Hindi Porn Stories कंचन -बेटी बहन से बहू तक का सफ़र - Printable Version

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RE: Hindi Porn Stories कंचन -बेटी बहन से बहू तक का सफ़र - - 08-13-2017

“ऊऊऊओिईईईईईईईईईईईईईई……………….आआआआआआआआआ आ…………..आआअहह… ऊऊिइ… म्‍म्मा..... आआ आ आ....... आआ…ऊओह…आहह मर गयी .” मेरी गांद का छेद बुरी तरह चौड़ा हो गया. मैं इतने ज़ोर से चीखी कि पूरे मुहल्ले में आवाज़ पहुँच गयी होगी. इससे पहले में संभाल पाती, विकी ने फिर एक ज़ोरदार धक्का लगाया और उसका लंड 5 इंच मेरी गांद के अंडर धँस गया.

“ आआआआआ…………ऊऊऊऊऊऊीीईईईईईईईईईईई.......... . मम्माआआअ विकी बस कर आहह…छोड़ मुझे …आऐईयईई ..आ मैं और नहीं झेल सकती. प्लीज़ मैं तेरे हाथ जोड़ती हूँ ….आआहह….निकाल ले ..अया.” मुझे पूरा विश्वास हो चला था था कि मैं उसके लंड को नहीं झेल पाउन्गि. दर्द के मारे बुरा हाल था. ऐसा लग रहा था जैसे गांद का छेद फॅट चुका था. आख़िर एक फुट लंबा लंड कैसे किसी औरत की गांद में जा सकता है ? मुझे पहले ही सोचना चाहिए था. लेकिन उस वक़्त तो विकी के मूसल से गांद मरवाने का भूत सवार था मेरे सिर पे. अभी मैं सोच ही रही थी के कैसे मनाउ विकी को अपना लंड मेरी गांद से बाहर निकालने के लिए, कि उसने लंड सुपारे तक बाहर खीच के पूरी ताक़त से एक और ज़बरदस्त धक्का लगा दिया.

“आआईयईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई ई……आआआआआआअहह……………” मैं बहुत ज़ोर से चिल्लाई. मेरी आँखों के सामने अंधेरा छ्छा गया. दर्द के मारे बुरा हाल था. मेरी गांद तो शायद फॅट ही गयी थी. लंड 10 इंच मेरी गांद में जा चुक्का था. बेहोशी सी छ्छा रही थी. बेहोश होने से पहले आखरी चीज़ जो मुझे याद है वो ये की विकी ने फिर से पूरा 10 इंच अंडर धंसा हुआ लॉडा बाहर निकाल के एक भयंकर धक्के के साथ पूरा का पूरा एक फुट का लंड मेरी गांद में उतार दिया, उसकी जांघें मेरे चूतरो से चिपक गयी और उसके बड़े बड़े बॉल्स जो उसकी टाँगों के बीच में किसी सांड के बॉल्स की तरह झूलते रहते थे मेरी गीली चूत से फ़च की आवाज़ के साथ टकरा गये. उसके बाद मैं अपना होश खो बैठी.

15 – 20 मिनिट के बाद होश आया. मैं पायट के बल नंगी ही बिस्तेर पे पड़ी हुई थी. दोनो टाँगें इस प्रकार फैली हुई थी जैसे विकी मुझे बेहोशी की हालत में भी चोद रहा हो. विकी मेरे सामने कुर्सी पे बैठा हुआ पानी के छींटे मेरे मुँह पे मार रहा था. काफ़ी घबराया हुआ लग रहा था. उसका लंड अब खड़ा तो नहीं था लेकिन सिकुदा हुआ भी नहीं था. उसकी टाँगों के बीच में किसी लंबे मोटे साँप के माफिक झूल रहा था. मुझे होश में आता देख घबरा के बोला,

“ दीदी ठीक तो हो ? ये क्या हो गया आपको?”

“ ये बात तू मुझसे क्यों पूछ रहा है? अपने इस मूसल से पूछ.” मैं उसके झूलते हुए लंड को प्यार से सहलाते हुए बोली. “ ये तो किसी भी औरत का बॅंड बजा देगा. और तूने भी तो कितने बेरहमी से चोदा है. ऐसे चोदा जाता है अपनी दीदी को? ”

“ मैं तो बहुत डर गया था. मेरी प्यारी दीदी को कुच्छ हो जाता तो?” विकी मेरे होंठों को चूमता हुआ बोला. लंड सहलाने के कारण फिर से खड़ा होने लगा था. मैं भी फिर से वासना की आग में जलने लगी. आख़िर मेरी चूत तो अभी तक प्यासी ही थी. विकी एक बार भी नहीं झारा था. सुबह के चार बज रहे थे. पूरी रात की भयंकर चुदाई के कारण मेरा पूरा बदन दर्द कर रहा था. मेरी चूत और मेरी गांद का तो और भी बुरा हाल था. लेकिन विकी के लॉड की प्यास के सामने कुच्छ नहीं सूझ रहा था. विकी का लंड पूरी तरह तन गया था. ऊऊफ़ क्या भयंकर लग रहा था. सारी रात मेरी चूत का पानी जो पिया था.

“ अरे, ये तो फिर से खड़ा हो गया. अब क्या इरादा है ? सारी रात चोदने के बाद भी मन नहीं भरा तेरा?”

“ दीदी आप को चोद के किसी का मन भर सकता है क्या? आपने एक बार चोदने की इज़ाज़त दी है और अभी मैं झारा कहाँ हूँ?”

“ हाई राम ! तू तो सांड़ है. पता नहीं कब झरेगा. मेरी प्यासी चूत तडप रही है, तू उसकी प्यास कब बुझाएगा?” मैं उसके मोटे सुपरे को पागलों की तरह चाटने लगी.

“ ठीक है दीदी मैं आपकी इच्छा पूरी कर देता हूँ. चलो फिर से कुतिया बन जाओ.

मैं फिर से कुतिया बन गयी और अपने चूतेर ऊपर की ओर उभार दिए. मेरी चूत से अब रस बाहर निकलने लगा था. विकी ने मेरे मुँह से अपना सुपरा बाहर निकाला और मेरे चूतरो के पीछे आ कर कुत्ता बन गया. उसने फिर से अपने मूसल का सुपरा मेरी चूत के छेद पे टीका के एक ज़ोर का धक्का लगा दिया.

“ एयाया..हह…….ऊऊऊीीईईईईई….आअहह” मेरी चूत बुरी तरह से गीली तो थी ही और सारी रात चुदाई के कारण चौड़ी भी हो गयी थी. विकी का लॉडा चूत की दोनो फांकों को आसानी से चीरता हुआ आधा अंडर धँस गया. विकी ने मेरे चूतरो को पकड़ के लंड बाहर खींचा और एक भयंकर धक्के के साथ पूरा का पूरा लंड जर तक मेरी चूत में उतार दिया.

“ आआआआआआअ…………..वी….. माआआआ ……… आह…आह……आआहह….इससस्स आईईईईई.”

अब विकी पूरा लंड सुपरे तक बाहर निकाल कर जड़ तक अंडर पेलने लगा. फ़च…फ़च …. फ़च….. ……आआआः ……ऊऊओह..फ़च…फ़च ….फ़च …आऐईयईई….फ़च…फ़च. बहुत ही मज़ा आ रहा था. मैं भी चूतेर उच्छल उच्छाल कर उसके धक्कों का जबाब दे रही थी. हर धक्के के साथ विकी का एक फुट लंबा लंड मेरी प्यासी चूत में जड़ तक समा जाता. आज तक किसी मर्द ने मुझे इस तरह नहीं चोदा था. आख़िर विकी मुझे चोदने वाला तीसरा मरद था. विकी के दमदार धक्कों के कारण मैं फिर झार गयी. मैं विकी के रस के लिए पागल हो रही थी. जब तक उसका लंड मेरी चूत को अपने वीर्य से भर नहीं देता तब तक मेरी चूत की प्यास नहीं बुझ सकती थी. आख़िर मैं बेशर्म होके बोल ही पड़ी,

“ विकी भर दे अपनी दीदी की प्यासी चूत को अपने वीर्य से. प्लीज़…विकी ..प्लीज़….अब बुझा दे मेरी प्यास नहीं तो मैं मर जाउन्गि.”


RE: Hindi Porn Stories कंचन -बेटी बहन से बहू तक का सफ़र - - 08-13-2017

“ हां मेरी जान. आज मैं आपकी प्यास ज़रूर बुझाउन्गा.” ये कहते हुए विकी ने अपना एक फुट का लंड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया और गांद के छेद पे टीका के एक ज़बरदस्त धक्का लगा दिया. गांद तो वॅसलीन का कारण चिकनी थी ही, विकी का लंड भी मेरी चूत के रस में सना हुआ था. इससे पहले की मुझे संभालने का मोका मिले आधा लंड मेरी गांद में समा गया.

“आआआआआआआआआआआ………………ऊऊऊऊऊऊओिईईईईई ईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईइइम्म्म्माआ” मैं ज़ोर से चीखी. लेकिन इतनी देर में विकी ने लंड सुपरे तक बाहर खींचा और मेरी कमर पकड़ के एक भयंकर धक्के के साथ पूरा जड़ तक गांद में उतार दिया.

“ ऊऊीइइमम्माआअ…आआअहह…..आआहह विकी धीरे….आआहह….” अब विकी लंड पूरा बाहर निकाल कर जड़ तक मेरी गांद में पेलने लगा. जैसे ही लंड पूरा गांद में घुसता विकी के बॉल्स फ़च की आवाज़ के साथ मेरी गीली चूत से टकरा जाते. धीरे धीरे दर्द थोड़ा कम हो रहा था. गांद के अंडर बाहर होता हुआ लंड अब अच्छा लग रहा था. करीब 10 मिनिट गांद मारने के बाद विकी ने फिर अपना लंड बाहर खींच लिया और इससे पहले कि मैं कुच्छ समझू उसने सामने आ के तने हुए लंड को मेरे मुँह में पेल दिया. मैं जितना चूस सकती थी उतना चूसने की कोशिश कर रही थी, लेकिन इतने मोटे लंड को चूसना कोई आसान काम नहीं था. उसने धक्के मार मार के लंड मेरे गले तक घुसेड दिया था. मैं साँस भी बड़ी मुश्किल से ले पा रही थी. दस मिनिट तक मेरे मुँह को चोदने के बाद विकी ने फिर से लंड मेरी चूत में पेल दिया. ये सिलसिला एक घंटे तक चलता रहा. विकी पहले मेरी चूत लेता फिर गांद मारता और फिर मुँह में पेल देता. मेरे मुँह में कयि चीज़ों का स्वाद था. विकी के लंड का, उसके वीर्य का, अपनी चूत का और अपनी गांद का. ये स्वाद तो किसी शराब से भी ज़्यादा नशीला था. सुबह के 6 बज रहे थे. मैं कुतिया बनी पागलों की तरह चुदवा रही थी. अजीब सा नशा छ्छा रहा था. ऐसा लग रहा था कि मैं फिर से होश खो बैठूँगी. इतने में विकी जो की मेरी चूत में लंड पेल रहा था, बोला

“ दीदी ठीक तो हो ? ये क्या हो गया आपको?”

“ ये बात तू मुझसे क्यों पूछ रहा है? अपने इस मूसल से पूछ.” मैं उसके झूलते हुए लंड को प्यार से सहलाते हुए बोली. “ ये तो किसी भी औरत का बॅंड बजा देगा. और तूने भी तो कितने बेरहमी से चोदा है. ऐसे चोदा जाता है अपनी दीदी को? ”

क्रमशः.........


RE: Hindi Porn Stories कंचन -बेटी बहन से बहू तक का सफ़र - - 08-13-2017

गतान्क से आगे ......

“ दीदी, अब तो शायद झरने वाला हूँ बोलो कहाँ निकालूं?”

“ मेर चूत को भर दे मेरे राजा. अपना सारा रस उंड़ेल दे मेरी प्यासी चूत में.”

विकी के धक्के तेज़ होने लगे. मैं समझ गयी कि वो सुचमुच झड़ने वाला है. इतने में विकी ज़ोर से चीखा और उसका सारा बदन काँप उठा. मुझे अपनी चूत में बहुत तेज़ पिचकारी की धार के समान गरम गरम वीर्य भरने का एहसास होने लगा. विकी ने चार पाँच पिचकारी मेरी चूत में मार के लंड बाहर खींचा और गांद में जड़ तक घुसेड दिया. गांद में भी गरम वीर्य का एहसास होने लगा. मैं तो मानो नशे में थी. मेरी चूत और गांद विकी के वीर्य से लबालूब भर गये थे. चार पाँच पिचकारी गांद में मारने के बाद विकी ने लंड मेरे मुँह में पेल दिया. बाप रे! कितना वीर्य है इसके बॉल्स में? ख़तम होने का नाम ही नहीं ले रहा था. मेरा मुँह भी विकी के वीर्य से भर गया. मैं और ना सह सकी और फिर से होश खो बैठी. 15-20 मिनिट के बाद होश आया. मैं तो मानो विकी के वीर्य मैं नहाई हुई थी. मेरी चूत में से वीर्य निकल रहा था. मेरी गांद में से वीर्य निकल रहा था, और मेरे मुँह से भी वीर्य निकल रहा था. ये वीर्य शायद काफ़ी देर से निकल रहा था क्योंकि चादर विकी के वीर्य और मेरी चूत के रूस के मिश्रण से गीली हो चुकी थी.

विकी ने टवल से मेरी गांद से निकालते हुए वीर्य को सॉफ किया और फिर मुझे चित लिटा के मेरी टाँगें चौड़ी करके मेरी चूत और झाँटें भी सॉफ करने लगा. उसका लंड सिकुड चुक्का था लेकिन सिकुड़ी हुई हालत में भी 8 इंच लंबा था और उसकी टाँगों के बीच किसी मंदिर के घंटे की तरह झूल रहा था. सुबह के सात बज चुके थे. मेरा एक एक अंग दर्द कर रहा था. सबसे ज़्यादा दर्द तो मेरी गांद में हो रहा था. चूत भी बुरी तरह सूज गयी थी और ऐसा दर्द हो रहा था जैसा सुहाग रात को मेरी कुँवारी चूत की चुदाई के बाद हुआ था. पूरा बदन टूट सा रहा था. मैं विकी के होंठों को चूमते हुए बोली,“ हो गयी तेरी ख्वाहिश पूरी? तू खुश तो है ना? लेकिन मेरे राजा अपनी सग़ी बेहन को चोदना पाप है . आज के बाद इस बारे में कभी सोचना भी मत. भूल जा की तूने दीदी को कभी चोदा भी है.”

“ जी दीदी. मैं पूरी कोशिश करूँगा. आज के बाद मैं आपको एक भाई की तरह ही प्यार करूँगा.”

“ वेरी गुड ! जा अब नहा ले. मैं भी इस कमरे को सॉफ करके नहा लूँगी.” विकी अपने कमरे में चला गया. मैं भी उठी लेकिन गिरते गिरते बची. चूत इतनी सूज गयी थी की मैं ठीक से चल भी नहीं पा रही थी. गांद में भी बहुत दर्द हो रहा था. किसी तरह से कमरे की सफाई की और फिर नहा धो के खुद भी सॉफ हुई. हालाँकि दर्द बहुत हो रहा था लेकिन जो आनंद विकी ने दिया वो ना तो मेरे पति ने और ना ही मेरे देवर ने दिया था.

अगले दिन पापा और मम्मी वापस आ गये. मैं जब अगले दिन सो के उठी तो मेरा और भी बुरा हाल था. चूत और भी ज़्यादा सूज गयी थी और गांद का दर्द भी ठीक नहीं हुआ था. डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी था. अगले दिन मैं एक लेडी डॉक्टर के पास गयी. लेडी डॉक्टर को देखते ही मेरे होश उड़ गये. वो मेरे स्कूल की दोस्त वीना निकली. वो भी मुझे देखते ही पहचान गयी और खूब गले मिली,

“ अरे कंचन तू! तू यहाँ कैसे. कितने दिनों बाद मिल रही है.”

“ हां वीना, स्कूल के बाद अब मिल रहे हैं. कैसी है तू?” वीना भी मेरी अच्छी दोस्त थी. पढ़ाई में अच्छी थी, इसलिए आज डॉक्टर बन गयी थी. हम दोनो बचपन की खूब बातें करते रहे.

“ कंचन मुझे अच्छी तरह याद है तू स्कूल की सुबसे सेक्सी लड़की थी.”

“ हट ! तू कौन सी कम थी?”

“ भाई जीजाजी को क्यों नहीं साथ लाई?”

“ वो तो मुझे छोड़ने आए थे. चले गये. मेरी मा की तबीयत थोड़ी खराब थी.”

“ अच्छा बता डॉक्टर के पास कैसे आना हुआ?” अब मैं सकपका गयी. हड़बड़ा के बोली

“ नहीं वैसे ही, कोई ख़ास बात नहीं है. फिर कभी दिखा लूँगी.”

“ अरे कंचन तू पागल है क्या. तेरी दोस्त डॉक्टर है और तू मुझे कुच्छ बताना नहीं चाहती.”

“ नहीं कुच्छ ख़ास नहीं.”

“ अब तू ये ही कहती रहेगी या कुच्छ बताएगी भी. डॉक्टर से क्या च्छुपाना.” मैं साहस जुटा के बोली,

“ देख वीना मेरे टाँगों के बीच की जगह में दर्द हो रहा है.”

“ ओ ! तो तू इसलिए इतना शर्मा रही है! चल उतार अपनी सलवार. देखें क्या प्राब्लम है.”

“ मैने तो आज तक किसी के सामने सलवार नहीं उतारी.” मैं शरमाते हुए बोली.

“ अच्छा ! जीजाजी के सामने भी नहीं?”

“ ओह हो! वो तो दूसरी बात है.”

“ जब एक मरद के सामने सलवार उतार सकती है तो औरत के सामने उतारने में कैसी शर्म? वो भी एक डॉक्टर के सामने.” वीना ने मेरी सलवार का नारा खींच दिया.

“ चल अब बिस्तेर पे लेट जा, और पॅंटी भी उतार दे.” मैं बिस्तेर पे लेट गयी लेकिन पॅंटी नहीं उतारी. वीना ने ही मेरी पॅंटी भी उतार दी. मैने टाँगें ज़ोर के चूत को छुपा रखा था.

“ कंचन, चल टाँगें फैला. देखें क्या प्राब्लम है.” मैने शरम से आँखें बंद कर लीं और टाँगें फैला दी.

“ बाप रे ! कंचन, इतना जंगल क्यों उगा रखा है?” वीना ने मेरी झाँटें हटा के चूत को देखने लगी, “ हाई राम ! ये क्या ? तेरी चूत तो बहुत ज़्यादा सूज गयी है. और भी कहीं दर्द है?”

“ हां पीछे भी दर्द हो रहा है.” मैं हिचकिचाते हुए बोली. वीना ने मुझे पेट के बल लिटा दिया और मेरे चूतरो को दोनो हाथों से फैला के मेरे गांद के छेद को देखने लगी.

“ हे भगवान ! कंचन तू क्या कर रही थी ? ये तो फॅट गयी है.” मैं तो मारे शरम के लाल हो गयी. “ और भी कहीं दर्द है?”

“ हां पूरे बदन में ही दर्द हो रहा है.”

“ हूँ! चल कपड़े पहन ले, फिर बात करते हैं.” मैने अपनी पॅंटी और सलवार पहन ली. वीना बोली

“ देख मैने ऐसे केसस पहले भी देखे हैं. लेकिन वो सब ऐसी लड़कियो के थे जिनकी नयी शादी हुई थी और वो सुहाग रात के बाद या हनिमून के बाद मेरे पास आई थी. आमतौर पे लड़कियाँ छ्होटे कद की थी और उनकी शादी लंबे तगड़े मर्द से हो गयी. सुहाग रात को कुँवारी चूत को चोदना हर मर्द को नहीं आता. ऐसे में अगर मरद का लंड मोटा और बड़ा हो और लड़की की चूत छोटी हो तो उसकी ये हालत हो जाती है.


RE: Hindi Porn Stories कंचन -बेटी बहन से बहू तक का सफ़र - - 08-13-2017

एक बार एक केस ऐसा भी आया था जब दस आदमियो ने मिल के एक औरत के साथ बलात्कार किया. उस औरत की चूत की भी ऐसी ही हालत थी जैसी तेरी चूत की है. लेकिन तेरी तो गांद की भी बहुत खराब हालत है. फॅट गयी है. देख कंचन मुझे मालूम है मरद लोगों को औरत की गांद मारने का बहुत शौक होता है. मेरे पति को भी है. अगर मैं उनसे कहूँ कि आज आपको या तो सिर्फ़ चूत दूँगी या सिर्फ़ गांद, एक चीज़ ले लीजिए तो वो तो मेरी गांद ही लेंगे. लेकिन जो हालत तेरी गांद की है वो हालत तो कोई मूसल या घोड़े का लंड ही कर सकता है. अब मुझे सच सच बता तेरे साथ बलात्कार तो नहीं हुआ.”

“ नहीं वीना तू कैसी बातें कर रही है? अरे भाई शादी शुदा हूँ और मेरे पति का ख़ासा मोटा और बड़ा है.”

“ ओ ! तो तेरी ये हालत जीजाजी ने की है?”

“ तो और कौन करेगा?”“

क्यों झूट बोल रही है. सच सच बता किसने चोदा है तुझे ?”

“ मैं क्यों झूट बोलूँगी ? मेरे पति का बहुत बड़ा है. उन्होने ही ये सब किया है.”

“ देख कंचन तू बिल्कुल झूट बोल रही है. पहली बात तेरी शादी को दो साल से ज़्यादा हो चुके हैं. तू कुँवारी तो है नहीं. जीजाजी का कितना भी मोटा और बड़ा क्यों ना हो अगर वो तुझे दो साल से चोद रहे हैं तो आज अचानक तेरी चूत की ऐसी हालत कैसे हो गयी ? ऐसी हालत तो उस कुँवारी चूत की होती है जिसे मोटे तगड़े लंड से बहुत बेरहमी से चोदा गया हो. और फिर क्या जीजाजी ने तेरी गांद दो साल में कल रात पहली बार ली ? दूसरी बात, जीजाजी तो तुझे छोड़ के वापस चले गये थे ना ?” मेरी चोरी पकरी गयी और मैं शर्म से एकदम लाल हो गयी.

“ तेरा चेहरा बता रहा है कि तुझे किसी गैर मरद ने चोदा है. वो भी किसी ऐसे मरद ने जिसका लंड वाकाई घोड़े के लंड जैसा होगा. बोल मैं ठीक कह रही हूँ ना ? सच सच बता. मैं तेरी दोस्त हूँ किसी से कहूँगी नहीं.” मेरे पास कोई चारा नहीं बचा. लेकिन फिर भी मैं ये तो कभी नहीं बता सकती थी कि मेरे सगे भाई ने ही मुझे चोदा है. मैं धीमी आवाज़ में बोली.

“ हां वीना मुझसे ग़लती हो गयी . मैने एक गैर मरद से……….”

“ क्यों जीजाजी तुझे संतुष्ट नहीं कर पाते ?”

“ नहीं वीना ऐसी बात नहीं है. लेकिन मैने जब उस आदमी का देखा तो अपने पर कंट्रोल ना कर सकी.”

“ क्यों बहुत बड़ा था.?”

“ बड़ा ? बिल्कुल घोड़े के लंड जैसा ! मैने कभी पिक्चर या फोटो में भी इतना बड़ा लंड नहीं देखा. पूरा एक फुट लंबा लंड है उसका.”

“ बाप रे! मेरे पास एक दो पेशेंट्स आए थे जिनके पति का 9 इंच का था. सिर्फ़ एक पेशेंट आई थी जो कहती थी कि उसके पति का लंड 10 इंच लंबा है. लेकिन एक फुट लंबा लंड !”

“ सच वीना सिकुड़ी हुई हालत में ही 8 इंच का होता है. ऐसे लंड को देख कर तो अच्छी से अच्छी पति व्रता औरत का मन भी डोल जाए. जब पहली बार उसकी टाँगों के बीच में एक मोटे नाग के समान झूलता हुआ देखा तभी मेरा मन डोल गया था. लेकिन खड़ा होके बिजली का खंबा बन जाएगा इसका बिल्कुल अंदाज़ नहीं था. चुदवाने से पहले जब उसका लंड देखा तो मैं काँप गयी लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. बेशरम ने पूरी रात बड़ी बेरहमी से चोदा और गांद भी मारी. तू ही सोच, एक फुट लंबा लंड अच्छों अच्छों की चूत फाड़ दे. उसने तो पूरा एक फुट का लंड मेरी गांद में पेल दिया. मैं तो दो बार बेहोश भी हो गयी थी.. अब मुझे बहुत बुरा लग रहा है. पति को क्या मुँह दिखाउंगी.”

मैने अपनी सफाई पेश करते हुए वीना को आधा सच बता दिया. वीना मेरी कहानी सुन के कुच्छ उत्तेजित लग रही थी. वो बोली,

“ कुँचन बुरा मत मान. ग़लती तो हर इंसान से हो जाती है. विश्वामित्रा जैसे सन्यासी का मन अगर एक अप्सरा को देख के डोल सकता है तो तू तो एक साधारण औरत है. फिर ऐसे लंबे ,मोटे लंड को देख कर किस औरत का मन नहीं डोलेगा? मैं तेरी जगह होती तो शायद यही ग़लती मैं भी कर बैठती.” वीना की बात सुन के मुझे चैन आया. मैने पूचछा,

“ वीना तेरे पति कैसे हैं मैं आज तक मिली नहीं.”

“ मिलवा दूँगी. उनको देख कर तेरा मन नहीं डोलेगा क्योकि उनका लंड तो 6 इंच का है.” ये कह कर वो ज़ोर से हसणे लगी. मुझे लगा कि वीना के मन में भी एक लंबे मोटे लंड की चाह है. हर औरत के मन में होती है.

“ वीना सच बता तूने भी कभी किसी गैर मरद से चुडवाया है ?”

“ अरे भाई हमारा ऐसा नसीब कहाँ. हां अगर तू इस मरद से मिलवा दे तो सोच सकती हूँ” वीना हंसते हुए बोली.

“ धुत ! अच्छा वीना अब इसका इलाज तो बता.”

“ देख कंचन इस आदमी से अब एक हफ्ते तक तो बिल्कुल मत चुदवाना, नहीं तो तेरी चूत और गांद इलाज के लायक नहीं रह जाएगी. अपना ये जंगल भी सॉफ कर ले क्योंकि मैं तुझे एक दवाई दे रही हूँ जो रोज़ चूत के चारों ओर लगानी है. ये ही दवाई गांद के चारों ओर भी लगानी है. चूत और गांद को सेकने की भी ज़रूरत है. एक हफ्ते के बाद फिर से दिखा देना. मैं तुझे एक जेल्ली भी देती हूँ. जब भी गांद देनी हो तो अपनी गांद में और लंड पे अच्छी तरह लगा लेना. ये जेल्ली वॅसलीन से ज़्यादा चिकनी है. इतनी चिकनी की लंड एक ही धक्के में पूरा गांद में उतर जाए. इसलिए जीजाजी को बोलना ज़रा धीरे धीरे डालें. और हां इस आदमी को अब गांद मत देना. नहीं तो कुच्छ दिनों में तेरी गांद इतनी चौड़ी हो जाएगी की जीजाजी को पता लग जाएगा कि तू किसी औरको भी गांद दे रही है.”


RE: Hindi Porn Stories कंचन -बेटी बहन से बहू तक का सफ़र - - 08-13-2017

दवाई ले कर मैं घर चली गयी. वीना को क्या बताती कि अब तो मेरी चूत और गांद पे विकी के लंड का ही नाम लिखा है. मेरी चूत या गांद कितनी भी चौड़ी क्यों ना हो जाए अब तो विकी के लंड के बिना जीना नामुमकिन था. लेकिन एक हफ्ते का टाइम निकालना ज़रूरी था. एक हफ्ते से पहले मेरी चूत और गांद की हालत ठीक नहीं होने वाली थी. घर पहुँची तो विकी मेरा इंतज़ार कर रहा था. देखते ही बोला,

“ कहाँ गयी थी दीदी ? मैं तो बहुत देर से आपका इंतज़ार कर रहा हूँ. मैं तो समझा आप नाराज़ हो के कहीं अपने घर तो नहीं चली गयी.”

“ तुझसे नाराज़ क्यों होंगी? तूने जो कुच्छ किया मेरी मर्ज़ी से किया. मैं तो डॉक्टर के पास गयी थी.”

‘ क्या हुआ दीदी?” विकी ने घबरा के पूचछा.

“देख विकी तेरा बहुत बड़ा है. मेरे आगे और पीछे बहुत दर्द हो रहा था.”

“ तो डॉक्टर ने क्या कहा?”

“ आगे से तो बहुत सूज गयी है, और पीछे का छेद फॅट गया है.”

“ सॉरी दीदी मैने जान के कुच्छ नहीं किया.”

“ जानती हूँ, तेरा है ही इतना बड़ा. तेरा कोई दोष नहीं.”

“ डॉक्टर ने क्या इलाज बताया?”

“ पहले तो बाल साफ करने को कहा. आगे और पीछे लगाने के लिए दवाई दी है और सेक भी करना है एक हफ्ते तक. पता नहीं बाल कैसे साफ कर पाउन्गि?”

“ दीदी आप बुरा ना मानो तो मैं आपके बाल साआफ कर दूँगा.”

“ हट पागल ! तूने जो कुच्छ करना था कर लिया.”

“ दीदी विश्वास करिए. मैं आपको एक भाई की तरह देखूँगा.”

“ अच्छा ! भाई भी अपनी बेहन की चूत के बाल सॉफ करते हैं?” मैने आख़िर चूत जैसा शब्द इस्तेमाल कर ही लिया. इस तरह का शब्द मैने विकी से चुदाई के बाद से अभी तक इस्तेमाल नहीं किया था. चुड़वाते वक़्त ऐसे शब्द बोलना और बात थी.

“ तो क्या हो गया दीदी? बेहन की तकलीफ़ में भाई काम ना आए तो भाई कैसा? और मैं आपको धोका नहीं दूँगा. वैसे भी आप अपने आप कैसे बाल साफ करोगी?”

“ तू ठीक कह रहा है. ठीक है तू ही साफ कर देना. लेकिन ध्यान रहे कोई शरारत नहीं.”

“ प्रॉमिस दीदी बिल्कुल नहीं.”

“ ठीक है आज रात को मेरे कमरे में आ जाना. साथ में अपना शेविंग का समान भी ले आना.”

रात में जब मम्मी, पापा अपने कमरे में चले गये तो विकी शेविंग का सामान ले के मेरे कमरे में आया. मैं भी नहा धो कर विकी के आने का इंतज़ार कर रही थी. मैने वोही छ्होटा सा नाइट गाउन पहन रखा था. अंडर से सिर्फ़ पॅंटी पहनी हुई थी.

“ चलो दीदी अपना गाउन उतार दो और बिस्तेर पे बैठ जाओ.”

“ अच्छा! गाउन क्यों उतारू? तूने जिस जगह पे काम करना है वो जगह तुझे मिल जाएगी.”

“ अच्छा बाबा अब बैठ जाओ.” मैं बिस्तेर पे बैठ गयी.

“ अब टाँगें तो खोलो शेव कैसे करूँगा?” मैने धीरे धीरे टाँगें फैला के चौड़ी कर दी. गाउन सामने से खुल गया. मेरी छ्होटी सी पॅंटी ने मेरी सूजी हुई चूत को बड़ी मुश्किल से धक रखा था. झाँटें तो पूरी बाहर ही निकली हुई थी.

“ ओफ दीदी आपने तो पॅंटी भी नहीं उतारी. वैसे भी बड़ी मुश्किल से आपकी जायदाद को ढक पाती है.” ये कह के उसने मुझे खड़ा कर दिया और पॅंटी नीचे सरकाने लगा. मेरी पॅंटी हमेशा की तरह मेरे विशाल चूतरो से सिमट के उनके बीच की दरार में फँसी हुई थी. विकी ने खीच के चूतरो के बीच फँसी पॅंटी को निकाला.

“ दीदी आपकी पॅंटी हमेशा ही आपके नितंबो के बीच में फँसी होती है.”

“ अरे तो इसमे मेरा क्या कसूर ?”“

हां दीदी आपका कोई कसूर नहीं. कसूर तो इन मोटे मोटे नितंबों का है. बेचारी पॅंटी क्या करे? पिस जाती होगी इन भारी नितंबों के बीच में.” विकी ने मेरी पॅंटी उतार दी और अपने नाक पे लगाके सूंघने और चूमने लगा.

“ऊफ़ क्या मादक खुश्बू है! सच दीदी आपकी पॅंटी कितनी लकी है. अब अपना गाउन भी उतार दो नहीं तो शेव करते हुए खराब हो जाएगा.” ये कह कर विकी ने मेरा गाउन भी उतार दिया. अब तो मैं बिल्कुल नंगी थी. अपने भाई के सामने इस तरह नंगी खड़े हुए मुझे शरम आ रही थी. वासना के नशे में नंगी होना और होशो हवास में नंगी होने में बहुत फ़र्क़ है. अपनी जांघों के बीच में अपनी चूत को च्छुपाने की कोशिश करने लगी. विकी ने मुझे बिस्तेर पे बैठा दिया और टाँगों को चौड़ा कर दिया. मेरी झांतों से भरी चूत विकी के सामने थी. विकी का चेहरा लाल हो गया. उसका लॉडा हरकत करने लगा जिसे वो च्छुपाने की कोशिश करने लगा. विकी मेरी टाँगों के बीच में बैठ गया.

“ बाप रे दीदी ! ये तो पूरा जंगल है.” ये कह कर विकी मेरी झांतों में हाथ फेरने लगा. मेरी चूत धीरे धीरे गीली होने लगी.

“ विकी तू ये सब क्या कर रहा है. अपना काम कर.”

क्रमशः.........


RE: Hindi Porn Stories कंचन -बेटी बहन से बहू तक का सफ़र - - 08-13-2017

गतान्क से आगे ......

विकी ने पहले कैंची से मेरी झांतों को काटना शुरू किया. जब झाँटें इतनी छ्होटी हो गयी की अब कैंची से काटना मुश्किल हो गया तब विकी ने शेविंग क्रीम निकाला. झाँटें काटने से मेरी पूरी चूत की बनावट नज़र आनी शुरू हो गयी थी. मुझे भी अपनी चूत की बनावट देखे 12 साल हो गये थे. विकी ने खूब सारा शेविंग क्रीम मेरी चूत के चारों ओर लगाया और फिर रेज़र से बाल साफ करने लगा. जैसे जैसे बाल साफ होते जा रहे थे मेरी गोरी चिकनी स्किन उभरती जा रही थी. विकी ने बड़े प्यार से शेव कर रहा था. थोड़ी देर में बोला,

“ दीदी अब लेट जाओ और पैर ऊपर की ओर मोड़ के फैला दो.” मैं लेट गयी और टाँगें मोड़ के छाती से लगा दी. बिल्कुल चुदवाने की मुद्रा थी. विकी ने उस जगह भी शेविंग क्रीम लगाया जहाँ वो मेरे बैठे होने के कारण नहीं लगा सका था. बाल तो मेरी गांद तक थे. विकी ने अच्छी तरह शेविंग क्रीम लगा के रेज़र से बाल सॉफ कर दिए. पूरी चूत शेव करने के बाद उसने गरम पानी से चूत को साफ किया. फिर बोला “ दीदी देखो अब ठीक है?” मैने टाँगों के बीच देखा तो अपनी ही चूत को पहचान ना पाई. कितनी गोरी, सुंदर,सॉफ और चिकनी लग रही थी. कितने फूली हुई थी. विकी के लंड ने इतनी सूजा दी थी कि अब तो किसी डबल रोटी से भी डबल लग रही थी. दोनो फांकों के बीच से निकले होंठ इतने बड़े थे मानो छ्होटा सा लंड हो. विकी भी मेरी चूत को घूरे जा रहा था. उसके लंड ने तो लूँगी का टेंट बना दिया था. मैं उसके लंड की ओर इशारा करके बोली,

“ विकी तू तो शायद मुझे एक भाई की नज़र से देख रहा है ना.?” विकी का चेहरा लाल हो गया,

“ दीदी आपकी ये है ही इतनी खूबसूरत की भाई का मन भी डोल जाए. ये तो बहुत ज़्यादा सूज गयी है, मैं सेक के दवाई लगा देता हूँ. लेकिन सेकेंगे कैसे?”

“ कोई बात नहीं बिना सेके ही दवाई लगा दे.”

“ नहीं दीदी ऐसे नहीं हो सकता. मैं सेकने का इंतज़ाम करता हूँ.” ये कह कर विकी बाहर जाने को हुआ. मैं उसे रोकते हुए बोली,

“ कहाँ जा रहा है? मम्मी पापा उठ जाएँगे.” विकी वापस आ गया.“ ये बात तो ठीक है. अच्छा, मेरे पास एक उपाय है. अगर आप मानो तो बोलूं.”

“ बोल तो. पता तो लगे कौन सा उपाय है.”

“ दीदी जब जानवर को चोट लगती है तो वो अपने जख्म को चाट के सेकता है और उसकी चोट ठीक हो जाती है. वो तो दवाई भी नहीं लगाता.”

“ तेरी बात ठीक है. लेकिन ना तो मैं जानवर हूँ और ना ही मेरी जीभ मेरे टाँगों के बीच में पहुँचेगी.”

“ मैने कब कहा आपकी जीभ आपकी टाँगों के बीच में पहुँचेगी? लेकिन मेरी जीभ तो पहुँच सकती है ना.”

“ ओ ! तो अब समझी. तेरी नियत फिर से खराब हो रही है.”

“ नहीं दीदी मेरी नीयत बिल्कुल खराब नहीं है. सेकने का और कोई रास्ता भी तो नहीं है. मैं आपको प्रॉमिस करता हूँ कोई ग़लत काम नहीं करूँगा. सिर्फ़ चाट के सेक दूँगा और फिर दवाई लगा देंगे.” चूत की चटाई की बात सुन के ही मेरी चूत गीली होने लगी थी. गीली तो जब विकी शेव कर रहा था तभी हो गयी थी लेकिन अब तो और भी ज़्यादा गीली हो गयी थी. मैं अपनी उत्तेजना को च्छूपाते हुए बोली,

“ देख विकी तुझे मेरी कसम यदि तूने कोई ग़लत काम किया तो. सिर्फ़ सेकना और दवाई लगाना है. कुच्छ और किया तो कभी बात नहीं करूँगी.”

“ आपकी कसम दीदी, और कुच्छ नहीं करूँगा, चलो गाउन उतार दो और लेट जाओ.”

“ अच्छा बदमाश गाउन क्यों उतारू? दीदी को नंगी करने का बहुत शौक हो गया है? वैसे भी तो सेक सकता है.”

“ दीदी वैसे अच्छी तरह नहीं सेक पाउन्गा. उतार भी दो ना. मेरे सामने कपड़े उतारने में क्या शरमाना?”

“ ठीक है उतार देती हूँ, लेकिन कोई शरारत नहीं करना.” मैं तो नंगी होना ही चाहती थी. मैने गाउन उतार दिया और बिस्तेर पे चित लेट गयी.विकी ने मेरी टाँगें चौड़ी कर दी. टाँगों के बीच का नज़ारा देखते ही उसका लंड फंफनाने लगा. वो जल्दी से मेरी टाँगों के बीच में बैठ गया और अपनी जीभ मेरी चूत से लगा दी. ऊऊफ़ ! विकी की गरम गरम जीभ बहुत अच्छी लग रही थी. मुझे अहसास हुआ कि यदि चूत चटवानी हो तो झाँटें नहीं होनी चाहिए. एक नया सा अहसास हो रहा था. मेरी चूत बुरी तरह से गीली हो रही थी. मुझे डर था कि कहीं मेरी चूत का रस बाहर ना निकल आए. विकी मेरी चूत के छेद के चारों ओर चाट रहा था लेकिन एक बार भी छेद को नहीं चॅटा और ना ही जीभ को छेद में डाला. मेरी वासना बढ़ती जा रही थी लेकिन आज चुदवाना ख़तरे से खाली नहीं था. जब मुझ से और नहीं सहा गया तो मैने विकी का सिर पकड़ के चूत का छेद उसके होंठों पे रगड़ दिया. मेरी चूत के होंठ उसके चेहरे पे रगड़ गये और उसका चेहरा मेरी चूत के रस से सन गया.


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“ दीदी क्या कर रही हो? मैं तो ठीक से सेक रहा था.”

“ नहीं मेरे राजा तू ठीक से नहीं सेक रहा था. जिस जगह सबसे ज़्यादा चोट लगी है वहाँ तो तूने सेका ही नहीं. उसके चारों ओर सेके जा रहा है.”

“ सॉरी दीदी वहाँ भी सेक देता हूँ.” ये कह के विकी ने मेरी चूत में मुँह दे दिया और जीभ चूत के अंडर घुसेड दी. अब तो बहुत मज़ा आ रहा था. मैं तो झरने वाली हो रही थी. विकी ने मेरी टाँगें मोड़ के मेरे सीने से चिपका दी. इस मुद्रा में मेरे चूतेर और ऊपेर हो गये मेरी गांद का छेद विकी के मुँह के सामने आ गया.विकी ने मेरी गांद को भी चाटना शुरू कर दिया और बीच बीच में जीभ गांद के छेद में भी घुसेड देता. बहुत मज़ा आ रहा था. विकी के होंठ मेरी चूत के रस से गीले हो गये. विकी बोला,

“दीदी, आपकी चूत तो बिल्कुल गीली है. इसका मतलब ये कुच्छ चाहती है.”“हट बदमाश ये कुच्छ नहीं चाहती. कोई मरद इस तरह से किसी औरत की चूत चॅटेगा तो क्या गीली नहीं होगी? लेकिन तेरा लंड भी तो फंफनाया हुआ है.”

“ दीदी आपके जैसी खूबसूरत औरत जिसके पीछे सारा शहर जान देता है, किसी मरद के सामने चूत खोल के बिल्कुल नंगी पड़ी हुई हो और वो मरद उसकी सेक्सी चूत चाट रहा हो तो क्या उसका लंड खड़ा नहीं होगा. आपको नंगी देख कर तो विश्वामित्रा जैसे सन्यासी का मन भी डोल जाए. मेरी तो किस्मत खराब है. मेरे लंड की प्यास तो अब कभी नहीं बुझेगी.”

“ ऐसा मत बोल विकी. जब तेरी शादी हो जाएगी तो तेरी तू अपनी बीवी को रोज़ चोदना.”

“ दीदी आपको चोदने के बाद अब किसी और को चोदने का मन नहीं करता.”

“ सब ठीक हो जाएगा मेरे राजा. आख़िर तू मुझे सारी ज़िंदगी तो नहीं चोद सकता.”

“ जब तक चोद सकता हूँ तब तक भी तो आप चोदने नहीं दे रही हो.”

“अच्छा ! तो तेरे प्रॉमिस का क्या हुआ.?”

“ दीदी आपको चोदने के लिए तो मैं कोई भी प्रॉमिस तोड़ सकता हूँ.”

“ विकी मैं तेरे दिल की हालत समझती हूँ. मुझे मालूम है कि कोई भी मरद इस तरह किसी औरत को नंगी करके उसकी चूत चाते तो अपने आप को आख़िर कब तक कंट्रोल कर सकता है? एक काम कर सकती हूँ. जब तू मेरी चूत को सैक के दवाई लगा देगा उसके बाद तू अपने लंड को मेरे मुँह में डाल सकता है. मैं तुझे उतना ही मज़ा दूँगी जितना तुझे चोदने से मिलेगा. इस तरह तेरे लंड की प्यास भी बुझ जाएगी.”

“ सच दीदी? आप बहुत अच्छी हो. लेकिन आप जानती हो चोदने और लंड को चूसने का अलग अलग मज़ा होता है. दोनो को कंपेर नहीं कर सकते. मैं आपसे एक बात कहूँ तो बुरा तो नहीं मानोगी?”

“ नहीं मेरे राजा बोल, क्या बात है?”

“ जब आप ठीक हो जाओगी, तो क्या मैं आपको तब तक चोद सकता हूँ जब तक आप जीजाजी के पास नहीं जाती?”

“ तू तो बहुत चालाक है. ठीक है चोद लेना. मैं तो वापस तब तक नहीं जा सकती जब तक मेरी चूत पे बाल नहीं आ जाते. तेरे जीजाजी को क्या कहूँगी. उन्हें तो मेरी चूत के बाल बहुत पसंद हैं.”

“ फिर तो मज़ा आ जाएगा. सच रोज़ चोदुन्गा आपको.”

“ जब तक मैं यहाँ हूँ तब तक जी भर के चोद लेना अपनी दीदी को. अब तो खुश है ना?”

उसके बाद विकी ने थोरी देर और मेरी चूत और गांद को चाता. मैं इस बीच दो बार झाड़ चुकी थी. फिर उसने मेरी चूत और गांद के छेद पे दवाई लगा दी. दवाई लगाने के बाद उसने अपनी लूँगी उतार दी और अपने फँफनाए हुए लॉड को मेरे होंठों पे टीका दिया. मैं तो उसके गधे जैसे लंड को चूसने के लिए उतावली हो ही रही थी.

विकी के मोटे लंड को मुँह में लेने के लिए मुझे पूरा मुँह खोलना पड़ा. मैं बड़े प्यार से लंड के सुपरे को चूसने लगी. धीरे धीरे पूरे लंड को चाटने लगी और उसके नीचे लटकते हुए बड़े बड़े बॉल्स को भी सहलाने और चूमने लगी. काफ देर तक मैने विकी के मूसल को चूसा. विकी ने जोश में आके लंड मेरे मुँह में पेलना शुरू कर दिया. उसका लंड मेरे गले तक घुस गया था. विकी ने मेरा मुँह पकड़ के धक्के लगाने शुरू कर दिए. वो अपने एक फुट लंबे लंड को सुपरे तक बाहर खींचता और फिर पूरा लंड मेरे मुँह में पेलने की कोशिश करता. अब एक फुट लंबा लंड तो मुँह में जाना मुश्किल था लेकिन 8 इंच तो घुस ही जाता था. विकी मेरे मुँह को ऐसे चोद रहा था जैसे मेरी चूत चोद रहा हो. मैं उसके लटकते हुए बॉल्स को दबा और सहला रही थी. करीब आधे घंटे तक भयंकर धक्के लगाने के बाद विकी झाड़ गया और ढेर सारा वीर्य मेरे मुँह में निकाल दिया. ऐसा लगता था था कि कभी उसका वीर्य निकलना बंद ही नहीं होगा. मैं जल्दी जल्दी उसके वीर्य को पीती जा रही थी, लेकिन फिर भी बहुत सारा वीर्य मेरे मुँह से निकल कर टपकने लगा. विकी के लॉड को कुच्छ राहत मिली. अब ये रोज़ का सिलसिला हो गया. विकी रोज़ रात को आता, मेरी चूत और गांद को चाट के सैकता और दवाई लगाने के बाद मेरे मुँह में अपना लंड पेल कर अपनी प्यास बुझाता.

एक हफ्ते के बाद मैं फिर अपनी सहेली वीना के पास चेक अप कराने गयी. उसने अच्छी तरह से मेरी चूत और गांद की जाँच की.

“कंचन तेरी चूत और गांद तो बहुत जल्दी ठीक हो गयी, लगता है जीजाजी ने बहुत सेवा की है. देख कंचन मैं एक बार फिर से कह देती हूँ अब उस आदमी को भूल के भी गांद मत देना.”

“नहीं दूँगी डॉक्टर साहिबा.”

“कुच्छ दिन और सेक कर ले तो अच्छा है. लेकिन अब दवाई लगाने की ज़रूरत नहीं है. वैसे किससे सेक करवा रही है?”

“तेरे जीजाजी से और किससे?”

मैने विकी को बताया कि डॉक्टर ने कुच्छ दिन और सेक करने को कहा है लेकिन गांद देने को बिल्कुल मना किया है. ये सुन कर विकी का दिल टूट सा गया.

“दीदी जिस गांद के लिए ज़िंदगी भर तडपा हूँ वो ही नहीं दोगि तो कैसे जीऊँगा?”

“ हाई मेरे प्यारे भैया, तेरे लिए तो जान भी दे दूं. तुझे गांद नहीं दूँगी तो किसे दूँगी? देख डॉक्टर ने एक जेल्ली दी है. आगे से ये जेल्ली मेरी गांद में और अपने मूसल पे लगा लेना. लेकिन गांद थोड़ा धीरे धीरे मारा कर. तू तो गधा है लेकिन मैं तो गधी नहीं हूँ ना. मैं तो औरत हूँ.”

“हाई दीदी आप कितनी अच्छी हो. आप की कसम आगे से ऐसे आपकी गांद मारूँगा की आपको पता ही नहीं चलेगा.”

अब विकी ने मेरी चूत और गांद को सेकने का एक नया तरीका निकाल लिया था. वो अब मेरी चूत और गांद पे कभी मक्खन और कभी शहद लगा कर चाटने लगा. जी भर चाटने के बाद रात भर मुझे चोद्ता और गांद भी मारता. गांद मारने के बाद वो बड़े प्यार से मेरे चूतरो को चौड़ा करके अपने होंठों से मेरी गांद के लाल हुए छेद को चूमता और जीभ अंडर डाल कर चाटता. करीब करीब एक महीना हो चला था. अब मेरी चूत पे फिर से झांतों का घना जंगल हो गया था. पिया के घर जाने के दिन भी नज़दीक आ गये थे.


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मुझे मायके आए अब बहुत दिन हो गये थे. मायके में मेरे और मेरे छ्होटे भाई विकी के बीच जो कुच्छ हुआ वो तो आप पढ़ ही चुके हैं. अब पति के घर वापस जाने का वक़्त भी आ गया था. विकी कुच्छ दिनों के लिए अपने कॉलेज की फुटबॉल टीम के साथ मॅच खेलने भोपाल गया हुआ था. पापा भी अगले दिन 15 दिनों के लिए टूर पे जाने वाले थे. उस रात मैं मम्मी को दूध देने उनके कमरे जा रही थी की मैने देखा मम्मी के कमरे की लाइट तो बंद थी. मुझे लगा कि मम्मी पापा सो गये होंगे. लेकिन जब मैं उनके दरवाज़े के पास पहुँची तो मुझे अंडर से फुसफुसाने की आवाज़ें सॉफ सुनाई दे रही थी. मेरे दिमाग़ में बचपन की वो यादें ताज़ा हो गयी जब मैने और मेरी सहेली नीलम ने पापा, मम्मी की चुदाई कई बार देखी थी. मेरे मन में ये जानने की उत्सुकता जागी कि क्या पापा मम्मी अब भी उसी तरह चुदाई करते हैं. मैं चुप चाप उनके कमरे की खिड़की के पास खड़ी हो गयी. बाथरूम की लाइट ऑन थी ओर कमरे में हल्का सा उजाला था. मम्मी पेटिकोट ओर ब्लाउस में पैट के बल लेती हुई थी. पापा सिर्फ़ लूँगी में खड़े हुए थे. अचानक पापा ने मम्मी से पूचछा,

“कविता ! कंचन कहाँ है ?”

मैं बुरी तरह चोंक गयी. ये अचानक पापा को मेरी याद कहाँ से आ गयी.

“अपने कमरे में होगी. वापस पति के घर जाने की तायारी कर रही है. आप क्यों पूछ रहें हैं ?”

“वैसे ही पूछा.”

“इस वक़्त कंचन की याद कैसे आ गयी ?”

“एक बार मुझे ऐसा लगा जैसे तुम नहीं कंचन लेटी हुई है.”

“ओ ! तो अब आप अपनी बीवी को भी नहीं पहचानते ?”

“नहीं मेरी जान ऐसी बात नहीं है. इस हल्की सी रोशनी में पीछे से तुम बिल्कुल कंचन की तरह लग रही हो.” मेरा दिल अब ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा. मैं कान लगा के सुनने लगी.

“अच्छा जी ! 25 साल से आप अपनी बीवी के पिच्छवाड़े को सिर्फ़ देख ही नहीं बल्कि ना जाने कितनी बार चोद भी चुके हैं, फिर भी आपने हमे पीछे से कंचन समझ लिया. हमें तो दाल में कुच्छ काला लगता है.”

“कैसी बातें करती हो कविता ? दाल में क्या काला होगा?”

“हमे तो पूरी दाल ही काली लग रही है. सच सच बताइए कंचन आपको अच्छी लगती है?”

“अच्छी क्यों नहीं लगेगी ? आख़िर हमारी बेटी जो है.”

“बेटी की तरह नहीं. एक औरत की तरह नहीं अच्छी लगती है ?”

“तुम पागल तो नहीं हो गयी हो?” पापा मम्मी का पेटिकोट चूतरो के ऊपर खिसकाने की कोशिश करते हुए बोले.

“छोड़िए भी हमे. जैसे हमे कुच्छ मालूम ही नहीं. जब तक आप सच नहीं बोलेंगे, तब तक हमे आपके साथ कुच्छ नहीं करना.” मम्मी बनावटी गुस्से से उनका हाथ अपने चूतरो से हटाती हुई बोली. पापा बुरी तरह वासना की आग में जल रहे थे. आज नहीं चोद सके तो 15 दिन तक ब्रह्मचारी बन के रहना पड़ेगा.

“इतना गुस्सा ना करो मेरी जान.”

“तो फिर सच सच बता दीजिए. हम जानते हैं आपकी ग़लती नहीं है. हमारी बेटी जवान हो गयी है. और शादी के बाद से तो उसका जिस्म भी भर गया है. किसी भी मरद की नज़र एक बार तो तो ज़रूर उस पर जाएगी.” मम्मी पापा को उकसाते हुए बोली. ये सुन कर पापा की कुच्छ हिम्मत बढ़ी और वो थोरे हिचकिचाते हुए बोले,

“तुम ठीक कहती हो कविता. शादी के बाद से कंचन का जिस्म भर गया है. अब तो उसके कपड़े उसकी जवानी को नहीं संभाल पाते हैं. ऊपर से नहा के पूरे घर में सिर्फ़ पेटिकोट और ब्लाउस में ही घूमती रहती है. ऐसे में किसी भी मरद की नज़र उस पर जाएगी ना ?”

“मैं आपको कहाँ कुच्छ कह रही हूँ? आपकी बात बिल्कुल ठीक है. शादी हो गयी लेकिन अभी तक बचपाना नहीं गया है. अपने आप को छ्होटा ही समझती है”

“ऊओफ़ छ्होटी कहाँ है अब ? पेटिकोट और ब्लाउस में से तो उसकी जवानी गिरने को होती है.” पापा एक लंबी आह भर के बोले.

“हाई, लगता है आपको अपनी बेटी की जवानी तंग करने लगी है. कहीं उसे देख के खड़ा तो नहीं होने लगा है?”

“देखो मेरी जान ग़लत मत समझना लेकिन जब वो गीले पेटिकोट में घूमती रहती है तो किसी भी मरद का खड़ा हो जाएगा.”

“आपका अपनी बेटी की जवानी को भोगने का मन नहीं करता ?”

“तुम तो सुचमुच पागल हो गयी हो. हम अपनी ही बेटी के साथ ये सब कैसे कर सकते हैं?” मम्मी ने पापा की लूँगी खीच ली. मैं तो पापा का मोटा काला तना हुआ लॉडा देख के घबरा ही गयी. आज बरसों बाद पापा का लॉडा देख रही थी. मम्मी पापा के तने हुए लंड को प्यार से सहलाते हुए बोली,

“हम कुच्छ करने को कहाँ कह रहे हैं? मन करना और सुचमुच कुच्छ करने में तो बहुत अंतर है. बोलिए बेटी की जवानी भोगने का मन तो करता होगा?”

“हां…. इस तरह उसे देख कर करता तो है. लेकिन हम ऐसा कभी करेंगे नहीं.”

अब तो बात बिल्कुल सॉफ थी. पापा भी मुझे वासना की नज़र से देखते थे ये जान कर मैं बहुत खुश थी. जिस बेटी को देख कर बाप का भी मन डोल जाए उसमें कुच्छ तो बात होगी.

“अच्छा चलिए आज रात आप हमे कंचन समझ लीजिए. हम आपको पापा कहेंगे और आप हमे बेटी कहिए. ठीक है पापा?” मम्मी उन्हें चिढ़ाती हुई बोली.

“ये क्या मज़ाक है कविता ?”

“कविता नहीं, कंचन! अगर आज रात आपको कुच्छ चाहिए तो हमे कंचन समझ कर ले लीजिए. नहीं तो चुप चाप सो जाइए.”

“आज तुम्हें ये क्या हो गया है कविता?”

“फिर कविता? कविता नहीं कंचन. ही पापा आपको हमारे नितूम्ब बहुत अच्छे लगते है ना? हमे भी आपका ये मोटा लंड बहुत अच्छा लगता है. चोदिये ना आज अपने इस मोटे लॉड से अपनी बेटी को.” मम्मी पापा के लंड पे जीभ फेरते हुए बोली.

क्रमशः.........


RE: Hindi Porn Stories कंचन -बेटी बहन से बहू तक का सफ़र - - 08-13-2017

गतान्क से आगे ......

“ऊफ़….! ठीक है कविता.. अर्रर…. मेरा मुतलब है कंचन. जैसा तुम कहो.”

उसके बाद तो पापा ने मम्मी को खूब जम के चोदा. मैं सोच रही थी कि पापा इस वक़्त मम्मी को सुचमुच अपनी बेटी समझ के चोद रहे हैं? अब तो मेरी भी शादी हो चुकी थी. मेरे मन में पापा के लिए वासना की आग भड़क उठी. अगले दिन पापा टूर पे चले गये लेकिन मेरे दिमाग़ में उस रात का नज़ारा घूम रहा था.

इसी बीच एक उन्होनी घटना हो गयी. पापा 15 दिन के टूर के बाद वापस आए थे और अगले ही दिन फिर उन्हें दो महीने के लिए टूर पे जाना था. मम्मी की तबीयत खराब चल रही थी. आज ही शाम को उन दोनो को पार्टी में जाना था. मम्मी तबीयत खराब होने के कारण नहीं जा सकी और पापा को अकेले ही पार्टी में जाना पड़ा. पार्टी में पापा कुच्छ ज़्यादा ही पी जाते थे. जिस दिन वो ज़्यादा पी जाते थे उसके अगले दिन उन्हें कुच्छ याद नहीं रहता था कि उन्होने शराब के नशे में क्या किया. रात को मम्मी बोली,

“कंचन बेटी, आज मैं तेरे कमरे में सो जाती हूँ. मेरी तबीयत ठीक नहीं है. सिर में भयंकर दर्द हो रहा है. तेरे पापा रात को देर से आएँगे तो मुझे डिस्टर्ब होगा. मैं नींद की गोली खा कर सोना चाहती हूँ. आज तू मेरे कमरे में सो जा. पापा आएँगे तो बता देना मेरी तबीयत ठीक नहीं थी इसलिए मैं नींद की गोली खा के तेरे कमरे में सो रही हूँ.”

“ठीक है मम्मी, आप मेरे कमरे में सो जाओ. मैं पापा को बता दूँगी.”

मैने मम्मी को अपने बिस्तेर पर लिटा दिया और उनके सिर पे बाम लगा के उन्हें नींद की गोली दे के सुला दिया. रात को अचानक भयंकर तूफान आया. बहुत तेज़ बारिश होने लगी. हवा भी सायँ सायँ करके चल रही थी. तभी पूरे मोहल्ले की लाइट चली गयी. फोन करके पूछा तो पता लगा कि बिजली के कुच्छ खंबे उखड़ गये हैं और लाइट तो अब कल ही आएगी. घर में घुप अंधेरा था. मैं मम्मी पापा के कमरे में गयी और एक कॅंडल जला दी. मुझे मालूम था कि आज मम्मी मेरे कमरे में क्यों सोई थी. पापा आज 15 दिन के बाद वापस आए थे. पापा के लिए 15 दिन तो बहुत ज़्यादा टाइम था. वो तो मम्मी के बिना एक दिन भी नहीं रह सकते थे. जब तक वो रोज़ एक बार मम्मी को चोद नहीं लेते उनकी वासना की भूख शांत नहीं होती थी. हालाँकि मम्मी भी उनके बिना नहीं रह सकती थी. लेकिन आज मम्मी की तबीयत बहुत खराब थी. मम्मी को मालूम था कि पापा 15 दिन के बाद आए हैं और कल फिर दो महीने के लिए जा रहे हैं. चोदने के लिए उतावले हो रहे होंगे. ऊपर से पार्टी से शराब पी कर आएँगे. शराब आदमी की वासना को और भी भड़का देती है. इसीलिए मम्मी ने आज मुझे अपने कमरे में सोने को कहा था.

मैं पापा मम्मी की चुदाइ का खेल बचपन में कई बार देख चकी थी. बहुत ही प्यार से और अच्छी तरह चोदते थे मम्मी को. मम्मी भी उनका पूरा साथ देती थी. मम्मी को भी चुदाई का बहुत शौक था और पापा की प्यास बुझाने में कोई कसर नहीं छ्चोड़ती थी. और पापा का लंड ! बाप रे ! शायद दुनिया का सबसे मोटा लंड था. मम्मी की चूत की क्या हालत कर रखी थी. चुदाई के दौरान जब पापा मम्मी की चूत में से लंड बाहर निकालते थे तो मम्मी की चूत देखते ही बनती थी. फैली हुए टाँगों के बीच में जैसे कोई कुआ बन गया हो. पापा के मोटे लंड ने मम्मी की चूत को चोद चोद कर सुचमुच ही कुआ बना दिया था. इतना मोटा लंड तो बहुत नसीब वाली औरतों को ही मिलता है. लेकिन इतने मोटे लंड से चुद कर औरत किसी और मरद से चुदवाने के काबिल भी नहीं रह जाती है. पापा का मोटा लंड बचपन से ही मेरी आँखों के सामने घूमता रहता था. लेकिन अभी 15 दिन पहले जो मैने देखा और सुना था, उसके बाद से तो मेरे दिल में पापा के लिए वासना जाग गयी थी. मम्मी के कमरे में आ के मेरे दिमाग़ में केयी तरह के विचार आ रहे थे. पापा के उस भयंकर लंड की याद करके मेरी चूत गीली होने लगी थी. वक़्त भी पूरा साथ दे रहा था. मम्मी नींद की गोली खा के मेरे कमरे में सो रही थी. पापा शराब के नशे में आएँगे और चोदने के लिए बेताब हो रहे होंगे. सुबह तक पापा को कुच्छ याद नहीं रहेगा. बाहर भयंकर तूफान आ रहा था. घर में घुप अंधेरा था. अंधेरे में और नशे के कारण पापा को पता भी नहीं चलेगा कि मैं हूँ या मम्मी. मम्मी और मेरा डील डोल एक सा ही था. मम्मी अपनी नाइटी पहन के सो रही थी नहीं तो मैं उनकी नाइटी पहन लेती. अक्सर मम्मी पेटिकोट और ब्लाउस में भी सोती थी. मैने पेटिकोट और ब्लाउस पहनना ही ठीक समझा. दिमाग़ कह रहा था कि ये सब ठीक नहीं है, पाप है. लेकिन दिल पे वासना का भूत सवार था. मम्मी पापा की चुदाई और पापा के मोटे लंड की याद आते ही मेरी चूत की आग भड़क उठती. मैने सोच लिया था कि आज के बाद फिर ऐसा मौका हाथ नहीं आएगा. मैं कॅंडल जला के मम्मी के बिस्तेर पे लाइट गयी और पापा के आने का इंतज़ार करने लगी. लेटे लेटे पुरानी बचपन की हसीन यादों में खो गयी……… …………….


RE: Hindi Porn Stories कंचन -बेटी बहन से बहू तक का सफ़र - - 08-13-2017

दोस्तो यहाँ से कहानी थोड़ी से फ्लेश बैक मे जाएगी

कंचन लेटे लेटे पुरानी बचपन की हसीन यादों में खो गयी……… …………….

पापा के मन में क्या है ये तो मुझे बचपन में ही पता लग गया था.

कंचन बचपन से ही एक बहुत चंचल, शोख और हँसमुख स्वाभाव की लड़की थी. कंचन के पिता विजय शर्मा एक बड़ी कंपनी में ऑफीसर थे. पड़ोस के लोग उन्हें शर्मा जी के नाम से बुलाते थे. कंचन की मा कविता एक बहुत सुन्दर सुडौल और कसे हुए बदन की औरत थी. इस उमर में भी उसकी जवानी कम नहीं हुई थी. जवानी तो कम हुई ही नहीं थी बल्कि साथ में जवानी की आग भी कम नहीं हुई थी. शर्मा जी अपनी बीवी के दीवाने थे. वो अपनी बीवी के मांसल बदन और ख़ास कर उसके चौड़े फैले हुए चूतेरो पे जान छिडकते थे. कविता भी अपने पति की दीवानी थी. वो भी बहुत कामुक स्वाभाव की औरत थी. लेकिन कभी उसने अपने पति के इलावा दूसरे मरद की ओर नहीं देखा था. शर्मा जी लंबे तगड़े इंसान थे और कविता को उन्होने तृप्त कर रखा था. कविता अपने आप को बहुत भाग्यशाली समझती थी जिसका कारण था उसके पति यानी शर्मा जी का लंड. शरमा जी का लंड करीब 9 इंच का था. उनके लंड को बहुत बड़ा तो नहीं कहा जा सकता लेकिन आम आदमी के लंड से तो काफ़ी बड़ा था. लेकिन उनके लंड की ख़ासियत उसकी लंबाई नहीं बल्कि मोटाई थी. बहुत ही मोटा था. शायद पूरे शहर में इतना मोटा लंड किसी का ना हो. कविता को तो दोनो हाथों का इस्तेमाल करना पड़ता था. शर्मा जी को चोदने का बहुत शौक था. शादी के बाद तो वो कविता को पूरी पूरी रात पाँच छेह बार चोदते थे और दिन में भी कम से कम दो बार तो चोद ही लेते थे. जैसे जैसे बच्चे बड़े होने लगे दिन में चोदना बंद हो गया. बढ़ती उमर के साथ रात को भी चोदना थोड़ा कम हो गया लेकिन अब भी रोज़ रात को एक बार तो चोद ही लेते थे.

शर्मा जी के दो बच्चे थे कंचन और विकी. कंचन विकी से दो साल बड़ी थी. कंचन बचपन से ही बहुत चंचल, शोख और हँसमुख मिज़ाज़ की थी. शर्मा जी एक आछे पिता थे. कंचन अपने पापा की लाडली थी. दोनो बाप बेटी में बहुत पटती थी. शर्मा जी को कंचन का चुलबुलापन बहुत अच्छा लगता था. कंचन अपने पापा के साथ कोई ना कोई शरारत करती ही रहती थी. शर्मा जी कंचन को अक्सर परिओ की शहज़ादी, गुड़िया, राजकुमारी और बेबी डॉल आदि नामों से बुलाते थे और कंचन भी पापा को कभी पापू, पंपकिन आदि नामों से पुकारा करती थी. देखते ही देखते शर्मा जी के बच्चे बड़े हो गये. कंचन अब 9थ में थी छातिया उभरने लगी थी. बदन भरने लगा था. लेकिन शर्मा जी के लिए तो वो अब भी बच्ची थी. कंचन को स्पोर्ट्स का बहुत शौक था. वो अपने स्कूल की लड़कियो की कबड्डी और बॅस्केटबॉल टीम की कॅप्टन थी. शर्मा जी ने बिटिया के लिए अपने घर के लॉन में बॅस्केटबॉल का पोल लगा दिया था जहाँ कंचन प्रॅक्टीस किया करती थी.

एक दिन की बात है. कंचन अपनी पाँच सहेलिओं के साथ स्कूल से आई. सभी लड़कियाँ स्कूल ड्रेस में ही थी यानी स्कर्ट और ब्लाउस में और बहुत एग्ज़ाइटेड थी.

कंचन आते ही शर्मा जी से बोली,

“पापा हमारे स्कूल का कल कबड्डी का मॅच है. हम यहाँ प्रॅक्टीस करना चाहती हैं.”

“ ज़रूर करो बेटी. तुम लोगों को मॅच ज़रूर जीतना चाहिए.”

कंचन और उसकी सहेलियाँ लॉन में कबड्डी की प्रॅक्टीस करने लगी. शर्मा जी अंडर ऑफीस का कुच्छ काम करने लगे. इतने में कंचन भागी भागी आई और बोली,

“पापा आपने एक बार बताया था कि आप भी अपने कॉलेज की कबड्डी की टीम में थे.”

“हाँ बेटी, हमने तो बहुत कबड्डी खेली है.”

“तो फिर आइए ना.. हमे भी कुच्छ कबड्डी के गुर बताइए.”

“बेटी अभी नहीं हमे बहुत काम है.”

“पापा प्लीईईआसए…..मैं अपनी सहेलिओं को बोल के आई हूँ कि आप अपने ज़माने के बहुत आछे खिलाड़ी थे. चलिए ना….. अब तो मेरी इज़्ज़त का सवाल है.”

शर्मा जी अपनी लाडली बिटिया को मना नहीं कर सके.

“ओफ बेटी, तुम तो बहुत ज़िद्दी हो. चलो.”

“ये हुई ना बात ! पापू आप बहुत अच्छे हैं.” ये कहते हुए कंचन ने शर्मा जी के गाल को चूम लिया.

शर्मा जी बाहर लॉन में आए और बोले,

“बोलो लड़कियो क्या प्राब्लम है?”

“अंकल, हमारी सबसे बड़ी प्राब्लम ये है कि जब हम सब मिल के दूसरी टीम के खिलाड़ी को पकड़ लेते हैं तो वो अक्सर लाइन पे हाथ लगाने में कामयाब हो जाती है. ऐसे में हमारी टीम की तीन चार लड़कियाँ आउट हो जाती हैं.” कंचन की सहेली नीलम बोली.

“ हां बेटी, ये सबसे ख़तरनाक साबित हो सकता है. एक ही बार में पूरी टीम आउट हो सकती है.”

“तो इसका क्या इलाज है अंकल ?” सुनीता ने पूचछा.

“ मेरे पापू को सब पता है. बहुत अच्छे खिलाड़ी रह चुके हैं.” कंचन बड़े गर्व से अपने पापा को देखते हुए बोली. शर्मा जी बोले,

“देखो बच्चो, जब पहले दूसरी टीम की लड़की को खूब अंडर अपने इलाक़े में आने दो. फिर उसे दो लड़कियाँ घेर लो और पहले ज़मीन पे गिरा दो. ज़मीन पे गिरते ही दो लड़कियाँ उसकी टाँगें पकड़ लें, दो लड़कियाँ उसके ऊपर चढ़ के उसे दबा के रखें और एक लड़की उसके हाथों को लाइन से टच ना होने दे. इस तरह अगर प्लान करोगी तो हमेशा जीतोगि. अब तुम सब लोग इसकी प्रॅक्टीस करो.”

“अरे लेकिन हम तो पाँच ही हैं. हम पाँच तो पकड़ने का काम करेंगी. पापा आप प्लीज़ दूसरी टीम की तरफ से एक प्रॅक्टीस करा दो.” कंचन ज़िद करती हुई बोली.

“ठीक है चलो.”


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