Chuto ka Samundar - चूतो का समुंदर - Printable Version

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RE: चूतो का समुंदर - - 06-08-2017

थोड़ी देर बाज़ सुजाता और आकाश , प्रॉपर्टीस की फाइल्स पढ़ रहे थे.....

सुजाता(फाइल्स पटक कर)- ये क्या बकवास है...सारी प्रॉपर्टी अंकित के नाम...और उसे कुछ हुआ तो सारी की सारी अलका चेरिटी ट्रस्ट के नाम...क्या बकवास है....

आकाश- हाँ...अजीब है ना..

सुजाता- पर तुमने तो पेपर पर साइन लिए थे....उसका क्या हुआ....

अक्ष- लिए तो थे..मुझे भी समझ नही आ रहा....शायद अकाउंटटेंट ने गड़बड़ की हो...या फिर अंकित ने....

सुजाता- ज़रा उस अक्कौंटेंट को बुलाओ तो..और पूछो उससे...क्या है ये सब...

अक्कौंटेंट आया और उसने बताया कि ये सब अंकित सर के कहने पर किया था.....

अंकित का नाम सुन कर सुजाता का पारा चढ़ गया ..पर अक्कौंटेंट के सामने चुप रही....और उसके जाते ही भड़क उठी.......

सुजाता- तुमसे एक काम ठीक से नही होता...किसी काम के नही तुम...

आकाश- मेरी क्या ग़लती...मैने तो साइन ले लिए थे....पता नही ये अंकित ने कैसे....बड़ा दिमाग़ चला गया लड़का....

सुजाता- ह्म्म...पर अब मेरी बारी...मैं इतनी आसानी से ये सब हाथ से नही जाने दूगी.....

आकाश- तो अब तुम क्या करोगी..हाँ...

सुजाता- कुछ खास नही...अंकित की कमज़ोरी का फ़ायदा उठाकर सब अपने मन का करवाउन्गी....

आकाश- पर कैसे...वो बहुत तेज दिमाग़ वाला है...आसानी से नही मानेगा...

सुजाता(मन मे)- बड़े से बड़े दिमाग़...औरत के सामने मंद पड़ जाते है...फिर ये तो बच्चा है...हहहे....

और सुजाता कुटिल मुस्कान बिखेरने लगी...जो आकाश की समझ मे नही आया.....

-----------------------------------------------


रिचा के घर.........


रिचा की दमदार चुदाई कर के हम फिर से बाहर वाले रूम मे बैठ गये...

रिचा की गान्ड इस कदर घायल थी कि वो ठीक से बैठ भी नही पा रही थी....

मैं- तो अब...अब खेलते है रियल गेम....ओके

रिचा- हाँ...खेलो...पर है क्या....???

मैं- ह्म्म..गेसिंग दा ट्रूथ...

रिचा- ये क्या है...मैने तो नही सुना...

मैं- हो सकता है...वैसे भी हर चीज़ कभी ना कभी 1स्ट टाइम होती है...तो आज ये 1स्ट टाइम खेल लो...फिर समझ जाओगी...ओके..

रिचा- ओके..तो सुरू करे...और ये बताओ कि करना क्या है...

मैं- बढ़ा सिंपल है...मैं एक कार्ड दिखाउन्गा...तुम्हे उसका ट्रूथ बताना है..कि वो क्या है...ओके...

रिचा- ओके...इसमे कोई बड़ी बात नही...सुरू करो...

मैं(कॉफी ख़त्म कर के)- ह्म्म...तो फिर सुरू करते है...ट्रूथ ऑर लाइ...

फिर मैने कार्ड को फेंटा और उसमे से बेगम के कार्ड्स को अलग किया और टेबल पर रख दिए....

मैं- तो बोलो...ये क्या है ...??

रिचा- ये...ये तो बेगम है...

मैं- ह्म्म..4 बेगम....

रिचा- हाँ..4 बेगम...पर इसमे क्या...

मैं- रूको तो ...सब समझ जाओगी....

रिचा- ओके...

फिर मैने 2 गुलाल...और 1 बादशाह भी टेबल पर रख दिए....

मैं- अब बोलो.....

रिचा- इसमे क्या बोलना...2 गुलाम और 1 बादशाह....इसमे गेम क्या है...ये तो बकवास है...अगर क्लोज़ करके पूछते तो गेम होता...तुम तो ओपन करके पूछ रहे हो...इसमे क्या मज़ा....

मैं- गुड....बस थोड़ा और...फिर गेम का मतलब भी समझ जाओगी और मज़ा भी आएगा...

फिर मैने 1 दुक्की रख दी...और एक जोकर...जोकर के नीचे एक पत्ता छिपा कर रख दिया....

मैं- ह्म्म...तो अब गेम सुरू होता है...ये तुम्हे अब इंटरेस्टिंग लगेगा...

रिचा(झुक कर कार्ड्स देखते हुए)- ह्म्म..तो अब करना क्या है...ये एक दुक्की रख दी और एक जोकर....मैं कुछ समझ नही पा रही...

मैं- रूको तो...सब समझ जाओगी...ये गेम तुम्हारी जिंदगी का सबसे इम्पोर्टेंट गेम होने वाला है.....

रिचा मुझे देखने लगी...और मैने एक शरारती मुस्कान बिखेर दी...जिसे देख कर रिचा बोली कुछ नही...पर मेरे बोलने का इंतज़ार करने लगी...

मैं- 4 बेगम....कामिनी, दामिनी, रजनी और रिचा....

अब रिचा का माथा ठनका....उसके चेहरे का रंग बदलने लगा...पर वो अपने आपको काबू करते हुए बोली...

रिचा- हम सहेलियाँ...बेगम...गुड...

मैं- हाँ जी....कामिनी ईंट की , रजनी पान की...दामिनी हुकुम की और तुम चिड़ी की...ठीक है...

रिचा- ओके...

मैं- अब ये 2 गुलाम...हुकुम का और चिड़ी का....

रिचा- इसका क्या...

मैं- हुकुम का छोड़ो...ये चिड़ी की बेगम का गुलाम है...क्या था...हाँ...रफ़्तार सिंग....सही है ना...

रिचा(सकपका कर)- र्ररर...रफ़्तार सिंग...इसका क्या मतलब...??

मैं- सब समझाउन्गा...थोड़ा रूको तो...अब किसकी बारी...तुम बोलो..अब कौन आएगा...

रिचा(हैरानी और डर से)- म्म..मुझे क्या पता...तुम ही बोलो....

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म्म...और ये आया बादशाह...जो इन बेगमो को कंट्रोल करता है....क्या था वो...हाँ...सरफ़राज़.....ठीक कहा था....

सटफ़राज़ का नाम सुनते ही रिचा की फट गई...उसे समझ आ गया कि मैं क्या बोल रहा हूँ...अब उसके चेहरे का रंग उड़ चुका था....पर अब भी वो बुत बनी मेरे बोलने का इंतजार करने लगी....

मैं- तो अब...बोलो भी...

रिचा- मैं क्या बोलू...मुझे कुछ समझ नही आ रहा...

मैं- लगता है कि नज़र कमजोर है तुम्हारी....देखो...ये बादशाह भी चिड़ी का है .....और तुम चिड़ी की बेगम...मतलब तुम सब जानती हो उस बादशाह के बारे मे...मतलब सरफ़राज़ के बारे मे....अब बोलो...


मेरी आवाज़ मे कठोरता थी..जिससे रिचा और भी सहम गई...फिर भी एक अच्छे खिलाड़ी की तरह बोली....

रिचा- तुम ये क्या बकवास कर रहे हो..मुझे कुछ समझ नही आ रहा...कैसा बादशाह...कैसा गुलाम...और कैसी बेगम...

मैं- रुक जाओ...ये देखो...ये है जोकर...जो इन बादशाह , बेगम और गुलाम की नज़रों मे बेवकूफ़ है...है ना...ये जोकर मैं हूँ...ओके...

रिचा- ये तुम क्या बके जा रहे हो...तुम और जोकर...क्या है ये....

मैं- वो भी समझ आ जायगा...पहले इस दुक्की को तो समझ लो...ये है चिड़ी की दुक्की...जो चिड़ी की बेगम के करीब है...है ना...

रिचा- मतलब...??

मैं- मतलब ये कि दुक्की बड़े कमाल की चीज़ है...सबका गेम करवा देगी...ये दुक्की है...ह्म्म्म..क्या थी...हाँ....रिया...

मैने दुक्की को आगे खिसका कर बोला...और रिया का नाम आते ही रिचा की पूरी तरह से फट गई....

अब वो कुछ कहने के लायक नही थी..बस मुझे देखते हुए उसका चेहरा उतरता जा रहा था.....


RE: चूतो का समुंदर - - 06-08-2017

मैं- तो अब तुम क्या चाहती हो...बेगम मुँह खोलेगी या दुक्की को जोकर ख़त्म कर दे...हाँ...

रिचा(डरी हुई)- ये..ये सब क्या है अंकित...

मैं- सीधे शब्दों मे बोलता हू...रिया मेरे पास है...और वो ठीक है..पर...अगर मुझे इस बादशाह का पता नही चला तो तुम्हारी दुक्की गई समझो...अब बोलो....

रिचा- अंकित...मैं...मुझे कुछ नही पता...सच मे....

मैं- अच्छा...देखो रिचा...तुम जिसे जोकर समझती हो...उसका असली चेहरा देख लो...कि वो कौन है...उठाओ उस जोकर को और देखो...

रिचा ने जोकर को हटाया और नीचे वाला पत्ता देख कर बोली...

रिचा- हुकुम का इक्का...

मैं- ह्म्म..अब बोलो...सरफ़राज़ कौन है और कहाँ है...

रिचा- पर मैं किसी सरफ़राज़ को नही जानती...सच मे...

मैं- तुमने दामिनी के सामने सब कबूला है...फ़ोन पर बात भी की है...याद करो...

रिचा- मैने कब...ओह माइ गॉड...मतलब दामिनी...

मैं- वो ठीक है...बिल्कुल ठीक...अब तुम बताओ...बोलोगि या फिर इस लड़की का मैं बुरा हाल करूँ...

मैने अपना मोबाइल निकाला और रिया का वीडियो रिचा को दिखा दिया...जिससे रिचा को कन्फर्म हो गया कि रिया मेरे कब्ज़े मे है...

मैं- बताओ जल्दी...क्या करना है...बोलना है या रिया को ...

रिचा(बीच मे चीख कर)- न्ंहिी...मेरी बेटी को कुछ मत करना...मैं बताती हूँ...बताती हूँ...

मैं- तो बोलो...कौन है सरफ़राज़....

रिचा- वसीम ख़ान...

मैं- कौन वसीम ख़ान...सही बोलो...

रिचा- तुम्हारे दोस्त अकरम का बाप....वसीम ख़ान..उर्फ सरफ़राज़ ख़ान....
वसीम का नाम सुनते ही मुझे झटका लगा और आँखो मे गुस्सा उतर आया....

मैं- क्या बक रही हो तुम...होश मे तो हो....??

रिचा- हाँ...पूरे होश मे....वसीम ही वो इंसान है जो हम सबको अपने इशारे पर नचा रहा है...वही है असली दुश्मन...हम सबका बॉस....

मैं रिचा की बात सुन कर चुप रह गया....मेरे दिमाग़ मे एक हलचल सी मच गई थी...कुछ समझ ही नही आ रहा था कि बोलू क्या....

रिचा(मन मे)- मैं जानती हूँ कि अब तुम मुझसे वो वजह भी पुछोगे कि क्यो वसीम ऐसा कर रहा है...पर अफ़सोस...मैं ये नही बताने वाली....

मैं काफ़ी देर तक चुप चाप रिचा को देखता रहा...शायद उसकी आँखो मे कुछ पढ़ने की कोसिस कर रहा था...पर मेरे हाथ कुछ नही लगा....

रिचा- क्या हुआ...सच सुन कर चुप क्यो हो गये....

मैं- सच...क्या तुम्हे अब भी लगता है कि मैं जोकर हूँ...नही...मैं हूँ इक्का...सबका बाप...अब जल्दी से सच बोल वरना तेरी और तेरी बेटी की तो...

रिचा(घबरा कर)- नही...मैं...मैं सच बोल रही हूँ...एक-एक शब्द सच है...अपनी बेटी की कसम....

मैं- ओके..मान लिया...पर वसीम से मेरी क्या दुश्मनी...वो ये सब क्यो करेगा....

रिचा- दुश्मनी तुम्हारी नही...तुम्हारे खानदान से है उसकी...और वो तुम सबको ख़त्म करना चाहता है....

मैं- बको मत...वसीम की मेरे परिवार से क्या दुश्मनी....अरे मैं तक तो जानता नही कि मेरा परिवार कहाँ है...तो वसीम का उनसे क्या लेना -देना....

रिचा- लेना, देना है...और बहुत करीबी लेना-देना....

मैं-अच्छा....तुझे पता है...तो बता...क्या दुश्मनी है उसकी मुझसे ....

रिचा(मन मे)- अब क्या बोलू...क्या इसे सच बता दूं...बता ही देती हूँ....वरना ये मेरी बेटी को छोड़ेगा नही....सॉरी वसीम...मुझे सच बोलना ही होगा....

मैं- अब ताला क्यो लग गया तेरे मुँह को...बता...क्या दुश्मनी है वसीम की हमसे....मैं नही मानता कि वसीम मेरी फॅमिली को जानता भी है...

रिचा- जानता है...यही सच है...वो तुम्हारे परिवार के हर सक्श को जानता है...बहुत पहले से....समझे....

मैं- अच्छा...तो फिर ये बता कि अपनी बात को साबित करने का कोई प्रूफ है तेरे पास....ह्म्म...

रिचा- प्रूफ...प्रूफ क्या दूं...प्रूफ तो..

मैं(बीच मे)- फस गई...अपने ही झूठ के जाल मे..ह्म्म्मन..देख रिचा...झूठ तो कभी ना कभी पकड़ा ही जाता है...इसलिए बेहतर होगा कि अब सच बोलो...वरना तुम सोच नही सकती कि तुम्हारी बेटी का मैं क्या हाल करूगा....

रिचा- प्ल्ज़...ट्रस्ट मी....मैं सच बोल रही हूँ...सच मे....मेरी बेटी की कसम....उससे बढ़कर कोई नही मेरे लिए....

मैं- ह्म्म..ये तो मानता हूँ कि तेरी बेटी ही तेरे लिए सब कुछ है...पर सवाल ये है कि सबूत कहाँ है....क्या तुम अपनी बात को साबित कर सकती हो...हाँ...

रिचा(कुछ सोचकर)- हाँ...याद आया...मैं तुम्हे कुछ दिखाती हूँ .फिर तुम खुद ही समझ जाओगे कि वसीम कौन है और तुम्हारी फॅमिली से कैसे लिंक्ड है....मैं अभी लाती हूँ....


RE: चूतो का समुंदर - - 06-08-2017

मैं- ओके...पर ...रूको...तुम अकेले कही नही जाओगी...मेरा आदमी साथ जायगा....

फिर मैने अपने आदमी को रिचा के साथ जाने को कहा...वो दोनो रूम के अंदर गये और कुछ देर बाद रिचा कुछ फोटो ले कर वापिस आ गई...

मैं- ये क्या है...

रिचा- ये वसीम की फॅमिली पिक है...देख लो...

मैं लगभग झपट ते हुए रिचा के हाथ से पिक ली...उस पिक को देखने पर पता चला कि रिचा सही है....

उस पिक मे वसीम था...पर उसके साथ 1 लड़का और एक मर्द-औरत थे...जिन्हे मैं नही जानता था...और कोई भी उसकी फॅमिली का मेंबर उस पिक मे नही था...जिसे मैं जानता था....

मैं- ये ...ये है कौन...मतलब...वसीम के साथ...और ये तो बहुत पुरानी पिक है...देखो...इसमे वसीम यंग दिख रहा है...

रिचा- बताती हूँ....ये वसीम की फॅमिली है...उसके माँ-बाप और उसका भाई...

मैं- अच्छा...पर इससे साबित क्या होता है...???

रिचा- साबित भी कर देती हूँ....ये दूसरी पिक देखो....

मैने दूसरी पिक हाथ मे ली तो चौंक ही गया....उस पिक मे मेरे दादाजी थे...बिल्कुल मेरे डॅड की तरह दिख रहे थे....

इस पिक मे उनके साथ 2 और आदमी थे ...एक तो वसीम का बाप...जो रिचा ने पहली पिक मे दिखाया ...और दूसरे को मैं जानता नही था....

मैं- ये पिक...तुम्हे कहाँ से मिली...ये तो मेरे.....मेरे दादाजी है...


रिचा- जानती हूँ...ये पिक मैने वसीम से चुराई थी...उसने ही मुझे बताया था कि उसका बाप तुम्हारे दादाजी का दोस्त था....अली ख़ान...हाँ...यही नाम था वसीम के पिता का....

अली का नाम आते ही मुझे डाइयरी की बातें याद आ गई...उसमे अली का काफ़ी ज़िक्र था...पर लास्ट मे वो गायब था...और अली ही था जिन्होने मेरे पिता का मुसीबत मे साथ दिया था.....

रिचा- अब तो मानते हो कि मैं सच बोल रही हूँ...

मैं- नही...ये पिक दिखा कर क्या साबित करना चाहती हो....इसका मतलब क्या है...

रिचा- यही कि वसीम तुम्हारी फॅमिली को काफ़ी पहले से जानता है...और वही से शुरुआत होती है उसकी दुश्मनी की....

मैं- दुश्मनी...पर तुम तो कह रही हो कि ये अली ख़ान मेरे दादाजी के दोस्त थे...तो दुश्मनी कैसी....

रिचा- बताती हूँ....ये बात मैने भी वसीम से पूछी थी और उसने मुझे सब बताया था....

मैं(ज़ोर से)- तो बोल ना...किस बात का इंतज़ार है तुझे....बोल..

और फिर रिचा ने बताना सुरू किया .......

फ्लेसबक...........

आज़ाद और अली ख़ान के बीच काफ़ी अच्छी दोस्ती थी....

दोनो ही एक-दूसरे के लिए जान दे भी सकते थे और किसी की जान ले भी सकते थे....

वो दोनो आपस मे सब कुछ शेयर करते.....दुख, सुख और सारी बातें...

दोनो के परिवार भी एक-दूसरे के काफ़ी करीब थे....

आज़ाद एक बड़े रसूख् वाले इंसान थे....दौलत , शोहरत, पैसा और पॉवर...सब था उनके पास....

इसके ठीक उल्टा...अली एक मिड्ल क्लास मॅन थे...पर इतने काबिल थे कि अपनी फॅमिली की सारी ज़रूरते पूरी कर सके....

अली की फॅमिली मे 4 लोग थे ...उसकी बीवी अमीन और उसके 2 बेटे ...सरफ़राज़ और आमिर....

अली ने सपना देखा था कि उनके बेटे बड़े हो कर बहुत बड़े आदमी बने...इसलिए वो अपने बेटों को सहर मे पढ़ाना चाहते थे....

सरफ़राज़ तो पढ़ने चला गया...पर अली की वाइफ ने आमिर को नही जाने दिया....उसे अपने पास ही रखा....

सरफ़राज़ अपने पिता के सपनो को पूरा करने के लिए जी-जान से पढ़ाई करने लगा...और यहाँ गाँव मे अली अपनी फॅमिली और अपने दोस्त के साथ खुश था....

अली और आज़ाद हर काम मे साथी थे...कैसा भी काम हो...अच्छा या बुरा...अली ने आज़ाद का साथ कभी नही छोड़ा ....

पर सिर्फ़ एक काम ऐसा था ...जिसमे अली बहुत कम शामिल होता...वो था अयाशी...

आज़ाद को नई-नई औरतों और लड़कियों को चोदने का बड़ा शौक था....

उसमे कई औरतो और लड़कियों को पटा रखा था.....वो खुद भी उन्हे चोदता और अपने दोस्त से भी चुदवाता....

पर अली को ये ज़्यादा पसंद नही था...वो कभी -कभी ही आज़ाद का साथ देता...नही तो दूर ही बैठा रहता....

अब आते है असली बात पर.....

सब कुछ सही चल रहा था...पर अचानक कुछ ऐसा हुआ कि आज़ाद की बीवी की मौत हो गई...और उसके बड़े बेटे आकाश को गाँव छोड़ कर जाना पड़ा....

आकाश के जाने के बाद आज़ाद टूट सा गया था...पर अली ने उसे संभाला...उसे वापिस वैसा ही बनाया...जैसा वो था...

आज़ाद भी आकाश को खुश देख कर अपनी लाइफ मे रम गया...और फिर से वही सब करने लगा ...जो वो पहले करता था....

आज़ाद ने फिर से नई औरतों और लड़कियो को चोदना सुरू कर दिया....उसकी बेटियों की शादी भी कर दी और सब खुशहाली से जिंदगी बिताने लगे....

पर एक दिन कुछ ऐसा हुआ ..जो शायद ना होता तो अच्छा था....


आज़ाद अपने ऑफीस मे एक औरत को चोद रहा था....और अली ऑफीस के बाहर बैठा निगरानी रख रहा था.....इसी वजह से आज़ाद ने गेट लॉक भी नही किया था....

पर कहते है ना कि होनी बड़ी बलवान....अली को उसके बेटे का कॉल आ गया...और वो बेटे से बात करते हुए दूसरी तरफ निकल गया....तभी वहाँ अली की बीवी पहुँच गई...

असल मे वो अली को देखने आई थी...पर देखने कुछ और ही मिल गया....

गेट खोलते ही आमीन के सामने जोरदार चुदाई का सीन आ गया....

आमीन के सामने आज़ाद एक औरत को टेबल पर झुका कर उसकी गान्ड मार रहा था...पर दोनो का चेहरा दूसरी तरफ था...जिससे वो आमीन को नही देख पाए थे....

आमीन ये नज़ारा देख कर ठिठक गई...और आज़ाद का तगड़ा लंड उस औरत की गाड़ मे आते-जाते देखने लगी....

वैसे तो आमीन एक सरीफ़ औरत थी...पर थी तो औरत ही....और ऐसी जोरदार चुदाई देख कर वो भी गरम होने लगी....

आमीन ने लगभग 15-20 मिनट तक आज़ाद को गान्ड मारते देखा...और इसी बीच उसकी चूत ने पानी छोड़ने लगी.....

आमीन कुछ और देखती उससे पहले ही उसे किसी के आने की आहट हुई और उसने धीरे से गेट को वापिस बंद किया और वहाँ से निकल गई....


RE: चूतो का समुंदर - - 06-08-2017

अली और आज़ाद इस घटना से पूरी तरह अंजान थे...पर आमीन की आँखो मे ये घटना घर कर चुकी थी.....

असल मे अली के दूसरे बेटे के जन्म के बाद से ही अली ने चुदाई बहुत कम कर दी थी...जिससे आमीन चुदाई के लिए प्यासी रहने लगी....

उपर से अली का लंड भी आज़ाद से छोटा था....तो ये बात भी आमीन की आँखो मे समा गई...

पर किसी तरह आमीन ने अपने दिल को संभाला और उस घटना को भूलने की कोसिस करने लगी....

पर कहते है ना...कि अगर कुछ भी होना होता है ...अच्छा या बुरा...तो हालात धीरे-धीरे उस मक़सद तक पहुँचा ही देते है....यहाँ भी वही हुआ...

एक दिन आज़ाद ने अपने फार्महाउस पर पार्टी रखी....दोस्त और उनकी फॅमिली के साथ.....

सब लोगो ने खूब एंजाय किया...खा-पी कर साम को सब खेतों मे टहलने लगे....सब अलग-अलग अपनी मस्ती मे घूम रहे थे.....

पर तभी अचानक बारिश हो गई....और जब बारिश हुई तो उस समय....आमीन चने के खेत मे थी....

आमीन वहाँ से भाग कर पेड़ के नीचे आती ...उससे पहले ही वो पूरी भीग चुकी थी....उसकी साड़ी बदन से चिपकी हुई थी और ब्लाउस के अंदर से ब्रा सॉफ नज़र आने लगी....साड़ी मे उसकी गान्ड भी सॉफ दिख रही थी....

आमीन ने अपनी हालत देखी और फिर आस-पास देखा...वहाँ कोई नही था....आमीन रिलॅक्स हो गई....

बारिश ज़्यादा तेज थी...इसलिए वो जा भी नही सकती थी...और उपेर से सर्द हवा उसके जिस्म को ठिठूरा रही थी..

आमीन(मन मे)- ऐसे ही खड़ी रही तो सर्दी बैठ जाएगी....और सीने मे सर्दी बैठ गई...तब तो मुसीबत हो जाएगी....

अब क्या करूँ...ये बारिश भी तेज है...जा भी नही सकती....

एक काम करती हूँ....कपड़े निचोड़ के पहन लेती हूँ...पर यहाँ...कोई देख ना ले...

आमीन काफ़ी देर सोचती रही कि बारिश रुक जाए...पर बारिश तो और तेज हो गई थी....और उसके जिस्म मे सर्दी भी बढ़ गई थी....

आमीन(मन मे)- अब मैं सर्दी नही सह सकती....कपड़े निचोड़ ही लेती हूँ...वैसे भी यहाँ कोई नही...पेड़ के पीछे से कर लेती हूँ...हां...

अमीन ने डिसाइड किया और पेड़ के पीछे आ गई....

पर वो इस बात से अंजान थी कि उसी तरफ एक दूसरे पेड़ के पीछे आज़ाद भी बारिश से बच रहा था....जो आमीन को नही दिखा...पर आज़ाद को आमीन दिख रही थी....


आमीन मे पेड़ के पीछे आते ही अपनी साड़ी निकाल दी...वो ब्लाउस-पेटिकोट मे आ गई....

ये नज़ारा देख कर आज़ाद सकपका गया....हालाकी उसने कभी आमीन पर गंदी नज़र नही रखी थी...पर था तो वो अयाश...इसलिए आमीन को देख कर उसकी नज़रे ठहर गई....

आज़ाद(मन मे)- ये क्या...ये मेरे दोस्त की बीवी है...नही...ये ग़लत है...मुझे इसे नही देखना चाहिए...

आज़ाद ने अपने आपको समझाया और नज़रें हटा ली....पर उसके दिल मे चिंगारी सुलग चुकी थी...जो उसे वापिस देखने को मजबूर कर गई...

जब आज़ाद ने वापिस देखा तो आमीन अपनी साड़ी निचोड़ चुकी थी और साड़ी को अलग टाँगकर अपना ब्लाउस खोल रही थी...

आज़ाद के देखते ही देखते आमीन का ब्लाउस निकल गया और उसने ब्लाउस निचोड़ कर अलग टाँग दिया....

अब आमीन पेटिकोट-ब्रा मे खड़ी हुई थी....उसके बड़े बूब्स ब्रा से झाँक रहे थे...जो आज़ाद की आग भड़का रहे थे...

आज़ाद ना चाहते हुए भी वो नज़ारा देखता रहा और आमीन ने अपनी ब्रा भी निकाल दी....

आमीन के बड़े और गोरे बूब्स देख कर आज़ाद के तन मे आग लग गई...अब उसे इस सीन मे मज़ा आ रहा था....

फिर आमीन ने ब्रा निचोड़ के रखी और जल्दी से पेटिकोट निकाल दिया....

आमीन की गोरी, चिकनी जांघे देख कर आज़ाद सब भूलता गया ....अब उसके दिल मे हवस जाग चुकी थी...वो एक तक लगाए आमीन को घूर रहा था....

तभी आमीन ने अपने तन का आख़िरी कपड़ा...यानी उसकी पैंटी भी निकाल दी...और आज़ाद को अपनी चूत के दर्शन करा दिए....

चूत देखते ही आज़ाद होश खो बैठा...उसका मन आमीन की चूत पाने को होने लगा....वो ललचाई नज़रों से आमीन को घूर रहा था....

थोड़ी देर बाद आमीन ने अपने बदन को पोंछ कर सारे कपड़े वापिस पहन लिए...

पर आज़ाद तो सब देख चुका था...उसके दिल मे आमीन के लिए हवस जाग चुकी थी...

आमीन कपड़े पहन कर वापिस अपनी जगह आ गई...पर आज़ाद वैसा ही बैठा रहा...

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RE: चूतो का समुंदर - - 06-08-2017

""इट्स माइ लाइफ...इट्स माइ लाइफ.....इट्स माइ लाइफ........""


अचानक मेरा फ़ोन बज उठा और रिंगटोन सुन कर मेरा ध्यान टूटा...ये रक्षा का कॉल था....

मैं(कॉल पर)- हेलो रक्षा...मैं बिज़ी हूँ..बाद मे बात करेंगे...

मैने कॉल कट कर के मोबाइल टेबल पर रख दिया और अपने हाथो से अपना सिर पकड़ लिया....

रिचा- क्या हुआ....

मैं- आहह ..सिर फटने लगा...

रिचा- सच सुनते ही सिर फटने लगा....अभी तो कुछ सुनाया ही नही...अभी तो कहानी सुरू हुई है...

मैं- नही...मैं सच सुनना ही पसंद करता हूँ...चाहे वो कितना भी कड़वा हो....

रिचा- तो आगे सुनो...

मैं(हाथ दिखा कर)- पहले एक स्ट्रॉंग कॉफी लाओ...फिर बोलना...

थोड़ी देर बाद मैने कॉफी ख़त्म की और रिचा को बोलने को कहा...

रिचा- तो आगे सुनो.....


फ्लेसबॅक......कंटिन्यू....

आमीन अपने कपड़े सूखा कर वापिस अपनी जगह आ गई थी...और आज़ाद , आमीन के जिस्म का दीदार करने के बाद हवस की आग मे जलता हुआ वही बैठा था.....

कुछ देर बाद बारिश थमी और सब फार्महाउस मे आ गये..

आज़ाद यहाँ भी आमीन को घूर रहा था...और ये बात आमीन ने भी नोटीस की...पर कहा कुछ नही...

कुछ दिन बाद ये घटना आई-गई हो गई...

आज़ाद भी होश मे आते ही अपने आपको धिक्कार रहा था..कि उसने अपने दोस्त की बीवी के बारे मे ऐसा सोचा क्यो....

आज़ाद ने ये बात अपने दिमाग़ मे दफ़न कर दी...और मन ही मन अली से माफी भी माग ली....

फिर से सब नॉर्मल चलने लगा ....पर कहते है ना...कि होनी को कौन टाल सकता है....

आमीन और आज़ाद के साथ भी वही हुआ....एक और घटना हुई...और उस घटना मे आमीन और आज़ाद, पहले हुई घटनाओ की याद मे बह गये.........

एक दिन आज़ाद फॅक्टरी मे एक औरत को चोदने का मूड बना ही रहा था कि उस औरत का पति आ गया और उसे किसी काम से घर ले गया...

आज़ाद का बना-बनाया मूड ऑफ हो गया....तो आज़ाद माइंड फ्रेश करने के लिए अली से मिलने उसके घर चला आया....

आज़ाद अली के घर पहुँचा तो गेट नौकरानी ने खोला....

आज़ाद ने बिना उससे पूछे ही अंदाज़ा लगाया कि अली इस वक़्त अपने बेडरूम मे रेस्ट कर रहा होगा...और वो बेडरूम.मे जाने लगा ....

असल मे अली के घर पर आज़ाद ऐसे ही आता-जाता रहता था...कभी कोई प्राब्लम नही हुई थी आज तक...

आज़ाद बेडरूम तक पहुँचा और एक झटके मे गेट खोल कर चिल्लाया..

आज़ाद- अली भाईईईईईईईईईईई.......

आज़ाद के शब्द अधूरे ही रह गये...जब उसने सामे आमीन को खड़ा पाया....

आमीन...जो अभी-अभी बाथरूम से निकली हुई थी ....और टवल को शायद खोल ही रही थी कि आज़ाद की आवाज़ सुन कर चौंक गई.....

आमीन आवाज़ सुनते ही पलट गई और सामने आज़ाद को देख कर शॉक्ड हो गई.....

आज़ाद भी आमीन को देख कर शॉक्ड हुआ....पर उसकी निगाहे आमीन पर गढ़ गई थी...

आमीन तो शॉक्ड के मारे हिल भी नही रही थी....उसे शायद इंतज़ार था कि आज़ाद बाहर चला जाए....

पर जब आमीन की नज़रें आज़ाद के पेंट मे बने तंबू पर पड़ी तो वो खुद ही होश खो बैठी...

जिस घटना को वो भुला रही थी...वो ताज़ा हो गई....उसे आज़ाद का मगा लंड गान्ड मे जाते हुए दिखाई देने लगा था....

दूसरी तरफ आज़ाद के सामने भी फार्महाउस पर हुई घटना घूमने लगी...और उसका लंड तनने लगा....

आमीन , आज़ाद के लंड पर निगाहे गढ़ाए हुई थी....उसे ये होश भी नही था कि उसकी टवल पलट ते ही नीचे गिर गई थी...और वो आज़ाद के सामने नगी खड़ी है...


आज़ाद के अंदर वासना का कीड़ा पैदा हो गया था...और आज़ाद ना चाहते हुए भी आमीन के पास पहुँच गया....

आज़ाद- आमीन...तुम बेहद खूबसूरत हो...

आमीन(चुप रही)

आज़ाद को इतने करीब देख कर आमीन की साँसे तेज हो गई...और तभी आज़ाद ने अपने हाथ आमीन के बूब्स पर रख दिए...

आज़ाद- आहह...कितने नरम है....उउउंम

आज़ाद के हाथ लगते ही आमीन को झटका लगा....उसे समझ आ गया कि वो नंगी खड़ी है...पर उसके मुँह से एक सिसकी निकल गई....

आमीन- आआहह...

आज़ाद- बुरा ना मानो तो...मैं...

आज़ाद बोलते-2 रुक गया और आमीन की आँखो मे देखने लगा....


RE: चूतो का समुंदर - - 06-08-2017

आज़ाद खेला हुआ बंदा था...उसने आमीन की आँखो मे पढ़ लिया कि वो गुस्सा नही हुई....और आमीन ने कुछ बोला भी नही..तो आज़ाद ने उसके बूब्स को ज़ोर से मसल दिया....

आमीन- आआहह......

आज़ाद- आमीन...तुम सच मे बहुत मस्त हो....उूुउउम्म्म्म...

और आज़ाद ने झुक कर आमीन के होंठ चूम लिए....आमीन अब भी शांत खड़ी थी...सिर्फ़ उसकी आँखे बंद हो गई....

आज़ाद समझ गया कि आमीन को कोई दिक्कत नही...

तो आज़ाद ने आमीन के चेहरे को पकड़ कर अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिए और किस करने लगा....

कुछ देर तक आमीन शांत रही...पर फिर उसने भी आज़ाद का साथ देना सुरू किया और दोनो एक -दूसरे को किस करने लगे....

आज़ाद- उउउंम्म...आमीन....उूउउम्म्म्म...

आमीन- उउउंम्म....आआहह....उूउउम्म्म्म...

थोड़ी देर बाद आज़ाद ने आमीन को कस के बाहों मे भर लिया और उसका चेहरा और होंठ चूमने लगा....

आमीन भी आज़ाद की बाहों मे समा गई...और सिसकियाँ लेने लगी....

आज़ाद- उउंम...उऊँ..सस्ररुउपप...उउंम..उऊँ..उउंम..उउम्म्मह...

आमीन-उउउम्म्म्म.....आअहह...आअहह....उूउउंम्म...आओउउंम्म..

किस करते हुए दोनो के जिस्म आपस मे चिपके हुए थे...और आमीन के बूब्स आज़ाद के सीने मे और आज़ाद का लंड आमीन की चूत मे चुभने लगा था....

करीब 5 मिनिट तक चूमने चाटने के बाद आज़ाद ने आमीन की आँखो मे देखा तो वो शर्मा गई...

ये आज़ाद के लिए आगे बढ़ने का इशारा था....आज़ाद ने आमीन को गोद मे उठाया और बेड पर लिटा दिया...

आज़ाद ने फिर जल्दी से अपने कपड़े निकाले....जो आमीन आँखे फाडे देखती रही...और आज़ाद का लंड निकलते ही आमीन शर्मा गई...

आज़ाद अपने हाथ से लंड हिलाते हुए आमीन को दिखाता रहा और उसके पैरों के पास बैठ गया....

आमीन ने बिना कुछ कहे अपने पैर फैला दिए और आज़ाद के लिए अपनी चूत खोल दी...

आज़ाद- उउंम्म...क्या मस्त चूत है आमीन....सस्स्र्र्ररुउउउप्प्प्प.....

आमीन- आज़ाद......उूउउम्म्म्म..

आमीन के मुँह से अपना नाम सुन कर आज़ाद एक्शिटेड हो गया और तेज़ी से चूत चूसने लगा.....

आज़ाद - सस्स्र्र्ररुउउप्प्प्प ....सस्स्रररुउउप्प्प....सस्स्र्र्ररुउउप्प्प्प.....

आमीन- आअहह.....उउउंम्म...आज़ाद....आअह्ह्ह्ह...

आमीन ने मस्त हो कर आज़ाद का सिर अपनी चूत पर दबा दिया...और आज़ाद ने चूत को मुँह मे भर के चूसना सुरू कर दिया......

आज़ाद- उूुउउंम्म...उउउम्म्म्मम ...उउउंम्म....उउउंम्म....उउउंम्म...

आमीन- आआहह....आअहह...उउउम्म्म्म...आआज़ाअद्दद्ड.....उूउउंम्म...

थोड़ी देर की चूत चुसाइ से आमीन झड़ने लगी और आज़ाद चूत रस पीने लगा....

आमीन- ऊओह...ओह्ह...आआअहह....म्माऐईन्न....उूउउंम्म...

आज़ाद- उूउउंम्म..उउउंम्म...उउंम..सस्स्ररुउप्प्प...सस्ररुउउप्प....

आज़ाद ने बड़े प्यार से आमीन का चूत रस पिया और फिर आमीन को देख कर एक चटकारा मारा...तो आमीन शर्म से लाल हो गई...


आज़ाद- उउउंम्म...बहुत अच्छा स्वाद है...उउउंम्म...

फिर आज़ाद खड़ा हुआ और अपना लंड हिलाने लगा....आमीन ने आज़ाद की आँखो मे देखा तो वो मुस्कुरा दिया...और आमीन उसका इशारा समझ गई...

आमीन घुटनो के बल बैठी और आज़ाद का लंड पकड़ कर देखने लगी...

आज़ाद- कैसा है..

आमीन(शर्मा गई...और लंड को चूम लिया)

आज़ाद- आअहह....अब देर ना करो जान...

आमीन समझ गई और लंड का सुपाडा चूसने लगी....

देखते ही देखते आमीन ने आधा लंड मुँह मे भर लिया और अब पूरी मस्ती मे लंड चूसने लगी....

आमीन- सस्स्रररुउउप्प्प्प...स्स्सल्लुउउउप्प्प...उउउंम्म...उउउंम...स्स्सल्लुउउप्प्प....

आज़ाद- ओह....ऐसे ही आमीन...ज़ोर से....आअहह....

आमीन- स्स्सल्ल्लूउउप्प्प्प...स्स्सल्ल्ल्लूउप्प्प...उउउंम्म...उूउउंम...उउउंम्म.....

आज़ाद- आअहह....मस्त हो...करती रहो....उउउंम्म...

आमीन ने पूरा दिल लगा कर लंड चूसा और अब आज़ाद चुदाई के लिए रेडी था...

आज़ाद ने आमीन को रोका और उसे बेड पर लिटा दिया...

आमीन ने भी अपनी एक टाँग उठा कर आज़ाद को आगे बढ़ने का इशारा कर दिया...

आज़ाद ने लंड सेट किया और जोरदार धक्का मार कर आधा लंड आमीन की चूत मे उतार दिया....

आमीन- आअलल्ल्लाअहह.....उूउउम्म्म्म...

आज़ाद- बस थोड़ा सा और ...

और दूसरे धक्के मे लंड पूरा चूत मे चला गया और आमीन के आँसू निकल गये....

आमीन- आअलल्ल्ल्लाअहहाअ....म्म्माीअरर....उउउंम्म....आआहह...

आज़ाद ने आमीन के बूब्स सहलाते हुए उसे नॉर्मल किया और धीरे से चुदाई सुरू कर दी...

कुछ देर बाद आमीन नॉर्मल हुई और अपनी गान्ड हिलाने लगी..

फिर आज़ाद ने आमीन की टाँग उठा कर जोरदार चुदाई सुरू कर दी...

आमीन- आअहह...आअहह...आअहह....उउउंम्म...

आज़ाद- यीहह....ईएहह....ईीई.....यईीई...

आमीन- ऊहह..ज़ोर से....आअहह....आअहह...आअहह...

आज़ाद- ये लो....ईएह...यीहह...ईएह...

आमीन- आअहह..आहह...आहह..ज्ज़ोर से...ज़ोर से ..उूउउंम्म...

आज़ाद पूरी मस्ती मे चुदाई करता रहा और कुछ देर बाद आमीन फिर से झड गई....

आमीन- आआहह...आआज़ाद....मैं...आअहह...गाऐयइ....उउउम्म्म्म...ऊओ..ययईईए....आअहह...आअहह...

चुदाई का तूफान आमीन के झड़ते ही थम गया...आज़ाद ने लंड बाहर निकाला और आमीन के बाजू लेट कर उसे बाहों मे भर लिया...


आज़ाद(आमीन की गान्ड दबाते हुए)- पता है आमीन...मैने तुम्हे खेत मे नंगा देखा था...बस तभी से तुम आँखो मे छा गई...

आमीन- क्या...आपने देख लिया था...

आज़ाद- ह्म्म्म्...और आज मेरी तमन्ना पूरी हुई...ये शानदार जिस्म मुझे हासिल हो गया...

आमीन(शरमा कर)- मैने भी आपको कितना याद किया...जबसे आपको ऑफीस मे उस औरत की गान्ड मारते देखा...

आज़ाद(गान्ड मसल कर)- बदमाश....तुमने सब देखा था..

आमीन- ह्म्म..और तबसे वो सीन भूल नही पाई...

आज़ाद- तो तुम्हारी तमन्ना गान्ड मरवाने की है...हाँ...

आमीन(सिर हिला कर)- ह्म्म्म ...पर आपका बड़ा है...

आज़ाद- कोई नही...तुम्हारी गान्ड को इसके लिए खोल दूँगा...चलो आओ...थोड़ा इसे चूस दो...फिर गान्ड मारु तुम्हारी...

आमीन और आज़ाद पूरे खुल चुके थे...आज़ाद के कहते ही आमीन ने लंड चूस के चिकना कर दिया और कुतिया बन गई...


RE: चूतो का समुंदर - - 06-08-2017

आज़ाद ने थूक लगा कर आमीन की गान्ड चिकनी की और 3 धक्को मे लंड को गान्ड मे डाल दिया...

इस बार भी आमीन दर्द से तड़प गई...और आँसू बहा दिए...पर जल्दी ही नॉर्मल हुई और गान्ड चुदाई जोरो से होने लगी....

आमीन- हाँ आज़ाद...ज़ोर से...आअहह...फाड़ दो अब....आअहह...

आज़ाद- ये लो मेरी जान...अब रोज फाड़ुँगा ...यीहह...

आमीन- आअहह...जररूर्र....बहुत तडपी हूँ मैं...ज़ोर से मारो...आअहह...

आज़ाद- अब चिंता मत करो...इसका ख्याल मैं रखुगा...ईएह...यीहह...

आमीन- ओह आज़ाद....ज़ोर से...ज़ोर से...आअहह..आअहह...आहह..आहह...

रूम मे गान्ड चुदाई की आवाज़े तेज हो गई...आमीन की गान्ड पर आज़ाद की जाघे टकरा रही थी..और आमीन के बूब्स हवा मे झूल रहे थे....

दोनो ही चुदाई के रंग मे रंग चुके थे...और थोड़ी देर की दमदार गान्ड चुदाई से आमीन अपनी चूत मसल्ते हुए झड़ने लगी....

आमीन- आअहह...आज़ाद....मैं गई...आअहह...आअहह...आअहह...उउउंम्म...

आज़ाद- मैं भी आया....कहा डालु जान...मुँह मे लोगि...

आमीन- आअहह...हाँ...पिला दो...आअहह...

आज़ाद ने लंड को गान्ड से निकाला और आमीन को पलटा कर उसके मुँह मे लंडरस छोड़ दिया...

आमीन ने लंड रस को गले मे उतार लिया और दोनो रेस्ट करने लगे..

आमीन- अगर इन्हे(अली को) पता चला तो..

आज़ाद(आमीन को किस कर के)- उऊँ..कभी नही चलेगा...मैं हूँ ना..उउउंम्म..

और फिर उस दिन आज़ाद ने अली के आने तक आमीन की चूत और गान्ड को जमकर चोदा...

और उसके बाद ये सिलसिला चल पड़ा...

टाइम मिलते ही आज़ाद और आमीन एक दूसरे मे समा जाते थे...

पर कहते है कि ग़लत काम एक ना एक दिन पकड़ा ही जाता है...देर सही पर पकड़ता ज़रूर है...

इनके साथ भी वही हुआ.............


एक दिन अली अपने बेटे से मिलने शहर निकला तो आमीन ने आज़ाद को बुला लिया....

अभी 1 घंटा ही हुआ था...आमीन के बेडरूम मे आज़ाद उसकी गान्ड मार रहा था...

कि तभी अली घर आ गया....उसकी कार खराब हो गई थी तो उसने जाना केंसिल कर दिया था...

अली ने डोरबेल बजाई...पर लाइट नही थी तो वो बाजी नही...फिर उसने गेट नॉक किया...पर चुदाई के रंग मे रंगी आमीन को कुछ सुनाई ही नही दिया...

अली- शायद आमीन सो रही होगी...बेडरूम की खिड़की...हाँ..वही से जागता हूँ...

अली बेडरूम की खिड़की पर पहुँचा तो वो खुली मिली...

उसने खिड़की खोली तो चुदाई की आवाज़े सुन कर उसका माथा ठनका..

और जब उसने अंदर का नज़ारा देखा तो उसके होश उड़ गये...

अंदर उसका खास दोस्त उसकी बीवी पर चढ़ कर उसकी गान्ड मे लंड पेल रहा था...और उसकी मासूम दिखने वाली बीवी उसके दोस्त का लंड गान्ड मे लेते हुए...और तेज- और तेज चिल्ला रही थी...

ये नज़ारा किसी भी पति से बर्दास्त नही होता....अली के साथ भी ऐसा ही हुआ...

अली के जिश्म का खून खौल गया और आँखो मे उतर आया....

वो गुस्से से भरा मेन गेट पर आया...

अपनी बीवी से ज़्यादा गुस्सा अली को अपने दोस्त पर था...क्योकि उसने अपने दोस्त को सबसे बढ़ कर माना था......

अली(मन मे)-इतना बढ़ा धोखा...एक मेरा खास दोस्त और एक मेरी बीवी....मैं इन्हे छोड़ूँगा नही....

अब देखो तुम दोनो...मैं तुम दोनो का क्या हाल करता हूँ.....??????????


अली ने गुस्से मे अपनी टाँग उठाई और उसे गेट पर मारने ही वाला था कि अचानक रुक गया.....

अली(मन मे)- ये क्या कर रहा हू मैं...अगर मैने आमीन को रंगे हाथो पकड़ भी लिया तो क्या होगा....

वो बेचारी इस सदमे को सह नही पायगी...और अपनी जान दे देगी...हाँ...मैं जानता हूँ...वो कमजोर दिल वाली है...और मेरी नज़रों मे गिरते ही वो अपने आपको मिटा लेगी...

और आज़ाद...वो तो अयाश है ही...उसे क्या फ़र्क पड़ेगा...फ़र्क पड़ेगा तो सिर्फ़ आमीन को...मुझे...मेरे बच्चो को....

नही-नही...अगर आमीन ने कुछ कर लिया तो मेरे बच्चो का क्या होगा...क्या कहुगा मैं उन्हे....वो तो टूट ही जाएँगे....और आमिर...वो तो अपनी अम्मी के बिना मर ही जायगा..उसे क्या समझाउन्गा....

नही...मैं आमीन को कुछ नही होने दूँगा....पर आज़ाद ...उसे मैं छोड़ूँगा नही...उसने मेरी दोस्ती का कत्ल किया है...मेरी पीठ मे चुरा घोपा है...उसे मैं नही छोड़ूँगा....

पर ये वक़्त यहाँ रुकने का नही...अभी यहाँ से जाना चाहिए...कही आमीन को मेरी भनक भी लग गई तो अभी मार जाएगी....अभी यहाँ से जाना ही होगा....

और अली ने अपने आप को संभाल कर अपनी टाँग वापिस ज़मीन पर रखी और सोचने लगा कि अब क्या किया जाए.....

अली के दिल मे एक तूफान उठ चुका था...उसे समझ नही आ रहा था कि क्या करे .....

उसके सामने जो नज़ारा आज आया...उसने उसकी दुनिया ही ख़त्म कर दी....

एक तरफ उसकी जान से भी प्यारा दोस्त ..और दूसरी तरफ उसकी प्यारी बीवी....दोनो ने ही अली को धोके की चक्की मे पीस दिया था....

अली अपने घर पर आज़ाद और आमीन का नंगा खेल देखने के बाद वहाँ से चुप चाप निकल गया...जैसे कि वो यहाँ आया ही ना हो....

फिर वो गईं कि बाहर तालाब के किनारे बैठ कर आगे का सोचता रहा....


RE: चूतो का समुंदर - - 06-08-2017

यहाँ अली के घर...आज़ाद ने आमीन को अंधेरा होने तक छोड़ा और फिर अपने घर निकल गया....

शाम को अली घर आया तो उसे आमीन के स्वाभाव मे कोई फ़र्क नज़र नही आया...फिर वो आज़ाद से मिला...पर आज़ाद भी नॉर्मल था....

अली ने सोच लिया था कि आज़ाद से डाइरेक्ट टक्कर लेना तो बेवकूफी होगी...

उसने पास पैसा और पवर बहुत है...साथ मे गाँव वाले भी उसे पूजते है....इस सूरत मे सामने से आज़ाद को कुछ करना आसान काम नही था....

अली ने सोच लिया था कि वो आज़ाद को तभी सज़ा दे सकता है...जब वो आज़ाद को सबकी नज़रों के सामने गिरा दे....पर सवाल था कि कैसे.....

दिन गुज़रते गये और अली अपने साथ हुए धोखे की आग मे जलता रहा....पर इन दिनो मे उसे आज़ाद के खिलाफ कुछ करने का कोई आइडिया नही आया.....

पर इन दिनो उसका आज़ाद के साथ घूमना कम हो गया था....वो कोई ना कोई बहाना कर के आज़ाद से दूरी बनाता रहा.....

फिर एक दिन ऐसा आया जब अली को आज़ाद पर वार करने का मौका मिल गया....

वो दिन था...आकाश की गाँव मे वापिसी का दिन....

उस दिन आकाश अपनी बेहन और बहनोई से मिलने आया....और पता नही उस घर मे क्या हुआ कि आकाश की बेहन ने सुसाइड कर ली....उसका पति भी मारा गया....

गाँव वाले सोच ही रहे थे कि क्या हुआ होगा...तभी अली ने अपने कुछ खास आदमियों से कह कर पूरे गाँव मे हल्ला कर दिया कि आकाश ने अपनी बेहन और बहनोई को मार डाला....


जिससे पूरा गाँव आकाश के पीछे पड़ गया...और मजबूरी मे अपनी जान बचाने के लिए आकाश को गाँव से भागना पड़ा....

आज़ाद का बेटा गया...बेटी मर गई...दामाद भी मर गया....यही सोच कर अली काफ़ी खुश था....

अली बिना आज़ाद की नज़रों मे आए उस पर बार करता रहा....उसने आज़ाद की पटाई हुई कई औरतों को उससे दूर कर दिया....और उसकी फॅक्टरी मे भी अपने आदमी मिला कर गड़बड़ करने लगा....

पर उसका मेन टारगेट था आज़ाद और उसकी फॅमिली का ख़ात्मा....और अब वो अगले मौके की तलाश मे रहने लगा....

पर फिर एक दिन ऐसा आया ...जिस दिन अली के मंसूबो पर पानी फिर गया...और उसकी दुनिया उजड़ गई.....

एक दिन हर हफ्ते की तरह अली फिर से अपने बेटे से मिलने जाने वाला था....

उस दिन आमीन ने अपने बेटे के लिए उसके मनपसंद लड्डू बनाए...पर अली के जाने के टाइम पर वो उसे देना भूल गई...

नौकरानी- मेम्साब...मैं चलती हूँ...

आमीन- हाँ...और ये क्या...ये लड्डू यही है...तुमने साब को दिए नही...

नौरानी- सॉरी मेम्साब ...याद नही रहा...

आमीन(गुस्से मे)- तेरी याद भी ना...चलो...जो हुआ सो हुआ...तुम जाओ.अब...

यहाँ नौकरानी गई और वहाँ आमीन ने आज़ाद को बुला लिया...और सुरू हो गया चुदाई का नंगा नाच....

आज़ाद(आमीन को चोदते हुए)- अब तो तेरी प्यास कुछ ज़्यादा ही बढ़ रही है...हा...

आमीन- हाईए...आपके लंड ने बढ़ा दी...आअहह ...

आज़ाद- बेचारा अली....ऐसा माल पास होते हुए भी मज़ा नही लूट पाता....

आमीन- आहह....ये माल आपके लिए बचाया था उसने...ज़ोर से करो ना...आअहह...

आज़ाद- ह्म्म..सही कहा मेरी जान....हाहाहा....

और दोनो ठहाका मार कर चुदाई मे लगे रहे....

हर बार की तरह दिन भर अपनी चूत और गान्ड मरवा के आमीन रेडी हुई और अली के लिए नौकरानी के साथ मिल कर खाना बनाने लगी.....

तभी नौकरानी की नज़र उन लड्डू के डिब्बे पर पड़ी....

नौकरानी- मेम्साब...ये लड्डू...आपने दिए नही साब को....

आमीन- कब देती...तू ही भूल गई थी ना...क्या अब ये भी भूल गई....

नोकरणी- तो दुबारा दे देती....साब(अली ) वापिस भी तो आए थे....

आमीन(हैरानी से)- वापिस ...कब आए थे...

नौकरानी- जाने के 1 घंटे बाद ...मैं दूसरे घर से काम निपटा कर लौटी थी...तब देखा था मैने उन्हे....

आमीन(सवालिया नज़रों से)- कब की बात कर रही है तू...और कहाँ देखा था....

नौकरानी- अरे मेम्साब...जब साब गये...उसके 1 घंटे के बाद ही देखा था...वो वहाँ पीछे खड़े थे...वो आपके बेडरूम की खिड़की है ना...वहाँ....

नौकरानी की बात सुनकर आमीन का चेहरा फक्क पड़ गया....उसका जिस्म पसीना छोड़ने लगा...

आमीन(डरती हुई)- तू सच बोल रही है...

नौकरानी- जी मेम्साब...और मैने तो कई बार साब को वहाँ खड़े देखा है...

आमीन- क्क्..कब...

नौकरानी- जब भी साब सहर जाते है...तो उसके 1 घंटे के बाद...क्या है कि मैं उस टाइम दूसरे घर का काम निपटा कर निकलती हूँ....तो...

नौकरानी की बात सुनकर आमीन की सिट्टी-पिटी गुम हो गई...

आमीन जल्दी से बेडरूम मे भागी और खिड़की चेक की...जो खुली हुई थी...सिर्फ़ लटकी थी..लॉक नही...

आमीन को पलक झपकते ही सब बातें क्लियर हो गई....कि अली यहाँ 1 घंटे बाद क्यो आते है और यहाँ खड़े क्या देखते है...


RE: चूतो का समुंदर - - 06-08-2017


आमीन का शक ये याद कर के और गहरा गया कि जिस दिन से उसने आज़ाद के साथ चुदाई सुरू की उसके कुछ दिन बाद से अली का व्यवहार बदल गया था....

पहले अली हफ्ते मे 1 बार तो चुदाई कर लेता था...पर कुछ हफ़्तो से उसने आमीन को छुआ भी नही था...

आमीन को सब समझ आ गया कि हो ना हो अली को सब पता है...और वो इस गम के साथ घुट-घुट के जी रहा है....

आमीन(मन मे)- ये मैने क्या किया...मेरे पति को धोखा दिया...वो भी इतने अच्छे पति को...

मुझे क्या हो गया था....इस सेक्स की तड़प ने मुझसे कैसा गुनाह करवा दिया...या अल्लाह ...

आमीन काफ़ी देर तक कमरे मे बैठी रोती रही....और नौकरानी अपना काम करती रही....

जब अली घर आया तो सीधा बेडरूम मे गया...और वहाँ जाते ही चीख उठा....

अली- आमम्मीईएन्न्णेणन्.......न्न्ंहिईीई...

आमीन ने अपने आपको मिटा दिया था ...उसकी बॉडी पंखे से झूल रही थी...


अली ये नज़ारा देख कर टूट गया....उसकी चीख सुनकर नौकरानी और आमिर भी वहाँ आ गये...और मस्त का महॉल छा गया.....

तभी अली को एक कागज दिखाई दिया...जो सुसाइड नोट था ...उसमे लिखा था कि....


""मैं ख़ुसनसीब थी कि मुझे आप जैसे शौहर मिले ...सरफ़राज़ और आमिर जैसे बच्चे मिले....

पर मैने अपने जिस्म की आग मिटाने को वो गुनाह कर दिया...जो मुझे नही करना चाहिए था....

आज तक मैं आपको धोखा देकर खुश होती थी...पर आज पता चला कि आप सब कुछ जान कर भी मुझे खुशियाँ देते रहे....

अब मैं अपनी गुनहगार आखो से आपकी आँखो मे नही देख सकती...इसलिए ये आँखे सदा के लिए बंद कर रही हूँ....

आप अपने बच्चो का ख्याल रखना...और हो सके तो मेरे मरने के बाद मेरे गुनाहो को माफ़ कर देना....

आपकी - आमीन....."'



ये पढ़ते ही अली फुट -फुट कर रो पड़ा...आमिर भी अली को देख कर रो रहा था....अली की दुनिया उजड़ चुकी थी....

थोड़ी देर बाद अली उठा और गुस्से मे आज़ाद के पास पहुँचा...और उसे वो लेटर पढ़ा दिया...

आज़ाद- ये सब क्या है भाई..

अली- भाई मत बोल हराम्जादे...वरना तेरी जान ले लूँगा...

आज़ाद- क्या हो गया तुझे अली..बात क्या है...

अली- धोखेबाज...अब मुझसे पूछता है....ये सब तेरी वजह से हुआ...तेरी वजह से वो मर गई...तेरी वजह से..

आज़ाद(गुस्से मे)- अली...क्या बक रहा है...मैने क्या किया...

अली- साले...तूने मेरी पीठ पीछे ..मेरी ही बीवी को अपनी रखेल बना डाला...मेरी दोस्ती को तमाचा मारा...और अब पूछता है कि क्या किया मैने...हाँ...

अली की बात सुनकर आज़ाद सकपका गया ..पर संभाल कर बोला...

आज़ाद- क्या बक रहा है तू...ज़रूर कोई ग़लतफहमी...

अली(बीच मे)- ग़लतफहमी नही...सब सच है...मैने अपनी आँखो से देखा....और अपनी फॅमिली के खातिर कड़वा घूट पी कर रह गया...पर अब नही...अब मैं तेरी जान ले लूँगा...तुझे सबके सामने नंगा कर दूँगा...धोखेबाज....

अली की आवाज़ सुन कर के सभी गाँव वाले इकट्ठा हो गये थे...जिससे आज़ाद और भी घबरा गया....

आज़ाद- अली...मेरी बात सुन...ज़रूर कोई...

आज़ाद ने अली को हाथ लगाया तो अली ने उसे धक्का दे दिया...

अली- दूर रह धोखेबाज....अब और नही...अब मैं तुझे सबके सामने नंगा करूगा...तेरे किए हर कांड के बारे मे सबको बताउन्गा...तू जिनके साथ मज़े लेता है ना...उनके मुँह से खुद कहलवाउँगा...और हाँ...मैने काफ़ी सारे सबूत इकट्ठा किए है..सब मेरे घर मे है....वो सबको बता दूगा....आज़ाद...अब तू गया...बस थोड़ा रुक जा...मेरी बीवी को दफ़ना दूं...फिर तुझे जिंदा गाढ दूँगा...समझा...

अली धमकी दे कर चला गया....और अपनी बीवी का अंतिम काम किया...मतलब दफ़नाया.....

कुछ दिन बाद....एक दिन आमिर रूम मे सो रहा था और अली आमीन की याद मे खोया हुआ था..कि तभी उसे आग की लपटें दिखाई दी...जो घर के बाहर से आ रही थी...

जब तक अली कुछ करता वो लपटें तेज हो गई ...अली ने भाग कर गेट देखा तो वो बाहर से लॉक था...

अली ने आमिर को उठाया और आग से बचाने की कोशिस मे लग गया...पर रास्ता कोई भी नही था....

धीरे-धीरे आग बढ़ती गई और देखते-देखते घर जलने लगा...सिर्फ़ चीखे सुनाई दे रही थी....

चीखे सुन कर लोग भागे...पानी डाला ..पर सब बेकार...





RE: चूतो का समुंदर - - 06-08-2017

कुछ देर बाद चीखे शांत हो गई ...और उसके कुछ देर बाद आग पर काबू पा लिया गया...पोलीस भी आ गई...

पर अंदर से मिली 2 लाशे....अली और उसकी गोद मे लिपटा हुआ आमिर....और दोनो ही बुरी तरह जले हुए......बाकी सब खाक हो चुका था....


मैं- बस..बस...बस करो...अब मैं और नही सुन सकता.....

रिचा- क्यो नही सुन सकते...सच सुनने का शौक है ना तुम्हे....

मैं- हाँ है...पर अभी नही...मेरा सिर फट रहा है....अभी और नही...

रिचा- अब और कुछ बचा भी नही ..

मैं- मतलब...अभी सरफ़राज़ की बात तो आई नही...

रिचा- हाँ...आ ही गई थी...सुनो...बस थोड़ा और....

ये खबर सुनकर सरफ़राज़ गाँव आया...पर उसे यही बताया गया कि आग अपने आप लग गई थी...और वो भी ये मान गया था.....

पर गाँव मे दबी ज़ुबान ये बात चल पड़ी कि इसके पीछे आज़ाद का हाथ है...पर कोई आज़ाद के सामने ये बात नही बोल पाया....

आज़ाद ने पोलीस से मिल कर ये केस बंद करा दिया और चैन की साँस ली...क्योकि असलियत यही थी कि ये सब आज़ाद ने अपने गुनाह छिपाने को किया था....

फिर एक दिन अली के खास आदमी ने सरफ़राज़ को अली और आज़ाद के बीच हुई बहस के बारे मे बता दिया...और ये भी बता दिया कि उसके कुछ दिन बाद ही ये आग लगी ..मतलब सॉफ है...ये आज़ाद ने किया...

बस...तभी से सुरू हो गई सरफ़राज़ की दुश्मनी...तुम्हारे दादाजी की वजह से उसकी पूरी फॅमिली मारी गई...इसलिए वो भी तुम्हारी पूरी फॅमिली मिटाना चाहता है...बस...यही बात है....

मैं- क्या ये सब सच था....

रिचा- हर एक बात सच है...

मैं- ओके...मुझे अभी जाना होगा...

रिचा- और मेरी बेटी...

मैं- उसे ले कर ही आउगा....वेट करो...

फिर मैं वहाँ से उठा और अपनी कार से निकल गया....

मेरे जाने के बाद रिचा रिलॅक्स हो गई....और अपनी बेटी का इंतज़ार करने लगी....

लगभग 2ह्र के बाद रिचा की डोर बेल फिर से बजी...

रिचा खुश हो गई ..ये सोच कर कि उसकी बेटी आ गई...

पर गेट खोलते ही उसके गाल पर एक जोरदार थप्पड़ पड़ा और वो ज़मीन पर गिर गई...

रिचा ने संभाल कर गेट की तरफ देखा तो वो सहम गई...और डरते हुए बोली...

रिचा- त्त्त...तुम...पर...मारा क्यो....????????????????

इतना बोलते ही रिचा के गाल पर एक और थप्पड़ पड़ा और रूम मे थप्पड़ की आवाज़ गूँज उठी....

""कककचहााआटततटत्त्ताआआक्कककककककक.......""

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रिचा के मुँह से फ्लॅशबॅक सुन कर मेरा माइंड गरम हो चुका था....

मेरा दिल ये मानने को तैयार ही नही था कि मेरे दादाजी इतनी जॅलील हरक़त कर सकते है....

जहाँ तक अली की बीवी का सवाल था....उसमे तो उसकी भी बराबर ग़लती थी...जितनी मेरे दादाजी की....

माना कि दोस्त की बीवी के साथ सेक्स करना ग़लत था...पर आमीन ने ही उनको इसमे आगे बढ़ने पर मजबूर किया....

क्योकि बिना औरत की मर्ज़ी के उसे कोई हाथ भी नही लगा सकता....हाँ...रेप ज़रूर कर सकता है...पर यहाँ तो सब उसकी मर्ज़ी से हुआ था....

अब दादाजी भी क्या करते....मर्द तो औरत का नंगा जिस्म देख कर लालची हो ही जाता है...उपेर से औरत की हाँ हो तो फिर कैसे रुक पायगा...

पर मेरा दिल ये मानने को तैयार नही था कि मेरे दादाजी ने अपने दोस्त और उसके बेटे को जिंदा जला डाला....

और इसी सवाल को दिल मे लिए मैं अपने सीक्रेट हाउस पहुँच गया....अपने सवाल का जवाब लेने....

सीक्रेट हाउस पर.........

जैसे ही मैं हाउस मे एंटर हुआ तो मेरे सामने मेरा आदमी एस आ गया...

मैं- आप यहाँ....इस वक़्त...

स- हाँ...फ्री था तो सोचा एक राउंड मार लूँ...

मैं- ओके...

स- क्या बात है...बड़े परेशान दिख रहे हो...

मैं- नही...ऐसा तो कुछ नही...

स- क्या हुआ...कहाँ से आ रहे हो...

मैं- रिचा के घर से....

स- ओह..तो ये बात है...उसी की किसी बात से मूड खराब है....वैसे क्या बका उसने...

मैं- जो भी बका...वो बहुत बुरा है....बहुत ही बुरा...

स- पहले बैठो...और मुझे पूरी बात बताओ....आओ बैठो...

फिर मैने स को सारी बात बता दी....जिसे सुनकर उसे भी हैरानी हुई...और उसने यही बोला कि पूरी सच्चाई जाने बिना किसी रिज़ल्ट पर मत पहुँचना....

मैं- यही जानने तो आया हूँ...उस बहादुर को कुछ पता होगा...

स- ह्म्म्म ...तुम बात करो...मैं निकलता हूँ...बाद मे बताना....और हाँ...अगर रिचा की बात थोड़ी सी भी ग़लत निकले...तो छोड़ना मत साली को...ओके

मैं- ह्म्म...

और फिर स निकल गया और मैं पहुँचा बहादुर के रूम मे...


बहादुर- अरे...छोटे मालिक...आप...

मैं- मुझे अंकित ही कहो तो अच्छा लगेगा मुझे ...वैसे आप कैसे हो...

बहादुर- बस कृपा है आपकी....मैं और मेरा परिवार ...दोनो सुरक्षित है....अरे..बैठिए ना...

मैं- नही...मैं बैठने नही आया...मुझे कुछ सवालो के जवाब चाहिए...

बहादुर- तो पूछिए ना....मुझे पता होगा तो ज़रूर बताउन्गा....

मैं- ह्म्म..तुम अली को तो जानते ही होगे...उसके बारे मे जो भी जानते हो..बताओ...

बहादुर- अली...हाँ ...अली तो आज़ाद साब के खास दोस्त थे...बहुत ही नेक स्वाभाव के....सीधे -सादे इंसान....

मैं- ह्म्म..और उनकी फॅमिली...

बहादुर- उसकी फॅमिली मे पत्नी और 2 बेटे थे....उनकी पत्नी भी उन्ही की तरह नेक दिल थी...बहुत ही सुलझी हुई...और छोटा बेटा भी अपने माँ-बाप की तरह था....जो भी उससे मिलता ..वो उसे पसंद ही करता था....हाँ...उनके बड़े बेटे को नही जानता...वो सहर मे रहता था...कभी-कभी देखा तो था...पर ज़्यादा नही पता....

मैं- अच्छा ये बताओ...की मेरे दादाजी और अली के बीच कोई दुश्मनी हुई थी क्या....

बहादुर- दुश्मनी....नही बेटा...वो दोनो तो एक दूसरे की जान थे...अली तो हमेशा तुम्हारे दादाजी के भले के लिए ही सोचते रहे....दुश्मनी तो दूर की बात थी....

मैं- जैसे कि....

बहादुर- तुम जानते हो बेटा...जब तुम्हारे पिता गाँव से चले गये ...तो अली ही थे जिन्होने उनका ख्याल रखा...और तुम्हारे माँ-बाप की शादी भी करवाई...और आज़ाद साब को भी मना लिया...कि वो अपने बेटे को माफ़ कर दे...

मैं- अच्छा...और जब मेरे डॅड बापिस गाँव आए....जब वो घटना हुई...जिसमे मेरी बुआ मारी गई...तब अली ने क्या किया ....

बहादुर- करते तो तब...जब वो वहाँ होते बेटा....

मैं- मतलब...वो कहाँ थे...

बहादुर- बेटा...उस घटना के कुछ समय पहले एक दुर्घटना मे अली अपनी बीवी और बेटे के साथ दुनिया से चल बसे थे....

मैं- क्या....कैसे...कब...???

बहादुर- तुम्हारे डॅड की शादी के बाद...एक दिन आज़ाद साब घर पर आराम कर रहे थे तभी एक आदमी भागता हुआ आया...और उसने बताया कि अली के घर मे आग लग गई है....

आज़ाद साब तुरंत अली के घर भागे...पर वहाँ जा कर देखा तो पूरा घर तेज लपटों से जल रहा था....

आज़ाद साब ने आग भुजवाने की हर कोसिस की...पर आग बुझते-बुझते देरी हो गई थी....

आग बुझने पर घर मे सिर्फ़ 3 जली हुई लाषे थी...अली, उनकी बीवी और बेटे की....सब खाक हो चुका था...आज़ाद साब की दोस्ती भी....

मैं- तो..तो क्या अली की बीवी भी अली के साथ ही मरी थी....

बहादुर- हाँ बेटा...एक ही दिन मे मियाँ-बीवी और बच्चा....सब एक साथ चले गये.....

मैं- ओह्ह...और उनके बड़े बेटे का क्या हुआ...वो कहाँ गया....

बहादुर- वो गाँव आया था...पर आज़ाद साब से बात भी नही की...साब ने उसे अपने साथ रहने को बोला...पर वो वहाँ से निकल गया....कहाँ गया...पता नही...पर सुना था कि वो अपने परिवार के लोगो की मौत को हत्या समझता है....

मैं- और आप क्या समझते है...ये हादसा था या हत्या....

बहादुर- हादसा ही था बेटा...और वजह सॉफ है...एक तो अली की किसी से दुश्मनी नही...और फिर आज़ाद साब के दोस्त....जिन्हे पूरा गाँव मानता था...तो उनके दोस्त को कौन नुकसान पहुँचायगा....ये हादसा ही था...

मैं- पर हादसे की कोई वजह तो होगी ही....

बहादुर- पोलीस के हिसाब से...उनके घर मे रखी पेट्रोल की कॅन से ये आग लगी...वही पास मे अनाज पड़ा था...तो आग फैल गई...फिर लाइट के तारों से पूरा घर जलने लगा....

मैं- पर अली को इतना सब होने पर ये पता क्यो नही चला...

बहादुर- अंदाज़ा ये था कि दोपहर को सब सो रहे होंगे...और जब तक नीद खुली...तब तक देर हो गई थी....

मैं- ओह माइ गॉड....ये बात बिल्कुल सही है ना...

बहदिर- हाँ..पर अचानक ये बात ...

मैं(बीच मे)- कुछ नही...आराम करो....वैसे आपकी बीवी और बेटी कहाँ है...

बहादुर- वो यही खेत मे है...आ रही होगी...आप बैठो मैं बुलाता हूँ...

मैं- नही..अभी मैं जल्दी मे हूँ..बाद मे मिलूँगा...आप भी आराम करो...

बहादुर की बात सुन कर मुझे रिचा पर बहुत गुस्सा आ रहा था....साली ने झूठ बोला मुझसे....सब झूठ...अब बताया हूँ रंडी को....आज तो तू गई रिचा ...

और मैने कार रिचा के घर पर दौड़ा दी....


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