहीं कहा। और खामोशी से बैठा टीवी देखने लगा कि तभी डोरबेल बज उठी और मैंने जाकर दरवाजा खोल दिया। बापू अकेले ही आए थे और काफी खुश भी लग रहे थे।

मैं बापू को अंदर लाया तो बापू ने आते ही कहा- “पायल कहाँ है? नजर नहीं आ रही है।

मैंने कहा- वो रूम में है और आराम कर रही है।

बापू ने कहा- “आलोक बेटा, हमारे तो दिन ही फिर गये हैं। पता है अरविंद साहब ने हमें एक कीनल का मकान लेकर दिया है और शर्त सिर्फ़ इतनी है कि अंजली किसी और के साथ वक़्त नहीं गुजारेगी और ना ही हम उस घर में कोई ऐसा वैसा काम करेंगे…”
मैं भी बापू की बात सुनकर खुश हो गया और बोला- “सच में बापू, अब मजा आएगा…”

अभी मैंने इतना ही कहा था कि पायल जो कि रूम में नंगी ही थी, बाहर निकल आई और बापू के पास आकर खड़ी हो गई और बोली- बापू, हमारा नया घर कहाँ है?

बापू जो कि पायल के नंगे जिश्म का नजारा कर रहे थे पायल की बात सुनकर चौंक गये और बापू ने एक पाश एरिया का नाम बता दिया जहाँ कोई भी घर हमारे जैसा और गरीब नहीं था। बापू जिस तरह पायल को देख रहे थे, मुझे लग रहा था कि बापू की भी नियत पायल को इस तरह नंगा देखकर खराब हो रही है और पायल भी बापू से किसी किश्म की कोई शरम नहीं कर रही थी जिससे मुझे पायल की कल रात वाली बात भी समझ में आ गई कि वो कौन है जिससे पायल अपनी गाण्ड खोलवाना चाहती है।

मुझे बापू से जलन हो रही थी क्योंकि पायल ने मुझे छोड़ के बापू से अपनी गाण्ड मरवाने का सोचा था। लेकिन फिर ये सोचकर कि मेरा लौड़ा जितना बड़ा है अगर मैं अपनी इस छोटी बहन की गाण्ड में झटके से घुसा देता तो उसकी गाण्ड फट ही जाती इसलिए तो उसने पापा से गाण्ड मरवाने का सोचा था तो अच्छा ही किया था।

बापू ने अब पायल को अपने पास बिठा लिया था और अपना एक हाथ से पायल के कंधों को पकड़कर पायल को अपनी तरफ खींच लिया और बोले- हाँ तो मेरी रानी बेटी, तुम सुनाओ क्या हाल हैं? भाई ने तंग तो नहीं किया?

पायल- नहीं बापू, भाई तो बहुत अच्छे हैं मुझे बड़े प्यार और आराम से रखा है भाई ने।

बापू- अच्छा, लेकिन मुझे तो लगता है कि इसने तुम्हें काफी तंग किया होगा?

पायल- बापू, भाई तो मुझे तंग करना चाहते थे लेकिन मैंने मना कर दिया कि नहीं अभी तंग नहीं करो तो भाई मान गया कि पहले कोई और तंग कर ले फिर मुझे और भाई दोनों को कोई परेशानी नहीं होगी।

बापू- क्यों आलोक, ये मैं क्या सुन रहा हूँ कि तुम मेरी इस रानी बेटी को तंग करने की कोशिश करते रहे हो?

पायल- नहीं पापा, भाई ने तंग थोड़ा ही किया है, हाँ प्यार जरूर किया है।

मैं- बापू, लगता है कि पायल चाहती है कि आप उसे तंग करो क्योंकि मुझे तो इसने मना कर दिया था।

पायल मेरी बात सुनकर मुझे घूरने लगी और बोली- “भाई, मैं नहीं चाहती थी कि कोई ज्यादा मसला हो जाये इसलिए मना किया था लेकिन आप तो लगता है कि दिल पे लिए बैठे हो अभी तक…”

बापू- आलोक यार, मुझे भी तो बताओ कि बात क्या है? हो सकता है कि मैं ही कुछ फैसला कर दूँ, तुम लोगों का।

पायल- “बापू, करना तो आप ही ने है…” और मेरी तरफ देखने लगी।

तो मैं भी पायल की बात सुनकर मुश्कुरा दिया।

बापू- अरे बेटी, मैंने कब मना किया है? जो कहो, मैं करने के लिए तैयार हूँ क्योंकि तुम लोग ही तो मेरा सरमाया हो, तुम्हारी नहीं मानूंगा तो किसकी मानूंगा?

बापू की बात सुनकर पायल सोफे से उठी और नीचे गिरे हुये गिलास को उठाने के लिए झुक गई जिससे उसकी गाण्ड और फुद्दी खुलकर बापू के सामने आ गई जिसे देखकर बापू अपने लण्ड को शलवार के ऊपर से ही मसलने लगे।
पायल गिलास उठाकर सीधी हुई और टेबल पे रखकर बापू की तरफ घूम गई और बापू को अपना लण्ड मसलते हुये देखकर हँस पड़ी और बोली- बापू, लगता है कि आपका ये शहजादा कुछ माँग रहा है?

बापू भी थोड़ा खुल गये और बोले- “अरे बेटी, इसका क्या पूछती हो? ये तो माँगता ही रहता है लेकिन जरूरी तो नहीं कि इसे सब कुछ मिल ही जाये…”

पायल- “बापू, हो सकता है कि जो ये माँग रहा हो इसे मिल जाए? आप बता के तो देखो…”

बापू ने कहा- बेटी, अब तुम खुद समझदार हो, मैं क्या बताऊँ कि ये क्या माँगता है और क्यों?

पायल बापू के पास बैठ गई और बापू के हाथ को पकड़कर लण्ड से हटा दिया और बोली- “तो लगता है कि मुझे इससे ही पूछना पड़ेगा कि इसे क्या चाहये है…” पायल ने इतना बोलते हुये बापू के लण्ड को पकड़ लिया और बोली- “हाँ शैतान शहजादे, क्यों मेरे बापू को तंग कर रहे हो? बोलो जरा…”

मैं पायल की इन हरकतों को देखकर हँस पड़ा और बोला- पायल, तुमसे ज्यादा कौन जानता होगा कि इसे क्या चाहिए? और ये बापू को क्यों तंग कर रहा है?

पायल ने बापू की तरफ देख तो बापू ने सर झुका लिया। तो पायल ने कहा- क्यों बापू क्या हुआ? क्या बेटी को दूसरे लोगों से चुदवाना ही आता है? क्या खुद कुछ करते हुये शरम आ रही है?

बापू ने पायल की तरफ बड़ी हैरानी से देखा और फिर मेरी तरफ देखा तो मैं बापू की आँखों में लिखा साफ पढ़ गया की बापू को पायल के इतना बोल्ड होने का यकीन ही नहीं हो रहा था। कुछ देर के बाद बापू इस कैफियत से बाहर निकल आए और एक झटके से पायल को अपनी तरफ खींच लिया और उसके तपते होंठों के साथ अपने होंठ भी लगा दिए और किस करने लगे और साथ ही अपना एक हाथ पायल की गाण्ड पे रख दिया और सहलाने लगे।

बापू अब पायल के होंठों को बुरी तरह चूस रहे थे और पायल की गाण्ड को भी मसल रहे थे जिससे कि पायल बुरी तरह से मचल रही थी और बापू के साथ और भी लिपटने की कोशिश कर रही थी। बापू और पायल के इस तरह किस करने से मैं भी गरम हो उठा और अपनी शलवार को खोल दिया और लण्ड को बाहर निकालकर हाथ में पकड़ लिया।

अब बापू ने पायल को सोफे पे गिरा दिया और खुद खड़े हो गये और अपने कपड़े उतारने लगे जिसे देखकर पायल का चेहरा लाल होने लगा और होंठ काँपने लगे थे। बापू ने अपने कपड़े उतार दिए और पायल की टाँगों को खोलकर बीच में बैठ गये और पायल की फुद्दी के साथ अपना मुँह लगा दिया और पायल की फुद्दी चाटने लगे।

बापू के फुद्दी पे मुँह लगाते ही पायल बुरी तरह तड़प उठी और सिसकी- “आअह्ह… बापूऊउ उंमन्ह… आज अपनी बेटी की फुद्दी को खा जाओ… कुतिया बना दो मुझे बापूऊउ…”

बापू ने अब अपनी जुबान बाहर निकाल ली और उसे पायल की फुद्दी में घुसाकर चाटने लगे और साथ ही अपने एक हाथ की बिचली-उंगली को पायल की गाण्ड के छेद पे रख दिया और दबाने लगे। जैसे-जैसे बापू की उंगली पायल की गाण्ड में घुस रही थी, पायल के चेहरा पे दर्द का एहसास साफ नजर आने लगा था और वो आऐ… बापू जी, थोड़ा और गीला करो… प्लीज़्ज़… दर्द हो रहा है।

पायल की बात को सुनते ही बापू ने अपनी उंगली निकाल ली और अपने मुँह में घुसाकर चाटने लगे और फिर पायल की गाण्ड के छेद पे भी हल्का सा थूक लगा दिया और फिर से अपनी उंगली पायल की गाण्ड के सुराख पे रखा और एक ही झटके में पूरी उंगली घुसा दी।

उंगली के घुसते ही पायल के मुँह से- “आऐ… बापूऊउ प्लीज़्ज़… रुको… आराम से आअह्ह… दर्द होता है बापूऊउ…”

बापू ने अबकी पायल की कोई बात नहीं सुनी और उंगली को अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया और साथ ही पायल की फुद्दी को भी चाटने लगे जिससे पायल का दर्द खतम हो गया और वो मजा लेने लगी जो कि उसकी सिसकियों से भी पता चल रहा था।

पायल- “आअह्ह… बापू, आप कितने अच्छे हो… उन्म्मह… अब अच्छा लग रहा है…”

बापू और पायल की बातों सी मैं भी काफी उत्तेजित हो रहा था तो मैं भी उठा और अपने कपड़े उतार दिए और नंगा हो गया और पायल के पास जा के नीचे ही बैठ गया और पायल की चूचियां के साथ अपना मुँह लगाकर चूसने लगा।

पायल को मेरा इस तरह करना अच्छा लगा और वो मेरे बालों में अपनी ऊँगलियां घुमाने लगी और सिसकी- “हाँ भाई, चूसो इन्हें… उन्म्मह… भाई जरा जोर से चूसो… आअह्ह…”

मैंने अपना सर पायल की चूचियां से उठाया और बापू की तरफ देखकर बोला- “बापू रूम में चलते हैं, यहाँ ठीक नहीं…”

बापू ने सर उठाकर मेरी तरफ देखा और फिर अपनी उंगली भी पायल की गाण्ड में से निकाल ली और पायल का हाथ पकड़कर उठा लिया और हम रूम में आ गये। रूम में आते ही मैं बाथरूम में गया और तेल उठा लाया। मेरे हाथ में तेल देखते ही बापू मुश्कुरा दिए और बोले- आलोक बेटा, ये अच्छा किया जो तेल ले आए इससे पायल की गाण्ड मारने में मजा आ जाएगा…” और तेल मेरे हाथ से ले लिया और पायल को उल्टा लिटा के उसके नीचे एक तकिया रख दिया जिससे पायल की गाण्ड उभर के ऊपर को हो गई तो बापू ने पायल की गाण्ड को हाथ से सहलाया और तेल लगाने लगे।

पायल की गाण्ड पे तेल लगाने के बाद बापू ने अपने लण्ड को भी तेल से भर दिया और मेरी तरफ देखा तो मैं आगे बढ़कर पायल की गाण्ड को दोनों हाथों से पकड़कर खोल दिया, तो बापू ने अपना लण्ड पायल की गाण्ड के छेद पे रखकर हल्का सा दबा दिया। जिससे बापू के लण्ड का सुपाड़ा पायल की गाण्ड में घुस गया।

लण्ड का सुपाड़ा घुसते ही पायल की दर्द से भरी आवाज सुनाई दी- बापू अभी रोुको प्लीज़्ज़… अभी और आगे नहीं करना।

बापू पायल की बात सुनकर थोड़ा रुक गये और फिर कुछ देर रुकने के बाद अपने लण्ड को अपनी बेटी की गाण्ड में दबाने लगे जिससे बापू का लण्ड आहिस्ता-आहिस्ता पायल की गाण्ड में जाने लगा तो पायल ने अपनी गाण्ड को दबा के बापू के लण्ड को अंदर जाने से रोकने की कोशिश की और बोली- “बापू प्लीज़्ज़… आराम से आऐ… बापू जी फट जायेगी…”

बापू ने अब अपने लण्ड को थोड़ी देर वहीं रोक लिया और बोले- हाँ मेरी जान… बेटी, ज्यादा दर्द हो रहा है क्या?

पायल की आँखों में अब आँसू नजर आ रहे थे तो वो बोली- जीए बापू, बड़ा दर्द हो रहा है… बस इससे ज्यादा नहीं करो, इतना ही ठीक है।

बापू ने मुझे इशारा किया कि मैं पायल को कस के पकड़ लूं, तो मैंने ऐसा ही किया।

जिससे पायल चौंक गई और बोली- “नहीं बापू, प्लीज़्ज़… ऐसा मत करना नहीं तो मेरी गाण्ड फट जायेगी…”

बापू ने कहा- “नहीं बेटी, मैं बाहर निकालने लगा हूँ…” और थोड़ा सा लण्ड को बाहर खींचा जिससे पायल रिलैक्स हो गई। तभी बापू ने अपनी पूरी ताकत से अपने लण्ड को पायल की गाण्ड में उतार दिया।

लण्ड के जड़ तक घुसते ही पायल चिल्ला उठी- “हाऐ… अम्मी जी, मुझे बचा लो… फट गई मेरी… नहीं बापू… बाहर निकालो प्लीज़्ज़… मुझे नहीं करना है… भाई, बापू को बोलो ना प्लीज़्ज़…”

अब बापू ने अपने लण्ड को पायल की गाण्ड में ऐसे ही रोक दिया और ऊपर लेट गये तो मैं पायल के पास लेट गया और उसके नीचे हाथ घुसाकर चूचियों को पकड़कर दबाने लगा कि पायल का दर्द जल्दी कम हो जाए।

पायल बुरी तरह मचल रही थी और अब गालियां भी दे रही थी- “आअह्ह… बापू, बहनचोद बाहर निकालो नहीं तो मैं मर जाऊँगी… बापू प्लीज़्ज़ बाहर निकालो… आअह्ह… आलोक, बहनचोद रंडी के बच्चे… कुछ बोलता क्यों नहीं? बोल ना बापू को बाहर निकाल लें…”

बापू ऐसे ही पायल के ऊपर लेटे रहे और पायल के कानों की लौ को अपने मुँह में भर के चूसते और कभी गर्दन पे किस करते और इस तरह कुछ देर के बाद पायल के दर्द में कमी होना शुरू हो गया और कुछ देर के बाद पायल के मुँह से आवाज निकलना भी बंद हो गया।

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09-04-2018, 10:23 PM,
#19
RE: XXX Hindi Kahani घर का बिजनिस
घर का बिजनिस -17

अब मैं उठा और अपने लण्ड को पायल के मुँह में घुसा दिया जिसे वो चूसने लगी। तो बापू ने भी अपने लण्ड को पायल की गाण्ड में आहिस्ता से अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया।
बापू का लण्ड जैसे ही पायल की गाण्ड में हिलाने लगा तो पायल ने मेरे लण्ड को अपने मुँह में से निकाल दिया और बोली- “बापू, आहिस्ता प्लीज़्ज़… आप ने बड़ा दर्द दिया है मुझे आअह्ह…”

तभी बापू ने कहा- बेटी, अब नहीं डरो। अब दर्द नहीं होगा। मैं अपनी बेटी को आराम से ही चोदूंगा और लण्ड को अंदर-बाहर करना जारी रखा। क्योंकि बापू का लण्ड पायल की गाण्ड में पूरा फँसा हुआ था जिसकी वजह से बापू को भी थोड़ा परेशानी हो रही थी। लेकिन बापू आराम-आराम से पायल की गाण्ड को खोलते रहे।

पायल अब मेरे लण्ड को नहीं चूस रही थी क्योंकि उसका सारा ध्यान बापू के लण्ड की तरफ ही लगा हुआ था जो कि अब पायल की गाण्ड में आराम से अंदर-बाहर हो रहा था। क्योंकि पायल की गाण्ड ने बापू के लण्ड को अपने अंदर जगह दे दी थी जिससे बापू को पायल की गाण्ड में आसानी हो गई थी।

अब पायल भी बापू का साथ अपनी गाण्ड को बापू के लण्ड की तरफ दबा के दे रही थी और साथ ही- “आअह्ह… बापू जी… अब अच्छा लग रहा है… उन्म्मह… बापू अभी थोड़ा से तेज करो प्लीज़्ज़… आह्ह… बस बापू… इससे ज्यादा नहीं… उन्म्मह… हाँ अब ठीक है…” की आवाज भी कर रही थी.

पायल की बापू के साथ ये गाण्ड चुदाई इतनी जबरदस्त थी कि मैं पायल के हाथ में लण्ड को पकड़कर हिलाने से ही फारिग़ हो गया और बगल में लेटकर बापू की चुदाई देखने लगा। मुझे लग रहा था कि अब बापू भी अपने अंत पे हैं क्योंकि उनके मुँह से भी अब- “आअह्ह… बेटी, क्या गाण्ड है तेरी… मजा आ गया बेटी… ऊओ… बेटी मैं तो दीवाना हो गया हूँ तेरी गाण्ड का…”

क्योंकि बापू अब झटके भी जरा जोर-जोर से लगा रहे थे जिसकी वजह से पायल के मुँह से- “आअह्ह… बापू जरा आराम से करो प्लीज़्ज़… बापू, आप बहुत अच्छे हो उन्म्मह…” की आवाज करने लगी और साथ ही अपना एक हाथ अपने नीचे घुसाकर अपनी फुद्दी को भी मसल रही थी जिससे पायल भी फारिग़ होने वाली थी।

तभी बापू ने- “आअह्ह… पायल बेटी, मैं गया ऊओ… बेटी, अपने बापू का पानी अपनी गाण्ड में ही ले लो बेटी…” की आवाज के साथ ही बापू पायल के ऊपर ही गिर पड़े और अपनी आँखों को बंद करके लंबी सांसें लेने लगे। बापू के पायल की गाण्ड मारने के बाद मैंने पायल के साथ कुछ भी नहीं किया क्योंकि अभी हमें जाना भी था। फिर पायल उठकर वहाँ से अजीब सी चाल चलते हुये बाथरूम में घुस गई तो बापू भी बाहर वाले वाश-रूम में चले गये और नहाकर वापिस आए।

तभी पायल भी आ गई थी नहाकर।

तो बापू ने कहा- “चलो भाई तैयार हो जाओ अभी हमने जाना है, नया घर में शिफ्ट भी करना है…” बापू की बात सुनकर पायल खुश हो गई और जल्दी से तैयार होकर आ गई।

फिर हम वहाँ से निकल पड़े और अपने पुराने घर आ गये। जहाँ अम्मी, दीदी, ऋतु और बुआ सामान को पैक करने के बाद हमारा इंतेजार कर रही थीं। फिर बापू ने किसी को फोन किया तो कुछ ही देर के बाद एक मिनी ट्रक आ गया और उसके साथ 3-4 मजदूर भी थे, जिन्होंने हमारा सामान ट्रक में लोड किया और हम वहाँ से नये घर की तरफ रवाना हो गये, जो कि एक पाश एरिया में था और वहाँ जरूरत की हर चीज पहले से ही मोजूद थी। इसलिए पुराने घर से लाया गया तकरीबन सारा सामान स्टोर में रखवा दिया गया और उसके बाद सबने अपने लिए रूम पसंद कर लिया और रूम में घुस गये।

फिर बापू ने हम सबको अपने पास बुला लिया और बोले- देखो भाई, अब बात ऐसी है कि हमें फ्लैट की जरूरत नहीं है। क्योंकि यहाँ हमारे पास एक एलहदा से गेस्टरूम हैं जो कि घर से अलहदा हैं और वहाँ हम अपना काम चला लिया करेंगे। क्या ख्याल है तुम लोगों का?

पायल- “लेकिन बापू, इस तरह ऋतु को भी पता चल जायेगा हमारे काम का…”

अम्मी- तो अच्छा है ना… वो भी इस काम में आ जाएगी और जितनी उम्र है उसकी, पैसे भी अच्छे कमा लिया करेगी।

बुआ- भाभी, बात तो आपने सही की है कि अब ऋतु को हमारे साथ आ ही जाना चाहिए। क्योंकि इस तरह कोई बात छुपानी नहीं पड़ेगी।

बापू- क्यों आलोक, तुम्हारा क्या ख्याल है?

मैं- मेरा क्या है बापू? जब आप लोग भी ये ही चाहते हो तो मुझसे क्यों पूछ रहे हो?

अम्मी- नहीं बेटा तुम्हारी बात भी जरूरी है, जो बात दिल में है वो बताओ।

मैं- देखो अम्मी, जब हम कंजर बन ही चुके हैं तो क्या फरक पड़ता है कि हम किसको चुदवा रहे हैं? और किससे? और खुद किसकी चुदाई कर रहे हैं?

मेरी बात सुनकर सब खामोश हो गये और कोई कुछ नहीं बोला। क्योंकि बात जो भी थी सच ही थी। फिर हम लोग वहाँ से उठे और अपने-अपने रूम में आ गये और आराम करने लगे। इसी भाग दौड़ में रात के खाने का टाइम हो गया और पता ही नहीं चला।

बुआ मेरे रूम में आ गई और बोली- अरे आलोक, अभी तक लेटे हुये हो? खाना नहीं खाओगे क्या?

मैं बुआ की बात सुनकर चौंक गया और टाइम देखा तो रात के 8:00 बज चुके थे। मैं जल्दी से उठा और फ्रेश होकर खाना खाने की टेबल पे आ गया और अम्मी और बुआ किचेन से खाना लाकर रखने लगीं।

तभी अरविंद साहब भी आ गये और आते ही बोले- अहाआ… लगता है कि मैं सही टाइम पे आ गया हूँ क्योंकि बड़ी भूख लग रही है और एक कुर्सी खींचकर दीदी की बगल में ही बैठ गये और दीदी को अपनी तरफ खींचकर एक किस भी कर दी, जिसे ऋतु ने बड़ी अजीब नजरों से देखा और फिर हमारी तरफ देखा। लेकिन जब ऋतु ने देखा कि हम सब नार्मल हैं तो वो भी खामोश हो गई और खाना निकालकर खाने लगी लेकिन उसका ध्यान खाने में कम लेकिन दीदी और अरविंद के बीच होने वाली छेड़-छाड़ में ज्यादा लगा हुआ था।

खाना खाने के बाद हम सब टीवी देखने बैठ गये तो अरविंद साहब ने मेरी तरफ देखा और कहा- यार हमारी दिलवर जानी भी ले आओ इस तरह क्या खाक मजा आएगा?

मैं अरविंद की बात का मतलब समझ गया और पायल की तरफ देखकर बोला- “जाओ बापू के रूम में से एक बोतल निकाल लाओ और साथ में गिलास और बर्फ भी ले आना…”

पायल उठकर चली गई तो ऋतु बड़ी अजीब नजरों से मेरी तरफ देखने लगी, लेकिन बोली कुछ नहीं क्योंकि वो काफी देर से यहाँ घर में जो देख रही थी उसकी समझ में नहीं आ रहा था।

पायल बापू के रूम में से शराब की बोतल निकाल लाई और उसे अरविंद के सामने रखकर किचन की तरफ चल पड़ी तो बुआ जो कि किचेन से ही आ रही थी उसके हाथ में बाकी सामान देखकर फिर से बैठ गई और बुआ ने बाकी सामान भी उनके सामने रख दिया और अरविंद ने दो गिलास में पेग बना लिए और एक दीदी को पकड़ा दिया और दूसरा खुद उठा लिया और पीने लगा।

दीदी को इस तरह सब घर वालों के सामने एक गैर-मर्द के साथ इस तरह चिपक के बैठने और किस करने के बाद अब शराब पीता देखकर ऋतु की आँखें हैरत के मारे फटने के करीब थीं कि वो एक झटके से उठी और अपने रूम की तरफ भाग गई।

ऋतु के वहाँ से जाते ही अम्मी ने और बुआ ने हल्का सा मुश्कुराकर मेरी तरफ देखा और ऋतु की तरफ इशारा कर दिया और पुछा- सुनाओ कैसी रही?

ऋतु के जाने के कुछ ही देर के बाद अरविंद साहब भी दीदी को लेकर उसके रूम में चले गये। तो अम्मी ने कहा- क्यों आलोक, कुछ परेशान हो कोई बात है तो बताओ मुझे।

मैंने अम्मी की तरफ देखा और कहा- अम्मी आप लोग ऋतु को अपने साथ शामिल करने के लिए जो कुछ कर रहे हो, क्या वो सही है?

अम्मी ने मेरी तरफ देखा और बोली- देखो बेटा, ऐसा है कि तुम अभी जाओ अपने रूम में इस पे हम बात करेंगे। लेकिन अभी नहीं ठीक है।

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09-04-2018, 10:23 PM,
#20
RE: XXX Hindi Kahani घर का बिजनिस
घर का बिजनिस -18

अम्मी ने मेरी तरफ देखा और बोली- देखो बेटा, ऐसा है कि तुम अभी जाओ अपने रूम में इस पे हम बात करेंगे। लेकिन अभी नहीं ठीक है।

अम्मी की बात सुनकर मैंने हाँ में सर हिला दिया और वहाँ से उठकर अपने रूम में आ गया और एक लूज निक्कर पहन ली और आराम करने के लिए लेट गया। कोई एक घंटे के बाद मेरे रूम का दरवाजा खुला और अम्मी अंदर आ गई और अपने पीछे दरवाजे को भी बंद कर दिया। और मेरे पास आकर बेड पे मेरे साथ ही लेट गईं और मुझे अपनी तरफ खींच लिया और मेरे बालों में उंगलियां घुमाने लगी।

मैंने कहा- क्यों अम्मी, क्या बात है? आज आप इतने दिनों के बाद मेरे रूम में? खैर तो है ना?

अम्मी ने मेरी तरफ देखा और बोली- आलोक बेटा, वो मैंने ऋतु के बारे में तुम्हारे साथ बात करनी थी।

इसीलिए सोचा कि आज मैं यहाँ तुम्हारे पास ही सो जाती हूँ और बात भी कर लूँगी।

मैंने कहा- “जी अम्मी, बोलो आप क्या बताना चाहती हो? जब कि मैं आपको पहले ही बता चुका हूँ कि आप जिसके साथ जो करना चाहती हो या करवाना चाहती हो मुझे कोई ऐतराज नहीं है बस मैं ये चाहता हूँ कि किसी के साथ जोर-जबरदस्ती वाला काम ना हो कि हमें कल को जलील होना पड़े…”

अम्मी ने मेरी पूरी बात सुनी और बोली- आलोक, हम भी ऋतु को ये सब इसीलिए दिखा रहे हैं कि वो जितना इस माहौल को देखेगी, अपने अंदर की गर्मी से मजबूर होकर खुद ही बोल देगी कि वो भी हमारे साथ इस काम में आना चाहती है।

मैंने कहा- अम्मी, अगर ऋतु ने नहीं कहा और वो आपके कहने से भी इस काम के लिए नहीं मानी तो आप क्या करोगी?

अम्मी ने कहा- आलोक, अगर वो नहीं मानी तो फिर हम उसकी शादी करके उसे खुद से दूर कर देंगे, जहाँ उस पे हमारा साया भी ना पड़े।

अम्मी की बात सुनकर मैं शांत हो गया और अम्मी को लिपट गया।

तो अम्मी ने भी मुझे अपने साथ भींच लिया और किस करने लगी और साथ ही मुझे दबाने लगी। मैं भी अम्मी की किस के जवाब में अम्मी की जुबान को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और एक हाथ से अम्मी की गाण्ड को दबाने लगा और सहलाने लगा। कुछ देर तक हम ऐसे ही एक दूसरे को किस करते रहे और फिर मैंने अम्मी को पीछे हटा दिया और खुद अम्मी की कमीज को निकाल दिया और साथ ही शलवार को भी तो अम्मी मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा में ही रह गई क्योंकि अम्मी पैंटी नहीं पहनती थी।

और इस वक़्त मेरी माँ जिसने मुझे पैदा किया था मेरे सामने सिर्फ़ एक ब्रा में लेटी मेरी तरफ बड़ी प्यार भरी नजरों से देख रही थी। अम्मी को इस तरह देखता पाकर मैं अम्मी की ब्रा पे झपट पड़ा और एक ही झटके से अम्मी की चूचियों को ब्रा से निकाल दिया और अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा। मेरे इस तरह झपटने से अम्मी के मुँह से से की हल्की आवाज निकली और इसके साथ ही अम्मी ने मुझे अपने चूचियों के साथ दबा लिया और बोली- “आअह्ह… बेटा पी लो अपनी माँ का दूध उंनमह…”

अब मैं अम्मी की चूचियों को चूसने के साथ दबा भी रहा था जिससे अम्मी काफी गरम हो रही थी और सिसकियां भर रही थी और मेरे सर को अपनी चूचियां के साथ दबा रही थीं। कुछ देर के बाद मैंने अपना हाथ अम्मी के चूची से हटा लिया और अम्मी की फुद्दी की तरफ बढ़ने लगा और फिर अम्मी की गरम और तपती हुई फुद्दी के ऊपर रख दिया जो कि हल्की से गीली भी हो रही थी। मेरे हाथ लगाते ही अम्मी के मुँह से ऊओ आलोक, उन्म्मह… की आवाज निकल गई।

अम्मी के मुँह से निकालने वाली आवाजें आहिस्ता-आहिस्ता तेज हो रही थीं। मैं अम्मी की चूचियों को छोड़कर सीधा फुद्दी की तरफ आया और अपना मुँह अम्मी की फुद्दी के साथ लगा दिया और अपनी जुबान को बाहर निकालकर अम्मी की फुद्दी में घुमाने लगा जिससे अम्मी मचल उठी। मेरे इस तरह अम्मी की फुद्दी में जुबान घुमाने से अम्मी की हालत और भी बुरी हो गई और वो तड़प के थोड़ा उठी और अपने हाथों से मेरा सर अपनी फुद्दी पे दबा लिया और बोली- “आअह्ह… आलोक, चाट अपनी माँ की फुद्दी को मादरचोद… उन्म्मह… हाँ… बेटा खा जाओ मेरी फुद्दी को ऊओ… आलोक ये क्या कर दिया है तूने हरामी?”

अम्मी के मुँह से इन सिसकियों और गालियों की आवाज़ों ने तो जैसे मुझे दीवाना कर दिया था कि मैं अब अपनी जुबान से अम्मी की फुद्दी को चाटने के साथ अम्मी की फुद्दी में घुसा भी रहा था और साथ ही हल्का सा काट भी लेता जिससे अम्मी और भी ज्यादा तड़प जाती।

अब अम्मी के मुँह से- आअह्ह… आलोक बेटा ऊओ… मैं गई… कमीने खा जा अपनी माँ की फुद्दी को… ऊओाअ… आलोक मैं गई…” और इसके साथ ही अम्मी के जिश्म को जोर का झटका लगा और अम्मी ने मेरे सर को अपनी रानो में दबा लिया और अम्मी की फुद्दी से पानी का सैलाब सा निकला और मेरे मुँह में गया जिसे मैं चाट गया और फिर उठा और अपने लण्ड को अम्मी की फुद्दी के साथ लगा दिया और रगड़ने लगा। अब मैं अपने लण्ड को अम्मी की फुद्दी के ऊपर रगड़ता और हल्का सा दबा के अम्मी की फुद्दी में घुसा देता और फिर बाहर निकाल लेता और रगड़ने लगता।

अम्मी ने जब देखा कि मैं अंदर नहीं घुसा रहा और बस ड्रामा कर रहा हूँ तो अम्मी ने कहा- “बेटा, क्यों तंग कर रहा है अपनी माँ को? अब घुसा भी दे ना…”

अम्मी की बात सुनते ही मैंने अपनी पूरी ताकत से झटका दिया जिससे मेरा लण्ड अम्मी की फुद्दी को खोलता हुआ जड़ तक घुस गया और तभी मैंने अम्मी के घुटनों को अम्मी की कंधों की तरफ मोड़ के पूरी तरह दबा दिया जिससे मेरा लण्ड अम्मी की फुद्दी में जड़ तक घुस गया।

लण्ड के इस तरह घुसने से अम्मी के मुँह से- “आऐ आलोक, आराम से करो ये क्या कर रहे हो? मारना है क्या मुझे? बेटा दर्द होता है इस तरह, एक तो तेरा बहुत बड़ा है प्लीज़्ज़… आराम से करो…”

मैंने कोई जवाब नहीं दिया और अम्मी की टाँगों को उसी पोजीशन में रखा और एक बार फिर से अपने लण्ड को सुपाड़े तक बाहर निकाला और फिर से अपने जिश्म का सारा वजन अपने लण्ड पे डाल दिया जिससे मेरा लण्ड अम्मी की बच्चेदानी तक टकराया तो अम्मी दर्द की वजह से तड़प उठी।

मेरे इस झटके से अम्मी के मुँह से- “ऊओई आलोक, क्या कर रहा है? फाड़नी है क्या? कमीने, मैं माँ हूँ तेरी… रंडी नहीं जो इस तरह चोद रहा है आअह्ह… प्लीज़्ज़… बेटा आराम से करो…”

मुझे भी अम्मी को इस तरह चोदने में मजा आ रहा था तो मैं भी इस तरह अम्मी की फुद्दी में अपने लण्ड को झटके देता रहा और बोला- “हाँ पता है तू मेरी माँ है, रंडी नहीं है… पर साली तू किसी रंडी से क्या कम है… हाँ…” और बार-बार झटके देता रहा।

अब अम्मी को भी इतना दर्द नहीं हो रहा था बलकि इसकी जगह वो मुझे अपने साथ लिपटा के चुदाई का मजा ले रही थी और साथ ही- “हाँ आलोक, अभी अच्छा लग रहा है बेटा… फाड़ दे अपनी माँ की फुद्दी को… उन्म्मह… ऊओ… आलोक मेरा बच्चा, तू कितना अच्छा है बेटा अपनी माँ का कितना ख्याल रखता है…”

अब मैं अपने अंत पे आ चुका था और अम्मी के ऊपर से थोड़ा ऊपर उठा और तेज झटके लगाने लगा जिससे अम्मी भी जरा ज्यादा सिसकने लगी और- “हाँ आलोक, बस हो गया मेरा… आअह्ह… मैं गई बेटा…” की आवाज के साथ ही अम्मी की फुद्दी में पानी की वजह और मेरे धक्कों की वजह से पिकचाक्क-पीकचाक्क की आवाज आने लगी और इसके साथ ही मैं भी अम्मी की फुद्दी में ही फारिग़ हो गया और वहीं गिर के लंबी-लंबी सांसें लेने लगा।

मैं उस रात अम्मी को एक बार ही चोद के इतना थक गया था िहोश ही नहीं रहा कि मैं कब सो गया। सुबह के 9:00 बजे मेरी आँख खुली तो देखा कि मैं अभी तक नंगा ही पड़ा हुआ सो रहा था और अम्मी अब मेरे रूम में नहीं थी। मैं उठा और अपने रूम में ही बने हुये बाथरूम में घुस गया और नहाकर ड्रेस पहनकर बाहर आया तो बापू और बुआ बैठे बातें कर रहे थे।

मुझे देखते ही बुआ ने कहा- लो भाई जान, आपका बेटा भी उठ गया है।

बापू भी मुझे आता हुआ देख चुके थे और जैसे ही मैं उन लोगों के पास जाकर बैठा बापू ने मुझसे कहा- हाँ भाई आलोक, कैसी गुजर रही है?

मैं बापू की बात से थोड़ा शर्मा गया और बोला- अच्छी गुजर रही है।

बुआ हँसते हुये- अच्छा, तो फिर क्या सोचा है तुमने ऋतु के बारे में?

मैं- बुआ बात ये है कि अगर ऋतु की अपनी मर्ज़ी हो तो अच्छी बात है लेकिन उससे जबरदस्ती नहीं करे कोई।

बापू- हाँ क्यों नहीं, हम भी तो ये ही चाहते हैं कि वो अपनी मर्ज़ी से करे।

बुआ- हाँ आलोक, इसीलिए तो हमने सोचा है कि ऋतु के सामने ज्यादा से ज्यादा फ्री हुआ जाए ताकि वो भी घर के नये माहौल को अच्छी तरह समझ के फैसला करे।

मैं- ठीक है बुआ, जो आप लोगों की मर्ज़ी… लेकिन अभी नाश्ता तो करवा दें बड़ी भूख लगी है।

बुआ- थोड़ा सबर करो, अंजली नाश्ता बना रही है फिर करते हैं।

मैं- क्यों बुआ? आप लोगों ने भी नहीं किया नाश्ता अभी तक?

बुआ- हेहेहेहे क्यों तुम ही रात को देर से सोए थे, क्या हम नहीं सो सकते देर से?

मैं बुआ की बात समझ गया और हँसते हुये बोला- हाँ हाँ क्यों नहीं? आपका तो हक है देर से सोना। और वो अम्मी और ऋतु कहाँ हैं नजर नहीं आ रहे…”

बापू- वो… तुम्हारी माँ ऋतु को अपने साथ लेकर अभी निकली है। बोल रही थी कि बाजार जाना है लड़कियों के लिए अच्छे कपड़े नहीं हैं।

मैं- लेकिन बापू, अभी तो बाजार पूरी तरह से खुले भी नहीं होंगे?

बुआ- अरे यार, भाभी के जाते तक खुल जायेंगे और वो जो कुछ लाना है लेकर जल्दी वापिस आ जायेंगी।
तभी दीदी भी नाश्ता तैयार होने का बताने के लिए हमारे पास आ गई और बोली- चलो सब लोग पहले नाश्ता कर लो।

फिर हम सब वहाँ से उठे और नाश्ता करने के लिए टेबल पे बैठ गये और खामोशी से नाश्ता करने लगे। नाश्ता करने के बाद बापू को कहीं से काल आई तो वो घर से निकल गये। तो मैं भी उठकर घर से निकल आया और घूमने लगा।

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क्योंकि इस इलाके में मेरा कोई दोस्त नहीं था और ना ही कोई जानने वाला तो मैं ज्यादा देर बाहर नहीं रहा और घर आ गया। तब तक अम्मी और ऋतु भी आ चुकी थीं। जैसे ही मैं घर में दाखिल हुआ पायल ने मुझे देखकर कहा- “भाई, वो बापू का फोन आया था। बोल रहे थे कि दो बजे तक उनका कोई दोस्त आएगा उसे गेस्टरूम में बिठा देना और जो माँगे मना नहीं करना…”

मैं समझ गया कि कौन सा दोस्त होगा। मैंने हाँ में सर हिला दिया और अपने रूम में चला गया। दो बजे से पहले ही मैं गेस्टरूम में चला गया और उस आदमी का इंतेजार करने लगा। वो आदमी आया तो तब तक 2:15 हो चुके थे और उसने आते ही मेरे साथ हाथ मिलाया और बोला- “जी मुझे किसी ने यहाँ का पता देकर भेजा था और बोला था कि यहाँ मेरा काम हो जाएगा…”

मैंने कहा- जी अगर आपको किसी ने भेजा है तो उसने मुझे भी बता दिया है। क्या आप अपना नाम बतायेंगे मुझे?

उसने मुझे अपना नाम समीर बताया। उसकी उम्र कुछ ज्यादा तो नहीं थी लेकिन 27 साल के करीब तो थी ही। मैंने उसे बिठाया और पूछा- जी अब बतायें कि आप क्या पियोगे?

समीर ने कहा- “जो भी मिल जाए… जिससे जरा मूड बन जाए…”

मैंने उसकी बात को समझा और उसे बैठने का बोलकर घर आ गया और पायल को जो कि पहले से ही तैयार बैठी हुई थी बोला- “तुम जाकर उसके पास बैठो…” और ऋतु की तरफ देखकर कहा- “तुम कुछ देर के बाद अम्मी से एक बोतल और 3 गिलास लेकर आना…”

ऋतु जो कि पहले ही कुछ परेशान नजर आ रही थी मेरी बात सुनकर हकला गई और बोली- “भाई… वा… वो… मैं क…क्या करूंगी वहाँ?

मैंने कहा- “कुछ नहीं, बस जो बोला है लाकर दे जाना…” और बस इतना बोलकर मैं पायल के पीछे ही गेस्टरूम में आ गया जहाँ पायल समीर के साथ लिपट के बैठी हुई थी और समीर उसकी चूचियों को मसल रहा था।

समीर ने जब मुझे देखा तो अपना हाथ पायल की चूचियों से हटा लिया और खामोश होकर बैठ गया। मैं उसकी ये हालत देखकर हँस पड़ा और बोला- “यार लगे रहो, डरो नहीं। अभी तुम्हारे मूड को बनाने के लिए भी सामान आ जाएगा…”

समीर मेरी बात सुनकर फिर से मेरी बहन की चूचियों को दबाने लगा और साथ ही उसे किस भी करने लगा।
तभी ऋतु भी शराब की बोतल और ग्लास लेकर आ गई और पायल को इस हालत में देखकर, और वो भी मेरे सामने, घबरा गई और उसके हाथ काँपने लगे।

मैंने ऋतु को देख लिया और बोला- हाँ ले आओ, शाबाश… यहाँ टेबल पे रख दो और अगर बैठना है तो यहाँ बैठ जाओ मेरे पास आकर।

समीर ने जब ऋतु की कमसिन जवानी को देखा तो बोला- “यार आलोक भाई, अगर नाराज नहीं हो तो क्या मैं इस लड़की के साथ नहीं कर सकता?

मैं उसकी बात सुनकर हँस पड़ा और बोला- “नहीं भाई, ये रंडी नहीं है…” और ऋतु की तरफ देखा जिसका चेहरा पशीना-पशीना हो रहा था और सांस भी तेज चल रही थी।

ऋतु ने जल्दी से बर्तन और शराब को टेबल पे रखा और वहाँ से भाग गई।

तो पायल ने उठकर 3 गिलास शराब बनाई और एक मुझे पकड़ा दिया और एक समीर को पकड़ा के खुद भी शराब पीने लगी। शराब के दो पेग लगाते ही समीर ने पायल को पकड़ लिया और साथ ही बने हुये रूम में चला गया।

मैं बाहर सोफे पे बैठा रहा और रूम से आने वाली पायल और समीर की आवाज़ों को सुनता रहा और अपने लण्ड को मसलता रहा जो कि पायल की सेक्सी और मजे से भरपूर सिसकियों को सुनकर खड़ा हो गया था। समीर के फारिग़ होने के बाद पायल ने मुझे आवाज दी।

जैसे ही मैं रूम में गया पायल ने कहा- “भाई, वो बाहर से शराब तो ला देना जरा…”

मैं पायल की फुद्दी को देखता हुआ बाहर आ गया और शराब की बोतल और गिलास रूम में लाकर रख दिया।
तो पायल ने कहा- “भाई, यहाँ हमारे पास ही बैठ जाओ ना प्लीज़्ज़…”

मैं पायल की बात मान गया और वहाँ रखी एक चेयर पे बैठ गया और उन दोनों के लिए शराब बनाने लगा। शराब का एक और पेग लगाने के बाद समीर फिर से पायल के साथ लिपट गया और किस करने लगा और उसकी फुद्दी में उंगली घुसाने लगा।

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